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अपस्यु:- वो उसे फैसला करने दीजिए। आप बस अपनी बात कहिए आंटी।
कुंजल:- क्या बात है मां, आप को इतना बताने में क्यों वक़्त लग रहा है कि इनके पापा के धोक की वजह से मेरे पापा ने आत्महत्या कर ली और मेरा छोटा भाई ये हादसा बर्दास्त नहीं कर पाया।
अपस्यु:- क्या ???? अंकल और मानस नहीं रहे?
नंदनी:- मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं। तुमलोग अपनी बहन को ढूंढ़ते यहां तक आए वही बहुत है। अब तुम जाओ, वरना कहीं तुम्हारे मम्मी-पापा को पता चला कि तुम मुझसे मिलने आए थे, तो वो गुस्सा करेंगे।
अपस्यु:- गुस्सा करने के लिए गुस्सा करने वालों को जिंदा भी रहना पड़ता है। जो जिंदा ही नहीं वो क्या गुस्सा करने आएंगे?
कुछ देर पहले आरव और अपस्यु अचरज में थे अब बारी नंदनी और कुंजल की थी। नंदनी आश्चर्य से देखती उनसे पूछने लगी… "ये कब हुआ?"
अपस्यु:- 14 जून 2007…
नंदनी अपने सिर पर हाथ रख कर बिलखती हुई कहने लगी…. "मुझे आज तक लगता रहा की तुम्हारे पापा ने मेरे बच्चे और पति का कत्ल करवाया है"…
"ये क्या बोल रही हैं आप?".. यह इतना बड़ा झटका था कि सबके चेहरे पर केवल आश्चर्य के भाव थे और कुंजल तो जैसे टूट ही गई हो। उसको ऐसा झटका लगा था कि उसका दिमाग जी सुन्न पड़ गया।
नंदनी:- ये बात आज तक मैंने कुंजल को भी नहीं बताई। ये घटना ठीक एक दिन बाद की है, 15 जून 2007. हम टोरंटो में थे अपने घर, जब मुझे ये सूचना मिली कि ओटावा में मेरे पति और बच्चे की लाश मिली है। गला घोंटा कर हत्या किया गया था और कातिलों का कोई सुराग तक नहीं मिला।
"आपने इतनी बड़ी बात आज तक मुझसे छिपाए रखी।" कुंजल फुटफुट कर रोती अपनी मां से पूछने लगी। नंदनी अपनी आशु छिपाती, अपने बेटी के सिर को वापस गोद में रखकर उसके आंसू पोंछती उसके सर पर अपने हाथ फेरने लगी।
अपस्यु:- बहुत सी बातें है कुंजल उस वक़्त की जो मुझे भी पता नहीं, और शायद आंटी तुम्हारे मन में भी जहर नहीं घोलना चाहती थी इसलिए नहीं बताया। हां लेकिन इस वक़्त मैं केवल इतना ही कहूंगा कि मेरे पापा और मम्मी ने आप लोगों के साथ कोई बेईमानी नहीं किया।
कुंजल, अपने प्रियजनों कि हत्या के बारे में सुनकर सिसक रही थी और सिसकती आवाज़ में ही पूछने लगी…. तो फिर मेरे पापा को उनका हिस्सा क्यों नहीं मिला?
अपस्यु:- इस "क्यों" ने ही हमारे पूरे परिवार को आज इस मोड़ पर ला खड़ा किया है। मुझे बस इतनी शिकायत थी कि दो भाइयों में आपसी अन-बन होते रहती है, किंतु इतना भी बड़ा क्या बैर की अपने भाई की मौत पर उसकी लाश तक देखने नहीं आए परन्तु आप लोगों को सुनने के बाद कहानी पूरी समझ में अा गई।
नंदनी:- कैसी कहानी।
अपस्यु:- सी.ए.बी (चन्द्रभान एंड भूषण) लिमिटेड 2003 से घाटे में चल रही थी। केवल कनाडा ही नहीं बल्कि फ्रांस में भी अपनी कंपनी नीचे गिर रही थी।
नंदनी:- लेकिन फ्रांस में तो लगातार ग्रोथ दिख रहा था।
अपस्यु:- वो इसलिए क्योंकि एक बात जो आप को पता नहीं, पापा अपना घाटा पूरा करने के लिए हवाला का काम करने लगे थे। दूसरों के ब्लैक मनी को व्हाइट करना और ये कंपनी के प्रॉफिट में शो होता रहा।
नंदनी:- क्या ??? तुम्हे ये सब कैसे पता।
कुंजल:- तो क्या तुम दोनों भी वही काम कर रहे हो इस वक़्त। तुम्हारे रहन-सहन देख कर तो ऐसा ही लगता है।
अपस्यु:- पागल, ये सब पैसे तो सी.ए.बी को पूरी तरह से बेचकर मिले है। तकरीबन 200 करोड़ है जिसके व्याज के पैसे पर हम ऐश करते हैं।
आरव:- तू क्यों मुंह छोटा कर रही है, तुम्हे भी पूरे पैसे मिलेंगे ऐश करने के लिए।
कुंजल:- ये बोलता भी है क्या? इतनी देर से सारी बातें सोनू ही बोल रहा था तो मुझे लगा इसे बोलना नहीं आता।
अराव:- बोलना, समझना और समझाना ये सब इसी का डिपार्टमेंट है। मुझसे ये नहीं होता।
"मुझसे भी नहीं होता"… कुंजल हंसती हुई बोली और आरव के ओर हाथ बढ़ा कर ताली बजाने लगी।
नंदनी:- भाई साहब ये कैसा काम कर रहे थे। क्या उन्हें कभी ख्याल नहीं आया कि गलत काम कर रहे है?
अपस्यु:- बहुत लंबी कहानी है आंटी। पहले आप लोग चलो यहां से। आपसे कभी इस हाल में मुलाकात होगी सोचा ना था। कुंजल को पता है कि आप रॉयल फैमिली से बिलोंग करती है।
नंदनी:- उस परिवार का दामन तो मेरी शादी के बाद ही छूट गया था, इसलिए मुड़ कर दोबारा ख्याल भी नहीं आया की मैं किसी रॉयल फैमिली से बिलोंग करती हूं।
कुंजल:- मोम आपने मुझसे कितना कुछ छिपाए रखा?
नंदनी:- नहीं बेटा, अभी जब सोनू ने रॉयल फ़ैमिली बोला तब याद आया कि मेरा मयका भी है, वरना शादी के बाद तो भूल ही गई थी। ये सब छोड़ो सोनू तुम मुझे पूरी बात बताओ ये अधूरी बात काटने दौड़ती है।
अपस्यु:- अभी चलते हैं यहां से … आप को यहां तो मैं एक पल भी नहीं रहने दूंगा।
नंदनी:- नहीं जो तुम्हारे पास है वो तुम्हारा है .. तुमदोनो बस मिलते रहना। हम यहां खुश हैं।
अपस्यु:- आरव, लेे भाई अब जोर जबरदस्ती वाला सीन अा गया है .. संभाल इन्हे तू।
फिर क्या था आरव कुंजल को लेकर निकल गया और इस बार वो अपस्यु से कहता गया कि कार कि जीपीएस फॉलो कर आंटी को साथ लेकर अा। हालांकि नंदनी तो जिद पकड़े थी लेकिन अराव कुंजल को जबरदस्ती वहां से लेकर गया। कुंजल को लगा कि वो अराव के साथ उसके घर जाएगी लेकिन अराव उसे सीधा लेकर पहुंचता है शहर से सबसे बड़े शॉपिंग मॉल।
नंदनी जिद्दी थी तो अपस्यु भी हटी था, वो तब तक नहीं माना जबतक नंदनी ने हां नहीं की। नंदनी उस जुग्गी से कुछ सामान लेना चाहती थी लेकिन अपस्यु उसे खींच कर बाहर लेे आया और एक समान तक उठाने नहीं दिया। दोनों पैदल ही सड़क तक निकले।
"तुमने पूरी बात अब तक नहीं बताई अपस्यु, कुछ संदेह मेरे अंदर उठ रहे हैं, मैं उनके सामने मैं जाहिर नहीं करना चाहती थी लेकिन मुझे अंदर ही अंदर खाए जा रही है"… नंदनी ने अपना सवाल रखा।
"यदि आप सोच रहे हैं कि पापा के गलत काम के वजह से अंकल का कत्ल हुआ तो आप गलत सोच रही है। क्योंकि अब मुझे समझ में आ रहा है कि पापा ने उस वक़्त अंकल से झगड़ा क्यों किया होगा?"
नंदनी:- क्यों किया था?
अपस्यु:- पापा को पता था कि वो क्या कर रहे है और गलत काम में वो पूरे परिवार को सामिल नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने दिखाने के लिए अंकल के साथ बेईमानी किया। वो नहीं चाहते थे कि उनके राजदार को ये लगे की पापा के धंधे में उसका भाई भी हिस्सेदार है।
नंदनी:- हम्मम ! तो फिर वो कत्ल की वजह क्या रही होगी?
अपस्यु:- मैं बस उन्हीं कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रहा हूं। हां लेकिन पापा ने कुछ बॉन्ड्स और पेपर चाचा के लिए छोड़े थे जो तकरीबन इस वक़्त 100 करोड़ से ऊपर के होंगे, मैंने सब संभाल कर रखा है। पापा भारत से फ्रांस लौटकर किसी तरह उन पेपर्स को अंकल तक पहुंचा ही देते लेकिन ऐसा हो ना सका।
नंदनी:- तुम तो बहुत छोटे से ही यहां आश्रम में रहते थे ना सोनू, फिर तुमने कंपनी कैसे बेच दी और इतनी सारी बातें तुम्हे कैसे पता?
अपस्यु:- जब मैं नैनीताल में गुरुजी के पास था, तब वहां मुझे एक गॉडफादर मिल गए थे। मेरी सारी जानकारी के पीछे उनका ही पूरा योगदान रहा है बस एक ही चूक हो गई, हमने अंकल के बारे में थोड़ी छानबीन की होती तो आप को इस हाल में नहीं रहना पड़ता और ना ही मुझे अपने ही परिवार के लोगों से नफरत करनी पड़ती।
नंदनी:- तुम्हारा हर जवाब मन में एक सवाल छोड़ रहा है सोनू। मुझे तुम केवल इतना बता दो कि क्या तुम उन लोगों के पीछे हो जिन्होंने तुम्हारे मॉम्-डैड का कत्ल किया? क्योंकि छानबीन की बात करना और जितने विश्वास के साथ तुमने अपनी बात रखी है ये उसी ओर इशारा करते हैं।
अपस्यु:- नहीं मैं किसी के पीछे नहीं हूं। पापा ने गलत किया था और उनके किए की सजा मेरी मां और हम दोनों भाइयों को मिली। वो गुजरा वक़्त था बीत गया। मेरे गॉडफादर ने मुझे उस वक़्त संभला था और उन्होंने ही मेरे पापा के बारे में पूरी जानकारी दी थी। साथ में उनके पास मेरे पापा के कुछ दस्तावेज भी थे, जो उन्होंने सबकी नजर से बचा कर मुझे लाकर दिए थे। उन दस्तावेजों में, दिल्ली के 3 बेनामी फ्लैट, सी.ए.बी का पूरा पेपर और अंकल के नाम के बोंड पेपर्स थे।
नंदनी:- तो फिर तुमने वो बोंड पेपर के खातिर भी अपने अंकल को ढूंढ़ने की कोशिश क्यों नहीं की?
अपस्यु:- उस वक़्त मैं खुद ही संभलने कि कोशिश कर रहा था। मेरी कोई उम्र थी क्या? वैसे भी उन बोंड को मैंने अपना धन कभी नहीं माना, इसलिए आज भी लॉकर में वो पड़ा है। हां लेकिन कभी उस पेपर को उसके सही मालिक तक पहुंचने की कोशिश भी ना किया। क्योंकि आप ही बताइए, एक छोटा लड़का जो अनाथ हो गया हो और उसके परिवार से कोई ना आया देखने तो कैसा मेहसूस करेगा। और वो कैसी सोच रखेगा परिवारवालों के लिए।
"कितना अजीब लगता है ना सब कुछ लूट जाने के बाद अपनी लूटी-पिटी जिंदगी की समीक्षा करना। इसमें कोई दो राय नहीं कि तुम्हारे पापा के वजह से हम सब का ये हाल हुआ"… नंदनी खुद को संतुष्ट करती अपस्यु से अपनी बात कही।