Fantasy Aryamani:- A Pure Alfa Between Two World's

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nain11ster

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Welcome To My Fantasy World....


Meri Nayi Fantasy Series Me Aapka Swagat Hai.... Supernatural World aur Wolf Fantasy Par Yah Series Aadharit Hai, Jahan Aapki Mulakat Kayi Tarah Ke Supernatural Fantasy Jiv Se Hogi....

7 August Se Kahani Ki Shuruaat Hogi. Kahani Me Kisi Bhi Orakar Ka Sujhav Dene Ke Liye Aap Swatantr Hai. Aap'ke Sujhav Ka Intzar Rahega.

Ummid Hai Iss Kahani Ko Bhi Aap Sabka Utna Hi Sath Aur Utna Hi Pyar Mile...


Dhanywaad....



Prastut Hone Wali Kahani Ki Kuch Jhalkiyan....


Scene:-1
जंगल का इलाका। कोहरा इतना गहरा की दिन को भी सांझ में बदल दे। दिन के वक़्त का माहौल भी इतना शांत की एक छोटी सी आहट भयभीत कर दे। यदि दिल कमजोर हो तो इन जंगली इलाकों से अकेले ना गुजरे।


हिमालय की ऊंचाई पर बसा एक शहर गंगटोक, जहां प्रकृति सौंदर्य के साथ-साथ वहां के विभिन्न इलाकों में भय के ऐसे मंजर भी होते है, जिसके देखने मात्र से प्राण हलख में आ जाए। दूर तक फैले जंगलों में कोहरा घना ऐसे मानो कोई अनहोनी होने का संकेत दे रहा हो।
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Scene:-2
आर्यमनी, बिना उसकी बातों पर ध्यान दिए हुए रस्सी के हुक को पेड़ से फसाने लगा। इधर जबतक निशांत ड्रोन कैमरा से दिव्य की वर्तमान परिस्थिति का जायजा लेने लगा। लगभग 12 फिट नीचे वो एक पेड़ की साखा पर बैठी हुई थी। निशांत ने फिर उसके आसपास का जायजा लिया।… "ओ ओ.… जल्दी कर आर्य, एक बड़ा शिकारी मैडम के ओर बढ़ रहा है।"..


आर्यमणि, निशांत की बात सुनकर मॉनिटर स्क्रीन को जैसे ही देखा, एक बड़ा अजगर दिव्या की ओर बढ़ रहा था। आर्यमणि रस्सी का दूसरा सिरा पकड़कर तुरंत ही खाई में उतरने के लिए आगे बढ़ गया। निशांत ड्रोन की सहायता से आर्यमणि को दिशा देते हुए दिव्या तक पहुंचा दिया। दिव्या यूं तो उस डाल पर सुरक्षित थी, लेकिन कितनी देर वहां और जीवित रहती ये तो उसे भी पता नहीं था।


किसी इंसान को अपने आसपास देखकर दिव्या के डर को भी थोड़ी राहत मिली। लेकिन अगले ही पल उसकी श्वांस फुल गई दम घुटने लगा, और मुंह ऐसे खुल गया मानो प्राण मुंह के रास्ते ही निकलने वाले हो। जबतक आर्यमणि दिव्या के पास पहुंचता, अजगर उसकी आखों के सामने ही दिव्या को कुंडली में जकड़ना शुरू कर चुका था। अजगर अपना फन दिव्या के चेहरे के ऊपर ले गया और एक ही बार में इतना बड़ा मुंह खोला, जिसमे दिव्या के सर से लेकर ऊपर का धर तक अजगर के मुंह में समा जाए।

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Scene:-3
नीरज और विनीत ने कल शाम 10 लड़को के साथ पिटने गया था लेकिन आज 40 लड़के लेकर आया था, यह सोचकर कि कॉलेज का माहौल है और पाता नहीं शायद 10-15 दोस्त निशांत भी लेकर आए। जैसे ही नम्रता को पुष्टि हो गई 40 लड़के है, उसके 60 लोग पहले से ही कैंटीन के आसपास जाकर फ़ैल गए।


पहला क्लास खत्म होने के बाद पलक अपने बैग का चैन खोली और नजरे बस प्रतीक्षा कर रही थी कि कब ये लोग आए। ज्यादा इंतजार भी नहीं करना पड़ा था और कैंटीन आने वाले रास्ते पर ही दूर से वो दिख गये।


पलक तेजी से दौड़ लगती अपने बैग से 1 मीटर की चाबुक निकल ली। जिसके चमड़े के ऊपर कांटेदार पतली तार लगी हुई थी। नीरज और विनीत कुछ कह पाते उससे पहले ही पलक ने आधे मीटर की दूरी से चाबुक चलना शुरू कर दिया।


जब वो चाबुक चला रही थी, देखने वाले स्टूडेंट ने अपने दातों तले उंगलियां दबा ली। सटाक की आवाज के साथ चाबुक पड़ते और अंदर का मांस लेकर निकल आते। पलक ने तबीयत से नीरज और वीनित को चाबुक मारना शुरू कर दिया था।


नीरज और वीनीत हर चाबुक पड़ने के बाद छिलमिलाते हुए दर्द भारी चींख निकालते और मदद के लिए अपने दोस्तो को गुहार लगाते। लेकिन चाबुक का दर्द इतना अशहनिया था कि नीरज और विनीत को पता ही नहीं चला कि जब उन्हें पलक के हाथ का पहला हंटर लग रहा था, ठीक उसी वक़्त उसके पीछे नम्रता के भेजे सभी लोगो ने नीरज के साथ आए मार करने वाले स्टूडेंट को तोड़ दिया था।


पलक दोनो को उसके औक़ाद अनुसार हंटर मारकर, हंटर को वापस बैग में रखी। पलक की नजर साफ देख पा रही थी कि जब वो हंटर चला रही थी कैसे कॉलेज का एक समूह उसे घुरे जा रहा था। पलक अपना काम खत्म करके नीरज और विनीत के पास पहुंची और उसके मुंह पर अपना लात रखती हुई कहने लगी… "अगली बार हमारे आसपास भी नजर आए तो फिर से मारूंगी।".

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Scene:-4
एक सेकंड ईयर का स्टूडेंट भागता हुआ कैंटीन में आया… "सुपर सीनियर (4th ईयर स्टूडेंट) आए है और एक स्टूडेंट को पकड़ रखा है। लगता है उसकी आज बैंड बजाने वाले है।"..


वो लड़का हल्ला करता हुआ सबको बता गया और कैंटीन से 5 कॉफी और सिगरेट लेकर चलता बना।… "इन सुपर सीनियर की रैगिंग क्या अलग होती है।"… पलक, निशांत और चित्रा से पूछने लगी।


निशांत:- पता नहीं। वैसे हमे तो सेकंड ईयर वालो का दर्द झेला नहीं गया था, ये तो फाइनल ईयर वाले है।


माधव:- चलकर देख लेते है फिर, ये सुपर सीनियर कैसे रैगिंग लेते है।


चित्रा:- चलो चलकर देखते है, इसी बहाने कुछ टाइमपास भी हो जाएगा।


पलक:- कैसे हो तुमलोग। कोई किसी को परेशान करेगा और तुम लोग उसे देखोगे।


निशांत:- शायद उन सुपर सीनियर्स के जाने के बाद उसे किसी कंधे कि जरूरत पड़े। ये भी तो हो सकता है ना पलक। मानवीय भावना से तुम भी क्यों नहीं चलती।


पलक:- हम्मम ! ये भी सही है। चलो चलते है।


चित्रा:- वैसे पलक ने उसे अपना कांधा दे दिया तब तो बेचारे के सारे गम दूर हो जाएंगे।


सभी बात करते हुए पहुंचे गए फर्स्ट ईयर के एरिया में, और जैसे ही नजर गई उस लडके पर… हाइट 6 फिट के करीब। आकर्षक गठीला बदन बिल्कुल किसी प्रोफेशनल एथलीट की तरह। रंग गोरा, चेहरा नजरें टिका देनेने वाली। और जब फॉर्मल के ऊपर आखों पर सन ग्लासेस लगाए था, किलर से कम नहीं लग रहा था। पलक उसे नजर भर देखने लगी।


चित्रा:- मारो, इसे खूब मारो.. इतना मारो कि होश ठिकाने आ जाए


निशांत:- बस अच्छे से इसकी ठुकाई हो जाए तो दिल खुश हो जाए।


पलक हैरानी से उन दोनों का चेहरा देखने लगी। ये सभी सुपर सीनियर्स के ठीक पीछे खड़े थे और नज़रों के सामने आर्यमणि।…. "इसने अपनी बॉडी पर काम किया है ना। पहले से कुछ पतला नजर आ रहा है ना निशांत।"..


निशांत:- ऐसा लग रहा है बदन के एक्स्ट्रा चर्बी को छीलकर आया हो जैसे।


इधर सुपर सीनियर्स छोटे से लॉन में लगे पत्थर की बनी बेंच पर बैठे थे और आर्यमणि ठीक उसके सामने। छोटा सा इंट्रो तो हो गया था। उसे खड़े रहने बोलकर सभी कॉफी पीने लगे थे। इसी बीच आर्यमणि ने अपने दोस्तो को देखा और अपना चस्मा निकालकर सीने में खोंस लिया।… "इसकी आखें नीली कबसे हो गई, कॉन्टैक्ट लेंस तो नहीं लिया।"..


निशांत:- इसपर पक्का यूएस की गलत हवा लगी है चित्रा। ये तो यहां की लड़कियों को दीवाना बनाने आया है। कमिने ने मेरे बारे में भी नहीं सोचा। अब मेरा क्या होगा।


हरप्रीत निशांत को एक लात मारती… "तुम्हारी छिछोड़ी हरकतें कभी बंद नहीं होगी ना।"


पलक इतनी डिटेल सुनने के बाद थोड़ी हैरान होती… "क्या यही आर्य है।"..


दोनो भाई बहन एक साथ… "हां यही आर्य है।"..


तभी सीनियर जो कॉफी पी रहे थे, अपनी आधी बची कॉफी आर्य के मुंह पर फेंकते… "अबे हम यहां बैठे है और तू मुस्कुराए जा रहा है।"


आर्यमणि:- सॉरी सर...


तभी एक सीनियर खड़ा हुआ और खींचकर एक तमाचा मरा। तमाचा इतना जोड़ का था कि आर्यमणि का उजला गाल लाल पर गया।… "कुत्ते के पिल्ले, झुककर, अदब से सर बोला कर। अच्छा तू सिगरेट पीता है।"


आर्यमणि:- टेक्निकल सवाल है सर जिसके जवाब पर थप्पड़ ही पड़ने है। वक़्त क्यों बर्बाद करना मारो।


उसे देखकर सभी हंसते हुए… "समझदार लड़का है।" सभी खड़े हो गए और एक के बाद एक उसके गाल पर निशान बनाते चले गए। उनकी इस हरकत को ना तो चित्रा बर्दास्त कर पाई और ना ही निशांत। उनके चेहरा देखकर ही आर्यमणि समझ गया कि अब ये दोनो यहां ना आ जाए इसलिए उसने इशारे से मानकर दिया।




Scene:-5
बात करते-करते बीच से एक गुप्त दरवाजा खुल गया। अंदर का गुप्त कमरा तो वाकई काफी रहस्यमय था। चारो ओर दीवार पर हथियार टंगे थे। चमचमाती रसियन, जर्मन और यूएस मेड अत्याधुनिक हथियार रखे थे। उसी के नीचे कई साइज के तलवार, भाला, बरछी, जंजीर और ना जाने क्या-क्या। कमरे की दीवार पर तरह-तरह के स्लोक लिखे हुए थे। आर्य चारो ओर का नजारा देखते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था।


चलते-चलते दीदार उस पुस्तक के भी हुए जिसकी तलाश थी। आर्यमणि सबके पीछे ही खड़ा था और उस पुस्तक के अपने पास होने का अनुभव कर रहा था। वो आगे बढ़कर जैसे ही उस पुस्तक को छूने के लिए अपना हाथ आगे बढाया… "नाह ! ऐसे नहीं। इसमें 25 अध्याय है और हर अध्याय को पढ़ने के लिए एक परीक्षा। कुल 25 परीक्षा देने होंगे तभी इस पुस्तक को हाथ लगा सकते हो, इसे पढ़ सकते हो। इसलिए तो इसके जानने की आयु भी हमने 25 वर्ष रखी है।





Scene:-6
रूही:- बॉस, 12 बज गए है, लोग हमारी तलाश में निकल रहे होंगे।


आर्यमणि:- एक का कॉल नहीं आया है अभी तक, मतलब अभी सब मामला समझने कि कोशिश ही कर रहे होंगे।


"मुझसे और इंतजार नहीं होता, आप तो हमे पकाये जा रहे हो। ये हुआ रावण दहन को तैयार। सब ताली बजाकर हैप्पी दशहरा कहो"… रूही जल्दी मे अपनी बात कही और सभी ने पेट्रोल पाइप में आग लगा दिया। अंदर ऐसा विस्फोट हुआ कि आर्यमणि के पूरे शरीर पर मांस के लोथरे थे। आर्यमणि का शरीर विस्फोट के संपर्क में आ चुका था और हालत कुछ फिल्मी सी हो गई थी। चेहरे की चमरी जल गई। कपड़ों में आग लगना और फिर बुझाया गया। आर्यमणि की हालत कुछ ऐसी थी.… आधा चेहरा जला। आधे जले कपड़े और पूरे शरीर पर मांस के लोथरे के साथ विस्फोट के काले मैल लगे थे।


आर्यमणि बदहाली से हालात में चारो को घूरने लगा। आर्यमणि को देखकर चारो हसने लगे। रात के तकरीबन सवा बारह (12.15am) बज रहे थे आर्यमणि के मोबाइल पर रिंग बजा… "शांत हो जाओ, और तुम सब भी सुनो।"… कहते हुए आर्यमणि ने फोन स्पीकर पर डाला..


"कहां हो अभी तुम आर्य।"… लड़की की गंभीर आवाज़..


आर्यमणि:- मिस्टर एक्स के चीथड़े उड़ा रहा था। तुम इतनी सीरियस क्यों हो?


लड़की, लगभग चिल्लाती हुई…. "मिस्टर एक्स तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं थी, तुम्हारे वॉयलेंस के कारण संतुलन बिगड़ चुका है। तुमने यह अच्छा नहीं किया।"


आर्यमणि:- मेरे साथ रहकर तुमने इतना नहीं जाना की मेरे डिक्शनरी में अच्छा या बुरा जैसा कोई शब्द नहीं होता।


लड़की:- अनंत कीर्ति की किताब कहां है।


आर्यमणि:- वो मुझसे खुलते-खुलते रह गई। जब मै खोल लूंगा तो किताब का सारांश पीडीएफ बनाकर मेल कर दूंगा।


लड़की:- तुमने अपना मकसद पाने के लिए मुझसे झूट बोला। तुमने मेरे साथ धोका किया है आर्य, तुम्हे इसकी कीमत चुकानी होगी।


आर्यमणि:- "मकसद, ओ बावड़ी लड़की, मिस्टर एक्स को मारना मेरा मकसद कहां से हो गया। उसके सपने क्या मुझे बचपन से आते थे? यहां आया और मुझे एक दरिंदे के बारे में पता चला, नरक का टिकिट काट दिया। ठीक वैसे ही एक दिन मै मौसा के घर, हॉल का टीवी इधर से उधर कर रहा था, पता नहीं क्या हो गया उस घर में। मौसा ने मुझे एक फैंटेसी बुक दिखा दी।"

"अब जिस पुस्तक का इतना शानदार इतिहास हो उसे पढ़ने के लिए दिल में बेईमानी आ गई बस। यहां धूम पार्ट 1 पार्ट 2 और पार्ट 3 की तरह कोई एक्शन सीरीज प्लान नहीं कर रहा था। लगता है तुम लोग किसी मकसद को साधने के लिए इतनी प्लांनिंग करते हो। योजना बनाना और सही वक्त के इंतजार करने जितना धैर्य नहीं। अब तो बात ईगो की है। मै यह किताब अपने पास रखूंगा। इस किताब की क्या कीमत चुकानी है, वो बता दो।"


लड़की:- तुम्हारे छाती चिड़कर सीने से दिल बाहर निकालना ही इसकी कीमत होगी आर्यमणि। तुमने मुझे धोका दिया है। कीमत तो चुकानी होगी, वो भी तुम्हे अपनी मौत से।


आर्यमणि:- "तुम्हे किताब जाने का गम है, या मिस्टर एक्स के मरने का। या इन दोनों के चक्कर में तुम्हारे परिवार ने मुझसे नाता तोड़ने कह दिया उसका गम है, मुझे नहीं पता। अब मैं ये किताब लेकर चला। वरना पहले मुझे लगा था, सरदार को मारकर जब मैं वापस आऊंगा तो तुम मुझे प्रहरी का गलेंटरी अवॉर्ड दिलवा दोगी। तुमने तो किताब चोर बना दिया। खैर, तुमने जो मुझे इस किताब तक पहुंचाने रिस्क लिया और मुझ पर भरोसा जताया उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया। मैं तुम्हारे भरोसे को टूटने नहीं दूंगा। एक दिन यह किताब खोलकर रहूंगा।"

"हमने मिस्टर एक्स को खत्म किया। तुम्हारे 10 प्रहरी को बचाया। शहर पर एक बड़ा हमला होने वाला था जिसे ये लोग जंगली कुत्तों का अटेक दिखाते, उस से नागपुर शहर को बचाया। बिना कोई सच्चाई जाने तुमने किताब चोर बना दिया। साला मेरा दिल तो चकनाचूर हो गया। मै चला, अब किसी को अपनी शक्ल ना दिखाऊंगा, तबतक जबतक मेरा दिल ना जुड़ जाए। और हां देवगिरी भाऊ को थैंक्स कह देना। उन्होंने जो मुझे अपनी कंपनी का 40% का हिस्सेदार बनाया था, वो हिस्सा मैंने ले लिया है। जहां भी रहूंगा उसके पैसे से लोक कल्याण करूंगा, उनसे कह देना। रूही मेरे दिल की फीलिंग जारा गाने बजाकर सुना दो।"


लड़की उधर से कुछ–कुछ कह रही थी लेकिन आर्यमणि ने अनसुना कर दिया। उपर से रूही ने… "ये दुनिया, ये महफिल, मेरे काम की नहीं" वाला गाना बजा दी।
 

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Scene:-7
सामने के बड़े से डायनिंग टेबल पर सभी अल्फा बैठे हुए थे और मुखिया की कुर्सी पर उनकी फर्स्ट अल्फा या शायद बीस्ट अल्फा बैठी हुई थी। मैं अपना चस्मा निकालकर ऊपर ओशुन के ओर देखा जो फिलहाल तो ठीक थी, लेकिन जैसे ही वहां से मैंने अपना एक कदम आगे बढ़ाया। जंजीर के खड़कने की आवाज आने लगी। जंजीर से लगा बेयरिंग घूमकर एक राउंड टाईट किया गया, और उसी के साथ ओशुन के के हाथ पाऊं भी अलग अलग दिशा में फ़ैल गए।


"पहले एक्शन देखकर बात करोगे या बात करने के बाद एक्शन दिखाऊं, मर्जी तुम लोगो की है। एक राउंड और घूमने का मतलब मै समझ जाऊंगा। ओह हां एक बात और मै बता दू, मेरे मार से तुम लोग हील नहीं होगे। नहीं विश्वास हो तो शूहोत्र लोपचे से पूछ लो जो आज-कल तुम लोगों के बीच लंगड़ा लोपचे के नाम से मशहूर है।"…


उनकी जगह, उनका घर, और मै अपनी छाती चौड़ी किए, उन्हें चुनौती दे रहा था। ईडन से ज्यादा तो उसके चेलों में आक्रोश भरा था। लाजमी भी है, फर्स्ट अल्फा खुश तो अल्फा बनने में कामयाबी मिलेगी। मै चारो ओर से घिर चुका, एक साथ चारो ओर से वुल्फ साउंड आने शुरू हो गए। कितने वुल्फ मुझे घेरे खड़े थे पता नहीं। लेकिन उन सब के कद के नीचे मै कहीं नजर नहीं आ रहा था। तभी वहां "खट खट खट" का साउंड हुआ और गुस्साए वुल्फ ने मेरा रास्ता छोड़ा…


"तुम्हारी हिम्मत की मै फैन हो गई। जिस जगह तुम्हारे खानदान प्रहरी के सारे शिकारी सर झुकाकर जाते है, वहां तुम इतने दिलेरी से बात कर रहे। ये तो कमाल हो गया।"..


मै:- ज्यादा बात करना और कहानी सुनने से मै बोर हो जाता हूं। ओशुन को छोड़ दो और उसे अपने ब्लड ओथ पैक तोड़कर जाने दो।


ईडन की अट्टहास भारी हंसी..… "ठीक है यही सही, पहले वो ओशुन फिर बाद में ये लड़का। लड़के को जान से मत मारना थोड़ी जान बाकी रहे, इस बात का ख्याल रखना।


जंजीर को एक राउंड और टाईट किया गया। मैंने ऊपर देखा और खुद से कहा.. "अब यही सही।".. सामने भिड़ लग चुकी थी और मैंने कमर से खंजर निकाल लिया। तभी वो लोग एक साथ हावी हो गए। मै भागकर निकलना तो चाहता था लेकिन मेरे शारीरिक क्षमता उनसे ज्यादा नहीं थी।


फिर से वूल्फ हाउस के दरिंदो के नाखून और दांत मेरे बदन को फ़ाड़ रहे थे। इस बार फाड़ने के साथ-साथ अपने घुसे दातों से मांस का हिस्सा भी फाड़ लेना चाहते थे। ऐसा लग रहा था मै एक लाश हूं जिसे चारो ओर से गिद्धों ने ढक रखा था और मांस नोचकर खा लेना चाह रहे थे।


वहीं दूसरी ओर ओशुन की चींख मेरे हृदय में भय पैदा कर रही था। मैं घुंटनो के बल फर्श पर हाथ टिकाए हुए था। ओशुन की आवाज फिर से मेरे कानो तक पहुंचीं। एक लम्बी और गहरी चींख। मैंने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया। अपनी ताकत को मेहसूस करने लगा। वुल्फ की वो तेज दहाड़ जो आज तक इस घर में नहीं गूंजी, मेरे गले से वो आवाज़ निकल रही थी।


मैंने अपने बदन पर लदे उन मजबूत मांशाहारियों को चिल्लाते हुए ऊपर की ओर धकेला और सब के सब बिखर गए। मेरे तेज और लंबी गूंज के कारन वहां मौजूद बीटा अपना सर नहीं उठा पा रहे थे। सभी अल्फा अपनी जगह खड़े होकर बस मुझे ही घुर रहे थे। हर कोई ये गणना करने की कोशिश कर रहा था कि मै कौन सा वेयरवुल्फ हूं। शरीर उजला, गहरी लाल आंखें और दहाड़ ऐसी के केवल फर्स्ट अल्फा ईडन ही मुझसे नजरे मिला पा रही थी।

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वेयरवोल्फ और उसके शिकार की अहम जानकारी



वेयरवोल्फ क्या है?

वेयरवोल्फ एक प्रकार का रूप–बदल इंसान होता है जो इंसान से भेड़िया और भेड़िए से इंसान बन सकते हैं। वेयरवोल्फ का जीवन उनके चरित्र का उल्लेख करते हैं। जिनकी मानसिक मनोदशा हिंसक होती है उनमें खून पीने और मांस खाने की तलब उतनी ही ज्यादा होती है।

शेर की तरह ही, एक बार जिन वेयरवॉल्फ को इंसानी मांस और खून मुंह में लग जाता है फिर वह किसी अन्य जानवर का शिकार नही करते। केवल और केवल इंसान का शिकार करते है। भेड़िए की तरह ही वेयरवोल्फ भी झुंड में रहना पसंद करते हैं और उनका झुंड ही उनका परिवार होता है। इनका झुंड की ताकत को ऐसा भी समझा जा सकता है कि एक आम वेयरवोल्फ मुखिया बनने के लिए कितना ही अपने मुखिया पर हमला क्यों न करे, किंतु झुंड का मुखिया कभी पलट कर अपने सदस्य को मारने की कोशिश नही करता। अपने झुंड को बचाने के लिए कोई भी सदस्य किसी भी हद तक जा सकता है। "वूऊऊऊऊऊ" यह एक ऐसा वुल्फ कॉलिंग साउंड है जिसके एक आवाज पर पूरा पैक दौड़ा चला आया। "वूऊऊऊऊऊ" वुल्फ कॉलिंग का वह आवाज भी है जिसे पैक का कोई भी सदस्य कई मिलों दूर से भी सुन सकता है। वहीं जब कोई वेयरवोल्फ बागी होकर झुंड छोड़ता है तब कई बार उनके झुंड के दूसरे वेयरवोल्फ ही उसे मार देते है।


वेयरवोल्फ के रूप, आकर और संरचना.…

इंसानी रूप से जब यह रूप–बदल जीव अपना रूप बदलते है, फिर इनकी लंबाई 7 से 8 फिट तक होती है। इनका चेहरा का आकार बदलकर भेड़िए की तरह दिखने लगता है और उन्ही की तरह इनके 2 बड़े–बड़े, नुकीले दांत दोनो किनारे से निकल आते हैं, जिन्हे फेंग कहते है। किसी भी मांस को यह फेंग फाड़ सकने में सक्षम होते है।


रूप बदलने के बाद जैसे इनके शरीर का आकार लंबा और दैत्यकारी हो जाता है। ठीक उसी के साथ इनकी भुजाएं और पाऊं की लंबाई भी बदल जाती है और पूरे शरीर पर बाल होते है। इनके चौड़े हथेली बड़े से पंजे की तरह दिखते है जिसमे बड़े, मजबूत और धारदार नाखून लगे होते है, जिन्हे क्ला कहते है। एक क्ला की लंबाई 2 इंच से लेकर 6 इंच तक हो सकती है। यह क्ला गेंडे की चमरी को भी आसानी से फाड़ सकती है।

कुछ वेयरवोल्फ पूर्णतः भेड़िया बन जाते हैं जो अपने दोनो पाऊं के जगह 4 पाऊं पर किसी जानवर की तरह खड़े रहते है। इस प्रकार के वेयरवोल्फ को सबसे खतरनाक माना जाता है। इन वेयरवोल्फ की लंबाई 8 से 10 फिट और ऊंचाई से 6 फिट तक होती है। इसे अजय आकार भी माना जाता है जो किसी भी 2 पाऊं पर खड़े वेयरवोल्फ से हार नही सकता।


वेयरवोल्फ के प्रकार.… और उनकी पहचान..

किसी भी झुंड में 2 प्रकार के वेयरवोल्फ होते हैं। सबसे पहले होता है बीटा। किसी भी झुंड में इनकी संख्या ज्यादा होती है और ये काफी आक्रामक प्रवृति के होते है। सबसे पहले शिकार के ओर दौड़ना, खूनी भिडंत करना या किसी भी प्रकार की जंग इन्ही के आक्रमक स्वभाव के वजह से होती है... एक बीटा की पहचान उसकी पीली आंखों से किया जाता है।

इन सभी बीटा को झुंड का मुखिया नियंत्रित करता है, जिन्हे अल्फा कहते है। एक अल्फा काफी हद तक खुद को नियंत्रित रखता है और अपनी मर्जी अनुसार आक्रमक होता है। हां लेकिन किसी एक अल्फा में इतनी ताकत होती है कि वह अकेले ही 20 बीटा का शिकार कर ले। इनकी पहचान इनके लाल आंखों से होती है और हर झुंड का अपना एक अल्फा होता है।

वैसे झुंड में एक हॉफ अल्फा भी होती है। हॉफ अल्फा वह वेयरवोल्फ होते है, जिनमे सारे गुण तो अल्फा के ही होते है, और उनकी आंखें भी लाल ही होती है, परंतु उनमें वह ताकत नही होती जो आम तौर पर एक अल्फा की होनी चाहिए।


बीस्ट वुल्फ या फर्स्ट अल्फा.…

ताकत का नशा वेयरवोल्फ के अंदर भी होता है। हर वेयरवोल्फ ताकत का भूखा होता है और शक्तियां अर्जित करने के लिए उतना ही आक्रमक। एक वेयरवोल्फ, जिस किसी भी दूसरे वेयरवॉल्फ को अपने क्ला (पंजे के बड़े बड़े नाखून) या फेंग से मारता है, फिर उसकी ताकत हासिल कर लेता है। एक लंबे वक्त तक दूसरे अल्फा और बीटा वेयरवोल्फ को मारकर ताकत हासिल करते–करते एक अल्फा बीस्ट अल्फा में बदल जाता है। यह होता एक अल्फा ही है किंतु इसकी चमरी इतनी सख्त हो जाती है जैसे किसी हीरे की चमरी हो। आंख तक को किसी बंदूक की गोली से भेदा नही जा सकता हो।

एक बीस्ट वुल्फ प्रायः 3–4 या उससे अधिक वुल्फ पैक को अपने अंदर रखते है, इसलिए इन्हे फर्स्ट अल्फा भी कहा जाता है। कई अल्फा के ऊपर का एक अल्फा... कुछ पैक फर्स्ट अल्फा के साथ अपनी मर्जी से रहते है तो ज्यादातर पैक को फर्स्ट अल्फा अपने साथ रहने पर मजबूर करता है। जहां अपने झुंड के लिए कोई भी वेयरवोल्फ कुछ भी कर सकता है वहीं फर्स्ट अल्फा या बीस्ट अल्फा थोड़े अलग होते है। यह रहते पैक के साथ ही हैं लेकिन अपने साथ रह रहे कई पैक में से किसी भी अल्फा या बीटा वेयरवोल्फ का शिकार उनके पैक के सामने ही कर लेते है।


वेयरवोल्फ के जानवर नियंत्रण शक्ति (Animal control power) और कुछ खास शक्तियां.....

कोई भी वेयरवोल्फ अपने आंखों से दूसरे जानवर, तथा खुद से निचले स्तर के वेयरवोल्फ को नियंत्रित कर सकता है। जैसे एक अल्फा, अपने बीटा और हॉफ अल्फा को कंट्रोल कर सकता है। वहीं फर्स्ट अल्फा, अल्फा वेयरवोल्फ को कंट्रोल कर सकता है।

हर वेयरवोल्फ में कमाल की सूंघने की शक्ति होती है। गंध की पहचान करने में ये कुत्तों से 100 गुना आगे होते है। वेयरवोल्फ के सूंघने की शक्ति के साथ साथ वह खून में बहने वाले हार्मोंस को महसूस कर किसी के भी भावना को मिलो दूर से महसूस कर सकते हैं। वह किसी के हंसना, रोना, उदास होना इत्यादि भावनाएं।

इन सब के अलावा वेयरवोल्फ हृदय के धड़कन को भी महसूस कर सकते हैं। किसी से बात करते वक्त उसके हृदय की धड़कन में आए परिवर्तन से ये लोग सच और झूठ का भी पता लगा सकते हैं। हां लेकिन यह बात भी सत्य है की ताजा टपकते खून की खुशबू में वेयरवोल्फ का दिमाग इस कदर आकर्षित करता हो, मानो किसी नशेड़ी को महीने दिन बाद उसके नशे के समान का दर्शन हुआ हो। फिर सारे सेंसस बिलकुल गायब। दिमाग या तो अंदर के आकर्षण को काबू करने में लगा रहता है या फिर खुद बेकाबू होकर खून के पास पहुंच जाते हैं और भेड़िया तो हमेशा भूखा ही होता है।


एक वेयरवोल्फ कैसे बनते हैं.…

वेयरवोल्फ बनने के 2 तरीके है। पहले नर और मादा वेयरवोल्फ के मिलन से जो बच्चा पैदा होता है वह वेयरवोल्फ होता है या नही तो किसी अल्फा के बाइट के बीटा वेयरवोल्फ बनता है। हां लेकिन किसी अल्फा द्वारा काटे जाने पर यदि इंसानी शरीर का इम्यून सिस्टम उस बाइट को स्वीकार कर लेता है तभी वह इंसान बीटा वेयरवोल्फ बनता है। यदि किसी इंसान के शरीर का इम्यून सिस्टम बाइट को रिजेक्ट कर देता है तब इंसान वेयरवोल्फ नही बनता अलबत्ता शरीर में कई तरह के केमिकल रिएक्शन के कारण उसकी मौत तक हो सकती है। इसलिए जब भी किसी अल्फा को अपने पैक का विस्तार करना होता है तब वह किसी किशोर अवस्था वाले लड़के या लड़की का चयन करता है जिनका इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग हो।

कुछ अन्य बातें...

१) किसी भी वेयरवोल्फ से उसकी शक्तियां चुराई जा सकती है। एक अल्फा कल बीटा भी हो सकता है।

२) हर वेयरवोल्फ के पास असमान्य रूप से हील होने की क्षमता होती है। बड़ा से बड़ा घाव महज मिनटों में भर जाता है और चोट के निशान भी नही होते।

३) हां लेकिन किसी बीटा को यदि उसका अल्फा चोट देता है फिर वह वेयरवॉल्फ इंसानी क्षमता जैसा सामान्य रूप से ही हिल करता है और उसके निशान हमेशा के लिए रह जाते हैं।

४) जैसे हर वेयरवोल्फ खुद को हिल कर सकता है ठीक उसी प्रकार वह अपनी नब्ज में दूसरों के दर्द और तकलीफ को उतारकर दूसरों को भी हिल कर सकता है। हर किसी वेयरवोल्फ में दूसरों को हिल करने की बहुत ही न्यूनतम क्षमता होती है। हां लेकिन एक ट्रू अल्फा दुनिया का सबसे शानदार हीलर होता है और यदि वो लगातार हिल करके अपने इस गुण को निखरते रहे फिर तो वह क्या न हिल कर दे.…

ट्रु अल्फा:– वेयरवोल्फ की दुनिया में यह नाम काफी दुर्लभ माना जाता है। जहां एक बीटा, भले ही वो 2 वेयरवोल्फ के मिलन से पैदा हुआ बीटा क्यों न हो, अल्फा बनने के लिए या तो कई सारे बीटा को मारते है या फिर उन्हे किसी अल्फा को मारना होता है। वहीं एक ट्रू–अल्फा इन सब से अलग होता है। वह अपनी इच्छा शक्ति से अल्फा बनता है। जो हिल करने के दर्द को लगातार झेलता है। कभी किसी का शिकार नही करता और न ही मांसहारी प्रवृति को अपने ऊपर हावी होने देता। इन्ही सब लागातार परिश्रम और अथक मेहनत के बाद एक ट्रू–अल्फा बनता है जिसकी शक्ति को कोई चुरा नही सकता।

वेयरवोल्फ कड़ी उनके शक्तियों के हिसाब से...

१) फर्स्ट अल्फा या बीस्ट अल्फा
२) ट्रू अल्फा
३) अल्फा
४) वेयरकायोटी (फीमेल फॉक्स शेप शिफ्टर, जो बीटा होती है और इनकी आंखें नीली होती है)
४) हॉफ अल्फा
५) बीटा
६) ओमेगा... (ओमेगा उन वेयरवोल्फ के लिए इस्तमाल होता है जिनका कोई पैक न हो। यह अल्फा या बीटा कोई भी हो सकते हैं। ओमेगा को हमेशा सबसे नीचे माना गया है क्योंकि अकेला वुल्फ सबसे कमजोर होता है, फिर वह अल्फा ही क्यों न हो)


कुछ खास बातें वेयरवोल्फ पैक के.…

वेयरवोल्फ के पैक में होने के एक ही नियम है, वह है ब्लड ओथ... एक अल्फा अपने पैक के सभी वुल्फ से ब्लड ओथ के साथ जुड़ता है। ब्लड पैक से जुड़े वुल्फ अपने मुखिया के ब्लड को, ब्लड ओथ के वक्त महसूस कर सकते है। एक पैक से जुड़े वुल्फ दूसरे पैक में, पैक तोड़ कर जा तो सकता है लेकिन ब्लड ओथ से जुड़े होने के कारण 2 पैक में खूनी भिडंत होनी आम बात है। या कभी–कभी खुशी से जाने भी देते हैं।

वहीं यदि किसी पैक ने दूसरे पैक के मुखिया को मार दिया तब वह हारे हुए पैक का मालिक बन जाता है। उसके बाद जीता हुआ पैक या तो दूसरे पैक के वुल्फ को अपने पैक में सामिल कर ले, या फिर गुलाम बनाकर रखे या फिर चाहे मार ही दे, वह जीते हुए पैक के मुखिया के ऊपर निर्भर करता है।

यदि कोई वुल्फ मरने की स्थिति में हो और उसकी जान कोई और बचाता है, उस परिस्थिति वुल्फ अपने ब्लड ओथ पैक को तोड़ सकता है और जान बचाने के एवज में उसे अपना मुखिया चुन सकता है। २ पैक के बीच शक्ति के वर्चस्व और क्षेत्र को लेकर खूनी भिडंत होनी आम सी बात है।



वेयरवोल्फ को रोकने और मारने के तरीके.....

वेयरवुल्फ मे कुछ बातें असमान्य होती है। कोई भी वेयरवुल्फ कितना भी घायल क्यों ना हो महज चंद मिनट में हील हो जाते है, इसलिए शिकारी उन्हे मारने के लिए खास हथियार का इस्तमाल करते है।

माउंटेन एश या अवरुद्ध भस्म.… हिमालय के क्षेत्र में पाया जानेवाला एक खास फुल जिसका भस्म की रेखा लक्ष्मण रेखा की तरह होती है। माउंटेन एश या अवरुद्ध भस्म 2 अलग दुनिया की दीवार मानी जाती है। अर्थात यदि हम धरती पर है और धरती पर पाए जाने वाले जीव के अलावा कोई अन्य जीव इसके रेखा को पार नही कर सकता है। इसी तरह यदि यह माउंटेन एश या अवरुद्ध भस्म किसी और डायमेंशन या अलग दुनिया में हो तो वहां पृथ्वी का कोई भी जीव इस अवरुद्ध भस्म को पार नही कर सकता।

सुपरनैचुरल के लिए यह माउंटेन एश किसी बुरे सपने की तरह होता है। इसकी रेखा यदि खींच दी गई हो और गलती से कोई सुपरनैचुरल इसकी रेखा को छू भी ले, फिर 4 दिन तक गहरे सदमे में रहता है।


लेथारिया वुलपिना:– वेयरवोल्फ के लिए एक तरह का धीमा जहर जो रक्त कोशिकाओं को तोड़ देता है। यदि समय रहते इलाज नहीं किया गया फिर तो वुल्फ न तो मरते हैं और न ही जीते है बस काली रक्त हर वक्त आंख, कान और नाक से निकलता रहता है। इसके बाद किसी भी वुल्फ को काबू में करना अथवा मारना आसान हो जाता है।

करंट फ्लो:– यूं तो करेंट हर किसी के लिए घातक होता है, लेकिन वेयरवोल्फ जो खुद को हिल कर सकते है, जिन्हे आसानी से नहीं मारा जा सकता, करेंट फ्लो एक विकल्प रहता है।

वोल्फबेन:– ये आम इंसान पर कुछ असर नहीं करती लेकिन यदि यह जहर किसी वुल्फ के सीने तक पहुंच जाता तो उसकी मृत्यु उसी वक़्त हो जाती।

कैनिन मॉडिफाइड वायरस:– कैनिन मॉडिफाइड वायरस को खाने में मिलाकर खिला दिया जाता। कैनिन वायरस कुत्ते में पाया जाना वाला वायरस है, जिसके मॉडिफाइड फॉर्म को एक वुल्फ पर ट्राय किया गया। परिणाम यह हुआ कि ये वायरस शरीर में जाते ही शेप शिफफ्टिंग बंद हो जाता है। लूथरिया वोलापिनी की तरह ही काले रक्त बहने लगते है और एक वुल्फ आम इंसान से ज्यादा कुछ नहीं रहता।


पूर्णिमा, अमावस्या और चंद्रग्रहण:– कोई भी शिकारी वुल्फ का शिकार करने के लिए इन सभी मौकों को भुनता है। जहां एक ओर पूर्णिमा की रात वुल्फ काफी आक्रमक होते है, और उन्हें रक्त और मांस का झांसा देकर फंसाया जा सकता है। वहीं चंद्रग्रहण और अमावस्या तो शिकारियों के लिए लॉटरी से कम नहीं। एक छोटा सा विंडो 10 मिनट से लेकर 1 घंटे के बीच खुलता है, जिसमे हर वेयरवॉल्फ अपनी शक्तियां खोकर आम इंसान की तरह रहता है, और आम इंसान वाले सारे वार कारगर होते हैं।


फिलहाल इतनी जानकारी दी गई है... इसमें जैसे–जैसे कुछ नया आता है, अपडेट होता रहेगा.…
 
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nain11ster

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कहानी के प्रमुख पात्र



आर्यमणि का परिवार..
दादा:- वर्धराज कुलकर्णी
पिता:- केशव कुलकर्णी (डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) इसके पैतृक पक्ष से कोई भी नहीं।
माता:- जया कुलकर्णी (हाउस वाइफ)

(केशव और जया की लव मैरिज हुई थी)

जया कुलकर्णी की बड़ी बहन और आर्यमणि की मासी:- मीनाक्षी भारद्वाज (हाउस वाइफ)
मौसा:- सुकेश भारद्वाज (काम काज से रिटायर्ड अरबपति)
मौसेरा भाई:- तेजस भारद्वाज (अरबपति)
मौसेरे भाई की पत्नी और आर्य की भाभी:- वैदेही भारद्वाज (एक्टिव सोशल वर्कर)
तेजस और वैदेही का एक बेटा:- मयंक भारद्वाज
उनकी बेटी:- शैली भारद्वाज
मौसेरी बहन:- भूमि देसाई (अरबपति और वर्किंग वूमेन)
मौसेरी बहन का पति और जीजा:- जयदेव देसाई (अरबपति और वर्किंग वूमेन)
जयदेव पवार की बहन:- रिचा देसाई
जयदेव पावर का पिता, और भूमि का ससुर:– विश्वा देसाई

ननिहाल के परिवार के सबसे छोटे सदस्य और मामा:- अरुण जोशी (अरबपति बिजनेसमैन) निवास.. मुंबई
मामी:- प्रीति जोशी (पति के साथ बिजनेस देखती है)
ममेरा भाई:- वंश जोशी (बीबीए, सेकंड ईयर स्टूडेंट)
ममेरी बहन:- निर जोशी (12th स्टूडेंट)

आर्यमणि के प्रारंभिक जीवन के लोग..


आर्यमणि के बचपन के 2 दोस्त..

निशांत और चित्रा:- जुड़वा भाई बहन..
पिता:- राकेश नाईक (पुलिस कमिश्नर, और पुस्तैनी पैसे वाले करोड़पति)
माता:- निलांजना (हाउस वाइफ)

(दोनो की मुलाकात एक फंक्शन में हुई थी, नजरे मिली और राकेश, निलंजना के घर पर शादी का प्रस्ताव भेजा। एक ही समूह से जुड़े होने के कारन इनके मुखिया ने खुशी खुशी दोनो की शादी के लिए मंजूरी दे दी)

मैत्री लोलचे ( आर्यमणि के बचपन का पहला प्यार, एक सुपर नेचुरल)


सुपर नेचुरल कैरेक्टर..

ईडन एक फर्स्ट अल्फा 8 अल्फा पैक के साथ जर्मनी के वुल्फ हाउस में रहती है। जहां आर्यमणि का पहला प्यार मैत्री लोपचे का पैक भी रहता था।

ओशुन (व्हाइट फॉक्स और एक अल्फा की शक्ति से थोड़ी कम शक्तियां).. अपने जैसे इकलौती और ईडन के साथ पैक में रहने वाली।


वैधयन भारद्वाज… लगभग 500 वर्ष पूर्व का नाम एक मजबूत साख जिसके साथ कई लोग जुड़े थे। शुरवात में विशुद्ध ब्राह्मण का एक समूह, जो मिलकर काम करना शुरू किया। ये समूह काफी संगठित और क्षमता वाले थे जिन्होंने गुप्त रूप से प्रशाशनिक सेवा में अपना योगदान दिया और महाराष्ट्र के सबसे अमीर समूह बन गए। तत्काल समय में भी यह समूह एक जुट होकर रहते है और इनकी साख इतनी गहरी है कि कोई भी इनसे उलझता नहीं।

तत्काल समय कि बात करे तो वैधयान वंश के 2 चचेरे भाई बिल्कुल खड़े है, और बाकी अन्य लोग गुमनामी के अंधेरों में चले गए।

दोनो चचेरे भाई में बड़ा भाई था सुकेश भारद्वाज यानी कि आर्यमणि का मौसा। भारद्वाज कुल का एक खड़ा चिराग..

शुकेश से छोटा है उसका चचेरा भाई:- उज्जवल भारद्वाज (रिटायर हेड मास्टर और अरबों की पुरखों की संपत्ति)
उसकी पत्नी:- अक्षरा भारद्वाज
बड़ा लड़का:- कमल भारद्वाज (सॉफ्टवेर इंजिनियर, यूएसए में सैटल)
कमल की पत्नी:- मिली भारद्वाज (सॉफ्टवेर इंजिनियर, यूएस में सैटल)
दूसरा लड़का:- राजदीप भारद्वाज… (नागपुर एसपी)
राजदीप के बाद पहली छोटी बहन… नम्रता (पोस्ट ग्रेजुएट, और पीएचडी करना चाहती है।)
दूसरी छोटी बहन::- पलक भारद्वाज ( इंजिनियरिंग स्टूडेंट)

कुछ और जरूरी पत्र हैं जिनके नाम अभी नही दिख रहे... कहानी के साथ आगे बढ़ते हुए उनका नाम भी अपडेट करता रहूंगा.…
 
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