Update:-61
USA Trip....
सुलेखा के कानो में जब से अपनी बेटी और आरव की बातें गई थी वो गुस्से में नागिन कि तरह फुफकार मार रही थी। अब तो बस वो सही मौके की तलाश में थी। थोड़ी ही देर में पूरी मिश्रा फैमिली खाने पर थी, और उन्हें ज्वाइन करने यूएस सेनेटर और उद्योगपति प्रकाश जिंदल का बेटा ध्रुव भी पहुंचा हुआ था।
जब साची ध्रुव के साथ बैठी तब कबीर के लिए अच्छा मौका था कुंजल से कुछ बातें करने की। वो कुंजल के पास आकर बैठ गया। एक ओर से कबीर और दूसरे ओर से नीरज, और दोनों ने एक साथ उसे "हाई" कहा… लेकिन कबीर "हाई" कहते हुए, पीछे से उसके पीठ पर हाथ रख दिया। जब कुंजल उसकी इस हरकत पर प्रतिक्रिया देती हुई उसकी ओर मुड़ी, तब कबीर अपनी एटिट्यूड वाली मुस्कान उसे दिखाने लगा।
कुंजल:- इंडिया में तो समझ में आता है कि एक लड़की के पीछे लड़के पड़े है। तुम तो यहां अाकर भी ऐसा कर रहे। इतनी खराब रेपो है कि तुम्हे यूएस में भी कोई गर्लफ्रेंड या टाइमपास नहीं मिल रही।
थे तो मिश्रा परिवार के ही, कुछ तो पिताजी वाला गुण तो रहेगा। बेज्जती ऐसी हुई की कबीर बिलबिलाता हुआ कुंजल के कानों के पास धीरे से कहने लगा…. "हमने सोचा तुम जैसे गवार को हम जैसा इंटरनेशनल हंक मिल जाएगा… वरना यहां तो रोज रात को बिस्तर में नई-नई लड़कियों कि कमी नहीं रहती।"
कुंजल उसकी बातों पर मुस्कुराती हुई धीरे से उसे कहने लगी…. "तुम्हे देखकर ही पता चलता है… उन लड़कियों को रात में कोई मिला नहीं होगा तो अपने मज़े के लिए तुझ जैसे लल्लू को पकड़ ली होगी या फिर तुमने बाज़ार से किसी को उठा लिया होगा… ख्याली पुलाव में डूबे रहो डार्लिंग।"
सामने पूरा परिवार बैठा हुआ था, कबीर अपना गुस्सा भरा चेहरा अनचाही हसी में छिपाए, वहां से उठकर दूसरी जगह चला गया… उसके जाते ही नीरज कुंजल से कहने लगा… "ऐसा क्या बोल दिया उसे, जो वो उठकर भाग गया।"
कुंजल:- उसी से पूछ लेना, फिलहाल मै खाना खा लूं, खाकर बात करते है।
नीरज:- ये भी सही है। वैसे एक बात जो मै कहे बिना नहीं रह पाऊंगा…
कुंजल:- ओह कम ऑन.. अब तुम्हे मै इस दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की तो नहीं लगने लगी।
नीरज:- हाहाहा… सॉरी मै ऐसे फ्लर्टिंग नहीं करता, और खाते वक़्त तो बिल्कुल भी नहीं। बस थैंक्स कहना था। मेरी बहने कोई दोस्त को लेकर नहीं आयी थी और मेरे पागल घरवाले किसी भी सोसायटी में चले जाएं, उनसे गांव नहीं छूट पता। तुम हो तो कम से कम तुम्हारे साथ वो कहीं घूम तो सकती है। वरना मेरी मजबूरी तो ऐसी है कि, मै जानता भी रहूं की वो लोग गलत है फिर भी उनका विरोध नहीं कर पाता।
कुंजल, नीरज के ओर देखती हुई…. "तुम अपनी बहनों को बहुत प्यार करते हो।"
नीरज:- पता नहीं, शायद मुझे अपनी बहनों से वह लगाव नहीं है जैसा वो दोनों अपने भाइयों से रखती हैं। जब मै उनके ऊपर मेरे घरवालों की पहरेदारी देखता हूं, तो मेरा दिमाग खराब हो जाता है। अभी साची की उम्र ही क्या होगी… आज कल तो भारत में 20-21 में किसी लड़की की शादी नहीं होती, लेकिन इन्हे देखो, यदि लड़का पसंद आ गया तो यहां सब प्लैनिंग हो चुकी है।
कुंजल:- अब इसमें मै क्या कर सकती हूं। ये तुम लोगों का आंतरिक मामला है।
इधर दूसरी ओर पूरा मिश्रा परिवार ध्रुव को खिलाने में जुटा हुआ था। बेचारा सोच कर आया था कि आज साची से आज शाम के बारे में पूछेगा, लेकिन पूरा परिवार था कि घेरे बैठा हुआ था उसे। लावणी के लिए यह अच्छा अवसर था और वो चुपके से वहां से निकल गई।
वेटर को 806 में खाना सर्व करने बोलकर, वो मीठी सी मुस्कान अपने चेहरे पर लिए, चहकती हुई चल दी आरव के पास। सुलेखा की नजर तो पहले से लावणी पर थी, लेकिन जैसे ही वो माहौल से निकलने की कोशिश करने लगी, अनुपमा ने उसका हाथ पकड़ कर रोक लिया।
बेल बजी, और आरव जोर से चिल्लाते हुए कहने लगा "दरवाजा खुला है।".. लावणी अंदर आयी, आरव कुर्सी पर अपना सिर टिकाए आखें मूंदे हुआ था। लावणी अाकर उसके गोद में बैठ गई और अपने दोनों पाऊं ऊपर करती उसके कंधे में अपने बाहों का फंदा डाल दी।
आरव उसके कमर में अपनी बाहों को लपेटकर, अपने होंठ उसके गालों पर फिराते हुए कहने लगा… "मुझे लगा आज भी मै भूखा ही रहूंगा।"…… "ऐसे कैसे भूखा रहते, कल तो भैय्या के लिए परेशान थे, इसलिए मैंने छोड़ दिया। लेकिन अब चिंता की कोई बात नहीं है।"…
आरव अपने चेहरे को पीछे करके उसे देखने लगा…. "तुम कल रात आयी थी यहां।"
लावणी, आरव के कान के नीचे धीमे से काटती हुई कहने लगी… "हां कुछ नॉटी खयालात के साथ आयी थी, लेकिन तुम्हे बेबस देखकर मुझे लगा।"…
आरव:- क्या लगा लावणी..
लावणी:- बस यही की किसी दिन मै भी भैय्या की तरह तुम्हारे दिल में इतनी जगह बना पाऊं की तुम भी उनके जितना मुझे प्यार करो।
आरव उसे जकड़ते हुए कहने लगा…. "उसके लिए बेबस हुआ था तुम्हारे लिए सब को बेबस कर दूंगा। और कभी सोचना भी मत की तुम्हारे बिना मेरी हालात बहुत अच्छी होती है।"
लावणी:- छोड़ो भी ये बातें। वैसे नॉटी से मेरी बात हुई थी। भैय्या को क्या हुआ था आरव।
आरव:- ये तुम अपस्यु को भैया क्यों कह रही हो, बड़ा ही अजीब लग रहा है।
लावणी:- बोलने में मुझे भी अजीब लग रहा है, लेकिन हमारी शादी के बाद वो मेरे जेठ हुए, तो अभी से भैय्या कहने की प्रैक्टिस कर रही हूं।
आरव:- मछली अभी पानी में ही है, और तुम मसाला पीस कर तैयार रहो फ्राई करने के लिए।
लावणी:- पानी में मछली है, तो कभी ना कभी घर भी आ ही जायेगी पकने, सारी तैयारियां पहले से होनी चाहिए।
लावणी की शरारती नजरों को देखते हुए आरव मुस्कुराने लगा। अपने होंठ को उसके होंठ के पास ले जाते हुए, दोनों अपने कब से सूखे अरमान का इजहार करते उसी में डूब गए। लंबा चला ये किस्स दोनों की श्वांस को सीने में कैद किए बस चलती ही जा रही थी।
तभी वहां के रूम कि बेल बजी, दोनों अपने प्यारे से अनुभव को मुस्कुराहट के साथ तोड़ते हुए, लावणी दरवाजा खोलने चली गई। वेटर दरवाजे पर खाना लिए खड़ा था। लावणी खाना लेकर अंदर आयी और वापस आरव के गोद में बैठकर एक निवाला उसे खिलाती और दूसरा निवाला खुद खाती।
दोनों का खाना अभी मध्य में ही था की साची और कुंजल बिना नॉक किए उस कमरे में आ धमकी। सामने का नजारा देखकर कुंजल बोलने लगी… "ओय कुछ शर्म आती है कि नहीं।"..
आरव, अपना बायां हाथ दिखाते…. "कृपया आप दोनों हमे बिना परेशान किए, आप हमे खाते हुए देख सकते है, और यदि देखा नहीं जा रहा है तो कृपया दूसरे कमरे में चले जाएं।"
"बस 2 मिनट रुक जाओ पीछे से सुलेखा मिश्रा भी आ रही है यहीं"… साची अभी आधा ही बोली थी, कि लावणी हड़बड़ा कर नीचे उतर आयी और भागी उस कमरे से…
आरव:- दोनों ने मिलकर भागा दिया ना उसे, अच्छा नहीं किया..
कुंजल:- पागल हम सच कह रहे है। वो वाकई में तुम्हारा रूम नंबर पूछ रही थी।
आरव:- बेड़ा गर्क हो इसका। क्या वाकई में इधर आ रही हैं वो।
कुंजल:- हां भाई सच कह रही हूं, …
आरव:- भागने दो फिर मुझे भी यहां से। तुम दोनों बोल देना मै यहां हूं ही नहीं कहीं घूमने निकल गया हूं।
आरव अपनी बात कहकर वीरभद्र के कमरे में पहुंच गया और दरवाजा लगाकर उससे बातें करने लगा… इधर साची, कुंजल से आंख मारती हुई पूछने लगी… क्या बातें हो रही थी मेरे भैय्या से..
कुंजल:- वहीं फर्स्ट टाइम बॉय एंड गर्ल टॉक…
साची:- हीहिहिही… तो तूने क्या कहा..
कुंजल:- मैंने कहा पनीर पकोड़ा मस्त बना है, जो भी ऐसा पनीर पकोड़ा बनाकर मुझे खिलाएगा, मै उसकी गर्लफ्रेंड।
साची:- ओह हो मतलब अपने लिए सर्टिफाइड बावर्ची ढूंढ़ रही है।
कुंजल:- हीहीहीही… मेरी छोड़ अपनी बताओ। तुम आज अपने रजिस्टर्ड होने वाले के साथ कहां जाने वाली हो घूमने…
साची:- पता ना अब वो जहां ले जाए…
कुंजल:- क्या हुआ किस शंका में डूबी हो…
साची:- नहीं शंका नहीं है, बस कुछ सोच रही हूं…
कुंजल:- क्या ?
साची, मुस्कुराती हुई… वो मै अभी नहीं, जब उस लल्लू के साथ घूमकर वापस आऊंगी तब बताऊंगी….
कुंजल उसे आंख मारती…. "ओह हो दिल पिघल रहा है क्या?"…
साची:- दिल तो अभी पिघलने से रहा, बस मन बना रही हूं… मन को भा गया तो दिल पिघलने में वक़्त ही कितना लगेगा…
कुंजल:- बेस्ट ऑफ लक डार्लिंग। चल तू इतना मेहनत कर रही है तो मै भी तेरे लिए आज दुआ मांगने जाऊंगी…
साची:- अब तू शिकागो में कहां मंदिर ढूंढ़ने जाएगी…
कुंजल:- किसने कहा मै दुआ मांगने मंदिर जाऊंगी। मै तो स्ट्रिप क्लब जाकर तेरे लिए दुआ करूंगी।
साची का खुला मुंह…… हो... तू सच कह रही है क्या…
कुंजल उसे आंख मारती हुई कहने लगी…. "यहां तक आयी हूं तो, कुछ मस्ती तो बनती है ना यार। सिक्स पैक में लड़के एक-एक कपड़े उतरते हुए।"…
साची:- कुंजल…. सुन ना..
कुंजल:- अब तू नकियाना बंद करके कुछ कहेगी भी…
साची:- सुन ना मै भी चलूंगी साथ में.. तू सब प्लान करके रख लेना..
कुंजल:- आज शाम तो तू ध्रुव के साथ जा रही है ना…
साची:- हां तो कौन सा मै उसके साथ पूरी रात रुकने वाली हूं। 6 बजे लेकर जाएगा, मैक्सिमम 9 बजे तक लौट आऊंगी…
कुंजल, फिर से आंख मारती हुई कहने लगी…. "तो फिर तैयार रहना… why should boys have all the fun."…
शाम के 5.30 बज रहे होंगे, साची बाहर जाने के लिए तैयार थी। बिल्कुल गजब का लुक और अजब सी रौनक उसके चेहरे पर थी। ध्रुव ने जब उसे देखा, तब देखते ही यह गया…
दोनों वहां से निकले, ध्रुव रह-रह कर बस बार-बार साची को ही देख रहा था…. "तुम… बहुत … खूबसूरत … लग… रही… हो…। मेरा … दिल.. पहले.. कभी.. ऐसे... नहीं.. धड़का..
साची:- ध्रुव प्लीज, तुम वो भाषा बोलो जिसमे तुम कंफर्टेबल हो। ये बनावटी भाषा में कोई फीलिंग नहीं आती।
ध्रुव:- ओके स्वीटहार्ट, जैसा तुम कहो…. (रूपांतरित भाषा)
साची:- ये हुई ना बात.. वैसे हम कहां जा रहे है।
ध्रुव:- जहां तुम चाहो…
साची:- मेरा एक अच्छा दोस्त है क्रेज़ी बॉय, उससे कल ही बात हुई थी। उसने कहा यदि किसी को परखना हो तो उसके दोस्तों से मिलो.. सो मै तुम्हारे दोस्तों से मिलना पसंद करूंगी, यदि तुम्हे कोई ऐतराज ना हो तो।
ध्रुव गाड़ी की स्पीड बढ़ाते हुए… "क्यों नहीं जरूर"…
दोनों के बीच आज अच्छी बातें चल रही थी। घूमने और बातों में कब वक़्त बीता पता ही नहीं चला। साची लगभग पौने नौ (8.45) के करीब लौट आयी। आज वो थोड़ा खुश नजर आ रही थी। आते ही वो सीधा कुंजल के पास गयी, जहां लावणी पहले से तैयार होकर उसके पास बैठी थी।
लावणी को देखते ही साची आश्चर्य से पूछने लगी… "ये भी साथ चल रही है क्या?"
कुंजल:- तुम्हे कोई ऐतराज हो तो अभी बता दो, मै इसे नहीं ले जाती।
साची:- ना ना .. इसे भी लेकर चल… कब तक ये भुटकी छोटी बनी रहेगी…
कुंजल… ये हुई ना बात... तो चलो फिर हम चलते हैं…
तीनों होटल से निकली। कुंजल ने स्ट्रिप क्लब जाने के लिए लिमो बुक करवाया था, तीनों उसी में सवार होकर निकल लिए… अंदर का इंतजाम देख कर पहले तो दोनों बहन थोड़ा ना नुकुर करने लगी, लेकिन कुंजल के जोड़ के आगे फिर किसका चले…. सैंपैन की बॉटल खुली, 3 ग्लास में उड़ेला गया.. तीनों ने चीयर्स किया और चुस्कियों में तीनों पीने लगी…
लावणी:- इसका टेस्ट तो दारू जैसा नहीं है, ये तो कोई ऐपल जूस लग रहा है।
साची और कुंजल दोनों एक साथ उसकी ओर घूरते…. "भुटकी दारू का टेस्ट तुझे अच्छे से पता है.. माजरा क्या है।".. फिर जो बेचारी लावणी को दोनों ने घेरा.. उसे कुछ बोलने भी नहीं दी।
तीनों पहुंचे स्ट्रिप क्लब और अंदर जैसे ही एंट्री मेरी… तीनों के अंदर अजीब सी हलचल होने लगी…. "ये कहां आ गए हम।" लावणी वहां के वेटर को चड्डी में टाय पहने सर्व करते हुए देखी और चौंककर पूछने लगी।
कुंजल:- इसे कहते है हमारा आज का फन…
तीनों सोफे पर जाकर बैठ गई। हाथों में फिर से तीनों के एक जाम और सामने देखने लगी। तभी वहां पर पूरा अंधेरा हो गया, और स्टेज के फोकस लाइट पर एक नया ताजा लड़का रंग ज़माने पहुंच गया।
उसके स्टेज पर आते ही वहां मौजूद लड़कियों कि हूटिंग शुरू हो गई। जैसे ही पोल डांस शुरू हुआ, तीनों की जोरदार हंसी भी शुरू हो गई.. फिर जैसे जैसे कपड़े उतार रहे थे.. कुंजल वैसे-वैसे हूटिंग कर रही थी। अब वो लड़का केवल चड्डी में था और तीनों की धड़कने तेज। बड़ी ही अदा से वो पीछे मुड़ा और अपनी चड्डी नीचे सरकाने लगा। साची जो अभी जाम का घूंट पी रही थी वो पीते-पीते सरक गई, और तेज-तेज खांसने लगी.. वहीं इन दोनों से भी आगे देखा नहीं गया और दोनों अपना मुंह फेर कर जोर-जोर से हसने लगी।
जितनी मस्ती करनी थी तीनों ने यहीं तक की, फिर वहां से बाहर निकलकर शिकागो के नाइट लाइफ का लुफ्त उठाने लगी। आज तीनों लड़कियां एक साथ एक ही कमरे में सोयी और रात भर हंसी मज़ाक के साथ छेड़-छाड़ चलती रही। लावणी सो चुकी थी और उसके नींद में कोई खलल ना हो इसलिए साची और कुंजल धीमे-धीमे बात करने लगे।