कहानी मे गांव , खेत , बगीचे , खलिहान , कच्चे रोड , जंगल वगैरह का जिक्र आए और रीडर्स मदहोश न हो , यह हो ही नही सकता। चित को यह सुखद एहसास दिलाता है ।
बहुत खुबसूरत लिखा है आपने पर इस पृष्ठभूमि पर थोड़ा और भी विस्तृत रूप मे वर्णन किया जाए तब यह और भी अधिक खुबसूरत लगेगा।
अजय के बाबूजी एक खेतिहर है। एक किसान है। ग्रामीण पृष्ठभूमि से है और तजुर्बेकार भी है। ये अपने बच्चो को कभी गलत सलाह दे ही नही सकते। उनके अनुसार अजय को इंजीनियरिंग पुरी करने के बाद अपनी नौकरी के साथ साथ खेती पर भी ध्यान देना चाहिए। और मै भी इनके सलाह से पुरी तरह सहमत हूं।
अगर खेत अच्छी मात्रा मे है और सिचाई की उत्तम व्यवस्था है तो कृषि से बढ़कर नौकरी नही हो सकता।
अजय की बड़ी बहन के समझाने के बाद भी अजय ठाकुर और अश्विनी के रोमांस पर कोई असर नही पड़ा। बहन की परवाह अजय के पास्ट को देखते हुए उसके फ्यूचर पर थी जो बिल्कुल वाजिब थी। लेकिन अगर इंसान अपने गलतियों से सबक लेकर उसे दोहराने का संकल्प न ले तो उसे अवश्य ही आगे बढ़ना चाहिए। अश्विनी अच्छी लड़की लग रही है। अतः मुझे लगता है अजय को इस लड़की से कोई भी बात छुपाना नही चाहिए। अपना दिल और पास्ट खोलकर उसके सामने रख देना ही बेहतर होगा।
देहात और रोमांस के बाद स्टोरी मे थ्रिल एवं सस्पेंस का भी लाजवाब सम्मिश्रण किया है आपने।
एक तो लता मैडम के हवेलीनुमा आफिस मे रखे हुए चीज और दूसरा तालाब के तलहटी से भी 200 फीट नीचे एक गुमनाम व्यक्ति की खुदाई एवं उस खुदाई के दौरान पाए गए नरकंकाल।
बहुत ही खूबसूरत अपडेट ठाकुर साहब।
आउटस्टैंडिंग एंड ब्यूटीफुल।