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#27
"सर! जो नंबर अभी आपको रोमेश सर ने दिया है, वो एक अवैध हथियार बेचने वाला आदमी है, जिसकी पिछले तीन दिनों में तान्या से सबसे ज्यादा बार हुई है" इस बार रागिनी ने ये बोलते हुए तान्या की ओर नजर घुमाई तो उसने नजर चुराने का प्रयास किया।
"बताओ तान्या, इस आदमी से किस लिए बात की थी" शर्मा जी ने ही इस वक़्त पूरी बातचीत की कमान सम्भाली हुई थी।
"सर! मैं तो ये कहना चाहूंगा कि इस अजीत नाम के आदमी को ही उठवा लीजिये, वो खुद ही बता देगा कि उसने वो पॉइंट 22 कैलिबर की पिस्टल इसे कितने में बेची थी" इस बार मैने भी तान्या को घेरा।
"भगवान सिंह इस नंबर की लोकेशन चेक करो और ये आदमी जहाँ भी मिले इसे उठाकर लाओ, अब वो ही इस पूरे मामले से पर्दा उठाएगा" शर्मा जी के बोलते ही भगवान सिंह ने उस नंबर को लिया और कमरे से बाहर निकल गया।
भगवान सिंह के जाते ही तान्या बैचेनी से अपना पहलू बदलने लगी। वो बार बार देवप्रिय की ओर देख रही थी, और देवप्रिय उससे अपनी नजरे बचाने की कोशिश कर रहा था।
"तान्या! वो अब तुम्हारे लिए कुछ नही करेगा, उसकी तो खुद गर्दन फंसी हुई है, वो तुम्हे क्या बचाएगा, उसकी तरफ अब उम्मीद भरी नजरों से देखना बंद करो, और जो भी सच्चाई है उसे बयान कर दो, शर्मा जी बडे दयालु इंसान है, वो तुम पर रहम करके बख्स भी सकते है" मैंने सही मौके को तान्या नाम की इस कमजोर कड़ी की पहचान कर ली थी।
" रोमेश सर! मैंने कुछ नही किया, सब किया धरा इसी देव का है, इसी ने देविका को गला घोंट कर मारा था, और मेघना को भी इसी ने गोली मारी थी" तान्या पर मेरा काला जादू चल गया था।
लेकिन तभी उसके साथ खड़ा हुआ देवप्रिय उस पर झपट चुका था।
उसके झपटते ही मैं भी उस पर झपट चुका था, इससे पहले की माहेश्वरी साहब उठकर आते मै उसको कब्ज़े में कर चुका था।
तभी शर्मा जी ने बेल बजाई और एक साथ चार पांच कॉन्स्टेबल को अंदर बुलाया। उन सभी को देवप्रिय को अपने घेरे में लेने का आदेश दे दिया था।
"तान्या! अब तुम्हे घबराने की कोई जरुरत नही है, इसने अगर फिर से ऐसी हरकत की तो उसकी ऐसी हालत कर देंगे कि ये जिंदगी में कभी कुछ करनें के काबिल ही नही रहेगा" शर्मा जी ने तान्या को आश्वासन दिया।
"सर! जिस दिन संध्या का कत्ल हुआ था, उसी दिन ये उस केस की जाँच करने के लिए मेरे रूम पर आया था, क्यो कि संध्या मेरी ही रूममेट थी" ये बोलकर तान्या को एक पल को चुप हुई।
"इन्होंने उस दिन मुझे बहुत बुरी तरह से डराया, यहां तक कि संध्या के कत्ल के केस में मुझे फंसाने की धमकी दी, मैं बहुत बुरी तरह से डर गई थी, इंसान को अगर कोई परेशान करता है तो वो पुलिस के पास जाता है, यहां तो पुलिस वाला ही मुझे डरा धमका रहा था, क्यो कि मैं इतने बड़े शहर में यहां अकेली रहती हूँ, जांच के नाम पर ये मेरा मोबाइल भी अपने साथ ले गया, आज तक वो मोबाइल इसी के पास है, संध्या के मर्डर वाले दिन के बाद से जितने भी काल उस फोन से हुए है, वो सब इसी ने किए है, मै तो किसी भी हथियार बेचने वाले को जानती भी नही, इसने ही मेघना को सबसे पहले गोली मारी थी, उसके बाद इसने देविका को वहां बुलाया था, लेकिन इसने देविका को गोली नही मारी, बल्कि जब वो सोफे पर बैठी थी तो अपने रुमाल से उसका गला घोंटा था, उसके बाद देविका की लाश को उसके बैडरूम में बैड के नीचे सरका दिया, उसके बाद ये मुझे ये थोड़ी देर में आने के लिए बोलकर गया कि वो उस पिस्टल को नाले में फेंक कर अभी आ रहा है, जैसे ही ये बाहर गया, उसके पांच मिनट के बाद ही रोमेश और रागिनी फ्लैट के अंदर आ गए" ये बोलकर तान्या एक बार फिर से चुप हो गई थी।
उसकी बात सुनते ही शर्मा जी ने घूर कर मेरी तरफ देखा। मैने क्षमा प्रार्थी मुद्रा में अपने कान को हाथ लगाया, क्यो की तान्या के बयान ने मेरे झूठ की पोल खोल दी थी।
"फिर रोमेश और रागिनी ने अंदर आकर क्या किया" शर्मा जी की जगह इस बार माहेश्वरी साहब ने पूछा।
"इनके अंदर आते ही मैं समझ गई थी कि देव की जगह कोई और आया है, इसलिए मैं दरवाजे की तरफ वहां से दौड़ी क्यो कि फ्लैट में उस वक़्त दो-दो लाशें पड़ी हुई थी, उन लाशो के चक्कर मे मैं न फंस जाऊं, इसलिए मैंने भागना ठीक समझा, लेकिन रागिनी और रोमेश ने मुझे पकड़ लिया"
एक बार फिर तान्या चुप हुई तो मैने टेबल पर रखा हुआ पानी का गिलास उसकी और बढ़ाया। जिसे लेने में तान्या ने कोई देरी नहीं कि, उसने एक ही सांस में पूरा गिलास खाली किया और मेरी ओर शुक्रिया भरी नजरो से देखा।
"उसके बाद रागिनी मैडम और रोमेश मुझ से वहाँ आने का कारण पूछने लगें, मैं उल्टा सीधा जवाब देकर इन्हे घुमाने लगी, तभी रागिनी उस फ्लैट की तलाशी लेने के लिए देविका के बेडरूम में गई, और वहां तलाशी लेते हुए उनकी नजर बेड के नीचे पड़ते ही उन्होंने आवाज लगाकर रोमेश को बुलाया।
"रोमेश ने उस लाश के बारे में मुझ से पूछा तो मैं एकदम से अंजान बन गई, उसके बाद रोमेश और रागिनी मुझे वहाँ से अपने फ्लैट पर ले आये, वहाँ भी मैं रोमेश और रागिनी को बरगला ही रही थी कि तभी देव वहां पर आ गया, उस समय इसके वहां आने पर इसने खुद को ही एक्सपोज़ कर लिया था" तान्या ने ये बोलकर इस बार देव की तरफ हिक़ारत भरी दृष्टि से देखा।
"उसके बाद की सारी कहानी तो आपको मालूम ही है मालिक साहब" मैंने माहेश्वरी साहब की ओर देखते हुए बोला।
"इस लड़की ने तुम्हे पूरा एक्सपोज़ कर दिया है देवप्रिय, अब तुम ये बताओ कि तुमने मेघना और देविका को क्यो मारा, और ये सारी साजिस किसके इशारे पर तुमने रची थी" शर्मा जी ने कठोर स्वर में देवप्रिय को बोला।
देवप्रिय अपनी नजर झुकाये हुए चुपचाप नीचे की ओर ही देखे जा रहा था, ऐसे वक्त में इंसान सोचता है कि इस वक़्त धरती फट जाए और वो उसमे समा जाये।
लेकिन ये पापी तमन्ना तो धरती ही फटने की कर रहा होगा, लेकिन उसमें समाने की कामना हमारी कर रहा होगा।
"बोल अब! या तुझ से बुलवाने के लिए तेरा थर्ड डिग्री रिमांड शुरू करवाऊँ" शर्मा जी पहली बार कुर्सी से उठकर उसके पास तक गए थे और उसके सिर के बाल पकड़कर उसके चेहरे को ऊपर उठाया था।
"साहब गलती हो गई, इस बार बचा लो, फिर जिंदगी में दोबारा ऐसी गलती नही करूँगा" काफी देर के बाद देवप्रिय के मुंह से कोई बोल फूटा था।
"बेटा तुमने किसी को लात घुसे या थप्पड़ नही मारे है, जो तुम्हें माफ़ कर दूं, तुमने कत्ल किये है, वो भी दो दो कत्ल एक साथ, इसलिए माफी तो तुझे अब देश के राष्ट्रपति के अलावा कोई और दे नही सकता, इसलिए अब तेरी भलाई इसी में है कि तू अपनी रामकहानी आराम से सुना दे, तेरे साथ स्टाफ का होने की वजह से बस एक ही शर्म करूँगा की तू हमारी थर्ड डिग्री से बच जाएगा" शर्मा जी उसे तरीके से समझा रहे थे।
"रोहिणी थाने में तैनाती से पहले मेरी तैनाती महिला जेल में थी, वही मेरी मुलाकात मेघना से हुई थी, मेघना ने ही फिर मेरी जान पहचान देविका से भी करवाई थी, दोनो लडकिया गजब की सुंदर थी सर, जिस वजह से मैं उनके मोहपाश में बंधता चला गया, मेरी मेघना और देविका दोनो से ही अंतरंगता बढ़ती चली गई, उसी दौरान मेघना ने सौम्या और रोमेश के बारे में बताया था, मेघना ने बताया था, की सौम्या हमेशा रोमेश की वजह से बच जाती हैं, और वो दो बार उसे मारने का प्रयास कर चुकी है, तब मैंने उसे विश्वास दिलवाया की इस बार वो अपने इरादो में सफल नही होगी, और इस बार सौम्या को मारने में जरूर सफल होंगे, हमारे बीच मे पूरा सौदा दो करोड़ रु में हुआ था, योजना के हिसाब से मुझे रोहिणी के उस थाने में अपनी पोस्टिंग करवानी थी, जिस थाने में रोमेश का फ्लैट आता हो, मैंने दो महीने पहले जुगाड़ से अपनी पोस्टिंग रोहिणी थाने में करवाली थी। इन दो महीने में ही मेघना और देविका की भी जमानत होकर बाहर आ जाना था, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एक बहुत बड़े वकील को मेरी मार्फ़त सौंपी गई थी"
देवप्रिय सांस लेने के लिये एक पल को रुका, लेकिन उसने तुरंत ही फिर से बोलना शुरू कर दिया था।
"प्लान के मुताबिक देविका को रोमेश के घर मे घुसना था और चाहे रात भर रोमेश के घर में रहना पड़ता, लेकिन उसकी पिस्टल हर हाल में चुराकर लानी थी, जिसमें देविका कामयाब भी हो गई थी, फिर उसी पिस्टल से उसी रात को संध्या को घर से बाहर बुलाकर गोली मार दी, और उसकी लाश को झाड़ियों मे उस इलाके में लाकर डाला, जो मेरे अंडर में आता था, इस पूरे खेल में मेरा काम था, किसी भी तरह से रोमेश को फँसाकर जेल भेजना, रोमेश के जेल भेजते ही फिर हम लोग सौम्या को टारगेट करते, इसके लिए मेघना और देविका ने दोबारा से रोमेश के साथ ही उसके घर मे जाकर उसकी पिस्टल वहां किचन
में प्लांट कर दी, और उसे बरामद भी मैने ही खुद जाकर की थी, हमारा प्लान बिल्कुल ठीक चल रहा था, बस अब मुझे फोरेंसिक रिपॉर्ट का इंतजार था, मुझे पता था की उस रिपोर्ट में क्या आना है, रिपोर्ट आते ही मुझे रोमेश को जेल भेज देना था, लेकिन यहां पर रोमेश की मदद आपने कर दी, रोमेश आपको मेरी नीयत के बारे में समझाने में कामयाब हो गया और मुझे एकाएक उस केस से ही हटवा दिया" ये बोलकर वो फिर से चुप हुआ।
सभी लोग उसकी ओर ही टकटकी लगाये हुए देख रहे थे।
"लेकिन मैंने भगवान सिंह को इस बात के लिए सहमत कर लिया था, की ये सारा किया धरा रोमेश का ही है" मेरी ओर देखकर देवप्रिय कुटिलता से एक फीकी सी मुस्कान अपने चेहरे पर लाया।
"इसी वजह से भगवान सिंह का भी व्यवहार मेरे साथ अचानक से बदल गया था, लेकिन तुम्हारी यही चाल तुम पर भारी पड़ गई, बातो बातो में भगवान सिंह ने तुम्हारी थाने में ही ड्यूटी के दौरान दारू पीने की आदत के बारे में मुझे बता दिया था, जिसके बाद मैंने तुम्हारी दारू पीते हुए की वीडियो बनाई और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दी और उस वीडियो को तुम्हारे कमिश्नर तक मैंने भेज दिया, उसके बाद तो तुम्हे सस्पेंड होने से कोई बचा नही सकता था, इसलिए कल रात को जब तुम मेरे घर मे घुसने की कोशिश कर रहे थें, तब मैंने तुम्हें जानबूझकर नहीं घुसने दिया था, क्यो कि मुझें मालूम था कि तुम मेरा कुछ नही उखाड़ सकते थे, इसलिए ही मैने उसी वक़्त माहेश्वरी साहब को भी फोन करके बुला लिया था" मैंने उसकी कुटिल मुस्कान का जवाब पूरी कुटिलता से दिया था।
रागिनी ने भी मुरीद नजरो से मेरी ओर देखा, क्यो कि इस बात की जानकारी तो रागिनी को भी नही थी।
"मेघना और देविका को मारने की क्या वजह थी" शर्मा जी ने मेरी बात खत्म होते ही पूछा।
"रोमेश को जेल नही भिजवा सकने के कारण उसने डील के दो करोड़ देने से मना कर दिया था, ऊपर से रागिनी की वजह से सौम्या को धीरज बवानिया के हाथो से मरवाने का प्लान भी फेल हो गया था, बल्कि खुद धीरज ही मारा गया था, इतने झमेले में फंसने के बाद भी जब मेघना ने पैसे देने से मना कर दिया तो मेरा दिमाग घूम गया था, बस तभी उन दोनो को मारने का सोच लिया था" देवप्रिय अब कुछ भी बताने से संकोच नही कर रहा था।
"इससे आगे की रब दास्तान मुझ से सुन मेरे जिगर के छल्ले, तेरे इरादो को मैं पहले दिन ही पहचान गया था, जब तुम संध्या के कत्ल की सही से जांच करने की जगह सिर्फ सारी बेटिंग मुझे फ़साने के लिए कर रहा था, इसलिए हमारी एक अंडरकवर एजेंट हर वक़्त तुम्हारे साथ लगी हुई थी, तान्या को हमने ही शर्मा जी के साथ मिलकर तुम्हारे साथ प्लांट किया था, इसलिए तुम्हारे हर कदम की जानकारी हमारे पास रहती थी, अब समझ मे आया कि तू कैसे हमारे जाल में फंसा, आज शर्मा जी भी यहां इत्तेफाक से नही बैठें है, बल्कि तेरे लिए ही खासतौर पर यहां आए है, अब बस एक सवाल का जवाब और चाहिए, कुमार गौरव को किसने मारा था" मैंने सारे रहस्यों पर से पर्दा उठाते हुए पूछा।
"संध्या के कत्ल के वक़्त गौरव देविका के साथ ही था, कल को वो अपना मुंह किस के सामने न खोल दे, इस वजह से देविका और धीरज ने उसे बेहिसाब दारू पिलाकर उसका गला घोंट कर मारा था" मैंने देखा कि ये बात सुनते ही तान्या के चेहरे पर उदासी की काली घटा छा गई थी।
"जिस पॉइंट बाइस कैलिबर की पिस्टल से मेघना को मारा, वो पिस्टल कहाँ छुपाई है" मेरे तरकस में भी अब ये शायद आखिरी सवाल ही बचा था।
"सेक्टर चौबीस के नाले में फेंक दिया था उस पिस्टल को" देवप्रिय ने बेशर्मी से बोला।
"लो साहब! आपका हत्यारा आपके सामने है और बाकी हत्यारे खुद ही आपस मे एक दूसरे के शिकार हो गए" मैने एक हल्की सी मुस्कान के साथ शर्मा जी की ओर देखा।
"ले जाओ इसे, और लॉकअप में डाल दो, कल सुबह इसे कोर्ट में पेश करना है' शर्मा जी ने हिक़ारत भरी निगाहों से उसे देखते हुए बोला।
शर्मा जी का आदेश पाते ही वहां मौजूद कॉन्स्टेबल उसे धकेलते हुए कमरे से बाहर ले गए।
कुछ देर बाद ही उस कमरे में कॉफी का दौर चल रहा था, शर्मा जी एक बार फिर से हम दोनों को मुरीद नजरो से देख रहे थे।
"सुनो ! अब तुम लोगो को शादी कर लेनी चाहिए" तभी शर्मा जी ने मेरी और रागिनी की शादी का शिगूफा छोड़ दिया था।
"लगता है इस दुनिया में मेरी शादी के अलावा और कोई टॉपिक ही नही बचा है" रागिनी ने बेजार स्वर में बोला।
"रागिनी जल्दी से रोमेश सर का हाथ थाम लो, नही तो मैं भी लाइन में लगी हुई हूँ" ये बोलकर तान्या बेबाकी से हँसी। उसकी इस हँसी में सभी ने मिलकर साथ दिया था।
समाप्त__
"सर! जो नंबर अभी आपको रोमेश सर ने दिया है, वो एक अवैध हथियार बेचने वाला आदमी है, जिसकी पिछले तीन दिनों में तान्या से सबसे ज्यादा बार हुई है" इस बार रागिनी ने ये बोलते हुए तान्या की ओर नजर घुमाई तो उसने नजर चुराने का प्रयास किया।
"बताओ तान्या, इस आदमी से किस लिए बात की थी" शर्मा जी ने ही इस वक़्त पूरी बातचीत की कमान सम्भाली हुई थी।
"सर! मैं तो ये कहना चाहूंगा कि इस अजीत नाम के आदमी को ही उठवा लीजिये, वो खुद ही बता देगा कि उसने वो पॉइंट 22 कैलिबर की पिस्टल इसे कितने में बेची थी" इस बार मैने भी तान्या को घेरा।
"भगवान सिंह इस नंबर की लोकेशन चेक करो और ये आदमी जहाँ भी मिले इसे उठाकर लाओ, अब वो ही इस पूरे मामले से पर्दा उठाएगा" शर्मा जी के बोलते ही भगवान सिंह ने उस नंबर को लिया और कमरे से बाहर निकल गया।
भगवान सिंह के जाते ही तान्या बैचेनी से अपना पहलू बदलने लगी। वो बार बार देवप्रिय की ओर देख रही थी, और देवप्रिय उससे अपनी नजरे बचाने की कोशिश कर रहा था।
"तान्या! वो अब तुम्हारे लिए कुछ नही करेगा, उसकी तो खुद गर्दन फंसी हुई है, वो तुम्हे क्या बचाएगा, उसकी तरफ अब उम्मीद भरी नजरों से देखना बंद करो, और जो भी सच्चाई है उसे बयान कर दो, शर्मा जी बडे दयालु इंसान है, वो तुम पर रहम करके बख्स भी सकते है" मैंने सही मौके को तान्या नाम की इस कमजोर कड़ी की पहचान कर ली थी।
" रोमेश सर! मैंने कुछ नही किया, सब किया धरा इसी देव का है, इसी ने देविका को गला घोंट कर मारा था, और मेघना को भी इसी ने गोली मारी थी" तान्या पर मेरा काला जादू चल गया था।
लेकिन तभी उसके साथ खड़ा हुआ देवप्रिय उस पर झपट चुका था।
उसके झपटते ही मैं भी उस पर झपट चुका था, इससे पहले की माहेश्वरी साहब उठकर आते मै उसको कब्ज़े में कर चुका था।
तभी शर्मा जी ने बेल बजाई और एक साथ चार पांच कॉन्स्टेबल को अंदर बुलाया। उन सभी को देवप्रिय को अपने घेरे में लेने का आदेश दे दिया था।
"तान्या! अब तुम्हे घबराने की कोई जरुरत नही है, इसने अगर फिर से ऐसी हरकत की तो उसकी ऐसी हालत कर देंगे कि ये जिंदगी में कभी कुछ करनें के काबिल ही नही रहेगा" शर्मा जी ने तान्या को आश्वासन दिया।
"सर! जिस दिन संध्या का कत्ल हुआ था, उसी दिन ये उस केस की जाँच करने के लिए मेरे रूम पर आया था, क्यो कि संध्या मेरी ही रूममेट थी" ये बोलकर तान्या को एक पल को चुप हुई।
"इन्होंने उस दिन मुझे बहुत बुरी तरह से डराया, यहां तक कि संध्या के कत्ल के केस में मुझे फंसाने की धमकी दी, मैं बहुत बुरी तरह से डर गई थी, इंसान को अगर कोई परेशान करता है तो वो पुलिस के पास जाता है, यहां तो पुलिस वाला ही मुझे डरा धमका रहा था, क्यो कि मैं इतने बड़े शहर में यहां अकेली रहती हूँ, जांच के नाम पर ये मेरा मोबाइल भी अपने साथ ले गया, आज तक वो मोबाइल इसी के पास है, संध्या के मर्डर वाले दिन के बाद से जितने भी काल उस फोन से हुए है, वो सब इसी ने किए है, मै तो किसी भी हथियार बेचने वाले को जानती भी नही, इसने ही मेघना को सबसे पहले गोली मारी थी, उसके बाद इसने देविका को वहां बुलाया था, लेकिन इसने देविका को गोली नही मारी, बल्कि जब वो सोफे पर बैठी थी तो अपने रुमाल से उसका गला घोंटा था, उसके बाद देविका की लाश को उसके बैडरूम में बैड के नीचे सरका दिया, उसके बाद ये मुझे ये थोड़ी देर में आने के लिए बोलकर गया कि वो उस पिस्टल को नाले में फेंक कर अभी आ रहा है, जैसे ही ये बाहर गया, उसके पांच मिनट के बाद ही रोमेश और रागिनी फ्लैट के अंदर आ गए" ये बोलकर तान्या एक बार फिर से चुप हो गई थी।
उसकी बात सुनते ही शर्मा जी ने घूर कर मेरी तरफ देखा। मैने क्षमा प्रार्थी मुद्रा में अपने कान को हाथ लगाया, क्यो की तान्या के बयान ने मेरे झूठ की पोल खोल दी थी।
"फिर रोमेश और रागिनी ने अंदर आकर क्या किया" शर्मा जी की जगह इस बार माहेश्वरी साहब ने पूछा।
"इनके अंदर आते ही मैं समझ गई थी कि देव की जगह कोई और आया है, इसलिए मैं दरवाजे की तरफ वहां से दौड़ी क्यो कि फ्लैट में उस वक़्त दो-दो लाशें पड़ी हुई थी, उन लाशो के चक्कर मे मैं न फंस जाऊं, इसलिए मैंने भागना ठीक समझा, लेकिन रागिनी और रोमेश ने मुझे पकड़ लिया"
एक बार फिर तान्या चुप हुई तो मैने टेबल पर रखा हुआ पानी का गिलास उसकी और बढ़ाया। जिसे लेने में तान्या ने कोई देरी नहीं कि, उसने एक ही सांस में पूरा गिलास खाली किया और मेरी ओर शुक्रिया भरी नजरो से देखा।
"उसके बाद रागिनी मैडम और रोमेश मुझ से वहाँ आने का कारण पूछने लगें, मैं उल्टा सीधा जवाब देकर इन्हे घुमाने लगी, तभी रागिनी उस फ्लैट की तलाशी लेने के लिए देविका के बेडरूम में गई, और वहां तलाशी लेते हुए उनकी नजर बेड के नीचे पड़ते ही उन्होंने आवाज लगाकर रोमेश को बुलाया।
"रोमेश ने उस लाश के बारे में मुझ से पूछा तो मैं एकदम से अंजान बन गई, उसके बाद रोमेश और रागिनी मुझे वहाँ से अपने फ्लैट पर ले आये, वहाँ भी मैं रोमेश और रागिनी को बरगला ही रही थी कि तभी देव वहां पर आ गया, उस समय इसके वहां आने पर इसने खुद को ही एक्सपोज़ कर लिया था" तान्या ने ये बोलकर इस बार देव की तरफ हिक़ारत भरी दृष्टि से देखा।
"उसके बाद की सारी कहानी तो आपको मालूम ही है मालिक साहब" मैंने माहेश्वरी साहब की ओर देखते हुए बोला।
"इस लड़की ने तुम्हे पूरा एक्सपोज़ कर दिया है देवप्रिय, अब तुम ये बताओ कि तुमने मेघना और देविका को क्यो मारा, और ये सारी साजिस किसके इशारे पर तुमने रची थी" शर्मा जी ने कठोर स्वर में देवप्रिय को बोला।
देवप्रिय अपनी नजर झुकाये हुए चुपचाप नीचे की ओर ही देखे जा रहा था, ऐसे वक्त में इंसान सोचता है कि इस वक़्त धरती फट जाए और वो उसमे समा जाये।
लेकिन ये पापी तमन्ना तो धरती ही फटने की कर रहा होगा, लेकिन उसमें समाने की कामना हमारी कर रहा होगा।
"बोल अब! या तुझ से बुलवाने के लिए तेरा थर्ड डिग्री रिमांड शुरू करवाऊँ" शर्मा जी पहली बार कुर्सी से उठकर उसके पास तक गए थे और उसके सिर के बाल पकड़कर उसके चेहरे को ऊपर उठाया था।
"साहब गलती हो गई, इस बार बचा लो, फिर जिंदगी में दोबारा ऐसी गलती नही करूँगा" काफी देर के बाद देवप्रिय के मुंह से कोई बोल फूटा था।
"बेटा तुमने किसी को लात घुसे या थप्पड़ नही मारे है, जो तुम्हें माफ़ कर दूं, तुमने कत्ल किये है, वो भी दो दो कत्ल एक साथ, इसलिए माफी तो तुझे अब देश के राष्ट्रपति के अलावा कोई और दे नही सकता, इसलिए अब तेरी भलाई इसी में है कि तू अपनी रामकहानी आराम से सुना दे, तेरे साथ स्टाफ का होने की वजह से बस एक ही शर्म करूँगा की तू हमारी थर्ड डिग्री से बच जाएगा" शर्मा जी उसे तरीके से समझा रहे थे।
"रोहिणी थाने में तैनाती से पहले मेरी तैनाती महिला जेल में थी, वही मेरी मुलाकात मेघना से हुई थी, मेघना ने ही फिर मेरी जान पहचान देविका से भी करवाई थी, दोनो लडकिया गजब की सुंदर थी सर, जिस वजह से मैं उनके मोहपाश में बंधता चला गया, मेरी मेघना और देविका दोनो से ही अंतरंगता बढ़ती चली गई, उसी दौरान मेघना ने सौम्या और रोमेश के बारे में बताया था, मेघना ने बताया था, की सौम्या हमेशा रोमेश की वजह से बच जाती हैं, और वो दो बार उसे मारने का प्रयास कर चुकी है, तब मैंने उसे विश्वास दिलवाया की इस बार वो अपने इरादो में सफल नही होगी, और इस बार सौम्या को मारने में जरूर सफल होंगे, हमारे बीच मे पूरा सौदा दो करोड़ रु में हुआ था, योजना के हिसाब से मुझे रोहिणी के उस थाने में अपनी पोस्टिंग करवानी थी, जिस थाने में रोमेश का फ्लैट आता हो, मैंने दो महीने पहले जुगाड़ से अपनी पोस्टिंग रोहिणी थाने में करवाली थी। इन दो महीने में ही मेघना और देविका की भी जमानत होकर बाहर आ जाना था, जिसकी पूरी जिम्मेदारी एक बहुत बड़े वकील को मेरी मार्फ़त सौंपी गई थी"
देवप्रिय सांस लेने के लिये एक पल को रुका, लेकिन उसने तुरंत ही फिर से बोलना शुरू कर दिया था।
"प्लान के मुताबिक देविका को रोमेश के घर मे घुसना था और चाहे रात भर रोमेश के घर में रहना पड़ता, लेकिन उसकी पिस्टल हर हाल में चुराकर लानी थी, जिसमें देविका कामयाब भी हो गई थी, फिर उसी पिस्टल से उसी रात को संध्या को घर से बाहर बुलाकर गोली मार दी, और उसकी लाश को झाड़ियों मे उस इलाके में लाकर डाला, जो मेरे अंडर में आता था, इस पूरे खेल में मेरा काम था, किसी भी तरह से रोमेश को फँसाकर जेल भेजना, रोमेश के जेल भेजते ही फिर हम लोग सौम्या को टारगेट करते, इसके लिए मेघना और देविका ने दोबारा से रोमेश के साथ ही उसके घर मे जाकर उसकी पिस्टल वहां किचन
में प्लांट कर दी, और उसे बरामद भी मैने ही खुद जाकर की थी, हमारा प्लान बिल्कुल ठीक चल रहा था, बस अब मुझे फोरेंसिक रिपॉर्ट का इंतजार था, मुझे पता था की उस रिपोर्ट में क्या आना है, रिपोर्ट आते ही मुझे रोमेश को जेल भेज देना था, लेकिन यहां पर रोमेश की मदद आपने कर दी, रोमेश आपको मेरी नीयत के बारे में समझाने में कामयाब हो गया और मुझे एकाएक उस केस से ही हटवा दिया" ये बोलकर वो फिर से चुप हुआ।
सभी लोग उसकी ओर ही टकटकी लगाये हुए देख रहे थे।
"लेकिन मैंने भगवान सिंह को इस बात के लिए सहमत कर लिया था, की ये सारा किया धरा रोमेश का ही है" मेरी ओर देखकर देवप्रिय कुटिलता से एक फीकी सी मुस्कान अपने चेहरे पर लाया।
"इसी वजह से भगवान सिंह का भी व्यवहार मेरे साथ अचानक से बदल गया था, लेकिन तुम्हारी यही चाल तुम पर भारी पड़ गई, बातो बातो में भगवान सिंह ने तुम्हारी थाने में ही ड्यूटी के दौरान दारू पीने की आदत के बारे में मुझे बता दिया था, जिसके बाद मैंने तुम्हारी दारू पीते हुए की वीडियो बनाई और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दी और उस वीडियो को तुम्हारे कमिश्नर तक मैंने भेज दिया, उसके बाद तो तुम्हे सस्पेंड होने से कोई बचा नही सकता था, इसलिए कल रात को जब तुम मेरे घर मे घुसने की कोशिश कर रहे थें, तब मैंने तुम्हें जानबूझकर नहीं घुसने दिया था, क्यो कि मुझें मालूम था कि तुम मेरा कुछ नही उखाड़ सकते थे, इसलिए ही मैने उसी वक़्त माहेश्वरी साहब को भी फोन करके बुला लिया था" मैंने उसकी कुटिल मुस्कान का जवाब पूरी कुटिलता से दिया था।
रागिनी ने भी मुरीद नजरो से मेरी ओर देखा, क्यो कि इस बात की जानकारी तो रागिनी को भी नही थी।
"मेघना और देविका को मारने की क्या वजह थी" शर्मा जी ने मेरी बात खत्म होते ही पूछा।
"रोमेश को जेल नही भिजवा सकने के कारण उसने डील के दो करोड़ देने से मना कर दिया था, ऊपर से रागिनी की वजह से सौम्या को धीरज बवानिया के हाथो से मरवाने का प्लान भी फेल हो गया था, बल्कि खुद धीरज ही मारा गया था, इतने झमेले में फंसने के बाद भी जब मेघना ने पैसे देने से मना कर दिया तो मेरा दिमाग घूम गया था, बस तभी उन दोनो को मारने का सोच लिया था" देवप्रिय अब कुछ भी बताने से संकोच नही कर रहा था।
"इससे आगे की रब दास्तान मुझ से सुन मेरे जिगर के छल्ले, तेरे इरादो को मैं पहले दिन ही पहचान गया था, जब तुम संध्या के कत्ल की सही से जांच करने की जगह सिर्फ सारी बेटिंग मुझे फ़साने के लिए कर रहा था, इसलिए हमारी एक अंडरकवर एजेंट हर वक़्त तुम्हारे साथ लगी हुई थी, तान्या को हमने ही शर्मा जी के साथ मिलकर तुम्हारे साथ प्लांट किया था, इसलिए तुम्हारे हर कदम की जानकारी हमारे पास रहती थी, अब समझ मे आया कि तू कैसे हमारे जाल में फंसा, आज शर्मा जी भी यहां इत्तेफाक से नही बैठें है, बल्कि तेरे लिए ही खासतौर पर यहां आए है, अब बस एक सवाल का जवाब और चाहिए, कुमार गौरव को किसने मारा था" मैंने सारे रहस्यों पर से पर्दा उठाते हुए पूछा।
"संध्या के कत्ल के वक़्त गौरव देविका के साथ ही था, कल को वो अपना मुंह किस के सामने न खोल दे, इस वजह से देविका और धीरज ने उसे बेहिसाब दारू पिलाकर उसका गला घोंट कर मारा था" मैंने देखा कि ये बात सुनते ही तान्या के चेहरे पर उदासी की काली घटा छा गई थी।
"जिस पॉइंट बाइस कैलिबर की पिस्टल से मेघना को मारा, वो पिस्टल कहाँ छुपाई है" मेरे तरकस में भी अब ये शायद आखिरी सवाल ही बचा था।
"सेक्टर चौबीस के नाले में फेंक दिया था उस पिस्टल को" देवप्रिय ने बेशर्मी से बोला।
"लो साहब! आपका हत्यारा आपके सामने है और बाकी हत्यारे खुद ही आपस मे एक दूसरे के शिकार हो गए" मैने एक हल्की सी मुस्कान के साथ शर्मा जी की ओर देखा।
"ले जाओ इसे, और लॉकअप में डाल दो, कल सुबह इसे कोर्ट में पेश करना है' शर्मा जी ने हिक़ारत भरी निगाहों से उसे देखते हुए बोला।
शर्मा जी का आदेश पाते ही वहां मौजूद कॉन्स्टेबल उसे धकेलते हुए कमरे से बाहर ले गए।
कुछ देर बाद ही उस कमरे में कॉफी का दौर चल रहा था, शर्मा जी एक बार फिर से हम दोनों को मुरीद नजरो से देख रहे थे।
"सुनो ! अब तुम लोगो को शादी कर लेनी चाहिए" तभी शर्मा जी ने मेरी और रागिनी की शादी का शिगूफा छोड़ दिया था।
"लगता है इस दुनिया में मेरी शादी के अलावा और कोई टॉपिक ही नही बचा है" रागिनी ने बेजार स्वर में बोला।
"रागिनी जल्दी से रोमेश सर का हाथ थाम लो, नही तो मैं भी लाइन में लगी हुई हूँ" ये बोलकर तान्या बेबाकी से हँसी। उसकी इस हँसी में सभी ने मिलकर साथ दिया था।
समाप्त__

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Maamle ko gambheerta se le to raha hai but lawda aisa feelich nahi ho raha. Ye bhi lagta hai ki wo killer ke kareeb hai but apan jaanta hai ki usse pahle apan ki ragini darling pahuchegi killer tak aur fir uske pichhwade me de laat de laat
Hatya aath ghante pahle hui hai, matlab ragini and romesh ke waha pahuchne se pahle hi use tapka diya gaya tha..but sawaal hai ki tanya waha ruki kyo thi?? Kya devpriya ke aane ka wait kar rahi thi...taaki laasho ko thikane lagaya ja sake?? 



Khair dekhte hain iske dwara call details milne par kya pata chalta hai... 

