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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Badhiya lagta hai shadi karke sabko bhul gaye aap????

Nahi bhai esa nahi hai
Wo kya hai na is bar ki pehli holi Sasural me manaee bahut he ache se pocho mat bahut enjoy kia maine bhai kya batao bs busy tha usme he

अपडेट 83 + 84 पर मेरी प्रतिक्रिया :

(1) सुप्रीम पर जो भी नरक मचा है, वो सब युफासा और सनूरा ने किया है।
(2) उन्होंने यह सारे काण्ड मकोटा के कारण (उसके इशारे पर) किए हैं।
(3) मकोटा ने यह सब किया क्योंकि उसको तमराज जैगन से कुछ चाहिए।
(4) और जैगन स्साला बेहोश है।

तो क्या उसको मानव लाशों से कुछ चाहिए? मनुष्यों का शरीर क्या उसके लिए संजीवनी है?

लॉरेन की लाश गायब होने का कारण समझ में आया।

युफासा और सनूरा ने जो किया है वो सब दबाव में किया है। ये महामानवीय शक्तियों से लेस जीव (मानव तो नहीं कह सकते इनको) मानवीय रीतियों के अनुरूप अपराधी तो हैं, लेकिन क्या उनकी सभ्यता में यह सब अपराध माना जाएगा? जैसे हम चींटियों को मार देते हैं और सोचते भी नहीं... ऐसे जीवों के लिए तो मानव भी चींटियाँ ही हैं! वैसे हर हत्या के बाद लुफासा ‘विचलित’ महसूस कर रहा है। लिहाज़ा, उसके अंदर भी विवेक है, और मानवीय नैतिकता है।

कम से कम दोनों ने रोजर को फिलहाल मकोटा से बचा लिया है। शायद वो भी नहीं चाहते कि मकोटा अपने मंसूबों में कामयाब हो।

अद्भुत लेखनी राज भाई! :) ♥️

फ़ोरम से अनुपस्थिति का कारण ये है कि कंपनी ने जो टारगेट दिया है उसको ही पूरा करने में लगा हुआ हूँ आज कल! ये अमृतकाल हम जैसे सेल्स के लोगों के लिए “काल” बन गया है। अपने क्लाइंट स्ट्रगल कर रहे हैं, और उनके कारण हम! इतनी कोशिश कर रहा हूँ, फिर भी टारगेट पूरा होता प्रतीत नहीं होता। ख़ैर - चार दिन का त्रास और! फिर जो होगा, सो होगा।

आप लिखते रहें। ✍️

Awesome update

Romanchak safar hai chalte rahiye

Badhiya update bhai

To Toffik hi tha jisne sab kiya tha lekin loren ko kyun mar diya usne wo to usse pyar karta tha na or bechari loren bhi uske pyar me andhi hoker uski baten man rahi thi or jis jenith se badla lena chahta tha use abhi tak jinda rakha ha usne usse pyar ka natak karta ja raha ha Jenith ki sab sachhai pata pad gayi ha dekhte han kab tak Toffik babu apni sachhai chhupa pate han waise bure karm ki saja milti hi ha or jis jagah ye sab han usse lagta ha jaise Aslam miya ko saja mili usi prakar Toffik ka bhi number lag sakta ha

moka hi nahi mil raha kuchh v pardne ka😞

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

अदभुद अकल्पनीय इससे अधिक शब्द नहीं हैं व्याख्यान के लिए

Shandar update bhai

अच्छी बात यह है कि अल्बर्ट बच गया है और अपनी ख़ुराफ़ात जारी रख रहा है।
पढ़ कर ऐसा लगा कि सुपर कमाण्डो ध्रुव वाली एक बेहद पुरानी कहानी - 'आदमखोरों का स्वर्ग' जैसा कुछ होगा।
लेकिन निराशा हाथ लगी :) हा हा!

इस अपडेट से एक और बात सूझती है कि क्या पुराने 'मर गए' किरदार भी वापस आ सकते हैं?

इस अपडेट में इक्यावन प्रश्न हैं - इतने तो एग्जाम में भी नहीं हल किए।
लिहाज़ा प्रश्नों को पढ़ने की ज़हमत नहीं उठाई मैंने।

अब तो सीधे अगले अपडेट में मिलेंगे जहाँ दिव्यास्त्रों की बातें होंगी - जैसे अभी कोई कम दिव्य शक्तियों की बातें हो रही थीं।
:tongue: :tongue: :tongue:

राज भाई
सेक्स नहीं कहानी पढ़ने का शौक रहा है मेरा हमेशा से
सेक्स पढ़ने देखने की जरूरत सिर्फ कुछ नया, अनोखा, अलग जानने के लिए समझता हूं
आनन्द या मनोरंजन सेक्स लिखने, पढ़ने, सुनने या देखने से नहीं 'करने' में ही होता है

Awesome update and nice story.

फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया

शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

मजेदार अपडेट, कहानी ने दिलचस्प मोड ले लिया। मर्डर मिस्ट्री से बरमूडा ट्रेंगल की और। हम्ममम🤔🤔

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Har update me ek nayi jankari milti he......

Maja aa raha he story me

Keep rocking Bro

बहुत ही शानदार अपडेट है !

Wonderful update brother, Nebula, supernova aur black hole ke baare mein aapne achhe se explain kiya hai, pure universe mein hi hydrogen gas sabse jyada paya jata hai.

Superb update

यह कहानी का प्रारंभिक अंश (Prologue) एक बहुत ही सस्पेंसभरी और दिलचस्प शुरुआत है।👌🏻 पहले ही अध्याय में कई ऐसे तत्व पिरो दिए हैं जो पाठक की जिज्ञासा को अंत तक बनाए रखने के लिए काफी हैं।😳

* शैफाली: कहानी का सबसे रहस्यमयी केंद्र। उसका जन्म से अंधा होना और फिर भी 'दृश्य' वाले सपने देखना (अंधेरा, लहरें, रोशनी, आग) एक अलौकिक या मनोवैज्ञानिक थ्रिलर का संकेत देता है। वह एक 'गिफ्टेड' बच्ची लगती है जो पहेलियाँ सुलझाने में माहिर है।
* माइकल और मारथा: एक सामान्य और फिक्रमंद माता-पिता के रूप में उनकी केमिस्ट्री अच्छी दिखाई गई है। प्रोफेसर अल्बर्ट के प्रति माइकल का आदर कहानी में आगे किसी बड़े मोड़ की ओर इशारा करता है।
* ब्रूनो: पालतू कुत्ते का शामिल होना कहानी में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाता है, खासकर यह जानकर कि वह शैफाली की 'आँखें' है।
* ऐलेक्स और क्रिस्टी: यहाँ से कहानी में 'क्राइम' या 'मिस्ट्री' का तड़का लगता है। ऐलेक्स का व्यवहार संदिग्ध है और क्रिस्टी का 'बैंक रॉबरी' पर किताब पढ़ना उसे एक साधारण लड़की से अलग बनाता है।
2. रहस्य और रोमांच कहानी में कई सवाल खड़े किए गए हैं जो पाठक को अगले भाग के लिए उकसाते हैं:
* शैफाली को सपने क्यों आते हैं और उसकी बड़बड़ाहट (आग, द्वीप, कीड़े) का क्या मतलब है? क्या यह भविष्य की कोई चेतावनी है?
* प्रोफेसर अल्बर्ट कौन हैं और क्या उनका शिप पर होना महज एक इत्तेफाक है?
* ऐलेक्स ने क्रिस्टी की किताब क्यों चुराई? क्या वह कोई जासूस है या अपराधी?
3. सेटिंग और वातावरण आपने 2001 के कालखंड और 'सुप्रीम' शिप के माहौल को बखूबी बुना है। न्यूयॉर्क से सिडनी तक का 65 दिनों का लंबा सफर एक 'क्लोज्ड-रूम मिस्ट्री' के लिए बेहतरीन सेटिंग है, जहाँ समुद्र के बीच भागने का कोई रास्ता नहीं होता।

लेखन शैली की बात करें तो केवल एक ही बात कह सकते है। की शानदार है। 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
बातचीत स्वाभाविक है और जानकारी देने के साथ-साथ पात्रों के स्वभाव को भी उजागर करती है।
शुरुआत पारिवारिक इमोशन्स से होती है और अंत एक रहस्यमयी मोड़ पर, जो संतुलन बनाए रखता है।👍

* शैफाली के सपनों वाले हिस्से में थोड़ा और "हॉरर" या "थ्रिल" पैदा किया जा सकता था ताकि पाठक को उसके डर का अहसास और गहराई से हो। ऐलेक्स के इरादों को अभी गुप्त रखा गया है, जो कि एक अच्छी तकनीक है।

यह एक ठोस शुरुआत है। इसमें इमोशन, मिस्ट्री और एडवेंचर का सही मिश्रण है। 'सुप्रीम' शिप पर होने वाला यह सफर निश्चित रूप से किसी बड़े तूफान या घटना की ओर इशारा कर रहा है। 😳
बोहोत बढिया अपडेट था भाई साहब 👌🏻👌🏻👌🏻💯💯💯💯🎉🎉🎉🎊🎊🎊🎊🎊

Nice update....

Nice update....

nice update

romanchak update. oras ko dhundne araka grah par aa gaye the androverse ke alien .samjhauta ho gaya tha par makota ne apni chal chalkar yuddh aarambh karwa diya,.
rojar to marr hi gaya tha par sinhraj ko usko apne shakti se jeevit kar diya .melait aur rojar ki prem kahani aage badh rahi hai .

Superb update🔥🔥

रिव्यू की शुरुआत की जाए

नए अध्याय का प्रारंभ हो चुका हैं युद्ध का बिगुल बज चुका हैं , जिस तरह युद्ध की झलकियां दिखाई हैं वे साबित करते हैं आगे हमें क्या देखना को मिलेगा।

मतलब सिर्फ एंडोर्स ग्रह के १० लोग भिड़ने आए हैं , अटका वासियों से, फिर भी इतनी तबाहि , भला हो सूर्यवर्या की शुभार्जुन का जिसने इस युद्ध में थोड़ा समय मांग लिया।

अब सबसे पहले मुझे ये बताओ सुनेरा लड़की हैं या लड़का क्योंकि कभी लगता हैं ये लड़की है तो कभी लड़का लगता है

जब शक्ति का वर्णन हो रहा था तब इनका जिक्र क्यों नहीं हुआ क्योंकि मैने पुराना अपडेट पढ़ा है। इसे तो लगता है ये दोनो शक्तियों उन पंद्रह शक्ति में से हैं।

अब मुझे नही पता इतना बड़ा लूपहोल कैसे भरेगा। पर करना तो पड़ेगा वर्ना कन्फ्यूजन होगा ।

अब समझा आगया है , की रॉजर जिंदा कैसे हुआ, वो शुभर्जुना का जादू था।

मेगा लाइट के गुस्से वाला अवतार तो खतरनाक था, वैसे ये जिंदा मारने के खेल कब तक चालू रखोगे , एक समय लगा कि युद्ध में पहले बलि आगाई, लेकिन हम गलत थे।


वैसे जैसा शुभार्जुन के बारे में पढ़ा हैं लगता है इसका प्रयोग पहले बार हुआ है और आगे चल कर २ बार हम किसी को भी जीवित कर सकते है ।

अब मार्कोटा ने युद्ध चालू कर कर कही न कही मुसीबत मोल लेली है, ये एंडोर्स वाले किसी को नहीं छोड़ने वाले अब तो और ताकतवर होकर आयेंगे क्यूंकि इनके महाबली योद्धा को परास्त किया है

इस अपडेट से ये भी लगता है कहानी के समाप्ति की और एक कदम बढ़ चुका है

कुलमिलाकर शानदार अपडेट आगे की प्रतीक्षा
Raj_sharma

Shaandar update

Bhut hi badhiya update Bhai
Sinor vasi abhi to ye choti si jang jeet gaye
Dhekte hai aage kya hota hai

Besabari se intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....

Update posted friends :dost:
 

parkas

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#187.

चैपटर-4
अद्भुत नेत्र:
(तिलिस्मा 5.11)

वसंत ऋतु को पार करने के बाद सभी जिस द्वार में प्रवेश किये, वह उन्हें लेकर एक बड़े से नाव के आकार वाले कमरे में पहुंच गया।

यह कमरा लगभग 5,000 वर्ग फुट में निर्मित था, इसकी छत की ऊंचाई भी बहुत ज्यादा थी।

कमरे की जमीन सफेद पत्थरों से बनी थी, जिसके बीच एक 10 मीटर त्रिज्या का नीला गोला और उस नीले गोले के बीच, 2 मीटर त्रिज्या का काला गोला बना था।

उस काले गोले के बीच में, काँच की पारदर्शी लिफ्ट लगी थी, जो कि उस काले गोले से, नीचे की ओर ले जाने के लिये थी। परंतु लिफ्ट पर किसी भी प्रकार का कोई बटन नहीं था।

कमरे की छत पर, लिफ्ट के ठीक ऊपर की ओर एक गोल ढक्कन लगा था।

“यह कमरा तो देखने में बहुत ही अजीब सा लग रहा है?" ऐलेक्स ने कहा।

“सही कह रहे हो ऐलेक्स भैया, इस कमरे का डिजाइन किसी नाव के समान है” शैफाली ने कमरे को देखते हुए कहा- “और इसकी जमीन भी थोड़ी उभरी हुई लग रही है।"

“पर इस कमरे में उस काँच की लिफ्ट के सिवा तो कुछ है ही नहीं?" जेनिथ ने कहा- “शायद उस लिफ्ट से हमें नीचे की ओर कहीं जाना है। पर उस लिफ्ट पर कहीं भी बटन नहीं है, पता नहीं यह कैसे चलती होगी?" यह कहकर जेनिथ उस लिफ्ट की ओर बढ़ी, परंतु अचानक पैर में कुछ चिपचिपा सा अहसास होने की वजह से वह चलते-चलते रुक गई और नीचे जमीन की ओर देखने लगी।

“दोस्तों, यहां जमीन पर कुछ चिपचिपा पदार्थ भी है, जरा ध्यान से आना, कहीं यह पदार्थ भी किसी प्रकार की मुसीबत ना हो?” जेनिथ ने सभी को सावधान करते हुए कहा और लिफ्ट की ओर आगे बढ़ गई।

लेकिन इससे पहले कि जेनिथ और आगे बढ़कर लिफ्ट के पास पहुंचती, तभी ऊपर छत पर लगा ढक्कन तेजी से खुला और उसमें से एक प्रकाश की किरण आकर लिफ्ट से टकराई।

प्रकाश की किरण टकराते ही, लिफ्ट का दरवाजा 2 सेकेण्ड के लिये खुला और फिर बंद होकर लिफ्ट, एक तेज आवाज करती हुई, जमीन के नीचे चली गई।

अब लिफ्ट के स्थान पर एक अंतहीन गोल गड्ढा दिखाई दे रहा था। अब ऊपर का ढक्कन पुनः बंद हो गया था।

जेनिथ ने धीरे से उस गड्ढे में झांक कर देखा। तभी जेनिथ को लिफ्ट वापस आती दिखाई दी। लिफ्ट को वापस आते देख जेनिथ थोड़ा पीछे हट गई। लिफ्ट पहले की तरह अपने स्थान पर वापस आकर रुक गई।

अब जेनिथ की नजर सुयश की ओर गई, जो कि बहुत देर से इस पूरे स्थान को देखकर कुछ सोच रहा था।

जेनिथ को अपनी ओर देखते पाकर आखिर सुयश बोल उठा- “यह पूरा कमरा किसी मानव के नेत्र के समान प्रतीत हो रहा है। जरा सभी लोग जमीन की ओर देखो, इसकी नाव सी सफेद आकृति, आँख के सफेद भाग की तरह प्रतीत हो रही है। इस सफेद भाग के बीच का नीला गोला, आँख की ‘आइरिश' और काला गोला, आँख की ‘प्यूपिल' लग रहा है। छत के ऊपर की ओर लगा ढक्कन, शायद पलकों का काम कर रहा है। जब पलकें खुलती हैं, तो उसमें से दृश्य तरंगे निकलकर उस लिफ्ट पर गिरती हैं। शायद वह लिफ्ट उन दृश्य तरंगों को लेकर मस्तिष्क तक जाती हो?"

सुयश के शब्दों को सुन सभी ने पहली बार उस कमरे को महसूस करके देखा। अब सभी सुयश की बात से सहमत थे।

"हम आपकी बात से सहमत हैं कैप्टेन।" क्रिस्टी ने कहा- “पर यह नहीं समझ आ रहा कि हमें इस आँख में करना क्या है?"

“पर कैप्टेन, जमीन पर बिखरा यह चिपचिपा पदार्थ कैसा है?” जेनिथ ने सुयश से पूछा- “आँख में तो ऐसा नहीं होता।"

"शायद यह चिपचिपा पदार्थ ही हमारी परेशानी है?" शैफाली ने कहा- “क्यों कि आँख में अगर किसी भी प्रकार का कोई कण या पदार्थ गिरता है, तो आँख स्वतः आँसू बनाकर उस कण या पदार्थ को बाहर निकाल देती है।

“अब समझ में आ गया।” ऐलेक्स ने खुशी से चीखते हुए कहा- “इस आँख में आंसुओं का निर्माण नहीं हो रहा। हमें आंसुओं का निर्माण करके इस चिपचिपे पदार्थ को समाप्त करना है।

“वाह मेरे अराका के शेर, तुमने तो पूरी पहेली ही हल कर दी।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स से मजा लेते हुए कहा “पर जरा यह बताओगे कि हम आँसुओं का निर्माण कैसे करेंगे?"

क्रिस्टी की बात सुन, ऐलेक्स अपना सिर खुजाकर ऊपर की ओर देखने लगा।

“आँसुओं का निर्माण, आँखों के ऊपर बने 'लैक्राईमल ग्लैंड' में होता है।" शैफाली ने कहा- “वहीं से आँसू हमारी आँख में प्रवेश करते है और ‘लैक्राइमल पंक्टा' से होते हुए नाक के द्वारा बाहर निकल जाते हैं। जब आँसू ज्यादा मात्रा में बनते हैं, तो वह ओवरफ्लो होकर हमारी आँखों से बाहर निकलने लगते हैं। इसी प्रक्रिया को हम रोना कहते हैं। शैफाली ने सरल भाषा में सभी को समझाते हुए कहा।

"तो इसका मतलब पहले हमें लैक्राईमल ग्लैंड तक पहुंचना होगा, उसके बाद ही हम जान पायेंगे कि वहां परेशानी क्या है?" जेनिथ ने कहा- “पर हम लैक्राईमल ग्लैंड तक जायेंगे कैसे?"

“यहां से तो लैक्राईमल ग्लैंड तक जाने का कोई रास्ता नहीं है। अब हमें वहां तक पहुंचने के लिये, पहले छत के ढक्कन खुलने का इंतजार करना होगा। जैसे ही ढक्कन खुलेगा, हम बारी-बारी से लिफ्ट के द्वारा नीचे जायेंगे और फिर वहां से किसी भी प्रकार से मस्तिष्क तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। अगर हम मस्तिष्क तक पहुंचने में सफल हो गये, तो वहां से कहीं भी जाया जा सकता है।” शैफाली ने सभी को अपना प्लान बताते हुए कहा।

"मुझे लगता है कि इस द्वार के लिये, हमें सिर्फ शैफाली की बातें सुननी चाहिये। क्यों कि उसे ही आँख की सबसे अच्छी जानकारी है।” सुयश ने कहा।

सुयश की बात सुन, सभी ने सिर हिलाकर अपनी सहमति दे दी। अब सभी आकर लिफ्ट के पास खड़े हो गये। सभी को वहां खड़े-खड़े आधा घंटा बीत गया, पर ऊपर की छत का ढक्कन नहीं खुला।

“कैप्टेन, यह छत का ढक्कन क्यों नहीं खुल रहा? क्रिस्टी ने सुयश की ओर देखते हुए कहा।

“मुझे लगता है कि यह इंसान सो रहा है, इसी लिये उसकी पलकें अभी नहीं झपक रहीं हैं।” सुयश ने तथ्य देते हुए कहा।

तभी छत की ऊपर लगा ढक्कन खुलने की तेज आवाज सुनाई दी। यह देख सुयश ने पहले तौफीक को नीचे जाने का इशारा किया। सुयश का इशारा पाकर, तौफीक बिल्कुल तैयार हो गया।

अब छत के ढक्कन से तेज रोशनी निकलकर, लिफ्ट के ऊपर गिरी और इसी के साथ लिफ्ट का दरवाजा 2 सेकेण्ड के लिये खुला।

तौफीक के लिये लिफ्ट में प्रवेश करने के लिये इतना समय काफी था। लिफ्ट तौफीक को लेकर नीचे की ओर चली गई।

धीरे-धीरे, एक-एक करके सभी उस लिफ्ट के माध्यम से नीचे की ओर आ गये। अब नीचे उन्हें एक बड़ा सा गोल पारदर्शी पर्दा दिखाई दिया, जिससे होकर प्रकाश अंदर की ओर जा रहा था।

“यह लेंस है, हमारी दृश्य तरंगे इससे होकर ही अपना चित्र रेटिना पर दर्शाती हैं।" शैफाली ने लेंस को देखते हुए कहा- “हमें इस लेंस के पार जाना होगा। यह कहकर शैफाली ने लेंस को अपने हाथों से छूकर देखा, पर वह उसे ठोस दिखाई दिया।

"हम ऐसे इसके पार नहीं जा सकते, इसके पार जाने के लिये कोई ना कोई दूसरा उपाय सोचना होगा?" शैफाली ने सुयश की ओर देखते हुए कहा।

“क्या हम फिर से प्रकाश के द्वारा उस पार नहीं जा सकते?" सुयश ने शैफाली से सवाल करते हुए पूछा।

“नहीं !” शैफाली ने समझाते हुए कहा- “इसको हम इस प्रकार समझ सकते हैं, कि जिस प्रकार पारदर्शी काँच के दूसरी ओर प्रकाश के सिवा कुछ भी नहीं जा सकता, ठीक उसी प्रकार इस लेंस के पार हम प्रकाश मे माध्यम से नहीं जा सकते।... लेकिन अभी भी हमारे पास दूसरी ओर जाने का एक तरीका है।... जब भी हल्का प्रकाश हमारी आँख पर पड़ता है, तो हमारी आँख में मौजूद लेंस अपने आकार को बढ़ा देता है और जब भी कोई तेज प्रकाश, हमारी आँखों पर पड़ता है, तो हमारी आँखों का लेंस सिकुड़कर छोटा हो जाता है। तो हमें बस इस लेंस के किनारे पहुंचकर किसी तेज प्रकाश के आने का इंतजार करना होगा। जैसे ही तेज प्रकाश आँखों पर पड़ेगा, लेंस अपने आपको ‘प्यूपिल' के हिसाब के संतुलित कर अपना आकार सिकोड़ेगा और ऐसी स्थिति में हम लेंस के किनारे से होकर दूसरी ओर जा पायेंगे।"

शैफाली का ज्ञान कई लोगों के सिर के ऊपर से निकल गया, पर उन्हें इतना समझ में आया कि तेज प्रकाश में लेंस के किनारे से, दूसरी ओर जाने का रास्ता बन जायेगा। अतः सभी लेंस के एक किनारे पर आकर खड़े हो गये।

सभी को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा। कुछ देर बाद ही आँख से तेज रोशनी प्यूपिल को पारकर लेंस पर आकर पड़ी। अब लेंस ने अपने आकार को सिकोड़ना शुरु कर दिया।

जैसे ही लेंस के किनारे से एक व्यक्ति के निकलने के बराबर जगह हो गई, शैफाली सहित सभी उस जगह से निकलकर लेंस व रेटिना के बीच वाले स्थान पर पहुंच गये।

उस स्थान का आकार काफी बड़ा था। वहां का वातावरण हल्के गुलाबी रंग का था। वहां की गोलाकार दीवारें किसी फिल्मस्क्रीन के पर्दे की भांति अत्यंत चमकीली थीं। बीच के स्थान पर अनेक लाल और नीले रंग के मोटे, परंतु खोखले पाइप हवा में लहरा रहे थे।

"हमें इन पाइपों के अंदर तो नहीं घुसना है ना?" ऐलेक्स ने घबराकर शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

"नहीं, ये पाइप असल में 'ऑप्टिकल नर्वस्' हैं।" शैफाली ने कहा- “यही नर्वस् रेटिना पर बने चित्रों को देखकर, मस्तिष्क तक इलेक्ट्रानिक सिग्नल भेजते हैं। अब हमें सिर्फ ये देखना है कि कैश्वर की बनाई यह कृत्रिम आँख, किस प्रकार से मस्तिष्क तक सिग्नल भेजती है? हमें बस उस सिग्नल का पीछा करना होगा।"

"हे भगवान, हमारी आँख इतनी कठिनता से हमें चित्र दिखाती है, यह तो हमें पता ही नहीं था।” क्रिस्टी ने आश्चर्य से आँखें फाड़कर रेटिना को देखते हुए कहा।

“मुझे इस बात का अच्छी तरह से अहसास है।" शैफाली ने आह भरते हुए कहा- “मैंने तो 13 वर्ष तक अपनी आँखों से कुछ देखा ही नहीं?" यह सुन सुयश ने शैफाली के सिर पर हाथ फेरा, जो कि अपनेपन का अहसास लिये था।

तभी रेटिना की चमक कुछ कम होती दिखाई दी।

“दोस्तों तैयार हो जाओ, अब ऑप्टिकल नर्वस् मस्तिष्क को सिग्नल भेजने ही वाला है।" शैफाली ने सबको सावधान करते हुए कहा।

तभी उन पाइपों से 4 फुट के जुगनू निकलने शुरु हो गये, जो कि अपने पंखों के सहारे तेजी से उड़ रहे थे।
उन जुगनुओं से तेज रोशनी भी, कुछ समय अंतराल में चमक रही थी।

किसी को भी पाइपों से जुगनू के निकलने की तो आशा कतई नहीं थी, इसलिये सभी विस्मित होकर उन जुगनुओं को देखने लगे।

तभी सभी को शैफाली की आवाज सुनाई दी- “यही जुगनू इलेक्ट्रानिक तरंगों का रुप हैं, हमें किसी भी प्रकार से इन पर बैठना होगा? यही हमें मस्तिष्क तक ले जा सकते हैं।" यह कहकर शैफाली ने एक पाइप को उछलकर पकड़ लिया और उससे जुगनू निकलने का इंतजार करती रही।

जैसे ही पाइप से जुगनू निकलता दिखा, शैफाली उस जुगनू पर कूदकर सवार हो गई। जुगनू अब शैफाली को लेकर हवा में उड़ने लगा।

शैफाली को इस प्रकार करते देख, क्रिस्टी ने भी उछलकर एक पाइप को पकड़ा और एक जुगनू पर सवार हो गई।

इस प्रकार एक-एक कर जेनिथ को छोड़ सभी जुगनुओं पर बैठ गये। जेनिथ जुगनू तो छोड़ो, पाइप को भी पकड़ते ही नीचे गिर जा रही थी।

“कैप्टेन, जेनिथ जुगनू पर नहीं बैठ पा रही है।' ऐलेक्स ने चीखकर कहा- “हमें जेनिथ की मदद करनी होगी।"

लेकिन इससे पहले कि कोई जेनिथ की मदद कर पाता, तभी रेटिना के बीच से एक द्वार खुला और सभी जुगनू उस द्वार से होते हुए बाहर की ओर निकल गये।

अब जेनिथ के हाथ पैर फूलने लगे। उसे नहीं पता था कि अगर वह कुछ देर तक इस रेटिना के द्वार से बाहर नहीं निकली, तो उसके साथ क्या होगा?

“नक्षत्रा !” जेनिथ ने घबराकर नक्षत्रा को पुकारा “क्या तुम मेरी किसी भी प्रकार से मदद कर सकते हो?"

“मैं तुम्हारा हौसला बढ़ाने के सिवा कुछ नहीं कर सकता जेनिथ। यह एक फिजिकल कार्य है, इसे तुम्हें स्वयं ही पूरा करना होगा।” नक्षत्रा ने अपने हथियार डालते हुए कहा।

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ पुनः से कोशिश करने लगी। तभी अचानक जेनिथ के शरीर को एक झटका लगा और वह उछलकर एक जुगनू पर सवार हो गई।

जेनिथ को ऐसा लगा कि जैसे किसी ने उसके शरीर को उठाकर जुगनू की ओर फेंक दिया हो।

जेनिथ ने डरकर जुगनू के शरीर को कसकर पकड़ लिया, पर वह यह नहीं जान पायी कि उसका शरीर जुगनू तक पहुंचा कैसे?

“यह कैसे हुआ नक्षत्रा? मैं अपने आप जुगनू तक कैसे पहुंच गई?” जेनिथ ने आश्चर्य से नक्षत्रा से पूछा।

“क्षमा चाहता हूं जेनिथ, इसका जवाब मेरे पास भी नहीं है, पर मुझे लगता है कि कोई ना कोई इस तिलिस्म में भी तुम्हारी मदद कर रहा है। अब वह कौन है? यह मुझे भी नहीं पता।

जेनिथ का जुगनू उड़कर रेटिना के द्वार की ओर चल दिया, पर अब जेनिथ की आँखें सोचने के अंदाज में सिकुड़ गईं थीं।

पता नहीं क्यों इस बार उसे नक्षत्रा पर कुछ शक सा होने लगा था? उसे लग रहा था कि उसे किसी प्रकार से नक्षत्रा ही बार-बार बचा रहा है? पर वह उसे बता क्यों नहीं रहा था? यह जेनिथ को नहीं समझ आ रहा था ?


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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चैपटर-4
अद्भुत नेत्र:
(तिलिस्मा 5.11)

वसंत ऋतु को पार करने के बाद सभी जिस द्वार में प्रवेश किये, वह उन्हें लेकर एक बड़े से नाव के आकार वाले कमरे में पहुंच गया।

यह कमरा लगभग 5,000 वर्ग फुट में निर्मित था, इसकी छत की ऊंचाई भी बहुत ज्यादा थी।

कमरे की जमीन सफेद पत्थरों से बनी थी, जिसके बीच एक 10 मीटर त्रिज्या का नीला गोला और उस नीले गोले के बीच, 2 मीटर त्रिज्या का काला गोला बना था।

उस काले गोले के बीच में, काँच की पारदर्शी लिफ्ट लगी थी, जो कि उस काले गोले से, नीचे की ओर ले जाने के लिये थी। परंतु लिफ्ट पर किसी भी प्रकार का कोई बटन नहीं था।

कमरे की छत पर, लिफ्ट के ठीक ऊपर की ओर एक गोल ढक्कन लगा था।

“यह कमरा तो देखने में बहुत ही अजीब सा लग रहा है?" ऐलेक्स ने कहा।

“सही कह रहे हो ऐलेक्स भैया, इस कमरे का डिजाइन किसी नाव के समान है” शैफाली ने कमरे को देखते हुए कहा- “और इसकी जमीन भी थोड़ी उभरी हुई लग रही है।"

“पर इस कमरे में उस काँच की लिफ्ट के सिवा तो कुछ है ही नहीं?" जेनिथ ने कहा- “शायद उस लिफ्ट से हमें नीचे की ओर कहीं जाना है। पर उस लिफ्ट पर कहीं भी बटन नहीं है, पता नहीं यह कैसे चलती होगी?" यह कहकर जेनिथ उस लिफ्ट की ओर बढ़ी, परंतु अचानक पैर में कुछ चिपचिपा सा अहसास होने की वजह से वह चलते-चलते रुक गई और नीचे जमीन की ओर देखने लगी।

“दोस्तों, यहां जमीन पर कुछ चिपचिपा पदार्थ भी है, जरा ध्यान से आना, कहीं यह पदार्थ भी किसी प्रकार की मुसीबत ना हो?” जेनिथ ने सभी को सावधान करते हुए कहा और लिफ्ट की ओर आगे बढ़ गई।

लेकिन इससे पहले कि जेनिथ और आगे बढ़कर लिफ्ट के पास पहुंचती, तभी ऊपर छत पर लगा ढक्कन तेजी से खुला और उसमें से एक प्रकाश की किरण आकर लिफ्ट से टकराई।

प्रकाश की किरण टकराते ही, लिफ्ट का दरवाजा 2 सेकेण्ड के लिये खुला और फिर बंद होकर लिफ्ट, एक तेज आवाज करती हुई, जमीन के नीचे चली गई।

अब लिफ्ट के स्थान पर एक अंतहीन गोल गड्ढा दिखाई दे रहा था। अब ऊपर का ढक्कन पुनः बंद हो गया था।

जेनिथ ने धीरे से उस गड्ढे में झांक कर देखा। तभी जेनिथ को लिफ्ट वापस आती दिखाई दी। लिफ्ट को वापस आते देख जेनिथ थोड़ा पीछे हट गई। लिफ्ट पहले की तरह अपने स्थान पर वापस आकर रुक गई।

अब जेनिथ की नजर सुयश की ओर गई, जो कि बहुत देर से इस पूरे स्थान को देखकर कुछ सोच रहा था।

जेनिथ को अपनी ओर देखते पाकर आखिर सुयश बोल उठा- “यह पूरा कमरा किसी मानव के नेत्र के समान प्रतीत हो रहा है। जरा सभी लोग जमीन की ओर देखो, इसकी नाव सी सफेद आकृति, आँख के सफेद भाग की तरह प्रतीत हो रही है। इस सफेद भाग के बीच का नीला गोला, आँख की ‘आइरिश' और काला गोला, आँख की ‘प्यूपिल' लग रहा है। छत के ऊपर की ओर लगा ढक्कन, शायद पलकों का काम कर रहा है। जब पलकें खुलती हैं, तो उसमें से दृश्य तरंगे निकलकर उस लिफ्ट पर गिरती हैं। शायद वह लिफ्ट उन दृश्य तरंगों को लेकर मस्तिष्क तक जाती हो?"

सुयश के शब्दों को सुन सभी ने पहली बार उस कमरे को महसूस करके देखा। अब सभी सुयश की बात से सहमत थे।

"हम आपकी बात से सहमत हैं कैप्टेन।" क्रिस्टी ने कहा- “पर यह नहीं समझ आ रहा कि हमें इस आँख में करना क्या है?"

“पर कैप्टेन, जमीन पर बिखरा यह चिपचिपा पदार्थ कैसा है?” जेनिथ ने सुयश से पूछा- “आँख में तो ऐसा नहीं होता।"

"शायद यह चिपचिपा पदार्थ ही हमारी परेशानी है?" शैफाली ने कहा- “क्यों कि आँख में अगर किसी भी प्रकार का कोई कण या पदार्थ गिरता है, तो आँख स्वतः आँसू बनाकर उस कण या पदार्थ को बाहर निकाल देती है।

“अब समझ में आ गया।” ऐलेक्स ने खुशी से चीखते हुए कहा- “इस आँख में आंसुओं का निर्माण नहीं हो रहा। हमें आंसुओं का निर्माण करके इस चिपचिपे पदार्थ को समाप्त करना है।

“वाह मेरे अराका के शेर, तुमने तो पूरी पहेली ही हल कर दी।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स से मजा लेते हुए कहा “पर जरा यह बताओगे कि हम आँसुओं का निर्माण कैसे करेंगे?"

क्रिस्टी की बात सुन, ऐलेक्स अपना सिर खुजाकर ऊपर की ओर देखने लगा।

“आँसुओं का निर्माण, आँखों के ऊपर बने 'लैक्राईमल ग्लैंड' में होता है।" शैफाली ने कहा- “वहीं से आँसू हमारी आँख में प्रवेश करते है और ‘लैक्राइमल पंक्टा' से होते हुए नाक के द्वारा बाहर निकल जाते हैं। जब आँसू ज्यादा मात्रा में बनते हैं, तो वह ओवरफ्लो होकर हमारी आँखों से बाहर निकलने लगते हैं। इसी प्रक्रिया को हम रोना कहते हैं। शैफाली ने सरल भाषा में सभी को समझाते हुए कहा।

"तो इसका मतलब पहले हमें लैक्राईमल ग्लैंड तक पहुंचना होगा, उसके बाद ही हम जान पायेंगे कि वहां परेशानी क्या है?" जेनिथ ने कहा- “पर हम लैक्राईमल ग्लैंड तक जायेंगे कैसे?"

“यहां से तो लैक्राईमल ग्लैंड तक जाने का कोई रास्ता नहीं है। अब हमें वहां तक पहुंचने के लिये, पहले छत के ढक्कन खुलने का इंतजार करना होगा। जैसे ही ढक्कन खुलेगा, हम बारी-बारी से लिफ्ट के द्वारा नीचे जायेंगे और फिर वहां से किसी भी प्रकार से मस्तिष्क तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। अगर हम मस्तिष्क तक पहुंचने में सफल हो गये, तो वहां से कहीं भी जाया जा सकता है।” शैफाली ने सभी को अपना प्लान बताते हुए कहा।

"मुझे लगता है कि इस द्वार के लिये, हमें सिर्फ शैफाली की बातें सुननी चाहिये। क्यों कि उसे ही आँख की सबसे अच्छी जानकारी है।” सुयश ने कहा।

सुयश की बात सुन, सभी ने सिर हिलाकर अपनी सहमति दे दी। अब सभी आकर लिफ्ट के पास खड़े हो गये। सभी को वहां खड़े-खड़े आधा घंटा बीत गया, पर ऊपर की छत का ढक्कन नहीं खुला।

“कैप्टेन, यह छत का ढक्कन क्यों नहीं खुल रहा? क्रिस्टी ने सुयश की ओर देखते हुए कहा।

“मुझे लगता है कि यह इंसान सो रहा है, इसी लिये उसकी पलकें अभी नहीं झपक रहीं हैं।” सुयश ने तथ्य देते हुए कहा।

तभी छत की ऊपर लगा ढक्कन खुलने की तेज आवाज सुनाई दी। यह देख सुयश ने पहले तौफीक को नीचे जाने का इशारा किया। सुयश का इशारा पाकर, तौफीक बिल्कुल तैयार हो गया।

अब छत के ढक्कन से तेज रोशनी निकलकर, लिफ्ट के ऊपर गिरी और इसी के साथ लिफ्ट का दरवाजा 2 सेकेण्ड के लिये खुला।

तौफीक के लिये लिफ्ट में प्रवेश करने के लिये इतना समय काफी था। लिफ्ट तौफीक को लेकर नीचे की ओर चली गई।

धीरे-धीरे, एक-एक करके सभी उस लिफ्ट के माध्यम से नीचे की ओर आ गये। अब नीचे उन्हें एक बड़ा सा गोल पारदर्शी पर्दा दिखाई दिया, जिससे होकर प्रकाश अंदर की ओर जा रहा था।

“यह लेंस है, हमारी दृश्य तरंगे इससे होकर ही अपना चित्र रेटिना पर दर्शाती हैं।" शैफाली ने लेंस को देखते हुए कहा- “हमें इस लेंस के पार जाना होगा। यह कहकर शैफाली ने लेंस को अपने हाथों से छूकर देखा, पर वह उसे ठोस दिखाई दिया।

"हम ऐसे इसके पार नहीं जा सकते, इसके पार जाने के लिये कोई ना कोई दूसरा उपाय सोचना होगा?" शैफाली ने सुयश की ओर देखते हुए कहा।

“क्या हम फिर से प्रकाश के द्वारा उस पार नहीं जा सकते?" सुयश ने शैफाली से सवाल करते हुए पूछा।

“नहीं !” शैफाली ने समझाते हुए कहा- “इसको हम इस प्रकार समझ सकते हैं, कि जिस प्रकार पारदर्शी काँच के दूसरी ओर प्रकाश के सिवा कुछ भी नहीं जा सकता, ठीक उसी प्रकार इस लेंस के पार हम प्रकाश मे माध्यम से नहीं जा सकते।... लेकिन अभी भी हमारे पास दूसरी ओर जाने का एक तरीका है।... जब भी हल्का प्रकाश हमारी आँख पर पड़ता है, तो हमारी आँख में मौजूद लेंस अपने आकार को बढ़ा देता है और जब भी कोई तेज प्रकाश, हमारी आँखों पर पड़ता है, तो हमारी आँखों का लेंस सिकुड़कर छोटा हो जाता है। तो हमें बस इस लेंस के किनारे पहुंचकर किसी तेज प्रकाश के आने का इंतजार करना होगा। जैसे ही तेज प्रकाश आँखों पर पड़ेगा, लेंस अपने आपको ‘प्यूपिल' के हिसाब के संतुलित कर अपना आकार सिकोड़ेगा और ऐसी स्थिति में हम लेंस के किनारे से होकर दूसरी ओर जा पायेंगे।"

शैफाली का ज्ञान कई लोगों के सिर के ऊपर से निकल गया, पर उन्हें इतना समझ में आया कि तेज प्रकाश में लेंस के किनारे से, दूसरी ओर जाने का रास्ता बन जायेगा। अतः सभी लेंस के एक किनारे पर आकर खड़े हो गये।

सभी को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा। कुछ देर बाद ही आँख से तेज रोशनी प्यूपिल को पारकर लेंस पर आकर पड़ी। अब लेंस ने अपने आकार को सिकोड़ना शुरु कर दिया।

जैसे ही लेंस के किनारे से एक व्यक्ति के निकलने के बराबर जगह हो गई, शैफाली सहित सभी उस जगह से निकलकर लेंस व रेटिना के बीच वाले स्थान पर पहुंच गये।

उस स्थान का आकार काफी बड़ा था। वहां का वातावरण हल्के गुलाबी रंग का था। वहां की गोलाकार दीवारें किसी फिल्मस्क्रीन के पर्दे की भांति अत्यंत चमकीली थीं। बीच के स्थान पर अनेक लाल और नीले रंग के मोटे, परंतु खोखले पाइप हवा में लहरा रहे थे।

"हमें इन पाइपों के अंदर तो नहीं घुसना है ना?" ऐलेक्स ने घबराकर शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

"नहीं, ये पाइप असल में 'ऑप्टिकल नर्वस्' हैं।" शैफाली ने कहा- “यही नर्वस् रेटिना पर बने चित्रों को देखकर, मस्तिष्क तक इलेक्ट्रानिक सिग्नल भेजते हैं। अब हमें सिर्फ ये देखना है कि कैश्वर की बनाई यह कृत्रिम आँख, किस प्रकार से मस्तिष्क तक सिग्नल भेजती है? हमें बस उस सिग्नल का पीछा करना होगा।"

"हे भगवान, हमारी आँख इतनी कठिनता से हमें चित्र दिखाती है, यह तो हमें पता ही नहीं था।” क्रिस्टी ने आश्चर्य से आँखें फाड़कर रेटिना को देखते हुए कहा।

“मुझे इस बात का अच्छी तरह से अहसास है।" शैफाली ने आह भरते हुए कहा- “मैंने तो 13 वर्ष तक अपनी आँखों से कुछ देखा ही नहीं?" यह सुन सुयश ने शैफाली के सिर पर हाथ फेरा, जो कि अपनेपन का अहसास लिये था।

तभी रेटिना की चमक कुछ कम होती दिखाई दी।

“दोस्तों तैयार हो जाओ, अब ऑप्टिकल नर्वस् मस्तिष्क को सिग्नल भेजने ही वाला है।" शैफाली ने सबको सावधान करते हुए कहा।

तभी उन पाइपों से 4 फुट के जुगनू निकलने शुरु हो गये, जो कि अपने पंखों के सहारे तेजी से उड़ रहे थे।
उन जुगनुओं से तेज रोशनी भी, कुछ समय अंतराल में चमक रही थी।

किसी को भी पाइपों से जुगनू के निकलने की तो आशा कतई नहीं थी, इसलिये सभी विस्मित होकर उन जुगनुओं को देखने लगे।

तभी सभी को शैफाली की आवाज सुनाई दी- “यही जुगनू इलेक्ट्रानिक तरंगों का रुप हैं, हमें किसी भी प्रकार से इन पर बैठना होगा? यही हमें मस्तिष्क तक ले जा सकते हैं।" यह कहकर शैफाली ने एक पाइप को उछलकर पकड़ लिया और उससे जुगनू निकलने का इंतजार करती रही।

जैसे ही पाइप से जुगनू निकलता दिखा, शैफाली उस जुगनू पर कूदकर सवार हो गई। जुगनू अब शैफाली को लेकर हवा में उड़ने लगा।

शैफाली को इस प्रकार करते देख, क्रिस्टी ने भी उछलकर एक पाइप को पकड़ा और एक जुगनू पर सवार हो गई।

इस प्रकार एक-एक कर जेनिथ को छोड़ सभी जुगनुओं पर बैठ गये। जेनिथ जुगनू तो छोड़ो, पाइप को भी पकड़ते ही नीचे गिर जा रही थी।

“कैप्टेन, जेनिथ जुगनू पर नहीं बैठ पा रही है।' ऐलेक्स ने चीखकर कहा- “हमें जेनिथ की मदद करनी होगी।"

लेकिन इससे पहले कि कोई जेनिथ की मदद कर पाता, तभी रेटिना के बीच से एक द्वार खुला और सभी जुगनू उस द्वार से होते हुए बाहर की ओर निकल गये।

अब जेनिथ के हाथ पैर फूलने लगे। उसे नहीं पता था कि अगर वह कुछ देर तक इस रेटिना के द्वार से बाहर नहीं निकली, तो उसके साथ क्या होगा?

“नक्षत्रा !” जेनिथ ने घबराकर नक्षत्रा को पुकारा “क्या तुम मेरी किसी भी प्रकार से मदद कर सकते हो?"

“मैं तुम्हारा हौसला बढ़ाने के सिवा कुछ नहीं कर सकता जेनिथ। यह एक फिजिकल कार्य है, इसे तुम्हें स्वयं ही पूरा करना होगा।” नक्षत्रा ने अपने हथियार डालते हुए कहा।

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ पुनः से कोशिश करने लगी। तभी अचानक जेनिथ के शरीर को एक झटका लगा और वह उछलकर एक जुगनू पर सवार हो गई।

जेनिथ को ऐसा लगा कि जैसे किसी ने उसके शरीर को उठाकर जुगनू की ओर फेंक दिया हो।

जेनिथ ने डरकर जुगनू के शरीर को कसकर पकड़ लिया, पर वह यह नहीं जान पायी कि उसका शरीर जुगनू तक पहुंचा कैसे?

“यह कैसे हुआ नक्षत्रा? मैं अपने आप जुगनू तक कैसे पहुंच गई?” जेनिथ ने आश्चर्य से नक्षत्रा से पूछा।

“क्षमा चाहता हूं जेनिथ, इसका जवाब मेरे पास भी नहीं है, पर मुझे लगता है कि कोई ना कोई इस तिलिस्म में भी तुम्हारी मदद कर रहा है। अब वह कौन है? यह मुझे भी नहीं पता।

जेनिथ का जुगनू उड़कर रेटिना के द्वार की ओर चल दिया, पर अब जेनिथ की आँखें सोचने के अंदाज में सिकुड़ गईं थीं।

पता नहीं क्यों इस बार उसे नक्षत्रा पर कुछ शक सा होने लगा था? उसे लग रहा था कि उसे किसी प्रकार से नक्षत्रा ही बार-बार बचा रहा है? पर वह उसे बता क्यों नहीं रहा था? यह जेनिथ को नहीं समझ आ रहा था ?


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Superb update🔥🔥
 

avsji

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प्रिय राज भाई Raj_sharma - बहुत दिनों से आपकी कहानी न पढ़ने और न कोई प्रतिक्रिया देने के लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।
और इस बात का कोई बहाना ही नहीं है। सच कहूँ - अब इस फोरम पर आने का मन ही नहीं होता। बस एक दो पिक्चर थ्रेड पर जाता हूँ, कभी कभार कमेंट करता हूँ - बस! और भी कम समय इसलिए भी मिल पाता है क्योंकि अब मैं एक नॉवेल लिख रहा हूँ, पब्लिशिंग के लिए। उधर बहुत व्यस्त हूँ - और अपना व्यावसायिक काम तो पूरा है ही!
अगले सप्ताह अवसर देख कर पुनः जुड़ता हूँ आपसे।
 

Raj_sharma

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प्रिय राज भाई Raj_sharma - बहुत दिनों से आपकी कहानी न पढ़ने और न कोई प्रतिक्रिया देने के लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ।
और इस बात का कोई बहाना ही नहीं है। सच कहूँ - अब इस फोरम पर आने का मन ही नहीं होता। बस एक दो पिक्चर थ्रेड पर जाता हूँ, कभी कभार कमेंट करता हूँ - बस! और भी कम समय इसलिए भी मिल पाता है क्योंकि अब मैं एक नॉवेल लिख रहा हूँ, पब्लिशिंग के लिए। उधर बहुत व्यस्त हूँ - और अपना व्यावसायिक काम तो पूरा है ही!
अगले सप्ताह अवसर देख कर पुनः जुड़ता हूँ आपसे।
अमर भाई , आप आये ये मेरे लिए मायने रखता है। और माफी मांगकर शर्मिंदा ना करें 🙏🏼
मै समझ सकता हूॅ, सबकी अपनी निजी जिंदगी होती है। और सबसे बडी खुशी की बात तो यह है कि आपकी किताब छपने वाली है।:yay:
हम पूरे मन से पढेंगे। ओर जब आपके पास समय हो तब आईयेगा, आपका सदैव ईंतजार रहेगा।
आपका अनुज
राज शर्मा 🙏🏼
 

Thor singh

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अच्छी स्टोरी हैं , बड़े समय बाद के अच्छा पढ़ने को मिला।
शुरुआत के दस अपडेट की समीक्षा।

सच बताऊँ तो कहानी पढ़ते-पढ़ते मज़ा आ रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे कोई पुरानी सस्पेंस वाली नॉवेल पढ़ रहे हों जिसमें हर थोड़ी देर में कुछ नया हो जाता है। सबसे अच्छी बात ये लगी कि कहानी रुकी हुई नहीं लगती, लगातार कुछ ना कुछ चलता रहता है, इसलिए पढ़ते रहो तो आगे क्या होगा ये जानने का मन करता रहता है।

शिप वाला आइडिया मुझे बहुत अच्छा लगा। एक ही जगह पर इतने सारे लोग, सबके अपने राज, ऊपर से इंटरपोल वाली बात, फिर सिक्योरिटी का शक, इससे कहानी में अलग ही टेंशन बनी रहती है। और जॉनी वाला हिस्सा तो काफी मजेदार था, खासकर जब उसने भेष बदलकर रिकॉर्ड रूम में एंट्री ली। वो सीन पढ़कर लगा कि अब कुछ बड़ा होने वाला है।

शैफाली वाला कैरेक्टर भी बहुत अलग लगा। वो अंधी है लेकिन उसकी समझ बहुत तेज है, ये चीज कहानी को खास बनाती है। ऐसे कैरेक्टर कम मिलते हैं इसलिए वो याद रह जाता है। प्रोफेसर अल्बर्ट वाला सीन भी अच्छा लगा, वहाँ कहानी थोड़ी शांत हो जाती है तो पढ़ने में अच्छा लगता है।

हाँ एक चीज थोड़ी लगी कि कभी-कभी बहुत सारे कैरेक्टर एक साथ आ जाते हैं तो थोड़ा याद रखना पड़ता है कि कौन कौन है। और कुछ जगह डायलॉग थोड़े लंबे हो गए हैं, जैसे लोग असल में इतने साफ-साफ नहीं बोलते। अगर थोड़ा छोटा रखो तो और नेचुरल लगेगा।

बाकी स्टोरी में सस्पेंस अच्छा बन रहा है, खासकर अभी जो न्यू ईयर वाली रात का प्लान चल रहा है, उससे तो लग रहा है आगे जरूर बड़ा कांड होने वाला है। अभी तक पढ़कर ऐसा लग रहा है कि असली कहानी अब शुरू होने वाली है।

मेरे हिसाब से कहानी में दम है। पढ़ने का मन बना रहता है और यही सबसे बड़ी बात होती है। बस ऐसे ही आगे भी सस्पेंस बनाए रखो तो कहानी और मजेदार हो जाएगी।

Raj_sharma
 
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