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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Badhiya update bhai

To Toffik hi tha jisne sab kiya tha lekin loren ko kyun mar diya usne wo to usse pyar karta tha na or bechari loren bhi uske pyar me andhi hoker uski baten man rahi thi or jis jenith se badla lena chahta tha use abhi tak jinda rakha ha usne usse pyar ka natak karta ja raha ha Jenith ki sab sachhai pata pad gayi ha dekhte han kab tak Toffik babu apni sachhai chhupa pate han waise bure karm ki saja milti hi ha or jis jagah ye sab han usse lagta ha jaise Aslam miya ko saja mili usi prakar Toffik ka bhi number lag sakta ha

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

अदभुद अकल्पनीय इससे अधिक शब्द नहीं हैं व्याख्यान के लिए

राज भाई
सेक्स नहीं कहानी पढ़ने का शौक रहा है मेरा हमेशा से
सेक्स पढ़ने देखने की जरूरत सिर्फ कुछ नया, अनोखा, अलग जानने के लिए समझता हूं
आनन्द या मनोरंजन सेक्स लिखने, पढ़ने, सुनने या देखने से नहीं 'करने' में ही होता है

Awesome update and nice story.

फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया

शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

मजेदार अपडेट, कहानी ने दिलचस्प मोड ले लिया। मर्डर मिस्ट्री से बरमूडा ट्रेंगल की और। हम्ममम🤔🤔

बहुत ही शानदार अपडेट है !

रिव्यू की शुरुआत की जाए

नए अध्याय का प्रारंभ हो चुका हैं युद्ध का बिगुल बज चुका हैं , जिस तरह युद्ध की झलकियां दिखाई हैं वे साबित करते हैं आगे हमें क्या देखना को मिलेगा।

मतलब सिर्फ एंडोर्स ग्रह के १० लोग भिड़ने आए हैं , अटका वासियों से, फिर भी इतनी तबाहि , भला हो सूर्यवर्या की शुभार्जुन का जिसने इस युद्ध में थोड़ा समय मांग लिया।

अब सबसे पहले मुझे ये बताओ सुनेरा लड़की हैं या लड़का क्योंकि कभी लगता हैं ये लड़की है तो कभी लड़का लगता है

जब शक्ति का वर्णन हो रहा था तब इनका जिक्र क्यों नहीं हुआ क्योंकि मैने पुराना अपडेट पढ़ा है। इसे तो लगता है ये दोनो शक्तियों उन पंद्रह शक्ति में से हैं।

अब मुझे नही पता इतना बड़ा लूपहोल कैसे भरेगा। पर करना तो पड़ेगा वर्ना कन्फ्यूजन होगा ।

अब समझा आगया है , की रॉजर जिंदा कैसे हुआ, वो शुभर्जुना का जादू था।

मेगा लाइट के गुस्से वाला अवतार तो खतरनाक था, वैसे ये जिंदा मारने के खेल कब तक चालू रखोगे , एक समय लगा कि युद्ध में पहले बलि आगाई, लेकिन हम गलत थे।


वैसे जैसा शुभार्जुन के बारे में पढ़ा हैं लगता है इसका प्रयोग पहले बार हुआ है और आगे चल कर २ बार हम किसी को भी जीवित कर सकते है ।

अब मार्कोटा ने युद्ध चालू कर कर कही न कही मुसीबत मोल लेली है, ये एंडोर्स वाले किसी को नहीं छोड़ने वाले अब तो और ताकतवर होकर आयेंगे क्यूंकि इनके महाबली योद्धा को परास्त किया है

इस अपडेट से ये भी लगता है कहानी के समाप्ति की और एक कदम बढ़ चुका है

कुलमिलाकर शानदार अपडेट आगे की प्रतीक्षा
Raj_sharma

Shaandar update

Intezar rahega bhai

#179

राज भाई - आपकी रचना तो एक भव्य और महत्वाकांक्षी फंतासी वाले संसार की रचना है। इंद्रसभा, त्रिदेवों का आगमन, और कलयुग के लिए “ब्रह्मांड रक्षक” की योजना, यह सभी तत्व मिलकर बढ़िया प्लॉट बना रहे हैं। मतलब आगे कहानी में और विस्तार आने वाला है। हमको इनके बारे में पहले पता चल चुका है लेकिन फिर भी, इस अपडेट के विचार न सिर्फ नए लगते हैं, बल्कि एक structured universe का संकेत भी देते हैं।

लेकिन सबसे पहले, भाषा और शुद्धता - जो आपने जान बूझ कर खराब करी है - उस पर ध्यान देना ज़रूरी है। एक और बात, संवाद केवल functional से हैं, मतलब, वो कहानी को आगे बढ़ाते तो हैं, लेकिन अलग-अलग पात्रों की आवाज़ में अंतर नहीं पढ़ने में आता। इंद्र, सूर्य, और वरुण, तीनों के ही बोलने का तरीका लगभग एक जैसा है।

-- ये उतारी मैंने बाल की खाल!

#180

यह अपडेट पिछले से बेहतर है और बहुत जीवंत है। बढ़िया visual narrative! देवशक्तियों का प्रस्तुतिकरण - रत्नों के माध्यम से शक्तियों को दिखाना एक बहुत ही प्रभावी और याद रहने वाला आइडिया है (वो अलग बात है कि मुझ भुलक्कड़ को याद नहीं रहेगा)। हर शक्ति का रंग, उसका गुण (जैसे सूर्यशक्ति = पराक्रम, जलशक्ति = गंभीरता, वायुशक्ति = विज्ञान) - यह सब मिलकर एक structured magic system बनाता है। अच्छी फंतासी वहीं होती है जहाँ शक्तियों के नियम स्पष्ट हों।

उधर इंद्र की आफ़त हो गई है। पहले उसको दूसरों के अमरत्व के कारण दिक्कत थी, फ़िर राक्षसलोक का डर, फिर माया पर संदेह, और अंत में मन ही मन कोई खिचड़ी पकाना। देवराज एक insecure और politically aware शासक है। बढ़िया!

Update is very nice 👍 🙂
Ek pakda gaya toh baki sab bahar ajaenge

Superb update🔥🔥

Nice update....

nice update

lovely update. ashrudhara train me baithne ke liye 12 sawalo ka jawab dena hai jisme se 8 ke jawab de diye hai ,shefali aur christi ke dimag ki vajah se sab sahi uttar de paye .dekhte hai aage aise kaun kaun se prashn poochhta hai computer jo dikhte to aasan hai par sochne par majbur kar hi dete hai .

Wonderful update brother! Sabhi sawal achhe the, lekin sabse easy sawal surya aur carrom wala tha, baki thoda theek thak tha, sochne ke liye thoda samay lag jana tha, lekin jab Shefali jaisi ladki sath ho toh jyada samay nahi lagta hai.

Bahut shandar update he Raj_sharma Bhai

Ye Ke-Ishwar bhi inke pure maje le raha he...........

Ek se ek paheli bana rakhi he bande ne.............

Keep rocking Bro

Nice update....

Bhut hi badhiya update Bhai
Ashrudhara train me bethne ke liye 12 me se 8 paheliyo ka jawab to sahi de diya hai
Dhekte hai aage aur konsi paheliya aati hai

Besabari se intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....
Update posted friends 👍
 

parkas

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#191.

एक बार फिर से ब्रेन मशीन ने अगला प्रश्न कर लिया, पर इस बार प्रश्न को पूछने की जगह पर वह प्रश्न स्क्रीन पर दिखाई दिया
A+T+8=?

इस प्रश्न को देख सभी ने तुरंत अंग्रेजी के अक्षरों को नंबरों से मैच कराते हुए, A को 1 मानकर और T को 20 मानकर उत्तर 29 बता दिया, पर सुयश ने जैसे ही शैफाली की ओर देखा, तो शैफाली ने सुयश को उत्तर 88 बताया।

अब सभी फिर से आश्चर्य से शैफाली की ओर देख रहे थे क्यों कि इस प्रकार के प्रश्न तो सभी ने पहले से कर रखे थे, पर उन्हें शैफाली के उत्तर का लॉजिक समझ में नहीं आ रहा था।

अभी कुछ समय बाकी था इसलिये शैफाली ने उन्हें समझाया- “हमें A और T को गणित के नंबरों से नहीं मिलाना, बल्कि उसे उच्चारण पर ध्यान देना है। इस प्रकार से A का उच्चारण ‘ए' और T का उच्चारण 'टी' होगा, तो अगर इन सभी को जोड़ें, तो पूरा उच्चारण होगा- एटीएट। यानि की '88"

सुयश ने जल्दी से मशीन पर 88 टाइप कर दिया, पर शैफाली का लॉजिक सुनकर सभी को अपने ऊपर हंसी आ गई।

अब सभी पुनः अगले प्रश्न के लिये ऊपर मशीन की ओर देखने लगे। अब ब्रेन मशीन ने दसवां प्रश्न पूछा
“जन्म हुआ रात में, सुबह हुआ जवान, एक दिन के जीवन में सबको बांटा ज्ञान।"

“यह प्रश्न कुछ पेचीदा लग रहा है?” क्रिस्टी ने कहा- “ऐसा कौन हो सकता है, जो एक रात में ही जवान हो जाए?"

"हमें ब्रेन मशीन के शब्दों पर नहीं, बल्कि उन शब्दों के सार पर ध्यान देना होगा।” सुयश ने क्रिस्टी को देखते हुए कहा- “क्यों कि पिछले सभी प्रश्न मशीन ने इसी प्रकार से पूछे हैं।”

आखिरकार शैफाली ने इस प्रश्न को भी हल कर ही लिया- “कैप्टेन अंकल, इस प्रश्न का उत्तर है न्यूजपेपर।”

सुयश ने उत्तर सुनकर मुस्कुरा कर शैफाली की ओर देखा और फिर स्क्रीन पर इस शब्द को टाइप कर दिया। पुनः उत्तर सही था।

अब बस 2 प्रश्न ही बचे थे। तभी ब्रेन मशीन ने ग्यारहवां प्रश्न पूछ लिया-
"सुबह में चार पैर, दोपहर में दो, शाम को तीन पैर, फिर जाता है सो।"

“यह कैसा प्रश्न है?” इस बार शैफाली भी चकरा गई- “इस प्रकार की कोई जीवित चीज तो पृथ्वी पर नहीं हो सकती?"

अब जब शैफाली ही इस पहेली को नहीं समझ पा रही थी तो बाकी के लोगों का मोरल तो वैसे ही डाउन हो गया।

पर सुयश अभी भी सोचता जा रहा था। वक्त का पहिया धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे की ओर बढ़ा रहा था, पर सुयश का दिमाग इस समय वक्त के पहिये से थोड़ा सा तेज चल रहा था, क्यों कि अब उसके चेहरे पर एक मुस्कान दिखाई देने लगी, जो इस बात का द्योतक थी कि सुयश को इस प्रश्न का उत्तर मिल गया है।

चूंकि समय ज्यादा नहीं बचा था, इसलिये सुयश ने पहले उत्तर को, की-बोर्ड पर टाइप कर इन्टर का बटन दबा दिया और फिर बिना हरी लाइट को देखे घूम कर सबको उत्तर समझाने लगा।

"उत्तर था मनुष्य....यहां बचपन को सुबह के समान माना गया है और बचपन में बालक अपने हाथों व घुटनों के बल चलता है, यानि की अपने 4 पैरों पर। फिर जवानी में यानि दोपहर में 2 पैरों पर चलता है और बाद में बुढ़ापे में यानि की शाम को, डंडे का सहारा लेकर तीन पैरों पर चलता है। इसके बाद उसके सोने का मतलब मृत्यु से था।"

इस वास्तव में यह प्रश्न अत्यंत कठिन था, क्यों कि प्रश्न का सार बहुत ही दुष्कर था।

सबको समझाने के बाद सुयश ने पीछे पलटकर मशीन की ओर देखा। मशीन पर हरी बत्ती ही जल रही थी। अब मात्र एक प्रश्न बचा था।

तभी वह आखिरी प्रश्न भी ब्रेन मशीन ने पूछ लिया, पर यह आखिरी प्रश्न एक बार फिर मशीन की स्क्रीन पर चमकने लगा।

पर भलाई ये थी कि इस बार टाइमर नहीं चल रहा था। स्क्रीन पर इस समय कुछ नंबर दिखाई दे रहे थे-1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15

और लिखा था- ऊपर दिये किन्हीं 3 नंबरों को इस प्रकार जोड़ो कि उत्तर 30 आये और नीचे उन तीन डिजिट की जगह खाली थी। _+_+_ = 30


“इम्पासिबल!" शैफाली ने देखते ही बोल दिया “कैप्टेन अंकल, आपको याद होगा कि मैंने आपसे एक बार इसी तिलिस्मा में 30 कबूतरों को उड़ाने वाला प्रश्न पूछा था, जिसका कोई उत्तर नहीं था, यह प्रश्न भी उसी प्रकार से है। ध्यान से देखिये, ऊपर लिखे सभी नंबर 'विषम' हैं और गणित का नियम ये कहता है कि किसी भी तीन विषम संख्याओं को जोड़कर, कभी भी एक 'सम' संख्या नहीं बनाई जा सकती है। इसलिये मेरे हिसाब से इस प्रश्न का उत्तर संभव ही नहीं है।"

“ध्यान से सोचो शैफाली, शायद हर प्रश्न की ही भांति कैश्वर ने इस प्रश्न में भी कोई ट्रिक लगा रखी हो?" सुयश ने कहा- “और यह बात ध्यान रखना कि अगर तुम इस गणित के प्रश्न को हल नहीं कर पाई, तो हममें से कोई भी नहीं कर पायेगा? सोचो तिलिस्मा में कैश्वर हमें कभी भी ऐसी कोई पहेली नहीं देगा, जिसका कि कोई उत्तर ही ना हो? और ये भी ध्यान रखो कि यह प्रश्न अत्यंत कठिन है, इसीलिये कैश्वर ने इस प्रश्न में टाइमर नहीं रखा है। इसलिये तुम्हारे पास इस प्रश्न को सोचने के लिये पर्याप्त समय है।"

सुयश के इतने शब्द ही, शैफाली के दिमाग में नयी ऊर्जा का संचार कर गये, उसने फिर से अपना दिमाग लगाना शुरु कर दिया।

काफी देर तक सोचने के बाद भी शैफाली को उत्तर समझ में नहीं आया, इसलिये वह अब ब्रेन मशीन की स्क्रीन के पास आकर देखने लगी।

कुछ सोच शैफाली ने स्क्रीन के ऊपर लिखे गणित के अंको को हाथ से छुआ। वह स्क्रीन टच स्क्रीन की भांति काम कर रही थी।

यह देख शैफाली ने सभी अंकों को हाथ लगाकर देखना शुरु कर दिया, पर जैसे ही शैफाली ने 9 अंक को हाथ लगाया, वह तुरंत घूमकर 6 में बदल गया।

यह देख शैफाली के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

अब उसने पहले अंक की जगह 11, दूसरे अंक की जगह 13 को उठाकर रख दिया। तीसरे अंक की जगह शैफाली ने जैसे ही 9 को 6 बनाकर रखा, तुरंत ब्रेन मशीन की हरी बत्ती जल उठी। 11 + 13 + 6 = 30

अब मशीन के एक स्थान से 6 टिकट निकल आये, जिसे शैफाली ने अपने हाथों में पकड़ा और सभी के साथ भागकर ट्रेन के पास पहुंच गई।

ट्रेन के द्वार पर एक स्कैनर लगा था, उस स्कैनर में टिकट को स्कैन करते ही ट्रेन का दरवाजा खुल गया।

सभी अंदर प्रवेश करके, एक ओर लगी 6 कुर्सियों पर बैठ गये।

"कैप्टेन अगर हमारे साथ शैफाली ना होती, तो इस द्वार को नहीं पार किया जा सकता था?" तौफीक ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

"कैश्वर ने सभी द्वार को किसी ना किसी की क्षमताओं को देखकर बनाया है, तो फिर यदि हममें से एक भी हमारे साथ ना होता, तो पूरा तिलिस्मा ही पार नहीं किया जा सकता था।” सुयश ने कहा- “और शायद यह विधि का विधान है, यानि हमारा इस तिलिस्मा में प्रवेश करना, एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि ये समझो कि हम तिलिस्मा तोड़ने के लिये ही पैदा हुए हैं।"

सभी बातें कर रहे थे और उधर शैफाली ट्रेन से बाहर की ओर देख रही थी, पर ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि शैफाली को कुछ नजर नहीं आ रहा था।

कुछ ही देर में ट्रेन एक स्टेशन पर जा कर रुकी। सभी ट्रेन से उतरकर नीचे आ गये।

नीचे प्लेटफार्म पर एक ओर लिखा हुआ था अश्रुधारा स्टेशन।"

जैसे ही सभी ट्रेन से उतरे, ट्रेन अपनी जगह से आगे चली गई। तभी सुयश की नजर स्टेशन के बाहर निकलने वाले द्वार की ओर गई।

सुयश ने इशारे से सभी को उस दिशा में चलने के लिये कहा।

स्टेशन के उस द्वार से निकलने के बाद, सभी एक ऐसे स्थान पर पहुंच गये, जहां कि एक बहुत सुंदर स्वीमिंग पूल बना था। स्वीमिंग पूल का पानी काफी साफ दिख रहा था।

शैफाली ने आगे बढ़कर उस स्वीमिंग पूल के पानी को थोड़ा सा अपनी अंजली में लिया और मुंह से लगा कर देखा।

“यही है लैक्राइमल ग्लैंड।” शैफाली ने कहा- “यह आँसुओं का स्वीमिंग पूल है, इस पानी में नमक की काफी ज्यादा मात्रा है। इसका मतलब इसके अंदर से, कोई ना कोई पाइप आँखों तक अवश्य जाता होगा? पर यह पता लगाने के लिये मुझे इसके अंदर जाना होगा।"

यह कहकर शैफाली ने सुयश की ओर देखा। सुयश ने धीरे से अपना सिर हिलाकर शैफाली को स्वीमिंग पूल के अंदर जाने की आज्ञा दे दी।

अब शैफाली ने बिना देर किये, स्वीमिंग पूल में छलांग लगा दी। शैफाली तैरती हुई स्वीमिंग पूल के तली की ओर बढ़ी, जहां एक 5 फुट मोटा पाइप उसे दिखाई दिया। शैफाली बिना डरे उस पाइप में प्रवेश कर गई।

पाइप के अंत में शैफाली को एक ढक्कन सा लगा दिखाई दिया, जो कि बंद था। शैफाली ने उस ढक्कन को पकड़ कर उठा दिया। ढक्कन हटते ही स्वीमिंग पूल का सारा पानी एक बहाव के साथ पाइप से होकर नीचे की ओर जाने लगा।

शैफाली भी उस पानी के साथ बहकर, आँखों की कोर वाले उसी स्थान पर पहुंच गई, जहां से उसने इस द्वार की शुरुआत की थी।

चूंकि आँसुओं का बहाव बहुत तेज था, इसलिये शैफाली ने एक खंभे को जोर से पकड़ रखा था।

कुछ ही देर में सभी आँसू आँखों की कोर से बाहर निकल गये।

तभी शैफाली को उसी रास्ते से सुयश सहित सभी आते दिखाई दिये।

अब कार्निया पर जमा चिपचिपा पदार्थ पूरी तरह से साफ हो गया था।

"इस द्वार का सारा कार्य तो समाप्त हो गया, फिर इससे बाहर निकलने का दरवाजा कहां है?" ऐलेक्स ने कहा।

तभी शैफाली की निगाह आँख की कोर से जुड़ी 'लैक्राइमल पंक्टा' की ओर गई। जहां पर एक द्वार दिखाई दे रहा था, जिस पर 5.2 लिखा हुआ था।

"मुझे लगता है कि हमें इस द्वार से नाक की ओर जाना होगा?" शैफाली ने कहा- “वही हमारा तिलिस्मा का अगला द्वार है।"

"हे भगवान! अब आँख के बाद नाक में जाना होगा।” ऐलेक्स ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा- “तेरा बेड़ा गर्क हो कैश्वर तुझे कोई और द्वार ना मिला, तिलिस्मा में बनाने को।”

सभी अब शैफाली के साथ उस द्वार की ओर बढ़ गये।

जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
 

Raj_sharma

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Ajju Landwalia

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#191.

एक बार फिर से ब्रेन मशीन ने अगला प्रश्न कर लिया, पर इस बार प्रश्न को पूछने की जगह पर वह प्रश्न स्क्रीन पर दिखाई दिया
A+T+8=?

इस प्रश्न को देख सभी ने तुरंत अंग्रेजी के अक्षरों को नंबरों से मैच कराते हुए, A को 1 मानकर और T को 20 मानकर उत्तर 29 बता दिया, पर सुयश ने जैसे ही शैफाली की ओर देखा, तो शैफाली ने सुयश को उत्तर 88 बताया।

अब सभी फिर से आश्चर्य से शैफाली की ओर देख रहे थे क्यों कि इस प्रकार के प्रश्न तो सभी ने पहले से कर रखे थे, पर उन्हें शैफाली के उत्तर का लॉजिक समझ में नहीं आ रहा था।

अभी कुछ समय बाकी था इसलिये शैफाली ने उन्हें समझाया- “हमें A और T को गणित के नंबरों से नहीं मिलाना, बल्कि उसे उच्चारण पर ध्यान देना है। इस प्रकार से A का उच्चारण ‘ए' और T का उच्चारण 'टी' होगा, तो अगर इन सभी को जोड़ें, तो पूरा उच्चारण होगा- एटीएट। यानि की '88"

सुयश ने जल्दी से मशीन पर 88 टाइप कर दिया, पर शैफाली का लॉजिक सुनकर सभी को अपने ऊपर हंसी आ गई।

अब सभी पुनः अगले प्रश्न के लिये ऊपर मशीन की ओर देखने लगे। अब ब्रेन मशीन ने दसवां प्रश्न पूछा
“जन्म हुआ रात में, सुबह हुआ जवान, एक दिन के जीवन में सबको बांटा ज्ञान।"

“यह प्रश्न कुछ पेचीदा लग रहा है?” क्रिस्टी ने कहा- “ऐसा कौन हो सकता है, जो एक रात में ही जवान हो जाए?"

"हमें ब्रेन मशीन के शब्दों पर नहीं, बल्कि उन शब्दों के सार पर ध्यान देना होगा।” सुयश ने क्रिस्टी को देखते हुए कहा- “क्यों कि पिछले सभी प्रश्न मशीन ने इसी प्रकार से पूछे हैं।”

आखिरकार शैफाली ने इस प्रश्न को भी हल कर ही लिया- “कैप्टेन अंकल, इस प्रश्न का उत्तर है न्यूजपेपर।”

सुयश ने उत्तर सुनकर मुस्कुरा कर शैफाली की ओर देखा और फिर स्क्रीन पर इस शब्द को टाइप कर दिया। पुनः उत्तर सही था।

अब बस 2 प्रश्न ही बचे थे। तभी ब्रेन मशीन ने ग्यारहवां प्रश्न पूछ लिया-
"सुबह में चार पैर, दोपहर में दो, शाम को तीन पैर, फिर जाता है सो।"

“यह कैसा प्रश्न है?” इस बार शैफाली भी चकरा गई- “इस प्रकार की कोई जीवित चीज तो पृथ्वी पर नहीं हो सकती?"

अब जब शैफाली ही इस पहेली को नहीं समझ पा रही थी तो बाकी के लोगों का मोरल तो वैसे ही डाउन हो गया।

पर सुयश अभी भी सोचता जा रहा था। वक्त का पहिया धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे की ओर बढ़ा रहा था, पर सुयश का दिमाग इस समय वक्त के पहिये से थोड़ा सा तेज चल रहा था, क्यों कि अब उसके चेहरे पर एक मुस्कान दिखाई देने लगी, जो इस बात का द्योतक थी कि सुयश को इस प्रश्न का उत्तर मिल गया है।

चूंकि समय ज्यादा नहीं बचा था, इसलिये सुयश ने पहले उत्तर को, की-बोर्ड पर टाइप कर इन्टर का बटन दबा दिया और फिर बिना हरी लाइट को देखे घूम कर सबको उत्तर समझाने लगा।

"उत्तर था मनुष्य....यहां बचपन को सुबह के समान माना गया है और बचपन में बालक अपने हाथों व घुटनों के बल चलता है, यानि की अपने 4 पैरों पर। फिर जवानी में यानि दोपहर में 2 पैरों पर चलता है और बाद में बुढ़ापे में यानि की शाम को, डंडे का सहारा लेकर तीन पैरों पर चलता है। इसके बाद उसके सोने का मतलब मृत्यु से था।"

इस वास्तव में यह प्रश्न अत्यंत कठिन था, क्यों कि प्रश्न का सार बहुत ही दुष्कर था।

सबको समझाने के बाद सुयश ने पीछे पलटकर मशीन की ओर देखा। मशीन पर हरी बत्ती ही जल रही थी। अब मात्र एक प्रश्न बचा था।

तभी वह आखिरी प्रश्न भी ब्रेन मशीन ने पूछ लिया, पर यह आखिरी प्रश्न एक बार फिर मशीन की स्क्रीन पर चमकने लगा।

पर भलाई ये थी कि इस बार टाइमर नहीं चल रहा था। स्क्रीन पर इस समय कुछ नंबर दिखाई दे रहे थे-1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15

और लिखा था- ऊपर दिये किन्हीं 3 नंबरों को इस प्रकार जोड़ो कि उत्तर 30 आये और नीचे उन तीन डिजिट की जगह खाली थी। _+_+_ = 30


“इम्पासिबल!" शैफाली ने देखते ही बोल दिया “कैप्टेन अंकल, आपको याद होगा कि मैंने आपसे एक बार इसी तिलिस्मा में 30 कबूतरों को उड़ाने वाला प्रश्न पूछा था, जिसका कोई उत्तर नहीं था, यह प्रश्न भी उसी प्रकार से है। ध्यान से देखिये, ऊपर लिखे सभी नंबर 'विषम' हैं और गणित का नियम ये कहता है कि किसी भी तीन विषम संख्याओं को जोड़कर, कभी भी एक 'सम' संख्या नहीं बनाई जा सकती है। इसलिये मेरे हिसाब से इस प्रश्न का उत्तर संभव ही नहीं है।"

“ध्यान से सोचो शैफाली, शायद हर प्रश्न की ही भांति कैश्वर ने इस प्रश्न में भी कोई ट्रिक लगा रखी हो?" सुयश ने कहा- “और यह बात ध्यान रखना कि अगर तुम इस गणित के प्रश्न को हल नहीं कर पाई, तो हममें से कोई भी नहीं कर पायेगा? सोचो तिलिस्मा में कैश्वर हमें कभी भी ऐसी कोई पहेली नहीं देगा, जिसका कि कोई उत्तर ही ना हो? और ये भी ध्यान रखो कि यह प्रश्न अत्यंत कठिन है, इसीलिये कैश्वर ने इस प्रश्न में टाइमर नहीं रखा है। इसलिये तुम्हारे पास इस प्रश्न को सोचने के लिये पर्याप्त समय है।"

सुयश के इतने शब्द ही, शैफाली के दिमाग में नयी ऊर्जा का संचार कर गये, उसने फिर से अपना दिमाग लगाना शुरु कर दिया।

काफी देर तक सोचने के बाद भी शैफाली को उत्तर समझ में नहीं आया, इसलिये वह अब ब्रेन मशीन की स्क्रीन के पास आकर देखने लगी।

कुछ सोच शैफाली ने स्क्रीन के ऊपर लिखे गणित के अंको को हाथ से छुआ। वह स्क्रीन टच स्क्रीन की भांति काम कर रही थी।

यह देख शैफाली ने सभी अंकों को हाथ लगाकर देखना शुरु कर दिया, पर जैसे ही शैफाली ने 9 अंक को हाथ लगाया, वह तुरंत घूमकर 6 में बदल गया।

यह देख शैफाली के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

अब उसने पहले अंक की जगह 11, दूसरे अंक की जगह 13 को उठाकर रख दिया। तीसरे अंक की जगह शैफाली ने जैसे ही 9 को 6 बनाकर रखा, तुरंत ब्रेन मशीन की हरी बत्ती जल उठी। 11 + 13 + 6 = 30

अब मशीन के एक स्थान से 6 टिकट निकल आये, जिसे शैफाली ने अपने हाथों में पकड़ा और सभी के साथ भागकर ट्रेन के पास पहुंच गई।

ट्रेन के द्वार पर एक स्कैनर लगा था, उस स्कैनर में टिकट को स्कैन करते ही ट्रेन का दरवाजा खुल गया।

सभी अंदर प्रवेश करके, एक ओर लगी 6 कुर्सियों पर बैठ गये।

"कैप्टेन अगर हमारे साथ शैफाली ना होती, तो इस द्वार को नहीं पार किया जा सकता था?" तौफीक ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

"कैश्वर ने सभी द्वार को किसी ना किसी की क्षमताओं को देखकर बनाया है, तो फिर यदि हममें से एक भी हमारे साथ ना होता, तो पूरा तिलिस्मा ही पार नहीं किया जा सकता था।” सुयश ने कहा- “और शायद यह विधि का विधान है, यानि हमारा इस तिलिस्मा में प्रवेश करना, एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि ये समझो कि हम तिलिस्मा तोड़ने के लिये ही पैदा हुए हैं।"

सभी बातें कर रहे थे और उधर शैफाली ट्रेन से बाहर की ओर देख रही थी, पर ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि शैफाली को कुछ नजर नहीं आ रहा था।

कुछ ही देर में ट्रेन एक स्टेशन पर जा कर रुकी। सभी ट्रेन से उतरकर नीचे आ गये।

नीचे प्लेटफार्म पर एक ओर लिखा हुआ था अश्रुधारा स्टेशन।"

जैसे ही सभी ट्रेन से उतरे, ट्रेन अपनी जगह से आगे चली गई। तभी सुयश की नजर स्टेशन के बाहर निकलने वाले द्वार की ओर गई।

सुयश ने इशारे से सभी को उस दिशा में चलने के लिये कहा।

स्टेशन के उस द्वार से निकलने के बाद, सभी एक ऐसे स्थान पर पहुंच गये, जहां कि एक बहुत सुंदर स्वीमिंग पूल बना था। स्वीमिंग पूल का पानी काफी साफ दिख रहा था।

शैफाली ने आगे बढ़कर उस स्वीमिंग पूल के पानी को थोड़ा सा अपनी अंजली में लिया और मुंह से लगा कर देखा।

“यही है लैक्राइमल ग्लैंड।” शैफाली ने कहा- “यह आँसुओं का स्वीमिंग पूल है, इस पानी में नमक की काफी ज्यादा मात्रा है। इसका मतलब इसके अंदर से, कोई ना कोई पाइप आँखों तक अवश्य जाता होगा? पर यह पता लगाने के लिये मुझे इसके अंदर जाना होगा।"

यह कहकर शैफाली ने सुयश की ओर देखा। सुयश ने धीरे से अपना सिर हिलाकर शैफाली को स्वीमिंग पूल के अंदर जाने की आज्ञा दे दी।

अब शैफाली ने बिना देर किये, स्वीमिंग पूल में छलांग लगा दी। शैफाली तैरती हुई स्वीमिंग पूल के तली की ओर बढ़ी, जहां एक 5 फुट मोटा पाइप उसे दिखाई दिया। शैफाली बिना डरे उस पाइप में प्रवेश कर गई।

पाइप के अंत में शैफाली को एक ढक्कन सा लगा दिखाई दिया, जो कि बंद था। शैफाली ने उस ढक्कन को पकड़ कर उठा दिया। ढक्कन हटते ही स्वीमिंग पूल का सारा पानी एक बहाव के साथ पाइप से होकर नीचे की ओर जाने लगा।

शैफाली भी उस पानी के साथ बहकर, आँखों की कोर वाले उसी स्थान पर पहुंच गई, जहां से उसने इस द्वार की शुरुआत की थी।

चूंकि आँसुओं का बहाव बहुत तेज था, इसलिये शैफाली ने एक खंभे को जोर से पकड़ रखा था।

कुछ ही देर में सभी आँसू आँखों की कोर से बाहर निकल गये।

तभी शैफाली को उसी रास्ते से सुयश सहित सभी आते दिखाई दिये।

अब कार्निया पर जमा चिपचिपा पदार्थ पूरी तरह से साफ हो गया था।

"इस द्वार का सारा कार्य तो समाप्त हो गया, फिर इससे बाहर निकलने का दरवाजा कहां है?" ऐलेक्स ने कहा।

तभी शैफाली की निगाह आँख की कोर से जुड़ी 'लैक्राइमल पंक्टा' की ओर गई। जहां पर एक द्वार दिखाई दे रहा था, जिस पर 5.2 लिखा हुआ था।

"मुझे लगता है कि हमें इस द्वार से नाक की ओर जाना होगा?" शैफाली ने कहा- “वही हमारा तिलिस्मा का अगला द्वार है।"

"हे भगवान! अब आँख के बाद नाक में जाना होगा।” ऐलेक्स ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा- “तेरा बेड़ा गर्क हो कैश्वर तुझे कोई और द्वार ना मिला, तिलिस्मा में बनाने को।”

सभी अब शैफाली के साथ उस द्वार की ओर बढ़ गये।

जारी रहेगा_____✍️

Kya gazab ki update post ki he Raj_sharma Bhai

Eye Specialist wali padhayi karwa di aapne to is dwar me.........

Ab agla number ENT ka he............

Keep rocking Bro
 

Raj_sharma

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Kya gazab ki update post ki he Raj_sharma Bhai

Eye Specialist wali padhayi karwa di aapne to is dwar me.........

Ab agla number ENT ka he............

Keep rocking Bro
Poora Dr. Bana kar chhodunga sabko :bigboss:
Thank you so much for your valuable review and support bhai :thanks:
 

dhparikh

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#191.

एक बार फिर से ब्रेन मशीन ने अगला प्रश्न कर लिया, पर इस बार प्रश्न को पूछने की जगह पर वह प्रश्न स्क्रीन पर दिखाई दिया
A+T+8=?

इस प्रश्न को देख सभी ने तुरंत अंग्रेजी के अक्षरों को नंबरों से मैच कराते हुए, A को 1 मानकर और T को 20 मानकर उत्तर 29 बता दिया, पर सुयश ने जैसे ही शैफाली की ओर देखा, तो शैफाली ने सुयश को उत्तर 88 बताया।

अब सभी फिर से आश्चर्य से शैफाली की ओर देख रहे थे क्यों कि इस प्रकार के प्रश्न तो सभी ने पहले से कर रखे थे, पर उन्हें शैफाली के उत्तर का लॉजिक समझ में नहीं आ रहा था।

अभी कुछ समय बाकी था इसलिये शैफाली ने उन्हें समझाया- “हमें A और T को गणित के नंबरों से नहीं मिलाना, बल्कि उसे उच्चारण पर ध्यान देना है। इस प्रकार से A का उच्चारण ‘ए' और T का उच्चारण 'टी' होगा, तो अगर इन सभी को जोड़ें, तो पूरा उच्चारण होगा- एटीएट। यानि की '88"

सुयश ने जल्दी से मशीन पर 88 टाइप कर दिया, पर शैफाली का लॉजिक सुनकर सभी को अपने ऊपर हंसी आ गई।

अब सभी पुनः अगले प्रश्न के लिये ऊपर मशीन की ओर देखने लगे। अब ब्रेन मशीन ने दसवां प्रश्न पूछा
“जन्म हुआ रात में, सुबह हुआ जवान, एक दिन के जीवन में सबको बांटा ज्ञान।"

“यह प्रश्न कुछ पेचीदा लग रहा है?” क्रिस्टी ने कहा- “ऐसा कौन हो सकता है, जो एक रात में ही जवान हो जाए?"

"हमें ब्रेन मशीन के शब्दों पर नहीं, बल्कि उन शब्दों के सार पर ध्यान देना होगा।” सुयश ने क्रिस्टी को देखते हुए कहा- “क्यों कि पिछले सभी प्रश्न मशीन ने इसी प्रकार से पूछे हैं।”

आखिरकार शैफाली ने इस प्रश्न को भी हल कर ही लिया- “कैप्टेन अंकल, इस प्रश्न का उत्तर है न्यूजपेपर।”

सुयश ने उत्तर सुनकर मुस्कुरा कर शैफाली की ओर देखा और फिर स्क्रीन पर इस शब्द को टाइप कर दिया। पुनः उत्तर सही था।

अब बस 2 प्रश्न ही बचे थे। तभी ब्रेन मशीन ने ग्यारहवां प्रश्न पूछ लिया-
"सुबह में चार पैर, दोपहर में दो, शाम को तीन पैर, फिर जाता है सो।"

“यह कैसा प्रश्न है?” इस बार शैफाली भी चकरा गई- “इस प्रकार की कोई जीवित चीज तो पृथ्वी पर नहीं हो सकती?"

अब जब शैफाली ही इस पहेली को नहीं समझ पा रही थी तो बाकी के लोगों का मोरल तो वैसे ही डाउन हो गया।

पर सुयश अभी भी सोचता जा रहा था। वक्त का पहिया धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे की ओर बढ़ा रहा था, पर सुयश का दिमाग इस समय वक्त के पहिये से थोड़ा सा तेज चल रहा था, क्यों कि अब उसके चेहरे पर एक मुस्कान दिखाई देने लगी, जो इस बात का द्योतक थी कि सुयश को इस प्रश्न का उत्तर मिल गया है।

चूंकि समय ज्यादा नहीं बचा था, इसलिये सुयश ने पहले उत्तर को, की-बोर्ड पर टाइप कर इन्टर का बटन दबा दिया और फिर बिना हरी लाइट को देखे घूम कर सबको उत्तर समझाने लगा।

"उत्तर था मनुष्य....यहां बचपन को सुबह के समान माना गया है और बचपन में बालक अपने हाथों व घुटनों के बल चलता है, यानि की अपने 4 पैरों पर। फिर जवानी में यानि दोपहर में 2 पैरों पर चलता है और बाद में बुढ़ापे में यानि की शाम को, डंडे का सहारा लेकर तीन पैरों पर चलता है। इसके बाद उसके सोने का मतलब मृत्यु से था।"

इस वास्तव में यह प्रश्न अत्यंत कठिन था, क्यों कि प्रश्न का सार बहुत ही दुष्कर था।

सबको समझाने के बाद सुयश ने पीछे पलटकर मशीन की ओर देखा। मशीन पर हरी बत्ती ही जल रही थी। अब मात्र एक प्रश्न बचा था।

तभी वह आखिरी प्रश्न भी ब्रेन मशीन ने पूछ लिया, पर यह आखिरी प्रश्न एक बार फिर मशीन की स्क्रीन पर चमकने लगा।

पर भलाई ये थी कि इस बार टाइमर नहीं चल रहा था। स्क्रीन पर इस समय कुछ नंबर दिखाई दे रहे थे-1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15

और लिखा था- ऊपर दिये किन्हीं 3 नंबरों को इस प्रकार जोड़ो कि उत्तर 30 आये और नीचे उन तीन डिजिट की जगह खाली थी। _+_+_ = 30


“इम्पासिबल!" शैफाली ने देखते ही बोल दिया “कैप्टेन अंकल, आपको याद होगा कि मैंने आपसे एक बार इसी तिलिस्मा में 30 कबूतरों को उड़ाने वाला प्रश्न पूछा था, जिसका कोई उत्तर नहीं था, यह प्रश्न भी उसी प्रकार से है। ध्यान से देखिये, ऊपर लिखे सभी नंबर 'विषम' हैं और गणित का नियम ये कहता है कि किसी भी तीन विषम संख्याओं को जोड़कर, कभी भी एक 'सम' संख्या नहीं बनाई जा सकती है। इसलिये मेरे हिसाब से इस प्रश्न का उत्तर संभव ही नहीं है।"

“ध्यान से सोचो शैफाली, शायद हर प्रश्न की ही भांति कैश्वर ने इस प्रश्न में भी कोई ट्रिक लगा रखी हो?" सुयश ने कहा- “और यह बात ध्यान रखना कि अगर तुम इस गणित के प्रश्न को हल नहीं कर पाई, तो हममें से कोई भी नहीं कर पायेगा? सोचो तिलिस्मा में कैश्वर हमें कभी भी ऐसी कोई पहेली नहीं देगा, जिसका कि कोई उत्तर ही ना हो? और ये भी ध्यान रखो कि यह प्रश्न अत्यंत कठिन है, इसीलिये कैश्वर ने इस प्रश्न में टाइमर नहीं रखा है। इसलिये तुम्हारे पास इस प्रश्न को सोचने के लिये पर्याप्त समय है।"

सुयश के इतने शब्द ही, शैफाली के दिमाग में नयी ऊर्जा का संचार कर गये, उसने फिर से अपना दिमाग लगाना शुरु कर दिया।

काफी देर तक सोचने के बाद भी शैफाली को उत्तर समझ में नहीं आया, इसलिये वह अब ब्रेन मशीन की स्क्रीन के पास आकर देखने लगी।

कुछ सोच शैफाली ने स्क्रीन के ऊपर लिखे गणित के अंको को हाथ से छुआ। वह स्क्रीन टच स्क्रीन की भांति काम कर रही थी।

यह देख शैफाली ने सभी अंकों को हाथ लगाकर देखना शुरु कर दिया, पर जैसे ही शैफाली ने 9 अंक को हाथ लगाया, वह तुरंत घूमकर 6 में बदल गया।

यह देख शैफाली के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

अब उसने पहले अंक की जगह 11, दूसरे अंक की जगह 13 को उठाकर रख दिया। तीसरे अंक की जगह शैफाली ने जैसे ही 9 को 6 बनाकर रखा, तुरंत ब्रेन मशीन की हरी बत्ती जल उठी। 11 + 13 + 6 = 30

अब मशीन के एक स्थान से 6 टिकट निकल आये, जिसे शैफाली ने अपने हाथों में पकड़ा और सभी के साथ भागकर ट्रेन के पास पहुंच गई।

ट्रेन के द्वार पर एक स्कैनर लगा था, उस स्कैनर में टिकट को स्कैन करते ही ट्रेन का दरवाजा खुल गया।

सभी अंदर प्रवेश करके, एक ओर लगी 6 कुर्सियों पर बैठ गये।

"कैप्टेन अगर हमारे साथ शैफाली ना होती, तो इस द्वार को नहीं पार किया जा सकता था?" तौफीक ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

"कैश्वर ने सभी द्वार को किसी ना किसी की क्षमताओं को देखकर बनाया है, तो फिर यदि हममें से एक भी हमारे साथ ना होता, तो पूरा तिलिस्मा ही पार नहीं किया जा सकता था।” सुयश ने कहा- “और शायद यह विधि का विधान है, यानि हमारा इस तिलिस्मा में प्रवेश करना, एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि ये समझो कि हम तिलिस्मा तोड़ने के लिये ही पैदा हुए हैं।"

सभी बातें कर रहे थे और उधर शैफाली ट्रेन से बाहर की ओर देख रही थी, पर ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि शैफाली को कुछ नजर नहीं आ रहा था।

कुछ ही देर में ट्रेन एक स्टेशन पर जा कर रुकी। सभी ट्रेन से उतरकर नीचे आ गये।

नीचे प्लेटफार्म पर एक ओर लिखा हुआ था अश्रुधारा स्टेशन।"

जैसे ही सभी ट्रेन से उतरे, ट्रेन अपनी जगह से आगे चली गई। तभी सुयश की नजर स्टेशन के बाहर निकलने वाले द्वार की ओर गई।

सुयश ने इशारे से सभी को उस दिशा में चलने के लिये कहा।

स्टेशन के उस द्वार से निकलने के बाद, सभी एक ऐसे स्थान पर पहुंच गये, जहां कि एक बहुत सुंदर स्वीमिंग पूल बना था। स्वीमिंग पूल का पानी काफी साफ दिख रहा था।

शैफाली ने आगे बढ़कर उस स्वीमिंग पूल के पानी को थोड़ा सा अपनी अंजली में लिया और मुंह से लगा कर देखा।

“यही है लैक्राइमल ग्लैंड।” शैफाली ने कहा- “यह आँसुओं का स्वीमिंग पूल है, इस पानी में नमक की काफी ज्यादा मात्रा है। इसका मतलब इसके अंदर से, कोई ना कोई पाइप आँखों तक अवश्य जाता होगा? पर यह पता लगाने के लिये मुझे इसके अंदर जाना होगा।"

यह कहकर शैफाली ने सुयश की ओर देखा। सुयश ने धीरे से अपना सिर हिलाकर शैफाली को स्वीमिंग पूल के अंदर जाने की आज्ञा दे दी।

अब शैफाली ने बिना देर किये, स्वीमिंग पूल में छलांग लगा दी। शैफाली तैरती हुई स्वीमिंग पूल के तली की ओर बढ़ी, जहां एक 5 फुट मोटा पाइप उसे दिखाई दिया। शैफाली बिना डरे उस पाइप में प्रवेश कर गई।

पाइप के अंत में शैफाली को एक ढक्कन सा लगा दिखाई दिया, जो कि बंद था। शैफाली ने उस ढक्कन को पकड़ कर उठा दिया। ढक्कन हटते ही स्वीमिंग पूल का सारा पानी एक बहाव के साथ पाइप से होकर नीचे की ओर जाने लगा।

शैफाली भी उस पानी के साथ बहकर, आँखों की कोर वाले उसी स्थान पर पहुंच गई, जहां से उसने इस द्वार की शुरुआत की थी।

चूंकि आँसुओं का बहाव बहुत तेज था, इसलिये शैफाली ने एक खंभे को जोर से पकड़ रखा था।

कुछ ही देर में सभी आँसू आँखों की कोर से बाहर निकल गये।

तभी शैफाली को उसी रास्ते से सुयश सहित सभी आते दिखाई दिये।

अब कार्निया पर जमा चिपचिपा पदार्थ पूरी तरह से साफ हो गया था।

"इस द्वार का सारा कार्य तो समाप्त हो गया, फिर इससे बाहर निकलने का दरवाजा कहां है?" ऐलेक्स ने कहा।

तभी शैफाली की निगाह आँख की कोर से जुड़ी 'लैक्राइमल पंक्टा' की ओर गई। जहां पर एक द्वार दिखाई दे रहा था, जिस पर 5.2 लिखा हुआ था।

"मुझे लगता है कि हमें इस द्वार से नाक की ओर जाना होगा?" शैफाली ने कहा- “वही हमारा तिलिस्मा का अगला द्वार है।"

"हे भगवान! अब आँख के बाद नाक में जाना होगा।” ऐलेक्स ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा- “तेरा बेड़ा गर्क हो कैश्वर तुझे कोई और द्वार ना मिला, तिलिस्मा में बनाने को।”

सभी अब शैफाली के साथ उस द्वार की ओर बढ़ गये।

जारी रहेगा_____✍️
Nice update....
 

Dhakad boy

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#191.

एक बार फिर से ब्रेन मशीन ने अगला प्रश्न कर लिया, पर इस बार प्रश्न को पूछने की जगह पर वह प्रश्न स्क्रीन पर दिखाई दिया
A+T+8=?

इस प्रश्न को देख सभी ने तुरंत अंग्रेजी के अक्षरों को नंबरों से मैच कराते हुए, A को 1 मानकर और T को 20 मानकर उत्तर 29 बता दिया, पर सुयश ने जैसे ही शैफाली की ओर देखा, तो शैफाली ने सुयश को उत्तर 88 बताया।

अब सभी फिर से आश्चर्य से शैफाली की ओर देख रहे थे क्यों कि इस प्रकार के प्रश्न तो सभी ने पहले से कर रखे थे, पर उन्हें शैफाली के उत्तर का लॉजिक समझ में नहीं आ रहा था।

अभी कुछ समय बाकी था इसलिये शैफाली ने उन्हें समझाया- “हमें A और T को गणित के नंबरों से नहीं मिलाना, बल्कि उसे उच्चारण पर ध्यान देना है। इस प्रकार से A का उच्चारण ‘ए' और T का उच्चारण 'टी' होगा, तो अगर इन सभी को जोड़ें, तो पूरा उच्चारण होगा- एटीएट। यानि की '88"

सुयश ने जल्दी से मशीन पर 88 टाइप कर दिया, पर शैफाली का लॉजिक सुनकर सभी को अपने ऊपर हंसी आ गई।

अब सभी पुनः अगले प्रश्न के लिये ऊपर मशीन की ओर देखने लगे। अब ब्रेन मशीन ने दसवां प्रश्न पूछा
“जन्म हुआ रात में, सुबह हुआ जवान, एक दिन के जीवन में सबको बांटा ज्ञान।"

“यह प्रश्न कुछ पेचीदा लग रहा है?” क्रिस्टी ने कहा- “ऐसा कौन हो सकता है, जो एक रात में ही जवान हो जाए?"

"हमें ब्रेन मशीन के शब्दों पर नहीं, बल्कि उन शब्दों के सार पर ध्यान देना होगा।” सुयश ने क्रिस्टी को देखते हुए कहा- “क्यों कि पिछले सभी प्रश्न मशीन ने इसी प्रकार से पूछे हैं।”

आखिरकार शैफाली ने इस प्रश्न को भी हल कर ही लिया- “कैप्टेन अंकल, इस प्रश्न का उत्तर है न्यूजपेपर।”

सुयश ने उत्तर सुनकर मुस्कुरा कर शैफाली की ओर देखा और फिर स्क्रीन पर इस शब्द को टाइप कर दिया। पुनः उत्तर सही था।

अब बस 2 प्रश्न ही बचे थे। तभी ब्रेन मशीन ने ग्यारहवां प्रश्न पूछ लिया-
"सुबह में चार पैर, दोपहर में दो, शाम को तीन पैर, फिर जाता है सो।"

“यह कैसा प्रश्न है?” इस बार शैफाली भी चकरा गई- “इस प्रकार की कोई जीवित चीज तो पृथ्वी पर नहीं हो सकती?"

अब जब शैफाली ही इस पहेली को नहीं समझ पा रही थी तो बाकी के लोगों का मोरल तो वैसे ही डाउन हो गया।

पर सुयश अभी भी सोचता जा रहा था। वक्त का पहिया धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे की ओर बढ़ा रहा था, पर सुयश का दिमाग इस समय वक्त के पहिये से थोड़ा सा तेज चल रहा था, क्यों कि अब उसके चेहरे पर एक मुस्कान दिखाई देने लगी, जो इस बात का द्योतक थी कि सुयश को इस प्रश्न का उत्तर मिल गया है।

चूंकि समय ज्यादा नहीं बचा था, इसलिये सुयश ने पहले उत्तर को, की-बोर्ड पर टाइप कर इन्टर का बटन दबा दिया और फिर बिना हरी लाइट को देखे घूम कर सबको उत्तर समझाने लगा।

"उत्तर था मनुष्य....यहां बचपन को सुबह के समान माना गया है और बचपन में बालक अपने हाथों व घुटनों के बल चलता है, यानि की अपने 4 पैरों पर। फिर जवानी में यानि दोपहर में 2 पैरों पर चलता है और बाद में बुढ़ापे में यानि की शाम को, डंडे का सहारा लेकर तीन पैरों पर चलता है। इसके बाद उसके सोने का मतलब मृत्यु से था।"

इस वास्तव में यह प्रश्न अत्यंत कठिन था, क्यों कि प्रश्न का सार बहुत ही दुष्कर था।

सबको समझाने के बाद सुयश ने पीछे पलटकर मशीन की ओर देखा। मशीन पर हरी बत्ती ही जल रही थी। अब मात्र एक प्रश्न बचा था।

तभी वह आखिरी प्रश्न भी ब्रेन मशीन ने पूछ लिया, पर यह आखिरी प्रश्न एक बार फिर मशीन की स्क्रीन पर चमकने लगा।

पर भलाई ये थी कि इस बार टाइमर नहीं चल रहा था। स्क्रीन पर इस समय कुछ नंबर दिखाई दे रहे थे-1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15

और लिखा था- ऊपर दिये किन्हीं 3 नंबरों को इस प्रकार जोड़ो कि उत्तर 30 आये और नीचे उन तीन डिजिट की जगह खाली थी। _+_+_ = 30


“इम्पासिबल!" शैफाली ने देखते ही बोल दिया “कैप्टेन अंकल, आपको याद होगा कि मैंने आपसे एक बार इसी तिलिस्मा में 30 कबूतरों को उड़ाने वाला प्रश्न पूछा था, जिसका कोई उत्तर नहीं था, यह प्रश्न भी उसी प्रकार से है। ध्यान से देखिये, ऊपर लिखे सभी नंबर 'विषम' हैं और गणित का नियम ये कहता है कि किसी भी तीन विषम संख्याओं को जोड़कर, कभी भी एक 'सम' संख्या नहीं बनाई जा सकती है। इसलिये मेरे हिसाब से इस प्रश्न का उत्तर संभव ही नहीं है।"

“ध्यान से सोचो शैफाली, शायद हर प्रश्न की ही भांति कैश्वर ने इस प्रश्न में भी कोई ट्रिक लगा रखी हो?" सुयश ने कहा- “और यह बात ध्यान रखना कि अगर तुम इस गणित के प्रश्न को हल नहीं कर पाई, तो हममें से कोई भी नहीं कर पायेगा? सोचो तिलिस्मा में कैश्वर हमें कभी भी ऐसी कोई पहेली नहीं देगा, जिसका कि कोई उत्तर ही ना हो? और ये भी ध्यान रखो कि यह प्रश्न अत्यंत कठिन है, इसीलिये कैश्वर ने इस प्रश्न में टाइमर नहीं रखा है। इसलिये तुम्हारे पास इस प्रश्न को सोचने के लिये पर्याप्त समय है।"

सुयश के इतने शब्द ही, शैफाली के दिमाग में नयी ऊर्जा का संचार कर गये, उसने फिर से अपना दिमाग लगाना शुरु कर दिया।

काफी देर तक सोचने के बाद भी शैफाली को उत्तर समझ में नहीं आया, इसलिये वह अब ब्रेन मशीन की स्क्रीन के पास आकर देखने लगी।

कुछ सोच शैफाली ने स्क्रीन के ऊपर लिखे गणित के अंको को हाथ से छुआ। वह स्क्रीन टच स्क्रीन की भांति काम कर रही थी।

यह देख शैफाली ने सभी अंकों को हाथ लगाकर देखना शुरु कर दिया, पर जैसे ही शैफाली ने 9 अंक को हाथ लगाया, वह तुरंत घूमकर 6 में बदल गया।

यह देख शैफाली के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

अब उसने पहले अंक की जगह 11, दूसरे अंक की जगह 13 को उठाकर रख दिया। तीसरे अंक की जगह शैफाली ने जैसे ही 9 को 6 बनाकर रखा, तुरंत ब्रेन मशीन की हरी बत्ती जल उठी। 11 + 13 + 6 = 30

अब मशीन के एक स्थान से 6 टिकट निकल आये, जिसे शैफाली ने अपने हाथों में पकड़ा और सभी के साथ भागकर ट्रेन के पास पहुंच गई।

ट्रेन के द्वार पर एक स्कैनर लगा था, उस स्कैनर में टिकट को स्कैन करते ही ट्रेन का दरवाजा खुल गया।

सभी अंदर प्रवेश करके, एक ओर लगी 6 कुर्सियों पर बैठ गये।

"कैप्टेन अगर हमारे साथ शैफाली ना होती, तो इस द्वार को नहीं पार किया जा सकता था?" तौफीक ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

"कैश्वर ने सभी द्वार को किसी ना किसी की क्षमताओं को देखकर बनाया है, तो फिर यदि हममें से एक भी हमारे साथ ना होता, तो पूरा तिलिस्मा ही पार नहीं किया जा सकता था।” सुयश ने कहा- “और शायद यह विधि का विधान है, यानि हमारा इस तिलिस्मा में प्रवेश करना, एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि ये समझो कि हम तिलिस्मा तोड़ने के लिये ही पैदा हुए हैं।"

सभी बातें कर रहे थे और उधर शैफाली ट्रेन से बाहर की ओर देख रही थी, पर ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि शैफाली को कुछ नजर नहीं आ रहा था।

कुछ ही देर में ट्रेन एक स्टेशन पर जा कर रुकी। सभी ट्रेन से उतरकर नीचे आ गये।

नीचे प्लेटफार्म पर एक ओर लिखा हुआ था अश्रुधारा स्टेशन।"

जैसे ही सभी ट्रेन से उतरे, ट्रेन अपनी जगह से आगे चली गई। तभी सुयश की नजर स्टेशन के बाहर निकलने वाले द्वार की ओर गई।

सुयश ने इशारे से सभी को उस दिशा में चलने के लिये कहा।

स्टेशन के उस द्वार से निकलने के बाद, सभी एक ऐसे स्थान पर पहुंच गये, जहां कि एक बहुत सुंदर स्वीमिंग पूल बना था। स्वीमिंग पूल का पानी काफी साफ दिख रहा था।

शैफाली ने आगे बढ़कर उस स्वीमिंग पूल के पानी को थोड़ा सा अपनी अंजली में लिया और मुंह से लगा कर देखा।

“यही है लैक्राइमल ग्लैंड।” शैफाली ने कहा- “यह आँसुओं का स्वीमिंग पूल है, इस पानी में नमक की काफी ज्यादा मात्रा है। इसका मतलब इसके अंदर से, कोई ना कोई पाइप आँखों तक अवश्य जाता होगा? पर यह पता लगाने के लिये मुझे इसके अंदर जाना होगा।"

यह कहकर शैफाली ने सुयश की ओर देखा। सुयश ने धीरे से अपना सिर हिलाकर शैफाली को स्वीमिंग पूल के अंदर जाने की आज्ञा दे दी।

अब शैफाली ने बिना देर किये, स्वीमिंग पूल में छलांग लगा दी। शैफाली तैरती हुई स्वीमिंग पूल के तली की ओर बढ़ी, जहां एक 5 फुट मोटा पाइप उसे दिखाई दिया। शैफाली बिना डरे उस पाइप में प्रवेश कर गई।

पाइप के अंत में शैफाली को एक ढक्कन सा लगा दिखाई दिया, जो कि बंद था। शैफाली ने उस ढक्कन को पकड़ कर उठा दिया। ढक्कन हटते ही स्वीमिंग पूल का सारा पानी एक बहाव के साथ पाइप से होकर नीचे की ओर जाने लगा।

शैफाली भी उस पानी के साथ बहकर, आँखों की कोर वाले उसी स्थान पर पहुंच गई, जहां से उसने इस द्वार की शुरुआत की थी।

चूंकि आँसुओं का बहाव बहुत तेज था, इसलिये शैफाली ने एक खंभे को जोर से पकड़ रखा था।

कुछ ही देर में सभी आँसू आँखों की कोर से बाहर निकल गये।

तभी शैफाली को उसी रास्ते से सुयश सहित सभी आते दिखाई दिये।

अब कार्निया पर जमा चिपचिपा पदार्थ पूरी तरह से साफ हो गया था।

"इस द्वार का सारा कार्य तो समाप्त हो गया, फिर इससे बाहर निकलने का दरवाजा कहां है?" ऐलेक्स ने कहा।

तभी शैफाली की निगाह आँख की कोर से जुड़ी 'लैक्राइमल पंक्टा' की ओर गई। जहां पर एक द्वार दिखाई दे रहा था, जिस पर 5.2 लिखा हुआ था।

"मुझे लगता है कि हमें इस द्वार से नाक की ओर जाना होगा?" शैफाली ने कहा- “वही हमारा तिलिस्मा का अगला द्वार है।"

"हे भगवान! अब आँख के बाद नाक में जाना होगा।” ऐलेक्स ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा- “तेरा बेड़ा गर्क हो कैश्वर तुझे कोई और द्वार ना मिला, तिलिस्मा में बनाने को।”

सभी अब शैफाली के साथ उस द्वार की ओर बढ़ गये।

जारी रहेगा_____✍️
Bhut hi badhiya update Bhai
Aankhon ki bhut jankari pad li ab lagta hai naak ke bare me jankari milegi
 
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