Update:-25
साची जब पीछे मुड़ी तब 3-4 लड़कियां कैंटीन में अा रही थी और उनके पीछे पीछे दोनों भाई अा रहे थे। दोनों भाई ठीक उन दोनों बहनों के पास से निकल गए लेकिन उन्होंने ध्यान तक नहीं दिया। बेचारी साची का चेहरा तो देखने लायक था। गुस्से में आकर कब उसने हाथ में परी किताब के पन्नो के चिथरे उड़ा दिए उसे पता भी नहीं चला। लेकिन अभी कहां, ये तो शुरवात थी।
कुंजल अपनी सहेलियों के साथ एक टेबल पे बैठी। ठीक उसी वक़्त दोनों भाई वहां पहुंचे और बाकी लड़कियों को वहां से जाने के लिए कहा। कुंजल को इस बात पर बेहद गुस्सा आया और उसने सबके सामने आरव को खींच कर एक तमाचा जड़ दिया…. "नफ़रत है मुझे तुम से, तुम्हारे मां बाप से। हमे पता होता कि तुमलोग इस सहर में मिलोगे तो हम दिल्ली कभी आते ही नहीं… चलो नम्रता।"
गुस्से में वो पागल होकर वहां से चली गई। आरव भी उसके पीछे जाने वाला था लेकिन अपस्यु ने उसका हाथ पकड़कर उसके पीछे जाने से रोक लिया।…. "अपस्यु छोड़ मेरा हाथ, वो मां के बारे में होती कौन है बोलने वाली".. आरव भी पूरा गुस्सा दिखाते हुए कहने लगा।
"शांत हो जा अभी, बिल्कुल शांत"… अपस्यु, आरव को समझा ही रहा था कि इसी बीच साची और लावणी भी चली आईं…. "कमाल का थप्पड था। काश उस लड़की के जगह मै होती। कमाल का सरप्राईज था ये, मैं जिंदगी में इस से ज्यादा फिर कभी ही शायद सरप्राइज हो पाऊं। चल लावणी"…. साची ताली बजाकर अपनी बात कहती हुई निकालने लगी।
"तुझे नहीं कुछ कहना, तू भी कुछ कहती जा ना।"… आरव ने पीछे से जाती हुई लावणी से कहा। आरव की हरकत पर अपस्यु आग बबूला हो गया, लेकिन इस बार अपस्यु ने अपने मुंह से कोई शब्द नहीं निकला, बस अपनी आखें उसे दिखाई और वो बिल्कुल शांत हो गया।
अपस्यु:- कितनी बार मैं समझता रहूं की गुस्से को इस्तमाल करना सीख, लेकिन तू है कि….
आरव:- सॉरी यार। एक तरफ ये कुंजल इतना पगलाई क्यों है वो समझ में नहीं अा रहा। जबकि इसके मां बाप ने कभी हमारी सुध तक ना ली। उसपर से ये दोनों बहने है, अक्ल की पैदल। मामला क्या है कुछ समझती नहीं बस कुछ भी प्रतिक्रिया देती रहती है। गुस्सा तो आएगा ना। अब हर कोई तेरी तरह संत तो नहीं होता ना।
अपस्यु:- उल्लू है तू। अगर तू अपने गुस्से पर काबू रखता तब तो तुझे कुछ समझ में भी आता…
आरव:- क्या?
अपस्यु:- हमारी नजर में अंकल और आंटी बुरे है। कुंजल के नजर में उसके अंकल और आंटी बुरे है। कुछ तो बात है जो हमे भी पता नहीं।
आरव:- पता कैसे होगा अंकल और आंट से जब झगड़ा हुआ था तब हमें अक्ल ही कितनी थी। और उसके कुछ दिन बाद तो…
अपस्यु:- कोई नहीं। यह वक़्त है पहले फैमिली रियूनियन का। एक काम कर कार के जीपीएस को फॉलो करके तू मेरे पीछे आ।
आरव:- तू कहां जा रहा है।
अपस्यु:- कुंजल को किडनैप करने।
आरव:- कार की चाभी तो देता जा, वरना पार्किंग तक उठा कर ले जाते हुए जो सीन बनेगा वो अच्छा ना लगेगा।
अपस्यु:- गूड आइडिया । जा कार लेे अा।
अपस्यु तेजी के साथ निकला और सीधा कुंजल के पास पहुंचा। कुंजल उसे नजरअंदाज करती आगे बढ़ गई। अपस्यु उसका हाथ पकड़ कर उसे रोकते हुए…. "सुनो कुंजल, तुमसे कुछ बात करनी है"
कुंजल:- मुझे तुम्हारी शक्ल ही पसंद नहीं। हाथ छोड़ो मेरा और यहां कोई सीन क्रिएट करने की कोशिश मत करो।
अपस्यु:- बस एक बार हमे बात करनी है, फिर तुम है जैसा चाहोगी वैसा ही होगा।
कुंजल अजीब सी हंसी हंसती हुई कहने लगी…. "बस 500 रुपए है हमारे पास। इतना ही तुम बेईमानी कर सकते हो। जाओ किसी और को ढूंढो शायद मोटी रकम बेईमानी करने के लिए मिल जाए।"
अपस्यु:- तुम अगर यहां सीन ही क्रिएट करना चाहती हो तो वही सही। लेकिन बिना बात पूरी हुए मैं नहीं जाने वाला।
कुंजल:- हाथ छोड़ो मेरा।
"क्या हुआ कुंजल, और ये लड़का जबरदस्ती कर रहा है क्या?".. कुंजल के कुछ क्लासमेट उसके पास आकर पूछने लगे।
अपस्यु:- यहां कोई तमाशा नहीं चल रहा, ये हमारा पारिवारिक मामला है। इसलिए निकलो तुम लोग यहां से।
"तू है कौन बे, और कुंजल के साथ ऐसे जबरदस्ती क्यों कर रहा है।"… उन में से एक और लड़का ने पूछा।
कुंजल:- हाथ छोड़ो मेरा, तुम यहां पर ड्रामा कर रहे हो।
इतने में आरव वहां गाड़ी लेे कर पहुंच गया। सभी लड़के गाड़ी देखते ही उसके हैसियत के बारे में सोचकर वहां से कट लिए। और जब कुंजल ने उनके पास इतनी मंहगी कार देखी तो वो ताने मारती कहने लगी… "तो तुम्हरे बेईमान बाप ने यहां खर्च किए हैं पैसे।"
अपस्यु उसकी बातों का कोई जवाब नहीं दिया बस गुस्से से अपनी आखें लाल करता हुआ उसे गाड़ी में बैठने के लिए बोला। लेकिन कुंजल को किसी के भी आखों का भय थोड़े ना था। वो भी विरोध करती रही। अंत में फिर उसे किडनैप ही करना पड़ा।
अपस्यु और आरव के बीच में कुंजल बैठी, बस गुस्से से फुंफकार रही थी।.. "अपस्यु यार बहन तो अपनी ही लग रही है, बिल्कुल अपने जैसा तेवर है"…. आरव चुटकी लेते हुए बोला…… "मुझे बहन मत बुलाओ, घृणा आती है तुम से और तुम्हारे परिवार से"… कुंजल गुस्से में फुफकारती बोली…. "घर का एड्रेस बताओ"… अपस्यु ने पूछा…. "मुझे नहीं पता" … कुंजल गुस्से में जवाब देती मुंह बना कर सीधी बैठ गई।
दोनों भाई पता पूछते रहे लेकिन कुंजल भी इन्हीं की तरह ढीट थी। मुंह फुलाए और और गुस्से से फुफकारती बस आगे देखती रही। इसी बीच वो किसी चौराहे से गुजरे जहां पुलिस चेक पोस्ट लगी थी। अपस्यु ने जैसे ही गाड़ी रोका कुंजल कूद कर पुलिसवाले के पास भागी और किडनैपिंग की सिकायत करने लगी।
वहां मौजूद सभी पुलिसवाले ने तुरंत ही दोनों भाई को घेर लिया और गाड़ी से उतरने के लिए कहने लगे। दोनों भाई हाथ ऊपर करके बाहर आए। दोनों भाई थाने में और कुंजल अपनी रपट दर्ज करवाकर वहां से सीधा अपने घर चली गई।
थानेदार इससे पहले की कोई एक्शन लेता, अपस्यु कहने लगा… "तो हम चले सर।"
थानेदार:- बैंचो, तुझे ये क्या सराय लगता है जो मुंह उठाए चले आए और जब जी चाहे, चले गए। बंद करो सालों को और इतने डंडे मारो की इनसे किडनेपिंग का भूत उतर जाए। और माचो से पता करो ये गाड़ी कहां से उड़ाई इसने।
अपस्यु:- सर टेक्निकली आप मुझे अरेस्ट नहीं कर सकते। रपट सोनू और मोनू के नाम पर लिखा है जिसमें ना तो पता आपने लिखा है और ना ही पिता का नाम। (सोनू और मोनू नाम से दोनों भाई को घर में बुलाते थे)
थानेदार:- ईब हम पता लगा लेंगे छोड़े तेरा पता और तेरे बाप का नाम भी। अब जो किडनैप हुई, उसे थोड़े ना किडनैपर की डिटेल पता होती है। हम अपनी रपट पूरी कर लेंगे, तू चिंता ना कर। लेकिन बैंचों आज तेरे पिछवाड़े को ऐसा सुझाएंगे की तू अपनी हालत पर रोएगा। और ये जो तू जिस किसी के दम पर भी इतना अकड़ कर बात कर रहा है ना, तेरी हालत देखकर उसकी पतलून भी गीली हो जाएगी।
अपस्यु:- जानते हो थानेदार साहब, बड़े बुजुर्गो ने कहा है किसी के फैमिली मैटर में नहीं पड़ते वरना वो फैमिली तो एक हो जाति है लेकिन बीच में जो पड़ता है वो पीस जाता है।
थानेदार:- के मतलब है?
अपस्यु:- यहीं की कुंजल मेरी कजिन है और उनके पापा का नाम भूषण रघुवंशी है।
थानेदार, उसके ऊपर हंसते हुए… "चुटिया कहीं का.. माचो आज कल तो हर किडनैपर इतनी डिटेल लेकर चलता है।"
अपस्यु:- अपनी जुबान पर थोड़ा काबू रखिए सर, हम कोई उठाएगीरा या क्रिमनाल नहीं है, और ना ही मेरे खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज हुई हैं। ये लो मेरा ड्राइविंग लाइसेंस और पढ़ो इसमें मेरे पिता का नाम.. चन्द्रभान रघुवंशी। किसने बनाया आप को थानेदार, थोड़ी भी अक्ल की नहीं। कोई किडनैपर चेकपोस्ट पर गाड़ी रोकता है क्या? अभी मैंने वकील बुला लिया ना तो सारी जिंदगी घर में ही गाली बकते रहना, स्टेशन दोबारा देखना नसीब भी नहीं होगा।
अपस्यु के तेवर और उसके पेश किए गए दस्तावेज को देखने के बाद, थानेदार भी थोड़ी सोच में पर गया। उसने अपने कुछ लोगों को बुलाकर, सलाह-मशवरा करने के बाद…... "ठीक है यदि ऐसी बात है तो अभी हम उसके घर चलकर सारी बातों की तहकीकात करेंगे। अगर तुम्हारी बातें सच निकली तो ठीक वरना तेरी जवानी का पूरा जोश लॉकअप में ठंडा करेंगे।
आरव, अपस्यु को देख कर हंसने लगा और आंखों से जैसे कह रहा हो… "मास्टर्स स्ट्रोक"… वहां से लंबोर्गिनी में एक हवलदार और अपस्यु बैठा और पुलिस जीप में आरव। पुलिस जीप किसी रेलवे ट्रैक के पास रुकी और पटरियों को पार करके वो लोग एक गंदी बस्ती में घुसे। चारों ओर अजीब सी बदबू और हर जगह कचरा फैला हुआ। अपस्यु और आरव जैसे-जैसे आगे बढ़ रहे थे उनका पैर जैसे स्थूल (भारी) परने लगे थे। एक-एक कदम आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।