Kaise likhte ho yaar itna accha, yaar mein aapki sab stories padh chuka hun, kuch tips dedo Bhai, yaha aapse behtar writer shayad hi koi ho,अपनी मां को बता कर बड़े सवेरे ही सूरज मुखिया के घर पहुंच चुका था। वहां पहुंच कर देखा तो घर के आंगन में ही लकड़ी के बक्से में खरबूजा भरा हुआ था ऐसे तकरीबन 20-25 बॉक्स बन चुके थे। पास में ही बैलगाड़ी खड़ी थी जो की काफी अच्छी खासी थी। लेकिन अभी वहां पर कोई था नहीं इसलिए सूरज वहीं पर बैठ गया और मुखिया का इंतजार करने लगा वह जानता था कि इस समय ऐसा कोई मौका मिलने वाला नहीं है जिससे उसकी गर्मी शांत हो सके इसलिए वह आराम से बैठकर मुखिया का इंतजार करने लगा कि तभी थोड़ी देर बाद ही मुखिया वहां सूरज को देखकर मुस्कुराता हुआ आया और बोला।
आ गए बेटा सूरज,,,,।
(मुखिया की आवाज सुनकर सूरज एकदम उठकर बैठ गया और हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए बोला)
नमस्कार मालिक,,,, शहर का मामला था इसलिए जल्दी आ गया वैसे भी मैं कभी शहर तो गया नहीं हूं लेकिन इतना जरुर जानता हूं कि आने-जाने में समय लग जाएगा।
मुझे मालूम है, तुम मेरे सबसे वफादार बनते जा रहे हो इससे पहले तुम्हारे पिताजी काम करते थे लेकिन तुमने अपने पिताजी की कमी बिल्कुल भी महसूस होने नहीं दिया है हम लोगों को तुमसे यही उम्मीद है कि तुम अपना काम ईमानदारी और वफादारी से करोगे। सच कहूं तो मैं तुम्हें मजदूर या नौकर नहीं समझता बल्कि मैं अपने बेटे जैसा ही समझता हूं,,, मैं कभी-कभी सोचता हूं कि काश तुम मेरे बेटे होते तो मेरा कितना काम आसान हो जाता।
(मुखिया की बात सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला इस घर का होने वाला दामाद हूं आगे चलकर सब कुछ मेरा ही हो जाएगा तब इसकी अच्छे से देखरेख करूंगा,,, सूरज अपने मन में ख्याली पुलाव पका रहा था कि तभी मुखिया अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोले) खैर कोई बात नहीं तुम भी तो मेरे बेटे जैसे ही हो तभी तो यह काम तुम्हें सौंपा है अगली बार यह काम हमने किसी और को दिया था तो वह तो खरबूजे बेचा ही बेचा बैलगाड़ी भी लेकर गायब हो गया,,,।
(यह सुनकर सूरज हंसने लगा और हंसते हुए बोला)
मैं गायब नहीं होऊंगा मलिक,,,।
अरे बेटा मैं जानता हूं तुम भोला के लड़के हो धोखा नहीं दे सकते इसलिए तो तुम्हारे साथ अपनी दोनों बेटियों को भेजने के लिए तैयार हो गया हूं वरना मैं किसी के साथ अपनी बेटी को आने जाने नहीं देता,,, लेकिन यह अभी तक आई क्यों नहीं समय हो रहा है तुम खाना खाए हो कि नहीं,,,।
नहीं मालिक इतनी सुबह-सुबह,,, मैं जल्दी ही निकल आया अभी घर पर खाना बना ही नहीं था।
ओहहह अच्छा हुआ कि तुम मुझे बता दिए वरना खाली पेट ही चले जाते एक काम करो लगता है नीलू और शालू अभी तैयार हो रही है तुम घर के पीछे चले जाओ मालकिन खाना बना रही होगी वही जाकर खा लो,,,,।
(घर के पीछे के बारे में सुनकर सूरज एकदम से उत्साहित हो गया और वह बिल्कुल भी देर किए बिना अपनी जगह से उठकर खड़े हो गया और बोला)
बहुत अच्छा मालिक सफर लंबा है पेट में कुछ चार रहेगा तभी दिमाग काम करेगा और मालकिन को कहकर थोड़ा खाना भी बंघवा देना रास्ते में काम आएगा,,,।
अरे बिल्कुल मैं पहले ही तुम्हारी मालकिन को कह चुका हूं वह इसीलिए तो इतनी सुबह-सुबह खाना बना रही है,,,,,।
ठीक है मालिक में जाकर खाना खा लेता हूं,,,,,।
ठीक है जाओ,,, तब तक यह खरबूज की पेटीयां बैलगाड़ी में लदवा देता हूं।
ठीक है मालिक,,, (और इतना कहकर सूरज एकदम उत्साहित होता हुआ जल्दी-जल्दी कदम आगे बढ़ने लगा क्योंकि वह जल्द से जल्द घर के पीछे पहुंचाना चाहता था क्योंकि घर के पीछे एक बार वह मुखिया की बीवी से मजा ले चुका था और आज भी उसकी आस बंधी हुई थी,,,, घर के पीछे पहुंचकर वह देखा तो मुखिया की बीवी सच में खाना बना रही थी उलझे हुए बाल साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिरा हुआ इस रूप में वह एकदम काम देवी लग रही थी जिसे देखते ही सूरज का लंड खड़ा होने लगा था,,,,, सूरज कुछ कहता इससे पहले ही मुखिया की बीवी की नजर सूरज पर पड़ गई और वह मुस्कुराते हुए सूरज की तरफ अच्छी और बोली।)
अच्छा हुआ तू आ गया ले जल्दी से गरमा गरम खाना खा ले फिर तुम लोगों के लिए मैं खाना भी बांध देती हूं,,,।
(मुखिया की बीवी का इतना कहना था कि सूरज एकदम से उत्साहित होता हुआ उसके करीब पहुंच गया और बोला)
पागल हो गई हो मेरी रानी सुबह-सुबह में दूध पीता हूं उसे दिन की तरह आज भी अपनी चूची पिला दो मुझे सफर अच्छा हो जाएगा,,,।
धत् हरामी जगह भी तू देखा नहीं है बस शुरू कर जाता है मुझे लगी रहा था तुझे देख कर की तेरे दिमाग में यही सब चल रहा होगा।
क्या करूं मालकिन तुमको देखते ही मेरा दिमाग पागल हो जाता है,,,।
अपना यह पागलपन संभाल कर रख किसी और दिन काम आएगा अभी मुझे काम करने दे और वैसे भी सालों और नीलू दोनों जाग चुकी है और तैयार हो रही है,,,, उन दोनों को संभाल कर ले जाना तेरे भरोसे छोड़ रही हूं,,,।
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मालकिन मैं तो कहता हूं तुम भी हमारे साथ चलो रास्ते भर मजा करेंगे।
सच कहूं तो मेरा खुद चलने का मन था लेकिन शालू और नीलू ने पूरा काम बिगाड दी,,, ।
क्या बात कर रही हो मालकिन क्या सच में तुम्हारा चलने का मन था।
हां रे बिल्कुल,,, (दाल में चमची डालकर उसे चलाते हुए बोली,,)
धत् तेरी कि सारा मजा करके रहोगे तुम साथ में होती तो कितना मजा आता,,,,।
(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी मन ही मन मुस्कुरा रही थी यह सोचकर उसे अच्छा लग रहा था कि सूरज को उसका साथ अच्छा लगता है,,,, फिर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
चलो कोई बात नहीं फिर कभी मौका मिलेगा तो हम दोनों साथ शहर चलेंगे लेकिन अभी जो तुमने मेरी हालत की हो,,, (इतना कहने के साथ ही पजामी को एकदम से नीचे खींच कर अपनी खड़े लंड को दिखाते हुए) इसका तो कोई इलाज करो,,,, (सूरज के लंड की तरफ देखकर मुखिया की बीवी उत्तेजना से गदगद हो गई क्योंकि सुबह-सुबह अपनी आंखों से सूरज के टनटनाए हुए लंड को देख ली थी और उसे उस दिन वाली बात याद आ गई थी जब इसी तरह से हुआ घर के पीछे दूध पका रही थी और सूरज उसकी जमकर चुदाई किया था,,,, पल भर के लिए अपने लंड को दिखाकर वापस अपना पजामा ऊपर कर लिया था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) कुछ तो करो मालकिन मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,।
(सूरज की बात सुनकर वह एकदम से अपनी कमर पर हाथ रखकर सूरज की तरफ घूम गई लेकिन सामान्य अवस्था में भी वह अपनी जवानी की मादकता के छीटे सूरज पर गिरने के लिए वह अपनी छाती को आगे की तरफ उचका दी थी और बड़े ही मादक स्वर में बोली,,,)
अब मैं इसमें भला क्या कर सकती हूं,,,,।
(उसका इस तरह से खड़ी होना सूरज के लिए आमंत्रण था क्योंकि उससे भी रहा नहीं जा रहा था सूरज के लंड को देखकर उसकी बुर पानी पानी हो रही थी,,,,, लेकिन अपने मुंह से सूरज को आगे बढ़ने के लिए बोल नहीं पा रही थी लेकिन वह जानती थी कि सूरज मौका देखकर उसकी चुदाई किए बिना यहां से जाने वाला नहीं है,,,, और जैसा वह सोच रही थी ठीक वैसा ही हुआ सूरज मुखिया की बीवी की उन्नत छातियों को देखकर अपने आप को रोक नहीं पाया और एकदम से आगे बढ़ गया और मुखिया की बीवी की कमर में ही कहां डालकर उसे अपनी तरफ खींचकर अपनी बाहों में कस लिया वैसे तो मुखिया की बीवी पूरी तरह से देखने को तैयार थी लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर वह सूरज से बोली)
अरे पागल हो गया है क्या तुझे कहीं ना नीलु और शालू दोनों जग गई है,,।
तुम दोनों की चिंता बिल्कुल भी मत करो मालकिन,,,, वह दोनों तैयार होने में मस्त होंगे वैसे भी लड़कियां जब तैयार होती है तो कुछ ज्यादा ही समय लेती हैं इतना समय हम दोनों के लिए काफी है।
नहीं हरामी छोड़ मुझे कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,, (वैसे तो मुखिया की बीवी का भी मन सूरज के साथ चुदाई का कर रहा था लेकिन फिर भी वह थोड़ा सा डर दिखा रही थी ताकि सूरज चौकन्ना रहे,,, सूरज कहां मानने वाला था मुखिया की बीवी की बात सुनकर भी वह उसकी बात को अनसुना करते हुए एकदम से ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,, और उसके लाल लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, सूरज की हरकत से मुखियाकी बीवी मदहोश होने लगी उसकी टांगों के बीच की पतली दरार से मदन रस बहने लगा,,,,, वह गहरी गहरी सांस लेने लगी थी,,,,, सूरज भी मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था वह एकदम से मुखिया की बीवी को कंधे से पड़कर दूसरी तरफ घुमा दिया और दीवार पकड़ा कर खड़ी कर दिया,,, क्योंकि सूरज को ज्यादा कुछ करना नहीं था इस समय खाली उसकी साड़ी को कमर तक उठाना भर था इसके बाद अपना काम शुरू कर देना था। लेकिन फिर भी मुखिया की बीवी की जवानी के साथ खेलने का आदी हो चुका था सूरज इसलिए बिना कपड़ा ऊपर उठे ही वह पीछे से उसे अपनी बाहों में भरकर एक बार फिर से उसकी चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया और इस दौरान धीरे-धीरे उसके ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया हालांकि अभी भी मुखिया की बीवी के दोनों हाथ दीवार से सटे हुए थे वह एक तरह से दीवार का सहारा दी हुई थी क्योंकि सूरज की हरकतों से वह उत्तेजना से गनगना जा रही थी। सूरज को इस तरह से मदहोश होता हुआ देखकर मुखिया की बीवी बोली।
जो भी करना है जल्दी कर कोई आ गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे तु ना तो समय देखता है ना जगह देखता है बस शुरू पड़ जाता है,,,।
मैं सिर्फ मौका देखता हूं मालकिन इससे अच्छा मौका कहां मिलने वाला है,,,, वैसे भी मलिक मुझसे कह रहे थे कि वह मुझे मजदूर या नौकर नहीं समझते बल्कि अपने बेटे जैसा समझते हैं।
हां तो इसमें क्या हो गया हम लोग तुझे बेटे जैसा ही समझते हैं।
बेटे जैसा समझती हो लेकिन तुम तो मुझसे आदमी वाला काम करवाती हो।
अरे बेवकूफ बेटा भी तो आदमी ही होता है एक औरत को खुश करना मर्द का काम होता है और एक तू मर्द है,,,,,,।
और हां मालिक को इस बात का अफसोस है कि उन्हें कोई बेटा नहीं है वह सोच रहे थे कि अगर मैं उनका बेटा होता तो उनका कितना काम आसान हो जाता। (नंगी चूची को अपने दोनों हाथ में लेकर जोर-जोर से दबाते हुए सूरज बोला उसकी हरकत से मदहोश होते हुए क्योंकि बीवी के मुंह से शिसकारी की आवाज निकल रही थी)
सहहहहह आहहहहह ऊमममममममम,,,, यह तो तेरे मलिक की गलती है वही मुझे खुश नहीं कर पाए तो बेटा कहां से होगा।
क्या तुम्हें भी बेटा चाहिए मालकिन,,,,।
क्यों नहीं लेकिन अब उम्मीद नहीं है,,,।
क्यों उम्मीद नहीं है मैं तो हूं ना कहो तो मैं तुम्हें बेटा दे सकता हूं,,,।
धत् हरामी अब मुझे नहीं चाहिए बेटा तो जल्दी से अपना काम खत्म कर मेरी हालत खराब कर दे रहा है,,,, वैसे भी देर हो रही है।
(सूरज मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था उसे यहां पर आए काफी देर हो चुकी थी और वह जानता था कि यहां पर कोई भी आ सकता था मुखिया भी आ सकते थे उनकी दोनों बेटियां भी आ सकती थी वैसे तो एक बेटी को सब कुछ पता चल गया था वह देख लेती तो कोई बात नहीं थी लेकिन दूसरा कोई देखा तो मामला गड़बड़ हो सकता था इसलिए सूरज बिल्कुल भी देर ना करते हुए एकदम से मुखिया की बीवी की साड़ी को पकड़ कर कमर तक उठा दिया और दोनों हाथ से कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपने लंड के सिधान पर व्यवस्थित करने लगा,,,, जब सुरज को मुखिया की बीवी की गुलाबी बर दिखाई देने लगी उसका रसीला छेद दिखाई देने लगा तब एकदम से अपने पजामे को नीचे किया और ढेर सारा थुक अपने लंड के सुपाड़े पर लगा लिया,,,, और फिर बिना कुछ बोले अपने गरमा गरम मोटे आलू बुखारे जैसे सुपाडे को मुखिया की बीवी की बुर पर रखकर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,,, थूक और बुर की चिकनाहट पाकर सूरज का लंड अंदर की तरफ सरकने लगा,, धीरे-धीरे करके वह अपना पूरा लंड मुखिया की बीवी की बुर में डाल चुका था,,, अपनी आंखों को बंद करके मुखिया की बीवी इस पल का मजा लूट रही थी जैसे-जैसे मोटा तगड़ा लंड अंदर की तरफ घुस रहा था वैसे-वैसे उसके चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे,,,,।
सूरज बिना देर किए मुखिया की बीवी की चिकनी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया सुबह-सुबह बिना खाए यह सूरज के लिए स्वादिष्ट व्यंजन था वह अच्छी तरह से जानता था कि सुबह-सुबह खूबसूरत औरत को चोदने को मिल जाए बस इससे ज्यादा भला और क्या हो सकता है,,,, सूरज बिना रुके अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा था,, मुखिया की बीवी अपनी सिसकारी की आवाज को काबू में किए हुए थी लेकिन फिर भी उसके मुंह से रह रहकर आहह आहह की आवाज निकल जा रही थी। मुखिया की बीवी जब भी चुदवाती थी एकदम खुलकर चुदवाती थी और इस तरह से चुदवाने वाली औरत ही सूरज को मदहोश और मत कर देती थी। मुखिया की बीवी का पिछवाड़ा सूरज का बेहद को भावना लगता था इसलिए वह ज्यादातर मुखिया की बीवी की पीछे से लेता था। सूरज बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था और हर एक धक्का उसके बच्चेदानी से टकरा रहा था। सूरज की बात सुनकर कुछ पल के लिए उसका भी मन बहकने लगा बैठे के लिए। उसकी भी ख्वाहिश थी कि उसका एक बेटा होता तो कितना अच्छा होता क्योंकि मुखिया होने की वजह से उसकी रियासत थोड़ी बड़ी थी। वह जानती थी की बेटियां तो शादी के बाद अपने घर चली जाएंगी तो यह सब कौन संभालेगा। यह चिंता हमेशा से उसे रहती थी लेकिन जब उसे एहसास हो गया कि अब उसे बेटा होने वाला नहीं है तो अपना मन मार कर वह खुद ही काम में छूट गई थी और सारा काम संभाल ली थी।
लेकिन आज सूरज के मुंह से यह बात सुनकर कि अगर वह कह तो उसे बेटा दे सकता है एक बार फिर से उसकी भावनाएं जागरूक होने लगी थी एक बार फिर से उसे एहसास होने लगा था कि वह फिर से मां बन सकती है लेकिन फिर इस बारे में सोच कर उसे शर्म महसूस होने लगी थी कि दोनों बेटियां जवान हो चुकी थी दोनों का विवाह करने का समय हो चुका था और ऐसे में उसका खुद का मां बनना कितना लज्जित कर देता है,,,, इसलिए एक बार फिर से अपनी भावनाओं को काबू में कर ली थी और इस समय सूरज से चुदवाने का मजा लूट रही थी,,, थोड़ी देर बाद दोनों के सांसे उखड़ने लगी,,, मुखिया की बीवी गहरी गहरी सांस ले रही थी क्योंकि वह चरम सुख के करीब पहुंच चुकी थी और इसका अहसास होते ही सूरज भी जोर-जोर से तक के लग रहा था क्योंकि उसका भी पानी निकलने वाला था और अगले ही पल वह अपने दोनों हाथों को मुखिया की बीवी की कमर से हटाकर उसकी दोनों बड़ी-बड़ी चूचियों पर रख दिया और उन्हें जोर-जोर से दबाता हुआ अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे,, दोनों की किस्मत बहुत तेज थी कि इतनी देर होने के बावजूद भी अभी तक वहां कोई नहीं आया था। जल्दी-जल्दी दोनों अपने कपड़ों को दुरुस्त कर लिए और मुखिया की बीवी थाली में दाल चावल रोटी सब्जी निकालकर उसे परोस दिखाने के लिए और वह खाना खाने लगा।
सूरज खाना खाने के बाद वहां से निकल गया था बैलगाड़ी के पास और उसके जाने के बाद ही नीलू और शालू दोनों जाकर खाना खाने लगे थे। खाना खाते समय मुखिया की बीवी अपनी दोनों बेटियों को सख्त हिदायत दे रही थी।
तुम दोनों ज्यादा शरारत मत करना क्योंकि अब तुम दोनों बाहर जा रहे हो सूरज के साथ ही रहना इधर-उधर बिल्कुल भी मत जाना।
तुम चिंता मत करो मां हम दोनों सूरज के ही साथ रहेंगे,,,,।
अपना ख्याल रखना पहली बार मैं तुम दोनों को बाहर भेज रही हूं कोई और होता तो शायद में तुम दोनों को नहीं भेजती लेकिन सूरज ईमानदार और विश्वास वाला लड़का है इसलिए तुम दोनों को भेज रही हूं।
(थोड़ी देर में मुखिया की बीवी अपने दोनों बेटियों के साथ बैलगाड़ी के पास आ गई थी वहां पर पहले से ही मुखिया खड़ा था और वह सूरज को कुछ समझा रहा था,,,, बैलगाड़ी में सारे खरबूजे की पेटीया रखी जा चुकी थी सूरज बार-बार दोनों बहनों को ही देख रहा था नीलू की जवानी का मजा तो वह चख चुका था लेकिन शालु अभी तक उसके नीचे नहीं आई थी कसी हुई सलवार में शालु की गांड जानलेवा लग रही थी उसकी दोनों गोलाइयां तरबूज के फांक की तरह लग रही थी ऐसा लग रहा था उसकी सलवार में गोल-गोल तरबूज लगे हो। कुल मिलाकर दोनों बहने उसका पानी निकालने के लिए तैयार थी,,,, शालू और नीलू को बैठने के लिए पीछे जगह थी दोनों पीछे बैठ चुकी थी और सूरज बैलगाड़ी चलाने के लिए आगे बैठ गया था मुखिया की बीवी ने रास्ते में खाने के लिए रोटी सब्जी और आचार बांध कर दे दी थी,,,, सूरज निकल चुका था एक नई सफर के लिए,,,,, जाते-जाते मुखिया की बीवी और मुखिया दोनों एक साथ बोल पड़े)
संभाल कर जाना,,,।
बहुत ही गरमागरम कामुक और शानदार उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गयारात भर जमकर चुदाई करने के बाद सुबह-सुबह भी सूरज अपनी मां की जवानी का मजा ले चुका था जिसमें उसकी मां ने उसका पूरा सहयोग दी थी पहले तो सूरज को ऐसा ही लग रहा था कि जैसे उसकी मां का मन बदल गया हो क्योंकि वह इस तरह की बात ही कर रही थी सीधे-सीधे यह कह रही थी कि अब से आगे यह सब नहीं होगा जो कुछ भी होगा इसमें दोनों की गलती है सूरज मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था वह जानता था कि अगर वह आज वह अपनी मां की हां में हां मिला दिया तो दोबारा उसे ऐसा सुख कभी भी मिलने वाला नहीं है इसलिए वह अपनी हरकतों से एक बार फिर से अपनी मां के बदन में मदहोशी की लहर भर दिया था जिसके चलते सूरज की मां आंगन में दरवाजा पकड़कर जमकर चुदाई का मजा लूट रही थी,,, ।
सुबह-सुबह कोई काम नहीं था तो खरबूजे का जिक्र आते ही सूरज को ख्याल आ गया की मुखिया जी खरबूजे के खेत में उसे कम सौंपते थे और वह अपनी मां की चुदाई करने के बाद खरबूजे के खेत की तरफ ही चला जा रहा था वह बहुत खुश नजर आ रहा था क्योंकि जिंदगी में वह बहुत कुछ हासिल कर चुका था। औरतों के मामले में जिसको चाहता था उसको बिस्तर पर लाकर जमकर उसकी चुदाई करता था। जिसमें अब उसकी मां भी शामिल हो चुकी थी अपनी मां को हम बिस्तर बनाने का गर्व उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था,, अपनी मां के तरफ वह पहले से ही आकर्षित था लेकिन वह यह नहीं जानता था कि इतनी जल्दी उसकी मां घुटने टेक देगी लेकिन जो कुछ भी हुआ था उसमें मां बेटे दोनों को फायदा था सूरज की भी इच्छा पूरी हो रही थी और उसकी मां की भी जरूरत पूरी हो रही थी। अपने मन में ढेर सारी बातें सोचता हुआ सूरज खरबूजे के खेत पर आ चुका था,,, बरसात के कारण खरबूजे के खेत में भी पानी भरा हुआ था खरबुजे एकदम बड़े हो चुके थे लेकिन अभी पके नहीं थे बस पकने की तैयारी में थे और यही सही मौका था इन्हें तोड़कर बाजार ले जाने का क्योंकि अगर 2 दिन की भी देरी हो जाए तो खरबूजा अपने आप पक जाता और धीरे-धीरे खराब होने लगता, सूरज धीरे-धीरे खरबूजे को तोड़कर एक तरफ रख रहा था। खरबूजे की खुशबू पूरे खेत में फैली हुई थी। अभी वह खरबूजा तोड ही रहा था कि तभी उसे पायल की आवाज सुनाई दी और पीछे मुड़कर देखा तो नीलू चली आ रही थी,,, नीलू को देखकर सूरज के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे। वह नीलू को देखता हुआ खड़ा हो गया,,, इतने सुबह-सुबह नीलू के दर्शन करके वह काफी खुश नजर आ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे नीलू करीब आ रही थी उसके चेहरे पर फैली हुई चिंता और गुस्से की लकीर एकदम साफ दिखाई दे रही थी सूरज को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह एक टक उसे ही देख रहा था।
तभी वह सूरज के एकदम करीब आ गई और बिना कुछ बोले उसके सीने पर दोनों हाथ से धक्का देने लगी और सूरज अपने आप को संभाल नहीं पाया और एक खरबुजे के ऊपर गिर गया और वह खरबुजा फट गया। उसे नीलू का व्यवहार को समझ में नहीं आ रहा था फिर भी खरबूजे का नुकसान होता हुआ देखकर वह बोला।
अरे यह क्या हो गया है तुमको देख रही हो खरबूजा खराब हो गया तुम्हारे पिताजी देखेंगे तो बिगड़ेंगे।
हरामजादे तुझे खरबूजे की पड़ी है और यहां तो मेरे घर में ही रासलीला खेल रहा है चारों तरफ से हमारा ही नुकसान कर रहा है।
(नीलू की बात सुनकर सूरज को इतना तो समझ में आ गया था कि नीलू को जरूर कुछ ना कुछ ऐसा मालूम हुआ है जो उसे नहीं मालूम होना चाहिए था तभी वह इतना नाराज है लेकिन फिर भी अपने आप को शांत रखते हुए धीरे से उठकर इस जगह पर बैठते हुए सूरज बोला)
अरे आखिर हुआ क्या है यह तो बताओ बस आते ही मारना शुरू कर दी।
हरामजादे मादरचोद तुझे नहीं मालूम कि क्या हुआ है,,,?
अरे मैं सच कह रहा हूं मुझे कुछ भी नहीं मालूम तुम बताओगी तब ना पता चलेगा।
मैं तुझे कितना अच्छा लड़का समझती थी तुझे मैं पसंद करती थी तेरे साथ मैंने सब कुछ की जो मुझे नहीं करना चाहिए था क्योंकि मैं तुझे पसंद करती हूं लेकिन तू है कि मेरी मां को,,,,(इतना कहकर नीलू चुप हो गई और एकदम परेशान नजर आने लगी सूरज को समझते देर नहीं लगी कि आखिर मामला क्या है लेकिन फिर भी वह अनजान बनने का नाटक करते हुए बोला)
क्या हुआ मालकिन को,,,!
मालकिन को कुछ भी नहीं हुआ मादरचोद,,,,(नीलू के मुंह से पहली बार की गाली सुन रहा था और उसे नीलू के मुंह से इस तरह की गालियां अच्छी लग रही थी,,, मुस्कुराता हुआ सूरज बोला)
तू इतना गुस्सा क्यों हो,,,?
तेरी वजह से सिर्फ तेरी वजह से मैंने सब कुछ अपनी आंखों से देख ली जो तू मेरी मां के साथ कर रहा था,,,,।
ओहहहहह यह बात है,,,,।(सूरज एकदम सहज होते हुए मुस्कुरा कर बोला और धीरे से अपनी जगह पर खड़ा हो गया यह देखकर नीलू और भी ज्यादा क्रोधित हो गई और वह बोली)
तुझे यह सब एकदम आम बात लगती है कितनी आराम से कह रहा है यह बात है,,,।
हां तो नीलू यह आम बात ही है औरत होती ही है चुदवाने के लिए,,, इसलिए मैंने तुम्हारी मां को भी चोद दिया,,, (सूरज फिर से एकदम शांत लहजे में बोला जिसकी वजह से नीलू का गुस्सा साथी हुए आसमान पर पहुंच गया और वह चिल्ला कर बोली)
कितनी आसानी से कह रहा है मादरचोद तुझे पता है कि तेरा क्या हसर होगा अगर यह बात पिताजी को पता चल गई तो।
पिताजी को पता चल गई तो क्या हो जाएगा शर्मिंदा हो जाएंगे उन्हें किस बात का एहसास होगा कि वह अपनी बीवी के साथ कुछ कर नहीं सकते इसलिए उनकी बीवी दूसरों से चुदवा रही है।
हरामजादे कुत्ते हरामी फिर तो यही अपनी मां के बारे में भी सोचता होगा हरामजादे मैं तुझे नहीं छोडूंगी,,,, (सूरज की बात सुनकर एकदम से गुस्सा होते हुए नीलू दम दम उसके सीने पर मुक्का मारने लगी लेकिन सूरज को बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था वह मुस्कुरा रहा था सूरज जितना मुस्कुरा रहा था नीलू को उतना ज्यादा गुस्सा आ रहा था,,, वह एकदम से रोने लगी और रोते-रोते नीचे बैठ गई उसे रोता हुआ देखकर सूरज एकदम से परेशान हो गया और वह भी उसके पास ही बैठ गया और बोला।)
तुम रो क्यों रही हो नीलू इसमें रोने वाली कौन सी बात है यह तो दुनिया की रित है यह तो सभी घरों में होता है।
मैं मां को कितनी अच्छी औरत समझते थे भले ही वहां पर गुस्सा करती थी लेकिन मैं मां की बहुत इज्जत करती थी मेरी बहन भी मन की बहुत इज्जत करती है जब उसे पता चलेगा कि उसकी मां तुम्हारे साथ चुदवाती है अपनी जवानी की प्यास बुझाती है गांव की मुखिया की बीवी होकर अपने पति को धोखा देती है तो सोचो उसके दिल पर क्या गुजरेगी और अगर यही बात गांव में किसी को पता चल गया तब तो हम लोगों के इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। (ऐसा कहकर जोर-जोर से रोने लगी वैसे भी यहां कोई उसे देखने वाला नहीं था क्योंकि दूर-दूर तक मुखिया का ही खेत था और चारों तरफ झाड़ियां की हुई थी जिस किसी के देखे जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता था,,,,,, कुछ देर तक सूरज नीलू को इसी तरह से रोने दिया और फिर धीरे से बोला।)
नीलू मालकिन मां ,बीवी बहन ओर मालकिन से पहले एक औरत है। एक औरत होने के नाते तुम्हें भी एक औरत के बारे में सोचना चाहिए था मैं जानता हूं कि अपनी मां को उसे अवस्था में देखकर तुम्हारी जगह कोई भी होता तो वह गुस्से से आग बबूला हो जाता लेकिन फिर भी तुमने आज तक अपने आप को संभाल कर रखी यही बहुत बड़ी बात है।
लेकिन तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था सूरज तुम नहीं जानते मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं।
(नीलू के मुंह से अपने प्यार का इजहार सुनकर सूरज गदगद हुए जा रहा था वह कभी सोचा भी नहीं था कि नीलू उससे प्यार करने लगेगी क्योंकि उन दोनों के बीच जो कुछ भी हो रहा था वह सिर्फ एक वासना का खेल था लेकिन नीलू के इजहार से सूरज को एहसास होने लगा था कि नीलू सच में उससे प्यार करती है नीलू की बात सुनकर सूरज के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे,,,, और नीलू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) भले ही हम दोनों का प्यार जिस्मानी तोर से शुरू हुआ लेकिन मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम मेरे घर में ही मेरी मां के साथ इतना गंदा काम करोगे।
लेकिन इसके लिए भी तुम्हारी मां ने मुझे मजबूर किया था , नीलु,,,,! (कुछ सोचने के बाद सूरज धीरे से बोला)
मां ने मजबूर किया था,,,, तुम झूठ बोल रहे हो।
तो कौन सच कह रहा है कभी अपनी मां से पूछी हो नहीं तो तुमसे सच कह रहा हूं लेकिन क्या तुम्हारी मां बोल पाएगी नहीं बोल पाएगी तुमने सिर्फ एक मां के तौर पर मालकिन को देख रही हो एक पति के पत्नी के रूप में उसे देख रही है लेकिन एक औरत का रूप तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है औरत की जरूरत क्या होती है एक औरत होने के बावजूद भी तुम समझ नहीं पा रही हो बल्कि खुद अपनी जरूरत तुम मुझसे पूरी कर रही थी। (सूरज की बात सुनकर नीलू सूरज की तरफ देखने लगी तो सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हो बोला,,,) तुम अपने पिताजी की हालत तो अच्छी रही हो क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हारे पिताजी तुम्हारी मां को शारीरिक तौर पर संतुष्ट कर पाते होंगे,,,, तुम्हारी मां अभी भी पूरी तरह से जवान है गठीला बदन है ऐसे में उन्हें भी एक मर्द की जरूरत पड़ती है इस बात को कैसे तुम भूल जाती हो,,,,।
एसी भी क्या जरूरत की अपने पति को धोखा देना पड़े। तुम नहीं जानते सूरज अगर इस बारे में पिताजी को पता चल गया तो उनका दिल टूट जाएगा भरोसा टूट जाएगा क्योंकि बरसों से उन्होंने नाम कमाया है इज्जत कमाई है।
तुम खामखा चिंता करती हो ऐसा कुछ भी नहीं है मालिक की इज्जत बनी रहेगी मैं भला किसी को बताने वाला थोड़ी ना हूं क्योंकि तुम्हारे घर से ही तो हम लोग कभी खर्चा पानी चलता है। और जरा तुम ही सोचो नीलू,,, क्या औरत को अपने लिए नहीं जीना चाहिए तुम्हारी मां दिन भर इधर-उधर दौड़कर खेत का काम घर का काम मजदूरों को संभालना फसल को शहर में ले जाकर बिचवाना यह सब किसके लिए करती है तुम लोगों के लिए ताकि तुम लोगों को किसी बात की कमी ना हो और इज्जत बनी की बनी रहे वरना अगर मैं सच कह रहा हूं मालकिन यह सब काम देखना छोड़ दे तो तुम्हारे घर पर भी कोई पूछने वाला नहीं होगा इज्जत की तो बात जाने दो कोई एक पैसे की भी इज्जत नहीं करेगा तुम सबकी यह तो तुम्हारी मां है कि उसकी वजह से पूरा गांव क्या अगल-बगल के 20 30 गांव मुखिया जी को जानते हैं पहचानते हैं।
(सूरज पूरी कोशिश कर रहा था नीलू को समझने की सूरज का बड़प्पन इसी बात से नजर आ रहा था कि वह मुखिया की बीवी की इज्जत पर बिल्कुल भी दाग लगे नहीं देना चाहता था वह किसी भी तरह से मुखिया की बीवी का बचाव कर रहा था और वह भी उसकी खुद की बेटी से सूरज की बात सुनकर नीलू बोली)
मां ने ऐसा क्यों किया उन्हें तो ऐसा नहीं करना चाहिए।
इसमें तुम्हारी मां की गलती बिल्कुल भी नहीं है एक सामान्य औरत की तरह तुम्हारी मां भी बहक गई थी जैसा कि तुम बहक गई थी।
बहक गई थी मेरी तरह मैं कुछ समझी नहीं ,,,,,।
याद है तुमने मुझे कब देखी थी।
(सूरज की बात सुनकर नीलू को समझ नहीं पा रही थी वह सावड़िया नजरों से सूरज की तरफ ही देख रही थी सूरज उसकी आंखों में देखकर समझ गया था कि उसे याद नहीं है इसलिए वह उसे याद कराते हुए बोला,,)
याद है तुम्हें आम का बगीचा जहां पर मैं पेशाब कर रहा था और तुम चोरी छुपे मुझे देख रही थी और तुमने मेरा मोटा तगड़ा लंबा लंड देखकर ही मेरे साथ जिस्मानी ताल्लुकात बनाने का फैसला की थी,,, (सूरज की बात सुनते ही नीलू को सब कुछ याद आ गया था और उसके चेहरे पर शर्म की लाली छाने लगी थी और सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) और तुम्हारी मां के साथ भी वही हुआ जो तुम्हारे साथ हुआ खेत में काम करते समय जब मुझे बड़ी जरूरत है पेशाब लगी थी तो मैं ट्यूबवेल के पीछे चला गया था पेशाब करने के लिए लेकिन न जाने कहां से तुम्हारी मां ठीक मेरे सामने झाड़ी के पास आ गई थी वह भी पेशाब करने के लिए आई थी वह साड़ी कमर तक उठाए बैठने वाली थी कि तभी उनके ठीक सामने में पेशाब कर रहा था और पेशाब करने की आवाज उनके कानों में पड़ी थी उनकी नजर मेरे पर पड़ गई और उन्होंने मुझे पेशाब करते हुए देख लिया मैं तो एकदम घबरा गया था लेकिन तुम्हारी मां की नजर सीधा मेरे लंड पर पड़ी थी जो कि उसे समय न जाने क्यों एकदम खड़ा था,,, अपने सामने मालकिन को देखकर मैं तुमसे घबरा गया था मैं वहां से जाता हूं इससे पहले तुम्हारी मां वहां से चली गई मुझे लगा कि मुझे मालकिन डांटेगी, लेकिन उसे समय ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जब शाम ढलने लगी और बाकी के मजदूर घर जाने लगे तो मैं भी उनके साथ घर की तरफ निकलने को हुआ लेकिन मालकिन मुझे रोक ली मैं एकदम से घबरा गया मुझे लगा के वही बात को लेकर मालकिन मुझे जरूर कुछ ना कुछ कहेंगी।
(सूरज की बात को नीलू बड़े ध्यान से सुन रही थी वह नहीं जानती थी कि सूरज बनी बनाई बात बता रहा था ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था वह जानबूझकर नमक मिर्च लगाकर बनी बनाई बात को नीलू के सामने परोस रहा था ताकि नीलू एक औरत के मन को अच्छी तरह से समझ सके औरत की जरूरत को समझ सके तभी वह अपनी मां को सहज रूप से ले सकेगी वरना अपनी मां के प्रति उसके मन में नफरत भर जाएगी सूरज की बात सुनकर नीलू धीरे-से बोली,,,)
क्या हुआ इसके बाद,,,,? (नीलू की आंखों में उत्सुकता दिखाई दे रही थी नीलू जानना चाहते थे कि आगे ऐसा क्या हुआ जो उसकी मां अपने ही नौकर के साथ हम बिस्तर होने पर मजबूर हो गई, यह ख्याल नीलू के मन में पहली बार आया था कि सूरज एक नौकर ही था, वरना अब तक वह सूरज को एक नौकर की हैसियत से कभी नहीं देखी थी लेकिन जब बात अपनी मां पर आ गई तो उसे एहसास होने लगा कि उसकी मां तो गांव की मुखिया की बीवी है बड़े घर की औरत है और ऐसे में उसका एक नौकर के साथ खेत में काम करने वाले लड़के के साथ शारीरिक संबंध यह बड़े शर्म की बात है जबकि वह खुद सूरज के साथ शारिरिक संबंध बना चुकी थी लेकिन वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि सूरज उसका हम उम्र ही था उसका और उसे सूरज के बीच लगाव होना स्वाभाविक था, लेकिन उसकी मां एक उम्र दराज औरत थी जिसे अपनी भावनाओं पर काबू होना जरूरी था । समाज में गांव में एक इज्जत थी एक उच्च पद था जिसकी गरिमा बनाए रखना उसका फर्ज था। नीलू की बात और उसकी उत्सुकता देखकर सूरज बोला,,,,)
तुम्हारी मां मुझे इशारे से ट्यबवेल की झोपड़ी के अंदर बुलाई।
वहां कोई और भी था।
नहीं,,, वहां हम दोनों किसी और कोई नहीं था सब लोग जा चुके थे और अंधेरा हो रहा था मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं क्योंकि मालकिन से दूसरी ही मुलाकात थी मालकिन का गुस्सा मैं जानता था क्योंकि लोग उनके गुस्से के बारे में बात करते थे इसलिए मैं घबरा रहा था लेकिन जैसे ही मैं उनके पास पहुंचा हुआ मेरा हाथ पकड़ कर झोपड़ी के अंदर ले गई और बिना कुछ सोचे समझे सीधा सवाल दाग दी।
क्या बोली मां,,,।
वह सीधे बोली अपना पजामा खोल।
क्या,,,?
हां मालकिन मुझे यही बोली पहले तो मुझे लगा कि शायद मेरे कान बज रहे हैं लेकिन फिर वह दोबारा मुझे पजामा खोलने के लिए बोली मैं घबरा गया था मैं मालकिन के सामने हाथ जोड़कर बोला।
मुझे माफ कर दो मालकिन मुझे जाने दो मुझे नहीं मालूम था कि तुम वहां खड़ी हो वरना मैं वहां कभी जाता ही नहीं।
फिर मा ने क्या कहा,,,?
फिर क्या मालकिन पुरी मैं तुझे डांट नहीं रही हूं कुछ बोलेगी भी नहीं लेकिन अगर तू मेरी बात नहीं मानेगा तो समझ ले तेरा जीना हराम हो जाएगा मालकिन की बात सुनकर मैं एकदम से घबरा गया था वह बार-बार मुझे पजामा उतारने के लिए कह रही थी मेरे पास उनकी बात करने किसी और कोई रास्ता नहीं था इसलिए मैं मजबूर होकर अपने पजामा को खींचकर घुटनों तक कर दिया।
फिर,,,(अपने सूखने हुए गले को अपने थूक से गिला करने की कोशिश करते हुए नीलू बोली)
फिर क्या था मालकिन की तो जैसे आंखें फटी गई थी वह मेरे लंड की तरफ आश्चर्य से देख रही थी उसे समय तो मेरा खड़ा भी नहीं था बस लटक रहा था लेकिन खड़ा होने के बावजूद भी इतना भयानक लग रहा था की मालकिन को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था उनका मुंह खुला का खुला रह गया था। मुझे शर्म आ रही थी मालकिन की नजर में एक अजीब सी खिंचाव था मालकिन गहरी गहरी सांस ले रही थी और सच बताओ नीलू उसे समय जब मालकिन गहरी सांस ले रही थी उनके साड़ी का पल्लू उनके कंधे से नीचे गिर गया था और उनकी भरी हुई छाती एकदम से मेरी आंखों के सामने थी जो ऊपर नीचे हो रही थी और ब्लाउज के ऊपर का बटन भी खुला हुआ था पल भर के लिए मुझे ना जाने क्यों मालकिन के प्रति अजीब सा लगने लगा।
फिर क्या हुआ,,,,?
फिर मैं मालकिन से बोला कि अब मैं पैजामा ऊपर कर लूं तो वह बोली नहीं अभी रहने दे मुझे जी भर कर देख लेने दे क्योंकि मैं आज तक जिंदगी में ऐसा लंड नहीं देखी,,,,।
क्या मा ने ऐसा कहा,,,?
बिल्कुल नीलू मैं हैरान था हैरान इस बात पर था की मालकिन कह रही थी कि मैं आज तक ऐसा लंड कभी नहीं देखी जब की वह तो तुम दो बच्चों की मां थी चुदाई का सुख प्राप्त कर चुकी थी मलिक के साथ शारीरिक संबंध बन चुकी थी फिर भी वह ऐसा क्यों कह रही है मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्योंकि जहां तक तब मुझे ऐसा ही लगता था कि जैसा मेरा है वैसा सभी लड़कों का होता होगा लेकिन मालकिन की बात सुनकर में हैरान हो गया था और इसीलिए मैं मालकिन से पूछ बेठा।
यह क्या कह रही हो मालकीन मालिक का भी तो ऐसा ही होगा,,,,,।
यह क्या कह रहे हो सूरज मलिक का अगर ऐसा होता तो क्या मैं तुम्हारा इस तरह से हैरानी के साथ देखती।
क्या मालकिन ने मेरा मतलब है कि मा ने ऐसा कहीं।
मेरे मुंह से निकला एक-एक शब्द सच है मैं झूठ नहीं कह रहा हूं मालकिन ने ऐसा ही कही और उस दिन मालकिन की बात सुनकर मुझे पता चला कि सभी मर्दों का एक जैसा नहीं होता अलग-अलग ही होता है मुझे मालकिन की बात में सच्चाई नजर आ रही थी मैं उनसे दोबारा कुछ पूछता इससे पहले ही मालकिन हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को पकड़ ली,,,,,।
क्या,,,,,? मा ने ऐसा की,,, लेकिन क्यों,,,?
यह तो मैं नहीं जानता लेकिन मालकिन की हरकत में पल भर में ही मेरे बेजान पड़े लंड में जान भर दी और मेरा लंड खड़ा होने लगा मैं हैरानी से अपने लंड की तरफ देख रहा था,,, जितना हैरान में था उससे कई ज्यादा हैरान मालकिन थी मुझे यकीन होने लगा था की मालकिन सच में ऐसा लंड पहली बार देख रही थी,,,, मैं शर्म के मारे पानी पानी हो रहा था मैं अपने हाथ से पजामा पकड़ कर उसे ऊपर उठाना चाहा लेकिन मालकिन हाथ बढ़ाकर मेरा हाथ पकड़ लिया और रोक ली और बिना कुछ कहे बिना ही अपना हाथ आगे बढ़कर मेरे लंड को पकड़ ली और हिलाना चालू कर दी मैं क्या करता मुझे तो ना चाहते हुए भी मजा आने लगा था आनंद आने लगा था मेरी आंखें अपने आप बंद होने लगी थी और जब मेरी आंखें बंद हो गई तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं हवा में उड़ रहा हूं तुम्हारी मां के नरम नरम हाथ उसकी नरम नरम ऊंगलियां मेरे जिस्म में जादू चला रही थी,,,,(सूरज इस तरह की मदहोशी भरी बातें करते हुए नीलू की तरफ देख रहा था उसे एहसास हो रहा था कि नीलू को उसकी बातें सुनकर मजा आ रहा था उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी उसके चेहरे का रंग सुर्ख लाल हो रहा था और यह देखकर सूरज मन ही मन प्रसन्न हो रहा था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मैं आंखों को बंद किया हुआ था लेकिन जैसे ही मुझे कुछ अजीब सा एहसास हुआ तो मैं अपनी आंखों को खोल दिया और जो मैंने अपनी आंखों से देखा उसे देखकर में दंग रह गया मैं घबरा गया मेरे बदन में कंपकंपी फैल गई।
ऐसा क्या देख लिया तुमने,,,,।
बुरा मत मानना नीलु,,,, मैंने जो देखा उसे सुनकर शायद तू हैरान हो जाओ तुम्हें अपनी मां पर गुस्सा भी आएगा लेकिन एक औरत की तरह अगर सोचो कि तो तुम्हें तुम्हारी मां की गलती बिल्कुल भी नजर नहीं आएगी।
पहले यह तो बताओ हुआ क्या बस गोल-गोल बात घूमा रहे हो।
आंख खुली तो मैंने देखा तुम्हारी मां मेरे लंड को मुंह में भर ली थी और उसे पागलों की तरह चूस रही थी मैं हैरान था नीलु,,,,, मैं कभी सपने में सोच भी नहीं सकता था कि कोई औरत ऐसा कर सकती है और मालकिन के बारे में तो मैं कभी सपने में भी सोच नहीं सकता था लेकिन वह सपना नहीं हकीकत था मालकिन मेरे लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी मैं पागल हुआ जा रहा था मेरे बदन में खुमारी छा रही थी मदहोशी छा रही थी मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था और अपने आप ही मेरी कमर आगे पीछे होना शुरू हो गई,,,, सच कहूं तो नीलू तुम्हारी मां मेरे लंड को देखकर बहन गई थी इसके बाद तो वह एकदम से खड़ी हुई और अपने सारे कपड़े उतार करें मेरे सामने नंगी हो गई।
क्या,,,?(एकदम हैरान होते हुए नीलू बोली)
हां नीलू तेरी आंखों के सामने तुम्हारी मां अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई पहली बार में किसी नंगी औरत को देख रहा था उसके जिस्म को देख रहा था उसकी खरबूज जैसे चुचियों को देख रहा था और तुम्हारी मां की बुर को मैं पहली बार देखा तो मुझे एहसास हुआ की औरत की बुर कितनी खूबसूरत होती है वरना उसके बारे में मैं सिर्फ सुना करता था देखा नहीं था उसका आकार कैसा होता है कैसी दिखती है यह सब मुझे पहली बार तुम्हारी मां की वजह से पता चला मैं तो तुम्हारी मां को देखा ही रह गया सच में नीलू तुम्हारी मां बहुत खूबसूरत है पूरे गांव में क्या अगल-बगल के 40 50 गांव में भी तुम्हारी मां की तरह खूबसूरत औरत कोई नहीं होगा। पहली बार मुझे एहसास हुआ की औरत कितनी खूबसूरत होती है तुम्हारी मां मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी क्योंकि वह जानती थी कि मेरे मन में क्या चल रहा है और समझ गई थी कि यह सब मेरे लिए पहली बार है मैंने आज से पहले कभी एक नंगी औरत को नहीं देखा था।
(इस तरह की मदहोशी वाली बातें सुनकर नीलू के बदन में हलचल मचाना शुरू हो गया था ना चाहते हुए भी उसकी बुर से मदन रस बहना शुरू हो गया था यह जानते हुए भी की सूरज उसकी मां की गंदी बात बता रहा है फिर भी वह अपने आप को काबू में नहीं कर पा रही थी और वह उत्तेजित हुए जा रही थी और उत्तेजित होते हुए वह धीरे से बोली)
फिर,,,,,?
फिर क्या नीलू,,, देख रही हो उसे दिन की बात बात कर इस समय मेरा लंड खड़ा हो गया है (एकदम से घुटनों के बाल बैठते हुए अपने पजामा को नीचे करके अपने खड़े लंड को बाहर निकलकर नीलू को दिखाते हुए वह बोला और अगले ही पल फिर से उसे पजामे में डाल दिया वह जानबूझकर ऐसा हरकत नीलू को उत्तेजित करने के लिए कर रहा था ताकि इस समय वह नीलू को चोद सके उसके गुस्से को पूरी तरह से शांत कर सके,,,, नीलु भी मस्त हो गई सूरज के खड़े लंड को देखकर ,, नीलू की बुर भी कचोरी की तरह फूलने लगी थी,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था मैं तो तुम्हारी मां की खूबसूरती देखकर पागल हुआ जा रहा था तभी तुम्हारी मां बोली। सूरज मेरी बात मानेगा तो हमेशा खुश रहेगी तुझे हमेशा काम मिलता रहेगा और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो मैं तुझे बदनाम कर दूंगी और कोई तुझे काम भी नहीं देगा,,,,, मैं क्या करता नीलू मेरे पास तुम्हारी मां की बात मानने के सिवा और कोई दूसरा रास्ता नहीं था लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि तुम्हारी मां क्या मनवाना चाहती है,,,,।
क्या बोली मेरी मां,,,,।
तुम्हारी मां बोली थी मेरी इच्छा पूरी कर
कैसी इच्छा,,,?
पहले तो मैं भी नहीं समझ पाया लेकिन अगले ही पर तुम्हारी मां एकदम से मेरी तरफ आगे पड़ी और मेरे सर पर हाथ रखकर मेरे बाल को कस के पकड़ ली और धीरे से मेरे मुंह को नीचे की तरफ ले जाने लगी जैसे ही मेरा मुंह तुम्हारी मां की दोनों टांगों के बीच आया वह एकदम से अपनी कमर को आगे की तरफ उचका कर अपनी बुर को मेरे मुंह से सटा दी और बोली चाट ईसे,,,, मैं क्या करता तुम्हारी मां की बुर से इतनी खूबसूरत इतनी मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपने आप ही मेरी जीत बाहर निकल गई और मैं तुम्हारी मां की बुर को चाटना शुरू कर दिया।
(सूरज को साफ दिखाई दे रहा था कि नीलू उसकी बातों को सुनकर उत्तेजित हो रही थी क्योंकि वह धीरे से अपने थूक को गले के अंदर निगल रही थी यह उत्तेजना की निशानी थी,,,,, सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए फिर बोला,,) मुझे पागलों की तरह चाटने पर तुम्हारी मां मजबूर कर दे,,,,, मैं कर भी क्या सकता था मैं पहली बार इतनी खूबसूरत औरत को देख रहा था और भी बिना कपड़ों के तो एक जवान लड़का होने के नाते में भी अपने हाथ से यह मौका जाने नहीं देना चाहता था मैं भी पागलों की तरह तुम्हारी मां की बुर चाट रहा था तुम्हारी मां पागल हो जा रही थी जोर-जोर से चीख रही थी चिल्ला रही थी ।
और नीलू उस दिन पहली बार में जान पाया की चुदाई किसे कहते हैं।
मतलब कि उसे दिन मन नहीं तुम्हारे साथ,,,,,
हां तुम्हारी मां मेरे से चुदवाई और यह सिलसिला उसे दिन से शुरू हो गया और न जाने तुम कहां से देख ली।
घर पर देखी थी सुबह-सुबह जब घर के पीछे मां टांग उठा कर करवा रही थी।
ओहहहहह उस दिन,,,,,(एकदम से जैसे सूरज को याद आया हो वह हैरान होता हुआ बोला फिर अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वह बोला,,,) लेकिन नीलू एक तरह से यह अच्छा ही हुआ कि तुम अपनी आंखों से सब कुछ देख ली,,,,।
क्यों अच्छा हुआ,,,?
जरा तुम ही सोचो तुम्हारा और मेरे बीच भी वही रिश्ता है जो मेरे और तुम्हारी मां के बीच है अगर भुले भटके हम दोनों को चुदाई करते समय तुम्हारी मां देख ले तो तुम्हारी मां का मुंह बंद करने के लिए तो मुंह का सकती हो कि वह मेरे और तुम्हारी मां के बीच क्या चल रहा है यह जानती हो तो तुम्हारी मां कुछ कह नहीं पाएगी शांत हो जाएगी तुम्हारा भी रास्ता बन जाएगा और उसका खुद का रास्ता बन जाएगा तो मां बेटी मेरे साथ मजा ले सकोगी।
हरामजादे में तुझसे प्यार करती हूं।
मैं भी तुमसे प्यार करता हूं लेकिन क्या करूं जिंदगी में ऐसे भी पल आते हैं जब हमें दूसरों के बारे में भी सोचना पड़ता है तुम ही अगर सोचो मैं तो कुछ नहीं कहूंगा अगर भावनाओं में भाकर तुम्हारी मां किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात तो बना ली और वह सारे गांव में बता दिया तो क्या होगा। बदनामी हो जाएगी ना ना तो मुखिया जी किसी को मुंह दिखाने के काबिल रह जाएंगे ना तो मालकिन और ना तुम दोनों जन और सब लोग पूरे परिवार को रंडी की तरह ही समझेंगे आते-जाते लोग तुम्हें तुम्हारी मां का नाम देखकर चिढ़ाएंगे क्या तुम्हें यह सब बर्दाश्त होगा मैं तो तुम्हारे परिवार को अपना परिवार समझता हूं इसलिए मर जाऊंगा लेकिन यह सब किसी को नहीं बताऊंगा।
(सूरज की बात में सच्चाई थी इस बात की नीतू अच्छी तरह से समझती थी इसलिए ना चाहते हो कि उसके होठों पर मुस्कान आ गई और वह मुस्कुराते हुए बोली,,)
अब मुझे जाना चाहिए,,,,(नीलू को मुस्कुराता हुआ देखकर सूरज समझ गया था की बात बन गई है लेकिन वह जाति से पहले उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपने सीने से लगा लिया और उसके खूबसूरत चेहरे को अपने हाथ में लेकर बोला)
इतनी जल्दी चली जाओगी इतने दिन बाद मिली हो और जाने को कह रही हो,,,,।
तो क्या करूं,,, तुम्हारे साथ यहां रुक कर खरबुजे तोडुं,,,,,,।
खरबूजे नहीं मेरी जान,,,(इतना कहकर वहां नीलू को एकदम से अपनी गोद में उठा दिया नीलू घबरा गई लेकिन वह नहीं माना और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) इतने दिन बाद मिली हो ऐसे थोड़ी ना जाने दूंगा (और ऐसा कहते हुए उसे गोद में उठाए हुए ही झोपड़ी की तरफ जाने लगा नीलू यह देखकर सिहर उठी लेकिन अपनी मां की कामलीला के बारे में सुनकर उसकी बुर भी पानी छोड़ रही थी वह भी सूरज की मोटे तगड़े लोगों को अपनी बुर में लेना चाहते थे क्योंकि बात ही बात में उसने अपनी लंड की की झलक भी दिखा दिया था,,,,, नीलू उसे इनकार नहीं कर पाई और सूरज उसे झोपड़ी में लेकर चला गया यहां पर किसी के भी आने की आशंका बिल्कुल भी नहीं थी उसके कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी कर दिया और खुद भी नंगा हो गया। नीलू अच्छी तरह से जानती थी उसे क्या करना है अपनी मां की लंड की चुसाई की कहानी सुनकर उसका भी मन कर रहा था सूरज के लंड को चूसने के लिए इसलिए वह तुरंत घुटनों के बल बैठ गई और सूरज के मोटे तगड़े लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी और तब तक चुस्ती रही जब तक कि वह पूरी तरह से तृप्त नहीं हो गई क्योंकि वह भी सूरज के साथ बहुत दिनों बाद इस तरह का मजा लूट रही थी। सूरज पूरी तरह से तैयार हो चुका था नीलू की चुदाई करने के लिए।
देखते ही देखते सूरज उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी गुलाबी छेद में अपना लंड डालकर उसकी कमर को दोनों हाथों से थाम दिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया नीलू को उसकी मां की रंगीन कहानियां सुना कर सूरज भी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था वैसे तो उसकी सारी कहानियां मनगढ़ंत थी लेकिन फिर भी किसी को भी उत्तेजित कर दे इस तरह की रसभरी कहानी थी और वही कसर सूरज नीलू के ऊपर उतार रहा था। सूरज का मोटा तगड़ा लंड बड़े आराम से उसकी बुर के अंदर बाहर हो रहा था और उसकी चुदाई करता हुआ सूरज उसे भविष्य के सपने भी दिख रहा था वह धक्के लगाते हुए बोला।
देखना नहीं तो मेरी जान सब कुछ सही रहा था तो मेरी बीवी बनोगी और तुम्हारी मां मेरी सास फिर देखना एक ही पलंग पर मां बेटी दोनों की चुदाई करूंगा।
हरामजादे शादी के बाद मैं यह सब बिल्कुल भी नहीं करने दूंगी।
अपनी मां के बारे में सोचो नीलू सासू मां बुढी नहीं है अभी पूरी तरह से जवान है। घर की बात घर में ही रह जाएगी तुम भी खुश सासू मां भी खुश।
नहीं बिल्कुल भी नहीं मैं अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ नहीं बांटूंगी,,,।
दूसरे के साथ कहां तुम्हारी मां के साथ मेरी सासू मां के साथ,,,,, सोचो कितना मजा आएगा।
नहीं लेना मुझे ऐसा मजा,,,,।(सूरज की बातें सुनकर नीलू को मजा आ रहा था वह भी भविष्य के सपने देख रही थी वह बार-बार उसकी मां को सासू मां और उसे बीवी कर कह कर संबोधन कर रहा था इस बात की खुशी नीलु के चेहरे पर एकदम साफ दिखाई दे रही थी और इस बात को लेकर सूरज काफी उत्तेजित हुआ जा रहा था थोड़ा जोर-जोर से धक्के लगा रहा था और तब तक धक्का लगाता रहा जब तक की नीलु का पानी निकालने के बाद खुद झड़ नहीं गया।
नीलू घर जा चुकी थी। सूरज भी शाम को ढेर सारा खरबूजा लेकर मुखिया के घर पहुंच चुका था। सूरज को खरबूजे के खेत के सारे खरबूजे लाया हुआ देखना मुखिया और मुखिया की बीवी खुश नजर आ रही थी क्योंकि उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि सूरज आज ही खरबूजा लेकर पहुंच जाएगा और खरबुजे को बाजार में पहुंचाना भी बहुत जरूरी था,,,, मुखिया सूरज से बोले,,)
यह तुमने बहुत अच्छा किया अब सही समय पर खरबूजा शहर पहुंच जाएगा लेकिन क्या तुम्हें बैलगाड़ी चलानी आती है।
जी मालीक,,,,
तब तो यह और भी अच्छा हुआ सुबह ही शहर के लिए निकलना है क्या तुम जा सकोगे इसके लिए अलग से पैसे भी मिलेंगे,,,,।
बिल्कुल मालिक मैं चला जाऊंगा,,,,,।
(शहर जाने की बात सुनते हैं नीलू और शालू दोनों जो अपनी मां की बगल में खड़े थे एग्जाम से खुश होते हुए अपने पिताजी की तरफ देखने लगी और बोली)
बाबूजी हम भी शहर जाएंगे हमें भी नए कपड़े लेने हैं शहर से,,,,।
नहीं नहीं बाद में कभी चली जाना।
बाद में कब हम दोनों को अभी जाना है सूरज के साथ वहां से कपड़े भी खरीद लेंगे और शहर भी घूम लेंगे,,,,।
तुम क्या कहती हो नीलू की मां,,,,।
सूरज साथ में है तो कोई दिक्कत नहीं है,,,,(इतना सुनते ही नीलु एकदम से खुश हो गई और अपनी मां को गले लगा ली,,,, लेकिन मुखिया की बीवी सख्त हिदायत देते हुए बोली)
लेकिन याद रखना सूरज के साथ ही रहना इधर-उधर कहीं चली मत जाना सूरज जैसा कहता है वैसा ही करना,,,,,।
ठीक है मां हम दोनों वैसा ही करेंगे जैसा सूरज कहेगा,,,(नीलु सूरज की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,,, सूरज भी दोनों लड़कियों को साथ ले जाने की बात से मन ही मन खुश हो रहा था,,,,,,, दूसरे दिन वह बड़े सवेरे ही मुखिया के घर पहुंच चुका था )
Tumhare jaise logo ki wajah se achi khasi story barbaad ho jati hai jo aise wahiyat idea writer ko dete haiलगता है 200 पेज होने तक सुनैना नहीं चुदेगी, पर अगर सुनैना की चुदाई कल्लू करे और सुनैना चुदते चुदते ही मुतने हगने लगे और ये सब होते हुए सूरज देखें तो मजा ही आ जाएगा, सुनैना की चुदाई गंदी होनी चाहिए और चोदने के बाद कल्लू उसको अपना मुत पीलाए।।
बहुत ही गरमागरम कामुक और शानदार लाजवाब मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गयाअपनी मां को बता कर बड़े सवेरे ही सूरज मुखिया के घर पहुंच चुका था। वहां पहुंच कर देखा तो घर के आंगन में ही लकड़ी के बक्से में खरबूजा भरा हुआ था ऐसे तकरीबन 20-25 बॉक्स बन चुके थे। पास में ही बैलगाड़ी खड़ी थी जो की काफी अच्छी खासी थी। लेकिन अभी वहां पर कोई था नहीं इसलिए सूरज वहीं पर बैठ गया और मुखिया का इंतजार करने लगा वह जानता था कि इस समय ऐसा कोई मौका मिलने वाला नहीं है जिससे उसकी गर्मी शांत हो सके इसलिए वह आराम से बैठकर मुखिया का इंतजार करने लगा कि तभी थोड़ी देर बाद ही मुखिया वहां सूरज को देखकर मुस्कुराता हुआ आया और बोला।
आ गए बेटा सूरज,,,,।
(मुखिया की आवाज सुनकर सूरज एकदम उठकर बैठ गया और हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए बोला)
नमस्कार मालिक,,,, शहर का मामला था इसलिए जल्दी आ गया वैसे भी मैं कभी शहर तो गया नहीं हूं लेकिन इतना जरुर जानता हूं कि आने-जाने में समय लग जाएगा।
मुझे मालूम है, तुम मेरे सबसे वफादार बनते जा रहे हो इससे पहले तुम्हारे पिताजी काम करते थे लेकिन तुमने अपने पिताजी की कमी बिल्कुल भी महसूस होने नहीं दिया है हम लोगों को तुमसे यही उम्मीद है कि तुम अपना काम ईमानदारी और वफादारी से करोगे। सच कहूं तो मैं तुम्हें मजदूर या नौकर नहीं समझता बल्कि मैं अपने बेटे जैसा ही समझता हूं,,, मैं कभी-कभी सोचता हूं कि काश तुम मेरे बेटे होते तो मेरा कितना काम आसान हो जाता।
(मुखिया की बात सुनकर सूरज अपने मन में ही बोला इस घर का होने वाला दामाद हूं आगे चलकर सब कुछ मेरा ही हो जाएगा तब इसकी अच्छे से देखरेख करूंगा,,, सूरज अपने मन में ख्याली पुलाव पका रहा था कि तभी मुखिया अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोले) खैर कोई बात नहीं तुम भी तो मेरे बेटे जैसे ही हो तभी तो यह काम तुम्हें सौंपा है अगली बार यह काम हमने किसी और को दिया था तो वह तो खरबूजे बेचा ही बेचा बैलगाड़ी भी लेकर गायब हो गया,,,।
(यह सुनकर सूरज हंसने लगा और हंसते हुए बोला)
मैं गायब नहीं होऊंगा मलिक,,,।
अरे बेटा मैं जानता हूं तुम भोला के लड़के हो धोखा नहीं दे सकते इसलिए तो तुम्हारे साथ अपनी दोनों बेटियों को भेजने के लिए तैयार हो गया हूं वरना मैं किसी के साथ अपनी बेटी को आने जाने नहीं देता,,, लेकिन यह अभी तक आई क्यों नहीं समय हो रहा है तुम खाना खाए हो कि नहीं,,,।
नहीं मालिक इतनी सुबह-सुबह,,, मैं जल्दी ही निकल आया अभी घर पर खाना बना ही नहीं था।
ओहहह अच्छा हुआ कि तुम मुझे बता दिए वरना खाली पेट ही चले जाते एक काम करो लगता है नीलू और शालू अभी तैयार हो रही है तुम घर के पीछे चले जाओ मालकिन खाना बना रही होगी वही जाकर खा लो,,,,।
(घर के पीछे के बारे में सुनकर सूरज एकदम से उत्साहित हो गया और वह बिल्कुल भी देर किए बिना अपनी जगह से उठकर खड़े हो गया और बोला)
बहुत अच्छा मालिक सफर लंबा है पेट में कुछ चार रहेगा तभी दिमाग काम करेगा और मालकिन को कहकर थोड़ा खाना भी बंघवा देना रास्ते में काम आएगा,,,।
अरे बिल्कुल मैं पहले ही तुम्हारी मालकिन को कह चुका हूं वह इसीलिए तो इतनी सुबह-सुबह खाना बना रही है,,,,,।
ठीक है मालिक में जाकर खाना खा लेता हूं,,,,,।
ठीक है जाओ,,, तब तक यह खरबूज की पेटीयां बैलगाड़ी में लदवा देता हूं।
ठीक है मालिक,,, (और इतना कहकर सूरज एकदम उत्साहित होता हुआ जल्दी-जल्दी कदम आगे बढ़ने लगा क्योंकि वह जल्द से जल्द घर के पीछे पहुंचाना चाहता था क्योंकि घर के पीछे एक बार वह मुखिया की बीवी से मजा ले चुका था और आज भी उसकी आस बंधी हुई थी,,,, घर के पीछे पहुंचकर वह देखा तो मुखिया की बीवी सच में खाना बना रही थी उलझे हुए बाल साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिरा हुआ इस रूप में वह एकदम काम देवी लग रही थी जिसे देखते ही सूरज का लंड खड़ा होने लगा था,,,,, सूरज कुछ कहता इससे पहले ही मुखिया की बीवी की नजर सूरज पर पड़ गई और वह मुस्कुराते हुए सूरज की तरफ अच्छी और बोली।)
अच्छा हुआ तू आ गया ले जल्दी से गरमा गरम खाना खा ले फिर तुम लोगों के लिए मैं खाना भी बांध देती हूं,,,।
(मुखिया की बीवी का इतना कहना था कि सूरज एकदम से उत्साहित होता हुआ उसके करीब पहुंच गया और बोला)
पागल हो गई हो मेरी रानी सुबह-सुबह में दूध पीता हूं उसे दिन की तरह आज भी अपनी चूची पिला दो मुझे सफर अच्छा हो जाएगा,,,।
धत् हरामी जगह भी तू देखा नहीं है बस शुरू कर जाता है मुझे लगी रहा था तुझे देख कर की तेरे दिमाग में यही सब चल रहा होगा।
क्या करूं मालकिन तुमको देखते ही मेरा दिमाग पागल हो जाता है,,,।
अपना यह पागलपन संभाल कर रख किसी और दिन काम आएगा अभी मुझे काम करने दे और वैसे भी सालों और नीलू दोनों जाग चुकी है और तैयार हो रही है,,,, उन दोनों को संभाल कर ले जाना तेरे भरोसे छोड़ रही हूं,,,।
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मालकिन मैं तो कहता हूं तुम भी हमारे साथ चलो रास्ते भर मजा करेंगे।
सच कहूं तो मेरा खुद चलने का मन था लेकिन शालू और नीलू ने पूरा काम बिगाड दी,,, ।
क्या बात कर रही हो मालकिन क्या सच में तुम्हारा चलने का मन था।
हां रे बिल्कुल,,, (दाल में चमची डालकर उसे चलाते हुए बोली,,)
धत् तेरी कि सारा मजा करके रहोगे तुम साथ में होती तो कितना मजा आता,,,,।
(सूरज की बात सुनकर मुखिया की बीवी मन ही मन मुस्कुरा रही थी यह सोचकर उसे अच्छा लग रहा था कि सूरज को उसका साथ अच्छा लगता है,,,, फिर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
चलो कोई बात नहीं फिर कभी मौका मिलेगा तो हम दोनों साथ शहर चलेंगे लेकिन अभी जो तुमने मेरी हालत की हो,,, (इतना कहने के साथ ही पजामी को एकदम से नीचे खींच कर अपनी खड़े लंड को दिखाते हुए) इसका तो कोई इलाज करो,,,, (सूरज के लंड की तरफ देखकर मुखिया की बीवी उत्तेजना से गदगद हो गई क्योंकि सुबह-सुबह अपनी आंखों से सूरज के टनटनाए हुए लंड को देख ली थी और उसे उस दिन वाली बात याद आ गई थी जब इसी तरह से हुआ घर के पीछे दूध पका रही थी और सूरज उसकी जमकर चुदाई किया था,,,, पल भर के लिए अपने लंड को दिखाकर वापस अपना पजामा ऊपर कर लिया था और अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) कुछ तो करो मालकिन मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,।
(सूरज की बात सुनकर वह एकदम से अपनी कमर पर हाथ रखकर सूरज की तरफ घूम गई लेकिन सामान्य अवस्था में भी वह अपनी जवानी की मादकता के छीटे सूरज पर गिरने के लिए वह अपनी छाती को आगे की तरफ उचका दी थी और बड़े ही मादक स्वर में बोली,,,)
अब मैं इसमें भला क्या कर सकती हूं,,,,।
(उसका इस तरह से खड़ी होना सूरज के लिए आमंत्रण था क्योंकि उससे भी रहा नहीं जा रहा था सूरज के लंड को देखकर उसकी बुर पानी पानी हो रही थी,,,,, लेकिन अपने मुंह से सूरज को आगे बढ़ने के लिए बोल नहीं पा रही थी लेकिन वह जानती थी कि सूरज मौका देखकर उसकी चुदाई किए बिना यहां से जाने वाला नहीं है,,,, और जैसा वह सोच रही थी ठीक वैसा ही हुआ सूरज मुखिया की बीवी की उन्नत छातियों को देखकर अपने आप को रोक नहीं पाया और एकदम से आगे बढ़ गया और मुखिया की बीवी की कमर में ही कहां डालकर उसे अपनी तरफ खींचकर अपनी बाहों में कस लिया वैसे तो मुखिया की बीवी पूरी तरह से देखने को तैयार थी लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर वह सूरज से बोली)
अरे पागल हो गया है क्या तुझे कहीं ना नीलु और शालू दोनों जग गई है,,।
तुम दोनों की चिंता बिल्कुल भी मत करो मालकिन,,,, वह दोनों तैयार होने में मस्त होंगे वैसे भी लड़कियां जब तैयार होती है तो कुछ ज्यादा ही समय लेती हैं इतना समय हम दोनों के लिए काफी है।
नहीं हरामी छोड़ मुझे कोई आ गया तो गजब हो जाएगा,,, (वैसे तो मुखिया की बीवी का भी मन सूरज के साथ चुदाई का कर रहा था लेकिन फिर भी वह थोड़ा सा डर दिखा रही थी ताकि सूरज चौकन्ना रहे,,, सूरज कहां मानने वाला था मुखिया की बीवी की बात सुनकर भी वह उसकी बात को अनसुना करते हुए एकदम से ब्लाउज के ऊपर से उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,, और उसके लाल लाल होठों को अपने मुंह में भरकर चूसना शुरू कर दिया,,,,, सूरज की हरकत से मुखियाकी बीवी मदहोश होने लगी उसकी टांगों के बीच की पतली दरार से मदन रस बहने लगा,,,,, वह गहरी गहरी सांस लेने लगी थी,,,,, सूरज भी मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था वह एकदम से मुखिया की बीवी को कंधे से पड़कर दूसरी तरफ घुमा दिया और दीवार पकड़ा कर खड़ी कर दिया,,, क्योंकि सूरज को ज्यादा कुछ करना नहीं था इस समय खाली उसकी साड़ी को कमर तक उठाना भर था इसके बाद अपना काम शुरू कर देना था। लेकिन फिर भी मुखिया की बीवी की जवानी के साथ खेलने का आदी हो चुका था सूरज इसलिए बिना कपड़ा ऊपर उठे ही वह पीछे से उसे अपनी बाहों में भरकर एक बार फिर से उसकी चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबाना शुरू कर दिया और इस दौरान धीरे-धीरे उसके ब्लाउज का बटन खोलने शुरू कर दिया हालांकि अभी भी मुखिया की बीवी के दोनों हाथ दीवार से सटे हुए थे वह एक तरह से दीवार का सहारा दी हुई थी क्योंकि सूरज की हरकतों से वह उत्तेजना से गनगना जा रही थी। सूरज को इस तरह से मदहोश होता हुआ देखकर मुखिया की बीवी बोली।
जो भी करना है जल्दी कर कोई आ गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे तु ना तो समय देखता है ना जगह देखता है बस शुरू पड़ जाता है,,,।
मैं सिर्फ मौका देखता हूं मालकिन इससे अच्छा मौका कहां मिलने वाला है,,,, वैसे भी मलिक मुझसे कह रहे थे कि वह मुझे मजदूर या नौकर नहीं समझते बल्कि अपने बेटे जैसा समझते हैं।
हां तो इसमें क्या हो गया हम लोग तुझे बेटे जैसा ही समझते हैं।
बेटे जैसा समझती हो लेकिन तुम तो मुझसे आदमी वाला काम करवाती हो।
अरे बेवकूफ बेटा भी तो आदमी ही होता है एक औरत को खुश करना मर्द का काम होता है और एक तू मर्द है,,,,,,।
और हां मालिक को इस बात का अफसोस है कि उन्हें कोई बेटा नहीं है वह सोच रहे थे कि अगर मैं उनका बेटा होता तो उनका कितना काम आसान हो जाता। (नंगी चूची को अपने दोनों हाथ में लेकर जोर-जोर से दबाते हुए सूरज बोला उसकी हरकत से मदहोश होते हुए क्योंकि बीवी के मुंह से शिसकारी की आवाज निकल रही थी)
सहहहहह आहहहहह ऊमममममममम,,,, यह तो तेरे मलिक की गलती है वही मुझे खुश नहीं कर पाए तो बेटा कहां से होगा।
क्या तुम्हें भी बेटा चाहिए मालकिन,,,,।
क्यों नहीं लेकिन अब उम्मीद नहीं है,,,।
क्यों उम्मीद नहीं है मैं तो हूं ना कहो तो मैं तुम्हें बेटा दे सकता हूं,,,।
धत् हरामी अब मुझे नहीं चाहिए बेटा तो जल्दी से अपना काम खत्म कर मेरी हालत खराब कर दे रहा है,,,, वैसे भी देर हो रही है।
(सूरज मौके की नजाकत को अच्छी तरह से समझता था उसे यहां पर आए काफी देर हो चुकी थी और वह जानता था कि यहां पर कोई भी आ सकता था मुखिया भी आ सकते थे उनकी दोनों बेटियां भी आ सकती थी वैसे तो एक बेटी को सब कुछ पता चल गया था वह देख लेती तो कोई बात नहीं थी लेकिन दूसरा कोई देखा तो मामला गड़बड़ हो सकता था इसलिए सूरज बिल्कुल भी देर ना करते हुए एकदम से मुखिया की बीवी की साड़ी को पकड़ कर कमर तक उठा दिया और दोनों हाथ से कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपने लंड के सिधान पर व्यवस्थित करने लगा,,,, जब सुरज को मुखिया की बीवी की गुलाबी बर दिखाई देने लगी उसका रसीला छेद दिखाई देने लगा तब एकदम से अपने पजामे को नीचे किया और ढेर सारा थुक अपने लंड के सुपाड़े पर लगा लिया,,,, और फिर बिना कुछ बोले अपने गरमा गरम मोटे आलू बुखारे जैसे सुपाडे को मुखिया की बीवी की बुर पर रखकर अपनी कमर को आगे की तरफ ठेलने लगा,,, थूक और बुर की चिकनाहट पाकर सूरज का लंड अंदर की तरफ सरकने लगा,, धीरे-धीरे करके वह अपना पूरा लंड मुखिया की बीवी की बुर में डाल चुका था,,, अपनी आंखों को बंद करके मुखिया की बीवी इस पल का मजा लूट रही थी जैसे-जैसे मोटा तगड़ा लंड अंदर की तरफ घुस रहा था वैसे-वैसे उसके चेहरे के हाव-भाव बदलते जा रहे थे,,,,।
सूरज बिना देर किए मुखिया की बीवी की चिकनी कमर को दोनों हाथों से थाम लिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया सुबह-सुबह बिना खाए यह सूरज के लिए स्वादिष्ट व्यंजन था वह अच्छी तरह से जानता था कि सुबह-सुबह खूबसूरत औरत को चोदने को मिल जाए बस इससे ज्यादा भला और क्या हो सकता है,,,, सूरज बिना रुके अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा था,, मुखिया की बीवी अपनी सिसकारी की आवाज को काबू में किए हुए थी लेकिन फिर भी उसके मुंह से रह रहकर आहह आहह की आवाज निकल जा रही थी। मुखिया की बीवी जब भी चुदवाती थी एकदम खुलकर चुदवाती थी और इस तरह से चुदवाने वाली औरत ही सूरज को मदहोश और मत कर देती थी। मुखिया की बीवी का पिछवाड़ा सूरज का बेहद को भावना लगता था इसलिए वह ज्यादातर मुखिया की बीवी की पीछे से लेता था। सूरज बिना रुके धक्के पर धक्के लगा रहा था और हर एक धक्का उसके बच्चेदानी से टकरा रहा था। सूरज की बात सुनकर कुछ पल के लिए उसका भी मन बहकने लगा बैठे के लिए। उसकी भी ख्वाहिश थी कि उसका एक बेटा होता तो कितना अच्छा होता क्योंकि मुखिया होने की वजह से उसकी रियासत थोड़ी बड़ी थी। वह जानती थी की बेटियां तो शादी के बाद अपने घर चली जाएंगी तो यह सब कौन संभालेगा। यह चिंता हमेशा से उसे रहती थी लेकिन जब उसे एहसास हो गया कि अब उसे बेटा होने वाला नहीं है तो अपना मन मार कर वह खुद ही काम में छूट गई थी और सारा काम संभाल ली थी।
लेकिन आज सूरज के मुंह से यह बात सुनकर कि अगर वह कह तो उसे बेटा दे सकता है एक बार फिर से उसकी भावनाएं जागरूक होने लगी थी एक बार फिर से उसे एहसास होने लगा था कि वह फिर से मां बन सकती है लेकिन फिर इस बारे में सोच कर उसे शर्म महसूस होने लगी थी कि दोनों बेटियां जवान हो चुकी थी दोनों का विवाह करने का समय हो चुका था और ऐसे में उसका खुद का मां बनना कितना लज्जित कर देता है,,,, इसलिए एक बार फिर से अपनी भावनाओं को काबू में कर ली थी और इस समय सूरज से चुदवाने का मजा लूट रही थी,,, थोड़ी देर बाद दोनों के सांसे उखड़ने लगी,,, मुखिया की बीवी गहरी गहरी सांस ले रही थी क्योंकि वह चरम सुख के करीब पहुंच चुकी थी और इसका अहसास होते ही सूरज भी जोर-जोर से तक के लग रहा था क्योंकि उसका भी पानी निकलने वाला था और अगले ही पल वह अपने दोनों हाथों को मुखिया की बीवी की कमर से हटाकर उसकी दोनों बड़ी-बड़ी चूचियों पर रख दिया और उन्हें जोर-जोर से दबाता हुआ अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ने लगे,, दोनों की किस्मत बहुत तेज थी कि इतनी देर होने के बावजूद भी अभी तक वहां कोई नहीं आया था। जल्दी-जल्दी दोनों अपने कपड़ों को दुरुस्त कर लिए और मुखिया की बीवी थाली में दाल चावल रोटी सब्जी निकालकर उसे परोस दिखाने के लिए और वह खाना खाने लगा।
सूरज खाना खाने के बाद वहां से निकल गया था बैलगाड़ी के पास और उसके जाने के बाद ही नीलू और शालू दोनों जाकर खाना खाने लगे थे। खाना खाते समय मुखिया की बीवी अपनी दोनों बेटियों को सख्त हिदायत दे रही थी।
तुम दोनों ज्यादा शरारत मत करना क्योंकि अब तुम दोनों बाहर जा रहे हो सूरज के साथ ही रहना इधर-उधर बिल्कुल भी मत जाना।
तुम चिंता मत करो मां हम दोनों सूरज के ही साथ रहेंगे,,,,।
अपना ख्याल रखना पहली बार मैं तुम दोनों को बाहर भेज रही हूं कोई और होता तो शायद में तुम दोनों को नहीं भेजती लेकिन सूरज ईमानदार और विश्वास वाला लड़का है इसलिए तुम दोनों को भेज रही हूं।
(थोड़ी देर में मुखिया की बीवी अपने दोनों बेटियों के साथ बैलगाड़ी के पास आ गई थी वहां पर पहले से ही मुखिया खड़ा था और वह सूरज को कुछ समझा रहा था,,,, बैलगाड़ी में सारे खरबूजे की पेटीया रखी जा चुकी थी सूरज बार-बार दोनों बहनों को ही देख रहा था नीलू की जवानी का मजा तो वह चख चुका था लेकिन शालु अभी तक उसके नीचे नहीं आई थी कसी हुई सलवार में शालु की गांड जानलेवा लग रही थी उसकी दोनों गोलाइयां तरबूज के फांक की तरह लग रही थी ऐसा लग रहा था उसकी सलवार में गोल-गोल तरबूज लगे हो। कुल मिलाकर दोनों बहने उसका पानी निकालने के लिए तैयार थी,,,, शालू और नीलू को बैठने के लिए पीछे जगह थी दोनों पीछे बैठ चुकी थी और सूरज बैलगाड़ी चलाने के लिए आगे बैठ गया था मुखिया की बीवी ने रास्ते में खाने के लिए रोटी सब्जी और आचार बांध कर दे दी थी,,,, सूरज निकल चुका था एक नई सफर के लिए,,,,, जाते-जाते मुखिया की बीवी और मुखिया दोनों एक साथ बोल पड़े)
संभाल कर जाना,,,।
बहुत ही खुबसुरत लाजवाब और शानदार जानदार मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गयासूरज बैलगाड़ी लेकर निकल चुका था एक नई सफर के लिए लेकिन वह अकेला नहीं था उसके साथ जवानी से भरी हुई दो लड़कियां थी शालू और नीलू नीलू की जवानी का मजा तो वह चख चुका था लेकिन शालू अभी भी बाकी थी,, उसे पूरी उम्मीद थी कि जिस तरह से नीलू उसके नीचे आ गई शालू भी जरूर आएगी लेकिन फिलहाल अभी तो इस सफर का मजा लेना था मौसम भी बहुत खुशनुमा था,,, सुबह-सुबह का समय था आसमान बिल्कुल साफ और ठंडी हवा बह रही थी धीरे-धीरे बैलगाड़ी आगे बढ़ रही थी,, बैलगाड़ी के पहिए में लोहे के घुनघुनए लगे हुए थे जिससे जैसे जैसे भैया घूम रहा था वैसे-वैसे उसमें से एक मधुर संगीत बज रही थी और यही हाल बैलों का भी था बैलों के पैर में भी घुंघरू बने हुए थे कुल मिलाकर शांत वातावरण में एक अद्भुत संगीत बज रहा था।
सालु और नीलू भी काफी खुश थे क्योंकि यह पहला मौका था जब वह दोनों शहर जा रहे थे और वह भी सूरज के साथ उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनके पिताजी और उनकी मां शहर जाने के लिए राजी हो गई थी। इसीलिए शालू नीलू से बोली।
नीलू मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि हम लोग शहर जा रहे हैं।
तो सही कह रही है मुझे भी यकीन नहीं हो रहा है मैं तो पहली बार शहर जा रही हूं।
अरे बुद्धू तुम्हें कौन सा दो-तीन बार जा चुकी हूं मैं भी तो पहली बार जा रही हूं।
अरे तुम दोनों क्या मैं भी पहली बार ही शहर जा रहा हूं। सच कहूं तो मैं भी अपने मन में सोचता था कि मैं शहर जाऊं देखो तो सही वहां के लोग कैसे होते हैं वहां का बाजार कैसा होता है। और आज देखो तुम्हारे मां बाबूजी की वजह से मुझे भी शहर जाने का मौका मिल रहा है।
मां बाबूजी तुम्हारी ईमानदारी देखकर भेज रहे हैं। (सूरज की बात सुनकर शालू बोली)
वह तो है लेकिन फिर भी अगर तुम्हारे मां बाबूजी नहीं भेजते तो शायद मेरी जिंदगी में कभी शहर नहीं जा पाता।
वैसे सूरज तुमने क्या शहर का रास्ता देखे हो,, (नीलू थोड़ी सी शंका जताते हुए सूरज से बोली)
सच कहूं तो मैं तो देखा नहीं हूं क्योंकि कभी जाने का मौका ही नहीं मिला लेकिन इतना जानता हूं कि कौन सी सड़क शहर की तरफ जाती है इसलिए तो तुम्हारे बाबूजी मुझे भेजने के लिए तैयार हो गए वैसे सच कहूं तो तुम्हारे बाबूजी और तुम्हारी मां मुझ पर बहुत भरोसा करती हैं,,,,।
(सूरज की बात सुनकर शालू मुस्कुराते हुए बोली)
हां यह बात तो है मां और बाबूजी अक्सर तुम्हारी बात करते रहते हैं तो बड़ी ईमानदारी से काम करते हो और हम लोगों का काम भी संभाल लिए हो,,,।
(अपनी बहन शालू की बात सुनकर नीलू अपने मन में ही बोली पिताजी ऐसा कहते हैं यह तो समझ में आता है लेकिन मन ऐसा कहते हैं इसके पीछे का राज तो नहीं जानती सिर्फ मैं जानती हूं,,, मां को सूरज का लंड बहुत पसंद है,,,,, ऐसा वह अपने मन में अपने आप से कह रही थी शालू के सामने ऐसी बात कहने की उसकी हिम्मत नहीं थी,,,,, शालू की बात सुनकर सूरज बोला)
क्या सच में मालिक और मालकिन मेरे बारे में बात करती रहती है या तुम यूं ही बात बना रही हो।
हां हां क्यों नहीं मैं झूठ थोड़ी ना कह रही हूं,,, काफी दिनों से तो मैं खुद तुम्हें देखते आ रही हूं हम लोगों का काम करते हुए अभी-अभी गेहूं की कटाई तुम ही ने करवाए थे ना,,,।
हां,,, मैं और मेरी मां,,,।
सिर्फ दो जन,,,!(आश्चर्य से शालू बोली)
हां तो क्या हो गया वैसे भी तो हम लोग अपने खेत में काम करते ही हैं,,,, मलिक के खेत में काम कर दिए तो कौन सी बड़ी बात है हम लोगों के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है हां लेकिन तुम लोग अगर खेत में काम करने लगोगे तुम्हारे पसीने छूट जाएंगे।
(सूरज की बात सुनकर नीलू मुस्कुराते हुए बोली)
नहीं नहीं हम लोग खेत में काम नहीं कर सकते वैसे भी तुम पसीना छुड़वा देते हो,,,।
(नीलू यह बात मुस्कुरा कर बोली थी सूरज नीलू के खाने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रहा था इसलिए तपाक से बोल पड़ा)
तुम्हें भी पसीना छुड़वाना है शालू,,,,?
ना बाबा ना मुझे तो माफ करो मुझे पसीना नहीं छुड़वाना है,,,,।
अरे मजा भी बहुत आता है पूछो नीलू से,,,,।
(सूरज की बात सुनकर नीलू एकदम से चौंक गई सूरज की बात सुनकर शालू नीलू की तरफ आश्चर्य से देख रही थी तब वह एकदम से बात बनाते हुए बोली)
नहीं नहीं मजा तो बिल्कुल नहीं आता हालत खराब हो जाती है वह क्या है ना शालू एक दिन में घूमते घूमते खेत पर पहुंच गई तो ऐसे ही मैं भी काम करने लगी सच में मेरी हालत खराब हो गई मैं तो यह सोचकर हैरान हूं कि सूरज और चाची मिलकर पूरे खेत की फसल की कटाई कैसे कर लिए,,,,,।
(नीलू एकदम से बात को घुमा दी थी नीलू की बात सुनकर शालू मुस्कुरा रही थी और मुस्कुराते हुए बोली)
तभी तो मैं खेत पर नहीं जाती वरना अगर कोई काम करने को बोल देगा तो मुझसे तो काम ही नहीं होगा,,,।
अरे लेकिन तुम्हें भी थोड़ा बहुत काम करना चाहिए ऐसा जरूरी नहीं कि सिर्फ खेत में ही पसीना निकल जाए औरतों का पसीना और भी काम में निकल जाता है क्यों नीलु,,,,।
(इस तरह के सवाल के आगे अपना नाम सुनकर नीलू सूरज पर मन ही मन गुस्सा कर रही थी लेकिन शालु सूरज के कहने के मतलब को नहीं समझ पा रही थी,,,, इसलिए वह एकदम से सूरज की बात सुनकर बोली।)
झाड़ू लगाना बर्तन मांजना यह सब तो मैं कर ही लेते हैं यह सब इतना कठिन काम नहीं है।
हां वह तो है लेकिन जब इसे आगे बढ़ोगी तब धीरे-धीरे काम में कठिनाई भी बढ़ती जाएगी लेकिन मजा भी बढ़ता जाएगा।
काम करने में कौन सा मजा,,!
अरे तुम समझ नहीं रही हो औरतों के लिए बहुत से कम है जिसमें मजा भी आता है पसीना भी निकलता है।
सूरज पागल हो गया है नीलू ऐसा कोई काम है औरत के लिए जिसमें औरत को मजा आता हो और पसीना भी निकल जाता हो,,।
(हरामजादा यह नहीं सुधरने वाला नीलू अपने मन में ही बोली फिर धीरे से शालू को समझाते हुए बोली)
मुझे तो नहीं लगता कि ऐसा कोई काम है पता नहीं यह कैसे जानता है औरतों के बारे में,,,।
चाची को देखता होगा काम करते,,,, उन्हें अच्छा लगता होगा काम करने में तभी यह कह रहा है,,,( शालु की बात सुनकर सूरज मन ही मन मुस्कुरा रहा था वैसे वह अनजाने में ही सूरज की मां के बारे में सच बात ही बता रही थी वह कुछ और समझ रही थी लेकिन सूरज कुछ और पूछ रहा था,,,, धीरे-धीरे घुंघरू की आवाज का शोर मचाते हुए बैलगाड़ी गांव से बाहर निकल गई थी,, शालू और नीलू को तो अच्छा लग ही रहा था सूरज को और भी ज्यादा अच्छा लग रहा था बैलगाड़ी के ऊपर बैठने से पहले वह दोनों बहनों को देख चुका था दोनों कई हुई सलवार पहनी हुई थी और कई हुई सलवार में दोनों की जवानी भर भर कर दिखाई दे रही थी जिसे देखकर उसी समय सूरज का लंड अंगड़ाई लेने लगा था,,,, धीरे-धीरे बैलगाड़ी आगे बढ़ती चली जा रही थी और जैसे-जैसे आगे बढ़ती चली जा रही थी वैसे-वैसे गांव के लोग दिखाई देना बंद हो गए थे,,,, कच्ची सड़क एकदम सुनसान थी दोनों तरफ बड़े-बड़े पेड़ और उनकी छांव कच्ची सड़क को और भी ज्यादा खूबसूरत बना रही थी और इस कच्ची सड़क के बीच से सूरज बैल गाड़ी हांक रहा था,,,,, तभी नीलू सूरज से पूछ बैठी,,,)
तुम्हें तो मैंने कभी बैलगाड़ी चलते अच्छी नहीं तो तुम यह बैलगाड़ी चलाना कहां से सीख गए,,,,।
अरे बैलगाड़ी चलाने में कोई बड़ी बात नहीं है बस इस पर बैठता है और रस्सी को जरूरत के मुताबिक छोड़ना है और खींचता है बेैल अपने आप समझ जाता है कि उसे क्या करना है,,,,,,।
(सूरज की बात सुनते ही शालू बोल उठी)
तब तो मुझे भी बैल गाड़ी चलाना है,,,,,।(उसकी बात सुनकर नीलू बोली)
पागल हो गई है क्या रहने दे यह जिसका काम है उसी को शोभा देता है तुझसे नहीं हो पाएगा,।
(बैलगाड़ी चलाने की बात से सूरज के मन में तूफान मचने लगा था,,,, वह बिल्कुल भी देर किए बिना बोल उठा।)
हां हां इसमें कोई बड़ी बात नहीं है शालु आ जाओ मैं तुम्हें बैलगाड़ी चलाना सिखाता हूं,,,।
(सूरज की बात सुनकर शालू एकदम से खुश हो गई,,,, तब नीलू बोली,,,)
लेकिन कहां बैठकर चलाएगी बैलगाड़ी, आगे बैठने के लिए जगह ही नहीं है,,,।
(सूरज इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था वह किसी भी तरह से शालू के तनबदन में उतेजना की लहर उठाना चाहता था,,, यह एहसास दिलाना चाहता था कि अब वह पूरी तरह से जवान हो चुकी है उसका हर एक अंग उसे आनंद देने के लिए बना है इसलिए वह तपाक से बोला,,,)
अरे कोई बात नहीं मेरे आगे बैठ जाओ तभी तो तुम सिख पाओगी वरना कहीं अकेले बैठी रही और बैल भड़क गया तो लेने के देने पड़ जाएंगे तब रोकना मुश्किल हो जाएगा,,,,।
हां नीलु सुरज सही कह रहा है,,,,, अरे थोड़ा बैल को तो रोको ताकि मैं उतर सकूं,,,,,।
(उसकी बात सुनकर सूरज बैल की रस्सी खींचकर बैल को खड़ा कर दिया और शालू बैलगाड़ी से नीचे उतर गई,,,, रास्ता पूरी तरह से सुनसान था केवल पंछियों की आवाज आ रही थी और दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था और वैसे भी इस सड़क से कोई आता जाता नहीं था क्योंकि गांव का बाजार दूसरी तरफ था यह रास्ता अक्सर सुनसान ही रहता था जो दूसरे गांव से मिलाता था और यह रास्ता दूसरे गांव के पीछे नहीं बल्कि दूसरे गांव के किनारे की सड़क से होकर गुजरता था इसलिए किसी के देखे जाने का डर नहीं था सूरज का दिल जोरों से धड़क रहा था क्योंकि शालू उसके आगे बैठने वाली थी एक तरह से उसकी गोद में ही बैठने वाली थी क्योंकि जगह बहुत कम थी,,,, शालू जल्दी से नीचे उतर कर आगे की तरफ आ गई और सूरज हाथ बढ़ाकर शालू का हाथ पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ चढाने लगा,,, शालू लकड़ी की पाटी को एक हाथ से पकड़ कर सूरज के हाथ का सहारा लेकर धीरे से बैलगाड़ी के ऊपर चढ़ गई लेकिन अभी वह बैठी नहीं थी वह सिर्फ जगह देख रही थी सूरत धीरे से थोड़ा सा पीछे की तरफ सड़क गया जिससे उसकी दोनों टांगों के बीच चौड़ी पाटी नजर आने लगी वह मुस्कुरा रही थी,,,, सूरज भी मुस्कुराते हुए बोला।)
आ जाओ बैठ जाओ,,, तुम्हारे लिए जगह बना दिया हूं,,,,।(यह सब सुनकर नीलू से रहा नहीं जा रहा था क्योंकि उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था,,, अब उसे लग रहा था कि उसे बैलगाड़ी चलाने के लिए आगे जाना चाहिए था ताकि वह किसी बहाने से सूरज के करीब तो रहती लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा अब उसके करीब शालू है,,,, वह कुछ कर भी नहीं सकती थी,शालु धीरे से सूरज की टांगों के बीच बैठ गई थी सूरज को एहसास हो रहा था कि नीलू से बड़ी गांड चालू की थी और वह थोड़ा नीलू से तंदुरुस्त थी, उसके गदराए बदन की खुशबू से सूरज मदहोश हो रहा था,,, शालू अच्छी तरह से बैठ गई थी,, फिर भी सूरज पूछा।)
अच्छे से तो बैठ गई हो ना,,,,।
हां अब मैं बराबर बैठ गई हूं,,,,,,।
(सूरज की मदहोशी बढ़ती जा रही थी क्योंकि जिस तरह से वह बेठी थी उसका पूरा बदन सूरज के बदन से सटा हुआ था,,,,, सूरज का मन कर रहा था कि इसी समय वह उसे अपनी बाहों में भरकर उसकी चूचियों को दबाना शुरू कर दे लेकिन फिर भी अपनी भावनाओं पर काबू किए हुए वहां अपने आप को संभाले हुए था तभी शालू बोली,,)
अब क्या करना है सूरज,,,?
ज्यादा कुछ करना नहीं है जब बैल खड़ा रहे और उसे आगे बढ़ने का इशारा करना हो,,, तो रस्सी को थोड़ा सा ढीला छोड़कर उसे हिलाओ जिस रस्सी के हलनचलन से बेल को लगने लगे कि अब उसे क्या करना है और साथ में मुंह से आवाज निकालो,,आहहह टटटट,,,,टटटटटट,,,,, अब ऐसे करो,,,,,।
(सूरज जैसा बता रहा था,, वैसा ही शालू करने लगी लेकिन जिस तरह से आवाज निकालने को कह रहा था उस तरह से आवाज निकालने में उसे हंसी आ जा रही थी और जब वह हंसती थी तो उसके नितंब एकदम से सूरज की टांगों के बीच सट जा रहे थे,,, सूरज तो ऐसा लग रहा था कि जैसे हवा में उड़ रहा हूं उसे शालु के नितंबों का स्पर्श और वह भी अपने आगे वाले भाग पर कुछ ज्यादा ही अच्छे तरीके से महसूस हो रहा था और वह मदहोश हो रहा था,,,,, फिर भी जैसा सूरज ने बताया था वैसा करने पर बल आगे की तरफ बढ़ने लगा यह देखकर नीलू को भी अच्छा लग रहा था की बैलगाड़ी चलाना कितना आसान है,,,,, देखते ही देखते बैलगाड़ी कुछ दूरी तक पहुंच गई चालू बहुत खुश नजर आ रही थी उसके हाथों में बैलो की लगाम जो थी,,,सूरज,,, बता रहा था कि जब बैलगाड़ी को रोकना हो तो रस्सी को थोड़ा सा अपनी तरफ खींच लेना तो वह रुक जाएगा सूरज का इतना कहना था कि शालु उसी समय रस्सी को खींच दी और बैलगाड़ी रुक गई यह देखकर सूरज मुस्कुराने लगा और बोला,,,,,।)
अरे इतना जोर से नहीं खींचना था,,,,, धीरे से रुको मैं बताता हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही सूरज अपने दोनों हाथों को उसके दोनों बाजू के नीचे से आगे की तरफ लाया जिसकी वजह से दोनों तरफ से उसकी नंगी सूरज की हथेली पर स्पर्श होने लगी जिसका एहसास शालू को भी हो रहा था लेकिन वह उसे सहज ले रही थी वह नहीं जानती थी कि इतने से ही सूरज पूरी तरह से आनंदित हो गया था रस्सी को धीरे से खींचने के लिए वहां अपने दोनों हथेलियों को शालू की हथेली पर रख दिया था और अपनी हथेली में रखकर उसकी हथेली को दबाते हुए धीरे से खींचा तो बेल की रफ्तार कम होने लगी वह धीरे-धीरे चलने लगा यह देखकर सूरज अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)
देखो बैल कैसे धीरे-धीरे चलने लगा,,,, और इन्हें रोकना हो तो थोड़ा सा जोर लगाकर खींच लो वह एकदम से रुक जाएंगे लेकिन एक मत खींचना क्योंकि इससे उन्हें चोट लग सकती है क्योंकि रस्सी उनकी नाक के छेद में से भरी जाती है समझ रही हो ना,,,,।
हां समझ रही हूं,,,,।
(इतना सुनकर सूरज एकदम सहज होते हुए अपनी हथेलियां को शालु की हथेलियो के ऊपर से हटा लिया,,,, ताकि शालू को उस पर बिल्कुल भी शक ना हो कि वह ऐसा जानबूझकर कर रहा है,,,, लेकिन इस दौरान उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर खड़ा हो चुका था और वह एकदम सीधा होकर ऊपर की तरफ मुंह उठाए शालू की पीठ से सटा हुआ था,,,, जिसका एहसास शालू को अच्छी तरह से हो रहा था शालू को उसकी चुभन नहीं हो रही थी लेकिन उसकी गर्माहट का एहसास हो रहा था और वह अपने मन में सोच भी रही थी कि उसकी पीठ पर इतनी गरम कौन सी चीज सटी हुई है,,,, लेकिन वह समझ नहीं पा रही थी क्योंकि उसके दिमाग में बैलगाड़ी चलाने की धुन जो सवार थी वह बड़े अच्छे से बैलगाड़ी को आगे की तरफ लेकर चली जा रही थी लेकिन जैसे-जैसे खड़े आते और उसमें से बैलगाड़ी का पहिया गुजरता तो बैलगाड़ी हीचकोले खाने लगती थी,, जिसकी वजह से शालू और सूरज थोड़ा आगे पीछे हो जा रहे थे अपने आप ही और इस वजह से रह रहकर सूरज का लंड उसकी पीठ पर चुभने लगता था।
जवानी से भरी हुई शालु की पीठ और नितंबों पर अपने लंड की रगड़ को महसूस करके सूरज एकदम मस्त हो जा रहा था वह उत्तेजना के परम शिखर पर था उसे इस बात का डर था कि कहीं उसके लंड से पानी न निकल जाए क्योंकि शालु की जवानी का स्पर्श उसे दीवाना बना रहा था,,,,, सूरज उसका हौसला बनाते हुए बोला।
बहुत अच्छे शालु तुम बहुत जल्दी बैलगाड़ी चलाना सीख गई हो,,,, अब तो तुम अकेले ही शहर बैलगाड़ी लेकर जा सकती हो। तुमको भी सिखाना है नीलु,,,।
(दोनों को खुश होता देखकर नीलू गुस्सा हो रही थी और गुस्से में बोली)
नहीं सीखना तुम ही दोनों जिंदगी भर करो मजदूरी,,।
लेकिन नीलू इस मजदूरी में तो मजा आ रहा है,,,।
हां मेरी रानी पहली बार है ना इसलिए मजा आ रहा है जब करना पड़ जाएगा तब तुझे यह सजा लगने लगेगा।
वह तो मैं नहीं जानती लेकिन इस समय तो मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,।
(शालू को खुश होता देखकर सूरज उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर सहज होता हुआ बोला ताकि उसे बिल्कुल भी शक ना हो,,,)
बैलगाड़ी चलाने में बहुत मजा आता है शालु मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम इतनी जल्दी बैलगाड़ी चलाना सीख गई हो,,,, सच में तुम्हें बैलगाड़ी चलाता देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है,,,।
(सूरज के इस तरह से अपनी कमर पर हाथ रखकर पकड़ने की वजह से पल भर के लिए शालू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी वह एकदम से गनगना गई थी लेकिन जिस तरह से सूरज उसका हौसला बढ़ा रहा था खुश हो रहा था यह देखकर वह एकदम से सहज होने का दिखावा कर रही थी जबकि उसके बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी वह कुछ बोल बाकी उससे पहले ही सूरज फिर से उसकी कमर को अपने दोनों हाथों की पकड़ से आजाद कर दिया वह गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,, इस दौरान उसे अपनी पीठ पर गर्माहट बराबर महसूस हो रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इतनी गर्म कौन सी चीज है जो उसकी पीठ से उसके नितंबों के ऊपरी हिस्से पर सटी हुई है,,,,, यही सब सोते हुए बैलगाड़ी आगे चली जा रही थी दूसरा गांव आने वाला था,,,, तभी जब उसे रहा नहीं गया तो वह सूरज से बोल पड़ी,,,,,,,,।)
यह क्या चीज है सूरज एकदम गरम लग रही है,,,,(शालू यह बात एकदम धीरे से बोलते हुए अपने हाथ को एकदम से पीछे की तरफ ले गई और उसे गर्म चीज पर जैसे ही हाथ रखी तो पहले तो उसे कुछ समझ में नहीं आया लेकिन वह उसका भूगोल उसका आकार जानने के लिए जैसे ही उसे अपनी हथेली में लेकर दबाई तो एकदम से चौंक गई उसे एहसास हो गया कि उसकी हथेली के अंदर गर्म चीज क्या है वह घबरा गई और अपनी हथेली को वापस खींच ले उसकी सांस ऊपर नीचे हो गई वह कुछ बोल नहीं पाई और सूरज मन ही मन में मुस्कुराने लगा खुश होने लगा,, लेकिन शालु की हालत खराब थी भले ही वह सीधी शादी और भोली भाली थी लेकिन इतना तो वह जानती थी कि उसकी हथेली में गर्म सी चीज कुछ और नहीं बल्कि सूरज का लंड था इस बात के एहसास से ही वह सिहर उठी थी,,,,, सूरज भी कुछ बोल नहीं पाया ना तो इसके बाद शालू ही कुछ बोल पाई उसकी आंखों में शर्म और मदहोशी भरी हुई थी उसका चेहरा शर्म से लाल हो चुका था उस बैलगाड़ी की रस्सी तक संभाली नहीं जा रही थी बार-बार उसके हाथों से छूट जा रही थी क्योंकि जिंदगी में पहली बार उसके हाथ में एक जवान लड़के का लंड जो आ गया था,,,,, सूरज शालु की मनोस्थिति से अच्छी तरह से बाकी हो चुका था वह जानता था कि शालु को सहज बनाना बहुत जरूरी है और वैसे भी दूसरे गांव की सीमा शुरू हो चुकी थी इसलिए वह शालु से बोला,,,)
अब तुम उतर जाओ शालू क्योंकि दूसरा गांव शुरू होने वाला है इस हाल में अगर कोई देखेगा तो क्या सोचेगा वैसे भी तुम्हारे पिताजी को दूर-दूर तक गांव में बहुत लोग जानते हैं,,,,।
(सूरज के कहने का मतलब को शालू अच्छी तरह से समझ रही थी इसलिए वह बिना कुछ बोले उतरने को तैयार हो गई और सूरज भी बैलगाड़ी रोक कर उसे उतरने में मदद किया,,, लेकिन वह नीचे उतरते समय सूरज से नजर नहीं मिल पा रही थी उसकी आंखों में शर्म भरी हुई थी चेहरा और का लाल हो चुका था जो कि सूरज को एकदम साफ दिखाई दे रहा था। सूरज शालू के चेहरे को देखकर मन ही मन बहुत खुश हो रहा था शालू बिना कुछ बोले पीछे चली गई और बैलगाड़ी पर बैठने लगी तो नीलू चुटकी लेते हुए बोली,,,)
बहुत मजा आ गया ना तुझे बैलगाड़ी चलाने में जब सही में चलाना पड़ेगा ना तो पसीने छूट जाएंगे,,,।
( नीलू की बात सुनकर वह कुछ बोली नहीं बस मुस्कुरा दी और बैलगाड़ी के ऊपर बैठ गई,,,,, और बैलगाड़ी सूरज आगे बढ़ा दिया कुछ देर तक किसी के मुंह से आवाज तक नहीं निकल रही थी तीनों खामोश है,,, सूरज और शालू एक दूसरे की खामोशी को अच्छी तरह से समझ रहे थे लेकिन इस बीच नीलु भी शांत थी,,,,, तभी थोड़ी दूर बैलगाड़ी आगे गई होगी कि तभी सूरज ने उसे रोक दिया,,,,, और बोला,,,)
कहां जा रही हो चाची,,,,?(सूरज की सूरत को पहचान लिया था वह औरत कोई और नहीं बल्कि कमला थी कमला रानी जिसके नंगे बदन को वह देख चुका था जिसे चुदवाते हुए वह देख चुका था जिसकी प्यास अभी भी सूरज की आंखों में बसी हुई थी,,,, यह वही औरत थी जिसके बदौलत, शुरू शुरू में लगता था कि सूरज का परिवार बिखर गया है क्योंकि इस औरत की वजह से ही सूरज के पिताजी घर छोड़कर चले गए थे लेकिन धीरे-धीरे एहसास हुआ कि इसी औरत की बदौलत आज वह एक बहुत ही खूबसूरत औरत की जवानी का मजा ले रहा था और वह औरत थी उसकी मां, इसीलिए वह भले अपनी मां के सामने कमला को भला बुरा कहता था लेकिन दिल ही दिल में हुआ कमल की इज्जत भी करता था लेकिन इस इज्जत के बीच उसके मन में कमला की जवानी का मजा चखने का भी इरादा था। सूरज की बात सुनकर वह औरत जो की पैदल चल रही थी अपने दो बच्चों को साथ में लेकर वह एकदम से रुक गई और बोली,,,)
कहीं नहीं बबुआ बस आगे वाले गांव तक जाना था,,,।
साथ में दो बच्चों को लेकर जा रही हो धूप बढ़ती जा रही है,,,।
तो अब कर भी क्या सकते हैं बबुआ,,,,,,!
(बैलगाड़ी रुक जाने की वजह से और सूरज की बात सुनकर शालू और नीलू दोनों अपने मन में सोच रहे थे कि अब यह कौन मिल गया जिसे सूरज चाची कह रहा है कहीं पहचान वाली तो नहीं है,,,,, लेकिन वह दोनों रेलगाड़ी से नीचे नहीं उतरे बस बैठे रहे,,,, सूरज कुछ सोच रहा था तभी वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,)
तुम कहां जा रहे हो बबुआ,,,,?
मैं तो शहर जा रहा था चाची खरबूजे बेचने के लिए,,,, और हां शहर का रास्ता यही आगे से होकर जाता है ना,,,!
हां हां,,,, तुम सही रास्ता पकड़े हो बबुआ,,,, यह सिद्ध शहर जाता है लेकिन शहर तो अभी बहुत दुर है,,,।
हां मैं जानता हूं,,,,, अगर कोई तकलीफ ना हो तो बैलगाड़ी पर बैठ जाओ मैं तुम्हें आगे छोड़ दूंगा,,,,,।
मुझे कौन सी तकलीफ होगी बबुआ बल्कि मुझे तो आराम हो जाएगा इतनी धूप में बच्चों को लेकर जा रही हूं,,,,।
(उसकी बात सुनते ही सूरज एकदम से बैलगाड़ी से नीचे उतर गया और कुछ सोचने के बाद बोला)
बच्चों को पीछे बिठा दो क्योंकि,, तुम पीछे बैठ नहीं पाओगी,,,।
पीछे क्यों नहीं बैठ पाऊंगी,,,,!
क्योंकि पीछे हमारी मालकिन है,,,।
मालकिन,,,?(कमला एकदम से हैरान होते हुए बोली और बैलगाड़ी के पीछे जाकर देखी तो दो खूबसूरत लड़कियों को देखकर वह हैरान रह गई और बोली,,,)
हाय दैया दोनों कितनी सुंदर है,,, एकदम गुलाब की पंखुड़ी की तरह।
(उसके मुंह से अपनी तारीफ सुनकर दोनों बहने एकदम खुश हो गई और नीलू बोल पड़ी)
लाओ बच्चों को पीछे बैठा दो,,,,(इतना कहकर दोनों बहने उसके दोनों बच्चों को अपनी गोद में बिठा दी क्योंकि दोनों की उम्र 6 साल और ८ साल थी,,, बच्चे तो बैठ गए थे लेकिन अभी भी कमला बाकी थी इसलिए वह हैरान होते हुए बोली,,,)
बच्चे तो बैठ गए हैं लेकिन मैं कहां बैठुंगी,,,,,।
तुम आगे बैठ जाओ सूरज के पास,,।
(नीलू ने सूरज के मन की बात बोल दी थी लेकिन यह बात सुनकर शालू एकदम से सिहर उठी थी क्योंकि आगे बैठने का उसे अच्छा खासा अनुभव हो गया था,,,, नीलू की बात सुनकर कमला आगे की तरफ आ गई सूरज भी साथ में आ गया,,, कमला बैठने की जगह को देख रही थी जो की काफी छोटी थी यह देखकर सूरज समझ गया कि वह क्या सोच रही है और वह अच्छी तरह से जानता था कि यह औरत एकदम चुदक्कड़ है इसलिए वह बोला,,,।)
कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है हम दोनों साथ में बैठ जाएंगे आराम से पहुंच जाओगी,,,।
लेकिन,,,?(कमला के मन में शंका हो रही थी कि वह कैसे बैठ पाएगी और वह भी जिस तरह से बैठने को बोल रहा है वह एक तरह से उसकी गोद में बैठने वाली थी,,, लेकिन ज्यादा सोच विचार ना करते हुए सूरज एकदम से बैलगाड़ी पर चढ़ गया और,, अपना हाथ कमला की तरफ बढ़ाकर बोला,,)
ज्यादा सोचो मत जल्दी से बैठ जाओ हमें बहुत दूर तक जाना है,,,, यह तो तुम्हें एक औरत हो और बच्चे के साथ थी इसलिए बैठा रहा हूं वरना किसी को बैठता नहीं अभी तक तो मैं कहां से कहां पहुंच गया होता,,,,
(सूरज की बात सुनकर अभी कुछ बोल नहीं पाई हो अपना हाथ आगे बढ़ा दे सूरज उसका हाथ पकड़ कर ऊपर की तरफ खींचते हुए कमला भी सहारा लेकर ऊपर चढ़ गई और सूरज की दोनों टांगों के बीच बैठ गई यह पल कमल के लिए भी अद्भुत था उसके बदन में अजीब सी लहर उठने लगी थी, शालु तो भोली थी नादान थी वह सूरज की चालाकी को समझ नहीं पाई थी लेकिन इस समय कमला को सूरज की चालाकी नहीं लग रही थी बल्कि उसकी मजबूरी थी और वह जानती थी कि बैलगाड़ी मैं बैठ कर वह थोड़ा जल्दी पहुंच जाएगी और धूप भी नहीं लगेगी,,, और यह सड़क जो शहर की तरफ जाती थी वह गांव के बगल से होकर गुजरती थी यहां पर किसी का आना जाना ना क ेहीं बराबर था इसलिए दोनों को इस अवस्था में देखने वाला कोई नहीं था।