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Romance भंवर (पूर्ण)

nain11ster

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Update:-70



अभी सब एक दूसरे को सवालिया नजरों से देख ही रहे थे कि हॉस्पिटल से कॉल आया। यह कॉल पार्थ का था, अपस्यु की खबर देते हुए उसने सबको तुरंत हॉस्पिटल पहुंचने के लिए बोला….


कोई समझ नहीं पा रहा था कि हुआ क्या है? नंदनी तो अलग ही डर के शाये में चली गई, उन्हें अपस्यु की बातें याद आने लगी, "हमारे परिवार कुछ कातिल यहां है।".. एक अनचाहा डर की कहीं उन कातिलों में से किसी को अपस्यु के बारे में पता तो नहीं चल गया, जिसने अपस्यु के साथ कुछ बहुत ही बुरा किया हो।


नंदनी सदमे से धम्म से गिरी। सभी लोग नंदनी के ओर दौड़े, उन्हें संभला और होश में लाने की कोशिश करने लगे। इधर सभी लोग नंदनी को संभालने में लगे हुए थे, उधर कुंजल गुस्से में निकली और सीधा कबीर के कमरे का दरवाजा खटखटाने लगी। वो भी देर रात सोया था, नींद में ही उसने दरवाजा खोला, और दरवाजे पर कुंजल को देखकर उसे कहने लगा… "तू है, क्या चाहिए।"


कुंजल पर गुस्सा पहले से सवार था, उसने दरवाजे पर जोड़ की एक लात मारी और पूरा दरवाजा खुल गया। दरवाजा तेज से खुलने के कारन कबीर के पाऊं में चोट लगी और वो तेज दर्द में चिल्लाते हुए कुंजल के कंधे को पीछे से पकड़ा।


कुंजल अपने हाथ कंधे तक लाती उसके उंगली को पकड़ी और तेजी से मुड़ते हुई, उसके पकड़ में आयी उंगलियों को उल्टा घुमा कर तोड़ दी। फिर नजर ईधर-उधर दौड़ाती हुई उसे मारने के लिए कोई हथियार ढूंढ़ने लगी। पास में ही पर्दे के ऊपर रोड लगा हुआ था। कुंजल उसे तेजी के साथ निकाली और पहले तो दरवाजा बंद की, फिर कबीर के पाऊं पर इतना तेज मारी की वो जहां था वहीं बैठ गया।


कबीर जैसे ही बैठा, उसे एक लात मारकर कुंजल ने लिटाया और जो ही उसके पीठ को उधेड़ी वो, अपनी चैरिटी में उसने फिर कोई कसर नहीं छोड़ी। कुंजल रोड वहीं पटकती हुई उसे कहने लगी…. "अभी सिर्फ शक है कि कल रात तुमने कुछ ऐसा किया कि मेरा भाई अभी हॉस्पिटल में है। मेरे दोनों भाई केवल परिवार और रिश्तों का लिहाज करके तुझे छोड़ते आ रहे है, लेकिन मै आरव या अपस्यु नहीं हूं। एक बार यदि मुझे पता चला ना की तेरे वजह से मेरा भाई हॉस्पिटल में है तब तो तू सोच लेना, आज बंद कमरे में मारी हूं, बाद में जहां मिलेगा वहां मारूंगी मारकर हॉस्पिटल भी खुद ही पहुंचाऊंगी और जब तू ठीक होकर आएगा तो फिर मारकर तुझे हॉस्पिटल में एडमिट करवाऊंगी।"


कुंजल बड़े गुस्से में वहां से निकली और वापस कमरे में आ चुकी थी। नंदनी पर छींटे मारकर उसे जगाया गया। जैसे ही वो जागी अपने बेटे को देखने के लिए छटपटा गई। लगभग रोई सी आवाज़ में वो जल्दी से अपने बेटे के पास ले चलने की विनती करने लगी। जो जिस हाल में थे, वैसे ही वहां से भागे-भागे निकले। पार्थ के दिए हुए पते पर सभी पहुंचे।


तेजी के साथ भागते हुए सभी अंदर पहुंचे।अंदर पहुंचकर जैसे ही थोड़ा आगे बढ़े, अचानक ही आरव के कदम रुके। 2 कदम अभी ऐमी और स्वस्तिका भी बढ़े थे कि वो दोनों भी जहां थे वहीं रुके…. "कुंजल, मां, आप दोनों जहां है वहीं रुको।".. आरव वहां के माहौल का चारो ओर से जायजा लेते हुए कहने लगा।


नंदनी और कुंजल पीछे मुड़ कर जिज्ञासावश पूछने लगी… "कहां है सोनू (अपस्यु)"…

स्वस्तिका:- आप समझी नहीं यह एक जाल है, हमे फंसाया गया है, आप दोनों हमारे पीछे आ जाइए।

कुंजल:- क्या कुछ ऐसा है जो हम सीधे-सीधे समझ जाए या फिर ज़िन्दगी हमारी पजल सॉल्व करने में ही बीत जाएगी।

आरव:- मां, कुंजल.. अपस्यु बिल्कुल ठीक है, इसलिए दोनों अपना चिंतन छोड़ दीजिए। अब ये सब क्यों हो रहा है उसका इकलौती वजह वो पार्थ है, अंत में ही पता चलेगा वो ऐसा कर क्यों रहा है?..


"यहां जो दिखता है, मात्र एक भ्रम है, अभी एक पल में कोई पास है, तो अगले पल ना जाने कहां।"….. आरव, नंदनी और कुंजल से बात कर ही रहा था, इसी बीच उस जगह की रौशनी चली गई और उस जगह पर ये बातें गूंजने लगी। आवाज़ गूंजना बंद हुआ और पास में ही एक लड़के की इमेज उभरी जो धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा…


सभी लोग उस उस इमेज के पीछे चल दिए और आगे अंधेरा ही अंधेरा था। किसी को कुछ भी नजर नहीं आ रहा था, बस एक दूसरे को सुन रहे थे। तभी उस जगह एक फोकस लाइट जली…. जो सीधा स्वस्तिका के ऊपर थी।


"मिलिए हमारे बीच की सबसे खूबसूरत और प्यारी सी लड़की से, जिससे आप जितनी बार भी मिलो कुछ नया देखने जरूर मिलेगा। मासूम लेकिन खतरनाक, जिद्दी लेकिन तय ना कर सको की जिद भी किया इसने, मोस्ट फैशनेबल लेकिन कभी सजती संवरती नहीं.. मिलिए हमारी बर्थडे गर्ल …. स्वस्तिका से।"…


बैकग्राउंड से इतना चलने के बाद वहां पूरी रौशनी हुई। हैप्पी बर्थडे का म्यूज़िक बजता हुआ, ठीक सामने पार्थ और अपस्यु जो खड़ा-खड़ा मुस्कुरा रहा था। स्वस्तिका दोनों के सरप्राइज पर मुस्कुराती हुई सबको देख रही थी और सभी लोग उसे घेर कर बधाइयां देने लगे। दीप जले, केक कटा, सबने खूब सेलीब्रेट किया और जब सब खुशियां बांटा जा रहा था उसी बीच नंदनी पार्थ के पास पहुंची।


पार्थ नंदनी को देखते ही उसके पाऊं छु लिए और दोनों कान पकड़ कर माफी भी मांगा। नंदनी उसे इशारों में थोड़ा नीचे झुकने कहीं, जैसे ही वो नीचे हुआ… एक थप्पड उसे चिपका दी। उसकी हालत देखकर सब हंसने लगे…. फिर सब जोर जोर से चिल्लाने लगा.. कल रात का सबसे बड़ा मुजरिम अभी बाकी है…


फिर क्या था नंदनी उसका स्वागत भी उसी अंदाज़ में कि। इतने थप्पड अपस्यु को आज तक कभी एक साथ नहीं पड़े थे। वहां जैसे एक परिवार, पूरा हो रहा था। सब लोग आपस में मिल रहे थे, गले लगकर खुशियां बांट रहे थे। पूरा दिन सभी लोग बाहर ही रहे। पूरा परिवार एक होकर आज स्वस्तिका के लिए खुशियां माना रहा था। सबके बीच आज वही स्पेशल गर्ल बनी हुई थी।


शाम के 4 बजे सभी लोग वापस आए। वापस आने के क्रम में ही ध्रुव का संदेश अपस्यु को मिला जिसमें उसे और ऐमी को शाम का खास आमंत्रण मिला हुआ था। ठीक यही संदेश ऐमी के पास भी पहुंचा हुआ था।.. खैर दोनों ही ये संदेश देखकर बिना किसी प्रतिक्रिया के सभी के साथ वापस लौट गए।


सभी रात देर से सोए थे और सुबह जल्दी ही उठकर निकले, सब लोग थकान में चूर अपने अपने कमरे में चले गए सोने। शाम को तकरीबन 7 बजे ऐमी उठकर बिल्कुल कातिलाना अंदाज में तैयार होने लगी, जब वो आधी तैयार हुई थी तभी कुंजल उसके कंधे के ऊपर लटकती हुई कहने लगी… "कहीं बाहर जा रही हो क्या?"..


ऐमी:- हां बाहर तो जा रही हूं, लेकिन इतना चहक कर मेरे पास खड़ी हुई और सिर्फ इतना सा सवाल तुम्हारे मन में कैसे?

कुंजल:- ठीक है मै सीधा-सीधा कह देती हूं। तुम में मुझे अपनी भाभी नजर आ रही है, और मुझे कुछ नहीं समझना कि तुम दोनों दुनिया को क्या बताते हो।

ऐमी, कुंजल की बात पर मुस्कुराती हुई अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की और तुरंत ही तैयार होकर अपस्यु के पास निकल गई। लॉबी के आधे रास्ते में ही थी कि अपस्यु भी तैयार होकर उसी के पास आ रहा था। दोनों एक दूसरे को दूर से ही देखकर हसने लगे और ध्रुव के घर निकल लिए।


ऐमी के जाते ही कुंजल भी थोड़ा बहुत तैयार हुई और वो स्वस्तिका को सोते छोड़कर आरव के कमरे में चली आयी। आरव अब तक सोया हुआ था, वो अपने भाई को एक नजर देखी और उसे भी सोते हुए छोड़कर वीरभद्र के कमरे में चली आयी।


कुंजल:- क्या वीरे जी, क्या कर रहे है।

वीरभद्र:- कुछ नहीं बस ऐसे ही बैठा हुआ था, आप सब आज सुबह से कहां गए थे।?

कुंजल:- मेरी बहन का आज बर्थडे है, वही सुबह से सेलीब्रेट कर रहे थे।

वीरभद्र:- ओह ! और मुझे छोड़ गए.. यहां मै पूरा दिन ऊब गया बैठे-बैठे, कोई काम ही नहीं था।

कुंजल:- सॉरी वीरे जी, वो भाई ने ऐसा सरप्राइज प्लान किया था कि हमलोग बिना प्लान के ही निकाल गए होटल से। वैसे कोई बात नहीं है जी, आप दिन भर बोर हुए लेकिन शाम आप की हसीन होगी। चलिए..

वीरभद्र:- कहां चलना है?

कुंजल:- आप सवाल बहुत करते है वीरे जी, अब जल्दी से तैयार होते है या फिर मै नाराज हो जाऊं आपसे।

वीरभद्र:- तैयार ही तो हूं, अब और कितना तैयार हो जाऊं।


कुंजल वीरभद्र के साथ बार में चली आयी। बार को देखकर ही वीरभद्र को चक्कर आने शुरू हो गए, वो घबराकर कुंजल से पूछने लगा… "कुंजल जी, सुबह का भूल गई, जो यहां आयी है।"

कुंजल:- अरे घबरा क्यों रहे है वीरे जी, अभी सिर्फ 7.30 बजे है, 3-4 घंटे में तो पूरा नशा ही उतर आना है।

वीरभद्र:- एक बात मै सच सच कहना चाहूंगा, मैंने आज से पहले इतनी खतरनाक लड़की से पहले कभी नहीं मिला।

कुंजल:- अच्छा, ऐसा है क्या? तो जरा बताइए किस तरह की लड़कियों से आज तक आपकी मुलाकात हुई है।

वीरभद्र:- आप को छोड़कर मेरी मां, मेरी बहन और गांव की कुछ लड़कियां बस।

कुंजल:- "हीहीहीहीहीही… ऐसी बात है क्या? अच्छा ये बताइए की वो लड़की कैसी लग रही है।"… कुंजल सामने एक हॉट लड़की के ओर इशारे करती हुई पूछने लगी।

वीरभद्र थोड़ा शर्माते हुए… "क्या कुंजल जी आप भी ना"…

कुंजल:- अरे इतना शर्मा क्यों रहे है, थोड़ा मर्दों वाली फीलिंग लाइए…

"और मर्दाना जोश भी इसे दिखाओ, कोई मिल नहीं रहा तो छटपटा रही है।"… कबीर दोनों के बीच दखलंदाजी करते हुए कहने लगा…

वीरभद्र उसकी बदतमीजियों पर आग बबूला होता अपनी जगह से उठकर उसकी ओर बढ़ा ही था… "बैठ जाओ वीरे जी, इसकी कुटाई आज मैंने की है, उसी का भड़ास निकल रहा है, एक लड़की से पीटा है, किसी तरह भड़ास तो निकलेगा ही।"

वीरभद्र:- हाहाहाहा.. ओह ऐसी बात है क्या, वैसे कुंजल जी खातिरदारी पूरी तरह की या कुछ कमी रहा गई थी?


कुंजल:- इसकी बहनों के वजह से छोड़ दी वीरे जी, वरना खातिरदारी में तो कोई कमी नहीं छोड़ने वाली थी। वैसे भी इसके जगह पर, इसी में घर में घुस कर मैंने इसे मारा है वीरे जी, अब इससे ज्यादा और क्या मै और क्या हाईलाइट बताऊं। लगता है थोड़ा कम मार खाया था, इसलिए ऐसी छिछोड़ी हरकत पर उतारू है।


कबीर:- तुझे तो मै वो सबक सिखाऊंगा की तू भी क्या याद रखेगी?


वीरभद्र:- सुन बे छिपकली की कटी हुई दुम, ज्यादा फड़फड़ा नहीं। तू सबक सीखाने की सोचने से पहले जरा इनके बैकग्राउंड का इतिहास उलट लेना। जब इनकी मां ने दहरा था तब तेरा बाप की घिघी नहीं निकली थी। कुंजल जी ने तेरे घर में घुस कर मारा। अभी तो तूने केवल औरतों का जलवा देखा है तो बिलबिला गया, कहीं इसके भाई ने तुझे सीरियसली ले लिया ना, फिर तू खुद को कोसेगा "की मैंने अपने बड़बोलेपन के कारन ये क्या कर दिया।" अब इससे पहले कि मेरा माथा घूम जाए और मै भूल जाऊं की तू आरव का कोई रिश्तेदार है कट ले यहां से।


कुंजल सिटी बजती हुई कहने लगी… "लव यू वीरे जी क्या डायलॉग मारा है। अब बस भी करो, वरना डर के मारे कहीं इसकी सूसू ना निकल आए।


दोनों कबीर पर हंसते हुए लगातार तंज कसे जा रहे थे। कबीर एक बात बोलता और दोनों मिलकर उसे छिल देते। इस शित युद्ध में तो कबीर कहीं दूर-दूर तक खड़ा ना हुआ इन दोनों के सामने और ऐसी भारी बेइज्जती दोनों ने कर डाली कि कबीर बिलबिला कर वहां से भाग गया।


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इधर कुंजल जब आरव के कमरे से निकली, उसके कुछ देर बाद ही लावणी चुपके से आरव के कमरे में दाखिल हुई। आरव वहां अकेला लेटा हुआ था। लावणी उसे सोते देख, वो भी उसके पास जाकर लेट गई और अपना चेहरा बिल्कुल आरव के चेहरे के सामने रखकर, उसे सुकून से सोते हुए देखने लगी।


बहुत दिलकश और मासूम लग रहा था आरव। आरव के सकून से सोने को मेहसूस करती हुई लावणी अपनी उंगलियां उसके चेहरे पर चलाने लगी। उंगलियों के स्पर्श से अराव की आखें खुल गई, और अपने नजरों के सामने अपने कम्बल में लावणी को देखकर, उसने अपनी पलकें 2 बार झपकी, और उसे प्यार से देखते हुए मुस्कुराने लगा। लावणी भी खामोशी से उसे देखती हुई प्रतिक्रिया में मुस्कुरा रही थी। आरव मुस्कुराते हुए धीमी आवाज़ में "आई लव यू" कहकर उसके चेहरे पर अपनी उंगलियां चलाने लगा।


लावणी के गुदगुदाते अरमान, और वो खिलकर कुछ पल के लिए हंसी। हंसती हुई वो अचानक ही खामोश हो गई और ध्यान से आरव का चेहरा देखती हुई, उसके होंठ पर अपने होंठ रख उसे प्यार से चूमने लगी। आरव भी उसे चूमते हुए अपने हाथ और पाऊं के बंधन में उसे जकड़ते हुए, धीरे-धीरे पकड़ बनाने लगा। "आऊच! ऐसे कौन करता है।"… लावणी आरव की जकड़ में कसमसाती, किस्स को तोड़ती हुई अपनी आखें दिखाती उसे डांटने लगी।


आरव अपने बंधन खोलते उसके होंठों पर किस्स करते हुए अपने हाथ उसके पीछे रखते, उसके नितम्बों को अपने हाथों से जकड़ दिया। लावणी फिर से किस्स तोड़ती हुई उस घूरने लगी… "ये आज चल क्या रहा है, हां।"..


आरव:- ऑफ ओ.. जो भी कहना है वो किस्स करती हुई कहो, ऐसे अधूरे किस्स में मज़ा नहीं आता।

लावणी:- अच्छा जी, होटों के लिए किस्स और हाथों के लिए बम.. बहुत मस्ती चढ़ी है हां…


आरव बिना कुछ बोले कम्बल के अंदर जाकर, उसके गले के नीचे चूमने लगा और अपना हाथ उसके टी शर्ट के अंदर डालकर लावणी के पेट पर अपने हाथ फेरते, धीरे-धीरे हाथ ऊपर ले जाते.. ब्रा को छू रहा था…. "इशशशशशश… बेबी नो.. प्लीज … छोड़ो भी…"


आरव रुका और उसके ऊपर आकर उसकी आखों में देखते हुए कहने लगा…. "ओह बेबी येस.. आज मै नहीं रुकने वाला।"… इतना कहकर अपना चेहरा उसके सीने में घुसा कर उसे चूमने लगा…. "हीहीहीही.. छोड़ो भी आरव कोई आ जायेगा… उफ्फ … आरव नो.. हटो भी बाबा.. कोई आ जाएगा.. दरवाजा खुला है… आरव.. आरव…"


अचानक ही लावणी उसे तेज तेज हिलाती, हुई कहने लगी… बेबी रुको भी कोई बेल बजा रहा… ऑफ ओ.. आरव स्टॉप एंड लिसेन।" .. लावणी थोड़ा तेज बोली और आरव रुकते हुए उसके ऊपर आया और गुस्से से अभी उसको देख ही रहा था, कि इतने में दरवाजा खुला और नंदनी अंदर… "कब से बेल बजा रही हूं तू दरवाजा क्यों नहीं खोल रहा।"… दरवाजा खुलने के आवाज़ के साथ ही लावणी कम्बल के अन्दर घुस गई और आरव करवट लेकर पलटा और नंदनी के ओर देखने लगा….
 

Chunmun

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Fala q apni bejjati karane pr tula hua hai.
Pta nahi hai ki kunjal jangli billi hai. Fale ko room mai ghus kr mar aai fir bhi nahi sudharta.
Pakka khun hai Manish ka. Wo bhi apne chote bhai k sur mai sur mila deta hai.
Aarav ki lagta hai fir chate parne ki puri sambhavna hai.
Kahi nandni ji ne kambal khicha to sara pol khul jana hai.
Dekhte hai kya hota hai us bechare k sath.
Idhar Dhruv ami or apasyu ko apne yaha invite kiya hai or waha ye dono ban than kr gye hai lekin bas koi bawal na ho waha Dhruv k bahan or jija k sath.
Swastik ka surprise party bada khatarnak tha bechara Kabir usi chakkar mai mara gya hai.
Nandni ji bhi chod di nahi to mujhe laga tha ki aaj ise chappal tutne tak pitai hogi apasyu ki.
Fabulous update dear.
 

rgcrazyboy

:dazed:
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mast update.
to sab ki soch se pare nikal is baar hospital ka locha.
hahahaha
vese partha ka bhi lage hato entro de he diya tum ne vo bhi chalki se :D
har choti baat ko aye se cover up :superb:
 
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एक और शानदार अपडेट, क्या जबरदस्त सरप्राइज बर्थडे विश किया है, और लावणी और आरव तो गए लगता है
 

aman rathore

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Update:-57



साची और ध्रुव को ऐसे हंसकर बातें करते हुए देख सभी लोगों के ख्यालों में ऐसा गलतफहमी का बीज उगा की दोनों की कुंडलियां बदलते हुए कहने लगे… "लगता है दोनों ने एक दूसरे को पसंद करना शुरू कर दिया है… हम भी कुंडलियां मिला ही लेते है।"…

रात के वक़्त दोनों बहने अपने रूम में थी। लावणी साची के पास बैठकर उसे देखती हुई, आज शाम की हुई घटना को बताने लगी। आश्चर्य तो उसे तब हो गया जब साची ने उसे ये कहा कि उसे सारी बातें पहले से पता थी। बस एक लड़के मिलना था.. सो वो मिल ली, अब वक़्त बताएगा की वो पसंद आता है कि नहीं, वैसे लगता है पसंद आ ही जाएगा।

साची की बात पर लावणी को यकीन नहीं हुआ और वो बार-बार यही कहती रही की आप हर काम में जल्दबाजी करने लग जाती है। इसपर साची उसे समझाती हुई कहने लगी….. "ब्वॉयफ्रैंड तो 10 मिल जाएंगे, जीवन साथी एक ही होता है। हां थोड़ा खिंचाव था अपस्यु को लेकर, कोई बात नहीं। ध्रुव को भी वक़्त दूंगी, झुकाव उस ओर भी हो ही जायेगा"

लावणी:- और यदि इसका भी पहले से कोई चक्कर हुआ तो?

"ये कम से कम उस गधे अपस्यु की तरह बताने तो नहीं आएगा। और जिसे ना देखा और ना सुना उसके बारे में क्या सोचना। वैसे भी आज शाम को ही आरव ने मुझे बताया था.. अच्छे लोग ज्यादा दर्द देते है। मैंने उसकी बात पर गौर किया और पाया कि वो सच बोल रहा था।"…

फिर जब एक बार अराव की बात शुरू हुई तब तो साची ने लावणी को घेर ही लिया। सोने तक में तो साची ने लावणी को लगभग रुला ही दिया। सुबह उठकर दोनों बहन तैयार हुई और नाश्ते के बाद वो दोनों पहुंची कमरा नंबर 806 में। आरव अपने कमरे में बैठा टॉम एंड जेरी का मज़ा ले रहा था, तभी उसके रूम की बेल बजी और दरवाजा खोला तो दोनों बहने बाहर खड़ी थी।

आरव और लावणी ने जब एक दूसरे को देखा, तो एक दूसरे से लिपटने को मचल गए, लेकिन साथ में साची थी, कुछ किया भी नही जा सकता था। दोनों अंदर आते हुई बैठी और साची आरव के ओर देखती हुई अपनी भौंहें चढ़ा कर लावणी के ओर इशारा करने लगी… आरव अपने हाथ जोड़कर साची के पाऊं में सीधा दंडवत हो गया… साची उसे आशीर्वाद देती कहने लगी… "खुश रहो बच्चा।"..

तीनों के बीच बातें शुरू हुई। यूं तो बात तीनों ही कर रहे थे, लेकिन ध्यान दोनों का एक दूसरे पर ही था जिनके बीच साची कुंडली मार कर बैठ चुकी थी। कुछ देर बात करने के बाद साची ने अचानक ही कुंजल को कॉल लगाने के लिए बोल दी…

आरव उसे कॉल लगाते हुए साची को फोन थामा दिया…. "हां मोनू…"

"मोनू नहीं साची बोल रही हूं। किधर हो अभी तुम"..

कुंजल:- न्यूयॉर्क आयी हूं साची। बाय द वे, हैप्पी हॉलीडे..

साची:- अच्छा हैप्पी हॉलीडे, इसलिए कामिनी अकेली भाग गई घूमने, सोची यहां रहोगी तो कहीं मेरा मेलोड्रामा ना झेलनी पड़े।

कुंजल:- ना रे बाबा, तुम्हारा बिल्कुल सोचना गलत है। मै यहां पहले आयी थी तो विन्नी और क्रिश के साथ न्यूयॉर्क पहुंच गई मस्ती करने।

साची:- बहुत मस्ती हो गई चल अब वापस आ जाओ। मेरे किसी दोस्त का यहां ना होना मुझे खल रहा हैं।

कुंजल:- क्या हुआ फिर किसी बात को लेकर परेशान हो क्या?

साची:- हां बहुत बड़ी परेशानी है। मैंने एक लड़का पसंद किया है और बस ऐसे वक़्त में एक दोस्त के सहारे की बहुत जरूरत है। अब हर बात हर किसी से शेयर तो नहीं कर सकती ना।

कुंजल:- ओहके डार्लिंग, आज भर यहां मस्ती मार लेने दे कल सुबह मिलती हूं।

कुंजल से बात समाप्त करके जब साची कमरे के कोने से पीछे मुड़ी… एकदम ध्यान मुद्रा में दोनों बिस्तर पर बैठे बैठे ऐसे गले लगे थे, मानो एक दूसरे से लिपट कर वहीं सो रहे हो। साची गले की खराश के साथ दोनों का ध्यान भंग करती अपनी आखें दिखाने लगी… और इधर दोनों ही शर्माकर एक लेफ्ट तो दूसरी राईट को ताकने लगी।…

इधर साची और लावणी दोनों उसके कमरे से निकले और आरव के दिल में अजीब सी बेचैनी उठने लगी। उसे अचानक ही बिना किसी चोट के तेज दर्द मेहसूस होने लगा। श्वांस लेने में काफी तकलीफ़ सी होने लगी। आरव ने जब समय देखा तो सुबह के लगभग 11 बज रहे थे।

बेचैन होकर उसने नंदनी को फोन लगाया। नंदनी उससे बात करने लगी और वहां का हाल चाल लेने लगी। आरव को बात करने में भी तकलीफ़ हो रही थी, लेकिन वो किसी तरह हंसते हुए अपनी मां से बात कर रहा था। फिर अंत में उसे पता चला कि अपस्यु सिन्हा जी के काम से बंगलौर निकला है।

आरव का दिमाग सन्न और दिल बेचैन हो उठा। बार काउंटर पर जाकर उसने पूरी बॉटल पी ली, दिल को फिर भी चैन नहीं। पीते-पीते उसके होश उड़े थे रास्ते में क्या हुआ किससे टकराया, किस से कितनी बातें हुई, कोई खबर नहीं।

अपने कमरे पहुंच कर वो ऐमी को फोन लगाया कोई जवाब नहीं। लगातार वो फोन लगाता रहा किंतु ऐमी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वो प्रतिक्रिया देती भी कैसे अपस्यु और प्लैनिंग के बीच ऐसी फसी थी कि उसका ध्यान ही नहीं गया फोन पर।

हार कर उसने स्वस्तिका को कॉल लगाया। स्वस्तिका फ्लाइट में थी इसलिए वो फोन ले नहीं सकती थी। आरव कॉल करके थक चुका था और अब एकटक बस अपने फोन को देख रहा था।

रात के तकरीबन 12.30 बज रहे होंगे। आरव अब भी बस अपनी खुली आंखों से फोन को ही देख रहा था। ठीक इस वक़्त स्वस्तिका और ऐमी अपनी चिट-चैट खत्म करके कैफेटेरिया से निकल रही थी। तभी ऐमी को ख्याल आया कि आरव से तो उसने बात ही नहीं की और जब उसने अपने कॉल लॉग पर ध्यान दी तब उसकी रूह सिहर गई…

तुरंत उसने आरव को कॉल लगाए… ऐमी का फोन देखते ही आरव ने अपनी पलकें झपकी और फोन उठाया…. "सुरक्षित है कि नहीं मेरा भाई।"…

ऐमी:- हां वो ठीक है। सॉरी आरव..

आरव:- नाह … सॉरी नहीं.. तुम ठीक हो..

ऐमी:- नहीं मुझे कुछ नहीं हुआ…

आरव, गहरी श्वांस लेते… नॉटी है क्या वहां..

ऐमी:- हां यहीं है..

आरव:- बात करवाओ मेरी..

ऐमी, स्वस्तिका को फोन देती… आरव है लाइन पर.. "कहां घूम रहा है लड़के"… स्वस्तिका फोन उठाती हुई पूछने लगी…

आरव:- नॉटी ऐमी ठीक है ना… उसकी कंडीशन स्टेबल तो है ना।

स्वस्तिका:- तू शॉक्ड हो जाता अगर ऐमी को यहां अभी देखता तो। बहुत हिम्मत दिखाई इसने तो।

आरव:- भाई को दिखाएगी क्या… मुझे देखना है?

स्वस्तिका:- हां दिखाती हूं रुको…

थोड़ी ही देर में स्वस्तिका आईसीयू में थी जहां अपस्यु बेसुध लेटा हुआ था। कुछ देर वो अपने भाई को देखता रहा, फिर उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। कुछ तसल्ली हुई आरव को, और वो वहीं परे-परे ही गहरी नींद में सो गया। इधर आरव गहरी नींद में सोया था और उधर अपस्यु।

नींद की गहराइयों में धीरे धीरे फिर से वही छवि बनना शुरू हो गया। दिमाग के कोने में वो गहरी सी यादें……



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वर्ष 2002….


दिए की रौशनी में जब आखें खुली सामने ऐमी उस फूल को मांग रही थी जिसे तोड़ने अपस्यु ऊपर चढ़ा हुआ था। गुरु निशी कुटिया में जैसे ही पहुंचे.. अपस्यु उठकर बैठ गया। सदैव की भांति गुरु के मुख पर वहीं तेज और चेहरे पर मुस्कान थी जिसे देखने मात्र से कई पिरा का निवारण हो जाए…

"अपस्यु, आप को पहले भी माना किया था ना ऊंचाई से दूर रहने"
"क्षमा गुरु देव, मै केवल मोह वाश उस फूल को तोड़ने चला गया था।"
"आप ने मेरा हृदय दुखाया है, आप को इसका दंड मिलेगा"

अपस्यु अपने शिस झुकाकर नमन करते हुए…. "आज्ञा गुरुदेव।"

"आज से महादेव वंदना और उनकी आराधना आप की जिम्मेदारी होगी। और आप बिना विफल हुए रोज ये कार्य करेंगे।
"जी गुरुदेव"
"अब आराम कीजिए और इस बालिका ने आपकी बहुत सेवा की है, इसलिए इसके निः स्वार्थ कार्य का फल मिले ऐसी कोशिश कीजिएगा।"
"जैसी आपकी इक्छा गुरुदेव"

गुरु निशी के जाते ही अपस्यु उठा और अपने बैग से वो उजला नीला फूल निकालकर ऐमी को भेंट करते हुए कहने लगा…. "यहीं फूल चाहिए था ना।"

ऐमी:- हां .. लवली फ्लॉवर। ए सुनो, तुम्हे डर नहीं लगता उस बाबा से। वो बच्चों को उठा कर ले जाते है।

अपस्यु, उसकी बात पर हंसते हुए कहने लगा…. "चिंता नहीं कीजिए आप यहां सुरक्षित है। इतनी रात को आप मेरे समीप है आप के माता-पिता आप को ढूंढ़ रहे होंगे।

ऐमी:- ऊफ़् ओ बहुत टफ लैंग्वेज में तुम बात करते हो, मुझे समझ में नहीं आया। दोबारा बताओ।

अपस्यु;- आप को फूल मिल गया ना, अब आप यहां से जाइए, आपके मम्मी-पापा इंतजार कर रहे होंगे।

ऐमी:- मै तो कई दिनों से तुम्हारे साथ ही सोती हूं डफर। अब चलो सोते हैं।

अपस्यु:- ठीक है।

ऐमी जबतक जागती रही तबतक वो बातें करती रही और अपस्यु बस उसे सुनता जा रहा था। गुरु निशी के कहे अनुसार अपस्यु सुबह के प्रहर उठकर स्नान किया और 900 मीटर की लगभग सीधी चढ़ाई के बाद ऊपर बने भगवान शिव के मंदिर पहुंचा और विधिवत पूजा करी।

महादेव वंदना की समाप्ति के बाद अपस्यु वापस उसी रास्ते से उतरने वाला था लेकिन उसके सामने जेके और पल्लवी थे… दोनों ने फिर पूछना शुरू किया कि वो 10 दिनों से कहां गायब था। अपस्यु ने सारी घटना बता दिया। अपस्यु को सुनने के बाद दोनों वापस चले गए।

उस दिन जब अपस्यु खाली समय में जेके और पल्लवी के पास पहुंचा तब वहां एक जाना पहचाना आवाज़ की भनक अपस्यु के कान में लगी। अपस्यु आवाज़ के सहारे ऐमी तक पहुंचा जो एक तरह से जेके और पल्लवी के कैद में थी।

यह कोई पहला मौका नहीं था जेके और पल्लवी के लिए, जब अपस्यु ने दोनों को चौंकाया था। नाम मात्र की निकली आवाज़ का दूर से पीछा करके वहां तक पहुंचने की अद्भुत कला पर दोनों दंपत्ति हैरान हो गए। अपस्यु के प्रशिक्षण को नया दिशा देते हुए अब उसे ब्लाइंड मूव्स और किसी अनजान जगह को दिमाग में बिल्कुल इंच दर इंच प्लॉट करने की सिक्षा मिलनी शुरू हो चुकी थी।

कुछ दिनों के बाद ऐमी अपनी छुट्टियां बीता कर वहां से चली गई। जबतक ऐमी छुट्टियों में वहां रुकी, बस अपस्यु के ही साथ होती। यहां तक कि वो उसके प्रशिक्षण के वक़्त भी उसी के साथ रहती। लगभग 6 मिहिने हुए थे अपस्यु को जेके और पल्लवी के साथ, उसके बाद वो दोनों भी वहां से चले गए और जाते जाते पूरा कॉटेज ही अपस्यु को देकर चले गए। जहां अपस्यु के लिए नई चीजों को सीखने का पूरा खजाना छोड़ा गया था।

2002 के साल का अंत भी हो रहा था, जब गुरुजी निशी अपने शिष्यों में से "प्रथम" और सहायक को चुनते। इस वर्ष पार्थ को "प्रथम" चुना गया था और वशी को "सहायक".. इसी के साथ इस वर्ष अपस्यु के दल में भी एक छोटा सा बदलाव किया गया था। उसके विज्ञान कि रुचि और जीव विज्ञान में उसके ज्ञान को देखते हुए गुरु जी ने उसके साथ अपनी पुत्री स्वस्तिका और 2 अन्य शिष्यों को उसके साथ रखे, जिनका लक्ष्य मानव जीवन को पिरा रहित सेवा देना था।

ये अपस्यु का ही प्रभाव था कि उसके साथी मित्र हर समय अपस्यु से कुछ ना कुछ नया सीखते थे। इसी क्रम में अपस्यु अक्सर पार्थ और स्वस्तिका के साथ उस कॉटेज में भी जाया करता था और उन्हें विज्ञान के साथ-साथ अन्य कला भी थोड़ी-बहुत सीखने के लिए मिल जाती थी।

2003 की सुरवात हो रही थी। हर साल अपस्यु के लिए जनवरी का महीना खुशियों से भड़ा होता था, क्योंकि पूरे महीने उसका भाई आरव और मां सुनंदा उसके साथ होती। जहां एक ओर सभी शिष्य ठंड के कारण अपने काम की गति को धीमा कर चुके होते वहीं अपस्यु हर काम को सही तरीके से जल्दी निपटाकर अपना पूरा वक़्त अपने भाई और मां को दिया करता था।

हालांकि वो उम्र ऐसी थी जहां चीजें समझ में ना आना एक आम सी बात होती है और आरव भी इसी खुन्नस में वहां रहता था, कि क्यों उसे अपने दोस्तों से दूर इस जंगल में 1 महीने के लिए पटक दिया गया है। सुनंदा आरव के इस चिढ़ को अपने प्यार से खत्म करती और अपस्यु के साथ उसे रहने के लिए प्रेरित किया करती थी।

दोनों भाई में सीखने की क्षमता तो एक जैसी थी लेकिन एक पुरव था तो दूसरा पश्चिम। अपस्यु जिस काम को लगन के साथ पूरा कर देता वहीं आरव पूरे लापरवाही के साथ उस काम को पूरा करता। हां लेकिन पूरा जरूर कर देता था। सुनंदा अपने आंचल तले अपने दोनों बच्चों पर पूरा प्यार बिखेर देती। वो वक़्त भी काफी भारी होता जब सुनंदा महीने के अंत में वापस जाती। अपस्यु रोना तो भूल चुका था, शायद चेहरे से उसके दर्द के एहसास को भी नहीं पढ़ा जा सकता था लेकिन उसके अंदर की भावना हर पल रोते रहती जिसे सिर्फ़ सुनंदा मेहसूस कर सकती थी।

वो जब भी अपस्यु को छोड़ कर जाती बस इतना ही कहती…. "मेरा बच्चा, बस कुछ दिन और यहां सीख लो, फिर हम सब साथ होंगे।" … वैसे एक हैरानी कि बात और भी इस दौरान होती, जब भी आरव उसे छोड़ कर जाता, ना चाहते हुए भी वो बिलख-बिलख कर रोता था… और अपस्यु भी उसे चुप कराते बस अपनी मां के कहे शब्द को उससे कह दिया करता।

माहौल गमगीन होता, सुनंदा और आरव की आखें नम होती किंतु अपस्यु के चेहरे पर ठीक गुरु निशी जैसा तेज होता, जो मुस्कुराते हुए अपने भाई और अपनी मां को जाते हुए देखता था
:superb: :good: amazing update hai nain bhai,
behad hi shandaar aur lajawab update hai bhai,
to swastika guruji ki putri hai,
flashback to bahot hi shandaar hai aur iss tarah chhote chhote bhaag mein flashback dikhane se present ka flow bhi nahin toot raha hai,
ab dekhte hain ki aage kya hota hai
 

aman rathore

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माहौल गमगीन होता, सुनंदा और आरव की आखें नम होती किंतु अपस्यु के चेहरे पर ठीक गुरु निशी जैसा तेज होता, जो मुस्कुराते हुए अपने भाई और अपनी मां को जाते हुए देखता था।

साल के मध्य तक ऐमी, अपस्यु के पास होती और जब वो आती फिर तो ऐसा लगता, उस माहौल में कोई सबसे अलग आ पहुंचा है। वो दिन भर अपस्यु के साथ रहती, उससे बातें करती और उसी के साथ सोती भी थी। दोनों एक दूसरे से काफी जुड़े हुए थे और जब भी साथ होते तो ये दिखता भी था।

वक़्त बीतने के साथ-साथ शिष्यों के बीच… और ऐमी और आरव का अपस्यु से जुड़े उनके दोस्तों के बीच रिश्ते गहराते चले गए। आरव अक्सर स्वस्तिका को नॉटी कहकर चिढ़ाता था, क्योंकि उसका मानना था कि गुरु निशी, एक अपनी बेटी की खुशी के कारण बाकी बच्चों को यहां कैद में रखे हैं। इस जगह पर सबके होने का कारण स्वस्तिका ही है।

वर्ष 2005 था, जब जेके और पल्लवी अपस्यु से मिलने वहां पहुंचे थे। हालाकि दोनों पहले भी बीच-बीच में अपस्यु से मिलकर उसका हाल चाल लेते रहते थे और उसके प्रशिक्षण को नई दिशा दिया करते थे।

उस वर्ष जेके और पल्लवी अपस्यु से मिलने पहले से उस पहाड़ी पर पहुंच चुके थे जहां अपस्यु सुबह के अंधेरे में हर रोज महादेव वंदना के लिए आया करता था। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था, कि अपस्यु सुबह जागकर जब महादेव वंदना को जा रहा हो, तब ऐमी कभी जागी हुई मिलती थी।

ये पहला अवसर था जब ऐमी सुबह जाग कर आज देखना चाहती थी, कि अपस्यु रोज सुबह उसे अकेला छोड़ कर कहां जाता था। अपस्यु उठकर जबतक स्नान कर रहा था, ऐमी भी स्नान करके पहले से तैयार बैठी थी।… अपस्यु जब अपने कुटिया ने प्रवेश किया और दिए की रौशनी में ऐमी को जागते हुए पाया तब वो उससे जागने का कारण पूछने लगा।

ऐमी भी जवाब में जिद पकड़ ली, की उसे भी देखना है कि वो कहां जा रहा है। अपस्यु दुविधा में फस चुका था। उस पहाड़ की लगभग सीधी चढ़ाई थी और ऐमी इतने जिद पकड़े थे कि उसे जाने ही नहीं दे रही थी।

पूजा अपने निश्चित समय में होनी थी और अपस्यु उसमे चूक नहीं सकता था और इसी काश-म-काश में अपस्यु ने महादेव का नमन किया और हर हर महादेव करता ऐमी को लेकर बढ़ चला। लगभग सीधे पहाड़ की चढ़ाई देखकर ही ऐमी को चक्कर आने लगे और उसने पहले फैसला किया की वो ऊपर नहीं जाने वाली। किंतु जब अपस्यु थोड़ा ऊपर आसानी से चढ़ गया, तब ऐमी को भी चढ़ने की हिम्मत मिली…

अब वो भी अपस्यु के नक्शे पर चढ़ने लगी। अपस्यु जब आगे बढ़ते नीचे देखा तब पाया की ऐमी भी ऊपर चढ़ रही थी। मजबूरन उसे वापस से नीचे आना पड़ा। अब ऐमी ऊपर और उसके ठीक नीचे अपस्यु था। वो लोग जब पहाड़ के मध्य में थे, तब सिन्हा जी और उनकी धर्म पत्नी सुनीता, जो सुबह भ्रमण को निकला करते थे, उन्होंने दूर से देखा कि आज उस पहाड़ पर केवल अपस्यु नहीं बल्कि उसके साथ कोई लड़की भी चढ़ रही है।

ऐमी की मॉम सुनीता को लगा कि कोई गुरुकुल की छात्रा होगी लेकिन सिन्हा जी को शंका हुआ कि ऐमी पूरे दिन और रात अपस्यु के साथ रहती है, कहीं वहीं तो नहीं। जब उन्हें ऐसा संका हुआ, दोनों दौड़े उस पर्वत के ओर। इधर ऊपर से जेके और पल्लवी दोनों भी उन दोनों को ऊपर चढ़ते देख रहे थे।

ऊपर पहुंचने में लगभग 100 मीटर और बचे होंगे जब ऐमी गलती से नीचे देखी और जब नीचे देखी तब उसकी डर कि कोई सीमा नहीं रही। अपस्यु उसे समझा रहा था कि बस उपर देखते बढ़ती रहो, कुछ नहीं होगा। किंतु ऐमी अब डर के साथ बढ़ रही थी और उसे बार-बार ऊंचाई का ख्याल आ रहा था।

इसी क्रम में ऐमी ऊपर के ओर पाऊं बढ़ा रही थी और वो पूरा संतुलन नहीं बना सकी। पहले उसका पाऊं फिसला फिर उसका हाथ छूटा। अपस्यु के पास बस एक पल का समय। उस एक पल में अपस्यु ने गहरी सांस खिंचा और गुरुत्वाकर्षण के विरूद्ध किसी भारी चीज को थामने में लगे फोर्स का ख्याल किया और अपना एक हाथ नीचे करता ऐमी को कंधे से पकड़ा, और दूसरे हाथ के पंजे से वो पहाड़ को जकड़े था।

ऐमी उचाई से गिर रही और अपस्यु तेजी के साथ उसका कंधा पूरी ताकत से पकड़ा…… बाएं हाथ से जैसे ही अपस्यु ने उसे पकड़ा दाएं हाथ की कलाई पूरी अकड़ गई और उंगलियां सीधी होकर उन खुरदरे पत्थर से घिसते हुए नीचे आने लगा। ऐसा लग रहा था अपस्यु अपने दाएं पंजे का पूरा जोर लगा कर पत्थरों में छेद करने की कोशिश कर रहा है और उसका पंजा लगातार उसके पूरे जोर लगने के विरूद्ध घिसते हुए नीचे फिसलता जा रहा था।

घिसते-घिसते वो तकरीबन 3 फिट तक नीचे आया। ऐमी को लगातार पकड़े होने के कारण, गिरने का दवाब धीरे-धीरे कम होने लगा और अंततः 3 फिट नीचे अाकर उसने एक बार फिर पूरी पकड़ बना चुका था।

ऐमी को हिम्मत देते हुए, उसने ऐमी को कंधे पर लिया और बची दूरी को तय करते वो ऊपर चढ़ गया। इस हुई घटना के साक्ष्य बने मिस्टर एंड मिसेज सिन्हा की तो दूर से देख कर ही चींखें निकल गई। इधर जेके और पल्लवी भी इस घटना को देखकर हैरान थे।

अपस्यु ऊपर आते ही बिना समय गंवाए अपनी आराधना में लग गया, जबकि जेके और पल्लवी, ऐमी को को सदमे से बाहर लाते हुए उसे नीचे लेकर गए। कुछ देर तक दोनों उसे दिलासा देते रहे और जब उन दोनों ने ऐमी के मॉम-डैड को पास आते देखा, तो वहां से गायब हो गए।

इधर अपस्यु, ऊपर जब पूजा समाप्त कर चुका था, तब उसे अपने हाथों का ख्याल आया, जिसके सहारे अब वो नीचे नहीं उतर पता। कलाई पूरी खींच चुकी थी जिसमें सुजन आ चुका था। दाएं हाथ की उंगली के नाखून उखड़ चुके थे, उंगली का उपरी हिस्से का भाग लगभग चिथरा हो चुका था और उंगलियां कांप रही थी।

इस हाथ के सहारे अब नीचे उतर पाना संभव नहीं था, अतः उसने अपने आस पास देखना शुरू किया। कुछ ही दूरी पर उसे रस्सी दिखी और वो समझ चुका था कौन जानता था कि वो अब अपने हाथो के सहारे से नीचे नहीं उतर पाएगा।

अपस्यु रस्सी के सहारे नीचे उतरा और वापस गुरुकुल लौटकर आया। जबतक वो वापस लौटा, तब तक सिन्हा जी पूरा माहोल बना चुके थे और गुरु निशी अन्य शिष्यों के साथ उसकी प्रतीक्षा में थे।

गुरु नुशी को रास्ते में देखकर अपस्यु ने तुरंत अपने हाथ पीछे किए और अपने रास्ते बढ़ने लगा। जैसे ही वो प्रवेश द्वार पर पहुंचा गुरु निशी हुए हटना पर उससे जवाब मांगने लगे। अपस्यु अपने प्रति उत्तर में केवल इतना ही कहा कि… "किसी के निः स्वार्थ सेवा का वो बस केवल छोटा सा भुगतान कर रहा था।"..

अपस्यु का जवाब सुनकर जैसे गुरु निशी गर्व महसूस करने लगे हो। कई साल पहले की बात थी जब गुरुजी ने ऐमी के सेवा के बदले उसका फल मिलना चाहिए ऐसी बोला था… और अपस्यु आज तक उस सेवा को याद रखे था। किंतु यह जवाब एक माता-पिता के लिए ये कतई ही सुकून देने वाला नहीं था, ऊपर से सिन्हा जी थोड़े गरम मिजाज के थे।

एक तो उन्हें यहां आकर ये बात खलने लगती थी कि काम में होने के वजह से वो अपने परिवार को समय नहीं दे पाते इसलिए छुट्टियां मनाने वो यहां आते है। उसपर से भी यहां वो अपनी बच्ची को प्यार करने से भी तरस जाया करते थे अपस्यु के कारण और आज तो नीचे गिरते देख प्राण ही सुख चुका था। उनसे बर्दास्त नहीं हुआ और उन्होंने अपस्यु पर हाथ उठा दिया।

हर किसी को अपनी परी थी। एक छोटा लड़का जो दर्द छिपाए चेहरे पर मुस्कान लिए वहां सामने खड़ा था… उसपर गुरुजी ने अपना रोष दिखाया और जवाब सुनकर अती संतुष्ट हो गए। वहीं सिन्हा जी भी अपने आक्रोश में अपनी छिपी पिरा, अपस्यु पर हाथ उठा कर दिखा रहे थे। किन्तु किसी ने भी ये ध्यान नहीं दिया कि उतनी ऊंचाई से बचाने के प्रयास में अपस्यु ने क्या किया?

शायद एक मूल इंसानी स्वभाव जो केवल अपना दर्द और खुशी देख रही थी लेकिन वहां खड़ा एक छोटा सा बालक सबकी भावनाओ की कदर करते बस शांत खड़ा सबके लिए अपने हृदय में प्रेम का संदेश दे रहा था। इसके साथ ही एक साहस कि कहानी, जो वो अबोध बालक लिख चुका था। अपने दृढ़ संकल्प और विश्वास के दम पर, उसने वो कर दिखाया था जो अच्छे-अच्छे प्रशिक्षित के सोच से परे था। जब उसकी उंगली से खून टपक कर नीचे गिर रहा था, गुरु निशी अपस्यु पर गर्व महसूस किए जा रहे थे, तो सिन्हा जी उसपर हाथ उठा रहे थे।

ऐमी की नजर उस टपकते खून पर पड़ी, जो उंगलियों में खून के बने थक्के (blood clot) से टप-टप करके बूंद बनकर टपक रही थी, और इसी के साथ अपस्यु के साहस की कहानी पता चल रही थी। ऐमी सहम सी गई, जब उसे याद आता रहा की किस जोड़ से अपस्यु ने अपने पंजे से पकड़ रखा था उस पहाड़ के पत्थर को और वो घिसता हुआ कितने नीचे तक आया था। और इन्हीं ख्यालों के साथ, ऐमी सदमे में जाती हुई धम्म से गिरी जमीन पर।


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गहरी नींद की ये वाकया, दिमाग के कहीं कोने से निकलकर अपस्यु के अंदर चलने लगी और ऐमी के गिरते देख, अपस्यु लंबी-लंबी श्वांस लेते हुए तेजी के साथ उठकर बैठ गया। उसने अपने हाथ और सीने पर लगे हर वो वस्तु हटाई जो उसे बिस्तर से जोड़े रखे थी, अपस्यु उठकर तुरंत बाहर आया…

जब घड़ी पर नजर गई तो रात के 2 बज रहे थे और ऐमी वहीं पास एक लम्बी टेबल के हैंड रेस्ट पर अपना सर रखकर सोई हुई थी। अपस्यु उसके पास बैठा और उसके सर पर हाथ रखकर अपने हाथ फिराने लगा…

एक पूरी रात वो सोई नहीं थी इसलिए वो काफी गहरी नींद में थी। सुबह जब ऐमी की आखें खुली तब उसका सिर तकिए के नीचे था और अपस्यु उसके पाऊं के पास बैठे-बैठे सो गया था।

"पागल बाहर क्यों हो, चलो अन्दर जाओ आईसीयू में।"… ऐमी, अपस्यु को जगाते हुए कहने लगी।

अपस्यु, ऐमी को पास देखकर मुस्कुराते हुए कहने लगा….. "अभी सवेरा हो गया है, मुझे लगा फिर दिए की रौशनी में तुम्हे देखूंगा।"

ऐमी:- वेरी फनी.. हा .. हा… हा .. नाइस जोक। चलो अब आईसीयू में जाओ। तुम बाहर क्यों हो?

अपस्यु:- मै गहरी नींद में था जब तुम मेरे हाथ का खून देख कर गिर गई और मेरी नींद खुल गई। मुझे लगा तुम भी मेरे साथ कहीं आईसीयू में तो ना हो।

ऐमी:- तब मै बच्ची थी समझे.. अब मै बच्ची नहीं रही, जो खून देखकर मै खुद एडमिट हो जाऊं। यदि ऐसा होता ना सर, तो आप यहां मुझसे बात नहीं कर रहे होते।

अपस्यु:- ठीक है बाबा मान लिया… वैसे समझ लो अब मुझे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है तो अब मै चल-फिर कर सकता ही हूं।

तभी उनके बीच स्वस्तिका पहुंची, अपस्यु को देख कर वो उसके गले लगती कहने लगी….. "क्या जरूरत थी ये सब करने की। जानते हो कितना डर गई थी मै।

अपस्यु:- अरे वहां परिस्थितियां ही कुछ ऐसी बनी की क्या बताऊं। छोड़ो ये बाद में चर्चा करेंगे… पहले आरव से मेरी बात करवाओ…

बंगलौर में 21 जून रात के सुबह के 6.30 बज रहे थे और USA में 20 जून दिन के लगभग शाम के 8 बजे रहे थे….

दिन के लगभग 1 बजे कुंजल अपने पूरे जत्थे के साथ न्यूयॉर्क से शिकागो पहुंची थी, किंतु जैसे ही वो कमरे में आयी, यहां का पूरा हाल ही उल्टा-पुल्टा था। आरव बिस्तर के नीचे बैठा बिस्तर से टिक कर सो रहा था और आस-पास कई सारी शराब कि बॉटल लुढ़की पड़ी थी।

कुंजल को समझते देर न लगी कि ये पूरा टूल होकर बेहोश पड़ा है। वीरभद्र के साथ मिलकर, उसे उठाकर दोनों ने बिस्तर पर लिटाया फिर वीरभद्र ने उसके कपड़े बदले। जबतक इधर क्रिश ने होटल स्टाफ को बुलवाकर पूरा रूम साफ करवाया। होटल स्टाफ से पता चला कि कल ही आरव ने इनके लिए 2 कमरे और बुक करवा रखे है। कुंजल और वीरभद्र तो वहां से नहीं गए लेकिन क्रिश और विन्नी ने अपना कमरा शिफ्ट कर लिया।

वीरभद्र कुंजल से पूछने लगा कि क्या आरव को उठाना चाहिए, इसपर कुंजल उसे माना करती हुई कहने कहीं… "सोने दो वीरे जी, वैसे भी मेरे भाई बहुत कम नींद लेते है।"

कुंजल ने वीरभद्र को भी आराम करने दूसरे कमरे में भेज दी, और खुद फ्रेश होकर वहीं आरव के पास टिक कर बैठ गई। कुछ देर के बाद कुंजल ने साची को इक्तला कर दिया कि वो शिकागो पहुंच चुकी है।

दोनों बहने अपना पारिवारिक मीटिंग खत्म करके सीधा कुंजल से मिलने चली आयी। कुंजल और साची के बीच बातचीत चलता रहा और लावणी आरव को देख-देख बस उन सब के बात पर "हां हूं" किए जा रही थी।

इतने में ही आरव का फोन बजने लगा और नाम लिखा आ रहा था… नॉटी। साची और कुंजल तो गप्पे मारने में लगी थी और लावणी फोन पर नाम पढ़कर झटपट फोन उठाई… वो कमरे के दूसरे हिस्से में जाती हुई … "हेल्लो" की।

इधर स्वस्तिका किसी लड़की की आवाज सुनकर फोन स्पीकर पर डालकर अपस्यु से पूछने लगी कि ये कौन है। अपस्यु ने भी इशारों में समझा दिया कि ये आरव की गर्लफ्रेंड है। "आरव की गर्लफ्रेंड" ये बात सुनते ही स्वस्तिका ने कुटिल मुस्कान हंसी, और उसकी इस मुस्कान को देखकर ऐमी और अपस्यु भी समझ गए कि अब तो बजने वाली है आरव की।
:superb: :good: amazing update hai nain bhai,
behad hi shandaar aur lajawab update hai bhai,
apasyu ne bachpan mein hi apni dridh iksha shakti ka anupam udaharan pesh kar diya tha,
Amy ko bachane ke liye usne khud ki bhi parwah nahin ki,
aur isi ghatna ke yaad aate ke saath use hosh aa gaya hai,
vahin ab ye naughty pata nahin kya shaitani karne wali hai lekin itna to pakka hai ki aarav ki aaj phir bajane wali hai :lol:
 

aman rathore

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इधर स्वस्तिका किसी लड़की की आवाज सुनकर फोन स्पीकर पर डालकर अपस्यु से पूछने लगी कि ये कौन है। अपस्यु ने भी इशारों में समझा दिया कि ये आरव की गर्लफ्रेंड है। "आरव की गर्लफ्रेंड" ये बात सुनते ही स्वस्तिका ने कुटिल मुस्कान हंसी, और उसकी इस मुस्कान को देखकर ऐमी और अपस्यु भी समझ गए कि अब तो बजने वाली है आरव की।

स्वस्तिका:- तुम कौन हो जो मेरे डार्लिंग का कॉल रिसीव कर रही। मै क्या ही बताऊं, ये कभी नहीं सुधर सकता।

लावणी, अपनी आवाज़ थोड़ी धीमे रखते…. "सुनिए आपने किसी गलत नंबर पर कॉल लगाया है।"

स्वस्तिका:- ये आरव का ही नंबर है और नॉटी के नाम से मेरा निक नेम सेव होगा। सुन छिपकली बहुत चिपक ली मेरे बॉयफ्रेंड के साथ, अभी के अभी उसे फोन दे और तू कल्टी हो वहां से।

लावणी:- अच्छा मज़ाक कर लेती है आप। जरूर आप आरव की कोई खास दोस्त होगी जो उसे छेड़ने के लिए मुझ से नाटक कर रही है। खैर आप कोई भी हो आरव इस वक़्त कॉल नहीं ले सकता क्योंकि वो गहरी नींद में सोया है।

स्वस्तिका:- ये लड़का मुझ से पिटेगा अब, आने दो इसे वापस। सुनो तुम एक काम करना अभी कॉल डिस्कनेक्ट करके कॉल लॉग में देखो वो मुझ से कितनी बार कॉन्टैक्ट किया है। इसके बाद ऐसा झटका दूंगी की तुम्हे भी यकीन होगा की मै कौन हूं उसकी…

लावणी कॉल डिस्कनेक्ट करती हुई नॉटी का कॉल लोग चेक करने लगी और इधर जबतक स्वस्तिका हंसती हुई कहने लगी… "यार बड़ी प्यारी लड़की है। मुझे मिलना इससे।"..

ऐमी:- हां ये बात तो सच कही। मै भी मिल चुकी हूं।

अपस्यु:- अरे स्वस्तिका रहने दो, कुछ दिन पहले मैंने भी झटका दिया था तब से दोनों में जो बात बंद हुई वो यूएस जाकर शुरू हुई है। अब बात बंद होगी तो ना जाने कब शुरू हो।

"फ़िक्र क्यों करते हो, मै कल उससे खुद बात करके सब समझा दूंगी।"…. स्वस्तिका बोल ही रही थी कि लावणी का कॉल उधर से आ गया।..

स्वस्तिका:- जी लावणी जी देख लिया…

लावणी:- हां देख ली, मै झटके के लिए तैयार हूं…

स्वस्तिका:- हम्मम ! ठीक है फोन स्पीकर पर डालकर तुम उसके कान के पास रखो, मै यहां से धीमे बोलूंगी और वो फटाफट उठकर कोने में चला आएगा बात करने।

लावणी ने ठीक वैसा ही किया जैसा स्वस्तिका ने बताया था… वो फोन स्पीकर पर डाल कर आरव के कान के पास रख दी…. इधर से स्वस्तिका ने बस अपनी श्वांस चलने जितनी आवाज़ में कही होगी…. "अपस्यु जाग गया है।"… आरव अचानक से उठा और आस-पास के माहौल को देखते हुए वो सीधा कोने में चला गया बात करने।

स्वस्तिका ने भी अपस्यु को फोन दिया…. "ज्यादा परेशान हुआ था क्या"…. "हां कह सकते हो, लेकिन अब सब ठीक है। तू बार बार डराया मत कर अपस्यु, तुझे कुछ होता है तो अजीब सी हालत हो जाती है मेरी। तू इतना प्रेशर ना ले.. फील्ड का काम तू मेरे जिम्मे रहने दे बस।"…. "कोई नहीं इसपर आराम से बैठ कर बात कर लेंगे.. अभी वहां पूरी छुट्टी का मज़ा ले।" चंद अल्फाज दोनों भाइयों ने एक दूसरे से कहा और आरव सुकून की श्वांस लेते हुए कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।

कॉल डिस्कनेक्ट करके जब आरव वापस लौटा, लावणी गुस्से से फुफकार मारती वहां से चली गई। आरव अपना सर खुजाता वहां चल रहे माहौल को देख रहा था। कुंजल और साची पागलों की तरह हंस-हंस कर, एक दूसरे के कंधों को धकेल-धकेल, बात करने में लगे थे। उनके लिए तो मानो यहां कोई था भी नहीं और इस ओर लावणी गुस्से में फुफकारकर चली गई....

आरव अपने ख्यालों में.….. "कहीं कल पीने के बाद इसे कुछ कह तो नहीं दिया या फिर इसके बाप को .. सॉरी ससुर जी.. या फिर इसके पापा के साथ, फिर कोई जंग हो गई… अरे यार अभी तो हमारा पैचअप हुआ था और ये क्या नया नाटक शुरू हो गया। कम से कम बता तो देती की किस बात पर मुंह लाल करके गई, सस्पेंस में डाल दी। अब मै कितने बातों के बारे में सोचकर उसे सफाई दूं। साला ये पीना मुझे ले डूबेगा किसी दिन।

आरव फटाफट निकला अपनी लावणी को मानने और ये तक ध्यान नहीं दिया कि सोते वक़्त उसके कपड़े बदले जा चुके थे। वो अंडरवीयर और बनियान में ही बाहर उसके पीछे-पीछे भागा चला जा रहा था, और उसे देखकर वहां के होटल के लोग उसे घूर रहे थे। तभी वहां का एक स्टाफ ने आरव को रोकते हुए समझाया की सर ऐसे कपड़ों में आप बाहर नहीं घूम सकते।

आरव ने अपना हुलिया देखा और अपनी जगह खड़ा होकर मायूसी से लावणी लावणी पुकारने लगा और लावणी बिना पल्टे बस चलती रही और वहां से चली गई।


21 जून … बंगलौर रात के 8 बजे…


अपस्यु को आईसीयू से वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था और दोनों लड़कियां होटल पहुंचकर आज रात के तय प्लान के बारे में चर्चा करने लगी… और चर्चा का विषय था आत्मसम्मान। इक्छा के विरूद्ध इन लड़कों की हिम्मत कैसे होती है यहां-वहां हाथ लगाने की… ऐसा सबक की फिर दोबारा किसी लड़की को बिना उसकी मर्जी के बिना छूना तो दूर उनसे बात करने में भी घबराए...

ऐमी:- मै तो कहती हूं केट मूव दिखाते है उन कमीनो को.. तुम क्या कहती हो स्वस्तिका…

स्वस्तिका:- केट मूव नहीं ऐमी। मुझे तंग कड़पे पहनने का मन नहीं है। क्यों ना गर्ल्स ट्रैप करे।

ऐमी:- मुझे आज बदन दिखने का मूड नहीं है।

स्वस्तिका:- कुछ नया करे क्या?

ऐमी:- नए में क्या करना चाहती हो?

स्वस्तिका:- बीडीएसएम (bdsm)

ऐमी:- नाह.. ये नया नहीं है। इन चूजों के हिसाब से ये कुछ ज्यादा बड़ा मूव हो जाएगा। वैसे भी ये मूव पब्लिक प्लेस में नहीं होगा तो क्या फायदा घर के अंदर कितना भी मारो, इनको बेज्जती थोड़े ना मेहसूस होगी। इन्हे तो पब्लिक में बेईज्जत करना है।

स्वस्तिका:- अम्म्म ! फिर देशी राउडी गर्ल ट्राय करें क्या?

ऐमी:- साउंड इंट्रेस्टिंग… इसे फाइनल करते हैं।

स्वस्तिका:- तो फिर चलते है, राउडी गर्ल की शॉपिंग करने।

दोनों निकल चुकी थी देसी राउडी गर्ल बनने। पूरा शॉपिंग करने के बाद दोनों होटल लौटी और फटाफट तैयार हुई। दोनों एक दूसरे को देखते ही हसने लगी। दोनों ने भारतीय नारी वाली साड़ी पहन रखी थी वो भी बिल्कुल सामान्य तरीके से , जैसे आम गृहणी पहना करती है। हाथो में दोनों के हथियारों से भड़ा बैग और रास्ते से दो लड़के को उठाई जिसे कुछ पैसे देकर केवल इतना कम दिया गया था कि वो शूटिंग करे।

पहली झरप डिस्को के मुख्य द्वार पर ही हुई, जहां उनके परिधान के कारण उन्हें अंदर जाने से रोका गया। ऐमी इशारों में रिकॉर्डिंग कर रहे लड़कों के ओर इशारा करती हुई उस रोकने वालों को अच्छे से समझा दी….. कि यदि पारंपरिक पोशाक में उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया तो ये बात कहां-कहां तक फैल जाएगी। साथ में स्वस्तिका ने ये भी समझा दिया कि ये केवल रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि लाइव रिकॉर्डिंग चल रही है इसलिए कोई भी गैर कानूनी हरकत हुई तो इस वीडियो की फाइल केवल फोन मोमरी नहीं, बल्कि 8-10 जगहों पर सेव हो रही है।

मजाल है फिर किसी ने ना-नुकुर भी किया हो। उल्टा नमस्ते करके उन्हें अंदर भेजा गया। अब दोनों पहले बार काउंटर पर आयी... टकीला अपने हाथों में उठकर चीयर्स किया और 4 टकीला के शॉट जल्दी-जल्दी लगा लिए।

इतने में उन ड्रग डीलर की नजर भी दोनों पर गई। अब दोनों ने कपड़े ही ऐसे पहने थे कि हर कोई उन्हें ही घूर रहा था। दोनों ने ऐमी को पहचान कर आपस में बात करते हुए उसके ओर बढ़ चले….

ऐमी और स्वस्तिका टकीला शॉट खत्म करके जब नजर घुमाई तभी ऐमी को भी वो दोनों उनके ओर आते हुए दिख गए…. "स्वस्तिका आ गए अपने शिकार, तू बैग खोलकर तैयार रह।"

स्वस्तिका अपने साथ लाए बैग को पूरा खोल कर रख दी, ताकि जरूरत के वक़्त तेजी से उनमें से हथियार निकलकर राउडीगीरी दिखाई जा सके। ऐमी और स्वस्तिका बार काउंटर के राउंड टेबल पर बैठी थी, और दोनों आते ही साड़ी के ऊपर से, उनके कमर के नीचे हाथ फेरते हुए कहने लगे… "क्या जानेमन आज धंधा करने आयी है क्या यहां।"..

दोनों अपना गर्दन घुमा कर प्यारी सी स्माइल देती हुई कहने लगी… "नो माय लव… हम दोनों यहां राउडीगिरी दिखाने आए है।"… इतना कहकर ऐमी और स्वस्तिका ने तेजी के साथ अपना लात उठाकर उसके सीने पर लात जमा दी। दोनों धक्का खाकर कुछ दूर पीछे गिरे।

उधर दोनों ड्रग डीलर धक्के खाकर फ्लोर पर गिरे और इधर ऐमी और स्वस्तिका ने तेजी के साथ बैग से अपना पहला हथियार निकाली… दोनों के हाथ में बेलन थी, और मारने कि काला में तो दोनों ने महारत हासिल किया ही हुआ था।

अब माहौल कुछ ऐसा था, ये जगह उन दोनों ड्रग डीलर की। एक तरह से घर मान लीजिए। दो सामान्य सी तैयार होकर आयी भारतीय लड़की.. और उसने सब लोगों के बीच वहां के सबसे जाने माने चेहरे को लात जमा कर सबके बीच मारा..… अकेले में भी उन दोनों ड्रग डीलर के साथ ऐसा होता, तो दोनों को बेज्जती मेहसूस होती, फिर तो उनके साथ ये कांड भरी सभा में हो गई। ऊपर से ऐमी और स्वस्तिका के पहनावे के कारण वहां मौजूद सभी लोग उन्हें ही देख रहे थे। लात जमा कर धक्का जैसे ही दिया, सब जोर-जोर से हसने लगे।

अपनी बेज्जती का बदला लेने के लिए, दोनों ड्रग डीलर तेजी से उनपर झपटे और उनका हाथ आंचल के ओर बढ़ रहा था। ऐमी और स्वस्तिका ने अपना बेलन को चाकू की तरह पकड़ी और पहले तो नीचे पूरे जोड़ के साथ घुसेड़ी। अंडकोष में वो बेलन ऐसा घुसा की दोनों बाप-बाप चिल्लाने लगे। आंचल के ओर बढ़ता हाथ जब नीचे जाने लगा, अपने अंडकोष को पकड़ कर सहारा देने के लिए तभी ऐमी और स्वस्तिका ने पूरे ताकत से दोनों की कलाइयों पर ऐसा बेलन चलाया की कलाई की हड्डी टूट गई।

"औरतों की इज्जत करना सीख, ये आंचल मां का होता है जो तुझ जैसी कमीनो को भी दूध पीला कर पालती है और तू साला इसी आंचल को हाथ लगाने के लिए अपना हाथ बढ़ा रहा था। रेस्पेक्ट द वुमन".... स्वस्तिका दहारी..

स्वस्तिका की बात पूरी ही हुई थी कि तबतक वहां बाउंसर पहुंच गए और दोनों को पकड़ने की कोशिश करने लगे… तभी ऐमी उन बाउंसर्स को नसीहत देती हुई कहने लगी…… "कोई मेल बाउंसर ने हाथ लगाया तो सीधा जेल जाएगा। जिसे जेल जाने का शौक हो और विश्वास हो कि उसका मालिक लाखों खर्च करके उसे बाहर निकाल लेगा, वहीं बस हाथ लगाए।.. क्योंकि वीडियो लाइव रिकॉर्ड हो रहा है… हमे किसी मर्द ने हाथ लगाया तो तुम्हरे साथ-साथ इस क्लब पर भी तला लगा होगा।"..

जो बाउंसर जहां थे वहीं रुक गए… दोनों ड्रग डीलर वहीं नीचे जमीन पर कर्राहते हुए अब भी मुंह से अपशब्द निकाल रहा था। और इधर पुरुष बाउंसर तो आगे नहीं बढ़े लेकिन 4 महिला बाउंसर वहां पहुंच गई।

दोनों इसके लिए भी पहले से तैयार थी। "सॉरी बहना".. कहती हुई दोनों ने तेजी के साथ बैग से रस्सी निकली और उन्हें पकड़ने के लिए बढ़े हाथ पर बड़ी तेजी से वो रस्सियां बांधती, सबको बांध कर वहीं बिठा दी…

स्वस्तिका बैग से झाडू निकालकर एक झाड़ू ऐमी के ओर उछाल दी। ऐमी उसे पकड़ती हुई…. "स्वस्तिका, अभी तक दिमाग कि गंदगी नहीं मिटी इनकी, जरा चेहरे की अच्छी से सफाई तो करी।"….. "बड़े ही शौक से ऐमी"… और फिर वो प्लास्टिक के सिक वाली झाड़ू से, 10 झाड़ू उनके चेहरे पर मार-मार कर तोड़ डाली…

सभी झाड़ू जब उनके चेहरे पर मार-मार कर दोनों ने तोड़ डाला, तब दोनों …. "ये हम लड़कियों का तुझ जैसे कमीनो के लिए देशी उपचार। किसी वक़्त भी इस उपचार की जरूरत हो बता दियो… हथियार 24 घंटे उपलब्ध रहता है।"..

चेहरे से खून तो नहीं निकला उनके, पर ऐसा लग रहा था कि पूरे चेहरे पर दोनों ने टैटू गोद दिया हो। … "ओ ऐमी, अभी इन दोनों ने हमारे बैंक को भी हाथ लगाया था ना।"…. "हां.… इनको हमारे बैंक पर हाथ डालना बहुत अच्छा लगता है स्वस्तिका, इसने तो उस दिन भी मेरे बैंक पर हाथ फेरा था।"….. "तो चल जरा पेबैक करे और समझा दे की जब ये हमारे बैंक पर हाथ डालते है तो हमें कैसा फील होता है।"

बैग के अंदर का पूरा बेलन अब फ्लोर पर फैला था। दोनों को लात मार कर उल्टा किया गया और जो ही उनके पिछवाड़े पर दोनों ने बेलन तोड़ा। पुलिस जबतक मामला संभालने आयी, तबतक तो वहां के फ्लोर पर पूरा टूटा हुआ बेलन, बिखरा पड़ा था, और पास खड़ी लड़कियां जो इनका शो देख रही थी, अपने अंदर अच्छा मेहसूस करती, दोनों का उत्साह बढ़ाती हुई पूरा हूटिंग कर रही थी।

2 लेडी कॉन्स्टेबल जब उन्हें पकड़ने पहुंची तब वहां के लड़कियों ने घेर लिया उन्हें और ले जाने के विरूद्ध अपना मोर्चा खोल दी… ऐमी सबको पीछे हटने का इशारा करती हुई कहने लगी….. "बहनों इन कमिने लोगों को बाहर से हथियार खरीदने की जरूरत पड़ती होगी… हम है राउडी गर्ल्स और हमारे हथियार 24 घनेट हमारे घर में होते है… जो हमारी दादी से लेकर हम सब लड़कियां रोज इस्तमाल करती है। कोई तुम्हे छेड़े और जबरदस्ती छुए तो बन जाओ राउडी गर्ल.."

स्वस्तिका ऐमी को देखकर हंसती हुई कहने लगी…. "तू क्या अब इनकी लीडर बनेगी। लंबा लंबा भाषण… अब चल यहां से"… दोनों लड़कियां यहां से अरेस्ट होकर थाने जा रही थी और इधर इनका करनामा पूरे देश में वायरल हो रहा था। थाने पहुंचने तक तो इनकी न्यूज ब्रेकिंग न्यूज बनकर राष्ट्रीय न्यूज चैनल में दिखाया जा रहा था और जो भी इस न्यूज को देखता बस "वाह-वाह जियो शेरनियों"… ऐसा ही कहता।

इतने बड़े कांड को सिन्हा जी, नंदनी, यहां तक कि विदेश में बैठा मिश्रा परिवार, साची लावणी कुंजल आरव सब ने देखा। और जो नहीं देख पा रहे थे लोग उन्हें कॉल करके देखने बोल रहे थे।
Wow bhai rowdy girls to chaa gayin hain,
aisi dhunai ke baare mein to inn dealers ne soncha bhi nahin hoga :lol:
 
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