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Romance भंवर (पूर्ण)

nain11ster

Prime
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Update:-26



उस गंदी बस्ती में प्रवेश करते ही चारों ओर अजीब सी बदबू और हर जगह कचरा फैला हुआ। अपस्यु और आरव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे थे उनका पैर जैसे स्थूल (भारी) परने लगे थे। एक-एक कदम आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।

जो बातें इस वक़्त आरव के दिमाग में चल रही थी वहीं बातें अपस्यु भी सोच रहा था। दोनों की आंखें डबडबाई सी थी बस आखों से आंसू छलकने बाकी थे। दिमाग ने जैसे काम करना बंद कर दिया हो। कुछ भी समझ पाना मुश्किल था। कुछ ही देर में दोनों भाई एक झोपड़ी के सामने थे। एक पुलिसवाले ने आवाज़ लगाई और दोनों मां बेटी दरवाजे पर खड़ी थी।

कुंजल तो उन दोनों को देख कर ही गुस्से में अंदर भाग गई, लेकिन उसकी मां यानी की दोनों भाई की आंटी नंदनी, बस एक झलक दोनों भाई को देखी और देखते ही पहचान गई। वो दोनो से लिपट कर ऐसे रोई, मानो वर्षों से ये आशु किसी के लिए बचा रखे हो। डबडबाई आखें तो दोनों भाई की थी लेकिन अपस्यु के आशु आखों में ही छलकते रहे और आरव फुटफुट कर रो रहा था।

उनलोगों को ऐसे देख पुलिसवालों को भी अपस्यु की बात समझ में अा गई थी। थानेदार ने अपस्यु के कंधे पर हाथ रखा और साथ चलने का इशारा किया। अपस्यु अपनी डबडबाई आखों को रुमाल से साफ करते हुए अपने आंटी से अलग हुआ। थोड़ी दूर चलने के बाद थानेदार ने अपस्यु को सरा मामला समझाते हुए हुए कहने लगा.…. "अपनी बहन में साथ अाकर अपनी रपट कैंसल करवाओ वरना शाम तक ये रिपोर्ट एसपी ऑफिस पहुंच जाएगी, फिर ज्यादा परेशानी होगी"।

अपस्यु उनके साथ कार तक आया और अपना डिक्की खोल कर कहने लगा… "सर आप का एहसान है मुझ पर। जितना आप की इक्छा हो उठा लीजिए।"… कार डिक्की में उस वक़्त कम से कम 30 लाख कैश थे। थानेदार को समझते देर नहीं लगी कि ये लड़का खुद इतनी आसानी से थाने क्यों आया। वो डिक्की बंद करते हुए सिर्फ इतना ही कहा.. "सिर्फ जुबान गंदी है लड़के, पर अपना दामन बिल्कुल साफ है। मैं नहीं जानता कि तुमलोग के परिवार के बीच क्या हुआ लेकिन इतना तो जरूर समझ में अा गया है कि तुम्हे अपने परिवार से कितना लगाव है"

जो आशु कहीं नहीं छलके वो थानेदार के सामने हाथ जोड़ कर अपने दोनो आखों से आंसू बहा रहा था। …. उसने अपना नंबर थानेदार साहब को दिया और वापस जुग्गी के ओर चल दिया।

लौट कर जब वो पहुंचा तब रास्ते में ही उसे कुंजल मिली जो बड़े गुस्से में कहीं जा रही थी। अपस्यु उसका रास्ता रोकते… "तुम्हारा गुस्सा जायज है, लेकिन बात करने से ही समस्या का समाधान होता है… भागने वाले हर वक़्त भागते ही रहते हैं।" …... "मैं कहीं भाग नहीं रही, अपने भतीजे के लिए ठंडा और नाश्ता का ऑर्डर मेरी मां ने दिया है उसे ही पूरा करने जा रही हूं।".. कुंजल फिर से गुस्से में अपनी प्रतिक्रिया दी।

जैसे 2 दोस्त गले में हाथ डाल कर साथ चलते हैं। ठीक वैसे ही अपस्यु, कुंजल के गले में हाथ डाल कर वापस घर के ओर ले जाने लगा। कुजल के आखों में आशु और गुस्सा दोनों थी, बस अंदर वो हिम्मत नहीं बची थी कोई विरोध कर सके। पूरी तरह टूट जाना जिसे कहते हैं वहीं स्थिति कुंजल की थी। जुबान से बस इतना ही निकल रहा था… "हमारा कोई नहीं, अपने ही अपनों को लुट लेते हैं, तुम सब बेईमान हो"…

अपस्यु उसके गले में हाथ डाले उसे कंधों का भी सहारा दे रहा था और दोनों वापस घर में लौटकर आए। अंदर आरव नीचे जमीन पर बैठा था और उसी के पास नंदनी रघुवंशी बैठकर, दोनों बातें कर रहे थे। अपस्यु ने कुंजल को जैसे ही छोड़ा वो बेसुध होकर रोते-रोते नीचे जमीन पर गिर गई।

नंदनी तुरंत उठकर अपनी बेटी के पास पहुंची और उसका सर अपने गोद में लेते हुए उसे चुप कराने लगी, लेकिन कुंजल के आशु थे कि वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। तभी उस जुग्गी में अपस्यु की तेज आवाज गूंजी और वो जोर से चिल्लाकर कहने लगा…. "बस, बहुत हुआ, रोना बंद करो सब। पागलों की तरह कब से सब रोए जा रहे हैं। मुझे अभी बात करनी है, इसलिए सब बिल्कुल शांत।"

अचानक बदले माहौल को देखकर कुंजल उठकर बैठ गई। अपने आशु पोंछति …. "तुम चले ही क्यों नहीं जाते, सबकुछ भूलकर तो हम यहां जी रहे थे ना, फिर वो दर्द कुरेदने क्यों पहुंच गए?"

अपस्यु:- क्या दर्द तुम्हारे ही पास है, और दर्द है तो फासी लगा कर मर जाओ पर हर वक़्त दुख-दर्द के नाम पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश न करो।

अपस्यु की बात सुनकर कुंजल लगभग शांत हो गई। नंदनी दोनों बच्चों के सर पर हाथ फेरती कहने लगी:- इनकी भी क्या गलती है कुंजल, बड़े लोगों के गलती का जिम्मेदार इन्हे क्यों ठहराना। लड़ाई तो उन दोनों भाइयों में हुई थी फिर तुमलोग क्यों आपस में लड़ रहे हो।

अपस्यु:- आंटी पहले मुझे आप ये बता दो कि कुंजल की तरह आप के मन में तो हमारे लिए बैर नहीं ना।

नंदनी की मुस्कान दर्द भड़ि थी, वो मुस्कुराती हुई कहने लगी… "पागल हो क्या? तुम्हारे मम्मी पापा से लाख बैर हो, बच्चों से कैसी बैर। तुम दोनों तो मेरे ही बेटे हो। 4 साल तक तुम दोनों को मैंने भी पाला है और अपने छाती से दूध भी पिलाई है। अपने बेटो के लिए कैसी बैर। और शायद तुम्हारे मम्मी-पापा को भी कुंजल से ऐसा ही लगवा होगा। हालांकि लगाव तो बड़ों में भी था बस कुछ गलतफहमी और थोड़ी लालच ने हमे अलग कर दिया।

अपस्यु:- जानती है, मां मुझ से जब भी मिलने आती थी तो एक ही बात कहती थी। तुझे मेरा नहीं नंदनी का बेटा होना चाहिए था। उनका मानना था कि आप कि समझदारी और सूझ-बुझ मुझ में अाई है। सुना था, लेकिन आज देख भी लिया। आप से मुझे बहुत कुछ सीखना है। लेकिन पहले मुझे ये बताइए दोनों भाई इतना प्यार करने वाले थे फिर आपस में गलतफहमी और लालच कैसे पैदा हो गई। क्योंकि हम दोनों में से किसी को पता नहीं कि झगड़े का मुद्दा क्या था और दोनों में इतनी भी क्या बैर की एक बार जो अलग हुए तो फिर कभी एक दूसरे की सुध तक ना ली।

नंदनी:- तुमलोग बहुत छोटे थे उस वक़्त और तुम तो यहां रहते भी नहीं थे सोनू। पहले सरा बिजनेस ज्वाइंट ही था तुम्हारे पापा का कारोबार फ्रांस में इनका कनाडा में। दोनों भाइयों में बिजनेस को लेकर कुछ मतभेद हो गया और ये चाहते थे कि दोनों अपने-अपने बिजनेस को अलग कर लें।

अपस्यु:- आंटी आप रोना बंद कीजिए और आगे बताइए।

नंदनी:- कुछ दिल के जख्म होते हैं जो आशुओं के रूप में छलक आते हैं। फिर उसके बाद तो हमारी दुनिया ही जैसे उजाड़ गईं। और एक के बाद एक घटनाएं होती चली गई।

आरव, अपने आंटी के आशु पोंछते….. "क्या हुआ आंटी, आप पूरी बात बताइए।"

कुंजल:- होना क्या था पूरी कंपनी तुम्हारे पापा ने हड़प लिया और जब मेरे पापा ने उनसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की तो उन्होंने अपने ऑफिस से धक्के मारकर भगा दिया।

अपस्यु:- हैम्म ! इस वक़्त अंकल कहां है और मानस।

नंदनी:- कुंजल बेटा तू बाहर जाएगी क्या? 2 मिनट हमे कुछ बातें करनी है।

अपस्यु:- नहीं। कोई बीच का भेद नहीं। उसे भी जानने दीजिए ।

नंदनी:- नहीं बेटा। शायद वो बर्दास्त ना कर पाए।

अपस्यु:- वो उसे फैसला करने दीजिए। आप बस अपनी बात कहिए आंटी।
 

Naina

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ise ek baat mujhe samjh me nahi aati .... ye arav ne kya bigada hai jo bechare ko har mamale me ghasit rahi.
Coz woh joh chhichhore harkate karta rahta hai uske dekh yahin meme yaad aaye..
Tauba tauba babe manhoos lag rahe ho , mat karo rahne do .... :D
 

kamdev99008

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Update:-26



उस गंदी बस्ती में प्रवेश करते ही चारों ओर अजीब सी बदबू और हर जगह कचरा फैला हुआ। अपस्यु और आरव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे थे उनका पैर जैसे स्थूल (भारी) परने लगे थे। एक-एक कदम आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।

जो बातें इस वक़्त आरव के दिमाग में चल रही थी वहीं बातें अपस्यु भी सोच रहा था। दोनों की आंखें डबडबाई सी थी बस आखों से आंसू छलकने बाकी थे। दिमाग ने जैसे काम करना बंद कर दिया हो। कुछ भी समझ पाना मुश्किल था। कुछ ही देर में दोनों भाई एक झोपड़ी के सामने थे। एक पुलिसवाले ने आवाज़ लगाई और दोनों मां बेटी दरवाजे पर खड़ी थी।

कुंजल तो उन दोनों को देख कर ही गुस्से में अंदर भाग गई, लेकिन उसकी मां यानी की दोनों भाई की आंटी नंदनी, बस एक झलक दोनों भाई को देखी और देखते ही पहचान गई। वो दोनो से लिपट कर ऐसे रोई, मानो वर्षों से ये आशु किसी के लिए बचा रखे हो। डबडबाई आखें तो दोनों भाई की थी लेकिन अपस्यु के आशु आखों में ही छलकते रहे और आरव फुटफुट कर रो रहा था।

उनलोगों को ऐसे देख पुलिसवालों को भी अपस्यु की बात समझ में अा गई थी। थानेदार ने अपस्यु के कंधे पर हाथ रखा और साथ चलने का इशारा किया। अपस्यु अपनी डबडबाई आखों को रुमाल से साफ करते हुए अपने आंटी से अलग हुआ। थोड़ी दूर चलने के बाद थानेदार ने अपस्यु को सरा मामला समझाते हुए हुए कहने लगा.…. "अपनी बहन में साथ अाकर अपनी रपट कैंसल करवाओ वरना शाम तक ये रिपोर्ट एसपी ऑफिस पहुंच जाएगी, फिर ज्यादा परेशानी होगी"।

अपस्यु उनके साथ कार तक आया और अपना डिक्की खोल कर कहने लगा… "सर आप का एहसान है मुझ पर। जितना आप की इक्छा हो उठा लीजिए।"… कार डिक्की में उस वक़्त कम से कम 30 लाख कैश थे। थानेदार को समझते देर नहीं लगी कि ये लड़का खुद इतनी आसानी से थाने क्यों आया। वो डिक्की बंद करते हुए सिर्फ इतना ही कहा.. "सिर्फ जुबान गंदी है लड़के, पर अपना दामन बिल्कुल साफ है। मैं नहीं जानता कि तुमलोग के परिवार के बीच क्या हुआ लेकिन इतना तो जरूर समझ में अा गया है कि तुम्हे अपने परिवार से कितना लगाव है"

जो आशु कहीं नहीं छलके वो थानेदार के सामने हाथ जोड़ कर अपने दोनो आखों से आंसू बहा रहा था। …. उसने अपना नंबर थानेदार साहब को दिया और वापस जुग्गी के ओर चल दिया।

लौट कर जब वो पहुंचा तब रास्ते में ही उसे कुंजल मिली जो बड़े गुस्से में कहीं जा रही थी। अपस्यु उसका रास्ता रोकते… "तुम्हारा गुस्सा जायज है, लेकिन बात करने से ही समस्या का समाधान होता है… भागने वाले हर वक़्त भागते ही रहते हैं।" …... "मैं कहीं भाग नहीं रही, अपने भतीजे के लिए ठंडा और नाश्ता का ऑर्डर मेरी मां ने दिया है उसे ही पूरा करने जा रही हूं।".. कुंजल फिर से गुस्से में अपनी प्रतिक्रिया दी।

जैसे 2 दोस्त गले में हाथ डाल कर साथ चलते हैं। ठीक वैसे ही अपस्यु, कुंजल के गले में हाथ डाल कर वापस घर के ओर ले जाने लगा। कुजल के आखों में आशु और गुस्सा दोनों थी, बस अंदर वो हिम्मत नहीं बची थी कोई विरोध कर सके। पूरी तरह टूट जाना जिसे कहते हैं वहीं स्थिति कुंजल की थी। जुबान से बस इतना ही निकल रहा था… "हमारा कोई नहीं, अपने ही अपनों को लुट लेते हैं, तुम सब बेईमान हो"…

अपस्यु उसके गले में हाथ डाले उसे कंधों का भी सहारा दे रहा था और दोनों वापस घर में लौटकर आए। अंदर आरव नीचे जमीन पर बैठा था और उसी के पास नंदनी रघुवंशी बैठकर, दोनों बातें कर रहे थे। अपस्यु ने कुंजल को जैसे ही छोड़ा वो बेसुध होकर रोते-रोते नीचे जमीन पर गिर गई।

नंदनी तुरंत उठकर अपनी बेटी के पास पहुंची और उसका सर अपने गोद में लेते हुए उसे चुप कराने लगी, लेकिन कुंजल के आशु थे कि वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। तभी उस जुग्गी में अपस्यु की तेज आवाज गूंजी और वो जोर से चिल्लाकर कहने लगा…. "बस, बहुत हुआ, रोना बंद करो सब। पागलों की तरह कब से सब रोए जा रहे हैं। मुझे अभी बात करनी है, इसलिए सब बिल्कुल शांत।"

अचानक बदले माहौल को देखकर कुंजल उठकर बैठ गई। अपने आशु पोंछति …. "तुम चले ही क्यों नहीं जाते, सबकुछ भूलकर तो हम यहां जी रहे थे ना, फिर वो दर्द कुरेदने क्यों पहुंच गए?"

अपस्यु:- क्या दर्द तुम्हारे ही पास है, और दर्द है तो फासी लगा कर मर जाओ पर हर वक़्त दुख-दर्द के नाम पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश न करो।

अपस्यु की बात सुनकर कुंजल लगभग शांत हो गई। नंदनी दोनों बच्चों के सर पर हाथ फेरती कहने लगी:- इनकी भी क्या गलती है कुंजल, बड़े लोगों के गलती का जिम्मेदार इन्हे क्यों ठहराना। लड़ाई तो उन दोनों भाइयों में हुई थी फिर तुमलोग क्यों आपस में लड़ रहे हो।

अपस्यु:- आंटी पहले मुझे आप ये बता दो कि कुंजल की तरह आप के मन में तो हमारे लिए बैर नहीं ना।

नंदनी की मुस्कान दर्द भड़ि थी, वो मुस्कुराती हुई कहने लगी… "पागल हो क्या? तुम्हारे मम्मी पापा से लाख बैर हो, बच्चों से कैसी बैर। तुम दोनों तो मेरे ही बेटे हो। 4 साल तक तुम दोनों को मैंने भी पाला है और अपने छाती से दूध भी पिलाई है। अपने बेटो के लिए कैसी बैर। और शायद तुम्हारे मम्मी-पापा को भी कुंजल से ऐसा ही लगवा होगा। हालांकि लगाव तो बड़ों में भी था बस कुछ गलतफहमी और थोड़ी लालच ने हमे अलग कर दिया।

अपस्यु:- जानती है, मां मुझ से जब भी मिलने आती थी तो एक ही बात कहती थी। तुझे मेरा नहीं नंदनी का बेटा होना चाहिए था। उनका मानना था कि आप कि समझदारी और सूझ-बुझ मुझ में अाई है। सुना था, लेकिन आज देख भी लिया। आप से मुझे बहुत कुछ सीखना है। लेकिन पहले मुझे ये बताइए दोनों भाई इतना प्यार करने वाले थे फिर आपस में गलतफहमी और लालच कैसे पैदा हो गई। क्योंकि हम दोनों में से किसी को पता नहीं कि झगड़े का मुद्दा क्या था और दोनों में इतनी भी क्या बैर की एक बार जो अलग हुए तो फिर कभी एक दूसरे की सुध तक ना ली।

नंदनी:- तुमलोग बहुत छोटे थे उस वक़्त और तुम तो यहां रहते भी नहीं थे सोनू। पहले सरा बिजनेस ज्वाइंट ही था तुम्हारे पापा का कारोबार फ्रांस में इनका कनाडा में। दोनों भाइयों में बिजनेस को लेकर कुछ मतभेद हो गया और ये चाहते थे कि दोनों अपने-अपने बिजनेस को अलग कर लें।

अपस्यु:- आंटी आप रोना बंद कीजिए और आगे बताइए।

नंदनी:- कुछ दिल के जख्म होते हैं जो आशुओं के रूप में छलक आते हैं। फिर उसके बाद तो हमारी दुनिया ही जैसे उजाड़ गईं। और एक के बाद एक घटनाएं होती चली गई।

आरव, अपने आंटी के आशु पोंछते….. "क्या हुआ आंटी, आप पूरी बात बताइए।"

कुंजल:- होना क्या था पूरी कंपनी तुम्हारे पापा ने हड़प लिया और जब मेरे पापा ने उनसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की तो उन्होंने अपने ऑफिस से धक्के मारकर भगा दिया।

अपस्यु:- हैम्म ! इस वक़्त अंकल कहां है और मानस।

नंदनी:- कुंजल बेटा तू बाहर जाएगी क्या? 2 मिनट हमे कुछ बातें करनी है।

अपस्यु:- नहीं। कोई बीच का भेद नहीं। उसे भी जानने दीजिए ।

नंदनी:- नहीं बेटा। शायद वो बर्दास्त ना कर पाए।

अपस्यु:- वो उसे फैसला करने दीजिए। आप बस अपनी बात कहिए आंटी।
ab hui hai asli kahani ki shuruat.....................

daal-daal paat-paat fudakne ki bajay ab jad khodne ka kaam shuru kar diya............

lage raho.......... dekhein kitni gehrai hai .......

apsyu aur arav ke sath 2 character aur jud gaye .... kunjal-nandini.......... manas shayad nandini ka beta hai
 

kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
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ab mujhe lag raha hai..... ki shayad PGK ki tarah emotions aur famly story bane................
the sex game aur KNTB ki tarah sirf thriller hui to wo maja nahin aata............... achchhi to tab bhi lagti hai :D
 

Naina

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दोनों भाई ने जब क्रिश नाम सुना तो हंसते हुए कहने लगे… "जादू, .. जादू".. इतना सुनकर वहां के आस पास के छात्र-छात्राएं भी हसने लगे।.. और मास्टर जी बोर्ड पर लिखते-लिखते ही जोड़ से "साइलेंट" चिल्ला दिए। वो लड़का क्रिश तो शांत ही बैठा रहा किंतु उसके साथ वाली लड़की कुछ कहने को हुई, तभी उस लड़के ने उसका हाथ पकड़ कर कहा.. "इनके मुंह मत लगो विन्नी, वो शशांक याद है ना, उसका पंगा इन्हीं के ग्रुप से हुआ था"… "तो.. तो अब ये दादागिरी करेंगे".. विन्नी भी गुस्सा दिखाती हुए बोली…

विन्नी का गुस्सा देख दोनो भाई आपस में ही जुगलबंदी करने लगे…. "अपस्यु ये विन्नी का पूरा नाम शायद वीनिता होगा, नहीं"….. "हां लगता तो ऐसा ही है आरव"…… "कैसे-कैसे लोग हैं, अच्छे नाम को भी कांट-छांट कर देते है"….. "सही कहा आरव, शुक्र है पद्मावत नहीं नाम रखा वरना शॉर्ट करके पाद बुलाते"

"How dare you to talking like this"... विन्नी गुस्से में थोड़ा चिल्ला कर बोली, और दोनों वहां से निकलने लगे। तभी प्रोफेसर साहब पीछे मुरे और…
lagta hai aarav ko uske mata pita ne manners nahin sikhaya bachpan mein ... :sigh:
इस सवाल के जवाब के लिए अपस्यु खड़ा हुआ और जो उसने प्रथम विश्व युद्ध में भारत के योगदान के बारे में बोला, प्रोफेसर साहब तो हक्के-बक्के रह गए। शुरवात ही उसने 1918 के हैफा युद्ध से कि जहां राजपूताना शौर्य गाथा सुनते, उसने तलवार और भालों की वो आखरी युद्ध याद दिलवाई, जिसके प्रतिद्वंद्वी उस वक़्त के सबसे एडवांस वैपन से लड़ रहे थे। फिर भी 900 जाने गंवा कर भारतीयों ने अपनी जीत सुनिश्चित की थी।

और जब अपस्यु ने एक बार बोलना शुरू किया, फिर तो ऐसा समा बांधा की क्लास की घंटी बजने तक सब ध्यान लगा कर उसे ही सुनते रहे, सिवाय 2 लोग के। एक तो आरव जो कुंजल को छोटे-छोटे नोट्स लिख कर दे रहा था पढ़ने और दूसरी कुंजल जो ना चाहते हुए भी उसके नोट्स को पढ़ रही थीं।

कुछ ही समय में कुंजल के दिमाग में भी सारी तस्वीरे साफ हो चुकी थी। आश्चर्य के भाव उसके चेहरे पर भी थे और वो दोनों भाइयों के चेहरे को बड़े गौर से देखें जा रही थी। इधर क्लास ख़त्म हुआ उधर कुंजल दोनों को अनदेखा कर अपने दोस्तों के बीच चली गई।
Aur ab suno guru ji ke gyaan ki baatein.. :D
kunjal ne janke ke anjan ban ke chali gayi.. aur kyun baat kare dono se... Dono ke sharmnak behavior joh dekh liya... kahin dono ke behavior ke chalte ushe bhi sharmshar hona na pade apne friends ke samne isliye bina aarav aur apsyu ko dhyan diye chali gayi...
उनमें से एक ने हिम्मत कर उसके पास बैठ गया…. "Hi I am Kapil".. वो लड़का अपना हाथ आगे बढ़ता हुए कहने लगा। साची अपने नजर उठा कर उसे एक बार देखी … "क्यों बोर कर रहा है भाई, जा ना यहां से"

"अरे मेरे पापा तुम्हारे घर कब गए"… कपिल ने कुछ प्रैंक वीडियो देख कर अपनी स्मार्टनेस दिखाते हुए बोल कर जोड़-जोड़ से हंसने लगा। साची उसकी बात सुनकर पूरी चिढ़ गई.. लेकिन खुद पर काबू करती वो कहने लगी…

"साले तेरा बाप का तो पता नहीं लेकिन तेरी मां जरूर मेरे घर आई थी, जाकर डीएनए टेस्ट करवा ले। अब निकल वरना इतने सैंडल मारूंगी की, कुत्ते तेरी आनी वाले पीढ़ी मेरे सैंडल के निशान के साथ पैदा लेगी। चल भाग यहां से।"
Yeh joke tha kya.. hanshi bilkul bhi nahin aayi... old style meme :yawn:
लावणी, जिसका क्लास अभी-अभी समाप्त हुआ था वो पीछे से दोनों भाई का ड्रामा देखते आ रही थी कैसे वो 3-4 लड़कियों के पीछे पीछे चला अा रहा था.. साची की बात पर वो चुटकी लेती बोलने लगी… "2 मिनट यहीं बैठो, अभी दोनों भाई दिख जाएंगे। हां लेकिन उनकी हरकतें देख कर शायद तुम बर्दास्त ना कर पाओ।"

साची:- क्या मतलब मैं बर्दास्त नहीं कर पाऊंगी, तू कहना क्या चाह रही है, खुल कर बोल।

लावणी:- खुल कर कहना क्या है, पीछे मुड़ कर देख मेरी बातों का मतलब भी समझ में आ जायेगा।

साची जब पीछे मुड़ी तब 3-4 लड़कियां कैंटीन में आ रही थी और उनके पीछे-पीछे दोनों भाई भी आ रहे थे। दोनों भाई ठीक उन दोनों बहनों के पास से निकाल गए लेकिन उन्होंने ध्यान तक नहीं दिया। बेचारी साची का चेहरा तो देखने लायक था। गुस्से में आकर कब उसने हाथ में परी किताब के पन्नो के चिथरे उड़ा दिए उसे पता भी नहीं चला। लेकिन अभी कहां, ये तो शुरवात थी।
Yeh huyi naa baat :toohappy:
Ab aayega maza.. apsyu ka sar aur saachi ki lathi... :D
wah... Kamal kar diya lavnee ne toh :bow:
sulekha ji k to pata nahi lekin lavnee ne apni duty puri nishtha se nibha rahi hai :good:
Khair let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill nainu ji :applause: :applause:
 

rgcrazyboy

:dazed:
Prime
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159
ab jake aya na kam ka update.
isko bolte hai update.


bhut sara confusion or bhut sare sawal khud se kar ke khud se jawab dena aye sa hota hai update.
pichale sare updates main yahe ek baat ko miss kar raha tha.

ab tum ko samaj main aaye ga ki pichale updates mere ko adhure kyu lage :dazed:
 
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