आपकी समीक्षा पढ़ कर इतना अच्छा लगता है कह नहीं सकती। वह लेखनी और कहानी धन्य है जिसे आप का आशीष मिलता है। हाँ कुछ बातें औरतों के बारे में। चाहे गाँव हो या शहर जहाँ सिर्फ औरतें ही होती हैं ऐसे माहौल में औरतें ज्यादा स्वछंद, उन्मुक्त और देह के हर प्रसंग के किस्से खुल के बखानती हैं। कई बार मैंने गाँव के रतजगों में हिस्सेदारी भी की है, जब बारात में महिलाएं लड़कियां नहीं जाती थीं और लाइफ साइकिल की पूरी आवृत्ति होती थी, शादी से लेकर बच्चे के जन्म तक और काफी खुल के रति संबंधो पे बात होती थी, गाने होते थे, लेकिन पुरुष दूर दूर तक नहीं होते थे और उसमे काफी लेयर्स एक साथ होती थीं, जैसे एक रिचुयल जिसे राइट द पैसेज भी कह सकते हैं, कुछ मौज मस्ती कुछ चिढ़ाना और उसमे हर उम्र की हर रिश्ते की औरतें साथ होती थीं, माँ भी बेटी भी, लेकिन कुछ भी भदेश नहीं लगता था। और सबसे बड़ी बात, सुबह होते ही जैसे बिस्तर समेटते हैं वह सब समेत दिया जाता था और सब लोग दिन के काम में लग जाते थे, और एक लेवल पर शादी के कस्टम फर्टिलटी रिचुअल और एग्रीकल्चर से भी जुड़े हैं। मंडप में पांच तोते, लकड़ी के कामदेव के वाहन के रूप में काम की उपस्थिति बताते हैं तो बांस लम्बे जीवन के साथ किसका प्रतीक है, कहने की जरूरत नहीं।
शहरो में क्लब्स में लेडीज ओनली नाइट्स में ड्रिंक्स के साथ खुल के मस्ती होती है और चिपंडेलस ऐसे क्लब में लेडीज के लिए आलमोस्ट फुल मांटी भी होती है और ज्यादा अडवेंचरस के के लिए सी ऍफ़ एन एम् भी अजीब नहीं है।
और मैं इन दोनों को सेलेब्रेशन ऑफ़ फीमेल सेक्सुअलिटी मानती हूँ और इसमें कुछ अजीब या जजमेंटल नहीं होना चाहती। मैं मानती हूँ की फीमेल सेक्सुलिटी उसकी लाइफ साइकिल का एक हिस्सा और वो सब घटनाएं एक तरह से रोड मैप के माइल स्टोन हैं, चाहे पीरियड्स का आना हो, पहली बार ब्रा खरीदना हो या वर्जिनिटी का लॉस या प्रिग्नेंसी या फिर डिलीवरी। इस लिए सेक्सुअलिटी को सहज ढंग से स्वीकार करती है, और उसके मजे भी लेती है लेकिन वह उसके दिमाग में शायद उस तरह से चिपक के नहीं रहता जैसे कभी कभी कुछ पुरुषों के साथ, कहाँ सेक्सुलिटी मन में मष्तिष्क में ज्यादा रहती है.
लेकिन सबसे कठिन है इन बातों को कहानी में गूंथना, और एक एडल्ट फोरम में जहाँ इन्सेस्ट का ज्यादा बोलबाला हो और कठिन और जटिल मल्टीलेयर्ड रचनाएं न तो व्यूज आकृष्ट करती हों न कमेंट और जहाँ फीमेल सेक्सुलिटी पर बात होने के बजाय फैंटेसी पर शायद ज्यादा जोर रहता हो। ऐसे में आप ऐसे पाठक मिलना एक सुखद अनुभूति है।
जल्द ही अगली पोस्ट लेकर हाजिर होउंगी और फिर आप के कमेंट्स का इन्तजार रहेगा।