Nice update.....#187.
चैपटर-4
अद्भुत नेत्र: (तिलिस्मा 5.11)
वसंत ऋतु को पार करने के बाद सभी जिस द्वार में प्रवेश किये, वह उन्हें लेकर एक बड़े से नाव के आकार वाले कमरे में पहुंच गया।
यह कमरा लगभग 5,000 वर्ग फुट में निर्मित था, इसकी छत की ऊंचाई भी बहुत ज्यादा थी।
कमरे की जमीन सफेद पत्थरों से बनी थी, जिसके बीच एक 10 मीटर त्रिज्या का नीला गोला और उस नीले गोले के बीच, 2 मीटर त्रिज्या का काला गोला बना था।
उस काले गोले के बीच में, काँच की पारदर्शी लिफ्ट लगी थी, जो कि उस काले गोले से, नीचे की ओर ले जाने के लिये थी। परंतु लिफ्ट पर किसी भी प्रकार का कोई बटन नहीं था।
कमरे की छत पर, लिफ्ट के ठीक ऊपर की ओर एक गोल ढक्कन लगा था।
“यह कमरा तो देखने में बहुत ही अजीब सा लग रहा है?" ऐलेक्स ने कहा।
“सही कह रहे हो ऐलेक्स भैया, इस कमरे का डिजाइन किसी नाव के समान है” शैफाली ने कमरे को देखते हुए कहा- “और इसकी जमीन भी थोड़ी उभरी हुई लग रही है।"
“पर इस कमरे में उस काँच की लिफ्ट के सिवा तो कुछ है ही नहीं?" जेनिथ ने कहा- “शायद उस लिफ्ट से हमें नीचे की ओर कहीं जाना है। पर उस लिफ्ट पर कहीं भी बटन नहीं है, पता नहीं यह कैसे चलती होगी?" यह कहकर जेनिथ उस लिफ्ट की ओर बढ़ी, परंतु अचानक पैर में कुछ चिपचिपा सा अहसास होने की वजह से वह चलते-चलते रुक गई और नीचे जमीन की ओर देखने लगी।
“दोस्तों, यहां जमीन पर कुछ चिपचिपा पदार्थ भी है, जरा ध्यान से आना, कहीं यह पदार्थ भी किसी प्रकार की मुसीबत ना हो?” जेनिथ ने सभी को सावधान करते हुए कहा और लिफ्ट की ओर आगे बढ़ गई।
लेकिन इससे पहले कि जेनिथ और आगे बढ़कर लिफ्ट के पास पहुंचती, तभी ऊपर छत पर लगा ढक्कन तेजी से खुला और उसमें से एक प्रकाश की किरण आकर लिफ्ट से टकराई।
प्रकाश की किरण टकराते ही, लिफ्ट का दरवाजा 2 सेकेण्ड के लिये खुला और फिर बंद होकर लिफ्ट, एक तेज आवाज करती हुई, जमीन के नीचे चली गई।
अब लिफ्ट के स्थान पर एक अंतहीन गोल गड्ढा दिखाई दे रहा था। अब ऊपर का ढक्कन पुनः बंद हो गया था।
जेनिथ ने धीरे से उस गड्ढे में झांक कर देखा। तभी जेनिथ को लिफ्ट वापस आती दिखाई दी। लिफ्ट को वापस आते देख जेनिथ थोड़ा पीछे हट गई। लिफ्ट पहले की तरह अपने स्थान पर वापस आकर रुक गई।
अब जेनिथ की नजर सुयश की ओर गई, जो कि बहुत देर से इस पूरे स्थान को देखकर कुछ सोच रहा था।
जेनिथ को अपनी ओर देखते पाकर आखिर सुयश बोल उठा- “यह पूरा कमरा किसी मानव के नेत्र के समान प्रतीत हो रहा है। जरा सभी लोग जमीन की ओर देखो, इसकी नाव सी सफेद आकृति, आँख के सफेद भाग की तरह प्रतीत हो रही है। इस सफेद भाग के बीच का नीला गोला, आँख की ‘आइरिश' और काला गोला, आँख की ‘प्यूपिल' लग रहा है। छत के ऊपर की ओर लगा ढक्कन, शायद पलकों का काम कर रहा है। जब पलकें खुलती हैं, तो उसमें से दृश्य तरंगे निकलकर उस लिफ्ट पर गिरती हैं। शायद वह लिफ्ट उन दृश्य तरंगों को लेकर मस्तिष्क तक जाती हो?"
सुयश के शब्दों को सुन सभी ने पहली बार उस कमरे को महसूस करके देखा। अब सभी सुयश की बात से सहमत थे।
"हम आपकी बात से सहमत हैं कैप्टेन।" क्रिस्टी ने कहा- “पर यह नहीं समझ आ रहा कि हमें इस आँख में करना क्या है?"
“पर कैप्टेन, जमीन पर बिखरा यह चिपचिपा पदार्थ कैसा है?” जेनिथ ने सुयश से पूछा- “आँख में तो ऐसा नहीं होता।"
"शायद यह चिपचिपा पदार्थ ही हमारी परेशानी है?" शैफाली ने कहा- “क्यों कि आँख में अगर किसी भी प्रकार का कोई कण या पदार्थ गिरता है, तो आँख स्वतः आँसू बनाकर उस कण या पदार्थ को बाहर निकाल देती है।
“अब समझ में आ गया।” ऐलेक्स ने खुशी से चीखते हुए कहा- “इस आँख में आंसुओं का निर्माण नहीं हो रहा। हमें आंसुओं का निर्माण करके इस चिपचिपे पदार्थ को समाप्त करना है।
“वाह मेरे अराका के शेर, तुमने तो पूरी पहेली ही हल कर दी।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स से मजा लेते हुए कहा “पर जरा यह बताओगे कि हम आँसुओं का निर्माण कैसे करेंगे?"
क्रिस्टी की बात सुन, ऐलेक्स अपना सिर खुजाकर ऊपर की ओर देखने लगा।
“आँसुओं का निर्माण, आँखों के ऊपर बने 'लैक्राईमल ग्लैंड' में होता है।" शैफाली ने कहा- “वहीं से आँसू हमारी आँख में प्रवेश करते है और ‘लैक्राइमल पंक्टा' से होते हुए नाक के द्वारा बाहर निकल जाते हैं। जब आँसू ज्यादा मात्रा में बनते हैं, तो वह ओवरफ्लो होकर हमारी आँखों से बाहर निकलने लगते हैं। इसी प्रक्रिया को हम रोना कहते हैं। शैफाली ने सरल भाषा में सभी को समझाते हुए कहा।
"तो इसका मतलब पहले हमें लैक्राईमल ग्लैंड तक पहुंचना होगा, उसके बाद ही हम जान पायेंगे कि वहां परेशानी क्या है?" जेनिथ ने कहा- “पर हम लैक्राईमल ग्लैंड तक जायेंगे कैसे?"
“यहां से तो लैक्राईमल ग्लैंड तक जाने का कोई रास्ता नहीं है। अब हमें वहां तक पहुंचने के लिये, पहले छत के ढक्कन खुलने का इंतजार करना होगा। जैसे ही ढक्कन खुलेगा, हम बारी-बारी से लिफ्ट के द्वारा नीचे जायेंगे और फिर वहां से किसी भी प्रकार से मस्तिष्क तक पहुंचने की कोशिश करेंगे। अगर हम मस्तिष्क तक पहुंचने में सफल हो गये, तो वहां से कहीं भी जाया जा सकता है।” शैफाली ने सभी को अपना प्लान बताते हुए कहा।
"मुझे लगता है कि इस द्वार के लिये, हमें सिर्फ शैफाली की बातें सुननी चाहिये। क्यों कि उसे ही आँख की सबसे अच्छी जानकारी है।” सुयश ने कहा।
सुयश की बात सुन, सभी ने सिर हिलाकर अपनी सहमति दे दी। अब सभी आकर लिफ्ट के पास खड़े हो गये। सभी को वहां खड़े-खड़े आधा घंटा बीत गया, पर ऊपर की छत का ढक्कन नहीं खुला।
“कैप्टेन, यह छत का ढक्कन क्यों नहीं खुल रहा? क्रिस्टी ने सुयश की ओर देखते हुए कहा।
“मुझे लगता है कि यह इंसान सो रहा है, इसी लिये उसकी पलकें अभी नहीं झपक रहीं हैं।” सुयश ने तथ्य देते हुए कहा।
तभी छत की ऊपर लगा ढक्कन खुलने की तेज आवाज सुनाई दी। यह देख सुयश ने पहले तौफीक को नीचे जाने का इशारा किया। सुयश का इशारा पाकर, तौफीक बिल्कुल तैयार हो गया।
अब छत के ढक्कन से तेज रोशनी निकलकर, लिफ्ट के ऊपर गिरी और इसी के साथ लिफ्ट का दरवाजा 2 सेकेण्ड के लिये खुला।
तौफीक के लिये लिफ्ट में प्रवेश करने के लिये इतना समय काफी था। लिफ्ट तौफीक को लेकर नीचे की ओर चली गई।
धीरे-धीरे, एक-एक करके सभी उस लिफ्ट के माध्यम से नीचे की ओर आ गये। अब नीचे उन्हें एक बड़ा सा गोल पारदर्शी पर्दा दिखाई दिया, जिससे होकर प्रकाश अंदर की ओर जा रहा था।
“यह लेंस है, हमारी दृश्य तरंगे इससे होकर ही अपना चित्र रेटिना पर दर्शाती हैं।" शैफाली ने लेंस को देखते हुए कहा- “हमें इस लेंस के पार जाना होगा। यह कहकर शैफाली ने लेंस को अपने हाथों से छूकर देखा, पर वह उसे ठोस दिखाई दिया।
"हम ऐसे इसके पार नहीं जा सकते, इसके पार जाने के लिये कोई ना कोई दूसरा उपाय सोचना होगा?" शैफाली ने सुयश की ओर देखते हुए कहा।
“क्या हम फिर से प्रकाश के द्वारा उस पार नहीं जा सकते?" सुयश ने शैफाली से सवाल करते हुए पूछा।
“नहीं !” शैफाली ने समझाते हुए कहा- “इसको हम इस प्रकार समझ सकते हैं, कि जिस प्रकार पारदर्शी काँच के दूसरी ओर प्रकाश के सिवा कुछ भी नहीं जा सकता, ठीक उसी प्रकार इस लेंस के पार हम प्रकाश मे माध्यम से नहीं जा सकते।... लेकिन अभी भी हमारे पास दूसरी ओर जाने का एक तरीका है।... जब भी हल्का प्रकाश हमारी आँख पर पड़ता है, तो हमारी आँख में मौजूद लेंस अपने आकार को बढ़ा देता है और जब भी कोई तेज प्रकाश, हमारी आँखों पर पड़ता है, तो हमारी आँखों का लेंस सिकुड़कर छोटा हो जाता है। तो हमें बस इस लेंस के किनारे पहुंचकर किसी तेज प्रकाश के आने का इंतजार करना होगा। जैसे ही तेज प्रकाश आँखों पर पड़ेगा, लेंस अपने आपको ‘प्यूपिल' के हिसाब के संतुलित कर अपना आकार सिकोड़ेगा और ऐसी स्थिति में हम लेंस के किनारे से होकर दूसरी ओर जा पायेंगे।"
शैफाली का ज्ञान कई लोगों के सिर के ऊपर से निकल गया, पर उन्हें इतना समझ में आया कि तेज प्रकाश में लेंस के किनारे से, दूसरी ओर जाने का रास्ता बन जायेगा। अतः सभी लेंस के एक किनारे पर आकर खड़े हो गये।
सभी को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना पड़ा। कुछ देर बाद ही आँख से तेज रोशनी प्यूपिल को पारकर लेंस पर आकर पड़ी। अब लेंस ने अपने आकार को सिकोड़ना शुरु कर दिया।
जैसे ही लेंस के किनारे से एक व्यक्ति के निकलने के बराबर जगह हो गई, शैफाली सहित सभी उस जगह से निकलकर लेंस व रेटिना के बीच वाले स्थान पर पहुंच गये।
उस स्थान का आकार काफी बड़ा था। वहां का वातावरण हल्के गुलाबी रंग का था। वहां की गोलाकार दीवारें किसी फिल्मस्क्रीन के पर्दे की भांति अत्यंत चमकीली थीं। बीच के स्थान पर अनेक लाल और नीले रंग के मोटे, परंतु खोखले पाइप हवा में लहरा रहे थे।
"हमें इन पाइपों के अंदर तो नहीं घुसना है ना?" ऐलेक्स ने घबराकर शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।
"नहीं, ये पाइप असल में 'ऑप्टिकल नर्वस्' हैं।" शैफाली ने कहा- “यही नर्वस् रेटिना पर बने चित्रों को देखकर, मस्तिष्क तक इलेक्ट्रानिक सिग्नल भेजते हैं। अब हमें सिर्फ ये देखना है कि कैश्वर की बनाई यह कृत्रिम आँख, किस प्रकार से मस्तिष्क तक सिग्नल भेजती है? हमें बस उस सिग्नल का पीछा करना होगा।"
"हे भगवान, हमारी आँख इतनी कठिनता से हमें चित्र दिखाती है, यह तो हमें पता ही नहीं था।” क्रिस्टी ने आश्चर्य से आँखें फाड़कर रेटिना को देखते हुए कहा।
“मुझे इस बात का अच्छी तरह से अहसास है।" शैफाली ने आह भरते हुए कहा- “मैंने तो 13 वर्ष तक अपनी आँखों से कुछ देखा ही नहीं?" यह सुन सुयश ने शैफाली के सिर पर हाथ फेरा, जो कि अपनेपन का अहसास लिये था।
तभी रेटिना की चमक कुछ कम होती दिखाई दी।
“दोस्तों तैयार हो जाओ, अब ऑप्टिकल नर्वस् मस्तिष्क को सिग्नल भेजने ही वाला है।" शैफाली ने सबको सावधान करते हुए कहा।
तभी उन पाइपों से 4 फुट के जुगनू निकलने शुरु हो गये, जो कि अपने पंखों के सहारे तेजी से उड़ रहे थे।
उन जुगनुओं से तेज रोशनी भी, कुछ समय अंतराल में चमक रही थी।
किसी को भी पाइपों से जुगनू के निकलने की तो आशा कतई नहीं थी, इसलिये सभी विस्मित होकर उन जुगनुओं को देखने लगे।
तभी सभी को शैफाली की आवाज सुनाई दी- “यही जुगनू इलेक्ट्रानिक तरंगों का रुप हैं, हमें किसी भी प्रकार से इन पर बैठना होगा? यही हमें मस्तिष्क तक ले जा सकते हैं।" यह कहकर शैफाली ने एक पाइप को उछलकर पकड़ लिया और उससे जुगनू निकलने का इंतजार करती रही।
जैसे ही पाइप से जुगनू निकलता दिखा, शैफाली उस जुगनू पर कूदकर सवार हो गई। जुगनू अब शैफाली को लेकर हवा में उड़ने लगा।
शैफाली को इस प्रकार करते देख, क्रिस्टी ने भी उछलकर एक पाइप को पकड़ा और एक जुगनू पर सवार हो गई।
इस प्रकार एक-एक कर जेनिथ को छोड़ सभी जुगनुओं पर बैठ गये। जेनिथ जुगनू तो छोड़ो, पाइप को भी पकड़ते ही नीचे गिर जा रही थी।
“कैप्टेन, जेनिथ जुगनू पर नहीं बैठ पा रही है।' ऐलेक्स ने चीखकर कहा- “हमें जेनिथ की मदद करनी होगी।"
लेकिन इससे पहले कि कोई जेनिथ की मदद कर पाता, तभी रेटिना के बीच से एक द्वार खुला और सभी जुगनू उस द्वार से होते हुए बाहर की ओर निकल गये।
अब जेनिथ के हाथ पैर फूलने लगे। उसे नहीं पता था कि अगर वह कुछ देर तक इस रेटिना के द्वार से बाहर नहीं निकली, तो उसके साथ क्या होगा?
“नक्षत्रा !” जेनिथ ने घबराकर नक्षत्रा को पुकारा “क्या तुम मेरी किसी भी प्रकार से मदद कर सकते हो?"
“मैं तुम्हारा हौसला बढ़ाने के सिवा कुछ नहीं कर सकता जेनिथ। यह एक फिजिकल कार्य है, इसे तुम्हें स्वयं ही पूरा करना होगा।” नक्षत्रा ने अपने हथियार डालते हुए कहा।
नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ पुनः से कोशिश करने लगी। तभी अचानक जेनिथ के शरीर को एक झटका लगा और वह उछलकर एक जुगनू पर सवार हो गई।
जेनिथ को ऐसा लगा कि जैसे किसी ने उसके शरीर को उठाकर जुगनू की ओर फेंक दिया हो।
जेनिथ ने डरकर जुगनू के शरीर को कसकर पकड़ लिया, पर वह यह नहीं जान पायी कि उसका शरीर जुगनू तक पहुंचा कैसे?
“यह कैसे हुआ नक्षत्रा? मैं अपने आप जुगनू तक कैसे पहुंच गई?” जेनिथ ने आश्चर्य से नक्षत्रा से पूछा।
“क्षमा चाहता हूं जेनिथ, इसका जवाब मेरे पास भी नहीं है, पर मुझे लगता है कि कोई ना कोई इस तिलिस्म में भी तुम्हारी मदद कर रहा है। अब वह कौन है? यह मुझे भी नहीं पता।
जेनिथ का जुगनू उड़कर रेटिना के द्वार की ओर चल दिया, पर अब जेनिथ की आँखें सोचने के अंदाज में सिकुड़ गईं थीं।
पता नहीं क्यों इस बार उसे नक्षत्रा पर कुछ शक सा होने लगा था? उसे लग रहा था कि उसे किसी प्रकार से नक्षत्रा ही बार-बार बचा रहा है? पर वह उसे बता क्यों नहीं रहा था? यह जेनिथ को नहीं समझ आ रहा था ?
जारी रहेगा_____![]()





