- 43,854
- 79,808
- 304
★ INDEX ★
☟
☟
♡ Family Introduction ♡ |
|---|
Last edited:
♡ Family Introduction ♡ |
|---|
Nice update....#11.
रोमेश डिनर के बाद फ्लैट पर पहुँचा, तो उसके पास सारी बातचीत का टेप मौजूद था। फिर भी उसने विजय को कुछ नहीं बता या। अगले ही दिन समाचार पत्रों में छपा की, विजय ने वह टैक्सी बरामद कर ली है, जिसे कातिल ने प्रयोग किया था।
टैक्सी के मालिक रूप सुंदर को एक रात हवालात में रखने के बाद सुबह छोड़ दिया गया था। चालक जुम्मन गायब था। रोमेश के होंठों पर मुस्कुराहट उभर आई, इसका मतलब मायादास को पहले से पता था कि टैक्सी का सुराग पुलिस को मिल गया है, और जुम्मन कभी भी आत्मसमर्पण कर सकता है।
जुम्मन के हाथ आते ही बटाला का नकाब भी उतर जायेगा। शाम को रोमेश से विजय खुद मिला।
''तुम्हारी बात सच निकली रोमेश।''
"कुछ मिला ?"
"जुम्मन ने सब बता दिया है।"
"जुम्मन तुम्हारे हाथ आ गया, कब ?"
"वह रात ही हमारे हाथ लग गया था, लेकिन मैंने उसे हवालात में नहीं रखा। बैंडस्टैंड के एक सुनसान बंगले में है।"
"यह तुमने अक्लमंदी की।"
"मगर तुम जुम्मन को कैसे जानते हो?"
"यह छोड़ो, एक बात मैं तुम्हें बताना चाहता था, तुम्हारे थाने का तुम्हारा कोई सहयोगी अपराधियों तक लिंक में है। कौन है, यह तुम पता लगाओगे।''
"मुझे पता लग चुका है। इसलिये तो मैंने जुम्मन से हवालात में पूछताछ नहीं की। बलदेव, सब इंस्पेक्टर बलदेव!
फिलहाल मैंने उसे फील्डवर्क से भी हटा लिया है। जुम्मन ने बटाला का नाम खोल दिया है। स्टेनगन बटाला के पास है, आज रात मैं उसके अड्डे पर धावा बोल दूँगा।"
"वह घाटकोपर में देसी बार चलाता है। मेरे पास उसकी सारी डिटेल आ गई है। चाहो तो रेड पर चल सकते हो।"
''नहीं, यह तुम्हारा काम है और फिर जब तुम बटाला को धर लो, तो जरा मुझसे दूर-दूर ही रहना।"
"क्यों ? क्या उसका भी केस लड़ोगे?''
"नहीं, मैं पेशे के प्रति ईमानदार रहना चाहता हूँ। हालांकि तुम खुद बटाला तक पहुंच गये हो, लेकिन इन लोगों को अगर पता चला कि उस केस के सिलसिले में तुम वहाँ जा रहे हो, तो वे यही समझेंगे कि यह सब मेरा किया धरा है। मैंने तुम्हें लाइन सिर्फ इसलिये दी, क्यों कि तुम गलत दिशा में भटक गये थे। अब सबूत जुटाना तुम्हारा काम है।''
''लेकिन जनाब अगले हफ्ते नया साल शुरू होने वाला है और दस जनवरी को आपकी शादी की वर्षगांठ होती है, याद है।'' इतना कहकर विजय ने सौ-सौ के नोटों की छः गड्डियां रोमेश के हवाले करते हुए कहा, "तुम तो तकाजा भी भूल गये।''
''यार सचमुच तूने याद दिला दिया , मेरे को तो याद भी नहीं था। माय गॉड, सीमा वैसे भी आजकल मुझसे बहुत कम बोलती है। मैरिज एनिवर्सरी पर मैं उसे गिफ्ट दूँगा इस बार।''
घाटकोपर की एक बस्ती में। बटाला का अवैध शराब का बार चलता था । बटाला देसी बार के ऊपर वाले कमरे में बैठा था। उसकी बगल में एक पेशेवर औरत थी, जिसके साथ वह रमी खेल रहा था। पास ही एक बोतल रखी थी। तभी एक चेला अंदर आया।
"मुखबिर का खबर आयेला।''
"क्या?"
"पुलिस का रेड इधर पड़ेला।''
"आने दे कोई नया इंस्पेक्टर होगा। जब आजाये तो बोल देना, ऊपर कू आए, मेरे से बात कर लेने का क्या, अब फुट जा।
'तभी पुलिस का सायरन बजा। बटाला पर कोई असर नहीं पड़ा। वह उसी प्रकार रमी खेलता रहा। खबर देने वाला नीचे चला गया। कुछ ही देर में बार में तोड़फोड़ की आवाजें गूंजने लगी। चेला फिर हाँफता काँपता ऊपर आया।
"इंस्पेक्टर विजय है। तुमको गिरफ्तार करने आया है।'' बटाला ने उठकर एक झन्नाटेदार थप्पड़ चेले के मुँह पर मारा। अपनी रिवॉल्वर हवा में घुमाई और फिर उसे जेब में डालता उठ खड़ा हुआ। उसी वक्त बटाला ने फोन मिलाने के लिए डायल पर उंगली घुमाई, लेकिन वह चौंक पड़ा, टेलीफो न डेड पड़ा था।
''हमारा काम करने का तरीका कुछ पसंद आया।'' अचानक विजय ने उसी कमरे के दरवाजे पर कदम रखा,
''अब तुम किसी नेता को फोन नहीं मारेगा, थाने चलेगा सीधा।''
''साले ! " बटाला ने रिवॉल्वर निकाली। लेकिन फायर करने से पहले विजय ने एक जोरदार ठोकर बटाला पर रसीद कर दी, बटाला लड़खड़ाया, विजय एकदम चीते की तरह उस पर झपटा और फिर विजय की रिवॉल्वर बटाला के सीने पर थी।
''पुलिस पर गोली चलाएगा साले। “
“मैं तेरे को बर्बाद कर दूँगा। अपुन को ठीक से जान लेने का, नहीं तो नौकरी से हाथ धोलेगा।"
"जनार्दन रेड्डी के कुत्ते।" विजय ने उसे एक ठोकर और जड़ दी,
''इधर पूरी बस्ती को घेरा है मैंने। कोई तेरी मदद को नहीं आएगा, मुम्बई के जितने भी तेरे जैसे लोग हैं, मेरा नाम सुनते ही सब का पेशाब निकल जाता है। सावंत का कत्ल किया तूने, चल।" विजय ने बटाला के हाथों में हथकड़ियां डाल दी।
"ऐ चल भाग यहाँ से।'' विजय ने पेशेवर युवती से कहा। बटाला को गिरफ्तार करके विजय गोरेगांव के लिए चल पड़ा। अभी बटाला से कुछ पूछताछ भी करनी थी, इसी लिये वह उसे लेकर सीधा थाने नहीं गया, बैंडस्टैंड के उसी बंगले में गया, जहाँ जुम्मन बंद था।
"यह तो थाना नहीं है।" "बटाला जी पर यह मेरा प्राइवेट थाना है, साले यहाँ भूत भी नाचने लगते हैं मेरी मार से। अभी तो तेरे से स्टेनगन बरामद करना है।" उसके बाद बटाला की ठुकाई शुरू हो गई। बटाला को अधिक देर तक प्राइवेट कस्टडी में नहीं रखा जा सकता था, विजय ने सुबह जब उसे लॉकअप में बन्द किया, तो स्टेनगन भी बरामद कर ली थी।
अब उसने पूरा मामला तैयार कर लिया था। उसे मालूम था, बटाला को गिरफ्तार करते ही हंगामा होगा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उससे जवाब तलबी कर सकते थे। हुआ भी यही। मामला सीधा आई.जी. के पास पहुँचा। खुद एस.एस.पी. सीधा थाने पहुंच गया।
"आज तक तुम्हारे खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई।" एस.एस.पी. ने कहा,
"इसलिये बटाला को छोड़ दो, तुमने ठाणे जिले में कैसे हाथ डाल दिया, वहाँ की पुलिस…।"
"सर। अगर मैं वहाँ की पुलिस को साथ लेता, तो बटाला हाथ नहीं आता, आखिरी वक्त तक वो यही समझता रहा कि उसी के थाने की पुलिस होगी, अगर उसे जरा भी पता चल जाता कि उसे सावंत मर्डर केस में अरेस्ट किया जा रहा है, तो वह हाथ नहीं आता।"
"सावंत मर्डर केस पहले चंदन, फिर यह बटाला। "
"मैंने स्टेनगन भी बरामद कर ली।"
"देखो इंस्पेक्टर विजय, आई.जी. का दबाव है, घाटकोपर की उस बस्ती में तुम्हारे खिलाफ नारे लगा रहे हैं, कोई ताज्जुब नहीं कि जुलूस निकलने लगे, तुम पुलिस इंस्पेक्टर हो, इसका यह मतलब नहीं कि…।"
"सर प्लीज, आप केवल रिजल्ट देखिये, ये मत देखिये कि मैंने कौन सा काम किस तरह किया है। यही शख्स सावंत का हत्यारा है। मैं इसका रिमांड लूँगा, ताकि असली हत्यारे को भी फंसाया जा सके।"
"इसकी सावंत से क्या दुश्मनी थी ?"
"इसकी नहीं, यह तो मोहरा भी नहीं है, प्यादा भर है। इसने शूट किया, शूट किसी और ने करवाया, मैं मुकदमा दायर कर चुका हूँ, अब रिमांड लूँगा और उस शख्स को गिरफ्तार करूंगा, जिसने कत्ल करवाया है।"
विजय ने एस.एस.पी. की एक न सुनी। बटाला लॉकअप में बन्द था।
"मुझे मालूम है सर, मेरी सर्विस भी जा सकती है, लेकिन इस थाने का चार्ज और सावंत मर्डर केस की तफ्तीश कर रहा हूँ मैं, जब तक मेरी वर्दी मेरे पास है, पुलिस महकमे का बड़े से बड़ा ऑफिसर भी मुझे काम करने से नहीं रोक सकता।"
"ठीक है, आई.जी . के सामने मैंने तुम्हारी बहुत तारीफ की थी, अब अपनी तारीफ खुद कर लेना, लेकिन मेरी व्यक्तिगत सलाह यही है कि…।"
"सॉरी सर।"
और एस.एस.पी. पैर पटकते हुए चला गया।
जारी रहेगा…….![]()
To aakhir kar Romesh ki help se Vijay ne Batala ko giraftaar ker leya or ache se kuttaaa bhi ab dekhte hai kaise asli mujrim ko giraft me leta hai Vijay or Romesh or ky ky karta hai#11.
रोमेश डिनर के बाद फ्लैट पर पहुँचा, तो उसके पास सारी बातचीत का टेप मौजूद था। फिर भी उसने विजय को कुछ नहीं बता या। अगले ही दिन समाचार पत्रों में छपा की, विजय ने वह टैक्सी बरामद कर ली है, जिसे कातिल ने प्रयोग किया था।
टैक्सी के मालिक रूप सुंदर को एक रात हवालात में रखने के बाद सुबह छोड़ दिया गया था। चालक जुम्मन गायब था। रोमेश के होंठों पर मुस्कुराहट उभर आई, इसका मतलब मायादास को पहले से पता था कि टैक्सी का सुराग पुलिस को मिल गया है, और जुम्मन कभी भी आत्मसमर्पण कर सकता है।
जुम्मन के हाथ आते ही बटाला का नकाब भी उतर जायेगा। शाम को रोमेश से विजय खुद मिला।
''तुम्हारी बात सच निकली रोमेश।''
"कुछ मिला ?"
"जुम्मन ने सब बता दिया है।"
"जुम्मन तुम्हारे हाथ आ गया, कब ?"
"वह रात ही हमारे हाथ लग गया था, लेकिन मैंने उसे हवालात में नहीं रखा। बैंडस्टैंड के एक सुनसान बंगले में है।"
"यह तुमने अक्लमंदी की।"
"मगर तुम जुम्मन को कैसे जानते हो?"
"यह छोड़ो, एक बात मैं तुम्हें बताना चाहता था, तुम्हारे थाने का तुम्हारा कोई सहयोगी अपराधियों तक लिंक में है। कौन है, यह तुम पता लगाओगे।''
"मुझे पता लग चुका है। इसलिये तो मैंने जुम्मन से हवालात में पूछताछ नहीं की। बलदेव, सब इंस्पेक्टर बलदेव!
फिलहाल मैंने उसे फील्डवर्क से भी हटा लिया है। जुम्मन ने बटाला का नाम खोल दिया है। स्टेनगन बटाला के पास है, आज रात मैं उसके अड्डे पर धावा बोल दूँगा।"
"वह घाटकोपर में देसी बार चलाता है। मेरे पास उसकी सारी डिटेल आ गई है। चाहो तो रेड पर चल सकते हो।"
''नहीं, यह तुम्हारा काम है और फिर जब तुम बटाला को धर लो, तो जरा मुझसे दूर-दूर ही रहना।"
"क्यों ? क्या उसका भी केस लड़ोगे?''
"नहीं, मैं पेशे के प्रति ईमानदार रहना चाहता हूँ। हालांकि तुम खुद बटाला तक पहुंच गये हो, लेकिन इन लोगों को अगर पता चला कि उस केस के सिलसिले में तुम वहाँ जा रहे हो, तो वे यही समझेंगे कि यह सब मेरा किया धरा है। मैंने तुम्हें लाइन सिर्फ इसलिये दी, क्यों कि तुम गलत दिशा में भटक गये थे। अब सबूत जुटाना तुम्हारा काम है।''
''लेकिन जनाब अगले हफ्ते नया साल शुरू होने वाला है और दस जनवरी को आपकी शादी की वर्षगांठ होती है, याद है।'' इतना कहकर विजय ने सौ-सौ के नोटों की छः गड्डियां रोमेश के हवाले करते हुए कहा, "तुम तो तकाजा भी भूल गये।''
''यार सचमुच तूने याद दिला दिया , मेरे को तो याद भी नहीं था। माय गॉड, सीमा वैसे भी आजकल मुझसे बहुत कम बोलती है। मैरिज एनिवर्सरी पर मैं उसे गिफ्ट दूँगा इस बार।''
घाटकोपर की एक बस्ती में। बटाला का अवैध शराब का बार चलता था । बटाला देसी बार के ऊपर वाले कमरे में बैठा था। उसकी बगल में एक पेशेवर औरत थी, जिसके साथ वह रमी खेल रहा था। पास ही एक बोतल रखी थी। तभी एक चेला अंदर आया।
"मुखबिर का खबर आयेला।''
"क्या?"
"पुलिस का रेड इधर पड़ेला।''
"आने दे कोई नया इंस्पेक्टर होगा। जब आजाये तो बोल देना, ऊपर कू आए, मेरे से बात कर लेने का क्या, अब फुट जा।
'तभी पुलिस का सायरन बजा। बटाला पर कोई असर नहीं पड़ा। वह उसी प्रकार रमी खेलता रहा। खबर देने वाला नीचे चला गया। कुछ ही देर में बार में तोड़फोड़ की आवाजें गूंजने लगी। चेला फिर हाँफता काँपता ऊपर आया।
"इंस्पेक्टर विजय है। तुमको गिरफ्तार करने आया है।'' बटाला ने उठकर एक झन्नाटेदार थप्पड़ चेले के मुँह पर मारा। अपनी रिवॉल्वर हवा में घुमाई और फिर उसे जेब में डालता उठ खड़ा हुआ। उसी वक्त बटाला ने फोन मिलाने के लिए डायल पर उंगली घुमाई, लेकिन वह चौंक पड़ा, टेलीफो न डेड पड़ा था।
''हमारा काम करने का तरीका कुछ पसंद आया।'' अचानक विजय ने उसी कमरे के दरवाजे पर कदम रखा,
''अब तुम किसी नेता को फोन नहीं मारेगा, थाने चलेगा सीधा।''
''साले ! " बटाला ने रिवॉल्वर निकाली। लेकिन फायर करने से पहले विजय ने एक जोरदार ठोकर बटाला पर रसीद कर दी, बटाला लड़खड़ाया, विजय एकदम चीते की तरह उस पर झपटा और फिर विजय की रिवॉल्वर बटाला के सीने पर थी।
''पुलिस पर गोली चलाएगा साले। “
“मैं तेरे को बर्बाद कर दूँगा। अपुन को ठीक से जान लेने का, नहीं तो नौकरी से हाथ धोलेगा।"
"जनार्दन रेड्डी के कुत्ते।" विजय ने उसे एक ठोकर और जड़ दी,
''इधर पूरी बस्ती को घेरा है मैंने। कोई तेरी मदद को नहीं आएगा, मुम्बई के जितने भी तेरे जैसे लोग हैं, मेरा नाम सुनते ही सब का पेशाब निकल जाता है। सावंत का कत्ल किया तूने, चल।" विजय ने बटाला के हाथों में हथकड़ियां डाल दी।
"ऐ चल भाग यहाँ से।'' विजय ने पेशेवर युवती से कहा। बटाला को गिरफ्तार करके विजय गोरेगांव के लिए चल पड़ा। अभी बटाला से कुछ पूछताछ भी करनी थी, इसी लिये वह उसे लेकर सीधा थाने नहीं गया, बैंडस्टैंड के उसी बंगले में गया, जहाँ जुम्मन बंद था।
"यह तो थाना नहीं है।" "बटाला जी पर यह मेरा प्राइवेट थाना है, साले यहाँ भूत भी नाचने लगते हैं मेरी मार से। अभी तो तेरे से स्टेनगन बरामद करना है।" उसके बाद बटाला की ठुकाई शुरू हो गई। बटाला को अधिक देर तक प्राइवेट कस्टडी में नहीं रखा जा सकता था, विजय ने सुबह जब उसे लॉकअप में बन्द किया, तो स्टेनगन भी बरामद कर ली थी।
अब उसने पूरा मामला तैयार कर लिया था। उसे मालूम था, बटाला को गिरफ्तार करते ही हंगामा होगा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उससे जवाब तलबी कर सकते थे। हुआ भी यही। मामला सीधा आई.जी. के पास पहुँचा। खुद एस.एस.पी. सीधा थाने पहुंच गया।
"आज तक तुम्हारे खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई।" एस.एस.पी. ने कहा,
"इसलिये बटाला को छोड़ दो, तुमने ठाणे जिले में कैसे हाथ डाल दिया, वहाँ की पुलिस…।"
"सर। अगर मैं वहाँ की पुलिस को साथ लेता, तो बटाला हाथ नहीं आता, आखिरी वक्त तक वो यही समझता रहा कि उसी के थाने की पुलिस होगी, अगर उसे जरा भी पता चल जाता कि उसे सावंत मर्डर केस में अरेस्ट किया जा रहा है, तो वह हाथ नहीं आता।"
"सावंत मर्डर केस पहले चंदन, फिर यह बटाला। "
"मैंने स्टेनगन भी बरामद कर ली।"
"देखो इंस्पेक्टर विजय, आई.जी. का दबाव है, घाटकोपर की उस बस्ती में तुम्हारे खिलाफ नारे लगा रहे हैं, कोई ताज्जुब नहीं कि जुलूस निकलने लगे, तुम पुलिस इंस्पेक्टर हो, इसका यह मतलब नहीं कि…।"
"सर प्लीज, आप केवल रिजल्ट देखिये, ये मत देखिये कि मैंने कौन सा काम किस तरह किया है। यही शख्स सावंत का हत्यारा है। मैं इसका रिमांड लूँगा, ताकि असली हत्यारे को भी फंसाया जा सके।"
"इसकी सावंत से क्या दुश्मनी थी ?"
"इसकी नहीं, यह तो मोहरा भी नहीं है, प्यादा भर है। इसने शूट किया, शूट किसी और ने करवाया, मैं मुकदमा दायर कर चुका हूँ, अब रिमांड लूँगा और उस शख्स को गिरफ्तार करूंगा, जिसने कत्ल करवाया है।"
विजय ने एस.एस.पी. की एक न सुनी। बटाला लॉकअप में बन्द था।
"मुझे मालूम है सर, मेरी सर्विस भी जा सकती है, लेकिन इस थाने का चार्ज और सावंत मर्डर केस की तफ्तीश कर रहा हूँ मैं, जब तक मेरी वर्दी मेरे पास है, पुलिस महकमे का बड़े से बड़ा ऑफिसर भी मुझे काम करने से नहीं रोक सकता।"
"ठीक है, आई.जी . के सामने मैंने तुम्हारी बहुत तारीफ की थी, अब अपनी तारीफ खुद कर लेना, लेकिन मेरी व्यक्तिगत सलाह यही है कि…।"
"सॉरी सर।"
और एस.एस.पी. पैर पटकते हुए चला गया।
जारी रहेगा…….![]()
जबरदस्त अपडेट,#11.
रोमेश डिनर के बाद फ्लैट पर पहुँचा, तो उसके पास सारी बातचीत का टेप मौजूद था। फिर भी उसने विजय को कुछ नहीं बता या। अगले ही दिन समाचार पत्रों में छपा की, विजय ने वह टैक्सी बरामद कर ली है, जिसे कातिल ने प्रयोग किया था।
टैक्सी के मालिक रूप सुंदर को एक रात हवालात में रखने के बाद सुबह छोड़ दिया गया था। चालक जुम्मन गायब था। रोमेश के होंठों पर मुस्कुराहट उभर आई, इसका मतलब मायादास को पहले से पता था कि टैक्सी का सुराग पुलिस को मिल गया है, और जुम्मन कभी भी आत्मसमर्पण कर सकता है।
जुम्मन के हाथ आते ही बटाला का नकाब भी उतर जायेगा। शाम को रोमेश से विजय खुद मिला।
''तुम्हारी बात सच निकली रोमेश।''
"कुछ मिला ?"
"जुम्मन ने सब बता दिया है।"
"जुम्मन तुम्हारे हाथ आ गया, कब ?"
"वह रात ही हमारे हाथ लग गया था, लेकिन मैंने उसे हवालात में नहीं रखा। बैंडस्टैंड के एक सुनसान बंगले में है।"
"यह तुमने अक्लमंदी की।"
"मगर तुम जुम्मन को कैसे जानते हो?"
"यह छोड़ो, एक बात मैं तुम्हें बताना चाहता था, तुम्हारे थाने का तुम्हारा कोई सहयोगी अपराधियों तक लिंक में है। कौन है, यह तुम पता लगाओगे।''
"मुझे पता लग चुका है। इसलिये तो मैंने जुम्मन से हवालात में पूछताछ नहीं की। बलदेव, सब इंस्पेक्टर बलदेव!
फिलहाल मैंने उसे फील्डवर्क से भी हटा लिया है। जुम्मन ने बटाला का नाम खोल दिया है। स्टेनगन बटाला के पास है, आज रात मैं उसके अड्डे पर धावा बोल दूँगा।"
"वह घाटकोपर में देसी बार चलाता है। मेरे पास उसकी सारी डिटेल आ गई है। चाहो तो रेड पर चल सकते हो।"
''नहीं, यह तुम्हारा काम है और फिर जब तुम बटाला को धर लो, तो जरा मुझसे दूर-दूर ही रहना।"
"क्यों ? क्या उसका भी केस लड़ोगे?''
"नहीं, मैं पेशे के प्रति ईमानदार रहना चाहता हूँ। हालांकि तुम खुद बटाला तक पहुंच गये हो, लेकिन इन लोगों को अगर पता चला कि उस केस के सिलसिले में तुम वहाँ जा रहे हो, तो वे यही समझेंगे कि यह सब मेरा किया धरा है। मैंने तुम्हें लाइन सिर्फ इसलिये दी, क्यों कि तुम गलत दिशा में भटक गये थे। अब सबूत जुटाना तुम्हारा काम है।''
''लेकिन जनाब अगले हफ्ते नया साल शुरू होने वाला है और दस जनवरी को आपकी शादी की वर्षगांठ होती है, याद है।'' इतना कहकर विजय ने सौ-सौ के नोटों की छः गड्डियां रोमेश के हवाले करते हुए कहा, "तुम तो तकाजा भी भूल गये।''
''यार सचमुच तूने याद दिला दिया , मेरे को तो याद भी नहीं था। माय गॉड, सीमा वैसे भी आजकल मुझसे बहुत कम बोलती है। मैरिज एनिवर्सरी पर मैं उसे गिफ्ट दूँगा इस बार।''
घाटकोपर की एक बस्ती में। बटाला का अवैध शराब का बार चलता था । बटाला देसी बार के ऊपर वाले कमरे में बैठा था। उसकी बगल में एक पेशेवर औरत थी, जिसके साथ वह रमी खेल रहा था। पास ही एक बोतल रखी थी। तभी एक चेला अंदर आया।
"मुखबिर का खबर आयेला।''
"क्या?"
"पुलिस का रेड इधर पड़ेला।''
"आने दे कोई नया इंस्पेक्टर होगा। जब आजाये तो बोल देना, ऊपर कू आए, मेरे से बात कर लेने का क्या, अब फुट जा।
'तभी पुलिस का सायरन बजा। बटाला पर कोई असर नहीं पड़ा। वह उसी प्रकार रमी खेलता रहा। खबर देने वाला नीचे चला गया। कुछ ही देर में बार में तोड़फोड़ की आवाजें गूंजने लगी। चेला फिर हाँफता काँपता ऊपर आया।
"इंस्पेक्टर विजय है। तुमको गिरफ्तार करने आया है।'' बटाला ने उठकर एक झन्नाटेदार थप्पड़ चेले के मुँह पर मारा। अपनी रिवॉल्वर हवा में घुमाई और फिर उसे जेब में डालता उठ खड़ा हुआ। उसी वक्त बटाला ने फोन मिलाने के लिए डायल पर उंगली घुमाई, लेकिन वह चौंक पड़ा, टेलीफो न डेड पड़ा था।
''हमारा काम करने का तरीका कुछ पसंद आया।'' अचानक विजय ने उसी कमरे के दरवाजे पर कदम रखा,
''अब तुम किसी नेता को फोन नहीं मारेगा, थाने चलेगा सीधा।''
''साले ! " बटाला ने रिवॉल्वर निकाली। लेकिन फायर करने से पहले विजय ने एक जोरदार ठोकर बटाला पर रसीद कर दी, बटाला लड़खड़ाया, विजय एकदम चीते की तरह उस पर झपटा और फिर विजय की रिवॉल्वर बटाला के सीने पर थी।
''पुलिस पर गोली चलाएगा साले। “
“मैं तेरे को बर्बाद कर दूँगा। अपुन को ठीक से जान लेने का, नहीं तो नौकरी से हाथ धोलेगा।"
"जनार्दन रेड्डी के कुत्ते।" विजय ने उसे एक ठोकर और जड़ दी,
''इधर पूरी बस्ती को घेरा है मैंने। कोई तेरी मदद को नहीं आएगा, मुम्बई के जितने भी तेरे जैसे लोग हैं, मेरा नाम सुनते ही सब का पेशाब निकल जाता है। सावंत का कत्ल किया तूने, चल।" विजय ने बटाला के हाथों में हथकड़ियां डाल दी।
"ऐ चल भाग यहाँ से।'' विजय ने पेशेवर युवती से कहा। बटाला को गिरफ्तार करके विजय गोरेगांव के लिए चल पड़ा। अभी बटाला से कुछ पूछताछ भी करनी थी, इसी लिये वह उसे लेकर सीधा थाने नहीं गया, बैंडस्टैंड के उसी बंगले में गया, जहाँ जुम्मन बंद था।
"यह तो थाना नहीं है।" "बटाला जी पर यह मेरा प्राइवेट थाना है, साले यहाँ भूत भी नाचने लगते हैं मेरी मार से। अभी तो तेरे से स्टेनगन बरामद करना है।" उसके बाद बटाला की ठुकाई शुरू हो गई। बटाला को अधिक देर तक प्राइवेट कस्टडी में नहीं रखा जा सकता था, विजय ने सुबह जब उसे लॉकअप में बन्द किया, तो स्टेनगन भी बरामद कर ली थी।
अब उसने पूरा मामला तैयार कर लिया था। उसे मालूम था, बटाला को गिरफ्तार करते ही हंगामा होगा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उससे जवाब तलबी कर सकते थे। हुआ भी यही। मामला सीधा आई.जी. के पास पहुँचा। खुद एस.एस.पी. सीधा थाने पहुंच गया।
"आज तक तुम्हारे खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई।" एस.एस.पी. ने कहा,
"इसलिये बटाला को छोड़ दो, तुमने ठाणे जिले में कैसे हाथ डाल दिया, वहाँ की पुलिस…।"
"सर। अगर मैं वहाँ की पुलिस को साथ लेता, तो बटाला हाथ नहीं आता, आखिरी वक्त तक वो यही समझता रहा कि उसी के थाने की पुलिस होगी, अगर उसे जरा भी पता चल जाता कि उसे सावंत मर्डर केस में अरेस्ट किया जा रहा है, तो वह हाथ नहीं आता।"
"सावंत मर्डर केस पहले चंदन, फिर यह बटाला। "
"मैंने स्टेनगन भी बरामद कर ली।"
"देखो इंस्पेक्टर विजय, आई.जी. का दबाव है, घाटकोपर की उस बस्ती में तुम्हारे खिलाफ नारे लगा रहे हैं, कोई ताज्जुब नहीं कि जुलूस निकलने लगे, तुम पुलिस इंस्पेक्टर हो, इसका यह मतलब नहीं कि…।"
"सर प्लीज, आप केवल रिजल्ट देखिये, ये मत देखिये कि मैंने कौन सा काम किस तरह किया है। यही शख्स सावंत का हत्यारा है। मैं इसका रिमांड लूँगा, ताकि असली हत्यारे को भी फंसाया जा सके।"
"इसकी सावंत से क्या दुश्मनी थी ?"
"इसकी नहीं, यह तो मोहरा भी नहीं है, प्यादा भर है। इसने शूट किया, शूट किसी और ने करवाया, मैं मुकदमा दायर कर चुका हूँ, अब रिमांड लूँगा और उस शख्स को गिरफ्तार करूंगा, जिसने कत्ल करवाया है।"
विजय ने एस.एस.पी. की एक न सुनी। बटाला लॉकअप में बन्द था।
"मुझे मालूम है सर, मेरी सर्विस भी जा सकती है, लेकिन इस थाने का चार्ज और सावंत मर्डर केस की तफ्तीश कर रहा हूँ मैं, जब तक मेरी वर्दी मेरे पास है, पुलिस महकमे का बड़े से बड़ा ऑफिसर भी मुझे काम करने से नहीं रोक सकता।"
"ठीक है, आई.जी . के सामने मैंने तुम्हारी बहुत तारीफ की थी, अब अपनी तारीफ खुद कर लेना, लेकिन मेरी व्यक्तिगत सलाह यही है कि…।"
"सॉरी सर।"
और एस.एस.पी. पैर पटकते हुए चला गया।
जारी रहेगा…….![]()
Thanks brotherNice update....

Bohot badiya update# 4
अपना फ्रेन्ड जगाधरी बहुत अच्छा आदमी था नी , सण्डे का दिन हमारा छुट्टी का दिन होता , दोनों यार शतरंज खेलता और दारू पीता , हम शतरंज खेलता , कबी वो जीतता कबी हम जीतता , कबी __________हम जीतता कबी वो , शतरंज भी अजीब खेल है सांई! हम दोनों बिल्कुल बराबर का खिलाड़ी , एकदम बराबर का । कबी वोजीतता कबी … ।"
"मुझे तुम्हारी शतरंज की जीत हार से कुछ लेना-देना नहीं समझे ।" विजय ने बीच में उसे टोकते हुए कहा ,
"तुम आज यहाँ शतरंज खेलने आये थे? और तुमने यहाँ आकर दारू पी थी।"
"कसम खा के बोलता सांई, आज दारू नहीं पी , अरे पीता किसके साथ, जगाधरी तो रहा नहीं , आप दारू की बात करता ।
" हीरा लाल की आंखों में एका एक आँसू छलक आए, "हम दोनों हफ्ते में एक दिन पीता , बस एक दिन । अब तो हफ्ते में एक दिन क्या महीने में भी एक दिन पीना नहीं होयेगा सांई।"
"शटअप !"
हीरालाल इस प्रकार चुप हो गया , जैसे ब्रेक लग गया हो ।
"जो मैं पूछता हूँ, बस उतना ही जवाब देना , वरना अन्दर कर दूँगा ।"
हीरा लाल के चेहरे से हवाइयां उड़ने लगीं ।
"आज तुम यहाँ शतरंज खेलने आये थे?"
"आज नहीं खेला , ठीक वक्त पर जब मैं आया , घंटी बजाया फ्लैट की , तभी अन्दर गोली चलने का आवाज हुआ, पहले मैं समझा कोई पटाखा छूटा होगा , हड़बड़ाहट में मैंने दरवाजे पर धक्का मारा , दरवाजा खुला था , जगाधरी को पुकारता हुआ उस कमरे के अन्दर घुसा तो देखा सांई ! बस जो देखा , कभी नहीं देखा पहले । मेरा यार राम को प्यारा हो गया नी।
मैं उसका हालत देखके भागा और सबसे पेले आपको फोन किया नी ।"
"क्या उस वक्त तक जगाधरी मर चुका था ?"
"देखने से यही लगता था , अबी जैसा देखने से लगता ।"
"तुम्हारे अलावा कमरे में और कोई नहीं गया ?"
"नहीं जी , मैं तो यहीं से फोन मिलाया , फिर दरवाजा बन्द करके बाहर बैठ गया , मैं सोचा के गोली चलाने वाला अन्दर ही कहीं छिप गया होयेगा , मैं दरवाजे पे डट गया सांई।
मेरे यार को मारके साला निकल के दिखाता बाहर, मैं ही उसका खोपड़ा तोड़ देता ।"
"कातिल को तुमने नहीं देखा?"
"देखता तो वो यहाँ लम्बा न पड़ा होता?"
"इस फ्लैट में जगाधरी के अलावा कौन रहता था ?"
"एक नौकर था बस, वो भी दो दिन से छुट्टी पे गया है । उसका यहाँ कोई नहीं था , यह बात जगाधरी ने मुझे बताया था सांई ।"
"सर यह झूठ बोलता है ।" बलदेव बोल उठा , "इसने फायर की आवाज सुनी । उसी वक्त अंदर भी आया और फिर दरवाजा बन्द करके बाहर जम गया । फिर गोली चलाने वाला कहाँ गया ?
मैंने सारा फ्लैट देख मारा है, इस दरवाजे के सिवा बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है, एक खिड़की है, जिस पर ग्रिल लगी है, सलामत है ग्रिल भी ।"
"यही तो मैं पूछता सांई, वो गोली चला के गया किधर ?"
"जगाधरी का पार्टनर कहाँ रहता है ?"
"मैं इतना नहीं जानता सांई, ना उसने कबी बताया । मैंने कभी उसके घर का लोग नहीं देखा , एक-दो बार पूछा, बता के नहीं देता था ।
छ: महीने पहले यह फ्लैट किराये पर लिया।"
"जगाधरी का क्या बिजनेस था ?"
"शेयर मार्केट में दलाली करता था , बस और हम कुछ नहीं जानता , हमारी दोस्ती शतरंज से शुरू हुई, दोनों एक क्लब में मिले, फिर पता लगा वो हमारा पड़ोसी है, उसके बाद यहीं जमने लगी , मगर आदमी बहुत अच्छा था सांई ! हफ्ते में एक दिन पीता था सण्डे को, और मैं भी उसी दिन पीता , कबी वो जीतता कबी मैं ।"
"कबी मैं जीतता कबी वो ।" विजय चीख पड़ा ।
"आपको कैसे मालूम जी ।" हीरालाल ने एक बार फिर चश्मा दुरुस्त किया ।
"अब तुम ड्राइंगरूम से बाहर बैठो , कहीं फूटना नहीं , तुम्हारे बयान होंगे ।" विजय ने हीरालाल को बाहर भेज दिया । विजय ने गहरी सांस ली और तफ्तीश शुरू कर दी । कुछ ही देर में फिंगर प्रिंट्स और फोटो वाले भी आ गये । पुलिस कंट्रोल रूम को मर्डर की सूचना दे दी गई थी । ……
उधर :
सण्डे था । सण्डे का दिन रोमेश अपनी पत्नी सीमा के लिए सुरक्षित रखता था , बाथरूम से नहा धो कर नौ बजे वह नाश्ते की टेबिल पर आ गया ।
"डार्लिंग, आज कहाँ का प्रोग्राम है ?"
"पूरे हफ्ते बाद याद आई मेरी ।" सीमा मेज पर नाश्ते की प्लेटें सजाती हुई बोली ।
"क्या करें डार्लिंग, तुम तो जानती ही हो कि कितना काम करना पड़ता है । दिन में कोर्ट, बाकी वक्त इन्वेस्टीगेशन, कई बार तो खतरों से भी जूझना पड़ता है, मुझे इन क्रिमिनल्स से सख्त नफरत है डार्लिंग ।"
"अब यह कोर्ट की बातें बन्द करिये, सण्डे है ।"
"हाँ भई, आज का दिन तुम्हारा होता है, आज के दिन हम जोरू के गुलाम,
किधर का प्रोग्राम बनाया जानेमन ?"
"बहुत दिनों से झावेरी ज्वैलर्स में शॉपिंग करने की सोच रही थी ।"
"झावेरी ज्वैलर्स ।"
रोमेश के हलक में जैसे कुछ फंस गया , "क… क्या खरीदना था ?"
"हीरे की एक अंगूठी , तुमने हनीमून पर वादा किया था कि मुझे हीरे की अंगूठी ला कर दोगे, वही जो झावेरी के शो रूम में लगी है और कुल पचास हजार की है ।"
"म…मारे गये, यह अंगूठी फिर टपक पड़ी ।" रोमेश बड़बड़ाया ।
"क्यों , कुछ फंस गया गले में, लो पानी पीलो ।" सीमा ने पानी का गिलास सामने कर दिया ।
रोमेश एक साँस में पूरा गिलास खाली कर गया । "डार्लिंग गिफ्ट देने का कोई शुभ अवसर भी तो होना चाहिये ना ।"
"पाँच साल हो गये हैं हमारी शादी हुए। इस बीच कम-से-कम पांच शुभ अवसर तो आये ही होंगे ।" सीमा ने व्यंगात्मक स्वर में कहा , "आपको याद है जब हमारे प्यार के शुरुआती दिन थे तो । "
"याद तो सब कुछ है, तुम्हें भी तो बंगला कार वगैरा से बहुत लगाव है।"
"किसको नहीं होता , आप अपने साथी वकीलों की माली हालत पर भी तो नजर डाल लिया कीजिए, उनके पास क्या नहीं है? और एक आप हैं कि आपकी मोटरसाइकिल तक रिटायर नहीं हो पाती ।"
"तल्खी खत्म हो तो बता देना ।" रोमेश उठकर फ्लैट की बालकनी में चला गया । तल्खी खत्म नहीं हुई थी कि फोन की घंटी बज उठी । रोमेश फोन की तरफ बढ़ गया ।
"रोमेश हेयर ।"
"मैं विजय ।" दूसरी तरफ से कहा गया ।
"इंस्पेक्टर, यह सुबह-सुबह कहाँ से बोल रहे हो ?"
''गोरेगांव ईस्ट, संगीता अपार्टमेंट ।"
"किसी का मर्डर हो गया क्या ?"
"तुम्हें कैसे मालूम ।"
"फोन पर गंध आ रही है । संगीता अपार्टमेन्ट में न तो तुम्हारा कोई रिश्तेदार रहता है, न कोई गर्लफ्रेंड, न ही वहाँ कोई शराब का अड्डा चलता है। घड़ी जो समय बता रही है, उसके अनुसार तुम्हें इस वक्त थाने में होना चाहिये था । तुम अपने ही इलाके की किसी और लोकेशन से बोल रहे हो , जिसका साफ मतलब है कि तुम मौका-ए-वारदात पर हो । मुझे फोन किया , इसलिये साफ जाहिर है कत्ल का मामला होगा , चोर डकैतों की लिस्ट तो पुलिस के पास होती ही है । हाँ , हत्यारों की नहीं होती ।"
"गुरु फौरन आ जाओ, मेरी फंसी पड़ी है ।"
"गुरु मानते हो , इसलिये आना ही होगा , लेकिन यार आज सण्डे है ।" दूसरी तरफ से फोन कट चुका था ।
"इन पुलिस वालों की छुट्टी तो वैसे कभी होती ही नहीं ।"
"खासकर विजय की तो हो ही नहीं सकती ।" सीमा बोल पड़ी ,
"जैसे आप, वैसा विजय। आप किसी क्रिमिनल का केस नहीं लड़ते और वह किसी क्रिमिनल को रिश्वत लेकर नहीं छोड़ता ।"
"कोई फतवा हो तो बताओ, वरना मैं देख आऊं क्या मामला है ?"
"जाइये ।"
इतना कहकर सीमा बाथरूम में चली गई । जल्दी ही तैयार होकर रोमेश अपनी मोटरसाइकिल लेकर चल पड़ा । बांद्रा से अंधेरी , अंधेरी से गोरेगांव । रॉयल एनफील्ड की बुलेट गाड़ी को पुलिसिया अंदाज में दौड़ाता हुआ वह पंद्रह मिनट में मौका-ए-वारदात पर पहुंच गया । और फिर जगाधरी के फ्लैट में पहुँचा , जहाँ विजय उसका बेताबी से इन्तजार कर रहाथा ।
कुछ दूसरे सीनियर पुलिस ऑफिसर भी घटना स्थल पर आ चुके थे । उनमें से कुछेक ऐसे भी थे, जो रोमेश को पसन्द नहीं करते थे।
"मकतूल की लाश कहाँ है? " रोमेश ने विजय से पूछा । विजय, रोमेश को लाश वाले कमरे में ले गया ।
"जब तुम उस कमरे में दाखिल हुए, क्या सब इसी तरह था , कोई चेजिंग तो नहीं हुई है?" रोमेश ने कमरे में सरसरी नजर दौड़ाते हुए कहा ।
"सिर्फ एक चेंजिग है, रिवॉल्वर हमने अपने कब्जे में ले ली है ।"
"यानि कि जिस रिवॉल्वर से कत्ल हुआ ।"
"अभी यह कहना मुनासिब न होगा कि कत्ल उसी से हुआ, लेकिन वह यहाँ उसे नीचे पड़ी मिली ।"
"वह जहाँ से उठाई, वहीं रख दो ।" विजय ने बलदेव को संकेत किया , बलदेव ने रिवॉल्वर रख दी ।
"क्या रिवॉल्वर रखने से सिचुऐशन पर फर्क पड़ जायेगा ।" यह बात डी .एस.पी . केसरी नाथ ने कटाक्ष के तौर पर कही ।
"हंड्रेड परसेन्ट ।"
रोमेश बोला ,"धारा भी बदल सकती है ।"
"यानि कि मर्डर की धारा 302 की जगह कुछ और बनती है ।"
"सर प्लीज ।"
विजय ने केसरी नाथ को टिप्पणियां करने से रोका ।
"एनी वे ।"
केसरी नाथ ड्राइंगरूम में चला गया ,
"जो भी रिजल्ट निकले, मेरे को इन्फॉर्म करो ।"
"यह दरवा जा बन्द कर दो बलदेव ।" रोमेश ने कहा ।
बलदेव, रोमेश की जांबाजी से वाकिफ था, और यह भी जानता था कि विजय तभी रोमेश की मदद लेता है, जब मामला सचमुच पेचीदा हो । कत्ल के मामले सुलझाने में उसे मुम्बई पुलिस का मददगार शरलक होम्स कहा जाता था ।
रोमेश इस काम की कोई फीस नहीं लेता था । बतौर शौक, यही नहीं बल्कि गुत्थी सुलझाने में उसे इस बात का सुकून मिलता था कि कोई निर्दोष नहीं पकड़ा गया ।
दरवाजा बन्द होने के बाद एक बार फिर रोमेश ने कमरे का निरीक्षण शुरू कर दिया था। विजय सारी घटना पर प्रकाश डालता जा रहा था । जब वह सब बता चुका , तो बोला ,
"अब बताओ कातिल कोई हवा तो है नहीं कि निकल गया होगा । या तो हीरालाल गलत बयानी कर रहा है, या वह खुद ।"
"किसी ठोस निर्णय के बिना हीरालाल को लपेटना उचित नहीं होगा ।" रोमेश ने बीच में ही टोक दिया .
"ऐसा आमतौर पर होता नहीं है कि कातिल कत्ल के बाद खुद गले में फंदा डालने वाली परिस्थितियां बना दे ।"
"मगर दरवाजा एक ही है, और धमाके के समय हीरा लाल द्वार पर था , फिर वह यहाँ आया । ओह एक बात हो सकती है ।"
"क्या ?"
"कत्ल करने के बाद कातिल इस कमरे से बाहर ड्राइंगरूम में या बाथरूम में छिपा , हीरालाल जैसे ही इसके अन्दर आया , वह बाहर निकल गया होगा । लेकिन उसने रिवॉल्वर यहाँ फेंक क्यों दी ? किसी मुसीबत से निपटने के लिए उसे रिवॉल्वर तो अपने पास रखनी चाहिये थी । ऐसे में जबकि हीरालाल दरवाजे पर था ।"
रोमेश ने रिवॉल्वर रूमाल से लपेटकर उठा ली । उसकी नाल सूंघी , गर्दन हिलाई । उसका चेम्बर चेक किया । चेम्बर में अभी भी पांच गोलियां थीं , एक ही चली थी । बारूद की गंध से पता चलता था कि गोली उसी से चली थी । फिर रोमेश का ध्यान दरवाजे पर लगी चंद कीलों पर पड़ा । उसने दरवाजे से सीधा लाश को देखा और फिर लाश के पास पहुंच गया । उसके बाद वह घुटने के बल बैठ गया और फर्श पर कुछ कुरेदता रहा । फिर रबड़ की एक डोरी उठा ते ही उसके होंठ गोल हो गये । वह सीधा खड़ा हो गया ।
"माई डियर पुलिस ऑफिसर । अब आप चाहें, तो शव को सील करके पोस्टमार्टम के लिए भेज सकते हैं ।"
इंस्पेक्टर विजय समझ गया कि जो गुत्थी वह नहीं सुलझा पा रहा था , वह सुलझ चुकी है ।
"हुआ क्या , लाश तो सील होगी ही । पंचनामा भी होगा , पोस्टमार्टम भी होगा । मगर बतौर कातिल मैं किसे गिरफ्तार करूं ? मैं जानने के लिए बेचैन हूँ, “रोमेश” आखिर कत्ल किसने किया? और कातिल कैसे निकल भागा ?"
"कातिल कहीं नहीं गया ।"
''क्या मतलब ?"
"माईडियर फ्रेन्ड, मकतूल भी यहीं है और कातिल भी , लेकिन अफसोस एक ही बात का है कि सारे सबूत उसके खिलाफ होते हुए भी तुम उसे गिरफ्तार न कर पाओगे ?"
जारी रहेगा...![]()
Bilkul bhai, aage dekho abhi kya hota haiTo aakhir kar Romesh ki help se Vijay ne Batala ko giraftaar ker leya or ache se kuttaaa bhi ab dekhte hai kaise asli mujrim ko giraft me leta hai Vijay or Romesh or ky ky karta hai
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....#11.
रोमेश डिनर के बाद फ्लैट पर पहुँचा, तो उसके पास सारी बातचीत का टेप मौजूद था। फिर भी उसने विजय को कुछ नहीं बता या। अगले ही दिन समाचार पत्रों में छपा की, विजय ने वह टैक्सी बरामद कर ली है, जिसे कातिल ने प्रयोग किया था।
टैक्सी के मालिक रूप सुंदर को एक रात हवालात में रखने के बाद सुबह छोड़ दिया गया था। चालक जुम्मन गायब था। रोमेश के होंठों पर मुस्कुराहट उभर आई, इसका मतलब मायादास को पहले से पता था कि टैक्सी का सुराग पुलिस को मिल गया है, और जुम्मन कभी भी आत्मसमर्पण कर सकता है।
जुम्मन के हाथ आते ही बटाला का नकाब भी उतर जायेगा। शाम को रोमेश से विजय खुद मिला।
''तुम्हारी बात सच निकली रोमेश।''
"कुछ मिला ?"
"जुम्मन ने सब बता दिया है।"
"जुम्मन तुम्हारे हाथ आ गया, कब ?"
"वह रात ही हमारे हाथ लग गया था, लेकिन मैंने उसे हवालात में नहीं रखा। बैंडस्टैंड के एक सुनसान बंगले में है।"
"यह तुमने अक्लमंदी की।"
"मगर तुम जुम्मन को कैसे जानते हो?"
"यह छोड़ो, एक बात मैं तुम्हें बताना चाहता था, तुम्हारे थाने का तुम्हारा कोई सहयोगी अपराधियों तक लिंक में है। कौन है, यह तुम पता लगाओगे।''
"मुझे पता लग चुका है। इसलिये तो मैंने जुम्मन से हवालात में पूछताछ नहीं की। बलदेव, सब इंस्पेक्टर बलदेव!
फिलहाल मैंने उसे फील्डवर्क से भी हटा लिया है। जुम्मन ने बटाला का नाम खोल दिया है। स्टेनगन बटाला के पास है, आज रात मैं उसके अड्डे पर धावा बोल दूँगा।"
"वह घाटकोपर में देसी बार चलाता है। मेरे पास उसकी सारी डिटेल आ गई है। चाहो तो रेड पर चल सकते हो।"
''नहीं, यह तुम्हारा काम है और फिर जब तुम बटाला को धर लो, तो जरा मुझसे दूर-दूर ही रहना।"
"क्यों ? क्या उसका भी केस लड़ोगे?''
"नहीं, मैं पेशे के प्रति ईमानदार रहना चाहता हूँ। हालांकि तुम खुद बटाला तक पहुंच गये हो, लेकिन इन लोगों को अगर पता चला कि उस केस के सिलसिले में तुम वहाँ जा रहे हो, तो वे यही समझेंगे कि यह सब मेरा किया धरा है। मैंने तुम्हें लाइन सिर्फ इसलिये दी, क्यों कि तुम गलत दिशा में भटक गये थे। अब सबूत जुटाना तुम्हारा काम है।''
''लेकिन जनाब अगले हफ्ते नया साल शुरू होने वाला है और दस जनवरी को आपकी शादी की वर्षगांठ होती है, याद है।'' इतना कहकर विजय ने सौ-सौ के नोटों की छः गड्डियां रोमेश के हवाले करते हुए कहा, "तुम तो तकाजा भी भूल गये।''
''यार सचमुच तूने याद दिला दिया , मेरे को तो याद भी नहीं था। माय गॉड, सीमा वैसे भी आजकल मुझसे बहुत कम बोलती है। मैरिज एनिवर्सरी पर मैं उसे गिफ्ट दूँगा इस बार।''
घाटकोपर की एक बस्ती में। बटाला का अवैध शराब का बार चलता था । बटाला देसी बार के ऊपर वाले कमरे में बैठा था। उसकी बगल में एक पेशेवर औरत थी, जिसके साथ वह रमी खेल रहा था। पास ही एक बोतल रखी थी। तभी एक चेला अंदर आया।
"मुखबिर का खबर आयेला।''
"क्या?"
"पुलिस का रेड इधर पड़ेला।''
"आने दे कोई नया इंस्पेक्टर होगा। जब आजाये तो बोल देना, ऊपर कू आए, मेरे से बात कर लेने का क्या, अब फुट जा।
'तभी पुलिस का सायरन बजा। बटाला पर कोई असर नहीं पड़ा। वह उसी प्रकार रमी खेलता रहा। खबर देने वाला नीचे चला गया। कुछ ही देर में बार में तोड़फोड़ की आवाजें गूंजने लगी। चेला फिर हाँफता काँपता ऊपर आया।
"इंस्पेक्टर विजय है। तुमको गिरफ्तार करने आया है।'' बटाला ने उठकर एक झन्नाटेदार थप्पड़ चेले के मुँह पर मारा। अपनी रिवॉल्वर हवा में घुमाई और फिर उसे जेब में डालता उठ खड़ा हुआ। उसी वक्त बटाला ने फोन मिलाने के लिए डायल पर उंगली घुमाई, लेकिन वह चौंक पड़ा, टेलीफो न डेड पड़ा था।
''हमारा काम करने का तरीका कुछ पसंद आया।'' अचानक विजय ने उसी कमरे के दरवाजे पर कदम रखा,
''अब तुम किसी नेता को फोन नहीं मारेगा, थाने चलेगा सीधा।''
''साले ! " बटाला ने रिवॉल्वर निकाली। लेकिन फायर करने से पहले विजय ने एक जोरदार ठोकर बटाला पर रसीद कर दी, बटाला लड़खड़ाया, विजय एकदम चीते की तरह उस पर झपटा और फिर विजय की रिवॉल्वर बटाला के सीने पर थी।
''पुलिस पर गोली चलाएगा साले। “
“मैं तेरे को बर्बाद कर दूँगा। अपुन को ठीक से जान लेने का, नहीं तो नौकरी से हाथ धोलेगा।"
"जनार्दन रेड्डी के कुत्ते।" विजय ने उसे एक ठोकर और जड़ दी,
''इधर पूरी बस्ती को घेरा है मैंने। कोई तेरी मदद को नहीं आएगा, मुम्बई के जितने भी तेरे जैसे लोग हैं, मेरा नाम सुनते ही सब का पेशाब निकल जाता है। सावंत का कत्ल किया तूने, चल।" विजय ने बटाला के हाथों में हथकड़ियां डाल दी।
"ऐ चल भाग यहाँ से।'' विजय ने पेशेवर युवती से कहा। बटाला को गिरफ्तार करके विजय गोरेगांव के लिए चल पड़ा। अभी बटाला से कुछ पूछताछ भी करनी थी, इसी लिये वह उसे लेकर सीधा थाने नहीं गया, बैंडस्टैंड के उसी बंगले में गया, जहाँ जुम्मन बंद था।
"यह तो थाना नहीं है।" "बटाला जी पर यह मेरा प्राइवेट थाना है, साले यहाँ भूत भी नाचने लगते हैं मेरी मार से। अभी तो तेरे से स्टेनगन बरामद करना है।" उसके बाद बटाला की ठुकाई शुरू हो गई। बटाला को अधिक देर तक प्राइवेट कस्टडी में नहीं रखा जा सकता था, विजय ने सुबह जब उसे लॉकअप में बन्द किया, तो स्टेनगन भी बरामद कर ली थी।
अब उसने पूरा मामला तैयार कर लिया था। उसे मालूम था, बटाला को गिरफ्तार करते ही हंगामा होगा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उससे जवाब तलबी कर सकते थे। हुआ भी यही। मामला सीधा आई.जी. के पास पहुँचा। खुद एस.एस.पी. सीधा थाने पहुंच गया।
"आज तक तुम्हारे खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई।" एस.एस.पी. ने कहा,
"इसलिये बटाला को छोड़ दो, तुमने ठाणे जिले में कैसे हाथ डाल दिया, वहाँ की पुलिस…।"
"सर। अगर मैं वहाँ की पुलिस को साथ लेता, तो बटाला हाथ नहीं आता, आखिरी वक्त तक वो यही समझता रहा कि उसी के थाने की पुलिस होगी, अगर उसे जरा भी पता चल जाता कि उसे सावंत मर्डर केस में अरेस्ट किया जा रहा है, तो वह हाथ नहीं आता।"
"सावंत मर्डर केस पहले चंदन, फिर यह बटाला। "
"मैंने स्टेनगन भी बरामद कर ली।"
"देखो इंस्पेक्टर विजय, आई.जी. का दबाव है, घाटकोपर की उस बस्ती में तुम्हारे खिलाफ नारे लगा रहे हैं, कोई ताज्जुब नहीं कि जुलूस निकलने लगे, तुम पुलिस इंस्पेक्टर हो, इसका यह मतलब नहीं कि…।"
"सर प्लीज, आप केवल रिजल्ट देखिये, ये मत देखिये कि मैंने कौन सा काम किस तरह किया है। यही शख्स सावंत का हत्यारा है। मैं इसका रिमांड लूँगा, ताकि असली हत्यारे को भी फंसाया जा सके।"
"इसकी सावंत से क्या दुश्मनी थी ?"
"इसकी नहीं, यह तो मोहरा भी नहीं है, प्यादा भर है। इसने शूट किया, शूट किसी और ने करवाया, मैं मुकदमा दायर कर चुका हूँ, अब रिमांड लूँगा और उस शख्स को गिरफ्तार करूंगा, जिसने कत्ल करवाया है।"
विजय ने एस.एस.पी. की एक न सुनी। बटाला लॉकअप में बन्द था।
"मुझे मालूम है सर, मेरी सर्विस भी जा सकती है, लेकिन इस थाने का चार्ज और सावंत मर्डर केस की तफ्तीश कर रहा हूँ मैं, जब तक मेरी वर्दी मेरे पास है, पुलिस महकमे का बड़े से बड़ा ऑफिसर भी मुझे काम करने से नहीं रोक सकता।"
"ठीक है, आई.जी . के सामने मैंने तुम्हारी बहुत तारीफ की थी, अब अपनी तारीफ खुद कर लेना, लेकिन मेरी व्यक्तिगत सलाह यही है कि…।"
"सॉरी सर।"
और एस.एस.पी. पैर पटकते हुए चला गया।
जारी रहेगा…….![]()
Superb update# 5
"क्या बात कर रहे हो भाई, अपने मामले में मैं कितना सख्त हूँ, यह तो तुम भी जानते हो।"
"यही तो मुश्किल है कि इस बार तुम हर जगह से हारोगे, कातिल सामने होगा और तुम उसे गिरफ्तार नहीं कर सकोगे ।"
"साफ-साफ बताओ यार, पहेली मत बुझाओ ।"
"तो सुनो , जो मकतूल है, वही कातिल भी है ।"
"क… क्या मतलब ? माई गॉड ! मगर कैसे ? वह यहाँ और रिवॉल्वर वहाँ ? हाउ इज इट पॉसिबल ?
आत्महत्या करने के बाद वह रिवॉल्वर इतनी दूर कैसे फेंक सकता है ? या तो उसके हाथ में होती या मेज पर ? नहीं तो ज्यादा-से-ज्यादा उसके पैरों के पास ।
कहीं तुम यह तो नहीं कहना चाहते कि आत्महत्या के बाद किसी ने रिवॉल्वर उस तरफ फेंक दी होगी ।"
"यार तुम तो हजा रों सवाल किये जा रहे हो । कभी-कभी दिमाग के घोड़े भी दौड़ा लिया करो , तुमने वह दरवाजा देखा ।" दरवा जा बन्द था ।
"हाँ , देखा ।"
"इस किस्म के फ्लैटों में रहने वाले लोग क्या दरवाजों पर इस तरह कीलें ठोककर रखते हैं। कीलें तो झोंपड़पट्टी वाले भी अपने दरवाजों पर नहीं ठोकते ।" विजय ने उन कीलों को देखा ।
"मगर इससे क्या हल निकला ?"
"रिवॉल्वर दरवाजे के पास गिरी हुई थी , लो पहले इसका चेम्बर खाली करके गोलियां अपने कब्जे में करो , फिर बताता हूँ ।"
विजय ने चेम्बर खाली कर दिया । खाली रिवॉल्वर की मूठ को रोमेश ने उन कीलों पर फिक्स किया , रिवॉल्वर कीलों पर अटक गया ।
''अब अगर इसकी नाल से गोली निकलती है, तो कहाँ पड़नी चाहिये ?" रोमेश ने पूछा ।
"ओ गॉड ! गोली सीधा उसी कुर्सी पर पड़ेगी , जहाँ मृतक मौजूद है ।"
"बिल्कुल ठीक ! यह भी कि गोली उसी जगह लगेगी , जहाँ इस शख्स के लगी हुई है । वह अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिला । कुर्सी के पुश्ते से उसका सिर उसी पोजीशन में है । वह उसी स्थिति में मरा है ।
उसने रिवॉल्वर का ट्रिगर दबाया , गोली चली और सीधा उसके मस्तक को फोड़ती चली गई ।"
"लेकिन सवाल अब भी वही है, उसने रिवॉल्वर का ट्रिगर दबाया कैसे ?"
"रबड़ की इस डोरी से ।"
रोमेश में एकपतली डोरी दिखाई,
"यह डोरी इस मेज के नीचे पड़ी थी”
उसने डोरी का एक सिरा ट्रिगर पर मिलाया , दूसरा सिरा खुद पकड़कर धीरे-धीरे डोरी खींची । जैसे ही तनाव बढ़ा , डोरी ने ट्रिगर दबा दिया । गोली चलने पर रिवॉल्वर को झटका लगा । साथ ही डोरी का बंधन भी ट्रिगर से छूट गया , रिवॉल्वर नीचे गिर गई और मृतक के मरते ही डोरी का दूसरा सिरा उसके हाथ से भी निकल गया।धमाके की आवाज सुनकर तुरन्त ही हीरालाल अन्दर आया, और बाकी वही हुआ, जो वह कहता है ।"
"ओ रियली ! यू आर जीनियस मैन रोमेश ! इस सारे मामले ने मेरे तो छक्के ही छुड़ा दिये । मगर इस शख्स ने आत्महत्या की यह तरकीब क्यों सोची और यह बिसात पर बिछे मोहरे, दो गिलास, व्हिस्की की बोतल यह सब क्या है ?"
"मरने से पहले उसने यह कौशिश की, कि यह मामला कत्ल का बन जाये और शायद यह भी सोच लिया था कि हीरा लाल पकड़ा जायेगा ,
हीरा लाल ने डोर नॉक किया तो वह मरने के लिए तैयार बैठा था ।"
"मगर वजह क्या हो सकती है ?"
"वजह तुम तलाश करो , क्या सब कुछ मैं ही करता फिरूंगा । कुछ तुम भी तो करके दिखाओ माई डियर पुलिसमैन ।"
इतना कहकर रोमेश ने दरवाजा खोला और बाहर निकला चला गया । अगले दिन वजय का फोन रोमेश को मिला ।
"वही स्टोरी है, असल में उसे जबरदस्त घाटा हो चुका था उसकी लाइफ इंश्योरेंस की कुछ पॉलिसी थी, जगाधरी और उसकी पत्नी में कुछ सालों से अनबन थी , जगाधरी घर नहीं जाता था ।
उसकी फैमिली पूना में रहती है, और उसकी पत्नी वहाँ टीचर है । इसके दो बच्चे भी हैं, दोनों माँ के साथ रहते हैं, जगाधरी की कमाई का वह एक पैसा भी नहीं लेते थे, जगाधरी काफी मालदार व्यक्ति था , फिर वह शेयर के धंधों में सब कुछ गंवा बैठा और पूरी तरह कर्जदार भी हो गया , इसका सब कुछ बिक चुका था । बस उसकी इंश्योरेंस की पॉलिसियां थीं , इसलिये वह चाहता था कि उसकी मौत का नाटक कत्ल की वारदात में बदल जाये, तो पॉलिसी कैश हो जायेगी, और उसकी मौत के बाद एक मोटी रकम बीवी - बच्चों को मिल जायेगी ।"
"बड़ी ट्रेजिकल स्टोरी है, वह अपने बीवी -बच्चों को चाहता था ।" रोमेश बोला ।
"हाँ , ऐसा ही है ।"
"बहरहाल तुम्हारा बहुत-बहुत शुक्रिया, तुमने गुत्थी सुलझा दी , अगर मेरी जगह कोई और होता , तो शायद जो स्टोरी जगाधरी बनाना चाहता था , वह अखबारों में छपी होती ।"
"मैं कचहरी जा रहा हूँ, एक दिलचस्प मुकदमे की पैरवी करने । जरा आ जाना ।"
इतना कहकर रोमेश ने फोन काट दिया ,
"सेम स्टोरी ।"
रोमश के होंठ गोल हो गये । वह कोर्ट जाने के लिए बिल्कुल तैयार खड़ा था, और कानून की एक मोटी किताब में कुछ मार्क कर रखा था । उसके बाद उसने दो-तीन लॉ बुक उठाई और फ्लैट से बाहर आ गया । श्यामू मोटर साइकिल साफ कर रहा था ।
"श्यामू तूने कभी अपना बीमा करवाया ?"
"नहीं तो साब, क्या करना बीमा करके, जो रुपया अपने काम न आये, वह किस काम का और फिर साब, मेरी अभी शादी ही कहाँ हुई ।"
"ओहो यह तो मैं भूल ही गया था , तेरी उम्र क्या है ?"
"उम्र मत पूछो साब, रोना आता है ।"
श्यामू, रोमेश का घरेलू नौकर था । जो उसे तनख्वाह मिलती थी , सब खर्च कर देता था। अच्छे कपड़े पहनना उसका शौक था, और एक फिल्म को कम-से-कम तीन बार तो देखता ही था । जो फिल्म केवल बालिगों के लिए होतीं , उन्हें तो वह दस-दस बार देखता था । रोमेश कोर्ट के लिए रवाना हो गया ।
रोमेश का संक्षिप्त नाम रोमी था, और रोमी के नाम से उसे सारा कोर्ट बुलाता था। कोर्ट के परिसर में उस समय जबरदस्त हलचल होती थी , जब रोमी का मुकद्दमा होता । उसकी बहस सुनने के लिए अन्य वकील भी आते थे और खासी भीड़ रहती थी ।
रोमी जब अपने चैम्बर में पहुँचा , तो वैशाली वहाँ उसकी प्रतीक्षा कर रही थी । वैशाली को नमस्ते का जवाब देने के बाद वह अपनी सीट पर बैठा, और फाइलें तलब करने लगा । असिस्टेंट उसे घेरे हुए थे ।
ग्यारह बजकर चालीस मिनट पर वह कोर्ट में पहुँचा । उस कोर्ट में आज एक अद्भुत मुकदमे की कार्यवाही होनी थी । कोर्ट में पेश हो रहा था इकबालिया मुलजिम सोमू उर्फ़ सोमदत्त ।
वैशाली वहाँ पहले ही पहुंच गयी थी, और इंस्पेक्टर विजय भी आ गया था, वो वैशाली के बराबर बैठा था । दोनों को बातें करता देख रोमी मुस्कराया ।
एक सीट पर राजदान बैठा था । रोमी को कोर्ट में आता देखकर वह चौंका । उसने बुरा - सा मुँह बनाया , दूसरे लोगों में भी काना फूसी होने लगी , क्या रोमी सोमदत्त की पैरवी पर आया है ?
"अगर उसने वकालतनामा भरा तो इस बार मुँह की खायेगा ।" राजदान किसी से कह रहा था ,
"मुलजिम अपने जुर्म का इकबाल कर चुका है ।"
उसी समय सोमू को अदालत में पेश किया गया । राजदान उठ खड़ा हुआ। न्यायाधीश ने मेज पर हथौड़ी की चोट की और अदालत की कार्यवा ही शुरू करने का हुक्म दिया ।
"इकबालिया मुलजिम सोमू के बारे में किसी प्रकार की बहस मुनासिब नहीं होगी , इकबाले जुर्म करने के बाद केवल खाना पूर्ति शेष रह जाती है । मेरे ख्याल से इस केस में कोई मुद्दा शेष नहीं रह गया है, अतः महामहिम के फैसले का इन्तजार है ।"
"आई ऑब्जेक्ट योर ऑनर !"
रोमी उठ खड़ा हुआ और फिर उसने अपना वकालतनामा सोमू के पक्ष में पेश किया ,
"मुझे सोमू की पैरवी की इजाजत दी जाये ।"
"इजाजत का प्रश्न ही नहीं उठता , वह अपने जुर्म का इकबाल कर चुका है । अब उसमें पैरवी या बहस के मुद्दे कहाँ से आ पड़े ?"
"शायद मेरे अजीज दोस्त राजदान को नहीं मालूम, किसी व्यक्ति के जुर्मस्वीकार कर लेने से ही जुर्म साबित नहीं हो जाता । इकबाले जुर्म के बाद भी पुलिस को उसे साबित करना होता है और पुलिस ने ऐसी कोई कार्यवाही नहीं की है । यदि मुलजिम जुर्म का इकबाल करता है, तो उसे दोषी नहीं माना जा सकता , ठीक उसी तरह जैसे इकबाले-जुर्म न करने पर उसे निर्दोष नहीं माना जाता।"
रोमी ने अपनी लॉ बुक से न्यायाधीश को एक धारा दिखाते हुए कहा ,
"अगर आवश्यकता हो , तो आप इसका अध्ययन कर लें ।"
अदालत में सनसनी फैल गई । यह पहला अवसर था , जब रोमी ने ऐसा केस हाथ में लिया था , जिसका मुलजिम अपने जुर्म का इक़बाल कर चुका था ।
"इजाजत दी जाती है ।"
न्यायाधीश ने कहा । न्यायाधीश ने रोमी का वकालतनामा स्वीकार कर लिया ।
"सबूत पक्ष को आदेश दिया जाता है कि वह मुलजिम सोमू पर जुर्म साबित करने की कार्यवाही मुकम्मल करे और एडवोकेट रोमेश सक्सेना को डिफेन्स का पूरा अधिकार दिया जाता है ।"
न्यायाधीश ने यह आदेश पारित करके एक सप्ताह बाद की तारीख कर दी ।
"इस बार मात होनी तय है, रोमी साहब ।"
राजदान ने बाहर निकलते हुए कहा ।
"हम साबित भी कर देंगे ।"
"मात किसकी होनी है, यह आप अच्छी तरह जानते हैं राजदान साहब। आपकी जिन्दगी में अदालत में जब-जब मेरा सामना होगा , तब शिकस्त ही आपका मुकद्दर होगी ।
मैं इस मुकदमे को लम्बा नहीं जाने दूँगा , तुम एक दो तारीख से ज्यादा नहीं खींच पाओगे और वह बरी हो जायेगा ।"
रोमेश ने विजय और वैशाली को अपने चैम्बर में आने के लिए कहा । दोनों चैम्बर में आ गये ।
"क्या तुम लोग एक-दूसरे से परिचित हो ?" रोमी ने पूछा ।
"हाँ , हम बड़ौदा में एक साथ पढ़े हैं ।" विजय बोला ।
"और आपसे मदद लेने की सलाह इन्होंने ही दी थी ।" वैशाली बोली ।
"भई वाह, यह तुमने पहले क्यों नहीं बताया ।"
"क्यों कि इन्होंने यह भी कहा था कि आपके मामले में कोई सिफारिश जोर नहीं मारती।"
"वैशाली लॉ कर रही है और तुम्हारी सरपरस्ती में कुछ बनना चाहती है ।"
"ओह बात यहाँ तक है ।" रोमी मुस्कुराया ।
"बात तो इससे भी आगे तक है ।" विजय हँसकर बोला ।
"अच्छा , यह बातें तो होती रहेंगी । मैंने तुम्हें आज इसलिये बुलाया था कि इस मामले में तुम्हारी मदद ले सकूं ।"
"ओह श्योर, क्या करना है हुक्म करो।"
"मुझे करुण पटेल चाहिये हर सूरत में ।"
"वह शख्स जिसने एक लाख रुपया दिया था ।"
"हाँ वही , वैशाली ने उसका जो पता मुझे बताया था , वह फर्जी पता है, और मेरी अपनी इन्वेस्टीगेशन के अनुसार यह कोई जरायमपेशा व्यक्ति भी नहीं है, न ही वह सोमू का परिचित है ।
जेल में मेरा एक आदमी सोमू को काफी टटोल चुका है, हमने इस मामले में एक कैदी से मदद ली थी और कैदी द्वारा जिन बातों का पता चला , उसी को ध्यान में रखकर मैंने मुकदमा हाथ में लिया है । फिलहाल मुझे करुण पटेल की जरूरत है ।
सेठ कमलनाथ के विश्वासपात्र लोगों में यह शख्स तुम्हें मिल जायेगा , उसे दबोचने के मामले में तुम पुलिसिया डंडा भी फेर सकते हो । बस यह बात ध्यान रखने की है कि वह सेठ कमलनाथ का कोई विश्वास पात्र होगा , हुलिया तुम्हें वैशाली से पता चल जायेगा ।"
"चिन्ता न करो , मैं उसे हर हालत में खोज निकालूंगा और जैसे ही वह मेरे हत्थे चढ़ेगा , तुम्हें फोन कर दूँगा ।"
विजय ने बड़ी जल्दी सफलता प्राप्त कर ली , तीसरे दिन ही करुण पटेल हाथ आ गया। विजय ने रोमेश को थाने बुला लिया । रोमी जब थाने पहुँचा , तो करुण पटेल हवालात में बंद था ।
"मुझे पकड़ा क्यों गया , क्या किया है मैंने ?"
करुण पटेल गिड़गिड़ा रहा था ,
"मेरा कसूर तो बता दो इंस्पेक्टर साहब ।"
"इसका नाम करुण पटेल नहीं बेंकट करुण है ।" विजय बोला ।
"क्या वैशाली ने इसकी पुष्टि कर ली ।"
"हाँ , उसने दूर से देखकर इसे पहचाना और मैंने धर दबोचा । यह सेठ कमलनाथ का बहनोई लगता है।"
"बस काम बन गया ।"
"लेकिन तुम्हें यह अन्देशा कैसे था कि यह शख्स कमलनाथ का कोई विश्वास पात्र होना चाहिये, आखिर लूटी गई रकम उसके विश्वासपात्र के पास कैसे सोमू रखेगा ?"
"तस्वीर का दूसरा रुख सामने आते ही सब तुम्हारी समझ में आ जायेगा , अब तुम्हें एक काम और करना है ।"
जारी रहेगा....✍
Thank you very much for your amazing support and review ❤ Rekha rani ji,जबरदस्त अपडेट,
विजय ने बहुत अच्छे से सब हैंडल कर लिया है अभी तक लेकिन बटाला को अरेस्ट करने के बाद असली मस्कत करनी पड़ेगी विजय को, अब असली युद्ध शुरू होगा उधर रोमेश खुश है विजय के काम।से लेकिन क्या अब वो खुद सीएम को मना कर पाएगा केस लड़ने से
और विजय ने एक जिगरी दोस्त का फर्ज अदा करते हुए उसे समय से याद दिलाते हुए पैसे भी वापिस।दे।दिए।है
क्या अब सीमा खुश हो पाएगी
या सीमा कुछ।और ही सोच रही है उसकी खामोशी के पीछे क्या चल रहा है,
लेखक साहब ने रॉमेश के ग्रहस्थ जीवन की मुस्किलो को दो अपडेट से भुला।दिया है
देखते है कब नजर पड़ती है उनकी उनके पर्सनॉल जीवन पर
शायद नेक्स्ट अपडेट में कुछ और मशाला पढ़ने को मिले
