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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Beautiful update brother! Ye achhi baat hai ki Aryan aur Aakriti ka baccha abhi tak puri tarah se safe hoga, khair Aakriti ko jitna saza milna tha wo mil chuka hai phir bhi usne iss process mein aur kai sare panga le liya hai.
Ye sab pange use bhaari padne wale hain :D Waise Aryan ka beta abhi sakushal hai :shhhh:
Thank you very much for your valuable review and support bhai :thanks:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Bhut hi badhiya update Bhai
Shalaka aur james aryan aur aakriti ke bete ko dhundne ke liye mahakal ki nagari ujjain pahuch gaye hai
Dhekte hai aage kya hota hai
Hona kya hai, wo usko dhoondhne ke liye sabhi hathkande apnayenge, dekhne waali baat ye hogi ki kya wo baalak abhi tak wahi hoga? Kya wo unko milega?:?:
Thanks for your valuable review and support bhai :thanks:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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#189.

भारत में इस समय दोपहर के 4 बज रहे थे। शलाका और जेम्स, आर्केडिया के गुप्त द्वार से बाहर निकले और रुद्र सागर के पानी को चीरते हुए, झील की सतह के ऊपर आ गये।

"आर्ची, मेरे और जेम्स के कपड़े, भारत की परंपरा के हिसाब से कर दो।” शलाका ने झील के बाहर निकलते ही आर्ची को आदेश दिया। शलाका के इतना कहते ही जेम्स और उसके कपडे तुरंत बदल गये।

यह देख जेम्स ने आश्चर्य से पूछा- “क्या आर्ची वहां से कपड़े भी चेंज कर सकती है?"

“आगे-आगे देखते रहो....अभी वह बहुत कुछ कर सकती है।” शलाका ने मुस्कुराकर अपने शरीर पर पहने कपड़े को देखा और फिर महा…लेश्वर मंदिर की ओर बढ़ गई।

इस समय जेम्स और शलाका ने टीशर्ट और जींस पहन रखी थी।

जेम्स के लिये ये सभी कुछ बहुत अनोखा था। उसे तो यह लग रहा था कि शलाका कहीं भी जाने के लिये अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग करेगी, पर जेम्स की सोच से बिल्कुल उल्टा हो रहा था, शलाका पूरी तरह से विज्ञान की शक्तियों का प्रयोग कर रही थी।

शलाका चलते हुए अब मंदि..र के प्रांगण में आ गई। शलाका ने जिस तरह का मं..दिर वेदांत रहस्यम् में देखा था, यह उससे बिल्कुल अलग था। बस देव का शि….वलिंग वहीं था।

इस समय मं..दिर के पट बंद थे। शलाका ने बाहर से हाथ जोड़कर देव का नमन किया और जेम्स को लेकर उस दिशा की ओर चल दी, जिधर उसने, वह लकड़ी का मकान देखा था।

इस समय उस स्थान पर सबकुछ बदला-बदला सा नजर आ रहा था। अब वहां पर बहुत से मकान बन चुके थे, पर शलाका को उस मकान की मंदिर से दूरी और उसका कोण याद था, इसलिये वह बिना कहीं रुके आगे बढ़ रही थी।

अब शलाका एक स्थान पर जाकर रुक गई। उसके सामने एक पक्का और काफी अच्छा मकान बना था।

शलाका ने एक बार फिर पलटकर मं..दिर के प्रांगण को देखा और उस मकान की दूरी और उसके कोण का फिर से अंदाजा लगाया।

अब वह पूरी तरह से संतुष्ट थी कि यह वही मकान है। शलाका जेम्स को लेकर उस मकान के बाहर पहुंच गई।

मकान के बाहर एक नेम प्लेट लगी थी, जिस पर हिंदी भाषा में लिखा था- “शारदा भवन।"

पर जेम्स, उस भाषा को पढ़ नहीं पा रहा था।

“आर्ची, हमें हिंदी भाषा का ज्ञान चाहिये।” शलाका ने आर्ची से कहा।

“भेज दिया, आप चेक कर सकती हैं।” आर्ची ने बिना देर लगाये शलाका और जेम्स के दिमाग में हिंदी भाषा का ज्ञान डाल दिया।

आर्ची के हर एक कार्य पर जेम्स हैरान हो रहा था। अब जेम्स की नजर दोबारा से नेम प्लेट पर गई, पर अब वह साफ-साफ हिंदी भाषा को पढ़ ले रहा था।

अब शलाका ने उस घर पर लगी घंटी पर अपनी उंगली रख दी। अंदर कहीं एक मधुर स्वरलहरी गूंजी।

कुछ देर के बाद एक लगभग 35 वर्षीय महिला ने दरवाजा खोला।
अपने सामने कुछ अजनबियों को देख, उसने पूछ लिया- "कौन हैं आप लोग और आपको किससे मिलना है?"

“जी, हमें इस घर के बारे में कुछ पूछना है? क्या हम अंदर आ सकते हैं?” शलाका ने बिल्कुल साफ हिंदी बोलते हुए कहा।

वह महिला एक विदेशी को इतनी साफ हिंदी बोलते देख खुश हो गई और उन्हें अंदर आने का इशारा किया।

शलाका और जेम्स घर के अंदर आ गये। घर अंदर से काफी सजा हुआ था। उस महिला ने दोनों को सोफे पर बैठने का इशारा किया और स्वयं सामने वाले सोफे पर बैठ गई।

“जी अब बताइये कि आप क्या कह रहीं थीं?” उस महिला ने शलाका से पूछा।

“जी क्षमा चाहती हूं, पर मैं कुछ भी बोलने से पहले आपका परिचय जानना चाहती हूं।” शलाका ने विनम्र शब्दों में निवेदन करते हुए पूछा।

"मेरा नाम शारदा है, मैं ही इस घर की मालकिन हूं।" शारदा ने कहा।

"शारदा जी आज से 30 वर्ष पहले इस मकान में हमारे पिताजी रहते थे। उन्हों ने अपना कुछ सामान, इस घर के तहखाने में रखा था, जिसका पता हमें कुछ दिनों पहले चला है, इसलिये हम यहां आये हैं।” शलाका ने साफ झूठ बोलते हुए कहा।

“जी, पर हमने तो यह मकान, सिर्फ 9 वर्ष पहले ही खरीदा है और इसमें कोई भी तहखाना नहीं है। इसके पहले तो इस मकान में शर्मा जी रहते थे, जो कि अपना सब कुछ बेचकर यहां से हमेशा-हमेशा के लिये अमेरिका चले गये।” शारदा ने कहा- “पर क्या मैं पूछ सकती हूं कि ऐसा क्या था यहां? जिसे आप 30 वर्ष बाद ढूंढने यहां आये हैं?”

“जी, वह काँच का एक अष्टकोण था, जो कि हमारे पिता की आखिरी निशानी था।” शलाका ने अभिनय करते हुए कहा- “पर अब तो उसका मिलना बिल्कुल असंभव ही है।"

शलाका का चेहरा रोने वाले अंदाज में बन गया, जिसे देख शारदा बोल उठी- “आप परेशान मत होइये, मैं आपको शर्मा जी का पता और फोन नंबर दे देती हूं। आप एक बार उनसे पूछ कर देख लीजिये, हो सकता है कि उन्हें कुछ पता हो उस अष्टकोण के बारे में?"

“ठीक है, आप उनका ही पता दे दीजिये, मैं उनसे मिलकर पूछ लूंगी।” शलाका ने खड़े होते हुए कहा" वैसे क्या मैं आपका अंदर वाला कमरा, एक बार देख सकती हूं?"

"हां पर इतने वर्षों के बाद अब उस कमरे में क्या मिलेगा आपको?" शारदा ने आश्चर्य से शलाका को देखते हुए कहा।

"मेरी माँ की यादें...वह उसी कमरे में रहती थीं।" अब तो शलाका ने झूठ बोलने की हद ही कर दी।

जेम्स, शलाका के अद्वितीय अभिनय को देख मन ही मन मुस्कुरा रहा था, पर वह अब भी सबके सामने अपने भावों को सामान्य किये शांति से बैठा था।

“जी हां आप अंदर वाला कमरा देख सकती हैं।” शारदा ने शलाका को अंदर जाने की इजाजत दे दी और उठकर स्वयं भी शलाका के साथ चलने लगीं।

एक सेकेण्ड से भी कम समय में, शलाका ने जेम्स को गहरे अंदाज में देखा।

जेम्स समझ गया कि शलाका नहीं चाहती कि शारदा उसके पीछे-पीछे उस कमरे में जाये, इसलिये वह तुरंत बोल उठा- “आप घर में अकेली ही रहती हैं क्या? मेरा मतलब है कि भाई साहब कहां काम करते हैं?" जेम्स को बोलता देख शारदा वापस से सोफे पर बैठ गई।

“मेरे पति का कपड़ों का व्यापार है, वह इस सिलसिले में अक्सर बाहर ही रहते हैं, इसलिये पूरा घर मुझे ही संभालना पड़ता है।"

शलाका, शारदा को बातों में फंसा देखकर तुरंत अंदर के कमरे में पहुंच गई। शलाका ने उस कमरे के कोण को देख महसूस कर लिया कि यह वही कमरा था, जिसमें उसने आर्यन को उस दिव्य बालक को छिपाते हुए देखा था।

“आर्ची, तुरंत मेरी आँखों में पृथ्वी से धातु ढूंढने वाला स्कैनर डालो।” शलाका ने आर्ची से कहा।

आर्ची ने तुरंत शलाका की आँख में स्कैनर डाल दिया। अब शलाका तेजी से पूरे कमरे की जमीन को स्कैन करके, उसके नीचे देखने लगी।

पर पूरे कमरे को स्कैन करने के बाद भी उसे जमीन में किसी प्रकार का धातु का कोई टुकड़ा नहीं दिखाई दिया।

“यहां पर अमरत्व की धातु वाली शीशी नहीं है, इसका साफ मतलब है कि किसी ने उस अष्टकोण से उस दिव्य बालक को निकाल लिया है?...अब...अब तो...शारदा से नंबर लेकर, एक बार शर्मा से भी बात करनी होगी, हो सकता है कि उसे अष्टकोण का पता हो?" यह सोच शलाका ने अपने चेहरे पर फिर से रोने वाले भाव लाये और वापस जेम्स के पास आ गई।

"अच्छा शारदा जी, आप वो शर्मा जी का पता और नंबर दे दीजिये....मैं एक बार उनसे बात करके भी देख लेती हूं।” शलाका ने शारदा की ओर देखते हुए कहा "वैसे शर्मा जी के घर में कौन-कौन है?"

"कौन...कौन....क्या? बस 3 ही लोग हैं उनके परिवार में शर्मा जी, उनकी पत्नि गायत्री और उनका बेटा देवोम।" शारदा ने पास की टेबल पर रखी अपनी डायरी उठाई और उसके पन्ने पलटकर शर्मा जी का नंबर ढूंढने लगी।

"उनके और बच्चे नहीं हैं क्या?" जेम्स ने शारदा को देखते हुए पूछा।

"और बच्चे?....अरे 50 वर्ष की उम्र में तो उन्हें बेटा हुआ था...अब उसके बाद और बच्चे कहां से आते?" शारदा ने एक पन्ने पर शर्मा जी का पता लिखते हुए कहा।

शारदा की बात सुन, इस बार शलाका का माथा ठनका।

"इस उम्र में बेटा?” शलाका ने आश्चर्यचकित होने का अभिनय किया।

"हां...कुछ लोग तो कहते हैं कि उनके बुढ़ापे को देख ईश्वर ने ही उनकी सुन ली...पर जो भी कहो....देवोम है बहुत कमाल का? बिल्कुल देवताओं सा तेज है उसके चेहरे पर इसीलिये तो शर्मा जी ने उसका नाम देवोम रखा था।...किसी ने सही कहा है, ईश्वर की माया अपरम्पार है।"

यह कहकर शारदा ने एक कागज शलाका की ओर बढ़ दिया, इस कागज में लिखा था “महेन्द्र शर्मा, 127B, 6 स्ट्रीट, मैनहट्टन, न्यूयार्क, अमेरिका” इसके बाद एक फोन नंबर दिया हुआ था।

"जी आपके सहयोग के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद।” यह कहकर, शलाका ने वह कागज का टुकड़ा शारदा से ले लिया और जेम्स के साथ बाहर की ओर निकल गई।

जाने क्यों शलाका को विश्वास हो चला था कि देवोम ही वह दिव्य बालक है? अब वह तेजी से वापस रुद्र सागर की ओर चल दी।

“क्या अब हम न्यूयार्क जायेंगे?" जेम्स ने शलाका से पूछा।

“हां ! हम न्यूयार्क जायेंगे, पर अभी नहीं। अभी मुझे कुछ और काम निपटाने हैं। इसलिये पहले हमें वापस अंटार्कटिका चलना होगा।” शलाका ने अपना सिर हिलाते हुए कहा- “वैसे जब तक मैं उस दिव्य बालक को ढूंढ नहीं लेती, तब तक मुझे शांति नहीं मिलेगी?"

“शलाका !" जेम्स ने एक जगह रुकते हुए कहा “आप तो देवी हो। हो सकता है कि आपको भूख ना लगती हो?"

जेम्स की बात सुन शलाका एक झटके से रुकी और पलटकर जेम्स को देखने लगी। फिर मुस्कुराकर, एक पास वाले रेस्टोरेंट की ओर बढ़ गई।

जेम्स भी मुस्कुराकर शलाका के पीछे चल दिया।

जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है सुयश के टैटू का तो राज खुल गया लेकिन एक और राज सामने आ गया सबकी हैप्पी न्यू ईयर की जगह bad न्यू ईयर हो गई शैफाली के पास एक सिक्का मिला है वह शैफाली के पास कौन व क्यों रख के गया है जिसका पता किसी को भी नहीं है अल्बर्ट के हिसाब से यह सिक्का अटलांटिस सभ्यता का है ये सच हो सकता है और शैफाली का उनके साथ कुछ तो संबंध हो सकता है???

James aur Wilmar ne Shalaka👸 aur uske bhaiyo 🦸‍♂️🦹‍♂️🦸‍♂️🦹‍♂️🦸‍♂️🦹‍♂️ 🦸‍♂️ ko jagaa diya. Lekin inaam ki jagah unhe sunehri qaid mili.. 😏

Yeha Mayavan mei ab Nayantara 🤩 ka kya mamla hai yaar.. bahut suspense hai yaar..
:cool3:

Nahi bhai esa nahi hai
Wo kya hai na is bar ki pehli holi Sasural me manaee bahut he ache se pocho mat bahut enjoy kia maine bhai kya batao bs busy tha usme he

Badhiya update bhai

To Toffik hi tha jisne sab kiya tha lekin loren ko kyun mar diya usne wo to usse pyar karta tha na or bechari loren bhi uske pyar me andhi hoker uski baten man rahi thi or jis jenith se badla lena chahta tha use abhi tak jinda rakha ha usne usse pyar ka natak karta ja raha ha Jenith ki sab sachhai pata pad gayi ha dekhte han kab tak Toffik babu apni sachhai chhupa pate han waise bure karm ki saja milti hi ha or jis jagah ye sab han usse lagta ha jaise Aslam miya ko saja mili usi prakar Toffik ka bhi number lag sakta ha

बहुत ही सुंदर लाजवाब और अद्भुत मनमोहक अपडेट हैं भाई मजा आ गया
ये नक्षत्रा ने जेनिथ के सामने तौफिक की पुरी सच्चाई लाकर रख दी
बडा ही जबरदस्त अपडेट
खैर देखते हैं आगे क्या होता है

Nice update.....

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Nice update....

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

अदभुद अकल्पनीय इससे अधिक शब्द नहीं हैं व्याख्यान के लिए

राज भाई
सेक्स नहीं कहानी पढ़ने का शौक रहा है मेरा हमेशा से
सेक्स पढ़ने देखने की जरूरत सिर्फ कुछ नया, अनोखा, अलग जानने के लिए समझता हूं
आनन्द या मनोरंजन सेक्स लिखने, पढ़ने, सुनने या देखने से नहीं 'करने' में ही होता है

Awesome update and nice story.

फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया

शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

मजेदार अपडेट, कहानी ने दिलचस्प मोड ले लिया। मर्डर मिस्ट्री से बरमूडा ट्रेंगल की और। हम्ममम🤔🤔

Waah.. nihaal kar diya guru 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

बहुत ही शानदार अपडेट है !

रिव्यू की शुरुआत की जाए

नए अध्याय का प्रारंभ हो चुका हैं युद्ध का बिगुल बज चुका हैं , जिस तरह युद्ध की झलकियां दिखाई हैं वे साबित करते हैं आगे हमें क्या देखना को मिलेगा।

मतलब सिर्फ एंडोर्स ग्रह के १० लोग भिड़ने आए हैं , अटका वासियों से, फिर भी इतनी तबाहि , भला हो सूर्यवर्या की शुभार्जुन का जिसने इस युद्ध में थोड़ा समय मांग लिया।

अब सबसे पहले मुझे ये बताओ सुनेरा लड़की हैं या लड़का क्योंकि कभी लगता हैं ये लड़की है तो कभी लड़का लगता है

जब शक्ति का वर्णन हो रहा था तब इनका जिक्र क्यों नहीं हुआ क्योंकि मैने पुराना अपडेट पढ़ा है। इसे तो लगता है ये दोनो शक्तियों उन पंद्रह शक्ति में से हैं।

अब मुझे नही पता इतना बड़ा लूपहोल कैसे भरेगा। पर करना तो पड़ेगा वर्ना कन्फ्यूजन होगा ।

अब समझा आगया है , की रॉजर जिंदा कैसे हुआ, वो शुभर्जुना का जादू था।

मेगा लाइट के गुस्से वाला अवतार तो खतरनाक था, वैसे ये जिंदा मारने के खेल कब तक चालू रखोगे , एक समय लगा कि युद्ध में पहले बलि आगाई, लेकिन हम गलत थे।


वैसे जैसा शुभार्जुन के बारे में पढ़ा हैं लगता है इसका प्रयोग पहले बार हुआ है और आगे चल कर २ बार हम किसी को भी जीवित कर सकते है ।

अब मार्कोटा ने युद्ध चालू कर कर कही न कही मुसीबत मोल लेली है, ये एंडोर्स वाले किसी को नहीं छोड़ने वाले अब तो और ताकतवर होकर आयेंगे क्यूंकि इनके महाबली योद्धा को परास्त किया है

इस अपडेट से ये भी लगता है कहानी के समाप्ति की और एक कदम बढ़ चुका है

कुलमिलाकर शानदार अपडेट आगे की प्रतीक्षा
Raj_sharma

Shaandar update

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प्रिय राज भाई Raj_sharma - बहुत दिनों से आपकी कहानी न पढ़ने और न कोई प्रतिक्रिया देने के लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।
और इस बात का कोई बहाना ही नहीं है। सच कहूँ - अब इस फोरम पर आने का मन ही नहीं होता। बस एक दो पिक्चर थ्रेड पर जाता हूँ, कभी कभार कमेंट करता हूँ - बस! और भी कम समय इसलिए भी मिल पाता है क्योंकि अब मैं एक नॉवेल लिख रहा हूँ, पब्लिशिंग के लिए। उधर बहुत व्यस्त हूँ - और अपना व्यावसायिक काम तो पूरा है ही!
अगले सप्ताह अवसर देख कर पुनः जुड़ता हूँ आपसे।

Trinetra gajab update tha Bhai aur nakhstra ka kuch to locha h, khair dekhte h aage kya hota h

Bahut hi zabardast update he Raj_sharma Bhai

Ab shalaka aur jems Ujjain Baba Mahakal ke pass aa rahe he.......

Aaryan aur Aakriti ke bete ko dhundhna he ab in dono ko............

Agali update ki pratiksha rahegi Bhai

Keep rocking

:congrats: For completed 700 pages on your story thread....

romanchak update. ye shalaka ke room me kaun aa gaya tha,jisne uske liye ek painting banayi .
ujjain me pahuch gaye palak jhapakte hi aur ab aryan ke ladke ko dhundne me koi samasya aayegi ya nahi dekhte hai .

nice update


intezaar rahega....

Update bohut achha laga specially last main jo Jack aur Johny wala
Aur Alex ne sidhe jalke Cristy ko dinner ke liye bol raha hai

Beautiful update brother! Ye achhi baat hai ki Aryan aur Aakriti ka baccha abhi tak puri tarah se safe hoga, khair Aakriti ko jitna saza milna tha wo mil chuka hai phir bhi usne iss process mein aur kai sare panga le liya hai.

Bhut hi badhiya update Bhai
Shalaka aur james aryan aur aakriti ke bete ko dhundne ke liye mahakal ki nagari ujjain pahuch gaye hai
Dhekte hai aage kya hota hai

Update posted friends :declare:
 

H E Y W I Z Z A R D

Devil 😈 calls me DAD
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63
#4
चैपटर-2
23 दि सम्बर 2001, रविवार, 22:30; “सुप्रीम”

कैप्टन सुयश को वायरलेस रूम में प्रवेश करते देख, ऑपरेटर ने ईयरपीस कान से हटाकर, अपनी कुर्सी से खड़ा हो गया ।

“कैप्टन! आपके लिए न्यूयॉर्क बंदरगाह से कोई मैसेज है।“ ऑपरेटर ने कैप्टन सुयश को देखते हुए कहा । कैप्टेन सुयश तुरंत ऑपरेटिंग कुर्सी पर बैठते हुए, ऑपरेटर से ईयरपीस लेकर अपने कानों पर चढ़ा लिया ।

“हैलो -हैलो ! सुप्रीम कॉलिंग डेल्टास्टार।“ कैप्टेन सुयश ने कहा ।

“डेल्टास्टार कॉलिंग सुप्रीम।“ इयरपीस पर उधर से आती हुई एक महीन सी आवाज सुनाई दी-

“हम आपकी आवाज सुन रहे हैं। क्या आप कैप्टन सुयश बोल रहे हैं? ओवर!“

“यस! मैं सुप्रीम से कैप्टन सुयश बोल रहा हूं। ओवर!“

“कैप्टेन! मैं न्यूयॉर्क के बंदरगाह से बोल रहा हूं। अभी-अभी हमें इंटरपोल द्वारा विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है, कि आपके शिप पर कुछ खतरनाक अपराधी भी सफर कर रहे हैं। उनके पास खतरनाक हथियार भी हो सकते हैं। इसलिए इंटरपोल ने हमें तुरंत आपको यह मैसेज भेजने के लिए कहा है। ओवर!“

“खतरनाक अपराधी !“ कैप्टेन सुयश आश्चर्य से भर उठा- “वो भी खतरनाक हथियार के साथ। कैप्टन सुयश ने 1 सेकेंड रुक कर फिर कहा-

“क्या आप हमें बता सकते हैं? कि वह संख्या में कितने हैं? या वह दिखने में कैसे हैं? या फिर कोई उनकी ऐसी पहचान, जो उन को पकड़वाने में मदद कर सके? ओवर!“

“हमें अभी तक इस तरह की कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी है।“ उधर से आवाज आयी- “वो एक से लेकर दस तक की संख्या में भी हो सकते हैं। वह आदमी या औरत में भी हो सकते हैं। ओवर!“

“तो फिर हम इतनी भीड़ में उन्हें पहचानेंगे कैसे?“ कैप्टन सुयश ने व्यग्र स्वर में कहा- “ओवर!“

“हमें तो जितना पता था, उतना हमने बता दिया। आगे जैसे ही हमें इंटरपोल से कोई अन्य मैसेज मिलेगा, हम आपको जरूर बताएंगे। आगे हम इतना ही कह सकते हैं, कि यदि आप उन्हें पहचान कर पकड़ने में कामयाब हो जाते हैं, तो फिर अगले स्टॉपेज पर उन्हें इंटरपोल के हवाले कर दीजिएगा ।“ कुछ क्षण रुककर उधर से पुनः आवाज आई-

“आपको और कोई सवाल पूछना है? ओवर!“

“नहीं ! ओवर एण्ड आउट।“ इतना कहकर कैप्टन सुयश ने संबंध विच्छेद कर दिया । तभी पास में खड़े असिस्टेंट कैप्टन रोजर, जोनाजा ने कब आकर पीछे खड़ा हो गया था, और इतनी देर से उनकी आधी अधूरी बातें सुन रहा था, उसने पूछ लिया -

“क्या बात है कैप्टन? आप कुछ परेशान से दिख रहें हैं। क्या बात हुई? सब ठीक तो है ना ?“ कैप्टन सुयश ने रोजर की बात अनसुनी कर, वायरलेस रूम से बाहर निकलते हुए कहा-

“सिक्योरिटी इंचार्ज लारा को लेकर तुरंत मेरे केबिन में आओ रोजर।“

23 दिसम्बर 2001, रविवार, 23:15; “सुप्रीम”

इस समय असिस्टेंट कैप्टन रोजर व सिक्योरिटी इंचार्ज लारा, दोनों ही कैप्टन सुयश के सामने बैठे थे।

“मैं आप लोगों से वायरलेस पर हुई सारी बातें बता चुका हूं।“ सुयश ने चिंतित स्वर में रोजर व लारा की तरफ देखते हुए कहा- “अब आप ही बताइए, कि इतने बड़े शिप पर अपराधियों को कैसे ढूंढा जा सकता है?“

कुछ क्षणों के लिए तीनों के बीच सन्नाटा छा गया। इस लंबे खिंच रहे सन्नाटे को तोड़ा , रोजर की आवाज ने-

“कैप्टन! सबसे पहले हमें अपराधी को पहचानने के लिए, कोई प्लान बनाना होगा । क्यों कि ऐसे तो शिप में कुल 2700 यात्री सफर कर रहे हैं। अब इसमें से किसी विशेष व्यक्ति की पहचान कर पाना बिल्कुल असंभव है। और वह भी तब जबकि हमें उसके बारे में कुछ ना पता हो।“

“यही तो मैं भी कहना चाहता हूं।“ सुयश ने चिंतित स्वर में उठकर चहल कदमी करते हुए कहा -

“पर, प्लान क्या बनाएं?“ पुनः कमरे में एक तीव्र सन्नाटा व्याप्त हो गया। घड़ी की सुईयों की तरह टक-टक करता हुआ, सभी का दिमाग तेजी से चल रहा था। पुनः रोजर की आवाज ने सन्नाटे को तोड़ा-


“कैप्टन! सबसे पहले हमें यह पता लगाना होगा कि अपराधियों की संख्या कितनी है?“

“मैं कहता हूं कि अपराधियों की संख्या 5 है।“ लारा ने रोजर को देखते हुए कहा- “लेकिन इससे क्या फर्क पड़ता है। सबसे बड़ी प्रॉब्लम तो अपराधी का पता लगाने की है, ना कि उनकी संख्या जानने की।“

“फर्क पड़ता है।“ रोजर ने अपने शब्दों पर जोर देते हुए कहा- “क्यों कि, यदि अपराधी ज्यादा संख्या में है, तो वह सारे एक जगह पर कमरे नहीं लिए होंगे। और ना ही वह ग्रुप में बैठते होंगे।“

“क्या कहना चाहते हैं आप?“ सुयश ने रोजर की ओर देखते हुए कहा ।

“कहने का मतलब यह है कैप्टन कि सबसे पहले इतने बड़े शिप में हमें ग्रुप बनाने होंगे। कि कौन सा व्यक्ति अपराधी हो सकता है? और कौन नहीं । ग्रुप से मेरा मतलब यह है, कि यदि कोई आदमी अपने बच्चों के साथ सफर कर रहा है। तो हमारी समझ से वह अपराधी नहीं हो सकता। इसलिए उसे हम अपने ग्रुप से बाहर कर देंगे और हम उसे नहीं चेक करेंगे।“

“वेरी गुड!“ सुयश ने रोजर की तारीफ करते हुए कहा- “अच्छा, अब हमने उन आदमियों को अपने ग्रुप से बाहर करना है, जो ग्रुप बना कर बैठते हैं, क्यों कि अपराधी कभी ग्रुप में नहीं बैठेगा।“

“बिल्कुल ठीक कैप्टन।“ रोजर खुशी से बोला- “यही तो मैं कहना चाह रहा था। अब हम बिल्कुल सही लाइन पर बढ़ रहे हैं।“

“जिनके साथ बूढ़ी महिलाएं हैं, गौरतलब है सिर्फ बूढ़ी महिलाएं।“ लारा ने महिला शब्द पर ज्यादा जोर देते हुए कहा-

“क्यों कि बूढ़ा आदमी तो अपराधी हो सकता है, पर बूढ़ी महिला नहीं। ऐसे लोगों को भी हमें अपने ग्रुप से बाहर कर देंगे।“

“अब हमें कोई ऐसी निशानी ढूंढनी है, जो साधारण आदमी में तो आसानी से ना मिलती हो पर हर अपराधी में पाई जाती हो।“ सुयश ने दिमाग पर जोर डालते हुए, रोजर व लारा की तरफ देखते हुए कहा। एक बार फिर केबिन में सन्नाटा छा गया । सभी अपने-अपने दिमाग का पूरा इस्तेमाल कर रहे थे। पुनः रोजर ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दिया-

“सर! सारे अपराधी हथियार चलाना जानते हैं। पर सारे यात्री हथियार नहीं चला सकते।“

“मार्वलश!“ सुयश की आंखों में यकायक जैसे हजार वाट का बल्ब जल गया हो। लारा की आंखों में भी रोजर के लिए प्रशंसा के भाव थे।

“लेकिन सर!“ लारा के शब्दों में व्यग्रता झलक रही थी-

“यह कैसे पता करेंगे? कि कौन सा यात्री हथियार चला लेता है? और कौन नहीं ?“

“यह पता करना तो बहुत आसान है।“ सुयश ने लारा को देखते हुए कहा-

“हम शिप पर एक निशाने बाजी की प्रतियोगिता रखेंगे। सभी लोगों से यह कह दिया जाएगा, कि यह मात्र मनोरंजन के लिए है। जिसको-जिसको निशानेबाजी का शौक है। वह हमारी इस प्रतियोगिता में भाग ले सकता है। और मेरा यह दावा है कि जो भी अपराधी शिप में है, वह इस प्रतियोगिता में भाग अवश्य लेगा। लेकिन परेशानी यह है, कि अगर वह पूछेंगे कि यह प्रतियोगिता किस उपलक्ष में की जा रही है, तो उन्हें हम क्या जवाब देंगे।“

“तो इसमें सोचने वाली क्या बात है?“ लारा ने कहा- “आज 23 दिसंबर है। आज से ठीक 2 दिन बाद क्रिसमस का त्यौहार है। सभी लोग उसकी पार्टी तो मनाएंगे ही .... इसी में हम प्रतियोगिता भी करा देंगे।“

“तो बिल्कुल फाइनल रहा।“ सुयश ने ’थम्बस-अप’ की स्टाइल में अपनी मुट्ठी को बंद कर, अंगूठा ऊपर करते हुए, जोरदार झटके से हाथ हिलाया-

“कल मैं सभी लोगों को यह अनाउंस कर दूंगा। और हां लारा तुम अपनी सिक्योरिटी के सभी आदमियों को अलर्ट कर दो कि वह सभी यात्रियों पर कड़ी नजर रखें।“

इतना कहकर सुयश ने अपनी इस छोटी सी मीटिंग का समापन किया। रोजर व लारा भी चुपचाप कमरे से निकल गए।





जारी रहेगा…….... :writing:
Nice update 🙂
Kya Captain Suyash un apradhiyon ko pakad payenge ?
 

H E Y W I Z Z A R D

Devil 😈 calls me DAD
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#5

24 दिसम्बर 2001, सोमवार, 09:30; “सुप्रीम”

आज सुबह से ही शिप का डेक, पूरी तरह भर गया था । मौसम आज भी साफ था । सूर्य की स्निग्ध सी किरणें समुद्र की लहरों से टकरा कर, एक अजीब सी चमक उत्पन्न कर रहीं थीं । सुप्रीम पूरे जोश से
समुद्र का सीना चीरता हुआ, अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था । प्रोफेसर अलबर्ट, अपनी पत्नि मारिया के साथ एक एकांत जगह ढूंढकर आराम से बैठे थे।

“कितना अच्छा लग रहा है ना मारिया।“ अलबर्ट ने सुनहली धूप पर एक नजर डालते हुए कहा -

“शहर की चीख-पुकार से भरी जिंदगी से दूर, अकेले तन्हाई में बैठना। ना कोई काम करने की टेंशन, न ही पैसे के पीछे भागने वाली जिंदगी। सभी कुछ सुकून से भरा हुआ।“

“सही कह रहे हैं आप।“ मारिया ने भी अलबर्ट की हां में हां मिलाई-

“आपका दिन-रात अपने शोध के पीछे इस तरह भागना । हमें तो बात करने का भी समय नहीं मिल पाता था । अब तो आज को देखकर बस दिल यही कहता है, कि यहीं कहीं आस-पास किसी सुनसान द्वीप पर चल कर रहा जाए। जहां पर हमारे और आपके सिवा और कोई इंसान ना हो।“

“सच! आज जिंदगी को देखकर यह लगता है कि मैंने अपने पूरे जीवन में
आखिर क्या हासिल कर लिया ?“ अलबर्ट ने खड़े होते हुए, एक लंबी सांस लेते हुए कहा-

“जवानी से आज तक भागता रहा,..... भागता रहा...... सिर्फ भागता रहा। किस चीज के पीछे ......पता नहीं ?.....क्या पाया? ...........मालूम नहीं। क्या यही जिंदगी थी ?“

थोड़ी देर रुक कर अलबर्ट ने मारिया को सूनी आंखों में झांकते हुए, पुनः कहना शुरू किया-

“आज हमारी शादी को लगभग 40 साल होने वाले हैं। लेकिन आज तक मैं तुम्हें कुछ नहीं दे पाया। यहां तक कि वक्त भी नहीं।“
बोलते-बोलते अलबर्ट इतना भावुक हो गया, कि उसकी आंखों की दोनों कोरों में पानी आ गया। फिर वह धीरे से चलकर मारिया के पास आया और उसकी तरफ अपना दाहिना हाथ बढ़ा दिया। मारिया ने भी अपना दांया हाथ उठाकर अलबर्ट के हाथ पर रख दिया अलबर्ट के थोड़ा सहारा देते ही, मारिया उठकर खड़ी हो गई। अलबर्ट ने उसका हाथ, इस तरह से थाम लिया, मानो अब वह पूरी जिंदगी इसे ना छोड़ने वाला हो। धीरे-धीरे चलते हुए दोनों डेक की रेलिंग तक पहुंच गये। दोनों ही शांत भाव से इस तरह से सागर को निहार रहे थे। मानो वह इनकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव हो।


“अब तुम बिल्कुल फिक्र ना करना मारिया।“ अलबर्ट ने खामोशी तोड़ते हुए कहा-

“आज से मैं दिन-रात तुम्हारे साथ रहूंगा। तुम जो कहोगी, मैं वही करूंगा। अब तो मौत ही हम दोनों को जुदा कर पायेगी।“

“इन बातों और इन लहरों को देखकर तुम्हें कुछ याद नहीं आता अलबर्ट।“ मारिया ने अलबर्ट को बीते दिनों की याद दिला ते हुए कहा। अलबर्ट ने सोचनीय मुद्रा में दिमाग पर जोर डाला। पर उसे कुछ समझ नहीं आया कि मारिया किस बात को याद दिलाने की कोशिश कर रही है। अन्ततः उसने सिर हिलाकर पूछा-

“क्या ?“

“हम लोग लगभग 40 साल पहले एक ऐसे ही शिप पर पहली बार मिले थे और उसके कुछ दिनों बाद, तुमने मुझसे यही शब्द बोले थे कि’ अब मौत ही हम दोनों को जुदा कर पायेगी’ और उसके कुछ दिनों बाद हम लोगों ने शादी भी कर ली थी।“

“वह दिन तो कुछ और ही थे।“ अलबर्ट भी शायद अतीत के कोने में चला गया-

“तब तो मैं कॉलेज में दोस्तों के साथ शायरी भी लिखा करता था। और........और तुम्हें वो शायरी याद है, जो मैंने तुम्हें पहली बार लिखकर सुनाई थी।“

एकदम से अलबर्ट बीते दिनों को याद कर खुशी से झूम उठा। उसे एकदम से लगने लगा, कि वह फिर से जवान हो गया। लेकिन इससे पहले कि वह किसी कालेज ब्वाय की तरह शायरों के अंदाज में शायरी कर पाता, माइकल को उधर आते देखकर, सामान्य हो गया। अलबर्ट
की इस स्टाइल पर मारिया को इतनी तेज हंसी आई कि हंसते-हंसते उसका बुरा हाल हो गया।

“क्या बात है अलबर्ट सर! मैडम बहुत तेज हंस रहीं हैं? क्या हो गया ?“ माइकल ने आते ही पूछ लिया।

“कुछ नहीं बेटे ! कुछ पुरानी बातें याद आ गई थीं।“ अलबर्ट ने जवाब दिया-

“उन्हें छोड़ो, अपनी सुनाओ, आजकल क्या चल रहा है?“

“फिलहाल सिडनी वापस जा रहा हूं सर। .......“ बोलते-बोलते रुक कर
माइकल ने हवा में हाथ मिलाया जो कि एक इशारा था, दूर खड़े शैफाली व मारथा को उधर बुलाने का।

“अच्छा ! यही है तुम्हारा परिवार।“ अलबर्ट ने मारथा व शैफाली पर नजर डालते हुए कहा-

“और ये है तुम्हारी बच्ची शैफाली। जिसके बारे में अक्सर तुम मिलने पर मुझे बताया करते थे।“ तब तक दोनों नजदीक आ गए थे। मारथा ने सिर झुका कर बारी-बारी से अलबर्ट व मारिया को अभिवादन किया।
आते ही शैफाली ने अंदाजे से अलबर्ट की ओर हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा-

“हैलो ग्रैंड अंकल!“

“ग्रैंड अंकल........।“ अलबर्ट यह शब्द सुन आश्चर्य से भर उठा- ये ग्रैंड अंकल क्या होता है बेटे ? ग्रैंड फादर तो सुना है, पर यह ग्रैंड अंकल.....।“

“मैं तो आपको ग्रैंड अंकल ही बोलूंगी। क्यों कि डैड के जितने दोस्त आते हैं वह मेरे अंकल हुए। तो आप तो मेरे डैड के भी सर हो और ग्रैंड भी। इसलिए मैं आपको ग्रैंड अंकल ही बोलूंगी।“ शैफाली नें तर्क देते हुए कहा।

“अच्छा-अच्छा ठीक है। तुम मुझे ग्रैंड अंकल ही कहना।“ अलबर्ट ने सिर हिलाते हुए कहा।

“तुमने जैसा इसके बारे में बताया था।“ अलबर्ट ने माइकल से मुखातिब होकर कहा- “यह ठीक वैसी ही है।“

तभी शैफाली ने दोनों को बीच में टोकते हुए कहा- “ग्रैंड अंकल आप के बाएं कंधे पर एक चींटी चल रही है, उसे हटा लीजिए।“

“व्हाट! अलबर्ट ने आश्चर्य से पहले शैफाली की तरफ देखा। फिर अपने बाएं कंधे पर, जिस पर वास्तव में एक चींटी चल रही थी। उसने चींटी को कंधे से झाड़ कर दोबारा शैफाली की ओर देखा -

“बेटे तुम्हें तो दिखा ई नहीं देता। फिर तुमने कैसे जाना कि मेरे बाएं कंधे पर चींटी चल रही है?“ अलबर्ट ने विस्मय से शैफाली की तरफ देखते हुए कहा।

“अरे ग्रैंड अंकल! आपने कभी चींटियों को एक कतार में चलते देखा है।“ शैफाली ने अलबर्ट से उल्टा सवाल कर दिया-

“अगर हां ! तो आप यह बताइए कि वह एक कतार में क्यों चलती हैं?“

“सभी चींटियां ‘फेरोमोंस‘ नामक एक विशेष प्रकार की गंध छोड़ती हैं।“ अलबर्ट में अपने ज्ञान का पूरा परिचय देते हुए कहा-

“जिससे उसके पीछे आने वाली
चींटियां उस गंध का अनुसरण करती हुई चलती हैं।“

“बिल्कुल ठीक कहा आपने ग्रैंड अंकल! शैफाली ने चुटकी बजाते हुए कहा-

“तो जो चींटी आपके कंधे पर चल रही थी। वह भी गंध छोड़ती हुई चल रही थी। जिसे सूंघकर मैंने जान लिया, कि एक चींटी आपके कंधे पर है।“

“यह कैसे संभव है?“ अलबर्ट बिल्कुल हैरान रह गया -


“तुम्हें चींटी की गंध कैसे मिल गई। वह तो इतनी हल्की होती है, कि चींटी के अलावा, अन्य बड़े जानवर भी उसे सूंघ नहीं पाते।“

“आपको कैसे पता कि अन्य जानवर उसे सूंघ नहीं पाते?“ शैफाली ने एक प्रश्न का गोला और दाग दिया -

“यह भी तो हो सकता है कि उसे जानवर सूंघ लेता हो पर वह सुगंध उसके मतलब की नहीं रहती, इसलिए वह उस पर ध्यान ना देता हो।“

“हो सकता है ।“ अलबर्ट ने गड़बड़ा कर जवाब दिया- “पर तुम्हें कैसे उसकी गंध मिल गयी ?“

“ग्रैंड अंकल! क्यों कि मैं जन्म से ही अंधी हूं। इसलिए मुझे हर चीज का अनुमान लगाना पड़ता है। जिसके कारण मेरी नाक व कान की इंद्रियां बहुत तीव्र हो गई हैं। मैं जो चीजें सुन व सूंघ सकती हूं, उसे सामान्य आदमी नहीं कर सकता।“

“बड़े आश्चर्य की बात है। मैंने सिर्फ इस बारे में सुना ही था।“ अलबर्ट लगातार विस्मय से बोल रहा था-

“देख पहली बार रहा हूं। अच्छा ये बताओ कि तुम्हें यह कैसे पता चला ? कि वह चींटी, मेरे बांए कंधे पर है।“

“सिंपल सी बात है ! शैफाली ने शांत स्वर में जवाब दिया - “आपने थोड़ी देर पहले मुझसे बात की। जिससे मैं आपकी आवाज सुनकर यह जान गई कि आपकी लंबाई 5 फुट 9 इंच है। आपके मुंह से निकलती आवाज और चींटी के बीच की खुशबू के बीच की दूरी लगभग 6 इंच थी। और आपके बांई तरफ से आ रही थी। जिससे यह पता चला कि वह चींटी आप के बांए कंधे पर है।“

“लेकिन बेटा ! यह भी तो हो सकता था कि मेरे बगल तुम्हारे डैड खड़े हैं। वह चींटी उनके कंधे पर भी तो हो सकती थी।“ अलबर्ट ने अब दिलचस्पी लेते हुए शैफाली का पूरा इंटरव्यू लेना शुरू कर दिया।

“हो सकती थी ।......... जरूर हो सकती थी । परंतु आप इधर-उधर टहल कर बात कर रहे थे और जैसे-जैसे आप घूम रहे थे। वैसे-वैसे चींटी की गंध भी कम या ज्यादा हो रही थी । जबकि मेरे डैड एक ही स्थान पर खड़े हो कर बात कर रहे हैं।“

अब अलबर्ट का सारा ध्यान इधर-उधर से हटकर, पूरा का पूरा शैफाली की बातों में लग गया, मानो उसे अपने शोध का एक हथियार मिल गया हो।

“अच्छा बेटे! यह बताओ कि मेरे पैंट की दाहिनी जेब में क्या है?“ अलबर्ट ने पूरा परीक्षण लेते हुए कहा।

“आपकी दाहिनी जेब में एक लोहे की छोटी सी डिबिया में सौंफ रखी है।“ शैफाली ने निश्चिंत हो कर जवाब दिया । अलबर्ट शैफाली की बात को सुनकर भौचक्का सा खड़ा रह गया। क्यों कि उसकी पैंट की दाहिनी जेब में, वास्तव में लोहे की छोटी सी डिबिया में सौंफ थी।

“बेटे! यह तुमने कैसे जाना ?“ अलबर्ट ने शैफाली से सवाल किया।

“आपके चलने से बार-बार डिबिया के अंदर रखी सौंफ डिबिया की दीवार से टकरा कर एक ध्वनि उत्पन्न कर रही थी। अगर डिबिया, प्लास्टिक की होती तो वह ध्वनि थोड़ी दूसरे तरीके से आती। इस तरह से बार-बार सौंफ का डिबिया से टकराना, यह साबित करता है, कि उसमें जो भी चीज है, वह बहुत छोटे-छोटे कणों में है।“

“छोटे-छोटे कणों में तो कुछ भी हो सकता है?“ अलबर्ट ने शैफाली की बात को काटते हुए कहा - “फिर यह कैसे जाना कि उसमें सौंफ ही है।“

“आपके मुंह से आती सौंफ की खुशबू से, जो लगभग 1 घंटे पहले आपने खाई थी।“ शैफाली ने कहा। शैफाली का हर जवाब अलबर्ट को आश्चर्य से भर रहा था । अब लगा जैसे अलबर्ट को कोई नया खेल मिल गया हो। उसने पास से जा रहे वेटर को रोककर, उसकी फल वाली टोकरी से एक सेब व एक अमरुद निकाल लिया । फिर वेटर से चाकू लेकर सेब व अमरुद को शैफाली के सामने रखा । और फिर अमरूद के चार टुकड़े कर दिए।

“बेटे! यह बताओ कि तुम्हारे सामने अभी-अभी मैंने एक सेब को काटकर कुछ टुकड़ों में बांट दिया है। क्या तुम बता सकती हो ? कि मैंने सेब के कितने टुकड़े किए हैं?“ अलबर्ट ने झूठ बोलते हुए शैफाली से सवाल किया।

“आप झूठ बोल रहे हैं ग्रैंड अंकल!“ शैफाली ने मुस्कुरा कर कहा- “कि आपने सेब के टुकड़े किए हैं। आपने सेब के बगल में रखे अमरूद के चार टुकड़े किए हैं। सेब के नहीं । क्यों कि सेब के कटने से अलग तरह की ध्वनि होती है और अमरूद के कटने से अलग तरह की ध्वनि । और जो चीज ताजा कटती है, उसकी खुशबू ज्यादा तेज होती है।“

उसके जवाबों को सुनकर अब मारिया भी उत्सुकता से उसकी तरफ देखने लगी । इस बार अलबर्ट ने शैफाली के सामने जा कर, बिना हाथ उठाए पूछा-

“ये कितनी उंगली हैं?“

“पहले उंगली तो उठा लीजिए ग्रैंड अंकल! क्यों कि आपकी आवाज बिना किसी अवरोध के मुझ तक आ रही है।“ शैफाली ने चहक कर जवाब दिया ।

अलबर्ट ने वहीं पास में पड़ा एक पतला लोहे का पाइप उठा कर, अपने व शैफाली के चेहरे के बीच लाते हुए कहा-

“अच्छा ! अब ये बताओ। ये कितनी उंगलियां हैं?“

“ये उंगली नहीं, लोहे का पाइप है।“ शैफाली ने जवाब दिया - “क्यों कि आपकी आवाज इससे टकरा कर, मेरे पास पहुंच रही है। और जब आपकी आवाज इससे टकराती है, तो इसमें बहुत हल्के से कंपन हो रहे हैं। वह कंपन झनझनाहट के रूप में मुझे सुनाई दे रहे हैं।“

अलबर्ट के पास हाल-फिलहाल अब कोई सवाल नहीं था। अतः वह चुप रहा । अलबर्ट अब विस्मय से एकटक, चुपचाप शैफाली को इस तरह निहारने लगा मानो वह धरती का कोई प्राणी ना होकर, अंतरिक्ष से आया कोई जीव हो ।

“लगता है ग्रैंड अंकल के पास सवाल खत्म हो गए।“ शैफाली ने अलबर्ट को ना बोलते देख पूछ लिया ।

“अब मैं आप से पूछती हूं।“ शैफाली ने इस बार अलबर्ट की आंखों के सामने, अपने दाहिने हाथ का पंजा फैलाते हुए पूछा- “ये कितनी उंगलियां हैं?“

अलबर्ट ने अजीब सी नजरों से पास खड़े माइकल, मारथा व मारिया को देखा । उसकी आंखों में प्रश्नवाचक निशान साफ झलक रहे थे।

“आपने बताया नहीं ग्रैंड अंकल! यह कितनी उंगलियां हैं?“ शैफाली ने अलबर्ट को ना बोलते देख पुनः अपने हाथ का पंजा फैलाते हुए पूछ लिया ।

“पाँच! अलबर्ट ने अजीब से भाव से जवाब दिया ।

“बिल्कुल गलत!“ शैफाली ने तेज आवाज में हंस कर कहा-

“अरे ग्रैंड अंकल ! उंगलियां तो चार ही हैं। एक तो अंगूठा है। और अंगूठे की गिनती उंगलि यों में नहीं करते।“

अलबर्ट ने धीरे से जेब से रुमाल निकालकर अपने माथे पर आए पसीने की बूंद को पोंछा और फिर माइकल की तरफ घूमता हुआ बोला-

“बाप ... रे .... बाप ...... ये लड़की है या शैतान की नानी । मुझे ही फंसा दिया।“

अलबर्ट के इतना कहते ही शैफाली को छोड़ बाकी सभी के मुंह से हंसी का एक जबरदस्त ठहाका फूट निकला ।




जारी. रहेगा.........✍️✍️
Kya Sefali super human hai?
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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