Mrxr
“𝕾𝖐𝖞— 𝕿𝖍𝖊 𝖍𝖊𝖆𝖗𝖙 𝖔𝖋 𝖊𝖑𝖊𝖒𝖊𝖓𝖙𝖘”
- 11,525
- 5,422
- 214
Haan ye baat toh hai... Rules thread aur pm ko koi seriously nahi leta...Rules thread alag hai . Ye hota hai har baar readers bohat jo rules padhte hi nhi hai . Chaahe unhe pm hi kar do .
Haan ye baat toh hai... Rules thread aur pm ko koi seriously nahi leta...Rules thread alag hai . Ye hota hai har baar readers bohat jo rules padhte hi nhi hai . Chaahe unhe pm hi kar do .
Yeh sab jab mata pita nahi hote tab socha jaata
Jab tak parents hain tab sab kuchh hai
Bhale hi zindagi mein kuchh na ho
Yahi satya haiApan koshish kar raha hain
Thanx a lot sir for your precious review i will try for more detailsकहानी समीक्षा: खामोश अलविदा
लेखक महोदय: ayush01111
प्रिय ayush01111 जी,
मैंने अभी कुछ देर पहले ही आपकी कहानी खामोश अलविदा पढ़ी और सोचा क्यों न आपसे इस पर थोड़ी तसल्ली से बात की जाए।
आरव और पूनम की जिंदगी जिस तरह से आपस में टकराती है और फिर एकदम अलग दिशाओं में मुड़ जाती है, वो थीम अपने आप में काफी मजबूत है। मुझे खास तौर पर वो हिस्सा बहुत सही लगा जब आरव मीटिंग के बाद बिना कोई शोर मचाए या बदला लिए चुपचाप अपनी राह चुन लेता है। एक इंसान की खामोश डिग्निटी को आपने वहां अच्छे से समझा है। और फिर अंत में जब पूनम कॉन्फ्रेंस वाले होटल के बाहर उस सच का सामना करती है, वो पल कहानी का सबसे भारी और ठहरा हुआ हिस्सा है।
एक बात जो मैं अपने सालों के पढ़ने और लिखने के तजुर्बे से आपसे शेयर करना चाहता था, वो है कहानी का स्ट्रक्चर और उसका बहाव। मैंने नोटिस किया कि आपकी कहानी में लगभग हर वाक्य एक नई लाइन से शुरू हो रहा है। एक पाठक के तौर पर मैं कहूंगा कि पैराग्राफ स्टाइल में कहानी पढ़ना ज्यादा कम्फर्टेबल होता है और उसका इम्पैक्ट भी बहुत गहरा पड़ता है। जब आप वाक्यों को एक साथ जोड़कर एक पैराग्राफ बनाते हैं, तो पढ़ने वाला किरदारों के इमोशन के साथ आराम से बह पाता है। अभी यह लाइन बाय लाइन वाला फॉरमेट थोड़ा बुलेट पॉइंट्स जैसा फील दे रहा है जिससे कहानी की असली गहराई और वो जो एक इंसानी टच होता है, वो कहीं छुप सा गया है।
इसके अलावा कहानी के इवेंट्स भी बहुत तेजी से भागते हैं। सब कुछ बहुत नपा तुला और कैलकुलेटेड लगता है। जैसे आरव का विदेश जाना और तुरंत इतनी बड़ी कामयाबी हासिल कर लेना। अगर आप किरदारों को थोड़ी और सांस लेने दें और उनके सफर को थोड़े और नेचुरल तरीके से सामने लाएं, तो कहानी में एक असली जान आ जाएगी। फिर यह किसी भी तय फॉर्मूले से बिल्कुल अलग और एकदम आपकी अपनी आवाज़ लगेगी।
आपके पास कहानी का प्लॉट सोचने की एक अच्छी समझ है। बस अपने शब्दों को इस लाइन वाले फॉरमेट से आज़ाद कीजिए और उन्हें पैराग्राफ्स में खुलकर बहने दीजिए। आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। बस लिखते रहिए, मुझे आपकी अगली कहानी का इंतज़ार रहेगा।
और हाँ, जाते-जाते एक बात और! मैंने फोरम पर सन्नीभाई के लिए आपका वो 'यूपी में रहना है तो...' वाला खौफनाक फरमान पढ़ा। मैं तो गुजरात से हूँ, यूपी का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है, फिर भी देखिए... बिना किसी दबाव के आपकी कहानी का इतना ईमानदारी से रिव्यू दे दिया है! अब कम से कम भविष्य में कभी बनारस या लखनऊ घूमने का प्लान बने, तो अपनी सरहद पर मेरी नो-एंट्री का बोर्ड मत लगवा दीजिएगा!मज़ाक कर रहा हूँ.. अन्यथा मत लीजिएगा..!!
सप्रेम..
vakharia
Maine tag Kiya tha pahle bhi ignore mar diye ho mujhe toBhat happened?

kise reply de rhe ho dikh nahi Raha mujhe Kisne phir ignore mar diya yar ab ?Uski adaon ne diwana mujhe kar diya, dil gaya.. dil gaya.. le gaya sanam.....
Usse dekha saanse mujhe aati ab kam, dhadkan ruk gayi nikale naa dam.. kese samjhau is nadaan dil ko.. kese samjhau is nadaan dil ko.. dil gyaa.. dil gaya.. le gaya sanam.....

Abbe kisi ko nhi... Ese hi is gaane ki lines sunni bahut time ke baad bas type ho gaya....kise reply de rhe ho dikh nahi Raha mujhe Kisne phir ignore mar diya yar ab ?![]()
Achchha hai bhaya gana !! Ye sunoAbbe kisi ko nhi... Ese hi is gaane ki lines sunni bahut time ke baad bas type ho gaya....
Ye tu bhi sun