कोमल जी, आपकी लेखनी का यह अंदाज़ पढ़कर बस एक ही शब्द निकलता है— 'लाजवाब'। आपने जिस तरह से 'जोरू का गुलाम' के इस भाग में उत्तेजना, बनारसी ठसक और जज़्बातों का ताना-बाना बुना है, वह किसी मंझे हुए फिल्म डायरेक्टर के विज़न जैसा महसूस होता है।
एक पाठक के तौर पर, आपकी राइटिंग स्किल्स की इन बारीकियों ने दिल जीत लिया
कोमल जी, आपकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि आप किरदारों को समाज के बनाए 'फिल्टर' में नहीं बांधतीं। अन्नी का वह कश्मीर की कली वाला भोलापन और उसके साथ हुई 'सुबह की खुदाई' का बेबाक वर्णन... यह दिखाता है कि आप औरतों की आपस की बातचीत को कितनी गहराई और सच्चाई से समझती हैं। क्लब में 'कुप्पी चेक' करने का वह माहौल और मिसेज मोइत्रा का वह रौबदार लेकिन अंदर से प्यासा व्यक्तित्व—सुपर्ब ।
एक तरफ क्लब में भांग वाले गुलाब जामुन, ऑरेंज वोदका और कामसूत्र वाली मेहंदी का वो 'सॉफ्ट और ग्लैमरस' नशा है, तो दूसरी तरफ घर के बंद कमरे में उन दो जुड़वां बहनों (बड़ी और छुटकी) का वह 'खतरनाक' खेल। आपने जिस तरह से उन नौवीं क्लास की लड़कियों की 'कच्ची उम्र' की शैतानी और उनके 'जीजू' की मजबूर हालत को लिखा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
मंजू का किरदार आपकी लेखनी की जान है। वह जिस तरह से 'प्रैक्टिकल क्लास' लेती है, महुए की दारू और सरसों के तेल का नुस्खा बताती है, वह कहानी को एक अलग ही 'देसी थ्रिलर' का रंग दे देता है। "झिल्ली फटने पर सफ़ेद चादर पर खून के धब्बे"—इस तरह की छोटी-छोटी डिटेलिंग हैट्स ऑफ
कोमल जी, आपकी कलम में वो 'मिठास' भी है जो अन्नी के गालों पर दिखती है और वो 'तीखापन' भी जो महुए की धार में है। आप जिस तरह से 'मर्यादा' की चूड़ियाँ तोड़कर 'वासना' के घुंघरू बांधती हैं, वह आपकी लेखनी का जादू है। आपने साबित कर दिया कि एक औरत की दबी हुई ख्वाहिशें जब शब्द बनती हैं, तो वो आग लगा देती हैं
अब जब 'जीजू' के हाथ खुल चुके हैं और दोनों 'कबूतरियां' निहत्थी हैं, तो अगले 7 घंटों में जो तबाही मचने वाली है, उसका इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा है। उधर मिसेज मोइत्रा 'ब्राजीलियन वैक्स' और 'स्ट्राबेरी फ्लेवर' के साथ तैयार हैं... भाई, आपने तो हर तरफ से घेराबंदी कर दी है!
आपकी ये 'स्वाति की बूंदें' हमारे जैसे पाठकों की प्यास बुझाने के लिए काफी नहीं हैं, हमें तो अब इस 'फागुन' की बारिश में पूरा भीगना है।
आप बस लिखती रहिये, हम आपकी लेखनी के मुरीद हैं!
(अगला अपडेट—हाथ खुलने के बाद वाला—जल्द दीजियेगा!)