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Thriller "विश्वरूप" ( completed )

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Kala Nag

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वीर अपने मन में चल रहे अंतर्द्वंद्व से जूझता हुआ राजगढ़ पहुंच गया है, इस उम्मीद में की शायद अपनी मां के पास उसे इसका समाधान मिल जाए। परंतु, वीर के यूं अचानक गायब होने से “द हैल” के सदस्य ज़रूर परेशान हो गए थे। क्या ही बदलाव आया है इस नर्क में रहने वाले लोगों के भीतर। कुछ ही समय में सबकी विचारधारा और साथ ही एक – दूसरे के प्रति भावों में गहरा परिवर्तन आया है, कोई संदेह नहीं इस बात में की जल्द ही ये नर्क स्वर्ग में परिवर्तित होने वाला है, या कहूं की हो ही चुका है।

वीर को भी उसकी मां ने अच्छी तरह से समझा दिया है की पश्चाताप की भावना के दिल में जन्म लेने मात्र से ही पाप की सजा आरंभ हो जाती है। अपराधबोध ही वो साधन है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने किए कुकर्मों का हिसाब कुछ कम कर सकता है। वीर ग्लानि के एक भंवर में फंसा हुआ है, वो भंवर जिसका वेग अनु के कारण और भी बढ़ गया है। निसंदेह अनु के प्रेम ने ही वीर को अपने दुष्कर्मों का एहसास करवाया है और अब अनु का प्रेम ही वो जरिया बनेगा जो उससे पश्चाताप करवाएगा। अब शायद वीर वापिस लौटेगा और अनु से बात करने का प्रयास भी करेगा परंतु वो नहीं जानता की यहां एक नया ही प्रकरण उसकी प्रतीक्षा में है।

अनु की दादी की फिक्र बेवजह नहीं है। वीर के कारनामे पूरे इलाके में फैले हुए हैं, और लड़कियों के प्रति अपनी सोच को लेकर भी वीर सुप्रसिद्ध है। ऐसे में अनु के लिए उनका चिंतित होना लाज़मी भी है, इसका एक और कारण अनु की मासूमियत और नार्मदिल होना भी है। यदि कोई चाहे, खासकर वीर जैसा कुटिल व्यक्ति, तो बेशक वो आसानी से अनु को अपने जाल में फांस सकता है। इसी विचार के कारण दादी चाहती है की जल्द से जल्द अनु का विवाह हो जाए, ताकि वो इस तरफ से चिंतामुक्त हो सकें और अनु के भविष्य को लेकर भी वो निश्चिंत हो जाएं।

मृत्युंजय के कहे मुताबिक जल्द ही अनु को लड़के वाले देखने आ सकते हैं। सर्वप्रथम, अनु की क्या प्रतिक्रिया होगी इसपर, ये देखना रोचक रहेगा। वो बेशक वीर से प्रेम करती है पर सवाल ये है की कुछ महीने का ये प्रेम उसकी दादी के वर्षों के प्रेम के समक्ष टिक पाएगा? यदि उसकी दादी ने उसे अपना वास्ता दे दिया, तो क्या कुछ भी करने योग्य बचेगी अनु? मुझे नहीं लगता, की अनु किसी भी परिस्थिति में अपनी दादी के कहे को टाल पाएगी। अवश्य वो प्रयास तो करेगी ही परंतु शायद ही वो कामयाब हो पाए।

यहां, प्रश्न ये भी है की जब इस बात की जानकारी वीर को मिलेगी तब वो क्या करेगा? यदि आवेश में आकर उसने कोई गलत कदम उठा लिया तो कहीं कोई बुरा प्रभाव ना पद जाए उसके और अनु के इस बंधन पर। देखते हैं भविष्य के गर्भ में इन दोनों के लिए क्या छिपा है...

शुभ्रा को भी अब एहसास हो गया है की जिस क्षेत्रपाल उपनाम के कारण उसने विक्रम को कुछ भी कहे बिना दोनों का बच्चा गिरा दिया, जिस क्षेत्रपाल उपनाम के कारण उसने विक्रम से इतने वर्ष दूरी बनाए रखी, खुद भी तड़पती रही और विक्रम भी तड़पता रहा। जबकि सत्य तो ये था कि विवाह के पश्चात शुभ्रा खुद भी क्षेत्रपाल बनकर रह गई थी। अहम और क्रोध और साथ ही अविश्वास ने उसके और विक्रम के मध्य एक ऐसी खाई बना दी जिसे आज तक वो दोनों लांघ नहीं पाए। पर अब रूप के कारण शुभ्रा को एहसास हो रहा है, की उसने क्या खोया और अब भी वो क्या को रही है...

विक्रम के लाए वो कपड़े और गहने तो शुभ्रा ने पहन लिए, उसकी दी चिट्ठी और गुलाब भी भले ही उसने स्वीकार कर लिया हो पर भी भी शुभ्रा आश्वस्त नहीं हो पा रही है की उसे क्या करना चाहिए। रूप से भी उसने इस बारे में बात की, और अब यही लगता की शायद विक्रम का इंतज़ार अभी लंबा होने वाला है। शायद एक और झटके की आवश्यकता है इनके रिश्ते की डोर को पुनः जुड़ने के लिए। शायद विश्व के साथ विक्रम की भेंट के बाद ही ये संभव हो पाए।

रूप और उसकी सभी सहेलियां विश्व के घर पहुंच गईं हैं। मैगजीन की मालकिन से बात करने के बाद भी रूप आश्वस्त नहीं हुई थी, लगता है की इस घर में उसे अपने सभी सवालों का जवाब मिल सकता है। विश्व का चरित्र लड़कियों से बात करते समय कुछ असहज होने का है, और साथ ही थोड़ा शर्मीला भी है, जिसकी एक झलक हमें इस अध्याय में भी देखने को मिली। अंतिम क्षणों में रूप ने विश्व को फोन किया और साथ ही ये भी देख लिया की विश्व ने उसका नंबर नकचढ़ी नाम से सेव किया हुआ है। बेशक अगला भाग हास्यास्पद हो सकता है। शायद प्रतिभा ने ही रूप को इस बात के बारे में बताए था...

उधर बल्लभ और अनिकेत ने भी निश्चय कर लिया है प्रतिभा के घर जाने का। यहां रूप भी मौजूद है, शायद उसे वहां देख लें वो दोनों... पर सवाल तो यही है की रूप को यदि वो दोनों वहां देख भी लेते हैं तो भी, क्या वो भैरव सिंह अथवा पिनाक को बताएंगे? मुझे नहीं लगता की वो अभी तक की अपनी सराय पोल भैरव सिंह के सामने खोलने का साहस जुटाने योग्य हैं। देखते हैं की दोनों की कितनी और किस प्रकार सुताई होनी है आगे...

बहुत ही खूबसूरत भाग था भाई। लगता है की जल्द ही रूप के सामने विश्व के अनाम होने का रहस्य खुलने वाला है।

प्रतीक्षा अगली कड़ी की...
 
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Kala Nag

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वीर अपने मन में चल रहे अंतर्द्वंद्व से जूझता हुआ राजगढ़ पहुंच गया है, इस उम्मीद में की शायद अपनी मां के पास उसे इसका समाधान मिल जाए। परंतु, वीर के यूं अचानक गायब होने से “द हैल” के सदस्य ज़रूर परेशान हो गए थे। क्या ही बदलाव आया है इस नर्क में रहने वाले लोगों के भीतर। कुछ ही समय में सबकी विचारधारा और साथ ही एक – दूसरे के प्रति भावों में गहरा परिवर्तन आया है, कोई संदेह नहीं इस बात में की जल्द ही ये नर्क स्वर्ग में परिवर्तित होने वाला है, या कहूं की हो ही चुका है।
कुछ खुशियाँ पल दो पल के लिए आती है l क्यूँकी वह हैल है खुशियाँ ठहर नहीं सकती l
वीर को भी उसकी मां ने अच्छी तरह से समझा दिया है की पश्चाताप की भावना के दिल में जन्म लेने मात्र से ही पाप की सजा आरंभ हो जाती है। अपराधबोध ही वो साधन है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने किए कुकर्मों का हिसाब कुछ कम कर सकता है। वीर ग्लानि के एक भंवर में फंसा हुआ है, वो भंवर जिसका वेग अनु के कारण और भी बढ़ गया है। निसंदेह अनु के प्रेम ने ही वीर को अपने दुष्कर्मों का एहसास करवाया है और अब अनु का प्रेम ही वो जरिया बनेगा जो उससे पश्चाताप करवाएगा। अब शायद वीर वापिस लौटेगा और अनु से बात करने का प्रयास भी करेगा परंतु वो नहीं जानता की यहां एक नया ही प्रकरण उसकी प्रतीक्षा में है।
हाँ वह प्रकरण आएगा
बहुत ही खास होगा
अनु के लिए भी और वीर के लिए भी
अनु की दादी की फिक्र बेवजह नहीं है। वीर के कारनामे पूरे इलाके में फैले हुए हैं, और लड़कियों के प्रति अपनी सोच को लेकर भी वीर सुप्रसिद्ध है। ऐसे में अनु के लिए उनका चिंतित होना लाज़मी भी है, इसका एक और कारण अनु की मासूमियत और नार्मदिल होना भी है। यदि कोई चाहे, खासकर वीर जैसा कुटिल व्यक्ति, तो बेशक वो आसानी से अनु को अपने जाल में फांस सकता है। इसी विचार के कारण दादी चाहती है की जल्द से जल्द अनु का विवाह हो जाए, ताकि वो इस तरफ से चिंतामुक्त हो सकें और अनु के भविष्य को लेकर भी वो निश्चिंत हो जाएं।
हाँ एक समय था दबंग परिवार वालों से डरते भी थे लोग l पर समाज के उन्हों तबकों से मदत और रक्षा की आस रखते थे l क्षेत्रपाल परिवार भी कुछ इसी श्रेणी आता है l
मृत्युंजय के कहे मुताबिक जल्द ही अनु को लड़के वाले देखने आ सकते हैं। सर्वप्रथम, अनु की क्या प्रतिक्रिया होगी इसपर, ये देखना रोचक रहेगा। वो बेशक वीर से प्रेम करती है पर सवाल ये है की कुछ महीने का ये प्रेम उसकी दादी के वर्षों के प्रेम के समक्ष टिक पाएगा? यदि उसकी दादी ने उसे अपना वास्ता दे दिया, तो क्या कुछ भी करने योग्य बचेगी अनु? मुझे नहीं लगता, की अनु किसी भी परिस्थिति में अपनी दादी के कहे को टाल पाएगी। अवश्य वो प्रयास तो करेगी ही परंतु शायद ही वो कामयाब हो पाए।
प्रेम की राह कब आसान रहा है l दुख भी होगा दर्द भी होगा
यहां, प्रश्न ये भी है की जब इस बात की जानकारी वीर को मिलेगी तब वो क्या करेगा? यदि आवेश में आकर उसने कोई गलत कदम उठा लिया तो कहीं कोई बुरा प्रभाव ना पद जाए उसके और अनु के इस बंधन पर। देखते हैं भविष्य के गर्भ में इन दोनों के लिए क्या छिपा है...
भविष्य हमेशा से अनिश्चितता से भरा होता है
दो प्रेमी हैं
दोनों एक दूसरे से प्रेम करते हैं
अपने प्रेम को हासिल करने के लिए दोनों को ही आगे आना होगा
शुभ्रा को भी अब एहसास हो गया है की जिस क्षेत्रपाल उपनाम के कारण उसने विक्रम को कुछ भी कहे बिना दोनों का बच्चा गिरा दिया, जिस क्षेत्रपाल उपनाम के कारण उसने विक्रम से इतने वर्ष दूरी बनाए रखी, खुद भी तड़पती रही और विक्रम भी तड़पता रहा। जबकि सत्य तो ये था कि विवाह के पश्चात शुभ्रा खुद भी क्षेत्रपाल बनकर रह गई थी। अहम और क्रोध और साथ ही अविश्वास ने उसके और विक्रम के मध्य एक ऐसी खाई बना दी जिसे आज तक वो दोनों लांघ नहीं पाए। पर अब रूप के कारण शुभ्रा को एहसास हो रहा है, की उसने क्या खोया और अब भी वो क्या को रही है...
हाँ बेशक विक्रम से गलतियाँ हुई हैं पर शुभ्रा को उस वक़्त विक्रम को संभाल लेना चाहिए था l प्रेम में कभी कभी अहं मन को कब्जा कर लेता है l शुभ्रा के पीठ कर लेने से विक्रम भी रुक गया था l आज विक्रम कुछ कदम आगे बढ़ा तभी तो शुभ्रा पिघल रही है l
विक्रम के लाए वो कपड़े और गहने तो शुभ्रा ने पहन लिए, उसकी दी चिट्ठी और गुलाब भी भले ही उसने स्वीकार कर लिया हो पर भी भी शुभ्रा आश्वस्त नहीं हो पा रही है की उसे क्या करना चाहिए। रूप से भी उसने इस बारे में बात की, और अब यही लगता की शायद विक्रम का इंतज़ार अभी लंबा होने वाला है। शायद एक और झटके की आवश्यकता है इनके रिश्ते की डोर को पुनः जुड़ने के लिए। शायद विश्व के साथ विक्रम की भेंट के बाद ही ये संभव हो पाए।
यह आपने अच्छा अनुमान लगाया है 😁
रूप और उसकी सभी सहेलियां विश्व के घर पहुंच गईं हैं। मैगजीन की मालकिन से बात करने के बाद भी रूप आश्वस्त नहीं हुई थी, लगता है की इस घर में उसे अपने सभी सवालों का जवाब मिल सकता है। विश्व का चरित्र लड़कियों से बात करते समय कुछ असहज होने का है, और साथ ही थोड़ा शर्मीला भी है, जिसकी एक झलक हमें इस अध्याय में भी देखने को मिली। अंतिम क्षणों में रूप ने विश्व को फोन किया और साथ ही ये भी देख लिया की विश्व ने उसका नंबर नकचढ़ी नाम से सेव किया हुआ है। बेशक अगला भाग हास्यास्पद हो सकता है। शायद प्रतिभा ने ही रूप को इस बात के बारे में बताए था...
हा हा हा हा हा
हाँ बिल्कुल यह आपको अगले अपडेट में मालुम पड़ जाएगा
उधर बल्लभ और अनिकेत ने भी निश्चय कर लिया है प्रतिभा के घर जाने का। यहां रूप भी मौजूद है, शायद उसे वहां देख लें वो दोनों... पर सवाल तो यही है की रूप को यदि वो दोनों वहां देख भी लेते हैं तो भी, क्या वो भैरव सिंह अथवा पिनाक को बताएंगे? मुझे नहीं लगता की वो अभी तक की अपनी सराय पोल भैरव सिंह के सामने खोलने का साहस जुटाने योग्य हैं। देखते हैं की दोनों की कितनी और किस प्रकार सुताई होनी है आगे...
देखते हैं
बहुत ही खूबसूरत भाग था भाई। लगता है की जल्द ही रूप के सामने विश्व के अनाम होने का रहस्य खुलने वाला है।

प्रतीक्षा अगली कड़ी की...
हाँ पर दिल्ली सभी बस थोड़ी दूर बाकी है
 
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