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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है सुयश के टैटू का तो राज खुल गया लेकिन एक और राज सामने आ गया सबकी हैप्पी न्यू ईयर की जगह bad न्यू ईयर हो गई शैफाली के पास एक सिक्का मिला है वह शैफाली के पास कौन व क्यों रख के गया है जिसका पता किसी को भी नहीं है अल्बर्ट के हिसाब से यह सिक्का अटलांटिस सभ्यता का है ये सच हो सकता है और शैफाली का उनके साथ कुछ तो संबंध हो सकता है???

James aur Wilmar ne Shalaka👸 aur uske bhaiyo 🦸‍♂️🦹‍♂️🦸‍♂️🦹‍♂️🦸‍♂️🦹‍♂️ 🦸‍♂️ ko jagaa diya. Lekin inaam ki jagah unhe sunehri qaid mili.. 😏

Yeha Mayavan mei ab Nayantara 🤩 ka kya mamla hai yaar.. bahut suspense hai yaar..
:cool3:

I don't know ,aap padhakar batana kaisi lagi ,

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Nice update....

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

अदभुद अकल्पनीय इससे अधिक शब्द नहीं हैं व्याख्यान के लिए

राज भाई
सेक्स नहीं कहानी पढ़ने का शौक रहा है मेरा हमेशा से
सेक्स पढ़ने देखने की जरूरत सिर्फ कुछ नया, अनोखा, अलग जानने के लिए समझता हूं
आनन्द या मनोरंजन सेक्स लिखने, पढ़ने, सुनने या देखने से नहीं 'करने' में ही होता है

Awesome update and nice story.

फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया

शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

बहुत ही शानदार अपडेट है !

रिव्यू की शुरुआत की जाए

नए अध्याय का प्रारंभ हो चुका हैं युद्ध का बिगुल बज चुका हैं , जिस तरह युद्ध की झलकियां दिखाई हैं वे साबित करते हैं आगे हमें क्या देखना को मिलेगा।

मतलब सिर्फ एंडोर्स ग्रह के १० लोग भिड़ने आए हैं , अटका वासियों से, फिर भी इतनी तबाहि , भला हो सूर्यवर्या की शुभार्जुन का जिसने इस युद्ध में थोड़ा समय मांग लिया।

अब सबसे पहले मुझे ये बताओ सुनेरा लड़की हैं या लड़का क्योंकि कभी लगता हैं ये लड़की है तो कभी लड़का लगता है

जब शक्ति का वर्णन हो रहा था तब इनका जिक्र क्यों नहीं हुआ क्योंकि मैने पुराना अपडेट पढ़ा है। इसे तो लगता है ये दोनो शक्तियों उन पंद्रह शक्ति में से हैं।

अब मुझे नही पता इतना बड़ा लूपहोल कैसे भरेगा। पर करना तो पड़ेगा वर्ना कन्फ्यूजन होगा ।

अब समझा आगया है , की रॉजर जिंदा कैसे हुआ, वो शुभर्जुना का जादू था।

मेगा लाइट के गुस्से वाला अवतार तो खतरनाक था, वैसे ये जिंदा मारने के खेल कब तक चालू रखोगे , एक समय लगा कि युद्ध में पहले बलि आगाई, लेकिन हम गलत थे।


वैसे जैसा शुभार्जुन के बारे में पढ़ा हैं लगता है इसका प्रयोग पहले बार हुआ है और आगे चल कर २ बार हम किसी को भी जीवित कर सकते है ।

अब मार्कोटा ने युद्ध चालू कर कर कही न कही मुसीबत मोल लेली है, ये एंडोर्स वाले किसी को नहीं छोड़ने वाले अब तो और ताकतवर होकर आयेंगे क्यूंकि इनके महाबली योद्धा को परास्त किया है

इस अपडेट से ये भी लगता है कहानी के समाप्ति की और एक कदम बढ़ चुका है

कुलमिलाकर शानदार अपडेट आगे की प्रतीक्षा
Raj_sharma

Intezar rahega bhai

Kya Sefali super human hai?

#179

राज भाई - आपकी रचना तो एक भव्य और महत्वाकांक्षी फंतासी वाले संसार की रचना है। इंद्रसभा, त्रिदेवों का आगमन, और कलयुग के लिए “ब्रह्मांड रक्षक” की योजना, यह सभी तत्व मिलकर बढ़िया प्लॉट बना रहे हैं। मतलब आगे कहानी में और विस्तार आने वाला है। हमको इनके बारे में पहले पता चल चुका है लेकिन फिर भी, इस अपडेट के विचार न सिर्फ नए लगते हैं, बल्कि एक structured universe का संकेत भी देते हैं।

लेकिन सबसे पहले, भाषा और शुद्धता - जो आपने जान बूझ कर खराब करी है - उस पर ध्यान देना ज़रूरी है। एक और बात, संवाद केवल functional से हैं, मतलब, वो कहानी को आगे बढ़ाते तो हैं, लेकिन अलग-अलग पात्रों की आवाज़ में अंतर नहीं पढ़ने में आता। इंद्र, सूर्य, और वरुण, तीनों के ही बोलने का तरीका लगभग एक जैसा है।

-- ये उतारी मैंने बाल की खाल!

#180

यह अपडेट पिछले से बेहतर है और बहुत जीवंत है। बढ़िया visual narrative! देवशक्तियों का प्रस्तुतिकरण - रत्नों के माध्यम से शक्तियों को दिखाना एक बहुत ही प्रभावी और याद रहने वाला आइडिया है (वो अलग बात है कि मुझ भुलक्कड़ को याद नहीं रहेगा)। हर शक्ति का रंग, उसका गुण (जैसे सूर्यशक्ति = पराक्रम, जलशक्ति = गंभीरता, वायुशक्ति = विज्ञान) - यह सब मिलकर एक structured magic system बनाता है। अच्छी फंतासी वहीं होती है जहाँ शक्तियों के नियम स्पष्ट हों।

उधर इंद्र की आफ़त हो गई है। पहले उसको दूसरों के अमरत्व के कारण दिक्कत थी, फ़िर राक्षसलोक का डर, फिर माया पर संदेह, और अंत में मन ही मन कोई खिचड़ी पकाना। देवराज एक insecure और politically aware शासक है। बढ़िया!

nice update

Update is very nice 👍 🙂
Ek pakda gaya toh baki sab bahar ajaenge

Superb update🔥🔥

She is good now, ghar pr aaram kr rhe...

Chapter 4 से लेकर आगे के भाग तक कहानी पढ़कर सच में मज़ा आ गया। पहले तो न्यू ईयर पार्टी वाला सीन बहुत अच्छा लगा, ऐसा लगा जैसे मैं खुद उसी शिप पर मौजूद हूँ। माहौल, म्यूज़िक, डांस, सब कुछ बहुत अच्छे से लिखा गया है। फिर अचानक से मर्डर हो जाना कहानी को और भी ज्यादा इंटरेस्टिंग बना देता है।

मुझे सबसे ज्यादा मज़ा सुयश के इन्वेस्टिगेशन वाले सीन में आया। लॉकेट वाली बात और अंधेरे में निशाना लगाने वाला ट्विस्ट बहुत बढ़िया था। ऐसा लगा कि कहानी सिर्फ रहस्य नहीं है, बल्कि दिमाग लगाकर लिखी गई है।

शैफाली वाला किरदार कहानी का सबसे अलग और खास हिस्सा लग रहा है। उसका सुनकर चीज़ें समझ लेना, सपने देखना, और गोली के बारे में बताना ये सब पढ़कर कहानी और भी ज्यादा मिस्टिरियस हो जाती है। सच कहूँ तो अब सबसे ज्यादा क्यूरियोसिटी इसी बात की है कि शैफाली आखिर है क्या।

बारामूडा ट्रायंगल वाला पार्ट आते ही कहानी का लेवल और ऊपर चला गया। नीली रोशनी वाला यान, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम खराब होना, भंवर में फँसना ये सब पढ़कर बिल्कुल मूवी जैसा फील आया। ऐसा लगा जैसे एडवेंचर + मिस्ट्री + साइ-फाइ सब एक साथ चल रहा है।

मुझे ये भी अच्छा लगा कि कहानी में सिर्फ डर या रहस्य ही नहीं है, बीच-बीच में छोटे-छोटे नॉर्मल मोमेंट्स भी हैं, जैसे ब्रूनो वाला सीन या लोगों की बातें। इससे कहानी रियल लगती है।

अटलांटिस वाला ट्विस्ट तो सबसे ज्यादा अनएक्सपेक्टेड था। अब तो सच में जानने का मन कर रहा है कि आगे क्या होने वाला है और ये सब घटनाएँ आपस में कैसे जुड़ी हैं।

कहानी बहुत ही इंटरेस्टिंग चल रही है। सस्पेंस लगातार बना हुआ है और हर चैप्टर के बाद आगे पढ़ने का मन करता है।

Raj_sharma

Nice update....

lovely update. ashrudhara train me baithne ke liye 12 sawalo ka jawab dena hai jisme se 8 ke jawab de diye hai ,shefali aur christi ke dimag ki vajah se sab sahi uttar de paye .dekhte hai aage aise kaun kaun se prashn poochhta hai computer jo dikhte to aasan hai par sochne par majbur kar hi dete hai .

Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....

Kya gazab ki update post ki he Raj_sharma Bhai

Eye Specialist wali padhayi karwa di aapne to is dwar me.........

Ab agla number ENT ka he............

Keep rocking Bro

Nice update....

Bhut hi badhiya update Bhai
Aankhon ki bhut jankari pad li ab lagta hai naak ke bare me jankari milegi

Awesome update! Ye 30 sum wala jawab pata nahi maine kahan par suna tha, lekin jab logic samajh aaya tha ki 9 ko 6 banaya gaya hai toh thoda bura laga tha, A+T+8= , Shefali ne iska answer 88 isliye diya kyunki usne question ko dhyan se padha jabki kisi aur ne question ko sirf dekha, apne mann mein spell nahi kiya hoga, isliye kaha jata hai question ko ek baar achhe se padh lena chahiye tabhi sahi answer mil pata hai.
Let's see aage ye sabhi aur kaun kaun si difficulties ko paar karte hain.

Shaandar update

nice update

Update posted friends :declare:
 

dhparikh

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युद्धनीति:
(19.01.02, शनिवार, नक्षत्रलोक, कैस्पर क्लाउड)

कैस्पर जब श्वेत महल को देखने गया था, तो वारुणि कैस्पर को लेकर नक्षत्रलोक आ गई थी।

वारुणि ने कैस्पर को वहां एक ऐसा जीव दिखाया था, जो कि कैस्पर की ही शक्तियों से निर्मित था। उसके बाद कैस्पर ने बताया कि किस प्रकार, कैश्वर ने उसे किनारे कर के पूरे तिलिस्मा पर अधिकार कर लिया है।

कैस्पर ने वारुणि से किसी देवयुद्ध का भी जिक्र किया था, जिसमें वारुणि को एक निर्णायक भूमिका निभानी थी।

वारुणि ने भी कैस्पर से कहा था कि वह उस 3 आँख और 4 हाथ वाले विचित्र जीव के द्वारा, उस ग्रह के बारे में जानने की कोशिश करेगी, जिधर उस जीव ने अपने सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र से मैसेज भेजा था।

इसलिये पिछली 4 दिन से वारुणि लगातार नक्षत्रशाला में काम कर रही थी। कल तो वह पूरी रात जागती रही थी।

वारुणि ने उस विचित्र जीव से मिले, सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र की तरंग दैर्ध्य जांच ली थी। जिससे उसे, सिग्नल की दूरी और गति का पता चल गया था।

अब वारुणि ध्यान से उस जीव की, उस समय की फोटो का अध्ययन कर रही थी, जब उसे टूटी हुई ओजोन लेयर के पास से पकड़ा गया था। इस समय वारुणि ने अपने हाथों में पेंसिल और ज्यामिति के कुछ टूल्स पकड़ रखे थे।

कुछ ही देर में वारुणि ने, उस जीव के कोण का भी पता लगा लिया। अब बस उस जीव के शरीर के कोण, सिग्नल की गति और दूरी को ब्रह्मांड के मानचित्र में डालने की जरुरत थी।

अब वारुणि ने अपने सामने मौजूद एक बड़े से कम्प्यूटर पर, अपनी सभी गणनाओं को डाल दिया और ब्रह्मांड के मानचित्र में सर्च का बटन दबा दिया।

नक्षत्रलोक का आधुनिक कम्प्यूटर, तेजी से वारुणि की गणनाओं से खेलने लगा।

कुछ ही देर में उस कम्प्यूटर ने एक ग्रह का चित्र और उसकी पृथ्वी से दूरी के बारे में बताना शुरु कर दिया।

वारुणि के लिये यह नीला ग्रह बिल्कुल नया था, वह इसके बारे में कुछ नहीं जानती थी। फिर भी उस ग्रह को देख वारुणि के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थिरक उठी। आखिर उसकी रात भर की मेहनत का फल मिल गया था।

वारुणि ने इस समय घड़ी पर नजर डाली, घड़ी में इस समय सुबह का 8 बज रहा था।

“सुबह का 8 बज गया है, कैस्पर अवश्य ही उठ गया होगा। मुझे तुरंत उसको इस ग्रह के बारे में बताना चाहिये।" वारुणि ने मन ही मन सोचा और तुरंत नक्षत्रशाला से निकलकर कैस्पर के कक्ष की ओर चल दी।

वारुणि बिना दरवाजा खटखटाये, कैस्पर के कमरे में प्रवेश कर गई, पर वारुणि की आशा के विपरीत कैस्पर अभी भी सो रहा था।

वारुणि कक्ष में उपस्थित एक कुर्सी पर बैठ गई और सो रहे कैस्पर को देखने लगी।

सोते समय भी कैस्पर के चेहरे पर एक सौम्यता सी दिखाई दे रही थी।

वारुणि ना जाने ऐसे ही कितनी देर तक बैठी कैस्पर को निहारती रही। आखिरकार कैस्पर की आँख खुली।
वारुणि को अपने कमरे में देख कैस्पर हैरान हो गया।

"लगता है मैं कोई सपना देख रहा हूं आज सुबह-सुबह चाँद हमारे कमरे में क्यों आ गया?” कैस्पर ने बिस्तर से उठकर अंगड़ाई लेते हुए कहा।

“तुम्हारी चाँद की पिछली पूरी रात काली हो चुकी है और वह सुबह-सुबह ही तुम्हारे कमरे में आया था, पर अफसोस कि इस समय दोपहर हो चुकी है।” वारुणि ने मुस्कुराते हुए कैस्पर को बाथरुम की ओर धक्का देते हुए कहा- “अब चाँद चाहता है कि उसका दोस्त भी नहा-धोकर, उसके साथ एक नये ग्रह की सैर पर चले।"

“इसका मतलब कि चाँद ने रात भर में, उस नये ग्रह को ढूंढ ही लिया।” कैस्पर ने बाथरुम में प्रवेश करते हुए कहा- “तो फिर बस मैं नहाकर अभी आया। फिर दोनों साथ में चलेंगे, उस नये ग्रह की सैर पर।"

कैस्पर के बाथरुम में घुसने के बाद, वारुणि, विक्रम के ख्यालों में खो गई- “आज विक्रम को गायब हुए 6 दिन बीत गये हैं, पर उसकी कहीं से कोई खबर नहीं आई। उसने पिछले हजारों वर्षों में आज तक ऐसा कभी नहीं किया था। एक तो वह मेरे मानसिक तरंगों का भी जवाब नहीं दे रहा है। पता नहीं वह कहां और किस हाल में होगा?

कुछ देर के लिये ही सही पर विक्रम को याद कर, वारुणि का पूरा चेहरा उतर गया। अब वह सिर झुकाकर वहीं कमरे में बैठ गई।

कुछ देर बाद कैस्पर फ्रेश होकर बाथरुम से निकला। अब उसकी नजर वारुणि पर गई, जो कि वहीं कुर्सी पर बैठे-बैठे ही सो गई थी।

कैस्पर ने अपने कपड़े बदले और वारुणि के सामने जमीन पर बैठकर उसे देखने लगा।

लगभग 10 मिनट बाद ही वारुणि हड़बड़ा कर नींद से उठ गई। अब उसकी नजर सामने जमीन पर बैठकर उसे निहारते कैस्पर पर गई।


“ये तुम मेरी नकल क्यों कर रहे हो?” वारुणि ने उठकर कैस्पर का कान पकड़ते हुए कहा- “तुम मेरे नींद से जागने का कई घंटों तक इंतजार करती हो, तो मैंने सोचा कि मैं भी कुछ घंटे अपने चाँद को निहार लूं।"

"चल झूठे, मुझे अभी सोये हुए 10 मिनट भी नहीं बीता है। इतना सफेद झूठ बोलते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती।” वारुणि ने प्यार से कैस्पर को डांटते हुए कहा।

“आती है...कभी-कभी मुझे भी शर्म आती है, पर अब अपने चाँद के सामने क्या शर्माना?" कैस्पर ने वारुणि को खुश करते हुए कहा।

“तुम्हारी ऐसी ही हरकतें रहीं, तो सच मानो किसी दिन तुम्हें विक्रम बहुत मारेगा।” वारुणि ने हंसते हुए कहा।

"अरे मारने के लिये उसका मिलना भी तो जरुरी है।” कैस्पर ने अब सीरीयस होते हुए कहा- “विक्रम का कुछ पता चला क्या?" कैस्पर की बात सुन वारुणि ने धीरे से 'ना' में अपना सिर हिला दिया।

“अरे तो इसमें दुखी होने की क्या बात है?” कैस्पर ने वारुणि को जोर से हिलाते हुए कहा- “तुम्हारा ये दोस्त मैं ढूंढकर लाऊंगा उसे बस इसके लिये मुझे एक बार अपनी माँ से मिलना पड़ेगा। है ना। ....

“मैं भी मिलूंगी तुम्हारी माँ से।” वारुणि ने कहा।

"जरुर मिलाऊंगा। चलो अब पहले जरा उस ग्रह के बारे में जान लें, फिर मैं अपनी माँ से बात करुंगा।” कैस्पर ने कहा और फिर वारुणि के पीछे-पीछे नक्षत्रशाला की ओर चल दिया।

कुछ ही देर में दोनों नक्षत्रशाला में थे। वारुणि जिस प्रकार अपने कम्प्यूटर को छोड़ गई थी, उसका कम्प्यूटर उसी हालत में अभी भी पड़ा था।

अब कैस्पर की नजर कम्प्यूटर की स्क्रीन पर थी, जिस पर एक नीले रंग का ग्रह चमक रहा था। कम्प्यूटर उस ग्रह की पृथ्वी से दूरी 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर दिखा रहा था।

“इस ग्रह के बारे में तो मुझे भी कुछ नहीं पता?...और...और इस ग्रह की दूरी तो पृथ्वी से बहुत ज्यादा है।” कैस्पर ने स्क्रीन की ओर देखते हुए कहा- “इतनी दूरी तक सिग्नल भेजने वाला सिग्नल मॉडुलेटर, कैश्वर के पास आया कहां से?... इसका मतलब है कि अवश्य ही कोई ना कोई और इस समय कैश्वर के साथ है? जिसने उसे यह सिग्नल मॉडुलेटर दिया है...पर कौन?...जब कैश्वर मेरा कहना नहीं मान रहा, तो ऐसा कौन है पृथ्वी पर, जो कैश्वर को भी अपने इशारों पर नचा रहा है? इन सबके पीछे कुछ ना कुछ रहस्य तो अवश्य है? मुझे इसका पता लगाने के लिये, एक बार फिर से अराका पर जाना ही पड़ेगा, पर... पर मेरे गुप्त ऊर्जा द्वार को तो पहले ही कैश्वर बंद कर चुका है, फिर मैं तिलिस्मा के अंदर कैसे प्रविष्ठ हो सकता हूं?...अब मुझे सिर्फ माँ ही इस मुसीबत से बचा सकती हैं.... मुझे माँ को ही याद करना होगा। तुम भी मेरे साथ चल रही हो वारुणि।”

यह कहकर कैस्पर ने अपनी आँख बंद कर ली और वारुणि का हाथ पकड़कर माया को याद करने लगा

“माँ, मैं इस समय एक बहुत बड़ी मुश्किल में हूं, मुझे इस समय आपकी मदद की आवश्यकता है। मुझे अपने पास बुलाइये माँ।”

वारुणि समझ नहीं पा रही थी कि कैस्पर की माँ, किस प्रकार नक्षत्रलोक से उन्हें अपने पास बुलायेंगी, पर उसने कुछ कहा नहीं। वह अब बस आँख बंद किये कैस्पर को देख रही थी।

तभी वारुणि को हवा में एक ऊर्जा द्वार बनता दिखाई दिया। एक पल से भी कम समय में उस ऊर्जा द्वार ने कैस्पर और वारुणि को अपने अंदर खींच लिया।

वारुणि को अपना शरीर हवा में गिरता हुआ सा महसूस हो रहा था, परंतु चारो ओर तेज रोशनी की वजह से उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन ऐसी स्थिति में वारुणि ने कैस्पर का हाथ नहीं छोड़ा था।

कुछ ही देर में रोशनी कम होने लगी। अब वारुणि की आँखें देखने लायक हो गईं थीं।

वारुणि ने स्वयं को इस समय एक ऐसे कमरे में पाया, जिसमें कोई खिड़की नहीं थी, बस एक दरवाजा ही था। कैस्पर उसके बगल खड़ा था।

तभी दरवाजे से एक खूबसूरत स्त्री ने अंदर प्रवेश किया, जिसे देख वारूणि हैरान हो गई।

“आप????” वारुणि के मुंह से माया के लिये सम्मान भरे शब्द निकले- “आप कैस्पर की माँ हैं! आपका चित्र तो मैंने वेदालय में हर स्थान पर लगे देखा था।"

माया ने वारुणि को देख धीरे से अपना सिर हिलाया, पर कुछ कहा नहीं? तभी कैस्पर दौड़कर माया के गले से लग गया।

“क्यों रे, अब तू मैग्ना की जगह इससे विवाह करेगा क्या?" माया की आवाज वातावरण में गूंजी। माया की बात सुन वारुणि शर्मा गई।

“अरे नहीं माँ, ये मेरी बहुत अच्छी दोस्त है बस।"

तभी वारुणि ने आगे बढ़कर माया के चरण स्पर्श कर लिये। माया ने अपना हाथ उठाकर वारुणि को आशीर्वाद दिया- “जा जल्दी ही तुझे विक्रम मिल जाये।"

माया की बात सुनकर वारुणि हैरानी से कैस्पर को देखने लगी थी, क्यों कि अभी उन्होंने माया से विक्रम के बारे में तो कुछ कहा ही नहीं था?

“अरे, इतना हैरान मत हो वारुणि, यह मेरी माँ हैं, यह भूत, भविष्य, वर्तमान सब जानती हैं, इनसे इस पृथ्वी पर कुछ भी छिपा नहीं है?" कैस्पर ने वारुणि से कहा“ बस तुम्हें इनकी आवाज वातावरण में सुनने की आदत डालनी पड़ेगी बस। क्यों कि यह किसी से भी बात नहीं करती हैं।"

“क्या तुम्हें पता है कैस्पर? कि माता ने ही हमारे वेदालय की रचना की थी और यह हमारे महागुरु नीलाभ की पत्नी हैं, इस हिसाब से यह हमारी गुरुमाता हुईं।" वारुणि ने प्रसन्नता से कहा।

माया ने अब कैस्पर और वारुणि को बैठने का इशारा किया।

“अच्छा किया कैस्पर कि तुमने मुझे याद कर लिया, अगर कुछ दिन तक तुम मुझे और याद नहीं करते, तो मैं स्वयं तुम्हें अपने पास बुला लेती।” माया ने कहा- “मुझे पता है कि तुम लोगों के मस्तिष्क में सैकड़ों प्रश्न घूम रहे हैं? इसलिये अब तुम एक-एक कर मुझसे सारे प्रश्न पूछ सकते हो। आज मैं भी बिना घुमाये-फिराये तुम्हें सबकुछ बता दूंगी क्यों कि सभी रहस्यों को खोलने का इससे बेहतर समय अब नहीं आयेगा।

“तो क्या माँ, आप जिस देवयुद्ध का ज़िक्र हमें बचपन से करती आई थीं, उसका समय अब आने वाला है?” कैस्पर ने माया से पूछा।

“हां, कैस्पर। वह देवयुद्ध अब बहुत निकट है। अगर उसे सही से संभाला नहीं गया, तो वह पूरी पृथ्वी का विनाश कर देगा।" माया ने कहा।

“कौन हैं, वह पृथ्वी के विनाशक, जिनके बारे में अभी हमें पता भी नहीं है?" वारुणि ने पूछा।

“वह एक नहीं है, बल्कि बहुत से हैं। कुछ पृथ्वी से सुदूर दूसरी आकाशगंगा से आये हैं, तो कुछ सैकड़ों वर्षों से पृथ्वी पर छिपे, उस विनाश का ताना-बाना बुन रहे हैं। हमारा कार्य उन सभी आसुरी शक्तियों को एक होने से रोकना है। अगर वह सब एक हो गये तो हमारी पृथ्वी का बचना असंभव है।" माया ने गंभीर शब्दों में कहा।

“पर हम उन्हें एक होने से किस प्रकार रोक सकते हैं? हम ना तो उनके बारे में जानते हैं? और ना ही उनकी शक्तियों के बारे में?...फिर इस प्रकार बिना जाने उन्हें रोक पाना असंभव है।" वारुणि ने कहा।

“इसी असंभव कार्य को तो तुम दोनों को संभव बनाना है। और...इसे संभव बनाने के लिये तुम्हें 3 कार्य करने होंगे। पहला कार्य तुम्हें सभी देवशक्ति धारकों को एक स्थान पर एकत्र करके, उन्हें सबकुछ बताकर एक माला में पिरोना होगा। बिना एकता की शक्ति के, तुम यह युद्ध कभी भी जीत नहीं सकते। दूसरा कार्य यह है कि तुम्हें सभी विनाशकों को एक साथ मिलने के पहले ही, एक-एक कर मारना शुरु करना होगा।

“अगर तुम ऐसा करने में सफल हो गये, तो देवयुद्ध से पहले ही हम अपने शत्रुओं की शक्ति को आधा कर सकते हैं। तीसरा कार्य तुम्हें कैसे भी ग्रीक देवताओं को अपनी ओर करना होगा? ये ध्यान रखना कि अगर वो हमारी ओर ना आयें, तो कम से कम हमारे शत्रुओं की ओर से भी युद्ध ना करें। क्यों कि अगर ग्रीक देवी -देवता भी उनकी ओर मिल गये, तब हम अपने शत्रुओं से नहीं जीत पायेंगे। इसके अलावा और कुछ छोटी -मोटी तैयारियां करनी होंगी, जो कि मैं समय-समय पर तुम्हें बताती रहूंगी।"

“पर माँ, इनमें से पहले 2 कार्य तब तक संभव नहीं हैं, जब तक कि हमें जानकारियां ना मिल जायें।" कैस्पर ने कहा।

“तुम जानकारियों की चिंता मत करो, मेरे पास सभी मित्रों और शत्रुओं की पूर्ण जानकारियां हैं।” माया ने यह कहकर अपना हाथ ऊपर की ओर उठाया।

माया के ऐसा करते ही हवा में एक पुस्तक प्रकट हो गई, जो कि हवा में तैरती हुई कैस्पर के हाथ में आ गई। कैस्पर ने उस पुस्तक को देखा, उसका नाम 'देवयुद्ध' था।

“यह पुस्तक मैंने तुम्हारे लिये ही लिखी है कैस्पर।" माया ने कहा- “इस पुस्तक में तुम्हें सभी शत्रुओं और मित्रों की जानकारियां मिल जायेंगी।"

कैस्पर ने उत्सुकतावश 'देवयुद्ध' का एक पृष्ठ खोलकर देखा। उस पृष्ठ पर एंड्रोनिका लिखा था।

“यह एंडोनिका क्या है माँ?” कैस्पर ने माया से पूछा।

"एंड्रोनिका, उस अंतरिक्ष यान का नाम है, जिसे तुम लोग उल्कापिंड समझ रहे हो।" माया ने कहा।

"तो क्या उस उल्कापिंड....म...मेरा मतलब है कि एंड्रोनिका में अंतरिक्ष के जीव भी हैं?” वारुणि ने आश्चर्य से पूछा।

“वही तो हमारे असली शत्रु हैं वारुणि।” माया ने कहा- “पृथ्वी के शत्रुओं को तो नियंत्रित करना सरल है, क्यों कि उन पर हमारी प्रकृति के नियम लागू होते हैं। पर उन दूसरे ग्रह से आये जीवों में, कुछ पर तो हमारी पृथ्वी के प्रकृति के नियम भी लागू नहीं होते, ऐसे में उन्हें मारना बहुत ही मुश्किल है।”

“गुरुमाता, हम इस पुस्तक को तो पढ़ लेंगे, पर मुझे थोड़ा सा और आपसे इन अंतरिक्ष के जीवों के बारे में जानना है? इनके पास ऐसी कौन सी शक्तियां हैं? जिन पर हमारी प्रकृति के नियम ही लागू नहीं होते।” वारुणि ने माया से पूछा।

“ठीक है वारुणि, तो बाकी पूरी जानकारी तुम लोग इस पुस्तक से पढ़ लेना। मैं तुम्हें सिर्फ उस अंतरिक्ष यान के बारे में बता देती हूं। वह अंतरिक्ष यान, हमारी पृथ्वी से 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर स्थित, फेरोना नामक एक नीले ग्रह से आया है। एंड्रोमेडा नामक इस अंतरिक्ष यान में कुल 15 जीव हैं, जो देखने में पृथ्वी वासियों जैसे ही हैं, बस उनके शरीर का रंग नीला है। यह सभी जीव अपने ग्रह के सबसे ताकतवर जीव हैं। इनका सम्मिलित नाम ‘एंड्रोवर्स पॉवर' है। ‘एंड्रोवर्स पॉवर' में अंग्रेजी के कुल 15 अक्षर होते हैं, जो कि इन सभी 15 जीवों के नाम के प्रथम अक्षर से मिलकर बने हैं।

“इन जीवों में कुल 10 पुरुष जीव हैं, जिन्हें 'एंड्रोवर्स' कहा जाता है। बाकी बचे 5 जीव, महिलाएं हैं, जिन्हें 'पॉवर' कहा जाता है। यानि इन सभी 15 जीवों को मिलाकर ही 'एंड्रोवर्स पॉवर' बनता है। इसमें यह बात ध्यान रखने वाली है कि इन जीवों की महिलाएं आपात स्थिति में ही बाहर निकलती हैं और वह अपने पुरुष जीवों से ज्यादा शक्तिशाली हैं। सभी 10 पुरुष जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः A1 से लेकर A10 तक लिख रखा है और सभी महिला जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः P1 से P5 तक लिख रखा है। मैंने इसके अगले पृष्ठ पर इन सभी के नाम और जानकारियां लिख रखीं हैं।"

माया की बात सुन, कैस्पर ने तुरंत पुस्तक का अगला पन्ना खोलकर देखा, उस पन्ने पर एक लिस्ट थी।

“इनमें से कुछ शक्तियों के बारे में तो हमने सुना तक नहीं है?" वारुणि ने पुस्तक में झांकते हुए कहा- “जैसे कि यह डार्क मैटर क्या है?"

"हमारे ब्रह्मांड में करोड़ों सितारे हैं, जिन्हों ने ब्रह्मांड का बहुत सा हिस्सा घेर रखा है, परंतु हम जब भी ब्रह्मांड को देखते हैं, तो हमें ज्यादातर उसका काला भाग ही दिखाई देता है। ब्रह्मांड का वहीं काला भाग डार्क मैटर कहलाता है। पहले वैज्ञानिकों को इस काले भाग के बारे में कुछ नहीं पता था? उन्हें लगता था कि यह ब्रह्मांड का खाली स्थान है, पर ज्यादा खोज होने के बाद हमें इस डार्क मैटर का पता लगा। यह डार्क मैटर ब्रह्मांड के सभी ग्रहों के बीच संतुलन बनाये रखने का कार्य करता है। अगर साधारण भाषा में समझें, तो हम केवल उसी चीज को देख सकते हैं, जो या तो प्रकाश का उत्सर्जन, अवशोषण या फिर परावर्तित करता हो। परंतु डार्क मैटर इनमें से कुछ भी नहीं करता, इसलिये वह हमें दिखाई नहीं देता। डार्क मैटर, हमारी पृथ्वी की किसी भी प्राकृतिक चीज से प्रभावित नहीं होता? ना ही हवा, ना ही आग, पानी और किसी भी धातु से?" माया ने वारुणि को समझाते हुए कहा।

“अगर डार्क मैटर पर कुछ असर ही नहीं होता, तो ना तो वह हमें मार पायेगा और ना ही हम उसे।” वारुणि ने कहा।

“ऐसा नहीं है वारुणि, डार्क मैटर का द्रव्यमान यानि कि भार, बिल्कुल ना के बराबर होता है, इसलिये वह हमारे जीवन में, हमारे शरीर से पार होने के बाद भी हमारा कुछ नहीं कर पाता, परंतु अगर डार्को ने डार्क मैटर का द्रव्यमान बढ़ाकर हम पर वार किया, तो एक सेकेण्ड से भी कम समय में हमारा पूरा शरीर कणों में बिखरकर हवा में मिल जायेगा।" माया ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा- “तभी तो मैं तुम लोगों को आने वाले खतरे से आगाह कर रही हूं, जिससे तुम लोग समय रहते ही उससे बचाव करने की तकनीक ढूंढ सको।"

“क्या ऐसे खतरनाक डार्क मैटर को किसी भी प्रकार से नियंत्रित किया जा सकता है?" वारुणि तो आज पूर्ण ज्ञान लेने के मूड में थी। ऐसा लग रहा था कि उसे माया के रुप में कोई खजाना मिल गया हो?

"गुरुत्वाकर्षण.....एक वहीं चीज है, जिससे डार्क मैटर आकर्षित होता है अब ये देखना तुम्हारा काम होगा कि तुम्हारे किस मित्र के पास गुरुत्वाकर्षण की शक्ति है और उसे कब और कैसे डार्को के आगे करना है? ये ध्यान रखना कि समय से पहले दिव्यशक्तियों का प्रदर्शन सदैव हानिकारक होता है।" माया ने मुस्कुराते हुए वारुणि को गुरुमंत्र दिया।

अब वारुणि ने उस लिस्ट को देखते हुए फिर से पूछा- “गुरुमाता, यह सामान्य शक्ति क्या है? जो किसी 'रेने' के पास है?"

यह सुनकर माया मुस्कुरा दी- “रेने इस पूरे ग्रुप की कमांडर है, यह एंड्रोनिका से तभी निकलती है, जब सबकी शक्तियां विफल हो जाती हैं दरअसल सच कहें तो रेने के पास कोई शक्ति नहीं है, पर वह अपने सामने किसी भी शक्ति को रहने भी नहीं देती। मतलब अगर वह सामने हो तो किसी भी शत्रु की दिव्य शक्तियां काम नहीं करती हैं और ऐसे में वह सभी आसानी से जीत जाते हैं। बस अब इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं बताने वाली वारुणि? इसके आगे तुम दोनों को स्वयं ही देखना होगा। और हां इसमें से एक जीव एलात्रा 2 दिन पहले मारा जा चुका है।” माया ने सभा का समापन करते हुए कहा।

“एक आखिरी चीज और बता दीजिये कि विक्रम ठीक तो है ना?" वारुणि ने आखिरी सवाल पूछते हुए कहा।

“हां, विक्रम ठीक है और वह तुमसे समय आने पर मिल जायेगा। परंतु धरा और मयूर को इन अंतरिक्ष के जीवों ने बंदी बना लिया है और अब वह एकएक कर बाकी लोगों पर भी हमला करेंगे।" माया ने कहा- “इसलिये तुम लोगों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी और हां अभी तो मैं तुम दोनों को वापस नक्षत्रलोक भेज रही हूं, पर जल्दी ही मैं तुम्हें फिर से वापस बुलाऊंगी और फिर मैं तुम दोनों के साथ ओलंपस पर्वत चलूंगी, इससे पहले कि कोई दूसरी परेशानी बढ़े? हमें ग्रीक देवताओं से एक बार बात करनी ही पड़ेगी।”

यह कहकर माया ने अपना हाथ हिलाया, इसी के साथ कैस्पर और वारुणि, ऊर्जा द्वार से होते हुए पुनः नक्षत्रशाला में पहुंच गये, पर अब उनके चेहरे पर थोड़ी निश्चिंतता के भाव थे।


जारी रहेगा_____✍️
Nice update....
 

dhalchandarun

[Death is the most beautiful thing.]
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युद्धनीति:
(19.01.02, शनिवार, नक्षत्रलोक, कैस्पर क्लाउड)

कैस्पर जब श्वेत महल को देखने गया था, तो वारुणि कैस्पर को लेकर नक्षत्रलोक आ गई थी।

वारुणि ने कैस्पर को वहां एक ऐसा जीव दिखाया था, जो कि कैस्पर की ही शक्तियों से निर्मित था। उसके बाद कैस्पर ने बताया कि किस प्रकार, कैश्वर ने उसे किनारे कर के पूरे तिलिस्मा पर अधिकार कर लिया है।

कैस्पर ने वारुणि से किसी देवयुद्ध का भी जिक्र किया था, जिसमें वारुणि को एक निर्णायक भूमिका निभानी थी।

वारुणि ने भी कैस्पर से कहा था कि वह उस 3 आँख और 4 हाथ वाले विचित्र जीव के द्वारा, उस ग्रह के बारे में जानने की कोशिश करेगी, जिधर उस जीव ने अपने सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र से मैसेज भेजा था।

इसलिये पिछली 4 दिन से वारुणि लगातार नक्षत्रशाला में काम कर रही थी। कल तो वह पूरी रात जागती रही थी।

वारुणि ने उस विचित्र जीव से मिले, सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र की तरंग दैर्ध्य जांच ली थी। जिससे उसे, सिग्नल की दूरी और गति का पता चल गया था।

अब वारुणि ध्यान से उस जीव की, उस समय की फोटो का अध्ययन कर रही थी, जब उसे टूटी हुई ओजोन लेयर के पास से पकड़ा गया था। इस समय वारुणि ने अपने हाथों में पेंसिल और ज्यामिति के कुछ टूल्स पकड़ रखे थे।

कुछ ही देर में वारुणि ने, उस जीव के कोण का भी पता लगा लिया। अब बस उस जीव के शरीर के कोण, सिग्नल की गति और दूरी को ब्रह्मांड के मानचित्र में डालने की जरुरत थी।

अब वारुणि ने अपने सामने मौजूद एक बड़े से कम्प्यूटर पर, अपनी सभी गणनाओं को डाल दिया और ब्रह्मांड के मानचित्र में सर्च का बटन दबा दिया।

नक्षत्रलोक का आधुनिक कम्प्यूटर, तेजी से वारुणि की गणनाओं से खेलने लगा।

कुछ ही देर में उस कम्प्यूटर ने एक ग्रह का चित्र और उसकी पृथ्वी से दूरी के बारे में बताना शुरु कर दिया।

वारुणि के लिये यह नीला ग्रह बिल्कुल नया था, वह इसके बारे में कुछ नहीं जानती थी। फिर भी उस ग्रह को देख वारुणि के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थिरक उठी। आखिर उसकी रात भर की मेहनत का फल मिल गया था।

वारुणि ने इस समय घड़ी पर नजर डाली, घड़ी में इस समय सुबह का 8 बज रहा था।

“सुबह का 8 बज गया है, कैस्पर अवश्य ही उठ गया होगा। मुझे तुरंत उसको इस ग्रह के बारे में बताना चाहिये।" वारुणि ने मन ही मन सोचा और तुरंत नक्षत्रशाला से निकलकर कैस्पर के कक्ष की ओर चल दी।

वारुणि बिना दरवाजा खटखटाये, कैस्पर के कमरे में प्रवेश कर गई, पर वारुणि की आशा के विपरीत कैस्पर अभी भी सो रहा था।

वारुणि कक्ष में उपस्थित एक कुर्सी पर बैठ गई और सो रहे कैस्पर को देखने लगी।

सोते समय भी कैस्पर के चेहरे पर एक सौम्यता सी दिखाई दे रही थी।

वारुणि ना जाने ऐसे ही कितनी देर तक बैठी कैस्पर को निहारती रही। आखिरकार कैस्पर की आँख खुली।
वारुणि को अपने कमरे में देख कैस्पर हैरान हो गया।

"लगता है मैं कोई सपना देख रहा हूं आज सुबह-सुबह चाँद हमारे कमरे में क्यों आ गया?” कैस्पर ने बिस्तर से उठकर अंगड़ाई लेते हुए कहा।

“तुम्हारी चाँद की पिछली पूरी रात काली हो चुकी है और वह सुबह-सुबह ही तुम्हारे कमरे में आया था, पर अफसोस कि इस समय दोपहर हो चुकी है।” वारुणि ने मुस्कुराते हुए कैस्पर को बाथरुम की ओर धक्का देते हुए कहा- “अब चाँद चाहता है कि उसका दोस्त भी नहा-धोकर, उसके साथ एक नये ग्रह की सैर पर चले।"

“इसका मतलब कि चाँद ने रात भर में, उस नये ग्रह को ढूंढ ही लिया।” कैस्पर ने बाथरुम में प्रवेश करते हुए कहा- “तो फिर बस मैं नहाकर अभी आया। फिर दोनों साथ में चलेंगे, उस नये ग्रह की सैर पर।"

कैस्पर के बाथरुम में घुसने के बाद, वारुणि, विक्रम के ख्यालों में खो गई- “आज विक्रम को गायब हुए 6 दिन बीत गये हैं, पर उसकी कहीं से कोई खबर नहीं आई। उसने पिछले हजारों वर्षों में आज तक ऐसा कभी नहीं किया था। एक तो वह मेरे मानसिक तरंगों का भी जवाब नहीं दे रहा है। पता नहीं वह कहां और किस हाल में होगा?

कुछ देर के लिये ही सही पर विक्रम को याद कर, वारुणि का पूरा चेहरा उतर गया। अब वह सिर झुकाकर वहीं कमरे में बैठ गई।

कुछ देर बाद कैस्पर फ्रेश होकर बाथरुम से निकला। अब उसकी नजर वारुणि पर गई, जो कि वहीं कुर्सी पर बैठे-बैठे ही सो गई थी।

कैस्पर ने अपने कपड़े बदले और वारुणि के सामने जमीन पर बैठकर उसे देखने लगा।

लगभग 10 मिनट बाद ही वारुणि हड़बड़ा कर नींद से उठ गई। अब उसकी नजर सामने जमीन पर बैठकर उसे निहारते कैस्पर पर गई।


“ये तुम मेरी नकल क्यों कर रहे हो?” वारुणि ने उठकर कैस्पर का कान पकड़ते हुए कहा- “तुम मेरे नींद से जागने का कई घंटों तक इंतजार करती हो, तो मैंने सोचा कि मैं भी कुछ घंटे अपने चाँद को निहार लूं।"

"चल झूठे, मुझे अभी सोये हुए 10 मिनट भी नहीं बीता है। इतना सफेद झूठ बोलते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती।” वारुणि ने प्यार से कैस्पर को डांटते हुए कहा।

“आती है...कभी-कभी मुझे भी शर्म आती है, पर अब अपने चाँद के सामने क्या शर्माना?" कैस्पर ने वारुणि को खुश करते हुए कहा।

“तुम्हारी ऐसी ही हरकतें रहीं, तो सच मानो किसी दिन तुम्हें विक्रम बहुत मारेगा।” वारुणि ने हंसते हुए कहा।

"अरे मारने के लिये उसका मिलना भी तो जरुरी है।” कैस्पर ने अब सीरीयस होते हुए कहा- “विक्रम का कुछ पता चला क्या?" कैस्पर की बात सुन वारुणि ने धीरे से 'ना' में अपना सिर हिला दिया।

“अरे तो इसमें दुखी होने की क्या बात है?” कैस्पर ने वारुणि को जोर से हिलाते हुए कहा- “तुम्हारा ये दोस्त मैं ढूंढकर लाऊंगा उसे बस इसके लिये मुझे एक बार अपनी माँ से मिलना पड़ेगा। है ना। ....

“मैं भी मिलूंगी तुम्हारी माँ से।” वारुणि ने कहा।

"जरुर मिलाऊंगा। चलो अब पहले जरा उस ग्रह के बारे में जान लें, फिर मैं अपनी माँ से बात करुंगा।” कैस्पर ने कहा और फिर वारुणि के पीछे-पीछे नक्षत्रशाला की ओर चल दिया।

कुछ ही देर में दोनों नक्षत्रशाला में थे। वारुणि जिस प्रकार अपने कम्प्यूटर को छोड़ गई थी, उसका कम्प्यूटर उसी हालत में अभी भी पड़ा था।

अब कैस्पर की नजर कम्प्यूटर की स्क्रीन पर थी, जिस पर एक नीले रंग का ग्रह चमक रहा था। कम्प्यूटर उस ग्रह की पृथ्वी से दूरी 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर दिखा रहा था।

“इस ग्रह के बारे में तो मुझे भी कुछ नहीं पता?...और...और इस ग्रह की दूरी तो पृथ्वी से बहुत ज्यादा है।” कैस्पर ने स्क्रीन की ओर देखते हुए कहा- “इतनी दूरी तक सिग्नल भेजने वाला सिग्नल मॉडुलेटर, कैश्वर के पास आया कहां से?... इसका मतलब है कि अवश्य ही कोई ना कोई और इस समय कैश्वर के साथ है? जिसने उसे यह सिग्नल मॉडुलेटर दिया है...पर कौन?...जब कैश्वर मेरा कहना नहीं मान रहा, तो ऐसा कौन है पृथ्वी पर, जो कैश्वर को भी अपने इशारों पर नचा रहा है? इन सबके पीछे कुछ ना कुछ रहस्य तो अवश्य है? मुझे इसका पता लगाने के लिये, एक बार फिर से अराका पर जाना ही पड़ेगा, पर... पर मेरे गुप्त ऊर्जा द्वार को तो पहले ही कैश्वर बंद कर चुका है, फिर मैं तिलिस्मा के अंदर कैसे प्रविष्ठ हो सकता हूं?...अब मुझे सिर्फ माँ ही इस मुसीबत से बचा सकती हैं.... मुझे माँ को ही याद करना होगा। तुम भी मेरे साथ चल रही हो वारुणि।”

यह कहकर कैस्पर ने अपनी आँख बंद कर ली और वारुणि का हाथ पकड़कर माया को याद करने लगा

“माँ, मैं इस समय एक बहुत बड़ी मुश्किल में हूं, मुझे इस समय आपकी मदद की आवश्यकता है। मुझे अपने पास बुलाइये माँ।”

वारुणि समझ नहीं पा रही थी कि कैस्पर की माँ, किस प्रकार नक्षत्रलोक से उन्हें अपने पास बुलायेंगी, पर उसने कुछ कहा नहीं। वह अब बस आँख बंद किये कैस्पर को देख रही थी।

तभी वारुणि को हवा में एक ऊर्जा द्वार बनता दिखाई दिया। एक पल से भी कम समय में उस ऊर्जा द्वार ने कैस्पर और वारुणि को अपने अंदर खींच लिया।

वारुणि को अपना शरीर हवा में गिरता हुआ सा महसूस हो रहा था, परंतु चारो ओर तेज रोशनी की वजह से उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन ऐसी स्थिति में वारुणि ने कैस्पर का हाथ नहीं छोड़ा था।

कुछ ही देर में रोशनी कम होने लगी। अब वारुणि की आँखें देखने लायक हो गईं थीं।

वारुणि ने स्वयं को इस समय एक ऐसे कमरे में पाया, जिसमें कोई खिड़की नहीं थी, बस एक दरवाजा ही था। कैस्पर उसके बगल खड़ा था।

तभी दरवाजे से एक खूबसूरत स्त्री ने अंदर प्रवेश किया, जिसे देख वारूणि हैरान हो गई।

“आप????” वारुणि के मुंह से माया के लिये सम्मान भरे शब्द निकले- “आप कैस्पर की माँ हैं! आपका चित्र तो मैंने वेदालय में हर स्थान पर लगे देखा था।"

माया ने वारुणि को देख धीरे से अपना सिर हिलाया, पर कुछ कहा नहीं? तभी कैस्पर दौड़कर माया के गले से लग गया।

“क्यों रे, अब तू मैग्ना की जगह इससे विवाह करेगा क्या?" माया की आवाज वातावरण में गूंजी। माया की बात सुन वारुणि शर्मा गई।

“अरे नहीं माँ, ये मेरी बहुत अच्छी दोस्त है बस।"

तभी वारुणि ने आगे बढ़कर माया के चरण स्पर्श कर लिये। माया ने अपना हाथ उठाकर वारुणि को आशीर्वाद दिया- “जा जल्दी ही तुझे विक्रम मिल जाये।"

माया की बात सुनकर वारुणि हैरानी से कैस्पर को देखने लगी थी, क्यों कि अभी उन्होंने माया से विक्रम के बारे में तो कुछ कहा ही नहीं था?

“अरे, इतना हैरान मत हो वारुणि, यह मेरी माँ हैं, यह भूत, भविष्य, वर्तमान सब जानती हैं, इनसे इस पृथ्वी पर कुछ भी छिपा नहीं है?" कैस्पर ने वारुणि से कहा“ बस तुम्हें इनकी आवाज वातावरण में सुनने की आदत डालनी पड़ेगी बस। क्यों कि यह किसी से भी बात नहीं करती हैं।"

“क्या तुम्हें पता है कैस्पर? कि माता ने ही हमारे वेदालय की रचना की थी और यह हमारे महागुरु नीलाभ की पत्नी हैं, इस हिसाब से यह हमारी गुरुमाता हुईं।" वारुणि ने प्रसन्नता से कहा।

माया ने अब कैस्पर और वारुणि को बैठने का इशारा किया।

“अच्छा किया कैस्पर कि तुमने मुझे याद कर लिया, अगर कुछ दिन तक तुम मुझे और याद नहीं करते, तो मैं स्वयं तुम्हें अपने पास बुला लेती।” माया ने कहा- “मुझे पता है कि तुम लोगों के मस्तिष्क में सैकड़ों प्रश्न घूम रहे हैं? इसलिये अब तुम एक-एक कर मुझसे सारे प्रश्न पूछ सकते हो। आज मैं भी बिना घुमाये-फिराये तुम्हें सबकुछ बता दूंगी क्यों कि सभी रहस्यों को खोलने का इससे बेहतर समय अब नहीं आयेगा।

“तो क्या माँ, आप जिस देवयुद्ध का ज़िक्र हमें बचपन से करती आई थीं, उसका समय अब आने वाला है?” कैस्पर ने माया से पूछा।

“हां, कैस्पर। वह देवयुद्ध अब बहुत निकट है। अगर उसे सही से संभाला नहीं गया, तो वह पूरी पृथ्वी का विनाश कर देगा।" माया ने कहा।

“कौन हैं, वह पृथ्वी के विनाशक, जिनके बारे में अभी हमें पता भी नहीं है?" वारुणि ने पूछा।

“वह एक नहीं है, बल्कि बहुत से हैं। कुछ पृथ्वी से सुदूर दूसरी आकाशगंगा से आये हैं, तो कुछ सैकड़ों वर्षों से पृथ्वी पर छिपे, उस विनाश का ताना-बाना बुन रहे हैं। हमारा कार्य उन सभी आसुरी शक्तियों को एक होने से रोकना है। अगर वह सब एक हो गये तो हमारी पृथ्वी का बचना असंभव है।" माया ने गंभीर शब्दों में कहा।

“पर हम उन्हें एक होने से किस प्रकार रोक सकते हैं? हम ना तो उनके बारे में जानते हैं? और ना ही उनकी शक्तियों के बारे में?...फिर इस प्रकार बिना जाने उन्हें रोक पाना असंभव है।" वारुणि ने कहा।

“इसी असंभव कार्य को तो तुम दोनों को संभव बनाना है। और...इसे संभव बनाने के लिये तुम्हें 3 कार्य करने होंगे। पहला कार्य तुम्हें सभी देवशक्ति धारकों को एक स्थान पर एकत्र करके, उन्हें सबकुछ बताकर एक माला में पिरोना होगा। बिना एकता की शक्ति के, तुम यह युद्ध कभी भी जीत नहीं सकते। दूसरा कार्य यह है कि तुम्हें सभी विनाशकों को एक साथ मिलने के पहले ही, एक-एक कर मारना शुरु करना होगा।

“अगर तुम ऐसा करने में सफल हो गये, तो देवयुद्ध से पहले ही हम अपने शत्रुओं की शक्ति को आधा कर सकते हैं। तीसरा कार्य तुम्हें कैसे भी ग्रीक देवताओं को अपनी ओर करना होगा? ये ध्यान रखना कि अगर वो हमारी ओर ना आयें, तो कम से कम हमारे शत्रुओं की ओर से भी युद्ध ना करें। क्यों कि अगर ग्रीक देवी -देवता भी उनकी ओर मिल गये, तब हम अपने शत्रुओं से नहीं जीत पायेंगे। इसके अलावा और कुछ छोटी -मोटी तैयारियां करनी होंगी, जो कि मैं समय-समय पर तुम्हें बताती रहूंगी।"

“पर माँ, इनमें से पहले 2 कार्य तब तक संभव नहीं हैं, जब तक कि हमें जानकारियां ना मिल जायें।" कैस्पर ने कहा।

“तुम जानकारियों की चिंता मत करो, मेरे पास सभी मित्रों और शत्रुओं की पूर्ण जानकारियां हैं।” माया ने यह कहकर अपना हाथ ऊपर की ओर उठाया।

माया के ऐसा करते ही हवा में एक पुस्तक प्रकट हो गई, जो कि हवा में तैरती हुई कैस्पर के हाथ में आ गई। कैस्पर ने उस पुस्तक को देखा, उसका नाम 'देवयुद्ध' था।

“यह पुस्तक मैंने तुम्हारे लिये ही लिखी है कैस्पर।" माया ने कहा- “इस पुस्तक में तुम्हें सभी शत्रुओं और मित्रों की जानकारियां मिल जायेंगी।"

कैस्पर ने उत्सुकतावश 'देवयुद्ध' का एक पृष्ठ खोलकर देखा। उस पृष्ठ पर एंड्रोनिका लिखा था।

“यह एंडोनिका क्या है माँ?” कैस्पर ने माया से पूछा।

"एंड्रोनिका, उस अंतरिक्ष यान का नाम है, जिसे तुम लोग उल्कापिंड समझ रहे हो।" माया ने कहा।

"तो क्या उस उल्कापिंड....म...मेरा मतलब है कि एंड्रोनिका में अंतरिक्ष के जीव भी हैं?” वारुणि ने आश्चर्य से पूछा।

“वही तो हमारे असली शत्रु हैं वारुणि।” माया ने कहा- “पृथ्वी के शत्रुओं को तो नियंत्रित करना सरल है, क्यों कि उन पर हमारी प्रकृति के नियम लागू होते हैं। पर उन दूसरे ग्रह से आये जीवों में, कुछ पर तो हमारी पृथ्वी के प्रकृति के नियम भी लागू नहीं होते, ऐसे में उन्हें मारना बहुत ही मुश्किल है।”

“गुरुमाता, हम इस पुस्तक को तो पढ़ लेंगे, पर मुझे थोड़ा सा और आपसे इन अंतरिक्ष के जीवों के बारे में जानना है? इनके पास ऐसी कौन सी शक्तियां हैं? जिन पर हमारी प्रकृति के नियम ही लागू नहीं होते।” वारुणि ने माया से पूछा।

“ठीक है वारुणि, तो बाकी पूरी जानकारी तुम लोग इस पुस्तक से पढ़ लेना। मैं तुम्हें सिर्फ उस अंतरिक्ष यान के बारे में बता देती हूं। वह अंतरिक्ष यान, हमारी पृथ्वी से 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर स्थित, फेरोना नामक एक नीले ग्रह से आया है। एंड्रोमेडा नामक इस अंतरिक्ष यान में कुल 15 जीव हैं, जो देखने में पृथ्वी वासियों जैसे ही हैं, बस उनके शरीर का रंग नीला है। यह सभी जीव अपने ग्रह के सबसे ताकतवर जीव हैं। इनका सम्मिलित नाम ‘एंड्रोवर्स पॉवर' है। ‘एंड्रोवर्स पॉवर' में अंग्रेजी के कुल 15 अक्षर होते हैं, जो कि इन सभी 15 जीवों के नाम के प्रथम अक्षर से मिलकर बने हैं।

“इन जीवों में कुल 10 पुरुष जीव हैं, जिन्हें 'एंड्रोवर्स' कहा जाता है। बाकी बचे 5 जीव, महिलाएं हैं, जिन्हें 'पॉवर' कहा जाता है। यानि इन सभी 15 जीवों को मिलाकर ही 'एंड्रोवर्स पॉवर' बनता है। इसमें यह बात ध्यान रखने वाली है कि इन जीवों की महिलाएं आपात स्थिति में ही बाहर निकलती हैं और वह अपने पुरुष जीवों से ज्यादा शक्तिशाली हैं। सभी 10 पुरुष जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः A1 से लेकर A10 तक लिख रखा है और सभी महिला जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः P1 से P5 तक लिख रखा है। मैंने इसके अगले पृष्ठ पर इन सभी के नाम और जानकारियां लिख रखीं हैं।"

माया की बात सुन, कैस्पर ने तुरंत पुस्तक का अगला पन्ना खोलकर देखा, उस पन्ने पर एक लिस्ट थी।

“इनमें से कुछ शक्तियों के बारे में तो हमने सुना तक नहीं है?" वारुणि ने पुस्तक में झांकते हुए कहा- “जैसे कि यह डार्क मैटर क्या है?"

"हमारे ब्रह्मांड में करोड़ों सितारे हैं, जिन्हों ने ब्रह्मांड का बहुत सा हिस्सा घेर रखा है, परंतु हम जब भी ब्रह्मांड को देखते हैं, तो हमें ज्यादातर उसका काला भाग ही दिखाई देता है। ब्रह्मांड का वहीं काला भाग डार्क मैटर कहलाता है। पहले वैज्ञानिकों को इस काले भाग के बारे में कुछ नहीं पता था? उन्हें लगता था कि यह ब्रह्मांड का खाली स्थान है, पर ज्यादा खोज होने के बाद हमें इस डार्क मैटर का पता लगा। यह डार्क मैटर ब्रह्मांड के सभी ग्रहों के बीच संतुलन बनाये रखने का कार्य करता है। अगर साधारण भाषा में समझें, तो हम केवल उसी चीज को देख सकते हैं, जो या तो प्रकाश का उत्सर्जन, अवशोषण या फिर परावर्तित करता हो। परंतु डार्क मैटर इनमें से कुछ भी नहीं करता, इसलिये वह हमें दिखाई नहीं देता। डार्क मैटर, हमारी पृथ्वी की किसी भी प्राकृतिक चीज से प्रभावित नहीं होता? ना ही हवा, ना ही आग, पानी और किसी भी धातु से?" माया ने वारुणि को समझाते हुए कहा।

“अगर डार्क मैटर पर कुछ असर ही नहीं होता, तो ना तो वह हमें मार पायेगा और ना ही हम उसे।” वारुणि ने कहा।

“ऐसा नहीं है वारुणि, डार्क मैटर का द्रव्यमान यानि कि भार, बिल्कुल ना के बराबर होता है, इसलिये वह हमारे जीवन में, हमारे शरीर से पार होने के बाद भी हमारा कुछ नहीं कर पाता, परंतु अगर डार्को ने डार्क मैटर का द्रव्यमान बढ़ाकर हम पर वार किया, तो एक सेकेण्ड से भी कम समय में हमारा पूरा शरीर कणों में बिखरकर हवा में मिल जायेगा।" माया ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा- “तभी तो मैं तुम लोगों को आने वाले खतरे से आगाह कर रही हूं, जिससे तुम लोग समय रहते ही उससे बचाव करने की तकनीक ढूंढ सको।"

“क्या ऐसे खतरनाक डार्क मैटर को किसी भी प्रकार से नियंत्रित किया जा सकता है?" वारुणि तो आज पूर्ण ज्ञान लेने के मूड में थी। ऐसा लग रहा था कि उसे माया के रुप में कोई खजाना मिल गया हो?

"गुरुत्वाकर्षण.....एक वहीं चीज है, जिससे डार्क मैटर आकर्षित होता है अब ये देखना तुम्हारा काम होगा कि तुम्हारे किस मित्र के पास गुरुत्वाकर्षण की शक्ति है और उसे कब और कैसे डार्को के आगे करना है? ये ध्यान रखना कि समय से पहले दिव्यशक्तियों का प्रदर्शन सदैव हानिकारक होता है।" माया ने मुस्कुराते हुए वारुणि को गुरुमंत्र दिया।

अब वारुणि ने उस लिस्ट को देखते हुए फिर से पूछा- “गुरुमाता, यह सामान्य शक्ति क्या है? जो किसी 'रेने' के पास है?"

यह सुनकर माया मुस्कुरा दी- “रेने इस पूरे ग्रुप की कमांडर है, यह एंड्रोनिका से तभी निकलती है, जब सबकी शक्तियां विफल हो जाती हैं दरअसल सच कहें तो रेने के पास कोई शक्ति नहीं है, पर वह अपने सामने किसी भी शक्ति को रहने भी नहीं देती। मतलब अगर वह सामने हो तो किसी भी शत्रु की दिव्य शक्तियां काम नहीं करती हैं और ऐसे में वह सभी आसानी से जीत जाते हैं। बस अब इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं बताने वाली वारुणि? इसके आगे तुम दोनों को स्वयं ही देखना होगा। और हां इसमें से एक जीव एलात्रा 2 दिन पहले मारा जा चुका है।” माया ने सभा का समापन करते हुए कहा।

“एक आखिरी चीज और बता दीजिये कि विक्रम ठीक तो है ना?" वारुणि ने आखिरी सवाल पूछते हुए कहा।

“हां, विक्रम ठीक है और वह तुमसे समय आने पर मिल जायेगा। परंतु धरा और मयूर को इन अंतरिक्ष के जीवों ने बंदी बना लिया है और अब वह एकएक कर बाकी लोगों पर भी हमला करेंगे।" माया ने कहा- “इसलिये तुम लोगों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी और हां अभी तो मैं तुम दोनों को वापस नक्षत्रलोक भेज रही हूं, पर जल्दी ही मैं तुम्हें फिर से वापस बुलाऊंगी और फिर मैं तुम दोनों के साथ ओलंपस पर्वत चलूंगी, इससे पहले कि कोई दूसरी परेशानी बढ़े? हमें ग्रीक देवताओं से एक बार बात करनी ही पड़ेगी।”

यह कहकर माया ने अपना हाथ हिलाया, इसी के साथ कैस्पर और वारुणि, ऊर्जा द्वार से होते हुए पुनः नक्षत्रशाला में पहुंच गये, पर अब उनके चेहरे पर थोड़ी निश्चिंतता के भाव थे।


जारी रहेगा_____✍️
Wonderful update, jab Vyom, Trikali, Suyash, Shefali aur Varuni aur baki sabhi ek sath honge, lekin isme abhi bahut waqt lagna hai, abhi Vyom ka mission pura nahi hua hai, Shefali aur Suyash abhi Tilism ko todne mein lage huye hain, khair dark matter ka ilaaz toh apne Vyom ke paas hai.
 

parkas

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युद्धनीति:
(19.01.02, शनिवार, नक्षत्रलोक, कैस्पर क्लाउड)

कैस्पर जब श्वेत महल को देखने गया था, तो वारुणि कैस्पर को लेकर नक्षत्रलोक आ गई थी।

वारुणि ने कैस्पर को वहां एक ऐसा जीव दिखाया था, जो कि कैस्पर की ही शक्तियों से निर्मित था। उसके बाद कैस्पर ने बताया कि किस प्रकार, कैश्वर ने उसे किनारे कर के पूरे तिलिस्मा पर अधिकार कर लिया है।

कैस्पर ने वारुणि से किसी देवयुद्ध का भी जिक्र किया था, जिसमें वारुणि को एक निर्णायक भूमिका निभानी थी।

वारुणि ने भी कैस्पर से कहा था कि वह उस 3 आँख और 4 हाथ वाले विचित्र जीव के द्वारा, उस ग्रह के बारे में जानने की कोशिश करेगी, जिधर उस जीव ने अपने सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र से मैसेज भेजा था।

इसलिये पिछली 4 दिन से वारुणि लगातार नक्षत्रशाला में काम कर रही थी। कल तो वह पूरी रात जागती रही थी।

वारुणि ने उस विचित्र जीव से मिले, सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र की तरंग दैर्ध्य जांच ली थी। जिससे उसे, सिग्नल की दूरी और गति का पता चल गया था।

अब वारुणि ध्यान से उस जीव की, उस समय की फोटो का अध्ययन कर रही थी, जब उसे टूटी हुई ओजोन लेयर के पास से पकड़ा गया था। इस समय वारुणि ने अपने हाथों में पेंसिल और ज्यामिति के कुछ टूल्स पकड़ रखे थे।

कुछ ही देर में वारुणि ने, उस जीव के कोण का भी पता लगा लिया। अब बस उस जीव के शरीर के कोण, सिग्नल की गति और दूरी को ब्रह्मांड के मानचित्र में डालने की जरुरत थी।

अब वारुणि ने अपने सामने मौजूद एक बड़े से कम्प्यूटर पर, अपनी सभी गणनाओं को डाल दिया और ब्रह्मांड के मानचित्र में सर्च का बटन दबा दिया।

नक्षत्रलोक का आधुनिक कम्प्यूटर, तेजी से वारुणि की गणनाओं से खेलने लगा।

कुछ ही देर में उस कम्प्यूटर ने एक ग्रह का चित्र और उसकी पृथ्वी से दूरी के बारे में बताना शुरु कर दिया।

वारुणि के लिये यह नीला ग्रह बिल्कुल नया था, वह इसके बारे में कुछ नहीं जानती थी। फिर भी उस ग्रह को देख वारुणि के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थिरक उठी। आखिर उसकी रात भर की मेहनत का फल मिल गया था।

वारुणि ने इस समय घड़ी पर नजर डाली, घड़ी में इस समय सुबह का 8 बज रहा था।

“सुबह का 8 बज गया है, कैस्पर अवश्य ही उठ गया होगा। मुझे तुरंत उसको इस ग्रह के बारे में बताना चाहिये।" वारुणि ने मन ही मन सोचा और तुरंत नक्षत्रशाला से निकलकर कैस्पर के कक्ष की ओर चल दी।

वारुणि बिना दरवाजा खटखटाये, कैस्पर के कमरे में प्रवेश कर गई, पर वारुणि की आशा के विपरीत कैस्पर अभी भी सो रहा था।

वारुणि कक्ष में उपस्थित एक कुर्सी पर बैठ गई और सो रहे कैस्पर को देखने लगी।

सोते समय भी कैस्पर के चेहरे पर एक सौम्यता सी दिखाई दे रही थी।

वारुणि ना जाने ऐसे ही कितनी देर तक बैठी कैस्पर को निहारती रही। आखिरकार कैस्पर की आँख खुली।
वारुणि को अपने कमरे में देख कैस्पर हैरान हो गया।

"लगता है मैं कोई सपना देख रहा हूं आज सुबह-सुबह चाँद हमारे कमरे में क्यों आ गया?” कैस्पर ने बिस्तर से उठकर अंगड़ाई लेते हुए कहा।

“तुम्हारी चाँद की पिछली पूरी रात काली हो चुकी है और वह सुबह-सुबह ही तुम्हारे कमरे में आया था, पर अफसोस कि इस समय दोपहर हो चुकी है।” वारुणि ने मुस्कुराते हुए कैस्पर को बाथरुम की ओर धक्का देते हुए कहा- “अब चाँद चाहता है कि उसका दोस्त भी नहा-धोकर, उसके साथ एक नये ग्रह की सैर पर चले।"

“इसका मतलब कि चाँद ने रात भर में, उस नये ग्रह को ढूंढ ही लिया।” कैस्पर ने बाथरुम में प्रवेश करते हुए कहा- “तो फिर बस मैं नहाकर अभी आया। फिर दोनों साथ में चलेंगे, उस नये ग्रह की सैर पर।"

कैस्पर के बाथरुम में घुसने के बाद, वारुणि, विक्रम के ख्यालों में खो गई- “आज विक्रम को गायब हुए 6 दिन बीत गये हैं, पर उसकी कहीं से कोई खबर नहीं आई। उसने पिछले हजारों वर्षों में आज तक ऐसा कभी नहीं किया था। एक तो वह मेरे मानसिक तरंगों का भी जवाब नहीं दे रहा है। पता नहीं वह कहां और किस हाल में होगा?

कुछ देर के लिये ही सही पर विक्रम को याद कर, वारुणि का पूरा चेहरा उतर गया। अब वह सिर झुकाकर वहीं कमरे में बैठ गई।

कुछ देर बाद कैस्पर फ्रेश होकर बाथरुम से निकला। अब उसकी नजर वारुणि पर गई, जो कि वहीं कुर्सी पर बैठे-बैठे ही सो गई थी।

कैस्पर ने अपने कपड़े बदले और वारुणि के सामने जमीन पर बैठकर उसे देखने लगा।

लगभग 10 मिनट बाद ही वारुणि हड़बड़ा कर नींद से उठ गई। अब उसकी नजर सामने जमीन पर बैठकर उसे निहारते कैस्पर पर गई।


“ये तुम मेरी नकल क्यों कर रहे हो?” वारुणि ने उठकर कैस्पर का कान पकड़ते हुए कहा- “तुम मेरे नींद से जागने का कई घंटों तक इंतजार करती हो, तो मैंने सोचा कि मैं भी कुछ घंटे अपने चाँद को निहार लूं।"

"चल झूठे, मुझे अभी सोये हुए 10 मिनट भी नहीं बीता है। इतना सफेद झूठ बोलते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती।” वारुणि ने प्यार से कैस्पर को डांटते हुए कहा।

“आती है...कभी-कभी मुझे भी शर्म आती है, पर अब अपने चाँद के सामने क्या शर्माना?" कैस्पर ने वारुणि को खुश करते हुए कहा।

“तुम्हारी ऐसी ही हरकतें रहीं, तो सच मानो किसी दिन तुम्हें विक्रम बहुत मारेगा।” वारुणि ने हंसते हुए कहा।

"अरे मारने के लिये उसका मिलना भी तो जरुरी है।” कैस्पर ने अब सीरीयस होते हुए कहा- “विक्रम का कुछ पता चला क्या?" कैस्पर की बात सुन वारुणि ने धीरे से 'ना' में अपना सिर हिला दिया।

“अरे तो इसमें दुखी होने की क्या बात है?” कैस्पर ने वारुणि को जोर से हिलाते हुए कहा- “तुम्हारा ये दोस्त मैं ढूंढकर लाऊंगा उसे बस इसके लिये मुझे एक बार अपनी माँ से मिलना पड़ेगा। है ना। ....

“मैं भी मिलूंगी तुम्हारी माँ से।” वारुणि ने कहा।

"जरुर मिलाऊंगा। चलो अब पहले जरा उस ग्रह के बारे में जान लें, फिर मैं अपनी माँ से बात करुंगा।” कैस्पर ने कहा और फिर वारुणि के पीछे-पीछे नक्षत्रशाला की ओर चल दिया।

कुछ ही देर में दोनों नक्षत्रशाला में थे। वारुणि जिस प्रकार अपने कम्प्यूटर को छोड़ गई थी, उसका कम्प्यूटर उसी हालत में अभी भी पड़ा था।

अब कैस्पर की नजर कम्प्यूटर की स्क्रीन पर थी, जिस पर एक नीले रंग का ग्रह चमक रहा था। कम्प्यूटर उस ग्रह की पृथ्वी से दूरी 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर दिखा रहा था।

“इस ग्रह के बारे में तो मुझे भी कुछ नहीं पता?...और...और इस ग्रह की दूरी तो पृथ्वी से बहुत ज्यादा है।” कैस्पर ने स्क्रीन की ओर देखते हुए कहा- “इतनी दूरी तक सिग्नल भेजने वाला सिग्नल मॉडुलेटर, कैश्वर के पास आया कहां से?... इसका मतलब है कि अवश्य ही कोई ना कोई और इस समय कैश्वर के साथ है? जिसने उसे यह सिग्नल मॉडुलेटर दिया है...पर कौन?...जब कैश्वर मेरा कहना नहीं मान रहा, तो ऐसा कौन है पृथ्वी पर, जो कैश्वर को भी अपने इशारों पर नचा रहा है? इन सबके पीछे कुछ ना कुछ रहस्य तो अवश्य है? मुझे इसका पता लगाने के लिये, एक बार फिर से अराका पर जाना ही पड़ेगा, पर... पर मेरे गुप्त ऊर्जा द्वार को तो पहले ही कैश्वर बंद कर चुका है, फिर मैं तिलिस्मा के अंदर कैसे प्रविष्ठ हो सकता हूं?...अब मुझे सिर्फ माँ ही इस मुसीबत से बचा सकती हैं.... मुझे माँ को ही याद करना होगा। तुम भी मेरे साथ चल रही हो वारुणि।”

यह कहकर कैस्पर ने अपनी आँख बंद कर ली और वारुणि का हाथ पकड़कर माया को याद करने लगा

“माँ, मैं इस समय एक बहुत बड़ी मुश्किल में हूं, मुझे इस समय आपकी मदद की आवश्यकता है। मुझे अपने पास बुलाइये माँ।”

वारुणि समझ नहीं पा रही थी कि कैस्पर की माँ, किस प्रकार नक्षत्रलोक से उन्हें अपने पास बुलायेंगी, पर उसने कुछ कहा नहीं। वह अब बस आँख बंद किये कैस्पर को देख रही थी।

तभी वारुणि को हवा में एक ऊर्जा द्वार बनता दिखाई दिया। एक पल से भी कम समय में उस ऊर्जा द्वार ने कैस्पर और वारुणि को अपने अंदर खींच लिया।

वारुणि को अपना शरीर हवा में गिरता हुआ सा महसूस हो रहा था, परंतु चारो ओर तेज रोशनी की वजह से उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन ऐसी स्थिति में वारुणि ने कैस्पर का हाथ नहीं छोड़ा था।

कुछ ही देर में रोशनी कम होने लगी। अब वारुणि की आँखें देखने लायक हो गईं थीं।

वारुणि ने स्वयं को इस समय एक ऐसे कमरे में पाया, जिसमें कोई खिड़की नहीं थी, बस एक दरवाजा ही था। कैस्पर उसके बगल खड़ा था।

तभी दरवाजे से एक खूबसूरत स्त्री ने अंदर प्रवेश किया, जिसे देख वारूणि हैरान हो गई।

“आप????” वारुणि के मुंह से माया के लिये सम्मान भरे शब्द निकले- “आप कैस्पर की माँ हैं! आपका चित्र तो मैंने वेदालय में हर स्थान पर लगे देखा था।"

माया ने वारुणि को देख धीरे से अपना सिर हिलाया, पर कुछ कहा नहीं? तभी कैस्पर दौड़कर माया के गले से लग गया।

“क्यों रे, अब तू मैग्ना की जगह इससे विवाह करेगा क्या?" माया की आवाज वातावरण में गूंजी। माया की बात सुन वारुणि शर्मा गई।

“अरे नहीं माँ, ये मेरी बहुत अच्छी दोस्त है बस।"

तभी वारुणि ने आगे बढ़कर माया के चरण स्पर्श कर लिये। माया ने अपना हाथ उठाकर वारुणि को आशीर्वाद दिया- “जा जल्दी ही तुझे विक्रम मिल जाये।"

माया की बात सुनकर वारुणि हैरानी से कैस्पर को देखने लगी थी, क्यों कि अभी उन्होंने माया से विक्रम के बारे में तो कुछ कहा ही नहीं था?

“अरे, इतना हैरान मत हो वारुणि, यह मेरी माँ हैं, यह भूत, भविष्य, वर्तमान सब जानती हैं, इनसे इस पृथ्वी पर कुछ भी छिपा नहीं है?" कैस्पर ने वारुणि से कहा“ बस तुम्हें इनकी आवाज वातावरण में सुनने की आदत डालनी पड़ेगी बस। क्यों कि यह किसी से भी बात नहीं करती हैं।"

“क्या तुम्हें पता है कैस्पर? कि माता ने ही हमारे वेदालय की रचना की थी और यह हमारे महागुरु नीलाभ की पत्नी हैं, इस हिसाब से यह हमारी गुरुमाता हुईं।" वारुणि ने प्रसन्नता से कहा।

माया ने अब कैस्पर और वारुणि को बैठने का इशारा किया।

“अच्छा किया कैस्पर कि तुमने मुझे याद कर लिया, अगर कुछ दिन तक तुम मुझे और याद नहीं करते, तो मैं स्वयं तुम्हें अपने पास बुला लेती।” माया ने कहा- “मुझे पता है कि तुम लोगों के मस्तिष्क में सैकड़ों प्रश्न घूम रहे हैं? इसलिये अब तुम एक-एक कर मुझसे सारे प्रश्न पूछ सकते हो। आज मैं भी बिना घुमाये-फिराये तुम्हें सबकुछ बता दूंगी क्यों कि सभी रहस्यों को खोलने का इससे बेहतर समय अब नहीं आयेगा।

“तो क्या माँ, आप जिस देवयुद्ध का ज़िक्र हमें बचपन से करती आई थीं, उसका समय अब आने वाला है?” कैस्पर ने माया से पूछा।

“हां, कैस्पर। वह देवयुद्ध अब बहुत निकट है। अगर उसे सही से संभाला नहीं गया, तो वह पूरी पृथ्वी का विनाश कर देगा।" माया ने कहा।

“कौन हैं, वह पृथ्वी के विनाशक, जिनके बारे में अभी हमें पता भी नहीं है?" वारुणि ने पूछा।

“वह एक नहीं है, बल्कि बहुत से हैं। कुछ पृथ्वी से सुदूर दूसरी आकाशगंगा से आये हैं, तो कुछ सैकड़ों वर्षों से पृथ्वी पर छिपे, उस विनाश का ताना-बाना बुन रहे हैं। हमारा कार्य उन सभी आसुरी शक्तियों को एक होने से रोकना है। अगर वह सब एक हो गये तो हमारी पृथ्वी का बचना असंभव है।" माया ने गंभीर शब्दों में कहा।

“पर हम उन्हें एक होने से किस प्रकार रोक सकते हैं? हम ना तो उनके बारे में जानते हैं? और ना ही उनकी शक्तियों के बारे में?...फिर इस प्रकार बिना जाने उन्हें रोक पाना असंभव है।" वारुणि ने कहा।

“इसी असंभव कार्य को तो तुम दोनों को संभव बनाना है। और...इसे संभव बनाने के लिये तुम्हें 3 कार्य करने होंगे। पहला कार्य तुम्हें सभी देवशक्ति धारकों को एक स्थान पर एकत्र करके, उन्हें सबकुछ बताकर एक माला में पिरोना होगा। बिना एकता की शक्ति के, तुम यह युद्ध कभी भी जीत नहीं सकते। दूसरा कार्य यह है कि तुम्हें सभी विनाशकों को एक साथ मिलने के पहले ही, एक-एक कर मारना शुरु करना होगा।

“अगर तुम ऐसा करने में सफल हो गये, तो देवयुद्ध से पहले ही हम अपने शत्रुओं की शक्ति को आधा कर सकते हैं। तीसरा कार्य तुम्हें कैसे भी ग्रीक देवताओं को अपनी ओर करना होगा? ये ध्यान रखना कि अगर वो हमारी ओर ना आयें, तो कम से कम हमारे शत्रुओं की ओर से भी युद्ध ना करें। क्यों कि अगर ग्रीक देवी -देवता भी उनकी ओर मिल गये, तब हम अपने शत्रुओं से नहीं जीत पायेंगे। इसके अलावा और कुछ छोटी -मोटी तैयारियां करनी होंगी, जो कि मैं समय-समय पर तुम्हें बताती रहूंगी।"

“पर माँ, इनमें से पहले 2 कार्य तब तक संभव नहीं हैं, जब तक कि हमें जानकारियां ना मिल जायें।" कैस्पर ने कहा।

“तुम जानकारियों की चिंता मत करो, मेरे पास सभी मित्रों और शत्रुओं की पूर्ण जानकारियां हैं।” माया ने यह कहकर अपना हाथ ऊपर की ओर उठाया।

माया के ऐसा करते ही हवा में एक पुस्तक प्रकट हो गई, जो कि हवा में तैरती हुई कैस्पर के हाथ में आ गई। कैस्पर ने उस पुस्तक को देखा, उसका नाम 'देवयुद्ध' था।

“यह पुस्तक मैंने तुम्हारे लिये ही लिखी है कैस्पर।" माया ने कहा- “इस पुस्तक में तुम्हें सभी शत्रुओं और मित्रों की जानकारियां मिल जायेंगी।"

कैस्पर ने उत्सुकतावश 'देवयुद्ध' का एक पृष्ठ खोलकर देखा। उस पृष्ठ पर एंड्रोनिका लिखा था।

“यह एंडोनिका क्या है माँ?” कैस्पर ने माया से पूछा।

"एंड्रोनिका, उस अंतरिक्ष यान का नाम है, जिसे तुम लोग उल्कापिंड समझ रहे हो।" माया ने कहा।

"तो क्या उस उल्कापिंड....म...मेरा मतलब है कि एंड्रोनिका में अंतरिक्ष के जीव भी हैं?” वारुणि ने आश्चर्य से पूछा।

“वही तो हमारे असली शत्रु हैं वारुणि।” माया ने कहा- “पृथ्वी के शत्रुओं को तो नियंत्रित करना सरल है, क्यों कि उन पर हमारी प्रकृति के नियम लागू होते हैं। पर उन दूसरे ग्रह से आये जीवों में, कुछ पर तो हमारी पृथ्वी के प्रकृति के नियम भी लागू नहीं होते, ऐसे में उन्हें मारना बहुत ही मुश्किल है।”

“गुरुमाता, हम इस पुस्तक को तो पढ़ लेंगे, पर मुझे थोड़ा सा और आपसे इन अंतरिक्ष के जीवों के बारे में जानना है? इनके पास ऐसी कौन सी शक्तियां हैं? जिन पर हमारी प्रकृति के नियम ही लागू नहीं होते।” वारुणि ने माया से पूछा।

“ठीक है वारुणि, तो बाकी पूरी जानकारी तुम लोग इस पुस्तक से पढ़ लेना। मैं तुम्हें सिर्फ उस अंतरिक्ष यान के बारे में बता देती हूं। वह अंतरिक्ष यान, हमारी पृथ्वी से 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर स्थित, फेरोना नामक एक नीले ग्रह से आया है। एंड्रोमेडा नामक इस अंतरिक्ष यान में कुल 15 जीव हैं, जो देखने में पृथ्वी वासियों जैसे ही हैं, बस उनके शरीर का रंग नीला है। यह सभी जीव अपने ग्रह के सबसे ताकतवर जीव हैं। इनका सम्मिलित नाम ‘एंड्रोवर्स पॉवर' है। ‘एंड्रोवर्स पॉवर' में अंग्रेजी के कुल 15 अक्षर होते हैं, जो कि इन सभी 15 जीवों के नाम के प्रथम अक्षर से मिलकर बने हैं।

“इन जीवों में कुल 10 पुरुष जीव हैं, जिन्हें 'एंड्रोवर्स' कहा जाता है। बाकी बचे 5 जीव, महिलाएं हैं, जिन्हें 'पॉवर' कहा जाता है। यानि इन सभी 15 जीवों को मिलाकर ही 'एंड्रोवर्स पॉवर' बनता है। इसमें यह बात ध्यान रखने वाली है कि इन जीवों की महिलाएं आपात स्थिति में ही बाहर निकलती हैं और वह अपने पुरुष जीवों से ज्यादा शक्तिशाली हैं। सभी 10 पुरुष जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः A1 से लेकर A10 तक लिख रखा है और सभी महिला जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः P1 से P5 तक लिख रखा है। मैंने इसके अगले पृष्ठ पर इन सभी के नाम और जानकारियां लिख रखीं हैं।"

माया की बात सुन, कैस्पर ने तुरंत पुस्तक का अगला पन्ना खोलकर देखा, उस पन्ने पर एक लिस्ट थी।

“इनमें से कुछ शक्तियों के बारे में तो हमने सुना तक नहीं है?" वारुणि ने पुस्तक में झांकते हुए कहा- “जैसे कि यह डार्क मैटर क्या है?"

"हमारे ब्रह्मांड में करोड़ों सितारे हैं, जिन्हों ने ब्रह्मांड का बहुत सा हिस्सा घेर रखा है, परंतु हम जब भी ब्रह्मांड को देखते हैं, तो हमें ज्यादातर उसका काला भाग ही दिखाई देता है। ब्रह्मांड का वहीं काला भाग डार्क मैटर कहलाता है। पहले वैज्ञानिकों को इस काले भाग के बारे में कुछ नहीं पता था? उन्हें लगता था कि यह ब्रह्मांड का खाली स्थान है, पर ज्यादा खोज होने के बाद हमें इस डार्क मैटर का पता लगा। यह डार्क मैटर ब्रह्मांड के सभी ग्रहों के बीच संतुलन बनाये रखने का कार्य करता है। अगर साधारण भाषा में समझें, तो हम केवल उसी चीज को देख सकते हैं, जो या तो प्रकाश का उत्सर्जन, अवशोषण या फिर परावर्तित करता हो। परंतु डार्क मैटर इनमें से कुछ भी नहीं करता, इसलिये वह हमें दिखाई नहीं देता। डार्क मैटर, हमारी पृथ्वी की किसी भी प्राकृतिक चीज से प्रभावित नहीं होता? ना ही हवा, ना ही आग, पानी और किसी भी धातु से?" माया ने वारुणि को समझाते हुए कहा।

“अगर डार्क मैटर पर कुछ असर ही नहीं होता, तो ना तो वह हमें मार पायेगा और ना ही हम उसे।” वारुणि ने कहा।

“ऐसा नहीं है वारुणि, डार्क मैटर का द्रव्यमान यानि कि भार, बिल्कुल ना के बराबर होता है, इसलिये वह हमारे जीवन में, हमारे शरीर से पार होने के बाद भी हमारा कुछ नहीं कर पाता, परंतु अगर डार्को ने डार्क मैटर का द्रव्यमान बढ़ाकर हम पर वार किया, तो एक सेकेण्ड से भी कम समय में हमारा पूरा शरीर कणों में बिखरकर हवा में मिल जायेगा।" माया ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा- “तभी तो मैं तुम लोगों को आने वाले खतरे से आगाह कर रही हूं, जिससे तुम लोग समय रहते ही उससे बचाव करने की तकनीक ढूंढ सको।"

“क्या ऐसे खतरनाक डार्क मैटर को किसी भी प्रकार से नियंत्रित किया जा सकता है?" वारुणि तो आज पूर्ण ज्ञान लेने के मूड में थी। ऐसा लग रहा था कि उसे माया के रुप में कोई खजाना मिल गया हो?

"गुरुत्वाकर्षण.....एक वहीं चीज है, जिससे डार्क मैटर आकर्षित होता है अब ये देखना तुम्हारा काम होगा कि तुम्हारे किस मित्र के पास गुरुत्वाकर्षण की शक्ति है और उसे कब और कैसे डार्को के आगे करना है? ये ध्यान रखना कि समय से पहले दिव्यशक्तियों का प्रदर्शन सदैव हानिकारक होता है।" माया ने मुस्कुराते हुए वारुणि को गुरुमंत्र दिया।

अब वारुणि ने उस लिस्ट को देखते हुए फिर से पूछा- “गुरुमाता, यह सामान्य शक्ति क्या है? जो किसी 'रेने' के पास है?"

यह सुनकर माया मुस्कुरा दी- “रेने इस पूरे ग्रुप की कमांडर है, यह एंड्रोनिका से तभी निकलती है, जब सबकी शक्तियां विफल हो जाती हैं दरअसल सच कहें तो रेने के पास कोई शक्ति नहीं है, पर वह अपने सामने किसी भी शक्ति को रहने भी नहीं देती। मतलब अगर वह सामने हो तो किसी भी शत्रु की दिव्य शक्तियां काम नहीं करती हैं और ऐसे में वह सभी आसानी से जीत जाते हैं। बस अब इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं बताने वाली वारुणि? इसके आगे तुम दोनों को स्वयं ही देखना होगा। और हां इसमें से एक जीव एलात्रा 2 दिन पहले मारा जा चुका है।” माया ने सभा का समापन करते हुए कहा।

“एक आखिरी चीज और बता दीजिये कि विक्रम ठीक तो है ना?" वारुणि ने आखिरी सवाल पूछते हुए कहा।

“हां, विक्रम ठीक है और वह तुमसे समय आने पर मिल जायेगा। परंतु धरा और मयूर को इन अंतरिक्ष के जीवों ने बंदी बना लिया है और अब वह एकएक कर बाकी लोगों पर भी हमला करेंगे।" माया ने कहा- “इसलिये तुम लोगों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी और हां अभी तो मैं तुम दोनों को वापस नक्षत्रलोक भेज रही हूं, पर जल्दी ही मैं तुम्हें फिर से वापस बुलाऊंगी और फिर मैं तुम दोनों के साथ ओलंपस पर्वत चलूंगी, इससे पहले कि कोई दूसरी परेशानी बढ़े? हमें ग्रीक देवताओं से एक बार बात करनी ही पड़ेगी।”

यह कहकर माया ने अपना हाथ हिलाया, इसी के साथ कैस्पर और वारुणि, ऊर्जा द्वार से होते हुए पुनः नक्षत्रशाला में पहुंच गये, पर अब उनके चेहरे पर थोड़ी निश्चिंतता के भाव थे।


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....
 

Dhakad boy

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युद्धनीति:
(19.01.02, शनिवार, नक्षत्रलोक, कैस्पर क्लाउड)

कैस्पर जब श्वेत महल को देखने गया था, तो वारुणि कैस्पर को लेकर नक्षत्रलोक आ गई थी।

वारुणि ने कैस्पर को वहां एक ऐसा जीव दिखाया था, जो कि कैस्पर की ही शक्तियों से निर्मित था। उसके बाद कैस्पर ने बताया कि किस प्रकार, कैश्वर ने उसे किनारे कर के पूरे तिलिस्मा पर अधिकार कर लिया है।

कैस्पर ने वारुणि से किसी देवयुद्ध का भी जिक्र किया था, जिसमें वारुणि को एक निर्णायक भूमिका निभानी थी।

वारुणि ने भी कैस्पर से कहा था कि वह उस 3 आँख और 4 हाथ वाले विचित्र जीव के द्वारा, उस ग्रह के बारे में जानने की कोशिश करेगी, जिधर उस जीव ने अपने सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र से मैसेज भेजा था।

इसलिये पिछली 4 दिन से वारुणि लगातार नक्षत्रशाला में काम कर रही थी। कल तो वह पूरी रात जागती रही थी।

वारुणि ने उस विचित्र जीव से मिले, सिग्नल मॉडुलेटर यंत्र की तरंग दैर्ध्य जांच ली थी। जिससे उसे, सिग्नल की दूरी और गति का पता चल गया था।

अब वारुणि ध्यान से उस जीव की, उस समय की फोटो का अध्ययन कर रही थी, जब उसे टूटी हुई ओजोन लेयर के पास से पकड़ा गया था। इस समय वारुणि ने अपने हाथों में पेंसिल और ज्यामिति के कुछ टूल्स पकड़ रखे थे।

कुछ ही देर में वारुणि ने, उस जीव के कोण का भी पता लगा लिया। अब बस उस जीव के शरीर के कोण, सिग्नल की गति और दूरी को ब्रह्मांड के मानचित्र में डालने की जरुरत थी।

अब वारुणि ने अपने सामने मौजूद एक बड़े से कम्प्यूटर पर, अपनी सभी गणनाओं को डाल दिया और ब्रह्मांड के मानचित्र में सर्च का बटन दबा दिया।

नक्षत्रलोक का आधुनिक कम्प्यूटर, तेजी से वारुणि की गणनाओं से खेलने लगा।

कुछ ही देर में उस कम्प्यूटर ने एक ग्रह का चित्र और उसकी पृथ्वी से दूरी के बारे में बताना शुरु कर दिया।

वारुणि के लिये यह नीला ग्रह बिल्कुल नया था, वह इसके बारे में कुछ नहीं जानती थी। फिर भी उस ग्रह को देख वारुणि के चेहरे पर एक विजयी मुस्कान थिरक उठी। आखिर उसकी रात भर की मेहनत का फल मिल गया था।

वारुणि ने इस समय घड़ी पर नजर डाली, घड़ी में इस समय सुबह का 8 बज रहा था।

“सुबह का 8 बज गया है, कैस्पर अवश्य ही उठ गया होगा। मुझे तुरंत उसको इस ग्रह के बारे में बताना चाहिये।" वारुणि ने मन ही मन सोचा और तुरंत नक्षत्रशाला से निकलकर कैस्पर के कक्ष की ओर चल दी।

वारुणि बिना दरवाजा खटखटाये, कैस्पर के कमरे में प्रवेश कर गई, पर वारुणि की आशा के विपरीत कैस्पर अभी भी सो रहा था।

वारुणि कक्ष में उपस्थित एक कुर्सी पर बैठ गई और सो रहे कैस्पर को देखने लगी।

सोते समय भी कैस्पर के चेहरे पर एक सौम्यता सी दिखाई दे रही थी।

वारुणि ना जाने ऐसे ही कितनी देर तक बैठी कैस्पर को निहारती रही। आखिरकार कैस्पर की आँख खुली।
वारुणि को अपने कमरे में देख कैस्पर हैरान हो गया।

"लगता है मैं कोई सपना देख रहा हूं आज सुबह-सुबह चाँद हमारे कमरे में क्यों आ गया?” कैस्पर ने बिस्तर से उठकर अंगड़ाई लेते हुए कहा।

“तुम्हारी चाँद की पिछली पूरी रात काली हो चुकी है और वह सुबह-सुबह ही तुम्हारे कमरे में आया था, पर अफसोस कि इस समय दोपहर हो चुकी है।” वारुणि ने मुस्कुराते हुए कैस्पर को बाथरुम की ओर धक्का देते हुए कहा- “अब चाँद चाहता है कि उसका दोस्त भी नहा-धोकर, उसके साथ एक नये ग्रह की सैर पर चले।"

“इसका मतलब कि चाँद ने रात भर में, उस नये ग्रह को ढूंढ ही लिया।” कैस्पर ने बाथरुम में प्रवेश करते हुए कहा- “तो फिर बस मैं नहाकर अभी आया। फिर दोनों साथ में चलेंगे, उस नये ग्रह की सैर पर।"

कैस्पर के बाथरुम में घुसने के बाद, वारुणि, विक्रम के ख्यालों में खो गई- “आज विक्रम को गायब हुए 6 दिन बीत गये हैं, पर उसकी कहीं से कोई खबर नहीं आई। उसने पिछले हजारों वर्षों में आज तक ऐसा कभी नहीं किया था। एक तो वह मेरे मानसिक तरंगों का भी जवाब नहीं दे रहा है। पता नहीं वह कहां और किस हाल में होगा?

कुछ देर के लिये ही सही पर विक्रम को याद कर, वारुणि का पूरा चेहरा उतर गया। अब वह सिर झुकाकर वहीं कमरे में बैठ गई।

कुछ देर बाद कैस्पर फ्रेश होकर बाथरुम से निकला। अब उसकी नजर वारुणि पर गई, जो कि वहीं कुर्सी पर बैठे-बैठे ही सो गई थी।

कैस्पर ने अपने कपड़े बदले और वारुणि के सामने जमीन पर बैठकर उसे देखने लगा।

लगभग 10 मिनट बाद ही वारुणि हड़बड़ा कर नींद से उठ गई। अब उसकी नजर सामने जमीन पर बैठकर उसे निहारते कैस्पर पर गई।


“ये तुम मेरी नकल क्यों कर रहे हो?” वारुणि ने उठकर कैस्पर का कान पकड़ते हुए कहा- “तुम मेरे नींद से जागने का कई घंटों तक इंतजार करती हो, तो मैंने सोचा कि मैं भी कुछ घंटे अपने चाँद को निहार लूं।"

"चल झूठे, मुझे अभी सोये हुए 10 मिनट भी नहीं बीता है। इतना सफेद झूठ बोलते हुए तुम्हें शर्म नहीं आती।” वारुणि ने प्यार से कैस्पर को डांटते हुए कहा।

“आती है...कभी-कभी मुझे भी शर्म आती है, पर अब अपने चाँद के सामने क्या शर्माना?" कैस्पर ने वारुणि को खुश करते हुए कहा।

“तुम्हारी ऐसी ही हरकतें रहीं, तो सच मानो किसी दिन तुम्हें विक्रम बहुत मारेगा।” वारुणि ने हंसते हुए कहा।

"अरे मारने के लिये उसका मिलना भी तो जरुरी है।” कैस्पर ने अब सीरीयस होते हुए कहा- “विक्रम का कुछ पता चला क्या?" कैस्पर की बात सुन वारुणि ने धीरे से 'ना' में अपना सिर हिला दिया।

“अरे तो इसमें दुखी होने की क्या बात है?” कैस्पर ने वारुणि को जोर से हिलाते हुए कहा- “तुम्हारा ये दोस्त मैं ढूंढकर लाऊंगा उसे बस इसके लिये मुझे एक बार अपनी माँ से मिलना पड़ेगा। है ना। ....

“मैं भी मिलूंगी तुम्हारी माँ से।” वारुणि ने कहा।

"जरुर मिलाऊंगा। चलो अब पहले जरा उस ग्रह के बारे में जान लें, फिर मैं अपनी माँ से बात करुंगा।” कैस्पर ने कहा और फिर वारुणि के पीछे-पीछे नक्षत्रशाला की ओर चल दिया।

कुछ ही देर में दोनों नक्षत्रशाला में थे। वारुणि जिस प्रकार अपने कम्प्यूटर को छोड़ गई थी, उसका कम्प्यूटर उसी हालत में अभी भी पड़ा था।

अब कैस्पर की नजर कम्प्यूटर की स्क्रीन पर थी, जिस पर एक नीले रंग का ग्रह चमक रहा था। कम्प्यूटर उस ग्रह की पृथ्वी से दूरी 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर दिखा रहा था।

“इस ग्रह के बारे में तो मुझे भी कुछ नहीं पता?...और...और इस ग्रह की दूरी तो पृथ्वी से बहुत ज्यादा है।” कैस्पर ने स्क्रीन की ओर देखते हुए कहा- “इतनी दूरी तक सिग्नल भेजने वाला सिग्नल मॉडुलेटर, कैश्वर के पास आया कहां से?... इसका मतलब है कि अवश्य ही कोई ना कोई और इस समय कैश्वर के साथ है? जिसने उसे यह सिग्नल मॉडुलेटर दिया है...पर कौन?...जब कैश्वर मेरा कहना नहीं मान रहा, तो ऐसा कौन है पृथ्वी पर, जो कैश्वर को भी अपने इशारों पर नचा रहा है? इन सबके पीछे कुछ ना कुछ रहस्य तो अवश्य है? मुझे इसका पता लगाने के लिये, एक बार फिर से अराका पर जाना ही पड़ेगा, पर... पर मेरे गुप्त ऊर्जा द्वार को तो पहले ही कैश्वर बंद कर चुका है, फिर मैं तिलिस्मा के अंदर कैसे प्रविष्ठ हो सकता हूं?...अब मुझे सिर्फ माँ ही इस मुसीबत से बचा सकती हैं.... मुझे माँ को ही याद करना होगा। तुम भी मेरे साथ चल रही हो वारुणि।”

यह कहकर कैस्पर ने अपनी आँख बंद कर ली और वारुणि का हाथ पकड़कर माया को याद करने लगा

“माँ, मैं इस समय एक बहुत बड़ी मुश्किल में हूं, मुझे इस समय आपकी मदद की आवश्यकता है। मुझे अपने पास बुलाइये माँ।”

वारुणि समझ नहीं पा रही थी कि कैस्पर की माँ, किस प्रकार नक्षत्रलोक से उन्हें अपने पास बुलायेंगी, पर उसने कुछ कहा नहीं। वह अब बस आँख बंद किये कैस्पर को देख रही थी।

तभी वारुणि को हवा में एक ऊर्जा द्वार बनता दिखाई दिया। एक पल से भी कम समय में उस ऊर्जा द्वार ने कैस्पर और वारुणि को अपने अंदर खींच लिया।

वारुणि को अपना शरीर हवा में गिरता हुआ सा महसूस हो रहा था, परंतु चारो ओर तेज रोशनी की वजह से उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन ऐसी स्थिति में वारुणि ने कैस्पर का हाथ नहीं छोड़ा था।

कुछ ही देर में रोशनी कम होने लगी। अब वारुणि की आँखें देखने लायक हो गईं थीं।

वारुणि ने स्वयं को इस समय एक ऐसे कमरे में पाया, जिसमें कोई खिड़की नहीं थी, बस एक दरवाजा ही था। कैस्पर उसके बगल खड़ा था।

तभी दरवाजे से एक खूबसूरत स्त्री ने अंदर प्रवेश किया, जिसे देख वारूणि हैरान हो गई।

“आप????” वारुणि के मुंह से माया के लिये सम्मान भरे शब्द निकले- “आप कैस्पर की माँ हैं! आपका चित्र तो मैंने वेदालय में हर स्थान पर लगे देखा था।"

माया ने वारुणि को देख धीरे से अपना सिर हिलाया, पर कुछ कहा नहीं? तभी कैस्पर दौड़कर माया के गले से लग गया।

“क्यों रे, अब तू मैग्ना की जगह इससे विवाह करेगा क्या?" माया की आवाज वातावरण में गूंजी। माया की बात सुन वारुणि शर्मा गई।

“अरे नहीं माँ, ये मेरी बहुत अच्छी दोस्त है बस।"

तभी वारुणि ने आगे बढ़कर माया के चरण स्पर्श कर लिये। माया ने अपना हाथ उठाकर वारुणि को आशीर्वाद दिया- “जा जल्दी ही तुझे विक्रम मिल जाये।"

माया की बात सुनकर वारुणि हैरानी से कैस्पर को देखने लगी थी, क्यों कि अभी उन्होंने माया से विक्रम के बारे में तो कुछ कहा ही नहीं था?

“अरे, इतना हैरान मत हो वारुणि, यह मेरी माँ हैं, यह भूत, भविष्य, वर्तमान सब जानती हैं, इनसे इस पृथ्वी पर कुछ भी छिपा नहीं है?" कैस्पर ने वारुणि से कहा“ बस तुम्हें इनकी आवाज वातावरण में सुनने की आदत डालनी पड़ेगी बस। क्यों कि यह किसी से भी बात नहीं करती हैं।"

“क्या तुम्हें पता है कैस्पर? कि माता ने ही हमारे वेदालय की रचना की थी और यह हमारे महागुरु नीलाभ की पत्नी हैं, इस हिसाब से यह हमारी गुरुमाता हुईं।" वारुणि ने प्रसन्नता से कहा।

माया ने अब कैस्पर और वारुणि को बैठने का इशारा किया।

“अच्छा किया कैस्पर कि तुमने मुझे याद कर लिया, अगर कुछ दिन तक तुम मुझे और याद नहीं करते, तो मैं स्वयं तुम्हें अपने पास बुला लेती।” माया ने कहा- “मुझे पता है कि तुम लोगों के मस्तिष्क में सैकड़ों प्रश्न घूम रहे हैं? इसलिये अब तुम एक-एक कर मुझसे सारे प्रश्न पूछ सकते हो। आज मैं भी बिना घुमाये-फिराये तुम्हें सबकुछ बता दूंगी क्यों कि सभी रहस्यों को खोलने का इससे बेहतर समय अब नहीं आयेगा।

“तो क्या माँ, आप जिस देवयुद्ध का ज़िक्र हमें बचपन से करती आई थीं, उसका समय अब आने वाला है?” कैस्पर ने माया से पूछा।

“हां, कैस्पर। वह देवयुद्ध अब बहुत निकट है। अगर उसे सही से संभाला नहीं गया, तो वह पूरी पृथ्वी का विनाश कर देगा।" माया ने कहा।

“कौन हैं, वह पृथ्वी के विनाशक, जिनके बारे में अभी हमें पता भी नहीं है?" वारुणि ने पूछा।

“वह एक नहीं है, बल्कि बहुत से हैं। कुछ पृथ्वी से सुदूर दूसरी आकाशगंगा से आये हैं, तो कुछ सैकड़ों वर्षों से पृथ्वी पर छिपे, उस विनाश का ताना-बाना बुन रहे हैं। हमारा कार्य उन सभी आसुरी शक्तियों को एक होने से रोकना है। अगर वह सब एक हो गये तो हमारी पृथ्वी का बचना असंभव है।" माया ने गंभीर शब्दों में कहा।

“पर हम उन्हें एक होने से किस प्रकार रोक सकते हैं? हम ना तो उनके बारे में जानते हैं? और ना ही उनकी शक्तियों के बारे में?...फिर इस प्रकार बिना जाने उन्हें रोक पाना असंभव है।" वारुणि ने कहा।

“इसी असंभव कार्य को तो तुम दोनों को संभव बनाना है। और...इसे संभव बनाने के लिये तुम्हें 3 कार्य करने होंगे। पहला कार्य तुम्हें सभी देवशक्ति धारकों को एक स्थान पर एकत्र करके, उन्हें सबकुछ बताकर एक माला में पिरोना होगा। बिना एकता की शक्ति के, तुम यह युद्ध कभी भी जीत नहीं सकते। दूसरा कार्य यह है कि तुम्हें सभी विनाशकों को एक साथ मिलने के पहले ही, एक-एक कर मारना शुरु करना होगा।

“अगर तुम ऐसा करने में सफल हो गये, तो देवयुद्ध से पहले ही हम अपने शत्रुओं की शक्ति को आधा कर सकते हैं। तीसरा कार्य तुम्हें कैसे भी ग्रीक देवताओं को अपनी ओर करना होगा? ये ध्यान रखना कि अगर वो हमारी ओर ना आयें, तो कम से कम हमारे शत्रुओं की ओर से भी युद्ध ना करें। क्यों कि अगर ग्रीक देवी -देवता भी उनकी ओर मिल गये, तब हम अपने शत्रुओं से नहीं जीत पायेंगे। इसके अलावा और कुछ छोटी -मोटी तैयारियां करनी होंगी, जो कि मैं समय-समय पर तुम्हें बताती रहूंगी।"

“पर माँ, इनमें से पहले 2 कार्य तब तक संभव नहीं हैं, जब तक कि हमें जानकारियां ना मिल जायें।" कैस्पर ने कहा।

“तुम जानकारियों की चिंता मत करो, मेरे पास सभी मित्रों और शत्रुओं की पूर्ण जानकारियां हैं।” माया ने यह कहकर अपना हाथ ऊपर की ओर उठाया।

माया के ऐसा करते ही हवा में एक पुस्तक प्रकट हो गई, जो कि हवा में तैरती हुई कैस्पर के हाथ में आ गई। कैस्पर ने उस पुस्तक को देखा, उसका नाम 'देवयुद्ध' था।

“यह पुस्तक मैंने तुम्हारे लिये ही लिखी है कैस्पर।" माया ने कहा- “इस पुस्तक में तुम्हें सभी शत्रुओं और मित्रों की जानकारियां मिल जायेंगी।"

कैस्पर ने उत्सुकतावश 'देवयुद्ध' का एक पृष्ठ खोलकर देखा। उस पृष्ठ पर एंड्रोनिका लिखा था।

“यह एंडोनिका क्या है माँ?” कैस्पर ने माया से पूछा।

"एंड्रोनिका, उस अंतरिक्ष यान का नाम है, जिसे तुम लोग उल्कापिंड समझ रहे हो।" माया ने कहा।

"तो क्या उस उल्कापिंड....म...मेरा मतलब है कि एंड्रोनिका में अंतरिक्ष के जीव भी हैं?” वारुणि ने आश्चर्य से पूछा।

“वही तो हमारे असली शत्रु हैं वारुणि।” माया ने कहा- “पृथ्वी के शत्रुओं को तो नियंत्रित करना सरल है, क्यों कि उन पर हमारी प्रकृति के नियम लागू होते हैं। पर उन दूसरे ग्रह से आये जीवों में, कुछ पर तो हमारी पृथ्वी के प्रकृति के नियम भी लागू नहीं होते, ऐसे में उन्हें मारना बहुत ही मुश्किल है।”

“गुरुमाता, हम इस पुस्तक को तो पढ़ लेंगे, पर मुझे थोड़ा सा और आपसे इन अंतरिक्ष के जीवों के बारे में जानना है? इनके पास ऐसी कौन सी शक्तियां हैं? जिन पर हमारी प्रकृति के नियम ही लागू नहीं होते।” वारुणि ने माया से पूछा।

“ठीक है वारुणि, तो बाकी पूरी जानकारी तुम लोग इस पुस्तक से पढ़ लेना। मैं तुम्हें सिर्फ उस अंतरिक्ष यान के बारे में बता देती हूं। वह अंतरिक्ष यान, हमारी पृथ्वी से 2.5 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर स्थित, फेरोना नामक एक नीले ग्रह से आया है। एंड्रोमेडा नामक इस अंतरिक्ष यान में कुल 15 जीव हैं, जो देखने में पृथ्वी वासियों जैसे ही हैं, बस उनके शरीर का रंग नीला है। यह सभी जीव अपने ग्रह के सबसे ताकतवर जीव हैं। इनका सम्मिलित नाम ‘एंड्रोवर्स पॉवर' है। ‘एंड्रोवर्स पॉवर' में अंग्रेजी के कुल 15 अक्षर होते हैं, जो कि इन सभी 15 जीवों के नाम के प्रथम अक्षर से मिलकर बने हैं।

“इन जीवों में कुल 10 पुरुष जीव हैं, जिन्हें 'एंड्रोवर्स' कहा जाता है। बाकी बचे 5 जीव, महिलाएं हैं, जिन्हें 'पॉवर' कहा जाता है। यानि इन सभी 15 जीवों को मिलाकर ही 'एंड्रोवर्स पॉवर' बनता है। इसमें यह बात ध्यान रखने वाली है कि इन जीवों की महिलाएं आपात स्थिति में ही बाहर निकलती हैं और वह अपने पुरुष जीवों से ज्यादा शक्तिशाली हैं। सभी 10 पुरुष जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः A1 से लेकर A10 तक लिख रखा है और सभी महिला जीवों ने अपनी ड्रेस पर क्रमशः P1 से P5 तक लिख रखा है। मैंने इसके अगले पृष्ठ पर इन सभी के नाम और जानकारियां लिख रखीं हैं।"

माया की बात सुन, कैस्पर ने तुरंत पुस्तक का अगला पन्ना खोलकर देखा, उस पन्ने पर एक लिस्ट थी।

“इनमें से कुछ शक्तियों के बारे में तो हमने सुना तक नहीं है?" वारुणि ने पुस्तक में झांकते हुए कहा- “जैसे कि यह डार्क मैटर क्या है?"

"हमारे ब्रह्मांड में करोड़ों सितारे हैं, जिन्हों ने ब्रह्मांड का बहुत सा हिस्सा घेर रखा है, परंतु हम जब भी ब्रह्मांड को देखते हैं, तो हमें ज्यादातर उसका काला भाग ही दिखाई देता है। ब्रह्मांड का वहीं काला भाग डार्क मैटर कहलाता है। पहले वैज्ञानिकों को इस काले भाग के बारे में कुछ नहीं पता था? उन्हें लगता था कि यह ब्रह्मांड का खाली स्थान है, पर ज्यादा खोज होने के बाद हमें इस डार्क मैटर का पता लगा। यह डार्क मैटर ब्रह्मांड के सभी ग्रहों के बीच संतुलन बनाये रखने का कार्य करता है। अगर साधारण भाषा में समझें, तो हम केवल उसी चीज को देख सकते हैं, जो या तो प्रकाश का उत्सर्जन, अवशोषण या फिर परावर्तित करता हो। परंतु डार्क मैटर इनमें से कुछ भी नहीं करता, इसलिये वह हमें दिखाई नहीं देता। डार्क मैटर, हमारी पृथ्वी की किसी भी प्राकृतिक चीज से प्रभावित नहीं होता? ना ही हवा, ना ही आग, पानी और किसी भी धातु से?" माया ने वारुणि को समझाते हुए कहा।

“अगर डार्क मैटर पर कुछ असर ही नहीं होता, तो ना तो वह हमें मार पायेगा और ना ही हम उसे।” वारुणि ने कहा।

“ऐसा नहीं है वारुणि, डार्क मैटर का द्रव्यमान यानि कि भार, बिल्कुल ना के बराबर होता है, इसलिये वह हमारे जीवन में, हमारे शरीर से पार होने के बाद भी हमारा कुछ नहीं कर पाता, परंतु अगर डार्को ने डार्क मैटर का द्रव्यमान बढ़ाकर हम पर वार किया, तो एक सेकेण्ड से भी कम समय में हमारा पूरा शरीर कणों में बिखरकर हवा में मिल जायेगा।" माया ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा- “तभी तो मैं तुम लोगों को आने वाले खतरे से आगाह कर रही हूं, जिससे तुम लोग समय रहते ही उससे बचाव करने की तकनीक ढूंढ सको।"

“क्या ऐसे खतरनाक डार्क मैटर को किसी भी प्रकार से नियंत्रित किया जा सकता है?" वारुणि तो आज पूर्ण ज्ञान लेने के मूड में थी। ऐसा लग रहा था कि उसे माया के रुप में कोई खजाना मिल गया हो?

"गुरुत्वाकर्षण.....एक वहीं चीज है, जिससे डार्क मैटर आकर्षित होता है अब ये देखना तुम्हारा काम होगा कि तुम्हारे किस मित्र के पास गुरुत्वाकर्षण की शक्ति है और उसे कब और कैसे डार्को के आगे करना है? ये ध्यान रखना कि समय से पहले दिव्यशक्तियों का प्रदर्शन सदैव हानिकारक होता है।" माया ने मुस्कुराते हुए वारुणि को गुरुमंत्र दिया।

अब वारुणि ने उस लिस्ट को देखते हुए फिर से पूछा- “गुरुमाता, यह सामान्य शक्ति क्या है? जो किसी 'रेने' के पास है?"

यह सुनकर माया मुस्कुरा दी- “रेने इस पूरे ग्रुप की कमांडर है, यह एंड्रोनिका से तभी निकलती है, जब सबकी शक्तियां विफल हो जाती हैं दरअसल सच कहें तो रेने के पास कोई शक्ति नहीं है, पर वह अपने सामने किसी भी शक्ति को रहने भी नहीं देती। मतलब अगर वह सामने हो तो किसी भी शत्रु की दिव्य शक्तियां काम नहीं करती हैं और ऐसे में वह सभी आसानी से जीत जाते हैं। बस अब इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं बताने वाली वारुणि? इसके आगे तुम दोनों को स्वयं ही देखना होगा। और हां इसमें से एक जीव एलात्रा 2 दिन पहले मारा जा चुका है।” माया ने सभा का समापन करते हुए कहा।

“एक आखिरी चीज और बता दीजिये कि विक्रम ठीक तो है ना?" वारुणि ने आखिरी सवाल पूछते हुए कहा।

“हां, विक्रम ठीक है और वह तुमसे समय आने पर मिल जायेगा। परंतु धरा और मयूर को इन अंतरिक्ष के जीवों ने बंदी बना लिया है और अब वह एकएक कर बाकी लोगों पर भी हमला करेंगे।" माया ने कहा- “इसलिये तुम लोगों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी और हां अभी तो मैं तुम दोनों को वापस नक्षत्रलोक भेज रही हूं, पर जल्दी ही मैं तुम्हें फिर से वापस बुलाऊंगी और फिर मैं तुम दोनों के साथ ओलंपस पर्वत चलूंगी, इससे पहले कि कोई दूसरी परेशानी बढ़े? हमें ग्रीक देवताओं से एक बार बात करनी ही पड़ेगी।”

यह कहकर माया ने अपना हाथ हिलाया, इसी के साथ कैस्पर और वारुणि, ऊर्जा द्वार से होते हुए पुनः नक्षत्रशाला में पहुंच गये, पर अब उनके चेहरे पर थोड़ी निश्चिंतता के भाव थे।


जारी रहेगा_____✍️
Bhut hi badhiya update Bhai
Maya ne aane vale yudh aur antriksh jeevo ke bare me bhut si jankari di hai
 
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