वाह क्या बयाँ किया है आपने !! प्रेम सुख से प्रकट हुई तृप्ति को।
आपकी लेखनी अपने उच्चस्तर को प्राप्त हुई, ये कड़ी हमेशा याद रहेगी।
मगर ऐसा लगता है की आप कहानी को भविष्य में ढाल कर इसे भूत काल में ले जाना चाहते है,
क्योंकि ये सब कैसे शुरू हुआ लव और रागिनी के बीच और उसमे नलिनी की क्या भूमिका रही है,
उसका परिणाम आने वाले समय पर छोड़ दिया है, जिसमे शायद आप प्रकट कर सके या कहानी अन्य किरदारों के साथ निरंतर गति से चली जाएगी।
और मेरा ऐसा मत है की निमिष को उसके कर्मों का दंड रागिनी और लव को मिल कर देना चाहिए, अपनी पत्नी के अधिकार लव को सौंपकर।
अगली कड़ी की उत्सुकता से प्रतीक्षा में . . . . .