अपडेट 12
“अरे सही कह रहा हूँ,” कमल ने ज़ोर दिया।
“हाँ हाँ! सही कह रहा है!” उसने कहा, “चल...”
“कहाँ?”
“घर... और कहाँ? देख भाई -- दीदी ने कहा था कि कमल को साथ लेकर सीधे घर आना। ... आज दीदी कुछ स्पेशल बना रही हैं! बोलीं, कि तुझे नाश्ता करा कर ही वापस जाने देंगी वो!” अजय ने बड़े अभूतपूर्व तरीके से कहा, "दीदी का आदेश है, हाँ! बस!"
“यार तू सच में बदल गया है!” कमल ने अचानक से गंभीर होते हुए कहा।
“अब क्या हो गया?”
“आज तक मेरे सामने तूने माया दीदी को ‘दीदी’ नहीं कहा...”
कमल की बात पर अजय को झटका सा लगा।
हाँ... सच ही तो कह रहा था कमल। घर में पापा और माँ के चलते वो माया को ‘माया दीदी’ ज़रूर कहता था, लेकिन बाहर - अपने मित्रों के सामने वो उसको कभी माया-देवी, तो कभी माया-बेन, तो कभी केवल माया ही कह कर बुलाता था। कोई इज़्ज़त नहीं दिखाता था। शायद मित्रों के सामने ‘कूल’ दिखने की चाहत हो? उसको यह समझ नहीं थी कि इस कूल दिखने की चाहत में वो मित्रों के सामने ‘फ़ूल’ दिखता था। कम से कम कमल के सामने।
कमल की बात पर अजय के दिल में एक टीस उठी।
माया दीदी उससे ऐसा तिरस्कार डिज़र्व नहीं करती थीं। वो एक बेहद अच्छी लड़की थीं, जिन्होंने अपने श्रम और प्रेम के बल पर उसके परिवार को बाँध कर रखा हुआ था। वो सही मायनों में ‘दीदी’ थीं!
हाँ, अब पुरानी बातें बदलने का समय आ गया था। भविष्य से आया हुआ अजय, अपने लिए एक नया भविष्य लिखने वाला था! ऐसा अवसर शायद ही किसी को आज तक मिला हो! भगवान ने उसको एक मौका दिया था - वो उसको यूँ जाने नहीं दे सकता था।
“गलती थी वो मेरी यार...” अजय बुदबुदाया, “नासमझी में ऐसी बहुत सी गलतियाँ हुई हैं मुझसे... अब सब कुछ रियलाइज़ हो रहा है मुझे!”
“हाँ... गलती तो थी!” कमल ने कहा, “वो अच्छी हैं बहुत! ... अच्छा लगा मुझे कि तू फाइनली उनको रेस्पेक्ट दे रहा है!”
कमल के कहने का अंदाज़ थोड़ा अलग था।
लड़कपन वाला अजय अवश्य ही न समझ पाता, लेकिन ये वयस्क अजय ऐसी बातें भाँप लेता है।
“क्या बात है कमल?” अजय ने दो-टूक पूछ लिया, “कुछ है जो तुम मुझे बताना चाहते हो?”
“कुछ नहीं!” कमल ऐसे अचानक पूछे जाने से थोड़ा अचकचा गया, जैसे उसकी कोई चोरी पकड़ ली गई हो।
“मुझसे छुपायेगा? अपने जिगरी दोस्त से?”
कमल कुछ बोला नहीं। उसकी हिचक साफ़ दिखाई दे रही थी।
लिहाज़ा, अजय ने ही कुरेदा,
“तुझे माया दीदी पसंद हैं?”
कमल ने चौंक कर अजय को देखा। लेकिन कुछ बोला नहीं।
“यार तू अगर बताएगा ही नहीं, तो फिर मैं तेरे लिए कुछ कैसे कर पाऊँगा?”
“आर यू सीरियस?” कमल को विश्वास नहीं हुआ कि अजय ऐसा कुछ कह देगा।
“और नहीं तो क्या?”
“तू नाराज़ नहीं है?”
“अरे मैं क्यों नाराज़ होऊँगा?” अजय ने कहा, “तुम दोनों ही मेरे अपने हो!”
नाराज़ होने की कोई वजह ही नहीं थी - जब आखिरी बार, कोई दो साल पहले, कमल से अजय की मुलाक़ात हुई थी, तो अजय जेल में ही था। मिलने आया था वो। उसी दिन माया दीदी भी आई थीं। अजय ने देखा था तब... कमल की आँखों में माया को देख कर निराशा के भाव थे।
माया अपने वैवाहिक जीवन में खुश कत्तई नहीं थीं, यह बात शायद पाठकों को बता चुका हूँ!
बेहद नालायक पति था उनका। शादी के तीन साल ही में दो बच्चे हो गए थे उनको, और उनको पालने का पूरा भार उन्ही पर था। उनके नाकारा पति ने अशोक जी द्वारा दिया गया धन (दहेज़ और संपत्ति में से हिस्सा) भी यूँ ही गँवा दिया था! फिर भी एक कर्तव्यनिष्ठ स्त्री होने के नाते वो मुस्कुराते हुए सब सहती रहीं। वो आदमी केवल नालायक ही होता, तो भी चलता। वो काईयाँ भी बहुत था। जब तक अजय के परिवार के पास धन दौलत थी, तब तक वो बड़ी मीठी मीठी बातें करता। लेकिन एक बार धन सम्पदा जाते ही उसने गिरगिट के जैसे रंग बदल दिया। अशोक जी की अंत्येष्टि में वो केवल खाना - पूरी करने आया हुआ था। और तो और, वो माया को अजय और माँ से जेल में मिलने से भी मना करता। ये बेचारी ही जस-तस बहाने कर कर के इनसे मिलने आ जातीं।
बहुत अत्याचार हुआ था माया दीदी जैसी कोमल लड़की पर!
उधर कमल ने भी आज तक शादी नहीं करी थी।
अजय उससे कहता कि वो बच गया! आज कल शादियाँ सही नहीं होतीं। लेकिन कमल उसको कहता कि सही लड़का लड़की से शादी होने पर शादियाँ सही होती हैं।
तब नहीं पता था अजय को कि कमल माया दीदी को अपने लिए सही लड़की मानता है।
लेकिन आज...
“बोल न?” अजय ने कमल को कुरेदा।
“यार...” कमल ने झिझकते हुए बताया, “पसंद तो हैं मुझे तेरी दीदी!”
“तुमको अजीब नहीं लगता,” अनजाने ही अजय ‘तुझको’ से ‘तुमको’ पर आ गया।
“क्यों अजीब लगना चाहिए? कितनी अच्छी सी तो है माया दीदी... कितनी सुन्दर... सुशील... गुणी!” कमल बोला, “माँ को भी पसंद हैं दीदी! ... भगवान ने चाहा, तो या तो माया दीदी से या फिर उन्ही जैसी किसी लड़की से शादी करूँगा! नहीं तो कुँवारा बैठूँगा!”
अजय ने कुछ पल चुप रह कर सोचा। कमल की बात सही थी। माया दीदी वाक़ई बहुत ही अच्छी लड़की थीं… हैं।
“सच में?”
“हाँ!”
बात तो सही थी - कमल ने शादी नहीं करी थी। इस बात का गवाह वो ‘पुराना’ वाला अजय था।
‘प्यार ऐसा होता है? कमाल है!’ अजय ने सोचा, ‘शायद ऐसा ही होता हो... किसी के लिए अगर इतनी पक्की धारणा बन जाए, तो फिर क्या कहना! ... काश उसको भी इसी तरह का प्यार होता किसी से!’
“यार, ऐसी क्लैरिटी होनी चाहिए लाइफ में!” प्रत्यक्ष में उसने कहा।
“बिलकुल होनी चाहिए!” कमल ने बड़े अभिमान से कहा, “कम से कम मुझे तो है!”
अजय ने सर हिला कर उसका समर्थन किया। फिर मूड को थोड़ा हल्का करने के लिए उसने चुहल करी,
“अबे, एक बात बता... तू अगर माया दीदी से शादी करना चाहता है, तो उनको ‘दीदी’ क्यों कह रहा है? केवल ‘माया’ कह न... केवल उनके नाम से बुलाया कर न!”
“भाई देखो... अभी तक उनसे इस बारे में कोई बात ही नहीं हुई है, तो और क्या कहूँ?” कमल बड़ी परिपक्वता से बोला, “वो मेरे सबसे पक्के दोस्त - मेरे भाई - की बड़ी बहन हैं, इसलिए इज़्ज़त तो करनी ही होगी न!” वो मुस्कुराया।
“क्या बात है यार!” अजय उसकी बात पर बहुत खुश हुआ।
‘कमल और माया दीदी,’ अजय के मन में ये विचार आए बिना न रह सके!
कमल अच्छा लड़का तो था ही! इसीलिए तो वो उसका दोस्त था... और बेहद अच्छा दोस्त था। लेकिन केवल इसी कारण से ही नहीं!
जब अजय के बाकी सबसे नाते रिश्ते छूट गए थे, तब कुछ ही लोग तो संग रहे! कमल उनमें से था... माया दीदी उनमें से एक थीं!
‘माया दीदी... कमल...’ सोच कर वो मुस्कुराया।
दो बेहद अच्छे लोग!
दोनों अपने अपने हिस्से की खुशियों से वंचित!
वो ख़ुशियाँ, जिनके वो हक़दार थे!
‘कमल और माया दीदी... नाइस!’
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