• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Thriller शतरंज की चाल

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
22,647
45,589
259
Mahi Maurya

जरा गौर फरमाइए, आपके जैसे टैलेंटेड राइटर नहीं है, लेकिन थोड़ी हौसलाफजई डिजर्व करते हैं। 🙏🏼
 

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
22,647
45,589
259
#अपडेट ६


अब तक आपने पढ़ा -


मैने करण को कॉल किया, "जी सर, कोई दिक्कत है क्या?"


"ये नेहा का नाम गलत प्रिंट हुआ है शायद? सब जगह Mrs. नेहा वर्मा है।"


"जी सही तो है सर वो।"


अब आगे -


"क्या?"


"जी सर, आपको पता नहीं, वो शादीशुदा है।"


"ओह अच्छा, चलो बेस्ट ऑफ लक फॉर योर टूर, और प्रिया को भी विश कर देना।" मैने अपनी आवाज को नार्मल रखते हुए कहा। हालांकि मुझे जोर का झटका लगा था।


मन बहुत व्यथित था कि इतनी बड़ी बात नेहा ने मुझसे छुपाई कैसे, लेकिन फिर एक बार ये भी सोचा कि हमारे बीच कभी ऐसी बात तो हुई ही नहीं कि वो मुझे बताती, फिर दिमाग ये सोचने लगता कि कोई सुहाग की निशानी भी नहीं दिखी मुझे, आखिर क्या चक्कर है ये।


एयरपोर्ट पहुंचते ही बोर्डिंग की अनाउंसमेंट हो गई थी, इसीलिए मैने नेहा को लेकर पहले चेक इन किया और फ्लाइट में भी हम दोनो की सीट अलग थी, इसीलिए कोई बात करने का चांस नहीं मिला। मन ही मन मैं गुस्सा था, इसीलिए मैने भी कोई ऐसी ज्यादा कोशिश नहीं की। लखनऊ में वहां के लोकल लोग हमें पिकअप करने आए थे, इसीलिए कार में कोई बात करने का फिर से मौका नहीं मिला। होटल में हमारे कमरे आमने सामने थे, और दोनो फ्रेश होने चले गए।


फ्रेश होने के बाद मुझे भूख लग रही थी, तभी मेरा फोन बजा, ये नेहा थी।


"हेलो?"


"सोचा अब तो लंच का टाइम है तो एक साथ ही कर लेते हैं, नीचे रेस्टुरेंट चलेंगे?"


"तुम खा लो नेहा, मेरे सर ने दर्द है, और वैसे भी मैं घर से हैवी ब्रेकफास्ट करके चला था, तो अभी तो भूख नहीं ही है।" भूख तो थी, पर उसके साथ खाने की इच्छा नहीं थी मुझे बिल्कुल भी।


"ओह, क्या आ कर बाम लगा दूं?"


"अरे नहीं, अभी एक घंटा है मीटिंग में, थोड़ा सो लेता हूं, रात को सोया नहीं था अच्छे से, शायद उसी से हो।" ये बोल कर मैने फोन काट दिया। फिर नाश्ता ऑर्डर करके रूम में ही मंगवा लिया।


नाश्ता आने के बाद मैं खाने बैठा और कुछ ही समय बाद मेरे रूम का दरवाजा खुला, जिसे मैं लॉक करना भूल गया था नाश्ता लेने के बाद, और नेहा अंदर आई।


"मैने सोचा कि तुम्हारे सर में दर्द है तो..."


"तुमने तो कहा भूख नहीं, फिर?"


"भूख लग गई तो मंगवा लिया।" मैने कुछ रुखाई से कहा।


"ओह सॉरी, मुझे बिना परमिशन के अंदर नहीं आना चाहिए था।"


ये बोल कर वो वापस चली गई।


कुछ देर बाद हम दोनो नीचे उतर कर मीटिंग में चले गए। देर रात तक मीटिंग चली और हमें कोई भी समय अकेले में नहीं मिला। थक जाने के कारण दोनों अपने अपने रूम में सो गए।


अगले दिन सुबह कानपुर के लिए निकल गए, साथ में कंपनी का एक एंप्लॉई भी था, वहां की मीटिंग भी देर शाम तक चली और रात को ही हमारी फ्लाइट थी दिल्ली की। देर रात को दिल्ली पहुंचे, यहां भी एक होटल में हमारा अरेंजमेंट था, लेकिन मैने वो कैंसल करके मित्तल सर के फॉर्महाउस जो छतरपुर में था वहां चले गए। दिल्ली में मैं अक्सर यहीं रुकता था। केयरटेकर ने डिनर का इंतजाम और हम दोनो के रूम रेडी रखे थे। हम दोनो ही बहुत थके थे तो खा कर अपने कमरों में जा कर सो गए। केयरटेकर ने बताया कि मित्तल सर भी आए हुए हैं और अभी वो सो चुके है।


वापी से लेकर अभी तक मेरे और नेहा के बीच जो भी बात हुई बस प्रोफेशनल तरीके से हुई। और मेरा व्यवहार भी कुछ रुखा सा ही था, जिससे वो थोड़ी दूरी बनाई हुई थी मुझसे।


सुबह नाश्ते की टेबल पर मित्तल सर भी मौजूद थे।


"और कैसी रही लखनऊ और कानपुर की मीटिंग?"


"बहुत बढ़िया रही, लोगों ने अच्छा रिस्पॉन्स दिया हमे लगता है कि जल्दी ही यहां भी ब्रांच खोल देनी चाहिए।"


"वाह ये तो अच्छी बात है। नेहा, क्या तुम अब अकेले मीटिंग हैंडल कर लोगी? मुझे मनीष को लेकर मंत्रालय जाना होगा।"


"जी सर, बिलकुल कर लूंगी।"


"वो जो वाल्ट वाली बात बोली थी मैने तुमको, उसके लिए चलना है।"


"बिलकुल चलिए, मेरा प्लान रेडी है पूरा।"


"ठीक है, मनीष नाश्ता करके मेरे साथ चलो तुम, मैने दिल्ली जोन के मैनेजर को नेहा के साथ रहने के लिए बोल दिया है, वो अभी 10 मिनिट में पहुंच कर नेहा को साथ ले जायेंगे वेन्यू पर। ठीक है मैं आता हूं अभी रूम से।"


थोड़ी देर के बाद नेहा नॉर्थ जोन के मैनेजर के साथ चली गई, और मैं सर के साथ मंत्रालय चल दिया, वहां पर पहले से ही उनकी अपॉइंटमेंट थी, लेकिन नेता तो नेता होते हैं, लगभग पूरी दोपहर बैठने के बाद मंत्री जी हमसे मिले और हमने उनके सामने प्रोपोजल रखा। असल में ऑटोमेटेड ब्रांच तो बस एक सीढ़ी थी सर के असल सपने की ओर। वो एक ऐसा वाल्ट बनवाना चाहते थे जिसमें सरकार अपना सोना रख सके। मैने उसकी रूप रेखा लगभग तैयार कर दी थी, बस सरकार से परमिशन ले कर उसपर काम करना था।


मीटिंग के बाद मंत्री जी बड़े खुश दिखे, और अगले दिन के लिए अपने विभाग के ऑफिसर्स के साथ इस प्रोजेक्ट को डिसकस करने के लिए दिया।


वापस आते आते रात हो चुकी थी, और नेहा भी थोड़ी देर पहले ही आई थी। दिसंबर का समय था और वातावरण ठंडा था। डाइनिंग टेबल पर नॉर्मल काम की बातें हुई और फिर हम सब सोने चले गए। अगला दिन भी व्यस्त था। शाम तक सारे काम खत्म हो चुके थे, और मित्तल सर मंत्रालय से ही वापस चले गए थे।


जब मैं फॉर्महाउस पहुंचा तो शायद नेहा जल्दी आ गई थी, और वो नीचे बने गार्डन में टहल रही थी। मैं फ्रेश हो कर आया तो फिर हमने खाना खाया। आज भी हमारे बीच एक खामोशी ही पसरी थी।


खाना खा कर मैं भी गार्डन में टहलने लगा। नेहा कुछ देर डाइनिंग टेबल पर ही बैठ अपना फोन चला रही थी। टेबल साफ करके सारे लोग अपने क्वार्टर में चले गए, और इस समय मुख्य इमारत में बस मैं और नेहा थे।


कुछ समय बाद मुझे लगा कोई मेरे पीछे है, देखा तो नेहा थी। इस समय उसने एक पैजामा टीशर्ट पहना था, जो अभी ठंड के हिसाब से कुछ कम था। मैं एक शॉल ओढ़े था।


"मुझे आपसे कुछ बात करनी है।"


"हां बोलिए नेहा जी।"


"दोस्त के नाते, क्या मैं कुछ पूछ सकती हूं?"


"हां बोलो।"


"क्या मुझसे नाराज हैं किसी बात पर?"


"दोस्त कहती हो और बातें भी छुपाती हो?" मैने सपाट भाव से पूछा।


"कौन सी बात छुपाई मैने?" उसने भी आश्चर्य से कहा।


"यही की तुम शादीशुदा हो।"



ये सुन कर वो मुझे गौर से देखने लगी...
 
Last edited:

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
22,647
45,589
259
Whoaaaa Riky007 bhai... Gazab ka scene....
Waah wo Neha hi nikli jo club mein Manish ko dikhi
Yhaan Neha aur Manish ka mast tuning chal rahi hai..
Koi golf sikha raha hai to koi swimming
Aur Manish ke to Dil mein guitar hi bajne lagte hain Neha ko touch krte hi

Aur yahaan ye episode fir se ek suspense par khatam hua.. ke Neha Mrs hai ya Miss...

Iska parda shayad agle episode mein uthe...

Keep writing bhai

मनीष साहब अपने न्यू कलिग ' नेहा ' के तौबा शिकन हुस्न पर हद से कहीं अधिक फिदा तो हो गए लेकिन उसके आधार कार्ड पर उसका मैरिटल स्टेटस देखकर हैरान और परेशान भी हुए ।
वैसे इश्क पर जोर नही ! दिल क्या करे जब किसी को किसी से प्यार हो जाए !
खैर , लखनऊ का ट्रीप ही बतायेगा कि इस युगल की केमिस्ट्री बन पाती है या नही !

शिविका मैडम खुले ख्यालात की एक बोल्ड युवती है जो शायद मनीष साहब की कदरदान भी है । देखते है यह आधुनिक युग की लड़की आगे चलकर क्या गुल खिलाती है !

बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी इस कहानी से एक ख्यालात उभर कर आ रही है कि कहीं इनके बायोमेट्रिक हाई टैक टेक्नोलॉजीज से लैस बैंक मे राॅबरी तो नही होने वाली है !

खुबसूरत अपडेट रिकी भाई ।


Awesome update
Neha जितनीतेजी से मनीष के साथ घनिष्ठता बढ़ा गई उससे लगने लगा है शतरंज की चाल शुरू हो गई है

Bahut hi badhiya update diya hai Riky007 bhai....
Nice and beautiful update....

First of all :congrats: nayi story ke liye .
Acha laga pahla update

ओ मनीष बाबू को नेहा दिखी थी क्लब में मुलाक़ात काफी इंट्रेस्टिंग थी दोनो की इस मुलाक़ात से दोनो की दोस्ती हो गई साथ में एक दूसरे को गोल्फ और तैरना सिखा रहे है दोनो
इन सब के चलते लगता है मनीष बाबू प्यार की सीढ़ी पर चढ़ना शुरू कर चुके है नेहा के लिए
लेकिन एक बात समझ में नहीं आई जब मनीष ने टिकट देखी तो सभी टिकट में नेहा का नाम कैसे आ गया
.
अपडेट काफी रोमांचक रहा आज का Riky007 भाई आगे के एक ओर रोमांचक अपडेट का बेसब्री से इंतजार रहोगा

Bahut hi shandar update he Riky007 Bhai,

Ye to manish ke sath KLPD ho gayi..................

Neha to pehle se hi married he..........dekhte aage trip me dono ke beech kya hota he................

Keep posting Bro

बिल्कुल सही फरमाया मित्र आपने, आजकल स्टूडेंट्स को एक्स्ट्रा क्लासेस मे " योग से सभोग् कला " सिखा रहा हूँ 😜😁😂

Bhai sahab tow poori tarah se lattu hote jaa rehe h
Lekin Mrs. Varma padh ker bhai sahab ko dhakka laga are abhi kaha abhi bahot saare dhakke lagne wale aane wale dino me
Baherhal abhi kuch din maze kar lo Mrs Neha Varma ke saath

Dost hi dost ke kabab me haddi hota hai. Ye ladke hamesha budhu hi hote hai. Mast romanchak romantic update hai. Par neha to apne Hero se badi hai. 2 sal. Maza aaya Ricky. Superb update.
Update posted 🙏🏼
 

Rekha rani

Well-Known Member
2,551
10,845
159
#अपडेट ६


अब तक आपने पढ़ा -


मैने करण को कॉल किया, "जी सर, कोई दिक्कत है क्या?"


"ये नेहा का नाम गलत प्रिंट हुआ है शायद? सब जगह Mrs. नेहा वर्मा है।"


"जी सही तो है सर वो।"


अब आगे -


"क्या?"


"जी सर, आपको पता नहीं, वो शादीशुदा है।"


"ओह अच्छा, चलो बेस्ट ऑफ लुक फॉर योर टूर, और प्रिया को भी विश कर देना।" मैने अपनी आवाज को नार्मल रखते हुए कहा। हालांकि मुझे जोर का झटका लगा था।


मन बहुत व्यथित था कि इतनी बड़ी बात नहीं ने मुझसे छुपाई कैसे, लेकिन फिर एक बार ये भी सोचा कि हमारे बीच कभी ऐसी बात तो हुई ही नहीं कि वो मुझे बताती, फिर दिमाग ये सोचने लगता कि कोई सुहाग की निशानी भी नहीं दिखी मुझे, आखिर क्या चक्कर है ये।


एयरपोर्ट पहुंचते ही बोर्डिंग की अनाउंसमेंट हो गई थी, इसीलिए मैने नेहा को लेकर पहले चेक इन किया और फ्लाइट में भी हम दोनो की सीट अलग थी, इसीलिए कोई बात करने का चांस नहीं मिला। मन ही मन मैं गुस्सा था, इसीलिए मैने भी कोई ऐसी ज्यादा कोशिश नहीं की। लखनऊ से वहां के लोकल लोग हमें पिकअप करने आए थे, इसीलिए कार में कोई बात करने का फिर से मौका नहीं मिला। होटल में हमारे कमरे आमने सामने थे, और दोनो फ्रेश होने चले गए।


फ्रेश होने के बाद मुझे भूख लग रही थी, तभी मेरा फोन बजा, ये नेहा थी।


"हेलो?"


"सोचा अब तो लंच का टाइम है तो एक साथ ही कर लेते हैं, नीचे रेस्टुरेंट चलेंगे?"


"तुम खा लो नेहा, मेरे सर ने दर्द है, और वैसे भी मैं घर से हैवी ब्रेकफास्ट करके चला था, तो अभी तो भूख नहीं ही है।" भूख तो थी, पर उसके हाथ खाने की इच्छा नहीं थी मुझे बिल्कुल भी।


"ओह, क्या आ कर बाम लगा दूं?"


"अरे नहीं, अभी एक घंटा है मीटिंग में, थोड़ा सो लेता हूं, रात को सोया नहीं था अच्छे से, शायद उसी से हो।" ये बोल कर मैने फोन काट दिया। फिर नाश्ता ऑर्डर करके रूम में ही मंगवा लिया।


नाश्ता आने के बाद मैं खाने बैठा और कुछ ही समय बाद मेरे रूम का दरवाजा खुला, जिसे मैं लॉक करना भूल गया था नाश्ता लेने के बाद, और नेहा अंदर आई।


"मैने सोचा कि तुम्हारे सर में दर्द है तो..."


"तुमने तो कहा भूख नहीं, फिर?"


"भूख लग गई तो मंगवा लिया।" मैने कुछ रुखाई से कहा।


"ओह सॉरी, मुझे बिना परमिशन के अंदर नहीं आना चाहिए था।"


ये बोल कर वो वापस चली गई।


कुछ देर बाद हम दोनो नीचे उतर कर मीटिंग में चले गए। देर रात तक मीटिंग चली और हमें कोई समय अकेले में नहीं मिला। थक जाने के कारण दोनों अपने अपने रूम में सो गए।


अगले दिन सुबह कानपुर के लिए निकल गए, साथ में कंपनी का एक एंप्लॉई भी था, वहां की मीटिंग भी देर शाम तक चली और रात को ही हमारी फ्लाइट थी दिल्ली की। देर रात को दिल्ली पहुंचे, यहां भी एक होटल में हमारा अरेंजमेंट था, लेकिन मैने वो कैंसल करके मित्तल सर के फॉर्महाउस जो छतरपुर में था वहां चले गए। दिल्ली में मैं अक्सर यहीं रुकता था। केयरटेकर ने डिनर का इंतजाम और हम दोनो के रूम रेडी रखे थे। हम दोनो ही बहुत थके थे तो खा कर अपने कमरों में जा कर दो गए। केयरटेकर ने बताया कि मित्तल सर भी आए हुए हैं और अभी वो सो चुके है।


वापी से लेकर अभी तक मेरे और नेहा के बीच जो भी बात ही बस प्रोफेशनल तरीके से हुई। और मेरा व्यवहार भी कुछ रुखा सा ही था, जिससे वो थोड़ी दूरी बनाई हुई थी मुझसे।


सुबह नाश्ते की टेबल पर मित्तल सर भी मौजूद थे।


"और कैसी रही लखनऊ और कानपुर की मीटिंग?"


"बहुत बढ़िया रही, लोगों ने अच्छा रिस्पॉन्स दिया हमे लगता है कि जल्दी ही यहां भी ब्रांच खोल देनी चाहिए।"


"वाह ये तो अच्छी बात है। नेहा, क्या तुम अब अनेक मीटिंग हैंडल कर लोगी? मुझे मनीष को लेकर मंत्रालय जाना होगा।"


"जी सर, बिलकुल कर लूंगी।"


"वो जो वाल्ट वाली बात बोली थी मैने तुमको, उसके लिए चलना है।"


"बिलकुल चलिए, मेरा प्लान रेडी है पूरा।"


"ठीक है, मनीष नाश्ता करके मेरे साथ चलो तुम, मैने दिल्ली जोन के मैनेजर को नेहा के साथ रहने के लिए बोल दिया है, वो अभी 10 मिनिट में पहुंच कर नेहा को साथ ले जायेंगे वेन्यू पर। ठीक है मैं आता हूं अभी रूम से।"


थोड़ी देर के बाद नेहा नॉर्थ जोन के मैनेजर के साथ चली गई, और मैं सर के साथ मंत्रालय चल दिया, वहां पर पहले से ही उनकी अपॉइंटमेंट थी, लेकिन नेता तो नेता होते हैं, लगभग पूरी दोपहर बैठने के बाद मंत्री जी हमसे मिले और हमने उनके सामने प्रोपोजल रखा। असल में ऑटोमेटेड ब्रांच तो बस एक सीढ़ी थी सर के असल सपने की ओर। वो एक ऐसा वाल्ट बनवाना चाहते थे जिसमें सरकार अपना सोना रख सके। मैने उसकी रूप रेखा लगभग तैयार कर दी थी, बस सरकार से परमिशन ले कर उसपर काम करना था।


मीटिंग के बाद मंत्री जी बड़े खुश दिखे, और अगले दिन के लिए अपने विभाग के ऑफिसर्स के साथ इस प्रोजेक्ट को डिसकस करने के लिए दिया।


वापस आते आते रात हो चुकी थी, और नेहा भी थोड़ी देर पहले ही आई थी। दिसंबर का समय था और वातावरण ठंडा था। डाइनिंग टेबल पर नॉर्मल काम की बातें हुई और फिर हम सब सोने चले गए। अगला दिन भी व्यस्त था। शाम तक सारे काम खत्म हो चुके थे, और मित्तल सर मंत्रालय से ही वापस चले गए थे।


जब मैं फॉर्महाउस पहुंचा तो शायद नेहा जल्दी आ गई थी, और वो नीचे बने गार्डन में टहल रही थी। मैं फ्रेश हो कर आया तो फिर हमने खाना खाया। आज भी हमारे बीच एक खामोशी ही पसरी थी।


खाना खा कर मैं भी गार्डन में टहलने लगा। नेहा कुछ देर डाइनिंग टेबल पर ही बैठ अपना फोन चला रही थी। टेबल साफ करके सारे लोग अपने क्वार्टर में चले गए, और इस समय मुख्य इमारत में बस मैं और नेहा थे।


कुछ समय बाद मुझे लगा कोई मेरे पीछे है, देखा तो नेहा थी। इस समय उसने एक पैजामा टीशर्ट पहना था, जो अभी ठंड के हिसाब से कुछ कम था। मैं एक शॉल ओढ़े था।


"मुझे आपसे कुछ बात करनी है।"


"हां बोलिए नेहा जी।"


"दोस्त के नाते, क्या मैं कुछ पूछ सकती हूं?"


"हां बोलो।"


"क्या मुझसे नाराज हैं किसी बात पर?"


"दोस्त कहती हो और बातें भी छुपाती हो?" मैने सपाट भाव से पूछा।


"कौन सी बात छुपाई मैने?" उसने भी आश्चर्य से कहा।


"यही की तुम शादीशुदा हो।"


ये सुन कर वो मुझे गौर से देखने लगी...
Awesome update
लो जी कांड हो गया शुरू में ही मनीष के साथ , अभी तो स्टोरी शुरू भी नहीं हुई और साहिबा शादीशुदा निकली,
मनीष khunas खाए घूम रहे है , बाकी पूरा अपडेट मीटिंग में निकल गया और जब कुछ इंटरस्टिंग होने को हुआ तो खतम हो गया।
वैसे काफी जगह कुछ मिस्टेक थी शायद अपडेट जल्दी देने में चेक नहीं किया आपने।
 

Riky007

उड़ते पंछी का ठिकाना, मेरा न कोई जहां...
22,647
45,589
259
Awesome update
लो जी कांड हो गया शुरू में ही मनीष के साथ , अभी तो स्टोरी शुरू भी नहीं हुई और साहिबा शादीशुदा निकली,
मनीष khunas खाए घूम रहे है , बाकी पूरा अपडेट मीटिंग में निकल गया और जब कुछ इंटरस्टिंग होने को हुआ तो खतम हो गया।
वैसे काफी जगह कुछ मिस्टेक थी शायद अपडेट जल्दी देने में चेक नहीं किया आपने।
ठीक कर दी मिस्टेक्स।

बाकी हर अपडेट में कुछ खास होता है। पढ़ते रहिए, कहानी की रूप रेखा ही बन रही है अभी
 

DEVIL MAXIMUM

"सर्वेभ्यः सर्वभावेभ्यः सर्वात्मना नमः।"
Prime
11,220
35,083
244
#अपडेट ६


अब तक आपने पढ़ा -


मैने करण को कॉल किया, "जी सर, कोई दिक्कत है क्या?"


"ये नेहा का नाम गलत प्रिंट हुआ है शायद? सब जगह Mrs. नेहा वर्मा है।"


"जी सही तो है सर वो।"


अब आगे -


"क्या?"


"जी सर, आपको पता नहीं, वो शादीशुदा है।"


"ओह अच्छा, चलो बेस्ट ऑफ लक फॉर योर टूर, और प्रिया को भी विश कर देना।" मैने अपनी आवाज को नार्मल रखते हुए कहा। हालांकि मुझे जोर का झटका लगा था।


मन बहुत व्यथित था कि इतनी बड़ी बात नेहा ने मुझसे छुपाई कैसे, लेकिन फिर एक बार ये भी सोचा कि हमारे बीच कभी ऐसी बात तो हुई ही नहीं कि वो मुझे बताती, फिर दिमाग ये सोचने लगता कि कोई सुहाग की निशानी भी नहीं दिखी मुझे, आखिर क्या चक्कर है ये।


एयरपोर्ट पहुंचते ही बोर्डिंग की अनाउंसमेंट हो गई थी, इसीलिए मैने नेहा को लेकर पहले चेक इन किया और फ्लाइट में भी हम दोनो की सीट अलग थी, इसीलिए कोई बात करने का चांस नहीं मिला। मन ही मन मैं गुस्सा था, इसीलिए मैने भी कोई ऐसी ज्यादा कोशिश नहीं की। लखनऊ में वहां के लोकल लोग हमें पिकअप करने आए थे, इसीलिए कार में कोई बात करने का फिर से मौका नहीं मिला। होटल में हमारे कमरे आमने सामने थे, और दोनो फ्रेश होने चले गए।


फ्रेश होने के बाद मुझे भूख लग रही थी, तभी मेरा फोन बजा, ये नेहा थी।


"हेलो?"


"सोचा अब तो लंच का टाइम है तो एक साथ ही कर लेते हैं, नीचे रेस्टुरेंट चलेंगे?"


"तुम खा लो नेहा, मेरे सर ने दर्द है, और वैसे भी मैं घर से हैवी ब्रेकफास्ट करके चला था, तो अभी तो भूख नहीं ही है।" भूख तो थी, पर उसके साथ खाने की इच्छा नहीं थी मुझे बिल्कुल भी।


"ओह, क्या आ कर बाम लगा दूं?"


"अरे नहीं, अभी एक घंटा है मीटिंग में, थोड़ा सो लेता हूं, रात को सोया नहीं था अच्छे से, शायद उसी से हो।" ये बोल कर मैने फोन काट दिया। फिर नाश्ता ऑर्डर करके रूम में ही मंगवा लिया।


नाश्ता आने के बाद मैं खाने बैठा और कुछ ही समय बाद मेरे रूम का दरवाजा खुला, जिसे मैं लॉक करना भूल गया था नाश्ता लेने के बाद, और नेहा अंदर आई।


"मैने सोचा कि तुम्हारे सर में दर्द है तो..."


"तुमने तो कहा भूख नहीं, फिर?"


"भूख लग गई तो मंगवा लिया।" मैने कुछ रुखाई से कहा।


"ओह सॉरी, मुझे बिना परमिशन के अंदर नहीं आना चाहिए था।"


ये बोल कर वो वापस चली गई।


कुछ देर बाद हम दोनो नीचे उतर कर मीटिंग में चले गए। देर रात तक मीटिंग चली और हमें कोई भी समय अकेले में नहीं मिला। थक जाने के कारण दोनों अपने अपने रूम में सो गए।


अगले दिन सुबह कानपुर के लिए निकल गए, साथ में कंपनी का एक एंप्लॉई भी था, वहां की मीटिंग भी देर शाम तक चली और रात को ही हमारी फ्लाइट थी दिल्ली की। देर रात को दिल्ली पहुंचे, यहां भी एक होटल में हमारा अरेंजमेंट था, लेकिन मैने वो कैंसल करके मित्तल सर के फॉर्महाउस जो छतरपुर में था वहां चले गए। दिल्ली में मैं अक्सर यहीं रुकता था। केयरटेकर ने डिनर का इंतजाम और हम दोनो के रूम रेडी रखे थे। हम दोनो ही बहुत थके थे तो खा कर अपने कमरों में जा कर सो गए। केयरटेकर ने बताया कि मित्तल सर भी आए हुए हैं और अभी वो सो चुके है।


वापी से लेकर अभी तक मेरे और नेहा के बीच जो भी बात हुई बस प्रोफेशनल तरीके से हुई। और मेरा व्यवहार भी कुछ रुखा सा ही था, जिससे वो थोड़ी दूरी बनाई हुई थी मुझसे।


सुबह नाश्ते की टेबल पर मित्तल सर भी मौजूद थे।


"और कैसी रही लखनऊ और कानपुर की मीटिंग?"


"बहुत बढ़िया रही, लोगों ने अच्छा रिस्पॉन्स दिया हमे लगता है कि जल्दी ही यहां भी ब्रांच खोल देनी चाहिए।"


"वाह ये तो अच्छी बात है। नेहा, क्या तुम अब अकेले मीटिंग हैंडल कर लोगी? मुझे मनीष को लेकर मंत्रालय जाना होगा।"


"जी सर, बिलकुल कर लूंगी।"


"वो जो वाल्ट वाली बात बोली थी मैने तुमको, उसके लिए चलना है।"


"बिलकुल चलिए, मेरा प्लान रेडी है पूरा।"


"ठीक है, मनीष नाश्ता करके मेरे साथ चलो तुम, मैने दिल्ली जोन के मैनेजर को नेहा के साथ रहने के लिए बोल दिया है, वो अभी 10 मिनिट में पहुंच कर नेहा को साथ ले जायेंगे वेन्यू पर। ठीक है मैं आता हूं अभी रूम से।"


थोड़ी देर के बाद नेहा नॉर्थ जोन के मैनेजर के साथ चली गई, और मैं सर के साथ मंत्रालय चल दिया, वहां पर पहले से ही उनकी अपॉइंटमेंट थी, लेकिन नेता तो नेता होते हैं, लगभग पूरी दोपहर बैठने के बाद मंत्री जी हमसे मिले और हमने उनके सामने प्रोपोजल रखा। असल में ऑटोमेटेड ब्रांच तो बस एक सीढ़ी थी सर के असल सपने की ओर। वो एक ऐसा वाल्ट बनवाना चाहते थे जिसमें सरकार अपना सोना रख सके। मैने उसकी रूप रेखा लगभग तैयार कर दी थी, बस सरकार से परमिशन ले कर उसपर काम करना था।


मीटिंग के बाद मंत्री जी बड़े खुश दिखे, और अगले दिन के लिए अपने विभाग के ऑफिसर्स के साथ इस प्रोजेक्ट को डिसकस करने के लिए दिया।


वापस आते आते रात हो चुकी थी, और नेहा भी थोड़ी देर पहले ही आई थी। दिसंबर का समय था और वातावरण ठंडा था। डाइनिंग टेबल पर नॉर्मल काम की बातें हुई और फिर हम सब सोने चले गए। अगला दिन भी व्यस्त था। शाम तक सारे काम खत्म हो चुके थे, और मित्तल सर मंत्रालय से ही वापस चले गए थे।


जब मैं फॉर्महाउस पहुंचा तो शायद नेहा जल्दी आ गई थी, और वो नीचे बने गार्डन में टहल रही थी। मैं फ्रेश हो कर आया तो फिर हमने खाना खाया। आज भी हमारे बीच एक खामोशी ही पसरी थी।


खाना खा कर मैं भी गार्डन में टहलने लगा। नेहा कुछ देर डाइनिंग टेबल पर ही बैठ अपना फोन चला रही थी। टेबल साफ करके सारे लोग अपने क्वार्टर में चले गए, और इस समय मुख्य इमारत में बस मैं और नेहा थे।


कुछ समय बाद मुझे लगा कोई मेरे पीछे है, देखा तो नेहा थी। इस समय उसने एक पैजामा टीशर्ट पहना था, जो अभी ठंड के हिसाब से कुछ कम था। मैं एक शॉल ओढ़े था।


"मुझे आपसे कुछ बात करनी है।"


"हां बोलिए नेहा जी।"


"दोस्त के नाते, क्या मैं कुछ पूछ सकती हूं?"


"हां बोलो।"


"क्या मुझसे नाराज हैं किसी बात पर?"


"दोस्त कहती हो और बातें भी छुपाती हो?" मैने सपाट भाव से पूछा।


"कौन सी बात छुपाई मैने?" उसने भी आश्चर्य से कहा।


"यही की तुम शादीशुदा हो।"



ये सुन कर वो मुझे गौर से देखने लगी...
Bechara Manish dil aaya jispe lekin wo to pehle se he kisi or ki amanat nikli
Waise Neha married hai to wo waise samne Q nahi aayi mera matlab mathe pe sindoor gale me mangalsutra Q nahi tha or jab Manish se dosti bhi hue to usne bataya Q nahi Manish ko
.
Bechara poore toor ke waqt doori banay raha Neha se kam ke waqt bhi door raha baat karne me bhi rokha pan
.
Kher ab dekhte hai Manish ke sawal ka kya jawab deti hai Neha
.
Kafi intresting update raha aaj ka very well Riky007 bhai
 

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,574
24,994
159
एक और अपडेट आ जाए, तो बड़े विस्तार से अपना रिएक्शन दूंगा।
लेकिन कहानी है बड़ी दिलचस्प 😊👌👌
 

Ajju Landwalia

Well-Known Member
4,483
17,123
159
#अपडेट ६


अब तक आपने पढ़ा -


मैने करण को कॉल किया, "जी सर, कोई दिक्कत है क्या?"


"ये नेहा का नाम गलत प्रिंट हुआ है शायद? सब जगह Mrs. नेहा वर्मा है।"


"जी सही तो है सर वो।"


अब आगे -


"क्या?"


"जी सर, आपको पता नहीं, वो शादीशुदा है।"


"ओह अच्छा, चलो बेस्ट ऑफ लक फॉर योर टूर, और प्रिया को भी विश कर देना।" मैने अपनी आवाज को नार्मल रखते हुए कहा। हालांकि मुझे जोर का झटका लगा था।


मन बहुत व्यथित था कि इतनी बड़ी बात नेहा ने मुझसे छुपाई कैसे, लेकिन फिर एक बार ये भी सोचा कि हमारे बीच कभी ऐसी बात तो हुई ही नहीं कि वो मुझे बताती, फिर दिमाग ये सोचने लगता कि कोई सुहाग की निशानी भी नहीं दिखी मुझे, आखिर क्या चक्कर है ये।


एयरपोर्ट पहुंचते ही बोर्डिंग की अनाउंसमेंट हो गई थी, इसीलिए मैने नेहा को लेकर पहले चेक इन किया और फ्लाइट में भी हम दोनो की सीट अलग थी, इसीलिए कोई बात करने का चांस नहीं मिला। मन ही मन मैं गुस्सा था, इसीलिए मैने भी कोई ऐसी ज्यादा कोशिश नहीं की। लखनऊ में वहां के लोकल लोग हमें पिकअप करने आए थे, इसीलिए कार में कोई बात करने का फिर से मौका नहीं मिला। होटल में हमारे कमरे आमने सामने थे, और दोनो फ्रेश होने चले गए।


फ्रेश होने के बाद मुझे भूख लग रही थी, तभी मेरा फोन बजा, ये नेहा थी।


"हेलो?"


"सोचा अब तो लंच का टाइम है तो एक साथ ही कर लेते हैं, नीचे रेस्टुरेंट चलेंगे?"


"तुम खा लो नेहा, मेरे सर ने दर्द है, और वैसे भी मैं घर से हैवी ब्रेकफास्ट करके चला था, तो अभी तो भूख नहीं ही है।" भूख तो थी, पर उसके साथ खाने की इच्छा नहीं थी मुझे बिल्कुल भी।


"ओह, क्या आ कर बाम लगा दूं?"


"अरे नहीं, अभी एक घंटा है मीटिंग में, थोड़ा सो लेता हूं, रात को सोया नहीं था अच्छे से, शायद उसी से हो।" ये बोल कर मैने फोन काट दिया। फिर नाश्ता ऑर्डर करके रूम में ही मंगवा लिया।


नाश्ता आने के बाद मैं खाने बैठा और कुछ ही समय बाद मेरे रूम का दरवाजा खुला, जिसे मैं लॉक करना भूल गया था नाश्ता लेने के बाद, और नेहा अंदर आई।


"मैने सोचा कि तुम्हारे सर में दर्द है तो..."


"तुमने तो कहा भूख नहीं, फिर?"


"भूख लग गई तो मंगवा लिया।" मैने कुछ रुखाई से कहा।


"ओह सॉरी, मुझे बिना परमिशन के अंदर नहीं आना चाहिए था।"


ये बोल कर वो वापस चली गई।


कुछ देर बाद हम दोनो नीचे उतर कर मीटिंग में चले गए। देर रात तक मीटिंग चली और हमें कोई भी समय अकेले में नहीं मिला। थक जाने के कारण दोनों अपने अपने रूम में सो गए।


अगले दिन सुबह कानपुर के लिए निकल गए, साथ में कंपनी का एक एंप्लॉई भी था, वहां की मीटिंग भी देर शाम तक चली और रात को ही हमारी फ्लाइट थी दिल्ली की। देर रात को दिल्ली पहुंचे, यहां भी एक होटल में हमारा अरेंजमेंट था, लेकिन मैने वो कैंसल करके मित्तल सर के फॉर्महाउस जो छतरपुर में था वहां चले गए। दिल्ली में मैं अक्सर यहीं रुकता था। केयरटेकर ने डिनर का इंतजाम और हम दोनो के रूम रेडी रखे थे। हम दोनो ही बहुत थके थे तो खा कर अपने कमरों में जा कर सो गए। केयरटेकर ने बताया कि मित्तल सर भी आए हुए हैं और अभी वो सो चुके है।


वापी से लेकर अभी तक मेरे और नेहा के बीच जो भी बात हुई बस प्रोफेशनल तरीके से हुई। और मेरा व्यवहार भी कुछ रुखा सा ही था, जिससे वो थोड़ी दूरी बनाई हुई थी मुझसे।


सुबह नाश्ते की टेबल पर मित्तल सर भी मौजूद थे।


"और कैसी रही लखनऊ और कानपुर की मीटिंग?"


"बहुत बढ़िया रही, लोगों ने अच्छा रिस्पॉन्स दिया हमे लगता है कि जल्दी ही यहां भी ब्रांच खोल देनी चाहिए।"


"वाह ये तो अच्छी बात है। नेहा, क्या तुम अब अकेले मीटिंग हैंडल कर लोगी? मुझे मनीष को लेकर मंत्रालय जाना होगा।"


"जी सर, बिलकुल कर लूंगी।"


"वो जो वाल्ट वाली बात बोली थी मैने तुमको, उसके लिए चलना है।"


"बिलकुल चलिए, मेरा प्लान रेडी है पूरा।"


"ठीक है, मनीष नाश्ता करके मेरे साथ चलो तुम, मैने दिल्ली जोन के मैनेजर को नेहा के साथ रहने के लिए बोल दिया है, वो अभी 10 मिनिट में पहुंच कर नेहा को साथ ले जायेंगे वेन्यू पर। ठीक है मैं आता हूं अभी रूम से।"


थोड़ी देर के बाद नेहा नॉर्थ जोन के मैनेजर के साथ चली गई, और मैं सर के साथ मंत्रालय चल दिया, वहां पर पहले से ही उनकी अपॉइंटमेंट थी, लेकिन नेता तो नेता होते हैं, लगभग पूरी दोपहर बैठने के बाद मंत्री जी हमसे मिले और हमने उनके सामने प्रोपोजल रखा। असल में ऑटोमेटेड ब्रांच तो बस एक सीढ़ी थी सर के असल सपने की ओर। वो एक ऐसा वाल्ट बनवाना चाहते थे जिसमें सरकार अपना सोना रख सके। मैने उसकी रूप रेखा लगभग तैयार कर दी थी, बस सरकार से परमिशन ले कर उसपर काम करना था।


मीटिंग के बाद मंत्री जी बड़े खुश दिखे, और अगले दिन के लिए अपने विभाग के ऑफिसर्स के साथ इस प्रोजेक्ट को डिसकस करने के लिए दिया।


वापस आते आते रात हो चुकी थी, और नेहा भी थोड़ी देर पहले ही आई थी। दिसंबर का समय था और वातावरण ठंडा था। डाइनिंग टेबल पर नॉर्मल काम की बातें हुई और फिर हम सब सोने चले गए। अगला दिन भी व्यस्त था। शाम तक सारे काम खत्म हो चुके थे, और मित्तल सर मंत्रालय से ही वापस चले गए थे।


जब मैं फॉर्महाउस पहुंचा तो शायद नेहा जल्दी आ गई थी, और वो नीचे बने गार्डन में टहल रही थी। मैं फ्रेश हो कर आया तो फिर हमने खाना खाया। आज भी हमारे बीच एक खामोशी ही पसरी थी।


खाना खा कर मैं भी गार्डन में टहलने लगा। नेहा कुछ देर डाइनिंग टेबल पर ही बैठ अपना फोन चला रही थी। टेबल साफ करके सारे लोग अपने क्वार्टर में चले गए, और इस समय मुख्य इमारत में बस मैं और नेहा थे।


कुछ समय बाद मुझे लगा कोई मेरे पीछे है, देखा तो नेहा थी। इस समय उसने एक पैजामा टीशर्ट पहना था, जो अभी ठंड के हिसाब से कुछ कम था। मैं एक शॉल ओढ़े था।


"मुझे आपसे कुछ बात करनी है।"


"हां बोलिए नेहा जी।"


"दोस्त के नाते, क्या मैं कुछ पूछ सकती हूं?"


"हां बोलो।"


"क्या मुझसे नाराज हैं किसी बात पर?"


"दोस्त कहती हो और बातें भी छुपाती हो?" मैने सपाट भाव से पूछा।


"कौन सी बात छुपाई मैने?" उसने भी आश्चर्य से कहा।


"यही की तुम शादीशुदा हो।"



ये सुन कर वो मुझे गौर से देखने लगी...

Bahut hi badhiya update he Riky007 Bhai,

Manish ka Neha ke prati ye rukha vayvahar thik hi tha...............

Neha ne bhi apne baare me jyada kuch nahi bataya tha manish ko...........khaskar uski married life ke bare me.............

Keep posting Bro
 

dhparikh

Well-Known Member
13,326
15,511
228
#अपडेट ६


अब तक आपने पढ़ा -


मैने करण को कॉल किया, "जी सर, कोई दिक्कत है क्या?"


"ये नेहा का नाम गलत प्रिंट हुआ है शायद? सब जगह Mrs. नेहा वर्मा है।"


"जी सही तो है सर वो।"


अब आगे -


"क्या?"


"जी सर, आपको पता नहीं, वो शादीशुदा है।"


"ओह अच्छा, चलो बेस्ट ऑफ लक फॉर योर टूर, और प्रिया को भी विश कर देना।" मैने अपनी आवाज को नार्मल रखते हुए कहा। हालांकि मुझे जोर का झटका लगा था।


मन बहुत व्यथित था कि इतनी बड़ी बात नेहा ने मुझसे छुपाई कैसे, लेकिन फिर एक बार ये भी सोचा कि हमारे बीच कभी ऐसी बात तो हुई ही नहीं कि वो मुझे बताती, फिर दिमाग ये सोचने लगता कि कोई सुहाग की निशानी भी नहीं दिखी मुझे, आखिर क्या चक्कर है ये।


एयरपोर्ट पहुंचते ही बोर्डिंग की अनाउंसमेंट हो गई थी, इसीलिए मैने नेहा को लेकर पहले चेक इन किया और फ्लाइट में भी हम दोनो की सीट अलग थी, इसीलिए कोई बात करने का चांस नहीं मिला। मन ही मन मैं गुस्सा था, इसीलिए मैने भी कोई ऐसी ज्यादा कोशिश नहीं की। लखनऊ में वहां के लोकल लोग हमें पिकअप करने आए थे, इसीलिए कार में कोई बात करने का फिर से मौका नहीं मिला। होटल में हमारे कमरे आमने सामने थे, और दोनो फ्रेश होने चले गए।


फ्रेश होने के बाद मुझे भूख लग रही थी, तभी मेरा फोन बजा, ये नेहा थी।


"हेलो?"


"सोचा अब तो लंच का टाइम है तो एक साथ ही कर लेते हैं, नीचे रेस्टुरेंट चलेंगे?"


"तुम खा लो नेहा, मेरे सर ने दर्द है, और वैसे भी मैं घर से हैवी ब्रेकफास्ट करके चला था, तो अभी तो भूख नहीं ही है।" भूख तो थी, पर उसके साथ खाने की इच्छा नहीं थी मुझे बिल्कुल भी।


"ओह, क्या आ कर बाम लगा दूं?"


"अरे नहीं, अभी एक घंटा है मीटिंग में, थोड़ा सो लेता हूं, रात को सोया नहीं था अच्छे से, शायद उसी से हो।" ये बोल कर मैने फोन काट दिया। फिर नाश्ता ऑर्डर करके रूम में ही मंगवा लिया।


नाश्ता आने के बाद मैं खाने बैठा और कुछ ही समय बाद मेरे रूम का दरवाजा खुला, जिसे मैं लॉक करना भूल गया था नाश्ता लेने के बाद, और नेहा अंदर आई।


"मैने सोचा कि तुम्हारे सर में दर्द है तो..."


"तुमने तो कहा भूख नहीं, फिर?"


"भूख लग गई तो मंगवा लिया।" मैने कुछ रुखाई से कहा।


"ओह सॉरी, मुझे बिना परमिशन के अंदर नहीं आना चाहिए था।"


ये बोल कर वो वापस चली गई।


कुछ देर बाद हम दोनो नीचे उतर कर मीटिंग में चले गए। देर रात तक मीटिंग चली और हमें कोई भी समय अकेले में नहीं मिला। थक जाने के कारण दोनों अपने अपने रूम में सो गए।


अगले दिन सुबह कानपुर के लिए निकल गए, साथ में कंपनी का एक एंप्लॉई भी था, वहां की मीटिंग भी देर शाम तक चली और रात को ही हमारी फ्लाइट थी दिल्ली की। देर रात को दिल्ली पहुंचे, यहां भी एक होटल में हमारा अरेंजमेंट था, लेकिन मैने वो कैंसल करके मित्तल सर के फॉर्महाउस जो छतरपुर में था वहां चले गए। दिल्ली में मैं अक्सर यहीं रुकता था। केयरटेकर ने डिनर का इंतजाम और हम दोनो के रूम रेडी रखे थे। हम दोनो ही बहुत थके थे तो खा कर अपने कमरों में जा कर सो गए। केयरटेकर ने बताया कि मित्तल सर भी आए हुए हैं और अभी वो सो चुके है।


वापी से लेकर अभी तक मेरे और नेहा के बीच जो भी बात हुई बस प्रोफेशनल तरीके से हुई। और मेरा व्यवहार भी कुछ रुखा सा ही था, जिससे वो थोड़ी दूरी बनाई हुई थी मुझसे।


सुबह नाश्ते की टेबल पर मित्तल सर भी मौजूद थे।


"और कैसी रही लखनऊ और कानपुर की मीटिंग?"


"बहुत बढ़िया रही, लोगों ने अच्छा रिस्पॉन्स दिया हमे लगता है कि जल्दी ही यहां भी ब्रांच खोल देनी चाहिए।"


"वाह ये तो अच्छी बात है। नेहा, क्या तुम अब अकेले मीटिंग हैंडल कर लोगी? मुझे मनीष को लेकर मंत्रालय जाना होगा।"


"जी सर, बिलकुल कर लूंगी।"


"वो जो वाल्ट वाली बात बोली थी मैने तुमको, उसके लिए चलना है।"


"बिलकुल चलिए, मेरा प्लान रेडी है पूरा।"


"ठीक है, मनीष नाश्ता करके मेरे साथ चलो तुम, मैने दिल्ली जोन के मैनेजर को नेहा के साथ रहने के लिए बोल दिया है, वो अभी 10 मिनिट में पहुंच कर नेहा को साथ ले जायेंगे वेन्यू पर। ठीक है मैं आता हूं अभी रूम से।"


थोड़ी देर के बाद नेहा नॉर्थ जोन के मैनेजर के साथ चली गई, और मैं सर के साथ मंत्रालय चल दिया, वहां पर पहले से ही उनकी अपॉइंटमेंट थी, लेकिन नेता तो नेता होते हैं, लगभग पूरी दोपहर बैठने के बाद मंत्री जी हमसे मिले और हमने उनके सामने प्रोपोजल रखा। असल में ऑटोमेटेड ब्रांच तो बस एक सीढ़ी थी सर के असल सपने की ओर। वो एक ऐसा वाल्ट बनवाना चाहते थे जिसमें सरकार अपना सोना रख सके। मैने उसकी रूप रेखा लगभग तैयार कर दी थी, बस सरकार से परमिशन ले कर उसपर काम करना था।


मीटिंग के बाद मंत्री जी बड़े खुश दिखे, और अगले दिन के लिए अपने विभाग के ऑफिसर्स के साथ इस प्रोजेक्ट को डिसकस करने के लिए दिया।


वापस आते आते रात हो चुकी थी, और नेहा भी थोड़ी देर पहले ही आई थी। दिसंबर का समय था और वातावरण ठंडा था। डाइनिंग टेबल पर नॉर्मल काम की बातें हुई और फिर हम सब सोने चले गए। अगला दिन भी व्यस्त था। शाम तक सारे काम खत्म हो चुके थे, और मित्तल सर मंत्रालय से ही वापस चले गए थे।


जब मैं फॉर्महाउस पहुंचा तो शायद नेहा जल्दी आ गई थी, और वो नीचे बने गार्डन में टहल रही थी। मैं फ्रेश हो कर आया तो फिर हमने खाना खाया। आज भी हमारे बीच एक खामोशी ही पसरी थी।


खाना खा कर मैं भी गार्डन में टहलने लगा। नेहा कुछ देर डाइनिंग टेबल पर ही बैठ अपना फोन चला रही थी। टेबल साफ करके सारे लोग अपने क्वार्टर में चले गए, और इस समय मुख्य इमारत में बस मैं और नेहा थे।


कुछ समय बाद मुझे लगा कोई मेरे पीछे है, देखा तो नेहा थी। इस समय उसने एक पैजामा टीशर्ट पहना था, जो अभी ठंड के हिसाब से कुछ कम था। मैं एक शॉल ओढ़े था।


"मुझे आपसे कुछ बात करनी है।"


"हां बोलिए नेहा जी।"


"दोस्त के नाते, क्या मैं कुछ पूछ सकती हूं?"


"हां बोलो।"


"क्या मुझसे नाराज हैं किसी बात पर?"


"दोस्त कहती हो और बातें भी छुपाती हो?" मैने सपाट भाव से पूछा।


"कौन सी बात छुपाई मैने?" उसने भी आश्चर्य से कहा।


"यही की तुम शादीशुदा हो।"



ये सुन कर वो मुझे गौर से देखने लगी...
Nice update...
 
Top