• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Romance फ़िर से [चित्रमय]

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,599
25,107
189
दोस्तों - इस अपडेट सूची को स्टिकी पोस्ट बना रहा हूँ!
लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि केवल पढ़ कर निकल लें। यह केवल आपकी सुविधा के लिए है। चर्चा बंद नहीं होनी चाहिए :)

अपडेट 1; अपडेट 2; अपडेट 3; अपडेट 4; अपडेट 5; अपडेट 6; अपडेट 7; अपडेट 8; अपडेट 9; अपडेट 10; अपडेट 11; अपडेट 12; अपडेट 13; अपडेट 14; अपडेट 15; अपडेट 16; अपडेट 17; अपडेट 18; अपडेट 19; अपडेट 20; अपडेट 21; अपडेट 22; अपडेट 23; अपडेट 24; अपडेट 25; अपडेट 26; अपडेट 27; अपडेट 28; अपडेट 29; अपडेट 30; अपडेट 31; अपडेट 32; अपडेट 33; अपडेट 34; अपडेट 35; अपडेट 36; अपडेट 37; अपडेट 38; अपडेट 39; अपडेट 40; अपडेट 41; अपडेट 42; अपडेट 43; अपडेट 44; अपडेट 45; अपडेट 46; अपडेट 47; अपडेट 48; अपडेट 49; अपडेट 50; अपडेट 51; अपडेट 52; अपडेट 53; अपडेट 54; अपडेट 55; अपडेट 56; अपडेट 57; अपडेट 58; अपडेट 59; अपडेट 60; अपडेट 61; अपडेट 62; अपडेट 63; अपडेट 64; अपडेट 65; अपडेट 66; अपडेट 67; अपडेट 68; अपडेट 69; अपडेट 70; अपडेट 71; अपडेट 72; अपडेट 73; अपडेट 74; अपडेट 75; अपडेट 76; अपडेट 77; अपडेट 78; अपडेट 79; अपडेट 80; अपडेट 81; अपडेट 82; अपडेट 83; अपडेट 84;
 
Last edited:

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,599
25,107
189
संजू भाई आप 50-55 की उम्र में 17-18 साल की लड़की की भावनाओं का छिद्रान्वेषण कर रहे हैं....
बाज आ जाओ :D भाभी जी को रौद्र रूप धारण करने पर मजबूर मत करो
बच्चों को आनन्द लेने दो बाली उमर के प्यार का.....हमने आपने भी लिया था

😂 😂 😂 😂 👏

आपने सही कहा बन्धु....
बल्कि मैं तो समझता हूं कि इस उम्र ही वास्तविक प्रेम होता है नि:स्वार्थ समर्पण वाला

परिपक्व प्रेम तो लाभ-हानि के स्वार्थ को तौलने लगता है

प्रेम को आध्यात्मिक / आत्मिक स्तर पर ले जा कर सोचने और देखने की एक बुरी लत है देश-वासियों को।

कुछ अजीब से pre-conceived notions बना रखे हैं हमने कुछ बातों के लिए - मसलन, नेता सफ़ेद धोती-कुर्ता पहने। नहीं तो उसका आचरण शुद्ध नहीं।
हमारे पास अनगिनत उदाहरण हैं कि कपड़ों का चरित्र से कोई लेना देना नहीं।
वैसे ही प्रेम को ले कर भी pre-conceived notions हैं। एक तो यह कि प्रेम आत्मिक हो... आध्यात्मिक हो, नहीं तो वो प्रेम नहीं!
दूसरा यह कि किशोरवय लोगों का प्रेम, प्रेम नहीं, दैहिक आकर्षण मात्र है।

अब इन बातों के लिए क्या ही कहा जाए!?
 

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,599
25,107
189
Kya gazab ki updates post ki he aapne avsji Bhai,

Ajay aur Ruchi ek dusre ko pasand to pehle se hi karte he..............

Ab inke pyar par inke gharwalo ki bhi muhar lag gayi...........

Erotica to itne sunder aur saral shabdo me likha he aapne..............

Simply awesome Bhai.............Nishabd kar diya aapne.............

Keep rocking Big Bro

अज्जू भाई - अपनी कहानी का प्रमुख पात्र अजय (अज्जू) आपका ही नाम-राशि है! 😂
बहुत बहुत धन्यवाद मित्र! साथ बने रहें।
 

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,599
25,107
189
अपडेट 40


राणा परिवार ने इस बार का उत्सव अपनी होने वाली बहू माया के संग बड़े आनंद से मनाया।

इस बार यह कोई साधारण उत्सव नहीं था! यह एक ऐसा अवसर था जब राणा खानदान के लगभग सभी सदस्य अपनी होने वाली बहू को देखने और परखने के लिए इकठ्ठा हुए थे। सपरिवार हवन, पूजा-पाठ, और भोज के आयोजन के साथ यह त्यौहार संपन्न हुआ।

सभी ने यह बात नोटिस करी कि इन सभी कार्यों में माया न केवल शामिल ही थी, बल्कि उसने अपनी मेहनत और लगन से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। सच तो यह था कि राणा खानदान वहाँ आया ही इसलिए था कि वो माया को परख सकें। हर कोई यह जानने को उत्सुक था कि इस लड़की में ऐसा क्या था कि खानदान के ‘लाडले’ के लिए उसको चुना गया था।
कुछ ही लोग थे जो उसकी खूबियों को देखना चाहते थे... अधिकतर लोग उसकी कमियों को तलाशने की फिराक में थे।

लेकिन माया ने अपने व्यवहार और कौशल से सबको चकित कर दिया।

माया को ले कर राणा खानदान में तरह-तरह की बातें चल रही थीं।

सामने अभी तक किसी ने कुछ कहा नहीं था, लेकिन उसकी साँवली रंगत और नट समुदाय से होने की वजह से कई सदस्य उसे राणा परिवार की बहू के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। राणा परिवार एक संपन्न और परंपरावादी परिवार था, जिसका सामाजिक रुतबा ऊँचा था। उनके लिए बहू का चयन केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि उनके खानदान की प्रतिष्ठा का सवाल था। करेले पर नीम चढ़ा वाली बात ये भी थी कि उम्र में भी वो कमल से चार साल बड़ी थी। कई रिश्तेदारों को यह बात खटक रही थी।

‘ये भी कोई रिश्ता हुआ?’ यह बात सभी लोगों में हो रही थी।

कुछ लोग तो यह भी सोचने लग गए कि शायद कमल में ही कोई कमी होगी... वरना इतने समृद्ध परिवार का लड़का ऐसा ‘समझौता’ क्यों करेगा?

हालाँकि, ये सभी पूर्वाग्रह माया से मिलने से पहले की बातें थीं।

जब राणा खानदान के लोग उससे पहली बार मिले, तो उनके मन में उठ रहे सवाल धीरे-धीरे शांत होने लगे। माया ने अपनी सादगी और शुद्धता से सबको पहली नज़र में प्रभावित कर दिया था। हाँ, उसकी रंगत साँवली थी, और वो नट समुदाय से थी... लेकिन ये वो बातें थीं जिन पर उसका अपना कोई बस नहीं था। उसके व्यक्तित्व में एक अलग तरह का सौंदर्य था, जो बाहरी दिखावे से परे था। उसकी मुस्कान में एक अपनापन था, उसकी बातों में एक मृदुलता थी, और उसके व्यवहार में एक ऐसी शालीनता थी जो धीरे-धीरे सबके दिलों को जीत रही थी। राणा परिवार के बुजुर्गों ने देखा कि माया न तो अपनी साँवली रंगत को लेकर असहज थी, न ही अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर। उसमें आत्मविश्वास था, लेकिन घमंड नहीं।

उत्सव के दौरान माया ने अपनी गृह-कार्य दक्षता और कौशल का ऐसा प्रदर्शन किया कि राणा खानदान की महिलाएँ भी उसकी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाईं। सुबह से ही वो पूजा-पाठ की तैयारियों में लग गई थी... उसने अपने हाथों से हवन-कुंड को सजाया था। उसने साड़ी पहनी हुई थी और पल्लू से अपना सर ढंका हुआ था। बस सिन्दूर की अनुपस्थिति ही थी जो बता रही थी कि वो अभी तक ब्याहता नहीं हुई थी। जब पुजारी ने मंत्रोच्चारण शुरू किया, तो कमल के साथ बैठ कर माया ने जिस तरह बिना किसी हिचक के आहुति दी, उससे सभी प्रभावित हुए। उसकी हर हरकत में एक सहजता थी, मानो वो अभी से ही इस घर की बहू हो गई हो।

हवन और पूजा शाम की थी। उसके बाद रात्रि-भोज का बंदोबस्त था। इस समय भी माया की काबिलियत प्रदर्शित हो रही थी। रसोईघर में रसोईया थी, लेकिन आज के प्रयोजन के लिए माया ने खुद ही लगभग सारी रसोई बनाई थी। रसोईया ने बस उसकी सहायता करी थी। सरिता जी ने उसकी मदद करने की पेशकश करी ही, लेकिन माया ने उसके गर्भवती होने का हवाला दे कर उसको मना कर दिया। तड़क भड़क वाला भोजन नहीं था, लेकिन उसमें ऐसा अच्छा स्वाद था कि राणा खानदान की बुजुर्ग महिलाएँ भी हैरान रह गईं।

किशोर जी की एक बहन ने तो सरिता जी से कह ही दिया, “भाभी, तुम्हारी बहू तो जादूगरनी है... ऐसा स्वादिष्ट खाना कहाँ मिलता है अब?”

माया के व्यवहार में एक अधिकार भाव था। लेकिन यह अधिकार भाव अहंकार के कारण नहीं, बल्कि परिवार के लिए अपनेपन वाली भावना से आ रहा था। वो इस घर को अपना मान चुकी थी, और उसका व्यवहार वैसा ही था, जैसा इस खानदान की बहू का होना चाहिए।

राणा खानदान की बड़ी बुजुर्ग महिलाओं ने यह बात देखी।

उनकी अपनी बहुएँ इतनी मेहनत नहीं करती थीं, और माया की मेहनत वो अनदेखा न कर सकीं। सरिता जी की किस्मत को ले कर उनको जलन भी महसूस हुई और माया के व्यवहार के लिए प्रशंसा भी!

कमल की दादी माँ ने कह भी दिया, “ऐसी बहू तो हर घर की शान होती है... इसका दिल सोने का है और व्यवहार तो शहद जैसा मीठा!”

माया की सबसे बड़ी खासियत थी उसकी सहजता। वो किसी को प्रभावित करने की कोशिश नहीं कर रही थी, फिर भी उसने सबको प्रभावित कर दिया थी। सरिता जी एक समय बहुत थक गई थीं, तो वो उनके लिए एक गिलास नींबू का शर्बत बना कर ले आई, और बोली, “माँ, आप थोड़ा आराम कर लीजिए... मैं संभाल लूँगी।”

सरिता जी को यह सुनकर बहुत अच्छा लगा। बाकी स्त्रियाँ थोड़ा जल गईं - उनकी अपनी बहुएँ उन्हें इतने प्यार से “माँ जी” नहीं कहती थीं। कई तो अपनी सासों को "आंटी" कह कर बुलाती थीं। माया का यह व्यवहार एक आदर्श भारतीय बहू की छवि दर्शा रहा था। ऐसी बहू , जो अपने सास-ससुर की सेवा को प्राथमिकता देती है, जो घर के कामों को बोझ नहीं, बल्कि अपना कर्तव्य समझती है, और उनको कर के ख़ुश रहती है।

रात्रि भोज में अशोक जी सपरिवार आमंत्रित थे।

किशोर जी चाहते थे कि उनके रिश्तेदार माया के माता-पिता से मिलें और इस रिश्ते को औपचारिक रूप से स्वीकार करें। इस बार सभी रिश्तेदारों का व्यवहार बहुत सौहार्दपूर्ण था। माया के परिवार को देखकर उनकी उत्सुकता और बढ़ गई। अजय, जिसने कमल और माया के रिश्ते की नींव रखी थी, उसके बारे में भी सबने सुन रखा था। लिहाज़ा सभी उससे बड़े प्रेम से मिले। रात्रि भोज के समय तक सभी ने माया को ले कर अपने पूर्वाग्रह छोड़ दिए थे। अब तक वो सभी की चहेती बन गई थी।

भोजन के दौरान किशोर जी ने सभी को माया और कमल की शादी की तारीख बताई, जो बस चालीस दिनों बाद की ही निश्चित हुई थी। सभी ने इस बात पर खुशी जताई, कि जितना जल्दी हो, बहू को लिवा लाया जाय! लेकिन सबसे बड़ी खुशखबरी तब आई जब किशोर जी ने बताया कि सरिता जी फिर से गर्भवती हैं। सरिता जी राणा खानदान में समकालीन भाईयों में सबसे छोटे भाई की पत्नी थीं... मतलब सबसे छोटी बहू थीं! सरिता जी उनसे भी दस साल छोटी थीं - मतलब वो उम्र में राणा खानदान के अपने कई ‘बेटे’ ‘बेटियों’ के समकक्ष थीं। अपने नटखट और मधुर स्वभाव के कारण सभी की चहेती थीं। सभी चाहते थे कि किशोर जी के यहाँ एक से अधिक संतानें हों, इसलिए इस खबर से घर में खुशी की लहर दौड़ गई। सभी ने सरिता जी को बधाइयाँ दीं और उनका ध्यान रखने की सलाह दी। जब कमल उनके गर्भ में था, तब भी परिवार ने उनकी खूब देखभाल की थी, और इस बार भी ऐसा ही होने की उम्मीद थी।

राणा खानदान की बुज़ुर्ग महिलाओं ने माया से प्रेम-भरी चुहल करते हुए कहा, “बहू, शादी के बाद तुम भी जल्दी से जल्दी खुशखबरी सुना देना... दोनों बच्चे साथ-साथ बड़े होंगे! घर में खूब रौनक बनी रहेगी।”

इस बात पर माया क्या कहती? उसने शरमाते हुए सर झुका लिया, लेकिन उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी।

दिन के अंत में जब सभी मेहमान विदा ले रहे थे, तो राणा खानदान के सभी सदस्यों के मन में माया के प्रति सम्मान और स्नेह जाग चुका था। उसकी साँवली रंगत और नट समुदाय से होने की बात अब किसी को नहीं खटक रही थी। वो अपनी मेहनत, लगन, और गुणों के कारण राणा परिवार की शान बन चुकी थी।

माया वैसी ही थी जैसी बहू हर सास का सपना होती है।

**
 

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,599
25,107
189
अपडेट 41


आज रात कमल को नींद नहीं आ रही थी।

कुछ देर वो सोने की कोशिश करता रहा, लेकिन फिर हार मान कर उठ गया, और आज की घटनाओं के बारे में सोचने लगा।

आज का दिन बड़ा बेहतरीन बीता। घर भर में हवन के बाद उठने वाली सुन्दर सी महक भरी हुई थी। हल्की सी ठंडक थी, लेकिन उस सुगंध के कारण ऐसा लग रहा था कि जैसे वातावरण थोड़ा गर्म है। उस वातावरण में उसके मन में अच्छे अच्छे विचार आ रहे थे। आज के शुभ अवसर पर उसके निकट के सम्बन्धियों ने भी माया को ले कर अपनी सहमति जता दी थी, और इस कारण कमल को बहुत संतोष महसूस हो रहा था। यह ठीक था कि उसके माँ बाप ने उसकी और माया की शादी तय कर दी थी, लेकिन उनके भविष्य के लिए यह आवश्यक था कि उसका पूरा खानदान भी माया को स्वीकारे और उसको पसंद करे।

वो दिन भर बहुत घबराया - सभी की प्रश्न करती हुई निगाहें दिन भर माया पर ही केंद्रित थीं। लेकिन वो ऐसी भोली है कि इन सब बातों से बेखबर, बस सभी के सत्कार में लगी हुई थी। माया भोली है, लेकिन सरिता जी को समझ में आ रहा था सब, और वो अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थीं। ऐसी भोली, गुणी और सुन्दर लड़की को भला कोई कैसे नहीं पसंद करेगा?

कुछ देर तक वो यूँ ही जागा हुआ सोने की असफ़ल कोशिश करता रहा। लेकिन फिर उसने सोचा कि नींद नहीं आ रही है तो क्यों न थोड़ा पढ़ लिया जाए! वैसे भी सभी लोग सो ही रहे होंगे।

एक समय था जब वो नींद न आने पर वीडियो गेम खेलता था, या टीवी देखता था, या फिर नॉवेल या उपन्यास पढ़ता था। कभी कभी सस्ती अश्लील पुस्तकें पढ़ते हुए हस्त-मैथुन भी करता था। लेकिन अब ये सभी बेकार की आदतें पीछे छूट गई थीं। दिन के समय भी अब अपने परिवार के संग क्वालिटी टाइम बीतता था, जिसमें आध्यात्मिक बातें, उत्तम भोजन, और हँसी मज़ाक होता था। और यह सब कुछ माया के कारण हुआ था। माया का नाम मन में आते ही कमल के होंठों पर मुस्कान आ गई। दिन में शायद ही कोई ऐसा घण्टा होता हो, जिसमें वो माया को याद न करे! पिछले एक सप्ताह में ही वो कैसी इसी घर की हो गई थी! उसको घर का पूरा सिस्टम समझ में आ गया था। माँ और पिता जी दोनों कैसे माया पर जान छिड़कने लगे थे। कमल की भी वख़त अब उनके आँखों में बढ़ गई थी। सब अच्छा हो रहा था।

लेकिन परसों वो वापस अपने ‘मायके’ चली जाएगी और यह घर उसके बिना कैसा सूना सूना हो जाएगा। यह विचार आने पर उसका दिल थोड़ा बैठ गया। वो और माया भी इन दिनों बहुत करीब आ गए थे। एक दूसरे की पसंद - नापसंद के बारे में बहुत कुछ समझ में आ गया था। कमल की समीपता के कारण माया का अपने ‘बड़े’ होने वाला भाव भी कम हो गया था, जो अजय की उपस्थिति में स्वाभाविक रूप से सामने आ जाता था। उसके साथ अब वो थोड़ा मस्ती भी कर लेती थी। सरिता जी वैसे भी इसी प्रयास में रहती थीं कि माया इस घर की लाड़ली बन कर रहे और वो और कमल दोनों एक दूसरे के संग पूरी तरह सहज रहें।

अभी उस रात ही माँ ने उन दोनों को साथ में स्तनपान कराया था। फिलहाल तो उनको दूध नहीं उतर रहा था, लेकिन फिर भी भविष्य में होने वाली मातृत्व की प्रत्याशा में ये तैयारी थी। कमल भी इस बात को ले कर उत्साहित था - वो जानता था कि अजय और माया दोनों को उसकी होने वाली सासू माँ दैनिक स्तनपान कराती हैं। वो भी यह सुख चाहता था... और यह शीघ्र ही उसके आने वाले छोटे भाई या बहन के कारण संभव होने वाला था। वो बात सोच कर उसके होंठों पर मुस्कान आ गई। मन और भी अच्छा हो गया।

गणित की पुस्तक निकाल कर वो पढ़ने लगा और प्रश्न हल करने लगा। कुछ हो समय में उसने पाया कि अपेक्षाकृत कठिन प्रश्न भी अब वो हल कर पा रहा था। पहले तो ऐसे प्रश्न समझ ही नहीं आते थे उसको! उसको अब और भी रूचि आने लगी, और वो बिना रुके पढ़ता रहा और और भी सवाल लगाता रहा। कुछ देर बाद जब उसकी तन्द्रा भंग हुई, और उसने वापस घड़ी देखी तो पाया कि वो पिछले सवा घण्टे से पढ़ रहा था! उसको खुद ही आश्चर्य हो आया! इतनी एकाग्रता उसके अंदर पहले कभी न आई। माया ने उसको अपना जीवन साधने का उद्देश्य दे दिया था, और अजय और रूचि के साथ ने उस उद्देश्य को सफल बनाने का साधन!

पहले वो अपने पिता के काम को सम्हालने से अधिक कुछ सोचता ही नहीं था, लेकिन पिछले कुछ समय से उसने सोचना शुरू कर दिया था कि वो काम-काज के साथ साथ आगे भी पढ़ेगा। कम से कम ग्रेजुएट तो होगा। अच्छा लगेगा खुद को और माया को भी। माया से उसने ये बात कही थी और वो भी उसके इस निर्णय से बहुत खुश थी। उसने माया से भी आगे पढ़ने को कहा, लेकिन माया का कहना था कि उसका मन था कि वो एक कुशल गृहणी बने, ये घर सम्हाले, और उसकी संतानों की माँ बने। कमल को इस बात से कोई निराशा नहीं हुई... बल्कि माया पर उसको घमंड हुआ कि वो जानती थी कि उसको अपने जीवन से क्या चाहिए।

वो अंगड़ाई ले कर कुर्सी से उठ ही रहा था कि दरवाज़े पर उसको आहट महसूस हुई। वहाँ माया खड़ी थी और उसको बहुत प्यार से देख कर मुस्कुरा रही थी। उसके हाथों में एक ट्रे था।

“आप?” वो उसको देख कर चौंका, “आप क्यों जाग गईं?”

“रात में हम आपको हमेशा चेक करने आते हैं,” माया ने मुस्कुराते हुए शरारत से कहा, “आज आपको पढ़ते देखा, तो आपके लिए चाय बना लाए।”

“अच्छा... आप रोज़ आती हैं? लेकिन हमको पता नहीं चलता।”

“कैसे पता चलेगा? आप हमेशा सो रहे होते हैं न,” माया ने उसको कप देते हुए कहा।

कमल ने देखा - माया ने क्रीम कलर की एक झीनी सी नाईटी पहनी हुई थी, और उसके अंदर कुछ नहीं। उसके साँवले शरीर पर वो बहुत फ़ब रही थी। जाहिर सी बात है कि वो कुछ समय पहले सो रही थी, और वाक़ई उसको ‘चेक’ करने आई थी।

“क्या चेक करती हैं आप?” कमल ने एक चुस्की लेते हुए कहा, “म्मम! बढ़िया चाय!”

“आपको अच्छी लगी? अदरक और लौंग डाला है... थोड़ी देर में आपको नींद आ जाएगी!”

“और मीठे के लिए?”

“चीनी... और क्या?”

“वो तो स्वाद के लिए है... मीठा करने के लिए आप इसमें से एक सिप ले लीजिए, बस, मीठी हो जाएगी ये!”

माया ने मुस्कुराते हुए कमल के कप को अपने होंठों से चूम लिया।

कमल ने तुरंत ही माया की चूमी हुई जगह पर कप से चाय पीनी शुरू कर दी, “हाँ! अब हुई मीठी ये चाय!”

“हा हा... आप और आपकी बातें,”

वो मुस्कुराया, “क्या चेक करती हैं... आपने बताया नहीं?”

“यही कि आप ठीक से सो रहे हैं या नहीं... कोई शरारत तो नहीं कर रहे हैं...” माया ने शोख़ी से कहा।

“सोते समय कोई क्या शरारत करेगा भला,” कमल ने मासूमियत से कहा, “हाँ, आप साथ में हों, तो अलग बात है!”

उसकी इस बात पर माया लजा गई, लेकिन फिर भी बोली,

“बस, कुछ ही दिनों बात और है... फिर तो हम आपके ही साथ होंगे!”

“आप हमको सारी शरारतें करने देंगी?”

“नहीं तो हमारे होने का क्या फ़ायदा है आपको?”

“बहुत सारे फ़ायदे हैं... लेकिन वो हम आपको अभी नहीं बताएँगे!”

माया ने कुछ नहीं कहा... बस, मुस्कुरा कर रह गई।

आगे की बात का सूत्र कमल ने ही थामा, “अच्छा एक बात बताइए हमें... हनीमून के लिए आप कहाँ जाना चाहती हैं?”

इस बात पर माया के चेहरे के भाव थोड़े बदल गए।

“क्या हुआ?”

“पहले ये बताइए कि यह ख़याल आपके मन में आया क्यों?”

“अरे सभी लोग जाते हैं हनीमून पर... और माँ ने भी मुझसे बोला है कि बहू से पूछ ले!”

“जानू... एक बात कहें आपसे?” माया ने बड़ी कोमलता से कहा।

“अरे, इतना फॉर्मल क्यूँ बनना है? कहिए न!”

“हमको हमारे घर में हनीमून मनाना है,”

“मतलब...”

“मतलब यहाँ! इस घर में... आपके और हमारे,” माया ने अपनी और कमल की ओर इशारा कर के कहा, “... हमारे घर में।”

“हाँ... लेकिन...”

“कोई लेकिन वेकिन नहीं... हमको यहीं रहना है। आपके साथ... मम्मी पापा के साथ... हमको हनीमून जैसी फ़ालतू की बातों पर बिना वज़ह पैसे नहीं वेस्ट करने हैं, और न ही आपका टाइम।”

कमल को विश्वास ही नहीं हुआ कि माया ऐसा कुछ कह देगी।

“लेकिन...”

“जानू... वैसे भी घर से बाहर हमको कम्फर्टेबल नहीं लगेगा।”

“हम्म्म... विंटर वेकेशंस भी तो होंगे न,”

“ठीक है, जब विंटर वेकेशंस होंगे,” माया कह रही थी, “तब चले चलेंगे... अगर... (माया ने ‘अगर’ पर ज़ोर दिया) अगर मम्मी पापा भी कहीं चल रहे हों!”

“मम्मी पापा के साथ जाना है आपको हनीमून पर?”

“जानू... वो दोनों हमेशा काम करते रहते हैं! उनको भी तो छुट्टी चाहिए न!”

“हम्म्म... ठीक है, हम मम्मी पापा से बात करेंगे,” कमल ने कहा और फिर आगे बोला, “आप बहुत अच्छी हैं मेरी जान!”

“वो हमको पता है,” माया ने बड़ी अदा से कहा, “यू आर लकी!”

“वो तो हम हैं!”

“तो मेरे जानू जी, हम घर पर ही हनीमून मनाएँगे! आप हमसे जैसा मन करे, जब मन करे, शरारत कीजिएगा...”

“अच्छा जी?”

“हाँ, लेकिन उसके बाद हम आपकी क्लास लेंगे कि आपने क्या पढ़ा!”

उसकी बात पर कमल को हँसी आ गई।

“हनी, आप जब ऐसी बातें करती हैं न, तो हमारे मन में कुछ कुछ होने लगता है!”

“अच्छा जी?”

“हाँ!” वो मुस्कुराते हुए आगे बोला, “आज जब दादी जी, चाचियों, और बुआ जी ने आपको जल्दी से ख़ुशख़बरी देने को कहा न, तब से मन में हलचल सी मची हुई है,”

“क्यों?” माया ने बड़ी कोमलता से उसकी बाँह को सहलाते हुए पूछा, “क्या हो गया जानू?”

कमल ने कुछ नहीं कहा - बस एक टक माया को देखता रहा।

माया ने सोचा कि शायद वो इतनी जल्दी पापा बनने की सोच कर घबरा रहा हो। इसलिए वो बोली,

“आई नो कि इतनी कम उम्र में आपके लिए पापा बनना थोड़ा जल्दी रहेगा, लेकिन अगर हमको अगले साल बच्चा होता है, हम तो तब तक चौबीस की हो जाएँगे न!” माया ने उसको दिलासा देते हुए आगे कहा, “और आप बच्चे की देखभाल की चिंता न कीजिए... आपकी पढ़ाई लिखाई, या काम में हम कोई डिस्टर्बेंस नहीं होने देंगे!”

“नहीं वो बात नहीं है,” कमल ने कहा, “माँ ने तो कहा ही है कि अगर हमको बच्चा हुआ, तो उसकी देखभाल मेरे होने वाले भाई या बहन के साथ ही हो जाएगा!”

कमल मुस्कुराया, “... और वैसे भी, आई थिंक आई विल लव टू बी अ फादर!”

माया भी मुस्कुराई, “सच में?”

कमल ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “आई थिंक इट विल बी कूल! मेरे तो कई टीचर्स भी माँ बाप नहीं बन पाए हैं... लेकिन मैं बनूँगा! हैं न बढ़िया बात!”

“हा हा हा...” माया उसकी इस भोली बात पर हँसने लगी।

“सच में मेरी जान... मुझे लगता है कि आप जैसी लड़की के लिए इससे बेहतर कोई और गिफ़्ट नहीं हो सकता। आपने मेरा प्यार एक्सेप्ट किया, हमको अपने दिल में जगह दी... आई ऍम श्योर कि हमारा बच्चा भी आपके जैसा ही भोला और सच्चा होगा!”

“आप भी तो इतने भोलू हैं...” माया ने बड़े प्यार से कमल का गाल सहलाया, “लेकिन फिर आपको हलचल क्यों महसूस हो रही है?”
 

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,599
25,107
189
अपडेट 42


“एक्चुअली,” कमल ने थोड़ा हिचकिचाया, “हमारे मन में जो हलचल मची हुई है न, वो आपके इस क्यूट से पेट में हमारा बच्चा रखने के लिए ही मची हुई है!” उसने माया के पेट को सहलाते हुए बताया।

“जानू,” माया ने कमल को अपने आलिंगन में भरते हुए कहा, “बस कुछ ही दिनों की बात है न!”

“आई नो... लेकिन उस बात को सोच सोच कर हमको खूब इरेक्शन होता है... दिन में कई कई बार!” कमल ने कहा, “ऊपर से आप हैं भी इतनी अच्छी और इतनी सुन्दर...”

कहते हुए उसने माया के कन्धों से उसकी नाइटी के पट्टे हटा दिए और कपड़े को नीचे सरकाने में मदद करने लगा। माया ने अंदर कुछ नहीं पहना हुआ था, लिहाज़ा वो अगले ही पल उसके सामने नंगी हो गई।

“ओह गॉड!” वो माया के सौंदर्य का आँखों से आस्वादन करते हुए बोला, “कितनी सुन्दर...”

माया को शर्म बहुत आ रही थी, लेकिन वो चाहती थी कि कमल को अपने मन का आनंद मिले।

“कोई आईडिया है आपको कि आप कितनी सुन्दर हैं,”

कमल से रहा नहीं गया। अगले ही पल माया का एक चूचक कमल के मुँह में समां गया।

स्तनों के चूषण और चुम्बनों में कोई दो तीन ही मिनटों में माया और कमल दोनों ही अच्छी तरह उत्तेजित हो गए।

“कैसे न हो इसका ‘ऐसा’ हाल...” माया के चूचक से अलग होते हुए कमल ने अपने पाजामे की तरफ़ इशारा किया।

उसके उत्तेजित लिंग ने पाजामे में एक टेंट बना दिया था।

“मन पर थोड़ा कण्ट्रोल किया करिए न जानू!” माया की साँसें अभी भी उखड़ी हुई थी।

“बहुत किया... बहुत करता हूँ! लेकिन, कभी कभी नहीं हो पाता,”

माया से शादी पक्की होने के बाद कमल ने सभी ‘बुरी’ आदतें छोड़ दी थीं - हस्तमैथुन भी नहीं करता था वो अब! इस चक्कर में दो बार वो बिस्तर ख़राब कर चुका था।

“मैं कुछ कर दूँ?” माया ने कमल का पजामा नीचे सरकाते हुए कहा।

यह पहली बार था जब माया ने कमल के साथ इस तरह की पहल करी हो।

पजामा नीचे सरकते ही कमल का उत्तेजित लिंग उछल कर बाहर आ गया। माया पहले भी कमल के लिंग को महसूस कर चुकी थी और उसको पता था कि यह एक स्वस्थ लिंग है। लेकिन अभी उसको मूर्त रूप में देख कर उसको पक्का हो गया कि कमल का लिंग अच्छे आकार का, स्वस्थ और मज़बूत अंग है।

“क्या?” कमल ने पूछा।

“आपके इस नन्हे बदमाश को शांत...”

“ये ‘नन्हा’ है?” कमल ने अपनी निराशा दिखाई।

माया ने मुस्कुराते हुए, ‘न’ में सर हिलाते हुए कहा, “मेरे लिए बहुत बड़ा है...”

यह बात सही थी, और दोनों को इस बात का ज्ञान हो चुका था।

लेकिन माया के कथन पर कमल का दिल हिल गया और लिंग भी! उसके लिंग में होने वाली हलचल माया से छुपी नहीं थी। उसने हाथ बढ़ा कर उसके लिंग के गिर्द अपनी हथेली लपेट दी। माया की उँगलियों का स्पर्श पाते ही कमल को लगा कि कहीं वो स्खलित न हो जाए। बड़ी कोशिश कर के उसने अपने ऊपर नियंत्रण रखा और माया क्या करने वाली है, उसका इंतज़ार करने लगा।

कमल को लग रहा था कि माया अपने हाथ से उसको निवृत कर देगी। लेकिन उसको घोर आश्चर्य तब हुआ जब माया ने उसके सामने घुटनों के बल बैठ कर, उसके उत्तेजित लिंग को अपने मुँह में ले लिया।

“ओह्ह्ह्ह्ह!”

जो आनंद कमल को महसूस हुआ, उसको शब्दों में लिख पाना कठिन काम है। अपने लिंग पर किसी अन्य हाथ महसूस करना एक बात होती है, लेकिन किसी अन्य का मुँह महसूस करना बहुत ही अलग बात होती है। ख़ास कर के अपनी प्रियतमा का मुँह! माया के मुँह के भीतर जाते ही कमल को अपने लिंग के लगभग हर हिस्से से अनोखी सनसनी उठती हुई महसूस हुईं!

जाहिर सी बात है कि माया ‘मौखिक आनंद’ देने के मामले में अनाड़ी थी। लेकिन उससे उन दोनों के आनंद पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। माया की इच्छा शुद्ध थी। वो चाहती थी कि कमल को सुख मिले और उसके अंदर सेक्स को ले कर जो तनाव बन रहा है, उससे उसको निजाद मिले! कमल के सुख में उसका सुख निहित था। और कमल को अलौकिक सुख मिल रहा था।

माया ने उसके लिंग को पकड़ कर अपना मुँह अंदर - बाहर चलाना शुरू कर दिया। उसका प्रभाव भी कमल पर तत्क्षण पड़ा। जो मज़ा उसको आ रहा था, वो स्वर्गिक था। कुछ ही क्षणों में कमल की उत्तेजना तेजी से बढ़ने लगी, और वो माया द्वारा दिए जा रहे मुख-मैथुन के अनंत सागर में खो गया। उसकी आँखें माया के मुँह में जाते ही बंद हो गईं थीं। उसको अपने लिंग के हर पोर पर मीठी, और कामुक गुदगुदी महसूस हो रही थी! अद्भुत आनंद! वो कामुक आनंद से कराहने लगा! उसकी साँसें तेज हो गईं। माया ने ये सब देखा। उसके होठों पर और आँखों में मुस्कान आ गई! वो समझ रही थी कि कमल को आनंद मिल रहा है। उसका प्रयास सार्थक हो गया!

मुश्किल से मिनट भर ही हुआ होगा कि कमल को मीठे ओर्गास्म ने आ घेरा! वीर्य की एक लम्बी, मोटी धार से माया का मुँह भर गया। उसके बाद ताबड़तोड़ तीन चार और छोटे गोले उसके मुँह में जा गिरे। लेकिन माया कमल के आनंद में विघ्न नहीं डालना चाहती थी। इसलिए और कोई चारा नहीं था। उसने कमल का वीर्य पी लिया। लेकिन अभी भी उसने कमल का लिंग चूसना बंद नहीं किया और तब तक चूसा जब तक उसमें से वीर्य आना बंद नहीं हो गया।

फिर माया उठ कर कमल के सामने आ गई। कमल की आँखें अभी भी बंद थीं... ओर्गास्म के बाद भी वो आसमान में तैर रहा था।

माया ने कमल की टेबल पर रखे पानी के गिलास से पानी पीया और फिर उसने पूछा, “कैसा लगा जानू?”

“कैसा लगा? बाप रे! ... आपने स्वर्ग की सैर करा दी मुझे, मेरी जान! ... बहुत मज़ा आया!”

वो मुस्कुराई।

कमल ने माया के मुँह पर चूम लिया। दोनों के होंठ कुछ देर तक एक दूसरे के साथ द्वंद्व करते रहे।

“ये करना आपने कहाँ से जाना?” कमल ने पूछा।

“नहीं बताऊँगी,” माया ने हँसते हुए कहा।

“अरे! क्यों?”

“आप बुरा मान जाएँगे...”

“नहीं मानेंगे! जिस काम से हमको इतना मज़ा आया, उसके बारे में जान कर हम बुरा क्यों मानेंगे भला?”

“हम्म्म... वो भी ठीक है!” माया ने कहा, “एक्चुअली, हमको माँ ने बताया था।”

“व्हाट? आपका मतलब, हमारी माँ ने?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए कहा, “उन्होंने कहा कि बहू अगर असली सेक्स न कर पा रही हो, तो ऐसे भी एक दूसरे को प्लीज़ कर सकती हो,”

“यार ये तो गलत है!”

“वो क्यों?”

“माँ आपको सेक्स एजुकेशन दे रही हैं, लेकिन हमको तो कुछ नहीं बताईं हैं आज तक,”

“लड़कों को तो सब पता रहता है न!” माया ने मुस्कुराते हुए कहा, “गन्दी गन्दी मैग़ज़ीनें पढ़ के... गन्दी वाली फ़िल्में देख के...”

“लेकिन हमारे पास वैसा कुछ नहीं है! न तो मैगज़ीन और न ही फ़िल्में!” कमल ने कहा, “फिर कैसे जानूँ?”

“कोई बात नहीं! हम हैं न... हम आपको सिखा देंगे!”

उसकी बात पर कमल हँसने लगा और अपनी कुर्सी पर बैठ कर, उसने कोमलता से माया की नग्न कमर में बाहें डाल कर उसने माया को अपने आलिंगन में समेट लिया। दोनों ने एक दूसरे को कुछ देर चूमा, फिर कमल ने उसकी योनि के चीरे पर कोमलता से अपनी तर्जनी चलाते हुए कहा,

“आप नंगू नंगू बहुत सुन्दर लगती हैं,”

“अच्छा जी!”

“हाँ! मेरा तो मन होता है कि आप हमेशा ऐसी ही रहें...”

“ऐसी? नंगू नंगू?”

कमल ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और उसकी योनि के होंठों को चूमा।

“पूरी नंगू नंगू?” कमल के होंठों का अपनी योनि के होंठों पर स्पर्श पा कर माया को परिचित उत्तेजना महसूस होने लगी। फिर भी उसने अपनी आवाज़ को यथासंभव सम्हाले रखा।

कमल ने फिर से ‘हाँ’ में सर हिलाया, और मुस्कुरा कर उसने माया की योनि को तसल्ली से चूमा।

“ऐसे कैसे हो पाएगा जानू?” माया ने बिखरती हुई असंयत आवाज़ में कहा, “मम्मी पापा भी तो हैं न घर में,”

“तो क्या? आपने ही तो कहा... मम्मी पापा हैं वो!”

“हा हा हा! वो भी ठीक है!” माया ने हँसते हुए कहा, “ओके! ठीक है तो... अगर आप यही चाहते हैं, और अगर आप हमारे साथ हैं, तो हमको भी कोई प्रॉब्लम नहीं!”

“सच में?” कमल को विश्वास ही नहीं हुआ।

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए कहा, “आपसे हम कभी झूठ नहीं कह सकते!”

“हम आपको कुछ भी करने की जबरदस्ती नहीं करेंगे,”

“आई नो जानू! ... लेकिन अगर आपका मन है, तो हम सब कुछ करेंगे!” माया ने उसके बालों में अपनी उँगलियाँ उलझाते हुए कहा, “हम वो हर काम करेंगे, जिससे आपको अच्छा लगे... आपको सुख मिले!”

कमल ने अपनी जीभ को माया की योनि के भीतर फिराया।

“यू आर टू गुड,”

“आई नो!”

कमल मुस्कुराया, “आपका स्वाद,” उसने स्पष्ट किया।

माया इस बात पर शरमा कर दोहरी हो गई।

“गंदे,”

“ये नन्हा बदमाश इसमें कब जाएगा?”

“जानू?”

“हम्म?”

“आप ऐसी बातें मत पूछा करिए... हम आपको रोक नहीं पाएँगे,”

“मतलब?”

“हम तो चाहते हैं कि हम हमारी शादी के दिन ही ‘एक’ हों... लेकिन अगर आपकी इच्छा है तो...”

“तो?”

“हम आपको मना नहीं कर पाएँगे,”

“उसकी ज़रुरत नहीं पड़ेगी! हमको भी आपकी हर इच्छा पूरी करनी है!” कमल ने कहा और उसकी योनि पर एक ज़ोरदार चुम्बन लिया।

माया मुस्कुराई, “आई लव यू,”

“आई लव यू मोर...”

“इम्पॉसिबल!”

“सच में?”

माया ने ‘न’ में सर हिलाया और कमल के होंठों को फिर से चूमने लगी।

“साथ में सो जाएँ आज?” कमल ने उसको चूमते हुए कहा।

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

**
 

parkas

Well-Known Member
33,398
71,017
303
अपडेट 40


राणा परिवार ने इस बार का उत्सव अपनी होने वाली बहू माया के संग बड़े आनंद से मनाया।

इस बार यह कोई साधारण उत्सव नहीं था! यह एक ऐसा अवसर था जब राणा खानदान के लगभग सभी सदस्य अपनी होने वाली बहू को देखने और परखने के लिए इकठ्ठा हुए थे। सपरिवार हवन, पूजा-पाठ, और भोज के आयोजन के साथ यह त्यौहार संपन्न हुआ।

सभी ने यह बात नोटिस करी कि इन सभी कार्यों में माया न केवल शामिल ही थी, बल्कि उसने अपनी मेहनत और लगन से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। सच तो यह था कि राणा खानदान वहाँ आया ही इसलिए था कि वो माया को परख सकें। हर कोई यह जानने को उत्सुक था कि इस लड़की में ऐसा क्या था कि खानदान के ‘लाडले’ के लिए उसको चुना गया था।
कुछ ही लोग थे जो उसकी खूबियों को देखना चाहते थे... अधिकतर लोग उसकी कमियों को तलाशने की फिराक में थे।

लेकिन माया ने अपने व्यवहार और कौशल से सबको चकित कर दिया।

माया को ले कर राणा खानदान में तरह-तरह की बातें चल रही थीं।

सामने अभी तक किसी ने कुछ कहा नहीं था, लेकिन उसकी साँवली रंगत और नट समुदाय से होने की वजह से कई सदस्य उसे राणा परिवार की बहू के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। राणा परिवार एक संपन्न और परंपरावादी परिवार था, जिसका सामाजिक रुतबा ऊँचा था। उनके लिए बहू का चयन केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि उनके खानदान की प्रतिष्ठा का सवाल था। करेले पर नीम चढ़ा वाली बात ये भी थी कि उम्र में भी वो कमल से चार साल बड़ी थी। कई रिश्तेदारों को यह बात खटक रही थी।

‘ये भी कोई रिश्ता हुआ?’ यह बात सभी लोगों में हो रही थी।

कुछ लोग तो यह भी सोचने लग गए कि शायद कमल में ही कोई कमी होगी... वरना इतने समृद्ध परिवार का लड़का ऐसा ‘समझौता’ क्यों करेगा?

हालाँकि, ये सभी पूर्वाग्रह माया से मिलने से पहले की बातें थीं।

जब राणा खानदान के लोग उससे पहली बार मिले, तो उनके मन में उठ रहे सवाल धीरे-धीरे शांत होने लगे। माया ने अपनी सादगी और शुद्धता से सबको पहली नज़र में प्रभावित कर दिया था। हाँ, उसकी रंगत साँवली थी, और वो नट समुदाय से थी... लेकिन ये वो बातें थीं जिन पर उसका अपना कोई बस नहीं था। उसके व्यक्तित्व में एक अलग तरह का सौंदर्य था, जो बाहरी दिखावे से परे था। उसकी मुस्कान में एक अपनापन था, उसकी बातों में एक मृदुलता थी, और उसके व्यवहार में एक ऐसी शालीनता थी जो धीरे-धीरे सबके दिलों को जीत रही थी। राणा परिवार के बुजुर्गों ने देखा कि माया न तो अपनी साँवली रंगत को लेकर असहज थी, न ही अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर। उसमें आत्मविश्वास था, लेकिन घमंड नहीं।

उत्सव के दौरान माया ने अपनी गृह-कार्य दक्षता और कौशल का ऐसा प्रदर्शन किया कि राणा खानदान की महिलाएँ भी उसकी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाईं। सुबह से ही वो पूजा-पाठ की तैयारियों में लग गई थी... उसने अपने हाथों से हवन-कुंड को सजाया था। उसने साड़ी पहनी हुई थी और पल्लू से अपना सर ढंका हुआ था। बस सिन्दूर की अनुपस्थिति ही थी जो बता रही थी कि वो अभी तक ब्याहता नहीं हुई थी। जब पुजारी ने मंत्रोच्चारण शुरू किया, तो कमल के साथ बैठ कर माया ने जिस तरह बिना किसी हिचक के आहुति दी, उससे सभी प्रभावित हुए। उसकी हर हरकत में एक सहजता थी, मानो वो अभी से ही इस घर की बहू हो गई हो।

हवन और पूजा शाम की थी। उसके बाद रात्रि-भोज का बंदोबस्त था। इस समय भी माया की काबिलियत प्रदर्शित हो रही थी। रसोईघर में रसोईया थी, लेकिन आज के प्रयोजन के लिए माया ने खुद ही लगभग सारी रसोई बनाई थी। रसोईया ने बस उसकी सहायता करी थी। सरिता जी ने उसकी मदद करने की पेशकश करी ही, लेकिन माया ने उसके गर्भवती होने का हवाला दे कर उसको मना कर दिया। तड़क भड़क वाला भोजन नहीं था, लेकिन उसमें ऐसा अच्छा स्वाद था कि राणा खानदान की बुजुर्ग महिलाएँ भी हैरान रह गईं।

किशोर जी की एक बहन ने तो सरिता जी से कह ही दिया, “भाभी, तुम्हारी बहू तो जादूगरनी है... ऐसा स्वादिष्ट खाना कहाँ मिलता है अब?”

माया के व्यवहार में एक अधिकार भाव था। लेकिन यह अधिकार भाव अहंकार के कारण नहीं, बल्कि परिवार के लिए अपनेपन वाली भावना से आ रहा था। वो इस घर को अपना मान चुकी थी, और उसका व्यवहार वैसा ही था, जैसा इस खानदान की बहू का होना चाहिए।

राणा खानदान की बड़ी बुजुर्ग महिलाओं ने यह बात देखी।

उनकी अपनी बहुएँ इतनी मेहनत नहीं करती थीं, और माया की मेहनत वो अनदेखा न कर सकीं। सरिता जी की किस्मत को ले कर उनको जलन भी महसूस हुई और माया के व्यवहार के लिए प्रशंसा भी!

कमल की दादी माँ ने कह भी दिया, “ऐसी बहू तो हर घर की शान होती है... इसका दिल सोने का है और व्यवहार तो शहद जैसा मीठा!”

माया की सबसे बड़ी खासियत थी उसकी सहजता। वो किसी को प्रभावित करने की कोशिश नहीं कर रही थी, फिर भी उसने सबको प्रभावित कर दिया थी। सरिता जी एक समय बहुत थक गई थीं, तो वो उनके लिए एक गिलास नींबू का शर्बत बना कर ले आई, और बोली, “माँ, आप थोड़ा आराम कर लीजिए... मैं संभाल लूँगी।”

सरिता जी को यह सुनकर बहुत अच्छा लगा। बाकी स्त्रियाँ थोड़ा जल गईं - उनकी अपनी बहुएँ उन्हें इतने प्यार से “माँ जी” नहीं कहती थीं। कई तो अपनी सासों को "आंटी" कह कर बुलाती थीं। माया का यह व्यवहार एक आदर्श भारतीय बहू की छवि दर्शा रहा था। ऐसी बहू , जो अपने सास-ससुर की सेवा को प्राथमिकता देती है, जो घर के कामों को बोझ नहीं, बल्कि अपना कर्तव्य समझती है, और उनको कर के ख़ुश रहती है।

रात्रि भोज में अशोक जी सपरिवार आमंत्रित थे।

किशोर जी चाहते थे कि उनके रिश्तेदार माया के माता-पिता से मिलें और इस रिश्ते को औपचारिक रूप से स्वीकार करें। इस बार सभी रिश्तेदारों का व्यवहार बहुत सौहार्दपूर्ण था। माया के परिवार को देखकर उनकी उत्सुकता और बढ़ गई। अजय, जिसने कमल और माया के रिश्ते की नींव रखी थी, उसके बारे में भी सबने सुन रखा था। लिहाज़ा सभी उससे बड़े प्रेम से मिले। रात्रि भोज के समय तक सभी ने माया को ले कर अपने पूर्वाग्रह छोड़ दिए थे। अब तक वो सभी की चहेती बन गई थी।

भोजन के दौरान किशोर जी ने सभी को माया और कमल की शादी की तारीख बताई, जो बस चालीस दिनों बाद की ही निश्चित हुई थी। सभी ने इस बात पर खुशी जताई, कि जितना जल्दी हो, बहू को लिवा लाया जाय! लेकिन सबसे बड़ी खुशखबरी तब आई जब किशोर जी ने बताया कि सरिता जी फिर से गर्भवती हैं। सरिता जी राणा खानदान में समकालीन भाईयों में सबसे छोटे भाई की पत्नी थीं... मतलब सबसे छोटी बहू थीं! सरिता जी उनसे भी दस साल छोटी थीं - मतलब वो उम्र में राणा खानदान के अपने कई ‘बेटे’ ‘बेटियों’ के समकक्ष थीं। अपने नटखट और मधुर स्वभाव के कारण सभी की चहेती थीं। सभी चाहते थे कि किशोर जी के यहाँ एक से अधिक संतानें हों, इसलिए इस खबर से घर में खुशी की लहर दौड़ गई। सभी ने सरिता जी को बधाइयाँ दीं और उनका ध्यान रखने की सलाह दी। जब कमल उनके गर्भ में था, तब भी परिवार ने उनकी खूब देखभाल की थी, और इस बार भी ऐसा ही होने की उम्मीद थी।

राणा खानदान की बुज़ुर्ग महिलाओं ने माया से प्रेम-भरी चुहल करते हुए कहा, “बहू, शादी के बाद तुम भी जल्दी से जल्दी खुशखबरी सुना देना... दोनों बच्चे साथ-साथ बड़े होंगे! घर में खूब रौनक बनी रहेगी।”

इस बात पर माया क्या कहती? उसने शरमाते हुए सर झुका लिया, लेकिन उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी।

दिन के अंत में जब सभी मेहमान विदा ले रहे थे, तो राणा खानदान के सभी सदस्यों के मन में माया के प्रति सम्मान और स्नेह जाग चुका था। उसकी साँवली रंगत और नट समुदाय से होने की बात अब किसी को नहीं खटक रही थी। वो अपनी मेहनत, लगन, और गुणों के कारण राणा परिवार की शान बन चुकी थी।

माया वैसी ही थी जैसी बहू हर सास का सपना होती है।

**
Bahut hi shaandar update diya hai avsji bhai....
Nice and lovely update....
 

dhparikh

Well-Known Member
13,731
15,860
228
अपडेट 42


“एक्चुअली,” कमल ने थोड़ा हिचकिचाया, “हमारे मन में जो हलचल मची हुई है न, वो आपके इस क्यूट से पेट में हमारा बच्चा रखने के लिए ही मची हुई है!” उसने माया के पेट को सहलाते हुए बताया।

“जानू,” माया ने कमल को अपने आलिंगन में भरते हुए कहा, “बस कुछ ही दिनों की बात है न!”

“आई नो... लेकिन उस बात को सोच सोच कर हमको खूब इरेक्शन होता है... दिन में कई कई बार!” कमल ने कहा, “ऊपर से आप हैं भी इतनी अच्छी और इतनी सुन्दर...”

कहते हुए उसने माया के कन्धों से उसकी नाइटी के पट्टे हटा दिए और कपड़े को नीचे सरकाने में मदद करने लगा। माया ने अंदर कुछ नहीं पहना हुआ था, लिहाज़ा वो अगले ही पल उसके सामने नंगी हो गई।

“ओह गॉड!” वो माया के सौंदर्य का आँखों से आस्वादन करते हुए बोला, “कितनी सुन्दर...”

माया को शर्म बहुत आ रही थी, लेकिन वो चाहती थी कि कमल को अपने मन का आनंद मिले।

“कोई आईडिया है आपको कि आप कितनी सुन्दर हैं,”

कमल से रहा नहीं गया। अगले ही पल माया का एक चूचक कमल के मुँह में समां गया।

स्तनों के चूषण और चुम्बनों में कोई दो तीन ही मिनटों में माया और कमल दोनों ही अच्छी तरह उत्तेजित हो गए।

“कैसे न हो इसका ‘ऐसा’ हाल...” माया के चूचक से अलग होते हुए कमल ने अपने पाजामे की तरफ़ इशारा किया।

उसके उत्तेजित लिंग ने पाजामे में एक टेंट बना दिया था।

“मन पर थोड़ा कण्ट्रोल किया करिए न जानू!” माया की साँसें अभी भी उखड़ी हुई थी।

“बहुत किया... बहुत करता हूँ! लेकिन, कभी कभी नहीं हो पाता,”

माया से शादी पक्की होने के बाद कमल ने सभी ‘बुरी’ आदतें छोड़ दी थीं - हस्तमैथुन भी नहीं करता था वो अब! इस चक्कर में दो बार वो बिस्तर ख़राब कर चुका था।

“मैं कुछ कर दूँ?” माया ने कमल का पजामा नीचे सरकाते हुए कहा।

यह पहली बार था जब माया ने कमल के साथ इस तरह की पहल करी हो।

पजामा नीचे सरकते ही कमल का उत्तेजित लिंग उछल कर बाहर आ गया। माया पहले भी कमल के लिंग को महसूस कर चुकी थी और उसको पता था कि यह एक स्वस्थ लिंग है। लेकिन अभी उसको मूर्त रूप में देख कर उसको पक्का हो गया कि कमल का लिंग अच्छे आकार का, स्वस्थ और मज़बूत अंग है।

“क्या?” कमल ने पूछा।

“आपके इस नन्हे बदमाश को शांत...”

“ये ‘नन्हा’ है?” कमल ने अपनी निराशा दिखाई।

माया ने मुस्कुराते हुए, ‘न’ में सर हिलाते हुए कहा, “मेरे लिए बहुत बड़ा है...”

यह बात सही थी, और दोनों को इस बात का ज्ञान हो चुका था।

लेकिन माया के कथन पर कमल का दिल हिल गया और लिंग भी! उसके लिंग में होने वाली हलचल माया से छुपी नहीं थी। उसने हाथ बढ़ा कर उसके लिंग के गिर्द अपनी हथेली लपेट दी। माया की उँगलियों का स्पर्श पाते ही कमल को लगा कि कहीं वो स्खलित न हो जाए। बड़ी कोशिश कर के उसने अपने ऊपर नियंत्रण रखा और माया क्या करने वाली है, उसका इंतज़ार करने लगा।

कमल को लग रहा था कि माया अपने हाथ से उसको निवृत कर देगी। लेकिन उसको घोर आश्चर्य तब हुआ जब माया ने उसके सामने घुटनों के बल बैठ कर, उसके उत्तेजित लिंग को अपने मुँह में ले लिया।

“ओह्ह्ह्ह्ह!”

जो आनंद कमल को महसूस हुआ, उसको शब्दों में लिख पाना कठिन काम है। अपने लिंग पर किसी अन्य हाथ महसूस करना एक बात होती है, लेकिन किसी अन्य का मुँह महसूस करना बहुत ही अलग बात होती है। ख़ास कर के अपनी प्रियतमा का मुँह! माया के मुँह के भीतर जाते ही कमल को अपने लिंग के लगभग हर हिस्से से अनोखी सनसनी उठती हुई महसूस हुईं!

जाहिर सी बात है कि माया ‘मौखिक आनंद’ देने के मामले में अनाड़ी थी। लेकिन उससे उन दोनों के आनंद पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। माया की इच्छा शुद्ध थी। वो चाहती थी कि कमल को सुख मिले और उसके अंदर सेक्स को ले कर जो तनाव बन रहा है, उससे उसको निजाद मिले! कमल के सुख में उसका सुख निहित था। और कमल को अलौकिक सुख मिल रहा था।

माया ने उसके लिंग को पकड़ कर अपना मुँह अंदर - बाहर चलाना शुरू कर दिया। उसका प्रभाव भी कमल पर तत्क्षण पड़ा। जो मज़ा उसको आ रहा था, वो स्वर्गिक था। कुछ ही क्षणों में कमल की उत्तेजना तेजी से बढ़ने लगी, और वो माया द्वारा दिए जा रहे मुख-मैथुन के अनंत सागर में खो गया। उसकी आँखें माया के मुँह में जाते ही बंद हो गईं थीं। उसको अपने लिंग के हर पोर पर मीठी, और कामुक गुदगुदी महसूस हो रही थी! अद्भुत आनंद! वो कामुक आनंद से कराहने लगा! उसकी साँसें तेज हो गईं। माया ने ये सब देखा। उसके होठों पर और आँखों में मुस्कान आ गई! वो समझ रही थी कि कमल को आनंद मिल रहा है। उसका प्रयास सार्थक हो गया!

मुश्किल से मिनट भर ही हुआ होगा कि कमल को मीठे ओर्गास्म ने आ घेरा! वीर्य की एक लम्बी, मोटी धार से माया का मुँह भर गया। उसके बाद ताबड़तोड़ तीन चार और छोटे गोले उसके मुँह में जा गिरे। लेकिन माया कमल के आनंद में विघ्न नहीं डालना चाहती थी। इसलिए और कोई चारा नहीं था। उसने कमल का वीर्य पी लिया। लेकिन अभी भी उसने कमल का लिंग चूसना बंद नहीं किया और तब तक चूसा जब तक उसमें से वीर्य आना बंद नहीं हो गया।

फिर माया उठ कर कमल के सामने आ गई। कमल की आँखें अभी भी बंद थीं... ओर्गास्म के बाद भी वो आसमान में तैर रहा था।

माया ने कमल की टेबल पर रखे पानी के गिलास से पानी पीया और फिर उसने पूछा, “कैसा लगा जानू?”

“कैसा लगा? बाप रे! ... आपने स्वर्ग की सैर करा दी मुझे, मेरी जान! ... बहुत मज़ा आया!”

वो मुस्कुराई।

कमल ने माया के मुँह पर चूम लिया। दोनों के होंठ कुछ देर तक एक दूसरे के साथ द्वंद्व करते रहे।

“ये करना आपने कहाँ से जाना?” कमल ने पूछा।

“नहीं बताऊँगी,” माया ने हँसते हुए कहा।

“अरे! क्यों?”

“आप बुरा मान जाएँगे...”

“नहीं मानेंगे! जिस काम से हमको इतना मज़ा आया, उसके बारे में जान कर हम बुरा क्यों मानेंगे भला?”

“हम्म्म... वो भी ठीक है!” माया ने कहा, “एक्चुअली, हमको माँ ने बताया था।”

“व्हाट? आपका मतलब, हमारी माँ ने?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए कहा, “उन्होंने कहा कि बहू अगर असली सेक्स न कर पा रही हो, तो ऐसे भी एक दूसरे को प्लीज़ कर सकती हो,”

“यार ये तो गलत है!”

“वो क्यों?”

“माँ आपको सेक्स एजुकेशन दे रही हैं, लेकिन हमको तो कुछ नहीं बताईं हैं आज तक,”

“लड़कों को तो सब पता रहता है न!” माया ने मुस्कुराते हुए कहा, “गन्दी गन्दी मैग़ज़ीनें पढ़ के... गन्दी वाली फ़िल्में देख के...”

“लेकिन हमारे पास वैसा कुछ नहीं है! न तो मैगज़ीन और न ही फ़िल्में!” कमल ने कहा, “फिर कैसे जानूँ?”

“कोई बात नहीं! हम हैं न... हम आपको सिखा देंगे!”

उसकी बात पर कमल हँसने लगा और अपनी कुर्सी पर बैठ कर, उसने कोमलता से माया की नग्न कमर में बाहें डाल कर उसने माया को अपने आलिंगन में समेट लिया। दोनों ने एक दूसरे को कुछ देर चूमा, फिर कमल ने उसकी योनि के चीरे पर कोमलता से अपनी तर्जनी चलाते हुए कहा,

“आप नंगू नंगू बहुत सुन्दर लगती हैं,”

“अच्छा जी!”

“हाँ! मेरा तो मन होता है कि आप हमेशा ऐसी ही रहें...”

“ऐसी? नंगू नंगू?”

कमल ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और उसकी योनि के होंठों को चूमा।

“पूरी नंगू नंगू?” कमल के होंठों का अपनी योनि के होंठों पर स्पर्श पा कर माया को परिचित उत्तेजना महसूस होने लगी। फिर भी उसने अपनी आवाज़ को यथासंभव सम्हाले रखा।

कमल ने फिर से ‘हाँ’ में सर हिलाया, और मुस्कुरा कर उसने माया की योनि को तसल्ली से चूमा।

“ऐसे कैसे हो पाएगा जानू?” माया ने बिखरती हुई असंयत आवाज़ में कहा, “मम्मी पापा भी तो हैं न घर में,”

“तो क्या? आपने ही तो कहा... मम्मी पापा हैं वो!”

“हा हा हा! वो भी ठीक है!” माया ने हँसते हुए कहा, “ओके! ठीक है तो... अगर आप यही चाहते हैं, और अगर आप हमारे साथ हैं, तो हमको भी कोई प्रॉब्लम नहीं!”

“सच में?” कमल को विश्वास ही नहीं हुआ।

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए कहा, “आपसे हम कभी झूठ नहीं कह सकते!”

“हम आपको कुछ भी करने की जबरदस्ती नहीं करेंगे,”

“आई नो जानू! ... लेकिन अगर आपका मन है, तो हम सब कुछ करेंगे!” माया ने उसके बालों में अपनी उँगलियाँ उलझाते हुए कहा, “हम वो हर काम करेंगे, जिससे आपको अच्छा लगे... आपको सुख मिले!”

कमल ने अपनी जीभ को माया की योनि के भीतर फिराया।

“यू आर टू गुड,”

“आई नो!”

कमल मुस्कुराया, “आपका स्वाद,” उसने स्पष्ट किया।

माया इस बात पर शरमा कर दोहरी हो गई।

“गंदे,”

“ये नन्हा बदमाश इसमें कब जाएगा?”

“जानू?”

“हम्म?”

“आप ऐसी बातें मत पूछा करिए... हम आपको रोक नहीं पाएँगे,”

“मतलब?”

“हम तो चाहते हैं कि हम हमारी शादी के दिन ही ‘एक’ हों... लेकिन अगर आपकी इच्छा है तो...”

“तो?”

“हम आपको मना नहीं कर पाएँगे,”

“उसकी ज़रुरत नहीं पड़ेगी! हमको भी आपकी हर इच्छा पूरी करनी है!” कमल ने कहा और उसकी योनि पर एक ज़ोरदार चुम्बन लिया।

माया मुस्कुराई, “आई लव यू,”

“आई लव यू मोर...”

“इम्पॉसिबल!”

“सच में?”

माया ने ‘न’ में सर हिलाया और कमल के होंठों को फिर से चूमने लगी।

“साथ में सो जाएँ आज?” कमल ने उसको चूमते हुए कहा।

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

**
Nice update....
 
  • Like
Reactions: avsji

parkas

Well-Known Member
33,398
71,017
303
अपडेट 41


आज रात कमल को नींद नहीं आ रही थी।

कुछ देर वो सोने की कोशिश करता रहा, लेकिन फिर हार मान कर उठ गया, और आज की घटनाओं के बारे में सोचने लगा।

आज का दिन बड़ा बेहतरीन बीता। घर भर में हवन के बाद उठने वाली सुन्दर सी महक भरी हुई थी। हल्की सी ठंडक थी, लेकिन उस सुगंध के कारण ऐसा लग रहा था कि जैसे वातावरण थोड़ा गर्म है। उस वातावरण में उसके मन में अच्छे अच्छे विचार आ रहे थे। आज के शुभ अवसर पर उसके निकट के सम्बन्धियों ने भी माया को ले कर अपनी सहमति जता दी थी, और इस कारण कमल को बहुत संतोष महसूस हो रहा था। यह ठीक था कि उसके माँ बाप ने उसकी और माया की शादी तय कर दी थी, लेकिन उनके भविष्य के लिए यह आवश्यक था कि उसका पूरा खानदान भी माया को स्वीकारे और उसको पसंद करे।

वो दिन भर बहुत घबराया - सभी की प्रश्न करती हुई निगाहें दिन भर माया पर ही केंद्रित थीं। लेकिन वो ऐसी भोली है कि इन सब बातों से बेखबर, बस सभी के सत्कार में लगी हुई थी। माया भोली है, लेकिन सरिता जी को समझ में आ रहा था सब, और वो अंदर ही अंदर मुस्कुरा रही थीं। ऐसी भोली, गुणी और सुन्दर लड़की को भला कोई कैसे नहीं पसंद करेगा?

कुछ देर तक वो यूँ ही जागा हुआ सोने की असफ़ल कोशिश करता रहा। लेकिन फिर उसने सोचा कि नींद नहीं आ रही है तो क्यों न थोड़ा पढ़ लिया जाए! वैसे भी सभी लोग सो ही रहे होंगे।

एक समय था जब वो नींद न आने पर वीडियो गेम खेलता था, या टीवी देखता था, या फिर नॉवेल या उपन्यास पढ़ता था। कभी कभी सस्ती अश्लील पुस्तकें पढ़ते हुए हस्त-मैथुन भी करता था। लेकिन अब ये सभी बेकार की आदतें पीछे छूट गई थीं। दिन के समय भी अब अपने परिवार के संग क्वालिटी टाइम बीतता था, जिसमें आध्यात्मिक बातें, उत्तम भोजन, और हँसी मज़ाक होता था। और यह सब कुछ माया के कारण हुआ था। माया का नाम मन में आते ही कमल के होंठों पर मुस्कान आ गई। दिन में शायद ही कोई ऐसा घण्टा होता हो, जिसमें वो माया को याद न करे! पिछले एक सप्ताह में ही वो कैसी इसी घर की हो गई थी! उसको घर का पूरा सिस्टम समझ में आ गया था। माँ और पिता जी दोनों कैसे माया पर जान छिड़कने लगे थे। कमल की भी वख़त अब उनके आँखों में बढ़ गई थी। सब अच्छा हो रहा था।

लेकिन परसों वो वापस अपने ‘मायके’ चली जाएगी और यह घर उसके बिना कैसा सूना सूना हो जाएगा। यह विचार आने पर उसका दिल थोड़ा बैठ गया। वो और माया भी इन दिनों बहुत करीब आ गए थे। एक दूसरे की पसंद - नापसंद के बारे में बहुत कुछ समझ में आ गया था। कमल की समीपता के कारण माया का अपने ‘बड़े’ होने वाला भाव भी कम हो गया था, जो अजय की उपस्थिति में स्वाभाविक रूप से सामने आ जाता था। उसके साथ अब वो थोड़ा मस्ती भी कर लेती थी। सरिता जी वैसे भी इसी प्रयास में रहती थीं कि माया इस घर की लाड़ली बन कर रहे और वो और कमल दोनों एक दूसरे के संग पूरी तरह सहज रहें।

अभी उस रात ही माँ ने उन दोनों को साथ में स्तनपान कराया था। फिलहाल तो उनको दूध नहीं उतर रहा था, लेकिन फिर भी भविष्य में होने वाली मातृत्व की प्रत्याशा में ये तैयारी थी। कमल भी इस बात को ले कर उत्साहित था - वो जानता था कि अजय और माया दोनों को उसकी होने वाली सासू माँ दैनिक स्तनपान कराती हैं। वो भी यह सुख चाहता था... और यह शीघ्र ही उसके आने वाले छोटे भाई या बहन के कारण संभव होने वाला था। वो बात सोच कर उसके होंठों पर मुस्कान आ गई। मन और भी अच्छा हो गया।

गणित की पुस्तक निकाल कर वो पढ़ने लगा और प्रश्न हल करने लगा। कुछ हो समय में उसने पाया कि अपेक्षाकृत कठिन प्रश्न भी अब वो हल कर पा रहा था। पहले तो ऐसे प्रश्न समझ ही नहीं आते थे उसको! उसको अब और भी रूचि आने लगी, और वो बिना रुके पढ़ता रहा और और भी सवाल लगाता रहा। कुछ देर बाद जब उसकी तन्द्रा भंग हुई, और उसने वापस घड़ी देखी तो पाया कि वो पिछले सवा घण्टे से पढ़ रहा था! उसको खुद ही आश्चर्य हो आया! इतनी एकाग्रता उसके अंदर पहले कभी न आई। माया ने उसको अपना जीवन साधने का उद्देश्य दे दिया था, और अजय और रूचि के साथ ने उस उद्देश्य को सफल बनाने का साधन!

पहले वो अपने पिता के काम को सम्हालने से अधिक कुछ सोचता ही नहीं था, लेकिन पिछले कुछ समय से उसने सोचना शुरू कर दिया था कि वो काम-काज के साथ साथ आगे भी पढ़ेगा। कम से कम ग्रेजुएट तो होगा। अच्छा लगेगा खुद को और माया को भी। माया से उसने ये बात कही थी और वो भी उसके इस निर्णय से बहुत खुश थी। उसने माया से भी आगे पढ़ने को कहा, लेकिन माया का कहना था कि उसका मन था कि वो एक कुशल गृहणी बने, ये घर सम्हाले, और उसकी संतानों की माँ बने। कमल को इस बात से कोई निराशा नहीं हुई... बल्कि माया पर उसको घमंड हुआ कि वो जानती थी कि उसको अपने जीवन से क्या चाहिए।

वो अंगड़ाई ले कर कुर्सी से उठ ही रहा था कि दरवाज़े पर उसको आहट महसूस हुई। वहाँ माया खड़ी थी और उसको बहुत प्यार से देख कर मुस्कुरा रही थी। उसके हाथों में एक ट्रे था।

“आप?” वो उसको देख कर चौंका, “आप क्यों जाग गईं?”

“रात में हम आपको हमेशा चेक करने आते हैं,” माया ने मुस्कुराते हुए शरारत से कहा, “आज आपको पढ़ते देखा, तो आपके लिए चाय बना लाए।”

“अच्छा... आप रोज़ आती हैं? लेकिन हमको पता नहीं चलता।”

“कैसे पता चलेगा? आप हमेशा सो रहे होते हैं न,” माया ने उसको कप देते हुए कहा।

कमल ने देखा - माया ने क्रीम कलर की एक झीनी सी नाईटी पहनी हुई थी, और उसके अंदर कुछ नहीं। उसके साँवले शरीर पर वो बहुत फ़ब रही थी। जाहिर सी बात है कि वो कुछ समय पहले सो रही थी, और वाक़ई उसको ‘चेक’ करने आई थी।

“क्या चेक करती हैं आप?” कमल ने एक चुस्की लेते हुए कहा, “म्मम! बढ़िया चाय!”

“आपको अच्छी लगी? अदरक और लौंग डाला है... थोड़ी देर में आपको नींद आ जाएगी!”

“और मीठे के लिए?”

“चीनी... और क्या?”

“वो तो स्वाद के लिए है... मीठा करने के लिए आप इसमें से एक सिप ले लीजिए, बस, मीठी हो जाएगी ये!”

माया ने मुस्कुराते हुए कमल के कप को अपने होंठों से चूम लिया।

कमल ने तुरंत ही माया की चूमी हुई जगह पर कप से चाय पीनी शुरू कर दी, “हाँ! अब हुई मीठी ये चाय!”

“हा हा... आप और आपकी बातें,”

वो मुस्कुराया, “क्या चेक करती हैं... आपने बताया नहीं?”

“यही कि आप ठीक से सो रहे हैं या नहीं... कोई शरारत तो नहीं कर रहे हैं...” माया ने शोख़ी से कहा।

“सोते समय कोई क्या शरारत करेगा भला,” कमल ने मासूमियत से कहा, “हाँ, आप साथ में हों, तो अलग बात है!”

उसकी इस बात पर माया लजा गई, लेकिन फिर भी बोली,

“बस, कुछ ही दिनों बात और है... फिर तो हम आपके ही साथ होंगे!”

“आप हमको सारी शरारतें करने देंगी?”

“नहीं तो हमारे होने का क्या फ़ायदा है आपको?”

“बहुत सारे फ़ायदे हैं... लेकिन वो हम आपको अभी नहीं बताएँगे!”

माया ने कुछ नहीं कहा... बस, मुस्कुरा कर रह गई।

आगे की बात का सूत्र कमल ने ही थामा, “अच्छा एक बात बताइए हमें... हनीमून के लिए आप कहाँ जाना चाहती हैं?”

इस बात पर माया के चेहरे के भाव थोड़े बदल गए।

“क्या हुआ?”

“पहले ये बताइए कि यह ख़याल आपके मन में आया क्यों?”

“अरे सभी लोग जाते हैं हनीमून पर... और माँ ने भी मुझसे बोला है कि बहू से पूछ ले!”

“जानू... एक बात कहें आपसे?” माया ने बड़ी कोमलता से कहा।

“अरे, इतना फॉर्मल क्यूँ बनना है? कहिए न!”

“हमको हमारे घर में हनीमून मनाना है,”

“मतलब...”

“मतलब यहाँ! इस घर में... आपके और हमारे,” माया ने अपनी और कमल की ओर इशारा कर के कहा, “... हमारे घर में।”

“हाँ... लेकिन...”

“कोई लेकिन वेकिन नहीं... हमको यहीं रहना है। आपके साथ... मम्मी पापा के साथ... हमको हनीमून जैसी फ़ालतू की बातों पर बिना वज़ह पैसे नहीं वेस्ट करने हैं, और न ही आपका टाइम।”

कमल को विश्वास ही नहीं हुआ कि माया ऐसा कुछ कह देगी।

“लेकिन...”

“जानू... वैसे भी घर से बाहर हमको कम्फर्टेबल नहीं लगेगा।”

“हम्म्म... विंटर वेकेशंस भी तो होंगे न,”

“ठीक है, जब विंटर वेकेशंस होंगे,” माया कह रही थी, “तब चले चलेंगे... अगर... (माया ने ‘अगर’ पर ज़ोर दिया) अगर मम्मी पापा भी कहीं चल रहे हों!”

“मम्मी पापा के साथ जाना है आपको हनीमून पर?”

“जानू... वो दोनों हमेशा काम करते रहते हैं! उनको भी तो छुट्टी चाहिए न!”

“हम्म्म... ठीक है, हम मम्मी पापा से बात करेंगे,” कमल ने कहा और फिर आगे बोला, “आप बहुत अच्छी हैं मेरी जान!”

“वो हमको पता है,” माया ने बड़ी अदा से कहा, “यू आर लकी!”

“वो तो हम हैं!”

“तो मेरे जानू जी, हम घर पर ही हनीमून मनाएँगे! आप हमसे जैसा मन करे, जब मन करे, शरारत कीजिएगा...”

“अच्छा जी?”

“हाँ, लेकिन उसके बाद हम आपकी क्लास लेंगे कि आपने क्या पढ़ा!”

उसकी बात पर कमल को हँसी आ गई।

“हनी, आप जब ऐसी बातें करती हैं न, तो हमारे मन में कुछ कुछ होने लगता है!”

“अच्छा जी?”

“हाँ!” वो मुस्कुराते हुए आगे बोला, “आज जब दादी जी, चाचियों, और बुआ जी ने आपको जल्दी से ख़ुशख़बरी देने को कहा न, तब से मन में हलचल सी मची हुई है,”

“क्यों?” माया ने बड़ी कोमलता से उसकी बाँह को सहलाते हुए पूछा, “क्या हो गया जानू?”

कमल ने कुछ नहीं कहा - बस एक टक माया को देखता रहा।

माया ने सोचा कि शायद वो इतनी जल्दी पापा बनने की सोच कर घबरा रहा हो। इसलिए वो बोली,

“आई नो कि इतनी कम उम्र में आपके लिए पापा बनना थोड़ा जल्दी रहेगा, लेकिन अगर हमको अगले साल बच्चा होता है, हम तो तब तक चौबीस की हो जाएँगे न!” माया ने उसको दिलासा देते हुए आगे कहा, “और आप बच्चे की देखभाल की चिंता न कीजिए... आपकी पढ़ाई लिखाई, या काम में हम कोई डिस्टर्बेंस नहीं होने देंगे!”

“नहीं वो बात नहीं है,” कमल ने कहा, “माँ ने तो कहा ही है कि अगर हमको बच्चा हुआ, तो उसकी देखभाल मेरे होने वाले भाई या बहन के साथ ही हो जाएगा!”

कमल मुस्कुराया, “... और वैसे भी, आई थिंक आई विल लव टू बी अ फादर!”

माया भी मुस्कुराई, “सच में?”

कमल ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “आई थिंक इट विल बी कूल! मेरे तो कई टीचर्स भी माँ बाप नहीं बन पाए हैं... लेकिन मैं बनूँगा! हैं न बढ़िया बात!”

“हा हा हा...” माया उसकी इस भोली बात पर हँसने लगी।

“सच में मेरी जान... मुझे लगता है कि आप जैसी लड़की के लिए इससे बेहतर कोई और गिफ़्ट नहीं हो सकता। आपने मेरा प्यार एक्सेप्ट किया, हमको अपने दिल में जगह दी... आई ऍम श्योर कि हमारा बच्चा भी आपके जैसा ही भोला और सच्चा होगा!”

“आप भी तो इतने भोलू हैं...” माया ने बड़े प्यार से कमल का गाल सहलाया, “लेकिन फिर आपको हलचल क्यों महसूस हो रही है?”
Bahut hi badhiya update diya hai avsji bhai....
Nice and beautiful update....
 

kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
10,265
38,998
259
😂 😂 😂 😂 👏



प्रेम को आध्यात्मिक / आत्मिक स्तर पर ले जा कर सोचने और देखने की एक बुरी लत है देश-वासियों को।

कुछ अजीब से pre-conceived notions बना रखे हैं हमने कुछ बातों के लिए - मसलन, नेता सफ़ेद धोती-कुर्ता पहने। नहीं तो उसका आचरण शुद्ध नहीं।
हमारे पास अनगिनत उदाहरण हैं कि कपड़ों का चरित्र से कोई लेना देना नहीं।
वैसे ही प्रेम को ले कर भी pre-conceived notions हैं। एक तो यह कि प्रेम आत्मिक हो... आध्यात्मिक हो, नहीं तो वो प्रेम नहीं!
दूसरा यह कि किशोरवय लोगों का प्रेम, प्रेम नहीं, दैहिक आकर्षण मात्र है।

अब इन बातों के लिए क्या ही कहा जाए!?
अज्ञान सत्य है
जबकि ज्ञान मिथ्या

बाकी सब भ्रम

इसलिए सत्य और शाश्वत प्रेम प्रकृति/अज्ञान (शरीर) से ही सम्भव है बिना शरीर तो सब भ्रम या मिथ्या है।

बालक का जन्म देने वाली मॉं से लगाव इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है और पति-पत्नी का सम्बन्ध भी शरीर से ही स्थायित्व पाता है
 

Ajju Landwalia

Well-Known Member
4,561
17,345
159
अपडेट 42


“एक्चुअली,” कमल ने थोड़ा हिचकिचाया, “हमारे मन में जो हलचल मची हुई है न, वो आपके इस क्यूट से पेट में हमारा बच्चा रखने के लिए ही मची हुई है!” उसने माया के पेट को सहलाते हुए बताया।

“जानू,” माया ने कमल को अपने आलिंगन में भरते हुए कहा, “बस कुछ ही दिनों की बात है न!”

“आई नो... लेकिन उस बात को सोच सोच कर हमको खूब इरेक्शन होता है... दिन में कई कई बार!” कमल ने कहा, “ऊपर से आप हैं भी इतनी अच्छी और इतनी सुन्दर...”

कहते हुए उसने माया के कन्धों से उसकी नाइटी के पट्टे हटा दिए और कपड़े को नीचे सरकाने में मदद करने लगा। माया ने अंदर कुछ नहीं पहना हुआ था, लिहाज़ा वो अगले ही पल उसके सामने नंगी हो गई।

“ओह गॉड!” वो माया के सौंदर्य का आँखों से आस्वादन करते हुए बोला, “कितनी सुन्दर...”

माया को शर्म बहुत आ रही थी, लेकिन वो चाहती थी कि कमल को अपने मन का आनंद मिले।

“कोई आईडिया है आपको कि आप कितनी सुन्दर हैं,”

कमल से रहा नहीं गया। अगले ही पल माया का एक चूचक कमल के मुँह में समां गया।

स्तनों के चूषण और चुम्बनों में कोई दो तीन ही मिनटों में माया और कमल दोनों ही अच्छी तरह उत्तेजित हो गए।

“कैसे न हो इसका ‘ऐसा’ हाल...” माया के चूचक से अलग होते हुए कमल ने अपने पाजामे की तरफ़ इशारा किया।

उसके उत्तेजित लिंग ने पाजामे में एक टेंट बना दिया था।

“मन पर थोड़ा कण्ट्रोल किया करिए न जानू!” माया की साँसें अभी भी उखड़ी हुई थी।

“बहुत किया... बहुत करता हूँ! लेकिन, कभी कभी नहीं हो पाता,”

माया से शादी पक्की होने के बाद कमल ने सभी ‘बुरी’ आदतें छोड़ दी थीं - हस्तमैथुन भी नहीं करता था वो अब! इस चक्कर में दो बार वो बिस्तर ख़राब कर चुका था।

“मैं कुछ कर दूँ?” माया ने कमल का पजामा नीचे सरकाते हुए कहा।

यह पहली बार था जब माया ने कमल के साथ इस तरह की पहल करी हो।

पजामा नीचे सरकते ही कमल का उत्तेजित लिंग उछल कर बाहर आ गया। माया पहले भी कमल के लिंग को महसूस कर चुकी थी और उसको पता था कि यह एक स्वस्थ लिंग है। लेकिन अभी उसको मूर्त रूप में देख कर उसको पक्का हो गया कि कमल का लिंग अच्छे आकार का, स्वस्थ और मज़बूत अंग है।

“क्या?” कमल ने पूछा।

“आपके इस नन्हे बदमाश को शांत...”

“ये ‘नन्हा’ है?” कमल ने अपनी निराशा दिखाई।

माया ने मुस्कुराते हुए, ‘न’ में सर हिलाते हुए कहा, “मेरे लिए बहुत बड़ा है...”

यह बात सही थी, और दोनों को इस बात का ज्ञान हो चुका था।

लेकिन माया के कथन पर कमल का दिल हिल गया और लिंग भी! उसके लिंग में होने वाली हलचल माया से छुपी नहीं थी। उसने हाथ बढ़ा कर उसके लिंग के गिर्द अपनी हथेली लपेट दी। माया की उँगलियों का स्पर्श पाते ही कमल को लगा कि कहीं वो स्खलित न हो जाए। बड़ी कोशिश कर के उसने अपने ऊपर नियंत्रण रखा और माया क्या करने वाली है, उसका इंतज़ार करने लगा।

कमल को लग रहा था कि माया अपने हाथ से उसको निवृत कर देगी। लेकिन उसको घोर आश्चर्य तब हुआ जब माया ने उसके सामने घुटनों के बल बैठ कर, उसके उत्तेजित लिंग को अपने मुँह में ले लिया।

“ओह्ह्ह्ह्ह!”

जो आनंद कमल को महसूस हुआ, उसको शब्दों में लिख पाना कठिन काम है। अपने लिंग पर किसी अन्य हाथ महसूस करना एक बात होती है, लेकिन किसी अन्य का मुँह महसूस करना बहुत ही अलग बात होती है। ख़ास कर के अपनी प्रियतमा का मुँह! माया के मुँह के भीतर जाते ही कमल को अपने लिंग के लगभग हर हिस्से से अनोखी सनसनी उठती हुई महसूस हुईं!

जाहिर सी बात है कि माया ‘मौखिक आनंद’ देने के मामले में अनाड़ी थी। लेकिन उससे उन दोनों के आनंद पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। माया की इच्छा शुद्ध थी। वो चाहती थी कि कमल को सुख मिले और उसके अंदर सेक्स को ले कर जो तनाव बन रहा है, उससे उसको निजाद मिले! कमल के सुख में उसका सुख निहित था। और कमल को अलौकिक सुख मिल रहा था।

माया ने उसके लिंग को पकड़ कर अपना मुँह अंदर - बाहर चलाना शुरू कर दिया। उसका प्रभाव भी कमल पर तत्क्षण पड़ा। जो मज़ा उसको आ रहा था, वो स्वर्गिक था। कुछ ही क्षणों में कमल की उत्तेजना तेजी से बढ़ने लगी, और वो माया द्वारा दिए जा रहे मुख-मैथुन के अनंत सागर में खो गया। उसकी आँखें माया के मुँह में जाते ही बंद हो गईं थीं। उसको अपने लिंग के हर पोर पर मीठी, और कामुक गुदगुदी महसूस हो रही थी! अद्भुत आनंद! वो कामुक आनंद से कराहने लगा! उसकी साँसें तेज हो गईं। माया ने ये सब देखा। उसके होठों पर और आँखों में मुस्कान आ गई! वो समझ रही थी कि कमल को आनंद मिल रहा है। उसका प्रयास सार्थक हो गया!

मुश्किल से मिनट भर ही हुआ होगा कि कमल को मीठे ओर्गास्म ने आ घेरा! वीर्य की एक लम्बी, मोटी धार से माया का मुँह भर गया। उसके बाद ताबड़तोड़ तीन चार और छोटे गोले उसके मुँह में जा गिरे। लेकिन माया कमल के आनंद में विघ्न नहीं डालना चाहती थी। इसलिए और कोई चारा नहीं था। उसने कमल का वीर्य पी लिया। लेकिन अभी भी उसने कमल का लिंग चूसना बंद नहीं किया और तब तक चूसा जब तक उसमें से वीर्य आना बंद नहीं हो गया।

फिर माया उठ कर कमल के सामने आ गई। कमल की आँखें अभी भी बंद थीं... ओर्गास्म के बाद भी वो आसमान में तैर रहा था।

माया ने कमल की टेबल पर रखे पानी के गिलास से पानी पीया और फिर उसने पूछा, “कैसा लगा जानू?”

“कैसा लगा? बाप रे! ... आपने स्वर्ग की सैर करा दी मुझे, मेरी जान! ... बहुत मज़ा आया!”

वो मुस्कुराई।

कमल ने माया के मुँह पर चूम लिया। दोनों के होंठ कुछ देर तक एक दूसरे के साथ द्वंद्व करते रहे।

“ये करना आपने कहाँ से जाना?” कमल ने पूछा।

“नहीं बताऊँगी,” माया ने हँसते हुए कहा।

“अरे! क्यों?”

“आप बुरा मान जाएँगे...”

“नहीं मानेंगे! जिस काम से हमको इतना मज़ा आया, उसके बारे में जान कर हम बुरा क्यों मानेंगे भला?”

“हम्म्म... वो भी ठीक है!” माया ने कहा, “एक्चुअली, हमको माँ ने बताया था।”

“व्हाट? आपका मतलब, हमारी माँ ने?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए कहा, “उन्होंने कहा कि बहू अगर असली सेक्स न कर पा रही हो, तो ऐसे भी एक दूसरे को प्लीज़ कर सकती हो,”

“यार ये तो गलत है!”

“वो क्यों?”

“माँ आपको सेक्स एजुकेशन दे रही हैं, लेकिन हमको तो कुछ नहीं बताईं हैं आज तक,”

“लड़कों को तो सब पता रहता है न!” माया ने मुस्कुराते हुए कहा, “गन्दी गन्दी मैग़ज़ीनें पढ़ के... गन्दी वाली फ़िल्में देख के...”

“लेकिन हमारे पास वैसा कुछ नहीं है! न तो मैगज़ीन और न ही फ़िल्में!” कमल ने कहा, “फिर कैसे जानूँ?”

“कोई बात नहीं! हम हैं न... हम आपको सिखा देंगे!”

उसकी बात पर कमल हँसने लगा और अपनी कुर्सी पर बैठ कर, उसने कोमलता से माया की नग्न कमर में बाहें डाल कर उसने माया को अपने आलिंगन में समेट लिया। दोनों ने एक दूसरे को कुछ देर चूमा, फिर कमल ने उसकी योनि के चीरे पर कोमलता से अपनी तर्जनी चलाते हुए कहा,

“आप नंगू नंगू बहुत सुन्दर लगती हैं,”

“अच्छा जी!”

“हाँ! मेरा तो मन होता है कि आप हमेशा ऐसी ही रहें...”

“ऐसी? नंगू नंगू?”

कमल ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और उसकी योनि के होंठों को चूमा।

“पूरी नंगू नंगू?” कमल के होंठों का अपनी योनि के होंठों पर स्पर्श पा कर माया को परिचित उत्तेजना महसूस होने लगी। फिर भी उसने अपनी आवाज़ को यथासंभव सम्हाले रखा।

कमल ने फिर से ‘हाँ’ में सर हिलाया, और मुस्कुरा कर उसने माया की योनि को तसल्ली से चूमा।

“ऐसे कैसे हो पाएगा जानू?” माया ने बिखरती हुई असंयत आवाज़ में कहा, “मम्मी पापा भी तो हैं न घर में,”

“तो क्या? आपने ही तो कहा... मम्मी पापा हैं वो!”

“हा हा हा! वो भी ठीक है!” माया ने हँसते हुए कहा, “ओके! ठीक है तो... अगर आप यही चाहते हैं, और अगर आप हमारे साथ हैं, तो हमको भी कोई प्रॉब्लम नहीं!”

“सच में?” कमल को विश्वास ही नहीं हुआ।

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए कहा, “आपसे हम कभी झूठ नहीं कह सकते!”

“हम आपको कुछ भी करने की जबरदस्ती नहीं करेंगे,”

“आई नो जानू! ... लेकिन अगर आपका मन है, तो हम सब कुछ करेंगे!” माया ने उसके बालों में अपनी उँगलियाँ उलझाते हुए कहा, “हम वो हर काम करेंगे, जिससे आपको अच्छा लगे... आपको सुख मिले!”

कमल ने अपनी जीभ को माया की योनि के भीतर फिराया।

“यू आर टू गुड,”

“आई नो!”

कमल मुस्कुराया, “आपका स्वाद,” उसने स्पष्ट किया।

माया इस बात पर शरमा कर दोहरी हो गई।

“गंदे,”

“ये नन्हा बदमाश इसमें कब जाएगा?”

“जानू?”

“हम्म?”

“आप ऐसी बातें मत पूछा करिए... हम आपको रोक नहीं पाएँगे,”

“मतलब?”

“हम तो चाहते हैं कि हम हमारी शादी के दिन ही ‘एक’ हों... लेकिन अगर आपकी इच्छा है तो...”

“तो?”

“हम आपको मना नहीं कर पाएँगे,”

“उसकी ज़रुरत नहीं पड़ेगी! हमको भी आपकी हर इच्छा पूरी करनी है!” कमल ने कहा और उसकी योनि पर एक ज़ोरदार चुम्बन लिया।

माया मुस्कुराई, “आई लव यू,”

“आई लव यू मोर...”

“इम्पॉसिबल!”

“सच में?”

माया ने ‘न’ में सर हिलाया और कमल के होंठों को फिर से चूमने लगी।

“साथ में सो जाएँ आज?” कमल ने उसको चूमते हुए कहा।

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

**

Bahut sunder update he avsji Bhai,

Shabdo ka stik chayan........

Kab kaha par kya shabd likhna he...............ye koi aapse sikhe.......

Erotica, Sex itne saral aur sunder shabdo me bhi likha ja sakta he...........

Gazab Bhai Ji
 
  • Like
  • Love
Reactions: avsji and parkas
Top