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intezaar rahega....Agla aur Antim Update aaj raat ya kal subah
WaitingAgla aur Antim Update aaj raat ya kal subah
Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....#26
थाने में हमारा ही बेसब्री से इंतजार हो रहा था। हम पर नजर पड़ते ही भगवान सिंह ने हमे कुर्सी पर बैठने का इशारा किया।
"कहाँ रह गए थे रोमेश बाबू, कब से तुम्हारा इंतजा र कर रहे है"भगवान सिंह ने शिकायती लहजें में बोला।
"सुबह के अत्यंत आवश्यक कार्यो का निष्पादन करने के लिए अपने घर गए थे जनाब, आज पुरी रात जागकर आपके मुजरिम पकड़े है, अभी कुछ देर में इस पूरी साजिश से भी पर्दा उठा देगे" मैने विश्वास भरे लहजे में बोला।
"इलाके में चार चार मर्डर सिर्फ हफ्ते भर में हो गए है, इसलिए एसी पी शर्मा जी खुद आ रहे है, उनके सामने ही अब सब राज के पर्दे उठेंगे" भगवान सिंह ने मेरी ओर देखकर बोला।
भगवान सिंह ने जो खबर मुझें दी थी, वो मेरे लिए ज्यादा सकूं भरी थी, क्यो कि शर्मा जी के सामने मै अपनी बात को बिना रोकटोक के और पूरे दमखम के रख सकता था। लेकिन शर्मा जी ने आते आते दोपहर के दो बजा दिये थे।
"माफ करना! किसी अर्जेंट काम से हैडक्वार्टर जाना पड़ गया था, इस वजह से आने में देर हो गई थी। इस वक़्त हम सभी लोग एसएचओ मा हेश्वरी जी के रूम में बैठें हुए थे।
शर्मा जी ने आते ही सबसे देरी से आने के लिए क्षमा मांगी थी। मैने रागिनी को अभी बाहर भेजा हुआ था, रुपेश ने दोपहर तक काल डिटेल देने का वादा किया हुआ था।
" रोमेश! तुम अपनी हरकतों से कब बाज आओगे, इस बार फिर तुम मकतूल के घर मे उसका ताला खोलकर घुसे थे" शर्मा जी को शायद यहाँ की रात की पूरी रिपोर्ट दी जा चुकी थी।
"जहाँपनाह! मै तो अपनी नींद हराम करके वहां उसके फ्लैट पर नजर रखने के लिए गया था, क्यो कि वे दोनो मोहतरमा दो दिन से गायब थी, हम लोग बाहर से ही उस फ्लैट की निगरानी कर रहे थे, की हमे उस फ़्लैट से एक लड़की निकलती हुईं दिखाई दी, इतनी रात को उस लड़की को उस बन्द पड़े हुए फ्लैट से बाहर निकलते हुए देखकर हमने उस लड़की को दबोचा तो वो देविका की पुरानी रूममेट निकली, फिर हम उसे ये देखने के लिए फ्लैट में वापस लेकर गये की ये क्या गड़बड़ करके फ्लैट से निकली है" मै पहले से रागिनी की सुझाई हुई कहानी को रट चुका था।
"फिर जब तुमने फ्लैट में लाश को देख लिया था, तुमने उसी समय पुलिस को सूचना क्यो नही दी" इस बार भगवान सिंह बीच मे ही टपक पड़ा था।
"जनाब अगर उस वक़्त मैं पुलिस को बुलाता तो आपके देवप्रिय बाबू सामने नही आते, जिन पर मुझे पहले से ही शक था कि वो बन्दा भी इन कातिलों की टोली से मिला हुआ था, मैं लड़की को वहां से अपने घर ले गया तो, देवप्रिय के मन में यही उथलपुथल चलती रही कि मैं पता नही तान्या से क्या क्या उगलवा रहा होऊंगा, इसी वजह से देवप्रिय सस्पेंड होने के बावजूद दौड़ता हुआ मेरे घर पहुंचा, और झूठी किडनैप काल की कहानी सुनाकर तान्या को वहां से जबर्दस्ती ले जाने का प्रयास करने लगा" मैने इस बार शर्मा जी
की ओर देखते हुए जवाब दिया।
"उसके बाद क्या किया तुमने" शर्मा जी मुझें अपनी बात कहने का पूरा मौका दे रहे थे।
"जैसे ही देवप्रिय सामने आया, मैने उसी वक़्त माहेश्वरी साहब को पूरी बात बताई, साहब ने मुझे बताया कि देवप्रिय बाबू तो दो दिन पहले ही सस्पेंड हो चुके है, उसके बाद तो मेरे सामने पूरी कहानी शीशे की तरह साफ हो चुकी थी" मैंने बताया।
"जब तुम उस लड़की को पहली बार उस फ्लैट में दोबारा लेकर गए थे, तब तुमने दूसरी लड़की की लाश नही देखी" शर्मा जी ने फिर से पूछा।
"सच बताऊं सर! मैं उस वक्त उस लाश को वहां देखकर बहुत घबरा गया था, और मैं ये भी नही चाहता था कि तान्या हमारे पास से भाग जाए, इसलिए उस वक़्त दिमाग मे यही आया कि पहले तान्या को यहां से कहीं और लेकर चलो, तान्या को हमारे साथ देखकर तान्या के साथी का सामने आना अवश्यम्भावी था, और वैसा ही हुआ भी" मैंने अपनी वाकपटुता का परिचय दिया।
"ये बात कुछ हजम नही हो रही है कि तुम और लाश देखकर डर गए" शर्मा जी मेरी रग रग से वाकिफ थे, मैं जानता था कि शर्मा जी को मेरी उस कहानी पर भी विश्वास नही हुआ होगा, जो मैने तान्या को वापस फ्लैट में ले जाने के बारे में सुनाई थी।
"सर! लाश से तो मैं कम घबराया था, लेकिन इस बात से ज्यादा घबराया था कि अगर लाश के साथ मैं यहां पर पुलिस को मिला तो, इस बार पुलिस मेरा रिमांड लिए बिना नही छोड़ेगी" मैंने सच्चाई बताई।
"अब आये न तुम लाइन पर, अब इस बात से तो इत्तेफाक करोगे न कि जब इस केस में तान्या और देवप्रिय से पूछताछ जितनी जरूरी है, उतनी ही तुमसे भी पूछताछ जरूरी है" शर्मा जी ने मेरी उम्मीदों के बिल्कुल उलट बात की थी।
"सर! इस गरीब पर ये अत्याचार किस लिये" मैने हैरानी से शर्मा जी की ओर देखते हुए बोला।
"क्यो कि इतनी देर से तुम सिर्फ बातें कर रहे हो, कोई सबूत नही पेश कर रहे हो, न अपने बचाव में और न उन लोगो के अपराधी होने का" शर्मा जी ने नाराज स्वर में बोला।
तभी रागिनी ने कमरे में कदम रखा।
"रागिनी मैडम आप कहाँ लापता थी, आपके गुरूदेव किसी दिन आपकी भी जेलयात्रा करवा देंगे" शर्मा जी आज पता नही किस मूड में आये थे।
"सर! ऐसे कर्म न तो मैं करती हूँ और न गुरु करते है, केस की इन्वेस्टिगेशन में थोड़ी बहुत जो कानून से इतर जाकर हमसे गलतियां होती है, उसमे भी कही न कही सिर्फ कानून की मदद करने की भावना ही छुपी होती है, जिन्हें आप जैसे दयालु अफसर बड़ा दिल रखते हुए माफ भी कर देते है" रागिनी की बात सुनकर शर्मा जी के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान ख़िल उठी थी।
"रोमेश बाबू! गुरु गुड़ रह गया और शागिर्द शक्कर हो गई है" शर्मा जी ने उसी गहरी मुस्कान के साथ बोला। तभी रागिनी ने मेरे कान में कुछ आकर बोला।
"सर! अब आप तान्या और देवप्रिय को भी यही बुला लीजिये, और उससे पहले इस आदमी को फोन करके यहाँ बुलवा लीजिये या इसे इसके ठिकाने से इसे उठवा लीजिये" मैने एक नंबर टेबल पर शर्मा जी के सामने पड़े एक नोटपैड पर एक नंबर लिखते हुए बोला।
"ये कौन है" शर्मा जी के साथ साथ इस बार माहेश्वरी साहब के मुंह से भी निकला।
"ये वो शख्स है जिसके साथ पिछले तीन दिनों में तान्या ने सबसे ज्यादा बात की, हथियारो की अवैध सप्लाई करता है, जिस पॉइंट 22 कैलिबर की पिस्टल से मेघना के गले मे गोली मारी गई है, वो पिस्टल इसी शख्स से तान्या ने खरीदी थी" मेरे इस बात से वहां एकबारगी तो सन्नाटा छा गया था।
"आप तान्या से इस आदमी का नाम लेकर पूछिये, ये मुकर नही सकती है" इस बार रागिनी ने जोर देकर बोला।
"भगवान सिंह! अब ले आओ उन दोनों को, अब उनसे पूछताछ करने का समय आ गया है" शर्मा जी ने भगवान सिंह को बोला।
भगवान सिंह आदेश मिलते ही तुरंत कमरे से बाहर निकल गया। दो तीन मिनट के अंतराल में ही वे दोनो भगवान सिंह के साथ कमरे में प्रवेश कर चुके थे।
"मेघना को जिस पिस्टल से तुमने गोली मारी थी, वो पिस्टल तुमने कहाँ से खरी दी थी" शर्मा जी ने बिना कि सी भूमिका के सीधा सवाल पूछकर तान्या के चेहरे पर अपनी नजर जमा दी थी।
"जवाब दो" कोई जवाब न पाकर शर्मा जी ने इस बार हल्के से गुस्से भरे स्वर में पूछा।
"सर! मैंने किसी को कोई गोली नही मारी, मुझे तो पिस्टल चलानी भी नही आती है" तान्या को अब तक सम्हलने का मौका मिल गया था।
"मतलब तुम सिर्फ गला दबा सकती हो, गोली नही मार सकती हो" इस बार मैंने तान्या को घेरा।
"तू क्यो हीरो बन रहा है भाई, साहब पूछताछ कर रहे है न, तो उन्हें ही पूछताछ करने दे"देवप्रिय मेरे सवाल से एकदम भड़कते हुए बोला।
"अगर दोबारा तेरी बिना पूछे आवाज सुनाई दी, तो मुझ से बुरा कोई नही होगा देव" शर्मा जी ने उसे तुरंत डांट लगाते हुए बोला।
"सर! ये सब इसी का किया धरा है, इसने अपनी क्लाइंट के रास्ते का कांटा हमेशा के लिए निकालने के लिए ही मेघना को गोली मार दी है" देवप्रिय अभी भी बोलने से बाज नही आ रहा था।
"कोई सबूत है तुम्हारे पास की ये सब रोमेश का किया धरा है, सबूत दो मुझे, अभी इसे जेल भिजवाता हूँ" शर्मा जी ने भड़कते हुए कहा।
"साहब मेघना और देविका की मौत का सबसे ज्यादा फायदा सौम्या को हुआ है" देवप्रिय बिल्कुल वही सोच रहा था, जो सुबह हम लोग भी सोच रहे थे।
"कैसा फायदा, वो तो खुद अरबपति है, और ये दोनो लड़कियां तो खुद उसके यहाँ नौकरियां करती थी, तो जाहिर है कि इनके पास इतनी दौलत तो होगी नही की उन्होंने उस सारी दौलत को सौम्या के नाम कर दिया हो, और फिर सौम्या ने उस दौलत को जल्दी से जल्दी अपने नाम करवाने के लिए इन दोनों को मरवा दिया हो, मैं उस पूरी फैमिली को पिछले तीन सालों से जानता हूँ, इसलिए कुछ भी बोलने से पहले अच्छी तरह से सोच समझ लो" शर्मा जी देवप्रिय पर बुरी तरह से भड़क चुके थे।
"नही सर! मैं दौलत के बारे में बात नही कर रहा हूँ" देवप्रिय हड़बड़ा सा गया था।
"फिर किस बारे में बात कर रहे हो" इस बार शर्मा जी नम्र स्वर में बोले।
"सर! मेघना ने सौम्या को मारने की तीन बार प्लानिंग की थी, हर बार रोमेश ने उसको बचा लिया, इस बार अपने सिर के ऊपर लटकती हुई तलवार को हमेशा के लिए ही हटा दिया" देवप्रिय इसी बात को लेकर सुबह मुझ पर इल्जाम लगा चुका था।
"तुम ये कहना चाहते हो कि उस तलवार को हटाने की सुपारी सौम्या ने रोमेश को दी थी" शर्मा जी ने मुस्कराकर पूछा।
"जी जनाब! यही हकीकत है" देवप्रिय ने विश्वासपूर्वक बोला।
"लेकिन सौम्या को इस तरह से मरवाने की जरूरत क्या थी, अगर वे फिर से कोई हमला सौम्या पर करती तो क़ानून भी अपनी आत्मरक्षा का अधिकार सौम्या को देता है, सौम्या के साथ उसके निजी हथियारबन्द सुरक्षा गार्ड भी हर वक़्त साथ होते है, वो उनसे गोली मरवा देती" शर्मा जी ने कायदे की बात बोली थी।
देवप्रिय ने अजीब सी नजरो से शर्मा जी की ओर देखा।
जारी रहेगा_____![]()
Bhut hi badhiya update Bhai#26
थाने में हमारा ही बेसब्री से इंतजार हो रहा था। हम पर नजर पड़ते ही भगवान सिंह ने हमे कुर्सी पर बैठने का इशारा किया।
"कहाँ रह गए थे रोमेश बाबू, कब से तुम्हारा इंतजा र कर रहे है"भगवान सिंह ने शिकायती लहजें में बोला।
"सुबह के अत्यंत आवश्यक कार्यो का निष्पादन करने के लिए अपने घर गए थे जनाब, आज पुरी रात जागकर आपके मुजरिम पकड़े है, अभी कुछ देर में इस पूरी साजिश से भी पर्दा उठा देगे" मैने विश्वास भरे लहजे में बोला।
"इलाके में चार चार मर्डर सिर्फ हफ्ते भर में हो गए है, इसलिए एसी पी शर्मा जी खुद आ रहे है, उनके सामने ही अब सब राज के पर्दे उठेंगे" भगवान सिंह ने मेरी ओर देखकर बोला।
भगवान सिंह ने जो खबर मुझें दी थी, वो मेरे लिए ज्यादा सकूं भरी थी, क्यो कि शर्मा जी के सामने मै अपनी बात को बिना रोकटोक के और पूरे दमखम के रख सकता था। लेकिन शर्मा जी ने आते आते दोपहर के दो बजा दिये थे।
"माफ करना! किसी अर्जेंट काम से हैडक्वार्टर जाना पड़ गया था, इस वजह से आने में देर हो गई थी। इस वक़्त हम सभी लोग एसएचओ मा हेश्वरी जी के रूम में बैठें हुए थे।
शर्मा जी ने आते ही सबसे देरी से आने के लिए क्षमा मांगी थी। मैने रागिनी को अभी बाहर भेजा हुआ था, रुपेश ने दोपहर तक काल डिटेल देने का वादा किया हुआ था।
" रोमेश! तुम अपनी हरकतों से कब बाज आओगे, इस बार फिर तुम मकतूल के घर मे उसका ताला खोलकर घुसे थे" शर्मा जी को शायद यहाँ की रात की पूरी रिपोर्ट दी जा चुकी थी।
"जहाँपनाह! मै तो अपनी नींद हराम करके वहां उसके फ्लैट पर नजर रखने के लिए गया था, क्यो कि वे दोनो मोहतरमा दो दिन से गायब थी, हम लोग बाहर से ही उस फ्लैट की निगरानी कर रहे थे, की हमे उस फ़्लैट से एक लड़की निकलती हुईं दिखाई दी, इतनी रात को उस लड़की को उस बन्द पड़े हुए फ्लैट से बाहर निकलते हुए देखकर हमने उस लड़की को दबोचा तो वो देविका की पुरानी रूममेट निकली, फिर हम उसे ये देखने के लिए फ्लैट में वापस लेकर गये की ये क्या गड़बड़ करके फ्लैट से निकली है" मै पहले से रागिनी की सुझाई हुई कहानी को रट चुका था।
"फिर जब तुमने फ्लैट में लाश को देख लिया था, तुमने उसी समय पुलिस को सूचना क्यो नही दी" इस बार भगवान सिंह बीच मे ही टपक पड़ा था।
"जनाब अगर उस वक़्त मैं पुलिस को बुलाता तो आपके देवप्रिय बाबू सामने नही आते, जिन पर मुझे पहले से ही शक था कि वो बन्दा भी इन कातिलों की टोली से मिला हुआ था, मैं लड़की को वहां से अपने घर ले गया तो, देवप्रिय के मन में यही उथलपुथल चलती रही कि मैं पता नही तान्या से क्या क्या उगलवा रहा होऊंगा, इसी वजह से देवप्रिय सस्पेंड होने के बावजूद दौड़ता हुआ मेरे घर पहुंचा, और झूठी किडनैप काल की कहानी सुनाकर तान्या को वहां से जबर्दस्ती ले जाने का प्रयास करने लगा" मैने इस बार शर्मा जी
की ओर देखते हुए जवाब दिया।
"उसके बाद क्या किया तुमने" शर्मा जी मुझें अपनी बात कहने का पूरा मौका दे रहे थे।
"जैसे ही देवप्रिय सामने आया, मैने उसी वक़्त माहेश्वरी साहब को पूरी बात बताई, साहब ने मुझे बताया कि देवप्रिय बाबू तो दो दिन पहले ही सस्पेंड हो चुके है, उसके बाद तो मेरे सामने पूरी कहानी शीशे की तरह साफ हो चुकी थी" मैंने बताया।
"जब तुम उस लड़की को पहली बार उस फ्लैट में दोबारा लेकर गए थे, तब तुमने दूसरी लड़की की लाश नही देखी" शर्मा जी ने फिर से पूछा।
"सच बताऊं सर! मैं उस वक्त उस लाश को वहां देखकर बहुत घबरा गया था, और मैं ये भी नही चाहता था कि तान्या हमारे पास से भाग जाए, इसलिए उस वक़्त दिमाग मे यही आया कि पहले तान्या को यहां से कहीं और लेकर चलो, तान्या को हमारे साथ देखकर तान्या के साथी का सामने आना अवश्यम्भावी था, और वैसा ही हुआ भी" मैंने अपनी वाकपटुता का परिचय दिया।
"ये बात कुछ हजम नही हो रही है कि तुम और लाश देखकर डर गए" शर्मा जी मेरी रग रग से वाकिफ थे, मैं जानता था कि शर्मा जी को मेरी उस कहानी पर भी विश्वास नही हुआ होगा, जो मैने तान्या को वापस फ्लैट में ले जाने के बारे में सुनाई थी।
"सर! लाश से तो मैं कम घबराया था, लेकिन इस बात से ज्यादा घबराया था कि अगर लाश के साथ मैं यहां पर पुलिस को मिला तो, इस बार पुलिस मेरा रिमांड लिए बिना नही छोड़ेगी" मैंने सच्चाई बताई।
"अब आये न तुम लाइन पर, अब इस बात से तो इत्तेफाक करोगे न कि जब इस केस में तान्या और देवप्रिय से पूछताछ जितनी जरूरी है, उतनी ही तुमसे भी पूछताछ जरूरी है" शर्मा जी ने मेरी उम्मीदों के बिल्कुल उलट बात की थी।
"सर! इस गरीब पर ये अत्याचार किस लिये" मैने हैरानी से शर्मा जी की ओर देखते हुए बोला।
"क्यो कि इतनी देर से तुम सिर्फ बातें कर रहे हो, कोई सबूत नही पेश कर रहे हो, न अपने बचाव में और न उन लोगो के अपराधी होने का" शर्मा जी ने नाराज स्वर में बोला।
तभी रागिनी ने कमरे में कदम रखा।
"रागिनी मैडम आप कहाँ लापता थी, आपके गुरूदेव किसी दिन आपकी भी जेलयात्रा करवा देंगे" शर्मा जी आज पता नही किस मूड में आये थे।
"सर! ऐसे कर्म न तो मैं करती हूँ और न गुरु करते है, केस की इन्वेस्टिगेशन में थोड़ी बहुत जो कानून से इतर जाकर हमसे गलतियां होती है, उसमे भी कही न कही सिर्फ कानून की मदद करने की भावना ही छुपी होती है, जिन्हें आप जैसे दयालु अफसर बड़ा दिल रखते हुए माफ भी कर देते है" रागिनी की बात सुनकर शर्मा जी के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान ख़िल उठी थी।
"रोमेश बाबू! गुरु गुड़ रह गया और शागिर्द शक्कर हो गई है" शर्मा जी ने उसी गहरी मुस्कान के साथ बोला। तभी रागिनी ने मेरे कान में कुछ आकर बोला।
"सर! अब आप तान्या और देवप्रिय को भी यही बुला लीजिये, और उससे पहले इस आदमी को फोन करके यहाँ बुलवा लीजिये या इसे इसके ठिकाने से इसे उठवा लीजिये" मैने एक नंबर टेबल पर शर्मा जी के सामने पड़े एक नोटपैड पर एक नंबर लिखते हुए बोला।
"ये कौन है" शर्मा जी के साथ साथ इस बार माहेश्वरी साहब के मुंह से भी निकला।
"ये वो शख्स है जिसके साथ पिछले तीन दिनों में तान्या ने सबसे ज्यादा बात की, हथियारो की अवैध सप्लाई करता है, जिस पॉइंट 22 कैलिबर की पिस्टल से मेघना के गले मे गोली मारी गई है, वो पिस्टल इसी शख्स से तान्या ने खरीदी थी" मेरे इस बात से वहां एकबारगी तो सन्नाटा छा गया था।
"आप तान्या से इस आदमी का नाम लेकर पूछिये, ये मुकर नही सकती है" इस बार रागिनी ने जोर देकर बोला।
"भगवान सिंह! अब ले आओ उन दोनों को, अब उनसे पूछताछ करने का समय आ गया है" शर्मा जी ने भगवान सिंह को बोला।
भगवान सिंह आदेश मिलते ही तुरंत कमरे से बाहर निकल गया। दो तीन मिनट के अंतराल में ही वे दोनो भगवान सिंह के साथ कमरे में प्रवेश कर चुके थे।
"मेघना को जिस पिस्टल से तुमने गोली मारी थी, वो पिस्टल तुमने कहाँ से खरी दी थी" शर्मा जी ने बिना कि सी भूमिका के सीधा सवाल पूछकर तान्या के चेहरे पर अपनी नजर जमा दी थी।
"जवाब दो" कोई जवाब न पाकर शर्मा जी ने इस बार हल्के से गुस्से भरे स्वर में पूछा।
"सर! मैंने किसी को कोई गोली नही मारी, मुझे तो पिस्टल चलानी भी नही आती है" तान्या को अब तक सम्हलने का मौका मिल गया था।
"मतलब तुम सिर्फ गला दबा सकती हो, गोली नही मार सकती हो" इस बार मैंने तान्या को घेरा।
"तू क्यो हीरो बन रहा है भाई, साहब पूछताछ कर रहे है न, तो उन्हें ही पूछताछ करने दे"देवप्रिय मेरे सवाल से एकदम भड़कते हुए बोला।
"अगर दोबारा तेरी बिना पूछे आवाज सुनाई दी, तो मुझ से बुरा कोई नही होगा देव" शर्मा जी ने उसे तुरंत डांट लगाते हुए बोला।
"सर! ये सब इसी का किया धरा है, इसने अपनी क्लाइंट के रास्ते का कांटा हमेशा के लिए निकालने के लिए ही मेघना को गोली मार दी है" देवप्रिय अभी भी बोलने से बाज नही आ रहा था।
"कोई सबूत है तुम्हारे पास की ये सब रोमेश का किया धरा है, सबूत दो मुझे, अभी इसे जेल भिजवाता हूँ" शर्मा जी ने भड़कते हुए कहा।
"साहब मेघना और देविका की मौत का सबसे ज्यादा फायदा सौम्या को हुआ है" देवप्रिय बिल्कुल वही सोच रहा था, जो सुबह हम लोग भी सोच रहे थे।
"कैसा फायदा, वो तो खुद अरबपति है, और ये दोनो लड़कियां तो खुद उसके यहाँ नौकरियां करती थी, तो जाहिर है कि इनके पास इतनी दौलत तो होगी नही की उन्होंने उस सारी दौलत को सौम्या के नाम कर दिया हो, और फिर सौम्या ने उस दौलत को जल्दी से जल्दी अपने नाम करवाने के लिए इन दोनों को मरवा दिया हो, मैं उस पूरी फैमिली को पिछले तीन सालों से जानता हूँ, इसलिए कुछ भी बोलने से पहले अच्छी तरह से सोच समझ लो" शर्मा जी देवप्रिय पर बुरी तरह से भड़क चुके थे।
"नही सर! मैं दौलत के बारे में बात नही कर रहा हूँ" देवप्रिय हड़बड़ा सा गया था।
"फिर किस बारे में बात कर रहे हो" इस बार शर्मा जी नम्र स्वर में बोले।
"सर! मेघना ने सौम्या को मारने की तीन बार प्लानिंग की थी, हर बार रोमेश ने उसको बचा लिया, इस बार अपने सिर के ऊपर लटकती हुई तलवार को हमेशा के लिए ही हटा दिया" देवप्रिय इसी बात को लेकर सुबह मुझ पर इल्जाम लगा चुका था।
"तुम ये कहना चाहते हो कि उस तलवार को हटाने की सुपारी सौम्या ने रोमेश को दी थी" शर्मा जी ने मुस्कराकर पूछा।
"जी जनाब! यही हकीकत है" देवप्रिय ने विश्वासपूर्वक बोला।
"लेकिन सौम्या को इस तरह से मरवाने की जरूरत क्या थी, अगर वे फिर से कोई हमला सौम्या पर करती तो क़ानून भी अपनी आत्मरक्षा का अधिकार सौम्या को देता है, सौम्या के साथ उसके निजी हथियारबन्द सुरक्षा गार्ड भी हर वक़्त साथ होते है, वो उनसे गोली मरवा देती" शर्मा जी ने कायदे की बात बोली थी।
देवप्रिय ने अजीब सी नजरो से शर्मा जी की ओर देखा।
जारी रहेगा_____![]()
Awesome update#26
थाने में हमारा ही बेसब्री से इंतजार हो रहा था। हम पर नजर पड़ते ही भगवान सिंह ने हमे कुर्सी पर बैठने का इशारा किया।
"कहाँ रह गए थे रोमेश बाबू, कब से तुम्हारा इंतजा र कर रहे है"भगवान सिंह ने शिकायती लहजें में बोला।
"सुबह के अत्यंत आवश्यक कार्यो का निष्पादन करने के लिए अपने घर गए थे जनाब, आज पुरी रात जागकर आपके मुजरिम पकड़े है, अभी कुछ देर में इस पूरी साजिश से भी पर्दा उठा देगे" मैने विश्वास भरे लहजे में बोला।
"इलाके में चार चार मर्डर सिर्फ हफ्ते भर में हो गए है, इसलिए एसी पी शर्मा जी खुद आ रहे है, उनके सामने ही अब सब राज के पर्दे उठेंगे" भगवान सिंह ने मेरी ओर देखकर बोला।
भगवान सिंह ने जो खबर मुझें दी थी, वो मेरे लिए ज्यादा सकूं भरी थी, क्यो कि शर्मा जी के सामने मै अपनी बात को बिना रोकटोक के और पूरे दमखम के रख सकता था। लेकिन शर्मा जी ने आते आते दोपहर के दो बजा दिये थे।
"माफ करना! किसी अर्जेंट काम से हैडक्वार्टर जाना पड़ गया था, इस वजह से आने में देर हो गई थी। इस वक़्त हम सभी लोग एसएचओ मा हेश्वरी जी के रूम में बैठें हुए थे।
शर्मा जी ने आते ही सबसे देरी से आने के लिए क्षमा मांगी थी। मैने रागिनी को अभी बाहर भेजा हुआ था, रुपेश ने दोपहर तक काल डिटेल देने का वादा किया हुआ था।
" रोमेश! तुम अपनी हरकतों से कब बाज आओगे, इस बार फिर तुम मकतूल के घर मे उसका ताला खोलकर घुसे थे" शर्मा जी को शायद यहाँ की रात की पूरी रिपोर्ट दी जा चुकी थी।
"जहाँपनाह! मै तो अपनी नींद हराम करके वहां उसके फ्लैट पर नजर रखने के लिए गया था, क्यो कि वे दोनो मोहतरमा दो दिन से गायब थी, हम लोग बाहर से ही उस फ्लैट की निगरानी कर रहे थे, की हमे उस फ़्लैट से एक लड़की निकलती हुईं दिखाई दी, इतनी रात को उस लड़की को उस बन्द पड़े हुए फ्लैट से बाहर निकलते हुए देखकर हमने उस लड़की को दबोचा तो वो देविका की पुरानी रूममेट निकली, फिर हम उसे ये देखने के लिए फ्लैट में वापस लेकर गये की ये क्या गड़बड़ करके फ्लैट से निकली है" मै पहले से रागिनी की सुझाई हुई कहानी को रट चुका था।
"फिर जब तुमने फ्लैट में लाश को देख लिया था, तुमने उसी समय पुलिस को सूचना क्यो नही दी" इस बार भगवान सिंह बीच मे ही टपक पड़ा था।
"जनाब अगर उस वक़्त मैं पुलिस को बुलाता तो आपके देवप्रिय बाबू सामने नही आते, जिन पर मुझे पहले से ही शक था कि वो बन्दा भी इन कातिलों की टोली से मिला हुआ था, मैं लड़की को वहां से अपने घर ले गया तो, देवप्रिय के मन में यही उथलपुथल चलती रही कि मैं पता नही तान्या से क्या क्या उगलवा रहा होऊंगा, इसी वजह से देवप्रिय सस्पेंड होने के बावजूद दौड़ता हुआ मेरे घर पहुंचा, और झूठी किडनैप काल की कहानी सुनाकर तान्या को वहां से जबर्दस्ती ले जाने का प्रयास करने लगा" मैने इस बार शर्मा जी
की ओर देखते हुए जवाब दिया।
"उसके बाद क्या किया तुमने" शर्मा जी मुझें अपनी बात कहने का पूरा मौका दे रहे थे।
"जैसे ही देवप्रिय सामने आया, मैने उसी वक़्त माहेश्वरी साहब को पूरी बात बताई, साहब ने मुझे बताया कि देवप्रिय बाबू तो दो दिन पहले ही सस्पेंड हो चुके है, उसके बाद तो मेरे सामने पूरी कहानी शीशे की तरह साफ हो चुकी थी" मैंने बताया।
"जब तुम उस लड़की को पहली बार उस फ्लैट में दोबारा लेकर गए थे, तब तुमने दूसरी लड़की की लाश नही देखी" शर्मा जी ने फिर से पूछा।
"सच बताऊं सर! मैं उस वक्त उस लाश को वहां देखकर बहुत घबरा गया था, और मैं ये भी नही चाहता था कि तान्या हमारे पास से भाग जाए, इसलिए उस वक़्त दिमाग मे यही आया कि पहले तान्या को यहां से कहीं और लेकर चलो, तान्या को हमारे साथ देखकर तान्या के साथी का सामने आना अवश्यम्भावी था, और वैसा ही हुआ भी" मैंने अपनी वाकपटुता का परिचय दिया।
"ये बात कुछ हजम नही हो रही है कि तुम और लाश देखकर डर गए" शर्मा जी मेरी रग रग से वाकिफ थे, मैं जानता था कि शर्मा जी को मेरी उस कहानी पर भी विश्वास नही हुआ होगा, जो मैने तान्या को वापस फ्लैट में ले जाने के बारे में सुनाई थी।
"सर! लाश से तो मैं कम घबराया था, लेकिन इस बात से ज्यादा घबराया था कि अगर लाश के साथ मैं यहां पर पुलिस को मिला तो, इस बार पुलिस मेरा रिमांड लिए बिना नही छोड़ेगी" मैंने सच्चाई बताई।
"अब आये न तुम लाइन पर, अब इस बात से तो इत्तेफाक करोगे न कि जब इस केस में तान्या और देवप्रिय से पूछताछ जितनी जरूरी है, उतनी ही तुमसे भी पूछताछ जरूरी है" शर्मा जी ने मेरी उम्मीदों के बिल्कुल उलट बात की थी।
"सर! इस गरीब पर ये अत्याचार किस लिये" मैने हैरानी से शर्मा जी की ओर देखते हुए बोला।
"क्यो कि इतनी देर से तुम सिर्फ बातें कर रहे हो, कोई सबूत नही पेश कर रहे हो, न अपने बचाव में और न उन लोगो के अपराधी होने का" शर्मा जी ने नाराज स्वर में बोला।
तभी रागिनी ने कमरे में कदम रखा।
"रागिनी मैडम आप कहाँ लापता थी, आपके गुरूदेव किसी दिन आपकी भी जेलयात्रा करवा देंगे" शर्मा जी आज पता नही किस मूड में आये थे।
"सर! ऐसे कर्म न तो मैं करती हूँ और न गुरु करते है, केस की इन्वेस्टिगेशन में थोड़ी बहुत जो कानून से इतर जाकर हमसे गलतियां होती है, उसमे भी कही न कही सिर्फ कानून की मदद करने की भावना ही छुपी होती है, जिन्हें आप जैसे दयालु अफसर बड़ा दिल रखते हुए माफ भी कर देते है" रागिनी की बात सुनकर शर्मा जी के चेहरे पर एक गहरी मुस्कान ख़िल उठी थी।
"रोमेश बाबू! गुरु गुड़ रह गया और शागिर्द शक्कर हो गई है" शर्मा जी ने उसी गहरी मुस्कान के साथ बोला। तभी रागिनी ने मेरे कान में कुछ आकर बोला।
"सर! अब आप तान्या और देवप्रिय को भी यही बुला लीजिये, और उससे पहले इस आदमी को फोन करके यहाँ बुलवा लीजिये या इसे इसके ठिकाने से इसे उठवा लीजिये" मैने एक नंबर टेबल पर शर्मा जी के सामने पड़े एक नोटपैड पर एक नंबर लिखते हुए बोला।
"ये कौन है" शर्मा जी के साथ साथ इस बार माहेश्वरी साहब के मुंह से भी निकला।
"ये वो शख्स है जिसके साथ पिछले तीन दिनों में तान्या ने सबसे ज्यादा बात की, हथियारो की अवैध सप्लाई करता है, जिस पॉइंट 22 कैलिबर की पिस्टल से मेघना के गले मे गोली मारी गई है, वो पिस्टल इसी शख्स से तान्या ने खरीदी थी" मेरे इस बात से वहां एकबारगी तो सन्नाटा छा गया था।
"आप तान्या से इस आदमी का नाम लेकर पूछिये, ये मुकर नही सकती है" इस बार रागिनी ने जोर देकर बोला।
"भगवान सिंह! अब ले आओ उन दोनों को, अब उनसे पूछताछ करने का समय आ गया है" शर्मा जी ने भगवान सिंह को बोला।
भगवान सिंह आदेश मिलते ही तुरंत कमरे से बाहर निकल गया। दो तीन मिनट के अंतराल में ही वे दोनो भगवान सिंह के साथ कमरे में प्रवेश कर चुके थे।
"मेघना को जिस पिस्टल से तुमने गोली मारी थी, वो पिस्टल तुमने कहाँ से खरी दी थी" शर्मा जी ने बिना कि सी भूमिका के सीधा सवाल पूछकर तान्या के चेहरे पर अपनी नजर जमा दी थी।
"जवाब दो" कोई जवाब न पाकर शर्मा जी ने इस बार हल्के से गुस्से भरे स्वर में पूछा।
"सर! मैंने किसी को कोई गोली नही मारी, मुझे तो पिस्टल चलानी भी नही आती है" तान्या को अब तक सम्हलने का मौका मिल गया था।
"मतलब तुम सिर्फ गला दबा सकती हो, गोली नही मार सकती हो" इस बार मैंने तान्या को घेरा।
"तू क्यो हीरो बन रहा है भाई, साहब पूछताछ कर रहे है न, तो उन्हें ही पूछताछ करने दे"देवप्रिय मेरे सवाल से एकदम भड़कते हुए बोला।
"अगर दोबारा तेरी बिना पूछे आवाज सुनाई दी, तो मुझ से बुरा कोई नही होगा देव" शर्मा जी ने उसे तुरंत डांट लगाते हुए बोला।
"सर! ये सब इसी का किया धरा है, इसने अपनी क्लाइंट के रास्ते का कांटा हमेशा के लिए निकालने के लिए ही मेघना को गोली मार दी है" देवप्रिय अभी भी बोलने से बाज नही आ रहा था।
"कोई सबूत है तुम्हारे पास की ये सब रोमेश का किया धरा है, सबूत दो मुझे, अभी इसे जेल भिजवाता हूँ" शर्मा जी ने भड़कते हुए कहा।
"साहब मेघना और देविका की मौत का सबसे ज्यादा फायदा सौम्या को हुआ है" देवप्रिय बिल्कुल वही सोच रहा था, जो सुबह हम लोग भी सोच रहे थे।
"कैसा फायदा, वो तो खुद अरबपति है, और ये दोनो लड़कियां तो खुद उसके यहाँ नौकरियां करती थी, तो जाहिर है कि इनके पास इतनी दौलत तो होगी नही की उन्होंने उस सारी दौलत को सौम्या के नाम कर दिया हो, और फिर सौम्या ने उस दौलत को जल्दी से जल्दी अपने नाम करवाने के लिए इन दोनों को मरवा दिया हो, मैं उस पूरी फैमिली को पिछले तीन सालों से जानता हूँ, इसलिए कुछ भी बोलने से पहले अच्छी तरह से सोच समझ लो" शर्मा जी देवप्रिय पर बुरी तरह से भड़क चुके थे।
"नही सर! मैं दौलत के बारे में बात नही कर रहा हूँ" देवप्रिय हड़बड़ा सा गया था।
"फिर किस बारे में बात कर रहे हो" इस बार शर्मा जी नम्र स्वर में बोले।
"सर! मेघना ने सौम्या को मारने की तीन बार प्लानिंग की थी, हर बार रोमेश ने उसको बचा लिया, इस बार अपने सिर के ऊपर लटकती हुई तलवार को हमेशा के लिए ही हटा दिया" देवप्रिय इसी बात को लेकर सुबह मुझ पर इल्जाम लगा चुका था।
"तुम ये कहना चाहते हो कि उस तलवार को हटाने की सुपारी सौम्या ने रोमेश को दी थी" शर्मा जी ने मुस्कराकर पूछा।
"जी जनाब! यही हकीकत है" देवप्रिय ने विश्वासपूर्वक बोला।
"लेकिन सौम्या को इस तरह से मरवाने की जरूरत क्या थी, अगर वे फिर से कोई हमला सौम्या पर करती तो क़ानून भी अपनी आत्मरक्षा का अधिकार सौम्या को देता है, सौम्या के साथ उसके निजी हथियारबन्द सुरक्षा गार्ड भी हर वक़्त साथ होते है, वो उनसे गोली मरवा देती" शर्मा जी ने कायदे की बात बोली थी।
देवप्रिय ने अजीब सी नजरो से शर्मा जी की ओर देखा।
जारी रहेगा_____![]()
Thanks brother for your valuable review and supportBahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....

Ab apne romesh and ragini use bolne layak chhodenge bhi nahiBhut hi badhiya update Bhai
Sharma ji ne to sabhi ko rimand par liya huva hai
Devpriy sahab to kuch bolne ki halat me nahi dhik rahe ab
