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Romance भंवर (पूर्ण)

nain11ster

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Update:-27




अपस्यु:- वो उसे फैसला करने दीजिए। आप बस अपनी बात कहिए आंटी।

कुंजल:- क्या बात है मां, आप को इतना बताने में क्यों वक़्त लग रहा है कि इनके पापा के धोक की वजह से मेरे पापा ने आत्महत्या कर ली और मेरा छोटा भाई ये हादसा बर्दास्त नहीं कर पाया।

अपस्यु:- क्या ???? अंकल और मानस नहीं रहे?

नंदनी:- मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं। तुमलोग अपनी बहन को ढूंढ़ते यहां तक आए वही बहुत है। अब तुम जाओ, वरना कहीं तुम्हारे मम्मी-पापा को पता चला कि तुम मुझसे मिलने आए थे, तो वो गुस्सा करेंगे।

अपस्यु:- गुस्सा करने के लिए गुस्सा करने वालों को जिंदा भी रहना पड़ता है। जो जिंदा ही नहीं वो क्या गुस्सा करने आएंगे?

कुछ देर पहले आरव और अपस्यु अचरज में थे अब बारी नंदनी और कुंजल की थी। नंदनी आश्चर्य से देखती उनसे पूछने लगी… "ये कब हुआ?"

अपस्यु:- 14 जून 2007…

नंदनी अपने सिर पर हाथ रख कर बिलखती हुई कहने लगी…. "मुझे आज तक लगता रहा की तुम्हारे पापा ने मेरे बच्चे और पति का कत्ल करवाया है"…

"ये क्या बोल रही हैं आप?".. यह इतना बड़ा झटका था कि सबके चेहरे पर केवल आश्चर्य के भाव थे और कुंजल तो जैसे टूट ही गई हो। उसको ऐसा झटका लगा था कि उसका दिमाग जी सुन्न पड़ गया।

नंदनी:- ये बात आज तक मैंने कुंजल को भी नहीं बताई। ये घटना ठीक एक दिन बाद की है, 15 जून 2007. हम टोरंटो में थे अपने घर, जब मुझे ये सूचना मिली कि ओटावा में मेरे पति और बच्चे की लाश मिली है। गला घोंटा कर हत्या किया गया था और कातिलों का कोई सुराग तक नहीं मिला।

"आपने इतनी बड़ी बात आज तक मुझसे छिपाए रखी।" कुंजल फुटफुट कर रोती अपनी मां से पूछने लगी। नंदनी अपनी आशु छिपाती, अपने बेटी के सिर को वापस गोद में रखकर उसके आंसू पोंछती उसके सर पर अपने हाथ फेरने लगी।

अपस्यु:- बहुत सी बातें है कुंजल उस वक़्त की जो मुझे भी पता नहीं, और शायद आंटी तुम्हारे मन में भी जहर नहीं घोलना चाहती थी इसलिए नहीं बताया। हां लेकिन इस वक़्त मैं केवल इतना ही कहूंगा कि मेरे पापा और मम्मी ने आप लोगों के साथ कोई बेईमानी नहीं किया।

कुंजल, अपने प्रियजनों कि हत्या के बारे में सुनकर सिसक रही थी और सिसकती आवाज़ में ही पूछने लगी…. तो फिर मेरे पापा को उनका हिस्सा क्यों नहीं मिला?

अपस्यु:- इस "क्यों" ने ही हमारे पूरे परिवार को आज इस मोड़ पर ला खड़ा किया है। मुझे बस इतनी शिकायत थी कि दो भाइयों में आपसी अन-बन होते रहती है, किंतु इतना भी बड़ा क्या बैर की अपने भाई की मौत पर उसकी लाश तक देखने नहीं आए परन्तु आप लोगों को सुनने के बाद कहानी पूरी समझ में अा गई।

नंदनी:- कैसी कहानी।

अपस्यु:- सी.ए.बी (चन्द्रभान एंड भूषण) लिमिटेड 2003 से घाटे में चल रही थी। केवल कनाडा ही नहीं बल्कि फ्रांस में भी अपनी कंपनी नीचे गिर रही थी।

नंदनी:- लेकिन फ्रांस में तो लगातार ग्रोथ दिख रहा था।

अपस्यु:- वो इसलिए क्योंकि एक बात जो आप को पता नहीं, पापा अपना घाटा पूरा करने के लिए हवाला का काम करने लगे थे। दूसरों के ब्लैक मनी को व्हाइट करना और ये कंपनी के प्रॉफिट में शो होता रहा।

नंदनी:- क्या ??? तुम्हे ये सब कैसे पता।

कुंजल:- तो क्या तुम दोनों भी वही काम कर रहे हो इस वक़्त। तुम्हारे रहन-सहन देख कर तो ऐसा ही लगता है।

अपस्यु:- पागल, ये सब पैसे तो सी.ए.बी को पूरी तरह से बेचकर मिले है। तकरीबन 200 करोड़ है जिसके व्याज के पैसे पर हम ऐश करते हैं।

आरव:- तू क्यों मुंह छोटा कर रही है, तुम्हे भी पूरे पैसे मिलेंगे ऐश करने के लिए।

कुंजल:- ये बोलता भी है क्या? इतनी देर से सारी बातें सोनू ही बोल रहा था तो मुझे लगा इसे बोलना नहीं आता।

अराव:- बोलना, समझना और समझाना ये सब इसी का डिपार्टमेंट है। मुझसे ये नहीं होता।

"मुझसे भी नहीं होता"… कुंजल हंसती हुई बोली और आरव के ओर हाथ बढ़ा कर ताली बजाने लगी।

नंदनी:- भाई साहब ये कैसा काम कर रहे थे। क्या उन्हें कभी ख्याल नहीं आया कि गलत काम कर रहे है?

अपस्यु:- बहुत लंबी कहानी है आंटी। पहले आप लोग चलो यहां से। आपसे कभी इस हाल में मुलाकात होगी सोचा ना था। कुंजल को पता है कि आप रॉयल फैमिली से बिलोंग करती है।

नंदनी:- उस परिवार का दामन तो मेरी शादी के बाद ही छूट गया था, इसलिए मुड़ कर दोबारा ख्याल भी नहीं आया की मैं किसी रॉयल फैमिली से बिलोंग करती हूं।

कुंजल:- मोम आपने मुझसे कितना कुछ छिपाए रखा?

नंदनी:- नहीं बेटा, अभी जब सोनू ने रॉयल फ़ैमिली बोला तब याद आया कि मेरा मयका भी है, वरना शादी के बाद तो भूल ही गई थी। ये सब छोड़ो सोनू तुम मुझे पूरी बात बताओ ये अधूरी बात काटने दौड़ती है।

अपस्यु:- अभी चलते हैं यहां से … आप को यहां तो मैं एक पल भी नहीं रहने दूंगा।

नंदनी:- नहीं जो तुम्हारे पास है वो तुम्हारा है .. तुमदोनो बस मिलते रहना। हम यहां खुश हैं।

अपस्यु:- आरव, लेे भाई अब जोर जबरदस्ती वाला सीन अा गया है .. संभाल इन्हे तू।

फिर क्या था आरव कुंजल को लेकर निकल गया और इस बार वो अपस्यु से कहता गया कि कार कि जीपीएस फॉलो कर आंटी को साथ लेकर अा। हालांकि नंदनी तो जिद पकड़े थी लेकिन अराव कुंजल को जबरदस्ती वहां से लेकर गया। कुंजल को लगा कि वो अराव के साथ उसके घर जाएगी लेकिन अराव उसे सीधा लेकर पहुंचता है शहर से सबसे बड़े शॉपिंग मॉल।

नंदनी जिद्दी थी तो अपस्यु भी हटी था, वो तब तक नहीं माना जबतक नंदनी ने हां नहीं की। नंदनी उस जुग्गी से कुछ सामान लेना चाहती थी लेकिन अपस्यु उसे खींच कर बाहर लेे आया और एक समान तक उठाने नहीं दिया। दोनों पैदल ही सड़क तक निकले।

"तुमने पूरी बात अब तक नहीं बताई अपस्यु, कुछ संदेह मेरे अंदर उठ रहे हैं, मैं उनके सामने मैं जाहिर नहीं करना चाहती थी लेकिन मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही है"… नंदनी ने अपना सवाल रखा।

"यदि आप सोच रहे हैं कि पापा के गलत काम के वजह से अंकल का कत्ल हुआ तो आप गलत सोच रही है। क्योंकि अब मुझे समझ में आ रहा है कि पापा ने उस वक़्त अंकल से झगड़ा क्यों किया होगा?"

नंदनी:- क्यों किया था?

अपस्यु:- पापा को पता था कि वो क्या कर रहे है और गलत काम में वो पूरे परिवार को सामिल नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने दिखाने के लिए अंकल के साथ बेईमानी किया। वो नहीं चाहते थे कि उनके राजदार को ये लगे की पापा के धंधे में उसका भाई भी हिस्सेदार है।

नंदनी:- हम्मम ! तो फिर वो कत्ल की वजह क्या रही होगी?

अपस्यु:- मैं बस उन्हीं कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रहा हूं। हां लेकिन पापा ने कुछ बॉन्ड्स और पेपर चाचा के लिए छोड़े थे जो तकरीबन इस वक़्त 100 करोड़ से ऊपर के होंगे, मैंने सब संभाल कर रखा है। पापा भारत से फ्रांस लौटकर किसी तरह उन पेपर्स को अंकल तक पहुंचा ही देते लेकिन ऐसा हो ना सका।

नंदनी:- तुम तो बहुत छोटे से ही यहां आश्रम में रहते थे ना सोनू, फिर तुमने कंपनी कैसे बेच दी और इतनी सारी बातें तुम्हे कैसे पता?

अपस्यु:- जब मैं नैनीताल में गुरुजी के पास था, तब वहां मुझे एक गॉडफादर मिल गए थे। मेरी सारी जानकारी के पीछे उनका ही पूरा योगदान रहा है बस एक ही चूक हो गई, हमने अंकल के बारे में थोड़ी छानबीन की होती तो आप को इस हाल में नहीं रहना पड़ता और ना ही मुझे अपने ही परिवार के लोगों से नफरत करनी पड़ती।

नंदनी:- तुम्हारा हर जवाब मन में एक सवाल छोड़ रहा है सोनू। मुझे तुम केवल इतना बता दो कि क्या तुम उन लोगों के पीछे हो जिन्होंने तुम्हारे मॉम्-डैड का कत्ल किया? क्योंकि छानबीन की बात करना और जितने विश्वास के साथ तुमने अपनी बात रखी है ये उसी ओर इशारा करते हैं।

अपस्यु:- नहीं मैं किसी के पीछे नहीं हूं। पापा ने गलत किया था और उनके किए की सजा मेरी मां और हम दोनों भाइयों को मिली। वो गुजरा वक़्त था बीत गया। मेरे गॉडफादर ने मुझे उस वक़्त संभला था और उन्होंने ही मेरे पापा के बारे में पूरी जानकारी दी थी। साथ में उनके पास मेरे पापा के कुछ दस्तावेज भी थे, जो उन्होंने सबकी नजर से बचा कर मुझे लाकर दिए थे। उन दस्तावेजों में, दिल्ली के 3 बेनामी फ्लैट, सी.ए.बी का पूरा पेपर और अंकल के नाम के बोंड पेपर्स थे।

नंदनी:- तो फिर तुमने वो बोंड पेपर के खातिर भी अपने अंकल को ढूंढ़ने की कोशिश क्यों नहीं की?

अपस्यु:- उस वक़्त मैं खुद ही संभलने कि कोशिश कर रहा था। मेरी कोई उम्र थी क्या? वैसे भी उन बोंड को मैंने अपना धन कभी नहीं माना, इसलिए आज भी लॉकर में वो पड़ा है। हां लेकिन कभी उस पेपर को उसके सही मालिक तक पहुंचने की कोशिश भी ना किया। क्योंकि आप ही बताइए, एक छोटा लड़का जो अनाथ हो गया हो और उसके परिवार से कोई ना आया देखने तो कैसा मेहसूस करेगा। और वो कैसी सोच रखेगा परिवारवालों के लिए।

"कितना अजीब लगता है ना सब कुछ लूट जाने के बाद अपनी लूटी-पिटी जिंदगी की समीक्षा करना। इसमें कोई दो राय नहीं कि तुम्हारे पापा के वजह से हम सब का ये हाल हुआ"… नंदनी खुद को संतुष्ट करती अपस्यु से अपनी बात कही।
 

rgcrazyboy

:dazed:
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aye sa bhi huaa tha kya.
kya baat hai aaj kal story likhane main tum to bhuta gharai main ghusne lage ho baat kya hai.
itne gharai to knbt main bhi na the shuru ke updates main :bat:
 

Avi12

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Bahut hi shandar updates guruji. Dheere dheere raz khulne shuru ho rahe hain. Dono bhaiyon ko unka parivar bhi mil gaya. Ab dekhte hain aur kya raaz khulte hain. Sachi aur lavni ka gussa to khair khatam hi ho jaega sacchai jan kar. Dekho agey kya hota hai.
Ek update aur milega kya sirji???
 
Last edited:

aka3829

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Bhai kya likhte ho yaar. Kasam se ek dum jhakaassss. Suru me ye story romantic lagi ki 2 premiyon ke milne aur bhichadne ki story lagi. Lekin fir isame aapne action dala to isane apna rukha ek thriller story ka kar liya. Lekin last ke do update padhne ke baad is story ne ek family drame ka rup leliya he. Haan beech 2 me aapne comedy ka tadka bhi lagaya tha.
Bhai ek kahani me kitane rang dikhaoge. Sabd kam pad rahe he tarif ke liye.
Waiting 4 next update
 

Aakash.

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उस गंदी बस्ती में प्रवेश करते ही चारों ओर अजीब सी बदबू और हर जगह कचरा फैला हुआ। अपस्यु और आरव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे थे उनका पैर जैसे स्थूल (भारी) परने लगे थे। एक-एक कदम आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।

जो बातें इस वक़्त आरव के दिमाग में चल रही थी वहीं बातें अपस्यु भी सोच रहा था। दोनों की आंखें डबडबाई सी थी बस आखों से आंसू छलकने बाकी थे। दिमाग ने जैसे काम करना बंद कर दिया हो। कुछ भी समझ पाना मुश्किल था। कुछ ही देर में दोनों भाई एक झोपड़ी के सामने थे। एक पुलिसवाले ने आवाज़ लगाई और दोनों मां बेटी दरवाजे पर खड़ी थी।

कुंजल तो उन दोनों को देख कर ही गुस्से में अंदर भाग गई, लेकिन उसकी मां यानी की दोनों भाई की आंटी नंदनी, बस एक झलक दोनों भाई को देखी और देखते ही पहचान गई। वो दोनो से लिपट कर ऐसे रोई, मानो वर्षों से ये आशु किसी के लिए बचा रखे हो। डबडबाई आखें तो दोनों भाई की थी लेकिन अपस्यु के आशु आखों में ही छलकते रहे और आरव फुटफुट कर रो रहा था।

उनलोगों को ऐसे देख पुलिसवालों को भी अपस्यु की बात समझ में अा गई थी। थानेदार ने अपस्यु के कंधे पर हाथ रखा और साथ चलने का इशारा किया। अपस्यु अपनी डबडबाई आखों को रुमाल से साफ करते हुए अपने आंटी से अलग हुआ। थोड़ी दूर चलने के बाद थानेदार ने अपस्यु को सरा मामला समझाते हुए हुए कहने लगा.…. "अपनी बहन में साथ अाकर अपनी रपट कैंसल करवाओ वरना शाम तक ये रिपोर्ट एसपी ऑफिस पहुंच जाएगी, फिर ज्यादा परेशानी होगी"।

अपस्यु उनके साथ कार तक आया और अपना डिक्की खोल कर कहने लगा… "सर आप का एहसान है मुझ पर। जितना आप की इक्छा हो उठा लीजिए।"… कार डिक्की में उस वक़्त कम से कम 30 लाख कैश थे। थानेदार को समझते देर नहीं लगी कि ये लड़का खुद इतनी आसानी से थाने क्यों आया। वो डिक्की बंद करते हुए सिर्फ इतना ही कहा.. "सिर्फ जुबान गंदी है लड़के, पर अपना दामन बिल्कुल साफ है। मैं नहीं जानता कि तुमलोग के परिवार के बीच क्या हुआ लेकिन इतना तो जरूर समझ में अा गया है कि तुम्हे अपने परिवार से कितना लगाव है"

जो आशु कहीं नहीं छलके वो थानेदार के सामने हाथ जोड़ कर अपने दोनो आखों से आंसू बहा रहा था। …. उसने अपना नंबर थानेदार साहब को दिया और वापस जुग्गी के ओर चल दिया।

लौट कर जब वो पहुंचा तब रास्ते में ही उसे कुंजल मिली जो बड़े गुस्से में कहीं जा रही थी। अपस्यु उसका रास्ता रोकते… "तुम्हारा गुस्सा जायज है, लेकिन बात करने से ही समस्या का समाधान होता है… भागने वाले हर वक़्त भागते ही रहते हैं।" …... "मैं कहीं भाग नहीं रही, अपने भतीजे के लिए ठंडा और नाश्ता का ऑर्डर मेरी मां ने दिया है उसे ही पूरा करने जा रही हूं।".. कुंजल फिर से गुस्से में अपनी प्रतिक्रिया दी।

जैसे 2 दोस्त गले में हाथ डाल कर साथ चलते हैं। ठीक वैसे ही अपस्यु, कुंजल के गले में हाथ डाल कर वापस घर के ओर ले जाने लगा। कुजल के आखों में आशु और गुस्सा दोनों थी, बस अंदर वो हिम्मत नहीं बची थी कोई विरोध कर सके। पूरी तरह टूट जाना जिसे कहते हैं वहीं स्थिति कुंजल की थी। जुबान से बस इतना ही निकल रहा था… "हमारा कोई नहीं, अपने ही अपनों को लुट लेते हैं, तुम सब बेईमान हो"…

अपस्यु उसके गले में हाथ डाले उसे कंधों का भी सहारा दे रहा था और दोनों वापस घर में लौटकर आए। अंदर आरव नीचे जमीन पर बैठा था और उसी के पास नंदनी रघुवंशी बैठकर, दोनों बातें कर रहे थे। अपस्यु ने कुंजल को जैसे ही छोड़ा वो बेसुध होकर रोते-रोते नीचे जमीन पर गिर गई।

नंदनी तुरंत उठकर अपनी बेटी के पास पहुंची और उसका सर अपने गोद में लेते हुए उसे चुप कराने लगी, लेकिन कुंजल के आशु थे कि वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। तभी उस जुग्गी में अपस्यु की तेज आवाज गूंजी और वो जोर से चिल्लाकर कहने लगा…. "बस, बहुत हुआ, रोना बंद करो सब। पागलों की तरह कब से सब रोए जा रहे हैं। मुझे अभी बात करनी है, इसलिए सब बिल्कुल शांत।"

अचानक बदले माहौल को देखकर कुंजल उठकर बैठ गई। अपने आशु पोंछति …. "तुम चले ही क्यों नहीं जाते, सबकुछ भूलकर तो हम यहां जी रहे थे ना, फिर वो दर्द कुरेदने क्यों पहुंच गए?"

अपस्यु:- क्या दर्द तुम्हारे ही पास है, और दर्द है तो फासी लगा कर मर जाओ पर हर वक़्त दुख-दर्द के नाम पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश न करो।

अपस्यु की बात सुनकर कुंजल लगभग शांत हो गई। नंदनी दोनों बच्चों के सर पर हाथ फेरती कहने लगी:- इनकी भी क्या गलती है कुंजल, बड़े लोगों के गलती का जिम्मेदार इन्हे क्यों ठहराना। लड़ाई तो उन दोनों भाइयों में हुई थी फिर तुमलोग क्यों आपस में लड़ रहे हो।

अपस्यु:- आंटी पहले मुझे आप ये बता दो कि कुंजल की तरह आप के मन में तो हमारे लिए बैर नहीं ना।

नंदनी की मुस्कान दर्द भड़ि थी, वो मुस्कुराती हुई कहने लगी… "पागल हो क्या? तुम्हारे मम्मी पापा से लाख बैर हो, बच्चों से कैसी बैर। तुम दोनों तो मेरे ही बेटे हो। 4 साल तक तुम दोनों को मैंने भी पाला है और अपने छाती से दूध भी पिलाई है। अपने बेटो के लिए कैसी बैर। और शायद तुम्हारे मम्मी-पापा को भी कुंजल से ऐसा ही लगवा होगा। हालांकि लगाव तो बड़ों में भी था बस कुछ गलतफहमी और थोड़ी लालच ने हमे अलग कर दिया।

अपस्यु:- जानती है, मां मुझ से जब भी मिलने आती थी तो एक ही बात कहती थी। तुझे मेरा नहीं नंदनी का बेटा होना चाहिए था। उनका मानना था कि आप कि समझदारी और सूझ-बुझ मुझ में अाई है। सुना था, लेकिन आज देख भी लिया। आप से मुझे बहुत कुछ सीखना है। लेकिन पहले मुझे ये बताइए दोनों भाई इतना प्यार करने वाले थे फिर आपस में गलतफहमी और लालच कैसे पैदा हो गई। क्योंकि हम दोनों में से किसी को पता नहीं कि झगड़े का मुद्दा क्या था और दोनों में इतनी भी क्या बैर की एक बार जो अलग हुए तो फिर कभी एक दूसरे की सुध तक ना ली।

नंदनी:- तुमलोग बहुत छोटे थे उस वक़्त और तुम तो यहां रहते भी नहीं थे सोनू। पहले सरा बिजनेस ज्वाइंट ही था तुम्हारे पापा का कारोबार फ्रांस में इनका कनाडा में। दोनों भाइयों में बिजनेस को लेकर कुछ मतभेद हो गया और ये चाहते थे कि दोनों अपने-अपने बिजनेस को अलग कर लें।

अपस्यु:- आंटी आप रोना बंद कीजिए और आगे बताइए।

नंदनी:- कुछ दिल के जख्म होते हैं जो आशुओं के रूप में छलक आते हैं। फिर उसके बाद तो हमारी दुनिया ही जैसे उजाड़ गईं। और एक के बाद एक घटनाएं होती चली गई।

आरव, अपने आंटी के आशु पोंछते….. "क्या हुआ आंटी, आप पूरी बात बताइए।"

कुंजल:- होना क्या था पूरी कंपनी तुम्हारे पापा ने हड़प लिया और जब मेरे पापा ने उनसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की तो उन्होंने अपने ऑफिस से धक्के मारकर भगा दिया।

अपस्यु:- हैम्म ! इस वक़्त अंकल कहां है और मानस।

नंदनी:- कुंजल बेटा तू बाहर जाएगी क्या? 2 मिनट हमे कुछ बातें करनी है।

अपस्यु:- नहीं। कोई बीच का भेद नहीं। उसे भी जानने दीजिए ।

नंदनी:- नहीं बेटा। शायद वो बर्दास्त ना कर पाए।

अपस्यु:- वो उसे फैसला करने दीजिए। आप बस अपनी बात कहिए आंटी।
Kunjal's displeasure is understandable, but it is true or is still something we do not know. My heart happy to see the union of Nandani and both brothers. I misunderstood the policeman but he is good. Nandani is absolutely right, it is not right to punish children for the mistake of parents. Let's see what is the secret in the next update.
As always the update was great, You are writing very well, Now let's see what happens next, Till then waiting for the next part of the story.
Thank You...
???
 
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