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Incest ससुराल की नयी दिशा

prkin

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Excellent update bhai...
 
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prkin

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सभी पाठकों को होली की हार्दिक शुभकामनाएं।
 

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ससुराल की नयी दिशा
अध्याय ६: नलिनी


एक बात तो निश्चित थी, काव्या जितना अपने ममेरे भाइयों और नानी को समझती थी, दिशा उतना अपनी माँ को नहीं. रागिनी और लव के प्रस्थान के बाद नलिनी सोच में डूबी रही. आज उसने लव के व्यव्हार में बदलाव देखा था. ये रागिनी के लिए उचित था. रागिनी अब निमिष से टकराने के बारे में सोच सकती थी. पर मेरा क्या होगा. आज माँ बेटे के प्यार के कारण उसकी कामना अतृप्त रह गयी थी. उसने दिशा को फोन किया और कोई दस मिनट उससे बात करने से उसका मन हल्का हो गया. पर शरीर अभी भी भूखा था. वो रसोई में गयी और दोपहर के बचे खाने कोगर्म करते हुए उसने अपना फोन निकला और किसी को मिलाया.

खाना गर्म होने के बाद उसने खाना खाया, अब आठ बजने को आये थे. उसने अपने ही कॉलेज के एक विद्यार्थी को बुलाया था और उसे कुछ और निर्देश भी दिए थे. उसे आशा थी कि वो उन्हें पूरा करेगा. प्लेट को धोकर किचन में रखने के बाद वो बाथरूम में गयी और हल्का स्नान किया और कमरे में जाकर अपने वस्त्र बदले. अब वो कॉलेज की प्रोफेसर नहीं बल्कि किसी ऊँची सोसाइटी की महिला लग रही थी. पर उसके वस्त्र बहुत ही उत्तेजक थे. मेकअप करने के बाद उसका रूप पूर्णतया परिवर्तित हो चुका था. उसे आशा थी कि आज की रात उसे शांति मिल पायेगी.

साढ़े आठ बजे घर की घंटी बजी और नलिनी ने दरवाजा खोला और अंदर आने का आमंत्रण दिया. शरद के हाथ में एक बक्सा सा था, जिसमे बारह बियर थीं.

“ठंडी हैं?” नलिनी ने पूछा.
“जी मैम.”
“ठीक है, फ्रिज में लगा दो. और तुम क्या लाये हो?” उसने दूसरे लड़के से पूछा.
“स्नेक्स हैं, चिकन वगैरह.”
“ओके किचन में ही रख दो.”

“शरद तुम तीन बियर लेकर आ जाओ, और अखिल तुम कुछ स्नेक्स ले आओ. हम यहीं बैठेंगे बैठक में.”

दोनों लड़कों ने आज्ञा का तुरंत पालन किया.

“मैम, वो राज कुछ समय बाद आएगा, वो खिन बाहर था, आपके निमंत्रण के बाद लौट रहा है.”
“कोई बात नहीं. वैसे तुम लोगों की पढ़ाई कैसी चल रही है.”

इस समय उन्हें देखकर कोई ये अनुमान नहीं लगा सकता था कि नलिनी उनकी प्रोफेसर के सिवाय भी कुछ और थी. बियर पीते हुए तीनों कॉलेज में चल रही गतिविधियों के बारे में जानते रहे. इनमे ये भी पता लगा कि कौन प्रोफेसर किसे चोद रहा है. स्त्री हो या पुरुष, उनके कॉलेज में प्रोफेसर किसी न किसी के साथ संबंध बनाये रखते थे. अनैतिक होने की जैसे उन्हें कोई ग्लानि नहीं थी. लड़के लड़कियां भी अच्छे नंबर और अन्य कारणों से भी इन संबंधों में अपनी इच्छा से सम्मिलित होते थे.

घंटी बजने पर शरद ने राज को अंदर आने दिया. राज ने एते ही देरी की क्षमा मांगी, और नलिनी ने उसे कहा कि वो समझती है. शरद ने फिर सबके लिए बियर निकाली अखिल ने स्नेक्स गर्म किये और सब फिर से बातों में लग गए.

राज उनके समूह का मुखिया था. वो इस समय कॉलेज के अंतिम वर्ष में था और उसे एक नौकरी मिल चुकी थी और वो अब केवल अपने परीक्षा परिणाम की प्रतीक्षा में था. महाविद्यालय अगले दो या तीन सप्ताह में उन्हें घोषित करने वाला था. इसके बाद वो अपनी नौकरी पर जाने वाला था. शरद और अखिल की एक वर्ष की पढ़ाई शेष थी.

नलिनी: “तो राज, तुम कब अपना हॉस्टल छोड़ रहे हो?”
राज: “परिणाम मिलते ही. मैंने अपना सामान बांध लिया है, केवल आवश्यकता भर की वस्तुएँ बाहर हैं.”

बातों ही बातों में बियर के दो राउंड पूरे हो गए. राज ने अपने मुखिया होने के कर्तव्य को निभाया और जाकर नलिनी के सामने जा खड़ा हुआ.

“मैडम, अपने बात करने के लिए तो हमें आमंत्रित किया नहीं है, तो चलिए जिस उद्देश्य से बुलाया है उसे पूर्ण किया जाये, रात ढलती जा रही है.”

नलिनी मुस्कुरा पड़ी, राज के इस सीधे बात करने के कारण ही वो उसे बहुत पसंद करती थी. पर केवल उसकी बातें ही नलिनी को आकर्षित नहीं करती थी. राज की पैंट के सामने जो उभार था, जिसने नलिनी की अनगिनत बार प्यास बुझाई थी, वो भी नलिनी को उतना ही प्रिय था. पर राज एक व्यस्त लड़का था. जहाँ तक नलिनी को पता था वो कॉलेज की प्रौढ़ शिक्षिकाओं में बहुत लोकप्रिय था. विधवा होने के कारण नलिनी पर किसी प्रकार की रोक नहीं थी और इसीलिए राज कई रातें उसके बिस्तर में काट चुका था.

राज का हाथ पकड़कर वो उठी और अपने शयनकक्ष की ओर बढ़ गयी. राज उसके पीछे हो लिया और शरद और अखिल राज के पीछे. कमरे में जाते ही राज ने नलिनी को पीछे से बाँहों में जकड़ लिया.

“उफ्फ, राज. इतने उतावले क्यों हो रहे हो? रात भर मैं तुम्हारे साथ जो हूँ.”

“हाँ, पर कल की रात भी आयूंगा, इसके बाद हमारा मिलना न हो पायेगा। “ राज ने बताया.

नलिनी के मन में एक हूक सी उठी, पर उसने स्वयं को समझाया कि ये तो होना ही था. और उसके बिस्तर के लिए कोई नया खिलाड़ी मिल ही जायेगा. उसकी तीन प्रोफेसर सखियाँ अपने युवा प्रेमियों को एक दूसरे के साथ बाँटती थीं. इसी श्रेणी में अखिल आज उसके साथ था, जो आज पहली बार उसके पास आया था. उसकी सखी श्रीमती ममता पालीवाल ने अखिल की चुदाई के बहुत किस्से सुनाये थे. आज उसे देखने का समय था. पर अखिल पीछे खड़ा सब कुछ देखते हुए कुछ भी नहीं कह रहा था. शरद भी एक दूसरी सखी के माध्यम से आया था, परन्तु वो नलिनी को पहले भी चोद चुका था.

नलिनी इस समय केवल एक गाउन में ही थी. शरद उसके आगे आया और गाउन के बटन खोलने लगा. बटन खोलने के बाद उसने गाउन को हटा दिया. नलिनी ने निचे कोई अंतर्वस्त्र नहीं पहना था, और उसका सुनहरा शरीर कमरे के प्रकाश में झिलमिला उठा. अखिल के मुंह से एक सीटी निकल गयी. ममता मैडम की तुलना में नलिनी बहुत सुंदर थी और शरीर भी सुघड़ था. उसके लंड ने एक अंगड़ाई ली. पर वो देखना चाहता था कि इस मैडम का खेल क्या है.

नलिनी को शरद और राज दोनों आगे और पीछे से चूम रहे थे. राज ने अपने हाथ आगे करते हुए नलिनी के मम्मे अपने हाथों में लिए और उन्हें मसलने लगा. नलिनी की आह निकल गयी. राज को सादी चुदाई रास नहीं आती थी. वो जब भी उसे चोदता उसका अंग अंग तोड़ देता था. वो तो भला हो कि उसे कोई कुछ पूछने वाला नहीं था, अन्यथा राज के साथ चुदाई के उपरांत न केवल उसका शरीर टूट सा जाता, बल्कि राज के नोचने और काटने के चिन्ह उसके शरीर पर कुछ दिन तक बने रहते. मम्मों और उसकी घुंडियों को जब काटता था तो नलिनी की आँखों में आंसू आ जाते. पर राज का लंड था ही ऐसा कि वो ये सभी दर्द उससे मिलने वाले आनंद के लिए भूल जाती थी.

शरद एक अच्छा लड़का था. हालाँकि उसका लंड राज के अनुपात का नहीं था परन्तु उसकी चुदाई की प्रक्रिया ऐसी थी कि वो नलिनी को संतुष्ट करने में सफल रहा था. उसे तेज और दुर्दांत चुदाई के स्थान पर धीमी और प्रेम से की जाने वाली चुदाई अधिक प्रिय थी. और आज दो विपरीत व्यक्तित्व वाले लड़के नलिनी के दो ओर से उसे चूम रहे थे. उसने कनखियों से अखिल को देखा जो एक हल्की सी मुस्कान के साथ उन तीनों की प्रणयलीला देख रहा था. नलिनी के पास बुलाने पर उसने ठहरने का संकेत दिया. इससे पहले नलिनी कुछ कह पाती राज ने उसकी घुंडियों को जोर से भींच दिया. नलिनी की कराह निकली और अखिल की आँखें चौड़ी हो गयीं. राज अब नलिनी के गर्दन पर अपने होठों से काट रहा था. नलिनी की चूत से अब पानी की धार बह रही थी.

शरद ने नलिनी के होंठों को चूमा और बिस्तर पर चलने का प्रस्ताव किया. तीनों बिस्तर की ओर चल पड़े. नलिनी बिस्तर पर बैठ गयी और शरद और राज अपने कपड़े उतारने लगे. कपड़े निकलने के बाद राज का लंड देखा तो अखिल समझ गया कि नलिनी क्यों उसके इस व्यवहार को सहन करती है. राज ने नलिनी के बल पकड़े और अपने लंड को उसके मुंह में ठूँस दिया. नलिनी की साँस मानो रुक गयी और वो छटपटा उठी.

“अरे मैडम, इसी लौड़े के लिए बुलाती हो मुझे. चूसो इसे ढंग से अब ये तुम्हें आगे नहीं मिलने वाला. साली रंडी, नखरा कर रही है.” राज ने अपने लंड को उसके मुंह में आगे पीछे करते हुए कहा.

“इस भाषा का प्रयोग करना कहाँ तक उचित है. प्रोफेसर हैं हमारी, कुछ सम्मान से बात करो.” अखिल से रहा नहीं गया.
“इस रंडी छिनाल की कोई इज्जत नहीं है. मेरे लोड़े के लिए गिड़गिड़ाती है. अब मेरे जैसा लौड़ा तो इसे मिलने वाला नहीं इसकी गांड फाड़ने के लिए.” राज के अभिमान से अखिल बहुत आहत हुआ.

“राज भाई, कभी इतना अभिमान नहीं करना चाहिए. मेरी आपको यही सलाह है.” अखिल ने कहा.
“अपनी सलाह को अपनी गांड में रख भोसड़ी के, नहीं तो इसके बाद तेरी गांड में पेल दूंगा अपना लौड़ा तो दस दिन तक चल नहीं पायेगा.”
शरद को लगा कि बात बहुत आगे जा रही है.
“अरे भाई लोगों, शांति रखो. अखिल मैडम को कोई आपत्ति नहीं है, तो तुम क्यों बीच में पड़ रहे हो. वैसे भी ये राज की उनके साथ आखिरी भेंट है.”

अखिल ने देखा कि नलिनी की आँखों में आंसू थे और वो उसकी ओर देखते हुए आभार व्यक्त कर रही थी. वो समझ गया कि अब उसे अपना अंतिम शस्त्र चलने का समय आ गया है. उसने किचन में जाकर एक बियर खोली और कमरे में जाकर घूंट लेते हुए तिकड़ी की ओर पीठ करते हुए अपने कपड़े उतारने लगा. राज को अभी भी शांति नहीं हुई थी.

“गांड क्यों दिखा रहा है मुझे, बाद में मरवा लेना.” राज ने उसे छेड़ते हुए कहा.
“उसका अवसर नहीं मिलेगा.” अखिल अब नँगा था, उसने बियर का एक घूँट लिया और अपने लंड को हाथ से सहलाया और उन तीनों की ओर मुड़ गया. “क्योंकि सेर को सवा सेर मिल गया है.”

उसकी इस बात पर तिनिन ने उसे देखा तो आश्चर्य से ऑंखें झपकाना ही भूल गए. नलिनी का मुंह खुला रह गया और राज का लंड उसके मुंह से बाहर निकल गया. अखिल का लंड राज से न केवल चार इंच लम्बा था बल्कि उसकी गोलाई भी राज के अनुपात में अधिक थी. और अभी लग रहा था कि वो अपने पूरे उफान पर भी नहीं है. राज की हेकड़ी निकल गयी और उसका लंड हीनता के आभास से सिकुड़ गया.

“लगता है आपके लंड को लकवा मार गया है. आप इसे एक और जाकर सम्भालो, मैडम को मैं संभालता हूँ.”

राज बेध्यानी में वहाँ से हट गया. उसे जब तक होश आया तब तक नलिनी के मुंह में अखिल का लंड अपना स्थान बना चुका था.


उसने नलिनी की ओर देखा तो उसकी आँखों को देखकर वो जान गया कि अब उसकी कोई आवश्यकता नहीं रह गयी है. उसे अपने व्यवहार पर ग्लानि हुई जो उसने नलिनी को इस प्रकार से प्रताड़ित किया था. पर अब तीर कमान से निकल चुका था और कुछ करने को शेष नहीं था. उसने अपने कपड़े पहने और नलिनी से कहा कि वो जा रहा है. नलिनी ने अखिल के लंड पर से मुंह हटाए बिना ही अपने हाथों से उसे संकेत किया कि वो जा सकता है. राज को इस प्रकार का अपमान कभी नहीं सहने को मिला था. वो सिर झुकाकर कमरे से फिर घर से निकल गया. घर अंदर से लॉक हो गया और अब उसके अंदर जाना सम्भव नहीं था.

अंदर अखिल के लंड को चूसते हुए नलिनी को न केवल आनंद मिल रहा था, बल्कि उसके मन से एक बोझ भी उतर गया था. उसने कल ममता को धन्यवाद करने का परं किया जिसने उसे अखिल जैसे शक्तिशाली लंड वाले लड़के से मिलाया था. और तो और वो राज के समान उसे अपमानित करने में विश्वास नहीं करता था. राज के लंड को अगर छोड़ दिया जाये तो उसका व्यक्तित्व उसे घृणित करता था. उसे अपनी शरीर की प्यास पर कई बार आक्रोश भी आता था. पर अब वो सब भूत काल के विषय थे जो समय के चक्र में लोप हो गए थे.

अखिल ने शरद को देखा जो बिस्तर पर बैठा हुआ सब देख रहा था. उसे शरद का संयम भला लगा था. उसने भी राज को रोका था, परन्तु अखिल ने बाजी मार ली थी.

“मैडम, शरद भी आपकी प्रतीक्षा कर रहा है.” अखिल ने नलिनी को बताया.
नलिनी ने अखिल के नाग को मुंह से निकालकर चाटा और बोली, “हाँ, मैं भूल गयी. तुम दोनों बिस्तर पर लेटो, मैं वहीं तुम्हारे लंड चूसूंगी. शरद को व्यर्थ ही में मैंने रोके रखा है.”

शरद बिस्तर पर लेट गया और अखिल ने भी उसके साथ में स्थान ले लिए. नलिनी बिस्तर पर चढ़ गयी और एक एक करके दोनों लंड चाटने लगी.

फिर उसने शरद से कहा, “शरद, क्यों न तुम मुझे पहले चोदो तब तक मैं अखिल के लंड को चूसती हूँ.”

अखिल लेटा रहा और नलिनी ने कुछ बदलाव के साथ उसके लंड को अपने मुंह में लिए रखा और अपनी ऊँची उठी गांड को लहराया. शरद ने उसके पीछे अपना स्थान लिया और अपने लंड को उसकी रिसती हुई चूत में डाल दिया.

“शाबास, अब मुझे अच्छे से चोदो, अब जब वो दुष्ट चला गया है, तो हम तीनों प्रेम प्रवक चुदाई का आनंद ले सकते हैं.” अखिल और शरद इससे सहमत थे और शरद ने अपने लंड से नलिनी की चुदाई का आरम्भ किया और नलिनी अखिल के लंड पर अपना प्रेम बरसाती रही.

शरद उसकी चुदाई अपने ढंग से कर रहा था, वो अधिक तेज चुदाई का आदी नहीं था और एक समान्य गति से नलिनी को चोद रहा था. नलिनी को इस कारण से अखिल के विशाल लंड को चूसने में कोई कठिनाई नहीं हो रही थी. मन ही मन वो चाह रही थी कि शरद जल्दी झड़े और वो अखिल के मूसल से अपनी चूत की गर्मी मिटा सके. अखिल उसके सिर पर हाथ रखे हुए उसके बालों को सहला रहा था. वो नलिनी जैसी आकर्षक मध्यम आयु की स्त्री की चुदाई करने का अपना सपना जल्दी ही पूरा करने वाला था. उसने नलिनी की आयु की कई स्त्रियों को चोदा था और उसे पता था कि वो उसके लंड को लेने में सक्षम भी होती हैं और उसे पूरी संतुष्टि भी देती हैं. अपनी आयु की अधिकांश लड़कियां उसके लंड को देखकर चुदवाने से कतराती थीं. उन्हें डर रहता था कि वे आगे के लिए इतनी न ढीली पड़ जाएँ कि विवाहोपरांत कठिनाई आये।

शरद अपने लक्ष्य के निकट पहुँचते हुए नलिनी से बोला कि वो अब झड़ने के निकट है. नलिनी ये समझते हुए कि अखिल को दूसरे के वीर्य में अपने लंड को डालना सम्भवतः रास न आए शरद से कहा कि वो उसके मुंह में ही अपना ऱस छोड़े। ये सुनकर तिकड़ी ने अपनी वर्तमान स्थिति को बदला. अखिल लेटा ही रहा, पर नलिनी उठ गयी और शरद ने अपने लंड को उसकी चूत से निकालते हुए उसके मुंह में दे दिया. अपनी चूत की सुगंध और स्वाद से लसे शरद के लंड को नलिनी ने प्यार से चाटा और फिर चूसते हुए शरद की आँखों को देखने लगी. कुछ ही देर में शरद ने अपने रस से उसके मुंह को भर दिया जिसे नलिनी ने निःसंकोच पी लिया. शरद झड़ने के बाद एक ओर बैठ गया. अब वो नलिनी की चुदाई करते हुए अखिल को देखना चाहता था. उसे कुछ सीखने की इच्छा थी.

अखिल का लंड अभी भी तना हुआ था और नलिनी के थूक से भीगा हुआ था. नलिनी ने उसे देखा तो उसके शरीर में रोमांच से झुरझुरी हुई. उसने सोचा कि क्या वो सच में ऐसा लंड अपनी चूत में लेने का प्रयास करने वाली है? अखिल उसकी इस दुविधा को समझ गया.

“आप ऊपर चढ़कर अपने ढंग से अंदर लें. कोई जल्दी नहीं है, आपको जितना समय चाहिए लीजिये. और जब आप चाहेंगी तब मैं अपने धक्के लगाऊँगा। और डरें नहीं, ममता मैडम आराम से इसे अपनी गांड में भी ले लेती हैं.”

नलिनी सिहर गयी. ममता अगर इसे गांड में लेती है तो मेरी चूत तो आसानी से ले लेगी. ये सोचते हुए उसने अखिल के दोनों ओर पैर करते हुए अपनी चूत के मुंह पर अखिल का लंड रखा. आँख बंद करते हुए उसने धीरे धीरे नीचे उतरना आरम्भ किया. फिर उसने एक बार में जितना लंड अंदर जा सकता था उतना अंदर ले लिए. यहाँ तक उसकी चूत में कई लंड जा चुके थे. उसने नीचे हाथ से देखा तो लगा कि चार पाँच इंच लंड अभी भी बाहर है. पर उसने वीरता न दिखते हुए उतने ही लंड पर उठना बैठा आरम्भ कर दिया.

नलिनी अखिल के लंड पर कूदती रही और इस गतिविधि से अखिल का लंड धीरे धीरे उसकी चूत की अनछुई गहराइयों में समाता रहा. नलिनी आनंद की पराकष्ठा पर थी और उसे ये ज्ञान नहीं था कि अखिल कितनी गहराई में उसमे खोया हुआ है. अखिल अपनी ओर से नलिनी के मम्मों को हाथ में लिए मसल रहा था, पर उसके मसलने में नलिनी को पीड़ा नहीं बल्कि आनंद मिल रहा था. नलिनी को ये आभास बहुत देर में हुआ कि अखिल का पूरा लंड उसकी चूत में है जब उसने नीचे की और कूदते हुए अखिल की जांघों को कई बार स्पर्श किया.

“ओह, अखिल, क्या तुम्हारा पूरा लंड ले लिया मैंने?” नलिनी ने उत्सुकता से पूछा.

“जी मैडम, मैंने आपसे कहा था न, कि कोई कठिनाई नहीं होगी. अब निश्चिन्त होकर आनंद लें. आपको कोई कष्ट तो नहीं हुआ न?”
“नहीं, बहुत मजा आ रहा है. ऐसी गहरी चुदाई मेरी कभी नहीं हुई. और अब कभी हो भी न पायेगी.” नलिनी हाँफते हुए बोली.

इसके बाद तो जैसे नलिनी पागल ही हो गयी, वो अलग अलग गति से, कभी आगे झुकते हुए, तो कभी पीछे झुकते हुए अखिल के लंड को चोदती रही. झड़ने की गिनती भी अब वो भूल चुकी थी. पर कब तक टिकती. उसकी गति कम होते देख अखिल ने पूछा, “आप नीचे आना चाहोगी क्या?”

नलिनी ने नशीली आँखों से उसे देखा और हामी भरी. अखिल ने उसे नीचे लिटाया. उसकी चूत इस समय पूरी लाल थी और खुली हुई थी. अखिल ने अपने लंड को उसकी चूत पर रखा और इस बार एक या दो बार में ही पूरा लंड अंदर समा गया. नलिनी आनंद से सीत्कार लेने लगी.

“अखिल, अब मुझे जम के चोदो, जैसे ममता को चोदते हो.” नलिनी ने कहा.
अखिल ने उनकी इस इच्छा को पूरी करने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया. दस पंद्रह मिनट की भीषण चुदाई के बाद नलिनी निश्छल हो गयी. उसके शरीर ने अब हार मन ली थी. अखिल भी कुछ ही देर और चोद पाया और फिर वो भी नलिनी की चूत में झड़ गया.

अखिल नलिनी के ऊपर ही गिर गया. दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे और कुछ देर में अखिल उठ गया और नलिनी ने उठकर अपनी चूत को देखा तो उसे उसकी दुर्दशा देखकर आश्चर्य हुआ. पर जो सुख और संतुष्टि उसे आज मिली थी, वो अविस्मरणीय थी. मुंह हाथ धोकर अपनी चूत को साफ करने के बाद तीनों बियर पीने लगे.

“मेरे कुछ अथिति आ रहे हैं सोमवार को, तो हमारा मिलना सम्भव नहीं होगा.” नलिनी ने उदास भाव से कहा.

“अगर आप ममता मैडम के घर आ जाओ तो हम वहाँ ये सब कर सकते हैं.” अखिल ने सुझाव दिया.

नलिनी की बाँचे खिल उठीं. “हाँ ये सही रहेगा.”

शरद अब फिर से चुदाई के लिए उत्सुक था.

नलिनी ने उसे देखा, “इस बार तुम मेरी गांड मारो.”

रात अभी शेष थी. शरद और अखिल उसे पूर्ण रूप से चोदने में सक्षम थे और वो चुदवाने के लिए लालायित. सारे समीकरण सही थे. ये सोचते हुए नलिनी मुस्कुरा उठी.

उसने खड़े होकर शरद का हाथ थामा। अखिल उसकी मटकती गांड को बिस्तर की ओर जाते हुए देख रहा था. उसने सोचा कि आज तो शरद को पहले गांड मारने देता हूँ, पर अगली बार किसी और को ऐसा अवसर नहीं दूंगा. उसे विश्वास था कि ममता मैडम उसकी सहायता करेंगी.

क्रमशः
 
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