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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

dhalchandarun

[Death is the most beautiful thing.]
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#191.

एक बार फिर से ब्रेन मशीन ने अगला प्रश्न कर लिया, पर इस बार प्रश्न को पूछने की जगह पर वह प्रश्न स्क्रीन पर दिखाई दिया
A+T+8=?

इस प्रश्न को देख सभी ने तुरंत अंग्रेजी के अक्षरों को नंबरों से मैच कराते हुए, A को 1 मानकर और T को 20 मानकर उत्तर 29 बता दिया, पर सुयश ने जैसे ही शैफाली की ओर देखा, तो शैफाली ने सुयश को उत्तर 88 बताया।

अब सभी फिर से आश्चर्य से शैफाली की ओर देख रहे थे क्यों कि इस प्रकार के प्रश्न तो सभी ने पहले से कर रखे थे, पर उन्हें शैफाली के उत्तर का लॉजिक समझ में नहीं आ रहा था।

अभी कुछ समय बाकी था इसलिये शैफाली ने उन्हें समझाया- “हमें A और T को गणित के नंबरों से नहीं मिलाना, बल्कि उसे उच्चारण पर ध्यान देना है। इस प्रकार से A का उच्चारण ‘ए' और T का उच्चारण 'टी' होगा, तो अगर इन सभी को जोड़ें, तो पूरा उच्चारण होगा- एटीएट। यानि की '88"

सुयश ने जल्दी से मशीन पर 88 टाइप कर दिया, पर शैफाली का लॉजिक सुनकर सभी को अपने ऊपर हंसी आ गई।

अब सभी पुनः अगले प्रश्न के लिये ऊपर मशीन की ओर देखने लगे। अब ब्रेन मशीन ने दसवां प्रश्न पूछा
“जन्म हुआ रात में, सुबह हुआ जवान, एक दिन के जीवन में सबको बांटा ज्ञान।"

“यह प्रश्न कुछ पेचीदा लग रहा है?” क्रिस्टी ने कहा- “ऐसा कौन हो सकता है, जो एक रात में ही जवान हो जाए?"

"हमें ब्रेन मशीन के शब्दों पर नहीं, बल्कि उन शब्दों के सार पर ध्यान देना होगा।” सुयश ने क्रिस्टी को देखते हुए कहा- “क्यों कि पिछले सभी प्रश्न मशीन ने इसी प्रकार से पूछे हैं।”

आखिरकार शैफाली ने इस प्रश्न को भी हल कर ही लिया- “कैप्टेन अंकल, इस प्रश्न का उत्तर है न्यूजपेपर।”

सुयश ने उत्तर सुनकर मुस्कुरा कर शैफाली की ओर देखा और फिर स्क्रीन पर इस शब्द को टाइप कर दिया। पुनः उत्तर सही था।

अब बस 2 प्रश्न ही बचे थे। तभी ब्रेन मशीन ने ग्यारहवां प्रश्न पूछ लिया-
"सुबह में चार पैर, दोपहर में दो, शाम को तीन पैर, फिर जाता है सो।"

“यह कैसा प्रश्न है?” इस बार शैफाली भी चकरा गई- “इस प्रकार की कोई जीवित चीज तो पृथ्वी पर नहीं हो सकती?"

अब जब शैफाली ही इस पहेली को नहीं समझ पा रही थी तो बाकी के लोगों का मोरल तो वैसे ही डाउन हो गया।

पर सुयश अभी भी सोचता जा रहा था। वक्त का पहिया धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे की ओर बढ़ा रहा था, पर सुयश का दिमाग इस समय वक्त के पहिये से थोड़ा सा तेज चल रहा था, क्यों कि अब उसके चेहरे पर एक मुस्कान दिखाई देने लगी, जो इस बात का द्योतक थी कि सुयश को इस प्रश्न का उत्तर मिल गया है।

चूंकि समय ज्यादा नहीं बचा था, इसलिये सुयश ने पहले उत्तर को, की-बोर्ड पर टाइप कर इन्टर का बटन दबा दिया और फिर बिना हरी लाइट को देखे घूम कर सबको उत्तर समझाने लगा।

"उत्तर था मनुष्य....यहां बचपन को सुबह के समान माना गया है और बचपन में बालक अपने हाथों व घुटनों के बल चलता है, यानि की अपने 4 पैरों पर। फिर जवानी में यानि दोपहर में 2 पैरों पर चलता है और बाद में बुढ़ापे में यानि की शाम को, डंडे का सहारा लेकर तीन पैरों पर चलता है। इसके बाद उसके सोने का मतलब मृत्यु से था।"

इस वास्तव में यह प्रश्न अत्यंत कठिन था, क्यों कि प्रश्न का सार बहुत ही दुष्कर था।

सबको समझाने के बाद सुयश ने पीछे पलटकर मशीन की ओर देखा। मशीन पर हरी बत्ती ही जल रही थी। अब मात्र एक प्रश्न बचा था।

तभी वह आखिरी प्रश्न भी ब्रेन मशीन ने पूछ लिया, पर यह आखिरी प्रश्न एक बार फिर मशीन की स्क्रीन पर चमकने लगा।

पर भलाई ये थी कि इस बार टाइमर नहीं चल रहा था। स्क्रीन पर इस समय कुछ नंबर दिखाई दे रहे थे-1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15

और लिखा था- ऊपर दिये किन्हीं 3 नंबरों को इस प्रकार जोड़ो कि उत्तर 30 आये और नीचे उन तीन डिजिट की जगह खाली थी। _+_+_ = 30


“इम्पासिबल!" शैफाली ने देखते ही बोल दिया “कैप्टेन अंकल, आपको याद होगा कि मैंने आपसे एक बार इसी तिलिस्मा में 30 कबूतरों को उड़ाने वाला प्रश्न पूछा था, जिसका कोई उत्तर नहीं था, यह प्रश्न भी उसी प्रकार से है। ध्यान से देखिये, ऊपर लिखे सभी नंबर 'विषम' हैं और गणित का नियम ये कहता है कि किसी भी तीन विषम संख्याओं को जोड़कर, कभी भी एक 'सम' संख्या नहीं बनाई जा सकती है। इसलिये मेरे हिसाब से इस प्रश्न का उत्तर संभव ही नहीं है।"

“ध्यान से सोचो शैफाली, शायद हर प्रश्न की ही भांति कैश्वर ने इस प्रश्न में भी कोई ट्रिक लगा रखी हो?" सुयश ने कहा- “और यह बात ध्यान रखना कि अगर तुम इस गणित के प्रश्न को हल नहीं कर पाई, तो हममें से कोई भी नहीं कर पायेगा? सोचो तिलिस्मा में कैश्वर हमें कभी भी ऐसी कोई पहेली नहीं देगा, जिसका कि कोई उत्तर ही ना हो? और ये भी ध्यान रखो कि यह प्रश्न अत्यंत कठिन है, इसीलिये कैश्वर ने इस प्रश्न में टाइमर नहीं रखा है। इसलिये तुम्हारे पास इस प्रश्न को सोचने के लिये पर्याप्त समय है।"

सुयश के इतने शब्द ही, शैफाली के दिमाग में नयी ऊर्जा का संचार कर गये, उसने फिर से अपना दिमाग लगाना शुरु कर दिया।

काफी देर तक सोचने के बाद भी शैफाली को उत्तर समझ में नहीं आया, इसलिये वह अब ब्रेन मशीन की स्क्रीन के पास आकर देखने लगी।

कुछ सोच शैफाली ने स्क्रीन के ऊपर लिखे गणित के अंको को हाथ से छुआ। वह स्क्रीन टच स्क्रीन की भांति काम कर रही थी।

यह देख शैफाली ने सभी अंकों को हाथ लगाकर देखना शुरु कर दिया, पर जैसे ही शैफाली ने 9 अंक को हाथ लगाया, वह तुरंत घूमकर 6 में बदल गया।

यह देख शैफाली के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

अब उसने पहले अंक की जगह 11, दूसरे अंक की जगह 13 को उठाकर रख दिया। तीसरे अंक की जगह शैफाली ने जैसे ही 9 को 6 बनाकर रखा, तुरंत ब्रेन मशीन की हरी बत्ती जल उठी। 11 + 13 + 6 = 30

अब मशीन के एक स्थान से 6 टिकट निकल आये, जिसे शैफाली ने अपने हाथों में पकड़ा और सभी के साथ भागकर ट्रेन के पास पहुंच गई।

ट्रेन के द्वार पर एक स्कैनर लगा था, उस स्कैनर में टिकट को स्कैन करते ही ट्रेन का दरवाजा खुल गया।

सभी अंदर प्रवेश करके, एक ओर लगी 6 कुर्सियों पर बैठ गये।

"कैप्टेन अगर हमारे साथ शैफाली ना होती, तो इस द्वार को नहीं पार किया जा सकता था?" तौफीक ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

"कैश्वर ने सभी द्वार को किसी ना किसी की क्षमताओं को देखकर बनाया है, तो फिर यदि हममें से एक भी हमारे साथ ना होता, तो पूरा तिलिस्मा ही पार नहीं किया जा सकता था।” सुयश ने कहा- “और शायद यह विधि का विधान है, यानि हमारा इस तिलिस्मा में प्रवेश करना, एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि ये समझो कि हम तिलिस्मा तोड़ने के लिये ही पैदा हुए हैं।"

सभी बातें कर रहे थे और उधर शैफाली ट्रेन से बाहर की ओर देख रही थी, पर ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि शैफाली को कुछ नजर नहीं आ रहा था।

कुछ ही देर में ट्रेन एक स्टेशन पर जा कर रुकी। सभी ट्रेन से उतरकर नीचे आ गये।

नीचे प्लेटफार्म पर एक ओर लिखा हुआ था अश्रुधारा स्टेशन।"

जैसे ही सभी ट्रेन से उतरे, ट्रेन अपनी जगह से आगे चली गई। तभी सुयश की नजर स्टेशन के बाहर निकलने वाले द्वार की ओर गई।

सुयश ने इशारे से सभी को उस दिशा में चलने के लिये कहा।

स्टेशन के उस द्वार से निकलने के बाद, सभी एक ऐसे स्थान पर पहुंच गये, जहां कि एक बहुत सुंदर स्वीमिंग पूल बना था। स्वीमिंग पूल का पानी काफी साफ दिख रहा था।

शैफाली ने आगे बढ़कर उस स्वीमिंग पूल के पानी को थोड़ा सा अपनी अंजली में लिया और मुंह से लगा कर देखा।

“यही है लैक्राइमल ग्लैंड।” शैफाली ने कहा- “यह आँसुओं का स्वीमिंग पूल है, इस पानी में नमक की काफी ज्यादा मात्रा है। इसका मतलब इसके अंदर से, कोई ना कोई पाइप आँखों तक अवश्य जाता होगा? पर यह पता लगाने के लिये मुझे इसके अंदर जाना होगा।"

यह कहकर शैफाली ने सुयश की ओर देखा। सुयश ने धीरे से अपना सिर हिलाकर शैफाली को स्वीमिंग पूल के अंदर जाने की आज्ञा दे दी।

अब शैफाली ने बिना देर किये, स्वीमिंग पूल में छलांग लगा दी। शैफाली तैरती हुई स्वीमिंग पूल के तली की ओर बढ़ी, जहां एक 5 फुट मोटा पाइप उसे दिखाई दिया। शैफाली बिना डरे उस पाइप में प्रवेश कर गई।

पाइप के अंत में शैफाली को एक ढक्कन सा लगा दिखाई दिया, जो कि बंद था। शैफाली ने उस ढक्कन को पकड़ कर उठा दिया। ढक्कन हटते ही स्वीमिंग पूल का सारा पानी एक बहाव के साथ पाइप से होकर नीचे की ओर जाने लगा।

शैफाली भी उस पानी के साथ बहकर, आँखों की कोर वाले उसी स्थान पर पहुंच गई, जहां से उसने इस द्वार की शुरुआत की थी।

चूंकि आँसुओं का बहाव बहुत तेज था, इसलिये शैफाली ने एक खंभे को जोर से पकड़ रखा था।

कुछ ही देर में सभी आँसू आँखों की कोर से बाहर निकल गये।

तभी शैफाली को उसी रास्ते से सुयश सहित सभी आते दिखाई दिये।

अब कार्निया पर जमा चिपचिपा पदार्थ पूरी तरह से साफ हो गया था।

"इस द्वार का सारा कार्य तो समाप्त हो गया, फिर इससे बाहर निकलने का दरवाजा कहां है?" ऐलेक्स ने कहा।

तभी शैफाली की निगाह आँख की कोर से जुड़ी 'लैक्राइमल पंक्टा' की ओर गई। जहां पर एक द्वार दिखाई दे रहा था, जिस पर 5.2 लिखा हुआ था।

"मुझे लगता है कि हमें इस द्वार से नाक की ओर जाना होगा?" शैफाली ने कहा- “वही हमारा तिलिस्मा का अगला द्वार है।"

"हे भगवान! अब आँख के बाद नाक में जाना होगा।” ऐलेक्स ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा- “तेरा बेड़ा गर्क हो कैश्वर तुझे कोई और द्वार ना मिला, तिलिस्मा में बनाने को।”

सभी अब शैफाली के साथ उस द्वार की ओर बढ़ गये।

जारी रहेगा_____✍️
Awesome update! Ye 30 sum wala jawab pata nahi maine kahan par suna tha, lekin jab logic samajh aaya tha ki 9 ko 6 banaya gaya hai toh thoda bura laga tha, A+T+8= , Shefali ne iska answer 88 isliye diya kyunki usne question ko dhyan se padha jabki kisi aur ne question ko sirf dekha, apne mann mein spell nahi kiya hoga, isliye kaha jata hai question ko ek baar achhe se padh lena chahiye tabhi sahi answer mil pata hai.
Let's see aage ye sabhi aur kaun kaun si difficulties ko paar karte hain.
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Bhut hi badhiya update Bhai
Aankhon ki bhut jankari pad li ab lagta hai naak ke bare me jankari milegi
Dekhte jao, aage bohot kuch milega dost :D
Thank you very much for your valuable review and support :thanks:
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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#191.

एक बार फिर से ब्रेन मशीन ने अगला प्रश्न कर लिया, पर इस बार प्रश्न को पूछने की जगह पर वह प्रश्न स्क्रीन पर दिखाई दिया
A+T+8=?

इस प्रश्न को देख सभी ने तुरंत अंग्रेजी के अक्षरों को नंबरों से मैच कराते हुए, A को 1 मानकर और T को 20 मानकर उत्तर 29 बता दिया, पर सुयश ने जैसे ही शैफाली की ओर देखा, तो शैफाली ने सुयश को उत्तर 88 बताया।

अब सभी फिर से आश्चर्य से शैफाली की ओर देख रहे थे क्यों कि इस प्रकार के प्रश्न तो सभी ने पहले से कर रखे थे, पर उन्हें शैफाली के उत्तर का लॉजिक समझ में नहीं आ रहा था।

अभी कुछ समय बाकी था इसलिये शैफाली ने उन्हें समझाया- “हमें A और T को गणित के नंबरों से नहीं मिलाना, बल्कि उसे उच्चारण पर ध्यान देना है। इस प्रकार से A का उच्चारण ‘ए' और T का उच्चारण 'टी' होगा, तो अगर इन सभी को जोड़ें, तो पूरा उच्चारण होगा- एटीएट। यानि की '88"

सुयश ने जल्दी से मशीन पर 88 टाइप कर दिया, पर शैफाली का लॉजिक सुनकर सभी को अपने ऊपर हंसी आ गई।

अब सभी पुनः अगले प्रश्न के लिये ऊपर मशीन की ओर देखने लगे। अब ब्रेन मशीन ने दसवां प्रश्न पूछा
“जन्म हुआ रात में, सुबह हुआ जवान, एक दिन के जीवन में सबको बांटा ज्ञान।"

“यह प्रश्न कुछ पेचीदा लग रहा है?” क्रिस्टी ने कहा- “ऐसा कौन हो सकता है, जो एक रात में ही जवान हो जाए?"

"हमें ब्रेन मशीन के शब्दों पर नहीं, बल्कि उन शब्दों के सार पर ध्यान देना होगा।” सुयश ने क्रिस्टी को देखते हुए कहा- “क्यों कि पिछले सभी प्रश्न मशीन ने इसी प्रकार से पूछे हैं।”

आखिरकार शैफाली ने इस प्रश्न को भी हल कर ही लिया- “कैप्टेन अंकल, इस प्रश्न का उत्तर है न्यूजपेपर।”

सुयश ने उत्तर सुनकर मुस्कुरा कर शैफाली की ओर देखा और फिर स्क्रीन पर इस शब्द को टाइप कर दिया। पुनः उत्तर सही था।

अब बस 2 प्रश्न ही बचे थे। तभी ब्रेन मशीन ने ग्यारहवां प्रश्न पूछ लिया-
"सुबह में चार पैर, दोपहर में दो, शाम को तीन पैर, फिर जाता है सो।"

“यह कैसा प्रश्न है?” इस बार शैफाली भी चकरा गई- “इस प्रकार की कोई जीवित चीज तो पृथ्वी पर नहीं हो सकती?"

अब जब शैफाली ही इस पहेली को नहीं समझ पा रही थी तो बाकी के लोगों का मोरल तो वैसे ही डाउन हो गया।

पर सुयश अभी भी सोचता जा रहा था। वक्त का पहिया धीरे-धीरे अपने कदमों को आगे की ओर बढ़ा रहा था, पर सुयश का दिमाग इस समय वक्त के पहिये से थोड़ा सा तेज चल रहा था, क्यों कि अब उसके चेहरे पर एक मुस्कान दिखाई देने लगी, जो इस बात का द्योतक थी कि सुयश को इस प्रश्न का उत्तर मिल गया है।

चूंकि समय ज्यादा नहीं बचा था, इसलिये सुयश ने पहले उत्तर को, की-बोर्ड पर टाइप कर इन्टर का बटन दबा दिया और फिर बिना हरी लाइट को देखे घूम कर सबको उत्तर समझाने लगा।

"उत्तर था मनुष्य....यहां बचपन को सुबह के समान माना गया है और बचपन में बालक अपने हाथों व घुटनों के बल चलता है, यानि की अपने 4 पैरों पर। फिर जवानी में यानि दोपहर में 2 पैरों पर चलता है और बाद में बुढ़ापे में यानि की शाम को, डंडे का सहारा लेकर तीन पैरों पर चलता है। इसके बाद उसके सोने का मतलब मृत्यु से था।"

इस वास्तव में यह प्रश्न अत्यंत कठिन था, क्यों कि प्रश्न का सार बहुत ही दुष्कर था।

सबको समझाने के बाद सुयश ने पीछे पलटकर मशीन की ओर देखा। मशीन पर हरी बत्ती ही जल रही थी। अब मात्र एक प्रश्न बचा था।

तभी वह आखिरी प्रश्न भी ब्रेन मशीन ने पूछ लिया, पर यह आखिरी प्रश्न एक बार फिर मशीन की स्क्रीन पर चमकने लगा।

पर भलाई ये थी कि इस बार टाइमर नहीं चल रहा था। स्क्रीन पर इस समय कुछ नंबर दिखाई दे रहे थे-1, 3, 5, 7, 9, 11, 13, 15

और लिखा था- ऊपर दिये किन्हीं 3 नंबरों को इस प्रकार जोड़ो कि उत्तर 30 आये और नीचे उन तीन डिजिट की जगह खाली थी। _+_+_ = 30


“इम्पासिबल!" शैफाली ने देखते ही बोल दिया “कैप्टेन अंकल, आपको याद होगा कि मैंने आपसे एक बार इसी तिलिस्मा में 30 कबूतरों को उड़ाने वाला प्रश्न पूछा था, जिसका कोई उत्तर नहीं था, यह प्रश्न भी उसी प्रकार से है। ध्यान से देखिये, ऊपर लिखे सभी नंबर 'विषम' हैं और गणित का नियम ये कहता है कि किसी भी तीन विषम संख्याओं को जोड़कर, कभी भी एक 'सम' संख्या नहीं बनाई जा सकती है। इसलिये मेरे हिसाब से इस प्रश्न का उत्तर संभव ही नहीं है।"

“ध्यान से सोचो शैफाली, शायद हर प्रश्न की ही भांति कैश्वर ने इस प्रश्न में भी कोई ट्रिक लगा रखी हो?" सुयश ने कहा- “और यह बात ध्यान रखना कि अगर तुम इस गणित के प्रश्न को हल नहीं कर पाई, तो हममें से कोई भी नहीं कर पायेगा? सोचो तिलिस्मा में कैश्वर हमें कभी भी ऐसी कोई पहेली नहीं देगा, जिसका कि कोई उत्तर ही ना हो? और ये भी ध्यान रखो कि यह प्रश्न अत्यंत कठिन है, इसीलिये कैश्वर ने इस प्रश्न में टाइमर नहीं रखा है। इसलिये तुम्हारे पास इस प्रश्न को सोचने के लिये पर्याप्त समय है।"

सुयश के इतने शब्द ही, शैफाली के दिमाग में नयी ऊर्जा का संचार कर गये, उसने फिर से अपना दिमाग लगाना शुरु कर दिया।

काफी देर तक सोचने के बाद भी शैफाली को उत्तर समझ में नहीं आया, इसलिये वह अब ब्रेन मशीन की स्क्रीन के पास आकर देखने लगी।

कुछ सोच शैफाली ने स्क्रीन के ऊपर लिखे गणित के अंको को हाथ से छुआ। वह स्क्रीन टच स्क्रीन की भांति काम कर रही थी।

यह देख शैफाली ने सभी अंकों को हाथ लगाकर देखना शुरु कर दिया, पर जैसे ही शैफाली ने 9 अंक को हाथ लगाया, वह तुरंत घूमकर 6 में बदल गया।

यह देख शैफाली के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

अब उसने पहले अंक की जगह 11, दूसरे अंक की जगह 13 को उठाकर रख दिया। तीसरे अंक की जगह शैफाली ने जैसे ही 9 को 6 बनाकर रखा, तुरंत ब्रेन मशीन की हरी बत्ती जल उठी। 11 + 13 + 6 = 30

अब मशीन के एक स्थान से 6 टिकट निकल आये, जिसे शैफाली ने अपने हाथों में पकड़ा और सभी के साथ भागकर ट्रेन के पास पहुंच गई।

ट्रेन के द्वार पर एक स्कैनर लगा था, उस स्कैनर में टिकट को स्कैन करते ही ट्रेन का दरवाजा खुल गया।

सभी अंदर प्रवेश करके, एक ओर लगी 6 कुर्सियों पर बैठ गये।

"कैप्टेन अगर हमारे साथ शैफाली ना होती, तो इस द्वार को नहीं पार किया जा सकता था?" तौफीक ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

"कैश्वर ने सभी द्वार को किसी ना किसी की क्षमताओं को देखकर बनाया है, तो फिर यदि हममें से एक भी हमारे साथ ना होता, तो पूरा तिलिस्मा ही पार नहीं किया जा सकता था।” सुयश ने कहा- “और शायद यह विधि का विधान है, यानि हमारा इस तिलिस्मा में प्रवेश करना, एक इत्तेफाक नहीं है, बल्कि ये समझो कि हम तिलिस्मा तोड़ने के लिये ही पैदा हुए हैं।"

सभी बातें कर रहे थे और उधर शैफाली ट्रेन से बाहर की ओर देख रही थी, पर ट्रेन की गति इतनी तेज थी कि शैफाली को कुछ नजर नहीं आ रहा था।

कुछ ही देर में ट्रेन एक स्टेशन पर जा कर रुकी। सभी ट्रेन से उतरकर नीचे आ गये।

नीचे प्लेटफार्म पर एक ओर लिखा हुआ था अश्रुधारा स्टेशन।"

जैसे ही सभी ट्रेन से उतरे, ट्रेन अपनी जगह से आगे चली गई। तभी सुयश की नजर स्टेशन के बाहर निकलने वाले द्वार की ओर गई।

सुयश ने इशारे से सभी को उस दिशा में चलने के लिये कहा।

स्टेशन के उस द्वार से निकलने के बाद, सभी एक ऐसे स्थान पर पहुंच गये, जहां कि एक बहुत सुंदर स्वीमिंग पूल बना था। स्वीमिंग पूल का पानी काफी साफ दिख रहा था।

शैफाली ने आगे बढ़कर उस स्वीमिंग पूल के पानी को थोड़ा सा अपनी अंजली में लिया और मुंह से लगा कर देखा।

“यही है लैक्राइमल ग्लैंड।” शैफाली ने कहा- “यह आँसुओं का स्वीमिंग पूल है, इस पानी में नमक की काफी ज्यादा मात्रा है। इसका मतलब इसके अंदर से, कोई ना कोई पाइप आँखों तक अवश्य जाता होगा? पर यह पता लगाने के लिये मुझे इसके अंदर जाना होगा।"

यह कहकर शैफाली ने सुयश की ओर देखा। सुयश ने धीरे से अपना सिर हिलाकर शैफाली को स्वीमिंग पूल के अंदर जाने की आज्ञा दे दी।

अब शैफाली ने बिना देर किये, स्वीमिंग पूल में छलांग लगा दी। शैफाली तैरती हुई स्वीमिंग पूल के तली की ओर बढ़ी, जहां एक 5 फुट मोटा पाइप उसे दिखाई दिया। शैफाली बिना डरे उस पाइप में प्रवेश कर गई।

पाइप के अंत में शैफाली को एक ढक्कन सा लगा दिखाई दिया, जो कि बंद था। शैफाली ने उस ढक्कन को पकड़ कर उठा दिया। ढक्कन हटते ही स्वीमिंग पूल का सारा पानी एक बहाव के साथ पाइप से होकर नीचे की ओर जाने लगा।

शैफाली भी उस पानी के साथ बहकर, आँखों की कोर वाले उसी स्थान पर पहुंच गई, जहां से उसने इस द्वार की शुरुआत की थी।

चूंकि आँसुओं का बहाव बहुत तेज था, इसलिये शैफाली ने एक खंभे को जोर से पकड़ रखा था।

कुछ ही देर में सभी आँसू आँखों की कोर से बाहर निकल गये।

तभी शैफाली को उसी रास्ते से सुयश सहित सभी आते दिखाई दिये।

अब कार्निया पर जमा चिपचिपा पदार्थ पूरी तरह से साफ हो गया था।

"इस द्वार का सारा कार्य तो समाप्त हो गया, फिर इससे बाहर निकलने का दरवाजा कहां है?" ऐलेक्स ने कहा।

तभी शैफाली की निगाह आँख की कोर से जुड़ी 'लैक्राइमल पंक्टा' की ओर गई। जहां पर एक द्वार दिखाई दे रहा था, जिस पर 5.2 लिखा हुआ था।

"मुझे लगता है कि हमें इस द्वार से नाक की ओर जाना होगा?" शैफाली ने कहा- “वही हमारा तिलिस्मा का अगला द्वार है।"

"हे भगवान! अब आँख के बाद नाक में जाना होगा।” ऐलेक्स ने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा- “तेरा बेड़ा गर्क हो कैश्वर तुझे कोई और द्वार ना मिला, तिलिस्मा में बनाने को।”

सभी अब शैफाली के साथ उस द्वार की ओर बढ़ गये।

जारी रहेगा_____✍️
Shaandar update
 

Raj_sharma

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Let's see aage ye sabhi aur kaun kaun si difficulties ko paar karte hain.
30 sum wala isi story me 9 grah wale episode me padha tha aapne, jab shefali ne kabootqro wali paheli poochi thi :D rahi baat 9 ko 6 banane ki to, wo 6 hi tha, bas caswer inke dimaak ki aisi taisi kar raha tha. Thank you very much for your wonderful review and support bhai :thanks:
 

Raj_sharma

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#192.

युद्धनीति:
(19.01.02, शनिवार, नक्षत्रलोक, कैस्पर क्लाउड)

कैस्पर जब श्वेत महल को देखने गया था, तो वारुणि कैस्पर को लेकर नक्षत्रलोक आ गई थी।

वारुणि ने कैस्पर को वहां एक ऐसा जीव दिखाया था, जो कि कैस्पर की ही शक्तियों से निर्मित था। उसके बाद कैस्पर ने बताया कि किस प्रकार, कैश्वर ने उसे किनारे कर के पूरे तिलिस्मा पर अधिकार कर लिया है।

कैस्पर ने वारुणि से किसी देवयुद्ध का भी जिक्र किया था, जिसमें वारुणि को एक निर्णायक भूमिका निभानी थी।

वारुणि ने भी कैस्पर से कहा था कि वह उस 3 आँख और 4 हाथ वाले विचित्र जीव के द्वारा, उस ग्रह के बारे में जानने की कोशिश करेगी, जिधर उस जीव ने अपने सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र से मैसेज भेजा था।

इसलिये पिछली 4 दिन से वारुणि लगातार नक्षत्रशाला में काम कर रही थी। कल तो वह पूरी रात जागती रही थी।

वारुणि ने उस विचित्र जीव से मिले, सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र की तरंग दैर्ध्य जांच ली थी। जिससे उसे, सिग्नल की दूरी और गति का पता चल गया था।

अब वारुणि ध्यान से उस जीव की, उस समय की फोटो का अध्ययन कर रही थी, जब उसे टूटी हुई ओजोन लेयर के पास से पकड़ा गया था। इस समय वारुणि ने अपने हाथों में पेंसिल और ज्यामिति के कुछ टूल्स पकड़ रखे थे।

कुछ ही देर में वारुणि ने, उस जीव के कोण का भी पता लगा लिया। अब बस उस जीव के शरीर के कोण, सिग्नल की गति और दूरी को ब्रह्मांड के मानचित्र में डालने की जरुरत थी।

अब वारुणि ने अपने सामने मौजूद एक बड़े से कम्प्यूटर पर, अपनी सभी गणनाओं को डाल दिया और ब्रह्मांड के मानचित्र में सर्च का बटन दबा दिया।

नक्षत्रलोक का आधुनिक कम्प्यूटर, तेजी से वारुणि की गणनाओं से खेलने लगा।

कुछ ही देर में उस कम्प्यूटर ने एक ग्रह का चित्र और उसकी पृथ्वी से दूरी के बारे में बताना शुरु कर दिया।

वारुणि के लिये यह नीला ग्रह बिल्कुल नया था, वह इसके बारे में कुछ नहीं जानती थी। फिर भी उस ग्रह को देख वारुणि के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थिरक उठी। आखिर उसकी रात भर की मेहनत का फल मिल गया था।

वारुणि ने इस समय घड़ी पर नजर डाली, घड़ी में इस समय सुबह का 8 बज रहा था।

“सुबह का 8 बज गया है, कैस्पर अवश्य ही उठ गया होगा। मुझे तुरंत उसको इस ग्रह के बारे में बताना चाहिये।" वारुणि ने मन ही मन सोचा और तुरंत नक्षत्रशाला से निकलकर कैस्पर के कक्ष की ओर चल दी।

वारुणि बिना दरवाजा खटखटाये, कैस्पर के कमरे में प्रवेश कर गई, पर वारुणि की आशा के विपरीत कैस्पर अभी भी सो रहा था।

वारुणि कक्ष में उपस्थित एक कुर्सी पर बैठ गई और सो रहे कैस्पर को देखने लगी।

सोते समय भी कैस्पर के चेहरे पर एक सौम्यता सी दिखाई दे रही थी।

वारुणि ना जाने ऐसे ही कितनी देर तक बैठी कैस्पर को निहारती रही। आखिरकार कैस्पर की आँख खुली।
वारुणि को अपने कमरे में देख कैस्पर हैरान हो गया।

"लगता है मैं कोई सपना देख रहा हूं आज सुबह-सुबह चाँद हमारे कमरे में क्यों आ गया?” कैस्पर ने बिस्तर से उठकर अंगड़ाई लेते हुए कहा।

“तुम्हारी चाँद की पिछली पूरी रात काली हो चुकी है और वह सुबह-सुबह ही तुम्हारे कमरे में आया था, पर अफसोस कि इस समय दोपहर हो चुकी है।” वारुणि ने मुस्कुराते हुए कैस्पर को बाथरुम की ओर धक्का देते हुए कहा- “अब चाँद चाहता है कि उसका दोस्त भी नहा-धोकर, उसके साथ एक नये ग्रह की सैर पर चले।"

“इसका मतलब कि चाँद ने रात भर में, उस नये ग्रह को ढूंढ ही लिया।” कैस्पर ने बाथरुम में प्रवेश करते हुए कहा- “तो फिर बस मैं नहाकर अभी आया। फिर दोनों साथ में चलेंगे, उस नये ग्रह की सैर पर।"

कैस्पर के बाथरुम में घुसने के बाद, वारुणि, विक्रम के ख्यालों में खो गई- “आज विक्रम को गायब हुए 6 दिन बीत गये हैं, पर उसकी कहीं से कोई खबर नहीं आई। उसने पिछले हजारों वर्षों में आज तक ऐसा कभी नहीं किया था। एक तो वह मेरे मानसिक तरंगों का भी जवाब नहीं दे रहा है। पता नहीं वह कहां और किस हाल में होगा?

कुछ देर के लिये ही सही पर विक्रम को याद कर, वारुणि का पूरा चेहरा उतर गया। अब वह सिर झुकाकर वहीं कमरे में बैठ गई।

कुछ देर बाद कैस्पर फ्रेश होकर बाथरुम से निकला। अब उसकी नजर वारुणि पर गई, जो कि वहीं कुर्सी पर बैठे-बैठे ही सो गई थी।

कैस्पर ने अपने कपड़े बदले और वारुणि के सामने जमीन पर बैठकर उसे देखने लगा।

लगभग 10 मिनट बाद ही वारुणि हड़बड़ा कर नींद से उठ गई। अब उसकी नजर सामने जमीन पर बैठकर उसे निहारते कैस्पर पर गई।

“ये तुम मेरी नकल क्यों कर रहे हो?” वारुणि ने उठकर कैस्पर का कान पकड़ते हुए कहा- “तुम मेरे नींद से जागने का कई घंटों तक इंतजार करती हो, तो मैंने सोचा कि मैं भी कुछ घंटे अपने चाँद को निहार लूं।"

"चल झूठे, मुझे अभी सोये हुए 10 मिनट भी नहीं बीता है। इतना सफेद झूठ बोलते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती।” वारुणि ने प्यार से कैस्पर को डांटते हुए कहा।

“आती है...कभी-कभी मुझे भी शर्म आती है, पर अब अपने चाँद के सामने क्या शर्माना?" कैस्पर ने वारुणि को खुश करते हुए कहा।

“तुम्हारी ऐसी ही हरकतें रहीं, तो सच मानो किसी दिन तुम्हें विक्रम बहुत मारेगा।” वारुणि ने हंसते हुए कहा।

"अरे मारने के लिये उसका मिलना भी तो जरुरी है।” कैस्पर ने अब सीरीयस होते हुए कहा- “विक्रम का कुछ पता चला क्या?" कैस्पर की बात सुन वारुणि ने धीरे से 'ना' में अपना सिर हिला दिया।

“अरे तो इसमें दुखी होने की क्या बात है?” कैस्पर ने वारुणि को जोर से हिलाते हुए कहा- “तुम्हारा ये दोस्त मैं ढूंढकर लाऊंगा उसे बस इसके लिये मुझे एक बार अपनी माँ से मिलना पड़ेगा। है ना। ....

“मैं भी मिलूंगी तुम्हारी माँ से।” वारुणि ने कहा।

"जरुर मिलाऊंगा। चलो अब पहले जरा उस ग्रह के बारे में जान लें, फिर मैं अपनी माँ से बात करुंगा।” कैस्पर ने कहा और फिर वारुणि के पीछे-पीछे नक्षत्रशाला की ओर चल दिया।

कुछ ही देर में दोनों नक्षत्रशाला में थे। वारुणि जिस प्रकार अपने कम्प्यूटर को छोड़ गई थी, उसका कम्प्यूटर उसी हालत में अभी भी पड़ा था।

अब कैस्पर की नजर कम्प्यूटर की स्क्रीन पर थी, जिस पर एक नीले रंग का ग्रह चमक रहा था। कम्प्यूटर उस ग्रह की पृथ्वी से दूरी 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर दिखा रहा था।

“इस ग्रह के बारे में तो मुझे भी कुछ नहीं पता?...और...और इस ग्रह की दूरी तो पृथ्वी से बहुत ज्यादा है।” कैस्पर ने स्क्रीन की ओर देखते हुए कहा- “इतनी दूरी तक सिग्नल भेजने वाला सिग्नल मॉडुलेटर, कैश्वर के पास आया कहां से?... इसका मतलब है कि अवश्य ही कोई ना कोई और इस समय कैश्वर के साथ है? जिसने उसे यह सिग्नल मॉडुलेटर दिया है...पर कौन?...जब कैश्वर मेरा कहना नहीं मान रहा, तो ऐसा कौन है पृथ्वी पर, जो कैश्वर को भी अपने इशारों पर नचा रहा है? इन सबके पीछे कुछ ना कुछ रहस्य तो अवश्य है? मुझे इसका पता लगाने के लिये, एक बार फिर से अराका पर जाना ही पड़ेगा, पर... पर मेरे गुप्त ऊर्जा द्वार को तो पहले ही कैश्वर बंद कर चुका है, फिर मैं तिलिस्मा के अंदर कैसे प्रविष्ठ हो सकता हूं?...अब मुझे सिर्फ माँ ही इस मुसीबत से बचा सकती हैं.... मुझे माँ को ही याद करना होगा। तुम भी मेरे साथ चल रही हो वारुणि।”

यह कहकर कैस्पर ने अपनी आँख बंद कर ली और वारुणि का हाथ पकड़कर माया को याद करने लगा

“माँ, मैं इस समय एक बहुत बड़ी मुश्किल में हूं, मुझे इस समय आपकी मदद की आवश्यकता है। मुझे अपने पास बुलाइये माँ।”

वारुणि समझ नहीं पा रही थी कि कैस्पर की माँ, किस प्रकार नक्षत्रलोक से उन्हें अपने पास बुलायेंगी, पर उसने कुछ कहा नहीं। वह अब बस आँख बंद किये कैस्पर को देख रही थी।

तभी वारुणि को हवा में एक ऊर्जा द्वार बनता दिखाई दिया। एक पल से भी कम समय में उस ऊर्जा द्वार ने कैस्पर और वारुणि को अपने अंदर खींच लिया।

वारुणि को अपना शरीर हवा में गिरता हुआ सा महसूस हो रहा था, परंतु चारो ओर तेज रोशनी की वजह से उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन ऐसी स्थिति में वारुणि ने कैस्पर का हाथ नहीं छोड़ा था।

कुछ ही देर में रोशनी कम होने लगी। अब वारुणि की आँखें देखने लायक हो गईं थीं।

वारुणि ने स्वयं को इस समय एक ऐसे कमरे में पाया, जिसमें कोई खिड़की नहीं थी, बस एक दरवाजा ही था। कैस्पर उसके बगल खड़ा था।

तभी दरवाजे से एक खूबसूरत स्त्री ने अंदर प्रवेश किया, जिसे देख वारूणि हैरान हो गई।

“आप????” वारुणि के मुंह से माया के लिये सम्मान भरे शब्द निकले- “आप कैस्पर की माँ हैं! आपका चित्र तो मैंने वेदालय में हर स्थान पर लगे देखा था।"

माया ने वारुणि को देख धीरे से अपना सिर हिलाया, पर कुछ कहा नहीं? तभी कैस्पर दौड़कर माया के गले से लग गया।

“क्यों रे, अब तू मैग्ना की जगह इससे विवाह करेगा क्या?" माया की आवाज वातावरण में गूंजी। माया की बात सुन वारुणि शर्मा गई।

“अरे नहीं माँ, ये मेरी बहुत अच्छी दोस्त है बस।"

तभी वारुणि ने आगे बढ़कर माया के चरण स्पर्श कर लिये। माया ने अपना हाथ उठाकर वारुणि को आशीर्वाद दिया- “जा जल्दी ही तुझे विक्रम मिल जाये।"

माया की बात सुनकर वारुणि हैरानी से कैस्पर को देखने लगी थी, क्यों कि अभी उन्होंने माया से विक्रम के बारे में तो कुछ कहा ही नहीं था?

“अरे, इतना हैरान मत हो वारुणि, यह मेरी माँ हैं, यह भूत, भविष्य, वर्तमान सब जानती हैं, इनसे इस पृथ्वी पर कुछ भी छिपा नहीं है?" कैस्पर ने वारुणि से कहा“ बस तुम्हें इनकी आवाज वातावरण में सुनने की आदत डालनी पड़ेगी बस। क्यों कि यह किसी से भी बात नहीं करती हैं।"

“क्या तुम्हें पता है कैस्पर? कि माता ने ही हमारे वेदालय की रचना की थी और यह हमारे महागुरु नीलाभ की पत्नी हैं, इस हिसाब से यह हमारी गुरुमाता हुईं।" वारुणि ने प्रसन्नता से कहा।

माया ने अब कैस्पर और वारुणि को बैठने का इशारा किया।

“अच्छा किया कैस्पर कि तुमने मुझे याद कर लिया, अगर कुछ दिन तक तुम मुझे और याद नहीं करते, तो मैं स्वयं तुम्हें अपने पास बुला लेती।” माया ने कहा- “मुझे पता है कि तुम लोगों के मस्तिष्क में सैकड़ों प्रश्न घूम रहे हैं? इसलिये अब तुम एक-एक कर मुझसे सारे प्रश्न पूछ सकते हो। आज मैं भी बिना घुमाये-फिराये तुम्हें सबकुछ बता दूंगी क्यों कि सभी रहस्यों को खोलने का इससे बेहतर समय अब नहीं आयेगा।

“तो क्या माँ, आप जिस देवयुद्ध का ज़िक्र हमें बचपन से करती आई थीं, उसका समय अब आने वाला है?” कैस्पर ने माया से पूछा।

“हां, कैस्पर। वह देवयुद्ध अब बहुत निकट है। अगर उसे सही से संभाला नहीं गया, तो वह पूरी पृथ्वी का विनाश कर देगा।" माया ने कहा।

“कौन हैं, वह पृथ्वी के विनाशक, जिनके बारे में अभी हमें पता भी नहीं है?" वारुणि ने पूछा।

“वह एक नहीं है, बल्कि बहुत से हैं। कुछ पृथ्वी से सुदूर दूसरी आकाशगंगा से आये हैं, तो कुछ सैकड़ों वर्षों से पृथ्वी पर छिपे, उस विनाश का ताना-बाना बुन रहे हैं। हमारा कार्य उन सभी आसुरी शक्तियों को एक होने से रोकना है। अगर वह सब एक हो गये तो हमारी पृथ्वी का बचना असंभव है।" माया ने गंभीर शब्दों में कहा।

“पर हम उन्हें एक होने से किस प्रकार रोक सकते हैं? हम ना तो उनके बारे में जानते हैं? और ना ही उनकी शक्तियों के बारे में?...फिर इस प्रकार बिना जाने उन्हें रोक पाना असंभव है।" वारुणि ने कहा।

“इसी असंभव कार्य को तो तुम दोनों को संभव बनाना है। और...इसे संभव बनाने के लिये तुम्हें 3 कार्य करने होंगे। पहला कार्य तुम्हें सभी देवशक्ति धारकों को एक स्थान पर एकत्र करके, उन्हें सबकुछ बताकर एक माला में पिरोना होगा। बिना एकता की शक्ति के, तुम यह युद्ध कभी भी जीत नहीं सकते। दूसरा कार्य यह है कि तुम्हें सभी विनाशकों को एक साथ मिलने के पहले ही, एक-एक कर मारना शुरु करना होगा।

“अगर तुम ऐसा करने में सफल हो गये, तो देवयुद्ध से पहले ही हम अपने शत्रुओं की शक्ति को आधा कर सकते हैं। तीसरा कार्य तुम्हें कैसे भी ग्रीक देवताओं को अपनी ओर करना होगा? ये ध्यान रखना कि अगर वो हमारी ओर ना आयें, तो कम से कम हमारे शत्रुओं की ओर से भी युद्ध ना करें। क्यों कि अगर ग्रीक देवी -देवता भी उनकी ओर मिल गये, तब हम अपने शत्रुओं से नहीं जीत पायेंगे। इसके अलावा और कुछ छोटी -मोटी तैयारियां करनी होंगी, जो कि मैं समय-समय पर तुम्हें बताती रहूंगी।"

“पर माँ, इनमें से पहले 2 कार्य तब तक संभव नहीं हैं, जब तक कि हमें जानकारियां ना मिल जायें।" कैस्पर ने कहा।

“तुम जानकारियों की चिंता मत करो, मेरे पास सभी मित्रों और शत्रुओं की पूर्ण जानकारियां हैं।” माया ने यह कहकर अपना हाथ ऊपर की ओर उठाया।

माया के ऐसा करते ही हवा में एक पुस्तक प्रकट हो गई, जो कि हवा में तैरती हुई कैस्पर के हाथ में आ गई। कैस्पर ने उस पुस्तक को देखा, उसका नाम 'देवयुद्ध' था।

“यह पुस्तक मैंने तुम्हारे लिये ही लिखी है कैस्पर।" माया ने कहा- “इस पुस्तक में तुम्हें सभी शत्रुओं और मित्रों की जानकारियां मिल जायेंगी।"

कैस्पर ने उत्सुकतावश 'देवयुद्ध' का एक पृष्ठ खोलकर देखा। उस पृष्ठ पर एंड्रोनिका लिखा था।

“यह एंडोनिका क्या है माँ?” कैस्पर ने माया से पूछा।

"एंड्रोनिका, उस अंतरिक्ष यान का नाम है, जिसे तुम लोग उल्कापिंड समझ रहे हो।" माया ने कहा।

"तो क्या उस उल्कापिंड....म...मेरा मतलब है कि एंड्रोनिका में अंतरिक्ष के जीव भी हैं?” वारुणि ने आश्चर्य से पूछा।

“वही तो हमारे असली शत्रु हैं वारुणि।” माया ने कहा- “पृथ्वी के शत्रुओं को तो नियंत्रित करना सरल है, क्यों कि उन पर हमारी प्रकृति के नियम लागू होते हैं। पर उन दूसरे ग्रह से आये जीवों में, कुछ पर तो हमारी पृथ्वी के प्रकृति के नियम भी लागू नहीं होते, ऐसे में उन्हें मारना बहुत ही मुश्किल है।”

“गुरुमाता, हम इस पुस्तक को तो पढ़ लेंगे, पर मुझे थोड़ा सा और आपसे इन अंतरिक्ष के जीवों के बारे में जानना है? इनके पास ऐसी कौन सी शक्तियां हैं? जिन पर हमारी प्रकृति के नियम ही लागू नहीं होते।” वारुणि ने माया से पूछा।

“ठीक है वारुणि, तो बाकी पूरी जानकारी तुम लोग इस पुस्तक से पढ़ लेना। मैं तुम्हें सिर्फ उस अंतरिक्ष यान के बारे में बता देती हूं। वह अंतरिक्ष यान, हमारी पृथ्वी से 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर स्थित, फेरोना नामक एक नीले ग्रह से आया है। एंड्रोमेडा नामक इस अंतरिक्ष यान में कुल 15 जीव हैं, जो देखने में पृथ्वी वासियों जैसे ही हैं, बस उनके शरीर का रंग नीला है। यह सभी जीव अपने ग्रह के सबसे ताकतवर जीव हैं। इनका सम्मिलित नाम ‘एंड्रोवर्स पॉवर' है। ‘एंड्रोवर्स पॉवर' में अंग्रेजी के कुल 15 अक्षर होते हैं, जो कि इन सभी 15 जीवों के नाम के प्रथम अक्षर से मिलकर बने हैं।

“इन जीवों में कुल 10 पुरुष जीव हैं, जिन्हें 'एंड्रोवर्स' कहा जाता है। बाकी बचे 5 जीव, महिलाएं हैं, जिन्हें 'पॉवर' कहा जाता है। यानि इन सभी 15 जीवों को मिलाकर ही 'एंड्रोवर्स पॉवर' बनता है। इसमें यह बात ध्यान रखने वाली है कि इन जीवों की महिलाएं आपात स्थिति में ही बाहर निकलती हैं और वह अपने पुरुष जीवों से ज्यादा शक्तिशाली हैं। सभी 10 पुरुष जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः A1 से लेकर A10 तक लिख रखा है और सभी महिला जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः P1 से P5 तक लिख रखा है। मैंने इसके अगले पृष्ठ पर इन सभी के नाम और जानकारियां लिख रखीं हैं।"

माया की बात सुन, कैस्पर ने तुरंत पुस्तक का अगला पन्ना खोलकर देखा, उस पन्ने पर एक लिस्ट थी।

“इनमें से कुछ शक्तियों के बारे में तो हमने सुना तक नहीं है?" वारुणि ने पुस्तक में झांकते हुए कहा- “जैसे कि यह डार्क मैटर क्या है?"

"हमारे ब्रह्मांड में करोड़ों सितारे हैं, जिन्हों ने ब्रह्मांड का बहुत सा हिस्सा घेर रखा है, परंतु हम जब भी ब्रह्मांड को देखते हैं, तो हमें ज्यादातर उसका काला भाग ही दिखाई देता है। ब्रह्मांड का वहीं काला भाग डार्क मैटर कहलाता है। पहले वैज्ञानिकों को इस काले भाग के बारे में कुछ नहीं पता था? उन्हें लगता था कि यह ब्रह्मांड का खाली स्थान है, पर ज्यादा खोज होने के बाद हमें इस डार्क मैटर का पता लगा। यह डार्क मैटर ब्रह्मांड के सभी ग्रहों के बीच संतुलन बनाये रखने का कार्य करता है। अगर साधारण भाषा में समझें, तो हम केवल उसी चीज को देख सकते हैं, जो या तो प्रकाश का उत्सर्जन, अवशोषण या फिर परावर्तित करता हो। परंतु डार्क मैटर इनमें से कुछ भी नहीं करता, इसलिये वह हमें दिखाई नहीं देता। डार्क मैटर, हमारी पृथ्वी की किसी भी प्राकृतिक चीज से प्रभावित नहीं होता? ना ही हवा, ना ही आग, पानी और किसी भी धातु से?" माया ने वारुणि को समझाते हुए कहा।

“अगर डार्क मैटर पर कुछ असर ही नहीं होता, तो ना तो वह हमें मार पायेगा और ना ही हम उसे।” वारुणि ने कहा।

“ऐसा नहीं है वारुणि, डार्क मैटर का द्रव्यमान यानि कि भार, बिल्कुल ना के बराबर होता है, इसलिये वह हमारे जीवन में, हमारे शरीर से पार होने के बाद भी हमारा कुछ नहीं कर पाता, परंतु अगर डार्को ने डार्क मैटर का द्रव्यमान बढ़ाकर हम पर वार किया, तो एक सेकेण्ड से भी कम समय में हमारा पूरा शरीर कणों में बिखरकर हवा में मिल जायेगा।" माया ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा- “तभी तो मैं तुम लोगों को आने वाले खतरे से आगाह कर रही हूं, जिससे तुम लोग समय रहते ही उससे बचाव करने की तकनीक ढूंढ सको।"

“क्या ऐसे खतरनाक डार्क मैटर को किसी भी प्रकार से नियंत्रित किया जा सकता है?" वारुणि तो आज पूर्ण ज्ञान लेने के मूड में थी। ऐसा लग रहा था कि उसे माया के रुप में कोई खजाना मिल गया हो?

"गुरुत्वाकर्षण.....एक वहीं चीज है, जिससे डार्क मैटर आकर्षित होता है अब ये देखना तुम्हारा काम होगा कि तुम्हारे किस मित्र के पास गुरुत्वाकर्षण की शक्ति है और उसे कब और कैसे डार्को के आगे करना है? ये ध्यान रखना कि समय से पहले दिव्यशक्तियों का प्रदर्शन सदैव हानिकारक होता है।" माया ने मुस्कुराते हुए वारुणि को गुरुमंत्र दिया।

अब वारुणि ने उस लिस्ट को देखते हुए फिर से पूछा- “गुरुमाता, यह सामान्य शक्ति क्या है? जो किसी 'रेने' के पास है?"

यह सुनकर माया मुस्कुरा दी- “रेने इस पूरे ग्रुप की कमांडर है, यह एंड्रोनिका से तभी निकलती है, जब सबकी शक्तियां विफल हो जाती हैं दरअसल सच कहें तो रेने के पास कोई शक्ति नहीं है, पर वह अपने सामने किसी भी शक्ति को रहने भी नहीं देती। मतलब अगर वह सामने हो तो किसी भी शत्रु की दिव्य शक्तियां काम नहीं करती हैं और ऐसे में वह सभी आसानी से जीत जाते हैं। बस अब इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं बताने वाली वारुणि? इसके आगे तुम दोनों को स्वयं ही देखना होगा। और हां इसमें से एक जीव एलात्रा 2 दिन पहले मारा जा चुका है।” माया ने सभा का समापन करते हुए कहा।

“एक आखिरी चीज और बता दीजिये कि विक्रम ठीक तो है ना?" वारुणि ने आखिरी सवाल पूछते हुए कहा।

“हां, विक्रम ठीक है और वह तुमसे समय आने पर मिल जायेगा। परंतु धरा और मयूर को इन अंतरिक्ष के जीवों ने बंदी बना लिया है और अब वह एकएक कर बाकी लोगों पर भी हमला करेंगे।" माया ने कहा- “इसलिये तुम लोगों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी और हां अभी तो मैं तुम दोनों को वापस नक्षत्रलोक भेज रही हूं, पर जल्दी ही मैं तुम्हें फिर से वापस बुलाऊंगी और फिर मैं तुम दोनों के साथ ओलंपस पर्वत चलूंगी, इससे पहले कि कोई दूसरी परेशानी बढ़े? हमें ग्रीक देवताओं से एक बार बात करनी ही पड़ेगी।”

यह कहकर माया ने अपना हाथ हिलाया, इसी के साथ कैस्पर और वारुणि, ऊर्जा द्वार से होते हुए पुनः नक्षत्रशाला में पहुंच गये, पर अब उनके चेहरे पर थोड़ी निश्चिंतता के भाव थे।


जारी रहेगा_____✍️
 
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