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Romance भंवर (पूर्ण)

nain11ster

Prime
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helicopter hi kyun? are udan khotola leke de dete ya spaceship hi de dete udane ke liye :D



Yeh sinha kidhar hai :D usko to har kadam pe apni hone wali biwi sang rahna chahiye :D



Tharki logis ko tharki damad chahiye.. khas kar hawas ki pujaran imli ko... taaki aage chalke koi uspe ungli na utha sake :D kam se kam kunjal ko toh normal insaan se shaadi karne dete... kamino ko yeh bhi raas na aaya...

Yeh toh had ho gayi.. nandini khud ko ab bhagwan samajhne lagi... are tuchh insaan kuch toh dar us upor wale se.. :sigh:


inlogo ke paas karne ke liye aur koi kaam dham nahi kya... har dusri update mei kisi na kisi rista tay kar dete hai... yaar lagta hai desh ka population badhake hi dum lenge yeh log..



chalo achha hai lage hatho inlogo ko bhi Kalyan ho gaya :D
Khair let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill nainu ji :applause: :applause:
Sabki gadi patri par line hai.. sabko sshadi karwao .. waise .. kunjal ka kab rishta tay hua hai .. haan .. ju r over reading wo bhi bina matlab me..

And wahy u r feeling jealous about aimi :D.. itni sunder susil aur sabhya kanya ko aise nahi kahte ...

Aur udan khatola kahan patya jata hai.. mujhe na mila.. aur wo to old model hai
 
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Reactions: Nevil singh

Black water

Vasudhaiv Kutumbakam
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Update:-170 (A)







उस गली के लोगो को अपने भिड़ पर बड़ा ही गुमान था शायद और अपस्यु उनकी इस घमंड को तोड़ने के लिए कल 4 फिट की रोड नहीं, बल्कि ढाई फीट की छोटी सी कुल्हाड़ी इस्तमाल करने वाला था। किसी को मारना तो मकसद नहीं था, लेकिन सबको आदेश मिल चुके थे, जो भी सामने अाए ऐसा वार किया जाए, अंग भंग हो जाए। अगली बार भिड़ लगाने से पहले उनकी रूह तक कांप जानी चाहिए। इसके लिए गांव से खास मंगाई गई थी, चमचमाती धातु से बनी मजबूत 200 कुल्हाड़ी, जो दिखने में काफी आकर्षक हथियार लग रहा था। इसी में साथ एक्सट्रीम परिस्थिति से निपटने के लिए ड्रोन, स्मोक बॉम्ब, और ऑटोमेटिक रयफल


4 मुखिया थे उस इलाके के… नवीन, मुख्तार, अनवर और जावेद। चारो ने ऐसा इस इलाके में अपनी पकड़ बनाई हुई थी कि लोग इन्हीं के बहकावे में आकर कुछ भी करने को पागल से रहते थे। चारो में से कोई भी एक, लोगो के भिड़ को काबू में करके, अपने इशारे पर नचा सकता था। चारो की तस्वीर अजिंक्य ने अपस्यु को दे दिया था और पुलिस प्रशासन की ओर से, उस इलाके में गिरे 20 पुलिस वालों की लाश के बदले इन चारो को मौत की सजा दिए बिना ना लौटने की गुजारिश की गई थी।


अपस्यु ने पुलिस के टारगेट को भी साझा किया और साफ शब्दो में का गया... "चारो को देखते ही मार डालो।"..


रण एक बार फिर सज चुकी थी। सुबह-सुबह ही युद्ध के लिए हवन तैयार कर लिया गया था। अपस्यु युद्ध के पूर्व विजई हवन करने के बाद, हर किसी को तिलक लगाया और सूट उप करने के आदेश मिले। हर कोई किसी मल्टी मिलियनैर की तरह तैयार हुआ, हर गाड़ी में तकरीबन 20 करोड़ कैश और साथ में छिपाकर हथियार रख लिया गया था और दिखाने के लिए 1 पिस्तौल पैसे के बैग के ऊपर रख दिया गया था।


दिल्ली पुलिस के कुछ ईमानदार लोग, जिनको इन इलाके से कुछ ज्यादा ही बैर था, उसके 40 लोग उस आधे किलोमीटर के उनके दायरे से दूर, अपने हाथ में सिंगल जैमर लिए बस 2 बजने का इंतजार कर रहे थे।


दिन के 2 बजे अनुप्रिया की चमचमाती कार एक ऑडटरियम में रुकी, जहां के गेस्ट रूम में उसे और महिदिपी को रूकवाया गया। उसी के साथ मुख्य पार्टियों के कई दिग्गज नेता वहां पहले से मौजूद थे।


इसी के साथ दिन के 2 बजे गाड़ियों का काफिला गली के मुहाने तक पहुंच चुकी थी। 6 गाडियां उन लोगों की थी जो दान करने आए थे, जिसमें सबसे आगे खुली जीप में सोमेश और सौरव हाथ जोड़े लोगो का अभिवादन कर रहा था। उसके आगे एक दिल्ली पुलिस और एक सेना की जीप थी, जिनपर 6-6 हथियारबंद लोग सवार थे। पीछे से भी इसी प्रकार से सुरक्षा कर्मियों के गाड़ी का काफिला था। और इनके बीच 5 बुलेट प्रूफ कार उन उद्योगपति और एनजीओ की थी जो दान करने आए थे।


गली के पास आकर सभी गाडियां रुक गई। भिड़ ने रास्ता रोक रखा था। कुछ लुक्खे और आवारा से लड़के, हर कांच पर हाथ मारकर डिक्की खोलने को कह रहे थे। सेना के जवान उतरकर हर कार की डिक्की के पास खड़े थे और एक कार से उतरकर, नीलू अपने 3 साथियों के साथ सोमेश और सौरव के पास पहुंचे।


लड़के हर डिक्की को चेक करने बाद उनके मुखिया नवीन और जावेद को बताने लगे… "5 कार में बैग भर-भर कर पैसे है, और साथ में एक पिस्तौल भी।"


नवीन:- सांसद जी आप के जीप में एक रुपया नहीं, कहां दान केर आए।


सोमेश:- बहुत से इलाकों से होकर आ रहे है नवीन भाई।


जावेद:- ये लड़की कौन है। (नीलू को देखकर पूछा)


सोमेश:- सेल्फी वाली है, उसी के लिए दान करने आए है।


जावेद:- हा हा हा.. ये सोशल मीडिया भी कमाल की चीज है। वैसे इतनी खूबसूरत महिला हमारे साथ खड़ी हो जाए तो हम पूरे बस्ती की सेल्फी दिलवा दे, वो भी बिना एक रुपया खर्च किए।


नीलू:- लुक मिस्टर आपका जो भी नाम है। हम ये सेल्फी के लिए नहीं कर रहे, बल्कि गंदगी में रहना और खराब पानी पीने से को हैल्थ प्रॉब्लम होती है, उसी का हल ढूंढने आए है। ये हम सबका काम है और हम सबको मिलाकर करना चाहिए।


नवीन:- मिलकर काम करने में हम पुरा भरोसा रखते है। होम मिनिस्टर जी के बेटे यहां तक आए, आप संसद महोदय यहां तक आए उसका धन्यवाद। दान जिनको करना है केवल उनकी गाड़ी अंदर जाएगी। और ये पॉलिटिकल फिगर नहीं है तो इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मेरी। आप सब अपना काफिला कहीं और ले जाइए। इस बस्ती को करने वालों की जरूरत है ना कि वोट बैंक बटोरने वालों की।


नीलू:- थैंक्स यू सो मच।


जावेद:- आप मिस हम दोनों के साथ पैदल इस इलाके को घूमिए, बाकी के कार को सेंट्रल स्टोरी में घुसा दो।


जैसे हो जावेद और नवीन की बात सोमेश और सौरव ने सुनी, दोनो राहत की श्वांस लेने लगे। लेकिन तभी अपस्यु सौरव को खींचकर अपने कार में बिठाते.. "अंकल आप बाकी को लेकर जाओ, इनकी सुरक्षा अब मेरी जिम्मेदारी।"..


सोमेश अपने काफिले और मीडिया के साथ उसके आगे निकल गया, सौरव भी अपने बॉडी गार्ड्स को आश्वासन देते पापा से कह दिया बात करने। होम मिनिस्टर से तुरंत संपर्क किया गया, अपस्यु का नाम सुनकर उन्होंने भी सभी सुरक्षाकर्मी को लौट आने के लिए कह दिया।


अपस्यु:- सौरव कार में ही बैठे रहना उतारना मत, वरना तुम्हारा गला उतार जाएगा।


सौरव:- जानता है मै इसमें क्यों बैठा हूं, जब ये लोग तुझे मारकर तुम्हारी चमरी को बदन से निकाल रहे होंगे, तब मै आराम से मज़े से देखूंगा।


अपस्यु:- वो तो वक़्त ही बताएगा।


अपस्यु की कार सबसे आगे थी जो गली में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। अपस्यु अपने कार के इंडिकेटर को ऑन किया, सभी लोग इशारा समझकर अपने कोट के नीचे, 4 स्मोक बॉम्ब डाल चुके थे। जैसे ही सबने अपने अंदर स्मोक बॉम्ब डाला, उसके तुरंत बाद सभी कार से कई तरह के पटाखे निकालकर बच्चो के ओर फेकने लगे।


बच्चे उन पटाखों को लेकर धूम धड़का मचाने लगे। धूम धड़ाके की आवाज सुनकर 2 हथियारबंद लोग मनीष और राजीव मिश्रा को अपने साथ लेकर नीचे आए, जहां उस इलाके के 2 प्रमुख लोग मुख्तार और अनवर नीचे पहले से मौजूद थे।


एक किडनैपर:- यहां इतना शोर क्यों है मुख्तार


मुख्तार:- लक्ष्मी देवी खुद चलकर हमारे बस्ती में आ रही है तो उसका स्वागत होना तो चाहिए ना। वैसे तुम्हे डरने की जरूरत नहीं है, फोर्स अंदर नहीं घुसी है केवल आलीशान कार में अमीर बिज़नेस मैन है जो एनजीओ के नाम पर करोड़ों लूटाने आए है और इसी दान को आधार बनाकर सरकार से अरबों का टेंडर लेंगे।


दूसरा किडनैपर मिश्रा बंधु से… "तुम दोनो जाओ और देखकर आओ कोई फोर्स तो नहीं, यदि फोर्स हुई और हमे सूचना नहीं मिली, तो इस बिल्डिंग की पहली सीढी चढ़ने के पूर्व ही हर किसी की कुर्सी में धमाका कर दिया जाएगा।


दोनो भाई हां बोलकर बाहर बस्ती में निकल गए। इधर जावेद और नवीन के साथ नीलू आगे-आगे गली में चल रही थी। जावेद नीलू का हाथ पकड़कर किनारे करते.. "कार को आगे जाने दीजिए मिस, आप हमे अपना प्लान बताइए।"


जावेद और नवीन नीलू को अपने साथ एक छोटे से झोपड़ी के अंदर बिठाते… "प्लान बताइए मिस।"


नीलू अपने टाई को ढीला करती शर्ट के 2 बटन को खोलती… "ये कौन सी जगह बिठा दिए मिस्टर, मुझे घुटन सी हो रही है।"..


जावेद:- यही तो हमारा दर्द है मैडम हमे इस घुटन में जीना पड़ता है। बताइए यहां बैठते ही आपने इतना खोल दिया, फिर यहां की औरतें कितना खोल देती होंगी किवाड़ बंद होने के बाद।


नीलू:- व्हाट् ????


नवीन:- लौंडा कह रहा है यहां इतनी गर्मी पड़ती है कि औरतें अपना लगभग कपड़ा उतार देती है, कितने शर्मिंदगी की बात है ना मैडम। ऊपर से यहां के लौंडे, किसी भी जुग्गी ने घुसकर पेलम पेल मचाकर 10 मिनट बाद भाग आते है। बेंचो पता ही नहीं चलता इस बस्ती में को कौन किसका बच्चा है।


नवीन की बात सुनकर जावेद मुंह फाड़ कर हसने लगता है और हंसते हंसते अपना हाथ उसके शर्ट के ऊपर से स्तन पर डाल देता है। नीलू थोड़ा पीछे हटकर अपने स्तन के ऊपर अपना हाथ रखती… "क्या तुम पागल हो गए हो मिस्टर। मै तुम्हे जेल भिजवा दूंगी।"..


जेल के बात सुनते ही नवीन अपना पिस्तौल निकलता है… "यहां का जेल भी मै हूं और कानून भी। जावेद पटक साली को ऐसा पेलेंगे की ये भी क्या याद रखेगी।


नीलू:- रुको रुको प्लीज, ऐसे जबरदस्ती मत करो। मै तुम्हारे साथ सब कुछ करूंगी लेकिन प्लीज यहां नहीं, बहुत गंदी जगह है ये। प्लीज फोर्स मत करो। चाहो तो तुम अभी मेरे साथ किसी होटल में चल दो, लेकिन प्लीज यहां नहीं। यहां हमे सबने आते भी देखा है और बाहर कुछ लोग मोबाइल का कैमरा यहीं लगाए है। मै बदनाम हो जाऊंगी।


जावेद, नीलू के होंठ को काटते.. बैन दी लोड़ी, तुझे पिलवाने के लिए मखमल का बिस्तर लेकर आऊं मै। नवीन बाहर से भगा मादरचोदों को। अभी दोनो साथ में पेलेंगे इसे आगे और पीछे से..


गली के अंदर उस वक़्त जब नीलू को किनारे किया गया। अपस्यु की कार का काफिला चंद फासला तय करके, उस 3 स्टोरी बिल्डिंग में पहुंचा। चारो ओर से पब्लिक का झुंड और एक-एक करके कार का दरवाजा खुला… "ओ भाई लोग डिक्की का दरवाजा यहां पहले खोलने का हां। चल डिक्की खोल पहले।".. तेज आवाज में अनवर बोला और सभी डिक्की का दरवाजा खुल गया।


डिक्की से हाथो हाथ कैश, 3 स्टोरी बिल्डिंग में पहुंच रहा था, तभी वहां एक हवा में फायरिंग हुई.. "मदरचोद यहां से भिड़ जल्दी हटाओ, तुम्हारे मां का यार नहीं आया है। भले लोग है, अपने पैसे हमे दान करने आए है। अरे सर लोग को अंदर बिठाओ रे।.. मुख्तार चिल्लाते हुए कहा और वहां से भीर बिल्कुल गायब सी हो गई।


आर्म्ड किडनैपर्स ने जब देखा कि मामला बस्ती वालों का है तो वो लोग अपने काम में ध्यान देने लगे। 3 स्टोरी बिल्डिंग ऐसी थी कि जिसमे आगे से मात्र एक 4 फिर का दरवाजा था बाकी पूरी कि पूरी दीवार। जैसे ही दरवाजे के आगे अनवर खड़ा हुआ, और एक एक करके बैग के साथ पिस्तौल भी अंदर जाने लगा, ठीक उसी वक़्त अपस्यु की नजर मिश्रा बंधु पर गई उसने पीछे की सीट से दोनो वीरदोयी को उतारकर मिश्रा बंधु को तुरंत कार में पैक करने के लिए कह दिया।


वीरदोयी बिजली की फुर्ती से गए और कार के दूसरे ओर से दोनो भाई को पैक कर दिया। दोनो भाई कुछ समझ पाते उससे पहले ही वो कार में थे।..


अपस्यु:- आप दोनो को बहुत कुछ कहना होगा, लेकिन उससे पहले मै कहना चाहूंगा... अभी वक़्त नहीं है बात करने का और आप दोनो के नेचर को देखते हुए यही बेहतर है.. मुंह हाथ बांध कर बिठाओ इन्हे, ताकि कोई समस्या ना खड़ी कर सके।


दोनो वीरदोयी फुर्ती दिखाते हुए मिश्रा बंधु के हाथ पाऊं मुंह बांधकर कार के पीछे लुढ़का दिए। अपस्यु उन दोनों को इशारा करते हुए कहने लगा.. सबको प्लान के मुताबिक 5 मिनट का टाइमर से करने कह दो 2 बजकर 15 मिनट पर। उसने हामी भरी और संदेश पहुंचाकर वो दोनो 2 और वीरदोयी को लेकर सबसे आगे वाली कार के पास चला आया।


बाकी के लोग उतारकर, एक-एक करके अंदर उस 3 स्टोरी बिल्डिंग में घुसने लगे। मुख्तार और अनवर वहां पैसों को देखकर उन्हें खुशी से धन्यवाद कह रहा थे। यहां हर किसी ने 2.15 के समय पर एक टाइमर लगा लिया था जिसमें मात्र 2 मिनट बचे थे। 14 वीरदोयी अंदर थे जो कि इनके पागलपन पर चुप्पी साधे धीरे-धरे नीचे के फ्लोर पर फ़ैल रहे थे।


टाइमर शुरू होते ही उन लोगो ने अपने कोट में लगे स्मोक बॉम्ब का पीन खींच दिया। इधर अपस्यु और ऐमी भी अपने कार से बाहर आए। अपस्यु वीरदोयी के हाथ का सहारा लेकर 18 फिट का जंप किया, तेजी से 2 प्लास्टिक सी4 दीवाल में लगा दिया। 5 मिनट के टाइमर में, 10 सेकंड बीतते बीतते, वहां अंदर मौजूद वीरदोयी के कोट से धुआं निकलने लगा और इधर सी4 के धमाके से बीच के फ्लोर की दीवार टूट गई।


एक ओर जुग्गी में जहां नीलू के साथ नाटक चल रहा था, जहां जावेद खड़ा होकर अपने पैंट निकल चुका था और तब तक नवीन सबको भागकर जैसे ही अंदर आया, तेज धमाका से वो दोनो चौंक गए और धमाके की आवाज सुनते ही नीलू हंसते हुए कहने लगी… "ठीक है मूर्खो अब हमारा एक्शन टाइम आ गया।"

नवीन हंसा, जावेद अपने अंडरवेयर पर हाथ फेर रहा था और नीलू, बिजली सी तेज… तेजी के साथ उसने अपना कोट निकला और पीठ में टंगी दोनो कुल्हाड़ी उसके हाथो में। जावेद और नवीन क्या संभलते, इतना तेज और जोरदार प्रहार था वो की उनका बड़ा सा मुंह खुला हुआ था और गला काटकर जमीन पर। सर कटा धर खून के फव्वारे के साथ खड़ा फर्फारा ही रहा था कि नीलू उसपर इतना तेज लात मारी की वो जुग्गी का दरवाजा फाड़कर बाहर जा गिरा।


सर कटी लाश को खून में लथपथ देखकर वहां के लोग पागलों कि तरह चीखते हुए अपने अपने घरों कि ओर हथियार निकालने भागे और इधर नीलू अपने ऊपर का सूट निकालकर लैदर ब्लैक बुलेटप्रूफ ड्रेस में आ गई और चेहरे पर भी कला बुलेटप्रूफ मास्क चढ़ा ली।


मास्क चढ़कर वो अपस्यु के ओर दौर लगा दी। इस ओर जैसे हो धमाका हुआ हर कोई अलना 2 स्मोक बॉम्ब नीचे और 2 स्मोक बॉम्ब ऊपर के फ्लोर पर डालते हुए, अपने अपने टारगेट कुर्सी के पास पहुंचे। 14 कुर्सी 14 लोग, पहुंचते ही बिना समय गंवाए हर किसी को एंटीडोट लग चुका था और हर कोई अपनी कुर्सी सहित सीधा उस दीवार से कूदते हुए बचे 2 स्मोक बॉम्ब को गाड़ियों के काफिले के पार फेंकता जा रहा था।


नीचे चार वीरदोयी बड़ी सी जाल फैलाए सबको लपक रहें थे, ऐमी और अपस्यु उन्हें पकड़ कर खिंचते हुए नीचे कर रहे थे। नीचे आते ही हर वीरदोयी कुर्सी से बंधे बंधक को निकालकर, ड्राइविंग करने वालो को ड्राइविंग सीट पर और बाकियों को आगे पीछे बिठाते जा रहे थे।

टाइमर सेट करने के महज पहले मिनट में ये सब हो चुका था और वहां मौजूद किडनैपर्स इस एक मिनट में पहले धमाके पर चौंक गए। बाद में चारो ओर ऐसा धुआं हुआ कि, जिस-जिस ने कुर्सी के पास खड़े होने की जहमत उठाई, वो बस खुद से 200 की रफ्तार से आती हुई किसी से टकराने का आभाष किया और चिंख़ते हुए जमीन पर धराशाई थे।


बस्ती में चारो ओर बात आग की तरह फ़ैल चुकी थी और वीरदोयी भी फ़ैल चुके थे। सभी लोगों को सुरक्षित बिठाने के बाद अपस्यु अकेला ही धुएं के बीच अंदर वो ट्रिपल स्टोरी बिल्डिंग में घुस गया।
Mast escape scene bhai
Ab escape ka final part kya hoga dekhna hai
 

Nevil singh

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अपस्यु:- कमीना कहीं का, नजर दिए है मुझ पर। एहसान फरामोश भुल गया तुझे गोवा ट्रिप पर भेजा था। ।


आरव:- हां हमे ट्रिप पर भेजकर पूरे दिल्ली में तहलका भी मचाया था, सब याद है मुझे।


अपस्यु:- तू मेरे साथ बकवास करने आया है?


आरव:- बकवास करने का शौक नहीं है तेरे साथ, बस यूं ही चला आया था इधर। तुझे अच्छा नहीं लगा तो जा रहा हूं।


अपस्यु:- बस कर नौटंकी, अच्छा चल माफ भी कर दे और बता की तेरा मूड काहे ऑफ है।


आरव:- तेरी वजह से ऑफ है, लावणी को लगता है मै उससे प्यार नहीं करता। कहती है एंगेजमेंट के पहले तो मै उसे परेशान किया करता था और जब से एंगाएमेंट हुई है मै उसे परेशान नहीं करता। कुछ ऐसा नहीं करता जो उसे सरप्राइज कर सके, जैसा पहले किया करता था। हर बात में तेरा एग्जाम्पल अपस्यु ने ऐसे चौंका दिया था ऐमी दीदी को, वैसे किया। इंडिया गेट पर अपने प्यार का इजहार किया।


अपस्यु:- भाई गलत भी कहां कह रही है वो। उन्हें हमारा छेड़ना पसंद है, थोड़ा बहुत परेशान करना पसंद है। मानता हूं कि वो मेरा एग्जाम्पल देती है लेकिन प्यार तो उसे आरव की अदाएं और हरकतों से हुआ था ना, फिर वो आरव कहां गुम है।


आरव:- तो क्या मै उसे जिंदगी भर परेशान करता रहूंगा?


अपस्यु, आरव को बिठाते हुए… "लावणी की प्यारी सी मुस्कान दिन भर बनी रहे तो तुझे कैसा लगता है।"..


आरव:- ऐसा लगता है मानो चारो ओर खुशनुमा मौसम हो। ठीक वैसे ही जैसे मै 11 महीने यूरोप में रहता था।


अपस्यु:- हा हा हा हा.. मतलब तेरा वो एक महीना जो मेरे साथ रहता था वो बुरा वक़्त होता था।


आरव:- और नहीं तो क्या? छोड़ ये सब क्या समझना चाह रहा था वो समझा दे जारा।


अपस्यु:- समझा तो दिया कबका, पूरे दिन छोटे छोटे मुस्कान बनाए रखने के लिए थोड़ा बहुत छेड़छाड़ जरूरी है। जैसे पहले करता था वैसे ही। हां लेकिन ध्यान रखना, ऐसे सितुएशन में मत डाल देना की शर्मिंदगी महसूस हो दोनो को।


आरव:- समझ गया गुरु जी। मै चला लाइन मारने अपनी बीवी को। जबतक जियूंगा उसे लाइन मारता रहूंगा।


अपस्यु:- शाबाश ये हुई ना बात। चल इसी बात कर 2 पेग लगाया जाए।


आरव:- मां है, मासी है, तू जूते मत खिलवा देना।


अपस्यु:- बस 2 पेग की तो बात कर रहा हूं मै।


आरव:- कमीना पिछले हफ्ते 2 पेग बोलकर 6 पेग पिला दिया था। मां ने कितनी गालियां सुनाई थी तुझे पता भी है। खुद तो भाग गया फ्लैट और मुझे यहां डांट खिलवा दी। मेरे सर पर हाथ रखकर बोल कोई जिद नहीं करेगा कोई इमोशनल नाटक नहीं करेगा।


अपस्यु:- बेवड़ा कहीं का, भुल गया वो दिन जब हमेशा टल्ली रहता था, आज भाई को ऐटिट्यूड दिखा रहा है।


आरव:- मतलब तुझे अच्छा लगेगा मै पी कर लड़खड़ाता रहूं घर के लोगों के सामने।


अपस्यु:- नाह ये तो कतई अच्छा नहीं लगेगा।


आरव:- फिर मुझे मेरे हिसाब से पीने से और तू अपने हिसाब से पी। रुक पुरा बोलने दे। मैं थोड़ा सा नशा आने तक पियूंगा, जिसमें मूड रोमांटिक बाना रहे। अब खुश।


अपस्यु:- आह ये हुई ना कलेजे को ठंडक पहुंचाने वाली बात।


दोनो भाई बैठ गए बैठक लगाने तभी दरवाजे पर दस्तक हुई… "कौन हैं"..


स्वास्तिका:- मै हूं, दरवाजा खोल।


आरव ने दरवाजा खोला और झट से बंद कर लिया।… "नॉटी बड़ी प्यारी लग रही है।"…


स्वास्तिका, सिगरेट निकालती…. "यार मां ने एक मिनट के लिए अकेले नहीं छोड़ा। दे एक पेग मुझे भी दे।"..


अपस्यु:- विशकी और स्कॉच है नॉटी, क्या लेगी।


स्वास्तिका:- हद है मेरे लिए वोदका नहीं रख सकते थे। अच्छा छोड़ विस्की ही पिला दे, थोड़ा लाइट पेग बनना।


2 के बदले 3 हो गए और तीनों बैठकर पीने लगे। स्वास्तिका और आरव 4 लाइट पेग के बाद रुक गए, अपस्यु 2 और हार्ड पेग लेने के बाद वहां से उठा। "अब महफिल जवान हुई है आग लगा देंगे।"… अपस्यु उठते ही कहा।


स्वास्तिका और आरव दोनो एक साथ… "फायर बिग्रेड की गाड़ी हॉल में ही घूम रही है, ये ध्यान रखना।"..


तीनों एक साथ किसी पुराने दोस्त की तरह बाहर निकले। तीनों को साथ कमरे से निकालते देखकर ऐमी समझ गई कि अंदर तीनों कौन सा गुल खिलाकर आ रहे है। खैर थोड़ा बहुत एंजॉयमेंट तो चलता है बस यही सोचकर वो चुप रह गई।


कुछ ही देर में लोग आने शुरू हो गए। दीपेश और उसकी फैमिली भी अाई थी और साथ में उसके कुछ दोस्त भी थे। दीपेश का खास दोस्त निर्मल दीपेश के कान में कहने लगा… "यार तेरे ससुराल में हरियाली बहुत होती है। जहां देखो दिल को ठंडक देने वाला एहसास है।"..


दीपेश:- ज्यादा घुर मत वरना यहां के लोगो ने अपने हॉल के दीवार को ज्यादातर वो छोटे छोटे रॉड से सजाया है, ना विश्वास हो तो नजर घुमा कर देख ले चारो ओर।


निर्मल:- जल्लादों के लेटेस्ट हथियार के दर्शन मत करवा, आज तक कभी पड़ी तो नहीं, लेकिन जिसने भी अपना अनुभव साझा किया है, रोंगटे खड़े करने वाले थे।


इधर सारी लड़कियां एक साथ गोल सर्किल बनाकर बीच में स्वास्तिका को घेरे उससे बात कर रही थी, तभी छेड़ छाड़ के इरादे से वहां आरव पहुंच गया। ऊपर देखते हुए उसने अपना हाथ बढ़ाकर लावणी के कमर तक ले गया और उसे चीकोटी काटने लगा…


आरव जब अपने हाथ आगे बढ़ा रहा था तब ऐमी ने लावणी को पीछे खींच लिया और आरव की हरकत देखने कहने लगी। इधर आरव ने चिकोटि काटी और उधर साची के मुंह से आऊच का तेज साउंड निकला और लावणी आरव को घुर रही थी।


साची:- अरे यार मै साची हूं, उधर देख वहां लावणी खड़ी है।


कुंजल:- क्या हुआ साची?


साची:- मेरे कमर में इसने चिकोती काट ली।


इतने में आरव की नजर, घूरती हुई लावणी पर गई… वो अपना सर पीटते वहां से निकल गया। उसे जाते देख वहां मौजूद सभी लड़कियां हंसने लगी। सभी लावणी को छेड़ते हुए पूछने लगी… "क्या जादू कर दिया को आरव बर्दास्त नहीं कर पा रहा। ऐसे भिड़ में छेड़ छाड़।"


लावणी:- हां मुझे भी अच्छा ही लगता अगर मुझे वो चिकोति काटता लेकिन ऐमी दीदी ने बेचारे को मिस कॉल लगवा दिया, अब पूरे फंक्शन में वो शरमाया शरमाया घूमेगा।


कुंजल:- मतलब इस साजिश कि राचयता बड़ी भाभी है।


ऐमी:- आखिर वो भाई किसका है, अपस्यु ने ही सीखा कर भेजा होगा जाकर तंग कर लावणी को।


साची:- लेकिन क्यों ?..


ऐमी:- शायद आज रात लावणी के पास रुकने के लिए रोमांटिक मोमेंट बाना रहा हो। अब दिल की प्यास बीवी ही तो बुझाएगी।


लावणी:- हद है मै जा रही हूं..


साची:- अभी से ही जा रही है.. वन टाइम शो होगा उसके लिए तू स्वास्तिका का एंगेजमेंट क्यों छोड़कर जा रही, बहुत वक़्त मिलेगा।


एक बार फिर से निशाने पर लावणी, बेचारी शर्मा भी रही थी और लज्जा भी। कहे तो क्या कहे और करे तो क्या करे। ये सब हरकत आरव की वजह से हो रहा था और अंदर ही अंदर अब बस वो अकेले में उससे मिलना चाहती थी।


सभी लोगों कि रैगिंग से वो दूर हटकर अपनी मां के पास आकर बैठ गई। वहीं स्वास्तिका ऐमी को आंखें दिखती हुई कहने लगी… "बहुत गलत किया तुम लोगो ने। बेचारी कुछ नहीं बोल पाती इसका मतलब ये नहीं कि तुमलोग उसे परेशान करती रहो।"


ऐमी, अनजान बनती… "मैंने तो बस कैसुआली मज़ाक किया था।"..


साची:- अच्छा, ऐमी को अपनी जगह से हटाकर पुरा सीन क्रिएट कर दी और देखो कैसे भोली बन रही है। इसकी सजा ये है कि ना तो ये अपस्यु को देखेगी और ना ही पूरे फंक्शन में उसके साथ रहेगी।


स्वास्तिका:- जब इनका कैजुअल रिलेशन चल रहा था तब भी ये ऐसा ही कुछ मेंटेन किए हुए थे। इसके लिए कौन सी बड़ी बात होगी। दोनो बस 5 सेकंड का नजर मिलाएंगे और सारी कहानी बयां।


कुंजल:- दीदी आप की कुछ ढंग कि सजा बता दो, तब आएगा मज़ा।


स्वास्तिका:- जाकर इसका ड्रेस चेंज करवा दे फिर देख मज़ा।


ऐमी:- नो नो नो… ये नहीं, बाकी कुछ भी बोलो वो मै कर लूंगी, लेकिन ये नहीं।


सबने पकड़ कार उसे रूम में लेकर आयी और उसका ड्रेस जबरदस्ती चेंज करवा दिया। ना साड़ी ना लहंगा बल्कि पेरिस में को लाल रंग की परिधान ऐमी ने पहनी थी वहीं जबरदस्ती पहनकर बाहर ले आयी।


ऐमी की एक्साइटमेंट पहले से हाई थी। बड़ा ही खुशनुमा फीलिंग था जब वो सोचती की अपस्यु पूरे फंक्शन में उसके आस पास ही रहेगा और मौका देखकर जल्दी से हाथ इधर उधर लगाएगा। फिर उसका आखें दिखाना और अपस्यु का मुस्कुराकर उसपर प्रतिक्रिया देना। लेकिन अब लगता था उसे है पूरे फंक्शन मंडरा मंडरा कर अपस्यु को रिझाना होगा। और अपस्यु का चेहरा उतारना लाजमी था, क्योंकि बहुत कम ही ऐसे मौके होते थे जब अपस्यु ऐमी को कुछ अपने हिसाब से करने कहता था।


"कामिनी कहीं की, देखना नॉटी इसका बदला मै लेकर रहूंगी।"… गुस्सा में वहां से निकल गई ऐमी। उसके जाते ही साची और कुंजल, स्वास्तिका से ड्रेस का लॉजिक पूछने लगी।


स्वास्तिका:- कुछ नहीं अपस्यु ऐमी को साड़ी में देखकर लट्टू रहता है। मैंने ऐमी से कहा था कि पेरिस में जो लाला ड्रेस पहनी थी, एग्जैक्टली वैसी ही तैयार होना, लेकिन कमिनी पहनी साड़ी ही। मैंने भी बदला के लिया…


इधर ऐमी जब बाहर निकली तब उसकी नजर अपस्यु को ही ढूंढ रही थी। और जब अपस्यु को उसने देखा फिर उसे भी समझ में आ गया कि पारा गरम है। बार काउंटर पर बैठकर 2 पेग पी गया जबकि घर के सभी लोग मौजूद थे।


ऐमी तुरंत उसके पास पहुंची.... "सुनो ना बेबी।"


अपस्यु:- तुम बहुत ही खूबसूरत दिख रही हो ऐमी..


इतना कहकर अपस्यु बार काउंटर से उठ गया और सीधा दीपेश के पास पहुंच गया। वो दीपेश और निर्मल बातें करने लगा, और ऐमी उसके पास खड़ी फीकी स्माइल देने लगी और बीच बीच में वो भी उनसे बात कर रही थी।


"देख उधर क्या कही थी। ऐमी का फिका चेहरा और अपस्यु उसे नजरंदाज करके सबसे बात कर रहा है।".. स्वास्तिका साची और कुंजल का ध्यान उस ओर खींचती कहने लगी।


अपस्यु उनसे थोड़ी देर वहां बात किया फिर आकर मासी के पास बैठ गया। ऐमी भी बैठी, और यहां भी वही हो रहा था। इधर दोनो की हालात देखकर ये लोग मज़े ले रहे थे। ऐमी समझ गई आज का ये फंक्शन बेकार ही गया। वो मुंह लटकाए लावणी के पास बैठी… "सॉरी ।"


लावणी:- किस बात के लिए दीदी


ऐमी:- तुम्हे और आरव को छेड़ने के लिए। लेकिन तुम्हे भी हमारी बात के कारन आरव से ऐसे नाराजगी नहीं दिखानी चाहिए। वो तो उसी को तंग करने आया था जिसे कर सकता है, हम तब भी तुमसे उतना ही मज़ाक करते। ये छोटे नोक झोंक तो जायके हैं, इसे मुंह लटकाकर बर्बाद ना कर और वो चीकोती काटने में मिस हो गया, तो क्या तू उसे नहीं छेड़ सकती।


लावणी:- हां छेड़ तो सकती हूं।


ऐमी:- पागल ये झिझक छोड़ और हक से छेड़, ऐसा की उसे फील हो किसी ने देख लिया होता तो क्या होता। अपना ही माल है जैसे मर्जी वैसे छेड़ती रहना।


लावणी हंसती हुई वहां से उठी। आरव नंदनी के पास खड़ा होकर कुछ मेहमानों से बात कर रहा था उसी वक़्त लावणी वहां पहुंच गई… "मां 2 घंटे के लिए आप अपना बेटा उधार देंगी, इतनी मेहनत से इसके लिए तैयार होकर आयी हूं, पूरी दुनिया ने देख ली, केवल आरव को छोड़कर।"


नंदनी, हंसती हुई… "2 घंटा क्यों, पूरी उम्र तो तुम्हे ही साथ रहना है। क्यों रे लड़के, तू लावणी के साथ क्यों नहीं है और उसे लोगो से क्यों नहीं मिलवा रहा।


नंदनी आरव के ओर मुड़ी और लावणी आरव के ठीक पास में खड़ी थी। वो जैसे ही कुछ बोलने को हुए उससे पहले ही उसकी आह निकल गई। बड़ी सफाई से लावणी ने अपने हाथ का पीन को उसके पीछे भोंक दी। बेचारा तिलमिला गय।
yaad aayengi bahut ye atkheliyya
ek ruthe duja manaye
aafreen update hai dost.
Nabil bhai :ecs: kahan hai aaj kal dikhai hi nahi dete hai :D
aap hi ke darbaar me bethe hai jahan panah.
gustakh maff
 

nain11ster

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nain11ster प्रभु आप तो तीव्र गति की लोहपथ गामिनी निकले और हम ( readers) खडे थे सामान्य गति का टिकट ले कर।
भाई साहब update एक से बढ़कर एक है, दो दो बार पढा चुका हूँ ।

2-2 baar abhi kyon padh rahe hai.. aaj kahani samapt kar deta hun .. pahle ek baar pura padh lijiye .. padhkar vichar de dijiye.. fir dobara shuri kar lijiyega .. shuru se ;)
 
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