dhalchandarun
[Death is the most beautiful thing.]
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Awesome update! Ye 30 sum wala jawab pata nahi maine kahan par suna tha, lekin jab logic samajh aaya tha ki 9 ko 6 banaya gaya hai toh thoda bura laga tha, A+T+8= , Shefali ne iska answer 88 isliye diya kyunki usne question ko dhyan se padha jabki kisi aur ne question ko sirf dekha, apne mann mein spell nahi kiya hoga, isliye kaha jata hai question ko ek baar achhe se padh lena chahiye tabhi sahi answer mil pata hai.#191.
एक बार फिर से ब्रेन मशीन ने अगला प्रश्न कर लिया, पर इस बार प्रश्न को पूछने की जगह पर वह प्रश्न स्क्रीन पर दिखाई दिया
A+T+8=?
इस प्रश्न को देख सभी ने तुरंत अंग्रेजी के अक्षरों को नंबरों से मैच कराते हुए, A को 1 मानकर और T को 20 मानकर उत्तर 29 बता दिया, पर सुयश ने जैसे ही शैफाली की ओर देखा, तो शैफाली ने सुयश को उत्तर 88 बताया।
अब सभी फिर से आश्चर्य से शैफाली की ओर देख रहे थे क्यों कि इस प्रकार के प्रश्न तो सभी ने पहले से कर रखे थे, पर उन्हें शैफाली के उत्तर का लॉजिक समझ में नहीं आ रहा था।
अभी कुछ समय बाकी था इसलिये शैफाली ने उन्हें समझाया- “हमें A और T को गणित के नंबरों से नहीं मिलाना, बल्कि उसे उच्चारण पर ध्यान देना है। इस प्रकार से A का उच्चारण ‘ए' और T का उच्चारण 'टी' होगा, तो अगर इन सभी को जोड़ें, तो पूरा उच्चारण होगा- एटीएट। यानि की '88"
सुयश ने जल्दी से मशीन पर 88 टाइप कर दिया, पर शैफाली का लॉजिक सुनकर सभी को अपने ऊपर हंसी आ गई।
अब सभी पुनः अगले प्रश्न के लिये ऊपर मशीन की ओर देखने लगे। अब ब्रेन मशीन ने दसवां प्रश्न पूछा
“जन्म हुआ रात में, सुबह हुआ जवान, एक दिन के जीवन में सबको बांटा ज्ञान।"
“यह प्रश्न कुछ पेचीदा लग रहा है?” क्रिस्टी ने कहा- “ऐसा कौन हो सकता है, जो एक रात में ही जवान हो जाए?"
"हमें ब्रेन मशीन के शब्दों पर नहीं, बल्कि उन शब्दों के सार पर ध्यान देना होगा।” सुयश ने क्रिस्टी को देखते हुए कहा- “क्यों कि पिछले सभी प्रश्न मशीन ने इसी प्रकार से पूछे हैं।”
आखिरकार शैफाली ने इस प्रश्न को भी हल कर ही लिया- “कैप्टेन अंकल, इस प्रश्न का उत्तर है न्यूजपेपर।”
सुयश ने उत्तर सुनकर मुस्कुरा कर शैफाली की ओर देखा और फिर स्क्रीन पर इस शब्द को टाइप कर दिया। पुनः उत्तर सही था।
अब बस 2 प्रश्न ही बचे थे। तभी ब्रेन मशीन ने ग्यारहवां प्रश्न पूछ लिया-
"सुबह में चार पैर, दोपहर में दो, शाम को तीन पैर, फिर जाता है सो।"
“यह कैसा प्रश्न है?” इस बार शैफाली भी चकरा गई- “इस प्रकार की कोई जीवित चीज तो पृथ्वी पर नहीं हो सकती?"
अब जब शैफाली ही इस पहेली को नहीं समझ पा रही थी तो बाकी के लोगों का मोरल तो वैसे ही डाउन हो गया।
पर सुयश अभी भी सोचता जा रहा था। वक्त का पहिया धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे की ओर बढ़ा रहा था, पर सुयश का दिमाग इस समय वक्त के पहिये से थोड़ा सा तेज चल रहा था, क्यों कि अब उसके चेहरे पर एक मुस्कान दिखाई देने लगी, जो इस बात का द्योतक थी कि सुयश को इस प्रश्न का उत्तर मिल गया है।
चूंकि समय ज्यादा नहीं बचा था, इसलिये सुयश ने पहले उत्तर को, की-बोर्ड पर टाइप कर इन्टर का बटन दबा दिया और फिर बिना हरी लाइट को देखे घूम कर सबको उत्तर समझाने लगा।
"उत्तर था मनुष्य....यहां बचपन को सुबह के समान माना गया है और बचपन में बालक अपने हाथों व घुटनों के बल चलता है, यानि की अपने 4 पैरों पर। फिर जवानी में यानि दोपहर में 2 पैरों पर चलता है और बाद में बुढ़ापे में यानि की शाम को, डंडे का सहारा लेकर तीन पैरों पर चलता है। इसके बाद उसके सोने का मतलब मृत्यु से था।"
इस वास्तव में यह प्रश्न अत्यंत कठिन था, क्यों कि प्रश्न का सार बहुत ही दुष्कर था।
सबको समझाने के बाद सुयश ने पीछे पलटकर मशीन की ओर देखा। मशीन पर हरी बत्ती ही जल रही थी। अब मात्र एक प्रश्न बचा था।
तभी वह आखिरी प्रश्न भी ब्रेन मशीन ने पूछ लिया, पर यह आखिरी प्रश्न एक बार फिर मशीन की स्क्रीन पर चमकने लगा।
पर भलाई ये थी कि इस बार टाइमर नहीं चल रहा था। स्क्रीन पर इस समय कुछ नंबर दिखाई दे रहे थे-1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15
और लिखा था- ऊपर दिये किन्हीं 3 नंबरों को इस प्रकार जोड़ो कि उत्तर 30 आये और नीचे उन तीन डिजिट की जगह खाली थी। _+_+_ = 30
“इम्पासिबल!" शैफाली ने देखते ही बोल दिया “कैप्टेन अंकल, आपको याद होगा कि मैंने आपसे एक बार इसी तिलिस्मा में 30 कबूतरों को उड़ाने वाला प्रश्न पूछा था, जिसका कोई उत्तर नहीं था, यह प्रश्न भी उसी प्रकार से है। ध्यान से देखिये, ऊपर लिखे सभी नंबर 'विषम' हैं और गणित का नियम ये कहता है कि किसी भी तीन विषम संख्याओं को जोड़कर, कभी भी एक 'सम' संख्या नहीं बनाई जा सकती है। इसलिये मेरे हिसाब से इस प्रश्न का उत्तर संभव ही नहीं है।"
“ध्यान से सोचो शैफाली, शायद हर प्रश्न की ही भांति कैश्वर ने इस प्रश्न में भी कोई ट्रिक लगा रखी हो?" सुयश ने कहा- “और यह बात ध्यान रखना कि अगर तुम इस गणित के प्रश्न को हल नहीं कर पाई, तो हममें से कोई भी नहीं कर पायेगा? सोचो तिलिस्मा में कैश्वर हमें कभी भी ऐसी कोई पहेली नहीं देगा, जिसका कि कोई उत्तर ही ना हो? और ये भी ध्यान रखो कि यह प्रश्न अत्यंत कठिन है, इसीलिये कैश्वर ने इस प्रश्न में टाइमर नहीं रखा है। इसलिये तुम्हारे पास इस प्रश्न को सोचने के लिये पर्याप्त समय है।"
सुयश के इतने शब्द ही, शैफाली के दिमाग में नयी ऊर्जा का संचार कर गये, उसने फिर से अपना दिमाग लगाना शुरु कर दिया।
काफी देर तक सोचने के बाद भी शैफाली को उत्तर समझ में नहीं आया, इसलिये वह अब ब्रेन मशीन की स्क्रीन के पास आकर देखने लगी।
कुछ सोच शैफाली ने स्क्रीन के ऊपर लिखे गणित के अंको को हाथ से छुआ। वह स्क्रीन टच स्क्रीन की भांति काम कर रही थी।
यह देख शैफाली ने सभी अंकों को हाथ लगाकर देखना शुरु कर दिया, पर जैसे ही शैफाली ने 9 अंक को हाथ लगाया, वह तुरंत घूमकर 6 में बदल गया।
यह देख शैफाली के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
अब उसने पहले अंक की जगह 11, दूसरे अंक की जगह 13 को उठाकर रख दिया। तीसरे अंक की जगह शैफाली ने जैसे ही 9 को 6 बनाकर रखा, तुरंत ब्रेन मशीन की हरी बत्ती जल उठी। 11 + 13 + 6 = 30
अब मशीन के एक स्थान से 6 टिकट निकल आये, जिसे शैफाली ने अपने हाथों में पकड़ा और सभी के साथ भागकर ट्रेन के पास पहुंच गई।
ट्रेन के द्वार पर एक स्कैनर लगा था, उस स्कैनर में टिकट को स्कैन करते ही ट्रेन का दरवाजा खुल गया।
सभी अंदर प्रवेश करके, एक ओर लगी 6 कुर्सियों पर बैठ गये।
"कैप्टेन अगर हमारे साथ शैफाली ना होती, तो इस द्वार को नहीं पार किया जा सकता था?" तौफीक ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।
"कैश्वर ने सभी द्वार को किसी ना किसी की क्षमताओं को देखकर बनाया है, तो फिर यदि हममें से एक भी हमारे साथ ना होता, तो पूरा तिलिस्मा ही पार नहीं किया जा सकता था।” सुयश ने कहा- “और शायद यह विधि का विधान है, यानि हमारा इस तिलिस्मा में प्रवेश करना, एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि ये समझो कि हम तिलिस्मा तोड़ने के लिये ही पैदा हुए हैं।"
सभी बातें कर रहे थे और उधर शैफाली ट्रेन से बाहर की ओर देख रही थी, पर ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि शैफाली को कुछ नजर नहीं आ रहा था।
कुछ ही देर में ट्रेन एक स्टेशन पर जा कर रुकी। सभी ट्रेन से उतरकर नीचे आ गये।
नीचे प्लेटफार्म पर एक ओर लिखा हुआ था अश्रुधारा स्टेशन।"
जैसे ही सभी ट्रेन से उतरे, ट्रेन अपनी जगह से आगे चली गई। तभी सुयश की नजर स्टेशन के बाहर निकलने वाले द्वार की ओर गई।
सुयश ने इशारे से सभी को उस दिशा में चलने के लिये कहा।
स्टेशन के उस द्वार से निकलने के बाद, सभी एक ऐसे स्थान पर पहुंच गये, जहां कि एक बहुत सुंदर स्वीमिंग पूल बना था। स्वीमिंग पूल का पानी काफी साफ दिख रहा था।
शैफाली ने आगे बढ़कर उस स्वीमिंग पूल के पानी को थोड़ा सा अपनी अंजली में लिया और मुंह से लगा कर देखा।
“यही है लैक्राइमल ग्लैंड।” शैफाली ने कहा- “यह आँसुओं का स्वीमिंग पूल है, इस पानी में नमक की काफी ज्यादा मात्रा है। इसका मतलब इसके अंदर से, कोई ना कोई पाइप आँखों तक अवश्य जाता होगा? पर यह पता लगाने के लिये मुझे इसके अंदर जाना होगा।"
यह कहकर शैफाली ने सुयश की ओर देखा। सुयश ने धीरे से अपना सिर हिलाकर शैफाली को स्वीमिंग पूल के अंदर जाने की आज्ञा दे दी।
अब शैफाली ने बिना देर किये, स्वीमिंग पूल में छलांग लगा दी। शैफाली तैरती हुई स्वीमिंग पूल के तली की ओर बढ़ी, जहां एक 5 फुट मोटा पाइप उसे दिखाई दिया। शैफाली बिना डरे उस पाइप में प्रवेश कर गई।
पाइप के अंत में शैफाली को एक ढक्कन सा लगा दिखाई दिया, जो कि बंद था। शैफाली ने उस ढक्कन को पकड़ कर उठा दिया। ढक्कन हटते ही स्वीमिंग पूल का सारा पानी एक बहाव के साथ पाइप से होकर नीचे की ओर जाने लगा।
शैफाली भी उस पानी के साथ बहकर, आँखों की कोर वाले उसी स्थान पर पहुंच गई, जहां से उसने इस द्वार की शुरुआत की थी।
चूंकि आँसुओं का बहाव बहुत तेज था, इसलिये शैफाली ने एक खंभे को जोर से पकड़ रखा था।
कुछ ही देर में सभी आँसू आँखों की कोर से बाहर निकल गये।
तभी शैफाली को उसी रास्ते से सुयश सहित सभी आते दिखाई दिये।
अब कार्निया पर जमा चिपचिपा पदार्थ पूरी तरह से साफ हो गया था।
"इस द्वार का सारा कार्य तो समाप्त हो गया, फिर इससे बाहर निकलने का दरवाजा कहां है?" ऐलेक्स ने कहा।
तभी शैफाली की निगाह आँख की कोर से जुड़ी 'लैक्राइमल पंक्टा' की ओर गई। जहां पर एक द्वार दिखाई दे रहा था, जिस पर 5.2 लिखा हुआ था।
"मुझे लगता है कि हमें इस द्वार से नाक की ओर जाना होगा?" शैफाली ने कहा- “वही हमारा तिलिस्मा का अगला द्वार है।"
"हे भगवान! अब आँख के बाद नाक में जाना होगा।” ऐलेक्स ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा- “तेरा बेड़ा गर्क हो कैश्वर तुझे कोई और द्वार ना मिला, तिलिस्मा में बनाने को।”
सभी अब शैफाली के साथ उस द्वार की ओर बढ़ गये।
जारी रहेगा_____![]()
Let's see aage ye sabhi aur kaun kaun si difficulties ko paar karte hain.



