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Romance भंवर (पूर्ण)

nain11ster

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Update:-159











दोनो के बीच सेक्स और बातचीत का दौर काफी लंबा चलता रहा और जब फाइनली दोनो सोने के लिए अपनी आखें मूंद रहे थे, दोनो ही एक दूसरे के विचार और पूर्व में किए काम से लेकर भविष्य कि योजनाओं तक हर काम में संतुष्ट होकर सोए।


कलिका और सौरव के निकालते ही, कुछ ही देर बाद पार्टी भी लगभग समाप्त होने को थी। सभी अतिथि जा चुके थे केवल कुछ खास लोग ही बचे थे जो खास काम के लिए रुके हुए थे। होम मिनिस्टर सबको लेकर एक प्राइवेट चेंबर में पहुंचा। सभी अपनी जगह लेते ही विपक्षी पार्टी के अध्यक्ष कहने लगे… "हमारे बीच इन दोनों का क्या काम (अपस्यु और ऐमी)


होम मिनिस्टर:- 15 अगस्त की रात जो डील तय होते ही तुरंत पैसा पहुंच गया था वो कारनामा करने वाले यही दोनो थे।


पक्ष और विपक्ष दोनो ही अध्यक्ष एक साथ… "ओह हो यही दोनो थे क्या। मानना पड़ेगा इन्हे तो, पैसे के मामले में इतना साफ और इतनी जल्दी पेमेंट करने वाले लोग मैंने अपनी जीवन में पहली बार देखा। वरना डील तय होने के बाद लोग पहले इंतजार करते है की काम हो रहा है कि नहीं, आधा पैसा पहले और कई तरह के सवाल जवाब के बाद फिर आधा पैसा देते है। बैठो बैठो दोनो बैठो और कोई ऐसा प्लान बताओ जिसमे धन की बारिश हो जाए।"


होम मिनिस्टर:- इसके पास 250 बिलियन यूरो है। हवाला के जरिए इसे पुरा पैसा डॉलर में चाहिए वो भी कैश इसके लिए ये 25% पे करेगा।


रकम सुनकर ही उन लोगो के चेहरे पर पसीना आ गया जिन्होंने पहली बार सुना था। 10% कमीसन पर काम होने वाला हवाला 25% पर हो रहा था, ये तो और भी सोने पर सुहागा वाला काम था।


रुद्रा:- पैसों का सोर्स क्या है?


ऐमी:- मल्टीपल सोर्स है इससे ज्यादा हम कुछ नहीं बता सकते।


रुद्रा:- हम पहले इसके साथ कभी काम नहीं किए, गुरांती क्या है कि ये ट्रैप नहीं। ये भी तो हो सकता है कि हम इसके जगह पर डॉलर लेकर पहुंचे लेकिन बदले में हमे इसकी जगह पर धोका मिले और ये हमारा सारा माल उड़ा कर ले जाए।


होम मिनिस्टर ने ऐमी को इशारा किया और टेबल पर कुछ पेपर रखते.... "2 प्रमुख कंपनी प्रताप ग्रुप और मायलो ग्रुप के ये लोन पेपर है जिसकी मंजूरी वर्ल्ड बैंक ने दे दी है… बस करना ये है कि कंपनी का एक फर्जी इंडियन अकाउंट देना है, जो मैंने तैयार कर लिया है, और तुरंत 200 बिलियन यूएसडी अपने खाते में। और वो अकाउंट देखो, वहां 100 बिलियन यूरो पहले से है और ये सब मेरे पास जमा है गुरांटी के तौर पर। अब भी किसी को शक।


पक्ष के अध्यक्ष:- अरे ये बच्चा तो पहले से बहुत ईमानदार हैं मुझे कोई शक नहीं, लेकिन मै अकेला इतना बड़ा अमाउंट नहीं लगा सकता। हम तो उम्र भर भी घोटाला करके इसका 10% भी जमा नहीं कर पाए। नेतागिरी के दलदल से अच्छा तो इसी का चेला बन जाता।


रुद्रा:- हम्मम ! शायद मंत्री जी को यकीन था कि हम में से कोई ये अकेला नहीं कर सकता इसलिए सभी हवाला वालो को एक साथ बिठा दिया। ठीक है ये पुरा काम मै करूंगा, बदले में प्रोफिट का 15% मै रखूंगा, और तुम सबके पैसे का पूरा रिस्क मेरा।


होम मिनिस्टर:- हम्मम ठीक है फिर डील तय हो गया। अपस्यु तुम्हे पैसा कब और कहां चाहिए।


अपस्यु:- पैसा मुझे लेकर आना होगा या ये लोग मेरे बताए पता पर लाएंगे।

रुद्रा:- कॉस्टमर तक भगवान होता है, हम ही पहुंच जाएंगे सर। आप बस लोकेशन बता दीजिए।


अपस्यु:- हम्मम ! ठीक है पैसा मुझे 25 दिसंबर को चाहिए। 24 दिसंबर को युक्रेन के वेस्ट बॉर्डर पर पैसा लेकर तैयार रहना वहां से 600 किलोमीटर का सफर 24 दिसंबर रात 12 बजे से तय करना है और सुबह के मेरे ख्याल से 10 बजे तक आप मेरे लोकेशन पर होंगे। आप अपनी सुरक्षा के लिए पूरी आर्मी ला सकते है मुझे कोई ऐतराज नहीं लेकिन बिना पैसे उस क्षेत्र में घुसे तो, ये आपके लिए अच्छा नहीं होगा। फिर आगे के अंजाम के लिए वो तैयार रहे जिन्होंने धोका का ख्याल अपने मन में लाया। और ऐसी स्थिति में आप यहां बैठे तमाम लोग उनका कॉलर पकड़ेंगे जिनसे आपके कमीशन की बात हुई है।"


"टेक्नोलॉजी स्कैनर के अलावा मै खुद मैनुअली एक एक रुपया चेक करूंगा बॉर्डर पर। पूरी सुनिश्चित होने के बाद ही मै पैसों के साथ अपने ठिकाने पर आऊंगा। आप सब का धन्यवाद, मैंने अपनी बात कह दी अब मुझे यहां से चलना चाहिए।"


अपस्यु अपनी बात कहकर उस महफिल से उठकर चला गया। ऐमी और अपस्यु दोनो बाहर निकलते ही जोधपुर से सीधा जयपुर अपनी मासी के पास निकल गए और इधर रुद्रा कुछ देर तक सभी लोगो से उनके हिस्से का पूरा पैसा कलेक्ट कर लिया क्यों इतनी बड़ी रकम कैश लगाना उसके बूते से भी बहुत बाहर था।


अगली सुबह दिल्ली के सत्तविक आश्रम में एक खास मेहमान का स्वागत किया जा रहा था। वो खास मेहमान अपने 4 साथियों के साथ सात्त्विक आश्रम से शिरकत करती हुई उनके प्राइवेट मीटिंग चेंबर के ओर पहुंची जहां रुद्रा और उसके सारे भाई बहन उसका इंतजार कर रहे थे।… "आराम से बैठ जाओ नीलू, और खुद को हम में से एक ही समझो।"..


नीलू अपने साथियों को बैठने का इशारा करती… "क्या हुआ यहां भी मेरे कपड़े उतरवाकर गैंग बैंग करवाने का इरादा है क्या युक्तेश्वर।"..


रुद्रा:- हम पता नहीं कर पाए कि तुम लोग ऐसा कौन सा जीवन रक्षक घुट्टी पीकर आए हो, जो पहले लोकेश के साथ थे तब हम पर भारी पर रहे थे, अब गिनती के 4-5 लोग बचे हो फिर भी भारी पर रहे थे।


नीलू:- फिर तो तुम्हे अपस्यु से मिलना चाहिए रुद्रा, उसने लोकेश के 40 लोग को उसी के हथियार से काट दिया था और 40 को कब मौत आ गई थी उन्हें पता भी नहीं चला। तुमसे ज्यादा होमवर्क तो वो करके बैठा है।


रुद्रा:- तभी तो उस लड़के को और करीब से जानने के लिए तुम्हे खास बुलाया है।


नीलू:- वो किसी भी गेम में नहीं हारता क्योंकि उसे विश्वास होता है कि उसके विरोधी क्षमता में उससे 1000 गुना ज्यादा ताकतवर है, और वो अपनी योजना उसी अनुसार बनता है। कमाल की बात जानते हो क्या होता है, जब भिड़ने का वक़्त आता है तो उसके सभी विरोधी किसी फिसड्डी की तरह नजर आतें है। लगता ही नहीं की उनके बीच कोई टक्कर है। एक और बात मै और मेरी टीम यहां है, शायद ये बात वो नहीं जानता होगा लेकिन उसका दिमाग कैलकुलेट कर चुका होगा कि ऐसा भी मोमेंट आ सकता है, और एक अपनी तैयारी उसी हिसाब से करेगा।

रुद्रा:- हम्मम ! फिर तो तुम मेरे किसी काम की नहीं।


नीलू:- मै क्या उसके विरूद्ध तुम्हे कोई काम नहीं आएगा। लोभ छोड़ दो, उसे मारने का ख्याल दिल से निकाल दो। वो तो अच्छा हुआ की उस दिन उसका भाई आईसीयू में था, जिस दिन तुमने अपस्यु के साथ साथ उसकी बहन और होने वाली बीवी की जान खतरे में डाला था। उसका ध्यान कहीं और था वरना वो खुद से कहता.. फक दि प्लांनिंग, और सीधा घुसता तुम्हारे लंका में।


रुद्रा:- इतना बड़ा कलेजा वाला है वो।


नीलू:- कलेजे के साथ दिमाग भी है। वो जनता है किस वक़्त किस आदमी को कहां लगाने से काम हो जाएगा और इसी विश्वास के साथ कहीं भी वो उतपात मचा सकता है।


रुद्रा:- तुम तो उसकी भक्त लग रही हो, लगता है जादू कर दिया है उसने।


नीलू:- सच्चाई बताई है मैंने बाकी कोई मुझ पर जादू कर दे ऐसा संभव नहीं।


कलिका:- अपने भाई की इतनी ज्यादा तारीफ सुनकर को तो मुझे लगता है मै खुशी से झूमने लागू। एक बात बताओ उसने ऐसा क्यों कहा कि डील होने वक़्त मै जितने चाहे उतने लोग ला सकतें है। इसका मतलब तो यही है कि वो अपनी तैयारी एक बटालियन से नहीं बाकी 5 बटालियन से लरने के लिए कर रहा है।


नीलू:- 40 लोगो का बटालियन तो उस 1 को मारने के लिए भेज ही चुकी थी, फिर भी अक्ल नहीं खुला तो एक घटना और सुनो। लोकेश ने हम जैसों की 8 लोगों की टीम बनाई, जिसमें 4 हमारे फाइटर और 4 स्नाइपर थे। और ऐसे 8 लोगो की टीम को 6 अलग अलग जगह भेजे उसे मारने के लिए।


लोकेश जब भी अपने स्क्रीन पर देखता ना, अपस्यु उसे हमेशा अकेला ही नजर आता। नतीजा क्या हुआ उसके सारे लोग एक साथ फेल हो गए। अपस्यु का एक डायलॉग जो उसने हमसे कहा था, मै जब मारने पर आऊंगा तो तुमलोग असहाय खड़े रहकर बस अपनी तादात कम होते हुए देखोगे। एक क्या 10 बटालियन ले जाओ शौक से, तुम्हारी मर्जी है।


रुद्रा:- खैर अब ऐसा लगता है कि वही भगवान है और उसे हराया नहीं जा सकता। सोचा था मिलकर काम करते तो तुम 5 लोगों के हिस्से में भी 2000 करोड़ सबके पास आता, उपर से दिल के अरमान पूरे करने के लिए तो हम है ही। युक्ता ने जिस भिड़ में तुम्हारे कपड़े उतरवाए थे, वैसे ही भिड़ में तुम्हे मंगलसूत्र डालकर इज्जत देता, लेकिन ये भी शायद हो ना पाएगा। साथ में इन चारो के मज़े के लिए एक से बढ़कर एक खूबसूरत तितलियां। खैर तुमसे मिलकर अच्छा लगा।


नीलू:- पैसों की बात पहले करनी चाहिए थी ना, मुझे इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती। अपस्यु को हराना कोई बड़ी बात नहीं है.. अब जारा डील फिक्स हो जाए तो आगे की कहानी कहूं। 2 लाख करोड़ की डील है और तुम 25% के हिस्सेदारी को हटाकर डेढ़ लाख करोड़ तुम्हरा नेट प्रॉफिट। जिसमे लोग और हथियार पर 1000 करोड़ भी खर्च कर दो तो 1 लाख 49 हजार करोड़ का बेनिफिट। मुझे बस 50 हजार करोड़ दे दो हम पाचो के लिए 10 हजार करोड़ की राशि।


कलिका:- यकीन होना चाहिए कि हम जीत रहे है, फिर डील डन समझो।


नीलू:- यकीन क्या जीत चुके समझे.. पहले 25 हजार करोड़ ट्रांसफर करो और जीत की कहानी सुनो।


युक्तेश्वर:- 10हजार करोड़ अभी और बाकी पैसे जितने के बाद।


नीलू:- जुबान तो इतने पर ही खुलेगी और बाकी के पैसे मै वहां डील वाली जगह पर लूंगी। मंजूर हो तो बताओ, वरना जाने दो।


युक्तेश्वर:- अब तो हम परिणय सूत्र में बांधने वाले है, इतना तो विश्वास जाता लो।


नीलू:- पागल कहीं का। मैंने शादी के लिए हां नहीं की है, वैसे भी तुम में इतनी स्टेमना नहीं की मुझे संभाल पाओ। अपने लिए कोई कमसिन कुंवारी ढूंढो और डील करना है या नहीं वो बताओ। ओह हां अच्छा एक बात तो मै बताना ही भुल गई। तुम्हारी गन तुम्हारी गोली और उन दोनों प्रेमियों का सिना। गोली मै ही मारूंगी।


कलिका:- हमारी गन क्यों?


नीलू:- कल को तुम ये ना कहो मैंने उसे नकली गोली मारी थी।


रुद्रा:- हम्मम ! डील मंजूर है। कलिका इसके अकाउंट में 25000 करोड़ जमा करो।


कलिका:- पैसे हमने दे दिए उसके बाद क्या भरोसा है कि ये हमे डबल क्रॉस ना करे, जैसे ये अपस्यु को कर रही।


नीलू:- हम्मम ! ठीक है फिर 49000 हजार करोड़ को पीरियड ट्रांसफर में डालो, 25 दिसंबर 2014, सुबह 10 बजे एग्जैक्ट। 1000 करोड़ मुझे अभी चाहिए कैश काम करने के लिए। अब सुनो योजना। ऊपर जितनी भी बातें मैंने बताई वो सभी सत प्रतिसत सत्य है केवल एक कमजोरी को छोड़कर।


रुद्रा:- क्या ?


लगभग 2 घंटे की बैठक, दिमाग वाले लोग उधर भी बैठे हुए थे और अंत में जब नीलू वहां से निकली सभी भाई बहन मुसकुराते हुए अपनी जीत को अपने आखों से देख रही थी।



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"आह ! बेबी ये क्या कर रहे हो, इतने बेसब्रे ना बनो मुझे मेकअप करने दो। और प्लीज हाथ ब्लाउस के उपर से हटाओ सिलवटें पड़ जाएगी।"..


अचानक ही एक बार फिर ऐमी के हाथ की चूड़ियों की खंखानाहट तेज हो गई। दर्द की हल्की सी आह उसके मुंह से निकल गई और हाथ से उसके लिप्स लाइनर छूटकर नीचे गिर गई।


अपस्यु का हाथ अपने स्तन के ऊपर से हटाने कि कोशिश में उसकी हाथ कि चूड़ियां खनक रही थी और वो खुद मिन्नतें करती अपस्यु से छोड़ने के लिए कह रही थी।… "तुम्हे देखकर होश ही नहीं है, कितनी बार कहा है साड़ी में मत तैयार हुआ करो।"… अपस्यु ब्लाउस के उपर से अपने हाथ की पकड़ थोड़ी ढीली करते हुए कहना लगा।


ऐमी:- बेबी प्लीज छोड़ दो ना, आज रात यहीं रुकी हूं, क्यों इतनी हड़बड़ी मची है।


अपस्यु:- नाह रात को तुम कपड़े चेंज कर लोगी फिर मेरी सारी फैंटेसी खत्म हो जाएगी।


ऐमी:- मतलब तो कपड़े उतारने से ही है ना.. कोई भी कपड़े उतार लेना, अब जाओ भी यहां से वरना तुम्हारा हाथ बहुत कमाल दिखा रहा है, और अभी मेरा एक ध्यान दरवाजे पर ही है। तुम्हारे खानदान का कोई भी आकर दरवाजा खटखटाने लगेगा।


अपस्यु:- हां तो रात को मै आऊंगा जब सब गेस्ट चले जाएंगे। समझी..


ऐमी अपस्यु को खिड़की के ओर धक्के मारती… "हां मै समझ गई, अब जाओ भी।"..


अपस्यु, ऐमी के होंठ से होंठ लगाकर चूमते… "आज तो होश उड़ा रही हो। जल्दी से तैयार होकर नीचे आओ।"


ऐमी:- तुम तैयार होने तो दो फिर ना मै नीचे आऊं।


अपस्यु खिड़की के रास्ते से वापस अपने कमरे में पहुंचा, और जैसे ही पहुंचा कमरे में आरव बैठा हुआ था.… "कमाल के दिन आ गए है, तुम्हे अपनी बीवी से मिलने के लिए पाइप चढ़कर जाना पड़ता है।"..
 
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अपस्यु:- कमीना कहीं का, नजर दिए है मुझ पर। एहसान फरामोश भुल गया तुझे गोवा ट्रिप पर भेजा था। ।


आरव:- हां हमे ट्रिप पर भेजकर पूरे दिल्ली में तहलका भी मचाया था, सब याद है मुझे।


अपस्यु:- तू मेरे साथ बकवास करने आया है?


आरव:- बकवास करने का शौक नहीं है तेरे साथ, बस यूं ही चला आया था इधर। तुझे अच्छा नहीं लगा तो जा रहा हूं।


अपस्यु:- बस कर नौटंकी, अच्छा चल माफ भी कर दे और बता की तेरा मूड काहे ऑफ है।


आरव:- तेरी वजह से ऑफ है, लावणी को लगता है मै उससे प्यार नहीं करता। कहती है एंगेजमेंट के पहले तो मै उसे परेशान किया करता था और जब से एंगाएमेंट हुई है मै उसे परेशान नहीं करता। कुछ ऐसा नहीं करता जो उसे सरप्राइज कर सके, जैसा पहले किया करता था। हर बात में तेरा एग्जाम्पल अपस्यु ने ऐसे चौंका दिया था ऐमी दीदी को, वैसे किया। इंडिया गेट पर अपने प्यार का इजहार किया।


अपस्यु:- भाई गलत भी कहां कह रही है वो। उन्हें हमारा छेड़ना पसंद है, थोड़ा बहुत परेशान करना पसंद है। मानता हूं कि वो मेरा एग्जाम्पल देती है लेकिन प्यार तो उसे आरव की अदाएं और हरकतों से हुआ था ना, फिर वो आरव कहां गुम है।


आरव:- तो क्या मै उसे जिंदगी भर परेशान करता रहूंगा?


अपस्यु, आरव को बिठाते हुए… "लावणी की प्यारी सी मुस्कान दिन भर बनी रहे तो तुझे कैसा लगता है।"..


आरव:- ऐसा लगता है मानो चारो ओर खुशनुमा मौसम हो। ठीक वैसे ही जैसे मै 11 महीने यूरोप में रहता था।


अपस्यु:- हा हा हा हा.. मतलब तेरा वो एक महीना जो मेरे साथ रहता था वो बुरा वक़्त होता था।


आरव:- और नहीं तो क्या? छोड़ ये सब क्या समझना चाह रहा था वो समझा दे जारा।


अपस्यु:- समझा तो दिया कबका, पूरे दिन छोटे छोटे मुस्कान बनाए रखने के लिए थोड़ा बहुत छेड़छाड़ जरूरी है। जैसे पहले करता था वैसे ही। हां लेकिन ध्यान रखना, ऐसे सितुएशन में मत डाल देना की शर्मिंदगी महसूस हो दोनो को।


आरव:- समझ गया गुरु जी। मै चला लाइन मारने अपनी बीवी को। जबतक जियूंगा उसे लाइन मारता रहूंगा।


अपस्यु:- शाबाश ये हुई ना बात। चल इसी बात कर 2 पेग लगाया जाए।


आरव:- मां है, मासी है, तू जूते मत खिलवा देना।


अपस्यु:- बस 2 पेग की तो बात कर रहा हूं मै।


आरव:- कमीना पिछले हफ्ते 2 पेग बोलकर 6 पेग पिला दिया था। मां ने कितनी गालियां सुनाई थी तुझे पता भी है। खुद तो भाग गया फ्लैट और मुझे यहां डांट खिलवा दी। मेरे सर पर हाथ रखकर बोल कोई जिद नहीं करेगा कोई इमोशनल नाटक नहीं करेगा।


अपस्यु:- बेवड़ा कहीं का, भुल गया वो दिन जब हमेशा टल्ली रहता था, आज भाई को ऐटिट्यूड दिखा रहा है।


आरव:- मतलब तुझे अच्छा लगेगा मै पी कर लड़खड़ाता रहूं घर के लोगों के सामने।


अपस्यु:- नाह ये तो कतई अच्छा नहीं लगेगा।


आरव:- फिर मुझे मेरे हिसाब से पीने से और तू अपने हिसाब से पी। रुक पुरा बोलने दे। मैं थोड़ा सा नशा आने तक पियूंगा, जिसमें मूड रोमांटिक बाना रहे। अब खुश।


अपस्यु:- आह ये हुई ना कलेजे को ठंडक पहुंचाने वाली बात।


दोनो भाई बैठ गए बैठक लगाने तभी दरवाजे पर दस्तक हुई… "कौन हैं"..


स्वास्तिका:- मै हूं, दरवाजा खोल।


आरव ने दरवाजा खोला और झट से बंद कर लिया।… "नॉटी बड़ी प्यारी लग रही है।"…


स्वास्तिका, सिगरेट निकालती…. "यार मां ने एक मिनट के लिए अकेले नहीं छोड़ा। दे एक पेग मुझे भी दे।"..


अपस्यु:- विशकी और स्कॉच है नॉटी, क्या लेगी।


स्वास्तिका:- हद है मेरे लिए वोदका नहीं रख सकते थे। अच्छा छोड़ विस्की ही पिला दे, थोड़ा लाइट पेग बनना।


2 के बदले 3 हो गए और तीनों बैठकर पीने लगे। स्वास्तिका और आरव 4 लाइट पेग के बाद रुक गए, अपस्यु 2 और हार्ड पेग लेने के बाद वहां से उठा। "अब महफिल जवान हुई है आग लगा देंगे।"… अपस्यु उठते ही कहा।


स्वास्तिका और आरव दोनो एक साथ… "फायर बिग्रेड की गाड़ी हॉल में ही घूम रही है, ये ध्यान रखना।"..


तीनों एक साथ किसी पुराने दोस्त की तरह बाहर निकले। तीनों को साथ कमरे से निकालते देखकर ऐमी समझ गई कि अंदर तीनों कौन सा गुल खिलाकर आ रहे है। खैर थोड़ा बहुत एंजॉयमेंट तो चलता है बस यही सोचकर वो चुप रह गई।


कुछ ही देर में लोग आने शुरू हो गए। दीपेश और उसकी फैमिली भी अाई थी और साथ में उसके कुछ दोस्त भी थे। दीपेश का खास दोस्त निर्मल दीपेश के कान में कहने लगा… "यार तेरे ससुराल में हरियाली बहुत होती है। जहां देखो दिल को ठंडक देने वाला एहसास है।"..


दीपेश:- ज्यादा घुर मत वरना यहां के लोगो ने अपने हॉल के दीवार को ज्यादातर वो छोटे छोटे रॉड से सजाया है, ना विश्वास हो तो नजर घुमा कर देख ले चारो ओर।


निर्मल:- जल्लादों के लेटेस्ट हथियार के दर्शन मत करवा, आज तक कभी पड़ी तो नहीं, लेकिन जिसने भी अपना अनुभव साझा किया है, रोंगटे खड़े करने वाले थे।


इधर सारी लड़कियां एक साथ गोल सर्किल बनाकर बीच में स्वास्तिका को घेरे उससे बात कर रही थी, तभी छेड़ छाड़ के इरादे से वहां आरव पहुंच गया। ऊपर देखते हुए उसने अपना हाथ बढ़ाकर लावणी के कमर तक ले गया और उसे चीकोटी काटने लगा…


आरव जब अपने हाथ आगे बढ़ा रहा था तब ऐमी ने लावणी को पीछे खींच लिया और आरव की हरकत देखने कहने लगी। इधर आरव ने चिकोटि काटी और उधर साची के मुंह से आऊच का तेज साउंड निकला और लावणी आरव को घुर रही थी।


साची:- अरे यार मै साची हूं, उधर देख वहां लावणी खड़ी है।


कुंजल:- क्या हुआ साची?


साची:- मेरे कमर में इसने चिकोती काट ली।


इतने में आरव की नजर, घूरती हुई लावणी पर गई… वो अपना सर पीटते वहां से निकल गया। उसे जाते देख वहां मौजूद सभी लड़कियां हंसने लगी। सभी लावणी को छेड़ते हुए पूछने लगी… "क्या जादू कर दिया को आरव बर्दास्त नहीं कर पा रहा। ऐसे भिड़ में छेड़ छाड़।"


लावणी:- हां मुझे भी अच्छा ही लगता अगर मुझे वो चिकोति काटता लेकिन ऐमी दीदी ने बेचारे को मिस कॉल लगवा दिया, अब पूरे फंक्शन में वो शरमाया शरमाया घूमेगा।


कुंजल:- मतलब इस साजिश कि राचयता बड़ी भाभी है।


ऐमी:- आखिर वो भाई किसका है, अपस्यु ने ही सीखा कर भेजा होगा जाकर तंग कर लावणी को।


साची:- लेकिन क्यों ?..


ऐमी:- शायद आज रात लावणी के पास रुकने के लिए रोमांटिक मोमेंट बाना रहा हो। अब दिल की प्यास बीवी ही तो बुझाएगी।


लावणी:- हद है मै जा रही हूं..


साची:- अभी से ही जा रही है.. वन टाइम शो होगा उसके लिए तू स्वास्तिका का एंगेजमेंट क्यों छोड़कर जा रही, बहुत वक़्त मिलेगा।


एक बार फिर से निशाने पर लावणी, बेचारी शर्मा भी रही थी और लज्जा भी। कहे तो क्या कहे और करे तो क्या करे। ये सब हरकत आरव की वजह से हो रहा था और अंदर ही अंदर अब बस वो अकेले में उससे मिलना चाहती थी।


सभी लोगों कि रैगिंग से वो दूर हटकर अपनी मां के पास आकर बैठ गई। वहीं स्वास्तिका ऐमी को आंखें दिखती हुई कहने लगी… "बहुत गलत किया तुम लोगो ने। बेचारी कुछ नहीं बोल पाती इसका मतलब ये नहीं कि तुमलोग उसे परेशान करती रहो।"


ऐमी, अनजान बनती… "मैंने तो बस कैसुआली मज़ाक किया था।"..


साची:- अच्छा, ऐमी को अपनी जगह से हटाकर पुरा सीन क्रिएट कर दी और देखो कैसे भोली बन रही है। इसकी सजा ये है कि ना तो ये अपस्यु को देखेगी और ना ही पूरे फंक्शन में उसके साथ रहेगी।


स्वास्तिका:- जब इनका कैजुअल रिलेशन चल रहा था तब भी ये ऐसा ही कुछ मेंटेन किए हुए थे। इसके लिए कौन सी बड़ी बात होगी। दोनो बस 5 सेकंड का नजर मिलाएंगे और सारी कहानी बयां।


कुंजल:- दीदी आप की कुछ ढंग कि सजा बता दो, तब आएगा मज़ा।


स्वास्तिका:- जाकर इसका ड्रेस चेंज करवा दे फिर देख मज़ा।


ऐमी:- नो नो नो… ये नहीं, बाकी कुछ भी बोलो वो मै कर लूंगी, लेकिन ये नहीं।


सबने पकड़ कार उसे रूम में लेकर आयी और उसका ड्रेस जबरदस्ती चेंज करवा दिया। ना साड़ी ना लहंगा बल्कि पेरिस में को लाल रंग की परिधान ऐमी ने पहनी थी वहीं जबरदस्ती पहनकर बाहर ले आयी।


ऐमी की एक्साइटमेंट पहले से हाई थी। बड़ा ही खुशनुमा फीलिंग था जब वो सोचती की अपस्यु पूरे फंक्शन में उसके आस पास ही रहेगा और मौका देखकर जल्दी से हाथ इधर उधर लगाएगा। फिर उसका आखें दिखाना और अपस्यु का मुस्कुराकर उसपर प्रतिक्रिया देना। लेकिन अब लगता था उसे है पूरे फंक्शन मंडरा मंडरा कर अपस्यु को रिझाना होगा। और अपस्यु का चेहरा उतारना लाजमी था, क्योंकि बहुत कम ही ऐसे मौके होते थे जब अपस्यु ऐमी को कुछ अपने हिसाब से करने कहता था।


"कामिनी कहीं की, देखना नॉटी इसका बदला मै लेकर रहूंगी।"… गुस्सा में वहां से निकल गई ऐमी। उसके जाते ही साची और कुंजल, स्वास्तिका से ड्रेस का लॉजिक पूछने लगी।


स्वास्तिका:- कुछ नहीं अपस्यु ऐमी को साड़ी में देखकर लट्टू रहता है। मैंने ऐमी से कहा था कि पेरिस में जो लाला ड्रेस पहनी थी, एग्जैक्टली वैसी ही तैयार होना, लेकिन कमिनी पहनी साड़ी ही। मैंने भी बदला के लिया…


इधर ऐमी जब बाहर निकली तब उसकी नजर अपस्यु को ही ढूंढ रही थी। और जब अपस्यु को उसने देखा फिर उसे भी समझ में आ गया कि पारा गरम है। बार काउंटर पर बैठकर 2 पेग पी गया जबकि घर के सभी लोग मौजूद थे।


ऐमी तुरंत उसके पास पहुंची.... "सुनो ना बेबी।"


अपस्यु:- तुम बहुत ही खूबसूरत दिख रही हो ऐमी..


इतना कहकर अपस्यु बार काउंटर से उठ गया और सीधा दीपेश के पास पहुंच गया। वो दीपेश और निर्मल बातें करने लगा, और ऐमी उसके पास खड़ी फीकी स्माइल देने लगी और बीच बीच में वो भी उनसे बात कर रही थी।


"देख उधर क्या कही थी। ऐमी का फिका चेहरा और अपस्यु उसे नजरंदाज करके सबसे बात कर रहा है।".. स्वास्तिका साची और कुंजल का ध्यान उस ओर खींचती कहने लगी।


अपस्यु उनसे थोड़ी देर वहां बात किया फिर आकर मासी के पास बैठ गया। ऐमी भी बैठी, और यहां भी वही हो रहा था। इधर दोनो की हालात देखकर ये लोग मज़े ले रहे थे। ऐमी समझ गई आज का ये फंक्शन बेकार ही गया। वो मुंह लटकाए लावणी के पास बैठी… "सॉरी ।"


लावणी:- किस बात के लिए दीदी


ऐमी:- तुम्हे और आरव को छेड़ने के लिए। लेकिन तुम्हे भी हमारी बात के कारन आरव से ऐसे नाराजगी नहीं दिखानी चाहिए। वो तो उसी को तंग करने आया था जिसे कर सकता है, हम तब भी तुमसे उतना ही मज़ाक करते। ये छोटे नोक झोंक तो जायके हैं, इसे मुंह लटकाकर बर्बाद ना कर और वो चीकोती काटने में मिस हो गया, तो क्या तू उसे नहीं छेड़ सकती।


लावणी:- हां छेड़ तो सकती हूं।


ऐमी:- पागल ये झिझक छोड़ और हक से छेड़, ऐसा की उसे फील हो किसी ने देख लिया होता तो क्या होता। अपना ही माल है जैसे मर्जी वैसे छेड़ती रहना।


लावणी हंसती हुई वहां से उठी। आरव नंदनी के पास खड़ा होकर कुछ मेहमानों से बात कर रहा था उसी वक़्त लावणी वहां पहुंच गई… "मां 2 घंटे के लिए आप अपना बेटा उधार देंगी, इतनी मेहनत से इसके लिए तैयार होकर आयी हूं, पूरी दुनिया ने देख ली, केवल आरव को छोड़कर।"


नंदनी, हंसती हुई… "2 घंटा क्यों, पूरी उम्र तो तुम्हे ही साथ रहना है। क्यों रे लड़के, तू लावणी के साथ क्यों नहीं है और उसे लोगो से क्यों नहीं मिलवा रहा।


नंदनी आरव के ओर मुड़ी और लावणी आरव के ठीक पास में खड़ी थी। वो जैसे ही कुछ बोलने को हुए उससे पहले ही उसकी आह निकल गई। बड़ी सफाई से लावणी ने अपने हाथ का पीन को उसके पीछे भोंक दी। बेचारा तिलमिला गय।
 
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