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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

SHADOW KING

Supreme
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lovely update. ashrudhara train me baithne ke liye 12 sawalo ka jawab dena hai jisme se 8 ke jawab de diye hai ,shefali aur christi ke dimag ki vajah se sab sahi uttar de paye .dekhte hai aage aise kaun kaun se prashn poochhta hai computer jo dikhte to aasan hai par sochne par majbur kar hi dete hai .
 

dhalchandarun

[Death is the most beautiful thing.]
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#190.

चैपटर-5
अश्रुधारा: (तिलिस्मा 5.12)

सभी रेटिना के द्वार के दूसरी ओर पहुंच गये थे, परंतु सभी ने देख लिया था कि जेनिथ जुगनू पर नहीं बैठ पा रही है।

लेकिन इस समय जेनिथ की मदद करने के लिये, कोई भी जुगनू को पीछे लेकर नहीं जा सकता था, क्यों कि जुगनू स्वयं की इच्छा से काम कर रहे थे।

अब रेटिना का द्वार धीरे-धीरे बंद होने लगा था। सभी के चेहरे पर चिंता के भाव साफ झलक रहे थे। पर इससे पहले कि रेटिना का द्वार पूरी तरह से बंद हो पाता, कि तभी जेनिथ के जुगनू ने अंदर प्रवेश किया।

जेनिथ को देख सभी खुश हो गये। अब सभी के जुगनू तेजी से एक चमकीली सुरंग के रास्ते से गुजर रहे थे।

कुछ ही देर में सभी को काफी दूर एक बड़ी सी मशीन दिखाई दी, जिसका ऊपरी हिस्सा किसी दिमाग की भांति महसूस हो रहा था।

उस मशीन के निचले सिरे पर, एक कंम्प्यूटर स्क्रीन लगी हुई थी, जो कि एक टाइपिंग पैड से जुड़ी हुई थी।

उस मशीन के दिमाग वाले स्थान पर एक बड़ा सा सुराख बना था। सभी जुगनू उसी सुराख में प्रविष्ठ हो रहे थे।

यह देखकर शैफाली ने सभी से चीखकर कहा- "हमें उस सुराख में, जुगनू के घुसने के पहले ही जुगनू से कूदना होगा।"

सभी ने शैफाली की बात सुन सहमति से सिर हिला दिया। चूंकि शैफाली का जुगनू सबसे आगे था, इसलिये जैसे ही ब्रेन मशीन के पास पहुंची, वह जुगनू से कूद कर जमीन पर आ गई।

शैफाली को कूदते देख सभी ने एक-एक कर, अपने-अपने जुगनू से छलांग लगा दी।

सभी जुगनू अब उस ब्रेन मशीन में समा गये और शैफाली सहित सभी लोग उस ब्रेन मशीन के सामने खड़े होकर उसे निहार रहे थे।

“कैप्टेन, यह तो किसी प्रकार की विज्ञान की दुनिया लग रही है?” क्रिस्टी ने सभी ओर देखते हुए कहा- “और उधर देखिये कैप्टेन, उस ओर किसी प्रकार का रेलवे प्लेटफार्म दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे हम किसी रेलवे स्टेशन पर हैं?"

लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ और बोल पाता, उस पूरे वातावरण में एक स्त्री के स्वर में अनाउन्समेंट सुनाई देने लगा- “अश्रुधारा जाने वाली ट्रेन, कुछ ही देर में प्लेटफार्म पर आ रही है, कृपया टिकट लेकर अपनी सीट को सुरक्षित कर लें।”

“यह सब क्या हो रहा है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली से पूछा- “तुम्हें कुछ समझ में आ रहा
है?"

"हां !" शैफाली ने अपना सिर हां के अंदाज में हिलाते हुए कहा- “अश्रुधारा मतलब आँसू की बूंद। शायद आने वाली ट्रेन हमें लैक्राईमल ग्लैंड तक ले जायेगी? पर यह टिकट का झंझट नहीं समझ आया? पता नहीं ये टिकट मिलेगा कहां से?"

"मुझे लगता है कि हमें ट्रेन का टिकट इस ब्रेन मशीन से ही मिलेगा।” सुयश ने कहा और ध्यान से उस ब्रेन मशीन को देखने लगा।

तभी सुयश को ब्रेन मशीन के की-बोर्ड पर एक साउन्ड का विकल्प दिखाई दिया। सुयश ने उस साउन्ड के बटन को प्रेस कर दिया।

उस बटन को प्रेस करते ही वातावरण में एक पुरुष की आवाज गूंजी- “ब्रेन सेंटर पर आपका स्वागत है। अगर आप अश्रुधारा की ओर जाना चाहते हैं, तो कृपया 1 दबाएं।" सुयश ने यह सुन की-बोर्ड पर लगा 1 नंबर का बटन दबा दिया।

“अब आप यात्रियों की संख्या सुनिश्चित करें।" मशीन से आवाज आई। सुयश ने इस बार की-बोर्ड पर लगे 6 नंबर के बटन को दबा दिया।

"आपकी संख्या 6 है, इसलिये आपको 12 मुद्रा, मशीन के अंदर डालनी होगी।"

मुद्रा का नाम सुनते ही सुयश सकते की सी हालत में आ गया और पीछे मुड़कर सभी की ओर देखने लगा।

“लगता है कि कार्य में कहीं मुद्राएं भी छिपी हुई थीं, जो हममें से किसी को दिखाई नहीं दी।” शैफाली ने मुंह बनाते हुए कहा- “अब बिना मुद्रा के यह मशीन हमें आगे जाने नहीं देगी और हम पीछे जाकर मुद्रा ढूंढ भी नहीं सकते।”

"तो सीधे तौर पर बोलते हैं कि हम पूरी तरह से अब इस मशीन में फंस चुके हैं।” ऐलेक्स ने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा।

तभी मशीन के अंदर से पुनः आवाज आई- “अगर आपके पास 12 मुद्रा नहीं हैं, तो आपको मेरे 12 आसान सवालों का जवाब देना होगा। अगर आपने उचित उत्तर दिया तो आप अपनी अपनी योग्यता सिद्ध कर टिकट को प्राप्त कर सकेंगे और अगर आपने एक भी प्रश्न का गलत उत्तर दिया, तो आप हमेशा के लिये इसी स्थान पर फंस जायेंगे। अगर आप प्रश्नों का विकल्प चुनना चाहते हैं, तो 1 दबाएं। अगर आप प्रश्नों का विकल्प नहीं चुनना चाहते हैं, तो 2 दबाकर मुझे आराम से सोने का मौका दें।"

"ये लो, अब इस मशीन को भी सोना है।” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा।

ब्रेन मशीन की बात सुन सुयश ने सभी की ओर ऐसे देखा, जैसे कि वह पूछना चाह रहा हो कि अब हमें क्या करना चाहिये?

“मेरे हिसाब से हमें प्रश्नों का विकल्प चुन लेना चाहिये।” तौफीक ने कहा- “इसमें बचने के कुछ चांस हैं, पर यदि हमने विकल्प नहीं चुना, तो फिर पता नहीं आगे क्या होगा?"

सभी ने तौफीक की बात पर सहमति जताई, इसलिये सुयश ने की-बोर्ड पर लगे 1 नंबर के बटन को दबा दिया।

“प्रश्नों का विकल्प चुनने के लिये धन्यवाद। अब हम आपके समक्ष 12 प्रश्नों को एक-एक कर रखेंगे। हर प्रश्न के लिये आपके पास सिर्फ 30 सेकेण्ड का समय रहेगा। आपको अपना जवाब मशीन के की-बोर्ड पर लिखकर देना होगा। तो पहला प्रश्न है:-

“दुनिया भर की करता सैर, बिना धरा पर रखे पैर।" इसी के साथ 30 सेकेण्ड का समय ब्रेन मशीन की स्क्रीन पर दिखाई देने लगा।

किसी को भी ब्रेन मशीन के द्वारा पहेलियां पूछने का अंदाजा नहीं था, ऊपर से समय की बंदिश। इसलिये सभी थोड़ा हड़बड़ा गये।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और सभी तेजी से उस पहेली में उलझे थे कि तभी शैफाली ने तेजी से कहा “सूर्य।"

शैफाली की बात सुन सुयश ने जल्दी से की-बोर्ड पर सूर्य टाइप कर दिया। जैसे ही सुयश ने सूर्य लिखकर ‘इन्टर' का बटन दबाया, मशीन के ऊपर लगी हरी बत्ती जल उठी, जो कि इस बात का द्योतक थी, कि शैफाली के द्वारा बताया गया उत्तर सही था।

“ये एक बार कैश्वर मुझे मिल जाये बस।" ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “पूरी बेइज्जती ही करके मानेगा गर्लफ्रेंड के सामने।" ऐलेक्स के शब्द सुन क्रिस्टी सहित सभी जोर से हंस दिये।

तभी ब्रेन मशीन ने दूसरा सवाल कर दिया:-
"ऐसा क्या है, जो YEAR में एक बा र और WEEK में 2 बार आता है?"

“ये क्या प्रश्न हुआ?” ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “जब कोई चीज WEEK में 2 बार आयेगी, तो वह YEAR में 1 बार कैसे आ सकती है?"

"उत्तर है 'E' अल्फा बेट।" शैफाली ने दोबारा से कहा- “यह YEAR में 1 बार और WEEK में 2 बार आती है।


“वाह!” ऐलेक्स ने शैफाली की प्रशंसा करते हुए कहा- “तुम बताना शैफाली कि तुमने किस स्कूल से पढ़ाई की है, मैं ऑस्ट्रेलिया चलकर, उसी स्कूल में एडमिशन लूंगा।

“बस एक बार ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाओ, फिर मैं तुम्हें घर में ट्यूशन दूंगी।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के गाल पर एक हल्के से चपत लगाते हुए कहा।

उधर सुयश ने मशी न पर लगे 'E' बटन को दबा दिया था। फिर से हरी बत्ती ने जलकर, उत्तर के सही होने की पुष्टि की।

अब मशीन ने तीसरा प्रश्न पूछ लिया:- “कमरे में बैठी इक रानी, सिर पर आग, बदन में पानी।"

सुयश को यह उत्तर किसी से पूछने की जरुरत नहीं पड़ी, क्यों कि इस प्रश्न का उत्तर उसे स्वयं पता था।
इसलिये उसने की-बोर्ड पर 'मोमबत्ती' लिख दिया। उत्तर बिल्कुल सही था।

“मुझे लगा कि इस प्रश्न का उत्तर 'क्रिस्टी' होगा। ऐलेक्स ने एक बार फिर क्रिस्टी को छेड़ा- "इसके भी सिर पर आग रहती है।"

“सिर्फ सिर पर।” क्रिस्टी ने इठलाते हुए ऐलेक्स का हाथ पकड़ते हुए कहा।

ऐलेक्स क्रिस्टी को ऐसे करता देख हाथ छुड़ाकर, शैफाली के पीछे जाकर छिप गया- “गंदी लड़की!"

कुछ भी हो, पर इस तिलिस्मा में क्रिस्टी और ऐलेक्स की वजह से माहौल हमेशा हल्का रहता था। सभी इनकी चुहलबाजियों से हमेशा हंसते रहते थे।

तभी ब्रेन मशीन ने चौथा प्रश्न कर लिया "ENGLISH में कितने अक्षर होते हैं?"

"26 अक्षर! ये मुझे आता है।” ऐलेक्स ने खुशी से चिल्ला कर कहा। पर सुयश ने 26 की-बोर्ड पर टाइप नहीं किया, वह तो इस सोच में था कि ब्रेन मशीन ने इतना आसान प्रश्न पूछा क्यों?

"7 अक्षर।" तभी शैफाली ने जवाब दिया- "ब्रेन मशीन ने हमसे ‘ENGLISH भाषा' के अक्षर नहीं पूछे हैं, वह सिर्फ ‘ENGLISH शब्द' में कितने अक्षर होते हैं? यह पूछ रहा है।”

शैफाली का तर्क सुनकर सुयश मुस्कुरा दिया, उसने शैफाली के कहे अनुसार की-बोर्ड पर 7 अंक टाइप कर दिया।

7 टाइप करते ही एक बार फिर मशीन पर लगी हरी बत्ती जल उठी। अब ब्रेन मशीन ने सभी से पांचवां प्रश्न कर लिया।

“सागर की बूंद सी है, मेरी जलधारा, भावों की नाव पर निवास है हमारा।"

सभी तेजी से इस प्रश्न के उत्तर के बारे में सोचने लगे कि तभी प्लेटफार्म पर ट्रेन ने सीटी बजाते हुए प्रवेश किया। एक बार के लिये सभी की नजर प्रश्न से हटकर ट्रेन की ओर चली गई।


बड़ी ही विचित्र ट्रेन थी। ट्रेन के इंजन पर बड़ी सी आँख बनी थी और उस पर लिखा था- 'नेत्र एक्सप्रेस'। इंजन के पीछे एक ही डिब्बा था, जिसकी आकृति बिल्कुल नाव के समान थी।

उस नाव को पारदर्शी काँच से ढका गया था, जिसकी वजह से वह ट्रेन काफी आकर्षक लग रही थी। अंदर बैठने के लिये कुर्सियां और मेज दिखाई दे रहे थे, जो उसकी भव्यता को चार चाँद लगा रहे थे।

"दोस्तों हमारा समय तेजी से बीत रहा है, हमारे पास अब बस 12 सेकेण्ड ही बचे हैं।” सुयश ने सबका ध्यान ट्रेन से अपनी ओर कराते हुए कहा।

“आँसू।” जेनिथ ने अभी भी ट्रेन की ओर देखते हुए कहा- “पांचवे प्रश्न का उत्तर आँसू है, क्यों कि आँसू में भी समुद्र के पानी के समान नमक पाया जाता है और वह आँख में रहती है, जिसका आकार भी नाव के समान ही होता है।"

सुयश ने जेनिथ की बात सुन की-बोर्ड पर जल्दी से आँसू टाइप कर दिया। हरी बत्ती एक बार पुनः जल उठी।

अब सबका ध्यान ट्रेन से हटकर प्रश्नों की ओर आ गया था। तभी 'ब्रेन मशीन' ने छठा प्रश्न कर दिया
“चार कोनों का नगर बना, चार कुएं बिन पानी, कुछ सैनिक के घेरे में, छिपी हुई एक रानी।"

इस प्रश्न का उत्तर क्रिस्टी को पहले से ही पता था, इसलिये उसने झट से बोल दिया- “कैरमबोर्ड"

सुयश ने यह उत्तर भी मशीन को बता दिया। हर बार की तरह यह उत्तर भी सही था। अब 'ब्रेन मशीन' ने सातवां प्रश्न कर दिया “अमेरिका और यूरोप के बीच में क्या है?"


“अब कैस्पर पगला गया है। कितने आसान प्रश्न पूछ रहा है?” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा- “अरे इसका उत्तर है समुद्र।"

“नहीं, इस प्रश्न का उत्तर समुद्र नहीं हो सकता। सुयश ने सोचते हुए कहा- “ऐसे बच्चों जैसे प्रश्न कैश्वर हमारे लिये नहीं बनाएगा।"

अब सुयश शैफाली की ओर देखने लगा, जो कि अब भी कुछ सोच रही थी। समय तेजी से बीत रहा था, पर समुद्र के सिवा किसी को कोई भी दूसरा उत्तर समझ नहीं आ रहा था।

अब सिर्फ 7 सेकेण्ड बचे थे। घड़ी की सुई लगातार आगे बढती जा रही थी। “6.....5......4.......3...." तभी शैफाली ने चीखकर कहा- “उत्तर है 'और'।"

सुयश इस चीज को समझ नहीं पाया, पर उसने जल्दी से इस उत्तर को की-बोर्ड पर टाइप कर दिया और ऊपर लगी हरी बत्ती की ओर देखने लगा।

तभी हरी बत्ती पुनः जल उठी।

“ब्रेन मशीन जानबूझकर हमसे पेचीदा प्रश्न पूछ रहा है, जिसका उत्तर हमें सामान्य सा लगे, पर वह गलत हो। जैसे उसने इस प्रश्न में कहीं ये नहीं पूछा कि अमेरिका और यूरोप देश के बीच क्या है? उसने यह पूछा कि अमेरिका और यूरोप के बीच क्या है। अब अमेरिका और यूरोप शब्द के बीच तो 'और' ही है ना।"

शैफाली का लॉजिक सुन सभी ब्रेन मशीन से और भी सतर्क हो गये।

अब ब्रेन मशीन ने आठवां प्रश्न कर दिया-
“एक किले के 2 हैं द्वार, उसमें सैनिक भरे अपार, टकरायें जब दीवारों से, खत्म करें अपना संसार।

धीरे-धीरे ब्रेन मशीन की पहेलियां कठिन होती जा रहीं थीं। इस प्रश्न का उत्तर पहले से किसी को नहीं पता था, इसलिये सभी एक-दूसरे का मुंह देखने लगे।

स्क्रीन पर समय एक बार फिर शुरु हो चुका था। इस बार इस प्रश्न का जवाब सूझा तौफीक को "माचिस"

तौफीक के शब्द सुन सभी को स्वयं पर हंसी आ गई, क्यों कि इस पहेली का उत्तर ज्यादा कठिन नहीं था, पर किसी को समझ नहीं आ रहा था।

सुयश ने इस उत्तर को भी मशीन को बता दिया, यह उत्तर भी सही था।


जारी रहेगा_____✍️
Wonderful update brother! Sabhi sawal achhe the, lekin sabse easy sawal surya aur carrom wala tha, baki thoda theek thak tha, sochne ke liye thoda samay lag jana tha, lekin jab Shefali jaisi ladki sath ho toh jyada samay nahi lagta hai.
 

parkas

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चैपटर-5
अश्रुधारा: (तिलिस्मा 5.12)

सभी रेटिना के द्वार के दूसरी ओर पहुंच गये थे, परंतु सभी ने देख लिया था कि जेनिथ जुगनू पर नहीं बैठ पा रही है।

लेकिन इस समय जेनिथ की मदद करने के लिये, कोई भी जुगनू को पीछे लेकर नहीं जा सकता था, क्यों कि जुगनू स्वयं की इच्छा से काम कर रहे थे।

अब रेटिना का द्वार धीरे-धीरे बंद होने लगा था। सभी के चेहरे पर चिंता के भाव साफ झलक रहे थे। पर इससे पहले कि रेटिना का द्वार पूरी तरह से बंद हो पाता, कि तभी जेनिथ के जुगनू ने अंदर प्रवेश किया।

जेनिथ को देख सभी खुश हो गये। अब सभी के जुगनू तेजी से एक चमकीली सुरंग के रास्ते से गुजर रहे थे।

कुछ ही देर में सभी को काफी दूर एक बड़ी सी मशीन दिखाई दी, जिसका ऊपरी हिस्सा किसी दिमाग की भांति महसूस हो रहा था।

उस मशीन के निचले सिरे पर, एक कंम्प्यूटर स्क्रीन लगी हुई थी, जो कि एक टाइपिंग पैड से जुड़ी हुई थी।

उस मशीन के दिमाग वाले स्थान पर एक बड़ा सा सुराख बना था। सभी जुगनू उसी सुराख में प्रविष्ठ हो रहे थे।

यह देखकर शैफाली ने सभी से चीखकर कहा- "हमें उस सुराख में, जुगनू के घुसने के पहले ही जुगनू से कूदना होगा।"

सभी ने शैफाली की बात सुन सहमति से सिर हिला दिया। चूंकि शैफाली का जुगनू सबसे आगे था, इसलिये जैसे ही ब्रेन मशीन के पास पहुंची, वह जुगनू से कूद कर जमीन पर आ गई।

शैफाली को कूदते देख सभी ने एक-एक कर, अपने-अपने जुगनू से छलांग लगा दी।

सभी जुगनू अब उस ब्रेन मशीन में समा गये और शैफाली सहित सभी लोग उस ब्रेन मशीन के सामने खड़े होकर उसे निहार रहे थे।

“कैप्टेन, यह तो किसी प्रकार की विज्ञान की दुनिया लग रही है?” क्रिस्टी ने सभी ओर देखते हुए कहा- “और उधर देखिये कैप्टेन, उस ओर किसी प्रकार का रेलवे प्लेटफार्म दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे हम किसी रेलवे स्टेशन पर हैं?"

लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ और बोल पाता, उस पूरे वातावरण में एक स्त्री के स्वर में अनाउन्समेंट सुनाई देने लगा- “अश्रुधारा जाने वाली ट्रेन, कुछ ही देर में प्लेटफार्म पर आ रही है, कृपया टिकट लेकर अपनी सीट को सुरक्षित कर लें।”

“यह सब क्या हो रहा है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली से पूछा- “तुम्हें कुछ समझ में आ रहा
है?"

"हां !" शैफाली ने अपना सिर हां के अंदाज में हिलाते हुए कहा- “अश्रुधारा मतलब आँसू की बूंद। शायद आने वाली ट्रेन हमें लैक्राईमल ग्लैंड तक ले जायेगी? पर यह टिकट का झंझट नहीं समझ आया? पता नहीं ये टिकट मिलेगा कहां से?"

"मुझे लगता है कि हमें ट्रेन का टिकट इस ब्रेन मशीन से ही मिलेगा।” सुयश ने कहा और ध्यान से उस ब्रेन मशीन को देखने लगा।

तभी सुयश को ब्रेन मशीन के की-बोर्ड पर एक साउन्ड का विकल्प दिखाई दिया। सुयश ने उस साउन्ड के बटन को प्रेस कर दिया।

उस बटन को प्रेस करते ही वातावरण में एक पुरुष की आवाज गूंजी- “ब्रेन सेंटर पर आपका स्वागत है। अगर आप अश्रुधारा की ओर जाना चाहते हैं, तो कृपया 1 दबाएं।" सुयश ने यह सुन की-बोर्ड पर लगा 1 नंबर का बटन दबा दिया।

“अब आप यात्रियों की संख्या सुनिश्चित करें।" मशीन से आवाज आई। सुयश ने इस बार की-बोर्ड पर लगे 6 नंबर के बटन को दबा दिया।

"आपकी संख्या 6 है, इसलिये आपको 12 मुद्रा, मशीन के अंदर डालनी होगी।"

मुद्रा का नाम सुनते ही सुयश सकते की सी हालत में आ गया और पीछे मुड़कर सभी की ओर देखने लगा।

“लगता है कि कार्य में कहीं मुद्राएं भी छिपी हुई थीं, जो हममें से किसी को दिखाई नहीं दी।” शैफाली ने मुंह बनाते हुए कहा- “अब बिना मुद्रा के यह मशीन हमें आगे जाने नहीं देगी और हम पीछे जाकर मुद्रा ढूंढ भी नहीं सकते।”

"तो सीधे तौर पर बोलते हैं कि हम पूरी तरह से अब इस मशीन में फंस चुके हैं।” ऐलेक्स ने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा।

तभी मशीन के अंदर से पुनः आवाज आई- “अगर आपके पास 12 मुद्रा नहीं हैं, तो आपको मेरे 12 आसान सवालों का जवाब देना होगा। अगर आपने उचित उत्तर दिया तो आप अपनी अपनी योग्यता सिद्ध कर टिकट को प्राप्त कर सकेंगे और अगर आपने एक भी प्रश्न का गलत उत्तर दिया, तो आप हमेशा के लिये इसी स्थान पर फंस जायेंगे। अगर आप प्रश्नों का विकल्प चुनना चाहते हैं, तो 1 दबाएं। अगर आप प्रश्नों का विकल्प नहीं चुनना चाहते हैं, तो 2 दबाकर मुझे आराम से सोने का मौका दें।"

"ये लो, अब इस मशीन को भी सोना है।” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा।

ब्रेन मशीन की बात सुन सुयश ने सभी की ओर ऐसे देखा, जैसे कि वह पूछना चाह रहा हो कि अब हमें क्या करना चाहिये?

“मेरे हिसाब से हमें प्रश्नों का विकल्प चुन लेना चाहिये।” तौफीक ने कहा- “इसमें बचने के कुछ चांस हैं, पर यदि हमने विकल्प नहीं चुना, तो फिर पता नहीं आगे क्या होगा?"

सभी ने तौफीक की बात पर सहमति जताई, इसलिये सुयश ने की-बोर्ड पर लगे 1 नंबर के बटन को दबा दिया।

“प्रश्नों का विकल्प चुनने के लिये धन्यवाद। अब हम आपके समक्ष 12 प्रश्नों को एक-एक कर रखेंगे। हर प्रश्न के लिये आपके पास सिर्फ 30 सेकेण्ड का समय रहेगा। आपको अपना जवाब मशीन के की-बोर्ड पर लिखकर देना होगा। तो पहला प्रश्न है:-

“दुनिया भर की करता सैर, बिना धरा पर रखे पैर।" इसी के साथ 30 सेकेण्ड का समय ब्रेन मशीन की स्क्रीन पर दिखाई देने लगा।

किसी को भी ब्रेन मशीन के द्वारा पहेलियां पूछने का अंदाजा नहीं था, ऊपर से समय की बंदिश। इसलिये सभी थोड़ा हड़बड़ा गये।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और सभी तेजी से उस पहेली में उलझे थे कि तभी शैफाली ने तेजी से कहा “सूर्य।"

शैफाली की बात सुन सुयश ने जल्दी से की-बोर्ड पर सूर्य टाइप कर दिया। जैसे ही सुयश ने सूर्य लिखकर ‘इन्टर' का बटन दबाया, मशीन के ऊपर लगी हरी बत्ती जल उठी, जो कि इस बात का द्योतक थी, कि शैफाली के द्वारा बताया गया उत्तर सही था।

“ये एक बार कैश्वर मुझे मिल जाये बस।" ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “पूरी बेइज्जती ही करके मानेगा गर्लफ्रेंड के सामने।" ऐलेक्स के शब्द सुन क्रिस्टी सहित सभी जोर से हंस दिये।

तभी ब्रेन मशीन ने दूसरा सवाल कर दिया:-
"ऐसा क्या है, जो YEAR में एक बा र और WEEK में 2 बार आता है?"

“ये क्या प्रश्न हुआ?” ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “जब कोई चीज WEEK में 2 बार आयेगी, तो वह YEAR में 1 बार कैसे आ सकती है?"

"उत्तर है 'E' अल्फा बेट।" शैफाली ने दोबारा से कहा- “यह YEAR में 1 बार और WEEK में 2 बार आती है।


“वाह!” ऐलेक्स ने शैफाली की प्रशंसा करते हुए कहा- “तुम बताना शैफाली कि तुमने किस स्कूल से पढ़ाई की है, मैं ऑस्ट्रेलिया चलकर, उसी स्कूल में एडमिशन लूंगा।

“बस एक बार ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाओ, फिर मैं तुम्हें घर में ट्यूशन दूंगी।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के गाल पर एक हल्के से चपत लगाते हुए कहा।

उधर सुयश ने मशी न पर लगे 'E' बटन को दबा दिया था। फिर से हरी बत्ती ने जलकर, उत्तर के सही होने की पुष्टि की।

अब मशीन ने तीसरा प्रश्न पूछ लिया:- “कमरे में बैठी इक रानी, सिर पर आग, बदन में पानी।"

सुयश को यह उत्तर किसी से पूछने की जरुरत नहीं पड़ी, क्यों कि इस प्रश्न का उत्तर उसे स्वयं पता था।
इसलिये उसने की-बोर्ड पर 'मोमबत्ती' लिख दिया। उत्तर बिल्कुल सही था।

“मुझे लगा कि इस प्रश्न का उत्तर 'क्रिस्टी' होगा। ऐलेक्स ने एक बार फिर क्रिस्टी को छेड़ा- "इसके भी सिर पर आग रहती है।"

“सिर्फ सिर पर।” क्रिस्टी ने इठलाते हुए ऐलेक्स का हाथ पकड़ते हुए कहा।

ऐलेक्स क्रिस्टी को ऐसे करता देख हाथ छुड़ाकर, शैफाली के पीछे जाकर छिप गया- “गंदी लड़की!"

कुछ भी हो, पर इस तिलिस्मा में क्रिस्टी और ऐलेक्स की वजह से माहौल हमेशा हल्का रहता था। सभी इनकी चुहलबाजियों से हमेशा हंसते रहते थे।

तभी ब्रेन मशीन ने चौथा प्रश्न कर लिया "ENGLISH में कितने अक्षर होते हैं?"

"26 अक्षर! ये मुझे आता है।” ऐलेक्स ने खुशी से चिल्ला कर कहा। पर सुयश ने 26 की-बोर्ड पर टाइप नहीं किया, वह तो इस सोच में था कि ब्रेन मशीन ने इतना आसान प्रश्न पूछा क्यों?

"7 अक्षर।" तभी शैफाली ने जवाब दिया- "ब्रेन मशीन ने हमसे ‘ENGLISH भाषा' के अक्षर नहीं पूछे हैं, वह सिर्फ ‘ENGLISH शब्द' में कितने अक्षर होते हैं? यह पूछ रहा है।”

शैफाली का तर्क सुनकर सुयश मुस्कुरा दिया, उसने शैफाली के कहे अनुसार की-बोर्ड पर 7 अंक टाइप कर दिया।

7 टाइप करते ही एक बार फिर मशीन पर लगी हरी बत्ती जल उठी। अब ब्रेन मशीन ने सभी से पांचवां प्रश्न कर लिया।

“सागर की बूंद सी है, मेरी जलधारा, भावों की नाव पर निवास है हमारा।"

सभी तेजी से इस प्रश्न के उत्तर के बारे में सोचने लगे कि तभी प्लेटफार्म पर ट्रेन ने सीटी बजाते हुए प्रवेश किया। एक बार के लिये सभी की नजर प्रश्न से हटकर ट्रेन की ओर चली गई।


बड़ी ही विचित्र ट्रेन थी। ट्रेन के इंजन पर बड़ी सी आँख बनी थी और उस पर लिखा था- 'नेत्र एक्सप्रेस'। इंजन के पीछे एक ही डिब्बा था, जिसकी आकृति बिल्कुल नाव के समान थी।

उस नाव को पारदर्शी काँच से ढका गया था, जिसकी वजह से वह ट्रेन काफी आकर्षक लग रही थी। अंदर बैठने के लिये कुर्सियां और मेज दिखाई दे रहे थे, जो उसकी भव्यता को चार चाँद लगा रहे थे।

"दोस्तों हमारा समय तेजी से बीत रहा है, हमारे पास अब बस 12 सेकेण्ड ही बचे हैं।” सुयश ने सबका ध्यान ट्रेन से अपनी ओर कराते हुए कहा।

“आँसू।” जेनिथ ने अभी भी ट्रेन की ओर देखते हुए कहा- “पांचवे प्रश्न का उत्तर आँसू है, क्यों कि आँसू में भी समुद्र के पानी के समान नमक पाया जाता है और वह आँख में रहती है, जिसका आकार भी नाव के समान ही होता है।"

सुयश ने जेनिथ की बात सुन की-बोर्ड पर जल्दी से आँसू टाइप कर दिया। हरी बत्ती एक बार पुनः जल उठी।

अब सबका ध्यान ट्रेन से हटकर प्रश्नों की ओर आ गया था। तभी 'ब्रेन मशीन' ने छठा प्रश्न कर दिया
“चार कोनों का नगर बना, चार कुएं बिन पानी, कुछ सैनिक के घेरे में, छिपी हुई एक रानी।"

इस प्रश्न का उत्तर क्रिस्टी को पहले से ही पता था, इसलिये उसने झट से बोल दिया- “कैरमबोर्ड"

सुयश ने यह उत्तर भी मशीन को बता दिया। हर बार की तरह यह उत्तर भी सही था। अब 'ब्रेन मशीन' ने सातवां प्रश्न कर दिया “अमेरिका और यूरोप के बीच में क्या है?"


“अब कैस्पर पगला गया है। कितने आसान प्रश्न पूछ रहा है?” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा- “अरे इसका उत्तर है समुद्र।"

“नहीं, इस प्रश्न का उत्तर समुद्र नहीं हो सकता। सुयश ने सोचते हुए कहा- “ऐसे बच्चों जैसे प्रश्न कैश्वर हमारे लिये नहीं बनाएगा।"

अब सुयश शैफाली की ओर देखने लगा, जो कि अब भी कुछ सोच रही थी। समय तेजी से बीत रहा था, पर समुद्र के सिवा किसी को कोई भी दूसरा उत्तर समझ नहीं आ रहा था।

अब सिर्फ 7 सेकेण्ड बचे थे। घड़ी की सुई लगातार आगे बढती जा रही थी। “6.....5......4.......3...." तभी शैफाली ने चीखकर कहा- “उत्तर है 'और'।"

सुयश इस चीज को समझ नहीं पाया, पर उसने जल्दी से इस उत्तर को की-बोर्ड पर टाइप कर दिया और ऊपर लगी हरी बत्ती की ओर देखने लगा।

तभी हरी बत्ती पुनः जल उठी।

“ब्रेन मशीन जानबूझकर हमसे पेचीदा प्रश्न पूछ रहा है, जिसका उत्तर हमें सामान्य सा लगे, पर वह गलत हो। जैसे उसने इस प्रश्न में कहीं ये नहीं पूछा कि अमेरिका और यूरोप देश के बीच क्या है? उसने यह पूछा कि अमेरिका और यूरोप के बीच क्या है। अब अमेरिका और यूरोप शब्द के बीच तो 'और' ही है ना।"

शैफाली का लॉजिक सुन सभी ब्रेन मशीन से और भी सतर्क हो गये।

अब ब्रेन मशीन ने आठवां प्रश्न कर दिया-
“एक किले के 2 हैं द्वार, उसमें सैनिक भरे अपार, टकरायें जब दीवारों से, खत्म करें अपना संसार।

धीरे-धीरे ब्रेन मशीन की पहेलियां कठिन होती जा रहीं थीं। इस प्रश्न का उत्तर पहले से किसी को नहीं पता था, इसलिये सभी एक-दूसरे का मुंह देखने लगे।

स्क्रीन पर समय एक बार फिर शुरु हो चुका था। इस बार इस प्रश्न का जवाब सूझा तौफीक को "माचिस"

तौफीक के शब्द सुन सभी को स्वयं पर हंसी आ गई, क्यों कि इस पहेली का उत्तर ज्यादा कठिन नहीं था, पर किसी को समझ नहीं आ रहा था।

सुयश ने इस उत्तर को भी मशीन को बता दिया, यह उत्तर भी सही था।


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....
 

Ajju Landwalia

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#189.

भारत में इस समय दोपहर के 4 बज रहे थे। शलाका और जेम्स, आर्केडिया के गुप्त द्वार से बाहर निकले और रुद्र सागर के पानी को चीरते हुए, झील की सतह के ऊपर आ गये।

"आर्ची, मेरे और जेम्स के कपड़े, भारत की परंपरा के हिसाब से कर दो।” शलाका ने झील के बाहर निकलते ही आर्ची को आदेश दिया। शलाका के इतना कहते ही जेम्स और उसके कपडे तुरंत बदल गये।

यह देख जेम्स ने आश्चर्य से पूछा- “क्या आर्ची वहां से कपड़े भी चेंज कर सकती है?"

“आगे-आगे देखते रहो....अभी वह बहुत कुछ कर सकती है।” शलाका ने मुस्कुराकर अपने शरीर पर पहने कपड़े को देखा और फिर महा…लेश्वर मंदिर की ओर बढ़ गई।

इस समय जेम्स और शलाका ने टीशर्ट और जींस पहन रखी थी।

जेम्स के लिये ये सभी कुछ बहुत अनोखा था। उसे तो यह लग रहा था कि शलाका कहीं भी जाने के लिये अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग करेगी, पर जेम्स की सोच से बिल्कुल उल्टा हो रहा था, शलाका पूरी तरह से विज्ञान की शक्तियों का प्रयोग कर रही थी।

शलाका चलते हुए अब मंदि..र के प्रांगण में आ गई। शलाका ने जिस तरह का मं..दिर वेदांत रहस्यम् में देखा था, यह उससे बिल्कुल अलग था। बस देव का शि….वलिंग वहीं था।

इस समय मं..दिर के पट बंद थे। शलाका ने बाहर से हाथ जोड़कर देव का नमन किया और जेम्स को लेकर उस दिशा की ओर चल दी, जिधर उसने, वह लकड़ी का मकान देखा था।

इस समय उस स्थान पर सबकुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा था। अब वहां पर बहुत से मकान बन चुके थे, पर शलाका को उस मकान की मंदिर से दूरी और उसका कोण याद था, इसलिये वह बिना कहीं रुके आगे बढ़ रही थी।

अब शलाका एक स्थान पर जाकर रुक गई। उसके सामने एक पक्का और काफी अच्छा मकान बना था।

शलाका ने एक बार फिर पलटकर मं..दिर के प्रांगण को देखा और उस मकान की दूरी और उसके कोण का फिर से अंदाजा लगाया।

अब वह पूरी तरह से संतुष्ट थी कि यह वही मकान है। शलाका जेम्स को लेकर उस मकान के बाहर पहुंच गई।

मकान के बाहर एक नेम प्लेट लगी थी, जिस पर हिंदी भाषा में लिखा था- “शारदा भवन।"

पर जेम्स, उस भाषा को पढ़ नहीं पा रहा था।

“आर्ची, हमें हिंदी भाषा का ज्ञान चाहिये।” शलाका ने आर्ची से कहा।

“भेज दिया, आप चेक कर सकती हैं।” आर्ची ने बिना देर लगाये शलाका और जेम्स के दिमाग में हिंदी भाषा का ज्ञान डाल दिया।

आर्ची के हर एक कार्य पर जेम्स हैरान हो रहा था। अब जेम्स की नजर दोबारा से नेम प्लेट पर गई, पर अब वह साफ-साफ हिंदी भाषा को पढ़ ले रहा था।

अब शलाका ने उस घर पर लगी घंटी पर अपनी उंगली रख दी। अंदर कहीं एक मधुर स्वरलहरी गूंजी।

कुछ देर के बाद एक लगभग 35 वर्षीय महिला ने दरवाजा खोला।
अपने सामने कुछ अजनबियों को देख, उसने पूछ लिया- "कौन हैं आप लोग और आपको किससे मिलना है?"

“जी, हमें इस घर के बारे में कुछ पूछना है? क्या हम अंदर आ सकते हैं?” शलाका ने बिल्कुल साफ हिंदी बोलते हुए कहा।

वह महिला एक विदेशी को इतनी साफ हिंदी बोलते देख खुश हो गई और उन्हें अंदर आने का इशारा किया।

शलाका और जेम्स घर के अंदर आ गये। घर अंदर से काफी सजा हुआ था। उस महिला ने दोनों को सोफे पर बैठने का इशारा किया और स्वयं सामने वाले सोफे पर बैठ गई।

“जी अब बताइये कि आप क्या कह रहीं थीं?” उस महिला ने शलाका से पूछा।

“जी क्षमा चाहती हूं, पर मैं कुछ भी बोलने से पहले आपका परिचय जानना चाहती हूं।” शलाका ने विनम्र शब्दों में निवेदन करते हुए पूछा।

"मेरा नाम शारदा है, मैं ही इस घर की मालकिन हूं।" शारदा ने कहा।

"शारदा जी आज से 30 वर्ष पहले इस मकान में हमारे पिताजी रहते थे। उन्हों ने अपना कुछ सामान, इस घर के तहखाने में रखा था, जिसका पता हमें कुछ दिनों पहले चला है, इसलिये हम यहां आये हैं।” शलाका ने साफ झूठ बोलते हुए कहा।

“जी, पर हमने तो यह मकान, सिर्फ 9 वर्ष पहले ही खरीदा है और इसमें कोई भी तहखाना नहीं है। इसके पहले तो इस मकान में शर्मा जी रहते थे, जो कि अपना सब कुछ बेचकर यहां से हमेशा-हमेशा के लिये अमेरिका चले गये।” शारदा ने कहा- “पर क्या मैं पूछ सकती हूं कि ऐसा क्या था यहां? जिसे आप 30 वर्ष बाद ढूंढने यहां आये हैं?”

“जी, वह काँच का एक अष्टकोण था, जो कि हमारे पिता की आखिरी निशानी था।” शलाका ने अभिनय करते हुए कहा- “पर अब तो उसका मिलना बिल्कुल असंभव ही है।"

शलाका का चेहरा रोने वाले अंदाज में बन गया, जिसे देख शारदा बोल उठी- “आप परेशान मत होइये, मैं आपको शर्मा जी का पता और फोन नंबर दे देती हूं। आप एक बार उनसे पूछ कर देख लीजिये, हो सकता है कि उन्हें कुछ पता हो उस अष्टकोण के बारे में?"

“ठीक है, आप उनका ही पता दे दीजिये, मैं उनसे मिलकर पूछ लूंगी।” शलाका ने खड़े होते हुए कहा" वैसे क्या मैं आपका अंदर वाला कमरा, एक बार देख सकती हूं?"

"हां पर इतने वर्षों के बाद अब उस कमरे में क्या मिलेगा आपको?" शारदा ने आश्चर्य से शलाका को देखते हुए कहा।

"मेरी माँ की यादें...वह उसी कमरे में रहती थीं।" अब तो शलाका ने झूठ बोलने की हद ही कर दी।

जेम्स, शलाका के अद्वितीय अभिनय को देख मन ही मन मुस्कुरा रहा था, पर वह अब भी सबके सामने अपने भावों को सामान्य किये शांति से बैठा था।

“जी हां आप अंदर वाला कमरा देख सकती हैं।” शारदा ने शलाका को अंदर जाने की इजाजत दे दी और उठकर स्वयं भी शलाका के साथ चलने लगीं।

एक सेकेण्ड से भी कम समय में, शलाका ने जेम्स को गहरे अंदाज में देखा।

जेम्स समझ गया कि शलाका नहीं चाहती कि शारदा उसके पीछे-पीछे उस कमरे में जाये, इसलिये वह तुरंत बोल उठा- “आप घर में अकेली ही रहती हैं क्या? मेरा मतलब है कि भाई साहब कहां काम करते हैं?" जेम्स को बोलता देख शारदा वापस से सोफे पर बैठ गई।

“मेरे पति का कपड़ों का व्यापार है, वह इस सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते हैं, इसलिये पूरा घर मुझे ही संभालना पड़ता है।"

शलाका, शारदा को बातों में फंसा देखकर तुरंत अंदर के कमरे में पहुंच गई। शलाका ने उस कमरे के कोण को देख महसूस कर लिया कि यह वही कमरा था, जिसमें उसने आर्यन को उस दिव्य बालक को छिपाते हुए देखा था।

“आर्ची, तुरंत मेरी आँखों में पृथ्वी से धातु ढूंढने वाला स्कैनर डालो।” शलाका ने आर्ची से कहा।

आर्ची ने तुरंत शलाका की आँख में स्कैनर डाल दिया। अब शलाका तेजी से पूरे कमरे की जमीन को स्कैन करके, उसके नीचे देखने लगी।

पर पूरे कमरे को स्कैन करने के बाद भी उसे जमीन में किसी प्रकार का धातु का कोई टुकड़ा नहीं दिखाई दिया।

“यहां पर अमरत्व की धातु वाली शीशी नहीं है, इसका साफ मतलब है कि किसी ने उस अष्टकोण से उस दिव्य बालक को निकाल लिया है?...अब...अब तो...शारदा से नंबर लेकर, एक बार शर्मा से भी बात करनी होगी, हो सकता है कि उसे अष्टकोण का पता हो?" यह सोच शलाका ने अपने चेहरे पर फिर से रोने वाले भाव लाये और वापस जेम्स के पास आ गई।

"अच्छा शारदा जी, आप वो शर्मा जी का पता और नंबर दे दीजिये....मैं एक बार उनसे बात करके भी देख लेती हूं।” शलाका ने शारदा की ओर देखते हुए कहा "वैसे शर्मा जी के घर में कौन-कौन है?"

"कौन...कौन....क्या? बस 3 ही लोग हैं उनके परिवार में शर्मा जी, उनकी पत्नि गायत्री और उनका बेटा देवोम।" शारदा ने पास की टेबल पर रखी अपनी डायरी उठाई और उसके पन्ने पलटकर शर्मा जी का नंबर ढूंढने लगी।

"उनके और बच्चे नहीं हैं क्या?" जेम्स ने शारदा को देखते हुए पूछा।

"और बच्चे?....अरे 50 वर्ष की उम्र में तो उन्हें बेटा हुआ था...अब उसके बाद और बच्चे कहां से आते?" शारदा ने एक पन्ने पर शर्मा जी का पता लिखते हुए कहा।

शारदा की बात सुन, इस बार शलाका का माथा ठनका।

"इस उम्र में बेटा?” शलाका ने आश्चर्यचकित होने का अभिनय किया।

"हां...कुछ लोग तो कहते हैं कि उनके बुढ़ापे को देख ईश्वर ने ही उनकी सुन ली...पर जो भी कहो....देवोम है बहुत कमाल का? बिल्कुल देवताओं सा तेज है उसके चेहरे पर इसीलिये तो शर्मा जी ने उसका नाम देवोम रखा था।...किसी ने सही कहा है, ईश्वर की माया अपरम्पार है।"

यह कहकर शारदा ने एक कागज शलाका की ओर बढ़ दिया, इस कागज में लिखा था “महेन्द्र शर्मा, 127B, 6 स्ट्रीट, मैनहट्टन, न्यूयार्क, अमेरिका” इसके बाद एक फोन नंबर दिया हुआ था।

"जी आपके सहयोग के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।” यह कहकर, शलाका ने वह कागज का टुकड़ा शारदा से ले लिया और जेम्स के साथ बाहर की ओर निकल गई।

जाने क्यों शलाका को विश्वास हो चला था कि देवोम ही वह दिव्य बालक है? अब वह तेजी से वापस रुद्र सागर की ओर चल दी।

“क्या अब हम न्यूयार्क जायेंगे?" जेम्स ने शलाका से पूछा।

“हां ! हम न्यूयार्क जायेंगे, पर अभी नहीं। अभी मुझे कुछ और काम निपटाने हैं। इसलिये पहले हमें वापस अंटार्कटिका चलना होगा।” शलाका ने अपना सिर हिलाते हुए कहा- “वैसे जब तक मैं उस दिव्य बालक को ढूंढ नहीं लेती, तब तक मुझे शांति नहीं मिलेगी?"

“शलाका !" जेम्स ने एक जगह रुकते हुए कहा “आप तो देवी हो। हो सकता है कि आपको भूख ना लगती हो?"

जेम्स की बात सुन शलाका एक झटके से रुकी और पलटकर जेम्स को देखने लगी। फिर मुस्कुराकर, एक पास वाले रेस्टोरेंट की ओर बढ़ गई।

जेम्स भी मुस्कुराकर शलाका के पीछे चल दिया।

जारी रहेगा_____✍️

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Nice and Beutiful
 

Ajju Landwalia

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#190.

चैपटर-5
अश्रुधारा: (तिलिस्मा 5.12)

सभी रेटिना के द्वार के दूसरी ओर पहुंच गये थे, परंतु सभी ने देख लिया था कि जेनिथ जुगनू पर नहीं बैठ पा रही है।

लेकिन इस समय जेनिथ की मदद करने के लिये, कोई भी जुगनू को पीछे लेकर नहीं जा सकता था, क्यों कि जुगनू स्वयं की इच्छा से काम कर रहे थे।

अब रेटिना का द्वार धीरे-धीरे बंद होने लगा था। सभी के चेहरे पर चिंता के भाव साफ झलक रहे थे। पर इससे पहले कि रेटिना का द्वार पूरी तरह से बंद हो पाता, कि तभी जेनिथ के जुगनू ने अंदर प्रवेश किया।

जेनिथ को देख सभी खुश हो गये। अब सभी के जुगनू तेजी से एक चमकीली सुरंग के रास्ते से गुजर रहे थे।

कुछ ही देर में सभी को काफी दूर एक बड़ी सी मशीन दिखाई दी, जिसका ऊपरी हिस्सा किसी दिमाग की भांति महसूस हो रहा था।

उस मशीन के निचले सिरे पर, एक कंम्प्यूटर स्क्रीन लगी हुई थी, जो कि एक टाइपिंग पैड से जुड़ी हुई थी।

उस मशीन के दिमाग वाले स्थान पर एक बड़ा सा सुराख बना था। सभी जुगनू उसी सुराख में प्रविष्ठ हो रहे थे।

यह देखकर शैफाली ने सभी से चीखकर कहा- "हमें उस सुराख में, जुगनू के घुसने के पहले ही जुगनू से कूदना होगा।"

सभी ने शैफाली की बात सुन सहमति से सिर हिला दिया। चूंकि शैफाली का जुगनू सबसे आगे था, इसलिये जैसे ही ब्रेन मशीन के पास पहुंची, वह जुगनू से कूद कर जमीन पर आ गई।

शैफाली को कूदते देख सभी ने एक-एक कर, अपने-अपने जुगनू से छलांग लगा दी।

सभी जुगनू अब उस ब्रेन मशीन में समा गये और शैफाली सहित सभी लोग उस ब्रेन मशीन के सामने खड़े होकर उसे निहार रहे थे।

“कैप्टेन, यह तो किसी प्रकार की विज्ञान की दुनिया लग रही है?” क्रिस्टी ने सभी ओर देखते हुए कहा- “और उधर देखिये कैप्टेन, उस ओर किसी प्रकार का रेलवे प्लेटफार्म दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे हम किसी रेलवे स्टेशन पर हैं?"

लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ और बोल पाता, उस पूरे वातावरण में एक स्त्री के स्वर में अनाउन्समेंट सुनाई देने लगा- “अश्रुधारा जाने वाली ट्रेन, कुछ ही देर में प्लेटफार्म पर आ रही है, कृपया टिकट लेकर अपनी सीट को सुरक्षित कर लें।”

“यह सब क्या हो रहा है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली से पूछा- “तुम्हें कुछ समझ में आ रहा
है?"

"हां !" शैफाली ने अपना सिर हां के अंदाज में हिलाते हुए कहा- “अश्रुधारा मतलब आँसू की बूंद। शायद आने वाली ट्रेन हमें लैक्राईमल ग्लैंड तक ले जायेगी? पर यह टिकट का झंझट नहीं समझ आया? पता नहीं ये टिकट मिलेगा कहां से?"

"मुझे लगता है कि हमें ट्रेन का टिकट इस ब्रेन मशीन से ही मिलेगा।” सुयश ने कहा और ध्यान से उस ब्रेन मशीन को देखने लगा।

तभी सुयश को ब्रेन मशीन के की-बोर्ड पर एक साउन्ड का विकल्प दिखाई दिया। सुयश ने उस साउन्ड के बटन को प्रेस कर दिया।

उस बटन को प्रेस करते ही वातावरण में एक पुरुष की आवाज गूंजी- “ब्रेन सेंटर पर आपका स्वागत है। अगर आप अश्रुधारा की ओर जाना चाहते हैं, तो कृपया 1 दबाएं।" सुयश ने यह सुन की-बोर्ड पर लगा 1 नंबर का बटन दबा दिया।

“अब आप यात्रियों की संख्या सुनिश्चित करें।" मशीन से आवाज आई। सुयश ने इस बार की-बोर्ड पर लगे 6 नंबर के बटन को दबा दिया।

"आपकी संख्या 6 है, इसलिये आपको 12 मुद्रा, मशीन के अंदर डालनी होगी।"

मुद्रा का नाम सुनते ही सुयश सकते की सी हालत में आ गया और पीछे मुड़कर सभी की ओर देखने लगा।

“लगता है कि कार्य में कहीं मुद्राएं भी छिपी हुई थीं, जो हममें से किसी को दिखाई नहीं दी।” शैफाली ने मुंह बनाते हुए कहा- “अब बिना मुद्रा के यह मशीन हमें आगे जाने नहीं देगी और हम पीछे जाकर मुद्रा ढूंढ भी नहीं सकते।”

"तो सीधे तौर पर बोलते हैं कि हम पूरी तरह से अब इस मशीन में फंस चुके हैं।” ऐलेक्स ने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा।

तभी मशीन के अंदर से पुनः आवाज आई- “अगर आपके पास 12 मुद्रा नहीं हैं, तो आपको मेरे 12 आसान सवालों का जवाब देना होगा। अगर आपने उचित उत्तर दिया तो आप अपनी अपनी योग्यता सिद्ध कर टिकट को प्राप्त कर सकेंगे और अगर आपने एक भी प्रश्न का गलत उत्तर दिया, तो आप हमेशा के लिये इसी स्थान पर फंस जायेंगे। अगर आप प्रश्नों का विकल्प चुनना चाहते हैं, तो 1 दबाएं। अगर आप प्रश्नों का विकल्प नहीं चुनना चाहते हैं, तो 2 दबाकर मुझे आराम से सोने का मौका दें।"

"ये लो, अब इस मशीन को भी सोना है।” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा।

ब्रेन मशीन की बात सुन सुयश ने सभी की ओर ऐसे देखा, जैसे कि वह पूछना चाह रहा हो कि अब हमें क्या करना चाहिये?

“मेरे हिसाब से हमें प्रश्नों का विकल्प चुन लेना चाहिये।” तौफीक ने कहा- “इसमें बचने के कुछ चांस हैं, पर यदि हमने विकल्प नहीं चुना, तो फिर पता नहीं आगे क्या होगा?"

सभी ने तौफीक की बात पर सहमति जताई, इसलिये सुयश ने की-बोर्ड पर लगे 1 नंबर के बटन को दबा दिया।

“प्रश्नों का विकल्प चुनने के लिये धन्यवाद। अब हम आपके समक्ष 12 प्रश्नों को एक-एक कर रखेंगे। हर प्रश्न के लिये आपके पास सिर्फ 30 सेकेण्ड का समय रहेगा। आपको अपना जवाब मशीन के की-बोर्ड पर लिखकर देना होगा। तो पहला प्रश्न है:-

“दुनिया भर की करता सैर, बिना धरा पर रखे पैर।" इसी के साथ 30 सेकेण्ड का समय ब्रेन मशीन की स्क्रीन पर दिखाई देने लगा।

किसी को भी ब्रेन मशीन के द्वारा पहेलियां पूछने का अंदाजा नहीं था, ऊपर से समय की बंदिश। इसलिये सभी थोड़ा हड़बड़ा गये।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और सभी तेजी से उस पहेली में उलझे थे कि तभी शैफाली ने तेजी से कहा “सूर्य।"

शैफाली की बात सुन सुयश ने जल्दी से की-बोर्ड पर सूर्य टाइप कर दिया। जैसे ही सुयश ने सूर्य लिखकर ‘इन्टर' का बटन दबाया, मशीन के ऊपर लगी हरी बत्ती जल उठी, जो कि इस बात का द्योतक थी, कि शैफाली के द्वारा बताया गया उत्तर सही था।

“ये एक बार कैश्वर मुझे मिल जाये बस।" ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “पूरी बेइज्जती ही करके मानेगा गर्लफ्रेंड के सामने।" ऐलेक्स के शब्द सुन क्रिस्टी सहित सभी जोर से हंस दिये।

तभी ब्रेन मशीन ने दूसरा सवाल कर दिया:-
"ऐसा क्या है, जो YEAR में एक बा र और WEEK में 2 बार आता है?"

“ये क्या प्रश्न हुआ?” ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “जब कोई चीज WEEK में 2 बार आयेगी, तो वह YEAR में 1 बार कैसे आ सकती है?"

"उत्तर है 'E' अल्फा बेट।" शैफाली ने दोबारा से कहा- “यह YEAR में 1 बार और WEEK में 2 बार आती है।


“वाह!” ऐलेक्स ने शैफाली की प्रशंसा करते हुए कहा- “तुम बताना शैफाली कि तुमने किस स्कूल से पढ़ाई की है, मैं ऑस्ट्रेलिया चलकर, उसी स्कूल में एडमिशन लूंगा।

“बस एक बार ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाओ, फिर मैं तुम्हें घर में ट्यूशन दूंगी।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के गाल पर एक हल्के से चपत लगाते हुए कहा।

उधर सुयश ने मशी न पर लगे 'E' बटन को दबा दिया था। फिर से हरी बत्ती ने जलकर, उत्तर के सही होने की पुष्टि की।

अब मशीन ने तीसरा प्रश्न पूछ लिया:- “कमरे में बैठी इक रानी, सिर पर आग, बदन में पानी।"

सुयश को यह उत्तर किसी से पूछने की जरुरत नहीं पड़ी, क्यों कि इस प्रश्न का उत्तर उसे स्वयं पता था।
इसलिये उसने की-बोर्ड पर 'मोमबत्ती' लिख दिया। उत्तर बिल्कुल सही था।

“मुझे लगा कि इस प्रश्न का उत्तर 'क्रिस्टी' होगा। ऐलेक्स ने एक बार फिर क्रिस्टी को छेड़ा- "इसके भी सिर पर आग रहती है।"

“सिर्फ सिर पर।” क्रिस्टी ने इठलाते हुए ऐलेक्स का हाथ पकड़ते हुए कहा।

ऐलेक्स क्रिस्टी को ऐसे करता देख हाथ छुड़ाकर, शैफाली के पीछे जाकर छिप गया- “गंदी लड़की!"

कुछ भी हो, पर इस तिलिस्मा में क्रिस्टी और ऐलेक्स की वजह से माहौल हमेशा हल्का रहता था। सभी इनकी चुहलबाजियों से हमेशा हंसते रहते थे।

तभी ब्रेन मशीन ने चौथा प्रश्न कर लिया "ENGLISH में कितने अक्षर होते हैं?"

"26 अक्षर! ये मुझे आता है।” ऐलेक्स ने खुशी से चिल्ला कर कहा। पर सुयश ने 26 की-बोर्ड पर टाइप नहीं किया, वह तो इस सोच में था कि ब्रेन मशीन ने इतना आसान प्रश्न पूछा क्यों?

"7 अक्षर।" तभी शैफाली ने जवाब दिया- "ब्रेन मशीन ने हमसे ‘ENGLISH भाषा' के अक्षर नहीं पूछे हैं, वह सिर्फ ‘ENGLISH शब्द' में कितने अक्षर होते हैं? यह पूछ रहा है।”

शैफाली का तर्क सुनकर सुयश मुस्कुरा दिया, उसने शैफाली के कहे अनुसार की-बोर्ड पर 7 अंक टाइप कर दिया।

7 टाइप करते ही एक बार फिर मशीन पर लगी हरी बत्ती जल उठी। अब ब्रेन मशीन ने सभी से पांचवां प्रश्न कर लिया।

“सागर की बूंद सी है, मेरी जलधारा, भावों की नाव पर निवास है हमारा।"

सभी तेजी से इस प्रश्न के उत्तर के बारे में सोचने लगे कि तभी प्लेटफार्म पर ट्रेन ने सीटी बजाते हुए प्रवेश किया। एक बार के लिये सभी की नजर प्रश्न से हटकर ट्रेन की ओर चली गई।


बड़ी ही विचित्र ट्रेन थी। ट्रेन के इंजन पर बड़ी सी आँख बनी थी और उस पर लिखा था- 'नेत्र एक्सप्रेस'। इंजन के पीछे एक ही डिब्बा था, जिसकी आकृति बिल्कुल नाव के समान थी।

उस नाव को पारदर्शी काँच से ढका गया था, जिसकी वजह से वह ट्रेन काफी आकर्षक लग रही थी। अंदर बैठने के लिये कुर्सियां और मेज दिखाई दे रहे थे, जो उसकी भव्यता को चार चाँद लगा रहे थे।

"दोस्तों हमारा समय तेजी से बीत रहा है, हमारे पास अब बस 12 सेकेण्ड ही बचे हैं।” सुयश ने सबका ध्यान ट्रेन से अपनी ओर कराते हुए कहा।

“आँसू।” जेनिथ ने अभी भी ट्रेन की ओर देखते हुए कहा- “पांचवे प्रश्न का उत्तर आँसू है, क्यों कि आँसू में भी समुद्र के पानी के समान नमक पाया जाता है और वह आँख में रहती है, जिसका आकार भी नाव के समान ही होता है।"

सुयश ने जेनिथ की बात सुन की-बोर्ड पर जल्दी से आँसू टाइप कर दिया। हरी बत्ती एक बार पुनः जल उठी।

अब सबका ध्यान ट्रेन से हटकर प्रश्नों की ओर आ गया था। तभी 'ब्रेन मशीन' ने छठा प्रश्न कर दिया
“चार कोनों का नगर बना, चार कुएं बिन पानी, कुछ सैनिक के घेरे में, छिपी हुई एक रानी।"

इस प्रश्न का उत्तर क्रिस्टी को पहले से ही पता था, इसलिये उसने झट से बोल दिया- “कैरमबोर्ड"

सुयश ने यह उत्तर भी मशीन को बता दिया। हर बार की तरह यह उत्तर भी सही था। अब 'ब्रेन मशीन' ने सातवां प्रश्न कर दिया “अमेरिका और यूरोप के बीच में क्या है?"


“अब कैस्पर पगला गया है। कितने आसान प्रश्न पूछ रहा है?” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा- “अरे इसका उत्तर है समुद्र।"

“नहीं, इस प्रश्न का उत्तर समुद्र नहीं हो सकता। सुयश ने सोचते हुए कहा- “ऐसे बच्चों जैसे प्रश्न कैश्वर हमारे लिये नहीं बनाएगा।"

अब सुयश शैफाली की ओर देखने लगा, जो कि अब भी कुछ सोच रही थी। समय तेजी से बीत रहा था, पर समुद्र के सिवा किसी को कोई भी दूसरा उत्तर समझ नहीं आ रहा था।

अब सिर्फ 7 सेकेण्ड बचे थे। घड़ी की सुई लगातार आगे बढती जा रही थी। “6.....5......4.......3...." तभी शैफाली ने चीखकर कहा- “उत्तर है 'और'।"

सुयश इस चीज को समझ नहीं पाया, पर उसने जल्दी से इस उत्तर को की-बोर्ड पर टाइप कर दिया और ऊपर लगी हरी बत्ती की ओर देखने लगा।

तभी हरी बत्ती पुनः जल उठी।

“ब्रेन मशीन जानबूझकर हमसे पेचीदा प्रश्न पूछ रहा है, जिसका उत्तर हमें सामान्य सा लगे, पर वह गलत हो। जैसे उसने इस प्रश्न में कहीं ये नहीं पूछा कि अमेरिका और यूरोप देश के बीच क्या है? उसने यह पूछा कि अमेरिका और यूरोप के बीच क्या है। अब अमेरिका और यूरोप शब्द के बीच तो 'और' ही है ना।"

शैफाली का लॉजिक सुन सभी ब्रेन मशीन से और भी सतर्क हो गये।

अब ब्रेन मशीन ने आठवां प्रश्न कर दिया-
“एक किले के 2 हैं द्वार, उसमें सैनिक भरे अपार, टकरायें जब दीवारों से, खत्म करें अपना संसार।

धीरे-धीरे ब्रेन मशीन की पहेलियां कठिन होती जा रहीं थीं। इस प्रश्न का उत्तर पहले से किसी को नहीं पता था, इसलिये सभी एक-दूसरे का मुंह देखने लगे।

स्क्रीन पर समय एक बार फिर शुरु हो चुका था। इस बार इस प्रश्न का जवाब सूझा तौफीक को "माचिस"

तौफीक के शब्द सुन सभी को स्वयं पर हंसी आ गई, क्यों कि इस पहेली का उत्तर ज्यादा कठिन नहीं था, पर किसी को समझ नहीं आ रहा था।

सुयश ने इस उत्तर को भी मशीन को बता दिया, यह उत्तर भी सही था।


जारी रहेगा_____✍️

Bahut shandar update he Raj_sharma Bhai

Ye Ke-Ishwar bhi inke pure maje le raha he...........

Ek se ek paheli bana rakhi he bande ne.............

Keep rocking Bro
 

dhparikh

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#190.

चैपटर-5
अश्रुधारा: (तिलिस्मा 5.12)

सभी रेटिना के द्वार के दूसरी ओर पहुंच गये थे, परंतु सभी ने देख लिया था कि जेनिथ जुगनू पर नहीं बैठ पा रही है।

लेकिन इस समय जेनिथ की मदद करने के लिये, कोई भी जुगनू को पीछे लेकर नहीं जा सकता था, क्यों कि जुगनू स्वयं की इच्छा से काम कर रहे थे।

अब रेटिना का द्वार धीरे-धीरे बंद होने लगा था। सभी के चेहरे पर चिंता के भाव साफ झलक रहे थे। पर इससे पहले कि रेटिना का द्वार पूरी तरह से बंद हो पाता, कि तभी जेनिथ के जुगनू ने अंदर प्रवेश किया।

जेनिथ को देख सभी खुश हो गये। अब सभी के जुगनू तेजी से एक चमकीली सुरंग के रास्ते से गुजर रहे थे।

कुछ ही देर में सभी को काफी दूर एक बड़ी सी मशीन दिखाई दी, जिसका ऊपरी हिस्सा किसी दिमाग की भांति महसूस हो रहा था।

उस मशीन के निचले सिरे पर, एक कंम्प्यूटर स्क्रीन लगी हुई थी, जो कि एक टाइपिंग पैड से जुड़ी हुई थी।

उस मशीन के दिमाग वाले स्थान पर एक बड़ा सा सुराख बना था। सभी जुगनू उसी सुराख में प्रविष्ठ हो रहे थे।

यह देखकर शैफाली ने सभी से चीखकर कहा- "हमें उस सुराख में, जुगनू के घुसने के पहले ही जुगनू से कूदना होगा।"

सभी ने शैफाली की बात सुन सहमति से सिर हिला दिया। चूंकि शैफाली का जुगनू सबसे आगे था, इसलिये जैसे ही ब्रेन मशीन के पास पहुंची, वह जुगनू से कूद कर जमीन पर आ गई।

शैफाली को कूदते देख सभी ने एक-एक कर, अपने-अपने जुगनू से छलांग लगा दी।

सभी जुगनू अब उस ब्रेन मशीन में समा गये और शैफाली सहित सभी लोग उस ब्रेन मशीन के सामने खड़े होकर उसे निहार रहे थे।

“कैप्टेन, यह तो किसी प्रकार की विज्ञान की दुनिया लग रही है?” क्रिस्टी ने सभी ओर देखते हुए कहा- “और उधर देखिये कैप्टेन, उस ओर किसी प्रकार का रेलवे प्लेटफार्म दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे हम किसी रेलवे स्टेशन पर हैं?"

लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ और बोल पाता, उस पूरे वातावरण में एक स्त्री के स्वर में अनाउन्समेंट सुनाई देने लगा- “अश्रुधारा जाने वाली ट्रेन, कुछ ही देर में प्लेटफार्म पर आ रही है, कृपया टिकट लेकर अपनी सीट को सुरक्षित कर लें।”

“यह सब क्या हो रहा है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली से पूछा- “तुम्हें कुछ समझ में आ रहा
है?"

"हां !" शैफाली ने अपना सिर हां के अंदाज में हिलाते हुए कहा- “अश्रुधारा मतलब आँसू की बूंद। शायद आने वाली ट्रेन हमें लैक्राईमल ग्लैंड तक ले जायेगी? पर यह टिकट का झंझट नहीं समझ आया? पता नहीं ये टिकट मिलेगा कहां से?"

"मुझे लगता है कि हमें ट्रेन का टिकट इस ब्रेन मशीन से ही मिलेगा।” सुयश ने कहा और ध्यान से उस ब्रेन मशीन को देखने लगा।

तभी सुयश को ब्रेन मशीन के की-बोर्ड पर एक साउन्ड का विकल्प दिखाई दिया। सुयश ने उस साउन्ड के बटन को प्रेस कर दिया।

उस बटन को प्रेस करते ही वातावरण में एक पुरुष की आवाज गूंजी- “ब्रेन सेंटर पर आपका स्वागत है। अगर आप अश्रुधारा की ओर जाना चाहते हैं, तो कृपया 1 दबाएं।" सुयश ने यह सुन की-बोर्ड पर लगा 1 नंबर का बटन दबा दिया।

“अब आप यात्रियों की संख्या सुनिश्चित करें।" मशीन से आवाज आई। सुयश ने इस बार की-बोर्ड पर लगे 6 नंबर के बटन को दबा दिया।

"आपकी संख्या 6 है, इसलिये आपको 12 मुद्रा, मशीन के अंदर डालनी होगी।"

मुद्रा का नाम सुनते ही सुयश सकते की सी हालत में आ गया और पीछे मुड़कर सभी की ओर देखने लगा।

“लगता है कि कार्य में कहीं मुद्राएं भी छिपी हुई थीं, जो हममें से किसी को दिखाई नहीं दी।” शैफाली ने मुंह बनाते हुए कहा- “अब बिना मुद्रा के यह मशीन हमें आगे जाने नहीं देगी और हम पीछे जाकर मुद्रा ढूंढ भी नहीं सकते।”

"तो सीधे तौर पर बोलते हैं कि हम पूरी तरह से अब इस मशीन में फंस चुके हैं।” ऐलेक्स ने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा।

तभी मशीन के अंदर से पुनः आवाज आई- “अगर आपके पास 12 मुद्रा नहीं हैं, तो आपको मेरे 12 आसान सवालों का जवाब देना होगा। अगर आपने उचित उत्तर दिया तो आप अपनी अपनी योग्यता सिद्ध कर टिकट को प्राप्त कर सकेंगे और अगर आपने एक भी प्रश्न का गलत उत्तर दिया, तो आप हमेशा के लिये इसी स्थान पर फंस जायेंगे। अगर आप प्रश्नों का विकल्प चुनना चाहते हैं, तो 1 दबाएं। अगर आप प्रश्नों का विकल्प नहीं चुनना चाहते हैं, तो 2 दबाकर मुझे आराम से सोने का मौका दें।"

"ये लो, अब इस मशीन को भी सोना है।” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा।

ब्रेन मशीन की बात सुन सुयश ने सभी की ओर ऐसे देखा, जैसे कि वह पूछना चाह रहा हो कि अब हमें क्या करना चाहिये?

“मेरे हिसाब से हमें प्रश्नों का विकल्प चुन लेना चाहिये।” तौफीक ने कहा- “इसमें बचने के कुछ चांस हैं, पर यदि हमने विकल्प नहीं चुना, तो फिर पता नहीं आगे क्या होगा?"

सभी ने तौफीक की बात पर सहमति जताई, इसलिये सुयश ने की-बोर्ड पर लगे 1 नंबर के बटन को दबा दिया।

“प्रश्नों का विकल्प चुनने के लिये धन्यवाद। अब हम आपके समक्ष 12 प्रश्नों को एक-एक कर रखेंगे। हर प्रश्न के लिये आपके पास सिर्फ 30 सेकेण्ड का समय रहेगा। आपको अपना जवाब मशीन के की-बोर्ड पर लिखकर देना होगा। तो पहला प्रश्न है:-

“दुनिया भर की करता सैर, बिना धरा पर रखे पैर।" इसी के साथ 30 सेकेण्ड का समय ब्रेन मशीन की स्क्रीन पर दिखाई देने लगा।

किसी को भी ब्रेन मशीन के द्वारा पहेलियां पूछने का अंदाजा नहीं था, ऊपर से समय की बंदिश। इसलिये सभी थोड़ा हड़बड़ा गये।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और सभी तेजी से उस पहेली में उलझे थे कि तभी शैफाली ने तेजी से कहा “सूर्य।"

शैफाली की बात सुन सुयश ने जल्दी से की-बोर्ड पर सूर्य टाइप कर दिया। जैसे ही सुयश ने सूर्य लिखकर ‘इन्टर' का बटन दबाया, मशीन के ऊपर लगी हरी बत्ती जल उठी, जो कि इस बात का द्योतक थी, कि शैफाली के द्वारा बताया गया उत्तर सही था।

“ये एक बार कैश्वर मुझे मिल जाये बस।" ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “पूरी बेइज्जती ही करके मानेगा गर्लफ्रेंड के सामने।" ऐलेक्स के शब्द सुन क्रिस्टी सहित सभी जोर से हंस दिये।

तभी ब्रेन मशीन ने दूसरा सवाल कर दिया:-
"ऐसा क्या है, जो YEAR में एक बा र और WEEK में 2 बार आता है?"

“ये क्या प्रश्न हुआ?” ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “जब कोई चीज WEEK में 2 बार आयेगी, तो वह YEAR में 1 बार कैसे आ सकती है?"

"उत्तर है 'E' अल्फा बेट।" शैफाली ने दोबारा से कहा- “यह YEAR में 1 बार और WEEK में 2 बार आती है।


“वाह!” ऐलेक्स ने शैफाली की प्रशंसा करते हुए कहा- “तुम बताना शैफाली कि तुमने किस स्कूल से पढ़ाई की है, मैं ऑस्ट्रेलिया चलकर, उसी स्कूल में एडमिशन लूंगा।

“बस एक बार ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाओ, फिर मैं तुम्हें घर में ट्यूशन दूंगी।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के गाल पर एक हल्के से चपत लगाते हुए कहा।

उधर सुयश ने मशी न पर लगे 'E' बटन को दबा दिया था। फिर से हरी बत्ती ने जलकर, उत्तर के सही होने की पुष्टि की।

अब मशीन ने तीसरा प्रश्न पूछ लिया:- “कमरे में बैठी इक रानी, सिर पर आग, बदन में पानी।"

सुयश को यह उत्तर किसी से पूछने की जरुरत नहीं पड़ी, क्यों कि इस प्रश्न का उत्तर उसे स्वयं पता था।
इसलिये उसने की-बोर्ड पर 'मोमबत्ती' लिख दिया। उत्तर बिल्कुल सही था।

“मुझे लगा कि इस प्रश्न का उत्तर 'क्रिस्टी' होगा। ऐलेक्स ने एक बार फिर क्रिस्टी को छेड़ा- "इसके भी सिर पर आग रहती है।"

“सिर्फ सिर पर।” क्रिस्टी ने इठलाते हुए ऐलेक्स का हाथ पकड़ते हुए कहा।

ऐलेक्स क्रिस्टी को ऐसे करता देख हाथ छुड़ाकर, शैफाली के पीछे जाकर छिप गया- “गंदी लड़की!"

कुछ भी हो, पर इस तिलिस्मा में क्रिस्टी और ऐलेक्स की वजह से माहौल हमेशा हल्का रहता था। सभी इनकी चुहलबाजियों से हमेशा हंसते रहते थे।

तभी ब्रेन मशीन ने चौथा प्रश्न कर लिया "ENGLISH में कितने अक्षर होते हैं?"

"26 अक्षर! ये मुझे आता है।” ऐलेक्स ने खुशी से चिल्ला कर कहा। पर सुयश ने 26 की-बोर्ड पर टाइप नहीं किया, वह तो इस सोच में था कि ब्रेन मशीन ने इतना आसान प्रश्न पूछा क्यों?

"7 अक्षर।" तभी शैफाली ने जवाब दिया- "ब्रेन मशीन ने हमसे ‘ENGLISH भाषा' के अक्षर नहीं पूछे हैं, वह सिर्फ ‘ENGLISH शब्द' में कितने अक्षर होते हैं? यह पूछ रहा है।”

शैफाली का तर्क सुनकर सुयश मुस्कुरा दिया, उसने शैफाली के कहे अनुसार की-बोर्ड पर 7 अंक टाइप कर दिया।

7 टाइप करते ही एक बार फिर मशीन पर लगी हरी बत्ती जल उठी। अब ब्रेन मशीन ने सभी से पांचवां प्रश्न कर लिया।

“सागर की बूंद सी है, मेरी जलधारा, भावों की नाव पर निवास है हमारा।"

सभी तेजी से इस प्रश्न के उत्तर के बारे में सोचने लगे कि तभी प्लेटफार्म पर ट्रेन ने सीटी बजाते हुए प्रवेश किया। एक बार के लिये सभी की नजर प्रश्न से हटकर ट्रेन की ओर चली गई।


बड़ी ही विचित्र ट्रेन थी। ट्रेन के इंजन पर बड़ी सी आँख बनी थी और उस पर लिखा था- 'नेत्र एक्सप्रेस'। इंजन के पीछे एक ही डिब्बा था, जिसकी आकृति बिल्कुल नाव के समान थी।

उस नाव को पारदर्शी काँच से ढका गया था, जिसकी वजह से वह ट्रेन काफी आकर्षक लग रही थी। अंदर बैठने के लिये कुर्सियां और मेज दिखाई दे रहे थे, जो उसकी भव्यता को चार चाँद लगा रहे थे।

"दोस्तों हमारा समय तेजी से बीत रहा है, हमारे पास अब बस 12 सेकेण्ड ही बचे हैं।” सुयश ने सबका ध्यान ट्रेन से अपनी ओर कराते हुए कहा।

“आँसू।” जेनिथ ने अभी भी ट्रेन की ओर देखते हुए कहा- “पांचवे प्रश्न का उत्तर आँसू है, क्यों कि आँसू में भी समुद्र के पानी के समान नमक पाया जाता है और वह आँख में रहती है, जिसका आकार भी नाव के समान ही होता है।"

सुयश ने जेनिथ की बात सुन की-बोर्ड पर जल्दी से आँसू टाइप कर दिया। हरी बत्ती एक बार पुनः जल उठी।

अब सबका ध्यान ट्रेन से हटकर प्रश्नों की ओर आ गया था। तभी 'ब्रेन मशीन' ने छठा प्रश्न कर दिया
“चार कोनों का नगर बना, चार कुएं बिन पानी, कुछ सैनिक के घेरे में, छिपी हुई एक रानी।"

इस प्रश्न का उत्तर क्रिस्टी को पहले से ही पता था, इसलिये उसने झट से बोल दिया- “कैरमबोर्ड"

सुयश ने यह उत्तर भी मशीन को बता दिया। हर बार की तरह यह उत्तर भी सही था। अब 'ब्रेन मशीन' ने सातवां प्रश्न कर दिया “अमेरिका और यूरोप के बीच में क्या है?"


“अब कैस्पर पगला गया है। कितने आसान प्रश्न पूछ रहा है?” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा- “अरे इसका उत्तर है समुद्र।"

“नहीं, इस प्रश्न का उत्तर समुद्र नहीं हो सकता। सुयश ने सोचते हुए कहा- “ऐसे बच्चों जैसे प्रश्न कैश्वर हमारे लिये नहीं बनाएगा।"

अब सुयश शैफाली की ओर देखने लगा, जो कि अब भी कुछ सोच रही थी। समय तेजी से बीत रहा था, पर समुद्र के सिवा किसी को कोई भी दूसरा उत्तर समझ नहीं आ रहा था।

अब सिर्फ 7 सेकेण्ड बचे थे। घड़ी की सुई लगातार आगे बढती जा रही थी। “6.....5......4.......3...." तभी शैफाली ने चीखकर कहा- “उत्तर है 'और'।"

सुयश इस चीज को समझ नहीं पाया, पर उसने जल्दी से इस उत्तर को की-बोर्ड पर टाइप कर दिया और ऊपर लगी हरी बत्ती की ओर देखने लगा।

तभी हरी बत्ती पुनः जल उठी।

“ब्रेन मशीन जानबूझकर हमसे पेचीदा प्रश्न पूछ रहा है, जिसका उत्तर हमें सामान्य सा लगे, पर वह गलत हो। जैसे उसने इस प्रश्न में कहीं ये नहीं पूछा कि अमेरिका और यूरोप देश के बीच क्या है? उसने यह पूछा कि अमेरिका और यूरोप के बीच क्या है। अब अमेरिका और यूरोप शब्द के बीच तो 'और' ही है ना।"

शैफाली का लॉजिक सुन सभी ब्रेन मशीन से और भी सतर्क हो गये।

अब ब्रेन मशीन ने आठवां प्रश्न कर दिया-
“एक किले के 2 हैं द्वार, उसमें सैनिक भरे अपार, टकरायें जब दीवारों से, खत्म करें अपना संसार।

धीरे-धीरे ब्रेन मशीन की पहेलियां कठिन होती जा रहीं थीं। इस प्रश्न का उत्तर पहले से किसी को नहीं पता था, इसलिये सभी एक-दूसरे का मुंह देखने लगे।

स्क्रीन पर समय एक बार फिर शुरु हो चुका था। इस बार इस प्रश्न का जवाब सूझा तौफीक को "माचिस"

तौफीक के शब्द सुन सभी को स्वयं पर हंसी आ गई, क्यों कि इस पहेली का उत्तर ज्यादा कठिन नहीं था, पर किसी को समझ नहीं आ रहा था।

सुयश ने इस उत्तर को भी मशीन को बता दिया, यह उत्तर भी सही था।


जारी रहेगा_____✍️
Nice update....
 

Dhakad boy

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#190.

चैपटर-5
अश्रुधारा: (तिलिस्मा 5.12)

सभी रेटिना के द्वार के दूसरी ओर पहुंच गये थे, परंतु सभी ने देख लिया था कि जेनिथ जुगनू पर नहीं बैठ पा रही है।

लेकिन इस समय जेनिथ की मदद करने के लिये, कोई भी जुगनू को पीछे लेकर नहीं जा सकता था, क्यों कि जुगनू स्वयं की इच्छा से काम कर रहे थे।

अब रेटिना का द्वार धीरे-धीरे बंद होने लगा था। सभी के चेहरे पर चिंता के भाव साफ झलक रहे थे। पर इससे पहले कि रेटिना का द्वार पूरी तरह से बंद हो पाता, कि तभी जेनिथ के जुगनू ने अंदर प्रवेश किया।

जेनिथ को देख सभी खुश हो गये। अब सभी के जुगनू तेजी से एक चमकीली सुरंग के रास्ते से गुजर रहे थे।

कुछ ही देर में सभी को काफी दूर एक बड़ी सी मशीन दिखाई दी, जिसका ऊपरी हिस्सा किसी दिमाग की भांति महसूस हो रहा था।

उस मशीन के निचले सिरे पर, एक कंम्प्यूटर स्क्रीन लगी हुई थी, जो कि एक टाइपिंग पैड से जुड़ी हुई थी।

उस मशीन के दिमाग वाले स्थान पर एक बड़ा सा सुराख बना था। सभी जुगनू उसी सुराख में प्रविष्ठ हो रहे थे।

यह देखकर शैफाली ने सभी से चीखकर कहा- "हमें उस सुराख में, जुगनू के घुसने के पहले ही जुगनू से कूदना होगा।"

सभी ने शैफाली की बात सुन सहमति से सिर हिला दिया। चूंकि शैफाली का जुगनू सबसे आगे था, इसलिये जैसे ही ब्रेन मशीन के पास पहुंची, वह जुगनू से कूद कर जमीन पर आ गई।

शैफाली को कूदते देख सभी ने एक-एक कर, अपने-अपने जुगनू से छलांग लगा दी।

सभी जुगनू अब उस ब्रेन मशीन में समा गये और शैफाली सहित सभी लोग उस ब्रेन मशीन के सामने खड़े होकर उसे निहार रहे थे।

“कैप्टेन, यह तो किसी प्रकार की विज्ञान की दुनिया लग रही है?” क्रिस्टी ने सभी ओर देखते हुए कहा- “और उधर देखिये कैप्टेन, उस ओर किसी प्रकार का रेलवे प्लेटफार्म दिखाई दे रहा है। ऐसा लग रहा है कि जैसे हम किसी रेलवे स्टेशन पर हैं?"

लेकिन इससे पहले कि कोई कुछ और बोल पाता, उस पूरे वातावरण में एक स्त्री के स्वर में अनाउन्समेंट सुनाई देने लगा- “अश्रुधारा जाने वाली ट्रेन, कुछ ही देर में प्लेटफार्म पर आ रही है, कृपया टिकट लेकर अपनी सीट को सुरक्षित कर लें।”

“यह सब क्या हो रहा है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली से पूछा- “तुम्हें कुछ समझ में आ रहा
है?"

"हां !" शैफाली ने अपना सिर हां के अंदाज में हिलाते हुए कहा- “अश्रुधारा मतलब आँसू की बूंद। शायद आने वाली ट्रेन हमें लैक्राईमल ग्लैंड तक ले जायेगी? पर यह टिकट का झंझट नहीं समझ आया? पता नहीं ये टिकट मिलेगा कहां से?"

"मुझे लगता है कि हमें ट्रेन का टिकट इस ब्रेन मशीन से ही मिलेगा।” सुयश ने कहा और ध्यान से उस ब्रेन मशीन को देखने लगा।

तभी सुयश को ब्रेन मशीन के की-बोर्ड पर एक साउन्ड का विकल्प दिखाई दिया। सुयश ने उस साउन्ड के बटन को प्रेस कर दिया।

उस बटन को प्रेस करते ही वातावरण में एक पुरुष की आवाज गूंजी- “ब्रेन सेंटर पर आपका स्वागत है। अगर आप अश्रुधारा की ओर जाना चाहते हैं, तो कृपया 1 दबाएं।" सुयश ने यह सुन की-बोर्ड पर लगा 1 नंबर का बटन दबा दिया।

“अब आप यात्रियों की संख्या सुनिश्चित करें।" मशीन से आवाज आई। सुयश ने इस बार की-बोर्ड पर लगे 6 नंबर के बटन को दबा दिया।

"आपकी संख्या 6 है, इसलिये आपको 12 मुद्रा, मशीन के अंदर डालनी होगी।"

मुद्रा का नाम सुनते ही सुयश सकते की सी हालत में आ गया और पीछे मुड़कर सभी की ओर देखने लगा।

“लगता है कि कार्य में कहीं मुद्राएं भी छिपी हुई थीं, जो हममें से किसी को दिखाई नहीं दी।” शैफाली ने मुंह बनाते हुए कहा- “अब बिना मुद्रा के यह मशीन हमें आगे जाने नहीं देगी और हम पीछे जाकर मुद्रा ढूंढ भी नहीं सकते।”

"तो सीधे तौर पर बोलते हैं कि हम पूरी तरह से अब इस मशीन में फंस चुके हैं।” ऐलेक्स ने गहरी साँस छोड़ते हुए कहा।

तभी मशीन के अंदर से पुनः आवाज आई- “अगर आपके पास 12 मुद्रा नहीं हैं, तो आपको मेरे 12 आसान सवालों का जवाब देना होगा। अगर आपने उचित उत्तर दिया तो आप अपनी अपनी योग्यता सिद्ध कर टिकट को प्राप्त कर सकेंगे और अगर आपने एक भी प्रश्न का गलत उत्तर दिया, तो आप हमेशा के लिये इसी स्थान पर फंस जायेंगे। अगर आप प्रश्नों का विकल्प चुनना चाहते हैं, तो 1 दबाएं। अगर आप प्रश्नों का विकल्प नहीं चुनना चाहते हैं, तो 2 दबाकर मुझे आराम से सोने का मौका दें।"

"ये लो, अब इस मशीन को भी सोना है।” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा।

ब्रेन मशीन की बात सुन सुयश ने सभी की ओर ऐसे देखा, जैसे कि वह पूछना चाह रहा हो कि अब हमें क्या करना चाहिये?

“मेरे हिसाब से हमें प्रश्नों का विकल्प चुन लेना चाहिये।” तौफीक ने कहा- “इसमें बचने के कुछ चांस हैं, पर यदि हमने विकल्प नहीं चुना, तो फिर पता नहीं आगे क्या होगा?"

सभी ने तौफीक की बात पर सहमति जताई, इसलिये सुयश ने की-बोर्ड पर लगे 1 नंबर के बटन को दबा दिया।

“प्रश्नों का विकल्प चुनने के लिये धन्यवाद। अब हम आपके समक्ष 12 प्रश्नों को एक-एक कर रखेंगे। हर प्रश्न के लिये आपके पास सिर्फ 30 सेकेण्ड का समय रहेगा। आपको अपना जवाब मशीन के की-बोर्ड पर लिखकर देना होगा। तो पहला प्रश्न है:-

“दुनिया भर की करता सैर, बिना धरा पर रखे पैर।" इसी के साथ 30 सेकेण्ड का समय ब्रेन मशीन की स्क्रीन पर दिखाई देने लगा।

किसी को भी ब्रेन मशीन के द्वारा पहेलियां पूछने का अंदाजा नहीं था, ऊपर से समय की बंदिश। इसलिये सभी थोड़ा हड़बड़ा गये।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और सभी तेजी से उस पहेली में उलझे थे कि तभी शैफाली ने तेजी से कहा “सूर्य।"

शैफाली की बात सुन सुयश ने जल्दी से की-बोर्ड पर सूर्य टाइप कर दिया। जैसे ही सुयश ने सूर्य लिखकर ‘इन्टर' का बटन दबाया, मशीन के ऊपर लगी हरी बत्ती जल उठी, जो कि इस बात का द्योतक थी, कि शैफाली के द्वारा बताया गया उत्तर सही था।

“ये एक बार कैश्वर मुझे मिल जाये बस।" ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “पूरी बेइज्जती ही करके मानेगा गर्लफ्रेंड के सामने।" ऐलेक्स के शब्द सुन क्रिस्टी सहित सभी जोर से हंस दिये।

तभी ब्रेन मशीन ने दूसरा सवाल कर दिया:-
"ऐसा क्या है, जो YEAR में एक बा र और WEEK में 2 बार आता है?"

“ये क्या प्रश्न हुआ?” ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “जब कोई चीज WEEK में 2 बार आयेगी, तो वह YEAR में 1 बार कैसे आ सकती है?"

"उत्तर है 'E' अल्फा बेट।" शैफाली ने दोबारा से कहा- “यह YEAR में 1 बार और WEEK में 2 बार आती है।


“वाह!” ऐलेक्स ने शैफाली की प्रशंसा करते हुए कहा- “तुम बताना शैफाली कि तुमने किस स्कूल से पढ़ाई की है, मैं ऑस्ट्रेलिया चलकर, उसी स्कूल में एडमिशन लूंगा।

“बस एक बार ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाओ, फिर मैं तुम्हें घर में ट्यूशन दूंगी।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के गाल पर एक हल्के से चपत लगाते हुए कहा।

उधर सुयश ने मशी न पर लगे 'E' बटन को दबा दिया था। फिर से हरी बत्ती ने जलकर, उत्तर के सही होने की पुष्टि की।

अब मशीन ने तीसरा प्रश्न पूछ लिया:- “कमरे में बैठी इक रानी, सिर पर आग, बदन में पानी।"

सुयश को यह उत्तर किसी से पूछने की जरुरत नहीं पड़ी, क्यों कि इस प्रश्न का उत्तर उसे स्वयं पता था।
इसलिये उसने की-बोर्ड पर 'मोमबत्ती' लिख दिया। उत्तर बिल्कुल सही था।

“मुझे लगा कि इस प्रश्न का उत्तर 'क्रिस्टी' होगा। ऐलेक्स ने एक बार फिर क्रिस्टी को छेड़ा- "इसके भी सिर पर आग रहती है।"

“सिर्फ सिर पर।” क्रिस्टी ने इठलाते हुए ऐलेक्स का हाथ पकड़ते हुए कहा।

ऐलेक्स क्रिस्टी को ऐसे करता देख हाथ छुड़ाकर, शैफाली के पीछे जाकर छिप गया- “गंदी लड़की!"

कुछ भी हो, पर इस तिलिस्मा में क्रिस्टी और ऐलेक्स की वजह से माहौल हमेशा हल्का रहता था। सभी इनकी चुहलबाजियों से हमेशा हंसते रहते थे।

तभी ब्रेन मशीन ने चौथा प्रश्न कर लिया "ENGLISH में कितने अक्षर होते हैं?"

"26 अक्षर! ये मुझे आता है।” ऐलेक्स ने खुशी से चिल्ला कर कहा। पर सुयश ने 26 की-बोर्ड पर टाइप नहीं किया, वह तो इस सोच में था कि ब्रेन मशीन ने इतना आसान प्रश्न पूछा क्यों?

"7 अक्षर।" तभी शैफाली ने जवाब दिया- "ब्रेन मशीन ने हमसे ‘ENGLISH भाषा' के अक्षर नहीं पूछे हैं, वह सिर्फ ‘ENGLISH शब्द' में कितने अक्षर होते हैं? यह पूछ रहा है।”

शैफाली का तर्क सुनकर सुयश मुस्कुरा दिया, उसने शैफाली के कहे अनुसार की-बोर्ड पर 7 अंक टाइप कर दिया।

7 टाइप करते ही एक बार फिर मशीन पर लगी हरी बत्ती जल उठी। अब ब्रेन मशीन ने सभी से पांचवां प्रश्न कर लिया।

“सागर की बूंद सी है, मेरी जलधारा, भावों की नाव पर निवास है हमारा।"

सभी तेजी से इस प्रश्न के उत्तर के बारे में सोचने लगे कि तभी प्लेटफार्म पर ट्रेन ने सीटी बजाते हुए प्रवेश किया। एक बार के लिये सभी की नजर प्रश्न से हटकर ट्रेन की ओर चली गई।


बड़ी ही विचित्र ट्रेन थी। ट्रेन के इंजन पर बड़ी सी आँख बनी थी और उस पर लिखा था- 'नेत्र एक्सप्रेस'। इंजन के पीछे एक ही डिब्बा था, जिसकी आकृति बिल्कुल नाव के समान थी।

उस नाव को पारदर्शी काँच से ढका गया था, जिसकी वजह से वह ट्रेन काफी आकर्षक लग रही थी। अंदर बैठने के लिये कुर्सियां और मेज दिखाई दे रहे थे, जो उसकी भव्यता को चार चाँद लगा रहे थे।

"दोस्तों हमारा समय तेजी से बीत रहा है, हमारे पास अब बस 12 सेकेण्ड ही बचे हैं।” सुयश ने सबका ध्यान ट्रेन से अपनी ओर कराते हुए कहा।

“आँसू।” जेनिथ ने अभी भी ट्रेन की ओर देखते हुए कहा- “पांचवे प्रश्न का उत्तर आँसू है, क्यों कि आँसू में भी समुद्र के पानी के समान नमक पाया जाता है और वह आँख में रहती है, जिसका आकार भी नाव के समान ही होता है।"

सुयश ने जेनिथ की बात सुन की-बोर्ड पर जल्दी से आँसू टाइप कर दिया। हरी बत्ती एक बार पुनः जल उठी।

अब सबका ध्यान ट्रेन से हटकर प्रश्नों की ओर आ गया था। तभी 'ब्रेन मशीन' ने छठा प्रश्न कर दिया
“चार कोनों का नगर बना, चार कुएं बिन पानी, कुछ सैनिक के घेरे में, छिपी हुई एक रानी।"

इस प्रश्न का उत्तर क्रिस्टी को पहले से ही पता था, इसलिये उसने झट से बोल दिया- “कैरमबोर्ड"

सुयश ने यह उत्तर भी मशीन को बता दिया। हर बार की तरह यह उत्तर भी सही था। अब 'ब्रेन मशीन' ने सातवां प्रश्न कर दिया “अमेरिका और यूरोप के बीच में क्या है?"


“अब कैस्पर पगला गया है। कितने आसान प्रश्न पूछ रहा है?” ऐलेक्स ने हंसते हुए कहा- “अरे इसका उत्तर है समुद्र।"

“नहीं, इस प्रश्न का उत्तर समुद्र नहीं हो सकता। सुयश ने सोचते हुए कहा- “ऐसे बच्चों जैसे प्रश्न कैश्वर हमारे लिये नहीं बनाएगा।"

अब सुयश शैफाली की ओर देखने लगा, जो कि अब भी कुछ सोच रही थी। समय तेजी से बीत रहा था, पर समुद्र के सिवा किसी को कोई भी दूसरा उत्तर समझ नहीं आ रहा था।

अब सिर्फ 7 सेकेण्ड बचे थे। घड़ी की सुई लगातार आगे बढती जा रही थी। “6.....5......4.......3...." तभी शैफाली ने चीखकर कहा- “उत्तर है 'और'।"

सुयश इस चीज को समझ नहीं पाया, पर उसने जल्दी से इस उत्तर को की-बोर्ड पर टाइप कर दिया और ऊपर लगी हरी बत्ती की ओर देखने लगा।

तभी हरी बत्ती पुनः जल उठी।

“ब्रेन मशीन जानबूझकर हमसे पेचीदा प्रश्न पूछ रहा है, जिसका उत्तर हमें सामान्य सा लगे, पर वह गलत हो। जैसे उसने इस प्रश्न में कहीं ये नहीं पूछा कि अमेरिका और यूरोप देश के बीच क्या है? उसने यह पूछा कि अमेरिका और यूरोप के बीच क्या है। अब अमेरिका और यूरोप शब्द के बीच तो 'और' ही है ना।"

शैफाली का लॉजिक सुन सभी ब्रेन मशीन से और भी सतर्क हो गये।

अब ब्रेन मशीन ने आठवां प्रश्न कर दिया-
“एक किले के 2 हैं द्वार, उसमें सैनिक भरे अपार, टकरायें जब दीवारों से, खत्म करें अपना संसार।

धीरे-धीरे ब्रेन मशीन की पहेलियां कठिन होती जा रहीं थीं। इस प्रश्न का उत्तर पहले से किसी को नहीं पता था, इसलिये सभी एक-दूसरे का मुंह देखने लगे।

स्क्रीन पर समय एक बार फिर शुरु हो चुका था। इस बार इस प्रश्न का जवाब सूझा तौफीक को "माचिस"

तौफीक के शब्द सुन सभी को स्वयं पर हंसी आ गई, क्यों कि इस पहेली का उत्तर ज्यादा कठिन नहीं था, पर किसी को समझ नहीं आ रहा था।

सुयश ने इस उत्तर को भी मशीन को बता दिया, यह उत्तर भी सही था।


जारी रहेगा_____✍️
Bhut hi badhiya update Bhai
Ashrudhara train me bethne ke liye 12 me se 8 paheliyo ka jawab to sahi de diya hai
Dhekte hai aage aur konsi paheliya aati hai
 
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