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Romance भंवर (पूर्ण)

Naina

Nain11ster creation... a monter in me
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:D kya kahti hain.. bahut si chijen ek sath dekhni hoti hai... Fir bhi kabhi kahani ko yah sochkar nahi likha ki "chalo likh kar dekhte hain"...

Kam hone ki wajah waqt ki hamesa se kami rahi hai aur upar se yahan ka internet... 1 post reply me 5 minute se 10 minute ka waqt jata tha... Main story edit karke yadi 5 baje sham se reply shuru karta tha to aalam ye tha ki ek update se dusre update ke bich reply karke update dene me 8 ya 9 baj jate the...

Lockdown me kaam nahi tha to ye bhi manage ho jata tha.. lekin aap hi sochiye jab kaam hoga tab aadmi kahan se reply manage kar payega..

Baharhaal .. wi fi connection ke liye 8 month pahle se kaha hua tha .. ummid hai Sunday tak wo bhi lag jayega aur is padesani ka bhi hal nikal aayega
Yeh kis prakar ki Internet hai... kahi 2G ke jamane mein toh chale gaye aap phir se :fainted:
 

Naina

Nain11ster creation... a monter in me
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Naina

Nain11ster creation... a monter in me
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Update:-139



सजा तय हो चुकी थी और बची खुची जिंदगी अब अंधेरों में गुजरने वाली थी। विक्रम, प्रकाश और लोकेश को जिंदा रखने का सारा इंतजाम वहां पहले से कर दिया गया था, और उन्हें हर हाल में जिंदा रखना था। हर वक़्त अपने मौत कि कामना करे ऐसी ज़िन्दगी देकर, तीनों वहां से निकल गए।


ऐमी:- आरव वीरदोयी की एक छोटी सी टीम के साथ तुम आगे बढ़ो, और उसकी एक टीम के साथ हम आगे बढ़ते हैं।


अपस्यु:- ज्यादा काम सेहत के लिए अच्छा नहीं है स्वीटी, 1 महीने का विश्राम लेंगे।


आरव:- कमिनेपन की हद। जब-जब इसने कहा है हम कुछ दिनों के लिए कोई काम नहीं करेंगे, तब-तब ये अकेले पूरे व्यूह की रचना कर जाता है। मेरे इंगेजमेंट के वक़्त भी इसने सबको स्टैंडबाय में रखा था और किसी को बिना खबर किए सारा खेल रच दिया। मुझे तुमपर विश्वास नहीं।


ऐमी:- और मुझे भी..


अपस्यु:- तुम दोनो थोड़ा धीरज धरो। मैंने तुम दोनों को 1 महीने का विश्राम दिया है। मैं भी विश्राम में ही रहूंगा बस बहुत ही धीमे तरीके से आगे चलेंगे। इस पूरे इवेंट का बॉस मैं हूं, शुरू में ही तय हो गया था, कोई सवाल।


आरव:- बस मरना मत, कोई सवाल नही।


ऐमी:- मै अब तुमसे दूर नहीं रह सकती, बाकी 1 महीने का विश्राम मंजूर है।


अपस्यु:- ठीक है चलो अब मां के पास, 5 बजने ही वाले है।


हेलीकॉप्टर वहीं निमेष गांव के पास ही लैंड हुई, जहां नंदनी रघुवंशी पहले से ही पहुंची हुई थी। सच ही है आज के युग में धन ही धर्म है। कुंवर सिंह के जिस परिवार को लोग अब तक बुरा कहते आ रहे थे, 24 घंटे के अंदर सबके विचार स्वतः ही बदल गए।
helicopter hi kyun? are udan khotola leke de dete ya spaceship hi de dete udane ke liye :D


ना तो खुद को सच्चा साबित करने की जरूरत हुई और ना ही कोई दलील पेश किए गए, लेकिन फिर भी गांव के लोग कुंवर सिंह राठौड़ जिंदाबाद, नंदनी रघुवंशी जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। एक प्रशिक्षित टीम वहीं खड़ी थी जो गांव वालों को पूरा नक्शा समझा रही थी और कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लिए जा रहे थे।
Yeh sinha kidhar hai :D usko to har kadam pe apni hone wali biwi sang rahna chahiye :D


नंदनी गांव के पंचायत भवन में बैठी वहां के लोगों को सुन रही थी, अपनें दोनो बेटे और बहू को देखकर नंदनी मुस्कुराने लगी और धीमे से कुंजल के कान में कुछ कहने लगी। कुंजल, नंदनी की बात सुनकर थोड़ी हैरान हुई और वहां से उठकर दोनो के पास चली आयी…. "मां बोल रही है वो ये सारा काम खुद हैंडल करना चाहती है, वीरभद्र के यहां तबतक तुम लोग रिश्ते की बात शुरू करो।"..


ऐमी, हंसती हुई… "तो तुम क्यों इतना मायूस बनी हुई हो।"..


कुंजल:- सब लोग बाहर आओ, यहां नहीं बात करना मुझे…


चारो बाहर निकल कर आए, कुंजल अपस्यु और ऐमी पर बरसती हुई…. "मैंने तो बस ऐसे ही कही थी, आप लोग तो सीरियसली मेरी शादी वीरे से करवाने पर उतारू हो गए। मां को किसने बताया, इस बारे में।


आरव:- वैसे तेरे और वीरे की शादी होगी तो जुगलबंदी अच्छी सुनने को मिलेगी.. वीरे जी, कुंजल जी..


कुंजल, आरव का कॉलर पकड़ती… "ज्यादा मज़ाक किए तो मैं मुंह तोड़ दूंगी।"


अपस्यु:- हद है, तुझे अरेंज मैरेज भी करना है, लड़का घर जमाई भी चाहिए और जब हम रिश्ते की बात करने जा रहे हैं तब तू गुंडई पर उतर आयी है..


कुंजल:- ऑफ ओ … मैं कही क्या मुझे अभी शादी करनी है, लड़का ढूंढो अभी। देखो मेरा दिमाग मत खराब करो और हां मुझे वीरे पसंद नहीं।


ऐमी:- मतलब कोई और पसंद है..


"हद है यार"… कुंजल नकियाते हुए कहने लगी और चिढ़कर वहां से भाग गई। उसे ऐसे भागते देख तीनों हसने लगे। तकरीबन 1 घंटे बाद नंदनी वहां का सारा काम निपटाकर वीरभद्र के घर चली आयी।


नंदनी के कदम उस घर में क्या परे ऐसा लगा जैसे श्री कृष्ण, सुदामा के यहां पधारे हो। आव भगत और स्वागत में कोई कमी नहीं थी। लेकिन माहौल तब बिगड़ गया जब नंदनी तकरीबन 40 लोगों के बीच में यह बात कहने लगी कि वो उसके घर रिश्ता लेकर आयी है।


जैसे ही यह बात कुंजल के कान में गई वो बौखलाकर नंदनी के ओर जाने लगी किन्तु स्वास्तिका मामले को संभालती हुई उसका हाथ पकड़कर रोकती हुई, उससे बात खत्म होने तक का इंतजार करने के लिए धीमे से कहीं।
Tharki logis ko tharki damad chahiye.. khas kar hawas ki pujaran imli ko... taaki aage chalke koi uspe ungli na utha sake :D kam se kam kunjal ko toh normal insaan se shaadi karne dete... kamino ko yeh bhi raas na aaya...
नंदनी के कदम उस घर में क्या परे ऐसा लगा जैसे श्री कृष्ण, सुदामा के यहां पधारे हो।
Yeh toh had ho gayi.. nandini khud ko ab bhagwan samajhne lagi... are tuchh insaan kuch toh dar us upor wale se.. :sigh:

इधर वीरभद्र की मां ये बात सुनकर क्या कहे और क्या ना कहे उसे कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। वो घबराई सी आवाज़ में पूछने लगी…. "जी आप ये क्या कह रही है।"..


नंदनी:- हां आपने बिल्कुल सही सुना है। मुझे मेरे बेटे पार्थ के लिए आपकी बेटी निम्मी का हाथ चाहिए। दोनो एक दूसरे को देख चुके है। पार्थ को निम्मी बेहद पसंद है, आप चाहे तो निम्मी से पूछ लीजिए, यदि उसे भी पार्थ पसंद हो तो हम दोनों कि सगाई करते हुए चले जाएंगे।


पार्थ जो तब से केवल ख़ामोश बैठा हुआ था, नंदनी की बात सुनकर बिल्कुल हैरान सा हो गया। हालांकि हैरान वहां 2 लोग थे। एक तो कुंजल, जिसका सर दर्द केवल इतनी सी बात को लेकर हो गया, कि वो बस समझाने के लिए वीरे और उसकी शादी की बात कह रही थी और लोगों ने सीरियसली ले लिया।


दूसरे अपने पार्थ भईया जो निम्मी की पजल में डूबे थे कि निम्मी उस शाम किस ओर इशारा कर गई जो अब तक वो समझ नहीं पाया और अगर जल्द ही उसने निम्मी बातों का सही मतलब नहीं निकाल पाया तो वो दृश्य के साथ चली जाएगी।
पार्थ, स्वास्तिका से… "नॉटी, ये आंटी अचानक से रिश्ते की बात करने आ गई"…


स्वास्तिका:- क्यों तुझे अच्छा नहीं लगा। रुक एक मिनट, मां पार्थ कुछ कह रहा है..


नंदनी:- हां बोलो ना पार्थ..


पार्थ:- मैं कहां कुछ बोल रहा था, वो स्वास्तिका को सुनने में कुछ गलतफमियां हुई थी शायद….. (फिर धीमे से स्वास्तिका से) पागल है क्या तू नॉटी..


स्वास्तिका:- डफर कहीं का.. उस दिन निम्मी ने साफ तौर पर तो कही थी कि वो गांव के लोगो और उनकी नजर को जानती है, इसलिए किसी को अपने मुंह नहीं लगने देती। वहीं उसने लोकेश के बारे में भी बताया, जबकि उसे पता था कि तुम यह बात जानते हो..


पार्थ:- कमिने हो तुम सब, छिपकर मेरी बात सुन रहे थे।


स्वास्तिका:- तेरे लिए हमारा बात सुनना मायने रखता है या निम्मी।


पार्थ:- निम्मी…


स्वास्तिका:- हां तो ध्यान से सुन, निम्मी का साफ इशारा था, तुम उससे अच्छे लगते हो, बस दूसरी लड़कियों को ताड़ना बंद कर दो और वो अपना प्यार तुम्हे तब दिखाएगी जब उसकी मां तुम्हारे और उसके रिश्ते के लिए राजी हो जाए।


पार्थ:- पहले प्यार का इजहार करने में क्या परेशानी थी?


स्वास्तिका:- गधा है तू, डफर। यह गांव है। यहां प्यार मतलब सेक्स और शादी मतलब इमोशन।


पार्थ:- अती बेवकूफ हो, प्यार मतलब सेक्स कब से होने लगा..


स्वास्तिका:- तुझे बात की गहराई को जाननी है तो अपस्यु से मिल ले। हद है यार, ये गांव है, यहां जात में शादी होती है, और एक ही गांव लड़का और लड़की की शादी भी नहीं होती। ऐसे में वो किसी से प्यार करके, फिर उसके लिए घरवालों से लड़े, बाद में उसके घरवाले दोनो को कबूल करते है या इमोशनल ब्लैकमेल करके उसकी शादी कहीं और करवा देते है, उतना रिस्क वो नहीं लेना चाहती थी, इसलिए उसने मन बना लिया था कि जिससे शादी होगी, प्यार उसी से कर लेगी और तबतक वो अपने काम में व्यस्त रहेगी। बस ये मेरी समीक्षा है और शायद सारी बातें समझा दी मैंने। अपस्यु को भी पता है ये बात, तभी तो उसने कल लोकेश की कहानी समाप्त करने के बाद भी तेरे लिए सोचा और ना जाने कब मां से बात करके ये सब प्लान कर लिया, वरना देर रात तक तो वो हम सब से बातें ही कर रहा था।


पार्थ:- यार कितना गजब है ना अपस्यु। इतना बड़ा काम करने के बाद तो दिमाग में जीत कि खुशी ही चलती। लेकिन फिर भी उसे मेरा ख्याल रहा।


स्वास्तिका:- ज्यादा इमोशनल ना हो। बात हम सब में से किसी की भी होती तो वो लोकेश का काम भले 4 दिन में समाप्त करता, लेकिन अपना काम पहले कर देता।


दोनो अपनी बात कर रहे थे और दोनो में से किसी का ध्यान वहां के माहौल पर तबतक नहीं गया, जबतक नंदनी ने पार्थ से ये नहीं कह दी कि जाकर तैयार होकर आए, बस कुछ ही देर में उसकी सगाई है। पार्थ को ऐसा लगा जैसे बिन मांगे सब मुराद मिल गई है।


इधर स्वास्तिका खुद गई और निम्मी को तैयार करके लाई। अलहड़ सी दिखने वाली लगी, जब सगाई के लिए तैयार होकर अाई थी, तब पहली बार उसकी खूबसूरती का भी पता लग रहा था। और चेहरे पर आयी वो शर्मो-हया, जो घरवालों के पास होने के कारन निम्मी मेहसूस कर रही थी और लोगों को वो साफ दिख रहा था।


इन दोनों का काम तो हो गया, साथ ही साथ जब सब फुरसत हुए तो कुंजल से क्या बदला लिया गया था। स्वास्तिका और ऐमी ने तो जैसे उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया हो। जबतक वो नंदनी के आंचल में अपना मुंह ना छिपा ली, तबतक सब उसे चिढ़ाते ही चले गए।


सभी कार्यक्रम पूर्ण होने में काफी समय लग चुका था, इसलिए तय यह हुआ कि एक रात वीरभद्र की मेहमान नवाजी स्वीकार करने के बाद कल सुबह सब यहां से निकलेंगे। नंदनी की बात मानते हुए हर कोई वहीं रुक गया सिवाय अपस्यु के जिसके दिमाग में कल रात से ही कुछ और चल रहा था, जिसे वो फिलहाल किसी के साथ साझा नहीं कर सकता था।
inlogo ke paas karne ke liye aur koi kaam dham nahi kya... har dusri update mei kisi na kisi rista tay kar dete hai... yaar lagta hai desh ka population badhake hi dum lenge yeh log..


थोड़ी सी मेहनत थोड़ी सी झूठ और अपस्यु जिस हेलीकॉप्टर से आया था उसी हेलीकॉप्टर में बैठकर अपने हाई टेक गांव निमेष पहुंच गया था। जैसे ही अपस्यु वहां के महल में दाखिल हुआ, सामने हॉल में ही….. "इतने सारे घर खाली परे हैं फिर भी यहां हॉल में"…


नीलू:- तू चालू रख रे, मज़ा ना खराब करो… उम्म्म ! अभी निकलो यहां से या बैठकर टीवी देखो, लेकिन मज़े को बर्बाद नहीं करो…


अपस्यु अपना सर पीटते हुए वहां से चला गया और नीलू को अपना मज़ा खत्म करके, काया के साथ कमरे में आने के लिए बोल दिया। तकरीबन आधे घंटे बाद दोनो कमरे में पहुंची….


अपस्यु:- हद है, खुले हॉल में सेक्स कौन करता है, यार इतने तो कमरे है यहां..


नीलू:- वो लड़का बेचारा अपनी मां के पास हमेशा के लिए जा रहा था और आज तक यहां किसी लड़की को टच भी नहीं कर पाया था, जबकि उसके सामने कई लोग मज़े लिया करते थे। बेचारे पर दया आ गई और वक़्त कम था, इसलिए उसकी हसरत वहीं पूरी कर दी। अब क्या तुम इस बात को लेकर टोक रहे.. वैसे तुम्हे यहां कौन सी याद खींचकर ले आयी।


अपस्यु:- बस ऐसे ताने की जरूरत नहीं। सेक्स की भूख नहीं खींच लाई मुझे, जो ऐसे पूछ रही हैं मैम। आप सब आदरणीय है और मुझे आपके लाइफ स्टाइल से कोई आपत्ती नहीं, मुझे एक बड़ा काम निपटाना है और उसपर कल से काम शुरू करना है।


काया:- मतलब हमारी मदद चाहिए।


अपस्यु:- हां मदद कि उम्मीद से आया हूं।


नीलू:- इसमें हमारा क्या फायदा होगा..


अपस्यु:- क्या फायदा चाहिए।


नीलू:- सम्मान..

अपस्यु:- मतलब..


नीलू:- जाने अंजाने में हम बहुत गलत कर गए हैं, अब कुछ ऐसा काम चाहिए जो अपने आप में लगे कि इस जीवन में कुछ तो अच्छा किया है।


अपस्यु:- हम्मम ! आज के बाद कभी ऐसा मेहसूस नहीं होगा कि पहले कभी गलत की हो।


नीलू:- मै तैयार हूं।


काया:- तुम्हारे काम के लिए हम सब तैयार है, और आखरी तक तैयार रहेंगे..


अपस्यु:- ठीक है फिर तैयार रहो, किसी की लंका भेदनी है।


काया:- हमे करना क्या होगा।


अपस्यु:- 3 लोगों को पूरी तरह सड़क पर लाना।


काया:- उनकी डिटेल..


अपस्यु कुछ तस्वीरें दिखाते…. "इस तस्वीर में जो लड़की है.."


जबतक अपस्यु इतना बोल रहा था तभी बीच में नीलू कहने लगी… "सात्विक आश्रम के संचालक महादीपी की भांजी और अनुप्रिया की बेटी कलकी है। दूसरा उसका छोटा भाई परमहंस और तीसरा सबसे छोटा भाई युक्तेश्वर है। जिल्लत की नई ऊंचाई दिखाई थी इसने मुझे। मेरा चरित्र क्या है इसे अच्छे से समझाया था मुझे। दोनो ही कमिने पन की नई परिभाषा है, बिल्कुल मीठा जहर।
chalo achha hai lage hatho inlogo ko bhi Kalyan ho gaya :D
Khair let's see what happens next
Brilliant update with awesome writing skill nainu ji :applause: :applause:
 
Last edited:

PARADOX

ଗପ ହେଲେ ବି ସତ
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Update:- 113



इधर श्रेया के घर में….. चल रहे रोमांस को देखकर सभी पागल हुए जा रहे थे। जेन तो पानी-पीते और बाथरूम जाते-जाते परेशान थी, वही हाल बाकियों का भी था। श्रेया से जब रहा नहीं गया तब वो कहने लगी…. "ये तो अपनी रास लीला में लगता है लीन रहेंगे और कुछ बात करने वाले नहीं। इनके रंग में भंग मै ही डालती हूं। जाती हूं अभी दोनो के पास।"


इधर श्रेया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था और उधर दोनो के रोमांस में कोई तब्दीली नहीं नजर आ रही थी। ऐमी डायनिंग टेबल पर बैठी गौर से अपस्यु का चेहरा देख रही थी। अपस्यु उसे सीने से लगाते हुए कहने लगा…. "खुलकर जीने का मज़ा ही कुछ और है।"..


ऐमी, अपस्यु से अलग होती मुस्कुराती हुई उसे देखने लगी… "आज ऐसा लग रहा है कि हम अपनी सोच में बेवकूफ थे। लेकिन जो बीत गया उसे जाने दो और जाकर तुम नहाकर आओ।"


अपस्यु:- तुम भी साथ चल रही हो क्या?


ऐमी, अपस्यु को धक्के देकर दूर हटती… "शाम को जब लौटेंगे तब देखते है, अभी जाओ नहा लो, जबतक मै किशोर को बुला लेती हूं। आज घर का काम करवा लेते है।"..


अपस्यु:- सारे काम 2 बजे तक खत्म कर लेना अभी कह देता हूं।


ऐमी:- हां ठीक है मैंने सुन लिया अब तुम जाओ।


अपस्यु चला गया और उसे जाते देख ऐमी मुस्कुराती हुई किशोर को कॉल लगा दी। अभी वो किशोर से बात करके कॉल रखी ही थी कि बेल बजने लगी। ऐमी दरवाजा खोलकर देखी तो बाहर श्रेया खड़ी थी…. "अपस्यु नहीं है क्या?"


ऐमी:- क्यों वो नहीं रहता तो तुम घर में नहीं आती क्या?


श्रेया, पूरी तरह चौंकती…. "क्या?"


ऐमी, हंसती हुई…. "मज़ाक कर रही थी आओ अंदर। कई बार आंटी के साथ देखी हूं तुम्हे, इसलिए थोड़ा सा मज़ाक।"


श्रेया अंदर आती हुई… "तुमसे कभी ठीक से मुलाकात नहीं हुई, लेकिन अच्छे से जानती हूं तुम्हे।"


ऐमी:- जी इस ज़र्रे नवाजी का शुक्रिया। (कामिनी जानती तो कल कुछ ढंग के लोग भेजती, इतने कमजोर प्लेयर को कॉन्ट्रैक्ट तूने दिया की तेरा खून करने का मन करता है)


श्रेया:- अपस्यु नहीं है क्या ? (देखने से लगता नहीं कि ये इतनी बड़ी फाइटर होगी। अपने फिगर को क्या मेंटेन किया है। तब उस अपस्यु की नजर इसपर से हटती नहीं। पहले इसे अपस्यु से थोड़ा दूर करना होगा, तब मुझे इनके बीच जगह मिलेगी)..


ऐमी:- कहां खो गई, मै कब से पूछ रही हूं, कुछ लोगी क्या?


श्रेया:- सॉरी कुछ सोच रही थी, इसलिए ध्यान नहीं दी। नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस अपस्यु से थोड़ी बात करनी थी।


ऐमी:- नहाने गया है थोड़ी देर में आ जाएगा.. (और तू कामिनी जल्दी से भाग जाना बात करके, क्योंकि ये वक़्त सिर्फ हम दोनों का है)


श्रेया से और बात करना ऐमी को उबाऊ सा लगने लगा इसलिए वो श्रेया को हॉल में बिठाकर किचेन में चली गई। तकरीबन 15 मिनट बाद अपस्यु हॉल में आया… "हेल्लो श्रेया"..


श्रेया:- हेय अपस्यु, क्या हो रहा है?


अपस्यु:- अपनी होने वाली बीवी के साथ हूं, वो भी अकेले तो होना क्या है, खट्टे-मीठे पल का मज़ा उठा रहे है।


श्रेया:- यहां पूरी कॉलोनी सदमे में है और तुम रोमांस में लगे हो।


अपस्यु:- ना तो मै पुलिस हूं और ना ही जो मरे उनमें से किसी को जानता, सो क्या फर्क पड़ता है।


श्रेया:- कमाल है, मै उसी लड़के से आज मिल रही हूं क्या, जो कुछ दिन पहले एक किसी अनजान के शव को नंगे पाऊं कांधा दे रहा था।


अपस्यु:- अखबार और न्यूज में ऐसे खबरे रोज आती हैं, क्या हर खबर के लिए तुम्हारी ऐसी ही भावना होती है। सामान्य सी बात है यार, जिसे नहीं जानते उसके लिए क्या कर सकते है। सुबह सुना मैंने भी, अफ़सोस तो कर लिया अब क्या चाहती हो छाती पीट लूं…


अपस्यु अपनी बात समाप्त ही किया था ठीक उसी वक़्त किशोर दरवाजे पर खड़ा होकर बेल बजाने लगा।… "ऐमी दरवाजे पर देखो शायद किशोर आया हुआ होगा।"…. ऐमी दरवाजा खोलती… "आइए सर"..


जैसे ही किशोर अंदर आया श्रेया की आखें बड़ी हो गई। हालाकि किशोर को श्रेया के बारे में नहीं पता था, लेकिन श्रेया किशोर के बारे में सब जानती थी। दिल्ली का एथिकल हैकर जो अपने सिक्योरिटी सिस्टम के लिए मशहूर था।


ऐमी:- किशोर सर वेलकम…


किशोर, ऐमी के सर पर एक हाथ मारते….. "कितनी बार तुमसे कहा है की ये बोरिंग नाम से मत पुकारा कर। कॉल में रेक्स।"..


अपस्यु दूर से ही… "ऐसा भी क्या फैशन किशोर भईया.. ये तो.. सेक"..


अपस्यु आधे पर ही था तो… "देखो अपस्यु अगर वो नाम बोला तो मै यहां से चला जाऊंगा।".. किशोर हड़बड़ी में अपनी बात कहते हुए अपस्यु के पास पहुंचा।


अपस्यु:- ठीक है नहीं कहता, कुछ लोगे आप?


किशोर:- काम बहुत परे है, क्या करना है वो बता। वहीं रेगुलर चेक करूं की कहीं कोई तेरी जासूसी तो नहीं कर रहा या आज कोई नई मांग है।


ऐमी:- हां सिक्योरिटी अलार्म भी चाहिए जो मोबाइल पर नोटिफिकेशन दे। कल का केस तो पता ही होगा यहां अपार्टमेंट में क्या हुआ है। कब कौन कहां से दुश्मनी निकालने आए किसे पता।


श्रेया:- ठीक है अपस्यु मैं चलती हूं।


"अरे श्रेया कहां जा रही हो। बैठो थोड़े गप्पे मारेंगे। किचेन का काम लगभग खत्म है।"…… ऐमी अपनी बात कहती, हंसती हुई अपस्यु के ओर देखने लगी।


श्रेया:- नहीं जाने दो, वैसे भी तुम्हारे होने वाले पतिदेव कह ही चुके हैं कि आज वो अकेले तुम्हारे साथ खट्टे-मीठे पल बांट रहा है।


श्रेया गेट तक बड़े आराम से निकली और बड़ी तेजी के साथ अपने फ्लैट में गई। बाकी लोगों को सर्विलेंस से सब खबर लग चुकी थी कि अपस्यु के यहां कौन आया है, अब बस सबको भेद खुलने का डर था।


श्रेया की साथी जेन और सादिक अपने अपने शब्दो में चिंता जाहिर करते हुए पूछने लगे….. "हम तो अपस्यु को नॉन टेक्निकल समझते थे, लेकिन इसके पास टैक्निकल टीम भी है।"..


श्रेया, जोर जोर हंसती हुई…. "जानती हो उसमे और हम सब में क्या फर्क है?"


श्रेया की पूरी टीम एक साथ… "वो शिकार है और हम शिकारी।"..


श्रेया:- नहीं, हम बेवकूफ शिकारी है और वो चालाक शिकार। कम से कम उन्हीं दोनो से तो कुछ सीख लेते। कल रात इतने शिकार किए उसने, लेकिन पुलिस को देखकर जरा भी पैनिक नहीं हुए और एक तुमलोग हो, एक लीगल हैकर क्या घुसा उसके घर में, पैनिक हो गए।

"सर्विलेंस पर रहो, यदि ये किशोर इसके साथ है, इसका मतलब इसे शुरू से पता है कि हम कौन है, फिर तो कोई गम ही नहीं, डायरेक्ट डील करेंगे, लेकिन नतीजा निकालने से पहले आराम से सर्विलेंस पर रहो, पूरे दिन में एक यही तो काम का आदमी आया है।


इधर श्रेया के जाने के बाद…. "अपस्यु, बेबी किशोर भईया को अपना काम करने दो, जबतक हम घर से होकर आते है। वैभव और पापा से मिल लेते है। कल से नहीं मिले।"..


अपस्यु, घूरती नज़रों से… "ऐमी देखो मुझे तुम ऐसे जान बूझकर परेशान नहीं करो, हम कहीं नहीं जा रहे।"


ऐमी, अपनी घूरती नजर अपस्यु पर डालती…. "तुम चल रहे हो और इस बात पर कोई बहस नहीं होगी। जाओ चेंज करके आओ।"..


अपस्यु छोटा सा मुंह बनाए अपने कपडे बदल कर आया।… "दरवाजे और कार की चाबी तो लेते आओ बेबी, श्रेया को देते चलते है, आने में देर हो गई तो।"..


दोनो थोड़े ही देर में श्रेया के दरवाजे पर पहुंचे, श्रेया के हाथ में सारी चाबियां देते हुए अपस्यु कहने लगा… "मेरे घर में कुछ काम हो रहा है श्रेया, प्लीज तुम थोड़ा देख लेना, हमे अभी ऐमी के घर जाना है।"


श्रेया:- ओय तुम दोनो झूठे हो, जा रहे हो रोमांस करने कहीं बाहर और मुझे जबरदस्ती काम दे रहे।


अपस्यु, श्रेया के दोनो गाल खिंचते…. "प्लीज अपने दोस्त की मदद कर दो, और वैसे भी मैंने सच कहा था। ऐमी खडूस हो गई है, रोमांस ना करूं मैं इसलिए बहाने से मुझे घर से बाहर ले जा रही है।


ऐमी गुस्से में अपस्यु का हाथ खींचकर ले जाने लगी और उन दोनों को देखकर श्रेया हंसने लगी। दोनो ऐमी की कार से जैसे ही अपार्टमेंट से बाहर निकले… "क्या हुआ ऐमी।"..


ऐमी:- आरव अभी-अभी किडनैप हुआ है।


अपस्यु:- हम्मम ! और कोई जानकारी।


ऐमी:- सिंगल बीप साउंड भेजा है, मतलब केवल वही किडनैप हुआ है, लावणी नहीं।


अपस्यु:- चलो फिर स्वागत कि तैयारी करते है।


ऐमी:- क्यों नहीं सर, वैसे भी कल के एक्शन ने बहुत निराश किया था, शायद आज कुछ टक्कर के लोग मिले। चलो जरा दुश्मन की जानकारी निकाली जाए।


अपस्यु और ऐमी दोनो ही अपने तीसरे फ्लैट पहुंचे जहां पुरा वर्क शॉप था इनका। ऐमी तुंरत अपने कंप्यूटर के साथ लग गई। सभी जानकारी पुख्ता करने लगी। कुछ बधाएं थी इसलिए ऐमी ने पल्लवी को गोवा एयरपोर्ट पर नजर दिए रहने के लिए बोली। इधर जबतक अपस्यु पुरा बैग तैयार कर चुका था, उसमे सारे जरूरत के प्रयाप्त समान के साथ अपने नए सेल रिप्लेसमेंट लिक्वड (cell replacement liquid) के इंगेजेक्शन बैग में डालकर तैयार हो गया।


ऐमी अब भी कंप्यूटर पर नजर बनाए थी। अपस्यु उसके कंधे से लगकर गाल को चूमते…. "क्या पता चला ऐमी।"..


ऐमी, अपस्यु के ओर मुड़कर अपस्यु के होंठ को चूमती…. "हाई टेक प्रोफेशनल, 12 लोगों की एक टीम है। अभी से 10 मिनट पहले एक प्राइवेट प्लेन में गोवा से दिल्ली के लिए उड़ान भरे है।


अपस्यु, भी ऐमी के होंठ को चूमते…. "जो भी है उसे हमारे बारे में सब पता है और शायद कोई सौदा करना चाहते है।"..


ऐमी:- चलो कम से कम आज मुंह छिपाकर तो नहीं लड़ना होगा।..


ऐमी अपना लैपटॉप बैग में पैक करके दोनो आराम से कार में जकार बैठ गए और बस इंतजार, इंतजार, इंतजार… तकरीबन डेढ़ घंटे बाद… "बेबी तैयार हो जाओ, वो लोग पहुंच गए।"


अपस्यु:- कौन से रास्ते पर है ऐमी।


ऐमी:- जिस हिसाब से ट्रैफिक लाइट को हैक करके अपनी तस्वीरें गायब करते चल रहे है, उस हिसाब से तो लग रहा है कि ये लोग अपने पसंदीदा रास्ते पर होंगे।


अपस्यु कार पूरी रफ्तार से भागते हुए… "ऐमी, पल्लवी भाभी अभी सर्वर पर थी क्या बैठी।"..


ऐमी:- हां वही बैठी है।


अपस्यु, पल्लवी को कॉल लगाया… "जी कहिए।"..


अपस्यु:- कुछ नहीं आपसे बात ही नहीं करनी मुझे।


तकरीबन 2 मिनट बाद पल्लवी प्राइवेट लाइन से कॉल लगाती… "आरव को कुछ समय पहले दिल्ली लाया गया है। मै और जेके थोड़े ऑफिशियल काम में फसे है, जल्द ही फ्री होकर हम भी ज्वाइन करेंगे। हमारे आने का इंतजार करना। ऐसा ना हो आने से पहले ही सारा एक्शन खत्म हो जाए।


अपस्यु:- भाभी, वो तो परिस्थिति तय करेगी ना। फिलहाल मैं कुछ कहता हूं ध्यान से सुनना और जल्द से जल्द जवाब देना, अभी हम दोनों ही दिल्ली उत्तराखंड के हाईवे पर है। अब ध्यान से सुनना, 12 लोगों की एक टीम जो काफी हाई टेक है और काफी योजनाबद्ध। दिल्ली और उत्तराखंड के बीच कहां जाकर हमसे डील कर सकते है।


तकरीबन 5 मिनट बाद पल्लवी एक लोकेशन साझा करती हुई कहने लगी…. "जिस हिसाब से तुमने उनका ब्योरा दिया है, उस हिसाब से तुम्हारे साथ डील वो भेजे गए पते पर ही करने वाले है। इस जगह में कंप्यूटर इंजीनियरिंग की हाई सिक्यूरिटी है ,जो आज ही सुबह की गई है।..


ऐमी, अपस्यु का चेहरा देखती हुई मंद मंद मुस्कुराने लगी। अपस्यु उसके सर पर एक हाथ मारते हुए… "मै जान रहा हूं तुम क्या सोच रही हो।"..


ऐमी:- अच्छा बताओ मै क्या सोच रही हूं?


अपस्यु:- यही ना की जिसके टेक्नोलॉजी हमने चोरी किए। जिसके ट्रेनिंग मॉड्यूल हमने चुराया, आज वो हमारे सामने होगा वो भी इस बात से अनजान।


ऐमी:- नाह ! मै तो एक्साइटेड हूं यह सोचकर, क्या होगा जब तुम एक एक्सपेरिमेंटल बेबी से भिरोगे, जो तुम्हारा मौसेरा भाई है।


अपस्यु:- फिलहाल तो उसने आरव को उठाकर एक दुश्मन की तरह दस्तक दिया है, तो उससे उसी की भाषा में मिलना है, आगे वक़्त की मर्जी। और हां कुछ रिश्ते आपके माता पिता के जाने के बाद ही चले जाते है, इसलिए वो मेरा भाई नहीं है।..


लोकेशन मिलने के बाद दोनो बस 5 मिनट में अंदर वहां थे। ऐमी वहां के सारे सिक्यूरिटी सिस्टम भेदने के बाद दोनो अंदर पहुंचे। जैसे ही वहां का सुरक्षा चक्र भेदा गया, वैसे ही किडनैपर को खबर लग गई की उसकी जगह पर घुसपैठ हुई है।…
Yar pura excitement ka gubbara bana dala.... aur ye Shreya ish ish billi ko hatao yar inke raaste se... iski miaaun.... miaun... achhi nahin lagti.....
(देखने से लगता नहीं कि ये इतनी बड़ी फाइटर होगी। अपने फिगर को क्या मेंटेन किया है। तब उस अपस्यु की नजर इसपर से हटती नहीं। पहले इसे अपस्यु से थोड़ा दूर करना होगा, तब मुझे इनके बीच जगह मिलेगी).

phir se iski miaaaun...... :banghead:


Aur Arav bhai ka kidnap... Aaila ye kya ho gaya..... Wese in donon ka reaction se pata chal raha hai ki in donon ko jaise pahle se maloom ho kidnapper ke baare me....

dekhte hain kon kiska patta kat ta hai....
 
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