• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Erotica जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

komaalrani

Well-Known Member
25,049
68,806
304
जोरू का गुलाम भाग २६१ पृष्ठ १६४७

मिसेज मोइत्रा की बेटियां घर में,
मिसेज मोइत्रा क्लब में, ---मस्ती नॉनस्टॉप


एक सुपर डुपर १०, हजार शब्दों का अपडेट पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर दें
 
Last edited:

komaalrani

Well-Known Member
25,049
68,806
304
ये जो तीज का मेला लगा है, ये कोई साधारण पार्टी नहीं लगती.. ये तो एक पूरा जंगल है। और आपने इस जंगल के हर पेड़, हर बेल, हर जानवर को बड़ी बारीकी से देखा है। ये औरतें, जो अपने घरों में शायद कभी इतनी आज़ाद नहीं होतीं, यहाँ आकर अपनी सारी लुच्चई और बदमाशी की प्रखरता पर हैं। उनका मसखरापन दिखावा नहीं है.. उनके अस्तित्व का एक बेहद अहम, और दबा हुआ, हिस्सा है।

वो चमची नंबर दो, सुनयना, और उसकी वेलकम कमेटी... मैं समझ गया कि आपने उनके ज़रिए एक पूरा रिवाज गढ़ दिया है। ये तेल-चिकनाई चेक करना, ड्रेस कोड, ये सब दिखने में मज़ाक है, पर इसके नीचे एक बहुत गहरा स्त्री-व्यंग्य है। मर्दों द्वारा थोपे गए पवित्रता और सतीत्व के उन्हीं हथियारों को औरतें आपस में एक दूसरे पर इस्तेमाल कर रही हैं, लेकिन उसे पूरी तरह उलट-पुलट कर। चेक करने का जो तरीका है, वो शर्म को पूरी तरह खत्म कर देता है। ये कहीं न कहीं उनकी अपनी ही कैद की एक शरारती तस्वीर है।

और फिर आपने वो दूसरी तस्वीर रखी, मिसेज मोइत्रा के घर की। जहाँ ये वही औरतें हैं, लेकिन यहाँ वो कातिल हैं, शिकार नहीं। वो अपने दामाद को जिस तरह घेर रही हैं, उसकी हर साँस पर अपना हक जता रही हैं, वो दृश्य बेहद शक्तिशाली है। आपने पूरे क्लब के मेकअप और मेंहदी के कोलाहल के बीच, उस ऊपर वाले कमरे में जो सन्नाटा रचा है, वो कमाल का है। दो लड़कियाँ, जो अपने जीजू को कस के बाँधे हैं, उसके साथ खेल रही हैं। ये उनके अंदर की उस चंचल और खतरनाक जिज्ञासा का जश्न है, जिसे घर में अक्सर दबा दिया जाता है। आपने ये दिखाने की कोशिश की है कि मासूमियत के इस लिबास के नीचे कितनी समझदार और चालाक औरतें पल रही हैं।

एक बात मैं कहूँगा, कभी-कभी इस भीड़ और शोर में, इन बातों की बौछार में, पाठक का दम घुट सकता है। ये बेलगाम होकर बहती है, और कुछ जगहों पर ये एक जैसी हो जाती है। लेकिन ये आपकी खूबी भी है क्योंकि आपने इस क्लब की वैसी ही चकाचौंध और हुड़दंग को ही कहानी का मिज़ाज बना दिया है।

असली कमाल तो ये है कि आपने इस सब कुछ के बीच, सुजाता को बिलकुल शांत खड़ा रखा है। वो ये सब होने दे रही है, और साथ ही उस वीडियो ट्रांसमिशन की तारें खुद जोड़ रही है। बहुत ही बेहतरीन पैंतरा है। असली खेल अभी शुरू हुआ है, और पर्दा जो अब तक सिर्फ कपड़े का था, अब एक कैमरे का हो गया है।


बहुत खूब.. अगले अपडेट का इंतज़ार रहेगा..!!

vakharia
आपकी समीक्षा पढ़ कर इतना अच्छा लगता है कह नहीं सकती। वह लेखनी और कहानी धन्य है जिसे आप का आशीष मिलता है। हाँ कुछ बातें औरतों के बारे में। चाहे गाँव हो या शहर जहाँ सिर्फ औरतें ही होती हैं ऐसे माहौल में औरतें ज्यादा स्वछंद, उन्मुक्त और देह के हर प्रसंग के किस्से खुल के बखानती हैं। कई बार मैंने गाँव के रतजगों में हिस्सेदारी भी की है, जब बारात में महिलाएं लड़कियां नहीं जाती थीं और लाइफ साइकिल की पूरी आवृत्ति होती थी, शादी से लेकर बच्चे के जन्म तक और काफी खुल के रति संबंधो पे बात होती थी, गाने होते थे, लेकिन पुरुष दूर दूर तक नहीं होते थे और उसमे काफी लेयर्स एक साथ होती थीं, जैसे एक रिचुयल जिसे राइट द पैसेज भी कह सकते हैं, कुछ मौज मस्ती कुछ चिढ़ाना और उसमे हर उम्र की हर रिश्ते की औरतें साथ होती थीं, माँ भी बेटी भी, लेकिन कुछ भी भदेश नहीं लगता था। और सबसे बड़ी बात, सुबह होते ही जैसे बिस्तर समेटते हैं वह सब समेत दिया जाता था और सब लोग दिन के काम में लग जाते थे, और एक लेवल पर शादी के कस्टम फर्टिलटी रिचुअल और एग्रीकल्चर से भी जुड़े हैं। मंडप में पांच तोते, लकड़ी के कामदेव के वाहन के रूप में काम की उपस्थिति बताते हैं तो बांस लम्बे जीवन के साथ किसका प्रतीक है, कहने की जरूरत नहीं।

शहरो में क्लब्स में लेडीज ओनली नाइट्स में ड्रिंक्स के साथ खुल के मस्ती होती है और चिपंडेलस ऐसे क्लब में लेडीज के लिए आलमोस्ट फुल मांटी भी होती है और ज्यादा अडवेंचरस के के लिए सी ऍफ़ एन एम् भी अजीब नहीं है।
और मैं इन दोनों को सेलेब्रेशन ऑफ़ फीमेल सेक्सुअलिटी मानती हूँ और इसमें कुछ अजीब या जजमेंटल नहीं होना चाहती। मैं मानती हूँ की फीमेल सेक्सुलिटी उसकी लाइफ साइकिल का एक हिस्सा और वो सब घटनाएं एक तरह से रोड मैप के माइल स्टोन हैं, चाहे पीरियड्स का आना हो, पहली बार ब्रा खरीदना हो या वर्जिनिटी का लॉस या प्रिग्नेंसी या फिर डिलीवरी। इस लिए सेक्सुअलिटी को सहज ढंग से स्वीकार करती है, और उसके मजे भी लेती है लेकिन वह उसके दिमाग में शायद उस तरह से चिपक के नहीं रहता जैसे कभी कभी कुछ पुरुषों के साथ, कहाँ सेक्सुलिटी मन में मष्तिष्क में ज्यादा रहती है.

लेकिन सबसे कठिन है इन बातों को कहानी में गूंथना, और एक एडल्ट फोरम में जहाँ इन्सेस्ट का ज्यादा बोलबाला हो और कठिन और जटिल मल्टीलेयर्ड रचनाएं न तो व्यूज आकृष्ट करती हों न कमेंट और जहाँ फीमेल सेक्सुलिटी पर बात होने के बजाय फैंटेसी पर शायद ज्यादा जोर रहता हो। ऐसे में आप ऐसे पाठक मिलना एक सुखद अनुभूति है।

जल्द ही अगली पोस्ट लेकर हाजिर होउंगी और फिर आप के कमेंट्स का इन्तजार रहेगा।
 

komaalrani

Well-Known Member
25,049
68,806
304
Komaal ji ye jaan kar bada acha laga ki bhagwan ki kripa se aap thik hai,updates ki chinta nahi hai bas yahi dua hai ki aisa accident aapke sath ya kisi ke sath bhi na ho.Take care.
I am back and so will be my stories, but accident endangered my stories more, will tell you in detail.Thanks so much .
 

komaalrani

Well-Known Member
25,049
68,806
304
Komal g Aaj ek mahine se upar ho gaya.
Update jaldi nahi aati ti interest dheere dheere khatam ho jata hai.
Kahani boring lagne lagti hai
soon and it will be a mega update
 

komaalrani

Well-Known Member
25,049
68,806
304

komaalrani

Well-Known Member
25,049
68,806
304
  • Like
Reactions: Sutradhar

komaalrani

Well-Known Member
25,049
68,806
304
  • Like
Reactions: Sutradhar

Mass

Well-Known Member
12,492
26,464
259
Was involved in a bad accident but had recovered and posts will start flowing from today or tomorrow. Things are almost back to normal.
So sorry to hear about your accident...infact I was thinking that you had taken a break since I did not see you/your posts for a very long time.
Glad that things are ok and you have recovered. Pls take care and stay safe!!

komaalrani
 
  • Like
Reactions: komaalrani

Rhonak

New Member
40
82
18
कोमल जी, आपकी लेखनी का यह अंदाज़ पढ़कर बस एक ही शब्द निकलता है— 'लाजवाब'। आपने जिस तरह से 'जोरू का गुलाम' के इस भाग में उत्तेजना, बनारसी ठसक और जज़्बातों का ताना-बाना बुना है, वह किसी मंझे हुए फिल्म डायरेक्टर के विज़न जैसा महसूस होता है।

एक पाठक के तौर पर, आपकी राइटिंग स्किल्स की इन बारीकियों ने दिल जीत लिया

कोमल जी, आपकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि आप किरदारों को समाज के बनाए 'फिल्टर' में नहीं बांधतीं। अन्नी का वह कश्मीर की कली वाला भोलापन और उसके साथ हुई 'सुबह की खुदाई' का बेबाक वर्णन... यह दिखाता है कि आप औरतों की आपस की बातचीत को कितनी गहराई और सच्चाई से समझती हैं। क्लब में 'कुप्पी चेक' करने का वह माहौल और मिसेज मोइत्रा का वह रौबदार लेकिन अंदर से प्यासा व्यक्तित्व—सुपर्ब ।

एक तरफ क्लब में भांग वाले गुलाब जामुन, ऑरेंज वोदका और कामसूत्र वाली मेहंदी का वो 'सॉफ्ट और ग्लैमरस' नशा है, तो दूसरी तरफ घर के बंद कमरे में उन दो जुड़वां बहनों (बड़ी और छुटकी) का वह 'खतरनाक' खेल। आपने जिस तरह से उन नौवीं क्लास की लड़कियों की 'कच्ची उम्र' की शैतानी और उनके 'जीजू' की मजबूर हालत को लिखा है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।

मंजू का किरदार आपकी लेखनी की जान है। वह जिस तरह से 'प्रैक्टिकल क्लास' लेती है, महुए की दारू और सरसों के तेल का नुस्खा बताती है, वह कहानी को एक अलग ही 'देसी थ्रिलर' का रंग दे देता है। "झिल्ली फटने पर सफ़ेद चादर पर खून के धब्बे"—इस तरह की छोटी-छोटी डिटेलिंग हैट्स ऑफ

कोमल जी, आपकी कलम में वो 'मिठास' भी है जो अन्नी के गालों पर दिखती है और वो 'तीखापन' भी जो महुए की धार में है। आप जिस तरह से 'मर्यादा' की चूड़ियाँ तोड़कर 'वासना' के घुंघरू बांधती हैं, वह आपकी लेखनी का जादू है। आपने साबित कर दिया कि एक औरत की दबी हुई ख्वाहिशें जब शब्द बनती हैं, तो वो आग लगा देती हैं

अब जब 'जीजू' के हाथ खुल चुके हैं और दोनों 'कबूतरियां' निहत्थी हैं, तो अगले 7 घंटों में जो तबाही मचने वाली है, उसका इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा है। उधर मिसेज मोइत्रा 'ब्राजीलियन वैक्स' और 'स्ट्राबेरी फ्लेवर' के साथ तैयार हैं... भाई, आपने तो हर तरफ से घेराबंदी कर दी है!

आपकी ये 'स्वाति की बूंदें' हमारे जैसे पाठकों की प्यास बुझाने के लिए काफी नहीं हैं, हमें तो अब इस 'फागुन' की बारिश में पूरा भीगना है।

आप बस लिखती रहिये, हम आपकी लेखनी के मुरीद हैं!

(अगला अपडेट—हाथ खुलने के बाद वाला—जल्द दीजियेगा!)
 
  • Like
Reactions: komaalrani

Rhonak

New Member
40
82
18
Was involved in a bad accident but had recovered and posts will start flowing from today or tomorrow. Things are almost back to normal.
कोमल जी, आपकी दुर्घटना की खबर सुनकर मन सच में घबरा गया था, लेकिन आपकी वापसी की खबर किसी 'मिरेकल' से कम नहीं है , आपकी सेहत सबसे पहले है। आपके 'रससिद्ध पाठक' कहीं नहीं जा रहे, हम सब यहीं आपकी हर 'स्वाति की बूंद' का इंतज़ार कर रहे हैं
 
  • Like
Reactions: komaalrani

Premkumar65

Don't Miss the Opportunity
9,765
10,718
173
जोरू का गुलाम भाग २६०

तीज पार्टी -लेडीज क्लब और खेल शुरू

४२,८१, ८९५
Teej-06591163e747357c1046449a93b2af02.jpg

क्लब में तैयारी



सुजाता इन्हे मिसेज मोइत्रा के यहाँ छोड़कर सवा दस बजे क्लब पहुँच गयी थी, और तय यह हुआ था की तीज पार्टी ठीक ११ बजे शुरू होगी, हाँ मेंबर पहले भी आ सकती हैं, लेकिन ११ बजे के बाद लेट माना जाएगा और पनिशमेंट मिलेगा जो मिसेज मोइत्रा तय करेगीं, और वो ११ बजने में पांच मिनट रहेगा तो मिसेज मोइत्राआ जाएंगी।

सुजाता को याद आ रहा था जब पहली मीटिंग में मिसेज मोइत्रा की प्रजेंस में तीज पार्टी की मीटिंग हुयी थी, तो सीनियर्स ( वोट लेडीज तो ३० के ऊपर हैं और उनके बच्चे हैं ) कितना खुल के मजाक कर रही थीं, यहाँ तक की मिसेज मोइत्रा भी, खुल कर मुट्ठी करने की बात हो रही थी , और एक ने साफ़ साफ कहा था

" लेकिन वैसलीन क्रीम कडुआ तेल लगा के मत आना , ...



चमची नंबर दो ने हड़का के बोला, " आने दीजिए न , जो करना हो कर लें , ... मैं हूँ न वेलकम कमिटी में , सारी छिनारों का पेटीकोट उठा उठा के आते ही चेक करुँगी ,.. जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , अरे जब तक चरचराए परपराए न , चीख पुकार न मचें, ... क्या मज़ा ,... "

Teej-IMG-9907.jpg


और ये मजाक नहीं था।

सच में एक वेलकम कमेटी थी, जिसकी सदर वो चमची नंबर दो थी, सुनयना, और साथ में एक सीनियर, करीब ३५ साल की, और मजाक में सीधे देह के स्तर पर उतरने वाली, दो बच्चे थे, दोनों बोर्डिंग में, माधुरी नाम था उनका और एक बच्ची पार्टी वाली भी, बेला, करीब २५ साल की।

उम्र के हिसाब से तो वो बच्ची पार्टी में भी बड़ी थीं, बच्ची पार्टी में वो लेडीज जिनके बच्चे नहीं थे, और २५-२६ से ज्यादा नहीं।

बेला, बिहार की थीं, गाली देने में चैम्पियन, और शादी हुए तीन साल हो गए थे लेकिन पहली रात ही उसने नाड़ा खोने के पहले पति से पंचवर्षीय योजना ( पहला बच्चा पांच साल बाद, और दो के बाद तीसरा नहीं ) मनवा लिया था। सास बहुत पीछे पड़ीं , " पोता चाहिए, पोता चाहिए " तो उनसे साफ साफ़ बोलीं,

' अबकी जब मेरी पांच दिन की छुट्टी होगी न तो भेज दूंगी आपके बेटे को आपके पास। अभी आप कुडुक तो हुयी नहीं है, मेरी गारंटी, आप का बेटाअसल मरद है, ससुर जी को भूल जाइएगा और पहली रात ही आपको गाभिन कर देगा। गारण्टी मेरी, और मन करे तो मेरी छोटी ननद को भी बोल दीजिये, मैं बोल देंगी उनसे, मेरी बात टालते नहीं है। माँ-बेटी दोनों पे चढ़ जाएंगे। अरे आपकी बेटी भी भले ९ में पढ़ती है लेकिन दो साल से खून उगल रही ही, पक्का मेरा मरद उसे गाभिन कर देगा, तो पोता नहीं तो नाती ही सही। " उसके बाद सास का मुंह बंद हो गया,

9ef37e7dee9928876ce6a5f6ea4f33a6.jpg


तो चमची नंबर दो यानी सुनयना, सीनियर माधुरी और हम लोगो की गोल की बेला, ये तीन लोग थीं वेलकम कमेटी में।

कुल ३० लेडीज आनेवाली थीं, १४ बच्ची पार्टी वाली और मिसेज मोइत्रा को जोड़ के १६ सीनियर पार्टी की। वैसे तो ३५ लेडीज थीं लेकिन पांच -छह कभी सास ससुर की सेवा में, तो कभी, मायके तो कभी बच्चो के चक्कर में गायब रहती थीं। और उन लेडीज के लिए कुछ नियम भी थे और वेलकम कमेटी, वह सब चेक करती, जैसे एक ड्रेस कोड था, सिर्फ साडी ब्लाउज पेटीकोट, और अगर कोई लहंगा पहन के आएगा, लहंगा चोली, चुनरी।
bride-choli-bv.jpg


मतलब साफ़ था कोई ढक्कन ना नीचे ना ऊपर और ये वेलकम कमेटी चेक भी करती, छू के दबा के सहला के।

लेकिन असली खेल दूसरा था,.... चमची नंबर २ ने कहा था, अगर कोई नीचे तेल, चिकनाई, क्रीम कुछ लगा के आया तो, जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , और ये वेलकम कमेटी वालों को मस्ती करने का अच्छा मौका मिल गया था।



पार्टी ११ बजे शुरू होने वाली थी, लेकिन सब लोग टाइम से आ जाएँ इसलिए अनाउंस यह हुआ था जो जल्दी ५ आएँगी, उन्हें ब्यूटी पार्लर वालों की ओर से एक गिफ्ट हैम्पर तो मिलेगा ही, ६ महीने तक पार्लर फ्री, और जो साढ़े दस बजे तक आ जाएंगी उन्हें ब्यूटी पार्लर का कंसेशन भी मिलेगा पूरे ६५ %।


वेलकम कमेटी के अलावा के श्रृंगार कमेटी थी जो लेडीज को ब्यूटी पार्लर और मेंहदी वालियों के पास ले जातीं, और उन से कोर्डिनेट करके टाइम पे काम शुरू हो जाए, ये भी तय करतीं। कुल चार-पांच कमेटियाँ थीं, किसी में दो सदस्य, किसी में तीन सदस्य, कैटरिंग, गेम, इत्यादि।

जब सुजाता सवा दस बजे पहुंची, तो उसी समय चमची नंबर दो भी साथ साथ पहुंची, उनकी वेलकम कमेटी के बाकी लोग बेला और माधुरी पहुँच गए थे। और उसके अलावा भी करीब दस-बारह लेडीज आ गई थीं,नाम लिखवा रही थीं।

ब्यूटी पार्लर के पांच स्टाल सेट हो गए थे, सब पर कॉस्मेटिक्स के अलावा, चार पांच लड़कियां मेकअप के लिए थीं। लक्मे, लोरियल, कलरबार, शुगर के अलावा एक हरबल ब्रांड भी था। सुजाता ने जा जा के हर ब्रांड वाली लड़कियों से, कोर्डिनेटर से बात की। तीन चार लेडीज का तो मेकअप शुरू भी हो गया था। खूब गरमाच थी, औरतें सब एकदम बौरायीं थीं, जो जितनी उमर वाली थीं, वो उतनी ही ज्यादा गरमायी थीं .मजाक खुल के हो रहा था, और जबान से ही नहीं, उँगलियों से भी, कोई चिकोटी काट रही थीं, तो कोई हलके से दबा देती और ये सब उन मेकअपवालियों, मेहन्दी वालियों के सामने और वो भी सब खुल के मजे ले रही थीं।



चमची नंबर दो, सुजाता के साथ मेकअप कार्नर में जा जा के देख रही थी तो कलमे वाली जो एक सीनियर लेडी को रेड लिपस्टिक लगा रही थी, उससे चमची नंबर दो मजाक करते हुए बोलीं,

" हे ऊपर वाले होठ पर तो अपने पसंद की, लगवाने वाली की पसंद की लगाना लेकिन नीचे वाले होंठों पर सबको एक ही रंग, गुलाबी। "
Teej-104722212-110399230719823-1947498686973228579-n.jpg


"एकदम मैम, सबसे आखीर में गुलाबो का ही मेकअप होगा " हंसती हुयी लक्मे बाला बोलीं।

" और वो भी स्ट्राबेरी फ्लेवर्ड वाली, " सुजाता भी उसी रंग में रंग गयी थी, "

" तुम को पसंद है क्या, चल आज तुमसे तो सबसे पहले चटवाउंगी "

जिसका मेकअप हो रहा था, वो सुजाता को चिढ़ाते हुए बोलीं,

लेकिन अभी चमची नंबर २ थी उनके साथ और वो कोई हिसाब नहीं छोड़ती थी। उसने सुजाता की ओर से पलट के जवाब दिया,

" इसकी कुप्पी में तो मरद की मलाई भरी होगी, ...वो भी चटवायेगी ये सोच लो "
lez-pussy-lick-IMG-4081.jpg


अब उन सीनियर का मैनीक्योर हो रहा था, वो भी कन्या प्रेमी थी,


" अरे नेकी और पूछ पूछ, और कुप्पी में मलाई भरी होने के लिए सिर्फ अपना मरद होना जरूरी थोड़ी है है। अपनी वेलकम कमेटी वालो से पूछ लेना,... मेरी भी कुप्पी बजबजा रही है "



नाम उनका लीला था, ३२-३४ की थीं, लेकिन आजकल उनके मर्द ट्रेनिंग पर थे, पिछले पंद्रह दिन से बाहर। साथ में एक सगा देवर रहता था, इंटर में गया था इस साल, मूंछे हलकी हलकी आ रही थी, और सिर्फ वो नहीं टाउनशिप की सब औरतें उस बेचारे को छेड़ती थीं, अब देवर तो देवर और जैसे साली की उमर नहीं देखी जातीं, सिर्फ रिश्ता देखा जाता है बस वही हाल देवर का है।
Teej-622279788-122270120822018102-7385457660988217532-n.jpg


एक बार तो मिसेज साहनी ने उसे साफ़ साफ़ धमकी दे दी थी, " साले, चिकने, या तो तू लेना शुरू कर दे या तेरी ले ली जायेगी" और चमची नंबर १ जो लीला की खास सहेली थीं उन्होंने तो प्लान बता दिया,

" अबे… इस होली में तेरा गैंगरेप होगा, कब तक अपनी नथ बचा के रखेगा ? "



और वैसे भी दस पन्दरह दिन में एक लम्बी छुट्टी होनी थी, जिसमे तीन दिन आफिस बंद रहता था हर साल, एनुअल हॉलिडे और अबकी तय हुआ था की उसी समय हस्बैंड डे मनाया जाएगा, लेकिन हस्बेंड के साथ नहीं, पर च्वायस मर्दो की रहेगी, ब्लाइंड च्वायस।


ये आइडिया इसी लीला का था: सब मर्दों को ब्लाइंड फोल्ड किया जाएगा और डार्क रूम में। सब औरतें अपनी ब्रा उतर के एक बॉक्स में डाल देंगी, और उस के बाद मिसेज मोइत्रा का रोल आएगा, एक एक मरद को उस अँधेरे कमरे में ले जाकर, हाथ पकड़कर बॉक्स में से ब्रा निकालने के लिए , शर्त सिर्फ इतनी ही होगी की अगर वो गलती से अपनी वाली की ब्रा निकालेगा तो फिर सेकेण्ड ट्राई। हाँ मिसेज मोइत्रा ने पहले ही साफ़ कर दिया था, उन्होंने अपना वाला छांट लिया है, अपना मुंहबोला दामाद, कोमल -पति।

Bengali-mm-pz8-8.jpg


तभी वेलकम कमेटी वाली माधुरी सुजाता को ढूंढते आयी,

लेकिन वो कुछ बोलती की लीला, वही सीनियर जिनक मैनीक्योर हो रहा था, उन्होंने उन्हें टोक दिया,

" हे माधुरी, तुम तो वेलकम कमेटी में हो, ये सुजाता की कुप्पी ज़रा ठीक से चेक करना "

और ये मजाक नहीं था।

सच में एक वेलकम कमेटी थी, जिसकी सदर वो चमची नंबर दो थी, सुनयना, और साथ में एक सीनियर, करीब ३५ साल की, और मजाक में सीधे देह के स्तर पर उतरने वाली, दो बच्चे थे, दोनों बोर्डिंग में, माधुरी नाम था उनका और एक बच्ची पार्टी वाली भी, बेला, करीब २५ साल की।


तो चमची नंबर दो यानी सुनयना, सीनियर माधुरी और हम लोगो की गोल की बेला, ये तीन लोग थीं वेलकम कमेटी में।



कुल ३० लेडीज आनेवाली थीं, १४ बच्ची पार्टी वाली और मिसेज मोइत्रा को जोड़ के १६ सीनियर पार्टी की। वैसे तो ३५ लेडीज थीं लेकिन पांच -छह कभी सास ससुर की सेवा में, तो कभी, मायके तो कभी बच्चो के चक्कर में गायब रहती थीं। और उन लेडीज के लिए कुछ नियम भी थे और वेलकम कमेटी, वह सब चेक करती, जैसे एक ड्रेस कोड था, सिर्फ साडी ब्लाउज पेटीकोट, और अगर कोई लहंगा पहन के आएगा, लहंगा चोली, चुनरी। मतलब साफ़ था कोई ढक्कन ना नीचे न ऊपर और ये वेलकम कमेटी चेक भी करती, छू के दबा के सहला के।



Teej-Blouse-ca406448c9b3b31bac92c1845cd3bc83.jpg

लेकिन असली खेल दूसरा था, चमची नंबर २ ने कहा था, अगर कोई नीचे तेल, चिकनाई, क्रीम कुछ लगा के आया तो, जरा भी गीला चिकना दिखा तो वहीं सूखे कपड़े से ,...एकदम सुखा के ही अंदर घुसने दूंगी , और ये वेलकम कमेटी वालों को मस्ती करने का अच्छा मौका मिल गया था।



पार्टी सो ११ बजे शुरू होने वाली थी, लेकिन सब लोग टाइम से आ जाएँ इसलिए अनाउंस यह हुआ था जो जल्दी ५ आएँगी, उन्हें ब्यूटी पार्लर वालों की ओर से एक गिफ्ट हैम्पर तो मिलेगा ही, ६ महीने तक पार्लर फ्री, और जो साढ़े दस बजे तक आ जाएंगी उन्हें ब्यूटी पार्लर का कंसेशन भी मिलेगा पूरे ६५ %।



वेलकम कमेटी के अलावा के श्रृंगार कमेटी थी जो लेडीज को ब्यूटी पार्लर और मेंहदी वालियों के पास ले जातीं, और उन से कोर्डिनेट करके टाइम पे काम शुरू हो जाए, ये भी तय करतीं। कुल चार-पांच कमेटियाँ थीं, किसी में दो सदस्य, किसी में तीन सदस्य, कैटरिंग, गेम, इत्यादि।



जब सुजाता सवा दस बजे पहुंची, तो उसी समय चमची नंबर दो भी साथ साथ पहुंची, उनकी वेलकम कमेटी के बाकी लोग बेला और माधुरी पहुँच गए थे। और उसके अलावा भी करीब दस-बारह लेडीज आ गई थीं,नाम लिखवा रही थीं।



ब्यूटी पार्लर के पांच स्टाल सेट हो गए थे, सब पर कॉस्मेटिक्स के अलावा, चार पांच लड़कियां मेकअप के लिए थीं। लक्मे, लोरियल, कलरबार, शुगर के अलावा एक हरबल ब्रांड भी था। सुजाता ने जा जा के हर ब्रांड वाली लड़कियों से, कोर्डिनेटर से बात की। तीन चार लेडीज का तो मेकअप शुरू भी हो गया था। खूब गचमच थी, औरतें सब एकदम बौरायीं थी, जो जितनी उमर वाली थीं, वो उतनी ही ज्यादा गर्मायी थीं मजाक खुल के हो रहा था, और जबान से ही नहीं, उँगलियों से भी, कोई चिकोटी काट रही थीं, तो कोई हलके से दबा देती और ये सब उन मेकअपवालियों, मेहन्दी वालियों के सामने और वो भी सब खुल के मजे ले रही थीं।



चमची नंबर दो, सुजाता के साथ मेकअप कार्नर में जा जा के देख रही थी तो कलमे वाली जो एक सीनियर लेडी को रेड लिपस्टिक लगा रही थी, उससे चमची नंबर दो मजाक करते हुए बोलीं, " हे ऊपर वाले होठ पर तो अपने पसंद की, लगवाने वाली की पसंद की लगाना लेकिन नीचे वाले होंठों पर सबको एक ही रंग, गुलाबी। "

Teej-IMG-20230606-045554.jpg


"एकदम मैम, सबसे आखीर में गुलाबो का ही मेकअप होगा " हंसती हुयी लक्मे बाला बोलीं।

" और वो भी स्ट्राबेरी फ्लेवर्ड वाली, " सुजाता भी उसी रंग में रंग गयी थी, "

" तुम को पसंद है क्या, चल आज तुमसे तो सबसे पहले चटवाउंगी " जिसका मेकअप हो रहा था, वो सुजाता को चिढ़ाते हुए बोलीं, लेकिन अभी चमची नंबर २ थी उनके साथ और वो कोई हिसाब नहीं छोड़ती थी। उसने सुजाता की ओर से पलट के जवाब दिया,

" इसकी कुप्पी में तो मरद की मलाई भरी होगी, वो भी चटवायेगी ये सोच लो "

अब उन सीनियर का मैनीक्योर हो रहा था, वो भी कन्या प्रेमी थी, " अरे नेकी और पूछ पूछ, और कुप्पी में मलाई भरी होने के लिए सिर्फ अपना मरद होना जरूरी थोड़ी है है। अपनी वेलकम कमेटी वालो से पूछ लेना, मेरी भी कुप्पी बजबजा रही है "



नाम उनका लीला था, ३२-३४ की थीं, लेकिन आजकल उनके मर्द ट्रेनिंग पर थे, पिछले पंद्रह दिन से बाहर। साथ में एक सगा देवर रहता था, इंटर में गया था इस साल, मूंछे हलकी हलकी आ रही थी, और सिर्फ वो नहीं टाउनशिप की सब औरतें उस बेचारे को छेड़ती थीं, अब देवर तो देवर और जैसे साली की उमर नहीं देखी जातीं, सिर्फ रिश्ता देखा जाता है बस वही हाल देवर का है।

4eb671beec9cac1a1d0ab5ed570eb4cb-1.jpg


एक बार तो मिसेज साहनी ने उसे साफ़ साफ़ धमकी दे दी थी, " साले, चिकने, या तो तू लेना शुरू कर दे या तेरी ले ली जायेगी" और चमची नंबर १ जो लीला की खास सहेली थीं उन्होंने तो प्लान बता दिया, " अबे इस होली में तेरा गैंग रेप होगा, कब तक अपनी नथ बचा के रखेगा ? "



और वैसे भी दस पन्दरह दिन में एक लम्बी छुट्टी होनी थी, जिसमे तीन दिन आफिस बंद रहता था हर साल, एनुअल हॉलिडे और अबकी तय हुआ था की उसी समय हस्बैंड डे मनाया जाएगा, लेकिन हस्बेंड के साथ नहीं, पर च्वायस मर्दो की रहेगी, ब्लाइंड च्वायस। ये आइडिया इसी लीला का था: सब मर्दों को ब्लाइंड फोल्ड किया जाएगा और डार्क रूम में। सब औरतें अपनी ब्रा उतर के एक बॉक्स में डाल देंगी, और उस के बाद मिसेज मोइत्रा का रोल आएगा, एक एक मरद को उस अँधेरे कमरे में ले जाकर, हाथ पकड़कर बॉक्स में से ब्रा निकालने के लिए , शर्त सिर्फ इतनी ही होगी की अगर वो गलती से अपनी वाली की ब्रा निकालेगा तो फिर सेकेण्ड ट्राई।

हाँ मिसेज मोइत्रा ने पहले ही साफ़ कर दिया था, उन्होंने अपना वाला छांट लिया है, अपना मुंहबोला दामाद, ...कोमल -पति।
Bengali-MM-th.jpg


तभी वेलकम कमेटी वाली माधुरी सुजाता को ढूंढते आयी, लेकिन वो कुछ बोलती की लीला, वही सीनियर जिनका मैनीक्योर हो रहा था, उन्होंने उन्हें टोक दिया,

" हे माधुरी, तुम तो वेलकम कमेटी में हो, ये सुजाता की कुप्पी ज़रा ठीक से चेक करना "
Very well organised party. Komal ji aap kitne minute details me jati hain.
 
Top