• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Horror Katil Haseena

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
Part 18


यह मन भी अजीब है!! मनुष्य को कठपुतली की तरह नचाता है !!

कोई मन में समाया है तो लोग उसके लिए हंसते-हंसते जान भी निछावर कर देते हैं ,....और मन से उतर गया तो जान ले भी लेते हैं!!!

कितना अंतर है दोनों दशाओं में !!

पर मन तो मन ही है !!!

जरा सी तारीफ से मन खुश हो जाता है तो कोई मुंह बनाकर भी देख ले तो मन उदास हो जाता है !!!

प्राची दिल्ली से वापस अपने गांव आ गई थी ....पर वह अपने साथ अपने मन में साहिल को भी लेकर आई थी !! अब उसके दैनिक जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आ गया था !!

वह पहले की तरह उदास और चिढ़ी-चिढ़ी सी नहीं रहती थी... अब वह खुश रहती थी !! बरखा के यहां उसने देखा था कि सभी लड़कियां तितली जैसी लग रही थी ...तो क्या वे सब गोरी ही थी!!

उसने शीशे में अपना चेहरा देखा !! चेहरा तो उसका बहुत ही सुंदर था !! तीखे नैन नक्श थे !!

बचपन विदाई ले रहा था !! यौवन दस्तक दे रहा था !! वयःसंधि के इस मोड़ पर प्राची हैरान थी ....कि यह उसे क्या हो गया था??

अब वह खोई- खोई सी दिन में सपने देखती थी !! उसकी हीन भावना भावना घुल -घुलकर वही जा रही थी !! उसमें आत्मविश्वास बढ़ता जा रहा था!!

पढ़ाई में वह बरखा से कोसों आगे थी!! अपनी साथ -सज्जा पर उसने अब ध्यान देना शुरू कर दिया था !! अब उसे हर पल किसी का इंतजार रहता था !!

हर समय दिन -रात,, सुबह सवेरे वह यही सोचती रहती थी कि वह कब आएगा ?? उसने वादा किया था दोस्ती का.!!

प्राची का छोटा भाई प्रियम तीन साल का था !! वह उसको खिलाने के बहाने.... दूर एकांत में अपने खेतों की हरी भरी हरियाली में जा बैठती थी !!

इस प्रकार इंतजार करते -करते वह थक गई!! पर वह नहीं आया धीरे धीरे वर्ष बीत गया !!

और एक दिन वह बहुत उदास बैठी थी तभी किसी ने उसकी आंखें पीछे से, चुपके से आकर बंद कर दीं!!

" पहचानो !!" किसी ने कहा !!

उसने झटके से अपनी आंखों पर से हाथ हटा दिये..... उसके सामने सुंदर ,सजीला साहिल मुस्कुराता हुआ खड़ा था !!वह पहले से थोड़ा लंबा भी हो गया था और ज्यादा अच्छा लगने लगा था !!

और साहिल ने प्राची को देखा तो देखता ही रह गया !!!

"क्या यह वही प्राची है ?..चिपके बालों वाली??"

अब वह पहले वाली प्राची तो दूर दूर तक नहीं थी !! रेशमी खुले बाल हवा में लहरा रहे थे!!

वह हैरानी से बोला :-वाह !! मैंने तो पहचान ही नहीं पाया... तुम कितनी अच्छी ,"लग रही हो!!"

"सच !!" प्राची खुश होकर बोली !! और बरखा कहाँ है ??"

वह भी आ रही है !! अभी तो हम लोग आ ही पाए हैं !! अब छुट्टी का खूब मजा उठाएंगे!! मम्मी तो मुझे यहां आने ही नहीं दे रही थी!!

वह तो कहो कि आंटी जी थीं .... उन्होंने परमिशन दिला पाई... तब मैं आ पाया !!!

बरखा उस पर कब्जा जमाती हुई बोली :- आंटी नहीं वह तो मैं थी .....जो तुझे परमिशन दिला पाई ....और क्या ??


किशोरावस्था का निर्दोष, निश्छल प्रेम दीन दुनिया से बेखबर अपनी परवाज पर था!! साहिल के मन में जो गंवार लड़की अपनी सादगी से साहिल को भा गई थी.... अब वो उसके मन पर कब्जा जमा कर बैठ गई थी !! पर बरखा को इसकी भनक नहीं थी !!

बरखा, प्राची, साहिल तीनों ही खूब घूमते थे.. मस्ती करते ।।बरखा वायलिन बजाने की बहुत शौकीन थी !!बहुत ही अच्छा वायलिन बजातीं थी वह!!

बरखा को यहां के हरे -भरे नजारे बहुत अच्छे लगते थे ...और सबसे अच्छा लगता था ..... एकांत में बैठकर वायलिन बजाना !! वह वायलिन बजाने में मगन होती थी ...तो साहिल और प्राची घूम -घूम कर बातें करने में मगन होते थे!!

धीरे धीरे छुट्टियां बीत गई !! समय का पता ही नहीं चला !!

दूसरे दिन सभी लोग वापस दिल्ली जा रहे थे प्राची बहुत ही उदास थी !! चलते चलते हुए सभी लोग दरवाजे के बाहर तक आ गए !!

साहिल प्राची के पास से गुजरा और उसके कान के पास धीरे से बोला :--" प्राची आई लव यू "" और बिना इधर-उधर देखे... सीधे तीर की तरह निकल गया !!


?????????????



जाते समय साहिल के कहे गए ये तीन शब्द प्राची के कानों में शहद घोलते रहे और उसके लिए हर परिस्थिति से लड़ने के लिए ताकत बन गए थे!! उस दिन के बाद से उन तीन शब्दों के अलावा किसी चीज पर उसने ध्यान नहीं दिया था !!

समय धीरे- धीरे गुजर रहा था !! चुपके-चुपके प्राची और साहिल का प्रेम अपने पूरे चरम पर आ चुका था!! उनकी कॉलेज की पढ़ाई भी खत्म होने वाली थी !!

मगर प्राची और साहिल के इस प्रेम की भनक बरखा को नहीं लगी थी !!नहीं तो अब तक तूफान आ चुका होता ...क्योंकि बरखा की शादी साहिल से उनके पेरेंट्स में आपस में पहले ही तय कर ली थी!!!

बस रस्मों की औपचारिकता रह गई थी !! तभी बरखा के साथ साहिल को आने-जाने में छूट मिली हुई थी... उसी के साथ घूमता रहता था !!! हर समय चिपका रहता था क्योंकि बरखा के मम्मी पापा यह मान कर चलते थे कि बरखा के शादी तो साहिल से ही होनी है और किसी से नहीं !!!


क्रमशः***************
 
Last edited:

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
Part 19


भाग 19

हरिश्चंद्र की जब नौकरी लगी थी ....और वह दिल्ली आए थे .. तो उनकी जान पहचान कौशलेंद्र से हुई!!!!

फिर उनकी जान पहचान दोस्ती में बदल गई !!और वह दोस्ती इतनी पक्की हो गई थी....कि फिर कभी नहीं टूटी!!

कौशलेंद्र की पत्नी मालती शांति की अच्छी सहेली बन गई थी । उनका स्वभाव भी खूब मिलता था!!!

धीरे- धीरे मेलमिलाप बढ़ता ही गया ....तो उन्होंने अपने बच्चों के विवाह बचपन में ही तय कर रखे थे !!!


अब बरखा और साहिल की कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी होने वाली थी !!!

हरिश्चन्द्र और कौशलेन्द्र ने निश्चित किया था ....कि अब इनकी शादी कर देनी चाहिए !!!! क्योंकि साहिल के बड़े भाई की शादी से भी लोग निपट चुके थे .....और अब सिर्फ साहिल की चिंता रह गई थी ।

हालांकि कौशलेंद्र की इच्छा थी....कि साहिल अपने पैरों पर खड़ा हो जाए!!! फिर उसकी शादी की जाए !!

मगर बरखा के पापा हरिश्चन्द्र चाहते थे.... कि शादी जल्दी से जल्दी हो जाए !!! तो वह भी अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाएं !!!


इसका जिक्र रात को मालती ने किया!!! तो साहिल ने कहा ...
पर मैं तो किसी और से शादी करना चाहता हूं!!!!

किसी और से ????

पर तुम तो बचपन से ही बरखा के साथ ही रहे हो!!...और उसे भली-भांति जानते भी हो !!! और वरखा को तो तुम चाहते भी हो!!!

ऐसा मैंने कब कहा???? कि मैं उसे चाहता हूं!!!

तो फिर इसका मतलब और क्या हम लगाएं?? जब तुम दिन रात उसी के साथ बने रहते हो!!!

अब फिर एकाएक उसे छोड़कर यह कौन सी लड़की आ गई है??

है एक लड़की ! वह वरखा की कजिन है!!!

ओह!!!! तो तू थोड़े दिन के लिए वहां क्या गया था?? कि यह गुल खिला आया ??


कैसी है वह ???उसके मां-बाप क्या करते हैं???

उसे आपने देखा होगा मां!!!

वह बरखा के भाई रितिक के पहले बर्थडे पर आई थी!!! मालती की आंखें सोचने के अंदाज में सिकुड़ गई !!!


अच्छा ! तो यह दस - बारह साल पहले की बात है!!!

फिर चुटकी बजाते हुए बोली!!!हां याद आया !!

एक निहायत काली - सी लड़की और उसके देहाती मां - बाप आए तो थे !!!

फिर वह व्यंग्यात्मक ढंग से मुंह बसनकर बोली.... फिर तो तुम्हारी पस्सन्द बहुत अच्छी है!!!!

मैंने तो सोचा था .....कि बरखा को ठुकरा कर जब तुमने दूसरी लड़की पसंद की है !!! तो उससे तो सुंदर ही होगी हुंह पता है!!! बरखा जैसी लड़की कहीं नहीं मिलेगी !!! दूसरे इतना दहेज लाएगी ....कि घर भर जाएगा !!!

उन फटीचरो से तुम्हें क्या मिलेगा ??? वह गंवार लड़की ?? बस ?

साहिल के चेहरे पर क्रोध भरी रेखाएं खिंच गईं:--" मम्मी वह गँवार नहीं है और न ही वह कुरूप है ,, माना कि वह बरखा की तरह सुंदर नहीं है लेकिन कई मायनों में वह बरखा से ज्यादा सुंदर है ।

"अपने विचार अपने तक ही रख !! मैं कहे देती हूं कि अगर तूने बरखा से शादी नहीं की ....तो फिर तू अपने बलबूते पर ही अपनी मनमानी करना !!! इस घर से तेरा नाता नहीं रहेगा !! अपना कमाकर खाना ....औकात नजर आ जाएगी!!"

फिर बात उसके पापा तक पहुंची तो हंगामा बरपा हो गया ...और बात यहां तक पहुंची कि अगर साहिल अपने मन की करेगा ....तो या तो वही इस घर में रहेगा ....या फिर उसके पापा !!!!

बस !! कमजोर दिल वाले साहिल का मनोबल टूट गया!! साहिल के सामने बहुत बड़ी दुविधा थी अगर वह प्राची को छोड़कर बरखा से शादी करेगा ....तो प्राची को नहीं भूल पाएगा ....यूं तो उसे बरखा से भी प्यार था!!!

पर ऐसी क्या बात थी जो बरखा का ...कयामत ढाने वाला रूप... प्राची के सामने हार गया था !!!


साहिल याद कर रहा था कि शुरू से ही उसने बरखा की आंखों में गर्व ही देखा था !! स्कूल से लेकर कॉलेज तक लड़के उसके आगे पीछे घूमते थे !! उससे बात करने के लिए लालायित रहते थे.!!
इससे बरखा का दिमाग बहुत चढ़ा हुआ था और वह साहिल से ऐसा व्यवहार करती थी ...जैसे वह उसे चाहती है तो एहसान कर रही है !!

वहीं प्राची की सादगी में समर्पण और मर मिटने वाला सच्चा प्यार था जिसने साहिल को बांध लिया था !!

बरखा जलती हुई रूपशिखा थी ..तो प्राची स्वच्छ शीतल जल की झील,,,,,बरखा तपती हुई दोपहर थी .....तो प्राची बदली की ठंडी फुहार !!!

यूं तो साहिल भी कम नहीं था !! कमोबेश उसके साथ भी वही हाल था जो बरखा का था ! उस पर भी लड़कियां मरती थी उसको भी एहसास था कि मैं कैसा हूं ??




☘️?☘️?☘️?☘️?☘️?☘️?☘️?☘️




थोड़े दिन के बाद प्राची के यहां खबर पहुंची कि साहिल और बरखा की सगाई है और आप सबको आना है !! यह खबर सुनकर प्राची को सहसा विश्वास ही नहीं हुआ कि उसके साथ इतना बड़ा धोखा हो सकता है !!

सगाई के दो दिन पहले ही प्राची अपने परिवार के साथ दिल्ली आई हुई थी !!

अवसर था बरखा और साहिल की सगाई का !!



प्राची की आंखें रो रो कर लाल हो गई थी ....जैसे ही वह साहिल से मिली ....तो उसने साहिल से इतना ही पूछा :--"मुझे धोखा क्यों दिया ?"

साहिल ने नजरें चुराते हुए कहा :--"मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं पर मैं मजबूर हूं .....मैं अभी अपने पैरों पर नहीं खड़ा हूं.... दूसरे मैं मम्मी पापा के सामने मजबूर हूं..... मैं उन्हें नहीं छोड़ सकता हूं !"

"तो मम्मी पापा से ही पूछ कर मुझसे प्रेम करते !!!! जाओ !! मैं कहती हूं कि मुझे धोखा देकर तुम भी चैन से नहीं रहोगे !! मेरी आह तुम्हें जीने नहीं देगी !!! बस मुझे कुछ नहीं कहना !!


सचमुच ही फिर साहिल कभी चैन से नहीं रह पाया !! सगाई के एक दिन पहले ही मालती को अटैक पड़ा और हॉस्पिटल तक जाते-जाते वह इस दुनिया से कूच कर गई !! सगाई टल गई !!


साहिल मन से प्राची को नहीं भूला था !! उसका गम उसे अंदर ही अंदर खा रहा था !!!! जिसके लिए उसने प्राची को ठुकराया .....वही उसकी मां ही नहीं रही थी अब !!

अब बरखा उसकी हमदर्दी में आई ....उससे प्यार जो करती थी!! यहीं से साहिल की बर्बादी शुरू हुई !! साहिल का भाई अपनी पत्नी के साथ जाकर जॉब के कारण दूसरे शहर में सेटल हो गया था !!

अब उसके पापा कौशलेंद्र और वह ....अकेले ही रह गए थे.... अकेला घर उसको काटने को दौड़ता था !! बरखा ने उसको संभाला !!! एक दिन वह उसके घर आई तो वह पड़ा -पड़ा बिसूर रहा था !!

उसने पहले मां को याद किया फिर प्राची का फोटो देखने लगा.... तभी बरखा ने अंदर कदम रखा !!

"कब तक मां का फोटो देखते रहोगे ?? यहां रहोगे तो यही हाल रहेगा !! चलो मेरे साथ !! साहिल की बांह पकड़कर उसे उठाते हुए बरखा ने कहा !!!




☘️?☘️?☘️?☘️?☘️?☘️?☘️?☘️



पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी!! बरखा की कई सहेलियां जो। उसी की तरह थी .....इस पार्टी की शोभा बढ़ा रही थी!! उनके साथ उनके बॉयफ्रेंडस आए हुए थे !!

कुल मिलाकर गहमागहमी का माहौल था !! हर तरफ कीमती चमकीले कपड़ों की नुमाइश और विदेशी परफ्यूम की खुशबू गमक रही थी !

मौका था बरखा की सहेली मिस कल्पना जोशी की बर्थडे पार्टी का!!! और उस पार्टी को यादगार बनाया जा रहा था बीयर से !!

बरखा साहिल के साथ दाखिल हुई तो कई जोड़ी निगाहें उन दोनों पर टिक कर रह गई !!! वाह!! इस पार्टी का सबसे खूबसूरत जोड़ा!"

कहकर उसकी सहेलियों ने चुटकी ली ,:-"कुछ भी कहो !!! आखिरकार साहिल पर हाथ मारा तुम्हीं ने ???

उधर जेंट्स साहिल से ईर्ष्या कर रहे थे !!!कि इतनी सुंदर लड़की रीझी भी तो साहिल पर ??धीरे- धीरे साहिल अपने सारे गमों को भूल गया और पार्टी का इंजॉय करने लगा !!


तभी उसके सामने बरखा आई और उसकी बांह पकड़ कर ले गई और एक युवक के सामने करती हुई बोली '--" अरे भाई सोमेन!!

"जरा इनको भी कंपनी दे दो !! यह घर पर पड़े- पड़े बहुत परेशान हो रहे थे ....मैं इन्हें ले आई हूं जरा इनको भी अपने जैसा चियरफुल बना दो !!"

ऐसा कहकर होंठ का कोना दबाकर वह थोड़ा मुस्कुराई और वापस सहेलियों के पास लौट आई !! उसके दोस्तों ने साहिल को घेर लिया और एक-एक पेग उसके लिए तैयार करके ले आए !! साहिल ने मना किया मगर वे बोले :--"अरे यार ! क्या औरतों की तरह न न न न करते हो !!

मर्दों की तरह ठाट से जियो !! जिंदगी के मजे उठाओ !! चलो तुम्हें मेरी कसम एक चखकर तो देखो !! यह खाली बीयर है और कुछ नहीं !! इससे कुछ नहीं होता !!

ऐसा कहकर धीरे से जाम उसके होठों से ही लगा दिया और जबरदस्ती एक घूंट पिला दिया !! इसके बाद तो यारों की होड़ लग गई कसम खिला- खिला कर एक घूंट पिलाने की !!

साहिल ने इससे पहले कभी ड्रिंक नहीं किया था !! आज पहली बार पीने से....... थोड़ी ही देर में वह नशे में आ गया !!!अब उसको हर जगह मस्ती ही मस्ती नजर आ रही थी !! अब वह पार्टी के रंग में रंग गया था !! खूब इंजॉय कर रहा था !!


उधर बरखा की सहेलियां बरखा को छेड़ रही थी !!

"यार बरखा !! तुम्हारा तो सब लोहा मान गए !!! तू चाहे तो ऋषि-मुनियों को भी अपना दीवाना बना सकती है !! अब बताओ कॉलेज का सबसे हैंडसम लड़का तुम्हारी मुट्ठी में है !!!

कौन सा ऐसा लड़का है जो तुम्हारी एक नजर के लिए नहीं तरसता ??"

"बरखा बड़े ही गर्व से मुस्कुराई !!

शालिनी बोली :-अब ऐसा भी नहीं है .... कि हर कोई इनकी नजरों के तीर से घायल हो जाए। !! बड़े-बड़े ऐसे पड़े हैं जो सुंदर से सुंदर लड़की आ जाए उसको भी नहीं गिनते !!"

"कल्पना बोली:--" ऐसा नहीं है !! हमारी बरखा से कोई नहीं बच सकता, !!!"

'अरे जाओ भी !""अभी भी ऐसे लोग हैं जो इसकी तरफ आंख उठाकर भी नहीं देखेंगे !!!

अब बरखा को भी गुस्सा आया !! वह भी अपनी तरंग में आ गई और अकड़ कर बोली :-"ऐसा कौन है जो मुझसे बच जाए ????.....

सोनी बोली :--"है ऐसा एक सिरफिरा !!!!



क्रमशः******************
 

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 20

बरखा बोली :- ":पर तुम लोग उसे कैसे जानते हो?? ' और उसी के पीछे क्यों पड़े हो??"

ऐसा कहकर उसने चारों तरफ देखा .. तो मोहिनी ने अपनी नजरें घुमा ली!! और अपनी आंखों की नमी को छुपाते हुए ..चश्मा लगा लिया!!

सहेलियों ने बताया कि ऐ. के. इंडस्ट्रीज का मालिक ...अंकित मल्होत्रा है ...अपनी मोहिनी का दिल उस पर आ गया !!और मोहिनी का उसकी वजह से शोभित से भी ब्रेकअप हो गया!!

इतने दिन उसके पीछे- पीछे घूमी.. और इसने खुद ही प्रपोज किया!! पर उस घमंडी ने इसे दुत्कार दिया!! अब बताओ जिसके पीछे -पीछे लोग घूमते हैं पर वह किसी को घास नहीं डालती !!

पर इसने उस अंकित के लिए अपने बॉयफ्रेंड को भी छोड़ दिया !! यह कम इंसल्ट की बात है ?? यह हम सबके लिए शर्म की बात है!! उसे नीचा दिखाना है..

मोहिनी कुछ सोचने लगी और कुछ कुछ भावुक हो गई!! हो क्या गई ....कर दी गई ....

कुछ बियर का नशा.. यह बरखा ने नई हाई - सोसाइटी ज्वाइन की थी!!! यह हाई - सोसाइटी के बड़े घर के बेटे बेटियां थे!

जिनके पेरेंट्स अत्यधिक बिजी होने के कारण जानते ही नहीं थे.. कि उनके बच्चे इस समय कहां हैं ??

हालांकि बरखा के पेरेंट्स इतने अमीर नहीं थे पर बरखा ने अपनी सुंदरता के बल पर.. इन में अपनी पैठ बना रखी थी !! इन लोगों के महंगे महंगे शौक थे!!

इन सबके साथ -साथ अब बरखा को भी इनका चस्का लगने लगा था !! और आज वह साहिल को भी यहीं खींच कर लाई थी !!

सहेलियों और मोहिनी की बात सुनकर बरखा किसी स्पेशलिस्ट कि तरह बोली :- "कितनी उम्र का है?"

लगभग पैंतीस - छत्तीस का होगा !!

बरखा ने आश्चर्य व्यक्त किया :- " इतनी उम्र तक शादी नहीं की .. और कोई अफेयर भी नहीं ..कमाल का बंदा है !!

मोहिनी ने बताया :- "कोई कमाल का बंदा -संदा नही है साला !! कॉलेज लाइफ से ही इसका एक लड़की के साथ अफेयर चल रहा था !!

यह बहुत सीरियस था इसीलिए कई सालों तक वह इसे उल्लू बनाती रही ... फिर इससे भी अमीर आदमी से शादी करके विदेश चली गई!!!

सुनते हैं इसने सुसाइट भी करने की कोशिश की थी!!! पर बच गया!! बस उसी दिन से यह सब लड़कियों को धोखेबाज समझता है!!

सोनी बोली :- " इसको फंसाना टेढ़ी खीर है!! यह नहीं चक्कर में आने वाला .. बरखा के बस की बात नहीं है!! "

बरखा को ऐसा लगा कि उसकी ब्यूटी का निरादर हो रहा है!! उसके घमंड ने सिर उठाया!! " कौन कहता है कि मेरे बस की बात नहीं .. और जो मैंने उसे अपने बस में कर लिया तो ..""

सोनी आगे बढ़कर बोली :- " तो तू जो भी कहेगी वही करेंगे !!

मोहिनी बोली :- " तू ऐसा कर के दिखा दे.. मैं यह हीरे का नेकलेस शर्त में लगती हूं.. अगर तू जीत गई तो यह हार तेरा!!

उस जगमगाते हीरे के नेकलेस को खरीदने की सामर्थ्यता बरखा में नहीं थी!! वह गर्व से गर्दन ऊंची करके... सब की ओर देखती हुई बोली :- " आप सभी गवाह है इस शर्त के !!

उस शाम की पार्टी ने एक तूफानी कहानी की नींव रख दी थी!! जिसमें लालच .. धोखे ..के रंग भरे थे!!.



?☘️?☘️?☘️?☘️




साहिल के जीवन में बड़ा बदलाव आया था !! राहें बदल गई थी!!! राही भी बदल गए थे !!

साहिल ने अपने पापा के दबाव में ताबड़तोड़ कई इंटरव्यू दे डाले !!

उसे खन्ना इंडस्ट्रीज में जॉब मिल गई वो भी मैनेजर की !! थोड़े ही दिनों में उसने अपनी कार्यकुशलता से अपने मालिक के मन में अपना प्रभाव जमा लिया था!!

एक दिन साहिल अपने रूम में काम कर रहा था कि तभी उसे चपरासी आकर बोला :- " आपको मालिक बुला रहे हैं !!

थोड़े ही देर में वह मिस्टर खन्ना के सामने उपस्थित हुआ मालिक ने बैठने का इशारा करके कहा :- " यह तो तुम्हें पता ही है कि इस साल हमारी कंपनी मुनाफे में जा रही है ...

पर हम ए.के. इंडस्ट्रीज की बराबरी नहीं कर पा रहे हैं!! कोई ऐसा काम करो .... या सोचो कि क्या हो सकता है ?? कैसे हम उनकी पॉलिसी जान सकते हैं ??


उनकी जानकारी हमें चाहिए कोई भी रास्ता अपनाओ फेयर या अनफेयर ...एवरीथिंग इज फेयर इन व्यापार !! "

साहिल की समझ में नहीं आया कि वह क्या जवाब दे !!

मिस्टर खन्ना बोले :- "तुम्हारी सैलरी बढ़ा दी जायेगी.. इसमें तुम को भी फायदा होगा!! "

साहिल वापस आ गया!! उसके दिमाग में उत्तल पुथल मची थी उसके विचार तेजी से बदलने लगे थे !!

चेतन मस्तिष्क उसे विगत की याद दिलाता था!!

इसलिए अब उसे सपनों में डूबने - उतरना अच्छा लगता था !! दिन में अपनी ड्यूटी करता... फिर शाम को बरखा के साथ जाकर होटलों ...क्लबों ..और पार्टियों में रंगिनियों में खो जाता !!

अब उसके खर्चे बहुत ही हाई-फाई हो गए थे!! उसके दस गुने खर्चे बरखा के थे!!


क्योंकि उसकी आदत हाई- सोसाइटी की लेडीस में भी सुपर रहने की हो गई थी !!
.
महंगा मेकअप... ज्वेलरी... ड्रेसेज में मैचिंग एसेसरीज में दीवाला निकलता था ...ऊपर से इंपॉर्टेंट सामान यूज करना !! स्टेट्स सिंबल था !!

साहिल ने अपने मालिक की बात बरखा को बताई तो वह खुशी से उछल पड़ी!!! थैंक गॉड जो तुमने इतना अच्छा अवसर हमें कमाने के लिए दिया !!!

पर ये कैसे हो पाएगा??

तुम चिंता ना करो ..सब ठीक हो जाएगा ...अब तुम देखना जो मैं कहती हूं वह तुम करते जाओ!!



?☘️?☘️?☘️?☘️




अंकित मल्होत्रा ए. के. इंडस्ट्रीज का मालिक... इस समय बहुत ही परेशान सा लग रहा था ...उसके सवेरे - सवेरे आने वाले पेपर के साथ एक अत्यंत खूबसूरत गुलाबी रंग का कार्ड आया था !!

जिसमें उसका नाम लिखा था ..

उसने जैसे ही उस कार्ड को खोला वैसे ही मदहोश कर देने वाली खुशबू सारे कमरे में फैल गई ...और वह खुशबू उसकी सांसों के साथ उसके मन में बस गई

कार्ड को उसने उलट-पुलट कर देखा... खूबसूरत फूलों के बीच दिल बना हुआ था और उस पर बड़ी ही स्टाइल से लिखा हुआ था माइ लव !!

अंकित ने बहुत सोच-विचारा पर उसे दूर दूर तक कोई ऐसा नजर नहीं आया है जो उसे कार्ड भेजे !!

उसने बड़ी ही लापरवाही से कार्ड को एक किनारे डाल दिया... और बेचैनी से टहलने लगा!!

इस कार्ड ने उसके बीते दिनों को खोल कर उसके सामने रख दिया!!

जब वह नया-नया कॉलेज गया था ..तो रिचा ने आगे बढ़कर उससे दोस्ती की !!

फिर धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई ..उसने रिचा के लिए इतना रुपया पानी की तरह बहाया कि जिसका कोई हिसाब नहीं!!

फिर कई सालों तक उसके साथ खेल खेलने के बाद अंकित से बेहतर लड़के के साथ शादी करके विदेश शिफ्ट हो गई थी!!!

फिर उसके लिए पत्र आया था कि कैसे उसने मजबूरी में शादी की...

उसी दिन से अंकित को प्यार और शादी के नाम से ही नफरत हो गई थी .. पेरेंट्स ने बहुत जोर डाला था!! पर थक हार कर अब वे चुप हो गए थे !!

उसने अपने को काम में इतना खपा दिया था कि उसे समय ही नहीं मिलता था !! इस बीच में उसे कई लड़कियों ने अपनाना चाहा पर उसने सबको दूर छोड़ दिया !!!

किसी को अपने पास नहीं फटकने दिया था ..एक ढर्रे पर जीवन चल रहा था!!!

पर अचानक आज उसके जीवन में इस कार्ड ने हलचल मचा दी.. कुछ तो बात थी इस कार्ड में !!!

अंकित उस कार्ड को बहुत देर तक घूरता रहा !! फिर उसका को उठा लिया !! फिर ध्यान से देखा!!कार्ड का धीरे-धीरे असर हो रहा था !!

दूसरे दिन फिर एक कार्ड आया...

उसी तरह का खुशबू से महकता हुआ...जैसे गुलाबों का गुलदस्ता हो!! अब उसमें दिल का आकार दूसरी जगह बना था ..और लिखा था ...

" जब से तुमको देखा है.. एक हलचल सी है दिल में !! "

अंकित ने इस कार्ड को नहीं फेंका.. उसने कई बार इस कार्ड को देखा !! फिर दूसरे दिन फिर एक कार्ड आया !!

वह सोच में डूब गया ...कि आखिर यह कौन है जो हर बार नए - नए शब्दों में प्यार का इजहार करती है!! मैंने जब उसे देखा नहीं फिर वह मुझ को कैसे जानती है ???

वेलेंटाइन डे के एक दिन पहले उसका कार्ड फिर आया !! उसके इस कार्ड में एक लंबा सा खत... और फोटो था !! फोटो में वह बड़ी ही आकर्षक मुद्रा में मुस्कुरा रही थी!!

अंकित ने जब उस फोटो को देखा... तो पहले तो पलकें झुकाना भूल गया!! क्या इस धरती पर ऐसी भी सुंदरी हो सकती है!!

उसकी शादी ना करने की प्रतिज्ञा .. और लड़कियों से नफरत.... धरी की धरी रह गई !!

और जब उसने उस लंबे खत में उसके प्यार भरे दिल का हाल पढ़ा कि कैसे उसने अंकित को देखा ....तब से उसकी दीवानी हो गई!!

और हर पल उसी के ख्याल में डूबी रहती है !!!

और उसमें यह भी लिखा था कि अगर उसे प्यार मंजूर है तो वैलेंटाइन डे की पार्टी करे!!!

तो वह समझ जाएगी ...और वह भी शामिल होगी... और उसके साथ डांस करेगी !!!

और वह शाम उसके जीवन की सबसे हसीन शाम होगी... अंकित उस हसीना के रूप में पूरी तरह उलझ चुका था !!

उसने पार्टी करने का निश्चय किया !!! उसने बड़ी ही भव्य पार्टी का आयोजन किया। !!

और बड़ी ही बेसब्री से उस हसीना का इंतजार करने लगा .....

क्रमशः**************
 

kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
10,239
38,942
259
बहुत खूब.............. ये दिखावा................और खुद को दूसरों से ज्यादा अहम साबित करना.....................
इसी जिद ने नींव रखी.............मौत और बरबादी के खेल की
 
  • Like
Reactions: Aakash.

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 21

ए.के. इंडस्ट्रीज के मैनेजर अभिलाष बाबू खा-पीकर सोने के लिए अपने बेडरूम में पहुंचे ही थे... कि उनके फोन पर अनजान नंबर से कॉल आई!!

हेलो!! अभिलाष जी !!"

अभिलाष बाबू चौंक पड़े --"आप कौन ?"

" मैं कोई भी हूं- पैसा कमाना चाहते हो ?"

न,न अब कुछ भी ना पूछना!! मुझे पता है तुम अपनी बेटी की शादी जिस घर में करना चाहते हो...... वहां के लिए तुम्हारे पास इतने रुपए नहीं हैं । बेटे का एडमिशन तुम अच्छे कॉलेज में नहीं करवा सकते किराए पर रह रहे हो अभी भी तुम्हारा अपना घर नहीं है ......

तुम कौन हो ???मेरे बारे में इतना कैसे जानते हो ???

अभिलाष बाबू ने पूछा !!!

मैं तुम्हारे बारे में सब जानता हूं!!! पहले तुम कोलकाता मे थे..... तुम्हारा बहुत सा - धन बिजनेस में बर्बाद हो गया ....फिर कंगाल होकर तुमने नौकरी की!!! सच है ना!!!

हां!!! पर इन बातों से क्या???

इन बातों का यही मतलब है कि अगर तुम ऐसे ही जॉब करोगे तो यह सारे काम नहीं निपटा पाओगे ???

तुम्हारी सैलरी में खर्चा तो ठाठ से चलेगा पर यह सारे काम तुम्हारी मनमर्जी से नहीं हो पाएंगे !!!

अगर चाहो तो इनकम का रास्ता खुला है ....बस मेरा थोड़ा सा काम करना होगा !!

क्या काम करना होगा ??अभिलाष लालच में आने लगा था !!!

ज्यादा कुछ नहीं !!! डेली - थोड़ी सी जानकारी बस ।

किस प्रकार की ??

अरे घबराओ मत !! उससे किसी का कुछ नुकसान नहीं होगा !!!

अगर राजी हो तो मैं तुमसे मिलने तुम्हारे ऑफिस आऊं !!

हां इतना मैं वादा करता हूं .....कि तुम पर कुछ आंच नहीं आएगी और तुम लाखों कमा लोगे।

अभिलाष हिचकिचाया !! थोड़ी देर तक असमंजस में रहा ।वह निश्चय नहीं कर पा रहा था ...…कि जो भी अजनबी उससे बात कर रहा है !!! वह भरोसे के काबिल है कि नहीं ??

फिर उधर से आवाज आई ....क्या सोच रहे हो??

किस्मत बार-बार दरवाजे पर दस्तक देने नहीं आती !!! वह केवल एक बार ही मौका देती है !!!

तुम्हारे सारे काम बन जायेंगे ........अभिलाष ने अटकते- अटकते कहा .....तुम कल ऑफिस में आकर मिलो ।

यह हुई ना बात!!! उधर से खुशी भरी आवाज आयी !!!

यह तुमने समझदारी से काम लिया.... फोन डिस्कनेक्ट हो गया।
अभिलाष ने उठकर एक गिलास पानी पिया ।




************************************



अगले दिन साहिल अभिलाष के सामने बैठा हुआ उसका ब्रेनवॉश कर रहा था - जैसा उसका बरखा ने किया था !!!

वरखा ने उसे समझाया था ......कि देखो यहां अगर धर्मात्मा,ईमानदार बनोगे तो ऐसे ही मुंह ताकते रह जाओगे ......जमाने के साथ चलना है तो जमाने के तौर-तरीके अपनाने होंगे ......वरना तुम पिछड़ जाओगे!!! और लोग तुम्हें रौंद कर आगे चले जाएंगे!!!

आखिरकार साहिल उसकी बातों से सहमत हो गया था ........उसी ने सलाह दी थी कि अगर प्रतिद्वंदी को पछाड़ना है तो उसके राज हासिल करो और वह जो कदम उठाने वाला है...... उससे पहले ही उठा लो और उसी के दावं से उसे चित कर दो!!!तुम ए .के. इंडस्ट्रीज की सूचनाएं हासिल करो .....कितना शैतानी दिमाग था बरखा का !!!

वही काम अब साहिल कर रहा था। साहिल ने कल रात में अभिलाष को फोन किया था... तो आधा राजी तो कल ही कर लिया था बाकी आज उसे समझा कर पूरी तौर से अपनी ओर मिला लिया ......अब अभिलाष काम तो ए.के.इंडस्ट्रीज में करता था..... पर जिस थाली में खा रहा था उसी में छेद कर रहा था!!!

यहां की इंफॉर्मेशन साहिल को दे रहा था..... फलस्वरूप ए.के.इंडस्ट्रीज को मिलने वाले ऑर्डर्स और कांट्रेक्ट खन्ना इंडस्ट्रीज वाले उड़ाने लगे !! लगातार ऐसा होने से अंकित मल्होत्रा चौका .... जो हमेशा एक एक दूसरे को कड़ी टक्कर देते थे .....अब उनमें से एक धराशाई होने लगा था ......दूसरा लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा था!!!!!

अंकित बात की तह तक जाना चाहता था कि अचानक ऐसा क्यों हो रहा है ???

अभिलाष को वास्तव में लाखों का फायदा होने लगा!! बहुत पुराना और विश्वस्त होने के कारण उस पर किसी ने शक नहीं किया ....पर जहां विश्वास होता है वहीं पर विश्वासघात होता है !!



*******************************




अंकित मल्होत्रा पर उस अनजानी हसीना का ऐसे ही जादू नहीं चला था !! इश्क के इस खेल की वह शातिर खिलाड़ी साबित हो रही थी !! मकड़ी जैसे शिकार को फांसती है तो अपना जाल कसती जाती है और धीरे-धीरे शिकार के करीब आती जाती है!!! जब शिकार को बिल्कुल जकड़ लेती है ....अपने मकड़जाल में फांस लेती है...... तब वार करती है और शिकार बचकर नहीं जा सकता !!!

बिल्कुल उसी तरीके से उसने धीरे- धीरे अपना जाल फेंका था पहले धीरे से अपना कार्ड भेजकर एक उत्सुकता जगा दी थी ...फिर जब तक वह इस सोच से बाहर नहीं आ पाया कि..... कौन हो सकता है जो मुझे कार्ड भेज रहा है ??....तब तक दूसरा कार्ड भेज दिया!!

जब अंकित की जिज्ञासा चरम पर पहुंच गई .....तब उसने अपना फोटो भेज दिया..... अंकित उसी के विचारों में उलझ कर रह गया था ......और फोटो तो उसका ऐसा था कि.... उस में गजब की कशिश थी .....उससे वह नहीं बच सका था .....और जो कसम खाए बैठा था कि कभी किसी के चक्कर में नहीं पड़ेगा.... वह इस समय उस अंजानी हसीना का बेकरारी से इंतजार कर रहा था!! पलके बिछाए बैठा था!!!

उसका जादू अंकित पर इस कदर छा गया था कि जिसको देखा नहीं केवल उसके कहने से उसने बड़ी पार्टी कर डाली थी !!!!!

बस अब इंतजार था उसका .....जिसके दीदार के लिए वह बेचैन था उत्सुकता आपने इतने चरम पर थी कि उसका एक-एक पल भारी बीत रहा था और वह बाहर जाकर बार- बार पता कर रहा था कि अभी वह आई है या नहीं!!

आखिरकार वो घड़ी आ ही गई अभी तक जिसको वह फोटो में देख रहा था ..,.वह अब उसके सामने थी ......उस पार्टी की शान ....

चमकीले नीले रंग का स्लीवलेस डीप नेक का गाउन पहने वह चमक रही थी!!! उस डार्क नीले रंग में उसका गोरा रंग और भी दमक रहा था!! सुराही दार गर्दन में हीरो का हार जगमगा रहा था और उससे मैच करते हुए हीरे के ही कर्ण फूल कानों की शोभा बढ़ा रहे थे!!


पार्टी अपने पूरे शबाब पर थी उसी समय जब उसने वायलिन बजाना शुरू किया तो सभी मंत्रमुग्ध उसकी मनमोहक धुनों को सुनते ही रह गए !!

सौंदर्य और कला का ऐसा अनूठा संगम जैसे जादू बिखेरा था .....और वह शाम अंकित मल्होत्रा की यादगार शाम बन गई!!! बहुत देर तक उसने उसके साथ डांस किया और फिर जब विदा होने लगे तो अंकित का दिल उस हसीना की मुट्ठी में था।


क्रमशः****************
 

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 22

अभिलाषाओं का कोई अंत नहीं होता है... एक पूरी हुई तो दूसरी उत्पन्न हो जाती है !!! !रक्तबीज की तरह विस्तार हो जाता है!!!

बरखा ने जो ऐयाशियों का रास्ता अख्तियार किया था ..वह बेहद खर्चीला था !!

साहिल से वह प्रेम तो करती थी पर उसकी सारी डिमांड्स वह पूरी नहीं कर सकता था!! इसके अलावा उनकी अभी शादी भी तो नहीं हुई थी!!!

बरखा सारी बात साहिल को नहीं बताती थी वह डबल क्रॉस का खेल खेल रही थी !!

हालांकि वह साहिल को चाहती जरूर थी पर ... उसकी नजर में उसकी पर्सनल लाइफ अपनी थी ...जिसमें वह किसी की भी दखलंदाजी पसंद नहीं करती थी !! उसमें वह अपनी मर्जी से जीने के लिए स्वतंत्र थी !! शुरू से ही अत्यधिक लाड़ - प्यार में वह बहुत उद्दंड हो गई थी !! वह समझौता नहीं कर सकती थी!!!

दूसरी बात जब तक उसके पापा हरिश्चंद्र जिंदा थे ...तब तक उस पर तब भी अंकुश था!!! उनके बाद वह बिल्कुल ही बेलगाम हो गई थी !! उसकी मां शांति देवी का उस पर कोई भी जोर या दवाब नहीं रह गया था!!


उसकी मां उसकी हरकतों के बारे में जानती थी... पर अब वह लाचार थी !!! कुछ नहीं कर सकती थी !! दूसरी बात उसे साहिल को सौंप कर वह निश्चिंत थी !!

बरखा कहने के लिए जॉब करती थी !! अपने अंधाधुंध खर्चों को पूरा करने के लिए उसकी नजर में ये थोड़े बहुत अफेयर्स .....कोई खास बात नहीं थी !!!

वह साहिल को भी उसी रास्ते पर ले गई.....और दोनों ही आलीशान जिंदगी जी रहे थे !!!

इसी बीच नए - नए दोस्तों से मिलकर.. नित्य नए-नए होटल और क्लबों में जाकर साहिल शराब और जुए का भी आदी हो गया था !!!

अच्छी भाषा में कहें तो गैंबलिंग और सट्टेबाजी का शौकीन हो गया था!!

जब उसे रुपयों की जरूरत पड़ती तो फौरन उसके दोस्त उसे मुहैया करा देते थे... जिससे उस पर लाखों का कर्ज हो गया था
...

जब वह स्वयं कर्जदार हो गया तो अपनी खूबसूरत महबूबा की डिमांड कैसे पूरी करता यह उसे पता नहीं था!

पूरी सिचुएशन को भांपकर बरखा ने भी इधर -उधर शिकार ढूंढना शुरू किया .. इसी बीच उसकी सहेलियों ने शर्त लगाई ....उसने हीरो का हार जीत लिया....

लेकिन मूर्ख बनाने के लिए जो शख्स मिला ...वह इतना मालदार आसामी होगा ...या उसे पता नहीं था !! अब वह तन - बदन से उस शिकार को साधने में लग गई ....

लेकिन उसने अंकित से अपनी नज़दीकियों के बारे में साहिल को नहीं बताया क्योंकि वह पैसा तो चाहता था पर ... यह नहीं चाहता था कि बरखा उसे छोड़कर किसी और से प्यार करे!!




??????????????





जिस प्रकार बरखा ने साहिल को अंकित की भनक नहीं लगने दी !! उसी प्रकार अंकित को साहिल के बारे में कुछ नहीं बताया !!

अंकित इस समय बरखा के हुस्न के नशे में पूरी तरह डूबा हुआ उस पर अपनी दौलत बेहिसाब लुटा रहा था!!

बरखा जीवन की रंगीनियों का आनंद उठा रही थी !! अंकित ने उसे अपने मन मंदिर की देवी बना रखा था !!! उसके जीवन से मायूसी दूर हो चुकी थी !!!

और जिंदगी प्यार के चिरागों से रोशन थी !!! अब वह सुबह की कोमल धूप में बरखा की मुस्कान देखता ....

तो शाम की उतरती परछाइयों में बरखा की उदासी ढूंढ कर ...झटपट कार निकालता और बरखा के साथ लॉन्ग ड्राइव पर निकल जाता !!!

और कहीं दूर एकांत में झील के किनारे घंटों तक उसे निहारता रहता.. वर्षा की हल्की फुहारों में उसके साथ भीगता - भगता और मस्ती करता था !!!

जब इतना सारा समय बरखा उसके साथ लगाती तो वह साहिल से नहीं मिल पाती!! जब साहिल उसे फोन करता ....तो कभी- कभी ऐसा होता कि वह अंकित के साथ घूम रही होती.....तो वह फोन रिसीव नहीं करती !! और साहिल से बहाने बना देती !!

साहिल को नित नए नए बहाने सुनकर... झुंझलाहट होती ...कि बरखा अब उससे इतना कम क्यों मिलती है !! उसे बरखा पर शक होने लगा !!

उसने जब एक दिन बरखा का पीछा किया.... तो उसने बरखा को अंकित के साथ जाते देखा !!! तो उसे बहुत क्रोध आया !!!

उसने अंकित की छानबीन कराई तो उसे यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि जिस अभिलाष को उसने अपना जासूस बना रखा था यह उसी कंपनी का मालिक है !!!

एक पल के लिए उसने कुछ सोचा... फिर उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी!! अब बरखा पर उसका क्रोध नहीं रहा !!

उसने बरखा से फोन करके तुरंत आने को कहा... अब उसे आगे की कार्यवाही करनी थी !! बरखा को देखते ही साहिल उसकी तरफ लपका ...

और उसे गले से लगाते हुए बोला :- " बरखा! मुझे तुमसे बहुत जरूरी बातें करनी थी ".... बरखा उसके इस अचानक भावावेश से चकित थी !!!

साहिल ने गंभीर होते हुए पूछा :- "आजकल किससे इश्क लड़ा रही हो ?? मुझे भूल गई ....फोन तक नहीं उठाती हो !! "



बरखा थोड़ा चौंकते हुए और मासूम बनते हुए बोली :- " कोई नहीं है ?? मैं किस से इश्क चला रही हूं??? तुम्हें झूठी खबर मिली होगी !!"

. "मैंने खुद तुम्हें उसके साथ सैर सपाटे पर जाते हुए देखा है !!"

वह तो मेरी सहेलियों ने शर्त लगाई थी तभी..... पूछ लो ना जाकर उनसे मै उनके नाम ....

रहने दो !! मैं तो बस वैसे ही कह रहा था... वैसे अभिलाष इसी की कंपनी का मैनेजर है?? अब तो यह अच्छा रहा ...इधर में अभिलाष को मुट्ठी में करता हूं!!! उधर तुम अंकित को अपने बस में कर लो....!!

फिर हमारी पांचों उंगलियां घी में... और सिर कढ़ाई में रहेगा!!

लेकिन शुरुआत अभिलाष से करते हैं!! साहिल ने मुस्कुराकर पूँछा :- " वैसे वह कैसा है?? यह पता करना होगा ...

मेरे साथ एक बार चलना .... तुम्हारी मदद की जरूरत होगी ...अगर रसिक हुआ तब तो आसानी रहेगी!! वीडियो आसानी से बनाएंगे !!

और अगर ज्यादा धार्मिक हुआ तो थोड़ी दिक्कत होगी ....

फिर बरखा और साहिल ने अभिलाष के जोरदार फोटोस तैयार किए.... जो एक शरीफ उम्रदराज और सीधे साधे व्यक्ति के लिए आफत की पुड़िया थे!!!

दूसरे फाइल्स की गुप्त सूचनाएं देने और पैसे लेने के फोटोस और वीडियो क्लिपस से उन्होंने ने अभिलाष को चूसना शुरू दिया ....

और उसे लगने लगा कि वह कौन सी घड़ी थी जब वह साहिल से मिला.. और उसकी बात मान बैठा था.... अब इतनी उसकी हैसियत तो नहीं थी कि जो हर समय उसकी डिमांड पूरी करता!!

क्रमशः*************
 

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 23

धीरे-धीरे समय बीत रहा था!! अभिलाष अब बरखा और साहिल की शक्ल नहीं देखना चाहता था!! क्योंकि उसे अब अपने ऑफिस में हेराफेरी भी करनी पड़ती थी !!

और इसका उसे कुछ लाभ भी नहीं मिलता था.... मालिक के समय से काम करते- करते अब वह मालिक के बेटे अंकित के साथ काम कर रहा था.... उस पर आंख मूंद कर विश्वास किया जाता था....!!

इसलिए उसे यही डर सताता रहता था कि ...कहीं मेरी हेराफेरी खुल गई.... तो मैं मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहूंगा !!

अब वह बहुत उकता चुका था ....और इन सनीचरों से मुक्ति चाहता था !!! अब तो वह बरखा को चुड़ैल.... और साहिल को राक्षस समझता था !!!

हर समय इसी उधेड़बुन में रहता था ....कि इन से कैसे पीछा छुड़ाया जाए ??

पाप का घड़ा धीरे धीरे भर ही जाता है..... यह तो सर्वविदित है!! अब सब अपनी -अपनी मंजिल के करीब आ रहे थे!!

बरखा ने जो दो नावों की सवारी कर रखी थी.... वह अब संभालना मुश्किल हो रही थी !!!

बरखा ने अंकित को अपना दीवाना तो बना रखा था पर .....वह एक सीमा तक ही थी!!

कई बार अंकित भावुक होकर उससे फिजिकली आगे बढ़ना चाहता ....तो बरखा पीछे हट जाती !!

वह उस पर शादी के लिए दबाव डाल रहा था!! पर वह टाल रही थी... अब आजकल इस बात ने जोर पकड़ लिया था !!

अंकित ने शादी की जिद ठान रखी थी ....बरखा ने इस बीच काफी गहने ...कैश... जमा कर लिए थे!!

यानी अब इधर से भी मामला लगभग पूरा होने वाला था ..!! अब उससे जो मिलने वाला था वह मिल चुका था .....अब वह उससे पीछा छुड़ाने की ताक में थी..एक दिन वह घटना घटी... जिससे एक ही झटके में उसका अंकित से संबंध टूट गया !!




???????????




यह एक खुशनुमा शाम थी ...सवेरे ही बरखा अंकित के यहां से गई थी !! इसीलिए निश्चिंत होकर शाम को उसने ....आगामी प्रोग्राम तय करने के लिए..... और घूमने के लिए .....साहिल के साथ खूबसूरत फूलों वाले पार्क का रुख किया !!!

खुशनुमा शाम फूलों की खुशबू से और भी नशीली थी ....साहिल आज बरखा को बहुत जिद करके यहां लाया था !! कई वर्षों पहले वह यहां आता था!!!


वह समय पीछे छूट गया था!!! पर तब की यादें फिर से ताजा हो गई !!!

वह बरखा की गोद में सिर रख कर लेट गया.... और बरखा उसके बालों में धीरे-धीरे उंगलियां फिरा रही थी !!

साहिल ने उसके हाथों को थाम लिया ...और उसकी आंखों में देखते हुए बोला ....."याद है बरखा कभी हम यहां बहुत आते थे.... कितना अच्छा समय था....

आज हम कहां से कहां पहुंच गए..... मम्मी के जाने के बाद जैसे कुछ रहा ही नहीं था!!! "

मन करता है कि फिर से वही पहुंच जाएं .....

.बरखा आश्चर्य से बोली ...आज कैसी बहकी बहकी बातें कर रहे हो ??

सच कहता हूं..... मुझे कभी पसंद नहीं था .....कि मैं ऐसा जीवन जियूँ !!!

क्या आज ड्रिंक नहीं किया ???? जो इस प्रकार की बातें करते हो....

तो सुनो बरखा .....मैं तुम्हें सच बताता हूं.. मैं पीता ही इसलिए हूं.... ताकि मैं उन बातों को भूल जाऊं.... जो मेरे मन को कचोटती है....!!

मैं इस दुनिया को भी भूल जाना चाहता हूं !! जो दूसरों की परवाह नहीं करती!!! मैं इस रास्ते को छोड़कर....? सुकून की जिंदगी जीना चाहता हूं !!!

मुझ पर दस बारह लाख रुपए का कर्ज है..... एक बार वह निपट जाए बस ....मैं तो फिर सब चीजों से तौबा कर लूंगा....!!

बरखा तुम मुझसे कितना प्यार करती हो?? तुम मेरा साथ दोगी?? पहली बात तो यह है कि मेरी इनकम में तुम आराम से रहोगी !!!

पर फिर भी अगर कुछ कमी हो तो तुम संभाल लेना!! बोलो बरखा !!

बरखा हिचकिचाते हुए बोली......" हां हां क्यों नहीं ...अच्छा मैं अब पानी पीकर आती हूं ....!!

वह उठ कर चल दी.... तभी जैसे भूचाल आ गया.... वह मुड़ी तो देख कर दंग रह गई.....!!

अंकित वहां मौजूद था !! और साहिल से उसकी हाथापाई हो रही थी!! किसी ने खबर करके अंकित को लाकर खड़ा कर दिया था!!!

क्रोध में भरे अंकित ने आते ही हाथापाई शुरू कर दी थी!!

क्या कर रहे हो अंकित?? अंकित का हाथ पकड़ते हुए वह बोली...!!

इससे मेरा कोई मतलब नहीं ....यह तो वैसे ही मेरे पीछे पड़ा है... इसे मैंने काफी सबक सिखा दिया है!! गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए...वह अंकित को अपने साथ लेकर जाने लगी....!!

आखिरकार वह अंकित को समझाने में कामयाब हो गई..... और उसी के साथ चली गई !! साहिल खड़ा देखता ही रह गया !!! एक बार तो उसके मन में आया कि वह बरखा और अंकित का गला दबाकर मार डाले!!!

पर जल्दी ही उसकी आंखों के सामने दस बारह लाख का कर्ज लहराने लगा !!! आज उसे अपने आप पर शर्म आ रही थी !!! कि वह क्यों बरखा के पीछे पड़ा है ???

जबकि वह देखने से ही बेवफा मालूम पड़ती है ....!!



???????????

अंकित ने बरखा से कहा......चलो ..हम अभी शादी कर लेते हैं ...यह सुनकर बरखा चुप हो गई.... ऐसे कैसे?

ऐसे क्यों नहीं ??

"मेरा मतलब है कि मम्मी ही तो सब तय करेंगी !!मेरे पापा नहीं हैं !!"

. "ठीक है !! मम्मी पापा को तुम्हारे घर भेजता हूं!!!

मेरे पापा मम्मी तो मैं जहां बताऊंगा वहीं शादी कर देंगे ....क्योंकि वे तो यही चाहते हैं ....कि मैं शादी कर लूं बस!!

बरखा को चुप देखकर अंकित बोला ....."अब बोलती क्यों नहीं हो.?? अब क्या बात है ??

बरखा अपने घर जाने के लिए उठी ....अभी कहां जा रही हो??.

क्यों ?? बरखा मुस्कुराती हुई बोली ....जाऊंगी नहीं तो मम्मी को बताऊंगी कैसे??

उन्हें तैयार करूंगी ....!!

अंकित खुश होकर बोला ....यह हुई ना बात!!


अंकित की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था!!! आखिर वह दिन आ ही गया .. जब उसके सपनों की रानी उसकी दुल्हन बन कर उसके घर में आएगी!!!

आज अंकित को सब कुछ नया नया सा लग रहा था.... ऐसा लगता था जैसे सब उसी के साथ साथ खुशी से झूम रहे हो!!!

अब वह बड़ी बेकरारी से बरखा के फोन का इंतजार कर रहा था... ... कि अचानक फोन की घंटी बजी ...उसने फोन रिसीव किया ...

बरखा की घबराई हुई आवाज आ रही थी ...सॉरी! अंकित हमारी शादी टल गई ....गांव में रह रही मेरी एक ताई एक्सपायर हो गई हैं!!!

हम लोग अभी गांव जा रहे हैं ....और रीति-रिवाज के अनुसार अभी शादी नहीं हो सकती !! अंकित यह सुनकर सन्न रह गया...

ओ माय गॉड... यह क्या हो गया ?? मैं भी चलता हूं .... हमदर्दी जताते हुए अंकित ने कहा ...

अरे नहीं नहीं ...वह गांव है.... दिल्ली नहीं है ...वहां शादी से पहले लड़का लड़की नहीं मिलते हैं ....बड़ी भारी बदनामी होगी ...हंसी उड़ाई जाएगी... बरखा ने समझाया !!

ठीक है ....जाकर फोन करना ....मायूस होते हुए अंकित ने कहा...!!

बरखा गांव जा रही थी ...यह तो सोच सच था... पर उसकी ताई मर गई थी यह उसने सफ़ेद झूठ बोला था!!!

क्योंकि उसके कोई ताई थीं ही नहीं !!! वह तो केवल अंकित से पीछा छुड़ाना चाहती थी !!

अपनी तबीयत ठीक ना होने ....और हवा पानी बदलने की बात कहकर .... वह गांव चली गई थी !!

अब टेंशन फ्री होकर ...कुछ दिन में दिल्ली जैसे नगर की कोलाहल भरी जिंदगी से दूर जाना चाहती थी !!

और थोड़ा खाली समय भी चाहती थी!! कि जिससे वह आराम से सोच सके ...कि अब क्या करना चाहिए ??



?????????????



यह हरी -भरी वादी उसे हमेशा अपनी ओर खींचती है ....मगर व्यस्त होने के कारण आ नहीं न पाती !!

प्राची के साथ वह अपना वायलिन लेकर निकल जाती ...और कहीं एकांत में ...जहां अच्छा लगता .... वहीं बैठकर तन्मयता से वायलिन बजाने लगती थी !!

सुरों की सरिता बहाते -बहाते वह स्वयं भी बह जाती। और फिर उसे कुछ याद नहीं रहता था..... केवल वह होती थी और उसकी सखी.......वह हरी-भरी वादी।।।

ऐसे ही एक दिन जब वह वायलिन बजा रही थी.... और अपनी व्यथा को भी जैसे डुबो रही थी.... !!!

तभी उसे किसी ने बड़े प्यार से पुकारा... उसकी पुकार ...उसके मन तक पहुंची... उसने देखा तो उसके सामने शेखर खड़ा था.... !!

उसके सामने उसका नया प्रेमी ....जो उसे एकटक मंत्रमुग्ध होकर देख रहा था!! बरखा उसकी आंखों में लहराती प्रेम की सरिता को देखकर कांप उठी!!

जिस बात से वह भाग रही थी... बचकर यहां शरण लेने आई थी... वही व्याधि यहां फिर मौजूद थी ...उसने शेखर को जोरदार ढंग से फटकार दिया था!!

मगर प्राची तो उसे पहली नजर से पसंद करने लगी थी ...बरखा ने जब उपेक्षा दिखाई तो प्राची ने उससे प्यार से बात की !! बचपन से चला आ रहा टकराव फिर जाग उठा..

क्रमशः***************
 

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 24

मानव स्वभाव है कि अपनी प्रशंसा सुनकर खुश होना ...और हमेशा अपनी खुशी को बहाल देखना... अब बरखा को जब शेखर से कोई मतलब नहीं था..

तो वह कुछ भी करे... कहीं भी जाए... उससे क्या?? लेकिन नही... उसका गर्व पुनः जाग उठा!!!

और उसकी मनोरंजन करने की लालसा फिर से जोर मारने लगी.... इसमें भी दो बातें थी ....एक तो प्राची पर अपना रौब जमाकर उसे नीचा दिखाना... दूसरे अपने अहं की संतुष्टि!

घर आकर प्राची ने शेखर की बहुत तारीफ की... बरखा ने कहा तुझे तो उसने आंख उठाकर भी नहीं देखा... तू तो बेकार में ही व्याकुल है ....!!

प्राची को फिर एक चोट लगी... पहली चोट तो उसे साहिल की लगी थी!!

बरखा के दिल से शेखर उतर गया था। पर प्राची शेखर को नहीं भूली थी .... कुछ ऐसा था शेखर के चेहरे में कि उसे लगा वह शेखर को बहुत पहले से जानती है !!

अब वह भगवान से मना रही थी कि वह फिर से शेखर से मिले.... और यह मौका भी मिला.... शायद सच्चे दिल की पुकार को भगवान सुन लेते हैं।।।

दिल्ली में बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रहे प्राची के भाई की तबीयत खराब हो गई.... उसके मम्मी पापा उसे देखने चले गए.... उन दोनों लड़कियों से सावधानी से घर पर रहने को कह गए थे...

दोनों दिन भर घूमी.... और शत में वही खेत वाली झोपड़ी में रुक गई .....

जहाँ धुआँ घुटने पर शेखर ने बरखा की जान बचाई.... उसे अस्पताल ले गया .....बरखा के मन में शेखर के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर हो गया था !!

अब वह प्राची के सामने यह जाहिर करने लगी कि वह शेखर को पसंद करती है .....

फिर शेखर जब प्राची के यहां जाने लगा.... तो उसके पेरेंट्स ने शेखर का हालचाल पता किया ....और छानबीन करके उसे प्राची के उपयुक्त पाया!!

उन्होंने मन बना लिया था कि अब शेखर ही उसका जमाता बनेगा... फिर इस बात में बरखा ने अपनी टांग अड़ाई ....तो प्राची से उसका जोरदार झगड़ा हुआ!!!

इस बार बरखा की मां शांति को जगदीश चंद ने बुलाया!! वह आकर अपनी बेटी को साथ ले गई ....बरखा को शांति देवी ने खरी खरी सुनाई!!!!

और कहा ....." अब पानी सर से ऊपर गुजर गया है..... तुम जहां रहती हो गुल खिलाती हो ......काश कि तुम पैदा ही ना हुई होती.....

अब देरी ठीक नहीं ....तुम्हारी शादी का जल्दी से जल्दी मुहूर्त निकलवा दूंगी ....!!

बरखा ने भी अपनी मां को छूट नहीं दी ....और गुस्से में कहा.... मां ही औलाद को बनाती है .....अगर तुमने मुझे शुरू से अच्छी शिक्षा दी होती तो मैं ऐसी नहीं होती.....!!

अपने पर ऐसा आरोप सुनकर शांति देवी सन्न रह गई ....और उनका बी.पी. हाई हो गया !!

उनकी हालत बिगड़ने लगी ....अपनी मां की हालत बिगड़ते देख कर बरखा ने अपने चाचा को फोन किया...

वे लोग तो पहले से ही दिल्ली में सेटल होने का विचार कर रहे थे.... वे सभी लोग शांति देवी को देखने आए पर उसकी बेरुखी देख कर चले गए !!

और अपने परिचित के घर गए ......,वहाँ उन्होंने पहले से ही बात कर रखी थी .!!

दो-तीन दिन में उन्हें कमरा भी दिलवा दिया ....और जॉब का भी इंतजाम करवा दिया !!



?????????????


.खेल चल ही रहा था.... जगह बदल गई... अब सभी दिल्ली में थे !!!

साहिल से धोखा खाने के बाद से प्राची बहुत अपसेट हो गई थी.... हर समय रोती रहती थी ....लंबा समय लगा था उसे ठीक होने में !!!


बचपन से ही बरखा से अपमानित होते - होते उसे बरखा और अब साहिल ....दोनों से ही नफरत थी !!!

लेकिन शांत स्वभाव होने के कारण.... प्राची तीखी प्रतिक्रिया नहीं करती थी !!! सबको लगता था कि सब नॉर्मल है..... पर किसी को नहीं पता था कि उसके मन में क्या चल रहा है!!!!

उसने शेखर को अपने मन से नहीं उतरने दिया ...वह हमेशा शेखर को याद करती थी ....शेखर को बहुत ही चाहती थी...!!

मगर जब यहां भी बरखा ने मीन मेख की तो वह बिलबिला उठी....

फिर घटनाक्रम तेजी से बदले ......ईश्वर ने उसके मन की मुराद को पूरा किया !!!! और एक बार फिर शेखर को उसके सामने लाकर खड़ा कर दिया था!!!

प्राची जानती थी कि बरखा का शौक है .....दिलों से खेलकर अपना मनोरंजन करना!!!

ऐसे में वह शेखर का दिल तोड़ देगी........ दिल टूटने का दर्द प्राची जानती थी !!! मगर वह शेखर से कह भी नहीं सकती थी !!! बस दुविधा में थी!!

सच में कितना मुश्किल होता है ......जिसे चाहो उसे मुसीबत में देखना ......पर अब हालात बदल गए थे !!!! सच सामने आ गया था !!!!

बरखा ने शालिनी नाम से अभिलाष को ब्लैकमेल करना शुरू किया था।। तभी उसे वहीं शेखर मिला!!!!

एक बार तो उसे उसे लगा कि उसकी पोल खुल जाएगी.!!!

दूसरे साहिल को जब उसके एक और नए प्रेम के बारे में पता चलेगा..... तो उसे संभालना मुश्किल हो जाएगा!!!! बरखा को पता था कि प्राची शेखर को चाहती है.......


इसलिए उसने शेखर को अपने ढंग से इस्तेमाल किया !!!!

अपना पीछा भी छुड़ाया..... प्राची को भी झटका दिया ....और अपने मकसद के लिए उसने साहिल के साथ मिलकर साजिश करके शेखर को जेल तक पहुंचा दिया !!!स्वार्थ के आगे वह यह भी भूल गई कि शेखर ने उसकी जान बचाई थी,,,और उसका वह सॉफ्ट कॉर्नर भी गुम हो गया था !!

ऑफिस में उसने शालिनी बनकर शेखर को नहीं पहचाना ।।।।और सरपट निकल गई।।।

फिर उसने साहिल को बताया कि एक पागल पीछे पड़ा है..... उधर साहिल दस - बारह लाख के चक्कर में पड़ा था .... वह आखिरी बार रुपए चाहता था !!

उसने योजना बनाई कि अभिलाष से रुपए मांगे जाएं.. पर वह देगा कहां से ...तो वह चोरी करके रुपए दे ....और चोरी शेखर पर लगा दी जाए !!

इसी योजना में बरखा ने शेखर को कॉफी हाउस में बुलाया... पार्क में ले गई ....

जहां उसने रुपए की बात की झूठी कहानी सुनाकर हमदर्दी हासिल की.... और उसने रुपयों की बात की ....साहिल ने वीडियो क्लिप बना ली!!!

उसके बाद साहिल ने अभिलाष को फोन किया.... अभिलाष ने फोन रिसीव किया .... और बारह लाख रुपए की डिमांड सुनते ही उस का पारा चढ़ गया....

उसने क्रोधित होते हुए कहा ..... " क्या यहां रुपयों का खजाना है?? तुमने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा ....मैं कर्जदार हो गया हूं ...अब तो मुझे कहीं से कर्ज भी नहीं मिलेगा.!!

"अरे रुको तो सही.!! तुम्हें तरकीब बताता हूं ....तुम्हारे ऑफिस में स्टोर कीपर है शेखर ....

तुम उसे लंचटाइम के समय अपने रूम में बुलाना....और तुम रुपए निकाल लेना.... बस नाम तुम्हारा नहीं होगा!!!

आज शाम को रुपए चाहिए मुझे!!! इसके बाद तुमसे मैं कभी रुपए नहीं मांगूंगा....

यह तो तुम हमेशा कहते हो .....

नहीं .....इस बार मै सच कहता हूं....

कहकर फोन कट गया ....अभिलाष का दिमाग झन्ना उठा…... अब यही रह गया है करने के लिए..... इससे तो अच्छा है मैं डूब मरूं!!

मेरी कितनी इज्जत रह जाएगी.... जब यह बात खुलेगी!! मन में आत्महत्या का विचार पक्का हो गया .....उसने सोच लिया कि वह बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर लेगा!!!

फिर उसके दिमाग में पलटा खाया..... उसने कल्पना की ...वह मर गया है उसकी लाश के पास लोग जमा हैं..... और थू - थू कर रहे हैं ....

उसकी सारी हेरा फेरी खुल गई है..... उसके बेटे बेटी और पत्नी दयनीय हालत में रो रहे हैं.... और लोग उन्हें घृणा भरी दृष्टि से देख रहे हैं ....

अभिलाष ने अपने सिर को झटका .....अपनी वास्तविक दुनिया में आया.... मन ही मन में साहिल पर गालियों का भंडार खोल दिया!!!

उसका गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था..... फिर उसके मन में आया कि मौत ही गले लगानी है तो पहले उसी को ठिकाने लगवा दूँ.... जिसकी वजह से मैं मरूंगा....

अब उसे थोड़ी राहत मिली.... एक बार उसके दिमाग में यह भी आया ...कि मैं क्यों मरूंगा.??

जब मुसीबत दूर हो जाएगी... तो फिर किसको पता चलेगा ???

उसने अपनी सोसायटी के एक दादा से बात की ...तो उसने झोपड़पट्टी में रहने वाले अपने आदमियों से बात कर ली... साहिल की जिंदगी का सौदा दो लाख रुपये में हुआ!!!

आखिरकार वो दिन भी आ गया जब इस घटना को अंजाम देना था.... उसने आठ लाख रुपये साहिल को दिए थे.... दो लाख पहले से ही बैग में रख लिए थे !!!

और साहिल से कहा ....मैं तुम्हें आगे चलकर चार लाख और दूंगा.... जिसे साहिल ने खुशी-खुशी मान लिया था...

और प्रचार यह किया कि दस लाख रुपये चोरी हुए थे ....उसी रात को उसने वो दो लाख जगन और मंगू को ले जा कर दिए थे
...

और कहा काम हो जाए.... जगन और मंगू साहिल की कोठी में गए थे ....और मंगू पिछवाड़े की बाउंड्री पर चौकसी के लिए रुका रहा.... और जगन अंदर चला गया....


?????????????




शेखर जब बरखा से पार्क में मिलकर गया था तो बरखा ने दस लाख की बात रख दी थी ....उसके पास तो दस हजार भी नहीं थे....

उसे फिर से झटका लगा था .....उसका भ्रम टूट गया था..... उसके मकान मालिक की बेटी छाया की दोस्त के रूप में जब प्राची फिर से उसके सामने आई ....

उसकी मां ने बहुत दुख उठाए थे अब इस बेवफा.. फरेबी हसीना के लिए वह अपनी मां की आंखों में आंसू नहीं देखना चाहता था.!!

फिर और भी बात थी जिससे वह प्राची से शादी करने के लिए तैयार हो गया था !! और वह यह बात थी कि उसने प्राची की आंखों में अपने प्रति जो प्यार देखा था ....उससे वह अनजान नहीं था...

पर वह बरखा के जादू के सामने सब जानबूझकर भुला देता था... अब उसकी आंखों के सामने कई बीती हुई घटना या रही थी जब उसने प्राची को दुख पहुंचाया था।।।


अब उसका प्रायश्चित करना चाहता था.... उसने प्राची से शादी करके नया जीवन शुरू करने का निश्चय किया !!

तभी उसकी प्यारी महबूबा ने अपना आखिरी रंग दिखा कर उसे फंसा कर जेल की तैयारी करा दी!!

और इस प्रकार अपनी रही सही मोहब्बत के ताबूत में आखरी कील ठोक दी .!!

जानकी ने रोकर विनय से शेखर के बारे में कहा ... तो विनय ने सेतु का काम करके प्राची और शेखर की शादी तय करवा दी थी...

विनय बचपन से ही शेखर का प्यारा और सच्चा दोस्त था... बचपन से साथ खेले ....साथ पढ़े थे.... अब शेखर की दुर्दशा उसे देखी नहीं जाती थी

प्राची की शादी शेखर से हो रही थी इसमें विनय का योगदान था.. प्राची खुशी से फूली नहीं समा रही थी ....साधारण समारोह में उसकी सगाई जब शेखर से हुई तो उसकी मुंह मांगी मुराद पूरी हुई.....

वह खुशी के सागर में डूबी हुई थी कि तभी अचानक यमदूत की तरह सिपाही आकर शेखर को पकड़ ले गए.... तो वह क्रोध से पागल ही हो उठी....

और थाने से शेखर और जगदीश चंद के लौटने के बाद.... विनय से बोली... भैया !! जरा मुझे मेरे घर तक.... फिर बरखा के घर तक ले चलो ...मैं उसे समझा दूंगी .!!!

विनय को क्या मालूम था.... कि प्राची के मन में क्या था ....वह उसे उसके घर ले गया... उसने घर पर कपड़े बदले और विनय उसे बरखा के घर छोड़ आया.

प्राची ने विनय से कहा था कि थोड़ी देर के बाद मुझे वापस ले जाना ... विनय तब तक अपने दोस्त से मिलने चला गया ...प्राची ने आज ठान लिया था कि बरखा का काम तमाम करना है ....अंजाम चाहे जो भी हो...

अपने घर से लाये हुए जहर को उसने संभाल कर मुट्ठी में दवा रखा था ....मगर जब उसने बरखा के कमरे में झांका तो साहिल को जाने के लिए तैयार देखा....

और उनकी योजना सुनी.... तो उसका खून खौल उठा.... अब बरखा की जगह उसने साहिल को सबक सिखाने की सोची और साहिल की कार की डिग्गी में बैठकर वह साहिल के घर पहुंच गई...

और चकमा देकर साहिल के बेडरूम में पहुंच गई.... मौका देखकर उसने साहिल के पैग में उस जहर को मिला दिया... उसी समय उसने आहट सुनी ...

जबकि साहिल फ्रेश होने के लिए गया था... तब वह कौन था ..वह यही सोच रही थी !!



क्रमशः***********
 

Guffy

Well-Known Member
2,069
2,177
159
भाग 25 ( अंतिम भाग)

तभी साहिल कमरे में आया..... वह पर्दे की आड़ में हो गई... कमरे के सामने से असल में जगन निकला था....

वह साहिल के कमरे के बारे में आश्वस्त होना चाहता था..... कि यह पक्का पता कर ले कि साहिल किस कमरे में है !!!

साहिल के कमरे के सामने से आहट से .....साहिल उसके पीछे पता लगाने गया .....कि बाहर कौन है ??
उसके पीछे - पीछे प्राची भी निकल गई.... वह पहले आती रहती थी इसीलिए उसका चप्पा- चप्पा जाना हुआ था ....वह तीर की तरह चुपके-चुपके भागती हुई निकल गई....काम तो उसका हो ही चुका था!!

इधर जगन कमरा देखता हुआ आगे निकल गया .... साहिल ने देखा तो उसे कोई दिखाई नहीं दिया... वह वापस लौटा... उसी के पीछे जगन हो लिया!!

साहिल कमरे में आकर बैठ गया ....और उसने अपना पैग उठाया उसे आभास नहीं हुआ कि मौत ठीक उसके सिर पर आ चुकी थी.... जगन ने अचानक हमला किया और तार से उसका गला घोट दिया !!!

साहिल के हाथ से पैग छूटकर कालीन पर गिरा.... और जहरीला प्वॉइजन कालीन में जज्ब हो गया...!!

. जगन आश्वश्त हो गया कि साहिल मर चुका है... तो फिर उसने तसल्ली से हाथ झाड़े और पिछवाड़े की तरफ भाग गया.... जहां मंगू भी मौजूद था !!







?????????




दोनों ही वहां से भाग गए.... प्राची जब अपनी समझ में साहिल का काम तमाम कर के निकली.... तो वह सड़क पर आई ......विनय उसी की तलाश रहा था!!! वह उसे बाइक पर बैठाकर चला ....!!

प्राची ने उससे कहा कि वह उसे प्राची के घर ले जाए... विनय ने उसे प्राची के घर पर छोड़ दिया .....इस बीच में प्राची को ढूंढने सभी प्राची के घर भी गए थे .....प्राची ने जल्दी में दरवाजा बंद नहीं किया था !!!

तभी सब ने अंदर आकर देखा तो प्राची गायब थी.... उसका लहंगा चुन्नी पड़ा था..... जो प्राची कपड़े चेंज करके डाल गई थी ....

दोबारा में जब सब उसे ढूंढने आए तो प्राची आ चुकी थी ....और दरवाजा अंदर से बंद था !!! मगर उसने किसी को कुछ भी नहीं बताया.!!

जब विजय राज ने बताया कि प्राची को साहिल की हत्या के आरोप में गिरफ्तार करने जा रहा है... तो सबको पता चला !!



?????????????




अंकित ने जब बरखा से सुना कि उसकी ताई गुजर गई है.... और वह गांव जा रही है .....तो उसे बहुत सदमा लगा..... जब उसने कहा कि मैं भी चलता हूं.... तो बरखा ने मना कर दिया...

मगर अंकित का मन नहीं माना ....उसने उसके गांव जाने की ठानी.... जब वह बरखा के गांव पहुंचा तो बरखा के बारे में उड़ती अफवाहें सुनकर वह हैरान रह गया !!

उसे एक युवक मिला जिसने बरखा के बारे में विस्तार से बताया.... और यह भी बताया कि उसकी ताई ही नहीं है ....बरखा ने झूठ बोला है कि उसकी ताई मर चुकी हैं ..!!!!

इतने सारे रहस्य उजागर होने से वह बहुत बड़े सदमे में था ....फिर वह जब बरखा के खेतों वाले घर की तरफ जा रहा था तो उसे एक गाइड दिखाई दिया ....

जो विनय था!! वह तो बरखा से पहले ही नाराज था ...कि वह शेखर को बेवकूफ बना रही है.... अंकित के बरखा के बारे में पूछते ही.... उसने अपना सारा गुबार ,निकाल दिया और शेखर की प्रेम कहानी के बारे में बताया !!

अंकित सब बातें सुनकर आग बबूला हो गया... वह बरखा से मिलने फिर नहीं पहुंचा...... और वापस आ गया ....उसके बरखा के बारे में पूरी छानबीन की तो एक से बढ़कर एक चौंकाने वाले खुलासे हुए!!!!

अपने ऑफिस पहुंचकर उसने बरखा के बारे में जानकारी के लिए अभिलाष से कहा .....यह फोटो लो और कोई बंदा काम पर लगा दो .....उसके घर का पता बताया ....पर वहां जाने की जरूरत ही नहीं पड़ी !!!

अभिलाष ने फोटो ही देख कर कहा यह तो शालिनी मैडम है....और उनका साथी साहिल है.... जिससे इनका लव अफेयर चल रहा है ....और जल्दी शादी होने वाली है !!!

यह सुनकर अंकित सन्न रह गया....अभिलाष ने ब्लैक मेलिंग की बात गोल कर ...बाकी अपनी पूरी भड़ास निकाल डाली !!

फिर रही सही कसर भी पूरी हो गई जब वह बरखा की मम्मी से भी मिला !!!

बरखा का यह धोखेबाज रूप उस पर बिजली बन कर गिरा ...इतने सुंदर चेहरे के पीछे इतना फरेबी चेहरा .!!!!

इतनी चालबाज कि विश्वास नहीं होता वह ऐसा भी कर सकती है....!!!!

उसे दोबारा धोखा मिला...जिसे वह सहन नहीं कर सका!!

क्या उसके साथ यही होता रहेगा????

क्या वह इसी के लिए बना है??


कौन सी कमी छोड़ी थी उसने बरखा के लिए ???

तन ,मन ,धन ... सब न्योछावर कर दिया... पैसा पानी की तरह बहाया!!! अपना ऑफिस तक भूल गया था वह !!!

और वह उसे मूर्ख बना रही थी !!!

" मेरी भावनाओं से खेलती रही ....सपने दिखाती रही.... और मुझे छलती रही .....ऐसा क्यों किया तूने???? फरेबी कहीं की....!!!

उसने बरखा का फोटो निकाला जो उसने भेजा था .....उसमें वह बड़ी ही आकर्षक मुद्रा में मुस्कुरा रही थी!!

आज उसकी मुस्कुराहट अंकित को बड़ी ही जहरीली लग रही थी !!!! वह इस समय उसे नागिन की तरह लग रही थी ....जो उसे डंस गई थी!!

जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने फोटो वहीं फेंक दिया और बड़बड़ाया..... अब देख तेरा क्या हश्र करता हूं !!

पर एक पल सोचने के बाद बोला.... नहीं ! तुझे मारना तो बेकार रहेगा तेरे लिए तो ऐसी सजा हो जिसमें तू जीवन भर तड़पे जिस तरह मैं तड़प रहा हूं !!

उसने अपनी पिस्तौल निकाली.... और निश्चय किया कि बरखा जिसे जी जान से चाहती है उसी साहिल को वह मार डालेगा!!

वह पिस्तौल लेकर निकला ....और साहिल की कोठी की तरफ बढ़ा... वह भी पीछे की बाउंड्री से ही कूदकर घुसा!! और पिस्तौल लेकर साहिल के कमरे की तरफ गया....

जब साहिल के कमरे में गया तभी देख लिया गया.... और पकड़ा गया !!

अपने बचाव के लिए उसने पिस्तौल का सहारा लिया.... सब ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया ....

?????????????



इंस्पेक्टर विजय राज की तहकीकात में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साहिल की मौत दम घुटने से हुई थी.... और अंकित के आने से दो घंटे पूर्व हुई थी!!

अंकित निर्दोष निकला ...प्राची को गिरफ्तार किया गया ...हालांकि उसने प्वाइजन से साहिल को मारने की कोशिश की थी.... पर मरा तो वह उससे नहीं था!!!

बाकी मारने का इरादा करने का केस बनता था ....पर साहिल के डैडी ने अंकित और प्राची पर कोई कार्यवाही करने से इनकार कर दिया था ....!!

विजय राज ने साहिल के कागजात चेक किए ....तो चौंकाने वाली बात पता चली ....कि साहिल किसी शिप्रा नामक लड़की से भी बात करता था ....!!

और वह अपना वीजा पासपोर्ट बनवा कर विदेश जाना चाहता था!!

क्योंकि वह अब शांति पूर्ण जीवन जीना चाहता था ....और बरखा उसके लिए तैयार नहीं थी!! दूसरे बरखा का डबल क्रॉस वाला खेल उसकी समझ में खूब आ चुका था !!!

उसने समझ लिया था कि अंकित के प्रति बरखा सीरियस थी.... और उससे खूब रकम ,जेवर लिए थे . यानी बरखा धन की भूखी थी !!

दूसरे जब शेखर का मामला आया तो साहिल और भी विमुख हो गया.... विश्वास खत्म ही हो गया तो उसने भी डबल क्रास का खेल खेला .....और अभिलाष से पैसे लेने तक के लिए.... बरखा को साथ रखा था!!

जिस प्रकार बरखा के जीवन में कई प्रेमी आए वैसे ही साहिल भी हैंडसम था लड़कियां उस पर भी मरती थी!! जिसमें शिप्रा सबसे ज्यादा उसकी करीबी थी... प्राची जब पर्दे के पीछे छुपी थी तो उसने साहिल को शिप्रा से बातें करते सुना था!!

जो उसने विजय राज को बताया... बाकी कहानी कागजातों ने बयां कर दी थी !!! विजय राज ने साहिल के पास से बरामद प्राची के फोटो से साहिल की कहानी पता कर ली!!!

तो अंकित के पास बरखा के फोटो से बरखा की शर्त वाली कहानी सामने आई .. दस लाख रुपए की चोरी सीसीटीवी कैमरे से खुली तो अभिलाष ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया.....

उसने चोरी का सब राज उगल डाला ....अब साहिल की हत्या का सबसे ज्यादा शक अभिलाष पर था !! वह भी उसे कबुलबाते देर नहीं लगी!! अभिलाष को जेल भेज दिया गया....

?????????????

अरुण ने अपनी कहानी को बंद किया ...यहां तक की कहानी तो उसने लिख डाली थी ....अब आगे की कहानी भी अभी-अभी बढ़ानी थी... क्योंकि यह कहानी तो अभी अधूरी थी!!

यह कहानी भी उसने बरखा से पूछकर लिखी थी.... उसने अरुण से कहा था मेरी जिंदगी पर कहानी जरूर लिखो ...मैं चाहती हूं कि यह सब के सामने आए और सब को इससे सबक मिले.!!

साहिल की बेवफाई पता चलते ही बरखा का दिल टूट गया था..... क्योंकि सबसे ज्यादा साहिल को शायद उसने चाहा था!!


तोअंत में साहिल कैसे बेवफा हुआ.??अब दिन-रात उसने यही सोचा था और अपने को दोषी पाया था!!!

अब बरखा के पास कुछ नहीं रह गया !!! एक एक करके उसके जीवन में तीन व्यक्ति आये...

पर बरखा की किस्मत में कोई नहीं था!! ऐसा क्यों हुआ??? यह सब सोचने का विषय था.... और बरखा के पास सोचने के अलावा कोई काम नहीं था!!!

भाई बोर्डिंग स्कूल में पढ़ रहा था .... मां तो पहले से ही बीमार थी.... अब और भी मृत प्राय सी हो गई थी!! रातों को सुनसान मनहूस सन्नाटे में बरखा को जैसे सिसकियां सुनाई देती ।।।

ध्यान से सुनती तो उसकी सांसे ही जैसे रुदन करती प्रतीत होती थी!! अरुण को अब उसकी हालत पर तरस आता था... वह उस से कुरेद -कुरेद कर कई बातें पूछता!!

कभी-कभी वह रो पड़ती... और कहने लगती ....यह सब मेरे ही कारण हुआ ....अब उसे अपने एक एक काम गलत मालूम हो रहे थे !! पर बीता हुआ समय वापस नहीं आता ....

उसने अरुण से कहा था... मेरी कहानी लिखो ....तो इन बातों को जरूर लिखो. .. जिससे सब नसीहत लें ... वह रूप किस काम का जिसमें कोई गुण नहीं... वह सुंदरता किस काम की जो विनाश का कारण बने .... कत्ल करा दे !!

और अरुण ने सब लिखा था... वह ऐसी हसीना थी ...जिसकी वजह से कई जिंदगियां बर्बाद हुई !!! प्राची ..अंकित ..शेखर ..और साहिल की तो हत्या ही हो गई ..

वह भी बरखा की वजह से हुई ....उसके कत्ल की वजह बनी यही हसीना....जो कातिल हसीना .बन गई!!..

अब सब कुछ सामान्य हो चला था.... बरखा बुत की तरह अपने ड्राइंग रूम में बैठी थी...... तभी अरुण आया ...उसने बरखा से कहा .... जो होना था वह तो हो चुका!!!

अब तुम पछता रही हो.... तुम्हारा प्रायश्चित भी हो गया.... अब आगे क्या ??

क्या मतलब ?? बरखा ने उदास चेहरे को ऊपर उठाकर प्रश्न किया। मतलब मेरी कहानी अभी अधूरी है ...मैं इसे पूरी ही लिखूंगा ....तो कैसे पूरी होगी!! अभी भी दुनिया बाकी है... शेखर तुम्हें बहुत प्यार करता था...

वह तुमसे शादी कर लेगा... तुम्हारी मां भी शायद जी जाएं... तुमने उसे दुख भी बहुत पहुंचाया है.... तुम उससे अपने किए की माफी मांग लो... चलो मेरे साथ ....

मैं माफी मांगने जाऊं... क्या मुझे माफ करेगा ??

अरुण बोला... क्यों नहीं मैं समझा दूंगा उसे...

फिर से वही पार्क था .....शेखर हरी घास पर बैठा हुआ था... तभी धीरे-धीरे थके कदमों से बरखा भी आकर बैठ गई.... थोड़ी देर तक तो कोई नहीं बोला!!! फिर बरखा ने मौन तोड़ा..

मैं माफी मांगने लायक तो नहीं ...पर अगर मुझे माफ कर सको तो... कहते -कहते उसके आंसू नहीं रुक सके!!

शेखर ने आश्चर्य से देखा कि क्या यह वही बरखा है जिसकी कातिल अदाएं एक क्षण में ही दीवाना बना देती थी?? इतनी लाचार शोक की मूर्ति लग रही है ...

नहीं ! यह वह बरखा नहीं है ! वह तो कोई दूसरी ही थी ....साहिल की मौत ने उसे बिल्कुल बदल डाला!!

वह दुखी स्वर में बोली ....शेखर मुझे नफरत है अब ऐसे धन से जिसने मुझे बर्बाद कर दिया ....

शेखर ने उसे दिलासा देते हुए कहा .....बरखा यह तुम्हारे लिए बहुत बड़ी दुर्घटना है ....अपने जीवन की शुरुआत करो... पिछली बातें सब भूल जाओ..

वही तो शेखर !! क्या तुम अभी भी मुझे चाहते हो ?? मुझे अपना लोगे ??

शेखर समझाते हुए बोला.... देखो बरखा.... मैंने यह जीवन के साथ सबक सीखा है ....कि शादी उससे करो ....जो तुम्हें चाहे... जिसे तुम चाहते हो उससे नहीं!!

इससे तुम्हारा पार्टनर तुम्हें कभी धोखा नहीं देगा !! प्राची मुझे चाहती है... मैं प्राची को ही अपना मान चुका हूं... और अब वही मेरी है !!

बरखा की आंखें आंसू से भर गई ...और वह तेजी से उठी... और जिस से टकराई उसने उसे संभाला!! और कहा.... सभी रास्ते तो बंद नहीं हुए ना!! और शेखर ने क्या कहा... शादी उससे करो जो तुम्हें चाहे.... मैं तो तुम्हें अभी भी उतना ही चाहता हूं!!!

विल यू मैरी मी?? बरखा के सामने अंकित खड़ा था ...और उसके पीछे अरुण ...!!

अरुण को अंदेशा था कि शेखर क्या कहेगा ....और इतना सुनकर बरखा फिर कभी अंकित के सामने नहीं जाएगी.... इसलिए उसने अंकित को समझाया था... और वैसे भी अंकित के मन में बरखा के प्रति प्यार था!!

पर शेखर के मन में नहीं ....बस सब तय हो गया.. अरुण की आवाजाही के फलस्वरूप छह महीने बाद शेखर और प्राची की धूमधाम से शादी हुई...!!

शेखर ने विनय को भी लपेट लिया ....जो छाया को ट्यूशन पढ़ाते पढ़ाते ही उसका हो गया था !! विनय छाया की भी शादी संपन्न हो गई.... इधर अंकित की कोठी जगमग जगमग कर रही थी!! अंकित के मम्मी पापा की बरसों की मुराद पूरी हुई थी..

अंकित और बरखा की शादी संपन्न हो गई ....और बरखा उनकी बहू बनकर के घर की शोभा बढ़ाने लगी.!!

समाप्त*********
 
Last edited:

kamdev99008

FoX - Federation of Xossipians
10,239
38,942
259
बहुत बढ़िया................. हॅप्पी एंडिंग
अंत भला सो सब भला

लेकिन ऐसा नहीं है
जो गुरूर और पैसे की दीवानी थी................. उसे पैसा, प्यार और घर सब मिल गया......................... बरखा
जो इस अंधी दौड़ से बाहर निकलना चाहता था.................वो दुनिया से बाहर हो गया.............साहिल


इससे यही सीख मिलती है :-
अच्छे व्यक्ति की बुरे से दूर रहने में ही भलाई है.................क्योंकि अच्छा कभी बुराई को सम्हालने के काबिल नहीं बन पाता
जबकि बुरा हर बुराई में बने चोर रास्ते से वाकिफ होता है............ तो वो अपनी खूबियों से अंकित जैसे बेवकूफ फँसाकर अपनी मुसीबतों से बाहर आ ही जाता है
 
  • Like
Reactions: Aakash.
Top