Ajju Landwalia
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रात भर जमकर चुदाई करने के बाद सुबह-सुबह भी सूरज अपनी मां की जवानी का मजा ले चुका था जिसमें उसकी मां ने उसका पूरा सहयोग दी थी पहले तो सूरज को ऐसा ही लग रहा था कि जैसे उसकी मां का मन बदल गया हो क्योंकि वह इस तरह की बात ही कर रही थी सीधे-सीधे यह कह रही थी कि अब से आगे यह सब नहीं होगा जो कुछ भी होगा इसमें दोनों की गलती है सूरज मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था वह जानता था कि अगर वह आज वह अपनी मां की हां में हां मिला दिया तो दोबारा उसे ऐसा सुख कभी भी मिलने वाला नहीं है इसलिए वह अपनी हरकतों से एक बार फिर से अपनी मां के बदन में मदहोशी की लहर भर दिया था जिसके चलते सूरज की मां आंगन में दरवाजा पकड़कर जमकर चुदाई का मजा लूट रही थी,,, ।
सुबह-सुबह कोई काम नहीं था तो खरबूजे का जिक्र आते ही सूरज को ख्याल आ गया की मुखिया जी खरबूजे के खेत में उसे कम सौंपते थे और वह अपनी मां की चुदाई करने के बाद खरबूजे के खेत की तरफ ही चला जा रहा था वह बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि जिंदगी में वह बहुत कुछ हासिल कर चुका था। औरतों के मामले में जिसको चाहता था उसको बिस्तर पर लाकर जमकर उसकी चुदाई करता था। जिसमें अब उसकी मां भी शामिल हो चुकी थी अपनी मां को हम बिस्तर बनाने का गर्व उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था,, अपनी मां के तरफ वह पहले से ही आकर्षित था लेकिन वह यह नहीं जानता था कि इतनी जल्दी उसकी मां घुटने टेक देगी लेकिन जो कुछ भी हुआ था उसमें मां बेटे दोनों को फायदा था सूरज की भी इच्छा पूरी हो रही थी और उसकी मां की भी जरूरत पूरी हो रही थी। अपने मन में ढेर सारी बातें सोचता हुआ सूरज खरबूजे के खेत पर आ चुका था,,, बरसात के कारण खरबूजे के खेत में भी पानी भरा हुआ था खरबुजे एकदम बड़े हो चुके थे लेकिन अभी पके नहीं थे बस पकने की तैयारी में थे और यही सही मौका था इन्हें तोड़कर बाजार ले जाने का क्योंकि अगर 2 दिन की भी देरी हो जाए तो खरबूजा अपने आप पक जाता और धीरे-धीरे खराब होने लगता, सूरज धीरे-धीरे खरबूजे को तोड़कर एक तरफ रख रहा था। खरबूजे की खुशबू पूरे खेत में फैली हुई थी। अभी वह खरबूजा तोड ही रहा था कि तभी उसे पायल की आवाज सुनाई दी और पीछे मुड़कर देखा तो नीलू चली आ रही थी,,, नीलू को देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे। वह नीलू को देखता हुआ खड़ा हो गया,,, इतने सुबह-सुबह नीलू के दर्शन करके वह काफी खुश नजर आ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे नीलू करीब आ रही थी उसके चेहरे पर फैली हुई चिंता और गुस्से की लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी सूरज को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह एक टक उसे ही देख रहा था।
तभी वह सूरज के एकदम करीब आ गई और बिना कुछ बोले उसके सीने पर दोनों हाथ से धक्का देने लगी और सूरज अपने आप को संभाल नहीं पाया और एक खरबुजे के ऊपर गिर गया और वह खरबुजा फट गया। उसे नीलू का व्यवहार को समझ में नहीं आ रहा था फिर भी खरबूजे का नुकसान होता हुआ देखकर वह बोला।
अरे यह क्या हो गया है तुमको देख रही हो खरबूजा खराब हो गया तुम्हारे पिताजी देखेंगे तो बिगड़ेंगे।
हरामजादे तुझे खरबूजे की पड़ी है और यहां तो मेरे घर में ही रासलीला खेल रहा है चारों तरफ से हमारा ही नुकसान कर रहा है।
(नीलू की बात सुनकर सूरज को इतना तो समझ में आ गया था कि नीलू को जरूर कुछ ना कुछ ऐसा मालूम हुआ है जो उसे नहीं मालूम होना चाहिए था तभी वह इतना नाराज है लेकिन फिर भी अपने आप को शांत रखते हुए धीरे से उठकर इस जगह पर बैठते हुए सूरज बोला)
अरे आखिर हुआ क्या है यह तो बताओ बस आते ही मारना शुरू कर दी।
हरामजादे मादरचोद तुझे नहीं मालूम कि क्या हुआ है,,,?
अरे मैं सच कह रहा हूं मुझे कुछ भी नहीं मालूम तुम बताओगी तब ना पता चलेगा।
मैं तुझे कितना अच्छा लड़का समझती थी तुझे मैं पसंद करती थी तेरे साथ मैंने सब कुछ की जो मुझे नहीं करना चाहिए था क्योंकि मैं तुझे पसंद करती हूं लेकिन तू है कि मेरी मां को,,,,(इतना कहकर नीलू चुप हो गई और एकदम परेशान नजर आने लगी सूरज को समझते देर नहीं लगी कि आखिर मामला क्या है लेकिन फिर भी वह अनजान बनने का नाटक करते हुए बोला)
क्या हुआ मालकिन को,,,!
मालकिन को कुछ भी नहीं हुआ मादरचोद,,,,(नीलू के मुंह से पहली बार की गाली सुन रहा था और उसे नीलू के मुंह से इस तरह की गालियां अच्छी लग रही थी,,, मुस्कुराता हुआ सूरज बोला)
तू इतना गुस्सा क्यों हो,,,?
तेरी वजह से सिर्फ तेरी वजह से मैंने सब कुछ अपनी आंखों से देख ली जो तू मेरी मां के साथ कर रहा था,,,,।
ओहहहहह यह बात है,,,,।(सूरज एकदम सहज होते हुए मुस्कुरा कर बोला और धीरे से अपनी जगह पर खड़ा हो गया यह देखकर नीलू और भी ज्यादा क्रोधित हो गई और वह बोली)
तुझे यह सब एकदम आम बात लगती है कितनी आराम से कह रहा है यह बात है,,,।
हां तो नीलू यह आम बात ही है औरत होती ही है चुदवाने के लिए,,, इसलिए मैंने तुम्हारी मां को भी चोद दिया,,, (सूरज फिर से एकदम शांत लहजे में बोला जिसकी वजह से नीलू का गुस्सा साथी हुए आसमान पर पहुंच गया और वह चिल्ला कर बोली)
कितनी आसानी से कह रहा है मादरचोद तुझे पता है कि तेरा क्या हसर होगा अगर यह बात पिताजी को पता चल गई तो।
पिताजी को पता चल गई तो क्या हो जाएगा शर्मिंदा हो जाएंगे उन्हें किस बात का एहसास होगा कि वह अपनी बीवी के साथ कुछ कर नहीं सकते इसलिए उनकी बीवी दूसरों से चुदवा रही है।
हरामजादे कुत्ते हरामी फिर तो यही अपनी मां के बारे में भी सोचता होगा हरामजादे मैं तुझे नहीं छोडूंगी,,,, (सूरज की बात सुनकर एकदम से गुस्सा होते हुए नीलू दम दम उसके सीने पर मुक्का मारने लगी लेकिन सूरज को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह मुस्कुरा रहा था सूरज जितना मुस्कुरा रहा था नीलू को उतना ज्यादा गुस्सा आ रहा था,,, वह एकदम से रोने लगी और रोते-रोते नीचे बैठ गई उसे रोता हुआ देखकर सूरज एकदम से परेशान हो गया और वह भी उसके पास ही बैठ गया और बोला।)
तुम रो क्यों रही हो नीलू इसमें रोने वाली कौन सी बात है यह तो दुनिया की रित है यह तो सभी घरों में होता है।
मैं मां को कितनी अच्छी औरत समझते थे भले ही वहां पर गुस्सा करती थी लेकिन मैं मां की बहुत इज्जत करती थी मेरी बहन भी मन की बहुत इज्जत करती है जब उसे पता चलेगा कि उसकी मां तुम्हारे साथ चुदवाती है अपनी जवानी की प्यास बुझाती है गांव की मुखिया की बीवी होकर अपने पति को धोखा देती है तो सोचो उसके दिल पर क्या गुजरेगी और अगर यही बात गांव में किसी को पता चल गया तब तो हम लोगों के इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। (ऐसा कहकर जोर-जोर से रोने लगी वैसे भी यहां कोई उसे देखने वाला नहीं था क्योंकि दूर-दूर तक मुखिया का ही खेत था और चारों तरफ झाड़ियां की हुई थी जिस किसी के देखे जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता था,,,,,, कुछ देर तक सूरज नीलू को इसी तरह से रोने दिया और फिर धीरे से बोला।)
नीलू मालकिन मां ,बीवी बहन ओर मालकिन से पहले एक औरत है। एक औरत होने के नाते तुम्हें भी एक औरत के बारे में सोचना चाहिए था मैं जानता हूं कि अपनी मां को उसे अवस्था में देखकर तुम्हारी जगह कोई भी होता तो वह गुस्से से आग बबूला हो जाता लेकिन फिर भी तुमने आज तक अपने आप को संभाल कर रखी यही बहुत बड़ी बात है।
लेकिन तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था सूरज तुम नहीं जानते मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं।
(नीलू के मुंह से अपने प्यार का इजहार सुनकर सूरज गदगद हुए जा रहा था वह कभी सोचा भी नहीं था कि नीलू उससे प्यार करने लगेगी क्योंकि उन दोनों के बीच जो कुछ भी हो रहा था वह सिर्फ एक वासना का खेल था लेकिन नीलू के इजहार से सूरज को एहसास होने लगा था कि नीलू सच में उससे प्यार करती है नीलू की बात सुनकर सूरज के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे,,,, और नीलू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) भले ही हम दोनों का प्यार जिस्मानी तोर से शुरू हुआ लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम मेरे घर में ही मेरी मां के साथ इतना गंदा काम करोगे।
लेकिन इसके लिए भी तुम्हारी मां ने मुझे मजबूर किया था , नीलु,,,,! (कुछ सोचने के बाद सूरज धीरे से बोला)
मां ने मजबूर किया था,,,, तुम झूठ बोल रहे हो।
तो कौन सच कह रहा है कभी अपनी मां से पूछी हो नहीं तो तुमसे सच कह रहा हूं लेकिन क्या तुम्हारी मां बोल पाएगी नहीं बोल पाएगी तुमने सिर्फ एक मां के तौर पर मालकिन को देख रही हो एक पति के पत्नी के रूप में उसे देख रही है लेकिन एक औरत का रूप तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है औरत की जरूरत क्या होती है एक औरत होने के बावजूद भी तुम समझ नहीं पा रही हो बल्कि खुद अपनी जरूरत तुम मुझसे पूरी कर रही थी। (सूरज की बात सुनकर नीलू सूरज की तरफ देखने लगी तो सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हो बोला,,,) तुम अपने पिताजी की हालत तो अच्छी रही हो क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हारे पिताजी तुम्हारी मां को शारीरिक तौर पर संतुष्ट कर पाते होंगे,,,, तुम्हारी मां अभी भी पूरी तरह से जवान है गठीला बदन है ऐसे में उन्हें भी एक मर्द की जरूरत पड़ती है इस बात को कैसे तुम भूल जाती हो,,,,।
एसी भी क्या जरूरत की अपने पति को धोखा देना पड़े। तुम नहीं जानते सूरज अगर इस बारे में पिताजी को पता चल गया तो उनका दिल टूट जाएगा भरोसा टूट जाएगा क्योंकि बरसों से उन्होंने नाम कमाया है इज्जत कमाई है।
तुम खामखा चिंता करती हो ऐसा कुछ भी नहीं है मालिक की इज्जत बनी रहेगी मैं भला किसी को बताने वाला थोड़ी ना हूं क्योंकि तुम्हारे घर से ही तो हम लोग कभी खर्चा पानी चलता है। और जरा तुम ही सोचो नीलू,,, क्या औरत को अपने लिए नहीं जीना चाहिए तुम्हारी मां दिन भर इधर-उधर दौड़कर खेत का काम घर का काम मजदूरों को संभालना फसल को शहर में ले जाकर बिचवाना यह सब किसके लिए करती है तुम लोगों के लिए ताकि तुम लोगों को किसी बात की कमी ना हो और इज्जत बनी की बनी रहे वरना अगर मैं सच कह रहा हूं मालकिन यह सब काम देखना छोड़ दे तो तुम्हारे घर पर भी कोई पूछने वाला नहीं होगा इज्जत की तो बात जाने दो कोई एक पैसे की भी इज्जत नहीं करेगा तुम सबकी यह तो तुम्हारी मां है कि उसकी वजह से पूरा गांव क्या अगल-बगल के 20 30 गांव मुखिया जी को जानते हैं पहचानते हैं।
(सूरज पूरी कोशिश कर रहा था नीलू को समझने की सूरज का बड़प्पन इसी बात से नजर आ रहा था कि वह मुखिया की बीवी की इज्जत पर बिल्कुल भी दाग लगे नहीं देना चाहता था वह किसी भी तरह से मुखिया की बीवी का बचाव कर रहा था और वह भी उसकी खुद की बेटी से सूरज की बात सुनकर नीलू बोली)
मां ने ऐसा क्यों किया उन्हें तो ऐसा नहीं करना चाहिए।
इसमें तुम्हारी मां की गलती बिल्कुल भी नहीं है एक सामान्य औरत की तरह तुम्हारी मां भी बहक गई थी जैसा कि तुम बहक गई थी।
बहक गई थी मेरी तरह मैं कुछ समझी नहीं ,,,,,।
याद है तुमने मुझे कब देखी थी।
(सूरज की बात सुनकर नीलू को समझ नहीं पा रही थी वह सावड़िया नजरों से सूरज की तरफ ही देख रही थी सूरज उसकी आंखों में देखकर समझ गया था कि उसे याद नहीं है इसलिए वह उसे याद कराते हुए बोला,,)
याद है तुम्हें आम का बगीचा जहां पर मैं पेशाब कर रहा था और तुम चोरी छुपे मुझे देख रही थी और तुमने मेरा मोटा तगड़ा लंबा लंड देखकर ही मेरे साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने का फैसला की थी,,, (सूरज की बात सुनते ही नीलू को सब कुछ याद आ गया था और उसके चेहरे पर शर्म की लाली छाने लगी थी और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और तुम्हारी मां के साथ भी वही हुआ जो तुम्हारे साथ हुआ खेत में काम करते समय जब मुझे बड़ी जरूरत है पेशाब लगी थी तो मैं ट्यूबवेल के पीछे चला गया था पेशाब करने के लिए लेकिन न जाने कहां से तुम्हारी मां ठीक मेरे सामने झाड़ी के पास आ गई थी वह भी पेशाब करने के लिए आई थी वह साड़ी कमर तक उठाए बैठने वाली थी कि तभी उनके ठीक सामने में पेशाब कर रहा था और पेशाब करने की आवाज उनके कानों में पड़ी थी उनकी नजर मेरे पर पड़ गई और उन्होंने मुझे पेशाब करते हुए देख लिया मैं तो एकदम घबरा गया था लेकिन तुम्हारी मां की नजर सीधा मेरे लंड पर पड़ी थी जो कि उसे समय न जाने क्यों एकदम खड़ा था,,, अपने सामने मालकिन को देखकर मैं तुमसे घबरा गया था मैं वहां से जाता हूं इससे पहले तुम्हारी मां वहां से चली गई मुझे लगा कि मुझे मालकिन डांटेगी, लेकिन उसे समय ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जब शाम ढलने लगी और बाकी के मजदूर घर जाने लगे तो मैं भी उनके साथ घर की तरफ निकलने को हुआ लेकिन मालकिन मुझे रोक ली मैं एकदम से घबरा गया मुझे लगा के वही बात को लेकर मालकिन मुझे जरूर कुछ ना कुछ कहेंगी।
(सूरज की बात को नीलू बड़े ध्यान से सुन रही थी वह नहीं जानती थी कि सूरज बनी बनाई बात बता रहा था ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था वह जानबूझकर नमक मिर्च लगाकर बनी बनाई बात को नीलू के सामने परोस रहा था ताकि नीलू एक औरत के मन को अच्छी तरह से समझ सके औरत की जरूरत को समझ सके तभी वह अपनी मां को सहज रूप से ले सकेगी वरना अपनी मां के प्रति उसके मन में नफरत भर जाएगी सूरज की बात सुनकर नीलू धीरे-से बोली,,,)
क्या हुआ इसके बाद,,,,? (नीलू की आंखों में उत्सुकता दिखाई दे रही थी नीलू जानना चाहते थे कि आगे ऐसा क्या हुआ जो उसकी मां अपने ही नौकर के साथ हम बिस्तर होने पर मजबूर हो गई, यह ख्याल नीलू के मन में पहली बार आया था कि सूरज एक नौकर ही था, वरना अब तक वह सूरज को एक नौकर की हैसियत से कभी नहीं देखी थी लेकिन जब बात अपनी मां पर आ गई तो उसे एहसास होने लगा कि उसकी मां तो गांव की मुखिया की बीवी है बड़े घर की औरत है और ऐसे में उसका एक नौकर के साथ खेत में काम करने वाले लड़के के साथ शारीरिक संबंध यह बड़े शर्म की बात है जबकि वह खुद सूरज के साथ शारिरिक संबंध बना चुकी थी लेकिन वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज उसका हम उम्र ही था उसका और उसे सूरज के बीच लगाव होना स्वाभाविक था, लेकिन उसकी मां एक उम्र दराज औरत थी जिसे अपनी भावनाओं पर काबू होना जरूरी था । समाज में गांव में एक इज्जत थी एक उच्च पद था जिसकी गरिमा बनाए रखना उसका फर्ज था। नीलू की बात और उसकी उत्सुकता देखकर सूरज बोला,,,,)
तुम्हारी मां मुझे इशारे से ट्यबवेल की झोपड़ी के अंदर बुलाई।
वहां कोई और भी था।
नहीं,,, वहां हम दोनों किसी और कोई नहीं था सब लोग जा चुके थे और अंधेरा हो रहा था मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं क्योंकि मालकिन से दूसरी ही मुलाकात थी मालकिन का गुस्सा मैं जानता था क्योंकि लोग उनके गुस्से के बारे में बात करते थे इसलिए मैं घबरा रहा था लेकिन जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा हुआ मेरा हाथ पकड़ कर झोपड़ी के अंदर ले गई और बिना कुछ सोचे समझे सीधा सवाल दाग दी।
क्या बोली मां,,,।
वह सीधे बोली अपना पजामा खोल।
क्या,,,?
हां मालकिन मुझे यही बोली पहले तो मुझे लगा कि शायद मेरे कान बज रहे हैं लेकिन फिर वह दोबारा मुझे पजामा खोलने के लिए बोली मैं घबरा गया था मैं मालकिन के सामने हाथ जोड़कर बोला।
मुझे माफ कर दो मालकिन मुझे जाने दो मुझे नहीं मालूम था कि तुम वहां खड़ी हो वरना मैं वहां कभी जाता ही नहीं।
फिर मा ने क्या कहा,,,?
फिर क्या मालकिन पुरी मैं तुझे डांट नहीं रही हूं कुछ बोलेगी भी नहीं लेकिन अगर तू मेरी बात नहीं मानेगा तो समझ ले तेरा जीना हराम हो जाएगा मालकिन की बात सुनकर मैं एकदम से घबरा गया था वह बार-बार मुझे पजामा उतारने के लिए कह रही थी मेरे पास उनकी बात करने किसी और कोई रास्ता नहीं था इसलिए मैं मजबूर होकर अपने पजामा को खींचकर घुटनों तक कर दिया।
फिर,,,(अपने सूखने हुए गले को अपने थूक से गिला करने की कोशिश करते हुए नीलू बोली)
फिर क्या था मालकिन की तो जैसे आंखें फटी गई थी वह मेरे लंड की तरफ आश्चर्य से देख रही थी उसे समय तो मेरा खड़ा भी नहीं था बस लटक रहा था लेकिन खड़ा होने के बावजूद भी इतना भयानक लग रहा था की मालकिन को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था उनका मुंह खुला का खुला रह गया था। मुझे शर्म आ रही थी मालकिन की नजर में एक अजीब सी खिंचाव था मालकिन गहरी गहरी सांस ले रही थी और सच बताओ नीलू उसे समय जब मालकिन गहरी सांस ले रही थी उनके साड़ी का पल्लू उनके कंधे से नीचे गिर गया था और उनकी भरी हुई छाती एकदम से मेरी आंखों के सामने थी जो ऊपर नीचे हो रही थी और ब्लाउज के ऊपर का बटन भी खुला हुआ था पल भर के लिए मुझे ना जाने क्यों मालकिन के प्रति अजीब सा लगने लगा।
फिर क्या हुआ,,,,?
फिर मैं मालकिन से बोला कि अब मैं पैजामा ऊपर कर लूं तो वह बोली नहीं अभी रहने दे मुझे जी भर कर देख लेने दे क्योंकि मैं आज तक जिंदगी में ऐसा लंड नहीं देखी,,,,।
क्या मा ने ऐसा कहा,,,?
बिल्कुल नीलू मैं हैरान था हैरान इस बात पर था की मालकिन कह रही थी कि मैं आज तक ऐसा लंड कभी नहीं देखी जब की वह तो तुम दो बच्चों की मां थी चुदाई का सुख प्राप्त कर चुकी थी मलिक के साथ शारीरिक संबंध बन चुकी थी फिर भी वह ऐसा क्यों कह रही है मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि जहां तक तब मुझे ऐसा ही लगता था कि जैसा मेरा है वैसा सभी लड़कों का होता होगा लेकिन मालकिन की बात सुनकर में हैरान हो गया था और इसीलिए मैं मालकिन से पूछ बेठा।
यह क्या कह रही हो मालकीन मालिक का भी तो ऐसा ही होगा,,,,,।
यह क्या कह रहे हो सूरज मलिक का अगर ऐसा होता तो क्या मैं तुम्हारा इस तरह से हैरानी के साथ देखती।
क्या मालकिन ने मेरा मतलब है कि मा ने ऐसा कहीं।
मेरे मुंह से निकला एक-एक शब्द सच है मैं झूठ नहीं कह रहा हूं मालकिन ने ऐसा ही कही और उस दिन मालकिन की बात सुनकर मुझे पता चला कि सभी मर्दों का एक जैसा नहीं होता अलग-अलग ही होता है मुझे मालकिन की बात में सच्चाई नजर आ रही थी मैं उनसे दोबारा कुछ पूछता इससे पहले ही मालकिन हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को पकड़ ली,,,,,।
क्या,,,,,? मा ने ऐसा की,,, लेकिन क्यों,,,?
यह तो मैं नहीं जानता लेकिन मालकिन की हरकत में पल भर में ही मेरे बेजान पड़े लंड में जान भर दी और मेरा लंड खड़ा होने लगा मैं हैरानी से अपने लंड की तरफ देख रहा था,,, जितना हैरान में था उससे कई ज्यादा हैरान मालकिन थी मुझे यकीन होने लगा था की मालकिन सच में ऐसा लंड पहली बार देख रही थी,,,, मैं शर्म के मारे पानी पानी हो रहा था मैं अपने हाथ से पजामा पकड़ कर उसे ऊपर उठाना चाहा लेकिन मालकिन हाथ बढ़ाकर मेरा हाथ पकड़ लिया और रोक ली और बिना कुछ कहे बिना ही अपना हाथ आगे बढ़कर मेरे लंड को पकड़ ली और हिलाना चालू कर दी मैं क्या करता मुझे तो ना चाहते हुए भी मजा आने लगा था आनंद आने लगा था मेरी आंखें अपने आप बंद होने लगी थी और जब मेरी आंखें बंद हो गई तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं तुम्हारी मां के नरम नरम हाथ उसकी नरम नरम ऊंगलियां मेरे जिस्म में जादू चला रही थी,,,,(सूरज इस तरह की मदहोशी भरी बातें करते हुए नीलू की तरफ देख रहा था उसे एहसास हो रहा था कि नीलू को उसकी बातें सुनकर मजा आ रहा था उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसके चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो रहा था और यह देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न हो रहा था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मैं आंखों को बंद किया हुआ था लेकिन जैसे ही मुझे कुछ अजीब सा एहसास हुआ तो मैं अपनी आंखों को खोल दिया और जो मैंने अपनी आंखों से देखा उसे देखकर में दंग रह गया मैं घबरा गया मेरे बदन में कंपकंपी फैल गई।
ऐसा क्या देख लिया तुमने,,,,।
बुरा मत मानना नीलु,,,, मैंने जो देखा उसे सुनकर शायद तू हैरान हो जाओ तुम्हें अपनी मां पर गुस्सा भी आएगा लेकिन एक औरत की तरह अगर सोचो कि तो तुम्हें तुम्हारी मां की गलती बिल्कुल भी नजर नहीं आएगी।
पहले यह तो बताओ हुआ क्या बस गोल-गोल बात घूमा रहे हो।
आंख खुली तो मैंने देखा तुम्हारी मां मेरे लंड को मुंह में भर ली थी और उसे पागलों की तरह चूस रही थी मैं हैरान था नीलु,,,,, मैं कभी सपने में सोच भी नहीं सकता था कि कोई औरत ऐसा कर सकती है और मालकिन के बारे में तो मैं कभी सपने में भी सोच नहीं सकता था लेकिन वह सपना नहीं हकीकत था मालकिन मेरे लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी मैं पागल हुआ जा रहा था मेरे बदन में खुमारी छा रही थी मदहोशी छा रही थी मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था और अपने आप ही मेरी कमर आगे पीछे होना शुरू हो गई,,,, सच कहूं तो नीलू तुम्हारी मां मेरे लंड को देखकर बहन गई थी इसके बाद तो वह एकदम से खड़ी हुई और अपने सारे कपड़े उतार करें मेरे सामने नंगी हो गई।
क्या,,,?(एकदम हैरान होते हुए नीलू बोली)
हां नीलू तेरी आंखों के सामने तुम्हारी मां अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई पहली बार में किसी नंगी औरत को देख रहा था उसके जिस्म को देख रहा था उसकी खरबूज जैसे चुचियों को देख रहा था और तुम्हारी मां की बुर को मैं पहली बार देखा तो मुझे एहसास हुआ की औरत की बुर कितनी खूबसूरत होती है वरना उसके बारे में मैं सिर्फ सुना करता था देखा नहीं था उसका आकार कैसा होता है कैसी दिखती है यह सब मुझे पहली बार तुम्हारी मां की वजह से पता चला मैं तो तुम्हारी मां को देखा ही रह गया सच में नीलू तुम्हारी मां बहुत खूबसूरत है पूरे गांव में क्या अगल-बगल के 40 50 गांव में भी तुम्हारी मां की तरह खूबसूरत औरत कोई नहीं होगा। पहली बार मुझे एहसास हुआ की औरत कितनी खूबसूरत होती है तुम्हारी मां मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि मेरे मन में क्या चल रहा है और समझ गई थी कि यह सब मेरे लिए पहली बार है मैंने आज से पहले कभी एक नंगी औरत को नहीं देखा था।
(इस तरह की मदहोशी वाली बातें सुनकर नीलू के बदन में हलचल मचाना शुरू हो गया था ना चाहते हुए भी उसकी बुर से मदन रस बहना शुरू हो गया था यह जानते हुए भी की सूरज उसकी मां की गंदी बात बता रहा है फिर भी वह अपने आप को काबू में नहीं कर पा रही थी और वह उत्तेजित हुए जा रही थी और उत्तेजित होते हुए वह धीरे से बोली)
फिर,,,,,?
फिर क्या नीलू,,, देख रही हो उसे दिन की बात बात कर इस समय मेरा लंड खड़ा हो गया है (एकदम से घुटनों के बाल बैठते हुए अपने पजामा को नीचे करके अपने खड़े लंड को बाहर निकलकर नीलू को दिखाते हुए वह बोला और अगले ही पल फिर से उसे पजामे में डाल दिया वह जानबूझकर ऐसा हरकत नीलू को उत्तेजित करने के लिए कर रहा था ताकि इस समय वह नीलू को चोद सके उसके गुस्से को पूरी तरह से शांत कर सके,,,, नीलु भी मस्त हो गई सूरज के खड़े लंड को देखकर ,, नीलू की बुर भी कचोरी की तरह फूलने लगी थी,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था मैं तो तुम्हारी मां की खूबसूरती देखकर पागल हुआ जा रहा था तभी तुम्हारी मां बोली। सूरज मेरी बात मानेगा तो हमेशा खुश रहेगी तुझे हमेशा काम मिलता रहेगा और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुझे बदनाम कर दूंगी और कोई तुझे काम भी नहीं देगा,,,,, मैं क्या करता नीलू मेरे पास तुम्हारी मां की बात मानने के सिवा और कोई दूसरा रास्ता नहीं था लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि तुम्हारी मां क्या मनवाना चाहती है,,,,।
क्या बोली मेरी मां,,,,।
तुम्हारी मां बोली थी मेरी इच्छा पूरी कर
कैसी इच्छा,,,?
पहले तो मैं भी नहीं समझ पाया लेकिन अगले ही पर तुम्हारी मां एकदम से मेरी तरफ आगे पड़ी और मेरे सर पर हाथ रखकर मेरे बाल को कस के पकड़ ली और धीरे से मेरे मुंह को नीचे की तरफ ले जाने लगी जैसे ही मेरा मुंह तुम्हारी मां की दोनों टांगों के बीच आया वह एकदम से अपनी कमर को आगे की तरफ उचका कर अपनी बुर को मेरे मुंह से सटा दी और बोली चाट ईसे,,,, मैं क्या करता तुम्हारी मां की बुर से इतनी खूबसूरत इतनी मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपने आप ही मेरी जीत बाहर निकल गई और मैं तुम्हारी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया।
(सूरज को साफ दिखाई दे रहा था कि नीलू उसकी बातों को सुनकर उत्तेजित हो रही थी क्योंकि वह धीरे से अपने थूक को गले के अंदर निगल रही थी यह उत्तेजना की निशानी थी,,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए फिर बोला,,) मुझे पागलों की तरह चाटने पर तुम्हारी मां मजबूर कर दे,,,,, मैं कर भी क्या सकता था मैं पहली बार इतनी खूबसूरत औरत को देख रहा था और भी बिना कपड़ों के तो एक जवान लड़का होने के नाते में भी अपने हाथ से यह मौका जाने नहीं देना चाहता था मैं भी पागलों की तरह तुम्हारी मां की बुर चाट रहा था तुम्हारी मां पागल हो जा रही थी जोर-जोर से चीख रही थी चिल्ला रही थी ।
और नीलू उस दिन पहली बार में जान पाया की चुदाई किसे कहते हैं।
मतलब कि उसे दिन मन नहीं तुम्हारे साथ,,,,,
हां तुम्हारी मां मेरे से चुदवाई और यह सिलसिला उसे दिन से शुरू हो गया और न जाने तुम कहां से देख ली।
घर पर देखी थी सुबह-सुबह जब घर के पीछे मां टांग उठा कर करवा रही थी।
ओहहहहह उस दिन,,,,,(एकदम से जैसे सूरज को याद आया हो वह हैरान होता हुआ बोला फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,,) लेकिन नीलू एक तरह से यह अच्छा ही हुआ कि तुम अपनी आंखों से सब कुछ देख ली,,,,।
क्यों अच्छा हुआ,,,?
जरा तुम ही सोचो तुम्हारा और मेरे बीच भी वही रिश्ता है जो मेरे और तुम्हारी मां के बीच है अगर भुले भटके हम दोनों को चुदाई करते समय तुम्हारी मां देख ले तो तुम्हारी मां का मुंह बंद करने के लिए तो मुंह का सकती हो कि वह मेरे और तुम्हारी मां के बीच क्या चल रहा है यह जानती हो तो तुम्हारी मां कुछ कह नहीं पाएगी शांत हो जाएगी तुम्हारा भी रास्ता बन जाएगा और उसका खुद का रास्ता बन जाएगा तो मां बेटी मेरे साथ मजा ले सकोगी।
हरामजादे में तुझसे प्यार करती हूं।
मैं भी तुमसे प्यार करता हूं लेकिन क्या करूं जिंदगी में ऐसे भी पल आते हैं जब हमें दूसरों के बारे में भी सोचना पड़ता है तुम ही अगर सोचो मैं तो कुछ नहीं कहूंगा अगर भावनाओं में भाकर तुम्हारी मां किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात तो बना ली और वह सारे गांव में बता दिया तो क्या होगा। बदनामी हो जाएगी ना ना तो मुखिया जी किसी को मुंह दिखाने के काबिल रह जाएंगे ना तो मालकिन और ना तुम दोनों जन और सब लोग पूरे परिवार को रंडी की तरह ही समझेंगे आते-जाते लोग तुम्हें तुम्हारी मां का नाम देखकर चिढ़ाएंगे क्या तुम्हें यह सब बर्दाश्त होगा मैं तो तुम्हारे परिवार को अपना परिवार समझता हूं इसलिए मर जाऊंगा लेकिन यह सब किसी को नहीं बताऊंगा।
(सूरज की बात में सच्चाई थी इस बात की नीतू अच्छी तरह से समझती थी इसलिए ना चाहते हो कि उसके होठों पर मुस्कान आ गई और वह मुस्कुराते हुए बोली,,)
अब मुझे जाना चाहिए,,,,(नीलू को मुस्कुराता हुआ देखकर सूरज समझ गया था की बात बन गई है लेकिन वह जाति से पहले उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपने सीने से लगा लिया और उसके खूबसूरत चेहरे को अपने हाथ में लेकर बोला)
इतनी जल्दी चली जाओगी इतने दिन बाद मिली हो और जाने को कह रही हो,,,,।
तो क्या करूं,,, तुम्हारे साथ यहां रुक कर खरबुजे तोडुं,,,,,,।
खरबूजे नहीं मेरी जान,,,(इतना कहकर वहां नीलू को एकदम से अपनी गोद में उठा दिया नीलू घबरा गई लेकिन वह नहीं माना और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) इतने दिन बाद मिली हो ऐसे थोड़ी ना जाने दूंगा (और ऐसा कहते हुए उसे गोद में उठाए हुए ही झोपड़ी की तरफ जाने लगा नीलू यह देखकर सिहर उठी लेकिन अपनी मां की कामलीला के बारे में सुनकर उसकी बुर भी पानी छोड़ रही थी वह भी सूरज की मोटे तगड़े लोगों को अपनी बुर में लेना चाहते थे क्योंकि बात ही बात में उसने अपनी लंड की की झलक भी दिखा दिया था,,,,, नीलू उसे इनकार नहीं कर पाई और सूरज उसे झोपड़ी में लेकर चला गया यहां पर किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी उसके कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया। नीलू अच्छी तरह से जानती थी उसे क्या करना है अपनी मां की लंड की चुसाई की कहानी सुनकर उसका भी मन कर रहा था सूरज के लंड को चूसने के लिए इसलिए वह तुरंत घुटनों के बल बैठ गई और सूरज के मोटे तगड़े लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी और तब तक चुस्ती रही जब तक कि वह पूरी तरह से तृप्त नहीं हो गई क्योंकि वह भी सूरज के साथ बहुत दिनों बाद इस तरह का मजा लूट रही थी। सूरज पूरी तरह से तैयार हो चुका था नीलू की चुदाई करने के लिए।
देखते ही देखते सूरज उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी गुलाबी छेद में अपना लंड डालकर उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम दिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया नीलू को उसकी मां की रंगीन कहानियां सुना कर सूरज भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था वैसे तो उसकी सारी कहानियां मनगढ़ंत थी लेकिन फिर भी किसी को भी उत्तेजित कर दे इस तरह की रसभरी कहानी थी और वही कसर सूरज नीलू के ऊपर उतार रहा था। सूरज का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था और उसकी चुदाई करता हुआ सूरज उसे भविष्य के सपने भी दिख रहा था वह धक्के लगाते हुए बोला।
देखना नहीं तो मेरी जान सब कुछ सही रहा था तो मेरी बीवी बनोगी और तुम्हारी मां मेरी सास फिर देखना एक ही पलंग पर मां बेटी दोनों की चुदाई करूंगा।
हरामजादे शादी के बाद मैं यह सब बिल्कुल भी नहीं करने दूंगी।
अपनी मां के बारे में सोचो नीलू सासू मां बुढी नहीं है अभी पूरी तरह से जवान है। घर की बात घर में ही रह जाएगी तुम भी खुश सासू मां भी खुश।
नहीं बिल्कुल भी नहीं मैं अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ नहीं बांटूंगी,,,।
दूसरे के साथ कहां तुम्हारी मां के साथ मेरी सासू मां के साथ,,,,, सोचो कितना मजा आएगा।
नहीं लेना मुझे ऐसा मजा,,,,।(सूरज की बातें सुनकर नीलू को मजा आ रहा था वह भी भविष्य के सपने देख रही थी वह बार-बार उसकी मां को सासू मां और उसे बीवी कर कह कर संबोधन कर रहा था इस बात की खुशी नीलु के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और इस बात को लेकर सूरज काफी उत्तेजित हुआ जा रहा था थोड़ा जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और तब तक धक्का लगाता रहा जब तक की नीलु का पानी निकालने के बाद खुद झड़ नहीं गया।
नीलू घर जा चुकी थी। सूरज भी शाम को ढेर सारा खरबूजा लेकर मुखिया के घर पहुंच चुका था। सूरज को खरबूजे के खेत के सारे खरबूजे लाया हुआ देखना मुखिया और मुखिया की बीवी खुश नजर आ रही थी क्योंकि उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि सूरज आज ही खरबूजा लेकर पहुंच जाएगा और खरबुजे को बाजार में पहुंचाना भी बहुत जरूरी था,,,, मुखिया सूरज से बोले,,)
यह तुमने बहुत अच्छा किया अब सही समय पर खरबूजा शहर पहुंच जाएगा लेकिन क्या तुम्हें बैलगाड़ी चलानी आती है।
जी मालीक,,,,
तब तो यह और भी अच्छा हुआ सुबह ही शहर के लिए निकलना है क्या तुम जा सकोगे इसके लिए अलग से पैसे भी मिलेंगे,,,,।
बिल्कुल मालिक मैं चला जाऊंगा,,,,,।
(शहर जाने की बात सुनते हैं नीलू और शालू दोनों जो अपनी मां की बगल में खड़े थे एग्जाम से खुश होते हुए अपने पिताजी की तरफ देखने लगी और बोली)
बाबूजी हम भी शहर जाएंगे हमें भी नए कपड़े लेने हैं शहर से,,,,।
नहीं नहीं बाद में कभी चली जाना।
बाद में कब हम दोनों को अभी जाना है सूरज के साथ वहां से कपड़े भी खरीद लेंगे और शहर भी घूम लेंगे,,,,।
तुम क्या कहती हो नीलू की मां,,,,।
सूरज साथ में है तो कोई दिक्कत नहीं है,,,,(इतना सुनते ही नीलु एकदम से खुश हो गई और अपनी मां को गले लगा ली,,,, लेकिन मुखिया की बीवी सख्त हिदायत देते हुए बोली)
लेकिन याद रखना सूरज के साथ ही रहना इधर-उधर कहीं चली मत जाना सूरज जैसा कहता है वैसा ही करना,,,,,।
ठीक है मां हम दोनों वैसा ही करेंगे जैसा सूरज कहेगा,,,(नीलु सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,,, सूरज भी दोनों लड़कियों को साथ ले जाने की बात से मन ही मन खुश हो रहा था,,,,,,, दूसरे दिन वह बड़े सवेरे ही मुखिया के घर पहुंच चुका था )
Bahut hi umda update he rohnny4545 Bhai
Suraj badi hi chalaki se nilu ko samjha diya aur lage hath uski badhiya se chudayi bhi kar di.........
Ab shahar jakar bhi suraj nilu ko jarur chodega.........
Keep rocking Bro
































