Update:- 160
अपस्यु:- कमीना कहीं का, नजर दिए है मुझ पर। एहसान फरामोश भुल गया तुझे गोवा ट्रिप पर भेजा था। ।
आरव:- हां हमे ट्रिप पर भेजकर पूरे दिल्ली में तहलका भी मचाया था, सब याद है मुझे।
अपस्यु:- तू मेरे साथ बकवास करने आया है?
आरव:- बकवास करने का शौक नहीं है तेरे साथ, बस यूं ही चला आया था इधर। तुझे अच्छा नहीं लगा तो जा रहा हूं।
अपस्यु:- बस कर नौटंकी, अच्छा चल माफ भी कर दे और बता की तेरा मूड काहे ऑफ है।
आरव:- तेरी वजह से ऑफ है, लावणी को लगता है मै उससे प्यार नहीं करता। कहती है एंगेजमेंट के पहले तो मै उसे परेशान किया करता था और जब से एंगाएमेंट हुई है मै उसे परेशान नहीं करता। कुछ ऐसा नहीं करता जो उसे सरप्राइज कर सके, जैसा पहले किया करता था। हर बात में तेरा एग्जाम्पल अपस्यु ने ऐसे चौंका दिया था ऐमी दीदी को, वैसे किया। इंडिया गेट पर अपने प्यार का इजहार किया।
अपस्यु:- भाई गलत भी कहां कह रही है वो। उन्हें हमारा छेड़ना पसंद है, थोड़ा बहुत परेशान करना पसंद है। मानता हूं कि वो मेरा एग्जाम्पल देती है लेकिन प्यार तो उसे आरव की अदाएं और हरकतों से हुआ था ना, फिर वो आरव कहां गुम है।
आरव:- तो क्या मै उसे जिंदगी भर परेशान करता रहूंगा?
अपस्यु, आरव को बिठाते हुए… "लावणी की प्यारी सी मुस्कान दिन भर बनी रहे तो तुझे कैसा लगता है।"..
आरव:- ऐसा लगता है मानो चारो ओर खुशनुमा मौसम हो। ठीक वैसे ही जैसे मै 11 महीने यूरोप में रहता था।
अपस्यु:- हा हा हा हा.. मतलब तेरा वो एक महीना जो मेरे साथ रहता था वो बुरा वक़्त होता था।
आरव:- और नहीं तो क्या? छोड़ ये सब क्या समझना चाह रहा था वो समझा दे जारा।
अपस्यु:- समझा तो दिया कबका, पूरे दिन छोटे छोटे मुस्कान बनाए रखने के लिए थोड़ा बहुत छेड़छाड़ जरूरी है। जैसे पहले करता था वैसे ही। हां लेकिन ध्यान रखना, ऐसे सितुएशन में मत डाल देना की शर्मिंदगी महसूस हो दोनो को।
आरव:- समझ गया गुरु जी। मै चला लाइन मारने अपनी बीवी को। जबतक जियूंगा उसे लाइन मारता रहूंगा।
अपस्यु:- शाबाश ये हुई ना बात। चल इसी बात कर 2 पेग लगाया जाए।
आरव:- मां है, मासी है, तू जूते मत खिलवा देना।
अपस्यु:- बस 2 पेग की तो बात कर रहा हूं मै।
आरव:- कमीना पिछले हफ्ते 2 पेग बोलकर 6 पेग पिला दिया था। मां ने कितनी गालियां सुनाई थी तुझे पता भी है। खुद तो भाग गया फ्लैट और मुझे यहां डांट खिलवा दी। मेरे सर पर हाथ रखकर बोल कोई जिद नहीं करेगा कोई इमोशनल नाटक नहीं करेगा।
अपस्यु:- बेवड़ा कहीं का, भुल गया वो दिन जब हमेशा टल्ली रहता था, आज भाई को ऐटिट्यूड दिखा रहा है।
आरव:- मतलब तुझे अच्छा लगेगा मै पी कर लड़खड़ाता रहूं घर के लोगों के सामने।
अपस्यु:- नाह ये तो कतई अच्छा नहीं लगेगा।
आरव:- फिर मुझे मेरे हिसाब से पीने से और तू अपने हिसाब से पी। रुक पुरा बोलने दे। मैं थोड़ा सा नशा आने तक पियूंगा, जिसमें मूड रोमांटिक बाना रहे। अब खुश।
अपस्यु:- आह ये हुई ना कलेजे को ठंडक पहुंचाने वाली बात।
दोनो भाई बैठ गए बैठक लगाने तभी दरवाजे पर दस्तक हुई… "कौन हैं"..
स्वास्तिका:- मै हूं, दरवाजा खोल।
आरव ने दरवाजा खोला और झट से बंद कर लिया।… "नॉटी बड़ी प्यारी लग रही है।"…
स्वास्तिका, सिगरेट निकालती…. "यार मां ने एक मिनट के लिए अकेले नहीं छोड़ा। दे एक पेग मुझे भी दे।"..
अपस्यु:- विशकी और स्कॉच है नॉटी, क्या लेगी।
स्वास्तिका:- हद है मेरे लिए वोदका नहीं रख सकते थे। अच्छा छोड़ विस्की ही पिला दे, थोड़ा लाइट पेग बनना।
2 के बदले 3 हो गए और तीनों बैठकर पीने लगे। स्वास्तिका और आरव 4 लाइट पेग के बाद रुक गए, अपस्यु 2 और हार्ड पेग लेने के बाद वहां से उठा। "अब महफिल जवान हुई है आग लगा देंगे।"… अपस्यु उठते ही कहा।
स्वास्तिका और आरव दोनो एक साथ… "फायर बिग्रेड की गाड़ी हॉल में ही घूम रही है, ये ध्यान रखना।"..
तीनों एक साथ किसी पुराने दोस्त की तरह बाहर निकले। तीनों को साथ कमरे से निकालते देखकर ऐमी समझ गई कि अंदर तीनों कौन सा गुल खिलाकर आ रहे है। खैर थोड़ा बहुत एंजॉयमेंट तो चलता है बस यही सोचकर वो चुप रह गई।
कुछ ही देर में लोग आने शुरू हो गए। दीपेश और उसकी फैमिली भी अाई थी और साथ में उसके कुछ दोस्त भी थे। दीपेश का खास दोस्त निर्मल दीपेश के कान में कहने लगा… "यार तेरे ससुराल में हरियाली बहुत होती है। जहां देखो दिल को ठंडक देने वाला एहसास है।"..
दीपेश:- ज्यादा घुर मत वरना यहां के लोगो ने अपने हॉल के दीवार को ज्यादातर वो छोटे छोटे रॉड से सजाया है, ना विश्वास हो तो नजर घुमा कर देख ले चारो ओर।
निर्मल:- जल्लादों के लेटेस्ट हथियार के दर्शन मत करवा, आज तक कभी पड़ी तो नहीं, लेकिन जिसने भी अपना अनुभव साझा किया है, रोंगटे खड़े करने वाले थे।
इधर सारी लड़कियां एक साथ गोल सर्किल बनाकर बीच में स्वास्तिका को घेरे उससे बात कर रही थी, तभी छेड़ छाड़ के इरादे से वहां आरव पहुंच गया। ऊपर देखते हुए उसने अपना हाथ बढ़ाकर लावणी के कमर तक ले गया और उसे चीकोटी काटने लगा…
आरव जब अपने हाथ आगे बढ़ा रहा था तब ऐमी ने लावणी को पीछे खींच लिया और आरव की हरकत देखने कहने लगी। इधर आरव ने चिकोटि काटी और उधर साची के मुंह से आऊच का तेज साउंड निकला और लावणी आरव को घुर रही थी।
साची:- अरे यार मै साची हूं, उधर देख वहां लावणी खड़ी है।
कुंजल:- क्या हुआ साची?
साची:- मेरे कमर में इसने चिकोती काट ली।
इतने में आरव की नजर, घूरती हुई लावणी पर गई… वो अपना सर पीटते वहां से निकल गया। उसे जाते देख वहां मौजूद सभी लड़कियां हंसने लगी। सभी लावणी को छेड़ते हुए पूछने लगी… "क्या जादू कर दिया को आरव बर्दास्त नहीं कर पा रहा। ऐसे भिड़ में छेड़ छाड़।"
लावणी:- हां मुझे भी अच्छा ही लगता अगर मुझे वो चिकोति काटता लेकिन ऐमी दीदी ने बेचारे को मिस कॉल लगवा दिया, अब पूरे फंक्शन में वो शरमाया शरमाया घूमेगा।
कुंजल:- मतलब इस साजिश कि राचयता बड़ी भाभी है।
ऐमी:- आखिर वो भाई किसका है, अपस्यु ने ही सीखा कर भेजा होगा जाकर तंग कर लावणी को।
साची:- लेकिन क्यों ?..
ऐमी:- शायद आज रात लावणी के पास रुकने के लिए रोमांटिक मोमेंट बाना रहा हो। अब दिल की प्यास बीवी ही तो बुझाएगी।
लावणी:- हद है मै जा रही हूं..
साची:- अभी से ही जा रही है.. वन टाइम शो होगा उसके लिए तू स्वास्तिका का एंगेजमेंट क्यों छोड़कर जा रही, बहुत वक़्त मिलेगा।
एक बार फिर से निशाने पर लावणी, बेचारी शर्मा भी रही थी और लज्जा भी। कहे तो क्या कहे और करे तो क्या करे। ये सब हरकत आरव की वजह से हो रहा था और अंदर ही अंदर अब बस वो अकेले में उससे मिलना चाहती थी।
सभी लोगों कि रैगिंग से वो दूर हटकर अपनी मां के पास आकर बैठ गई। वहीं स्वास्तिका ऐमी को आंखें दिखती हुई कहने लगी… "बहुत गलत किया तुम लोगो ने। बेचारी कुछ नहीं बोल पाती इसका मतलब ये नहीं कि तुमलोग उसे परेशान करती रहो।"
ऐमी, अनजान बनती… "मैंने तो बस कैसुआली मज़ाक किया था।"..
साची:- अच्छा, ऐमी को अपनी जगह से हटाकर पुरा सीन क्रिएट कर दी और देखो कैसे भोली बन रही है। इसकी सजा ये है कि ना तो ये अपस्यु को देखेगी और ना ही पूरे फंक्शन में उसके साथ रहेगी।
स्वास्तिका:- जब इनका कैजुअल रिलेशन चल रहा था तब भी ये ऐसा ही कुछ मेंटेन किए हुए थे। इसके लिए कौन सी बड़ी बात होगी। दोनो बस 5 सेकंड का नजर मिलाएंगे और सारी कहानी बयां।
कुंजल:- दीदी आप की कुछ ढंग कि सजा बता दो, तब आएगा मज़ा।
स्वास्तिका:- जाकर इसका ड्रेस चेंज करवा दे फिर देख मज़ा।
ऐमी:- नो नो नो… ये नहीं, बाकी कुछ भी बोलो वो मै कर लूंगी, लेकिन ये नहीं।
सबने पकड़ कार उसे रूम में लेकर आयी और उसका ड्रेस जबरदस्ती चेंज करवा दिया। ना साड़ी ना लहंगा बल्कि पेरिस में को लाल रंग की परिधान ऐमी ने पहनी थी वहीं जबरदस्ती पहनकर बाहर ले आयी।
ऐमी की एक्साइटमेंट पहले से हाई थी। बड़ा ही खुशनुमा फीलिंग था जब वो सोचती की अपस्यु पूरे फंक्शन में उसके आस पास ही रहेगा और मौका देखकर जल्दी से हाथ इधर उधर लगाएगा। फिर उसका आखें दिखाना और अपस्यु का मुस्कुराकर उसपर प्रतिक्रिया देना। लेकिन अब लगता था उसे है पूरे फंक्शन मंडरा मंडरा कर अपस्यु को रिझाना होगा। और अपस्यु का चेहरा उतारना लाजमी था, क्योंकि बहुत कम ही ऐसे मौके होते थे जब अपस्यु ऐमी को कुछ अपने हिसाब से करने कहता था।
"कामिनी कहीं की, देखना नॉटी इसका बदला मै लेकर रहूंगी।"… गुस्सा में वहां से निकल गई ऐमी। उसके जाते ही साची और कुंजल, स्वास्तिका से ड्रेस का लॉजिक पूछने लगी।
स्वास्तिका:- कुछ नहीं अपस्यु ऐमी को साड़ी में देखकर लट्टू रहता है। मैंने ऐमी से कहा था कि पेरिस में जो लाला ड्रेस पहनी थी, एग्जैक्टली वैसी ही तैयार होना, लेकिन कमिनी पहनी साड़ी ही। मैंने भी बदला के लिया…
इधर ऐमी जब बाहर निकली तब उसकी नजर अपस्यु को ही ढूंढ रही थी। और जब अपस्यु को उसने देखा फिर उसे भी समझ में आ गया कि पारा गरम है। बार काउंटर पर बैठकर 2 पेग पी गया जबकि घर के सभी लोग मौजूद थे।
ऐमी तुरंत उसके पास पहुंची.... "सुनो ना बेबी।"
अपस्यु:- तुम बहुत ही खूबसूरत दिख रही हो ऐमी..
इतना कहकर अपस्यु बार काउंटर से उठ गया और सीधा दीपेश के पास पहुंच गया। वो दीपेश और निर्मल बातें करने लगा, और ऐमी उसके पास खड़ी फीकी स्माइल देने लगी और बीच बीच में वो भी उनसे बात कर रही थी।
"देख उधर क्या कही थी। ऐमी का फिका चेहरा और अपस्यु उसे नजरंदाज करके सबसे बात कर रहा है।".. स्वास्तिका साची और कुंजल का ध्यान उस ओर खींचती कहने लगी।
अपस्यु उनसे थोड़ी देर वहां बात किया फिर आकर मासी के पास बैठ गया। ऐमी भी बैठी, और यहां भी वही हो रहा था। इधर दोनो की हालात देखकर ये लोग मज़े ले रहे थे। ऐमी समझ गई आज का ये फंक्शन बेकार ही गया। वो मुंह लटकाए लावणी के पास बैठी… "सॉरी ।"
लावणी:- किस बात के लिए दीदी
ऐमी:- तुम्हे और आरव को छेड़ने के लिए। लेकिन तुम्हे भी हमारी बात के कारन आरव से ऐसे नाराजगी नहीं दिखानी चाहिए। वो तो उसी को तंग करने आया था जिसे कर सकता है, हम तब भी तुमसे उतना ही मज़ाक करते। ये छोटे नोक झोंक तो जायके हैं, इसे मुंह लटकाकर बर्बाद ना कर और वो चीकोती काटने में मिस हो गया, तो क्या तू उसे नहीं छेड़ सकती।
लावणी:- हां छेड़ तो सकती हूं।
ऐमी:- पागल ये झिझक छोड़ और हक से छेड़, ऐसा की उसे फील हो किसी ने देख लिया होता तो क्या होता। अपना ही माल है जैसे मर्जी वैसे छेड़ती रहना।
लावणी हंसती हुई वहां से उठी। आरव नंदनी के पास खड़ा होकर कुछ मेहमानों से बात कर रहा था उसी वक़्त लावणी वहां पहुंच गई… "मां 2 घंटे के लिए आप अपना बेटा उधार देंगी, इतनी मेहनत से इसके लिए तैयार होकर आयी हूं, पूरी दुनिया ने देख ली, केवल आरव को छोड़कर।"
नंदनी, हंसती हुई… "2 घंटा क्यों, पूरी उम्र तो तुम्हे ही साथ रहना है। क्यों रे लड़के, तू लावणी के साथ क्यों नहीं है और उसे लोगो से क्यों नहीं मिलवा रहा।
नंदनी आरव के ओर मुड़ी और लावणी आरव के ठीक पास में खड़ी थी। वो जैसे ही कुछ बोलने को हुए उससे पहले ही उसकी आह निकल गई। बड़ी सफाई से लावणी ने अपने हाथ का पीन को उसके पीछे भोंक दी। बेचारा तिलमिला गय।