अपडेट 41
आज रात कमल को नींद नहीं आ रही थी।
कुछ देर वो सोने की कोशिश करता रहा, लेकिन फिर हार मान कर उठ गया, और आज की घटनाओं के बारे में सोचने लगा।
आज का दिन बड़ा बेहतरीन बीता। घर भर में हवन के बाद उठने वाली सुन्दर सी महक भरी हुई थी। हल्की सी ठंडक थी, लेकिन उस सुगंध के कारण ऐसा लग रहा था कि जैसे वातावरण थोड़ा गर्म है। उस वातावरण में उसके मन में अच्छे अच्छे विचार आ रहे थे। आज के शुभ अवसर पर उसके निकट के सम्बन्धियों ने भी माया को ले कर अपनी सहमति जता दी थी, और इस कारण कमल को बहुत संतोष महसूस हो रहा था। यह ठीक था कि उसके माँ बाप ने उसकी और माया की शादी तय कर दी थी, लेकिन उनके भविष्य के लिए यह आवश्यक था कि उसका पूरा खानदान भी माया को स्वीकारे और उसको पसंद करे।
वो दिन भर बहुत घबराया - सभी की प्रश्न करती हुई निगाहें दिन भर माया पर ही केंद्रित थीं। लेकिन वो ऐसी भोली है कि इन सब बातों से बेखबर, बस सभी के सत्कार में लगी हुई थी। माया भोली है, लेकिन सरिता जी को समझ में आ रहा था सब, और वो अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थीं। ऐसी भोली, गुणी और सुन्दर लड़की को भला कोई कैसे नहीं पसंद करेगा?
कुछ देर तक वो यूँ ही जागा हुआ सोने की असफ़ल कोशिश करता रहा। लेकिन फिर उसने सोचा कि नींद नहीं आ रही है तो क्यों न थोड़ा पढ़ लिया जाए! वैसे भी सभी लोग सो ही रहे होंगे।
एक समय था जब वो नींद न आने पर वीडियो गेम खेलता था, या टीवी देखता था, या फिर नॉवेल या उपन्यास पढ़ता था। कभी कभी सस्ती अश्लील पुस्तकें पढ़ते हुए हस्त-मैथुन भी करता था। लेकिन अब ये सभी बेकार की आदतें पीछे छूट गई थीं। दिन के समय भी अब अपने परिवार के संग क्वालिटी टाइम बीतता था, जिसमें आध्यात्मिक बातें, उत्तम भोजन, और हँसी मज़ाक होता था। और यह सब कुछ माया के कारण हुआ था। माया का नाम मन में आते ही कमल के होंठों पर मुस्कान आ गई। दिन में शायद ही कोई ऐसा घण्टा होता हो, जिसमें वो माया को याद न करे! पिछले एक सप्ताह में ही वो कैसी इसी घर की हो गई थी! उसको घर का पूरा सिस्टम समझ में आ गया था। माँ और पिता जी दोनों कैसे माया पर जान छिड़कने लगे थे। कमल की भी वख़त अब उनके आँखों में बढ़ गई थी। सब अच्छा हो रहा था।
लेकिन परसों वो वापस अपने ‘मायके’ चली जाएगी और यह घर उसके बिना कैसा सूना सूना हो जाएगा। यह विचार आने पर उसका दिल थोड़ा बैठ गया। वो और माया भी इन दिनों बहुत करीब आ गए थे। एक दूसरे की पसंद - नापसंद के बारे में बहुत कुछ समझ में आ गया था। कमल की समीपता के कारण माया का अपने ‘बड़े’ होने वाला भाव भी कम हो गया था, जो अजय की उपस्थिति में स्वाभाविक रूप से सामने आ जाता था। उसके साथ अब वो थोड़ा मस्ती भी कर लेती थी। सरिता जी वैसे भी इसी प्रयास में रहती थीं कि माया इस घर की लाड़ली बन कर रहे और वो और कमल दोनों एक दूसरे के संग पूरी तरह सहज रहें।
अभी उस रात ही माँ ने उन दोनों को साथ में स्तनपान कराया था। फिलहाल तो उनको दूध नहीं उतर रहा था, लेकिन फिर भी भविष्य में होने वाली मातृत्व की प्रत्याशा में ये तैयारी थी। कमल भी इस बात को ले कर उत्साहित था - वो जानता था कि अजय और माया दोनों को उसकी होने वाली सासू माँ दैनिक स्तनपान कराती हैं। वो भी यह सुख चाहता था... और यह शीघ्र ही उसके आने वाले छोटे भाई या बहन के कारण संभव होने वाला था। वो बात सोच कर उसके होंठों पर मुस्कान आ गई। मन और भी अच्छा हो गया।
गणित की पुस्तक निकाल कर वो पढ़ने लगा और प्रश्न हल करने लगा। कुछ हो समय में उसने पाया कि अपेक्षाकृत कठिन प्रश्न भी अब वो हल कर पा रहा था। पहले तो ऐसे प्रश्न समझ ही नहीं आते थे उसको! उसको अब और भी रूचि आने लगी, और वो बिना रुके पढ़ता रहा और और भी सवाल लगाता रहा। कुछ देर बाद जब उसकी तन्द्रा भंग हुई, और उसने वापस घड़ी देखी तो पाया कि वो पिछले सवा घण्टे से पढ़ रहा था! उसको खुद ही आश्चर्य हो आया! इतनी एकाग्रता उसके अंदर पहले कभी न आई। माया ने उसको अपना जीवन साधने का उद्देश्य दे दिया था, और अजय और रूचि के साथ ने उस उद्देश्य को सफल बनाने का साधन!
पहले वो अपने पिता के काम को सम्हालने से अधिक कुछ सोचता ही नहीं था, लेकिन पिछले कुछ समय से उसने सोचना शुरू कर दिया था कि वो काम-काज के साथ साथ आगे भी पढ़ेगा। कम से कम ग्रेजुएट तो होगा। अच्छा लगेगा खुद को और माया को भी। माया से उसने ये बात कही थी और वो भी उसके इस निर्णय से बहुत खुश थी। उसने माया से भी आगे पढ़ने को कहा, लेकिन माया का कहना था कि उसका मन था कि वो एक कुशल गृहणी बने, ये घर सम्हाले, और उसकी संतानों की माँ बने। कमल को इस बात से कोई निराशा नहीं हुई... बल्कि माया पर उसको घमंड हुआ कि वो जानती थी कि उसको अपने जीवन से क्या चाहिए।
वो अंगड़ाई ले कर कुर्सी से उठ ही रहा था कि दरवाज़े पर उसको आहट महसूस हुई। वहाँ माया खड़ी थी और उसको बहुत प्यार से देख कर मुस्कुरा रही थी। उसके हाथों में एक ट्रे था।
“आप?” वो उसको देख कर चौंका, “आप क्यों जाग गईं?”
“रात में हम आपको हमेशा चेक करने आते हैं,” माया ने मुस्कुराते हुए शरारत से कहा, “आज आपको पढ़ते देखा, तो आपके लिए चाय बना लाए।”
“अच्छा... आप रोज़ आती हैं? लेकिन हमको पता नहीं चलता।”
“कैसे पता चलेगा? आप हमेशा सो रहे होते हैं न,” माया ने उसको कप देते हुए कहा।
कमल ने देखा - माया ने क्रीम कलर की एक झीनी सी नाईटी पहनी हुई थी, और उसके अंदर कुछ नहीं। उसके साँवले शरीर पर वो बहुत फ़ब रही थी। जाहिर सी बात है कि वो कुछ समय पहले सो रही थी, और वाक़ई उसको ‘चेक’ करने आई थी।
“क्या चेक करती हैं आप?” कमल ने एक चुस्की लेते हुए कहा, “म्मम! बढ़िया चाय!”
“आपको अच्छी लगी? अदरक और लौंग डाला है... थोड़ी देर में आपको नींद आ जाएगी!”
“और मीठे के लिए?”
“चीनी... और क्या?”
“वो तो स्वाद के लिए है... मीठा करने के लिए आप इसमें से एक सिप ले लीजिए, बस, मीठी हो जाएगी ये!”
माया ने मुस्कुराते हुए कमल के कप को अपने होंठों से चूम लिया।
कमल ने तुरंत ही माया की चूमी हुई जगह पर कप से चाय पीनी शुरू कर दी, “हाँ! अब हुई मीठी ये चाय!”
“हा हा... आप और आपकी बातें,”
वो मुस्कुराया, “क्या चेक करती हैं... आपने बताया नहीं?”
“यही कि आप ठीक से सो रहे हैं या नहीं... कोई शरारत तो नहीं कर रहे हैं...” माया ने शोख़ी से कहा।
“सोते समय कोई क्या शरारत करेगा भला,” कमल ने मासूमियत से कहा, “हाँ, आप साथ में हों, तो अलग बात है!”
उसकी इस बात पर माया लजा गई, लेकिन फिर भी बोली,
“बस, कुछ ही दिनों बात और है... फिर तो हम आपके ही साथ होंगे!”
“आप हमको सारी शरारतें करने देंगी?”
“नहीं तो हमारे होने का क्या फ़ायदा है आपको?”
“बहुत सारे फ़ायदे हैं... लेकिन वो हम आपको अभी नहीं बताएँगे!”
माया ने कुछ नहीं कहा... बस, मुस्कुरा कर रह गई।
आगे की बात का सूत्र कमल ने ही थामा, “अच्छा एक बात बताइए हमें... हनीमून के लिए आप कहाँ जाना चाहती हैं?”
इस बात पर माया के चेहरे के भाव थोड़े बदल गए।
“क्या हुआ?”
“पहले ये बताइए कि यह ख़याल आपके मन में आया क्यों?”
“अरे सभी लोग जाते हैं हनीमून पर... और माँ ने भी मुझसे बोला है कि बहू से पूछ ले!”
“जानू... एक बात कहें आपसे?” माया ने बड़ी कोमलता से कहा।
“अरे, इतना फॉर्मल क्यूँ बनना है? कहिए न!”
“हमको हमारे घर में हनीमून मनाना है,”
“मतलब...”
“मतलब यहाँ! इस घर में... आपके और हमारे,” माया ने अपनी और कमल की ओर इशारा कर के कहा, “... हमारे घर में।”
“हाँ... लेकिन...”
“कोई लेकिन वेकिन नहीं... हमको यहीं रहना है। आपके साथ... मम्मी पापा के साथ... हमको हनीमून जैसी फ़ालतू की बातों पर बिना वज़ह पैसे नहीं वेस्ट करने हैं, और न ही आपका टाइम।”
कमल को विश्वास ही नहीं हुआ कि माया ऐसा कुछ कह देगी।
“लेकिन...”
“जानू... वैसे भी घर से बाहर हमको कम्फर्टेबल नहीं लगेगा।”
“हम्म्म... विंटर वेकेशंस भी तो होंगे न,”
“ठीक है, जब विंटर वेकेशंस होंगे,” माया कह रही थी, “तब चले चलेंगे... अगर... (माया ने ‘अगर’ पर ज़ोर दिया) अगर मम्मी पापा भी कहीं चल रहे हों!”
“मम्मी पापा के साथ जाना है आपको हनीमून पर?”
“जानू... वो दोनों हमेशा काम करते रहते हैं! उनको भी तो छुट्टी चाहिए न!”
“हम्म्म... ठीक है, हम मम्मी पापा से बात करेंगे,” कमल ने कहा और फिर आगे बोला, “आप बहुत अच्छी हैं मेरी जान!”
“वो हमको पता है,” माया ने बड़ी अदा से कहा, “यू आर लकी!”
“वो तो हम हैं!”
“तो मेरे जानू जी, हम घर पर ही हनीमून मनाएँगे! आप हमसे जैसा मन करे, जब मन करे, शरारत कीजिएगा...”
“अच्छा जी?”
“हाँ, लेकिन उसके बाद हम आपकी क्लास लेंगे कि आपने क्या पढ़ा!”
उसकी बात पर कमल को हँसी आ गई।
“हनी, आप जब ऐसी बातें करती हैं न, तो हमारे मन में कुछ कुछ होने लगता है!”
“अच्छा जी?”
“हाँ!” वो मुस्कुराते हुए आगे बोला, “आज जब दादी जी, चाचियों, और बुआ जी ने आपको जल्दी से ख़ुशख़बरी देने को कहा न, तब से मन में हलचल सी मची हुई है,”
“क्यों?” माया ने बड़ी कोमलता से उसकी बाँह को सहलाते हुए पूछा, “क्या हो गया जानू?”
कमल ने कुछ नहीं कहा - बस एक टक माया को देखता रहा।
माया ने सोचा कि शायद वो इतनी जल्दी पापा बनने की सोच कर घबरा रहा हो। इसलिए वो बोली,
“आई नो कि इतनी कम उम्र में आपके लिए पापा बनना थोड़ा जल्दी रहेगा, लेकिन अगर हमको अगले साल बच्चा होता है, हम तो तब तक चौबीस की हो जाएँगे न!” माया ने उसको दिलासा देते हुए आगे कहा, “और आप बच्चे की देखभाल की चिंता न कीजिए... आपकी पढ़ाई लिखाई, या काम में हम कोई डिस्टर्बेंस नहीं होने देंगे!”
“नहीं वो बात नहीं है,” कमल ने कहा, “माँ ने तो कहा ही है कि अगर हमको बच्चा हुआ, तो उसकी देखभाल मेरे होने वाले भाई या बहन के साथ ही हो जाएगा!”
कमल मुस्कुराया, “... और वैसे भी, आई थिंक आई विल लव टू बी अ फादर!”
माया भी मुस्कुराई, “सच में?”
कमल ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “आई थिंक इट विल बी कूल! मेरे तो कई टीचर्स भी माँ बाप नहीं बन पाए हैं... लेकिन मैं बनूँगा! हैं न बढ़िया बात!”
“हा हा हा...” माया उसकी इस भोली बात पर हँसने लगी।
“सच में मेरी जान... मुझे लगता है कि आप जैसी लड़की के लिए इससे बेहतर कोई और गिफ़्ट नहीं हो सकता। आपने मेरा प्यार एक्सेप्ट किया, हमको अपने दिल में जगह दी... आई ऍम श्योर कि हमारा बच्चा भी आपके जैसा ही भोला और सच्चा होगा!”
“आप भी तो इतने भोलू हैं...” माया ने बड़े प्यार से कमल का गाल सहलाया, “लेकिन फिर आपको हलचल क्यों महसूस हो रही है?”