ससुराल की नयी दिशा
अध्याय ४०: सरिता की दुहरी इच्छापूर्ति
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सरिता, पंखुड़ी और नलिनी:
अब तक:
नलिनी ने सरिता की गांड को जयेश के लंड पर लगा दिया. तभी कमरे में ललिता ने प्रवेश किया. पंखुड़ी ललिता के पास आई तो ललिता ने उसे कैमरा थमा दिया और अपने लिए एक पटियाला पेग बनाया. इतनी चुदाई देखकर उसका गला जो सूख चूका था!
नलिनी के सुरीले स्वर में रितेश और सरिता को दिए हुए निर्देश उसे विचित्र लग रहे थे. अचानक बिस्तर पर जो हुआ उसे देखकर उसकी आँखें चौंधिया गयीं. उसने पंखुड़ी को देखा पर वो तो अपने कार्य में व्यस्त थी. वो इस दृश्य को देखने के लिए बिस्तर के पास चली गई.
अब आगे:
ललिता ने देखा कि उसकी माँ सरिता उसके बेटे जयेश के लंड को अपनी गांड में ले चुकी थी. और अब वो आगे झुकी हुई थी. जयेश ने अपनी नानी की कमर को पकड़ा और उन्हें और आगे झुकाते हुए उनके होंठों पर अपने होंठ रखकर भींच लिए.
“आई लव यू, नानी.” जयेश ने उन्हें विश्वास दिलाया. “आप चिंता न करो, आपको कष्ट नहीं होगा अधिक, फिर आनंद बहुतेरा आएगा.”
“मुझे भी यही आशा है, पर डर से मेरी गांड फट रही है.” सरिता ने कहा फिर दोनों हंस पड़े.
अब रितेश सरिता के पीछे आया. ललिता के ह्रदय की धड़कन बढ़ गई. क्या मेरे बेटे अपनी नानी की गांड एक साथ मारने वाले हैं? उसके कंधे पर किसी का हाथ का आभास हुआ और देखा कि पंखुड़ी थी. पंखुड़ी ने मानो उसके मन को पढ़ चुकी थी और सिर हिलाकर बताया कि जो उसने सोचा है वही होने जा रहा है.
नलिनी का ध्यान इन सबसे दूर इस बात पर था कि अब सरिता की गांड में दूसरा लंड जो डालना था. हालाँकि इन दोनों भाइयों को इसका अनुभव था, इसीलिए वो अधिक चिंतित नहीं थी. उसने तेल लेकर रितेश के लंड को चमकाया और सरिता की गांड के ऊपर भी कुछ और तेल उड़ेल दिया.
“माँ जी, अपनी गांड को ढीला करो, मैं रितेश के लंड को अंदर डाल रही हूँ.” नलिनी ने सरिता को चेताया.
उसकी इस बात को सुनकर सरिता की प्रतिक्रिया उलटी हुई. गांड ढीली करने के विपरीत उसकी गांड और सिकुड़ गई. सरिता ने जयेश के लंड के चारों ओर के हिस्से को नलिनी धीरे धीरे सहलाने लगी.
“माँ जी, ढ़ीली छोड़ दो, कुछ नहीं होगा. मैं हूँ न. ये दोनों मेरी भी गांड एक साथ मार चुके हैं और समझते हैं क्या करना है. माँ जी.” नलिनी सरिता को समझाते हुए बोली.
“हाँ, नानी. बिलकुल परेशान मत हो. हम बड़े प्रेम से आपकी गांड मारेंगे.” रितेश ने भी आश्वासन दिया.
ललिता चुपचाप हतप्रभ ये सब देख सुन रही थी. नलिनी और रितेश की बात सुनकर सरिता ने को ढ़ीला किया. पर इस आसन में जहाँ उसकी गांड में पहले ही एक लंड था ये इतना सरल न था. जब नलिनी ने देखा कि सरिता की गांड में तनाव कम हो गया है तो उसने रितेश को संकेत किया.
रितेश ने अपने लंड को सरिता की गांड के छेद पर अपने भाई के लंड के साथ लगाया.
“धीरे से जैसा मैंने सिखाया था.” नलिनी ने उसे समझाया. “धीरे धीरे अंदर डालो, रुक रुक कर.”
रितेश ने सिर हिलाकर उसकी बात का स्वीकार किया और हल्का दबाव डाला. सुपाड़े को अंदर जाने में कुछ समय लगा, परन्तु रितेश में संयम था, इसी कारण नलिनी ने उसे जयेश के बाद रखा था. ललिता ने अपनी माँ की गांड को खुलकर अपने बेटे के लंड के सुपाड़े को अचानक ही उसमे गम होते देखा. उसकी आँखें खुली रह गयीं.
“ओह, माँ!” सरिता के मुंह से निकला. “ओह रे मेरी माँ!”
नलिनी तुरंत ही रितेश को रुकने का संकेत दे कर सरिता के पास गई.
“माँ जी, बस हो गया. थोड़ा और धैर्य रखो. फिर बस आनंद ही आनंद आएगा.” नलिनी ने समझाया.
“नानी, मैं हूँ न.” आंटीजी को देखो. इनकी भी हम दोनों एक साथ गांड मार चुके हैं और ये आज भी इतनी मस्त हैं.”
“मेरे बच्चों, तुम सब पर मुझे भरोसा है. पर गांड तो मेरी ही फटेगी न?” सरिता ने उसे चूमते हुए बोला।
“नानी, देखना थोड़ी ही देर में आप स्वयं ही हम दोनों से आपकी गांड फाड़ने के लिए चिल्ला रही होगी.” जयेश ने उसे कहा.
नलिनी ने रितेश को संकेत दिया और इस बार उसने ललिता को भी खड़े देखा और पंखुड़ी के हाथ में कैमरा भी देख लिया. उसने उन दोनों को आँख मारी. फिर ललिता के पास आकर उसके कान में बोली, “आपका भी नंबर लगाने वाली हूँ शीघ्र ही.”
ललिता के शरीर में झुरझुरी सी फ़ैल गई. पर उसकी आँखों की चमक ने नलिनी को आश्वस्त किया कि उसकी बात सही है. रितेश ने फिर हल्के हल्के दबाव के साथ अपने लंड को अंदर डालना आरम्भ कर दिया. सच में इस आयु में भी उसके संयम की प्रशंसा करनी होगी. परन्तु जयेश का धैर्य छूट रहा था.
“भैया, इतनी धीरे! मेरा लंड दुःख रहा है!” जयेश ने बोला तो नलिनी उसके पास गई और उसे हल्की सी चपत लगाई.
“नानी है तेरी दुष्ट, रितेश बिलकुल ठीक कर रहा है. अब चुपचाप रह.” नलिनी की डांट सुनकर जयेश चुप हो गया.
रितेश पूरे धैर्य के साथ अपने लंड को अंदर डाल रहा था. अंततः वो समय भी आया जब उसके पूरे लंड ने सरिता की गांड में प्रवेश पा लिया. उसने नलिनी को संकेत दिया. नलिनी सरिता के पास गई.
“माँ जी, हो गया. अब दोनों नातियों के लौड़े आपकी गांड में हैं. कैसा लग रहा है?” नलिनी ने टीवी समाचार वालों के समान पूछा.
“गांड पूरी भरी हुई है, लग रहा है जैसे कोई मोटा बेलन मेरी गांड में है. फ़टी नहीं है.” नलिनी ने उत्तर दिया.
“कुछ देर ठहरो फिर जैसा मैंने सिखाया है उसी प्रकार से मारना माँ जी की गांड. ठीक है न?” नलिनी ने दोनों भाइयों को समझाया.
रितेश ने जयेश से आँख मिलायी. और अब ये अत्यंत आवश्यक था कि दोनों एक दूसरे की ताल से ताल मिलाएं. अगर नानी को आनंद आया तो उनकी माँ जो साथ खड़ी थी उसकी गांड भी मारने का अवसर मिलेगा. और अगर सम्भव हुआ तो पंखुड़ी नानी की भी.
“तुम बहुत साहसी हो माँ.” ललिता जो अब तक चुप थी सरिता के सामने जाकर बोली.
“तू क्या करने आई है यहां पर?” सरिता ने पूछा.
पंखुड़ी आगे आई और कैमरे को दिखाकर बोली, “लगता है तेरी बेटी हम सबकी फिल्म बना रही है.”
“मैं ठीक तो लग रही हूँ न?” सरिता ये भूल कर कि उसकी गांड में दो दो लंड पड़े हैं, इस बात से चिंतित हो उठी कि वो फिल्म में सुंदर तो लग रही है. वाह रे नारी!
“बहुत सुंदर लग रही हो माँ.” ललिता ने आश्वासन दिया.
उधर रितेश और जयेश के बीच में मूक संकेत हुआ और दोनों ने अपने लौडों को धीमी गति से नानी की गांड में अंदर बाहर करना प्रारम्भ कर दिया. पंखुड़ी निकट जाकर कैमरे से उसे रिकॉर्ड करने लगी. दोनों लौडों ने हल्के हल्के अंदर बाहर आते जाते शीघ्र ही एक अच्छी ताल बना ली. अब नलिनी कुछ नहीं कर सकती थी. अब उसके शिष्य किस प्रकार से परीक्षा में प्रदर्शन करते हैं ये पूर्ण रूप से उनपर ही निर्भर था.
“ऊउँन्ह, मेरी गांड! ओह रे मेरी मैया! ऊह उह उउउह! उई उई आह!” सरिता की सिसकारियां निकलने लगीं.
नलिनी ने जाकर दो पेग बनाये और एक ललिता को थमा दिया और दोनों एक ओर होकर सामने चल रही कामक्रीड़ा का आनंद लेने लगे. पंखुड़ी घूम घूम कर फिल्म बना रही थी, कभी दूर से तो कभी निकट जाकर.
“मुझे भी ये करना है.” ललिता ने नलिनी से कहा.
“मैं जानती हूँ. पर इसकी एक प्रक्रिया है, नहीं तो चोट लग सकती है और गांड सच में फट सकती है. मैं समझा दूँगी।”
“और अन्य सबको भी सीखना होगा, केवल इन दोनों के भरोसे नहीं रहना है.” ललिता ने कहा तो नलिनी ने बताया कि उसकी बहन रागिनी और सरिता चूत में दो लंड लेने का प्रशिक्षण दे सकती हैं. गांड की विशेषज्ञ अभी तक वही थी, पर सरिता भी इसमें भागीदारी कर सकती है. उसे अन्य किसी को सिखाने समझाने में कोई समस्या नहीं थी. दोनों पेग से चुस्कियां लेते हुए ललिता की माँ की गांड की माँ चुदते हुए देखने लगे.
पंखुड़ी सम्भवतः तक गई थी कैमरे को पकड़े हुए. उसने ललिता को कैमरा वापिस सौंपा और अपने लिए एक पेग बनाया. फिर कुछ सोचकर एक और पेग बनाया और बाथरूम में ले गई. उसमें अपने पानी के साथ मिलाया और फिर लौट आई. नलिनी ये देख रही थी और समझ भी रही थी.
नलिनी, “माँ जी, जाईये पिला दीजिये उन्हें भी थोड़ी सी.” उसने पंखुड़ी से कहा. पंखुड़ी सरिता के सामने गई.
“लो सरिता, अपने मन का पेग पियो. ये लौंडे अब तुम्हारी पलंगतोड़ चुदाई करने वाले हैं.”
उसके होंठों से ग्लास लगते ही सरिता को मिश्रित गंध का आभास हो गया. अब गांड में दो लौड़े हों और पीने के लिए मूत्र मिश्रित शराब तो और क्या चाहिए? उसने हिलते हुए और चुदते हुए ही अपने पेग को पी लिया. पर चूँकि वो इतना हिल रही थी तो कुछ मात्रा जयेश के मुंह पर भी गिरी. जयेश समझ गया कि नानी क्या पी रही हैं. परन्तु उसने कुछ बोला नहीं. बल्कि रितेश को संकेत दिया कि अब गति बढ़ाई जाये.
सरिता के पेट में शराब जाने के बाद उसमे साहस भी आ गया.
“अच्छे से चोदो माँ के लौडों, क्या खटर पटर लगा रखी है.” उसने कहा तो नलिनी ने पंखुड़ी की ओर देखा मानो पूछ रही हो कि क्या पिला दिया. पंखुड़ी ने कहा कि उनकी सामान्य ड्रिंक ही पिलाई है.
सरिता को इस बात का आभास नहीं हुआ कि उसने इस कथन से अब शेर की सवारी कर ली थी. जयेश और रितेश अब पीछे हटने वाले नहीं थे. उन्होंने क्रमशः गति बढ़ाते हुए सरिता की गांड तीव्र गति से चुदाई आरम्भ कर दी. सरिता की सिसकारियाँ अब चीखों में परिवर्तित हो गयीं.
“मेरी गांड फाड़ दी रे! ओह माँ! मुझे बचा लो. मेरी गांड फट गई. छोड़ दो मुझे मादरचोदों!”
पर अब दोनों कहाँ रुकने वाले थे, और रुकने का कोई आशय भी नहीं था, क्योंकि उन्हें पता था कि ये कुछ ही क्षणों की बात है फिर नानी आनंद से चिल्ला रही होगी. ललिता नलिनी को देखी तो उसने आँखों से समझाया कि रुको, सब ठीक हो जायेगा. परन्तु उसने कुछ और तेल सरिता की गांड के ऊपर भी डाल दिया.
दोनों लंड अब सरिता की गांड में सटासट सरलता से जा रहे थे. गति बढ़ाते हुए दोनों भाई अपनी नानी की गांड के परखच्चे उड़ाने का प्रयास कर रहे थे. और जैसा उनका अनुमान था नानी भी अब इस नई चुदाई का भरपूर आनंद लेने लगी थी.
“आह, माँ. मर गई रे मैं. क्या आनंद आ रहा है रे नलिनी. कसम से तेरा मूत पियूँगी। क्या आकाश दिखाया है तूने मुझे. मारो भोसड़ी वालों, और तेजी से मारो मेरी गांड. सच में फाड़ ही दो आज इसे. रुकना मत! आह उउइइइ ईईईई माँ मैं मर जाऊँगी इतने आनंद से! मैं तेरे पास आ रही हूँ. फिर स्वर्ग में भी ऐसे ही गांड मरवाऊँगी सबसे. चोदो मुझे मेरे बच्चों, मादरचोदों और तेजी से छोड़ो.”
सरिता की बातें सुनकर ललिता को कुछ शांति मिली. उसने नलिनी का आभार माना कि उसने उसकी माँ को इस आनंद से अवगत कराया. कैमरे को हाथ में लिए हुए इस वीभत्स चुदाई को वो भविष्य के लिए संग्रहित कर रही थी. दोनों भाई की विकराल रूप ले चुकी थी. तीव्र गति से दोनों एक ताल में अपनी नानी की गांड का भोसड़ा बना रहे थे. इस सबके बीच पंखुड़ी ने सरिता के ग्लास को उठाया और वहीं पास में खड़ी हो गई. उसके मन में एक और विकृत विचार आया था.
दोनों भाइयों की कुछ समय बाद गति क्षीण होने लगी. दो दो लंड एक ही छेद में होने के कारण अब दोनों ही झड़ने के निकट थे.
“गांड में ही छोड़ना अपना पानी. और ध्यान से छोड़ना कि एक बूँद भी बाहर न गिरे.” पंखुड़ी ने निर्देश दिया. नलिनी ने उसकी ओर देखा और उसके हाथ में ग्लास देखकर वो समझ गई कि पंखुड़ी क्या करने वाली है. उसने टेबल पर रखी पानी की बोतलों को देखा. फिर उसमें से एक लेकर बाथरूम में चली गई. उसे फिर से भरा, पर पानी से नहीं. फिर लेकर उसे टेबल पर न रखकर एक कोने में रख दिया. अगर पंखुड़ी इस आयु में विकृत सोच रख सकती है तो वो उसे और भी बढ़ाकर दिखाएगी.
“नानी, नानी, नानी, मेरा होने वाला है!” जयेश ने हुंकार भरी.
पंखुड़ी ने उसे दिलाया. जयेश के शरीर की ऐठन देखकर वो समझ गई कि लौंडा पस्त हो गया है. जयेश के धक्के बंद हो गए. परन्तु रितेश अभी भी लगा पड़ा था, पर अधिक समय वो भी नहीं रुक सकता था.
“नानी, मैं भी आ रहा हूँ.” ये कहते हुए रितेश ने भी अपना पानी छोड़ दिया. दोनों लंड अब झड़ चुके थे.
पंखुड़ी आगे गई और सरिता के ग्लास को जयेश के लंड के नीचे लगा दिया. फिर उसने रितेश से लंड बाहर निकालने के लिए कहा. लंड निकलते ही कुछ रज ग्लास में गिर गया. पंखुड़ी से नलिनी की ओर देखा तो उसने रितेश को हटाया और फिर जयेश के लंड को पकड़ा. सावधानी के साथ बाहर निकालते हुए उसने गांड को खुलते हुए देखा, जो अब पूरी लाल थी.
जयेश के लंड के निकलते ही सरिता की गांड से दोनों भाइयों के वीर्य का मिश्रण भरभराते हुए निकलने लगा जिसे पंखुड़ी ने बड़ी चतुरता के साथ गिलास में भर लिया. पर सरिता की गांड में अभी और भी पानी था जो उसकी गहराइयों में खोया हुआ था. नलिनी ने सरिता को सहारा देते हुए बैठाया जिससे कि उसकी गांड ग्लास के ऊपर आ गई और कुछ और मिश्रण गिलास में आ गिरा. आधा गिलास भर चुका था.
“माँ जी, आप प्रयास करेंगी?” उसने पंखुड़ी से पूछा.
पंखुड़ी ने ग्लास को देखा और मना कर दिया.
“मैं करूंगी.” ललिता ने कहा और कैमरा रितेश को थमाते हुए अपनी माँ की गांड पर मुंह रखा और उसे सोखने लगी. फिर मुंह में आये द्रव्य को ग्लास में डाल दिया.
“बस अब और नहीं.” ये कहकर ललिता खड़ी हो गई. उसने समय देखा तो इस कमरे में आवश्यकता से अधिक समय बीत चुका था. सरिता वहीँ बिस्तर पर पसर गई और आँखें बंद करके लेट गई. पंखुड़ी ने ग्लास में व्हिस्की डाली और फिर विशेष बोतल से विशेल जल को डालकर उसे ऊपर तक भर दिया. ये सब भी ललिता ने कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया. फिर अपनी माँ की खुली गांड जो अब धीरे धीरे बंद होती जा रही थी उसका एक चित्र लिया और फिर कमरे से चली गई.
सरिता कुछ देर तक यूँ ही निढ़ाल पड़ी रही और किसी ने उसे छेड़ा नहीं. कुछ समय बाद वो कुनमुनाई और बैठ गई.
“सच में पंखुड़ी, मेरी गांड की माँ तो चुद गई पर आनंद दुगने से भी अधिक आया. लगता है इस प्रकार से चुदने का मुझे कोई कैलेंडर बनाना होगा. अधिक नहीं पर माह में एक बार तो ये बनता ही है.” सरिता ने पंखुड़ी से कहा.
“और नलिनी, बिटिया, तेरा तो मैं कैसे आभार व्यक्त करूँ। तू न होती तो मैं इस खेल से वंचित ही रह जाती. और तुम दोनों सच में विलक्षण हो.”
दोनों में से किसी ने कुछ कहा नहीं बस मुस्कुरा दिए. फिर पंखुड़ी ने सबके पेग बनाकर उन्हें दिए और सरिता को बैठकर उसका विशेष पेग उसके हाथ में दिया. ग्लास में श्वेत रंग के तैरते हुए भाग को देखकर वो समझ गई कि ये उसकी गांड से निकले वीर्य के साथ मिला हुआ है. फिर पंखुड़ी ने उसके कान में फुसफुसाया.
“तेरी गांड का पानी, शराब और नलिनी का पानी मिलाकर बनाया है. पी ले और देख कैसा लगता है.”
सरिता ने उसे सूँघा और फिर एक चुस्की ली.
“स्वादिष्ट है.”
सब अपने पेग पी रहे थे. रात के अगले पड़ाव में क्या करना है इस पर भी चर्चा हो रही थी. रितेश और जयेश दो बार झड़ चुके थे और उन्हें अगले संग्राम के लिए कुछ समय चाहिए थे. और इस बार उनकी नलिनी और पंखुड़ी की गांड का आनंद लेने की इच्छा थी. किसी को इसमें कोई आपत्ति नहीं थी. अब चूँकि सरिता की इच्छा पूरी हो चुकी थी तो उसके और पीने पर किसी ने कुछ न कहा.
जयेश और रितेश में कुछ आँखों में संकेत अवश्य हुआ और उन्होंने उस बोतल को भी देखा जिससे केवल सरिता का ही पेग बनाया जा रहा था. बिना कुछ कहे ही उन्हें समझ में आ गया कि उस बोतल में क्या है. इस ज्ञान का उपयोग वो कभी और करने वाले थे. पर अभी समय विश्राम का था.
तभी अचानक नलिनी का फोन बज उठा. नलिनी ने फोन पर नाम देखा और बात करने के लिए बटन दबाया. फिर वो उठ कर थोड़ी दूर चली गई. वो अन्य लोगों को ये बातचीत सुनने नहीं देना चाहती थी.
रात अभी बहुत शेष थी.
कौन था फोन पर? उसने ऐसा क्या कहा कि नलिनी दूर जाकर बात करने लगी. नलिनी के चेहरे पर आ रहे भाव क्या व्यक्त कर रहे थे? जानने के लिए पढ़ते रहिये और अपने विचार देते रहिये.
क्रमशः