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Incest पहाडी मौसम

Aditya2575

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rohnny4545 भाई
मैं आपकी कहानी तब से पढ़ रहा हूँ जब आप अपनी जीवन की पहली कहानी "एक अधूरी प्यास" Xossip पर लिख रहे थे। मैं भी बाकी लोगो की तरह साइलेंट रीडर में से एक था। आप यकीन मानिए आपकी कहानी साइलेंट रीडर बहुत भारी मात्रा में पढ़ते हैं क्योंकि आपकी कहानी में वो सब प्राप्त होता हैं जो रीडर को चाइए और खास बात की आप अपनी कहानी को हर हाल में पूरा करते है। आप उन लेखक में से एक है, जिन्होंने अपनी कहानी के माध्यम से इस फोरम को और भी ज्यादा प्रचलित किया है। आपकी कहानी में रफ्तार थोड़ी धीरे हुई इसके पीछे भी कोई विशेष कारण होगी। आप अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दे और अपनी कहानी से सबको मनोरंजन करते रहे। मैं उन सभी साइलेंट रीडर की तरफ से आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ।
 
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sunoanuj

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रात भर जमकर चुदाई करने के बाद सुबह-सुबह भी सूरज अपनी मां की जवानी का मजा ले चुका था जिसमें उसकी मां ने उसका पूरा सहयोग दी थी पहले तो सूरज को ऐसा ही लग रहा था कि जैसे उसकी मां का मन बदल गया हो क्योंकि वह इस तरह की बात ही कर रही थी सीधे-सीधे यह कह रही थी कि अब से आगे यह सब नहीं होगा जो कुछ भी होगा इसमें दोनों की गलती है सूरज मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था वह जानता था कि अगर वह आज वह अपनी मां की हां में हां मिला दिया तो दोबारा उसे ऐसा सुख कभी भी मिलने वाला नहीं है इसलिए वह अपनी हरकतों से एक बार फिर से अपनी मां के बदन में मदहोशी की लहर भर दिया था जिसके चलते सूरज की मां आंगन में दरवाजा पकड़कर जमकर चुदाई का मजा लूट रही थी,,, ‌।



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सुबह-सुबह कोई काम नहीं था तो खरबूजे का जिक्र आते ही सूरज को ख्याल आ गया की मुखिया जी खरबूजे के खेत में उसे कम सौंपते थे और वह अपनी मां की चुदाई करने के बाद खरबूजे के खेत की तरफ ही चला जा रहा था वह बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि जिंदगी में वह बहुत कुछ हासिल कर चुका था। औरतों के मामले में जिसको चाहता था उसको बिस्तर पर लाकर जमकर उसकी चुदाई करता था। जिसमें अब उसकी मां भी शामिल हो चुकी थी अपनी मां को हम बिस्तर बनाने का गर्व उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था,, अपनी मां के तरफ वह पहले से ही आकर्षित था लेकिन वह यह नहीं जानता था कि इतनी जल्दी उसकी मां घुटने टेक देगी लेकिन जो कुछ भी हुआ था उसमें मां बेटे दोनों को फायदा था सूरज की भी इच्छा पूरी हो रही थी और उसकी मां की भी जरूरत पूरी हो रही थी। अपने मन में ढेर सारी बातें सोचता हुआ सूरज खरबूजे के खेत पर आ चुका था,,, बरसात के कारण खरबूजे के खेत में भी पानी भरा हुआ था खरबुजे एकदम बड़े हो चुके थे लेकिन अभी पके नहीं थे बस पकने की तैयारी में थे और यही सही मौका था इन्हें तोड़कर बाजार ले जाने का क्योंकि अगर 2 दिन की भी देरी हो जाए तो खरबूजा अपने आप पक जाता और धीरे-धीरे खराब होने लगता, सूरज धीरे-धीरे खरबूजे को तोड़कर एक तरफ रख रहा था। खरबूजे की खुशबू पूरे खेत में फैली हुई थी। अभी वह खरबूजा तोड ही रहा था कि तभी उसे पायल की आवाज सुनाई दी और पीछे मुड़कर देखा तो नीलू चली आ रही थी,,, नीलू को देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे। वह नीलू को देखता हुआ खड़ा हो गया,,, इतने सुबह-सुबह नीलू के दर्शन करके वह काफी खुश नजर आ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे नीलू करीब आ रही थी उसके चेहरे पर फैली हुई चिंता और गुस्से की लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी सूरज को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह एक टक उसे ही देख रहा था।




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तभी वह सूरज के एकदम करीब आ गई और बिना कुछ बोले उसके सीने पर दोनों हाथ से धक्का देने लगी और सूरज अपने आप को संभाल नहीं पाया और एक खरबुजे के ऊपर गिर गया और वह खरबुजा फट गया। उसे नीलू का व्यवहार को समझ में नहीं आ रहा था फिर भी खरबूजे का नुकसान होता हुआ देखकर वह बोला।

अरे यह क्या हो गया है तुमको देख रही हो खरबूजा खराब हो गया तुम्हारे पिताजी देखेंगे तो बिगड़ेंगे।

हरामजादे तुझे खरबूजे की पड़ी है और यहां तो मेरे घर में ही रासलीला खेल रहा है चारों तरफ से हमारा ही नुकसान कर रहा है।
(नीलू की बात सुनकर सूरज को इतना तो समझ में आ गया था कि नीलू को जरूर कुछ ना कुछ ऐसा मालूम हुआ है जो उसे नहीं मालूम होना चाहिए था तभी वह इतना नाराज है लेकिन फिर भी अपने आप को शांत रखते हुए धीरे से उठकर इस जगह पर बैठते हुए सूरज बोला)

अरे आखिर हुआ क्या है यह तो बताओ बस आते ही मारना शुरू कर दी।


हरामजादे मादरचोद तुझे नहीं मालूम कि क्या हुआ है,,,?

अरे मैं सच कह रहा हूं मुझे कुछ भी नहीं मालूम तुम बताओगी तब ना पता चलेगा।





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मैं तुझे कितना अच्छा लड़का समझती थी तुझे मैं पसंद करती थी तेरे साथ मैंने सब कुछ की जो मुझे नहीं करना चाहिए था क्योंकि मैं तुझे पसंद करती हूं लेकिन तू है कि मेरी मां को,,,,(इतना कहकर नीलू चुप हो गई और एकदम परेशान नजर आने लगी सूरज को समझते देर नहीं लगी कि आखिर मामला क्या है लेकिन फिर भी वह अनजान बनने का नाटक करते हुए बोला)

क्या हुआ मालकिन को,,,!

मालकिन को कुछ भी नहीं हुआ मादरचोद,,,,(नीलू के मुंह से पहली बार की गाली सुन रहा था और उसे नीलू के मुंह से इस तरह की गालियां अच्छी लग रही थी,,, मुस्कुराता हुआ सूरज बोला)

तू इतना गुस्सा क्यों हो,,,?

तेरी वजह से सिर्फ तेरी वजह से मैंने सब कुछ अपनी आंखों से देख ली जो तू मेरी मां के साथ कर रहा था,,,,।

ओहहहहह यह बात है,,,,।(सूरज एकदम सहज होते हुए मुस्कुरा कर बोला और धीरे से अपनी जगह पर खड़ा हो गया यह देखकर नीलू और भी ज्यादा क्रोधित हो गई और वह बोली)


तुझे यह सब एकदम आम बात लगती है कितनी आराम से कह रहा है यह बात है,,,।

हां तो नीलू यह आम बात ही है औरत होती ही है चुदवाने के लिए,,, इसलिए मैंने तुम्हारी मां को भी चोद दिया,,, (सूरज फिर से एकदम शांत लहजे में बोला जिसकी वजह से नीलू का गुस्सा साथी हुए आसमान पर पहुंच गया और वह चिल्ला कर बोली)




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कितनी आसानी से कह रहा है मादरचोद तुझे पता है कि तेरा क्या हसर होगा अगर यह बात पिताजी को पता चल गई तो।


पिताजी को पता चल गई तो क्या हो जाएगा शर्मिंदा हो जाएंगे उन्हें किस बात का एहसास होगा कि वह अपनी बीवी के साथ कुछ कर नहीं सकते इसलिए उनकी बीवी दूसरों से चुदवा रही है।

हरामजादे कुत्ते हरामी फिर तो यही अपनी मां के बारे में भी सोचता होगा हरामजादे मैं तुझे नहीं छोडूंगी,,,, (सूरज की बात सुनकर एकदम से गुस्सा होते हुए नीलू दम दम उसके सीने पर मुक्का मारने लगी लेकिन सूरज को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह मुस्कुरा रहा था सूरज जितना मुस्कुरा रहा था नीलू को उतना ज्यादा गुस्सा आ रहा था,,, वह एकदम से रोने लगी और रोते-रोते नीचे बैठ गई उसे रोता हुआ देखकर सूरज एकदम से परेशान हो गया और वह भी उसके पास ही बैठ गया और बोला।)

तुम रो क्यों रही हो नीलू इसमें रोने वाली कौन सी बात है यह तो दुनिया की रित है यह तो सभी घरों में होता है।




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मैं मां को कितनी अच्छी औरत समझते थे भले ही वहां पर गुस्सा करती थी लेकिन मैं मां की बहुत इज्जत करती थी मेरी बहन भी मन की बहुत इज्जत करती है जब उसे पता चलेगा कि उसकी मां तुम्हारे साथ चुदवाती है अपनी जवानी की प्यास बुझाती है गांव की मुखिया की बीवी होकर अपने पति को धोखा देती है तो सोचो उसके दिल पर क्या गुजरेगी और अगर यही बात गांव में किसी को पता चल गया तब तो हम लोगों के इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। (ऐसा कहकर जोर-जोर से रोने लगी वैसे भी यहां कोई उसे देखने वाला नहीं था क्योंकि दूर-दूर तक मुखिया का ही खेत था और चारों तरफ झाड़ियां की हुई थी जिस किसी के देखे जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता था,,,,,, कुछ देर तक सूरज नीलू को इसी तरह से रोने दिया और फिर धीरे से बोला।)



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नीलू मालकिन मां ,बीवी बहन ओर मालकिन से पहले एक औरत है। एक औरत होने के नाते तुम्हें भी एक औरत के बारे में सोचना चाहिए था मैं जानता हूं कि अपनी मां को उसे अवस्था में देखकर तुम्हारी जगह कोई भी होता तो वह गुस्से से आग बबूला हो जाता लेकिन फिर भी तुमने आज तक अपने आप को संभाल कर रखी यही बहुत बड़ी बात है।

लेकिन तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था सूरज तुम नहीं जानते मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं।
(नीलू के मुंह से अपने प्यार का इजहार सुनकर सूरज गदगद हुए जा रहा था वह कभी सोचा भी नहीं था कि नीलू उससे प्यार करने लगेगी क्योंकि उन दोनों के बीच जो कुछ भी हो रहा था वह सिर्फ एक वासना का खेल था लेकिन नीलू के इजहार से सूरज को एहसास होने लगा था कि नीलू सच में उससे प्यार करती है नीलू की बात सुनकर सूरज के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे,,,, और नीलू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) भले ही हम दोनों का प्यार जिस्मानी तोर से शुरू हुआ लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम मेरे घर में ही मेरी मां के साथ इतना गंदा काम करोगे।

लेकिन इसके लिए भी तुम्हारी मां ने मुझे मजबूर किया था , नीलु,,,,! (कुछ सोचने के बाद सूरज धीरे से बोला)




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मां ने मजबूर किया था,,,, तुम झूठ बोल रहे हो।

तो कौन सच कह रहा है कभी अपनी मां से पूछी हो नहीं तो तुमसे सच कह रहा हूं लेकिन क्या तुम्हारी मां बोल पाएगी नहीं बोल पाएगी तुमने सिर्फ एक मां के तौर पर मालकिन को देख रही हो एक पति के पत्नी के रूप में उसे देख रही है लेकिन एक औरत का रूप तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है औरत की जरूरत क्या होती है एक औरत होने के बावजूद भी तुम समझ नहीं पा रही हो बल्कि खुद अपनी जरूरत तुम मुझसे पूरी कर रही थी। (सूरज की बात सुनकर नीलू सूरज की तरफ देखने लगी तो सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हो बोला,,,) तुम अपने पिताजी की हालत तो अच्छी रही हो क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हारे पिताजी तुम्हारी मां को शारीरिक तौर पर संतुष्ट कर पाते होंगे,,,, तुम्हारी मां अभी भी पूरी तरह से जवान है गठीला बदन है ऐसे में उन्हें भी एक मर्द की जरूरत पड़ती है इस बात को कैसे तुम भूल जाती हो,,,,।

एसी भी क्या जरूरत की अपने पति को धोखा देना पड़े। तुम नहीं जानते सूरज अगर इस बारे में पिताजी को पता चल गया तो उनका दिल टूट जाएगा भरोसा टूट जाएगा क्योंकि बरसों से उन्होंने नाम कमाया है इज्जत कमाई है।




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तुम खामखा चिंता करती हो ऐसा कुछ भी नहीं है मालिक की इज्जत बनी रहेगी मैं भला किसी को बताने वाला थोड़ी ना हूं क्योंकि तुम्हारे घर से ही तो हम लोग कभी खर्चा पानी चलता है। और जरा तुम ही सोचो नीलू,,, क्या औरत को अपने लिए नहीं जीना चाहिए तुम्हारी मां दिन भर इधर-उधर दौड़कर खेत का काम घर का काम मजदूरों को संभालना फसल को शहर में ले जाकर बिचवाना यह सब किसके लिए करती है तुम लोगों के लिए ताकि तुम लोगों को किसी बात की कमी ना हो और इज्जत बनी की बनी रहे वरना अगर मैं सच कह रहा हूं मालकिन यह सब काम देखना छोड़ दे तो तुम्हारे घर पर भी कोई पूछने वाला नहीं होगा इज्जत की तो बात जाने दो कोई एक पैसे की भी इज्जत नहीं करेगा तुम सबकी यह तो तुम्हारी मां है कि उसकी वजह से पूरा गांव क्या अगल-बगल के 20 30 गांव मुखिया जी को जानते हैं पहचानते हैं।
(सूरज पूरी कोशिश कर रहा था नीलू को समझने की सूरज का बड़प्पन इसी बात से नजर आ रहा था कि वह मुखिया की बीवी की इज्जत पर बिल्कुल भी दाग लगे नहीं देना चाहता था वह किसी भी तरह से मुखिया की बीवी का बचाव कर रहा था और वह भी उसकी खुद की बेटी से सूरज की बात सुनकर नीलू बोली)


मां ने ऐसा क्यों किया उन्हें तो ऐसा नहीं करना चाहिए।

इसमें तुम्हारी मां की गलती बिल्कुल भी नहीं है एक सामान्य औरत की तरह तुम्हारी मां भी बहक गई थी जैसा कि तुम बहक गई थी।

बहक गई थी मेरी तरह मैं कुछ समझी नहीं ,,,,,।

याद है तुमने मुझे कब देखी थी।
(सूरज की बात सुनकर नीलू को समझ नहीं पा रही थी वह सावड़िया नजरों से सूरज की तरफ ही देख रही थी सूरज उसकी आंखों में देखकर समझ गया था कि उसे याद नहीं है इसलिए वह उसे याद कराते हुए बोला,,)

याद है तुम्हें आम का बगीचा जहां पर मैं पेशाब कर रहा था और तुम चोरी छुपे मुझे देख रही थी और तुमने मेरा मोटा तगड़ा लंबा लंड देखकर ही मेरे साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने का फैसला की थी,,, (सूरज की बात सुनते ही नीलू को सब कुछ याद आ गया था और उसके चेहरे पर शर्म की लाली छाने लगी थी और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और तुम्हारी मां के साथ भी वही हुआ जो तुम्हारे साथ हुआ खेत में काम करते समय जब मुझे बड़ी जरूरत है पेशाब लगी थी तो मैं ट्यूबवेल के पीछे चला गया था पेशाब करने के लिए लेकिन न जाने कहां से तुम्हारी मां ठीक मेरे सामने झाड़ी के पास आ गई थी वह भी पेशाब करने के लिए आई थी वह साड़ी कमर तक उठाए बैठने वाली थी कि तभी उनके ठीक सामने में पेशाब कर रहा था और पेशाब करने की आवाज उनके कानों में पड़ी थी उनकी नजर मेरे पर पड़ गई और उन्होंने मुझे पेशाब करते हुए देख लिया मैं तो एकदम घबरा गया था लेकिन तुम्हारी मां की नजर सीधा मेरे लंड पर पड़ी थी जो कि उसे समय न जाने क्यों एकदम खड़ा था,,, अपने सामने मालकिन को देखकर मैं तुमसे घबरा गया था मैं वहां से जाता हूं इससे पहले तुम्हारी मां वहां से चली गई मुझे लगा कि मुझे मालकिन डांटेगी, लेकिन उसे समय ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जब शाम ढलने लगी और बाकी के मजदूर घर जाने लगे तो मैं भी उनके साथ घर की तरफ निकलने को हुआ लेकिन मालकिन मुझे रोक ली मैं एकदम से घबरा गया मुझे लगा के वही बात को लेकर मालकिन मुझे जरूर कुछ ना कुछ कहेंगी।

(सूरज की बात को नीलू बड़े ध्यान से सुन रही थी वह नहीं जानती थी कि सूरज बनी बनाई बात बता रहा था ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था वह जानबूझकर नमक मिर्च लगाकर बनी बनाई बात को नीलू के सामने परोस रहा था ताकि नीलू एक औरत के मन को अच्छी तरह से समझ सके औरत की जरूरत को समझ सके तभी वह अपनी मां को सहज रूप से ले सकेगी वरना अपनी मां के प्रति उसके मन में नफरत भर जाएगी सूरज की बात सुनकर नीलू धीरे-से बोली,,,)

क्या हुआ इसके बाद,,,,? (नीलू की आंखों में उत्सुकता दिखाई दे रही थी नीलू जानना चाहते थे कि आगे ऐसा क्या हुआ जो उसकी मां अपने ही नौकर के साथ हम बिस्तर होने पर मजबूर हो गई, यह ख्याल नीलू के मन में पहली बार आया था कि सूरज एक नौकर ही था, वरना अब तक वह सूरज को एक नौकर की हैसियत से कभी नहीं देखी थी लेकिन जब बात अपनी मां पर आ गई तो उसे एहसास होने लगा कि उसकी मां तो गांव की मुखिया की बीवी है बड़े घर की औरत है और ऐसे में उसका एक नौकर के साथ खेत में काम करने वाले लड़के के साथ शारीरिक संबंध यह बड़े शर्म की बात है जबकि वह खुद सूरज के साथ शारिरिक संबंध बना चुकी थी लेकिन वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज उसका हम उम्र ही था उसका और उसे सूरज के बीच लगाव होना स्वाभाविक था, लेकिन उसकी मां एक उम्र दराज औरत थी जिसे अपनी भावनाओं पर काबू होना जरूरी था । समाज में गांव में एक इज्जत थी एक उच्च पद था जिसकी गरिमा बनाए रखना उसका फर्ज था। नीलू की बात और उसकी उत्सुकता देखकर सूरज बोला,,,,)

तुम्हारी मां मुझे इशारे से ट्यबवेल की झोपड़ी के अंदर बुलाई।

वहां कोई और भी था।

नहीं,,, वहां हम दोनों किसी और कोई नहीं था सब लोग जा चुके थे और अंधेरा हो रहा था मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं क्योंकि मालकिन से दूसरी ही मुलाकात थी मालकिन का गुस्सा मैं जानता था क्योंकि लोग उनके गुस्से के बारे में बात करते थे इसलिए मैं घबरा रहा था लेकिन जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा हुआ मेरा हाथ पकड़ कर झोपड़ी के अंदर ले गई और बिना कुछ सोचे समझे सीधा सवाल दाग दी।

क्या बोली मां,,,।

वह सीधे बोली अपना पजामा खोल।

क्या,,,?

हां मालकिन मुझे यही बोली पहले तो मुझे लगा कि शायद मेरे कान बज रहे हैं लेकिन फिर वह दोबारा मुझे पजामा खोलने के लिए बोली मैं घबरा गया था मैं मालकिन के सामने हाथ जोड़कर बोला।

मुझे माफ कर दो मालकिन मुझे जाने दो मुझे नहीं मालूम था कि तुम वहां खड़ी हो वरना मैं वहां कभी जाता ही नहीं।


फिर मा ने क्या कहा,,,?

फिर क्या मालकिन पुरी मैं तुझे डांट नहीं रही हूं कुछ बोलेगी भी नहीं लेकिन अगर तू मेरी बात नहीं मानेगा तो समझ ले तेरा जीना हराम हो जाएगा मालकिन की बात सुनकर मैं एकदम से घबरा गया था वह बार-बार मुझे पजामा उतारने के लिए कह रही थी मेरे पास उनकी बात करने किसी और कोई रास्ता नहीं था इसलिए मैं मजबूर होकर अपने पजामा को खींचकर घुटनों तक कर दिया।

फिर,,,(अपने सूखने हुए गले को अपने थूक से गिला करने की कोशिश करते हुए नीलू बोली)


फिर क्या था मालकिन की तो जैसे आंखें फटी गई थी वह मेरे लंड की तरफ आश्चर्य से देख रही थी उसे समय तो मेरा खड़ा भी नहीं था बस लटक रहा था लेकिन खड़ा होने के बावजूद भी इतना भयानक लग रहा था की मालकिन को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था उनका मुंह खुला का खुला रह गया था। मुझे शर्म आ रही थी मालकिन की नजर में एक अजीब सी खिंचाव था मालकिन गहरी गहरी सांस ले रही थी और सच बताओ नीलू उसे समय जब मालकिन गहरी सांस ले रही थी उनके साड़ी का पल्लू उनके कंधे से नीचे गिर गया था और उनकी भरी हुई छाती एकदम से मेरी आंखों के सामने थी जो ऊपर नीचे हो रही थी और ब्लाउज के ऊपर का बटन भी खुला हुआ था पल भर के लिए मुझे ना जाने क्यों मालकिन के प्रति अजीब सा लगने लगा।


फिर क्या हुआ,,,,?

फिर मैं मालकिन से बोला कि अब मैं पैजामा ऊपर कर लूं तो वह बोली नहीं अभी रहने दे मुझे जी भर कर देख लेने दे क्योंकि मैं आज तक जिंदगी में ऐसा लंड नहीं देखी,,,,।

क्या मा ने ऐसा कहा,,,?

बिल्कुल नीलू मैं हैरान था हैरान इस बात पर था की मालकिन कह रही थी कि मैं आज तक ऐसा लंड कभी नहीं देखी जब की वह तो तुम दो बच्चों की मां थी चुदाई का सुख प्राप्त कर चुकी थी मलिक के साथ शारीरिक संबंध बन चुकी थी फिर भी वह ऐसा क्यों कह रही है मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि जहां तक तब मुझे ऐसा ही लगता था कि जैसा मेरा है वैसा सभी लड़कों का होता होगा लेकिन मालकिन की बात सुनकर में हैरान हो गया था और इसीलिए मैं मालकिन से पूछ बेठा।

यह क्या कह रही हो मालकीन मालिक का भी तो ऐसा ही होगा,,,,,।

यह क्या कह रहे हो सूरज मलिक का अगर ऐसा होता तो क्या मैं तुम्हारा इस तरह से हैरानी के साथ देखती।

क्या मालकिन ने मेरा मतलब है कि मा ने ऐसा कहीं।

मेरे मुंह से निकला एक-एक शब्द सच है मैं झूठ नहीं कह रहा हूं मालकिन ने ऐसा ही कही और उस दिन मालकिन की बात सुनकर मुझे पता चला कि सभी मर्दों का एक जैसा नहीं होता अलग-अलग ही होता है मुझे मालकिन की बात में सच्चाई नजर आ रही थी मैं उनसे दोबारा कुछ पूछता इससे पहले ही मालकिन हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को पकड़ ली,,,,,।

क्या,,,,,? मा ने ऐसा की,,, लेकिन क्यों,,,?

यह तो मैं नहीं जानता लेकिन मालकिन की हरकत में पल भर में ही मेरे बेजान पड़े लंड में जान भर दी और मेरा लंड खड़ा होने लगा मैं हैरानी से अपने लंड की तरफ देख रहा था,,, जितना हैरान में था उससे कई ज्यादा हैरान मालकिन थी मुझे यकीन होने लगा था की मालकिन सच में ऐसा लंड पहली बार देख रही थी,,,, मैं शर्म के मारे पानी पानी हो रहा था मैं अपने हाथ से पजामा पकड़ कर उसे ऊपर उठाना चाहा लेकिन मालकिन हाथ बढ़ाकर मेरा हाथ पकड़ लिया और रोक ली और बिना कुछ कहे बिना ही अपना हाथ आगे बढ़कर मेरे लंड को पकड़ ली और हिलाना चालू कर दी मैं क्या करता मुझे तो ना चाहते हुए भी मजा आने लगा था आनंद आने लगा था मेरी आंखें अपने आप बंद होने लगी थी और जब मेरी आंखें बंद हो गई तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं तुम्हारी मां के नरम नरम हाथ उसकी नरम नरम ऊंगलियां मेरे जिस्म में जादू चला रही थी,,,,(सूरज इस तरह की मदहोशी भरी बातें करते हुए नीलू की तरफ देख रहा था उसे एहसास हो रहा था कि नीलू को उसकी बातें सुनकर मजा आ रहा था उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसके चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो रहा था और यह देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न हो रहा था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मैं आंखों को बंद किया हुआ था लेकिन जैसे ही मुझे कुछ अजीब सा एहसास हुआ तो मैं अपनी आंखों को खोल दिया और जो मैंने अपनी आंखों से देखा उसे देखकर में दंग रह गया मैं घबरा गया मेरे बदन में कंपकंपी फैल गई।

ऐसा क्या देख लिया तुमने,,,,।

बुरा मत मानना नीलु,,,, मैंने जो देखा उसे सुनकर शायद तू हैरान हो जाओ तुम्हें अपनी मां पर गुस्सा भी आएगा लेकिन एक औरत की तरह अगर सोचो कि तो तुम्हें तुम्हारी मां की गलती बिल्कुल भी नजर नहीं आएगी।

पहले यह तो बताओ हुआ क्या बस गोल-गोल बात घूमा रहे हो।

आंख खुली तो मैंने देखा तुम्हारी मां मेरे लंड को मुंह में भर ली थी और उसे पागलों की तरह चूस रही थी मैं हैरान था नीलु,,,,, मैं कभी सपने में सोच भी नहीं सकता था कि कोई औरत ऐसा कर सकती है और मालकिन के बारे में तो मैं कभी सपने में भी सोच नहीं सकता था लेकिन वह सपना नहीं हकीकत था मालकिन मेरे लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी मैं पागल हुआ जा रहा था मेरे बदन में खुमारी छा रही थी मदहोशी छा रही थी मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था और अपने आप ही मेरी कमर आगे पीछे होना शुरू हो गई,,,, सच कहूं तो नीलू तुम्हारी मां मेरे लंड को देखकर बहन गई थी इसके बाद तो वह एकदम से खड़ी हुई और अपने सारे कपड़े उतार करें मेरे सामने नंगी हो गई।

क्या,,,?(एकदम हैरान होते हुए नीलू बोली)

हां नीलू तेरी आंखों के सामने तुम्हारी मां अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई पहली बार में किसी नंगी औरत को देख रहा था उसके जिस्म को देख रहा था उसकी खरबूज जैसे चुचियों को देख रहा था और तुम्हारी मां की बुर को मैं पहली बार देखा तो मुझे एहसास हुआ की औरत की बुर कितनी खूबसूरत होती है वरना उसके बारे में मैं सिर्फ सुना करता था देखा नहीं था उसका आकार कैसा होता है कैसी दिखती है यह सब मुझे पहली बार तुम्हारी मां की वजह से पता चला मैं तो तुम्हारी मां को देखा ही रह गया सच में नीलू तुम्हारी मां बहुत खूबसूरत है पूरे गांव में क्या अगल-बगल के 40 50 गांव में भी तुम्हारी मां की तरह खूबसूरत औरत कोई नहीं होगा। पहली बार मुझे एहसास हुआ की औरत कितनी खूबसूरत होती है तुम्हारी मां मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि मेरे मन में क्या चल रहा है और समझ गई थी कि यह सब मेरे लिए पहली बार है मैंने आज से पहले कभी एक नंगी औरत को नहीं देखा था।

(इस तरह की मदहोशी वाली बातें सुनकर नीलू के बदन में हलचल मचाना शुरू हो गया था ना चाहते हुए भी उसकी बुर से मदन रस बहना शुरू हो गया था यह जानते हुए भी की सूरज उसकी मां की गंदी बात बता रहा है फिर भी वह अपने आप को काबू में नहीं कर पा रही थी और वह उत्तेजित हुए जा रही थी और उत्तेजित होते हुए वह धीरे से बोली)

फिर,,,,,?

फिर क्या नीलू,,, देख रही हो उसे दिन की बात बात कर इस समय मेरा लंड खड़ा हो गया है (एकदम से घुटनों के बाल बैठते हुए अपने पजामा को नीचे करके अपने खड़े लंड को बाहर निकलकर नीलू को दिखाते हुए वह बोला और अगले ही पल फिर से उसे पजामे में डाल दिया वह जानबूझकर ऐसा हरकत नीलू को उत्तेजित करने के लिए कर रहा था ताकि इस समय वह नीलू को चोद सके उसके गुस्से को पूरी तरह से शांत कर सके,,,, नीलु भी मस्त हो गई सूरज के खड़े लंड को देखकर ,, नीलू की बुर भी कचोरी की तरह फूलने लगी थी,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था मैं तो तुम्हारी मां की खूबसूरती देखकर पागल हुआ जा रहा था तभी तुम्हारी मां बोली। सूरज मेरी बात मानेगा तो हमेशा खुश रहेगी तुझे हमेशा काम मिलता रहेगा और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुझे बदनाम कर दूंगी और कोई तुझे काम भी नहीं देगा,,,,, मैं क्या करता नीलू मेरे पास तुम्हारी मां की बात मानने के सिवा और कोई दूसरा रास्ता नहीं था लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि तुम्हारी मां क्या मनवाना चाहती है,,,,।

क्या बोली मेरी मां,,,,।

तुम्हारी मां बोली थी मेरी इच्छा पूरी कर

कैसी इच्छा,,,?

पहले तो मैं भी नहीं समझ पाया लेकिन अगले ही पर तुम्हारी मां एकदम से मेरी तरफ आगे पड़ी और मेरे सर पर हाथ रखकर मेरे बाल को कस के पकड़ ली और धीरे से मेरे मुंह को नीचे की तरफ ले जाने लगी जैसे ही मेरा मुंह तुम्हारी मां की दोनों टांगों के बीच आया वह एकदम से अपनी कमर को आगे की तरफ उचका कर अपनी बुर को मेरे मुंह से सटा दी और बोली चाट ईसे,,,, मैं क्या करता तुम्हारी मां की बुर से इतनी खूबसूरत इतनी मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपने आप ही मेरी जीत बाहर निकल गई और मैं तुम्हारी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया।
(सूरज को साफ दिखाई दे रहा था कि नीलू उसकी बातों को सुनकर उत्तेजित हो रही थी क्योंकि वह धीरे से अपने थूक को गले के अंदर निगल रही थी यह उत्तेजना की निशानी थी,,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए फिर बोला,,) मुझे पागलों की तरह चाटने पर तुम्हारी मां मजबूर कर दे,,,,, मैं कर भी क्या सकता था मैं पहली बार इतनी खूबसूरत औरत को देख रहा था और भी बिना कपड़ों के तो एक जवान लड़का होने के नाते में भी अपने हाथ से यह मौका जाने नहीं देना चाहता था मैं भी पागलों की तरह तुम्हारी मां की बुर चाट रहा था तुम्हारी मां पागल हो जा रही थी जोर-जोर से चीख रही थी चिल्ला रही थी ।
और नीलू उस दिन पहली बार में जान पाया की चुदाई किसे कहते हैं।

मतलब कि उसे दिन मन नहीं तुम्हारे साथ,,,,,

हां तुम्हारी मां मेरे से चुदवाई और यह सिलसिला उसे दिन से शुरू हो गया और न जाने तुम कहां से देख ली।

घर पर देखी थी सुबह-सुबह जब घर के पीछे मां टांग उठा कर करवा रही थी।

ओहहहहह उस दिन,,,,,(एकदम से जैसे सूरज को याद आया हो वह हैरान होता हुआ बोला फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,,) लेकिन नीलू एक तरह से यह अच्छा ही हुआ कि तुम अपनी आंखों से सब कुछ देख ली,,,,।

क्यों अच्छा हुआ,,,?

जरा तुम ही सोचो तुम्हारा और मेरे बीच भी वही रिश्ता है जो मेरे और तुम्हारी मां के बीच है अगर भुले भटके हम दोनों को चुदाई करते समय तुम्हारी मां देख ले तो तुम्हारी मां का मुंह बंद करने के लिए तो मुंह का सकती हो कि वह मेरे और तुम्हारी मां के बीच क्या चल रहा है यह जानती हो तो तुम्हारी मां कुछ कह नहीं पाएगी शांत हो जाएगी तुम्हारा भी रास्ता बन जाएगा और उसका खुद का रास्ता बन जाएगा तो मां बेटी मेरे साथ मजा ले सकोगी।


हरामजादे में तुझसे प्यार करती हूं।

मैं भी तुमसे प्यार करता हूं लेकिन क्या करूं जिंदगी में ऐसे भी पल आते हैं जब हमें दूसरों के बारे में भी सोचना पड़ता है तुम ही अगर सोचो मैं तो कुछ नहीं कहूंगा अगर भावनाओं में भाकर तुम्हारी मां किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात तो बना ली और वह सारे गांव में बता दिया तो क्या होगा। बदनामी हो जाएगी ना ना तो मुखिया जी किसी को मुंह दिखाने के काबिल रह जाएंगे ना तो मालकिन और ना तुम दोनों जन और सब लोग पूरे परिवार को रंडी की तरह ही समझेंगे आते-जाते लोग तुम्हें तुम्हारी मां का नाम देखकर चिढ़ाएंगे क्या तुम्हें यह सब बर्दाश्त होगा मैं तो तुम्हारे परिवार को अपना परिवार समझता हूं इसलिए मर जाऊंगा लेकिन यह सब किसी को नहीं बताऊंगा।

(सूरज की बात में सच्चाई थी इस बात की नीतू अच्छी तरह से समझती थी इसलिए ना चाहते हो कि उसके होठों पर मुस्कान आ गई और वह मुस्कुराते हुए बोली,,)

अब मुझे जाना चाहिए,,,,(नीलू को मुस्कुराता हुआ देखकर सूरज समझ गया था की बात बन गई है लेकिन वह जाति से पहले उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपने सीने से लगा लिया और उसके खूबसूरत चेहरे को अपने हाथ में लेकर बोला)

इतनी जल्दी चली जाओगी इतने दिन बाद मिली हो और जाने को कह रही हो,,,,।

तो क्या करूं,,, तुम्हारे साथ यहां रुक कर खरबुजे तोडुं,,,,,,।

खरबूजे नहीं मेरी जान,,,(इतना कहकर वहां नीलू को एकदम से अपनी गोद में उठा दिया नीलू घबरा गई लेकिन वह नहीं माना और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) इतने दिन बाद मिली हो ऐसे थोड़ी ना जाने दूंगा (और ऐसा कहते हुए उसे गोद में उठाए हुए ही झोपड़ी की तरफ जाने लगा नीलू यह देखकर सिहर उठी लेकिन अपनी मां की कामलीला के बारे में सुनकर उसकी बुर भी पानी छोड़ रही थी वह भी सूरज की मोटे तगड़े लोगों को अपनी बुर में लेना चाहते थे क्योंकि बात ही बात में उसने अपनी लंड की की झलक भी दिखा दिया था,,,,, नीलू उसे इनकार नहीं कर पाई और सूरज उसे झोपड़ी में लेकर चला गया यहां पर किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी उसके कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया। नीलू अच्छी तरह से जानती थी उसे क्या करना है अपनी मां की लंड की चुसाई की कहानी सुनकर उसका भी मन कर रहा था सूरज के लंड को चूसने के लिए इसलिए वह तुरंत घुटनों के बल बैठ गई और सूरज के मोटे तगड़े लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी और तब तक चुस्ती रही जब तक कि वह पूरी तरह से तृप्त नहीं हो गई क्योंकि वह भी सूरज के साथ बहुत दिनों बाद इस तरह का मजा लूट रही थी। सूरज पूरी तरह से तैयार हो चुका था नीलू की चुदाई करने के लिए।

देखते ही देखते सूरज उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी गुलाबी छेद में अपना लंड डालकर उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम दिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया नीलू को उसकी मां की रंगीन कहानियां सुना कर सूरज भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था वैसे तो उसकी सारी कहानियां मनगढ़ंत थी लेकिन फिर भी किसी को भी उत्तेजित कर दे इस तरह की रसभरी कहानी थी और वही कसर सूरज नीलू के ऊपर उतार रहा था। सूरज का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था और उसकी चुदाई करता हुआ सूरज उसे भविष्य के सपने भी दिख रहा था वह धक्के लगाते हुए बोला।

देखना नहीं तो मेरी जान सब कुछ सही रहा था तो मेरी बीवी बनोगी और तुम्हारी मां मेरी सास फिर देखना एक ही पलंग पर मां बेटी दोनों की चुदाई करूंगा।

हरामजादे शादी के बाद मैं यह सब बिल्कुल भी नहीं करने दूंगी।

अपनी मां के बारे में सोचो नीलू सासू मां बुढी नहीं है अभी पूरी तरह से जवान है। घर की बात घर में ही रह जाएगी तुम भी खुश सासू मां भी खुश।

नहीं बिल्कुल भी नहीं मैं अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ नहीं बांटूंगी,,,।

दूसरे के साथ कहां तुम्हारी मां के साथ मेरी सासू मां के साथ,,,,, सोचो कितना मजा आएगा।


नहीं लेना मुझे ऐसा मजा,,,,।(सूरज की बातें सुनकर नीलू को मजा आ रहा था वह भी भविष्य के सपने देख रही थी वह बार-बार उसकी मां को सासू मां और उसे बीवी कर कह कर संबोधन कर रहा था इस बात की खुशी नीलु के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और इस बात को लेकर सूरज काफी उत्तेजित हुआ जा रहा था थोड़ा जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और तब तक धक्का लगाता रहा जब तक की नीलु का पानी निकालने के बाद खुद झड़ नहीं गया।


नीलू घर जा चुकी थी। सूरज भी शाम को ढेर सारा खरबूजा लेकर मुखिया के घर पहुंच चुका था। सूरज को खरबूजे के खेत के सारे खरबूजे लाया हुआ देखना मुखिया और मुखिया की बीवी खुश नजर आ रही थी क्योंकि उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि सूरज आज ही खरबूजा लेकर पहुंच जाएगा और खरबुजे को बाजार में पहुंचाना भी बहुत जरूरी था,,,, मुखिया सूरज से बोले,,)

यह तुमने बहुत अच्छा किया अब सही समय पर खरबूजा शहर पहुंच जाएगा लेकिन क्या तुम्हें बैलगाड़ी चलानी आती है।

जी मालीक,,,,


तब तो यह और भी अच्छा हुआ सुबह ही शहर के लिए निकलना है क्या तुम जा सकोगे इसके लिए अलग से पैसे भी मिलेंगे,,,,।


बिल्कुल मालिक मैं चला जाऊंगा,,,,,।
(शहर जाने की बात सुनते हैं नीलू और शालू दोनों जो अपनी मां की बगल में खड़े थे एग्जाम से खुश होते हुए अपने पिताजी की तरफ देखने लगी और बोली)

बाबूजी हम भी शहर जाएंगे हमें भी नए कपड़े लेने हैं शहर से,,,,।

नहीं नहीं बाद में कभी चली जाना।

बाद में कब हम दोनों को अभी जाना है सूरज के साथ वहां से कपड़े भी खरीद लेंगे और शहर भी घूम लेंगे,,,,।


तुम क्या कहती हो नीलू की मां,,,,।

सूरज साथ में है तो कोई दिक्कत नहीं है,,,,(इतना सुनते ही नीलु एकदम से खुश हो गई और अपनी मां को गले लगा ली,,,, लेकिन मुखिया की बीवी सख्त हिदायत देते हुए बोली)

लेकिन याद रखना सूरज के साथ ही रहना इधर-उधर कहीं चली मत जाना सूरज जैसा कहता है वैसा ही करना,,,,,।


ठीक है मां हम दोनों वैसा ही करेंगे जैसा सूरज कहेगा,,,(नीलु सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,,, सूरज भी दोनों लड़कियों को साथ ले जाने की बात से मन ही मन खुश हो रहा था,,,,,,, दूसरे दिन वह बड़े सवेरे ही मुखिया के घर पहुंच चुका था )

बहुत ही शानदार अपडेट है एक नए ट्विस्ट के साथ अब दोनों लड़कियां भी सूरज के साथ जा रही है !

बहुत अच्छा लिख रहे हो आप ! 👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
 

sunoanuj

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अगले अपडेट की प्रतीक्षा में हैं सूरज और कमला के कारनामे क्या होंगे !

जल्दी अपडेट दीजिए भाई !
 

rohnny4545

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सूरज बड़े चलाकी से कमला को अपने आगे बैठने के लिए मजबूर कर दिया था भले ही कमला उसकी मां की सौतन थी लेकिन कमला को देखकर सूरज का भी लंड खड़ा हो जाता था, अपने बाप के साथ उसने कमला की काम कलाओं को बड़ी बारीकी से देखा था एक मर्द को खुश करने की कल उसे अच्छी तरह से आई थी,,, मर्दों को रिझाने की अदा बेहद काबिले तारीफ थी भले ही फिर वह मर्द के सामने अपनी गांड मटका के चलना हो या फिर धीरे-धीरे अपने बदन से वस्त्र उतार कर वस्त्र विहीन होना हो सभी कलाओं में वह पूरी तरह से पारंगत थी और उसकी यही कला का सूरज भी दीवाना हो गया था,,,।




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कुछ देर पहले ही उसने शालू को अपनी हरकतों से मदहोश कर दिया था नीलू के मुकाबले शालू थोड़ी शर्मीली और शांत स्वभाव की थी मर्दों की हरकत के बारे में उसे ज्यादा कुछ जानकारी नहीं थी और ना ही उसने कभी मर्दों के उसे कठोर रंग को देखा था जिसे देखकर अक्सर और तो की टांगों के बीच की पतली दरार पानी पानी हो जाती है लेकिन कुछ देर पहले ही उसने उसे कठोर अंग को अपनी हथेली में महसूस की थी उसकी मोटाई उसकी गरमाहट को पल भर के लिए महसूस करके वह शर्म से पानी पानी हो गई थी। इसलिए तो वह एकदम शांत थी,,,, और अपने मन में यही सोच रही थी कि अब उस औरत का क्या होगा जो सूरज के साथ बैठने के लिए तैयार हो गई थी यही सोच कर उसका दिल जोरो से धड़क रहा था। सूरज अभी भी कमला को ठीक से अपने आगे बैठाने में व्यस्तथा,, उसका दिल सोच कर ही जोरों से धड़क रहा था कि एक जवानी से भरी हुई औरत उसकी टांगों के बीच बैठने जा रही थी उसकी गदराई मोटी मोटी गांड निश्चित तौर पर उसके मोटे तगड़े लंड से स्पर्श होने वाली थी,,,, सूरज पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबा जा रहा था क्योंकि कुछ देर पहले ही, मुखिया की बेटी को अपने लंड के अकड़ पन का एहसास दिलाया था और वैसे भी सूरज का अगला शिकार शालू ही थी जिसे भोगकर वह मुखिया के घर की तीनों औरतों का मजा ले चुका होगा,,,, और शायद पुर गांव में पूरे गांव में क्या गांव के अगल-बगल के 100 गांव में सूरज एक अकेला लौता मर्द होगा जो एक ही घर की तीनों औरतों के साथ मजा ले चुका होगा,,,।



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ठीक से बैठो चाची आराम से कोई जल्दबाजी नहीं है,,, अरे मैं तो चला जा रहा था लेकिन तुमको छोटे-छोटे बच्चों के साथ खड़ी दुपहरी में ज्यादा देखकर मुझे रहा नहीं गया इसलिए तुम्हारी मदद कर रहा हूं तुम देख तो रही हो हमारी बैलगाड़ी में बिल्कुल भी जगह नहीं है,,,।



हां वह तो मैं देख ही रही हूं तुम्हारा बड़प्पन है जो मुझे बैलगाड़ी में जगह दे रहे हो,,, (कमला अपने आप को सूरज की दोनों टांगों के बीच व्यवस्थित करते हुए बोली उसकी भारी भरकम गांड पहले प्रयास में ही सूरज के मोटे तगड़े लंड से स्पर्श हो रही थी लेकिन इसका एहसास अभी कमला को बिल्कुल भी नहीं था कमल तो यह सब सहज रूप से ले रही थी उसे नहीं मालूम था कि सूरज के मन में कुछ और चल रहा है,,,, कमला अपनी भारी भरकम गांड को सूरज की दोनों टांगों के बीच व्यवस्थित करके बैठ चुकी थी, सूरज को बड़ा ही उत्तेजनात्मक पल लग रहा था और यह सूरज के लिए बहुत खुशी की बात थी कि आज कमला उसकी दोनों टांगों के बीच बैठी हुई थी जिसे वह अक्सर चुदवाते हुए देखा था इसकी बड़ी-बड़ी गांड हमेशा से उसके आकर्षण और उत्तेजना का केंद्र बिंदु बना था,,,, उसके गुलाबी छेद में लंड को अंदर बाहर होते हुए देखा था,, और तभी से उसका भी यही ख्वाब था कि वह भी कमला की चुदाई करें और आज किस्मत देखो की कमला खुद उसकी गोद में आकर बैठ चुकी थी,,,, किसी ने सच ही कहा है किसी को पाने की चाहत अगर ज्यादा तेज हो तो वह चीज अक्सर उसे मिल ही जाती है,,,, सूरज बहुत खुश था उसका यह सफर बेहद रोमांचक होने वाला था।




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एक बार फिर से बैल गाड़ी चल चुकी थी,, सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर किसी औरत के दिल में जगह बनाने हो तो उससे बातचीत के दौरान उसकी खूबसूरती की तारीफ करने से औरत जल्दी उसकी बातों में आ जाती है और सूरज अपने इस हुनर को यहां पर बाकायदा प्रदर्शित करने वाला था इसलिए वह बैलगाड़ी चलते हुए बात करते हुए बोला।



वैसे चाची इतनी धूप में कहां चली जा रही थी।



अरे बेटा,,, पास के गांव में शादी है वहीं जा रही थी,,,।



तो थोड़ा जल्दी निकल गई होती इतनी धूप में निकलने की क्या जरूरत थी,,,।



अब घर का काम इतना रहता है कि करते-करते दोपहर हो गई वरना मैं भी सुबह ही निकलना चाहती थी।



वैसे लड़के की शादी है की लड़की की,,,,



लड़की की,,,,,।



चलो तब तो कोई बात नहीं शाम को बारात आएगी,,,।





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हां बेटा बारात तो शाम को ही आएगी लेकिन काम भी तो करना पड़ता है ना अब जा रहे हैं तो ऐसा तो नहीं की दिनभर बैठे रहना पड़ेगा काम में हाथ तो बंटाना पड़ेगा,,,।



वह तो है चाची,,,, वैसे भी शादी लड़के की हो या लड़की की काम करने में भी मजा आता है,,,,।



हममम,,,,।

(दोनों के बीच बातचीत जारी हो चुकी थी बैलगाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी पीछे बैठी शालू और नीलू दोनों छोटे बच्चों को संभाले हुए थी लेकिन शालू का ध्यान सूरज की बातों पर ही लगा हुआ था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि इस समय सूरज का लंड खड़ा हो चुका होगा और उसे औरत की गांड में पीठ पर चुभ रहा होगा,,,, और वाकई में सूरज का लंड खड़ा हो चुका था कमला रानी के बदन की मादक खुशबू सूरज को उत्तेजित कर रही थी,,, इस दौरान बैलगाड़ी हिचकोले खाते हुए ऊंची नीची पगडंडी पर आगे बढ़ती चली जा रही थी जिसे रह-रह कर कमल का भजन पीछे की तरफ हो जाता था और सूरज की छाती से एकदम से उसकी पीठ चिपक जाती थी पहले तो यह सब कमला को सहज लग रहा था लेकिन जल्द ही लंड की गर्माहट उसे अपनी पीठ के निचले स्तर पर महसूस होने लगी जहां पर नितंबों की गहरी लकीर की शुरुआत होती है,,,, कमला खेली खाई औरत थी मर्दों की नस-नस से वाकिफ थी उसे एहसास हो गया था कि सूरज का लंड खड़ा हो चुका है,,,, लेकिन वह सामान्य बनी रही क्योंकि उसे लग रहा था कि हो सकता है कि यह सब सहज रूप से हुआ हो,,,, क्योंकि अभी तक सूरज ने ऐसी वैसी कोई हरकत भी नहीं किया था जैसे उसके मन की जिज्ञासा को जाना जा सके इसलिए कमल भी सामान्य बनी रही दोनों के बीच बातचीत जारी थी। तभी सूरज कमला से बोला।)




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चाचा जी क्या करते हैं चाची,,,,।

(सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि उसका पति नहीं था लेकिन फिर भी वहां औपचारिकता निभाते हुए पूछ ही लिया इस सवाल पर कमला शांत होते हुए जवाब दी)



वह नहीं है कुछ साल पहले ही गुजर गए,,,।



ओहहह ,,,, मैं माफी चाहता हूं मुझे मालूम नहीं था।



कोई बात नहीं,,,,।



तो फिर खर्चा कैसे चलता है क्योंकि तुम्हारी तो दो बच्चे हैं उनकी देखरेख खाना पीना सब कुछ की जिम्मेदारी तो अब तुम्हारे सर पर है तो यह सब कैसे चलता है।



चलना पड़ता है मजदूरी कर लेती हूं दूसरे के खेतों में काम कर लेती हूं इसी तरह से गुजारा चल रहा है,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज अपने मन में ही बोल साले कितनी बड़ी रंडी है इतना झूठ बोल रही है मेरे पिताजी को गांड दे देकर उसकी सारी कमाई ले लेती है और कहती है की मजदूरी करती हूं एक साथ दो-दो मर्दों को फसाइ है,,,,, उसकी बात पर सांत्वना देते हुए वह उससे बोला,,,)





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बड़ा मेहनत करती हो तुम सच में यह बहुत बड़े हिम्मत की बात है कि तुम दो-दो बच्चों का गुजारा मजदूरी करके चला रही हो पति के जाने के बाद क्या तुम दूसरी शादी के बारे में नहीं सोची,,,,,





नहीं,,,,, (एकदम शांत होते हुए जवाब दे वैसे अब उसके बदन में अजीब सी लहर उठने लगी थी क्योंकि खेली खाई कमला अपनी पीठ पर गर्माहट महसूस करके सूरज के लंड की लंबाई और मोटाई का अंदाजा लगा चुकी थी,,,, रह रहकर वह गहरी सांस ले ले रही थी जो कि इस बात का सबूत था कि उसके बदन में मस्ती की लहर उठ रही थी,,, सूरज भी एकदम से कमला को चांपे हुए था बैलगाड़ी के बैलों की रस्सियों को दोनों हाथों से वह इस तरह से पकड़ा हुआ था। जिसकी वजह से कमला उसकी बाहों में थी कमला को भी सूरज के कसरती बदन उसकी भुजाओं के बीच रहना अच्छा लग रहा था,,, कमला का ना मे जवाब सुनकर सूरज बोला)





पर तुमने ऐसा क्यों की तुम्हारी तो शुरुआत है देखो तुम्हें बुरा नहीं लगना चाहिए लेकिन मैं सच कह रहा हूं तुम अभी पूरी तरह से जवान हो तुम्हें देखने के बाद कोई का भी नहीं सकता कि तुम दो बच्चों की मां हो तुम्हें तो शादी कर लेना चाहिए जिंदगी बहुत बड़ी है।




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(सूरज अपनी बातों का जाल कमला के ऊपर फेंक रहा था,, कमला को सूरज की यह बातें बहुत अच्छी लग रही थी, क्योंकि सूरज उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और दुनिया में कौन सी ऐसी औरत होगी जिसे अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना पसंद नहीं होगा ,,, सूरज की बातें सुनकर कमल के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली।)



धत् दो बच्चों की मां से कौन शादी करेगा,,,!



क्यों नहीं करेगा तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत हो तो कोई भी तुमसे शादी करने के लिए तैयार हो जाएगा तुम्हारे मैं किसी बात की कमी भी तो नहीं है खूबसूरत हो जवान हो तुम्हारा बदन भी एकदम गदराया हुआ है,,,,,, तुम्हारे में मुझे कहीं से थोड़ा सा भी कमी नहीं दिखाई दे रही है,,,,(सूरज पूरी तरह से अपनी बातों के जाल में कमला को फंसा लेना चाहता था वैसे भी उसने कमल के लिए गदराया बदन शब्द है का प्रयोग करके उसे पूरी तरह से मदहोश कर दिया था क्योंकि अक्सर यह शब्द का उपयोग औरत और मर्द के बीच के आकर्षण और मदहोशी में बोला जाता है कमला सूरज के मुंह से गदराया शब्द सुनकर उत्तेजित होने लगी थी,,,,,, फिर वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)






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तुम्हें कोई कमी नहीं लग रही है ना लेकिन किसी को अगर शादी करना होगा तो कमीयां ही दिखाई देगी,,।



अंधे हैं वह लोग जिन्हें तुम्हारे में कमियां दिखाई देती है चाची मुझे तो तुम संपूर्ण खूबसूरती की मिसाल दिखाई देती हो,,,,,(इस तरह की बातें करते हुए सूरज अपनी आवाज को थोड़ी धीमी कर लिया था और जिस तरह से वह धीमी आवाज में बात कर रहा था उसी तरह से कमला भी धीरे से ही जवाब दे रही थी जिससे सूरज समझ गया था कि यह बहुत ही जल्द लाइन पर आने वाली है,,,, सूरज की बात सुनकर कमला मदहोश हो जा रही थी उसे सूरज की बातें अच्छी लग रही थी और अपने आप ही वह अपनी गांड को पीछे की तरफ खेल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सूरज के लंड को अच्छी तरह से अपनी गांड पर चुभता हुआ महसूस करना चाह रही हो,,,,, सड़क पूरी तरह से सुनसान थी कच्ची सड़क के दोनों तरफ बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए थे और उसकी छांव पूरे सड़क को अपनी आगोश में लिए हुए थी जिससे गर्मी में भी उन लोगों को ठंडक का एहसास हो रहा था,,,, दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा है,,,, कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही कमला कुछ बोल नहीं पा रही थी हालांकि लगातार उसे अपनी गांड के ऊपरी सतह पर सूरज के लंड की गर्माहट अच्छी तरह से महसूस हो रही थी उसका मन कर रहा था कि हाथ पीछे की तरफ ले जाकर के उसके लंड को पकड़ ले लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि दोनों के बीच अभी इतनी जान पहचान नहीं थी,,, सुनसान सड़क को देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)





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अच्छा चाची काफी देर से हम लोग की सड़क पर आगे बढ़ते चले जा रहे हैं लेकिन दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा है सोचो तुम इसी सड़क से आने वाली थी ना,,,।



हां,,,,।



बाप रे तुम्हें डर नहीं लगता इतनी दुपहरी में सुनसान सड़क पर अकेले जाते हुए,,,,।



नहीं तो,,,,।



अरे अब थोड़ा डरा करो,,,, कोई लुटेरा मिल गया तो सब कुछलूट लेगा,,,,।



अरे मेरे पास क्या है लूटने को ना तो मेरे पास कोई खाने हैं और ना ही मेरे पास पैसे हैं तो लुटेरा लूटेगा क्या,,,!(मुस्कुराते हुए कमला बोली तो उसकी बात सुनकर सूरज बोला)



कैसी बात कर रही हो चाची,,, यह बोलो क्या नहीं है तुम्हारे पास,,, धन दौलत गहने से भी ज्यादा कीमती चीज है तुम्हारे पास मुझे लूटने के लिए दुनिया का हर मर्द बेताब रहता है,,,,।



ऐसा कुछ भी तो नहीं है मेरे पास खामखा बातें बना रहे हो,,,।



नहीं चाची मैं सच कह रहा हूं,,,,,।



सच कह रहे हो क्या है मेरे पास बताओ तो,,,,।





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तुम्हारे पास है तुम्हारी जवानी,,,गदराई जवानी और सही मानो लूटेरा अगर लूटने आएगा तो तुम्हारे पास से पैसे या गहने नहीं लौटेगा बल्कि तुम्हारी जवानी लूट कर चला जाएगा,,,,।

(सूरज की यह बात सुनकर कमला एकदम से शर्मा गई औरशरमाते हुए बोली)



धत्,,,,, यह कैसी बातें कर रहे हो,,,,।



मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं चाची,,,,(सूरज अपनी बातों से कमला के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठा रहा था,,,, और सचमुच में उसकी बातें कमला के तन बदन में असर कर रही थी बहुत तेज हो रही थी उसे अपनी बर से मदर रस का बहाव होता हुआ महसूस हो रहा था और सूरज इस बीच अपनी हरकतें भी जारी रखे हुए था अपने लंड का दबाव तो उसकी पीठ पर वह एकदम बराबर बनाया हुआ था,,, लेकिन बैलों की रस्सियों को खींचते हुए वह जानबूझकर अपनी बाहों का स्पर्श दोनों तरफ से कमल की बड़ी-बड़ी चूचियों पर कर रहा था जो की ब्लाउज में कबूतर की तरह फड़फड़ा रहे थे कमला को सूरज की यह हरकत भी काफी हद तक मदहोश कर रही थी,,,,। सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)






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मेरी बात का यकीन करो चाची इस तरह से अकेले कहीं आया जाया मत कीया करो,,,, अब तुम ही जरा विचार करो चारों तरफ सुनसान सड़क इंसान की जात तक यहां नहीं है ऐसे में कोई लुटेरा तुम्हारी इज्जत लूट लिया तुम्हारी चुदाई करके चला गया तो तुम किसको बता पाओगी,,,,(सूरज जानबूझकर कमला के सामने चुदाई शब्द का प्रयोग कर दिया था वह देखना चाहता था कि उसकी बात पर कमला कैसे भाव प्रकट करती है लेकिन कमल उसकी बात सुनकर कुछ बोल नहीं पाई थी और सूरज के मुंह से चुदाई सबसे सुनकर उसके बदन में गनगनाहट सी फैलने लगी थी,,,, कमला ने उसकी अश्लील बात का बिल्कुल जवाब नहीं दी तो सूरज की हिम्मत खुलने लगी और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मैं सच कह रहा हूं चाची,,, मेरी बात को बिल्कुल भी मजाक में मत लेना अक्सर लुटेरे लुटेरे क्या कोई भी मर्द सुनसान सड़क पर तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत देखेगा तो उसका मन चोदने को ही कहेगा,,,,,।



(सूरज की बातें कमला के तन बदन में आग लग रही थी सूरज खुले तौर पर उससे चुदाई की बातें करने लगा था,,, यह देखकर कमला भी हैरान थी लेकिन वह मस्त में जा रही थी इस बात से भी वह इनकार नहीं कर सकती थी और वैसे भी सूरज जो कुछ भी कह रहा था उसमें सच्चाई थी इस बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था वह जानती थी कि इस तरह से सुनसान सड़क पर एक जवान औरत का निकलना बिल्कुल भी ठीक नहीं था लेकिन उसकी मजबूरी थी शादी में उसे पहुंचना था और उसे देर हो गई थी इसलिए वह पैदल निकल पड़ी थी वह तो अच्छा हुआ कि सूरज उसे रास्ते में मिल गया और वह बैलगाड़ी पर बैठकर जा रही थी लेकिन सूरज कि ईस तरह की बातें किसी लुटेरे से बिल्कुल भी काम नहीं बैलगाड़ी वान किस अकल में सूरज से जवानी का लुटेरा लगने लगा था,,,,, सूरज की अश्लील बातों को सुनकर उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी थी,,,, लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह सूरत से कैसे कहें कि उसे पेशाब लगी है,,,,, फिर भी वह हिम्मत जुटाकर धीरे से बोली,,,।)





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जरा यहां पर थोड़ा सा रोकना तो,,,,,।





क्यों क्या हुआ चाची,,,,?



अरे बहुत जरूरी है थोड़ा रोकना तो सही,,,।



अरे लेकिन हुआ क्या बताओ तो,,,,





अरे तुम रोको बताने जैसा नहीं है,,,,।

(सूरज समझ गया था कि कमला बैलगाड़ी को क्यों रोकने के लिए कह रही थी इसलिए वह जानबूझकर मुस्कुराते हुए बोला)



अच्छा पेशाब लगी है ऐसा कहो ना मुझे लगा कि क्या हो गया,,,,,,।(ऐसा कहते हुए सूरज एकदम से बैलगाड़ी की रस्सी खींचकर बैलगाड़ी को रोक दिया,,,, लेकिन सूरज की बात सुनकर कमला शर्मा गई थी और सूरज की तरफ देखने लगी थी और देखते हुए बोली,,,)



तुम बहुत बेशर्म हो,,,,,,।



अरे चाची ऐसा नहीं है यह सब तो औपचारिक है,,,,, अच्छा लो हांथ पकड़ लो आराम से उतरना गिरना नहीं,,,,,,(सूरज के हाथ का सहारा लेकर कमला बैलगाड़ी से नीचे उतर गई और खड़ी होकर इधर-उधर देखने लगी तब तक सूरज भी नीचे उतर गया और बैलगाड़ी के पीछे जाकर उन दोनों से भी बोला,,,,)



कुछ देर के लिए हम लोग यहां रख रही है अगर पेशाब लगी हो तो कर लो,,,,,,,(सूरज एकदम बेशर्मी दिखाते हुए बोला था शालू उसकी बात सुनकर एकदम शर्म से पानी पानी हो गई थी वह आश्चर्य से नीलू की तरफ देखने लगी तो नीलू जानबूझकर शालू से बोली)




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पागल है,,,,, चलो जल्दी से हम भी पेशाब कर लेते हैं,,, मुझे भी काफी देर से बड़े जोरों की लगी हुई है,,,,(इतना कहकर नीलू बच्चों को भी नीचे उतारकर खुद भी नीचे उतर गई शालू को भी बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए दोनों बहने एक तरफ पेड़ के पास चली गई,,,,,, दोनों बच्चे भी वही खड़े-खड़े पेशाब करने लगे और कोई मौका होता तो इस समय सूरज के निशाने पर दोनों बहने होती और सूरज उन्हें पेशाब करते हुए देखा लेकिन इस समय उसका मुख्य ध्येय कमला थी इसलिए वह कमला की तरफ आगे बढ़ गया वह देख चुका था कि कमला कहां पर पेशाब करने बैठी है,,, इसलिए वह उत्साहित होता हुआ कमला की तरफ आगे बढ़ रहा था कमला अपनी धुन में झाड़ियां के बीच बैठकर पेशाब कर रही थी लेकिन वह सड़क के किनारे बैठी हुई थी और सूरज चाहता तो उसे दूर पेशाब कर सकता था लेकिन वह कमला की गांड की झलक पाना चाहता था,,, और देखना चाहता था कि उसकी उपस्थिति में कमला कैसे भाव प्रकट करती है और सूरज यही सोच कर झाड़ियों में बैठी हुई कमला को देखते हुए 5-6 कदम आगे निकल गया,,, इस बीच उसे कमला गोलाकार गांड की झलक बराबर मिली थी और वह मदहोश हो गया था,,, कमला को ईस बात का एहसास था कि सूरज उसकी तरफ देखते हुए आगे बढ़ गया लेकिन वह अपनी नंगी गांड को अपनी साड़ी से छुपा नहीं पाई थी ढंक नहीं पाई थी,, और शायद इसलिए की अंदर ही अंदर वह भी अपनी जवानी की झलक सूरज को दिखाना चाहती थी,,,, सूरज कमला से ज्यादा दूर नहीं क्या बस 5_ 6 कदम पर झाड़ियां के पास जाकर खड़ा हो गया जहां से वह कमला को अपना लंड दिखा सके।



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सूरज अच्छी तरह से जानता था कि कमला उसके पास ही बैठी हुई है लेकिन वह जानबूझकर उसके सामने पेशाब करना चाहता था पेशाब करना तो एक बहाना था वह कमल को अपनी मर्दाना ताकत दिखाना चाहता था अपने मोटे तगड़े लंड के दर्शन करना चाहता था,,, सूरज को अपने बेहद करीब खड़ा देख कर कमला के तन-बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह चोर नजरों से सूरज की तरफ देख रही थी, और अगले ही पल सूरज अपने पजामे को नीचे करके अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल लिया जो कि अपनी औकात में आकर खड़ा था जिसे देखते ही कमला का मुंह आश्चर्य से खुल गया,,,, वह आश्चर्य से फटी आंखों से सूरज के मर्दाना अंग को देखते रह गई उसे तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था क्योंकि आज तक उसने इतना मोटा तगड़ा लंड कभी नहीं देखी थी,,, सूरज भी पूरी तरह से बेशर्मी पर उतर आया था वह अपने हाथ की उंगलियों से अपने लंड को पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए पेशाब करने लगा इस अवस्था में देखकर कमला की बुर उत्तेजना से फूलने पिचकने लगी,,,, हालात पूरी तरह से मदहोशी से भर चुके थे। दोनों तरफ जिज्ञासा और कुतुहल बढ़ती जा रही थी। सूरज पहले से ही कमला को पाने का मन बना लिया था,, और सूरज की कामुक हरकतें कमल की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को पिघला रही थी उसकी जवानी की आग बढ़ती जा रही थी उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी की तपन बढ़ती जा रही थी, जिसे शीतलता प्रदान करने के लिए ठंडे पानी की बौछार की जरूरत थी।




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बड़ा ही कामुक नजारा था बैलगाड़ी के उसे तरफ दोनों बहने सलवार को नीचे करके पेशाब करने बैठी थी और बैलगाड़ी के इस तरफ सूरज और कमला पेशाब कर रहे थे,,, कमला की गदराई गांड झाड़ियों के बाहर झांक रही थी जिसे सूरज पेशाब करते हुए भी अच्छी तरह से देख पा रहा था दूर से निकलने वाली सिटी की आवाज सूरज को एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,, अपना इरादा दर्शाने के लिए सूरज एकदम से अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया था और उसे आगे पीछे करके मुठीयाने लगा था,,, यह देख कर तो कमला का भी धैर्य जवाब देने लगा, उसका मन मचलने लगा अगर साथ में दोनों लड़कियां ना होती तो इस समय वह सच में आगे बढ़कर सूरज के लंड को अपने मुंह में लेकर उसकी मोटाई और लंबाई का जायजा ले ली होती,,, इस समय केवल वह सूरज के लंड को देखकर गरम आहे लेने किसी और कुछ नहीं कर सकती थी,,, दोनों पेशाब कर चुके थे दोनों लड़के अभी पेशाब करके अपनी सलवार ऊपर करके सलवार की डोरी बढ़ रही थी यह देखकर सूरज को वहां से हट जाना ही उचित लगा और वह अपना पजामा ऊपर करके बैलगाड़ी के पास आ गया,,,, कमला कुछ पल के लिए पेशाब करने के बाद भी वहीं बैठी रह गई क्योंकि वह सूरज के मुसल के बारे में सोच रही थी,,, सूरज ही आवाज लगाता हुआ बोला।




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क्या हुआ चाची कर ली कि नहीं,,, ।(जिस तरह से सूरज ने आवाज लगा कर बोला था उसे सुनकर कमला शर्म से पानी पानी हो गई और शालू भी सूरज की इस बात से हैरान हो गई थी नीलू एकदम से उसे मीठी फटकार लगाते हुए बोली)

तुम्हें शर्म नहीं आती औरत से इस तरह से बात करते हो,,,।

क्यों क्या हुआ इसमें कौन सी शर्म आने की बात है,,,, यह तो सब लोग करते हैं पूछ लिया तो क्या हुआ,,,?

पूछ लिया तो क्या हुआ,,,(नीलू मुंह बनाते हुए बोली कब तक कमला भी वहां आ गई थी,,,, सूरज उन बच्चों को बैठाने लगा नीलू और शालू बैठ चुकी थी,,,, कमला बैलों के पास खड़ी होकर सूरज के आने का इंतजार कर रही थी और सूरज नीलू और शालू से बोला,,,,,,) एकाद खरबूजा काटकर बच्चों को खिला दो भूख लग गई होगी और तुम दोनों भी खा लो,,,।

लेकिन खरबूजा काटेंगे किससे,,, (शालू हैरान होते हुए सूरज से बोली तो सूरज मुस्कुराते हुए बोला)

चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है,,,, (इतना कहकर सूरज शालू के पास ऐसे ही पीछे की तरफ हाथ डालकर एक चाकू बाहर निकाल दिया और शालू को थमाते हुए बोला,,,,) चलने से पहले मैं यह सब रख लिया था मुझे मालूम था कि कब इसका काम पड़ जाए पता नहीं,,,, (यह सुनकर नीलू मुस्कुराते हुए बोली)

बहुत समझदारी का काम किए हो,,,,।

तो क्या जीवन में समझदार बनना बहुत जरूरी होता है,,,,,,,,।




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अच्छा अब जाकर बैलगाड़ी चलाओ यही खड़े-खड़े समय बिता दे रहे हो,,,,।

जो हुकुम छोटी मालकिन,,,, (इतना कहकर सूरज आगे की तरफ चला गया और नीलू मुस्कुराने लगी, बड़ी बेसब्री से कमला सूरज का इंतजार कर रही थी क्योंकि कुछ देर पहले जो नजारा उसने अपनी आंखों से देखी थी उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह अपने मन में सोच रही थी कि इतना मोटा तगड़ा है तभी तो पूरी पीठ गर्मा जा रही थी,,, सूरज मुस्कुराते हुए कमला की तरफ देखा और बैलगाड़ी पर चढ़ते हुए बोला,,,)

अभी कितनी दूर है चाची,,,,,?

बस आधा रह गया है,,,।

ओह,,, तब तो अच्छा हुआ कि तुम्हें मैं मिल गया वरना कितना पैदल चलना पड़ता,,,।

बात तो तुम एकदम ठीक कह रहे हो,,,, (अपना हाथ ऊपर की तरफ आगे बढ़ाकर कमला बोली,,, और उसे ऊपर की तरफ खींचने लगा जिस तरह से सूरज ने कमला की कलाई को थामा था कमला की सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी,,,,, साड़ी का पल्लू अस्त-व्यस्त हो जाने के कारण ब्लाउज में से जाते उसकी भारी भरकम चूचियों की गहरी लकीर के साथ-साथ आधी चूची ब्लाउज के बाहर झलक रही थी जिस पर सूरज की नजर बराबर बनी हुई थी और सूरज किस नजर को कमला अच्छी तरह से पहचान गई थी इसलिए हल्की सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई थी,,,, सूरज संभलकर उसे फिर से अपनी दोनों टांगों के बीच बिठा लिया था,,,, अब तो कल्पना करने के लिए कुछ बाकी नहीं रह गया था क्योंकि कमला अपनी आंखों से सूरज के मर्दाना अंग को देख चुकी थी और वास्तविकता यही थी कि उसने अपने जीवन में ऐसा मुसल नहीं देखी थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि ऐसा मुसल जिस किसी के भी ओखली में जाएगा सब कुछ पीस कर रख देगा,,,,,,,, कमल को अपनी दोनों टांगों के बीच बैठ कर बेल की रस्सियों को अपने हाथ में लेकर सूरज बोला,,,)




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अब चले चाची,,,, ।

हां अब चलो,,,,,
(इतना सुनते ही सूरज बैलो की रस्सी को हिलाने लगा और बैल इशारा पाकर चलने लगे,,,,,, कुछ देर पहले आंखों ही आंखों में जो दोनों के बीच इशारा हुआ था उसे लेकर दोनों काफी उत्साहित थे,, ,,, कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही बेल धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था रास्ता इस तरह से सुनसान ही था पीछे चालू खरबूजा काट काट कर बच्चों को दे रही थी और अपनी बहन को भी दे रही थी वह लोग खर्च खाने में मस्त थे लेकिन कमला और सूरज अपनी इच्छा पूर्ति का रास्ता ढूंढ रहे थे,,, कुछ देर की खामोशी के बाद बातचीत की शुरुआत करते हुए सूरज कमला से बोला,,,)

क्या बात है चाची एकदम शांत क्यों हो गई कुछ तो बोलो,,,,।

क्या बोलूं,,,,,,? तूने तो मेरी बोलती बंद कर दिया,,,,

ऐसा क्यों,,,,?

यह तो तू ही जाने,,,,

लेकिन मुझे नहीं पता कि तुम किस बारे में बोल रही हो,,,,?

तुझे सब पता है,,,,,।

मुझे कुछ भी पता नहीं तुम किस बारे में बोल रही हो मैं नहीं जानता,,,,,।
( कमला का दिल जोरों से धड़क रहा था वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अगला गांव आने में कुछ समय की देरी है और अगर अगला गांव आ गया तो वह कुछ नहीं कर पाएगी,,, जिंदगी में पहली बार इतना मोटा तगड़ा लंड देख रही थी इसलिए कमला का मन मचल रहा था वैसे भी वह पूरी तरह से छिनार हो चुकी थी जहां अपनी जरूरत के लिए वह दूसरे मर्दों के साथ संबंध बनाती थी वही उसकी भी यह जरूर बन चुकी थी,,, इसलिए वह कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे सूरज का लंड उसे बड़े आराम से मिल जाए वैसे भी खेली खाई कमला अच्छी तरह से समझ गई थी कि सूरज भी यही चाहता है जो वह चाह रही थी। इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए बोली,,,)




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तुझे नहीं लगता कि तेरा कुछ ज्यादा ही बड़ा है,,,,(थोड़ी सी बेशर्मी दिखाते हुए दबे स्वर में वह बोली उसकी बात सुनकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि अब उसकी मंजिल उसकी आंखों के सामने है इसलिए वह मुस्कुराता हुआ बोला)

हां मुझे मालूम है मेरा कुछ ज्यादा ही बड़ा और मोटा है,,,, वैसे चाची सही कहूं तो तुम्हारी गांड भी बहुत खूबसूरत है झाड़ियां के बीच से चमक रही थी इतनी गोलाकार गोरी गोरी मक्खन जैसी गांड मैंने कभी नहीं देखा,,,,,(सूरज की बेशर्मी भरी बातें सुनते ही कमल एकदम से शर्मा गई और बोली)

धत् यही सब देखता है तु,,,,


तुम दिखाओगी तो क्यों नहीं देखूंगा,,,,

मैं तुझे थोड़ी ना दिखा रही थी,,,, मैं तो पेशाब कर रही थी,,,,।

तो थोड़ा अंतर की तरफ चली गई होती ताकि तुम्हारी खूबसूरत गांड झाड़ियों से छुप गई होती खुली गांड लेकर सड़क के किनारे बैठने की क्या जरूरत थी,,,।

मुझे क्या मालूम था कि तू उधर आ जाएगा,,,,,।

मुझे भी तो पेशाब लगी थी,,,,,, इसलिए वहां चला गया,,,।

कितना बेशर्म है तु एक औरत के पास खड़े होकर पेशाब करता है तुझे यह सब करने में शर्म नहीं आती,,,,।

शर्म तो बहुत आती है चाची, लेकिन मैं जानता हूं कि शर्म करूंगा तो मजा कैसे ले पाऊंगा,,,,,, शर्म करता तो इतना खूबसूरत नजारा अपनी आंखों से कैसे देख पाता,,,,,(बातचीत के दौरान सूरज लगातार अपने लंड का एहसास कमल के नितंबों के ऊपरी सतह पर बराबर कर रहा था जिसकी गर्माहट से कमला का लावा पिघल रहा था वह मदहोश हो रही थी,,,, और वह भी जानबूझकर अपनी पीठ को पीछे की तरफ ठेल दे रही थी बाकी का काम ऊंची नीची पगडंडी से चलते हुए बैलगाड़ी कर दे रही थी,,, सूरज की बात सुनकर मत हो सोते हुए कमला बोली,,)

तो एक औरत को देखना और वह भी पेशाब करते हुए तुम्हारे लिए सबसे खूबसूरत नजारा होता है यही कह रहे हो ना तुम।




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हां बिल्कुल चाची इसमें कोई दो राय नहीं है मेरे लिए तो यह दुनिया का सबसे बेहतरीन नजारा है मेरे लिए क्या हर मर्द के लिए औरत को पेशाब करते हुए देखना बेहद खूबसूरत नजारा होता है।

और ऐसा नजारा देखकर क्या होता है,,,(कमला मुस्कुराते हुए बोल रही थी और इस बीच सूरज की बाहों को अपनी चूचियों पर महसूस करके मस्त हुए जा रही थी,,,, कमला की बात सुनकर सूरज उसी के अंदाज में जवाब देते हुए बोला)

खड़ा हो जाता है चाची बिल्कुल भी रहा नहीं जाता,,, देखी तो थी तुम,,,,, क्या हाल हो रहा था,,,,।

देखी थी तभी तो पूछ रही हूं,,,,, अच्छा अपना यह हथियार,,,(इतना कहने के साथ ही तुरंत अपना हाथ पीछे की तरफ लाई और पजामे के ऊपर से ही सूरज के लंड को पकड़ते हुए) पीछे रख बार-बार चुभ रहा है,,,,,।
(कमला की हथेली में अपने लंड को महसूस करके सूरज एकदम से मत हो गया भले ही वह पजामे के ऊपर से उसे पड़ी थी लेकिन इतने से ही सूरज को चांद तारे दिखाई देने लगे थे,,,, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि कमला अभी तक उसके लंड को छोड़ी नहीं थी अपने हाथ में ही पड़े हुए थी और वह भी एकदम दबाकर,,,, सूरज की तो सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी और वह बोला,,,)

क्या चाची,,, जब तुम्हें इसकी चुभन बर्दाश्त नहीं हो रही है तो अंदर कैसे ले पाओगी,,,,,।
(इतना सुनते ही,,, हैरानी से कमला नजर घुमा कर सूरज को देखने लगी दोनों के होठों के बीच केवल दो अंगूल का ही फर्क नहीं किया था कमल की आंखों में मदहोशी की खुमारी एकदम साफ दिखाई दे रही थी सूरज की आंखों में वासना की चमक दिखाई दे रही थी कमला हैरान थी कि उम्र में कम यह लड़का कितना तेज तर्रार है,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से एक दूसरे को देखते रहे बैलगाड़ी आगे बढ़ती चली जा रही थी और कमल का एक हाथ पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को नाप रहा था,, फिर धीरे से कमला बोली,,,)



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तू तो लुटेरों की बात कर रहा था अब देखो खुद लुटेरा बनने को तैयार हो गया है,,,।

क्या करूं चाची तुम्हारे पास खजाना इतना बेस कीमती है कि तुम्हारा खजाना देखकर कोई भी लुटेरा बनने को तैयार हो जाए,,,,,।
(इतना सुनकर कमला मुस्कुरा दे और उसकी मुस्कुराहट देखकर सूरज समझ गया था कि मामला बिल्कुल साफ है रास्ता ऊंचा नीचा भले ही हो लेकिन मंजिल एकदम साफ दिखाई दे रही है इसलिए वह बिल्कुल भी देर ना करते हुए एकदम से अपने होठों को आगे बढ़ाया और कमला के लाल-लाल होठों पर रख दिया कमला पल भर के लिए सकपका गई वह अपने होठों को पीछे खींच ले आश्चर्य से सूरज उसे देखने लगा तो अगले ही पल कमला खुद अपने होठों को एकदम से सूरज के होठों पर रखकर पागलों की तरह चुंबन करने लगी कमला को सीखाने की जरूरत नहीं थी वह खेली खाई औरत थी एक साथ दो दो मर्दों को संभालती थी,, इस मदहोश कर देने वाले चुंबन से सूरज की हालत खराब होने लगी वह बैलगाड़ी की रस्सी को अपने हाथों से छोड़ दिया और अपने दोनों हथेलियां को कमला की खरबूजे जैसी चूचियों पर रख दिया जो कि अभी भी ब्लाउज में कैद थी,,, सूरज पागलों की तरह ब्लाउज के ऊपर से ही कमला की चूचियों को मसलने लगा,,, सूरज पूरी हथेलियां को फैला कर बराबर उसकी चूचियों पर रख रहा था जो की ब्लाउज में कैद थी और पूरी तरह से उसकी हथेली में आ भी नहीं रही थी लेकिन फिर भी बड़ी शिद्दत से सूरज कमला की चूचियों से खेलने लगा था। और कमला एक हाथ में सूरज के लंड को दबाए हुए बराबर उसे अपने होठों का रसपान करा रही थी,,,, सूरज दूर-दूर तक नजर दौड़ा कर देख रहा था कि कहीं कोई दिखाई तो नहीं दे रहा है लेकिन दूर-दूर तक सन्नाटा था केवल पंछियों की आवाज आ रही थी सुनसान सड़क पर दूर-दूर तक कोई नहीं दिखाई दे रहा था वैसे भी दोपहर का समय था इसलिए और भी ज्यादा सन्नाटा फैला हुआ था मौके की नजाकत को समझते हुए सूरज अपनी उंगलियों का सहारा लेकर कमला के ब्लाउज का बटन खोलने लगा।

यह देखकर कमला अपने मन में ही सोच रही थी कि लड़का सच में कितना तेज है इसे बिल्कुल भी डर नहीं है की बैलगाड़ी में पीछे दो जवान लड़कियां बैठी हुई है और वह कोई एकांत में कमरे में या खेत में नहीं बल्कि खुली सड़क पर इस तरह की हरकत कर रहा है लेकिन कमला भी निश्चिंत थी क्योंकि वह जानती थी कि इस सड़क पर कोई आता जाता नहीं था,,,, सड़क पर घास उगी हुई थी जिसका मतलब साफ था कि कई दिनों से इधर से किसी का आना-जाना नहीं हुआ था,,,, बैलगाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी इसलिए पीछे बैठी दोनों लड़कियों को बिल्कुल भी शक नहीं हो रहा था कि आगे क्या हो रहा है और वैसे भी सूरज और कमला बहुत धीरे-धीरे बात कर रहे थे जिससे दोनों लड़कियों को उन दोनों की बातचीत भी सुनाई नहीं दे रही थी इसलिए आगे के प्रकरण के बारे में उन्हें कोई अंदाजा ही नहीं था। देखते ही देखते सूरज फुर्ती दिखाते हुए कमल के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और उसकी चूचियों को नंगी कर दिया,,,, सूरज से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हथेलियों को उसकी नंगी चूचियों पर रखकर दबाना शुरू कर दिया जो कि एकदम दशहरी आम की तरह कड़क थे,,,,, सूरज के द्वारा तन मर्दन की क्रिया का कमला भी आनंद ले रही थी,,,,,,, दोनों के होंठ पल भर के लिए भी अलग नहीं हो रहे थे देखते ही देखते कमला अपनी हथेली को पजामी के अंदर डाल दी और उसके नंगे लंड को पकड़ ली जो की काफी गर्म था उसकी गर्माहट इसकी मोटाई को अपनी हथेली में महसूस करके वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी अब वह उत्तेजना के मारे सूरज के लंड को मुठीयाना शुरू कर दी थी,,, सूरज भी मत हो रहा था कुछ देर तक हो इसी तरह से कमला की चूचियों को मसलते रहा दबाते रहा उसकी छोटी सी खजूर को उंगलियों के बीच रखकर मसलता रहा,,, सूरज की हरकतों से कमला पानी पानी हो गई थी, उसकी साड़ी उसके मदन रस से गीली होने लगी थी,,,,,।

बैलगाड़ी पर बैठे-बैठे सूरज जवानी का मजा लूट रहा था,,, कमला के लिए भी है पहले ही मौका था जब वह खुले में इस तरह से एक जवान लड़के से मजा लूट रही थी अब तक उसने अपनी जवानी किसी जवान लड़के के हाथों में नहीं सोंपी थी क्योंकि उसका मानना था कि जवान लड़के अनुभव के कच्चे होते हैं और वह एक जवानी से भरी हुई औरत की प्यास बुझाने में समर्थ नहीं होते लेकिन अपनी सुझभुज से उसने अंदाजा लगा ली थी कि भले ही सूरज की उम्र कम थी लेकिन अनुभव से भरा हुआ था इसीलिए तो वह अपनी मदद कर देने वाली जवानी उसके सामने परोस दी थी,,,। सूरज से रहा नहीं जा रहा था बेल गाड़ी धीरे-धीरे,,,, आगे बढ़ रही थी और सूरज एक हाथ उसकी चूची से हटाकर आगे से उसकी साड़ी मे डाल दिया,,,, और उसे ज्यादा देर नहीं लगी कमला की रसीली बुर तक पहुंचने में वह पूरी तरह से गीली थी मदन रस से चिपचिपी हो गई थी इसके बावजूद भी सूरज उत्तेजना में उसकी बुर को अपनी हथेली में एकदम से दबोच लिया और कमला गनगना अब दोनों के नग्न अंग एक दूसरे के हथेलियो में थे,,,, कमला के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,, यह देख कर सूरज बोला,,,।

जरा धीरे आवाज निकालो चाची कहीं दोनों लड़कियों ने सुन लिया तो गजब हो जाएगा,,,,।
(सूरज की बात सुनकर कमला अपनी भावनाओं पर काबू करने लगी लेकिन फिर भी उसके मुंह से हल्की-हल्की आवाज तो निकल ही रही थी,,, दोनों पूरी तरह से काम ग्रस्त हो चुके थे,,,, कमला सूरज के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी लेकिन यहां जगह का अभाव था अगर दोनों लड़कियां ना होती तो इस समय सूरज खुद ही बैलगाड़ी को पेड़ के नीचे उसकी छाव में रोक कर बैलगाड़ी में लेटा कर उसकी जमकर लेता लेकिन दोनों लड़कियों की मौजूदगी में काम बिगड़ गया था लेकिन फिर भी कमला ऐसी हालात में रास्ता ढूंढ ही लेती है,,, वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई दिल गाड़ी चल रही थी वह नीचे लकड़ी पर पैर रखकर खड़ी थी धीरे से सूरज की तरफ मुंह करके घूम गई सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था उसके हाथों में बैलों की रस्सी नहीं थी लेकिन फिर भी बैल समझदार थे वह बड़े आराम से सड़क पर आगे बढ़ रहे थे,,,, कमला इधर-उधर दिखी और फिर बेल के कंधे पर जो लकड़ी का लगाम लगाया जाता है वह बैलगाड़ी से जुड़ा हुआ था और इस पर धीरे से कमला गांड रखकर बैठ गई यह देखकर सूरज बोला,,,,)

संभलकर चाची गिरना नहीं,,,।

नहीं गिरूंगी,,,(और इतना कहने के साथ यहां आगे बढ़कर फिर से सूरज के लंड को पकड़ ली सूरज फिर से मस्त होने लगा,,,,, कुछ देर मुठियाने के बाद धीरे से अपने प्यासे होठों को अंकित के मोटे तगड़े लंड पर रख दी और अपने होठ से उस पर रगड़ने लगी पल भर में ही सूरज मदहोश होने लगा वाकई में मर्द को खुश करने की कला कमला अच्छी तरह से जानती थी तभी तो दो-दो मर्दों को एक साथ मजा देती थी,,,, सूरज बार-बार अपनी आंखों को बंद कर ले रहा था क्योंकि वह मदहोशी के सागर में डूबने लगा था और देखते-देखते कमला अपने लाल-लाल होठों को खोलकर सूरज के मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में भर ले और चूसना शुरू कर दी,,, कमला खेली खाई औरत थी इसलिए उसे कुछ ज्यादा सीखना नहीं था वह अपने आप ही सूरज को खुश करने में लगी थी और सूरज भी अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसकी नंगी चूचियों को बराबर दबा रहा था,,,,,,,,, सूरज और कमला दोनों बेशर्म हो चुके थे, उन्हें इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी कि वह किस जगह पर है किसके साथ हैं खुली सड़क पर भले यहां पर इंसानों का नाम और इंसान नहीं था लेकिन सड़क थी कोई भी आ जा सकता था लेकिन इस बात की परवाह दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी बैलगाड़ी में भी दो जवान लड़कियां थी तो छोटे बच्चे लेकिन इस बात का भी उन्हें कोई मलाल नहीं था बस उन्हें जवानी का मजा लूटना था,,, सूरज तो खैर औरत को चोदने का मौका ही ढूंढता है लेकिन कमला तो दो बच्चों की मां थी समझदार थी लेकिन वह भी वासना में बह चुकी थी उसे बिल्कुल भी शर्म नहीं थी इसीलिए तो इस समय अपने लिए जगह बनाकर सूरज के लंड को मुंह में लेकर बराबर चूस रही थी।

कमला के दोनों दशहरी आम सूरज के हाथों में थे सूरज ने जोर-जोर से दबा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे सच में वह आम हो और वह दबा दबा कर उनका रस निकाल लेना चाहता हो,,,,, कमला को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में सूरज का लैंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था क्योंकि बड़े आराम से उसके गले तक पहुंच भी जा रहा था और उसका मुंह पूरा का पूरा खुला हुआ था,,,, बड़ी मुश्किल से वह अपने मुंह को खोलकर सूरज के लंड को मुंह में लेकर चुस रही थी।,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से कमला मजा लेती रही वह भी जानती थी कि जिस गांव जाना है वह गांव अब ज्यादा दूर नहीं था इसलिए वह धीरे से अपने मुंह में से सूरज के लंड को बाहर निकाली और गहरी गहरी सांस लेने लगी इतना मोटा तगड़ा लंड मुंह में लेने की वजह से उसकी दोनों आंखें ऐसा लग रहा था कि जैसे बाहर निकल आएंगे उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो चुका था,,,, यह देख कर सूरज मुस्कुराते हुए बोला।

कैसा लगा चाची,,,!


बहुत बड़ा है,,,,( हांफते हुए वह बोली,,,, फिर उसे न जाने क्या सोचा वह धीरे से जिस पाटी पर सूरज बैठा हुआ था उसके इर्द-गिर अपने दोनों पैर रखकर एकदम से खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,,, अब सूरज के लिए काफी दिक्कत वाला काम आने वाला था वह कभी सोचा भी नहीं था कि एक औरत इतनी भी बेशर्म हो सकती है वह पूरी तरह से अपनी साड़ी को कमर तक उठती थी सूरज जानता था कि अब उसे क्या करना है अपनी साड़ी को कमर तक उठाने के बाद वह बैलगाड़ी की छावनी पर दोनों हाथ रखकर खड़ी हो गई और अपनी बर को सूरज के मुंह पर सटाने लगी रगड़ने लगी,,,, सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि उसे क्या करना है वह पागल हुआ जा रहा था एक अलग ही अनुभव से मिलने वाला था वह दोनों हाथ से कमला की मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर उसकी मलाईदार बुर को चाटने लगा,,,, कमला पागल होने लगी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि सूरज इतने अच्छे तरीके से बुरे की चटाई करता होगा लेकिन उसके सोच के विपरीत सूरज उसे पर भारी पड़ने लगा था जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ अंदर डालकर उसे चाट रहा था,,,, सब कुछ बड़ी जल्दी से हो रहा था बैलगाड़ी रुकने का नाम नहीं ले रही थी बैलों के पैरों में बंधे घुंघरू सड़क के सन्नाटे को चीरते हुए आगे बढ़ते चले जा रहे थे लेकिन घुंघरू की आवाज को सुनने वाला वहां इन लोगों के सिवा दूसरा कोई नहीं था बैलगाड़ी के पीछे बैठी दोनों बहनों को तो हल्का सा अाभास तक नहीं हुआ था कि आगे क्या हो रहा है,,,, वह दोनों तो अनजान थी खरबूजा खाने के बाद उन दोनों की आंख लग गई थी,, बच्चे भी आराम से सो रहे थे,,,,, और कमला अपने काम में लगी हुई थी,,,,

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कमला की हालत खराब हो रही थी क्योंकि उसकी बुर की छटाई करते हुए सूरज अपनी दो उंगलियों को एक साथ उसकी बुर में अंतर बाहर करते हुए डाल दिया था उसका बदन अकड़ने लगा था वह झड़ने के कगार पर थी वह बैलगाड़ी की ऊपरी छावनी को कस के पड़कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दी थी जैसे मर्द औरत की बुर में ठोकर मारते हैं इस तरह से वह सूरज के मुंह में ठोकर मार रही थी सूरज भी दोनों हाथों से उसकी कारण को तब पहुंचकर पूरा साथ दे रहा था और देखते ही देखते उसकी बुर से मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी जो सूरज के चेहरे को पूरी तरह से भिगोने लगी,,,,,, लेकिन सूरज उसकी मलाई को अपनी जीभ से चाटे जा रहा था अपने गले के अंदर उतारे जा रहा था,,,,, कमला का काम तमाम आ चुका था लेकिन वह जानते थे कि अभी खेल खत्म नहीं हुआ था,,,, वह खड़े-खड़े ही गहरी गहरी सांस ले रही थी कमल का पानी निकल गया था लेकिन सूरज बरकरार था सूरज अभी एक असली मर्द का एहसास उसे दिलाना चाहता था इसलिए उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ बैठने लगा के दिखाई कमला जानती थी कि उसे क्या करना है वह धीरे से अपनी टांगों को खोलकर सूरज के मोटे तगड़े लंड पर अपनी गुलाबी छेद को रख दी,,, मोटे सुपाडे की गर्माहट अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर महसूस करके कमल के तन बदन में सुरसुरी छाने लगी वह मदहोश होने लगी उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में सुपड़ा कुछ ज्यादा ही मोटा था इसलिए वह अपनी भारी भरकम गांड का दबाव एकदम से लंड पर बढ़ते हुए बैठने लगी,,, सूरज भी दोनों हथेलियां में उसकी मटके जैसी गांड को संभाल कर उसे अपने लंड पर व्यवस्थित करने लगा और देखते ही देखे बुर की चिकनाहट पाकर सुपाड़ा अंदर की तरफ सरकने लगा,,, जैसे-जैसे सुपाड़ा अंदर की तरफ जा रहा था वैसे-वैसे कमला के चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे,,,,

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सूरज उसके खूबसूरत चेहरे को ही देख रहा था,,, देखते ही देखते कमला की चालाकी और सूरज की सूझबूझ के कारण सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में खो गया था और फिर सूरज के कंधों को पकड़ कर सुपाड़ा अपनी भारी भरकम गांड को उठाने बैठाने लगी थी,,,, कमला यह प्रक्रिया बड़े धीरे-धीरे कर रही थी क्योंकि एक बार लय बनने के बाद वह रुकने वाली नहीं थी,,,, धीरे-धीरे वह बड़े आराम से अपनी बुर की गहराई में सूरज के मोटे तगड़े लंड को ले रही थी सूरज उसे अपनी बाहों में भरकर उसके धक्को का मजा ले रहा था, कमला की बुर की तपती हुई गर्मी सूरज को एकदम साफ महसूस हो रही थी अगर दूसरा कोई होता तो उसकी गर्मी से ही पिघल जाता है लेकिन सूरज दूसरे मर्दों की तरह बिल्कुल भी नहीं था जब तक औरत को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर देता था तब तक उसका पानी नहीं निकलता था और यहां भी वह कमला की जवानी पर पूरी तरह से छा चुका था,,,, नीचे से भी सूरज बराबर धक्का लगा रहा था हर धक्के के साथ कमला के मुंह से हल्की-हल्की आवाज निकल रही थी जिसे वह बहुत काबू में लिए हुए निकाल रही थी। सूरज का मोटा तगड़ा लंड हर धक्के के साथ उसके बच्चेदानी पर स्पर्श कर रहा था कमला के लिए यह हैरानी की बात थी क्योंकि अब तो कुछ नहीं बहुत से मर्दों के साथ संभोग कर चुकी थी लेकिन उसके बच्चेदानी तक कोई पहुंच नहीं पाया था सूरज पहले मर्द था जो बड़े आराम से उसके बच्चेदानी पर ठोकर लगा रहा था।

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कमला मदहोश होकर सूरज के लंड पर अपनी गांड पटक रही थी। और उसकी दशहरी जैसी आम पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर उछल रहे थे जिसे रह रहकर सूरज उसे अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर देता था जब जब वह दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीता तब तब कमला की हालत और ज्यादा खराब हो जा रही थी,,,, एक बार फिर से कमला झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी और इस बात का अहसास होते ही सूरज पूरी तरह से तैयार हो गया क्योंकि वह भी झड़ने वाला था वह कमला की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे थोड़ा आगे की तरफ झुका दिया और दोनों पैर का सहारा लेकर वह अपनी गांड को लकड़ी के पाटी से थोड़ा ऊपर उठा लिया और फिर जमकर धक्के लगाने लगा इस तरह से तो कमला की हालत खराब होने लगी क्योंकि उसे अभी तक लग रहा था कि वह सूरज पर भारी पड़ रही है लेकिन आप उसे एहसास होने लगा था कि सूरज असली मर्द है वह पूरी तरह से कमला पर भारी पड़ रहा था उसके हर एक धक्के पर कमला के चेहरे का हवा बदल रहा था उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव के साथ-साथ दर्द की रेखा भी झलक रही थी उसे दर्द भी हो रहा था तड़प भी रही थी और अत्यधिक आनंद भी आ रहा था,,,, इस अवस्था में उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़े पूरा कर लगाकर सूरज उसकी बुर में लंड पेल रहा था अगर इस समय कमला बिस्तर पर होती तो शायद चारपाई टूट जाती,,,,, अगर ही पर कमल का बदन पूरी तरह से अकड़ने लगा वह सूरज पर विश्वास करके उसके हाथों में अपनी जवानी सौंप कर पीछे की तरफ पूरी तरह झुक गई थी मानो कि जैसे किसी बिस्तर पर लेटी हो और सूरज भी उसके विश्वास पर खड़े उतारते हुए उसे बिल्कुल भी गिरने नहीं दिया और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर तब तक पेलता रहा जब तक की दोनों का पानी एक साथ निकल नहीं गया,,,।



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दोनों झड़ चुके वासना का तूफान शांत हो चुका था धीरे से सूरज के लंड पर से वह उठने लगी उसकी बुर में से सूरज का मोटा तगड़ा लंड बाहर निकल चुका था लेकिन झड़ने के बावजूद भी अभी भी उसी तरह से खड़ा था यह देखकर वह हैरान थी उसे इस बात का मलाल था कि अगर किसी कमरे में दोनों की मुलाकात होती तो यह मजा और ज्यादा बढ़ जाता,,,, वह अपने कपड़ों को दुरुस्त करने लगी और फिर से पहले की तरह बैठ गई लेकिन इस बीच सूरज उसके बदन से छेड़खानी करता रहा उसे मजा आ रहा था अगर मौका होता तो वह फिर से उसकी चुदाई कर देता लेकिन अब मौका बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि जहां उसे उतरना था वह गांव आ चुका था वह धीरे से बैलगाड़ी से नीचे उतर गई सूरज भी नीचे उतर गया पीछे जाकर देखा तो दोनों बहने और दोनों बच्चे सो रहे थे वह उन दोनों को उठाया,,,, कमला बहुत खुश थी क्योंकि आज किस्मत से उसे सूरज का साथ मिला था वह अपने दोनों बच्चों के साथ गांव के रास्ते मुड़ गई लेकिन बार-बार सूरज की तरफ ही देख ले रही थी वहीं पास में ही हेड पंप था जहां पर सूरज रुक कर अपना हाथ मुंह धोया और पानी पीने लगा नीलू और शालू भी अपना हाथ मुंह धो कर पानी पीने लगे सूरज दो बाल्टी बैलगाड़ी में रखा था उसमें पानी भरकर बेल के सामने रख दिया बैल भी पानी पीने लगे और फिर थोड़ी देर में वह लोग आगे के लिए निकल गए।
 
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Kumarshiva

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सूरज बड़े चलाकी से कमला को अपने आगे बैठने के लिए मजबूर कर दिया था भले ही कमला उसकी मां की सौतन थी लेकिन कमला को देखकर सूरज का भी लंड खड़ा हो जाता था, अपने बाप के साथ उसने कमला की काम कलाओं को बड़ी बारीकी से देखा था एक मर्द को खुश करने की कल उसे अच्छी तरह से आई थी,,, मर्दों को रिझाने की अदा बेहद काबिले तारीफ थी भले ही फिर वह मर्द के सामने अपनी गांड मटका के चलना हो या फिर धीरे-धीरे अपने बदन से वस्त्र उतार कर वस्त्र विहीन होना हो सभी कलाओं में वह पूरी तरह से पारंगत थी और उसकी यही कला का सूरज भी दीवाना हो गया था,,,।



कुछ देर पहले ही उसने शालू को अपनी हरकतों से मदहोश कर दिया था नीलू के मुकाबले शालू थोड़ी शर्मीली और शांत स्वभाव की थी मर्दों की हरकत के बारे में उसे ज्यादा कुछ जानकारी नहीं थी और ना ही उसने कभी मर्दों के उसे कठोर रंग को देखा था जिसे देखकर अक्सर और तो की टांगों के बीच की पतली दरार पानी पानी हो जाती है लेकिन कुछ देर पहले ही उसने उसे कठोर अंग को अपनी हथेली में महसूस की थी उसकी मोटाई उसकी गरमाहट को पल भर के लिए महसूस करके वह शर्म से पानी पानी हो गई थी। इसलिए तो वह एकदम शांत थी,,,, और अपने मन में यही सोच रही थी कि अब उस औरत का क्या होगा जो सूरज के साथ बैठने के लिए तैयार हो गई थी यही सोच कर उसका दिल जोरो से धड़क रहा था। सूरज अभी भी कमला को ठीक से अपने आगे बैठाने में व्यस्तथा,, उसका दिल सोच कर ही जोरों से धड़क रहा था कि एक जवानी से भरी हुई औरत उसकी टांगों के बीच बैठने जा रही थी उसकी गदराई मोटी मोटी गांड निश्चित तौर पर उसके मोटे तगड़े लंड से स्पर्श होने वाली थी,,,, सूरज पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डूबा जा रहा था क्योंकि कुछ देर पहले ही, मुखिया की बेटी को अपने लंड के अकड़ पन का एहसास दिलाया था और वैसे भी सूरज का अगला शिकार शालू ही थी जिसे भोगकर वह मुखिया के घर की तीनों औरतों का मजा ले चुका होगा,,,, और शायद पुर गांव में पूरे गांव में क्या गांव के अगल-बगल के 100 गांव में सूरज एक अकेला लौटा मर्द होगा जो एक ही घर की तीनों औरतों के साथ मजा ले चुका होगा,,,।



ठीक से बैठो चाची आराम से कोई जल्दबाजी नहीं है,,, अरे मैं तो चला जा रहा था लेकिन तुमको छोटे-छोटे बच्चों के साथ खड़ी दुपहरी में ज्यादा देखकर मुझे रहा नहीं गया इसलिए तुम्हारी मदद कर रहा हूं तुम देख तो रही हो हमारी बैलगाड़ी में बिल्कुल भी जगह नहीं है,,,।



हां वह तो मैं देख ही रही हूं तुम्हारा बड़प्पन है जो मुझे बैलगाड़ी में जगह दे रहे हो,,, (कमला अपने आप को सूरज की दोनों टांगों के बीच व्यवस्थित करते हुए बोली उसकी भारी भरकम गांड पहले प्रयास में ही सूरज के मोटे तगड़े लंड से स्पर्श हो रही थी लेकिन इसका एहसास अभी कमला को बिल्कुल भी नहीं था कमल तो यह सब सहज रूप से ले रही थी उसे नहीं मालूम था कि सूरज के मन में कुछ और चल रहा है,,,, कमला अपनी भारी भरकम गांड को सूरज की दोनों टांगों के बीच व्यवस्थित करके बैठ चुकी थी, सूरज को बड़ा ही उत्तेजनात्मक पल लग रहा था और यह सूरज के लिए बहुत खुशी की बात थी कि आज कमला उसकी दोनों टांगों के बीच बैठी हुई थी जिसे वह अक्सर चुदवाते हुए देखा था इसकी बड़ी-बड़ी गांड हमेशा से उसके आकर्षण और उत्तेजना का केंद्र बिंदु बना था,,,, उसके गुलाबी छेद में लंड को अंदर बाहर होते हुए देखा था,, और तभी से उसका भी यही ख्वाब था कि वह भी कमला की चुदाई करें और आज किस्मत देखो की कमला खुद उसकी गोद में आकर बैठ चुकी थी,,,, किसी ने सच ही कहा है किसी को पाने की चाहत अगर ज्यादा तेज हो तो वह चीज अक्सर उसे मिल ही जाती है,,,, सूरज बहुत खुश था उसका यह सफर बेहद रोमांचक होने वाला था।



एक बार फिर से बैल गाड़ी चल चुकी थी,, सूरज इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि अगर किसी औरत के दिल में जगह बनाने हो तो उससे बातचीत के दौरान उसकी खूबसूरती की तारीफ करने से औरत जल्दी उसकी बातों में आ जाती है और सूरज अपने इस हुनर को यहां पर बाकायदा प्रदर्शित करने वाला था इसलिए वह बैलगाड़ी चलते हुए बात करते हुए बोला।



वैसे चाची इतनी धूप में कहां चली जा रही थी।



अरे बेटा,,, पास के गांव में शादी है वहीं जा रही थी,,,।



तो थोड़ा जल्दी निकल गई होती इतनी धूप में निकलने की क्या जरूरत थी,,,।



अब घर का काम इतना रहता है कि करते-करते दोपहर हो गई वरना मैं भी सुबह ही निकलना चाहती थी।



वैसे लड़के की शादी है की लड़की की,,,,



लड़की की,,,,,।



चलो तब तो कोई बात नहीं शाम को बारात आएगी,,,।



हां बेटा बारात तो शाम को ही आएगी लेकिन काम भी तो करना पड़ता है ना अब जा रहे हैं तो ऐसा तो नहीं की दिनभर बैठे रहना पड़ेगा काम में हाथ तो बंटाना पड़ेगा,,,।



वह तो है चाची,,,, वैसे भी शादी लड़के की हो या लड़की की काम करने में भी मजा आता है,,,,।



हममम,,,,।

(दोनों के बीच बातचीत जारी हो चुकी थी बैलगाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी पीछे बैठी शालू और नीलू दोनों छोटे बच्चों को संभाले हुए थी लेकिन शालू का ध्यान सूरज की बातों पर ही लगा हुआ था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि इस समय सूरज का लंड खड़ा हो चुका होगा और उसे औरत की गांड में पीठ पर चुभ रहा होगा,,,, और वाकई में सूरज का लंड खड़ा हो चुका था कमला रानी के बदन की मादक खुशबू सूरज को उत्तेजित कर रही थी,,, इस दौरान बैलगाड़ी हिचकोले खाते हुए ऊंची नीची पगडंडी पर आगे बढ़ती चली जा रही थी जिसे रह-रह कर कमल का भजन पीछे की तरफ हो जाता था और सूरज की छाती से एकदम से उसकी पीठ चिपक जाती थी पहले तो यह सब कमला को सहज लग रहा था लेकिन जल्द ही लंड की गर्माहट उसे अपनी पीठ के निचले स्तर पर महसूस होने लगी जहां पर नितंबों की गहरी लकीर की शुरुआत होती है,,,, कमला खेली खाई औरत थी मर्दों की नस-नस से वाकिफ थी उसे एहसास हो गया था कि सूरज का लंड खड़ा हो चुका है,,,, लेकिन वह सामान्य बनी रही क्योंकि उसे लग रहा था कि हो सकता है कि यह सब सहज रूप से हुआ हो,,,, क्योंकि अभी तक सूरज ने ऐसी वैसी कोई हरकत भी नहीं किया था जैसे उसके मन की जिज्ञासा को जाना जा सके इसलिए कमल भी सामान्य बनी रही दोनों के बीच बातचीत जारी थी। तभी सूरज कमल से बोला।)



चाचा जी क्या करते हैं चाची,,,,।

(सूरज को अच्छी तरह से मालूम था कि उसका पति नहीं था लेकिन फिर भी वहां औपचारिकता निभाते हुए पूछ ही लिया इस सवाल पर कमला शांत होते हुए जवाब दी)



वह नहीं है कुछ साल पहले ही गुजर गए,,,।



ओहहह ,,,, मैं माफी चाहता हूं मुझे मालूम नहीं था।



कोई बात नहीं,,,,।



तो फिर खर्चा कैसे चलता है क्योंकि तुम्हारी तो दो बच्चे हैं उनकी देखरेख खाना पीना सब कुछ की जिम्मेदारी तो अब तुम्हारे सर पर है तो यह सब कैसे चलता है।



चलना पड़ता है मजदूरी कर लेती हूं दूसरे के खेतों में काम कर लेती हूं इसी तरह से गुजारा चल रहा है,,,।

(उसकी बात सुनकर सूरज अपने मन में ही बोल साले कितनी बड़ी रंडी है इतना झूठ बोल रही है मेरे पिताजी को गांड दे देकर उसकी सारी कमाई ले लेती है और कहती है की मजदूरी करती हूं एक साथ दो-दो मर्दों को फसाइ है,,,,, उसकी बात पर सांत्वना देते हुए वह उससे बोला,,,)



बड़ा मेहनत करती हो तुम सच में यह बहुत बड़े हिम्मत की बात है कि तुम दो-दो बच्चों का गुजारा मजदूरी करके चला रही हो पति के जाने के बाद क्या तुम दूसरी शादी के बारे में नहीं सोची,,,,,





नहीं,,,,, (एकदम शांत होते हुए जवाब दे वैसे अब उसके बदन में अजीब सी लहर उठने लगी थी क्योंकि खेली खाई कमला अपनी पीठ पर गर्माहट महसूस करके सूरज के लंड की लंबाई और मोटाई का अंदाजा लगा चुकी थी,,,, रह रहकर वह गहरी सांस ले ले रही थी जो कि इस बात का सबूत था कि उसके बदन में मस्ती की लहर उठ रही थी,,, सूरज भी एकदम से कमला को चांपे हुए था बैलगाड़ी के बैलों की रस्सियों को दोनों हाथों से वह इस तरह से पकड़ा हुआ था। जिसकी वजह से कमला उसकी बाहों में थी कमला को भी सूरज के कसरती बदन उसकी भुजाओं के बीच रहना अच्छा लग रहा था,,, कमला का ना मे जवाब सुनकर सूरज बोला)





पर तुमने ऐसा क्यों की तुम्हारी तो शुरुआत है देखो तुम्हें बुरा नहीं लगना चाहिए लेकिन मैं सच कह रहा हूं तुम अभी पूरी तरह से जवान हो तुम्हें देखने के बाद कोई का भी नहीं सकता कि तुम दो बच्चों की मां हो तुम्हें तो शादी कर लेना चाहिए जिंदगी बहुत बड़ी है।

(सूरज अपनी बातों का जाल कमला के ऊपर फेंक रहा था,, कमला को सूरज की यह बातें बहुत अच्छी लग रही थी, क्योंकि सूरज उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और दुनिया में कौन सी ऐसी औरत होगी जिसे अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनना पसंद नहीं होगा ,,, सूरज की बातें सुनकर कमल के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराते हुए बोली।)



धत् दो बच्चों की मां से कौन शादी करेगा,,,!



क्यों नहीं करेगा तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत हो तो कोई भी तुमसे शादी करने के लिए तैयार हो जाएगा तुम्हारे मैं किसी बात की कमी भी तो नहीं है खूबसूरत हो जवान हो तुम्हारा बदन भी एकदम गदराया हुआ है,,,,,, तुम्हारे में मुझे कहीं से थोड़ा सा भी कमी नहीं दिखाई दे रही है,,,,(सूरज पूरी तरह से अपनी बातों के जाल में कमला को फंसा लेना चाहता था वैसे भी उसने कमल के लिए गदराया बदन शब्द है का प्रयोग करके उसे पूरी तरह से मदहोश कर दिया था क्योंकि अक्सर यह शब्द का उपयोग औरत और मर्द के बीच के आकर्षण और मदहोशी में बोला जाता है कमला सूरज के मुंह से गदराया शब्द सुनकर उत्तेजित होने लगी थी,,,,,, फिर वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)



तुम्हें कोई कमी नहीं लग रही है ना लेकिन किसी को अगर शादी करना होगा तो कमीयां ही दिखाई देगी,,।



अंधे हैं वह लोग जिन्हें तुम्हारे में कमियां दिखाई देती है चाची मुझे तो तुम संपूर्ण खूबसूरती की मिसाल दिखाई देती हो,,,,,(इस तरह की बातें करते हुए सूरज अपनी आवाज को थोड़ी धीमी कर लिया था और जिस तरह से वह धीमी आवाज में बात कर रहा था उसी तरह से कमला भी धीरे से ही जवाब दे रही थी जिससे सूरज समझ गया था कि यह बहुत ही जल्द लाइन पर आने वाली है,,,, सूरज की बात सुनकर कमला मदहोश हो जा रही थी उसे सूरज की बातें अच्छी लग रही थी और अपने आप ही वह अपनी गांड को पीछे की तरफ खेल रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सूरज के लंड को अच्छी तरह से अपनी गांड पर चुभता हुआ महसूस करना चाह रही हो,,,,, सड़क पूरी तरह से सुनसान थी कच्ची सड़क के दोनों तरफ बड़े-बड़े पेड़ लगे हुए थे और उसकी छांव पूरे सड़क को अपनी आगोश में लिए हुए थी जिससे गर्मी में भी उन लोगों को ठंडक का एहसास हो रहा था,,,, दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा है,,,, कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही कमला कुछ बोल नहीं पा रही थी हालांकि लगातार उसे अपनी गांड के ऊपरी सतह पर सूरज के लंड की गर्माहट अच्छी तरह से महसूस हो रही थी उसका मन कर रहा था कि हाथ पीछे की तरफ ले जाकर के उसके लंड को पकड़ ले लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी क्योंकि दोनों के बीच अभी इतनी जान पहचान नहीं थी,,, सुनसान सड़क को देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)



अच्छा चाची काफी देर से हम लोग की सड़क पर आगे बढ़ते चले जा रहे हैं लेकिन दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा है सोचो तुम इसी सड़क से आने वाली थी ना,,,।



हां,,,,।



बाप रे तुम्हें डर नहीं लगता इतनी दुपहरी में सुनसान सड़क पर अकेले जाते हुए,,,,।



नहीं तो,,,,।



अरे अब थोड़ा डरा करो,,,, कोई लुटेरा मिल गया तो सब कुछलूट लेगा,,,,।



अरे मेरे पास क्या है लूटने को ना तो मेरे पास कोई खाने हैं और ना ही मेरे पास पैसे हैं तो लुटेरा लूटेगा क्या,,,!(मुस्कुराते हुए कमला बोली तो उसकी बात सुनकर सूरज बोला)



कैसी बात कर रही हो चाची,,, यह बोलो क्या नहीं है तुम्हारे पास,,, धन दौलत गहने से भी ज्यादा कीमती चीज है तुम्हारे पास मुझे लूटने के लिए दुनिया का हर मर्द बेताब रहता है,,,,।



ऐसा कुछ भी तो नहीं है मेरे पास खामखा बातें बना रहे हो,,,।



नहीं चाची मैं सच कह रहा हूं,,,,,।



सच कह रहे हो क्या है मेरे पास बताओ तो,,,,।





तुम्हारे पास है तुम्हारी जवानी,,,गदराई जवानी और सही मानो लूटेरा अगर लूटने आएगा तो तुम्हारे पास से पैसे या गहने नहीं लौटेगा बल्कि तुम्हारी जवानी लूट कर चला जाएगा,,,,।

(सूरज की यह बात सुनकर कमला एकदम से शर्मा गई औरशरमाते हुए बोली)



धत्,,,,, यह कैसी बातें कर रहे हो,,,,।



मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं चाची,,,,(सूरज अपनी बातों से कमला के तन बदन में उत्तेजना का तूफान उठा रहा था,,,, और सचमुच में उसकी बातें कमला के तन बदन में असर कर रही थी बहुत तेज हो रही थी उसे अपनी बर से मदर रस का बहाव होता हुआ महसूस हो रहा था और सूरज इस बीच अपनी हरकतें भी जारी रखे हुए था अपने लंड का दबाव तो उसकी पीठ पर वह एकदम बराबर बनाया हुआ था,,, लेकिन बैलों की रस्सियों को खींचते हुए वह जानबूझकर अपनी बाहों का स्पर्श दोनों तरफ से कमल की बड़ी-बड़ी चूचियों पर कर रहा था जो की ब्लाउज में कबूतर की तरह फड़फड़ा रहे थे कमला को सूरज की यह हरकत भी काफी हद तक मदहोश कर रही थी,,,,। सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)



मेरी बात का यकीन करो चाची इस तरह से अकेले कहीं आया जाया मत कीया करो,,,, अब तुम ही जरा विचार करो चारों तरफ सुनसान सड़क इंसान की जात तक यहां नहीं है ऐसे में कोई लुटेरा तुम्हारी इज्जत लूट लिया तुम्हारी चुदाई करके चला गया तो तुम किसको बता पाओगी,,,,(सूरज जानबूझकर कमला के सामने चुदाई शब्द का प्रयोग कर दिया था वह देखना चाहता था कि उसकी बात पर कमला कैसे भाव प्रकट करती है लेकिन कमल उसकी बात सुनकर कुछ बोल नहीं पाई थी और सूरज के मुंह से चुदाई सबसे सुनकर उसके बदन में गनगनाहट सी फैलने लगी थी,,,, कमला ने उसकी अश्लील बात का बिल्कुल जवाब नहीं दी तो सूरज की हिम्मत खुलने लगी और वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मैं सच कह रहा हूं चाची,,, मेरी बात को बिल्कुल भी मजाक में मत लेना अक्सर लुटेरे लुटेरे क्या कोई भी मर्द सुनसान सड़क पर तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत देखेगा तो उसका मन चोदने को ही कहेगा,,,,,।



(सूरज की बातें कमला के तन बदन में आग लग रही थी सूरज खुले तौर पर उससे चुदाई की बातें करने लगा था,,, यह देखकर कमला भी हैरान थी लेकिन वह मस्त में जा रही थी इस बात से भी वह इनकार नहीं कर सकती थी और वैसे भी सूरज जो कुछ भी कह रहा था उसमें सच्चाई थी इस बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था वह जानती थी कि इस तरह से सुनसान सड़क पर एक जवान औरत का निकलना बिल्कुल भी ठीक नहीं था लेकिन उसकी मजबूरी थी शादी में उसे पहुंचना था और उसे देर हो गई थी इसलिए वह पैदल निकल पड़ी थी वह तो अच्छा हुआ कि सूरज उसे रास्ते में मिल गया और वह बैलगाड़ी पर बैठकर जा रही थी लेकिन सूरज कि ईस तरह की बातें किसी लुटेरे से बिल्कुल भी काम नहीं बैलगाड़ी वान किस अकल में सूरज से जवानी का लुटेरा लगने लगा था,,,,, सूरज की अश्लील बातों को सुनकर उसे बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी थी,,,, लेकिन उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह सूरत से कैसे कहें कि उसे पेशाब लगी है,,,,, फिर भी वह हिम्मत जुटाकर धीरे से बोली,,,।)



जरा यहां पर थोड़ा सा रोकना तो,,,,,।





क्यों क्या हुआ चाची,,,,?



अरे बहुत जरूरी है थोड़ा रोकना तो सही,,,।



अरे लेकिन हुआ क्या बताओ तो,,,,





अरे तुम रोको बताने जैसा नहीं है,,,,।

(सूरज समझ गया था कि कमला बैलगाड़ी को क्यों रोकने के लिए कह रही थी इसलिए वह जानबूझकर मुस्कुराते हुए बोला)



अच्छा पेशाब लगी है ऐसा कहो ना मुझे लगा कि क्या हो गया,,,,,,।(ऐसा कहते हुए सूरज एकदम से बैलगाड़ी की रस्सी खींचकर बैलगाड़ी को रोक दिया,,,, लेकिन सूरज की बात सुनकर कमला शर्मा गई थी और सूरज की तरफ देखने लगी थी और देखते हुए बोली,,,)



तुम बहुत बेशर्म हो,,,,,,।



अरे चाची ऐसा नहीं है यह सब तो औपचारिक है,,,,, अच्छा लो हांथ पकड़ लो आराम से उतरना गिरना नहीं,,,,,,(सूरज के हाथ का सहारा लेकर कमला बैलगाड़ी से नीचे उतर गई और खड़ी होकर इधर-उधर देखने लगी तब तक सूरज भी नीचे उतर गया और बैलगाड़ी के पीछे जाकर उन दोनों से भी बोला,,,,)



कुछ देर के लिए हम लोग यहां रख रही है अगर पेशाब लगी हो तो कर लो,,,,,,,(सूरज एकदम बेशर्मी दिखाते हुए बोला था शालू उसकी बात सुनकर एकदम शर्म से पानी पानी हो गई थी वह आश्चर्य से नीलू की तरफ देखने लगी तो नीलू जानबूझकर शालू से बोली)



पागल है,,,,, चलो जल्दी से हम भी पेशाब कर लेते हैं,,, मुझे भी काफी देर से बड़े जोरों की लगी हुई है,,,,(इतना कहकर नीलू बच्चों को भी नीचे उतारकर खुद भी नीचे उतर गई शालू को भी बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी इसलिए दोनों बहने एक तरफ पेड़ के पास चली गई,,,,,, दोनों बच्चे भी वही खड़े-खड़े पेशाब करने लगे और कोई मौका होता तो इस समय सूरज के निशाने पर दोनों बहने होती और सूरज उन्हें पेशाब करते हुए देखा लेकिन इस समय उसका मुख्य ध्येय कमला थी इसलिए वह कमला की तरफ आगे बढ़ गया वह देख चुका था कि कमला कहां पर पेशाब करने बैठी है,,, इसलिए वह उत्साहित होता हुआ कमला की तरफ आगे बढ़ रहा था कमला अपनी धुन में झाड़ियां के बीच बैठकर पेशाब कर रही थी लेकिन वह सड़क के किनारे बैठी हुई थी और सूरज चाहता तो उसे दूर पेशाब कर सकता था लेकिन वह कमला की गांड की झलक पाना चाहता था,,, और देखना चाहता था कि उसकी उपस्थिति में कमला कैसे भाव प्रकट करती है और सूरज यही सोच कर झाड़ियों में बैठी हुई कमला को देखते हुए 5-6 कदम आगे निकल गया,,, इस बीच उसे कमला गोलाकार गांड की झलक बराबर मिली थी और वह मदहोश हो गया था,,, कमला को ईस बात का एहसास था कि सूरज उसकी तरफ देखते हुए आगे बढ़ गया लेकिन वह अपनी नंगी गांड को अपनी साड़ी से छुपा नहीं पाई थी ढंक नहीं पाई थी,, और शायद इसलिए की अंदर ही अंदर वह भी अपनी जवानी की झलक सूरज को दिखाना चाहती थी,,,, सूरज कमला से ज्यादा दूर नहीं क्या बस 5_ 6 कदम पर झाड़ियां के पास जाकर खड़ा हो गया जहां से वह कमल को अपना लंड दिखा सके।



सूरज अच्छी तरह से जानता था कि कमला उसके पास ही बैठी हुई है लेकिन वह जानबूझकर उसके सामने पेशाब करना चाहता था पेशाब करना तो एक बहाना था वह कमल को अपनी मर्दाना ताकत दिखाना चाहता था अपने मोटे तगड़े लंड के दर्शन करना चाहता था,,, सूरज को अपने बेहद करीब खड़ा देख कर कमला के तन-बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह चोर नजरों से सूरज की तरफ देख रही थी, और अगले ही पल सूरज अपने पजामे को नीचे करके अपने मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल लिया जो कि अपनी औकात में आकर खड़ा था जिसे देखते ही कमला का मुंह आश्चर्य से खुल गया,,,, वह आश्चर्य से फटी आंखों से सूरज के मर्दाना अंग को देखते रह गई उसे तो अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था क्योंकि आज तक उसने इतना मोटा तगड़ा लंड कभी नहीं देखी थी,,, सूरज भी पूरी तरह से बेशर्मी पर उतर आया था वह अपने हाथ की उंगलियों से अपने लंड को पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करके हिलाते हुए पेशाब करने लगा इस अवस्था में देखकर कमला की बुर उत्तेजना से फूलने पिचकने लगी,,,, हालात पूरी तरह से मदहोशी से भर चुके थे। दोनों तरफ जिज्ञासा और कुतुहल बढ़ती जा रही थी। सूरज पहले से ही कमला को पाने का मन बना लिया था,, और सूरज की कामुक हरकतें कमल की दोनों टांगों के बीच की पतली दरार को पिघला रही थी उसकी जवानी की आग बढ़ती जा रही थी उसकी मदहोश कर देने वाली जवानी की तपन बढ़ती जा रही थी, जिसे शीतलता प्रदान करने के लिए ठंडे पानी की बौछार की जरूरत थी।

बड़ा ही कामुक नजारा था बैलगाड़ी के उसे तरफ दोनों बहने सलवार को नीचे करके पेशाब करने बैठी थी और बैलगाड़ी के इस तरफ सूरज और कमला पेशाब कर रहे थे,,, कमला की गदराई गांड झाड़ियों के बाहर झांक रही थी जिसे सूरज पेशाब करते हुए भी अच्छी तरह से देख पा रहा था दूर से निकलने वाली सिटी की आवाज सूरज को एकदम साफ सुनाई दे रही थी,,, अपना इरादा दर्शाने के लिए सूरज एकदम से अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भर लिया था और उसे आगे पीछे करके मुठीयाने लगा था,,, यह देख कर तो कमला का भी धैर्य जवाब देने लगा, उसका मन मचलने लगा अगर साथ में दोनों लड़कियां ना होती तो इस समय वह सच में आगे बढ़कर सूरज के लंड को अपने मुंह में लेकर उसकी मोटाई और लंबाई का जायजा ले ली होती,,, इस समय केवल वह सूरज के लंड को देखकर गरम आहे लेने किसी और कुछ नहीं कर सकती थी,,, दोनों पेशाब कर चुके थे दोनों लड़के अभी पेशाब करके अपनी सलवार ऊपर करके सलवार की डोरी बढ़ रही थी यह देखकर सूरज को वहां से हट जाना ही उचित लगा और वह अपना पजामा ऊपर करके बैलगाड़ी के पास आ गया,,,, कमला कुछ पल के लिए पेशाब करने के बाद भी वहीं बैठी रह गई क्योंकि वह सूरज के मुसल के बारे में सोच रही थी,,, सूरज ही आवाज लगाता हुआ बोला।

क्या हुआ चाची कर ली कि नहीं,,, ।(जिस तरह से सूरज ने आवाज लगा कर बोला था उसे सुनकर कमला शर्म से पानी पानी हो गई और शालू भी सूरज की इस बात से हैरान हो गई थी नीलू एकदम से उसे मीठी फटकार लगाते हुए बोली)

तुम्हें शर्म नहीं आती औरत से इस तरह से बात करते हो,,,।

क्यों क्या हुआ इसमें कौन सी शर्म आने की बात है,,,, यह तो सब लोग करते हैं पूछ लिया तो क्या हुआ,,,?

पूछ लिया तो क्या हुआ,,,(नीलू मुंह बनाते हुए बोली कब तक कमला भी वहां आ गई थी,,,, सूरज उन बच्चों को बैठाने लगा नीलू और शालू बैठ चुकी थी,,,, कमला बैलों के पास खड़ी होकर सूरज के आने का इंतजार कर रही थी और सूरज नीलू और शालू से बोला,,,,,,) एकाद खरबूजा काटकर बच्चों को खिला दो भूख लग गई होगी और तुम दोनों भी खा लो,,,।

लेकिन खरबूजा काटेंगे किससे,,, (शालू हैरान होते हुए सूरज से बोली तो सूरज मुस्कुराते हुए बोला)

चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है,,,, (इतना कहकर सूरज शालू के पास ऐसे ही पीछे की तरफ हाथ डालकर एक चाकू बाहर निकाल दिया और शालू को थमाते हुए बोला,,,,) चलने से पहले मैं यह सब रख लिया था मुझे मालूम था कि कब इसका काम पड़ जाए पता नहीं,,,, (यह सुनकर नीलू मुस्कुराते हुए बोली)

बहुत समझदारी का काम किए हो,,,,।

तो क्या जीवन में समझदार बनना बहुत जरूरी होता है,,,,,,,,।

अच्छा अब जाकर बैलगाड़ी चलाओ यही खड़े-खड़े समय बिता दे रहे हो,,,,।

जो हुकुम छोटी मालकिन,,,, (इतना कहकर सूरज आगे की तरफ चला गया और नीलू मुस्कुराने लगी, बड़ी बेसब्री से कमला सूरज का इंतजार कर रही थी क्योंकि कुछ देर पहले जो नजारा उसने अपनी आंखों से देखी थी उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह अपने मन में सोच रही थी कि इतना मोटा तगड़ा है तभी तो पूरी पीठ गर्मा जा रही थी,,, सूरज मुस्कुराते हुए कमला की तरफ देखा और बैलगाड़ी पर चढ़ते हुए बोला,,,)

अभी कितनी दूर है चाची,,,,,?

बस आधा रह गया है,,,।

ओह,,, तब तो अच्छा हुआ कि तुम्हें मैं मिल गया वरना कितना पैदल चलना पड़ता,,,।

बात तो तुम एकदम ठीक कह रहे हो,,,, (अपना हाथ ऊपर की तरफ आगे बढ़ाकर कमला बोली,,, और उसे ऊपर की तरफ खींचने लगा जिस तरह से सूरज ने कमला की कलाई को थामा था कमला की सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी,,,,, साड़ी का पल्लू अस्त-व्यस्त हो जाने के कारण ब्लाउज में से जाते उसकी भारी भरकम चूचियों की गहरी लकीर के साथ-साथ आधी चूची ब्लाउज के बाहर झलक रही थी जिस पर सूरज की नजर बराबर बनी हुई थी और सूरज किस नजर को कमला अच्छी तरह से पहचान गई थी इसलिए हल्की सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई थी,,,, सूरज संभलकर उसे फिर से अपनी दोनों टांगों के बीच बिठा लिया था,,,, अब तो कल्पना करने के लिए कुछ बाकी नहीं रह गया था क्योंकि कमला अपनी आंखों से सूरज के मर्दाना अंग को देख चुकी थी और वास्तविकता यही थी कि उसने अपने जीवन में ऐसा मुसल नहीं देखी थी वह अपने मन में यही सोच रही थी कि ऐसा मुसल जिस किसी के भी ओखली में जाएगा सब कुछ पीस कर रख देगा,,,,,,,, कमल को अपनी दोनों टांगों के बीच बैठ कर बेल की रस्सियों को अपने हाथ में लेकर सूरज बोला,,,)

अब चले चाची,,,, ।

हां अब चलो,,,,,
(इतना सुनते ही सूरज बैलो की रस्सी को हिलाने लगा और बैल इशारा पाकर चलने लगे,,,,,, कुछ देर पहले आंखों ही आंखों में जो दोनों के बीच इशारा हुआ था उसे लेकर दोनों काफी उत्साहित थे,, ,,, कुछ देर तक दोनों के बीच खामोशी छाई रही बेल धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था रास्ता इस तरह से सुनसान ही था पीछे चालू खरबूजा काट काट कर बच्चों को दे रही थी और अपनी बहन को भी दे रही थी वह लोग खर्च खाने में मस्त थे लेकिन कमला और सूरज अपनी इच्छा पूर्ति का रास्ता ढूंढ रहे थे,,, कुछ देर की खामोशी के बाद बातचीत की शुरुआत करते हुए सूरज कमला से बोला,,,)

क्या बात है चाची एकदम शांत क्यों हो गई कुछ तो बोलो,,,,।

क्या बोलूं,,,,,,? तूने तो मेरी बोलती बंद कर दिया,,,,

ऐसा क्यों,,,,?

यह तो तू ही जाने,,,,

लेकिन मुझे नहीं पता कि तुम किस बारे में बोल रही हो,,,,?

तुझे सब पता है,,,,,।

मुझे कुछ भी पता नहीं तुम किस बारे में बोल रही हो मैं नहीं जानता,,,,,।
( कमला का दिल जोरों से धड़क रहा था वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अगला गांव आने में कुछ समय की देरी है और अगर अगला गांव आ गया तो वह कुछ नहीं कर पाएगी,,, जिंदगी में पहली बार इतना मोटा तगड़ा लंड देख रही थी इसलिए कमला का मन मचल रहा था वैसे भी वह पूरी तरह से छिनार हो चुकी थी जहां अपनी जरूरत के लिए वह दूसरे मर्दों के साथ संबंध बनाती थी वही उसकी भी यह जरूर बन चुकी थी,,, इसलिए वह कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे सूरज का लंड उसे बड़े आराम से मिल जाए वैसे भी खेली खाई कमला अच्छी तरह से समझ गई थी कि सूरज भी यही चाहता है जो वह चाह रही थी। इसलिए वह थोड़ी हिम्मत दिखाते हुए बोली,,,)

तुझे नहीं लगता कि तेरा कुछ ज्यादा ही बड़ा है,,,,(थोड़ी सी बेशर्मी दिखाते हुए दबे स्वर में वह बोली उसकी बात सुनकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे क्योंकि उसे एहसास हो गया था कि अब उसकी मंजिल उसकी आंखों के सामने है इसलिए वह मुस्कुराता हुआ बोला)

हां मुझे मालूम है मेरा कुछ ज्यादा ही बड़ा और मोटा है,,,, वैसे चाची सही कहूं तो तुम्हारी गांड भी बहुत खूबसूरत है झाड़ियां के बीच से चमक रही थी इतनी गोलाकार गोरी गोरी मक्खन जैसी गांड मैंने कभी नहीं देखा,,,,,(सूरज की बेशर्मी भरी बातें सुनते ही कमल एकदम से शर्मा गई और बोली)

धत् यही सब देखता है तु,,,,


तुम दिखाओगी तो क्यों नहीं देखूंगा,,,,

मैं तुझे थोड़ी ना दिखा रही थी,,,, मैं तो पेशाब कर रही थी,,,,।

तो थोड़ा अंतर की तरफ चली गई होती ताकि तुम्हारी खूबसूरत गांड झाड़ियों से छुप गई होती खुली गांड लेकर सड़क के किनारे बैठने की क्या जरूरत थी,,,।

मुझे क्या मालूम था कि तू उधर आ जाएगा,,,,,।

मुझे भी तो पेशाब लगी थी,,,,,, इसलिए वहां चला गया,,,।

कितना बेशर्म है तु एक औरत के पास खड़े होकर पेशाब करता है तुझे यह सब करने में शर्म नहीं आती,,,,।

शर्म तो बहुत आती है चाची, लेकिन मैं जानता हूं कि शर्म करूंगा तो मजा कैसे ले पाऊंगा,,,,,, शर्म करता तो इतना खूबसूरत नजारा अपनी आंखों से कैसे देख पाता,,,,,(बातचीत के दौरान सूरज लगातार अपने लंड का एहसास कमल के नितंबों के ऊपरी सतह पर बराबर कर रहा था जिसकी गर्माहट से कमला का लावा पिघल रहा था वह मदहोश हो रही थी,,,, और वह भी जानबूझकर अपनी पीठ को पीछे की तरफ ठेल दे रही थी बाकी का काम ऊंची नीची पगडंडी से चलते हुए बैलगाड़ी कर दे रही थी,,, सूरज की बात सुनकर मत हो सोते हुए कमला बोली,,)

तो एक औरत को देखना और वह भी पेशाब करते हुए तुम्हारे लिए सबसे खूबसूरत नजारा होता है यही कह रहे हो ना तुम।

हां बिल्कुल चाची इसमें कोई दो राय नहीं है मेरे लिए तो यह दुनिया का सबसे बेहतरीन नजारा है मेरे लिए क्या हर मर्द के लिए औरत को पेशाब करते हुए देखना बेहद खूबसूरत नजारा होता है।

और ऐसा नजारा देखकर क्या होता है,,,(कमला मुस्कुराते हुए बोल रही थी और इस बीच सूरज की बाहों को अपनी चूचियों पर महसूस करके मस्त हुए जा रही थी,,,, कमला की बात सुनकर सूरज उसी के अंदाज में जवाब देते हुए बोला)

खड़ा हो जाता है चाची बिल्कुल भी रहा नहीं जाता,,, देखी तो थी तुम,,,,, क्या हाल हो रहा था,,,,।

देखी थी तभी तो पूछ रही हूं,,,,, अच्छा अपना यह हथियार,,,(इतना कहने के साथ ही तुरंत अपना हाथ पीछे की तरफ लाई और पजामे के ऊपर से ही सूरज के लंड को पकड़ते हुए) पीछे रख बार-बार चुभ रहा है,,,,,।
(कमला की हथेली में अपने लंड को महसूस करके सूरज एकदम से मत हो गया भले ही वह पजामे के ऊपर से उसे पड़ी थी लेकिन इतने से ही सूरज को चांद तारे दिखाई देने लगे थे,,,, लेकिन हैरानी की बात यह थी कि कमला अभी तक उसके लंड को छोड़ी नहीं थी अपने हाथ में ही पड़े हुए थी और वह भी एकदम दबाकर,,,, सूरज की तो सांसे ऊपर नीचे होने लगी थी और वह बोला,,,)

क्या चाची,,, जब तुम्हें इसकी चुभन बर्दाश्त नहीं हो रही है तो अंदर कैसे ले पाओगी,,,,,।
(इतना सुनते ही,,, हैरानी से कमला नजर घुमा कर सूरज को देखने लगी दोनों के होठों के बीच केवल दो अंगूल का ही फर्क नहीं किया था कमल की आंखों में मदहोशी की खुमारी एकदम साफ दिखाई दे रही थी सूरज की आंखों में वासना की चमक दिखाई दे रही थी कमला हैरान थी कि उम्र में कम यह लड़का कितना तेज तर्रार है,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से एक दूसरे को देखते रहे बैलगाड़ी आगे बढ़ती चली जा रही थी और कमल का एक हाथ पजामे के ऊपर से ही उसके लंड को नाप रहा था,, फिर धीरे से कमला बोली,,,)

तू तो लुटेरों की बात कर रहा था अब देखो खुद लुटेरा बनने को तैयार हो गया है,,,।

क्या करूं चाची तुम्हारे पास खजाना इतना बेस कीमती है कि तुम्हारा खजाना देखकर कोई भी लुटेरा बनने को तैयार हो जाए,,,,,।
(इतना सुनकर कमला मुस्कुरा दे और उसकी मुस्कुराहट देखकर सूरज समझ गया था कि मामला बिल्कुल साफ है रास्ता ऊंचा नीचा भले ही हो लेकिन मंजिल एकदम साफ दिखाई दे रही है इसलिए वह बिल्कुल भी देर ना करते हुए एकदम से अपने होठों को आगे बढ़ाया और कमला के लाल-लाल होठों पर रख दिया कमला पल भर के लिए सकपका गई वह अपने होठों को पीछे खींच ले आश्चर्य से सूरज उसे देखने लगा तो अगले ही पल कमला खुद अपने होठों को एकदम से सूरज के होठों पर रखकर पागलों की तरह चुंबन करने लगी कमला को सीखाने की जरूरत नहीं थी वह खेली खाई औरत थी एक साथ दो दो मर्दों को संभालती थी,, इस मदहोश कर देने वाले चुंबन से सूरज की हालत खराब होने लगी वह बैलगाड़ी की रस्सी को अपने हाथों से छोड़ दिया और अपने दोनों हथेलियां को कमला की खरबूजे जैसी चूचियों पर रख दिया जो कि अभी भी ब्लाउज में कैद थी,,, सूरज पागलों की तरह ब्लाउज के ऊपर से ही कमला की चूचियों को मसलने लगा,,, सूरज पूरी हथेलियां को फैला कर बराबर उसकी चूचियों पर रख रहा था जो की ब्लाउज में कैद थी और पूरी तरह से उसकी हथेली में आ भी नहीं रही थी लेकिन फिर भी बड़ी शिद्दत से सूरज कमला की चूचियों से खेलने लगा था। और कमला एक हाथ में सूरज के लंड को दबाए हुए बराबर उसे अपने होठों का रसपान करा रही थी,,,, सूरज दूर-दूर तक नजर दौड़ा कर देख रहा था कि कहीं कोई दिखाई तो नहीं दे रहा है लेकिन दूर-दूर तक सन्नाटा था केवल पंछियों की आवाज आ रही थी सुनसान सड़क पर दूर-दूर तक कोई नहीं दिखाई दे रहा था वैसे भी दोपहर का समय था इसलिए और भी ज्यादा सन्नाटा फैला हुआ था मौके की नजाकत को समझते हुए सूरज अपनी उंगलियों का सहारा लेकर कमला के ब्लाउज का बटन खोलने लगा।

यह देखकर कमला अपने मन में ही सोच रही थी कि लड़का सच में कितना तेज है इसे बिल्कुल भी डर नहीं है की बैलगाड़ी में पीछे दो जवान लड़कियां बैठी हुई है और वह कोई एकांत में कमरे में या खेत में नहीं बल्कि खुली सड़क पर इस तरह की हरकत कर रहा है लेकिन कमला भी निश्चिंत थी क्योंकि वह जानती थी कि इस सड़क पर कोई आता जाता नहीं था,,,, सड़क पर घास उगी हुई थी जिसका मतलब साफ था कि कई दिनों से इधर से किसी का आना-जाना नहीं हुआ था,,,, बैलगाड़ी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी इसलिए पीछे बैठी दोनों लड़कियों को बिल्कुल भी शक नहीं हो रहा था कि आगे क्या हो रहा है और वैसे भी सूरज और कमला बहुत धीरे-धीरे बात कर रहे थे जिससे दोनों लड़कियों को उन दोनों की बातचीत भी सुनाई नहीं दे रही थी इसलिए आगे के प्रकरण के बारे में उन्हें कोई अंदाजा ही नहीं था। देखते ही देखते सूरज फुर्ती दिखाते हुए कमल के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और उसकी चूचियों को नंगी कर दिया,,,, सूरज से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हथेलियों को उसकी नंगी चूचियों पर रखकर दबाना शुरू कर दिया जो कि एकदम दशहरी आम की तरह कड़क थे,,,,, सूरज के द्वारा तन मर्दन की क्रिया का कमला भी आनंद ले रही थी,,,,,,, दोनों के होंठ पल भर के लिए भी अलग नहीं हो रहे थे देखते ही देखते कमला अपनी हथेली को पजामी के अंदर डाल दी और उसके नंगे लंड को पकड़ ली जो की काफी गर्म था उसकी गर्माहट इसकी मोटाई को अपनी हथेली में महसूस करके वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी अब वह उत्तेजना के मारे सूरज के लंड को मुठीयाना शुरू कर दी थी,,, सूरज भी मत हो रहा था कुछ देर तक हो इसी तरह से कमला की चूचियों को मसलते रहा दबाते रहा उसकी छोटी सी खजूर को उंगलियों के बीच रखकर मसलता रहा,,, सूरज की हरकतों से कमला पानी पानी हो गई थी, उसकी साड़ी उसके मदन रस से गीली होने लगी थी,,,,,।

बैलगाड़ी पर बैठे-बैठे सूरज जवानी का मजा लूट रहा था,,, कमला के लिए भी है पहले ही मौका था जब वह खुले में इस तरह से एक जवान लड़के से मजा लूट रही थी अब तक उसने अपनी जवानी किसी जवान लड़के के हाथों में नहीं सोंपी थी क्योंकि उसका मानना था कि जवान लड़के अनुभव के कच्चे होते हैं और वह एक जवानी से भरी हुई औरत की प्यास बुझाने में समर्थ नहीं होते लेकिन अपनी सुझभुज से उसने अंदाजा लगा ली थी कि भले ही सूरज की उम्र कम थी लेकिन अनुभव से भरा हुआ था इसीलिए तो वह अपनी मदद कर देने वाली जवानी उसके सामने परोस दी थी,,,। सूरज से रहा नहीं जा रहा था बेल गाड़ी धीरे-धीरे,,,, आगे बढ़ रही थी और सूरज एक हाथ उसकी चूची से हटाकर आगे से उसकी साड़ी मे डाल दिया,,,, और उसे ज्यादा देर नहीं लगी कमला की रसीली बुर तक पहुंचने में वह पूरी तरह से गीली थी मदन रस से चिपचिपी हो गई थी इसके बावजूद भी सूरज उत्तेजना में उसकी बुर को अपनी हथेली में एकदम से दबोच लिया और कमला गनगना अब दोनों के नग्न अंग एक दूसरे के हथेलियो में थे,,,, कमला के मुंह से हल्की-हल्की सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,, यह देख कर सूरज बोला,,,।

जरा धीरे आवाज निकालो चाची कहीं दोनों लड़कियों ने सुन लिया तो गजब हो जाएगा,,,,।
(सूरज की बात सुनकर कमला अपनी भावनाओं पर काबू करने लगी लेकिन फिर भी उसके मुंह से हल्की-हल्की आवाज तो निकल ही रही थी,,, दोनों पूरी तरह से काम ग्रस्त हो चुके थे,,,, कमला सूरज के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी लेकिन यहां जगह का अभाव था अगर दोनों लड़कियां ना होती तो इस समय सूरज खुद ही बैलगाड़ी को पेड़ के नीचे उसकी छाव में रोक कर बैलगाड़ी में लेटा कर उसकी जमकर लेता लेकिन दोनों लड़कियों की मौजूदगी में काम बिगड़ गया था लेकिन फिर भी कमला ऐसी हालात में रास्ता ढूंढ ही लेती है,,, वह धीरे से अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई दिल गाड़ी चल रही थी वह नीचे लकड़ी पर पैर रखकर खड़ी थी धीरे से सूरज की तरफ मुंह करके घूम गई सूरज गहरी गहरी सांस ले रहा था उसके हाथों में बैलों की रस्सी नहीं थी लेकिन फिर भी बैल समझदार थे वह बड़े आराम से सड़क पर आगे बढ़ रहे थे,,,, कमला इधर-उधर दिखी और फिर बेल के कंधे पर जो लकड़ी का लगाम लगाया जाता है वह बैलगाड़ी से जुड़ा हुआ था और इस पर धीरे से कमला गांड रखकर बैठ गई यह देखकर सूरज बोला,,,,)

संभलकर चाची गिरना नहीं,,,।

नहीं गिरूंगी,,,(और इतना कहने के साथ यहां आगे बढ़कर फिर से सूरज के लंड को पकड़ ली सूरज फिर से मस्त होने लगा,,,,, कुछ देर मुठियाने के बाद धीरे से अपने प्यासे होठों को अंकित के मोटे तगड़े लंड पर रख दी और अपने होठ से उस पर रगड़ने लगी पल भर में ही सूरज मदहोश होने लगा वाकई में मर्द को खुश करने की कला कमला अच्छी तरह से जानती थी तभी तो दो-दो मर्दों को एक साथ मजा देती थी,,,, सूरज बार-बार अपनी आंखों को बंद कर ले रहा था क्योंकि वह मदहोशी के सागर में डूबने लगा था और देखते-देखते कमला अपने लाल-लाल होठों को खोलकर सूरज के मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में भर ले और चूसना शुरू कर दी,,, कमला खेली खाई औरत थी इसलिए उसे कुछ ज्यादा सीखना नहीं था वह अपने आप ही सूरज को खुश करने में लगी थी और सूरज भी अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर उसकी नंगी चूचियों को बराबर दबा रहा था,,,,,,,,, सूरज और कमला दोनों बेशर्म हो चुके थे, उन्हें इस बात की बिल्कुल भी परवाह नहीं थी कि वह किस जगह पर है किसके साथ हैं खुली सड़क पर भले यहां पर इंसानों का नाम और इंसान नहीं था लेकिन सड़क थी कोई भी आ जा सकता था लेकिन इस बात की परवाह दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी बैलगाड़ी में भी दो जवान लड़कियां थी तो छोटे बच्चे लेकिन इस बात का भी उन्हें कोई मलाल नहीं था बस उन्हें जवानी का मजा लूटना था,,, सूरज तो खैर औरत को चोदने का मौका ही ढूंढता है लेकिन कमला तो दो बच्चों की मां थी समझदार थी लेकिन वह भी वासना में बह चुकी थी उसे बिल्कुल भी शर्म नहीं थी इसीलिए तो इस समय अपने लिए जगह बनाकर सूरज के लंड को मुंह में लेकर बराबर चूस रही थी।

कमला के दोनों दशहरी आम सूरज के हाथों में थे सूरज ने जोर-जोर से दबा रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे सच में वह आम हो और वह दबा दबा कर उनका रस निकाल लेना चाहता हो,,,,, कमला को भी इस बात का एहसास हो रहा था कि वाकई में सूरज का लैंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा था क्योंकि बड़े आराम से उसके गले तक पहुंच भी जा रहा था और उसका मुंह पूरा का पूरा खुला हुआ था,,,, बड़ी मुश्किल से वह अपने मुंह को खोलकर सूरज के लंड को मुंह में लेकर चुस रही थी।,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से कमला मजा लेती रही वह भी जानती थी कि जिस गांव जाना है वह गांव अब ज्यादा दूर नहीं था इसलिए वह धीरे से अपने मुंह में से सूरज के लंड को बाहर निकाली और गहरी गहरी सांस लेने लगी इतना मोटा तगड़ा लंड मुंह में लेने की वजह से उसकी दोनों आंखें ऐसा लग रहा था कि जैसे बाहर निकल आएंगे उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो चुका था,,,, यह देख कर सूरज मुस्कुराते हुए बोला।

कैसा लगा चाची,,,!


बहुत बड़ा है,,,,( हांफते हुए वह बोली,,,, फिर उसे न जाने क्या सोचा वह धीरे से जिस पाटी पर सूरज बैठा हुआ था उसके इर्द-गिर अपने दोनों पैर रखकर एकदम से खड़ी हो गई और अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,,, अब सूरज के लिए काफी दिक्कत वाला काम आने वाला था वह कभी सोचा भी नहीं था कि एक औरत इतनी भी बेशर्म हो सकती है वह पूरी तरह से अपनी साड़ी को कमर तक उठती थी सूरज जानता था कि अब उसे क्या करना है अपनी साड़ी को कमर तक उठाने के बाद वह बैलगाड़ी की छावनी पर दोनों हाथ रखकर खड़ी हो गई और अपनी बर को सूरज के मुंह पर सटाने लगी रगड़ने लगी,,,, सूरज अच्छी तरह से समझ गया था कि उसे क्या करना है वह पागल हुआ जा रहा था एक अलग ही अनुभव से मिलने वाला था वह दोनों हाथ से कमला की मोटी मोटी जांघों को पकड़ कर उसकी मलाईदार बुर को चाटने लगा,,,, कमला पागल होने लगी क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि सूरज इतने अच्छे तरीके से बुरे की चटाई करता होगा लेकिन उसके सोच के विपरीत सूरज उसे पर भारी पड़ने लगा था जितना हो सकता था उतना अपनी जीभ अंदर डालकर उसे चाट रहा था,,,, सब कुछ बड़ी जल्दी से हो रहा था बैलगाड़ी रुकने का नाम नहीं ले रही थी बैलों के पैरों में बंधे घुंघरू सड़क के सन्नाटे को चीरते हुए आगे बढ़ते चले जा रहे थे लेकिन घुंघरू की आवाज को सुनने वाला वहां इन लोगों के सिवा दूसरा कोई नहीं था बैलगाड़ी के पीछे बैठी दोनों बहनों को तो हल्का सा अाभास तक नहीं हुआ था कि आगे क्या हो रहा है,,,, वह दोनों तो अनजान थी खरबूजा खाने के बाद उन दोनों की आंख लग गई थी,, बच्चे भी आराम से सो रहे थे,,,,, और कमला अपने काम में लगी हुई थी,,,,

कमला की हालत खराब हो रही थी क्योंकि उसकी बुर की छटाई करते हुए सूरज अपनी दो उंगलियों को एक साथ उसकी बुर में अंतर बाहर करते हुए डाल दिया था उसका बदन अकड़ने लगा था वह झड़ने के कगार पर थी वह बैलगाड़ी की ऊपरी छावनी को कस के पड़कर अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दी थी जैसे मर्द औरत की बुर में ठोकर मारते हैं इस तरह से वह सूरज के मुंह में ठोकर मार रही थी सूरज भी दोनों हाथों से उसकी कारण को तब पहुंचकर पूरा साथ दे रहा था और देखते ही देखते उसकी बुर से मदन रस की पिचकारी फूट पड़ी जो सूरज के चेहरे को पूरी तरह से भिगोने लगी,,,,,, लेकिन सूरज उसकी मलाई को अपनी जीभ से चाटे जा रहा था अपने गले के अंदर उतारे जा रहा था,,,,, कमला का काम तमाम आ चुका था लेकिन वह जानते थे कि अभी खेल खत्म नहीं हुआ था,,,, वह खड़े-खड़े ही गहरी गहरी सांस ले रही थी कमल का पानी निकल गया था लेकिन सूरज बरकरार था सूरज अभी एक असली मर्द का एहसास उसे दिलाना चाहता था इसलिए उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे नीचे की तरफ बैठने लगा के दिखाई कमला जानती थी कि उसे क्या करना है वह धीरे से अपनी टांगों को खोलकर सूरज के मोटे तगड़े लंड पर अपनी गुलाबी छेद को रख दी,,, मोटे सुपाडे की गर्माहट अपनी बुर की गुलाबी पत्तियों पर महसूस करके कमल के तन बदन में सुरसुरी छाने लगी वह मदहोश होने लगी उसे एहसास हो रहा था कि वाकई में सुपड़ा कुछ ज्यादा ही मोटा था इसलिए वह अपनी भारी भरकम गांड का दबाव एकदम से लंड पर बढ़ते हुए बैठने लगी,,, सूरज भी दोनों हथेलियां में उसकी मटके जैसी गांड को संभाल कर उसे अपने लंड पर व्यवस्थित करने लगा और देखते ही देखे बुर की चिकनाहट पाकर सुपाड़ा अंदर की तरफ सरकने लगा,,, जैसे-जैसे सुपाड़ा अंदर की तरफ जा रहा था वैसे-वैसे कमला के चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे,,,,

सूरज उसके खूबसूरत चेहरे को ही देख रहा था,,, देखते ही देखते कमला की चालाकी और सूरज की सूझबूझ के कारण सूरज का मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर की गहराई में खो गया था और फिर सूरज के कंधों को पकड़ कर सुपाड़ा अपनी भारी भरकम गांड को उठाने बैठाने लगी थी,,,, कमला यह प्रक्रिया बड़े धीरे-धीरे कर रही थी क्योंकि एक बार लय बनने के बाद वह रुकने वाली नहीं थी,,,, धीरे-धीरे वह बड़े आराम से अपनी बुर की गहराई में सूरज के मोटे तगड़े लंड को ले रही थी सूरज उसे अपनी बाहों में भरकर उसके धक्को का मजा ले रहा था, कमला की बुर की तपती हुई गर्मी सूरज को एकदम साफ महसूस हो रही थी अगर दूसरा कोई होता तो उसकी गर्मी से ही पिघल जाता है लेकिन सूरज दूसरे मर्दों की तरह बिल्कुल भी नहीं था जब तक औरत को पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर देता था तब तक उसका पानी नहीं निकलता था और यहां भी वह कमला की जवानी पर पूरी तरह से छा चुका था,,,, नीचे से भी सूरज बराबर धक्का लगा रहा था हर धक्के के साथ कमला के मुंह से हल्की-हल्की आवाज निकल रही थी जिसे वह बहुत काबू में लिए हुए निकाल रही थी। सूरज का मोटा तगड़ा लंड हर धक्के के साथ उसके बच्चेदानी पर स्पर्श कर रहा था कमला के लिए यह हैरानी की बात थी क्योंकि अब तो कुछ नहीं बहुत से मर्दों के साथ संभोग कर चुकी थी लेकिन उसके बच्चेदानी तक कोई पहुंच नहीं पाया था सूरज पहले मर्द था जो बड़े आराम से उसके बच्चेदानी पर ठोकर लगा रहा था।

कमला मदहोश होकर सूरज के लंड पर अपनी गांड पटक रही थी। और उसकी दशहरी जैसी आम पानी भरे गुब्बारे की तरह उसकी छाती पर उछल रहे थे जिसे रह रहकर सूरज उसे अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर देता था जब जब वह दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीता तब तब कमला की हालत और ज्यादा खराब हो जा रही थी,,,, एक बार फिर से कमला झड़ने के कगार पर पहुंच चुकी थी और इस बात का अहसास होते ही सूरज पूरी तरह से तैयार हो गया क्योंकि वह भी झड़ने वाला था वह कमला की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे थोड़ा आगे की तरफ झुका दिया और दोनों पैर का सहारा लेकर वह अपनी गांड को लकड़ी के पाटी से थोड़ा ऊपर उठा लिया और फिर जमकर धक्के लगाने लगा इस तरह से तो कमला की हालत खराब होने लगी क्योंकि उसे अभी तक लग रहा था कि वह सूरज पर भारी पड़ रही है लेकिन आप उसे एहसास होने लगा था कि सूरज असली मर्द है वह पूरी तरह से कमला पर भारी पड़ रहा था उसके हर एक धक्के पर कमला के चेहरे का हवा बदल रहा था उसके चेहरे पर संतुष्टि के भाव के साथ-साथ दर्द की रेखा भी झलक रही थी उसे दर्द भी हो रहा था तड़प भी रही थी और अत्यधिक आनंद भी आ रहा था,,,, इस अवस्था में उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़े पूरा कर लगाकर सूरज उसकी बुर में लंड पेल रहा था अगर इस समय कमला बिस्तर पर होती तो शायद चारपाई टूट जाती,,,,, अगर ही पर कमल का बदन पूरी तरह से अकड़ने लगा वह सूरज पर विश्वास करके उसके हाथों में अपनी जवानी सौंप कर पीछे की तरफ पूरी तरह झुक गई थी मानो कि जैसे किसी बिस्तर पर लेटी हो और सूरज भी उसके विश्वास पर खड़े उतारते हुए उसे बिल्कुल भी गिरने नहीं दिया और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर तब तक पेलता रहा जब तक की दोनों का पानी एक साथ निकल नहीं गया,,,।

दोनों झड़ चुके वासना का तूफान शांत हो चुका था धीरे से सूरज के लंड पर से वह उठने लगी उसकी बुर में से सूरज का मोटा तगड़ा लंड बाहर निकल चुका था लेकिन झड़ने के बावजूद भी अभी भी उसी तरह से खड़ा था यह देखकर वह हैरान थी उसे इस बात का मलाल था कि अगर किसी कमरे में दोनों की मुलाकात होती तो यह मजा और ज्यादा बढ़ जाता,,,, वह अपने कपड़ों को दुरुस्त करने लगी और फिर से पहले की तरह बैठ गई लेकिन इस बीच सूरज उसके बदन से छेड़खानी करता रहा उसे मजा आ रहा था अगर मौका होता तो वह फिर से उसकी चुदाई कर देता लेकिन अब मौका बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि जहां उसे उतरना था वह गांव आ चुका था वह धीरे से बैलगाड़ी से नीचे उतर गई सूरज भी नीचे उतर गया पीछे जाकर देखा तो दोनों बहने और दोनों बच्चे सो रहे थे वह उन दोनों को उठाया,,,, कमला बहुत खुश थी क्योंकि आज किस्मत से उसे सूरज का साथ मिला था वह अपने दोनों बच्चों के साथ गांव के रास्ते मुड़ गई लेकिन बार-बार सूरज की तरफ ही देख ले रही थी वहीं पास में ही हेड पंप था जहां पर सूरज रुक कर अपना हाथ मुंह धोया और पानी पीने लगा नीलू और शालू भी अपना हाथ मुंह धो कर पानी पीने लगे सूरज दो बाल्टी बैलगाड़ी में रखा था उसमें पानी भरकर बेल के सामने रख दिया बैल भी पानी पीने लगे और फिर थोड़ी देर में वह लोग आगे के लिए निकल गए।
Nice update
Suraj ne Kamala ko bailgaadi pr hi nipta diya
Waiting for shalu
 
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