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Thriller The cold night (वो सर्द रात) (completed)

Sanju@

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#10

विजय के तो छक्के छूट गये। रोमेश जिस आत्मविश्वास से कह रहा था, उससे साफ जाहिर था कि वह जो कह रहा है, वही होगा।

''तो फिर तुम ही बताओ, असली कातिल कौन है?"

"तुम्हारा सी.एम. ! जे.एन. है उसका कातिल।"

विजय उछल पड़ा। वह इधर-उधर इस प्रकार देखने लगा, जैसे कहीं किसी ने कुछ सुन तो नहीं लिया।

"एक मिनट।'' वह उठा और दरवाजा बंद करके आ गया।

''अब बोलो।'' वह फुसफुसाया।

''तुम इस केस से हाथ खींच लो।'' रोमेश ने भी फुसफुसा कर कहा।

''य...यह नहीं हो सकता।''

''तुम चीफ कमिश्नर को गिरफ्तार नहीं कर सकते। नौकरी चली जायेगी। इसलिये कहता हूँ, तुम इस तफ्तीश से हाथ खींच लोगे, तो जांच किसी और को दी जायेगी। वह
चंदन को ही पकड़ेगा और मैं चंदन को छुड़ा लूँगा। तुम्हारा ना कोई भला होगा, ना नुकसान।''

''यह हो ही नहीं सकता।'' विजय ने मेज पर घूंसा मारते हुए कहा।

''नहीं हो सकता तो वर्दी की लाज रखो, ट्रैक बदलो और सी एम को घेर लो। मैं तुम्हारासाथ दूँगा और सबूत भी। जैसे ही तुम ट्रैक बदलोगे, तुम पर आफतें टूटनी शुरू होंगी।
डिपार्टमेंटल दबाव भी पड़ सकता है और तुम्हारी नौकरी तक खतरे में पड़ सकती है।

परंतु शहीद होने वाला भले ही मर जाता है, लेकिन इतिहास उसे जिंदा रखता है और जो इतिहास बनाते हैं, वह कभी नहीं मरते। कई भ्रष्ट अधिकारी तुम्हारे मार्ग में रोड़ा बनेंगे,
जिनका नाम काले पन्नों पर होगा।"

''मैं वादा करता हूँ रोमेश ऐसा ही होगा। परंतु ट्रैक बदलने के लिए मेरे पास सबूत तो होना चाहिये।''

"सबूत मैं तुम्हें दूँगा।"

"ठीक है।" विजय ने हाथ मिलाया और उठ खड़ा हुआ।

रोमेश ने अगले दिन दिल्ली फोन मिलाया। कैलाश वर्मा को उसने रात भी फोन पर ट्राई किया था, मगर कैलाश से बात नहीं हो पायी। ग्यारह बजे ऑफिस में मिल गया।

"मैं रोमेश ! मुम्बई से।"

"हाँ बोलो। अरे हाँ, समझा।
मैं आज ही दस हज़ार का ड्राफ्ट लगा दूँगा। तुम्हारी पेमेंट बाकी है।''

"मैं उस बाबत कुछ नहीं बोल रहा। ''

"फिर खैरियत?"

"अखबार तो तुम पढ़ ही रहे होगे।"

''पुलिस की अपनी सोच है, हम क्या कर सकते हैं? जो हमारा काम था, हमने वही करना होता है, बेकार का लफड़ा नहीं करते।"

"लेकिन जो काम तुम्हारा था, वह नहीं हुआ।"

''तुम कहना क्या चाहते हो?"

"तुमने सावंत को …।"

"एक मिनट! शार्ट में नाम लो।

यह फोन है मिस्टर! सिर्फ एस. बोलो।"

"मिस्टर एस. को जो जानकारी तुमने दी, उसमें उसी का नाम है, जिस पर तर्क हो रहा है। तुमने असलियत को क्यों छुपाया? जो सबूत मैंने दिया, वही क्यों नहीं दिया, यह दोगली हरकत क्यों की तुमने?"

"मेरे ख्याल से इस किस्म के उल्टे सीधे सवाल न तो फोन पर होते हैं, न फोन पर उनका जवाब दिया जाता है। बाई द वे, अगर तुम दस की बजाय बीस बोलोगे, वो भेज दूँगा, मगर अच्छा यही होगा कि इस बाबत कोई पड़ताल न करो।"

"मुझे तो अब तुम्हारा दस हज़ार भी नहीं चाहिये और आइंदा मैं कभी तुम्हारे लिए काम भी नहीं करने का।"

"यार इतना सीरियस मत लो, दौलत बड़ी कुत्ती शै होती है। हम वैसे भी छोटे लोग हैं।
बड़ों की छाया में सूख जाने का डर होता है ना, इसलिये बड़े मगरमच्छों से पंगा लेना ठीक नहीं होता। तुम भी चुप हो जाना और मैं बीस हज़ार का ड्राफ्ट बना देता हूँ।"

''शटअप ! मुझे तुम्हारा एक पैसा भी नहीं चाहिये और मुझे भाषण मत दो।
तुमने जो किया, वह पेशे की ईमानदारी नहीं थी। आज से तुम्हारा मेरा कोई संबंध नहीं रहा।"

इतना कहकर रोमेश ने फोन काट दिया। करीब पन्द्रह मिनट बाद फोन की घंटी फिर बजी।रोमेश ने रिसीवर उठाया ।

''एडवोकेट रोमेश ''

''मायादास बोलते हैं जी। नमस्कार जी।"

"ओह मायादास जी , नमस्कार।"

"हम आपसे यह बताना चाहते थे कि फिलहाल जे.एन. साहब के लिए कोई केस नहीं
लड़ना है, प्रोग्राम कुछ बदल गया है।
हाँ , अगर फिर जरूरत पड़ी , तो आपको याद किया जायेगा। बुरा मत मानना ।"

''नहीं-नहीं । ऐसी कोई बात नहीं है।
वैसे बाई द वे जरूरत पड़ जाये, तो फोन नंबर आपके पास है ही ।''

"आहो जी ! आहो जी ! नमस्ते ।'' माया-दास ने फोन काट दिया ।

रोमेश जानता था कि दो-चार दिन में ही मायादास फिर संपर्क करेगा और रोमेश को अभी उससे एक मीटिंग और करनी थी, तभी जे.एन. घेरे में आ सकता था।

तीन दिन बाद विजय ने चंदन को चार्ज से हटा लिया और अखबारों में बयान दिया कि चंदन को शक के आधार पर तफ्तीश में लिया गया था किंतु बाद की जांच के मामले ने
दूसरा रूप ले लिया और इस कत्ल की वारदात के पीछे किसी बहुत बड़ी हस्ती का हाथ होने का संकेत दिया ।

सावंत कांड अभी भी समाचार पत्रों की सुर्खियों में था। विजय ने इसे एक बार फिर नया मोड़ दे दिया था।
उसी दिन शाम को मायादास का फोन आ गया।

''आपकी जरूरत आन पड़ी वकील साहब।"

"आता हूँ।"

"उसी जगह, वक्त भी आठ।“

"ठीक है ।"

रोमेश ठीक वक्त पर होटल जा पहुँचा। मायादास के अलावा उस समय वहाँ एक और आदमी था।
वह व्यक्ति चेहरे से खतरनाक दिखता था और उसके शरीर की बनावट भी
वेट-लिफ्टिंग चैंपियन जैसी थी। उसके बायें गाल पर तिल का निशान था और सामने के दो दांत सोने के बने थे। सांवले रंग का वह लंबा तगड़ा व्यक्ति गुजराती मालूम पड़ता था ,
उम्र होगी कोई चालीस वर्ष ।

"यह बटाला है।" मायादास ने उसका परिचय कराया ।

"वैसे तो इसका नाम बटाला है, लेकिन अख्तर बटाला के नाम से इसे कम ही लोग जानते हैं। पहले जब छोटे-मोटे हाथ मारा करता था, तो इसे बट्टू चोर के नाम से जाना जाता था। फिर यह मिस्टर बटाला बन गया और कत्ल के पेशे में आ गया, इसका निशाना सधा हुआ है। जितना कमांड इसका राइफल, स्टेनगन या पिस्टल पर है, उतना ही भरोसा रामपुरी पर है। जल्दी ही हज करने का इरादा रखता है, फि र तो हम इसे हाजी साहब कहा करेंगे ।''

बटाला जोर-जोर से हंस पड़ा ।

''अब जरा दांत बंद कर।" मायादास ने उसे जब डपटा, तो उसके मुंह पर तुरंत ब्रेक का जाम लग गया।

''वकील लोगों से कुछ छुपाने का नहीं मांगता।" वह बोला !

"और हम यह भी पसंद नहीं करते कि हमारा कोई आदमी तड़ी पार चला जाये । अगर बटाला को जुम्मे की नमाज जेल में पढ़नी पड़ गई, तो लानत है हम पर ।''

"पण जो अपुन को तड़ी पार करेगा, हम उसको भी खलास कर देगा" बटाला ने फटे बास की तरह घरघराती आवाज निकाली।"

"तेरे को कई बार कहा, सुबह-सुबह गरारे किया कर, वरना बोला मत कर।"
मायादास ने उसे घूरते हुए कहा । बटाला चुप हो गया।

''सावंत का कत्ल करते वक्त इस हरामी से कुछ मिस्टेक भी हो गयी। इसने जुम्मन की टैक्सी को इस काम के लिये इस्तेमाल किया और जुम्मन उसी दिन से लापता है। उसकी टैक्सी गैराज में खड़ी है। यह जुम्मन इसके गले में पट्टा डलवा सकता है।

मैंने कहा था- कोई चश्मदीद ऐसा ना हो, जो तुम्हें पहचानता हो। जुम्मन की थाने में हिस्ट्री शीट खुली हुई है और अगर वह पुलिस को बिना बताए गायब होता है, तो पुलिस उसे रगड़ देगी।
ऐसे में वह भी मुंह खोल सकता है। जुम्मन डबल क्रॉस भी कर सकता है, वह भरोसे का आदमी नहीं है।"

बटाला ने फिर कुछ बोलना चाहा, परंतु मायादास के घूरते ही केवल हिनहिना कर रह गया।

''तो सावंत का मुजरिम ये है।'' रोमेश बोला ।

''आपको इसे हर हालत में सेफ रखना है वकील साहब, बोलो क्या फीस मांगता ?"

"फीस में तब ले लूँगा, जब काम शुरू होगा। अभी तो कुछ है ही नहीं , पहले पुलिस को बटाला तक तो पहुंचने दो, फिर देखेंगे।"


जारी रहेगा…….,
Bahut hi sandaar aur lajwab update hai romi aur vijay dono ek bahut badi hasti State ke CM se panga le rahe hai isme dono ko bahut khtra hia
 
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

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Bahut hi sandaar aur lajwab update hai romi aur vijay dono ek bahut badi hasti State ke CM se panga le rahe hai isme dono ko bahut khtra hia
Thank you so much for your wonderful review bhai, aage ke update or bhi tagde honge :thanx:
 
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वेद प्रकाश शर्मा साहब ने एक उपन्यास लिखा था - वर्दी वाला गुंडा । उनके अनुसार एक पुलिस इंस्पेक्टर से बढ़कर उस क्षेत्र का कोई गुंडा नही । बहुत पावर होती है एक इंस्पेक्टर मे ।
लेकिन जब बात पॉलिटिक्स पर आती है तो एक साधारण पुलिस इंस्पेक्टर क्या पुलिस सुपरिटेंडेंट , कमिश्नर , यहां तक कि डायरेक्टर जनरल आफ पुलिस भी एक भीगी बिल्ली की तरह दिखाई देने लगते हैं ।
यह सब हम फिलहाल प्रत्यक्ष रूप से देख ही रहे हैं ।

बटाला को अरेस्ट कर के विजय ने बहुत बड़ा काम किया । एक आले अफसर के आदेश को इंकार कर यानि बटाला को छोड़ने से इंकार कर के उससे भी बड़ा काम किया ।
लेकिन अगर वो अपनी सर्विस से सस्पेंड कर दिया जाए , डिसमिस कर दिया जाए तब वो क्या करेगा !

चीफ मिस्टर से , पुरी पुलिस तंत्र से , उनके पाले हुए अराजक तत्वों से वह कैसे सामना कर पायेगा ?
यह लड़ाई एक अकेले बंदे के वश का नही । जब तक अवाम आप के साथ कंधे से कंधा नही मिलाती तब तक आप उनका बाल भी बांका नही कर सकते ।

यह बहुत ज्यादा अटपटा लगेगा कि एक साधारण पुलिसिए ने एक मुख्य मंत्री को कानूनन कटघरे के अंदर पंहुचा दिया ।
खैर देखते हैं , वकील और इंस्पेक्टर साहब मिलकर क्या इंकलाब लाते हैं !
खुबसूरत अपडेट शर्मा जी ।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग अपडेट ।
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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Raj_sharma

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वेद प्रकाश शर्मा साहब ने एक उपन्यास लिखा था - वर्दी वाला गुंडा । उनके अनुसार एक पुलिस इंस्पेक्टर से बढ़कर उस क्षेत्र का कोई गुंडा नही । बहुत पावर होती है एक इंस्पेक्टर मे ।
लेकिन जब बात पॉलिटिक्स पर आती है तो एक साधारण पुलिस इंस्पेक्टर क्या पुलिस सुपरिटेंडेंट , कमिश्नर , यहां तक कि डायरेक्टर जनरल आफ पुलिस भी एक भीगी बिल्ली की तरह दिखाई देने लगते हैं ।
यह सब हम फिलहाल प्रत्यक्ष रूप से देख ही रहे हैं ।

बटाला को अरेस्ट कर के विजय ने बहुत बड़ा काम किया । एक आले अफसर के आदेश को इंकार कर यानि बटाला को छोड़ने से इंकार कर के उससे भी बड़ा काम किया ।
लेकिन अगर वो अपनी सर्विस से सस्पेंड कर दिया जाए , डिसमिस कर दिया जाए तब वो क्या करेगा !

चीफ मिस्टर से , पुरी पुलिस तंत्र से , उनके पाले हुए अराजक तत्वों से वह कैसे सामना कर पायेगा ?
यह लड़ाई एक अकेले बंदे के वश का नही । जब तक अवाम आप के साथ कंधे से कंधा नही मिलाती तब तक आप उनका बाल भी बांका नही कर सकते ।

यह बहुत ज्यादा अटपटा लगेगा कि एक साधारण पुलिसिए ने एक मुख्य मंत्री को कानूनन कटघरे के अंदर पंहुचा दिया ।
खैर देखते हैं , वकील और इंस्पेक्टर साहब मिलकर क्या इंकलाब लाते हैं !
खुबसूरत अपडेट शर्मा जी ।
आउटस्टैंडिंग एंड अमेजिंग अपडेट ।
Thank you so much for your wonderful review and support SANJU ( V. R. ) bhai :thanx: Aapne sahi kaha, ye sab aasaan to nahi ho sakta aur kyu nahi ho sakta ye aaj raat ke update me pata lag jayega.
 

Raj_sharma

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