- 43,867
- 79,809
- 304
★ INDEX ★
☟
☟
♡ Family Introduction ♡ |
|---|
Last edited:
♡ Family Introduction ♡ |
|---|
Ye kya hai??? Pahli baat to ye ki ye thriller story hai, wo bhi saaf suthri so you should not post those kind of pictures here,[URL
and other thing is i am not interested at al 
Damha uski post hataoYe kya hai??? Pahli baat to ye ki ye thriller story hai, wo bhi saaf suthri so you should not post those kind of pictures here,and other thing is i am not interested at al
![]()
Damha uski post hatao

Thank you brother

Gajab update hai bhai aakhir kar Kamal nath pakda gaya ab to Somu azaad ho jayga jail se# 6
अगली तारीख पर अदालत खचा-खच भरी हुई थी ।
पुलिस ने जो गवाह पेश किये, वह सब रटे रटाये तोते की तरह बयान दे रहे थे । रोमी ने इनमें से किसी से भी खास क्वेश्चन नहीं कि या, न ही चश्मदीद गवाह से यह पूछा कि वह सुनसान हाईवे पर आधी रात को क्या कर रहा था ?
"मेरे अजीज दोस्त रोमेश सक्सेना ने बिना वजह अदालत का समय जाया किया है मीलार्ड”।
“इनका तो मनो बल इतना टूटा हुआ है कि किसी गवाह से सवाल जवाब करने से ही कतरा रहे हैं ।"
"फर्जी गवाहों से सवाल जवाब करना मैं अपनी तौहीन समझता हूँ, और न ही इस किस्म के क्रिया कलापों में समय नष्ट करता हूँ । मैं अपने काबिल दोस्त से जानना चाहूँगा कि सारे गवाह पेश करने के बावजूद भी पुलिस वह रकम क्यों बरामद नहीं कर पायी , जो सोमू ने लूट ली थी। यह प्वाइन्ट नोट किया जाये योर ऑनर, कि जिस रकम के पीछे कत्ल हो गया , वह रकम सोमू के पास से बरामद नहीं हुई ।"
"इस रकम की बरामदगी न होने से केस की मजबूती पर कोई असर नहीं पड़ता योर ऑनर !
पुलिस सोमू से रकम बरामद न कर सकी, इससे केस के हालात नहीं बदल जाते । सोमू पहले ही अपने जुर्म का इकबा ल कर चुका है।" राजदान ने पुरजोर असर डालते हुए कहा ,
"यह बात मुलजिम ही बेहतर जानता होगा , उसने रकम कहाँ छिपायी थी। पुलिस ने उस पर थर्ड डिग्री प्रयोग की होती, तो शायद रकम भी बरामद हो जाती । लेकिन उसने पुलिस को चकमा देकर अदालत में समर्पण किया, और उसे रिमाण्ड पर नहीं लिया जा सका । पुलिस ने रिमाण्ड की जरूरत इसलिये भी नहीं समझी, कि वह अपना जुर्म कबूल करने के लिए तैयार था । दैट्स आल योर ऑनर ।"
"योर ऑनर मेरे काबिल दोस्त की सारी दलीलें अभी फर्जी साबित हो जाएंगी, मैं वह रकम पेश करने की इजाजत चाहता हूँ ।"
"आप रकम पेश करेंगे ?" राजदान चिल्लाया ।
"क्या हर्ज है ? पुलिस का अधूरा काम कोई भी शरीफ शहरी पूरा कर दे, तो उसमें हर्ज क्या है। क्या मुझे कानून की मदद करने का अधिकार नहीं? और फिर यह रकम कोई मैं अपने पल्ले से दे नहीं रहा। न ही उसमें मेरा कोई कमीशन है ।" अदालत में बैठे लोग हँस पड़े ।
"आर्डर !आर्डर !!" जज ने मेज पर हथौड़ी पीटी ।अदालत शांत हो गई ।
"एडवोकेट रोमेश सक्सेना , रकम पेश कीजिए ।"
इंस्पेक्टर विजय उठकर बाहर गया और कुछ क्षण में ही एक व्यक्ति को पेश किया गया ! वह हाथ में ब्रीफकेस लिए हुए था । यह शख्स और कोई नहीं बेंकट करुण था । कमलनाथ का बहनोई। अदालत की रस्मी कार्यवाही के अनुसार गी.. पर हाथ रख कसम लेने के बाद उसके बयान शुरू हो गये ।
"आपका नाम ?" रोमेश ने पूछा ।
"बेंकट करुण ।"
"बाप का नाम ।"
"अंकेश करुण ।"
"क्या आप वह रकम लेकर आये हैं, जिसका मालिक सोमू है ?" रोमेश ने पूछा ।
"जी हाँ , ये रही ।"
"यह फर्जी ड्रामा कर रहे हैं योर ऑनर।" राजदान चीखा ,
"पता नहीं क्या गुल खिलाना चाहते हैं?"
"मैं कोई गुल नहीं खिलाना चाहता गुले गुलजार, मैं तो आपकी मदद कर रहा हूँ । केस को और मजबूत कर रहा हूँ ।"
"योर ऑनर, मेरे काबिल दोस्त से कहें कि गवाह का बयान पूरा होने के बाद ही गुल खिलायें ।"
पब्लिक एक बार फिर हँस पड़ी । न्यायाधीश को एक बार फिर मेज बजानी पड़ी। कार्यवाही आगे बढ़ी ।
"ब्रीफकेस खोलो ।" रोमेश ने कहा ।
ब्रीफकेस में सौ-सौ के नोटों की दस गड्डियां थीं । रोमेश ने रकम न्यायाधीश की मेज पर रखी ।
"गिन लीजिये योर ऑनर ! पूरे एक लाख ही हैं, और यह रकम कोई मैं अपनी जेब से दान नहीं कर रहा हूँ, यह वही रकम है जिसकी खातिर यह सब घटना यें प्रकाश में आई ।"
"ठीक है, आगे कहिए ।" न्यायाधीश ने अत्यन्त क्षीण दिलचस्पी से कहा । अदालत में बैठी जनता में खुसुर-फुसुर हो रही थी ।
"यह उसकी पैरवी कर रहा है या फाँसी पर लटकवाना चाहता है, सब उसके खिलाफ जा रहा है ।"
राजदान ने पीछे बैठे व्यक्ति की टिप्पणी सुन ली थी, वह मुस्करा तो दिया, परन्तु अन्दर ही अन्दर उसका मन किसी आशंका से काँप रहा था ।
"बेंकट करुण, अदालत को बताओ कि यह रकम किसने तुम्हें दी, और किस शर्त पर तुमने इसे सोमू के घर तक पहुंचाया ?"
''यह रकम सेठ कमलनाथ ने मुझे दी थी, मैं उनका बहनोई हूँ ।"
उसके इतना कहते ही अदालत में एकदम खलबली मच गयी ।
"शर्त यह थी कि जब सोमू कत्ल के जुर्म का इकबाल कर लेगा, तो रकम उनके घर पहुँचा दी जायेगी और उसके ऐसा करते ही हमने रकम पहुँचा दी ।"
"यह झूठा प्रपंच है ।" राजदान चीखा ,
"भला कमलनाथ क्यों देगा, कमलनाथ तो मर चुका था योर ऑनर ! सफाई पक्ष का वकील तो इस तरह कह रहा है, जैसे वह अभी चुर्रर-मुर्रर करेगा और कमलनाथ को जिन्दा कर लेगा ।"
"यही होने जा रहा है मिस्टर राजदान।"
ठीक उसी समय हथकड़ियों में जकड़ा कमलनाथ अदालत में आ गया।
"देखो,वो रहा कमलनाथ! गौर से देखो और चाहे जैसे शिनाख्त कर लो और खुद अदालत को बतादो कि जो शख्स मरा ही नहीं, उसके कत्ल के जुर्म में क्या किसी मुलजिम को सजा दी जा सकती है? हाउ कैन इट पॉसिबल?, चाहे उसने जुर्म का इकबाल ही क्यों न किया हो ।"
राजदान के तो छक्के छूट गये। पसीना-पसीना हो गया वह। सेठ कमलनाथ सचमुच अदालत में प्रकट हो गया था। अदालत में खलबली शांत हुई, तो कमलनाथ को कटघरे में लाया गया, और कमलनाथ को भी..कसम दिलाई गई ।
"सेठ कमलनाथ, उचित होगा कि आप स्वयं अदालत को सब कुछ बता दें, क्यों कि अब आपका खेल खत्म हो गया है।"
"मैं दिवालिया हो गया था ।" कमलनाथ ने बोलना शुरू किया,
"तीन महीने से मेरी फैक्ट्री में ताला पड़ा था। स्टाफ को वेतन नहीं दे पा रहा था, और वह लोग मुझे कोर्ट में घसीटने की धमकियां दे रहे थे। ट्रेड यूनियन्स उनकी पीठ पर आ खड़ी हुई थी। उनको मेरी हालत का अन्दाजा भी न था, कि मेरी सारी प्रॉपर्टी गिरवी पड़ी है। उस रात मैं बहुत परेशान था और अचानक वह हादसा हो गया, कोई शख्स आत्महत्या के इरादे से रात के अन्धेरे में सड़क के किनारे खड़ा शायद किसी वाहन की प्रतीक्षा कर रहा था, और अचानक हमारी कार के आगे कूद गया, उसकी मौत हो गई ।" इतना कहकर वह कुछ क्षण के लिए रुका ।
"संयोग से उसकी कद-काठी मेरे जैसी थी। मेरे दिमाग में तुरन्त एक ख्याल आया, अगर मेरी मौत इस तरह हो जाती, तो मुझे पचास लाख रुपया मिल सकता था। यह रकम मुझे इंश्योरेंस से मिल सकती थी। उधर सोमू को अपनी बहन की शादी के लिए एक लाख रुपये की जरूरत थी। मैंने पहले तो लाश को अपने कपड़े वगैरा पहनवाये, फिर सोमू से सौदा कर लिया कि उसे क्या करना है । अगर मैं खाली एक्सीडेन्ट दिखाता हूँ, तो तफ्तीश में शायद यह भेद खुल जाता। इसलिये मैंने उसे कत्ल का नाटक बनाकर पेश कर दिया और सोमू मुलजिम बनने को तैयार हो गया। उसके इकबाले-जुर्म करने से पुलिस भी अधिक झंझट में नहीं पड़ी और इंश्योरेंस की रकम भी मुझे मिल गई। मैं कुछ दिन के लिए मुम्बई से बाहर अपने बहनोई के गाँव वाले मकान में रहने चला गया, और काम होने पर रकम सोमू के घर पहुंचाने का निर्देश भी दे दिया था। लेकिन बेंकट करुण पकड़ा गया और फिर मेरा सारा भांडा फूट गया।"
"दैट्स आल योर ऑनर ! यह है असली वाकया, आप चाहें तो सेठ कमलनाथ की शिनाख्त करवा सकते हैं। कहीं मेरे वकील दोस्त राजदान, कमलनाथ को भी फर्जी न कह बैठे।"
अदालत में बैठे लोगों ने तालियां बजा कर उसका उत्साह-वर्धन किया। अगले दिन अखबारों में रोमी सुर्खियों में था।
जारी रहेगा….![]()
Aakhir kya karne wala hai Romesh kya such ka sath dega ya is bar Paisoo ke leye krega#10
विजय के तो छक्के छूट गये। रोमेश जिस आत्मविश्वास से कह रहा था, उससे साफ जाहिर था कि वह जो कह रहा है, वही होगा।
''तो फिर तुम ही बताओ, असली कातिल कौन है?"
"तुम्हारा सी.एम. ! जे.एन. है उसका कातिल।"
विजय उछल पड़ा। वह इधर-उधर इस प्रकार देखने लगा, जैसे कहीं किसी ने कुछ सुन तो नहीं लिया।
"एक मिनट।'' वह उठा और दरवाजा बंद करके आ गया।
''अब बोलो।'' वह फुसफुसाया।
''तुम इस केस से हाथ खींच लो।'' रोमेश ने भी फुसफुसा कर कहा।
''य...यह नहीं हो सकता।''
''तुम चीफ कमिश्नर को गिरफ्तार नहीं कर सकते। नौकरी चली जायेगी। इसलिये कहता हूँ, तुम इस तफ्तीश से हाथ खींच लोगे, तो जांच किसी और को दी जायेगी। वह
चंदन को ही पकड़ेगा और मैं चंदन को छुड़ा लूँगा। तुम्हारा ना कोई भला होगा, ना नुकसान।''
''यह हो ही नहीं सकता।'' विजय ने मेज पर घूंसा मारते हुए कहा।
''नहीं हो सकता तो वर्दी की लाज रखो, ट्रैक बदलो और सी एम को घेर लो। मैं तुम्हारासाथ दूँगा और सबूत भी। जैसे ही तुम ट्रैक बदलोगे, तुम पर आफतें टूटनी शुरू होंगी।
डिपार्टमेंटल दबाव भी पड़ सकता है और तुम्हारी नौकरी तक खतरे में पड़ सकती है।
परंतु शहीद होने वाला भले ही मर जाता है, लेकिन इतिहास उसे जिंदा रखता है और जो इतिहास बनाते हैं, वह कभी नहीं मरते। कई भ्रष्ट अधिकारी तुम्हारे मार्ग में रोड़ा बनेंगे,
जिनका नाम काले पन्नों पर होगा।"
''मैं वादा करता हूँ रोमेश ऐसा ही होगा। परंतु ट्रैक बदलने के लिए मेरे पास सबूत तो होना चाहिये।''
"सबूत मैं तुम्हें दूँगा।"
"ठीक है।" विजय ने हाथ मिलाया और उठ खड़ा हुआ।
रोमेश ने अगले दिन दिल्ली फोन मिलाया। कैलाश वर्मा को उसने रात भी फोन पर ट्राई किया था, मगर कैलाश से बात नहीं हो पायी। ग्यारह बजे ऑफिस में मिल गया।
"मैं रोमेश ! मुम्बई से।"
"हाँ बोलो। अरे हाँ, समझा।
मैं आज ही दस हज़ार का ड्राफ्ट लगा दूँगा। तुम्हारी पेमेंट बाकी है।''
"मैं उस बाबत कुछ नहीं बोल रहा। ''
"फिर खैरियत?"
"अखबार तो तुम पढ़ ही रहे होगे।"
''पुलिस की अपनी सोच है, हम क्या कर सकते हैं? जो हमारा काम था, हमने वही करना होता है, बेकार का लफड़ा नहीं करते।"
"लेकिन जो काम तुम्हारा था, वह नहीं हुआ।"
''तुम कहना क्या चाहते हो?"
"तुमने सावंत को …।"
"एक मिनट! शार्ट में नाम लो।
यह फोन है मिस्टर! सिर्फ एस. बोलो।"
"मिस्टर एस. को जो जानकारी तुमने दी, उसमें उसी का नाम है, जिस पर तर्क हो रहा है। तुमने असलियत को क्यों छुपाया? जो सबूत मैंने दिया, वही क्यों नहीं दिया, यह दोगली हरकत क्यों की तुमने?"
"मेरे ख्याल से इस किस्म के उल्टे सीधे सवाल न तो फोन पर होते हैं, न फोन पर उनका जवाब दिया जाता है। बाई द वे, अगर तुम दस की बजाय बीस बोलोगे, वो भेज दूँगा, मगर अच्छा यही होगा कि इस बाबत कोई पड़ताल न करो।"
"मुझे तो अब तुम्हारा दस हज़ार भी नहीं चाहिये और आइंदा मैं कभी तुम्हारे लिए काम भी नहीं करने का।"
"यार इतना सीरियस मत लो, दौलत बड़ी कुत्ती शै होती है। हम वैसे भी छोटे लोग हैं।
बड़ों की छाया में सूख जाने का डर होता है ना, इसलिये बड़े मगरमच्छों से पंगा लेना ठीक नहीं होता। तुम भी चुप हो जाना और मैं बीस हज़ार का ड्राफ्ट बना देता हूँ।"
''शटअप ! मुझे तुम्हारा एक पैसा भी नहीं चाहिये और मुझे भाषण मत दो।
तुमने जो किया, वह पेशे की ईमानदारी नहीं थी। आज से तुम्हारा मेरा कोई संबंध नहीं रहा।"
इतना कहकर रोमेश ने फोन काट दिया। करीब पन्द्रह मिनट बाद फोन की घंटी फिर बजी।रोमेश ने रिसीवर उठाया ।
''एडवोकेट रोमेश ''
''मायादास बोलते हैं जी। नमस्कार जी।"
"ओह मायादास जी , नमस्कार।"
"हम आपसे यह बताना चाहते थे कि फिलहाल जे.एन. साहब के लिए कोई केस नहीं
लड़ना है, प्रोग्राम कुछ बदल गया है।
हाँ , अगर फिर जरूरत पड़ी , तो आपको याद किया जायेगा। बुरा मत मानना ।"
''नहीं-नहीं । ऐसी कोई बात नहीं है।
वैसे बाई द वे जरूरत पड़ जाये, तो फोन नंबर आपके पास है ही ।''
"आहो जी ! आहो जी ! नमस्ते ।'' माया-दास ने फोन काट दिया ।
रोमेश जानता था कि दो-चार दिन में ही मायादास फिर संपर्क करेगा और रोमेश को अभी उससे एक मीटिंग और करनी थी, तभी जे.एन. घेरे में आ सकता था।
तीन दिन बाद विजय ने चंदन को चार्ज से हटा लिया और अखबारों में बयान दिया कि चंदन को शक के आधार पर तफ्तीश में लिया गया था किंतु बाद की जांच के मामले ने
दूसरा रूप ले लिया और इस कत्ल की वारदात के पीछे किसी बहुत बड़ी हस्ती का हाथ होने का संकेत दिया ।
सावंत कांड अभी भी समाचार पत्रों की सुर्खियों में था। विजय ने इसे एक बार फिर नया मोड़ दे दिया था।
उसी दिन शाम को मायादास का फोन आ गया।
''आपकी जरूरत आन पड़ी वकील साहब।"
"आता हूँ।"
"उसी जगह, वक्त भी आठ।“
"ठीक है ।"
रोमेश ठीक वक्त पर होटल जा पहुँचा। मायादास के अलावा उस समय वहाँ एक और आदमी था।
वह व्यक्ति चेहरे से खतरनाक दिखता था और उसके शरीर की बनावट भी
वेट-लिफ्टिंग चैंपियन जैसी थी। उसके बायें गाल पर तिल का निशान था और सामने के दो दांत सोने के बने थे। सांवले रंग का वह लंबा तगड़ा व्यक्ति गुजराती मालूम पड़ता था ,
उम्र होगी कोई चालीस वर्ष ।
"यह बटाला है।" मायादास ने उसका परिचय कराया ।
"वैसे तो इसका नाम बटाला है, लेकिन अख्तर बटाला के नाम से इसे कम ही लोग जानते हैं। पहले जब छोटे-मोटे हाथ मारा करता था, तो इसे बट्टू चोर के नाम से जाना जाता था। फिर यह मिस्टर बटाला बन गया और कत्ल के पेशे में आ गया, इसका निशाना सधा हुआ है। जितना कमांड इसका राइफल, स्टेनगन या पिस्टल पर है, उतना ही भरोसा रामपुरी पर है। जल्दी ही हज करने का इरादा रखता है, फि र तो हम इसे हाजी साहब कहा करेंगे ।''
बटाला जोर-जोर से हंस पड़ा ।
''अब जरा दांत बंद कर।" मायादास ने उसे जब डपटा, तो उसके मुंह पर तुरंत ब्रेक का जाम लग गया।
''वकील लोगों से कुछ छुपाने का नहीं मांगता।" वह बोला !
"और हम यह भी पसंद नहीं करते कि हमारा कोई आदमी तड़ी पार चला जाये । अगर बटाला को जुम्मे की नमाज जेल में पढ़नी पड़ गई, तो लानत है हम पर ।''
"पण जो अपुन को तड़ी पार करेगा, हम उसको भी खलास कर देगा" बटाला ने फटे बास की तरह घरघराती आवाज निकाली।"
"तेरे को कई बार कहा, सुबह-सुबह गरारे किया कर, वरना बोला मत कर।"
मायादास ने उसे घूरते हुए कहा । बटाला चुप हो गया।
''सावंत का कत्ल करते वक्त इस हरामी से कुछ मिस्टेक भी हो गयी। इसने जुम्मन की टैक्सी को इस काम के लिये इस्तेमाल किया और जुम्मन उसी दिन से लापता है। उसकी टैक्सी गैराज में खड़ी है। यह जुम्मन इसके गले में पट्टा डलवा सकता है।
मैंने कहा था- कोई चश्मदीद ऐसा ना हो, जो तुम्हें पहचानता हो। जुम्मन की थाने में हिस्ट्री शीट खुली हुई है और अगर वह पुलिस को बिना बताए गायब होता है, तो पुलिस उसे रगड़ देगी।
ऐसे में वह भी मुंह खोल सकता है। जुम्मन डबल क्रॉस भी कर सकता है, वह भरोसे का आदमी नहीं है।"
बटाला ने फिर कुछ बोलना चाहा, परंतु मायादास के घूरते ही केवल हिनहिना कर रह गया।
''तो सावंत का मुजरिम ये है।'' रोमेश बोला ।
''आपको इसे हर हालत में सेफ रखना है वकील साहब, बोलो क्या फीस मांगता ?"
"फीस में तब ले लूँगा, जब काम शुरू होगा। अभी तो कुछ है ही नहीं , पहले पुलिस को बटाला तक तो पहुंचने दो, फिर देखेंगे।"
जारी रहेगा……..![]()
Waise mujhe bharosa hai aap pe ki review to likh hi doge
Likh to ab bhi de deti ju, per padha hi nahi to![]()
Raj_sharma bhai km se km aapke update read kia hamare to dekhe he nahi abhi takSahi bole ho abhi mai 2 update piche hu..pura padh kar ek saath review dungi
Big thanks to you DEVIL MAXIMUM for your valuable reviewGajab update hai bhai aakhir kar Kamal nath pakda gaya ab to Somu azaad ho jayga jail se
.
Plan to bahut mast banaya tha Kamalnath ne lekin ek kmi se maat kha gaya
Ab dekhte hai aage or kya karvaahee hoti hai Adalat me
Thank you very much bhaiAakhir kya karne wala hai Romesh kya such ka sath dega ya is bar Paisoo ke leye krega
Khel hai Romanchak dekhte hai kya hota hai aage