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parkas

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UPDATE 23

गीता देवी – क्या तूने अभय को बताई ये बात

राज – नही मां हवेली का नाम लेते ही वो ऐसा भड़का मानो साप की पूछ पर पैर मार दिया हो मैने वो कुछ सुनने को राजी नही है मां क्या करू मैं

गीता देवी – ऐसी क्या बात थी जिसके वजह से ये बात करने लगे तुम दोनो

राज – कुछ नही मां वो...वो...

गीता देवी – अब तू बहाने बनाने लगा है मुझसे

राज – नही मां वो बात ये थी (फिर राज ने गीता देवी को खंडर वाली बात बताई जिसे सुन के)

गीता देवी – तुम दोनो लड़को का दिमाग कुछ ज्यादा ही खराब हो गया है अगर अभय को नही पता उस खंडर के बारे में लेकिन तू तो जनता है ना माना कर देता तू

राज – मैने बोला मां उसे लेकिन फिर उसने उस रात के बारे में बताया जब वो घर से भाग गया था उसकी ये बात सुन के मुझे भी शक सा हुआ अब तुम ही बताओ क्या करू मैं वो एक बात सुनने को राजी नही उपर से आज रात वो अकेले जाने वाला है खंडर में

गीता देवी – (बात सुन आंखे बड़ी करके) उसे रोक राज रोक ले उसे खंडर में जाने से वर्ना अनर्थ हो जाएगा

राज – (शौक से) क्या हुआ मां तुम्हे तुम ऐसी बाते क्यों की रही हो

गीता देवी – तुझे नही पता लेकिन जो वहा गया लौट के कभी नहीं आया वहा से पड़ोस के गांव के 2 लोग पिछले 2 साल से गायब है आखरी बार उनको खंडर के रास्ते पर जाते देखा गया था उसके बाद आज तक नही दिखे दोनो

राज – मैं बात करता हू उससे मां तुम परेशान मत हो

राज से बात करने के बाद अभय निकल गया हॉस्टल की तरफ रास्ते किसी ने अभय को आवाज दी...

पायल – कहा जा रहे हो

अभय – (पलट के देख के) कैसी हो तुम

पायल – अच्छी हू तू कहा जा रहा है

अभय – हॉस्टल जा रहा हू , और तू कहा जा रही है

पायल – अपनी दोस्त से मिल के आ रही हूं घर चल ना मेरे मां और बाबा तुझे देख के खुश हो जाएंगे

अभय – पायल इस बारे में कुछ मत बोल किसी को भी

पायल – लेकिन क्यों ऐसा क्यों बोल रहा है तू

अभय – सब समझा दुगा तुझे बस अभी के लिए बात मान मेरी

पायल – आखिर तू इतने वक्त तक था कहा पर क्यों चला गया था घर से

अभय – मैं जहा भी था लेकिन अब तेरे साथ हू और तेरे साथ रहूंगा हमेशा

पायल – बात को टाल क्यों रहा है तू बताता क्यों नही

अभय – बताऊंगा सब बताऊंगा थोड़ा सब्र कर

पायल – जैसे तेरी मर्जी , कहा से आ रहा है तू

अभय – घूम रहा था खेतो में चल चलते है साथ में वही जहा घूमते थे हम साथ में

पायल – (मुस्कुरा के) अभी नही फिर किसी दिन अभी मां बाबा इंतजार कर रहे होगे घर में मेरा वैसे अगले महीने मेला लगने वाला है याद है ना तुझे

अभय – हा याद है

पायल – इस बार कुल देवी की पूजा साथ में करेगा ना मेरे

अभय – बिल्कुल करूंगा

पायल – चल ठीक है शाम को मिलेगा बगीचे में साथ में घूमेंगे

अभय – तू बोले मैं ना आऊं ऐसा हो सकता है भला आऊंगा पक्का

पायल – ठीक है शाम को मिलते है

इतना बोल के पायल निकल गई अपने घर और अभय निकल गया हॉस्टल की तरफ जबकि एक तरफ संध्या , चांदनी और शनाया गांव घूम के वापस जा रहे थे तभी रास्ते में कार का टायर पंचर हो गया कार रोक दी संध्या ने....

चांदनी – क्या हुआ ठकुराइन कार क्यों रोक दी

संध्या – शायद टायर पंचर हो गया है रुको देखती हू

बोल के संध्या कार से बाहर निकली देखा सच में टायर पंचर था तब संध्या तुरंत किसी को कॉल करने लगी लेकिन कॉल कोई रिसीव नहीं कर रहा था तब संध्या कार में वापस बैठ गई बोली...

संध्या – टायर पंचर हो गया है और ये मकैनिक कॉल नही उठा रहा है

चांदनी – आस पास कोई मकैनिक नहीं है यहां पर

संध्या – है लेकिन काफी दूर है यहां से

शनाया – कोई गांव का बंदा आस पास हो उससे मदद लेते है

तभी संध्या की कार के पीछे से कोई आ रहा होता है उनकी कार के बगल से निकल जाता है जिसे देख शनाया बोलती है...

शनाया – अरे वो देखिए कोई जा रहा है उसे बात करिए

शनाया की बात सुन संध्या तुरंत कार से निकलती है आगे जा रहे लड़के को आवाज देती है...

संध्या – अरे सुनो जरा मदद कर दो हमारी

आवाज सुन के जैसे ही लड़का पीछे देखता है तभी दोनो का सामना होता आपस में...

अभय – क्या बात है हवेली की इतनी बड़ी ठकुराइन को आज मदद की जरूरत पड़ रही है क्यों भला

संध्या –(अभय की बात चुप चाप सुन के धीरे से बोली) वो कार का टायर पंचर हो गया तो...

अभय – (बीच में) ओह इतनी बड़ी कार चलानी सीखी लेकिन एक टायर बदलना नही सीखा अरे मैं भी किसे बोल रहा हू ये बात जो खुद नकल कर के पास हुई हो , खेर मकैनिक को बुला लीजिए मैं खाली नहीं हू...

बोल के अभय जाने लगा तभी पीछे से किसी से आवाज लगाई जिसे सुन अभय हैरान हो गया...

शनाया – सुनो अभय रुक जाओ

अभय – (आवाज सुन के हैरान होके धीरे से पीछे मुड़ा सामने शनाया को देख के बोला) आप यहां पर

शनाया – तुम यहां पर

दोनो ने एक दूसरे को देख एक साथ बोला तब चांदनी भी निकल आई कार से बाहर...

चांदनी – आप जानते हो एक दूसरे के

चांदनी की बात सुन अभय ने जैसे ही चांदनी को देख कुछ बोलने जा रहा था तीन चांदनी ने डायर से सिर ना में हिला दिया जिस समझ के अभय बोला...

अभय – जी हम एक ही स्कूल में थे मैडम टीचर थी मैं स्टूडेंट , आप कॉन

चांदनी – मैं टीचर हू यहां के कॉलेज की अभी नई आई हू

अभय – जी

शनाया – अभय प्लीज मदद कर दो थोड़ी कार का टायर पंचर हो गया है

शनाया की बात मान कर अभय कार की डिक्की से स्टेपनी और जैक निकल के थोड़ी देर में टायर बदल देता है...

शनाया – कहा जा रहे हो तुम

अभय – हॉस्टल जा रहा हू

संध्या –(बीच में बोल पड़ती है) हम उसी रास्ते से जा रहे है हमारे साथ चलो छोड़ देती हू

शनाया – हा अभय इतनी धूप में पैदल जाने से अच्छा हमारे साथ चलो...

अपना मन मार कर मजबूरी में अभय हा कहना पड़ता है इससे पहले अभय कार में बैठने जाता शनाया पीछे बैठ गई और साथ में चांदनी भी बैठ गई पीछे मजबूरी में अभय को संध्या के साथ आगे बैठना पड़ता है जिस कारण संध्या हल्का मुस्कुरा देती है अभय को अपने साथ बैठा देख के कार आगे बड़ जाति है जब तक हॉस्टल आए तब तक संध्या सिर्फ अभय को देखती रहती है तिरछी नजरों से इस बात को अभय के इलावा चांदनी भी देख के मुस्कुराती है लेकिन अभय अपनी दीदी और शनाया मैडम की वजह से चुप चाप इंतजार करता है हॉस्टल के आने का...

हॉस्टल आते ही अभय कार से निकल के बोलता है...

अभय – अच्छा शुक्रिया आपका लिफ्ट के लिए मैं चलता हूं

शनाया –(बीच में बोल देती है) अभय इतनी भी जल्दी क्या है अपना हॉस्टल नही दिखाओगे हमे

अभय –(बे मन से मुस्कुरा के (मन में – क्या मुसीबत है यार ये भी) हा आइए

अभय हॉस्टल में लेके जाता है तीनों को अभय ने रूम में आते ही पंखा चालू कर दिया जिसके बाद शनाया बोली....

शनाया – अभय कितनी गर्मी है कमरे में तुम यहां पर कैसे रहते हो और कैसे सोते हो इससे अच्छा तो तुम अपनी आंटी के घर में सही थे

अभय –(मुस्कुरा के) आदत आदत की बात है मैडम (संध्या को देख के) वैसे भी आलीशान कमरे की आदत नही है मुझे मै भले जमीन में सोता हू कुछ पल की गर्माहट जरूर देता है लेकिन नीद सुकून की देती है ये जमीन , खेर मेरी तो आदत है मैडम आप बताए कब आए आप यहां पर

शनाया – मेरा प्रमोशन हो गया कॉलेज उसके बाद इंटरव्यू हुआ और मैं सिलेक्ट हो गई अब यहां तुम्हारे सामने हू यहां के कॉलेज की प्रिंसिपल बन के आई हू

अभय – ये तो बहुत खुशी की बात है मैडम , आप कहा पर रुकी है

शनाया – मैं हवेली में रुकी हू जब तक रूम तयार हो जाए टीचर्स के लिए

अभय – हा जितनी जल्दी बन जाय रूम उतना अच्छा होगा

शनाया – क्या मतलब

अभय – वो...मेरा मतलब है की रूम बन जाएगी तब तो आप पास में ही रहोगे हमारे हॉस्टल के रोज रोज इतनी दूर से आने जाने में दिक्कत नहीं होगी तब आपको

शनाया – हा बिलकुल...

संध्या –अगर आपको दिक्कत ना हो तो आप हवेली में रुक जाइए जब तक...

अभय –(बीच में) ऐशो आराम का ना तो शौक है और ना ही जरूरत है मुझे , यही सबसे ज्यादा सुखी हू मै

इस जवाब से संध्या इसके आगे बोलने की हिम्मत ना कर पाई लेकिन चांदनी ने बीच में बोल दिया...

चांदनी – (हल्के गुस्से में) शायद मैडम सिर्फ इतना कहना चाहती थी जब तक हॉस्टल में बाकी स्टूडेंट्स नही आ जाते तब तक आप हवेली में रह जाओ , रही ऐशो आराम की बात तो आदत जबरदस्ती नही बनती बल्कि बनाने से बनती है

अभय – (अपनी दीदी की बात समझ शांत मन से संध्या से बोला) मुझे पढ़ाई के लिए इससे अच्छी एकांत जगह नहीं मिल सकती आपने पूछा उसके लिए शुक्रिया...

संध्या कुछ बोलती उससे पहले चांदनी ने आखों से संध्या को इशारा कर निकल गए तीनों अपनी कार की तरफ कार में बैठते ही चांदनी बोली...

चांदनी – एक मिनट ठकुराइन मैं अपना बैग कमरे में भूल गई हू अभी लेके आती हू...

बोल के चांदनी तुरंत चली गई अभय के कमरे में जैसे ही अभय ने अपनी दीदी को आते देखा बोला...

अभय – क्या हुआ दीदी आप...

चांदनी –(बीच में बात को काट के) देख अभय ठकुराइन से तेरी जो प्रोब्लम है उसे अपने तक रख इस तरह किसी के भी सामने तुझे कोई हक नही बनता किसी की बेइजती करने का समझा

अभय – लेकिन दीदी आप जानते हो...

चांदनी – (बीच में) हा जानती हू इसका मतलब ये नही मैं अपनी इंसानियत भूल जाऊ...

बोल कर चांदनी अपना बैग लेके चली गई पीछे अभय चुप चाप अपनी दीदी को जाते हुए देखता रहा और मन में बोला....

अभय –(मन में–सही तो के रही है दीदी तुझे कोई मतलब नहीं है उस औरत से तू जिस काम के लिए आया है उसमे ध्यान दे इन हरकतों के कारण कही सच में तेरी दीदी नाराज ना हो जाए क्या बोलेगा मां को क्यों नाराज हुए दीदी तेरे से इसीलिए अपनी पढ़ाई और अपने काम से मतलब रख तू)

अपने मन में सोच रहा था अभय तभी सायरा ने आवाज दी..

सायरा – किस सोच में डूबे हो आईटी आई देर से आवाज दे रही हू सब ठीक तो है ना

अभय – हा सब ठीक है आप इस वक्त

सायरा – लगता है बहुत गहरी सोच में डूबे हुए थे खाना खाना भी याद नहीं है तुम्हे

अभय –अब आप हो ही इतनी सुंदर कोई खाना तो क्या सोना तक भूल जाए

सायरा – अच्छा ऐसा है तो सोचना छोड़ दो इतना ऐसे ही हाथ लगने वाली चीज नही हू मै समझे मिस्टर

अभय – तो आप ही बता दो कैसे हाथ लगोगे आप

सायरा – (मुस्कुरा के) ये सोचना तुम्हे है मुझे नहीं

अभय – (मुस्कुरा के) चलो एक काम करते है आज से अब से मैं और आप दोस्त बन जाते है सिर्फ अच्छे दोस्त ये ठीक है ना

सायरा – सिर्फ अच्छे दोस्त तो ठीक है इससे आगे(मुस्कुरा के)

अभय – हा इससे आगे क्यों सोचे दोस्त बन के ही काम चलाते है

सायरा – मतलब मानोगे नही दोस्ती कर के ही रहोगे

अभय – अगर आपको एतराज है तो रहने दो

सायरा – मुझे कोई एतराज नही (अभय से हाथ मिला के) आज से हम दोस्त हुए अब खुश

अभय – बहुत खुश

सायरा – चलो खाना खा लो पहले मुझे जाना है चांदनी ने बुलाया है काम के लिए

अभय – ठीक है...

दोनो ने खाना खाया साथ में सायरा चली गई शाम को आने क्या बोल के जबकि अभय बेड में लेट गया शाम को सायरा के जागने से अभय की नीद खुली उठते ही...

अभय – (नीद से जागते ही) वक्त क्या हुआ है

सायरा – वैसे तो शाम के 7:30 हो रहे है लेकिन तुम्हारे लिए बहुत बुरा है

अभय – बहुत बुरा मेरे लिए वो भला क्यों

सायरा – तुमने पायल से मिलने का वादा किया था भूल गए

अभय –(अपने सिर में हाथ रख के) अरे ये क्या हो गया मैं भूल कैसे गया यार अब तो नाराज हो जाएगी पायल

सायरा –(हस्ते हुए) घबराओ मत ऐसा कुछ नही होगा मैं मिल कर आई हू पायल से उसके घर में उसकी मां की तबियत ठीक नहीं है इसीलिए पायल नही निकली घर से अपने

अभय – क्या काकी की तबियत ठीक नहीं है लेकिन तुम क्यों गई थी पायल के घर

सायरा – याद है न मैं 2 साल पहले आई हू इस गांव में तब से सबसे मिल कर रहती आई हू कभी कभी मिलती रहती हू गांव की औरतों से छोटे छोटे काम के बहाने

अभय –(सायरा की बात सुन के) आखिर किस काम के लिए आई हो तुम यहां क्यों 2 साल से हवेली में नौकर बनी हुई हो

सायरा – अभय कुछ बाते ऐसी है मैं चाह के भी बता नही सकती तुम्हे और प्लीज ये बात मत पूछना दोबारा चांदनी ने मना किया है जब चांदनी को सही लगेगा तब वो तुम्हे खुद बता देगी भरोसा रखो चांदनी पर

अभय – (हल्का हस के) अपने आप से ज्यादा भरोसा है दीदी पर खेर तुम मत सोचो ज्यादा इस बारे में मन में आया इसीलिए पूछ लिया तुमसे

सायरा – (चाय देते हुए) ठीक है अब जल्दी से ये चाय पियो मैं खाना बना देती हू रात के लिए ठीक है

अभय – ठीक है

रात का खाना बना के सायरा चली गई अभय कुछ वक्त के बाद खाना खा के तयार बैठा था खंडर जाने के लिए रात के 12 बजते ही अभय निकल गया खंडर की तरफ अंधेरी रात के सन्नाटे में अभय अकेला चलते चलते आ जाता है खंडर के सामने


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चारो तरफ देखते हुए अभय धीरे धीरे चला जाता है खंडर में जहा सिवाय घनघोर सन्नाटे और अमावस्या की काले अंधेरे के सिवा कुछ नहीं था वहा पर चारों तरफ की दीवारें झाड़ियों से ढकी हुई थी


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तो कही टूटी फूटी दीवारे थी अभय ने पॉकेट से मिनी टॉर्च निकल के जैसे ही जलाने को हुआ था की तभी किसी आहट सुनाई दी अभय को जिसे सुन अभय एक दीवार के पीछे छिप गया वो आहट धीरे धीरे अभय के करीब आते हुए महसूस हो रही थी तभी अभय फुर्ती से दीवार की पीछे से निकल के उस शक्श के सामने आके हमला करने वाला था तभी उस शख्स को देख अभय ने टार्च से उसका चेहरा देख रुक गया और बोला...

अभय – राज तू यहां पर , साले अभी मारने वाला था तुझे , जब आना था तो बता देता मुझे साथ में आते हम

राज – (गुस्से में) ज्यादा बकवास मत कर तू , एक तो बिना बात करे चला गया उपर से मुझे सुना रहा है , मुझे पहले पता था तू यहां जरूर आएगा इसीलिए मैं भी आ गया तेरे पीछे

अभय – लेकिन बड़ी मां ने तुझे आने कैसे दिया

राज – मैं बोल के आया हू आज तेरे साथ सोओंगा हॉस्टल में

अभय – और बड़ी मां मान भी गई

राज – हा मान गई चल छोड़ ये बता कुछ पता चला यहां पर तुझे

अभय – अभी आया हू मै यार यहां

राज – मैं भी यार , चल साथ में देखते है



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दोनो मिल कर साथ में आगे बड़ गए सिवाय खंडर पड़ी दीवारों के कुछ दिख नहीं रहा था दोनो को तब राज बोला...

राज – यार यहां तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है और ये साला अजीब सी ठंडक जाने कहा से आने लगी है यार

अभय – हा यार मुझे भी लग रही है ठंड ऐसा लगता है जैसे मैं आ चुका हू पहले भी यहां पर

राज – किसके साथ आया था तू

अभय – याद नही आ रहा है यार अगर मैं सही हू तो आगे एक हॉल भी होना चाहिए

दोनो जैसे ही आगे बड़े सच में हाल में आ गए जिसके बाद राज बोला...

राज – तू सही कह रहा था यार यहां सच में हाल है

अभय – लल्ला ने बोला था बनवारी चाचा का बेटा आया था खंडर की तरफ जो अगले रोज बावली हालत में मिला था तो क्या वो सच में इतना अन्दर आया होगा या इससे भी आगे क्योंकि यहां तक तो ऐसा कुछ नही हुआ हमारे साथ

राज – तो चल आगे चल के देखते है ऐसा क्या देखा था बनवारी चाचा के बेटे ने

बोल के दोनो आगे बड़ने लगते है तभी ठंड पहले से ज्यादा लगने लगती है दोनो को...

राज – यार अब तो ठंड सी लगने लगी है अभय

अभय – नही राज ये ठंड नही ये ए सी की ठंडक है

राज – तुझे कैसे पता , यहां हाल में ए सी लगा हुआ है , लेकिन दिख नही रहा है कहा होगा

अभय – शालिनी आंटी के घर मैं ए सी में रहता था वही ठंडक है यहां पे भी एक काम कर राज हाल के चारो तरफ कमरे में दरवाजे लगे है तू उस तरफ़ दोनो दरवाजे देख मैं इस तरफ के दोनो दरवाजे देखता हू...

दोनो तरफ देखने के बाद...

अभय – यहां तो कुछ भी नही है यार तुझे कुछ मिला

राज –नही यार या भी कुछ नही है फिर इतनी ठंडक कहा से आ रही है यहां पर , (तभी राज ने एक तरफ देख बोला) अभय वो सामने देख कोने में एक और दरवाजे जैसा दिख रहा है...

उस तरफ देखते ही दोनो आगे बड़ गए देखने के लिए वहा पर जैसे ही वहा पहुंचे वैसे ही अभय बोला...

अभय – ठंडक यहां से आ रही है राज चले क्या अन्दर

राज – जब इतना आगे आ गए है तो चलते है देखा जाएगा जो होगा...

जैसे ही अन्दर गए दोनो अपने सामने वाले नजरे को देख कर दोनो की आखें बड़ी हो गई डर से क्योंकि जमीन पर एक आदमी का कटा हुआ सिर था राज हिम्मत कर के आगे गया जैसे ही राज ने सिर पर हाथ रखा...


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राज –(हस्ते हुए) अबे ये तो पत्थर का बना हुआ है भाई

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अभय – ओह तेरी की मुझे लगा साला किसका सिर आ गया यहां पर

राज ने इस पत्थर के सिर को उठा के एक मूर्ति पे लगा के..


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राज – भाई ये है इस मूर्ति का सिर है (हसने लगा) जिसके देख हमारी फट के चार हो गई थी😂😂

अभय – (कुछ सोच के) कही इसे देख कर ही तो बनवारी चाचा के बेटे की हालत वैसी तो नही हुई

राज – हो सकता है भाई यहां की हालत ऐसी है देख कर ही लग रहा है कोई भूत बंगला हो जैसे मुझे समझ में नहीं आ रहा है आखिर इस वीरान खंडर के अन्दर कोई कर क्या रहा होगा और अब तो ठंडक भी नही लग रही है यहां पर , भाई कसम से बोल रहा हू डर से मेरी फट रही है यहां पे

अभय –( कुछ सोचते हुए बोला) मुझे याद आ गया राज

राज – (चौक के) क्या याद आ गया तुझे

अभय – मैने कहा था ना कि ये जगह में आ चुका हू मै पहले

राज – हा कहा था लेकिन कब आया था तू यहां पर

अभय – यहां नहीं आया था मैं लेकिन ये जगह बिल्कुल हवेली की तरह है हर कमरा हर वो जगह जहा से हम आए है सब कुछ हवेली की तरह है यहां पे भी

राज – तू कहना चाहता है की दादा ठाकुर ने एक जैसे दो हवेली बनवाई थी

अभय – हा राज यहीं मुझे लग रहा है अगर मैं सही हू तो आगे इस दीवार की पीछे एक बड़ी सी गली बनी हुई है जहा बीचों बीच एक छोटा सा बगीचा बना हुआ है उसमे पानी और फूल होगे

जैसे ही दोनो आगे गए वहा का नजारा अलग था क्योंकि वहा पर तहखाना बना हुआ था...

राज – अबे यहां पर तहखाना का रास्ता बना हुआ है

राज – (सीडियो से उपर चढ के देख बोला) ये सामने तो रास्ता है कच्चा वाला

अभय – हा यही वो रास्ता है जिससे मैं निकला था तब यही से मुझे वो रोशनी आई थी इसका मतलब समझ रहा हैं तू

राज – हा समझ गया मेरे भाई हम बिल्कुल सही जगह पर आए है लेकिन यहां कहा से रोशनी आई होगी देख के भी समझ नही आ रहा है यार

अभय – तो चले तहखाने को देखने क्या बोलता है

राज – जैसे मैने पहले भी बोला फिर बोलता हू चल चलते है जो होगा निपट लेंगे साथ में यार....

बोल के जैसे ही आगे बढते है तभी दोनो को किसी की आवाज आती है जिसे सुन के दोनो एक साइड छुप जाते है लेकिन आवाज किसी की सही से समझ नही आती दोनो को...

राज –(धीरे से) ये आवाज कैसे थी यार

अभय –(धीरे से) पता नही भाई...

जब आवाज आना बंद हो गई तब दोनो अपनी जगह से निकल के बाहर आए कोई नही दिखा दोनो को जैसे ही आगे बड़े तभी अचानक से उनके सामने कोई आ गया जिसे देख दोनो की हवा टाइट हो गई अपने सामने उस आकृति को देख डर से आखें बड़ी हो गए जोर से चिल्ला के भागे दोनो....


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राज और अभय –(चिल्ला के भागते हुए) BBBBBBHHHHHOOOOOOOOOOOTTTTTTTT AAAABBBBBEEEEE BBBBBBAAAAAAAHHHHHHGGGGGOOOOOOOO

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चिल्लाते हुए इतने तेज भागे दोनो जैसे उनके पीछे किसी ने चीते को छोड़ दिया हो भागते भागते दोनो सीधे खंडर के बाहर निकल आए सीधे जाके अभय के हॉस्टल में रुके दोनो...
.
.
.
जारी रहेगा..✍️✍️✍️
Bahut hi badhiya update diya hai DEVIL MAXIMUM bhai....
Nice and beautiful update....
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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Shandar jabardast romanchak update 😏
 

despicable

त्वयि मे'नन्या विश्वरूपा
Supreme
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बढ़िया अपडेट
अब ये कौन नज़र आ गाया है दोनों दोस्तों को , राज़ कुछ और है खंडहर का
 
Last edited:

dev61901

" Never let an old flame burn you twice "
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Bahut mast update

Idhar shanaya or abhay ki mulakat ho gayi ha or abhay ko fir sandhya ne haweli me rahne je liye kaha lekin abhay to ab sabke samne sandhya se badtamiji karne pe aa gaya to shayd chandni ko abhay per gussa aa gaya ki use aisa nahi karna chhahiye kher chandni ke apne kuchh raj ha jisse wo sandhya se naraj nahi ha past me abhay ke prati behavior se

Idhar sayra ka alg raaj ha ki wo kyun 2 salon se abhay ke ganv me haweli me jasus banke rah rahi thi ye sirf chandni ko pata ha or shayad shalini ko bhi kya pata usne hi use bheja ho idhar

Or ye khandhar ko abhay haweli bata raha ha jaise ki abhay ne kaha ki yahan sab kuchh haweli ki tarah ha to kya uske dada ne sach me 2 haweliyan banwai thi kya lekin kyon banwai hogi or ye last me kya dikh gaya dono ko ki dono dum daba kar bhag gaye ye sach me tha ya kisi machine ke dwara logon ko darane ke liye banaya gaya tha ki log bag idhar se hi ise dekhkar bhag jayen lagta ha is khandhar me bahut bada raj chhipa ha kher lekin khandhar wala scene to old horror type movie ki tarah tha
 
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