बढ़िया अपडेट कहानी अपने असली रंग मे नज़र आई इस अपडेट के साथ । राज और चाँदनी के सीन को लिमिटेड वे मे रखा है आपने वो कहानी के साथ समन्वय मे बैठ रहा है ।
आख़िर किसके आदमी होंगे वो दोनों शायद अब उस खिलाड़ी के सामने आने का टाइम आ गया है ।
संध्या डार्लिंग तो असली वाली ठकुराइन बनती जा रही है।
संध्या ने उस बच्ची को अपने पास रखने का फ़ैसला सही किया अभय जब सोचेगा तो कुछ तो अच्छा लगेगा उसे संध्या के बारे मे।
रमन की नाक तुड़वाकर अच्छा किया आपने । आगे तकलीफ़ और बढ़ने वाली है रमन की अब ।
वैसे अभय के हवेली आने का चांस मिस कर दिया आपने जब वो चाँदनी को हवेली छोड़ने आया था ।
फ़ोन कॉल्स नहीं हो रहे है संध्या और अभय के, होने चाहिए ।
अब कुछ तो ऐसा करो की माँ बेटे के बीच ज़्यादा ना सही कुछ तो ठीक हो
