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Part 18
यह मन भी अजीब है!! मनुष्य को कठपुतली की तरह नचाता है !!
कोई मन में समाया है तो लोग उसके लिए हंसते-हंसते जान भी निछावर कर देते हैं ,....और मन से उतर गया तो जान ले भी लेते हैं!!!
कितना अंतर है दोनों दशाओं में !!
पर मन तो मन ही है !!!
जरा सी तारीफ से मन खुश हो जाता है तो कोई मुंह बनाकर भी देख ले तो मन उदास हो जाता है !!!
प्राची दिल्ली से वापस अपने गांव आ गई थी ....पर वह अपने साथ अपने मन में साहिल को भी लेकर आई थी !! अब उसके दैनिक जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया था !!
वह पहले की तरह उदास और चिढ़ी-चिढ़ी सी नहीं रहती थी... अब वह खुश रहती थी !! बरखा के यहां उसने देखा था कि सभी लड़कियां तितली जैसी लग रही थी ...तो क्या वे सब गोरी ही थी!!
उसने शीशे में अपना चेहरा देखा !! चेहरा तो उसका बहुत ही सुंदर था !! तीखे नैन नक्श थे !!
बचपन विदाई ले रहा था !! यौवन दस्तक दे रहा था !! वयःसंधि के इस मोड़ पर प्राची हैरान थी ....कि यह उसे क्या हो गया था??
अब वह खोई- खोई सी दिन में सपने देखती थी !! उसकी हीन भावना भावना घुल -घुलकर वही जा रही थी !! उसमें आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था!!
पढ़ाई में वह बरखा से कोसों आगे थी!! अपनी साथ -सज्जा पर उसने अब ध्यान देना शुरू कर दिया था !! अब उसे हर पल किसी का इंतजार रहता था !!
हर समय दिन -रात,, सुबह सवेरे वह यही सोचती रहती थी कि वह कब आएगा ?? उसने वादा किया था दोस्ती का.!!
प्राची का छोटा भाई प्रियम तीन साल का था !! वह उसको खिलाने के बहाने.... दूर एकांत में अपने खेतों की हरी भरी हरियाली में जा बैठती थी !!
इस प्रकार इंतजार करते -करते वह थक गई!! पर वह नहीं आया धीरे धीरे वर्ष बीत गया !!
और एक दिन वह बहुत उदास बैठी थी तभी किसी ने उसकी आंखें पीछे से, चुपके से आकर बंद कर दीं!!
" पहचानो !!" किसी ने कहा !!
उसने झटके से अपनी आंखों पर से हाथ हटा दिये..... उसके सामने सुंदर ,सजीला साहिल मुस्कुराता हुआ खड़ा था !!वह पहले से थोड़ा लंबा भी हो गया था और ज्यादा अच्छा लगने लगा था !!
और साहिल ने प्राची को देखा तो देखता ही रह गया !!!
"क्या यह वही प्राची है ?..चिपके बालों वाली??"
अब वह पहले वाली प्राची तो दूर दूर तक नहीं थी !! रेशमी खुले बाल हवा में लहरा रहे थे!!
वह हैरानी से बोला :-वाह !! मैंने तो पहचान ही नहीं पाया... तुम कितनी अच्छी ,"लग रही हो!!"
"सच !!" प्राची खुश होकर बोली !! और बरखा कहाँ है ??"
वह भी आ रही है !! अभी तो हम लोग आ ही पाए हैं !! अब छुट्टी का खूब मजा उठाएंगे!! मम्मी तो मुझे यहां आने ही नहीं दे रही थी!!
वह तो कहो कि आंटी जी थीं .... उन्होंने परमिशन दिला पाई... तब मैं आ पाया !!!
बरखा उस पर कब्जा जमाती हुई बोली :- आंटी नहीं वह तो मैं थी .....जो तुझे परमिशन दिला पाई ....और क्या ??
किशोरावस्था का निर्दोष, निश्छल प्रेम दीन दुनिया से बेखबर अपनी परवाज पर था!! साहिल के मन में जो गंवार लड़की अपनी सादगी से साहिल को भा गई थी.... अब वो उसके मन पर कब्जा जमा कर बैठ गई थी !! पर बरखा को इसकी भनक नहीं थी !!
बरखा, प्राची, साहिल तीनों ही खूब घूमते थे.. मस्ती करते ।।बरखा वायलिन बजाने की बहुत शौकीन थी !!बहुत ही अच्छा वायलिन बजातीं थी वह!!
बरखा को यहां के हरे -भरे नजारे बहुत अच्छे लगते थे ...और सबसे अच्छा लगता था ..... एकांत में बैठकर वायलिन बजाना !! वह वायलिन बजाने में मगन होती थी ...तो साहिल और प्राची घूम -घूम कर बातें करने में मगन होते थे!!
धीरे धीरे छुट्टियां बीत गई !! समय का पता ही नहीं चला !!
दूसरे दिन सभी लोग वापस दिल्ली जा रहे थे प्राची बहुत ही उदास थी !! चलते चलते हुए सभी लोग दरवाजे के बाहर तक आ गए !!
साहिल प्राची के पास से गुजरा और उसके कान के पास धीरे से बोला :--" प्राची आई लव यू "" और बिना इधर-उधर देखे... सीधे तीर की तरह निकल गया !!
?????????????
जाते समय साहिल के कहे गए ये तीन शब्द प्राची के कानों में शहद घोलते रहे और उसके लिए हर परिस्थिति से लड़ने के लिए ताकत बन गए थे!! उस दिन के बाद से उन तीन शब्दों के अलावा किसी चीज पर उसने ध्यान नहीं दिया था !!
समय धीरे- धीरे गुजर रहा था !! चुपके-चुपके प्राची और साहिल का प्रेम अपने पूरे चरम पर आ चुका था!! उनकी कॉलेज की पढ़ाई भी खत्म होने वाली थी !!
मगर प्राची और साहिल के इस प्रेम की भनक बरखा को नहीं लगी थी !!नहीं तो अब तक तूफान आ चुका होता ...क्योंकि बरखा की शादी साहिल से उनके पेरेंट्स में आपस में पहले ही तय कर ली थी!!!
बस रस्मों की औपचारिकता रह गई थी !! तभी बरखा के साथ साहिल को आने-जाने में छूट मिली हुई थी... उसी के साथ घूमता रहता था !!! हर समय चिपका रहता था क्योंकि बरखा के मम्मी पापा यह मान कर चलते थे कि बरखा के शादी तो साहिल से ही होनी है और किसी से नहीं !!!
क्रमशः***************
यह मन भी अजीब है!! मनुष्य को कठपुतली की तरह नचाता है !!
कोई मन में समाया है तो लोग उसके लिए हंसते-हंसते जान भी निछावर कर देते हैं ,....और मन से उतर गया तो जान ले भी लेते हैं!!!
कितना अंतर है दोनों दशाओं में !!
पर मन तो मन ही है !!!
जरा सी तारीफ से मन खुश हो जाता है तो कोई मुंह बनाकर भी देख ले तो मन उदास हो जाता है !!!
प्राची दिल्ली से वापस अपने गांव आ गई थी ....पर वह अपने साथ अपने मन में साहिल को भी लेकर आई थी !! अब उसके दैनिक जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया था !!
वह पहले की तरह उदास और चिढ़ी-चिढ़ी सी नहीं रहती थी... अब वह खुश रहती थी !! बरखा के यहां उसने देखा था कि सभी लड़कियां तितली जैसी लग रही थी ...तो क्या वे सब गोरी ही थी!!
उसने शीशे में अपना चेहरा देखा !! चेहरा तो उसका बहुत ही सुंदर था !! तीखे नैन नक्श थे !!
बचपन विदाई ले रहा था !! यौवन दस्तक दे रहा था !! वयःसंधि के इस मोड़ पर प्राची हैरान थी ....कि यह उसे क्या हो गया था??
अब वह खोई- खोई सी दिन में सपने देखती थी !! उसकी हीन भावना भावना घुल -घुलकर वही जा रही थी !! उसमें आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था!!
पढ़ाई में वह बरखा से कोसों आगे थी!! अपनी साथ -सज्जा पर उसने अब ध्यान देना शुरू कर दिया था !! अब उसे हर पल किसी का इंतजार रहता था !!
हर समय दिन -रात,, सुबह सवेरे वह यही सोचती रहती थी कि वह कब आएगा ?? उसने वादा किया था दोस्ती का.!!
प्राची का छोटा भाई प्रियम तीन साल का था !! वह उसको खिलाने के बहाने.... दूर एकांत में अपने खेतों की हरी भरी हरियाली में जा बैठती थी !!
इस प्रकार इंतजार करते -करते वह थक गई!! पर वह नहीं आया धीरे धीरे वर्ष बीत गया !!
और एक दिन वह बहुत उदास बैठी थी तभी किसी ने उसकी आंखें पीछे से, चुपके से आकर बंद कर दीं!!
" पहचानो !!" किसी ने कहा !!
उसने झटके से अपनी आंखों पर से हाथ हटा दिये..... उसके सामने सुंदर ,सजीला साहिल मुस्कुराता हुआ खड़ा था !!वह पहले से थोड़ा लंबा भी हो गया था और ज्यादा अच्छा लगने लगा था !!
और साहिल ने प्राची को देखा तो देखता ही रह गया !!!
"क्या यह वही प्राची है ?..चिपके बालों वाली??"
अब वह पहले वाली प्राची तो दूर दूर तक नहीं थी !! रेशमी खुले बाल हवा में लहरा रहे थे!!
वह हैरानी से बोला :-वाह !! मैंने तो पहचान ही नहीं पाया... तुम कितनी अच्छी ,"लग रही हो!!"
"सच !!" प्राची खुश होकर बोली !! और बरखा कहाँ है ??"
वह भी आ रही है !! अभी तो हम लोग आ ही पाए हैं !! अब छुट्टी का खूब मजा उठाएंगे!! मम्मी तो मुझे यहां आने ही नहीं दे रही थी!!
वह तो कहो कि आंटी जी थीं .... उन्होंने परमिशन दिला पाई... तब मैं आ पाया !!!
बरखा उस पर कब्जा जमाती हुई बोली :- आंटी नहीं वह तो मैं थी .....जो तुझे परमिशन दिला पाई ....और क्या ??
किशोरावस्था का निर्दोष, निश्छल प्रेम दीन दुनिया से बेखबर अपनी परवाज पर था!! साहिल के मन में जो गंवार लड़की अपनी सादगी से साहिल को भा गई थी.... अब वो उसके मन पर कब्जा जमा कर बैठ गई थी !! पर बरखा को इसकी भनक नहीं थी !!
बरखा, प्राची, साहिल तीनों ही खूब घूमते थे.. मस्ती करते ।।बरखा वायलिन बजाने की बहुत शौकीन थी !!बहुत ही अच्छा वायलिन बजातीं थी वह!!
बरखा को यहां के हरे -भरे नजारे बहुत अच्छे लगते थे ...और सबसे अच्छा लगता था ..... एकांत में बैठकर वायलिन बजाना !! वह वायलिन बजाने में मगन होती थी ...तो साहिल और प्राची घूम -घूम कर बातें करने में मगन होते थे!!
धीरे धीरे छुट्टियां बीत गई !! समय का पता ही नहीं चला !!
दूसरे दिन सभी लोग वापस दिल्ली जा रहे थे प्राची बहुत ही उदास थी !! चलते चलते हुए सभी लोग दरवाजे के बाहर तक आ गए !!
साहिल प्राची के पास से गुजरा और उसके कान के पास धीरे से बोला :--" प्राची आई लव यू "" और बिना इधर-उधर देखे... सीधे तीर की तरह निकल गया !!
?????????????
जाते समय साहिल के कहे गए ये तीन शब्द प्राची के कानों में शहद घोलते रहे और उसके लिए हर परिस्थिति से लड़ने के लिए ताकत बन गए थे!! उस दिन के बाद से उन तीन शब्दों के अलावा किसी चीज पर उसने ध्यान नहीं दिया था !!
समय धीरे- धीरे गुजर रहा था !! चुपके-चुपके प्राची और साहिल का प्रेम अपने पूरे चरम पर आ चुका था!! उनकी कॉलेज की पढ़ाई भी खत्म होने वाली थी !!
मगर प्राची और साहिल के इस प्रेम की भनक बरखा को नहीं लगी थी !!नहीं तो अब तक तूफान आ चुका होता ...क्योंकि बरखा की शादी साहिल से उनके पेरेंट्स में आपस में पहले ही तय कर ली थी!!!
बस रस्मों की औपचारिकता रह गई थी !! तभी बरखा के साथ साहिल को आने-जाने में छूट मिली हुई थी... उसी के साथ घूमता रहता था !!! हर समय चिपका रहता था क्योंकि बरखा के मम्मी पापा यह मान कर चलते थे कि बरखा के शादी तो साहिल से ही होनी है और किसी से नहीं !!!
क्रमशः***************
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