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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Evaran Eternity

Don Eternity
Prime
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रिव्यू की शुरुआत की जाए

नए अध्याय का प्रारंभ हो चुका हैं युद्ध का बिगुल बज चुका हैं , जिस तरह युद्ध की झलकियां दिखाई हैं वे साबित करते हैं आगे हमें क्या देखना को मिलेगा।

मतलब सिर्फ एंडोर्स ग्रह के १० लोग भिड़ने आए हैं , अटका वासियों से, फिर भी इतनी तबाहि , भला हो सूर्यवर्या की शुभार्जुन का जिसने इस युद्ध में थोड़ा समय मांग लिया।

अब सबसे पहले मुझे ये बताओ सुनेरा लड़की हैं या लड़का क्योंकि कभी लगता हैं ये लड़की है तो कभी लड़का लगता है
हमारा सिंहलोक भी इन्हीं 15 लोकों में से एक था, जहां पर 2 देव शक्तियां छिपी थीं- पहली थी ‘चतुर्मुख सिंहराज’ और दूसरी थी- ‘शुभार्जना’। दरअसल इन 2 शक्तियों की वजह से ही हमारा लोक एक प्रकार से अमर था। ‘चतुर्मुख सिंहराज’ एक 4 सिर वाली सिंह की प्रतिमा थी, जिसे राज्य के द्वार पर लगाया गया था।
जब शक्ति का वर्णन हो रहा था तब इनका जिक्र क्यों नहीं हुआ क्योंकि मैने पुराना अपडेट पढ़ा है। इसे तो लगता है ये दोनो शक्तियों उन पंद्रह शक्ति में से हैं।

अब मुझे नही पता इतना बड़ा लूपहोल कैसे भरेगा। पर करना तो पड़ेगा वर्ना कन्फ्यूजन होगा ।
शुभार्जना, एक छोटी सी डिबिया में बंद एक सिंह की गर्जना थी, जिसका 3 बार प्रयोग कर, किसी भी 3 मृत इंसान को जीवित किया जा सकता था
अब समझा आगया है , की रॉजर जिंदा कैसे हुआ, वो शुभर्जुना का जादू था।

मेगा लाइट के गुस्से वाला अवतार तो खतरनाक था, वैसे ये जिंदा मारने के खेल कब तक चालू रखोगे , एक समय लगा कि युद्ध में पहले बलि आगाई, लेकिन हम गलत थे।


वैसे जैसा शुभार्जुन के बारे में पढ़ा हैं लगता है इसका प्रयोग पहले बार हुआ है और आगे चल कर २ बार हम किसी को भी जीवित कर सकते है ।

अब मार्कोटा ने युद्ध चालू कर कर कही न कही मुसीबत मोल लेली है, ये एंडोर्स वाले किसी को नहीं छोड़ने वाले अब तो और ताकतवर होकर आयेंगे क्यूंकि इनके महाबली योद्धा को परास्त किया है

इस अपडेट से ये भी लगता है कहानी के समाप्ति की और एक कदम बढ़ चुका है

कुलमिलाकर शानदार अपडेट आगे की प्रतीक्षा
Raj_sharma
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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#186.

अराका युद्ध:
(17.01.02, गुरुवार, सीनोर राज्य का समुद्र तट, अराका द्वीप)

मेलाइट और सुर्वया ने जैसे ही सनूरा को अपनी कहानी सुनाने को कहा, तभी महल में किसी बड़े ढोल की आवाज सुनाई देने लगी थी।

सुर्वया ने अपनी दिव्यदृष्टि से देखकर बताया कि सीनोर राज्य के समुद्र तट पर, समुद्र की लहरों पर कोई विशालकाय चीज खड़ी है।

सुर्वया के शब्द सुन सनूरा तेजी से बाहर की ओर भागी। सनूरा को बाहर जाते देख मेलाइट और सुर्वया ने एक दूसरे की ओर देखा और फिर वह भी सनूरा के पीछे भाग लीं। आखिर वह सब अब एक अच्छी दोस्त थीं।

सनूरा जैसे महल के बाहर वाले प्रांगण में पहुंची, उसे घबराया हुआ लुफासा एक ओर से आता दिखाई दिया। महल की मीनारों पर मौजूद प्रहरी, अभी भी बड़ा सा ढोल बजा रहा था।

“सुर्वया ने अपनी दिव्यदृष्टि से देखा कि हमारे समुद्र तट पर कोई विशाल आकृति खड़ी है। वह क्या है? वह तो वहां पहुंचने पर ही पता चलेगा।” सनूरा ने लुफासा से कहा।

तभी लुफासा के सामने एक विशाल रथ आकर खड़ा हो गया, जिसे 4 तेंदुए खींच रहे थे।

“सनूरा, तुम सबको लेकर समुद्र तट पर पहुंचो, मैं आसमान से तुम सब पर नजर रखे हूं।” लुफासा ने सनूरा से कहा- “लेकिन ध्यान रखना, जब तक हो सके, हमें किसी भी युद्ध को टालना है।" यह कहकर लुफासा ने एक बार सुर्वया, मेलाइट ओर रोजर की ओर देखा और फिर एक विशाल चील में परिवर्तित होकर आसमान में उड़ गया।

लुफासा के जाते ही सनूरा रथ पर बैठ गई। सनूरा को रथ पर बैठते देख मेलाइट, सुर्वया और रोजर भी रथ पर बैठ गये। इस समय रोजर ने पूरे कपड़े पहन रखे थे।

“क्या लगता है आप लोगों को? समुद्र तट पर किस प्रकार का खतरा होगा?” मेलाइट ने सुर्वया से पूछा।

लेकिन इससे पहले कि सुर्वया कोई जवाब दे पाती, उसे रोजर की बुदबुदाती आवाज सुनाई दी- “आपसे बड़ा तो नहीं ही होगा।"

“तुमने मुझे खतरा कहा?” अब मेलाइट अचानक से रोजर की ओर ही घूम गई।


“न...न...नहीं तो। मैनें ऐसा कब कहा।” रोजर ने घबराते हुए कहा।

“तुम भूल रहे हो रोजर कि मैं एक हिरनी हूं, मेरे कान बहुत तेज होते हैं।” मेलाइट ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा।

“पर मैंने तो सुना था कि बिल्ली के कान तेज होते हैं।” रोजर ने बात को बदलते हुए कहा।

“रोजर का कहना ठीक है, बिल्ली के कान ही सबसे तेज होते हैं।” सनूरा ने बिल्ली के परिवार का पक्ष लेते हुए कहा।

"हां-हां ठीक है, पर हिरनी के भी होते हैं।” मेलाइट ने सनूरा को बीच में पड़ते देख सरेंडर करते हुए कहा।

"मेरे हिसाब से सिंह के कान सबसे तेज होते हैं। अब सुर्वया ने भी अपने लोक का हवाला देते हुए कहा।

“क्या दोस्तों? हम इस समय समुद्र तट की ओर जा रहे हैं, जहां पर कोई बड़ा खतरा मंडरा रहा है और आप लोग हिरन, शेर और बिल्ली के कान पर लगे हुए हो।" रोजर ने मुस्कुराते हुए कहा।'

रोजर की बात सुन मेलाइट को याद आया कि वह तो कोई और ही बात कर रहे थे, पर रोजर ने ही उन सभी का ध्यान भंग कर दिया था।

अब मेलाइट ने घूरकर रोजर की ओर देखा। मेलाइट को घूरते देख रोजर ने सटपटा कर अपनी नजरें दूसरी ओर कर लीं। यह देख मेलाइट के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

तभी सनूरा को समुद्र तट का किनारा दिखाई देने लगा, जहां पर लहरों के ऊपर, एक विशाल अंतरिक्ष यान खड़ा दिखाई दे रहा था, पर अभी दूरी अधिक होने के कारण वह सनूरा के अलावा और किसी को दिखाई नहीं दे रहा था।

उस अंतरिक्ष यान को देख, सनूरा ने अपने पास से 3 लाल रंग की बिंदियां निकालकर मेलाइट, सुर्वया और रोजर की ओर बढ़ा दिया।

"तुम तीनों इन बिंदियों को अपने गले पर चिपकालो, इससे अराका द्वीप का सुरक्षा घेरा, तुम्हें अंदर या बाहर जाने पर रोकेगा नहीं।"

तीनों ने जल्दी से अपने-अपने गले पर उन बिंदियों को चिपका लिया।

कुछ ही देर में चारो सीनोर के समुद्र तट पर खड़े, उस अंतरिक्ष यान को निहार रहे थे।

सनूरा ने धीरे से सिर उठाकर ऊपर आसमान की ओर देखा, उसे लुफासा उस अंतरिक्ष यान की ओर जाता दिखाई दिया।

समुद्र की लहरों पर खड़ा अंतरिक्ष यान लगभग 100 मीटर बड़ा, काले रंग का यान था। उसका आकार बिल्कुल गोल था, उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह ज्वालामुखी से निकले लावे से निर्मित हो।

उस अंतरिक्ष यान पर अजीब सी आड़ी-तिरछी धारियां बनी हुई थीं।

उस अंतरिक्ष यान पर कुल 10 मनुष्य की तरह दिखने वाले जीव खड़े थे, जिनका शरीर हल्की सी नीली रंगत वाला था और उन सभी ने एक ही तरह की, गाढ़े नीले रंग की ड्रेस पहन रखी थी।

हर ड्रेस के बीच में एक सुनहरे रंग का गोला बना था, जिस पर A1 से लेकर A10 तक लिखा हुआ था। वह सभी अंतरिक्ष यान के ऊपर एक क्रमबद्ध तरी के से खड़े थे।

^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
उधर इन सबसे दूर सीनोर राज्य में बने पिरामिड के अंदर, एक बड़ी सी स्क्रीन पर, यह पूरा दृश्य, वहां खड़े मकोटा, वुल्फा और जैगन देख रहे थे।

इस समय जैगन का आकार एक साधारण मनुष्य के बराबर ही था। शायद उसके पास अपने आकार को घटाने और बढ़ाने की भी विशेषता थी।

“यह तो कोई अंतरिक्ष के जीव हैं? जो अराका वासियों से लड़ने के लिये आये हैं।” वुल्फा ने कहा “क्या हमें भी इस युद्ध का हिस्सा बनना चाहिये मांत्रिक?"

“हां-हां बनना चाहिये।” मकोटा के बोलने के पहले ही जैगन बोल उठा- “बहुत दिन हो गये युद्ध किये हुए... पहले मुझे भेजो, मैं इन सबको काटकर खा जाऊंगा।

“मूर्ख मत बनो जैगन।” मकोटा ने जैगन को समझाते हुए कहा- “हमें पहले यहीं से बैठकर इस युद्ध को देखना चाहिये। पता तो चले कि लुफासा जैसे मूर्ख ने और किस-किस को सीनोर में छिपा कर रखा है?"

मकोटा का इशारा इस समय मेलाइट, रोजर व सुर्वया की ओर था, जो उसके लिये बिल्कुल नये थे।

“और अगर उन अंतरिक्ष के जीवों के पास कोई खतरनाक शक्ति हुई? तो हम उनकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाकर, अपना लक्ष्य भी तो पूरा कर सकते हैं?” मकोटा के शब्दों में लोमड़ी सी मक्कारी झलक रही थी-
“पर एक चीज समझ में नहीं आई कि यह पूरी पृथ्वी को छोड़कर यहां अराका पर लेने क्या आये हैं?"

“मुझे लगता है कि युद्ध शुरु होने के बाद हमें काफी जानकारी अपने आप मिल जायेगी।” वुल्फा ने कहा “वह देखिये, अब उनमें से 1 जीव, पानी पर चलता हुआ, उन लोगों की ओर ही बढ़ रहा है।"
..............................

1 जीव को अपनी ओर बढ़ता देख, सनूरा ने सभी को सावधान होने का इशारा कर दिया।
1 उस जीव के गोले पर, A10 लिखा था। वह जीव पानी पर चलता हुआ, सनूरा के सामने आ पहुंचा।

“तुम में से इस द्वीप का कमांडर कौन है?” उस जीव ने साफ अंग्रेजी बोलते हुए कहा। उसे अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते देख सनूरा सहित सभी को बड़ा आश्चर्य हुआ।

“मैं हूं इस द्वीप की कमांडर। मेरा नाम सनूरा है। सनूरा ने कहा- “तुम लोग कौन हो? और तुम्हारे यहां आने का क्या उद्देश्य है?"

“मेरा नाम एलात्रा है, मैं और मेरे बाकी 9 साथी, पृथ्वी से 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर, एण्ड्रोवर्स आकाशगंगा के फेरोना ग्रह से आये हैं। हमें पृथ्वी पर हमारे एक दुश्मन की तलाश है, जो कि इस द्वीप पर ही कहीं छिपकर बैठा है। अगर तुमने बिना किसी शर्त, उसे हमे सौंप दिया, तो हम बिना युद्ध किये इस ग्रह से चले जायेंगे।" एलात्रा ने कहा।

“पर हमारे द्वीप पर कोई भी परग्रह वासी नहीं छिपा है। तुम पता नहीं किसकी बातें कर रहे हो?” सनूरा ने एलात्रा को समझाने की कोशिश करते हुए कहा।

“उसका नाम ओरस है...वह अंतरिक्ष के एक ग्रह डेल्फानो का राजकुमार है और हमारे सिग्नल के अनुसार वह 3 दिन पहले तक इसी द्वीप पर था। पता नहीं कैसे अचानक ही उसके सिग्नल आने बंद हो गये? इसी लिये हमको यहां आना पड़ा। ...अब अगर तुम लोग उसके बारे में कुछ नहीं बताओगे? तो विवश होकर हमें आपस में युद्ध करना ही पड़ेगा।

“अच्छा ठीक है एलात्रा, तुम हमें कुछ दिन का समय दे दो, हम उस ओरस को ढूंढकर, तुम्हें जल्दी ही सौंप देंगे।” सनूरा ने दिमाग लगाते हुए, एक बार फिर युद्ध को टालने की कोशिश की।

यह सुनकर एलात्रा ने अपने अंतरिक्ष यान से संपर्क करते हुए किसी से कहा- “कमांडर रेने, इस द्वीप का कमांडर, ओरस को हमें सौंपने के लिये कुछ समय मांग रहा है? आप बताइये कि हमें क्या करना है?"

कुछ क्षण रुकने के बाद दूसरी ओर से आवाज आई“ ठीक है, तुम इन्हें 3 दिन का समय देकर वापस अपने अंतरिक्ष यान पर आ जाओ।

"जी......कमांडर।” एलात्रा ने रेने से कहा।

"हमारे कमांडर ने आप लोगों को 3 दिन का समय देने को कहा है। हम 3 दिन बाद फिर से वापस आयेंगे। एलात्रा ने सनूरा से कहा और फिर पलटकर अपने अंतरिक्ष यान की ओर चल दिया।

मकोटा से यह समझौता देखा नहीं गया, उसने पिरामिड से बैठे-बैठे ही, अपने हाथ में पकड़ी सर्प के समान, छड़ी को हवा में लहराया।

उसके ऐसा करते ही मकोटा की छड़ी से एक लाल रंग की किरण निकली और हवा में ऊंची उठती हुई, समुद्र तट पर मौजूद एलात्रा से कुछ दूरी पर जाकर गिरी। एक तरह से मकोटा ने युद्ध का बिगुल बजा दिया था।

अब एलात्रा पीछे पलटा और सनूरा को घूरने लगा। इससे पहले कि सनूरा एलात्रा को कुछ समझा पाती, अंतरिक्ष यान से 3 और जीव कूदकर अराका की ओर चल दिये।

अब सनूरा के पास किसी को भी समझाने का समय नहीं था, अब तो हराने या हारने का समय था।

मेलाइट, सुर्वया और रोजर भी किसी भी हमले से निपटने के लिये तैयार हो गये थे। सुर्वया के हाथ में अचानक से तीर-धनुष दिखाई देने लगा।

“क्या कोई मुझे भी किसी प्रकार का हथियार देगा?" रोजर ने धीमें स्वर में बोलते हुए कहा।

"हां, मैं देती हूं।” यह कहकर मेलाइट ने रोजर की शर्ट एक झटके से फाड़कर फेंक दी- “यही है तुम्हारा हथियार।"

रोजर अब बिना शर्ट के उस युद्ध के मैदान में खड़ा था, पर उसकी नाभि से निकल रही तेज रोशनी एलात्रा का ध्यान बार-बार उधर ही ले जा रही थी।

रोजर को समझ ही नहीं आया कि मेलाइट ने ऐसा क्यों किया? वह तो बस अभी अंतरिक्ष यान की ओर से, पास आ रहे जीवों को देख रहा था।

तभी एलात्रा ने अपने हाथ हवा में उठाये और अपना पहला वार सनूरा पर कर दिया।

एलात्रा के हाथ से तेज बिजली की लहर निकली और सनूरा की ओर बढ़ी, पर सनूरा पहले से ही इसके लिये तैयार थी, उसने एक ओर झुककर उस वार को बचाया।

बिजली की वो लहर, सनूरा के पीछे मौजूद एक पेड़ पर जाकर गिरी, पेड़ अब धू-धू करके जलने लगा। यह देखकर सनूरा समझ गई, कि इस एलात्रा के अगले वार से बचना होगा।

तभी मेलाइट आगे बढ़ी और एलात्रा के सामने जाकर खड़ी हो गई।

अब मेलाइट ने सबसे चीखकर कहा- “तुम लोग बाकी के जीवों पर ध्यान दो, मैं इस एलात्रा से निपटती हूं।" यह कहकर मेलाइट ने अपने सिर को तेजी से दांये बांये हिलाया।

अब वह बैल के बराबर की एक सुनहरी हिरनी में परिवर्तित हो गई। उस सुनहरी हिरनी की सींगें, और पैर सोने के थे। एलात्रा एकाएक मेलाइट के इस रुप परिवर्तन को समझ नहीं पाया।

तभी मेलाइट ने बिजली की फुर्ती से एलात्रा के पेट में अपनी सींगें घुसा दीं। एलात्रा के शरीर से नीले रंग का खून निकलकर, समुद्र के पानी में मिक्स होने लगा।

उधर A2 नंबर का जीव, जिसका नाम नीडो था, सनूरा की ओर बढ़ा। नीडो ने अपने दोनों हाथों को आगे किया, जिससे बहुत से छोटे-छोटे धारदार सितारे निकलकर सनूरा की ओर लपके।

सनूरा ने तुरंत अपने हाथों से ताली बजाई, जिससे वह एक विशाल बिल्ली में परिवर्तित हो गई।

अब सनूरा की स्पीड देखने लायक थी। उसने उछलकर, हवा में ही अपने शरीर का एक कोण बनाया और सभी सितारों से आसानी से बच गई।

अब सनूरा ने उछलकर नीडो के शरीर पर अपना पंजा मारा। नीडो के सीने पर मौजूद उसकी ड्रेस, कुछ मांस और खून लिये अब सनूरा के पंजों में फंसी थी। अब नीडो सनूरा से सावधान हो गया था।

तीसरे जीव A9 का नाम सलोहा था। सलोहा ने जैसे ही एलात्रा और नीडो का खून से सना शरीर देखा, उसने तुरंत अपने शरीर को एक ‘मरकरी' की तरह के द्रव फार्म में बना लिया। सलोहा को आगे बढ़ता देख सुर्वया ने उस पर तीरों की बौछार कर दी।

पर सुर्वया के चलाये हुए सारे तीर सलोहा के पार जा रहे थे, उन तीरों का उस पर कोई भी असर नहीं हो रहा था।

यह देख सुर्वया ने अपने मन में कोई मंत्र पढ़ा, जिससे उसके धनुष पर एक आग के समान तीर दिखाई देने लगा, सुर्वया ने वह तीर भी सलोहा पर फेंक कर मार दिया।

इस तीर के लगते ही सलोहा का शरीर, पूरी तरह से आग की लपटों के बीच घिर गया।

यह देख सुर्वया की नजर चौथे जीव A3 पर गई, जिसका नाम डार्को था, पर सबकी आशा के विपरीत डार्को, आराम से पानी पर खड़े होकर उस युद्ध को देख रहा था।

डार्को जैसा ही हाल रोजर का भी था, उसे तो कुछ पता ही नहीं था कि युद्ध करना कैसे है? वह भी डरी-डरी निगाहों से चारो ओर हो रहे इस घमासान को देख रहा था।

उधर मेलाइट, एलात्रा को अपनी सींघों में फंसाकर इधर-उधर पटक रही थी। एलात्रा को संभलने का भी मौका नहीं मिल पा रहा था।

उधर नीडो ने अब अपने हाथों से सितारे फेंकने बंद कर दिये थे, उसे पता चल गया था कि उन सितारों से, वह सनूरा रुपी बिल्ली का कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा? इसलिये इस बार उसने अपनी चाल बदल दी।

नीडो ने एक बार फिर अपना हाथ सनूरा की ओर उठाया, सनूरा को लगा कि नीडो फिर से सितारे फेंकने जा रहा है, इसलिये उसने हवा में छलांग लगा दी, पर इस बार सनूरा के ठीक सामने हवा में एक जोर का धमाका हुआ, जिसके कारण सनूरा, नीचे जमीन पर गिर गई।

सनूरा का बिल्ली वाला शरीर इस धमाके से कई जगह पर जख्मी हो गया था, पर सनूरा किसी भी चीज की परवाह किये बिना फिर से खड़ी हो गई।

यह देख सुर्वया ने इस बार नीडो पर तीरों की बौछार कर दी। नीडो का सारा ध्यान सनूरा की ओर था, इसलिये वह सुर्वया के तीरों से बच नही पाया।

कम से कम 8 से 10 तीर नीडो के शरीर में जाकर घुस गये। जिसकी वजह से नीडो वहीं पानी पर गिर गया।

तभी सलोहा ने सुर्वया का ध्यान दूसरी ओर देख, अपने द्रव्य रुपी शरीर से सुर्वया को पूरी तरह से जकड़ लिया।

यह देख मेलाइट ने एलात्रा को वहीं नीडो के पास जमीन पर पटका और सुर्वया की ओर तेजी से दौड़ पड़ी।

मेलाइट ने सुर्वया के पास पहुंचकर अपनी सोने की सींगें, सलोहा के द्रव्य वाले शरीर से छुआ दिया।

मेलाइट के सींगों से छूते ही सलोहा को अपने शरीर में एक तेज गर्मी का अहसास हुआ और वह पूरा का पूरा पिघलकर सुर्वया के पास जमीन पर गिर गया। अब सुर्वया फिर से आजाद हो गई थी।

तभी नीचे गिरे पड़े घायल नीडो ने अपना मुंह जोर से खोल दिया। उसके मुंह से एक छोटा सा सूर्य के समान गोला निकला और उसने वहां के वातावरण में तेज गर्मी पैदा कर दी।

उस गर्मी ने एक सेकेण्ड में ही सबके पसीने छुड़ा दिये। अंतरिक्ष के उन जीवों पर इस गर्मी का कोई असर नहीं हो रहा था।

अब सभी सीनोरवासी युद्ध करना छोड़, उस गर्मी से बचने के लिये इधर-उधर छिपने की जगह ढूंढने लगे।

पर जाने क्यों रोजर को इस भयानक गर्मी का बिल्कुल भी अहसास नहीं हा रहा था, यह देख रोजर उस हवा में नाच रहे छोटे से सूर्य के और पास पहुंच गया।

जैसे ही रोजर उस सूर्य के पास पहुंचा, वह सूर्य छोटा होकर रोजर की नाभि में समा गया। यह देखकर अंतरिक्ष के जीव क्या सभी अराका वासी भी हैरान हो गये।

सबसे ज्यादा हैरानी तो स्वयं रोजर को हो रही थी।

तभी घायल पड़े एलात्रा ने, अपने हाथ को हवा में जोर से उठाया, उसके ऐसा करते ही आसमान में तेज बिजली कड़कने लगी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, एक बिजली रोजर पर आकर गिरी।

रोजर का शरीर हवा में उछला और एक पल में निष्प्राण हो गया। यह देख जैसे मेलाइट का खून खौल गया, उसने अपने आकार को थोड़ा और बड़ा कर लिया और पूरे आसमान की बिजली को अपनी सींघों में सोख लिया।

अब मेलाइट की खूंखार निगाहें सिर्फ और सिर्फ एलात्रा पर थीं। इससे पहले कि एलात्रा अपने बचाव में कुछ कर पाता, मेलाइट ने अपनी सींघों में भरी पूरी बिजली को उल्टा एलात्रा पर ही मार दिया।

शायद आज पहली बार एलात्रा को, अपनी ही दवा का स्वाद अनुभव करना पड़ रहा था। कड़कड़ाती हुई वह बिजली एलात्रा पर जाकर गिरी। जिसकी वजह से एलात्रा पूरा स्वाहा हो गया। उसके शरीर का कण-कण जलकर हवा में बिखर गया।

अब इतनी देर से वहां खड़े तमाशा देख रहे डार्को की आँखें जल उठीं, वह अपने हाथ उठाकर हमला करने ही जा रहा था कि तभी समुद्र की लहरों के बीच से एक विशाल व्हेल हवा में उछली और उसे गपक कर पानी के अंदर चली गई।

जी हां, वह कोई और नहीं बल्कि लुफासा था। लुफासा अब किसी को कोई भी मौका नहीं देना चाहता था।

लुफासा ने डार्को को अपने दाँतों में कसकर दबाया और समुद्र की गहराई के अंदर छलांग लगा दी।

उधर नीडो और सलोहा मेलाइट का विकराल रुप देख धीरे-धीरे पीछे की ओर खिसकने लगे थे।

अब मेलाइट ने अपना रुप परिवर्तित कर लिया। अब वह फिर से स्त्री रुप में आ गई और रोजर का शरीर अपनी बांहों में भरकर जोर-जोर से रोने लगी।

सनूरा को पता था कि खतरा अभी टला नहीं इसलिये वह मेलाइट के पास पहुंच तो गई थी, पर उसकी निगाहें अभी भी नीडो और सलोहा की ओर थीं।

सुर्वया से मेलाइट का इस प्रकार रोना देखा नहीं जा रहा था। तभी सुर्वया की निगाह अंतरिक्ष यान से निकलकर आ रहे 4 और योद्धाओं पर पड़ी।

यह देख सुर्वया का दिमाग पूरी तरह से खराब हो गया। अब उसने अपने वस्त्रों में छिपाई एक डिबिया को निकाल लिया और उसका ढक्कन खोलकर तेज आवाज में चिल्लाई- “सिंहराज, मुझे शुभार्जना की आवश्यकता है।”

सुर्वया के ऐसा बोलते ही उस डिबिया से, एक सुनहरे रंग का धुंआ निकलकर वातावरण में फैलने लगा।

धीरे-धीरे उस सुनहरे धुंए ने अराका के पूरे आकाश को ढंक लिया।

अब अंतरिक्ष यान से निकले जीव, द्वीप को छोड़ उस धुंए को देखने लगे।

तभी उस धुंए ने एक विशाल सिंह का अवतार धारण कर लिया, जिसके मुंह का ही आकार अराका द्वीप से भी बड़ा था।

अब उन अंतरिक्ष के जीवों ने नीडो और सलोहा को उठाया और धीरे-धीरे अपने अंतरिक्ष यान की ओर वापस जाने लगे।

तभी उस महाकाय सिंह ने एक भयानक गर्जना की। उस गर्जना की ध्वनि तरंगें इतनी ज्यादा शक्तिशाली थीं, कि उस सिंह की गर्जना मात्र से ही, पूरा का पूरा अंतरिक्ष यान 20 मीटर तक पीछे खिसक गया।

पर सिंहराज की महा गर्जना का एक असर और हुआ, मरा पड़ा रोजर अचानक से उठकर बैठ गया।

उधर अंतरिक्ष यान के सारे जीव अपने यान में बैठकर, वहां से तुरंत भाग गये।

इधर मेलाइट ने जैसे ही रोजर को उठते देखा, उसने तुरंत अपने आँसू पोंछ लिये और खुश हो ते हुए कहा- “थैंक गॉड कि तुम जिंदा हो।"

रोजर अब अचकचाकर अपने शरीर को देखने लगा, जो कि अब भी मेलाइट की गोद में था।

“अरे वाह, काश ऐसा मरना रोज-रोज हो।" रोजर ने खुश होकर कहा।

रोजर की बात सुन मेलाइट ने रोजर के शरीर को धीरे से जमीन पर रखा और शर्माकर उस जगह से उधर चल दी, जिधर सुर्वया खड़ी थी।

उधर महाकाय सिंहराज का शरीर वापस धुंए में बदलकर उस डिबिया में समा गया।

मेलाइट ने अब सुर्वया को गले से लगा लिया “मुझे पता है कि रोजर को तुमने ही शुभार्जना का प्रयोग कर बचाया है। मैं तुम्हारा यह अहसान पूरी जिंदगी नहीं भूलूंगी सुर्वया।

"चल-चल, मैंने तुम्हारे लिये नहीं बचाया उस ‘कोई और' को। मुझे तो बस कुछ दिन और तुम दोनों का नाटक देखना है। सच में बहुत मजा आता है।” सुर्वया ने किसी बेस्ट सहेली की तरह मेलाइट से मजा लेते हुए कहा- “चलो अब अपनी 'नाभिकीय टॉर्च' को लेकर महल चलते हैं।"

सुर्वया ने 'नाभिकीय टॉर्च' कहकर रोजर का एक नया नामकरण कर दिया था, पर जो भी हो यह नाम रोजर पर बिल्कुल फिट बैठ रहा था।

उधर लुफासा भी डार्को को कहीं पानी में पटककर वापस आ गया था। अतः सभी वापस महल की ओर चल पड़े।

सभी के चेहरे इस समय खुशी से जगमगा रहे थे क्यों कि उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा था और उन्होंने अपने एक शत्रु एलात्रा को मार दिया था।

जारी रहेगा_____✍️
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#186.

अराका युद्ध:
(17.01.02, गुरुवार, सीनोर राज्य का समुद्र तट, अराका द्वीप)

मेलाइट और सुर्वया ने जैसे ही सनूरा को अपनी कहानी सुनाने को कहा, तभी महल में किसी बड़े ढोल की आवाज सुनाई देने लगी थी।

सुर्वया ने अपनी दिव्यदृष्टि से देखकर बताया कि सीनोर राज्य के समुद्र तट पर, समुद्र की लहरों पर कोई विशालकाय चीज खड़ी है।

सुर्वया के शब्द सुन सनूरा तेजी से बाहर की ओर भागी। सनूरा को बाहर जाते देख मेलाइट और सुर्वया ने एक दूसरे की ओर देखा और फिर वह भी सनूरा के पीछे भाग लीं। आखिर वह सब अब एक अच्छी दोस्त थीं।

सनूरा जैसे महल के बाहर वाले प्रांगण में पहुंची, उसे घबराया हुआ लुफासा एक ओर से आता दिखाई दिया। महल की मीनारों पर मौजूद प्रहरी, अभी भी बड़ा सा ढोल बजा रहा था।

“सुर्वया ने अपनी दिव्यदृष्टि से देखा कि हमारे समुद्र तट पर कोई विशाल आकृति खड़ी है। वह क्या है? वह तो वहां पहुंचने पर ही पता चलेगा।” सनूरा ने लुफासा से कहा।

तभी लुफासा के सामने एक विशाल रथ आकर खड़ा हो गया, जिसे 4 तेंदुए खींच रहे थे।

“सनूरा, तुम सबको लेकर समुद्र तट पर पहुंचो, मैं आसमान से तुम सब पर नजर रखे हूं।” लुफासा ने सनूरा से कहा- “लेकिन ध्यान रखना, जब तक हो सके, हमें किसी भी युद्ध को टालना है।" यह कहकर लुफासा ने एक बार सुर्वया, मेलाइट ओर रोजर की ओर देखा और फिर एक विशाल चील में परिवर्तित होकर आसमान में उड़ गया।

लुफासा के जाते ही सनूरा रथ पर बैठ गई। सनूरा को रथ पर बैठते देख मेलाइट, सुर्वया और रोजर भी रथ पर बैठ गये। इस समय रोजर ने पूरे कपड़े पहन रखे थे।

“क्या लगता है आप लोगों को? समुद्र तट पर किस प्रकार का खतरा होगा?” मेलाइट ने सुर्वया से पूछा।

लेकिन इससे पहले कि सुर्वया कोई जवाब दे पाती, उसे रोजर की बुदबुदाती आवाज सुनाई दी- “आपसे बड़ा तो नहीं ही होगा।"

“तुमने मुझे खतरा कहा?” अब मेलाइट अचानक से रोजर की ओर ही घूम गई।


“न...न...नहीं तो। मैनें ऐसा कब कहा।” रोजर ने घबराते हुए कहा।

“तुम भूल रहे हो रोजर कि मैं एक हिरनी हूं, मेरे कान बहुत तेज होते हैं।” मेलाइट ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा।

“पर मैंने तो सुना था कि बिल्ली के कान तेज होते हैं।” रोजर ने बात को बदलते हुए कहा।

“रोजर का कहना ठीक है, बिल्ली के कान ही सबसे तेज होते हैं।” सनूरा ने बिल्ली के परिवार का पक्ष लेते हुए कहा।

"हां-हां ठीक है, पर हिरनी के भी होते हैं।” मेलाइट ने सनूरा को बीच में पड़ते देख सरेंडर करते हुए कहा।

"मेरे हिसाब से सिंह के कान सबसे तेज होते हैं। अब सुर्वया ने भी अपने लोक का हवाला देते हुए कहा।

“क्या दोस्तों? हम इस समय समुद्र तट की ओर जा रहे हैं, जहां पर कोई बड़ा खतरा मंडरा रहा है और आप लोग हिरन, शेर और बिल्ली के कान पर लगे हुए हो।" रोजर ने मुस्कुराते हुए कहा।'

रोजर की बात सुन मेलाइट को याद आया कि वह तो कोई और ही बात कर रहे थे, पर रोजर ने ही उन सभी का ध्यान भंग कर दिया था।

अब मेलाइट ने घूरकर रोजर की ओर देखा। मेलाइट को घूरते देख रोजर ने सटपटा कर अपनी नजरें दूसरी ओर कर लीं। यह देख मेलाइट के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

तभी सनूरा को समुद्र तट का किनारा दिखाई देने लगा, जहां पर लहरों के ऊपर, एक विशाल अंतरिक्ष यान खड़ा दिखाई दे रहा था, पर अभी दूरी अधिक होने के कारण वह सनूरा के अलावा और किसी को दिखाई नहीं दे रहा था।

उस अंतरिक्ष यान को देख, सनूरा ने अपने पास से 3 लाल रंग की बिंदियां निकालकर मेलाइट, सुर्वया और रोजर की ओर बढ़ा दिया।

"तुम तीनों इन बिंदियों को अपने गले पर चिपकालो, इससे अराका द्वीप का सुरक्षा घेरा, तुम्हें अंदर या बाहर जाने पर रोकेगा नहीं।"

तीनों ने जल्दी से अपने-अपने गले पर उन बिंदियों को चिपका लिया।

कुछ ही देर में चारो सीनोर के समुद्र तट पर खड़े, उस अंतरिक्ष यान को निहार रहे थे।

सनूरा ने धीरे से सिर उठाकर ऊपर आसमान की ओर देखा, उसे लुफासा उस अंतरिक्ष यान की ओर जाता दिखाई दिया।

समुद्र की लहरों पर खड़ा अंतरिक्ष यान लगभग 100 मीटर बड़ा, काले रंग का यान था। उसका आकार बिल्कुल गोल था, उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह ज्वालामुखी से निकले लावे से निर्मित हो।

उस अंतरिक्ष यान पर अजीब सी आड़ी-तिरछी धारियां बनी हुई थीं।

उस अंतरिक्ष यान पर कुल 10 मनुष्य की तरह दिखने वाले जीव खड़े थे, जिनका शरीर हल्की सी नीली रंगत वाला था और उन सभी ने एक ही तरह की, गाढ़े नीले रंग की ड्रेस पहन रखी थी।

हर ड्रेस के बीच में एक सुनहरे रंग का गोला बना था, जिस पर A1 से लेकर A10 तक लिखा हुआ था। वह सभी अंतरिक्ष यान के ऊपर एक क्रमबद्ध तरी के से खड़े थे।

^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
उधर इन सबसे दूर सीनोर राज्य में बने पिरामिड के अंदर, एक बड़ी सी स्क्रीन पर, यह पूरा दृश्य, वहां खड़े मकोटा, वुल्फा और जैगन देख रहे थे।

इस समय जैगन का आकार एक साधारण मनुष्य के बराबर ही था। शायद उसके पास अपने आकार को घटाने और बढ़ाने की भी विशेषता थी।

“यह तो कोई अंतरिक्ष के जीव हैं? जो अराका वासियों से लड़ने के लिये आये हैं।” वुल्फा ने कहा “क्या हमें भी इस युद्ध का हिस्सा बनना चाहिये मांत्रिक?"

“हां-हां बनना चाहिये।” मकोटा के बोलने के पहले ही जैगन बोल उठा- “बहुत दिन हो गये युद्ध किये हुए... पहले मुझे भेजो, मैं इन सबको काटकर खा जाऊंगा।

“मूर्ख मत बनो जैगन।” मकोटा ने जैगन को समझाते हुए कहा- “हमें पहले यहीं से बैठकर इस युद्ध को देखना चाहिये। पता तो चले कि लुफासा जैसे मूर्ख ने और किस-किस को सीनोर में छिपा कर रखा है?"

मकोटा का इशारा इस समय मेलाइट, रोजर व सुर्वया की ओर था, जो उसके लिये बिल्कुल नये थे।

“और अगर उन अंतरिक्ष के जीवों के पास कोई खतरनाक शक्ति हुई? तो हम उनकी ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाकर, अपना लक्ष्य भी तो पूरा कर सकते हैं?” मकोटा के शब्दों में लोमड़ी सी मक्कारी झलक रही थी-
“पर एक चीज समझ में नहीं आई कि यह पूरी पृथ्वी को छोड़कर यहां अराका पर लेने क्या आये हैं?"

“मुझे लगता है कि युद्ध शुरु होने के बाद हमें काफी जानकारी अपने आप मिल जायेगी।” वुल्फा ने कहा “वह देखिये, अब उनमें से 1 जीव, पानी पर चलता हुआ, उन लोगों की ओर ही बढ़ रहा है।"
..............................

1 जीव को अपनी ओर बढ़ता देख, सनूरा ने सभी को सावधान होने का इशारा कर दिया।
1 उस जीव के गोले पर, A10 लिखा था। वह जीव पानी पर चलता हुआ, सनूरा के सामने आ पहुंचा।

“तुम में से इस द्वीप का कमांडर कौन है?” उस जीव ने साफ अंग्रेजी बोलते हुए कहा। उसे अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते देख सनूरा सहित सभी को बड़ा आश्चर्य हुआ।

“मैं हूं इस द्वीप की कमांडर। मेरा नाम सनूरा है। सनूरा ने कहा- “तुम लोग कौन हो? और तुम्हारे यहां आने का क्या उद्देश्य है?"

“मेरा नाम एलात्रा है, मैं और मेरे बाकी 9 साथी, पृथ्वी से 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर, एण्ड्रोवर्स आकाशगंगा के फेरोना ग्रह से आये हैं। हमें पृथ्वी पर हमारे एक दुश्मन की तलाश है, जो कि इस द्वीप पर ही कहीं छिपकर बैठा है। अगर तुमने बिना किसी शर्त, उसे हमे सौंप दिया, तो हम बिना युद्ध किये इस ग्रह से चले जायेंगे।" एलात्रा ने कहा।

“पर हमारे द्वीप पर कोई भी परग्रह वासी नहीं छिपा है। तुम पता नहीं किसकी बातें कर रहे हो?” सनूरा ने एलात्रा को समझाने की कोशिश करते हुए कहा।

“उसका नाम ओरस है...वह अंतरिक्ष के एक ग्रह डेल्फानो का राजकुमार है और हमारे सिग्नल के अनुसार वह 3 दिन पहले तक इसी द्वीप पर था। पता नहीं कैसे अचानक ही उसके सिग्नल आने बंद हो गये? इसी लिये हमको यहां आना पड़ा। ...अब अगर तुम लोग उसके बारे में कुछ नहीं बताओगे? तो विवश होकर हमें आपस में युद्ध करना ही पड़ेगा।

“अच्छा ठीक है एलात्रा, तुम हमें कुछ दिन का समय दे दो, हम उस ओरस को ढूंढकर, तुम्हें जल्दी ही सौंप देंगे।” सनूरा ने दिमाग लगाते हुए, एक बार फिर युद्ध को टालने की कोशिश की।

यह सुनकर एलात्रा ने अपने अंतरिक्ष यान से संपर्क करते हुए किसी से कहा- “कमांडर रेने, इस द्वीप का कमांडर, ओरस को हमें सौंपने के लिये कुछ समय मांग रहा है? आप बताइये कि हमें क्या करना है?"

कुछ क्षण रुकने के बाद दूसरी ओर से आवाज आई“ ठीक है, तुम इन्हें 3 दिन का समय देकर वापस अपने अंतरिक्ष यान पर आ जाओ।

"जी......कमांडर।” एलात्रा ने रेने से कहा।

"हमारे कमांडर ने आप लोगों को 3 दिन का समय देने को कहा है। हम 3 दिन बाद फिर से वापस आयेंगे। एलात्रा ने सनूरा से कहा और फिर पलटकर अपने अंतरिक्ष यान की ओर चल दिया।

मकोटा से यह समझौता देखा नहीं गया, उसने पिरामिड से बैठे-बैठे ही, अपने हाथ में पकड़ी सर्प के समान, छड़ी को हवा में लहराया।

उसके ऐसा करते ही मकोटा की छड़ी से एक लाल रंग की किरण निकली और हवा में ऊंची उठती हुई, समुद्र तट पर मौजूद एलात्रा से कुछ दूरी पर जाकर गिरी। एक तरह से मकोटा ने युद्ध का बिगुल बजा दिया था।

अब एलात्रा पीछे पलटा और सनूरा को घूरने लगा। इससे पहले कि सनूरा एलात्रा को कुछ समझा पाती, अंतरिक्ष यान से 3 और जीव कूदकर अराका की ओर चल दिये।

अब सनूरा के पास किसी को भी समझाने का समय नहीं था, अब तो हराने या हारने का समय था।

मेलाइट, सुर्वया और रोजर भी किसी भी हमले से निपटने के लिये तैयार हो गये थे। सुर्वया के हाथ में अचानक से तीर-धनुष दिखाई देने लगा।

“क्या कोई मुझे भी किसी प्रकार का हथियार देगा?" रोजर ने धीमें स्वर में बोलते हुए कहा।

"हां, मैं देती हूं।” यह कहकर मेलाइट ने रोजर की शर्ट एक झटके से फाड़कर फेंक दी- “यही है तुम्हारा हथियार।"

रोजर अब बिना शर्ट के उस युद्ध के मैदान में खड़ा था, पर उसकी नाभि से निकल रही तेज रोशनी एलात्रा का ध्यान बार-बार उधर ही ले जा रही थी।

रोजर को समझ ही नहीं आया कि मेलाइट ने ऐसा क्यों किया? वह तो बस अभी अंतरिक्ष यान की ओर से, पास आ रहे जीवों को देख रहा था।

तभी एलात्रा ने अपने हाथ हवा में उठाये और अपना पहला वार सनूरा पर कर दिया।

एलात्रा के हाथ से तेज बिजली की लहर निकली और सनूरा की ओर बढ़ी, पर सनूरा पहले से ही इसके लिये तैयार थी, उसने एक ओर झुककर उस वार को बचाया।

बिजली की वो लहर, सनूरा के पीछे मौजूद एक पेड़ पर जाकर गिरी, पेड़ अब धू-धू करके जलने लगा। यह देखकर सनूरा समझ गई, कि इस एलात्रा के अगले वार से बचना होगा।

तभी मेलाइट आगे बढ़ी और एलात्रा के सामने जाकर खड़ी हो गई।

अब मेलाइट ने सबसे चीखकर कहा- “तुम लोग बाकी के जीवों पर ध्यान दो, मैं इस एलात्रा से निपटती हूं।" यह कहकर मेलाइट ने अपने सिर को तेजी से दांये बांये हिलाया।

अब वह बैल के बराबर की एक सुनहरी हिरनी में परिवर्तित हो गई। उस सुनहरी हिरनी की सींगें, और पैर सोने के थे। एलात्रा एकाएक मेलाइट के इस रुप परिवर्तन को समझ नहीं पाया।

तभी मेलाइट ने बिजली की फुर्ती से एलात्रा के पेट में अपनी सींगें घुसा दीं। एलात्रा के शरीर से नीले रंग का खून निकलकर, समुद्र के पानी में मिक्स होने लगा।

उधर A2 नंबर का जीव, जिसका नाम नीडो था, सनूरा की ओर बढ़ा। नीडो ने अपने दोनों हाथों को आगे किया, जिससे बहुत से छोटे-छोटे धारदार सितारे निकलकर सनूरा की ओर लपके।

सनूरा ने तुरंत अपने हाथों से ताली बजाई, जिससे वह एक विशाल बिल्ली में परिवर्तित हो गई।

अब सनूरा की स्पीड देखने लायक थी। उसने उछलकर, हवा में ही अपने शरीर का एक कोण बनाया और सभी सितारों से आसानी से बच गई।

अब सनूरा ने उछलकर नीडो के शरीर पर अपना पंजा मारा। नीडो के सीने पर मौजूद उसकी ड्रेस, कुछ मांस और खून लिये अब सनूरा के पंजों में फंसी थी। अब नीडो सनूरा से सावधान हो गया था।

तीसरे जीव A9 का नाम सलोहा था। सलोहा ने जैसे ही एलात्रा और नीडो का खून से सना शरीर देखा, उसने तुरंत अपने शरीर को एक ‘मरकरी' की तरह के द्रव फार्म में बना लिया। सलोहा को आगे बढ़ता देख सुर्वया ने उस पर तीरों की बौछार कर दी।

पर सुर्वया के चलाये हुए सारे तीर सलोहा के पार जा रहे थे, उन तीरों का उस पर कोई भी असर नहीं हो रहा था।

यह देख सुर्वया ने अपने मन में कोई मंत्र पढ़ा, जिससे उसके धनुष पर एक आग के समान तीर दिखाई देने लगा, सुर्वया ने वह तीर भी सलोहा पर फेंक कर मार दिया।

इस तीर के लगते ही सलोहा का शरीर, पूरी तरह से आग की लपटों के बीच घिर गया।

यह देख सुर्वया की नजर चौथे जीव A3 पर गई, जिसका नाम डार्को था, पर सबकी आशा के विपरीत डार्को, आराम से पानी पर खड़े होकर उस युद्ध को देख रहा था।

डार्को जैसा ही हाल रोजर का भी था, उसे तो कुछ पता ही नहीं था कि युद्ध करना कैसे है? वह भी डरी-डरी निगाहों से चारो ओर हो रहे इस घमासान को देख रहा था।

उधर मेलाइट, एलात्रा को अपनी सींघों में फंसाकर इधर-उधर पटक रही थी। एलात्रा को संभलने का भी मौका नहीं मिल पा रहा था।

उधर नीडो ने अब अपने हाथों से सितारे फेंकने बंद कर दिये थे, उसे पता चल गया था कि उन सितारों से, वह सनूरा रुपी बिल्ली का कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा? इसलिये इस बार उसने अपनी चाल बदल दी।

नीडो ने एक बार फिर अपना हाथ सनूरा की ओर उठाया, सनूरा को लगा कि नीडो फिर से सितारे फेंकने जा रहा है, इसलिये उसने हवा में छलांग लगा दी, पर इस बार सनूरा के ठीक सामने हवा में एक जोर का धमाका हुआ, जिसके कारण सनूरा, नीचे जमीन पर गिर गई।

सनूरा का बिल्ली वाला शरीर इस धमाके से कई जगह पर जख्मी हो गया था, पर सनूरा किसी भी चीज की परवाह किये बिना फिर से खड़ी हो गई।

यह देख सुर्वया ने इस बार नीडो पर तीरों की बौछार कर दी। नीडो का सारा ध्यान सनूरा की ओर था, इसलिये वह सुर्वया के तीरों से बच नही पाया।

कम से कम 8 से 10 तीर नीडो के शरीर में जाकर घुस गये। जिसकी वजह से नीडो वहीं पानी पर गिर गया।

तभी सलोहा ने सुर्वया का ध्यान दूसरी ओर देख, अपने द्रव्य रुपी शरीर से सुर्वया को पूरी तरह से जकड़ लिया।

यह देख मेलाइट ने एलात्रा को वहीं नीडो के पास जमीन पर पटका और सुर्वया की ओर तेजी से दौड़ पड़ी।

मेलाइट ने सुर्वया के पास पहुंचकर अपनी सोने की सींगें, सलोहा के द्रव्य वाले शरीर से छुआ दिया।

मेलाइट के सींगों से छूते ही सलोहा को अपने शरीर में एक तेज गर्मी का अहसास हुआ और वह पूरा का पूरा पिघलकर सुर्वया के पास जमीन पर गिर गया। अब सुर्वया फिर से आजाद हो गई थी।

तभी नीचे गिरे पड़े घायल नीडो ने अपना मुंह जोर से खोल दिया। उसके मुंह से एक छोटा सा सूर्य के समान गोला निकला और उसने वहां के वातावरण में तेज गर्मी पैदा कर दी।

उस गर्मी ने एक सेकेण्ड में ही सबके पसीने छुड़ा दिये। अंतरिक्ष के उन जीवों पर इस गर्मी का कोई असर नहीं हो रहा था।

अब सभी सीनोरवासी युद्ध करना छोड़, उस गर्मी से बचने के लिये इधर-उधर छिपने की जगह ढूंढने लगे।

पर जाने क्यों रोजर को इस भयानक गर्मी का बिल्कुल भी अहसास नहीं हा रहा था, यह देख रोजर उस हवा में नाच रहे छोटे से सूर्य के और पास पहुंच गया।

जैसे ही रोजर उस सूर्य के पास पहुंचा, वह सूर्य छोटा होकर रोजर की नाभि में समा गया। यह देखकर अंतरिक्ष के जीव क्या सभी अराका वासी भी हैरान हो गये।

सबसे ज्यादा हैरानी तो स्वयं रोजर को हो रही थी।

तभी घायल पड़े एलात्रा ने, अपने हाथ को हवा में जोर से उठाया, उसके ऐसा करते ही आसमान में तेज बिजली कड़कने लगी और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, एक बिजली रोजर पर आकर गिरी।

रोजर का शरीर हवा में उछला और एक पल में निष्प्राण हो गया। यह देख जैसे मेलाइट का खून खौल गया, उसने अपने आकार को थोड़ा और बड़ा कर लिया और पूरे आसमान की बिजली को अपनी सींघों में सोख लिया।

अब मेलाइट की खूंखार निगाहें सिर्फ और सिर्फ एलात्रा पर थीं। इससे पहले कि एलात्रा अपने बचाव में कुछ कर पाता, मेलाइट ने अपनी सींघों में भरी पूरी बिजली को उल्टा एलात्रा पर ही मार दिया।

शायद आज पहली बार एलात्रा को, अपनी ही दवा का स्वाद अनुभव करना पड़ रहा था। कड़कड़ाती हुई वह बिजली एलात्रा पर जाकर गिरी। जिसकी वजह से एलात्रा पूरा स्वाहा हो गया। उसके शरीर का कण-कण जलकर हवा में बिखर गया।

अब इतनी देर से वहां खड़े तमाशा देख रहे डार्को की आँखें जल उठीं, वह अपने हाथ उठाकर हमला करने ही जा रहा था कि तभी समुद्र की लहरों के बीच से एक विशाल व्हेल हवा में उछली और उसे गपक कर पानी के अंदर चली गई।

जी हां, वह कोई और नहीं बल्कि लुफासा था। लुफासा अब किसी को कोई भी मौका नहीं देना चाहता था।

लुफासा ने डार्को को अपने दाँतों में कसकर दबाया और समुद्र की गहराई के अंदर छलांग लगा दी।

उधर नीडो और सलोहा मेलाइट का विकराल रुप देख धीरे-धीरे पीछे की ओर खिसकने लगे थे।

अब मेलाइट ने अपना रुप परिवर्तित कर लिया। अब वह फिर से स्त्री रुप में आ गई और रोजर का शरीर अपनी बांहों में भरकर जोर-जोर से रोने लगी।

सनूरा को पता था कि खतरा अभी टला नहीं इसलिये वह मेलाइट के पास पहुंच तो गई थी, पर उसकी निगाहें अभी भी नीडो और सलोहा की ओर थीं।

सुर्वया से मेलाइट का इस प्रकार रोना देखा नहीं जा रहा था। तभी सुर्वया की निगाह अंतरिक्ष यान से निकलकर आ रहे 4 और योद्धाओं पर पड़ी।

यह देख सुर्वया का दिमाग पूरी तरह से खराब हो गया। अब उसने अपने वस्त्रों में छिपाई एक डिबिया को निकाल लिया और उसका ढक्कन खोलकर तेज आवाज में चिल्लाई- “सिंहराज, मुझे शुभार्जना की आवश्यकता है।”

सुर्वया के ऐसा बोलते ही उस डिबिया से, एक सुनहरे रंग का धुंआ निकलकर वातावरण में फैलने लगा।

धीरे-धीरे उस सुनहरे धुंए ने अराका के पूरे आकाश को ढंक लिया।

अब अंतरिक्ष यान से निकले जीव, द्वीप को छोड़ उस धुंए को देखने लगे।

तभी उस धुंए ने एक विशाल सिंह का अवतार धारण कर लिया, जिसके मुंह का ही आकार अराका द्वीप से भी बड़ा था।

अब उन अंतरिक्ष के जीवों ने नीडो और सलोहा को उठाया और धीरे-धीरे अपने अंतरिक्ष यान की ओर वापस जाने लगे।

तभी उस महाकाय सिंह ने एक भयानक गर्जना की। उस गर्जना की ध्वनि तरंगें इतनी ज्यादा शक्तिशाली थीं, कि उस सिंह की गर्जना मात्र से ही, पूरा का पूरा अंतरिक्ष यान 20 मीटर तक पीछे खिसक गया।

पर सिंहराज की महा गर्जना का एक असर और हुआ, मरा पड़ा रोजर अचानक से उठकर बैठ गया।

उधर अंतरिक्ष यान के सारे जीव अपने यान में बैठकर, वहां से तुरंत भाग गये।

इधर मेलाइट ने जैसे ही रोजर को उठते देखा, उसने तुरंत अपने आँसू पोंछ लिये और खुश हो ते हुए कहा- “थैंक गॉड कि तुम जिंदा हो।"

रोजर अब अचकचाकर अपने शरीर को देखने लगा, जो कि अब भी मेलाइट की गोद में था।

“अरे वाह, काश ऐसा मरना रोज-रोज हो।" रोजर ने खुश होकर कहा।

रोजर की बात सुन मेलाइट ने रोजर के शरीर को धीरे से जमीन पर रखा और शर्माकर उस जगह से उधर चल दी, जिधर सुर्वया खड़ी थी।

उधर महाकाय सिंहराज का शरीर वापस धुंए में बदलकर उस डिबिया में समा गया।

मेलाइट ने अब सुर्वया को गले से लगा लिया “मुझे पता है कि रोजर को तुमने ही शुभार्जना का प्रयोग कर बचाया है। मैं तुम्हारा यह अहसान पूरी जिंदगी नहीं भूलूंगी सुर्वया।

"चल-चल, मैंने तुम्हारे लिये नहीं बचाया उस ‘कोई और' को। मुझे तो बस कुछ दिन और तुम दोनों का नाटक देखना है। सच में बहुत मजा आता है।” सुर्वया ने किसी बेस्ट सहेली की तरह मेलाइट से मजा लेते हुए कहा- “चलो अब अपनी 'नाभिकीय टॉर्च' को लेकर महल चलते हैं।"

सुर्वया ने 'नाभिकीय टॉर्च' कहकर रोजर का एक नया नामकरण कर दिया था, पर जो भी हो यह नाम रोजर पर बिल्कुल फिट बैठ रहा था।

उधर लुफासा भी डार्को को कहीं पानी में पटककर वापस आ गया था। अतः सभी वापस महल की ओर चल पड़े।

सभी के चेहरे इस समय खुशी से जगमगा रहे थे क्यों कि उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा था और उन्होंने अपने एक शत्रु एलात्रा को मार दिया था।

जारी रहेगा_____✍️
Bhut hi badhiya update Bhai
Sinor vasi abhi to ye choti si jang jeet gaye
Dhekte hai aage kya hota hai
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

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रिव्यू की शुरुआत की जाए

नए अध्याय का प्रारंभ हो चुका हैं युद्ध का बिगुल बज चुका हैं , जिस तरह युद्ध की झलकियां दिखाई हैं वे साबित करते हैं आगे हमें क्या देखना को मिलेगा।
Avasya :smarty:
मतलब सिर्फ एंडोर्स ग्रह के १० लोग भिड़ने आए हैं , अटका वासियों से, फिर भी इतनी तबाहि , भला हो सूर्यवर्या की शुभार्जुन का जिसने इस युद्ध में थोड़ा समय मांग लिया।
bilkul, suvarya ne subharjana, aur singhraaj ki shakti se hi ye chamatkar kiya hai 😎
अब सबसे पहले मुझे ये बताओ सुनेरा लड़की हैं या लड़का क्योंकि कभी लगता हैं ये लड़की है तो कभी लड़का लगता है
Abe wo sanura hai surena nahi, and wo 100% ladki hai, viswas na ho to jakar ghaaghra utha le or dekh le 😆
जब शक्ति का वर्णन हो रहा था तब इनका जिक्र क्यों नहीं हुआ क्योंकि मैने पुराना अपडेट पढ़ा है। इसे तो लगता है ये दोनो शक्तियों उन पंद्रह शक्ति में से हैं। अब मुझे नही पता इतना बड़ा लूपहोल कैसे भरेगा। पर करना तो पड़ेगा वर्ना कन्फ्यूजन होगा ।
Sabhi ki details thodi di thi ☺🤔
Baki agar kuch bacha hoga to saamne aajayega, fikar not.
अब समझा आगया है , की रॉजर जिंदा कैसे हुआ, वो शुभर्जुना का जादू था।
Yess
मेगा लाइट के गुस्से वाला अवतार तो खतरनाक था, वैसे ये जिंदा मारने के खेल कब तक चालू रखोगे , एक समय लगा कि युद्ध में पहले बलि आगाई, लेकिन हम गलत थे।
Abe wo mega light nahi, melight hai :declare: Pahle bhi bata chuka hu uska naam:slap:
Baaki aise hi har baar har koi jinda thodi hoga.?
वैसे जैसा शुभार्जुन के बारे में पढ़ा हैं लगता है इसका प्रयोग पहले बार हुआ है और आगे चल कर २ बार हम किसी को भी जीवित कर सकते है ।
fir wahi baat, subharjun nahi, Subharjana naam hai us shakti ka 😅
अब मार्कोटा ने युद्ध चालू कर कर कही न कही मुसीबत मोल लेली है, ये एंडोर्स वाले किसी को नहीं छोड़ने वाले अब तो और ताकतवर होकर आयेंगे क्यूंकि इनके महाबली योद्धा को परास्त किया है
No doubt, aisa ho sakta hai :dazed:
इस अपडेट से ये भी लगता है कहानी के समाप्ति की और एक कदम बढ़ चुका है

कुलमिलाकर शानदार अपडेट आगे की प्रतीक्षा
Raj_sharma
Abhi kaha bhai, abhi to bohot kuch baaki hai :roll:
Tumne chanra kaanta dekha hai kya? Dekha hai to fir se yaad aane wala hai hai, and nahi dekha to hum uska bhi baap dikha denge :roll3:
Thank you so much for your wonderful review and superb support bhai :hug:
 

Raj_sharma

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Bhut hi badhiya update Bhai
Sinor vasi abhi to ye choti si jang jeet gaye
Dhekte hai aage kya hota hai
Thanks for your valuable review and support bhai :thanks:
 

Raj_sharma

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#187.

चैपटर-4
अद्भुत नेत्र:
(तिलिस्मा 5.11)

वसंत ऋतु को पार करने के बाद सभी जिस द्वार में प्रवेश किये, वह उन्हें लेकर एक बड़े से नाव के आकार वाले कमरे में पहुंच गया।

यह कमरा लगभग 5,000 वर्ग फुट में निर्मित था, इसकी छत की ऊंचाई भी बहुत ज्यादा थी।

कमरे की जमीन सफेद पत्थरों से बनी थी, जिसके बीच एक 10 मीटर त्रिज्या का नीला गोला और उस नीले गोले के बीच, 2 मीटर त्रिज्या का काला गोला बना था।

उस काले गोले के बीच में, काँच की पारदर्शी लिफ्ट लगी थी, जो कि उस काले गोले से, नीचे की ओर ले जाने के लिये थी। परंतु लिफ्ट पर किसी भी प्रकार का कोई बटन नहीं था।

कमरे की छत पर, लिफ्ट के ठीक ऊपर की ओर एक गोल ढक्कन लगा था।

“यह कमरा तो देखने में बहुत ही अजीब सा लग रहा है?" ऐलेक्स ने कहा।

“सही कह रहे हो ऐलेक्स भैया, इस कमरे का डिजाइन किसी नाव के समान है” शैफाली ने कमरे को देखते हुए कहा- “और इसकी जमीन भी थोड़ी उभरी हुई लग रही है।"

“पर इस कमरे में उस काँच की लिफ्ट के सिवा तो कुछ है ही नहीं?" जेनिथ ने कहा- “शायद उस लिफ्ट से हमें नीचे की ओर कहीं जाना है। पर उस लिफ्ट पर कहीं भी बटन नहीं है, पता नहीं यह कैसे चलती होगी?" यह कहकर जेनिथ उस लिफ्ट की ओर बढ़ी, परंतु अचानक पैर में कुछ चिपचिपा सा अहसास होने की वजह से वह चलते-चलते रुक गई और नीचे जमीन की ओर देखने लगी।

“दोस्तों, यहां जमीन पर कुछ चिपचिपा पदार्थ भी है, जरा ध्यान से आना, कहीं यह पदार्थ भी किसी प्रकार की मुसीबत ना हो?” जेनिथ ने सभी को सावधान करते हुए कहा और लिफ्ट की ओर आगे बढ़ गई।

लेकिन इससे पहले कि जेनिथ और आगे बढ़कर लिफ्ट के पास पहुंचती, तभी ऊपर छत पर लगा ढक्कन तेजी से खुला और उसमें से एक प्रकाश की किरण आकर लिफ्ट से टकराई।

प्रकाश की किरण टकराते ही, लिफ्ट का दरवाजा 2 सेकेण्ड के लिये खुला और फिर बंद होकर लिफ्ट, एक तेज आवाज करती हुई, जमीन के नीचे चली गई।

अब लिफ्ट के स्थान पर एक अंतहीन गोल गड्ढा दिखाई दे रहा था। अब ऊपर का ढक्कन पुनः बंद हो गया था।

जेनिथ ने धीरे से उस गड्ढे में झांक कर देखा। तभी जेनिथ को लिफ्ट वापस आती दिखाई दी। लिफ्ट को वापस आते देख जेनिथ थोड़ा पीछे हट गई। लिफ्ट पहले की तरह अपने स्थान पर वापस आकर रुक गई।

अब जेनिथ की नजर सुयश की ओर गई, जो कि बहुत देर से इस पूरे स्थान को देखकर कुछ सोच रहा था।

जेनिथ को अपनी ओर देखते पाकर आखिर सुयश बोल उठा- “यह पूरा कमरा किसी मानव के नेत्र के समान प्रतीत हो रहा है। जरा सभी लोग जमीन की ओर देखो, इसकी नाव सी सफेद आकृति, आँख के सफेद भाग की तरह प्रतीत हो रही है। इस सफेद भाग के बीच का नीला गोला, आँख की ‘आइरिश' और काला गोला, आँख की ‘प्यूपिल' लग रहा है। छत के ऊपर की ओर लगा ढक्कन, शायद पलकों का काम कर रहा है। जब पलकें खुलती हैं, तो उसमें से दृश्य तरंगे निकलकर उस लिफ्ट पर गिरती हैं। शायद वह लिफ्ट उन दृश्य तरंगों को लेकर मस्तिष्क तक जाती हो?"

सुयश के शब्दों को सुन सभी ने पहली बार उस कमरे को महसूस करके देखा। अब सभी सुयश की बात से सहमत थे।

"हम आपकी बात से सहमत हैं कैप्टेन।" क्रिस्टी ने कहा- “पर यह नहीं समझ आ रहा कि हमें इस आँख में करना क्या है?"

“पर कैप्टेन, जमीन पर बिखरा यह चिपचिपा पदार्थ कैसा है?” जेनिथ ने सुयश से पूछा- “आँख में तो ऐसा नहीं होता।"

"शायद यह चिपचिपा पदार्थ ही हमारी परेशानी है?" शैफाली ने कहा- “क्यों कि आँख में अगर किसी भी प्रकार का कोई कण या पदार्थ गिरता है, तो आँख स्वतः आँसू बनाकर उस कण या पदार्थ को बाहर निकाल देती है।

“अब समझ में आ गया।” ऐलेक्स ने खुशी से चीखते हुए कहा- “इस आँख में आंसुओं का निर्माण नहीं हो रहा। हमें आंसुओं का निर्माण करके इस चिपचिपे पदार्थ को समाप्त करना है।

“वाह मेरे अराका के शेर, तुमने तो पूरी पहेली ही हल कर दी।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स से मजा लेते हुए कहा “पर जरा यह बताओगे कि हम आँसुओं का निर्माण कैसे करेंगे?"

क्रिस्टी की बात सुन, ऐलेक्स अपना सिर खुजाकर ऊपर की ओर देखने लगा।

“आँसुओं का निर्माण, आँखों के ऊपर बने 'लैक्राईमल ग्लैंड' में होता है।" शैफाली ने कहा- “वहीं से आँसू हमारी आँख में प्रवेश करते है और ‘लैक्राइमल पंक्टा' से होते हुए नाक के द्वारा बाहर निकल जाते हैं। जब आँसू ज्यादा मात्रा में बनते हैं, तो वह ओवरफ्लो होकर हमारी आँखों से बाहर निकलने लगते हैं। इसी प्रक्रिया को हम रोना कहते हैं। शैफाली ने सरल भाषा में सभी को समझाते हुए कहा।

"तो इसका मतलब पहले हमें लैक्राईमल ग्लैंड तक पहुंचना होगा, उसके बाद ही हम जान पायेंगे कि वहां परेशानी क्या है?" जेनिथ ने कहा- “पर हम लैक्राईमल ग्लैंड तक जायेंगे कैसे?"

“यहां से तो लैक्राईमल ग्लैंड तक जाने का कोई रास्ता नहीं है। अब हमें वहां तक पहुंचने के लिये, पहले छत के ढक्कन खुलने का इंतजार करना होगा। जैसे ही ढक्कन खुलेगा, हम बारी-बारी से लिफ्ट के द्वारा नीचे जायेंगे और फिर वहां से किसी भी प्रकार से मस्तिष्क तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। अगर हम मस्तिष्क तक पहुंचने में सफल हो गये, तो वहां से कहीं भी जाया जा सकता है।” शैफाली ने सभी को अपना प्लान बताते हुए कहा।

"मुझे लगता है कि इस द्वार के लिये, हमें सिर्फ शैफाली की बातें सुननी चाहिये। क्यों कि उसे ही आँख की सबसे अच्छी जानकारी है।” सुयश ने कहा।

सुयश की बात सुन, सभी ने सिर हिलाकर अपनी सहमति दे दी। अब सभी आकर लिफ्ट के पास खड़े हो गये। सभी को वहां खड़े-खड़े आधा घंटा बीत गया, पर ऊपर की छत का ढक्कन नहीं खुला।

“कैप्टेन, यह छत का ढक्कन क्यों नहीं खुल रहा? क्रिस्टी ने सुयश की ओर देखते हुए कहा।

“मुझे लगता है कि यह इंसान सो रहा है, इसी लिये उसकी पलकें अभी नहीं झपक रहीं हैं।” सुयश ने तथ्य देते हुए कहा।

तभी छत की ऊपर लगा ढक्कन खुलने की तेज आवाज सुनाई दी। यह देख सुयश ने पहले तौफीक को नीचे जाने का इशारा किया। सुयश का इशारा पाकर, तौफीक बिल्कुल तैयार हो गया।

अब छत के ढक्कन से तेज रोशनी निकलकर, लिफ्ट के ऊपर गिरी और इसी के साथ लिफ्ट का दरवाजा 2 सेकेण्ड के लिये खुला।

तौफीक के लिये लिफ्ट में प्रवेश करने के लिये इतना समय काफी था। लिफ्ट तौफीक को लेकर नीचे की ओर चली गई।

धीरे-धीरे, एक-एक करके सभी उस लिफ्ट के माध्यम से नीचे की ओर आ गये। अब नीचे उन्हें एक बड़ा सा गोल पारदर्शी पर्दा दिखाई दिया, जिससे होकर प्रकाश अंदर की ओर जा रहा था।

“यह लेंस है, हमारी दृश्य तरंगे इससे होकर ही अपना चित्र रेटिना पर दर्शाती हैं।" शैफाली ने लेंस को देखते हुए कहा- “हमें इस लेंस के पार जाना होगा। यह कहकर शैफाली ने लेंस को अपने हाथों से छूकर देखा, पर वह उसे ठोस दिखाई दिया।

"हम ऐसे इसके पार नहीं जा सकते, इसके पार जाने के लिये कोई ना कोई दूसरा उपाय सोचना होगा?" शैफाली ने सुयश की ओर देखते हुए कहा।

“क्या हम फिर से प्रकाश के द्वारा उस पार नहीं जा सकते?" सुयश ने शैफाली से सवाल करते हुए पूछा।

“नहीं !” शैफाली ने समझाते हुए कहा- “इसको हम इस प्रकार समझ सकते हैं, कि जिस प्रकार पारदर्शी काँच के दूसरी ओर प्रकाश के सिवा कुछ भी नहीं जा सकता, ठीक उसी प्रकार इस लेंस के पार हम प्रकाश मे माध्यम से नहीं जा सकते।... लेकिन अभी भी हमारे पास दूसरी ओर जाने का एक तरीका है।... जब भी हल्का प्रकाश हमारी आँख पर पड़ता है, तो हमारी आँख में मौजूद लेंस अपने आकार को बढ़ा देता है और जब भी कोई तेज प्रकाश, हमारी आँखों पर पड़ता है, तो हमारी आँखों का लेंस सिकुड़कर छोटा हो जाता है। तो हमें बस इस लेंस के किनारे पहुंचकर किसी तेज प्रकाश के आने का इंतजार करना होगा। जैसे ही तेज प्रकाश आँखों पर पड़ेगा, लेंस अपने आपको ‘प्यूपिल' के हिसाब के संतुलित कर अपना आकार सिकोड़ेगा और ऐसी स्थिति में हम लेंस के किनारे से होकर दूसरी ओर जा पायेंगे।"

शैफाली का ज्ञान कई लोगों के सिर के ऊपर से निकल गया, पर उन्हें इतना समझ में आया कि तेज प्रकाश में लेंस के किनारे से, दूसरी ओर जाने का रास्ता बन जायेगा। अतः सभी लेंस के एक किनारे पर आकर खड़े हो गये।

सभी को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा। कुछ देर बाद ही आँख से तेज रोशनी प्यूपिल को पारकर लेंस पर आकर पड़ी। अब लेंस ने अपने आकार को सिकोड़ना शुरु कर दिया।

जैसे ही लेंस के किनारे से एक व्यक्ति के निकलने के बराबर जगह हो गई, शैफाली सहित सभी उस जगह से निकलकर लेंस व रेटिना के बीच वाले स्थान पर पहुंच गये।

उस स्थान का आकार काफी बड़ा था। वहां का वातावरण हल्के गुलाबी रंग का था। वहां की गोलाकार दीवारें किसी फिल्मस्क्रीन के पर्दे की भांति अत्यंत चमकीली थीं। बीच के स्थान पर अनेक लाल और नीले रंग के मोटे, परंतु खोखले पाइप हवा में लहरा रहे थे।

"हमें इन पाइपों के अंदर तो नहीं घुसना है ना?" ऐलेक्स ने घबराकर शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

"नहीं, ये पाइप असल में 'ऑप्टिकल नर्वस्' हैं।" शैफाली ने कहा- “यही नर्वस् रेटिना पर बने चित्रों को देखकर, मस्तिष्क तक इलेक्ट्रानिक सिग्नल भेजते हैं। अब हमें सिर्फ ये देखना है कि कैश्वर की बनाई यह कृत्रिम आँख, किस प्रकार से मस्तिष्क तक सिग्नल भेजती है? हमें बस उस सिग्नल का पीछा करना होगा।"

"हे भगवान, हमारी आँख इतनी कठिनता से हमें चित्र दिखाती है, यह तो हमें पता ही नहीं था।” क्रिस्टी ने आश्चर्य से आँखें फाड़कर रेटिना को देखते हुए कहा।

“मुझे इस बात का अच्छी तरह से अहसास है।" शैफाली ने आह भरते हुए कहा- “मैंने तो 13 वर्ष तक अपनी आँखों से कुछ देखा ही नहीं?" यह सुन सुयश ने शैफाली के सिर पर हाथ फेरा, जो कि अपनेपन का अहसास लिये था।

तभी रेटिना की चमक कुछ कम होती दिखाई दी।

“दोस्तों तैयार हो जाओ, अब ऑप्टिकल नर्वस् मस्तिष्क को सिग्नल भेजने ही वाला है।" शैफाली ने सबको सावधान करते हुए कहा।

तभी उन पाइपों से 4 फुट के जुगनू निकलने शुरु हो गये, जो कि अपने पंखों के सहारे तेजी से उड़ रहे थे।
उन जुगनुओं से तेज रोशनी भी, कुछ समय अंतराल में चमक रही थी।

किसी को भी पाइपों से जुगनू के निकलने की तो आशा कतई नहीं थी, इसलिये सभी विस्मित होकर उन जुगनुओं को देखने लगे।

तभी सभी को शैफाली की आवाज सुनाई दी- “यही जुगनू इलेक्ट्रानिक तरंगों का रुप हैं, हमें किसी भी प्रकार से इन पर बैठना होगा? यही हमें मस्तिष्क तक ले जा सकते हैं।" यह कहकर शैफाली ने एक पाइप को उछलकर पकड़ लिया और उससे जुगनू निकलने का इंतजार करती रही।

जैसे ही पाइप से जुगनू निकलता दिखा, शैफाली उस जुगनू पर कूदकर सवार हो गई। जुगनू अब शैफाली को लेकर हवा में उड़ने लगा।

शैफाली को इस प्रकार करते देख, क्रिस्टी ने भी उछलकर एक पाइप को पकड़ा और एक जुगनू पर सवार हो गई।

इस प्रकार एक-एक कर जेनिथ को छोड़ सभी जुगनुओं पर बैठ गये। जेनिथ जुगनू तो छोड़ो, पाइप को भी पकड़ते ही नीचे गिर जा रही थी।

“कैप्टेन, जेनिथ जुगनू पर नहीं बैठ पा रही है।' ऐलेक्स ने चीखकर कहा- “हमें जेनिथ की मदद करनी होगी।"

लेकिन इससे पहले कि कोई जेनिथ की मदद कर पाता, तभी रेटिना के बीच से एक द्वार खुला और सभी जुगनू उस द्वार से होते हुए बाहर की ओर निकल गये।

अब जेनिथ के हाथ पैर फूलने लगे। उसे नहीं पता था कि अगर वह कुछ देर तक इस रेटिना के द्वार से बाहर नहीं निकली, तो उसके साथ क्या होगा?

“नक्षत्रा !” जेनिथ ने घबराकर नक्षत्रा को पुकारा “क्या तुम मेरी किसी भी प्रकार से मदद कर सकते हो?"

“मैं तुम्हारा हौसला बढ़ाने के सिवा कुछ नहीं कर सकता जेनिथ। यह एक फिजिकल कार्य है, इसे तुम्हें स्वयं ही पूरा करना होगा।” नक्षत्रा ने अपने हथियार डालते हुए कहा।

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ पुनः से कोशिश करने लगी। तभी अचानक जेनिथ के शरीर को एक झटका लगा और वह उछलकर एक जुगनू पर सवार हो गई।

जेनिथ को ऐसा लगा कि जैसे किसी ने उसके शरीर को उठाकर जुगनू की ओर फेंक दिया हो।

जेनिथ ने डरकर जुगनू के शरीर को कसकर पकड़ लिया, पर वह यह नहीं जान पायी कि उसका शरीर जुगनू तक पहुंचा कैसे?

“यह कैसे हुआ नक्षत्रा? मैं अपने आप जुगनू तक कैसे पहुंच गई?” जेनिथ ने आश्चर्य से नक्षत्रा से पूछा।

“क्षमा चाहता हूं जेनिथ, इसका जवाब मेरे पास भी नहीं है, पर मुझे लगता है कि कोई ना कोई इस तिलिस्म में भी तुम्हारी मदद कर रहा है। अब वह कौन है? यह मुझे भी नहीं पता।

जेनिथ का जुगनू उड़कर रेटिना के द्वार की ओर चल दिया, पर अब जेनिथ की आँखें सोचने के अंदाज में सिकुड़ गईं थीं।

पता नहीं क्यों इस बार उसे नक्षत्रा पर कुछ शक सा होने लगा था? उसे लग रहा था कि उसे किसी प्रकार से नक्षत्रा ही बार-बार बचा रहा है? पर वह उसे बता क्यों नहीं रहा था? यह जेनिथ को नहीं समझ आ रहा था ?


जारी रहेगा_____✍️
 
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