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TharkiPo

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अपडेट नंबर 259 पोस्ट कर दी है पढ़ कर रिव्यू ज़रूर करें, लाइक और रिव्यू कम नहीं होने चाहिए। और जब तक 30 लाइक्स नहीं होते अपडेट लिखना शुरू नहीं होगा।
 
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TharkiPo

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जहां अंजली कर्मा के साथ उसके घर पर नए रिश्ते बना रही थी वहीं गैंदापुर में उसकी मां और भाभी भी कुछ नया कर रही थी,

अपडेट 256

दोनों सास बहू अभी आंगन में थी और दोनों के बदन पर अभी बस एक एक। बैंगनी रंग की पेंटी थी और चेहरे पर कामुक मुस्कान और शर्म का मिश्रण था

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रानी: कितना अजीब लग रहा है न मम्मी जी हम लोग ऐसे हम लोग आंगन में घूम रहे हैं।
सविता: अजीब तो है पर मज़ेदार भी, गर्मी में ऐसे ही रहना चाहिए,
सविता ने हंसते हुए कहा, और फिर दोनों हंसने लगी,
रानी: अब चलते हैं ये इंतजार कर रहे होंगे आखिर उन्हें ही हमें घर में ऐसे देखना था,
सविता: हां चल बेटा।
दोनों फिर आगे बढ़ कर पीयूष और रानी के कमरे की ओर चल दी, जहां पीयूष पहले से ही उनका इंतजार कर रहा था उसके बदन पर भी बस एक कच्छा था, दोनों ने देखा कि पीयूष बिस्तर पर लेटा हुआ था तीनों की नज़रें मिली और पीयूष के चेहरे पर मुस्कान आ गई अपनी मां और अपनी पत्नी को इस रूप में देख कर।
रानी: ऐसे क्या देख कर मुस्कुरा रहे हो तुमने ही कहा था न ऐसे ही घूमने को।
पीयूष: हां कहा था और बिल्कुल सही कहा था बहुत सुन्दर लग रही हो दोनों लोग।
रानी: हां तुम्हे तो सुंदर लगेंगे ही नंगे जो घूम रहे हैं।
रानी ने उसे छेड़ते हुए कहा और बिस्तर पर चढ़ गई,
पीयूष: अरे कपड़े तुम्हारी सुंदरता को छिपाते हैं अब असली सुंदरता तो ऐसे ही नज़र आती है, मम्मी आओ न तुम भी बैठो।
सविता: हां आई,
सविता भी आगे बढ़ कर बिस्तर पर चढ़ जाती है और बैठ जाती है।

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पीयूष भी आगे होकर अपनी मां के होंठों को चूमने लगता है वहीं रानी पीछे से अपनी सास के बदन को सहलाती है फिरउसने सास की कमर पकड़ी, पीठ पर होंठ रख दिए। धीरे-धीरे जीभ से पीठ चाटने लगी – कंधे से लेकर कमर तक। सविता की साँसें तेज़ हो गईं।
रानी (सविता के कान में, जीभ फेरते हुए): सासू माँ... आपकी पीठ... कितनी नरम... कितनी गरम... मन करता है पूरा बदन चाट जाऊँ...
सविता (आह भरते हुए): बहू... तेरी जीभ... ओह... माँ की पीठ पर... कितना अच्छा लग रहा है... पीयूश... बेटा... देख... तेरी पत्नी तेरी माँ को कैसे चाट रही है... आ... तू भी आ... अपनी माँ की चूचियाँ... चूस...
पीयूश ने आगे बढ़कर सविता की एक चूची मुंह में ले ली। जोर से चूसा। निप्पल को जीभ से घुमाया, दांतों से हल्का कसा। सविता की कमर अकड़ गई। रानी ने पीछे से सविता की दूसरी चूची हाथ में ली, और उसे मसलने लगी।
रानी (चूची मसलते हुए): मम्मी जी... आपकी चूचियाँ... कितनी भरी हुई... ओह... कितनी नरम? ओह... देखो... तुम्हारी माँ का निप्पल... कितना सख्त... चूसो... पूरा निचोड़ लो...
थोड़ी देर बाद पीयूष अपनी मां की चूची को छोड़ता है और रानी के होंठों को चूसने लगता है इतने में सविता पीयूष के कच्छे की लास्टिक में उंगलियां फांसती है और उसे नीचे खिसकती है और पूरी तरह से पैरों से निकाल देती है तो पियूष का लंड उछल कर बाहर आ जाता है, जिसे सविता हाथ में लेकर प्यार से सहलाने लगती है, अपनी मां के हाथों में लंड का स्पर्श पाकर आह निकलती है और वो रानी के होंठों से अपने होंठ अलग करता है, रानी अलग होती है और उठ कर झट से अपनी पैंटी उतार कर पूरी नंगी हो जाती है उसकी देखा देखी सविता भी अपनी कच्छी उतार देती है और नंगी हो जाती है, पीयूष बिस्तर के बीच में लेट जाता है वहीं सविता और रानी उसके एक एक ओर बिस्तर पर चढ़ जाती हैं
रानी आगे झुक कर अपनी सास की चूची को मुंह में भर लेती है वहीं पीयूष रानी के बदन को सहलाने लगता है
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सविता: ओह बहू आह ऐसे ही आह मज़ा आ रहा है खा जा मेरी चूचियों को।
पीयूष: आह क्या पत्नी और मां पाई है मैने आह रानी ओह।
पीयूष रानी के चूतड़ों को सहलाते हुए बोला।
रानी अपनी सास की चूचियों को बदल बदल कर चूस रही थी वहीं सविता उसके सिर को अपनी चूचियों पर दबा रही थी, वहीं पीयूष उसकी कमर और चूचियों को चूम रहा था, वहीं रानी का एक हाथ उसके पति के लंड को पकड़ कर सहला रहा था,
सविता: आह बच्चों ओह ऐसे ही आह ओह मेरे बच्चों ओह ओह।
रानी ने जी भर के अपनी सास की चूचियों को चूसा फिर जा कर छोड़ा और फिर बिना समय गंवाए, अपने पति के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी,
पीयूष के मुंह से सिसकियां निकलने लगी।
पीयूष: आह रानी अह कितना गरम मुंह है तेरा ओह मज़ा आ रहा है ऐसे ही चूसती रह।
पीयूष ने कहा और फिर हाथ बढ़ा कर अपनी मां के चूतड़ों को पकड़ लिया और उन्हें अपनी ओर खींचने लगा, सविता भी उसका इशारा समझ गई और तुरंत आगे बढ़ कर अपने बेटे के चेहरे पर बैठ गई, उसके बैठते ही पीयूष ने अपनी मां की चूत में जीभ चलाना शुरू कर दिया, और सविता अपने बेटे की जीभ के इशारों पर मचलने लगी,


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सविता: ओह आह बेटा आह चाट अपनी मां की चूत को ओह आह इसी चूत से निकला था तू ओह आह आज बापिस घुसा अपनी जीभ ओह।
सविता ने गरम होते हुए बोला
पीयूष के हाथ अपनी मां की गरम बातों को सुन कर उसके चूतड़ों पर कस गए वहीं रानी तो बिना विराम लिए अपने पति के लंड को चूस रही थी,
वहीं सविता अपने बेटे से अपनी चूत चटवा रही थी उसकी चूत लगातार गीली होकर बह रही थी,
कुछ देर बाद सविता ने अपने बेटे के मुँह से धीरे से अपनी कमर ऊपर उठाई। पीयूष की जीभ अभी भी उसकी चूत से चिपकी हुई थी, जैसे छोड़ना न चाहती हो। सविता की चूत गीली, रस से चमक रही थी – बेटे की लार और अपना रस मिलकर। वो हाँफते हुए मुस्कुराई, रानी की ओर देखा जो अभी भी पीयूष के लंड को सहलाते हुए चूस रही थी।
सविता (हाँफते हुए): बहू... अब तू अकेली क्यों खेल रही है? आ... माँ-बहू मिलकर बेटे की सेवा करें... देख... कितना कड़क है... हम दोनों का इंतजार कर रहा है...
रानी ने लंड से हाथ नहीं हटाया, बल्कि सविता को अपनी ओर खींचा। सविता घुटनों के बल बिस्तर पर झुकीं, पीयूष के लंड के ठीक सामने। सविता ने पहले जीभ फेरी – लंड के सुपारे पर, धीरे-धीरे गोल-गोल। पीयूष की आह निकली। रानी ने सामने से सविता की चूची पकड़ी, मसली, और फिर अपना मुँह लंड पर रख दिया – सविता के साथ मिलकर चूसने लगी। दोनों की जीभें लंड पर टकरा रही थीं, रस चाट रही थीं, होंठ मिलाकर लंड को बीच में दबा रही थीं। तो कभी एक दूसरे को होंठों को चूस रही थी

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रानी (लंड चूसते हुए, सविता से): ओह मम्मी... आपका बेटा... कितना मोटा लंड रखता है... आह... चूसने में मजा आ रहा है ना।
सविता (रानी की जीभ से टकराते हुए, आह भरकर): आह... बहू... तू भी चाट... सास बहु की जीभ एक साथ आह... बेटे के लंड पर... ओह... कितना गंदा लग रहा है... लेकिन... मजा दोगुना... पीयूष... बेटा... देख... तेरी माँ और बहू... तेरा लंड... मिलकर... चूस रही हैं... जैसे रंडियाँ... आह... तेरा लंड... कितना गरम है।

पीयूष ने दोनों के सिर पकड़े, धक्के लगाने लगा – लंड दोनों के मुँह में बारी-बारी घुसा रहा था। कमरा आहों और चूसने की चपचप आवाजों से भर गया। सविता और रानी की चूचियाँ आपस में टकरा रही थीं, निप्पल्स सख्त होकर रगड़ खा रही थीं।
पीयूष (सिसकते हुए): आह... माँ... रानी... दोनों... मेरी रंडियाँ... चूसो... पूरा गले में उतार लो... ओह... माँ... तेरी जीभ... आह मक्खन की तरह... लंड पर... कितनी गरम... मजा आ रहा है...

कुछ देर दोनों सास-बहू ने पीयूष का लंड चूसा, फिर सविता ने रानी को बगल में धकेला। वो खुद बिस्तर पर लेट गई, टांगें थोड़ी फैलाईं। पीयूष ऊपर आया, और अपना लंड सविता की चूचियों के बीच फँसा दिया। सविता ने दोनों चूचियाँ दबाकर लंड को बीच में जकड़ लिया – मोटी, नरम चूचियाँ लंड को दबा रही थीं। पीयूष ने कमर हिलानी शुरू की – लंड चूचियों के बीच अंदर-बाहर होने लगा। रानी अपनी सास की चूचियों को थाम कर उन्हें दबा रही थी और जिससे पीयूष को और गहराई मिले चूचियां चोदने में, साथ ही वो झुक कर अपनी सास के होंठों को चूस रही थी,

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रानी (सविता के होंठ चूसते, चूचियाँ दबाते): सासू माँ... देखो... आपकी चूचियाँ... कितनी मोटी... लंड को अपने में समा रही हैं... आह... कितना गरम लंड है... आपकी चूचियों के बीच... ओह... मैं दबाती हूँ...
सविता (आह भरते, रानी के होंठ चूसते): आह... बहू... तेरे हाथ... माँ की चूचियों पर... ओह... कितने गरम... पीयूष... बेटा... चोद... माँ की चूचियाँ... लंड से जैसे चूत चोदता है ... आह... रानी... तेरी जीभ घुसा... माँ के मुँह में... चूस... और चूस...

पीयूष (धक्के लगाते, लंड चूचियों में घिसते): आह... माँ... तेरी चूचियाँ... कितनी नरम... लंड को दबा रही हैं... ओह... रानी... दबाओ... माँ की चूचियाँ... और जोर से... देखो... लंड बाहर आ रहा है... चाट लो... माँ की चूचियों से निकलकर...
रानी ने वैसा ही किया और झुककर लंड का सुपारा चाटा – चूचियों के बीच से। सविता की चूचियाँ लार से चमक रही थीं, रस से लथपथ। रानी की जीभ कभी लंड तो कभी चूचियों के बीच से चाट रही थीं। पीयूष की सिसकियाँ तेज़ हो गईं।

कुछ देर बाद पीयूष ने सविता की चूचियों से लंड निकाला। रानी बिस्तर पर लेट गई, टांगें फैलाईं।
रानी: आह मम्मी आओ न मेरी चूत चाटो आह बहुत देर से तड़प रही है। आओ मेरी रंडी मम्मी चाटो अपनी बहू की चूत।
सविता: आह बहू तूने मेरे मन की बात कह दी आज तेरी चूत को खा जाऊंगी।
सविता उसके ऊपर झुकी, चूत पर जीभ फेरी – धीरे-धीरे, होंठ चूसते हुए। रानी की आह निकली। पीयूष सविता के पीछे आया, अपना लंड सविता की चूत पर रगड़ने लगा,
सविता रानी की चूत में ही सिसकने लगी,
रानी: ओह जी क्यों तड़पा रहे हो मम्मी को घुसा दो न।
पीयूष ने ये सुनकर वैसा ही किया और लंड अपनी मां की चूत में घुसा दिया। सविता की कमर अकड़ गई, लेकिन वो रानी की चूत चाटती रही।
सविता (रानी की चूत चाटते, पीयूष से): आह... बेटा... तेरी माँ की चूत... भर दी... ओह... रानी... बहू... तेरी चूत... कितनी गीली कितनी स्वाद है आराम से लेट ... माँ चाट रही है... रस पी रही है... आह... पीयूष... जोर से... माँ को चोद... बहू की चूत चाटते हुए...
पीयूष सविता की कमर थाम कर धक्के लगाने लगा,

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रानी अपनी सास के सिर को सहलाते हुए उसकी जीभ की हरकतों से मचल रही थी,
रानी (सिसकते हुए , सविता के बाल पकड़कर): मम्मी जी ... जीभ... अंदर... ओह... कितनी गरम... ओह जी ओह... देखो... सासू माँ मेरी चूत चाट रही हैं... आप... माँ को चोदो... जोर से... आह... मम्मी... चाटो... बहू की चूत... जैसे रंडी की चाटते हैं आह मम्मी जी।
पीयूष (धक्के लगाते): आह... माँ... तेरी चूत... कितनी कसी... ओह... रानी... देख... माँ तेरी चूत चाट रही है... जैसे प्यासी कुतिया दूध चाटती है... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ... चोदूँगा... चटवाऊँगा... रोज...
सविता की जीभ रानी की चूत में घूम रही थी, क्लिट को चूस रही थी । पीयूष के धक्कों से सविता का बदन हिल रहा था, जिससे उसकी जीभ और तेज़ चल रही थी।रानी का पूरा बदन उसकी सास की हरकतों से मचल रही थी, उसकी कमर बार बार घूम रही थी वो अपने चरम सुख की ओर बढ़ रही थी और क्यों न बढ़े उसकी सास उसकी चूत चाट रही थी, उसकी पति अपनी मां को चोद रहा था ये सब सोचते हुए रानी झड़ी – और रस सविता के मुँह में बहा दिया। सविता ने भी चटकारे लेते हुए सब चाटा, इधर पीयूष ने अपनी मां की चूत से लंड निकाल लिया तो सविता भी उसके सामने से हट गई
सविता के हटते ही पीयूष बिस्तर पर चढ़ कर आगे आया अपनी पत्नी की टांगों के बीच, रानी लेटे हुए हाफ रही थी, पीयूष ने उसकी दोनों टांगों को फैलाया और अपना कड़क लंड रानी की चूत पर घिसने लगा रानी एक बार फिर से मचलने लगी।
रानी: ओह आह हां जी घुसा दो न अपना मोटा लंड मेरी चूत में मत तड़पाओ,
पियूष ने अपने पत्नी की बात मानी और रानी की चूत में लंड घुसाया। जिससे रानी के मुंह से आह निकल गई, वहीं सविता भी रानी के बदन के ऊपर चढ़ कर रानी के मुँह पर बैठ गई – चूत रानी के होंठों पर टिका दी। रानी ने जीभ निकाली, और तुरंत सविता की चूत चाटने लगी। नीचे से पीयूष धक्के लगाने लगा।
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सविता (रानी के मुँह पर रगड़ते): आह... बहू... तेरी जीभ... मम्मी की चूत में... ओह... चाट... पूरा रस पी... पीयूष... बेटा... चोद अपनी पत्नी को... माँ की चूत चटवाते हुए... चोद अपनी पत्नी को आह और तेज धक्के लगा।
पीयूष: आह... रानी... तेरी चूत... कितनी कसी हुई... ओह... मम्मी... देखो... कैसे तुम्हारी बहू तुम्हारी चूत चाट रही है... आह रानी चूस लो मम्मी की चूत का सारा रस... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ...हो तुम दोनों आह आह आह।
पीयूष रानी की चूत में धक्के लगाते हुए बोला, सविता हाथ आगे कर रानी की चूचियों को मसल रही थी और पीयूष ने एक हाथ से अपनी मां के चेहरे को पकड़ लिया और अपनी ओर खींच कर उसके होंठों को चूसने लगा, तीनों आपस में जुड़े हुए थे, पीयूष का लंड रानी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, रानी की जीभ सविता की चूत में चल रही थी वहीं सविता और पियूष एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे,
कुछ देर बाद ही सविता रानी के मुंह पर कांप रही थी और अपने चरमसुख को महसूस कर रही थी उसकी चूत रानी के मुंह में अपना रस छोड़ रही थी जिसे रानी शरबत की तरह गटक रही थी, सविता झड़ने लगी और झड़ने के बाद रानी के मुंह से हटकर एक ओर गिर गई, पीयूष ने रानी को चोदना जारी रखा, रानी लगातार आहें भर रही थी,
सविता अपनी सांसों को संभालते हुए उठी और अपने बेटे और बहू के बगल में बैठ गई, उसे कुछ सुझा तो उसने अपनी दो उंगलियों को अपने मुंह में घुसा कर गीला किया और फिर रानी के चूत के नीचे की ओर ले गई जहां पीयूष का लंड अंदर बाहर हो रहा था और फिर थोड़ा नीचे लेजाकर वो रानी के गांड के छेद को अपनी उंगली से छेड़ने लगी,रानी मचलने लगी।
कुछ पल अपनी उंगली को रानी के गांड के छेद पर घुमाने के बाद उसने एक उंगली रानी की गांड में घुसा दी और रानी के मुंह से एक आह निकल गई, चूत में पति का लंड और गांड में सास की उंगली पाकर वो गन गना उठी, एक उंगली के अच्छे से घुसते ही सविता ने दूसरी उंगली भी उसकी गांड में सरका दी और अंदर बाहर करने लगी, रानी भी मजे से पागल होने लगी उसे दोहरी चुदाई का मज़ा जो मिल रहा था,
रानी: ओह मम्मी जी ओह आह आह आह आह मज़ा आ रहा है ओह जी चोदो और तेज,
इसी बीच सविता ने दूसरे हाथ की उंगलियों को भी मुंह में घुसा कर अच्छे से गीला किया और फिर कुछ पल बाद ही पीयूष की भी एक तेज सिसकी निकली, क्योंकि उसकी मां ने अचानक से एक उंगली पीछे से उसकी गांड में घुसा दी,
पीयूष: ओह आह आह आह मां ओह ये क्या आह,
पहली बार पीयूष अपनी मां की उंगली को अपनी गांड में महसूस कर उत्तेजना से भर गया, सविता ने रानी की तरह ही पीयूष की गांड में भी दो उंगलियों को घुसा दिया और अपना हाथ आगे पीछे करने लगी,
सविता अब एक साथ अपनी बहू और बेटे की गांड से खेल रही थी और दोनों पर ही इसका बहुत असर हो रहा था, पीयूष तो और तेजी से आहें भरते हुए रानी को चोदने लगा वहीं रानी का भी पूरा बदन अकड़ रहा था, दोनों के मुंह से ही अभी बस सिर्फ आहें और सिसकियां निकल रही थी,
सविता: आह आह आह मेरे बच्चों ओह ऐसे ही करते रहो एक दूसरे के साथ तुम्हारी मम्मी तुम्हारी गांड से खेल रही है,मज़ा आ रहा है न दोनों को,
सविता को इसका जवाब जल्दी ही मिला जब रानी और पीयूष एक साथ झड़ने लगे, रानी की कमर ऊपर उठ गई तो पीयूष ने गुर्राते हुए कुछ धक्के लगाए और अपना रस रानी की चूत में भरने लगा और एक के बाद एक धक्के लगा कर पूरा रस उसकी चूत में उड़ेल दिया। दोनों के झड़ते ही सविता ने अपनी उंगलियां दोनों की गांड से निकाल ली और फिर जैसे ही पीयूष ने अपना लंड रानी की चूत से निकाला सविता उसे अपने मुंह में भर कर चाट कर साफ करने लगी।


दूसरी ओर शहर के एक छोटे लेकिन भीड़भाड़ वाले रेस्टोरेंट में महिपाल, नीलेश और शैलेश एक कोने की टेबल पर बैठे थे। सामने प्लेट में गरमागरम परांठे, दाल, सब्जी और दही। लेकिन तीनों का ध्यान खाने से ज्यादा बातों पर था। बाहर धूप तेज थी, लेकिन अंदर एसी की ठंडक और बातों का जोश दोनों थे।
शैलेश ने परांठा तोड़ा, मुंह में डाला, फिर महिपाल की ओर देखा।
शैलेश (मुँह में परांठा रखते हुए): महिपाल भाई साहब... आज का काम तो हो गया। हस्ताक्षर, फाइल जमा... अब बस इंतजार। क्या लगता है... कितने दिन में परमिशन मिल जाएगी?
महिपाल ने चम्मच से दाल उठाई, मुंह में डाली। वो थोड़ा सोच में पड़ गया।
महिपाल (धीरे से, लेकिन मुस्कुराते): शैलेश... सच कहूँ तो... अफसरों का मूड है। लेकिन हमने जो कागजात तैयार किए... सब सही हैं। जमीन हमारी है, प्रोजेक्ट अच्छा है। लगता है... दो-तीन हफ्ते में क्लियर हो जाएगा। बस... थोड़ा इन लोगों के पीछे पड़ना पड़ेगा।
नीलेश ने दही का कटोरा अपनी तरफ खींचा, चम्मच से खाया।
नीलेश (हँसते हुए): वो तो हम करेंगे भाई साहब। जबतक काम नहीं हो जाता सालों की गांड के पीछे पड़े रहेंगे।
शैलेश: वैसे सालों की गांड है तो नहीं पीछे पड़ने लायक पर कोई नहीं काम है अपना।
इस पर तीनों हंसने लगे,
महिपाल: अरे शैलेश भाई तुम भी न अलग ही बात करते हो।
शैलेश: अरे सही तो कह रहा हूं गांड के पीछे पड़ना ही है तो गांड भी वैसी होनी चाहिए कि देखने और पीछे लगने में मज़ा आए।
इसी बीच महिपाल के फोन पर व्हाट्स ऐप मैसेज आता है तो महिपाल फोन उठा कर देखने वाला ही होता है कि शैलेश उसे कहता है: अरे भाई साहब तुम्हारे पास जमीन के और सारे कागजों के फोटो तो हैं न?
महिपाल: हां सब के हैं। अभी जमा करने से पहले ही खींचे थे।
शैलेश: मुझे भेज दो कोई जान पहचान निकालता हूं अगर निकल गई तो अपना काम यूं हो जाएगा।
महिपाल: अभी भेजता हूं,
महिपाल तुरंत शैलेश को सारे फोटो भेज देता है। उसके बाद जो मैसेज आया था उसे देखता है वो पीयूष का था पहले लिखा था पापा इसे अकेले में खोलना और उसके साथ एक वीडियो था। महिपाल तुरंत सतर्क हो जाता है और दोनों से कहता है: मैं हाथ धो कर आता हूं, और फिर अकेले में आकर वो वीडियो खोल कर देखता है तो उसकी आँखें चौड़ी हो जाती हैं

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वो देखता है वीडियो में उसकी बहू और पत्नी एक दूसरे के बगल में बिल्कुल नंगी होकर लेटी हैं दोनों ने अपनी टांगों को पीछे की ओर मोड़ रखा है जिससे उनकी गांड और चूतड़ पूरी तरह खुले हुए दिखाई दे रहे हैं उसकी बहू की गांड में बेटे का लंड है जिसे वो एक हाथ से पकड़ कर निकालता है क्योंकि दूसरे हाथ से उसने फोन पकड़ रखा था और वीडियो बना रहा था, वो रानी की गांड से लंड निकालता है और फिर सविता की गांड के सामने आता है और अपना लंड सविता की गांड के छेद पर रखता है और फिर अंदर घुसा देता है, महिपाल को अपनी पत्नी की गांड में अपने बेटे का लंड घुसता हुआ साफ दिखता है ये देख तो उसके बदन में भी सिहरन होने लगती है और उसका लंड कड़क होने लगता है, इतने में पीछे से उसे नीलेश बुलाते हैं तो वो फोन को बंद करके तुरंत जेब में रख लेता है और उनके पास चला जाता है।

खाने के बाद तीनों बापिस दफ्तर में जाकर फाइल जमा कराते हैं वहीं महिपाल के मन में तो वही घूम रहा था वो सोचता है कि उसका परिवार कितना अलग हो गया है इन लोगों से, बताओ ये लोग सोच भी नहीं सकते कि घर पर मेरा बेटा अपनी पत्नी और मां की गांड मार रहा होगा, उसका मन अब काम से हटकर कामसुख पर लग रहा था,
फाइल जमा करा के वो लोग बाहर निकल ही रहे थे कि एक औरत ने उन्हें रोका,
औरत: भाई साहब आपके पास पेन होगा मुझे फॉर्म पर साइन करने हैं
नीलेश: हां हां लीजिए ना।
औरत: धन्यवाद बस 5 मिनिट रुकिए अभी देती हूं।
औरत पेन लेकर थोड़ा आगे जाकर खड़ी हो कर फार्म भरने लगती है और वो लोग वहीं खड़े होकर बातें करने लगते हैं, इसी बीच उस औरत का पल्लू उसके कंधे से सरक जाता है और तीनों की नज़रें उसके ब्लाउज़ में बंद बड़ी बड़ी चूचियों और उसकी गोरी कमर पर ठहर जाती है
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औरत जल्दी से ही अपने पल्लू को ठीक करती है और तीनों बापिस अपनी नज़र हटाते हैं और एक दूसरे को देखते हैं और मुस्कुराते हैं
शैलेश: हाय क्या नजारा है इसने तो मेरा पेन खड़ा कर दिया।
नीलेश: सही में यार।
महिपाल भी औरत के बदन को देख कर थोड़ा गरम हुआ था पर वो थोड़ा झिझकते हुए बोला: अरे यार आप लोग भी न क्या बोल रहे हो।
शैलेश: अरे महिपाल भाई साहब काहे इतना झिझक रहे हो अच्छा खुद ही बताओ तुम्हें नज़ारा पसंद नहीं आया?
महिपाल: अरे ऐसी बात नहीं है
शैलेश: अरे महिपाल भाई अब हम लोग दोस्त भी हैं और पार्टनर भी तो अब सब झिझक भूल जाओ, अब आपस में ही एक दूसरे के सामने खुल कर नहीं बोलेंगे तो कब बोलेंगे।
नीलेश: और क्या बिल्कुल सही कहा,
महिपाल को खुलने की बात सुनकर एक झटका सा लगा वो सोचने लगा ये लोग सही बोल रहे हैं ये ही मौका खुलने का, अब मेरा जीवन जितना खुल चुका है उतना ये लोग न खुल सकें तो न सही पर इन लोगों के साथ भी ऐसी मस्त तो कर ही सकता हूं। इतने में ही वो औरत आई और नीलेश को पेन देकर चली गई।
महिपाल: वैसे इसकी गांड के पीछे लगना पड़ता तो मज़ा आता,
महिपाल ने धीरे से बोला तो वो दोनों भी हंसने लगे,
शैलेश: ये हुई न बात महिपाल भाई साहब, अब खुल कर मन की बात कही है तुमने।
शैलेश ने आगे चलते हुए दफ्तर से बाहर आते हुए कहा, बाकी दोनों भी उसके बगल में चल रहे थे।
महिपाल: अब तुमने दोस्त मान लिया है तो दोस्तों के साथ तो खुलना ही पड़ेगा ना।
नीलेश: बिल्कुल, दोस्ती का पहला नियम तो यही कहता है।
महिपाल: अच्छा भाई साहब तो दोस्ती के और कौन से नियम हैं?
नीलेश: दोस्त हर मजा साथ में लेते हैं चाहे वो शराब का हो या शबाब का।
शैलेश: तो फिर आज करें फिर प्रोग्राम नई दोस्ती के नाम?
महिपाल: कैसा प्रोग्राम?
शैलेश: अरे समझ जाओ भाई साहब, शराब का।
नीलेश: कर सकते हैं क्यों महिपाल भाई क्या कहते हो ?
महिपाल: हां बिल्कुल पर शबाब का क्या?
शैलेश: अरे महिपाल भाई तो पूरे जोश में हैं, वैसे शराब का पहले बनाते हैं शबाब का भी मौका मिला तो जल्दी ही करेंगे।
महिपाल: ये भी ठीक है
नीलेश: शैलेश घुमाओ गाड़ी फिर ठेके की तरफ।
शैलेश: नेकी और पूछ पूछ। वैसे बैठेंगे कहां?
नीलेश: कहीं भी बैठ जाएंगे जगह की कमी थोड़ी ही है।
महिपाल: पिछली बार की तरह करते हैं आप लोग आ जाओ हमारे घर।
नीलेश: अरे पिछली बार भी तुम्हारे यहां ही बैठे थे इस बार सेवा का मौका हमें दो।
महिपाल: नहीं भाई साहब दोस्ती की शुरुआत तो मेरे यहां से ही होगी, आगे से तुम जैसा चाहो वैसे कर लिया करेंगे।
शैलेश: चलो ठीक है महिपाल भाई तुम्हारा घर हो या हमारा बात तो एक ही है।
महिपाल: वैसे शबाब का क्या करना है? तुम लोगों को शराब के बाद शबाब जरूरी लगता है।
नीलेश: हां भाई साहब नशे के बाद बिना चुदाई के नहीं रहा जाता।
शैलेश: नशे का असली मज़ा तो तभी आता है।
महिपाल: तो पिछली बार की तरह ही करते हैं न आप लोग भाभियों को लेकर आ जाना।
नीलेश: वो सब तो ठीक है पर फिर बच्चे? उनके सामने ये सब करना अच्छा नहीं लगता ना।
महिपाल: अरे कुछ नहीं होगा बच्चे नीचे सो जाएंगे हम लोग ऊपर छत पर अपना प्रोग्राम करेंगे। फिर आगे के प्रोग्राम के लिए कमरों में चले जाएंगे।
नीलेश: चलो ठीक है ऐसा ही करते हैं पहले अपनी अपनी पत्नियों को भी तो मनाना पड़ेगा।
तीनों बातें करते हुए गाड़ी में आगे बढ़ जाते हैं, आगे क्या क्या करना ह उस बारे में सोचते हुए।

इधर चोदम पुर में शाम की चाय चल रही थी, कर्मा, सभ्या और अंजली कमरे से बाहर निकल चुके थे और सबके साथ बैठ कर चाय पी रहे थे, अंजली को थोड़ी शर्म और झिझक हो रही थी क्योंकि अभी वो अंदर चुदाई कर रही थी और ऐसे अब सब के सामने बैठी थी, हालांकि सब कुछ बिल्कुल साधारण लग रहा था आपस में बातें, नौकझोंक ये सब देख उसे बहुत अच्छा लग रहा था,
किरन: भाभी बोर तो नहीं हो रही ना?
किरन ने अंजली से पूछा, तो अंजली थोड़ी शर्मा गई और बोली: अभी से भाभी?
पल्ली: अरे भाभी हो तो भाभी ही बोलेंगे न भाभी।
शालू: अरे बच्चों क्यों परेशान कर रहे हो उसे? इतनी प्यारी बच्ची है।
किरन: बुआ बड़ा प्यार आ रहा अपनी बहू पर।
शालू: तुम लोग पिटोगे अभी।
अंजली: अरे कोई बात नहीं मौसी बुलाने दो, अच्छा लगता है।
ये कह कर वो शर्मा गई तो सब हंसने लगे।
पल्ली: चलो न भाभी हमारे साथ थोड़ा घूम कर आते हैं गांव में।
किरन: हां और बहुत सी बातें भी करनी हैं तुमसे।
सागर: अरे हम लोगों को भी बातें करनी थी भाभी से।
अनुज: और क्या तुम लोग ही क्यों करेंगे।
पल्ली: ननद पहले देवर बाद में।
दोनों अंजली को लेकर चली गईं। बाकी घर में सब अपने काम में लग गए।

जारी रहेगी
 

TharkiPo

I'M BACK
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Bhai apke yeah story one of the best story hai iss forum ki
Iss par review dene ke liya hei maine yeah I'd banaiye maine apki story ke first se lekar last tak saare part padhe hai
Mujhe aisa lagta hai ki apke new updates mai sex scene detail mai nhi hota hai I mean seductive ness thoda kam kam hogaya jaise last updated mai sabhya wale seen mai sidha sex tha group wala aur dusra ek update mai aap ne teeno family ka thoda thoda likha bich bich Mai dusre taraf story chale jate hai jisse ek taraf ka link bigadne lagata hai I suggest jab tak ek ka seen khatam na hojaye dusre ko na laye
Thank u for a wonderful story

Bahut hi badhiya update..hone wali saas aur Bahu ka sambhog bahot hi garam tha ab parivar ke baki logo ke sath kaise ghulti hai Anjali ye padhne ka intezar rahega,sath hi sath Anjali ke mayake mai bhi kamukta badhti hi ja rahi hai ye padh ke bahot anand mila..pratiksha rahegi agle update ki.

Atyanth kammuk update Bhai Maza agaya

Bah

Bahot hi behtareen update aajkal ekdum time se update aa rahe hai.
Bhai jis tarah se har cheez ka itna kamuk description dete ho maza aa jata hai.
Kabhi bhi aisa nahi lagta ki story fast jaa rahi bas sex ho gaya har jagah ki kahani ko ekdum smoothly balance karte ho. Naye update ki Excitement hamesha bani rahti hai

Update nahi balki ye is site per bhopal hi .asadharn , fantastic gajab update hi three some mi .bus hi update dete rahiye ho sake to threesome wale

Pichle kuch updates ko padh kr ye to pta lag gya ki ye purane wala tharkipo nhi h ye koi naya hi Banda h..


Bhai kya likhe ho yaar. Sala Lund bait hi nhi rha h. Ab lagta h karma ke sasural me bhi jaldi sab khul jayenge. Sabya ne to maa aur beti dono ka swad chakh liya h. Ab to bas dono family ke ek hone ka wait kar rhe h. Tharkipo bhai Rimjhim ki bhi kuch khabar de do.
Bhai ek request h ki wo pen wala game khel kar karma aur uske sasural ke family open ho to maza aa jayega. Jaise rimmi aur purvi ke family open hue the. Jo bhi likhte ho kamaal h.
Just लंड फार अपडेट।

Jabardast update karma or ajnali ki jodi to tehlka macha degi maza aagaya jab karma or anjali ki jodi ghar ki baki mahilao ke sath hogi maza aajayga karma or anujh ki shaffi ek sath karwana or dono ki shuag raat ek dusre ki bahu ke sath or sath me unke maa or pitaji maza ajayga bhai

Bhai kya wonderful update tha
Sabhya anjali aur karma ka mast sex scene tha karma ki family ke scene waise bhi mast rehte hai
Sabse accha tha ki apne ek scene ko complete Kiya thoda ek scene phir dusri taraf lejana wapas purane scene par aana aisa nhi kiya jissa sex ke bich ka link nhi tuta
Waiting for more wonderful updates
And thank you for a beautiful update

Kya dhamakedar update likha hai maza aa gaya , waise ek chota sa suggestion hai ki aage ek sabhya ka gangbang scene dikhao karma , vineet aur sagar ke saath ya karma , rajan aur shailesh ke saath

Intejar hey anjeli. Karma aur nilesh ka threesome...

Wah Bhai Kya Kamal ka update diya hai itne din Thoda busy tha aur I'd ki bhi Kuch problem thi isliye padh nahi paya tha ab Free hu
Bhai hinglish hai Kyu Hindi mein chale gaye khair Bhai land khada kardenewale update hai sabhya karma Anjali ka threesome ab age dekhte hai Anjali Kya srif sabhya k sath hi Karke Chalo jayegi Apne Ghar ya koi aur bhi shamil hoga aur uske Ghar mein saas bahu Konsa nayi cheez Karne wale hai dekhte hai
Waise update k staring mein sabya ka srif dhoti pehene baccho ka Kisi na Kisi k sath sex bohut excited tha ab agle update ka intezar hai ummed karta hu jaldi milega

I would not say this the best compared to previous ones but the progression is mostly satisfactory.

For upcoming update apse ek vinti hain anjali k parivaar ki chudai k bakht hone vali batein thora aur kamuk ho karma k Sashi bua aur charu Mami k ghar k jaisa.
Wish u would continue to offer such wonderful updates.

Sorry dear, I have actually lost access to my previous mail, so I could not log in to the site.

Hope you like the translation, enjoy.

Lajabab update bro

Awesome update bro

Bhai koi iss story ki pdf bna kar upload krdo.

Bhai aap bhi apni story ka update do ...mast story tha

Waiting for next marvelous update

new update ka inntzaaar kar rahi hunnn...........

Bhi ji apki jitni tarif ki jaye utni he kam pichle 3saal se iss forum pr khaniya pd raha hu pr apki khani no.1pr hai bhi bhut he hot likhte ho

You are the sweetest soul.

Waiting for update

Bhai ek hi font me likho ya to Hindi ya hinglish page badh jate hai

Ek update de ke 2-3 mahine gayab ho jato ho

So many days passed where are you bro

Bhai ek tadakta phadakta update do ki khada ho jaaye

Bro hinglish ma likho

Bangali taina😂😂


Kahani ka ras khatam ho gya writer change hone se 😞

Bhai mujhe bhi tumhari tarah pardne me dikkat ho raha he

Kha chale gye ho bhai
Please update de do na yrr

Nice update


Bhaiji update ki bahut din se pratiksha h.agar swasthya sahi ho gaya ho to kripya story update kare.besabri se intjar h

I don’t usually comment, but this story forced me to compel on your writing skills.
This is on another level. The chemistry between real blood relatives here is so thick you could cut it with a knife. Writing a scene where everyone is fucking their own family member right in front of each other takes a lot of guts, and you nailed it. The adultery and the raw lust in that room made this the most addictive story yet. Absolutely top-tier. I’ve re-read this many more times already and I’ve lost count of how many times I’ve re-read this—it’s impossible to keep track anymore brother. It's absolutely top-tier, And I’m still breathless.
Please don’t disappear like this. Me and your readers are waiting desperately. This story deserves consistency in updates, and we deserve the next chapter ASAP. Drop the update soon — we’re starving for it!

Please try to update a bit faster! You started this story back in 7th Jun 2020, and ever since I finished those first 15 chapters, not a single day has passed where I haven't checked for a new update. I'm literally checking every day just hoping to see more of this family's madness.

Love u brother ❤️ 😍

Intezar....

Bhai ji intezaar nhi ho rha please jaldi se ek tadakta bhadkta update de do please brother gifts 🎁 ke sath

Bhai 3 month update bhool jao

Please Give me this: patreon.com/TubeIndia

Intejar hai bhai update ka is chakar me is story ko me 4 bar padh liya hu fir bhi kuch naya hi kick Hai story me

अपडेट की प्रतीक्षा है

Bhaiji thik to ho na.kuch to reply kr dijiye

Bhai update de dijiye

Bhai update to do...kb tk update doge.....

Waiting for your update


Bhai ji update de do please

Shandaar update likthe raho
अपडेट नंबर 256 पेज नं 1256 पर पोस्ट कर दिया है, थोड़ी देर हुई उसके लिए माफी चाहता हूं आप लोग समझ सकते हैं कि बहुत कुछ संभालना होता है, बाकी अपडेट पर लाइक और कमेंट पूरे होने चाहिए उसमें कोई छूट नहीं है, आप लोगों के प्यार की वजह से ही ये कहानी चल रही है और अगर चाहते हैं चलती रहे तो अपना प्यार हर तरह से दें, बहुत बहुत धन्यवाद।।
 

keepinsimple99

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Hamesha ki tarah bahot badhia update..anjali bhi ab ghulne Milne lagi hai karma ke parivar se padh ke acha laga
 
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Rony1

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Bhai itne din bad update diya ab Jara jaldi diya karo wah maa beta bahu ka Kya threesome hai Maza agaya umeed hai agle update mein mahipal ko bhi nilesh k pariwar ka Kuch toh jalak mile man hi man bohut der sana ban Raha hai ki uske pariwar jaisa koi NAHI uske Kya pata nilesh ka pariwar uske bhi 10 kadam age hai aur ab uski beti bhi samil ho Rahi hai ab Bhai jaldi se Anjali ko uske Bhai aur baap se chduwao fir did pariwar ka Milan karwao aur update Jara jaldi dene nj korshi Karna Bhai
 
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Arthur Morgan

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जहां अंजली कर्मा के साथ उसके घर पर नए रिश्ते बना रही थी वहीं गैंदापुर में उसकी मां और भाभी भी कुछ नया कर रही थी,

अपडेट 256

दोनों सास बहू अभी आंगन में थी और दोनों के बदन पर अभी बस एक एक। बैंगनी रंग की पेंटी थी और चेहरे पर कामुक मुस्कान और शर्म का मिश्रण था

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रानी: कितना अजीब लग रहा है न मम्मी जी हम लोग ऐसे हम लोग आंगन में घूम रहे हैं।
सविता: अजीब तो है पर मज़ेदार भी, गर्मी में ऐसे ही रहना चाहिए,
सविता ने हंसते हुए कहा, और फिर दोनों हंसने लगी,
रानी: अब चलते हैं ये इंतजार कर रहे होंगे आखिर उन्हें ही हमें घर में ऐसे देखना था,
सविता: हां चल बेटा।
दोनों फिर आगे बढ़ कर पीयूष और रानी के कमरे की ओर चल दी, जहां पीयूष पहले से ही उनका इंतजार कर रहा था उसके बदन पर भी बस एक कच्छा था, दोनों ने देखा कि पीयूष बिस्तर पर लेटा हुआ था तीनों की नज़रें मिली और पीयूष के चेहरे पर मुस्कान आ गई अपनी मां और अपनी पत्नी को इस रूप में देख कर।
रानी: ऐसे क्या देख कर मुस्कुरा रहे हो तुमने ही कहा था न ऐसे ही घूमने को।
पीयूष: हां कहा था और बिल्कुल सही कहा था बहुत सुन्दर लग रही हो दोनों लोग।
रानी: हां तुम्हे तो सुंदर लगेंगे ही नंगे जो घूम रहे हैं।
रानी ने उसे छेड़ते हुए कहा और बिस्तर पर चढ़ गई,
पीयूष: अरे कपड़े तुम्हारी सुंदरता को छिपाते हैं अब असली सुंदरता तो ऐसे ही नज़र आती है, मम्मी आओ न तुम भी बैठो।
सविता: हां आई,
सविता भी आगे बढ़ कर बिस्तर पर चढ़ जाती है और बैठ जाती है।

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पीयूष भी आगे होकर अपनी मां के होंठों को चूमने लगता है वहीं रानी पीछे से अपनी सास के बदन को सहलाती है फिरउसने सास की कमर पकड़ी, पीठ पर होंठ रख दिए। धीरे-धीरे जीभ से पीठ चाटने लगी – कंधे से लेकर कमर तक। सविता की साँसें तेज़ हो गईं।
रानी (सविता के कान में, जीभ फेरते हुए): सासू माँ... आपकी पीठ... कितनी नरम... कितनी गरम... मन करता है पूरा बदन चाट जाऊँ...
सविता (आह भरते हुए): बहू... तेरी जीभ... ओह... माँ की पीठ पर... कितना अच्छा लग रहा है... पीयूश... बेटा... देख... तेरी पत्नी तेरी माँ को कैसे चाट रही है... आ... तू भी आ... अपनी माँ की चूचियाँ... चूस...
पीयूश ने आगे बढ़कर सविता की एक चूची मुंह में ले ली। जोर से चूसा। निप्पल को जीभ से घुमाया, दांतों से हल्का कसा। सविता की कमर अकड़ गई। रानी ने पीछे से सविता की दूसरी चूची हाथ में ली, और उसे मसलने लगी।
रानी (चूची मसलते हुए): मम्मी जी... आपकी चूचियाँ... कितनी भरी हुई... ओह... कितनी नरम? ओह... देखो... तुम्हारी माँ का निप्पल... कितना सख्त... चूसो... पूरा निचोड़ लो...
थोड़ी देर बाद पीयूष अपनी मां की चूची को छोड़ता है और रानी के होंठों को चूसने लगता है इतने में सविता पीयूष के कच्छे की लास्टिक में उंगलियां फांसती है और उसे नीचे खिसकती है और पूरी तरह से पैरों से निकाल देती है तो पियूष का लंड उछल कर बाहर आ जाता है, जिसे सविता हाथ में लेकर प्यार से सहलाने लगती है, अपनी मां के हाथों में लंड का स्पर्श पाकर आह निकलती है और वो रानी के होंठों से अपने होंठ अलग करता है, रानी अलग होती है और उठ कर झट से अपनी पैंटी उतार कर पूरी नंगी हो जाती है उसकी देखा देखी सविता भी अपनी कच्छी उतार देती है और नंगी हो जाती है, पीयूष बिस्तर के बीच में लेट जाता है वहीं सविता और रानी उसके एक एक ओर बिस्तर पर चढ़ जाती हैं
रानी आगे झुक कर अपनी सास की चूची को मुंह में भर लेती है वहीं पीयूष रानी के बदन को सहलाने लगता है
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सविता: ओह बहू आह ऐसे ही आह मज़ा आ रहा है खा जा मेरी चूचियों को।
पीयूष: आह क्या पत्नी और मां पाई है मैने आह रानी ओह।
पीयूष रानी के चूतड़ों को सहलाते हुए बोला।
रानी अपनी सास की चूचियों को बदल बदल कर चूस रही थी वहीं सविता उसके सिर को अपनी चूचियों पर दबा रही थी, वहीं पीयूष उसकी कमर और चूचियों को चूम रहा था, वहीं रानी का एक हाथ उसके पति के लंड को पकड़ कर सहला रहा था,
सविता: आह बच्चों ओह ऐसे ही आह ओह मेरे बच्चों ओह ओह।
रानी ने जी भर के अपनी सास की चूचियों को चूसा फिर जा कर छोड़ा और फिर बिना समय गंवाए, अपने पति के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी,
पीयूष के मुंह से सिसकियां निकलने लगी।
पीयूष: आह रानी अह कितना गरम मुंह है तेरा ओह मज़ा आ रहा है ऐसे ही चूसती रह।
पीयूष ने कहा और फिर हाथ बढ़ा कर अपनी मां के चूतड़ों को पकड़ लिया और उन्हें अपनी ओर खींचने लगा, सविता भी उसका इशारा समझ गई और तुरंत आगे बढ़ कर अपने बेटे के चेहरे पर बैठ गई, उसके बैठते ही पीयूष ने अपनी मां की चूत में जीभ चलाना शुरू कर दिया, और सविता अपने बेटे की जीभ के इशारों पर मचलने लगी,


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सविता: ओह आह बेटा आह चाट अपनी मां की चूत को ओह आह इसी चूत से निकला था तू ओह आह आज बापिस घुसा अपनी जीभ ओह।
सविता ने गरम होते हुए बोला
पीयूष के हाथ अपनी मां की गरम बातों को सुन कर उसके चूतड़ों पर कस गए वहीं रानी तो बिना विराम लिए अपने पति के लंड को चूस रही थी,
वहीं सविता अपने बेटे से अपनी चूत चटवा रही थी उसकी चूत लगातार गीली होकर बह रही थी,
कुछ देर बाद सविता ने अपने बेटे के मुँह से धीरे से अपनी कमर ऊपर उठाई। पीयूष की जीभ अभी भी उसकी चूत से चिपकी हुई थी, जैसे छोड़ना न चाहती हो। सविता की चूत गीली, रस से चमक रही थी – बेटे की लार और अपना रस मिलकर। वो हाँफते हुए मुस्कुराई, रानी की ओर देखा जो अभी भी पीयूष के लंड को सहलाते हुए चूस रही थी।
सविता (हाँफते हुए): बहू... अब तू अकेली क्यों खेल रही है? आ... माँ-बहू मिलकर बेटे की सेवा करें... देख... कितना कड़क है... हम दोनों का इंतजार कर रहा है...
रानी ने लंड से हाथ नहीं हटाया, बल्कि सविता को अपनी ओर खींचा। सविता घुटनों के बल बिस्तर पर झुकीं, पीयूष के लंड के ठीक सामने। सविता ने पहले जीभ फेरी – लंड के सुपारे पर, धीरे-धीरे गोल-गोल। पीयूष की आह निकली। रानी ने सामने से सविता की चूची पकड़ी, मसली, और फिर अपना मुँह लंड पर रख दिया – सविता के साथ मिलकर चूसने लगी। दोनों की जीभें लंड पर टकरा रही थीं, रस चाट रही थीं, होंठ मिलाकर लंड को बीच में दबा रही थीं। तो कभी एक दूसरे को होंठों को चूस रही थी

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रानी (लंड चूसते हुए, सविता से): ओह मम्मी... आपका बेटा... कितना मोटा लंड रखता है... आह... चूसने में मजा आ रहा है ना।
सविता (रानी की जीभ से टकराते हुए, आह भरकर): आह... बहू... तू भी चाट... सास बहु की जीभ एक साथ आह... बेटे के लंड पर... ओह... कितना गंदा लग रहा है... लेकिन... मजा दोगुना... पीयूष... बेटा... देख... तेरी माँ और बहू... तेरा लंड... मिलकर... चूस रही हैं... जैसे रंडियाँ... आह... तेरा लंड... कितना गरम है।

पीयूष ने दोनों के सिर पकड़े, धक्के लगाने लगा – लंड दोनों के मुँह में बारी-बारी घुसा रहा था। कमरा आहों और चूसने की चपचप आवाजों से भर गया। सविता और रानी की चूचियाँ आपस में टकरा रही थीं, निप्पल्स सख्त होकर रगड़ खा रही थीं।
पीयूष (सिसकते हुए): आह... माँ... रानी... दोनों... मेरी रंडियाँ... चूसो... पूरा गले में उतार लो... ओह... माँ... तेरी जीभ... आह मक्खन की तरह... लंड पर... कितनी गरम... मजा आ रहा है...

कुछ देर दोनों सास-बहू ने पीयूष का लंड चूसा, फिर सविता ने रानी को बगल में धकेला। वो खुद बिस्तर पर लेट गई, टांगें थोड़ी फैलाईं। पीयूष ऊपर आया, और अपना लंड सविता की चूचियों के बीच फँसा दिया। सविता ने दोनों चूचियाँ दबाकर लंड को बीच में जकड़ लिया – मोटी, नरम चूचियाँ लंड को दबा रही थीं। पीयूष ने कमर हिलानी शुरू की – लंड चूचियों के बीच अंदर-बाहर होने लगा। रानी अपनी सास की चूचियों को थाम कर उन्हें दबा रही थी और जिससे पीयूष को और गहराई मिले चूचियां चोदने में, साथ ही वो झुक कर अपनी सास के होंठों को चूस रही थी,

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रानी (सविता के होंठ चूसते, चूचियाँ दबाते): सासू माँ... देखो... आपकी चूचियाँ... कितनी मोटी... लंड को अपने में समा रही हैं... आह... कितना गरम लंड है... आपकी चूचियों के बीच... ओह... मैं दबाती हूँ...
सविता (आह भरते, रानी के होंठ चूसते): आह... बहू... तेरे हाथ... माँ की चूचियों पर... ओह... कितने गरम... पीयूष... बेटा... चोद... माँ की चूचियाँ... लंड से जैसे चूत चोदता है ... आह... रानी... तेरी जीभ घुसा... माँ के मुँह में... चूस... और चूस...

पीयूष (धक्के लगाते, लंड चूचियों में घिसते): आह... माँ... तेरी चूचियाँ... कितनी नरम... लंड को दबा रही हैं... ओह... रानी... दबाओ... माँ की चूचियाँ... और जोर से... देखो... लंड बाहर आ रहा है... चाट लो... माँ की चूचियों से निकलकर...
रानी ने वैसा ही किया और झुककर लंड का सुपारा चाटा – चूचियों के बीच से। सविता की चूचियाँ लार से चमक रही थीं, रस से लथपथ। रानी की जीभ कभी लंड तो कभी चूचियों के बीच से चाट रही थीं। पीयूष की सिसकियाँ तेज़ हो गईं।

कुछ देर बाद पीयूष ने सविता की चूचियों से लंड निकाला। रानी बिस्तर पर लेट गई, टांगें फैलाईं।
रानी: आह मम्मी आओ न मेरी चूत चाटो आह बहुत देर से तड़प रही है। आओ मेरी रंडी मम्मी चाटो अपनी बहू की चूत।
सविता: आह बहू तूने मेरे मन की बात कह दी आज तेरी चूत को खा जाऊंगी।
सविता उसके ऊपर झुकी, चूत पर जीभ फेरी – धीरे-धीरे, होंठ चूसते हुए। रानी की आह निकली। पीयूष सविता के पीछे आया, अपना लंड सविता की चूत पर रगड़ने लगा,
सविता रानी की चूत में ही सिसकने लगी,
रानी: ओह जी क्यों तड़पा रहे हो मम्मी को घुसा दो न।
पीयूष ने ये सुनकर वैसा ही किया और लंड अपनी मां की चूत में घुसा दिया। सविता की कमर अकड़ गई, लेकिन वो रानी की चूत चाटती रही।
सविता (रानी की चूत चाटते, पीयूष से): आह... बेटा... तेरी माँ की चूत... भर दी... ओह... रानी... बहू... तेरी चूत... कितनी गीली कितनी स्वाद है आराम से लेट ... माँ चाट रही है... रस पी रही है... आह... पीयूष... जोर से... माँ को चोद... बहू की चूत चाटते हुए...
पीयूष सविता की कमर थाम कर धक्के लगाने लगा,

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रानी अपनी सास के सिर को सहलाते हुए उसकी जीभ की हरकतों से मचल रही थी,
रानी (सिसकते हुए , सविता के बाल पकड़कर): मम्मी जी ... जीभ... अंदर... ओह... कितनी गरम... ओह जी ओह... देखो... सासू माँ मेरी चूत चाट रही हैं... आप... माँ को चोदो... जोर से... आह... मम्मी... चाटो... बहू की चूत... जैसे रंडी की चाटते हैं आह मम्मी जी।
पीयूष (धक्के लगाते): आह... माँ... तेरी चूत... कितनी कसी... ओह... रानी... देख... माँ तेरी चूत चाट रही है... जैसे प्यासी कुतिया दूध चाटती है... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ... चोदूँगा... चटवाऊँगा... रोज...
सविता की जीभ रानी की चूत में घूम रही थी, क्लिट को चूस रही थी । पीयूष के धक्कों से सविता का बदन हिल रहा था, जिससे उसकी जीभ और तेज़ चल रही थी।रानी का पूरा बदन उसकी सास की हरकतों से मचल रही थी, उसकी कमर बार बार घूम रही थी वो अपने चरम सुख की ओर बढ़ रही थी और क्यों न बढ़े उसकी सास उसकी चूत चाट रही थी, उसकी पति अपनी मां को चोद रहा था ये सब सोचते हुए रानी झड़ी – और रस सविता के मुँह में बहा दिया। सविता ने भी चटकारे लेते हुए सब चाटा, इधर पीयूष ने अपनी मां की चूत से लंड निकाल लिया तो सविता भी उसके सामने से हट गई
सविता के हटते ही पीयूष बिस्तर पर चढ़ कर आगे आया अपनी पत्नी की टांगों के बीच, रानी लेटे हुए हाफ रही थी, पीयूष ने उसकी दोनों टांगों को फैलाया और अपना कड़क लंड रानी की चूत पर घिसने लगा रानी एक बार फिर से मचलने लगी।
रानी: ओह आह हां जी घुसा दो न अपना मोटा लंड मेरी चूत में मत तड़पाओ,
पियूष ने अपने पत्नी की बात मानी और रानी की चूत में लंड घुसाया। जिससे रानी के मुंह से आह निकल गई, वहीं सविता भी रानी के बदन के ऊपर चढ़ कर रानी के मुँह पर बैठ गई – चूत रानी के होंठों पर टिका दी। रानी ने जीभ निकाली, और तुरंत सविता की चूत चाटने लगी। नीचे से पीयूष धक्के लगाने लगा।
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सविता (रानी के मुँह पर रगड़ते): आह... बहू... तेरी जीभ... मम्मी की चूत में... ओह... चाट... पूरा रस पी... पीयूष... बेटा... चोद अपनी पत्नी को... माँ की चूत चटवाते हुए... चोद अपनी पत्नी को आह और तेज धक्के लगा।
पीयूष: आह... रानी... तेरी चूत... कितनी कसी हुई... ओह... मम्मी... देखो... कैसे तुम्हारी बहू तुम्हारी चूत चाट रही है... आह रानी चूस लो मम्मी की चूत का सारा रस... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ...हो तुम दोनों आह आह आह।
पीयूष रानी की चूत में धक्के लगाते हुए बोला, सविता हाथ आगे कर रानी की चूचियों को मसल रही थी और पीयूष ने एक हाथ से अपनी मां के चेहरे को पकड़ लिया और अपनी ओर खींच कर उसके होंठों को चूसने लगा, तीनों आपस में जुड़े हुए थे, पीयूष का लंड रानी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, रानी की जीभ सविता की चूत में चल रही थी वहीं सविता और पियूष एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे,
कुछ देर बाद ही सविता रानी के मुंह पर कांप रही थी और अपने चरमसुख को महसूस कर रही थी उसकी चूत रानी के मुंह में अपना रस छोड़ रही थी जिसे रानी शरबत की तरह गटक रही थी, सविता झड़ने लगी और झड़ने के बाद रानी के मुंह से हटकर एक ओर गिर गई, पीयूष ने रानी को चोदना जारी रखा, रानी लगातार आहें भर रही थी,
सविता अपनी सांसों को संभालते हुए उठी और अपने बेटे और बहू के बगल में बैठ गई, उसे कुछ सुझा तो उसने अपनी दो उंगलियों को अपने मुंह में घुसा कर गीला किया और फिर रानी के चूत के नीचे की ओर ले गई जहां पीयूष का लंड अंदर बाहर हो रहा था और फिर थोड़ा नीचे लेजाकर वो रानी के गांड के छेद को अपनी उंगली से छेड़ने लगी,रानी मचलने लगी।
कुछ पल अपनी उंगली को रानी के गांड के छेद पर घुमाने के बाद उसने एक उंगली रानी की गांड में घुसा दी और रानी के मुंह से एक आह निकल गई, चूत में पति का लंड और गांड में सास की उंगली पाकर वो गन गना उठी, एक उंगली के अच्छे से घुसते ही सविता ने दूसरी उंगली भी उसकी गांड में सरका दी और अंदर बाहर करने लगी, रानी भी मजे से पागल होने लगी उसे दोहरी चुदाई का मज़ा जो मिल रहा था,
रानी: ओह मम्मी जी ओह आह आह आह आह मज़ा आ रहा है ओह जी चोदो और तेज,
इसी बीच सविता ने दूसरे हाथ की उंगलियों को भी मुंह में घुसा कर अच्छे से गीला किया और फिर कुछ पल बाद ही पीयूष की भी एक तेज सिसकी निकली, क्योंकि उसकी मां ने अचानक से एक उंगली पीछे से उसकी गांड में घुसा दी,
पीयूष: ओह आह आह आह मां ओह ये क्या आह,
पहली बार पीयूष अपनी मां की उंगली को अपनी गांड में महसूस कर उत्तेजना से भर गया, सविता ने रानी की तरह ही पीयूष की गांड में भी दो उंगलियों को घुसा दिया और अपना हाथ आगे पीछे करने लगी,
सविता अब एक साथ अपनी बहू और बेटे की गांड से खेल रही थी और दोनों पर ही इसका बहुत असर हो रहा था, पीयूष तो और तेजी से आहें भरते हुए रानी को चोदने लगा वहीं रानी का भी पूरा बदन अकड़ रहा था, दोनों के मुंह से ही अभी बस सिर्फ आहें और सिसकियां निकल रही थी,
सविता: आह आह आह मेरे बच्चों ओह ऐसे ही करते रहो एक दूसरे के साथ तुम्हारी मम्मी तुम्हारी गांड से खेल रही है,मज़ा आ रहा है न दोनों को,
सविता को इसका जवाब जल्दी ही मिला जब रानी और पीयूष एक साथ झड़ने लगे, रानी की कमर ऊपर उठ गई तो पीयूष ने गुर्राते हुए कुछ धक्के लगाए और अपना रस रानी की चूत में भरने लगा और एक के बाद एक धक्के लगा कर पूरा रस उसकी चूत में उड़ेल दिया। दोनों के झड़ते ही सविता ने अपनी उंगलियां दोनों की गांड से निकाल ली और फिर जैसे ही पीयूष ने अपना लंड रानी की चूत से निकाला सविता उसे अपने मुंह में भर कर चाट कर साफ करने लगी।


दूसरी ओर शहर के एक छोटे लेकिन भीड़भाड़ वाले रेस्टोरेंट में महिपाल, नीलेश और शैलेश एक कोने की टेबल पर बैठे थे। सामने प्लेट में गरमागरम परांठे, दाल, सब्जी और दही। लेकिन तीनों का ध्यान खाने से ज्यादा बातों पर था। बाहर धूप तेज थी, लेकिन अंदर एसी की ठंडक और बातों का जोश दोनों थे।
शैलेश ने परांठा तोड़ा, मुंह में डाला, फिर महिपाल की ओर देखा।
शैलेश (मुँह में परांठा रखते हुए): महिपाल भाई साहब... आज का काम तो हो गया। हस्ताक्षर, फाइल जमा... अब बस इंतजार। क्या लगता है... कितने दिन में परमिशन मिल जाएगी?
महिपाल ने चम्मच से दाल उठाई, मुंह में डाली। वो थोड़ा सोच में पड़ गया।
महिपाल (धीरे से, लेकिन मुस्कुराते): शैलेश... सच कहूँ तो... अफसरों का मूड है। लेकिन हमने जो कागजात तैयार किए... सब सही हैं। जमीन हमारी है, प्रोजेक्ट अच्छा है। लगता है... दो-तीन हफ्ते में क्लियर हो जाएगा। बस... थोड़ा इन लोगों के पीछे पड़ना पड़ेगा।
नीलेश ने दही का कटोरा अपनी तरफ खींचा, चम्मच से खाया।
नीलेश (हँसते हुए): वो तो हम करेंगे भाई साहब। जबतक काम नहीं हो जाता सालों की गांड के पीछे पड़े रहेंगे।
शैलेश: वैसे सालों की गांड है तो नहीं पीछे पड़ने लायक पर कोई नहीं काम है अपना।
इस पर तीनों हंसने लगे,
महिपाल: अरे शैलेश भाई तुम भी न अलग ही बात करते हो।
शैलेश: अरे सही तो कह रहा हूं गांड के पीछे पड़ना ही है तो गांड भी वैसी होनी चाहिए कि देखने और पीछे लगने में मज़ा आए।
इसी बीच महिपाल के फोन पर व्हाट्स ऐप मैसेज आता है तो महिपाल फोन उठा कर देखने वाला ही होता है कि शैलेश उसे कहता है: अरे भाई साहब तुम्हारे पास जमीन के और सारे कागजों के फोटो तो हैं न?
महिपाल: हां सब के हैं। अभी जमा करने से पहले ही खींचे थे।
शैलेश: मुझे भेज दो कोई जान पहचान निकालता हूं अगर निकल गई तो अपना काम यूं हो जाएगा।
महिपाल: अभी भेजता हूं,
महिपाल तुरंत शैलेश को सारे फोटो भेज देता है। उसके बाद जो मैसेज आया था उसे देखता है वो पीयूष का था पहले लिखा था पापा इसे अकेले में खोलना और उसके साथ एक वीडियो था। महिपाल तुरंत सतर्क हो जाता है और दोनों से कहता है: मैं हाथ धो कर आता हूं, और फिर अकेले में आकर वो वीडियो खोल कर देखता है तो उसकी आँखें चौड़ी हो जाती हैं

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वो देखता है वीडियो में उसकी बहू और पत्नी एक दूसरे के बगल में बिल्कुल नंगी होकर लेटी हैं दोनों ने अपनी टांगों को पीछे की ओर मोड़ रखा है जिससे उनकी गांड और चूतड़ पूरी तरह खुले हुए दिखाई दे रहे हैं उसकी बहू की गांड में बेटे का लंड है जिसे वो एक हाथ से पकड़ कर निकालता है क्योंकि दूसरे हाथ से उसने फोन पकड़ रखा था और वीडियो बना रहा था, वो रानी की गांड से लंड निकालता है और फिर सविता की गांड के सामने आता है और अपना लंड सविता की गांड के छेद पर रखता है और फिर अंदर घुसा देता है, महिपाल को अपनी पत्नी की गांड में अपने बेटे का लंड घुसता हुआ साफ दिखता है ये देख तो उसके बदन में भी सिहरन होने लगती है और उसका लंड कड़क होने लगता है, इतने में पीछे से उसे नीलेश बुलाते हैं तो वो फोन को बंद करके तुरंत जेब में रख लेता है और उनके पास चला जाता है।

खाने के बाद तीनों बापिस दफ्तर में जाकर फाइल जमा कराते हैं वहीं महिपाल के मन में तो वही घूम रहा था वो सोचता है कि उसका परिवार कितना अलग हो गया है इन लोगों से, बताओ ये लोग सोच भी नहीं सकते कि घर पर मेरा बेटा अपनी पत्नी और मां की गांड मार रहा होगा, उसका मन अब काम से हटकर कामसुख पर लग रहा था,
फाइल जमा करा के वो लोग बाहर निकल ही रहे थे कि एक औरत ने उन्हें रोका,
औरत: भाई साहब आपके पास पेन होगा मुझे फॉर्म पर साइन करने हैं
नीलेश: हां हां लीजिए ना।
औरत: धन्यवाद बस 5 मिनिट रुकिए अभी देती हूं।
औरत पेन लेकर थोड़ा आगे जाकर खड़ी हो कर फार्म भरने लगती है और वो लोग वहीं खड़े होकर बातें करने लगते हैं, इसी बीच उस औरत का पल्लू उसके कंधे से सरक जाता है और तीनों की नज़रें उसके ब्लाउज़ में बंद बड़ी बड़ी चूचियों और उसकी गोरी कमर पर ठहर जाती है
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औरत जल्दी से ही अपने पल्लू को ठीक करती है और तीनों बापिस अपनी नज़र हटाते हैं और एक दूसरे को देखते हैं और मुस्कुराते हैं
शैलेश: हाय क्या नजारा है इसने तो मेरा पेन खड़ा कर दिया।
नीलेश: सही में यार।
महिपाल भी औरत के बदन को देख कर थोड़ा गरम हुआ था पर वो थोड़ा झिझकते हुए बोला: अरे यार आप लोग भी न क्या बोल रहे हो।
शैलेश: अरे महिपाल भाई साहब काहे इतना झिझक रहे हो अच्छा खुद ही बताओ तुम्हें नज़ारा पसंद नहीं आया?
महिपाल: अरे ऐसी बात नहीं है
शैलेश: अरे महिपाल भाई अब हम लोग दोस्त भी हैं और पार्टनर भी तो अब सब झिझक भूल जाओ, अब आपस में ही एक दूसरे के सामने खुल कर नहीं बोलेंगे तो कब बोलेंगे।
नीलेश: और क्या बिल्कुल सही कहा,
महिपाल को खुलने की बात सुनकर एक झटका सा लगा वो सोचने लगा ये लोग सही बोल रहे हैं ये ही मौका खुलने का, अब मेरा जीवन जितना खुल चुका है उतना ये लोग न खुल सकें तो न सही पर इन लोगों के साथ भी ऐसी मस्त तो कर ही सकता हूं। इतने में ही वो औरत आई और नीलेश को पेन देकर चली गई।
महिपाल: वैसे इसकी गांड के पीछे लगना पड़ता तो मज़ा आता,
महिपाल ने धीरे से बोला तो वो दोनों भी हंसने लगे,
शैलेश: ये हुई न बात महिपाल भाई साहब, अब खुल कर मन की बात कही है तुमने।
शैलेश ने आगे चलते हुए दफ्तर से बाहर आते हुए कहा, बाकी दोनों भी उसके बगल में चल रहे थे।
महिपाल: अब तुमने दोस्त मान लिया है तो दोस्तों के साथ तो खुलना ही पड़ेगा ना।
नीलेश: बिल्कुल, दोस्ती का पहला नियम तो यही कहता है।
महिपाल: अच्छा भाई साहब तो दोस्ती के और कौन से नियम हैं?
नीलेश: दोस्त हर मजा साथ में लेते हैं चाहे वो शराब का हो या शबाब का।
शैलेश: तो फिर आज करें फिर प्रोग्राम नई दोस्ती के नाम?
महिपाल: कैसा प्रोग्राम?
शैलेश: अरे समझ जाओ भाई साहब, शराब का।
नीलेश: कर सकते हैं क्यों महिपाल भाई क्या कहते हो ?
महिपाल: हां बिल्कुल पर शबाब का क्या?
शैलेश: अरे महिपाल भाई तो पूरे जोश में हैं, वैसे शराब का पहले बनाते हैं शबाब का भी मौका मिला तो जल्दी ही करेंगे।
महिपाल: ये भी ठीक है
नीलेश: शैलेश घुमाओ गाड़ी फिर ठेके की तरफ।
शैलेश: नेकी और पूछ पूछ। वैसे बैठेंगे कहां?
नीलेश: कहीं भी बैठ जाएंगे जगह की कमी थोड़ी ही है।
महिपाल: पिछली बार की तरह करते हैं आप लोग आ जाओ हमारे घर।
नीलेश: अरे पिछली बार भी तुम्हारे यहां ही बैठे थे इस बार सेवा का मौका हमें दो।
महिपाल: नहीं भाई साहब दोस्ती की शुरुआत तो मेरे यहां से ही होगी, आगे से तुम जैसा चाहो वैसे कर लिया करेंगे।
शैलेश: चलो ठीक है महिपाल भाई तुम्हारा घर हो या हमारा बात तो एक ही है।
महिपाल: वैसे शबाब का क्या करना है? तुम लोगों को शराब के बाद शबाब जरूरी लगता है।
नीलेश: हां भाई साहब नशे के बाद बिना चुदाई के नहीं रहा जाता।
शैलेश: नशे का असली मज़ा तो तभी आता है।
महिपाल: तो पिछली बार की तरह ही करते हैं न आप लोग भाभियों को लेकर आ जाना।
नीलेश: वो सब तो ठीक है पर फिर बच्चे? उनके सामने ये सब करना अच्छा नहीं लगता ना।
महिपाल: अरे कुछ नहीं होगा बच्चे नीचे सो जाएंगे हम लोग ऊपर छत पर अपना प्रोग्राम करेंगे। फिर आगे के प्रोग्राम के लिए कमरों में चले जाएंगे।
नीलेश: चलो ठीक है ऐसा ही करते हैं पहले अपनी अपनी पत्नियों को भी तो मनाना पड़ेगा।
तीनों बातें करते हुए गाड़ी में आगे बढ़ जाते हैं, आगे क्या क्या करना ह उस बारे में सोचते हुए।


इधर चोदम पुर में शाम की चाय चल रही थी, कर्मा, सभ्या और अंजली कमरे से बाहर निकल चुके थे और सबके साथ बैठ कर चाय पी रहे थे, अंजली को थोड़ी शर्म और झिझक हो रही थी क्योंकि अभी वो अंदर चुदाई कर रही थी और ऐसे अब सब के सामने बैठी थी, हालांकि सब कुछ बिल्कुल साधारण लग रहा था आपस में बातें, नौकझोंक ये सब देख उसे बहुत अच्छा लग रहा था,
किरन: भाभी बोर तो नहीं हो रही ना?
किरन ने अंजली से पूछा, तो अंजली थोड़ी शर्मा गई और बोली: अभी से भाभी?
पल्ली: अरे भाभी हो तो भाभी ही बोलेंगे न भाभी।
शालू: अरे बच्चों क्यों परेशान कर रहे हो उसे? इतनी प्यारी बच्ची है।
किरन: बुआ बड़ा प्यार आ रहा अपनी बहू पर।
शालू: तुम लोग पिटोगे अभी।
अंजली: अरे कोई बात नहीं मौसी बुलाने दो, अच्छा लगता है।
ये कह कर वो शर्मा गई तो सब हंसने लगे।
पल्ली: चलो न भाभी हमारे साथ थोड़ा घूम कर आते हैं गांव में।
किरन: हां और बहुत सी बातें भी करनी हैं तुमसे।
सागर: अरे हम लोगों को भी बातें करनी थी भाभी से।
अनुज: और क्या तुम लोग ही क्यों करेंगे।
पल्ली: ननद पहले देवर बाद में।
दोनों अंजली को लेकर चली गईं। बाकी घर में सब अपने काम में लग गए।


जारी रहेगी
बहुत सुंदर भाई, इसीलिए आप मेरे फेवरेट हो, जो लिखते हो कमाल लिखते हो इसी तरह समय निकाल कर लिखते रहो तो हमारा भी मन बहलता रहे, मां बेटे और पत्नी का थ्रीसम मजेदार और कामुक था वैसे भी चुदाई के सीन लिखने में आपको कौन छू सकता है, वहीं शहर में भी नई खिचड़ी पक रही है अब उसका स्वाद क्या आता है वो देखने लायक होगा।
आगे का इंतजार।
 

Raj Kumar Kannada

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जहां अंजली कर्मा के साथ उसके घर पर नए रिश्ते बना रही थी वहीं गैंदापुर में उसकी मां और भाभी भी कुछ नया कर रही थी,

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दोनों सास बहू अभी आंगन में थी और दोनों के बदन पर अभी बस एक एक। बैंगनी रंग की पेंटी थी और चेहरे पर कामुक मुस्कान और शर्म का मिश्रण था

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रानी: कितना अजीब लग रहा है न मम्मी जी हम लोग ऐसे हम लोग आंगन में घूम रहे हैं।
सविता: अजीब तो है पर मज़ेदार भी, गर्मी में ऐसे ही रहना चाहिए,
सविता ने हंसते हुए कहा, और फिर दोनों हंसने लगी,
रानी: अब चलते हैं ये इंतजार कर रहे होंगे आखिर उन्हें ही हमें घर में ऐसे देखना था,
सविता: हां चल बेटा।
दोनों फिर आगे बढ़ कर पीयूष और रानी के कमरे की ओर चल दी, जहां पीयूष पहले से ही उनका इंतजार कर रहा था उसके बदन पर भी बस एक कच्छा था, दोनों ने देखा कि पीयूष बिस्तर पर लेटा हुआ था तीनों की नज़रें मिली और पीयूष के चेहरे पर मुस्कान आ गई अपनी मां और अपनी पत्नी को इस रूप में देख कर।
रानी: ऐसे क्या देख कर मुस्कुरा रहे हो तुमने ही कहा था न ऐसे ही घूमने को।
पीयूष: हां कहा था और बिल्कुल सही कहा था बहुत सुन्दर लग रही हो दोनों लोग।
रानी: हां तुम्हे तो सुंदर लगेंगे ही नंगे जो घूम रहे हैं।
रानी ने उसे छेड़ते हुए कहा और बिस्तर पर चढ़ गई,
पीयूष: अरे कपड़े तुम्हारी सुंदरता को छिपाते हैं अब असली सुंदरता तो ऐसे ही नज़र आती है, मम्मी आओ न तुम भी बैठो।
सविता: हां आई,
सविता भी आगे बढ़ कर बिस्तर पर चढ़ जाती है और बैठ जाती है।

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पीयूष भी आगे होकर अपनी मां के होंठों को चूमने लगता है वहीं रानी पीछे से अपनी सास के बदन को सहलाती है फिरउसने सास की कमर पकड़ी, पीठ पर होंठ रख दिए। धीरे-धीरे जीभ से पीठ चाटने लगी – कंधे से लेकर कमर तक। सविता की साँसें तेज़ हो गईं।
रानी (सविता के कान में, जीभ फेरते हुए): सासू माँ... आपकी पीठ... कितनी नरम... कितनी गरम... मन करता है पूरा बदन चाट जाऊँ...
सविता (आह भरते हुए): बहू... तेरी जीभ... ओह... माँ की पीठ पर... कितना अच्छा लग रहा है... पीयूश... बेटा... देख... तेरी पत्नी तेरी माँ को कैसे चाट रही है... आ... तू भी आ... अपनी माँ की चूचियाँ... चूस...
पीयूश ने आगे बढ़कर सविता की एक चूची मुंह में ले ली। जोर से चूसा। निप्पल को जीभ से घुमाया, दांतों से हल्का कसा। सविता की कमर अकड़ गई। रानी ने पीछे से सविता की दूसरी चूची हाथ में ली, और उसे मसलने लगी।
रानी (चूची मसलते हुए): मम्मी जी... आपकी चूचियाँ... कितनी भरी हुई... ओह... कितनी नरम? ओह... देखो... तुम्हारी माँ का निप्पल... कितना सख्त... चूसो... पूरा निचोड़ लो...
थोड़ी देर बाद पीयूष अपनी मां की चूची को छोड़ता है और रानी के होंठों को चूसने लगता है इतने में सविता पीयूष के कच्छे की लास्टिक में उंगलियां फांसती है और उसे नीचे खिसकती है और पूरी तरह से पैरों से निकाल देती है तो पियूष का लंड उछल कर बाहर आ जाता है, जिसे सविता हाथ में लेकर प्यार से सहलाने लगती है, अपनी मां के हाथों में लंड का स्पर्श पाकर आह निकलती है और वो रानी के होंठों से अपने होंठ अलग करता है, रानी अलग होती है और उठ कर झट से अपनी पैंटी उतार कर पूरी नंगी हो जाती है उसकी देखा देखी सविता भी अपनी कच्छी उतार देती है और नंगी हो जाती है, पीयूष बिस्तर के बीच में लेट जाता है वहीं सविता और रानी उसके एक एक ओर बिस्तर पर चढ़ जाती हैं
रानी आगे झुक कर अपनी सास की चूची को मुंह में भर लेती है वहीं पीयूष रानी के बदन को सहलाने लगता है
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सविता: ओह बहू आह ऐसे ही आह मज़ा आ रहा है खा जा मेरी चूचियों को।
पीयूष: आह क्या पत्नी और मां पाई है मैने आह रानी ओह।
पीयूष रानी के चूतड़ों को सहलाते हुए बोला।
रानी अपनी सास की चूचियों को बदल बदल कर चूस रही थी वहीं सविता उसके सिर को अपनी चूचियों पर दबा रही थी, वहीं पीयूष उसकी कमर और चूचियों को चूम रहा था, वहीं रानी का एक हाथ उसके पति के लंड को पकड़ कर सहला रहा था,
सविता: आह बच्चों ओह ऐसे ही आह ओह मेरे बच्चों ओह ओह।
रानी ने जी भर के अपनी सास की चूचियों को चूसा फिर जा कर छोड़ा और फिर बिना समय गंवाए, अपने पति के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी,
पीयूष के मुंह से सिसकियां निकलने लगी।
पीयूष: आह रानी अह कितना गरम मुंह है तेरा ओह मज़ा आ रहा है ऐसे ही चूसती रह।
पीयूष ने कहा और फिर हाथ बढ़ा कर अपनी मां के चूतड़ों को पकड़ लिया और उन्हें अपनी ओर खींचने लगा, सविता भी उसका इशारा समझ गई और तुरंत आगे बढ़ कर अपने बेटे के चेहरे पर बैठ गई, उसके बैठते ही पीयूष ने अपनी मां की चूत में जीभ चलाना शुरू कर दिया, और सविता अपने बेटे की जीभ के इशारों पर मचलने लगी,


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सविता: ओह आह बेटा आह चाट अपनी मां की चूत को ओह आह इसी चूत से निकला था तू ओह आह आज बापिस घुसा अपनी जीभ ओह।
सविता ने गरम होते हुए बोला
पीयूष के हाथ अपनी मां की गरम बातों को सुन कर उसके चूतड़ों पर कस गए वहीं रानी तो बिना विराम लिए अपने पति के लंड को चूस रही थी,
वहीं सविता अपने बेटे से अपनी चूत चटवा रही थी उसकी चूत लगातार गीली होकर बह रही थी,
कुछ देर बाद सविता ने अपने बेटे के मुँह से धीरे से अपनी कमर ऊपर उठाई। पीयूष की जीभ अभी भी उसकी चूत से चिपकी हुई थी, जैसे छोड़ना न चाहती हो। सविता की चूत गीली, रस से चमक रही थी – बेटे की लार और अपना रस मिलकर। वो हाँफते हुए मुस्कुराई, रानी की ओर देखा जो अभी भी पीयूष के लंड को सहलाते हुए चूस रही थी।
सविता (हाँफते हुए): बहू... अब तू अकेली क्यों खेल रही है? आ... माँ-बहू मिलकर बेटे की सेवा करें... देख... कितना कड़क है... हम दोनों का इंतजार कर रहा है...
रानी ने लंड से हाथ नहीं हटाया, बल्कि सविता को अपनी ओर खींचा। सविता घुटनों के बल बिस्तर पर झुकीं, पीयूष के लंड के ठीक सामने। सविता ने पहले जीभ फेरी – लंड के सुपारे पर, धीरे-धीरे गोल-गोल। पीयूष की आह निकली। रानी ने सामने से सविता की चूची पकड़ी, मसली, और फिर अपना मुँह लंड पर रख दिया – सविता के साथ मिलकर चूसने लगी। दोनों की जीभें लंड पर टकरा रही थीं, रस चाट रही थीं, होंठ मिलाकर लंड को बीच में दबा रही थीं। तो कभी एक दूसरे को होंठों को चूस रही थी

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रानी (लंड चूसते हुए, सविता से): ओह मम्मी... आपका बेटा... कितना मोटा लंड रखता है... आह... चूसने में मजा आ रहा है ना।
सविता (रानी की जीभ से टकराते हुए, आह भरकर): आह... बहू... तू भी चाट... सास बहु की जीभ एक साथ आह... बेटे के लंड पर... ओह... कितना गंदा लग रहा है... लेकिन... मजा दोगुना... पीयूष... बेटा... देख... तेरी माँ और बहू... तेरा लंड... मिलकर... चूस रही हैं... जैसे रंडियाँ... आह... तेरा लंड... कितना गरम है।

पीयूष ने दोनों के सिर पकड़े, धक्के लगाने लगा – लंड दोनों के मुँह में बारी-बारी घुसा रहा था। कमरा आहों और चूसने की चपचप आवाजों से भर गया। सविता और रानी की चूचियाँ आपस में टकरा रही थीं, निप्पल्स सख्त होकर रगड़ खा रही थीं।
पीयूष (सिसकते हुए): आह... माँ... रानी... दोनों... मेरी रंडियाँ... चूसो... पूरा गले में उतार लो... ओह... माँ... तेरी जीभ... आह मक्खन की तरह... लंड पर... कितनी गरम... मजा आ रहा है...

कुछ देर दोनों सास-बहू ने पीयूष का लंड चूसा, फिर सविता ने रानी को बगल में धकेला। वो खुद बिस्तर पर लेट गई, टांगें थोड़ी फैलाईं। पीयूष ऊपर आया, और अपना लंड सविता की चूचियों के बीच फँसा दिया। सविता ने दोनों चूचियाँ दबाकर लंड को बीच में जकड़ लिया – मोटी, नरम चूचियाँ लंड को दबा रही थीं। पीयूष ने कमर हिलानी शुरू की – लंड चूचियों के बीच अंदर-बाहर होने लगा। रानी अपनी सास की चूचियों को थाम कर उन्हें दबा रही थी और जिससे पीयूष को और गहराई मिले चूचियां चोदने में, साथ ही वो झुक कर अपनी सास के होंठों को चूस रही थी,

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रानी (सविता के होंठ चूसते, चूचियाँ दबाते): सासू माँ... देखो... आपकी चूचियाँ... कितनी मोटी... लंड को अपने में समा रही हैं... आह... कितना गरम लंड है... आपकी चूचियों के बीच... ओह... मैं दबाती हूँ...
सविता (आह भरते, रानी के होंठ चूसते): आह... बहू... तेरे हाथ... माँ की चूचियों पर... ओह... कितने गरम... पीयूष... बेटा... चोद... माँ की चूचियाँ... लंड से जैसे चूत चोदता है ... आह... रानी... तेरी जीभ घुसा... माँ के मुँह में... चूस... और चूस...

पीयूष (धक्के लगाते, लंड चूचियों में घिसते): आह... माँ... तेरी चूचियाँ... कितनी नरम... लंड को दबा रही हैं... ओह... रानी... दबाओ... माँ की चूचियाँ... और जोर से... देखो... लंड बाहर आ रहा है... चाट लो... माँ की चूचियों से निकलकर...
रानी ने वैसा ही किया और झुककर लंड का सुपारा चाटा – चूचियों के बीच से। सविता की चूचियाँ लार से चमक रही थीं, रस से लथपथ। रानी की जीभ कभी लंड तो कभी चूचियों के बीच से चाट रही थीं। पीयूष की सिसकियाँ तेज़ हो गईं।

कुछ देर बाद पीयूष ने सविता की चूचियों से लंड निकाला। रानी बिस्तर पर लेट गई, टांगें फैलाईं।
रानी: आह मम्मी आओ न मेरी चूत चाटो आह बहुत देर से तड़प रही है। आओ मेरी रंडी मम्मी चाटो अपनी बहू की चूत।
सविता: आह बहू तूने मेरे मन की बात कह दी आज तेरी चूत को खा जाऊंगी।
सविता उसके ऊपर झुकी, चूत पर जीभ फेरी – धीरे-धीरे, होंठ चूसते हुए। रानी की आह निकली। पीयूष सविता के पीछे आया, अपना लंड सविता की चूत पर रगड़ने लगा,
सविता रानी की चूत में ही सिसकने लगी,
रानी: ओह जी क्यों तड़पा रहे हो मम्मी को घुसा दो न।
पीयूष ने ये सुनकर वैसा ही किया और लंड अपनी मां की चूत में घुसा दिया। सविता की कमर अकड़ गई, लेकिन वो रानी की चूत चाटती रही।
सविता (रानी की चूत चाटते, पीयूष से): आह... बेटा... तेरी माँ की चूत... भर दी... ओह... रानी... बहू... तेरी चूत... कितनी गीली कितनी स्वाद है आराम से लेट ... माँ चाट रही है... रस पी रही है... आह... पीयूष... जोर से... माँ को चोद... बहू की चूत चाटते हुए...
पीयूष सविता की कमर थाम कर धक्के लगाने लगा,

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रानी अपनी सास के सिर को सहलाते हुए उसकी जीभ की हरकतों से मचल रही थी,
रानी (सिसकते हुए , सविता के बाल पकड़कर): मम्मी जी ... जीभ... अंदर... ओह... कितनी गरम... ओह जी ओह... देखो... सासू माँ मेरी चूत चाट रही हैं... आप... माँ को चोदो... जोर से... आह... मम्मी... चाटो... बहू की चूत... जैसे रंडी की चाटते हैं आह मम्मी जी।
पीयूष (धक्के लगाते): आह... माँ... तेरी चूत... कितनी कसी... ओह... रानी... देख... माँ तेरी चूत चाट रही है... जैसे प्यासी कुतिया दूध चाटती है... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ... चोदूँगा... चटवाऊँगा... रोज...
सविता की जीभ रानी की चूत में घूम रही थी, क्लिट को चूस रही थी । पीयूष के धक्कों से सविता का बदन हिल रहा था, जिससे उसकी जीभ और तेज़ चल रही थी।रानी का पूरा बदन उसकी सास की हरकतों से मचल रही थी, उसकी कमर बार बार घूम रही थी वो अपने चरम सुख की ओर बढ़ रही थी और क्यों न बढ़े उसकी सास उसकी चूत चाट रही थी, उसकी पति अपनी मां को चोद रहा था ये सब सोचते हुए रानी झड़ी – और रस सविता के मुँह में बहा दिया। सविता ने भी चटकारे लेते हुए सब चाटा, इधर पीयूष ने अपनी मां की चूत से लंड निकाल लिया तो सविता भी उसके सामने से हट गई
सविता के हटते ही पीयूष बिस्तर पर चढ़ कर आगे आया अपनी पत्नी की टांगों के बीच, रानी लेटे हुए हाफ रही थी, पीयूष ने उसकी दोनों टांगों को फैलाया और अपना कड़क लंड रानी की चूत पर घिसने लगा रानी एक बार फिर से मचलने लगी।
रानी: ओह आह हां जी घुसा दो न अपना मोटा लंड मेरी चूत में मत तड़पाओ,
पियूष ने अपने पत्नी की बात मानी और रानी की चूत में लंड घुसाया। जिससे रानी के मुंह से आह निकल गई, वहीं सविता भी रानी के बदन के ऊपर चढ़ कर रानी के मुँह पर बैठ गई – चूत रानी के होंठों पर टिका दी। रानी ने जीभ निकाली, और तुरंत सविता की चूत चाटने लगी। नीचे से पीयूष धक्के लगाने लगा।
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सविता (रानी के मुँह पर रगड़ते): आह... बहू... तेरी जीभ... मम्मी की चूत में... ओह... चाट... पूरा रस पी... पीयूष... बेटा... चोद अपनी पत्नी को... माँ की चूत चटवाते हुए... चोद अपनी पत्नी को आह और तेज धक्के लगा।
पीयूष: आह... रानी... तेरी चूत... कितनी कसी हुई... ओह... मम्मी... देखो... कैसे तुम्हारी बहू तुम्हारी चूत चाट रही है... आह रानी चूस लो मम्मी की चूत का सारा रस... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ...हो तुम दोनों आह आह आह।
पीयूष रानी की चूत में धक्के लगाते हुए बोला, सविता हाथ आगे कर रानी की चूचियों को मसल रही थी और पीयूष ने एक हाथ से अपनी मां के चेहरे को पकड़ लिया और अपनी ओर खींच कर उसके होंठों को चूसने लगा, तीनों आपस में जुड़े हुए थे, पीयूष का लंड रानी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, रानी की जीभ सविता की चूत में चल रही थी वहीं सविता और पियूष एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे,
कुछ देर बाद ही सविता रानी के मुंह पर कांप रही थी और अपने चरमसुख को महसूस कर रही थी उसकी चूत रानी के मुंह में अपना रस छोड़ रही थी जिसे रानी शरबत की तरह गटक रही थी, सविता झड़ने लगी और झड़ने के बाद रानी के मुंह से हटकर एक ओर गिर गई, पीयूष ने रानी को चोदना जारी रखा, रानी लगातार आहें भर रही थी,
सविता अपनी सांसों को संभालते हुए उठी और अपने बेटे और बहू के बगल में बैठ गई, उसे कुछ सुझा तो उसने अपनी दो उंगलियों को अपने मुंह में घुसा कर गीला किया और फिर रानी के चूत के नीचे की ओर ले गई जहां पीयूष का लंड अंदर बाहर हो रहा था और फिर थोड़ा नीचे लेजाकर वो रानी के गांड के छेद को अपनी उंगली से छेड़ने लगी,रानी मचलने लगी।
कुछ पल अपनी उंगली को रानी के गांड के छेद पर घुमाने के बाद उसने एक उंगली रानी की गांड में घुसा दी और रानी के मुंह से एक आह निकल गई, चूत में पति का लंड और गांड में सास की उंगली पाकर वो गन गना उठी, एक उंगली के अच्छे से घुसते ही सविता ने दूसरी उंगली भी उसकी गांड में सरका दी और अंदर बाहर करने लगी, रानी भी मजे से पागल होने लगी उसे दोहरी चुदाई का मज़ा जो मिल रहा था,
रानी: ओह मम्मी जी ओह आह आह आह आह मज़ा आ रहा है ओह जी चोदो और तेज,
इसी बीच सविता ने दूसरे हाथ की उंगलियों को भी मुंह में घुसा कर अच्छे से गीला किया और फिर कुछ पल बाद ही पीयूष की भी एक तेज सिसकी निकली, क्योंकि उसकी मां ने अचानक से एक उंगली पीछे से उसकी गांड में घुसा दी,
पीयूष: ओह आह आह आह मां ओह ये क्या आह,
पहली बार पीयूष अपनी मां की उंगली को अपनी गांड में महसूस कर उत्तेजना से भर गया, सविता ने रानी की तरह ही पीयूष की गांड में भी दो उंगलियों को घुसा दिया और अपना हाथ आगे पीछे करने लगी,
सविता अब एक साथ अपनी बहू और बेटे की गांड से खेल रही थी और दोनों पर ही इसका बहुत असर हो रहा था, पीयूष तो और तेजी से आहें भरते हुए रानी को चोदने लगा वहीं रानी का भी पूरा बदन अकड़ रहा था, दोनों के मुंह से ही अभी बस सिर्फ आहें और सिसकियां निकल रही थी,
सविता: आह आह आह मेरे बच्चों ओह ऐसे ही करते रहो एक दूसरे के साथ तुम्हारी मम्मी तुम्हारी गांड से खेल रही है,मज़ा आ रहा है न दोनों को,
सविता को इसका जवाब जल्दी ही मिला जब रानी और पीयूष एक साथ झड़ने लगे, रानी की कमर ऊपर उठ गई तो पीयूष ने गुर्राते हुए कुछ धक्के लगाए और अपना रस रानी की चूत में भरने लगा और एक के बाद एक धक्के लगा कर पूरा रस उसकी चूत में उड़ेल दिया। दोनों के झड़ते ही सविता ने अपनी उंगलियां दोनों की गांड से निकाल ली और फिर जैसे ही पीयूष ने अपना लंड रानी की चूत से निकाला सविता उसे अपने मुंह में भर कर चाट कर साफ करने लगी।


दूसरी ओर शहर के एक छोटे लेकिन भीड़भाड़ वाले रेस्टोरेंट में महिपाल, नीलेश और शैलेश एक कोने की टेबल पर बैठे थे। सामने प्लेट में गरमागरम परांठे, दाल, सब्जी और दही। लेकिन तीनों का ध्यान खाने से ज्यादा बातों पर था। बाहर धूप तेज थी, लेकिन अंदर एसी की ठंडक और बातों का जोश दोनों थे।
शैलेश ने परांठा तोड़ा, मुंह में डाला, फिर महिपाल की ओर देखा।
शैलेश (मुँह में परांठा रखते हुए): महिपाल भाई साहब... आज का काम तो हो गया। हस्ताक्षर, फाइल जमा... अब बस इंतजार। क्या लगता है... कितने दिन में परमिशन मिल जाएगी?
महिपाल ने चम्मच से दाल उठाई, मुंह में डाली। वो थोड़ा सोच में पड़ गया।
महिपाल (धीरे से, लेकिन मुस्कुराते): शैलेश... सच कहूँ तो... अफसरों का मूड है। लेकिन हमने जो कागजात तैयार किए... सब सही हैं। जमीन हमारी है, प्रोजेक्ट अच्छा है। लगता है... दो-तीन हफ्ते में क्लियर हो जाएगा। बस... थोड़ा इन लोगों के पीछे पड़ना पड़ेगा।
नीलेश ने दही का कटोरा अपनी तरफ खींचा, चम्मच से खाया।
नीलेश (हँसते हुए): वो तो हम करेंगे भाई साहब। जबतक काम नहीं हो जाता सालों की गांड के पीछे पड़े रहेंगे।
शैलेश: वैसे सालों की गांड है तो नहीं पीछे पड़ने लायक पर कोई नहीं काम है अपना।
इस पर तीनों हंसने लगे,
महिपाल: अरे शैलेश भाई तुम भी न अलग ही बात करते हो।
शैलेश: अरे सही तो कह रहा हूं गांड के पीछे पड़ना ही है तो गांड भी वैसी होनी चाहिए कि देखने और पीछे लगने में मज़ा आए।
इसी बीच महिपाल के फोन पर व्हाट्स ऐप मैसेज आता है तो महिपाल फोन उठा कर देखने वाला ही होता है कि शैलेश उसे कहता है: अरे भाई साहब तुम्हारे पास जमीन के और सारे कागजों के फोटो तो हैं न?
महिपाल: हां सब के हैं। अभी जमा करने से पहले ही खींचे थे।
शैलेश: मुझे भेज दो कोई जान पहचान निकालता हूं अगर निकल गई तो अपना काम यूं हो जाएगा।
महिपाल: अभी भेजता हूं,
महिपाल तुरंत शैलेश को सारे फोटो भेज देता है। उसके बाद जो मैसेज आया था उसे देखता है वो पीयूष का था पहले लिखा था पापा इसे अकेले में खोलना और उसके साथ एक वीडियो था। महिपाल तुरंत सतर्क हो जाता है और दोनों से कहता है: मैं हाथ धो कर आता हूं, और फिर अकेले में आकर वो वीडियो खोल कर देखता है तो उसकी आँखें चौड़ी हो जाती हैं

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वो देखता है वीडियो में उसकी बहू और पत्नी एक दूसरे के बगल में बिल्कुल नंगी होकर लेटी हैं दोनों ने अपनी टांगों को पीछे की ओर मोड़ रखा है जिससे उनकी गांड और चूतड़ पूरी तरह खुले हुए दिखाई दे रहे हैं उसकी बहू की गांड में बेटे का लंड है जिसे वो एक हाथ से पकड़ कर निकालता है क्योंकि दूसरे हाथ से उसने फोन पकड़ रखा था और वीडियो बना रहा था, वो रानी की गांड से लंड निकालता है और फिर सविता की गांड के सामने आता है और अपना लंड सविता की गांड के छेद पर रखता है और फिर अंदर घुसा देता है, महिपाल को अपनी पत्नी की गांड में अपने बेटे का लंड घुसता हुआ साफ दिखता है ये देख तो उसके बदन में भी सिहरन होने लगती है और उसका लंड कड़क होने लगता है, इतने में पीछे से उसे नीलेश बुलाते हैं तो वो फोन को बंद करके तुरंत जेब में रख लेता है और उनके पास चला जाता है।

खाने के बाद तीनों बापिस दफ्तर में जाकर फाइल जमा कराते हैं वहीं महिपाल के मन में तो वही घूम रहा था वो सोचता है कि उसका परिवार कितना अलग हो गया है इन लोगों से, बताओ ये लोग सोच भी नहीं सकते कि घर पर मेरा बेटा अपनी पत्नी और मां की गांड मार रहा होगा, उसका मन अब काम से हटकर कामसुख पर लग रहा था,
फाइल जमा करा के वो लोग बाहर निकल ही रहे थे कि एक औरत ने उन्हें रोका,
औरत: भाई साहब आपके पास पेन होगा मुझे फॉर्म पर साइन करने हैं
नीलेश: हां हां लीजिए ना।
औरत: धन्यवाद बस 5 मिनिट रुकिए अभी देती हूं।
औरत पेन लेकर थोड़ा आगे जाकर खड़ी हो कर फार्म भरने लगती है और वो लोग वहीं खड़े होकर बातें करने लगते हैं, इसी बीच उस औरत का पल्लू उसके कंधे से सरक जाता है और तीनों की नज़रें उसके ब्लाउज़ में बंद बड़ी बड़ी चूचियों और उसकी गोरी कमर पर ठहर जाती है
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औरत जल्दी से ही अपने पल्लू को ठीक करती है और तीनों बापिस अपनी नज़र हटाते हैं और एक दूसरे को देखते हैं और मुस्कुराते हैं
शैलेश: हाय क्या नजारा है इसने तो मेरा पेन खड़ा कर दिया।
नीलेश: सही में यार।
महिपाल भी औरत के बदन को देख कर थोड़ा गरम हुआ था पर वो थोड़ा झिझकते हुए बोला: अरे यार आप लोग भी न क्या बोल रहे हो।
शैलेश: अरे महिपाल भाई साहब काहे इतना झिझक रहे हो अच्छा खुद ही बताओ तुम्हें नज़ारा पसंद नहीं आया?
महिपाल: अरे ऐसी बात नहीं है
शैलेश: अरे महिपाल भाई अब हम लोग दोस्त भी हैं और पार्टनर भी तो अब सब झिझक भूल जाओ, अब आपस में ही एक दूसरे के सामने खुल कर नहीं बोलेंगे तो कब बोलेंगे।
नीलेश: और क्या बिल्कुल सही कहा,
महिपाल को खुलने की बात सुनकर एक झटका सा लगा वो सोचने लगा ये लोग सही बोल रहे हैं ये ही मौका खुलने का, अब मेरा जीवन जितना खुल चुका है उतना ये लोग न खुल सकें तो न सही पर इन लोगों के साथ भी ऐसी मस्त तो कर ही सकता हूं। इतने में ही वो औरत आई और नीलेश को पेन देकर चली गई।
महिपाल: वैसे इसकी गांड के पीछे लगना पड़ता तो मज़ा आता,
महिपाल ने धीरे से बोला तो वो दोनों भी हंसने लगे,
शैलेश: ये हुई न बात महिपाल भाई साहब, अब खुल कर मन की बात कही है तुमने।
शैलेश ने आगे चलते हुए दफ्तर से बाहर आते हुए कहा, बाकी दोनों भी उसके बगल में चल रहे थे।
महिपाल: अब तुमने दोस्त मान लिया है तो दोस्तों के साथ तो खुलना ही पड़ेगा ना।
नीलेश: बिल्कुल, दोस्ती का पहला नियम तो यही कहता है।
महिपाल: अच्छा भाई साहब तो दोस्ती के और कौन से नियम हैं?
नीलेश: दोस्त हर मजा साथ में लेते हैं चाहे वो शराब का हो या शबाब का।
शैलेश: तो फिर आज करें फिर प्रोग्राम नई दोस्ती के नाम?
महिपाल: कैसा प्रोग्राम?
शैलेश: अरे समझ जाओ भाई साहब, शराब का।
नीलेश: कर सकते हैं क्यों महिपाल भाई क्या कहते हो ?
महिपाल: हां बिल्कुल पर शबाब का क्या?
शैलेश: अरे महिपाल भाई तो पूरे जोश में हैं, वैसे शराब का पहले बनाते हैं शबाब का भी मौका मिला तो जल्दी ही करेंगे।
महिपाल: ये भी ठीक है
नीलेश: शैलेश घुमाओ गाड़ी फिर ठेके की तरफ।
शैलेश: नेकी और पूछ पूछ। वैसे बैठेंगे कहां?
नीलेश: कहीं भी बैठ जाएंगे जगह की कमी थोड़ी ही है।
महिपाल: पिछली बार की तरह करते हैं आप लोग आ जाओ हमारे घर।
नीलेश: अरे पिछली बार भी तुम्हारे यहां ही बैठे थे इस बार सेवा का मौका हमें दो।
महिपाल: नहीं भाई साहब दोस्ती की शुरुआत तो मेरे यहां से ही होगी, आगे से तुम जैसा चाहो वैसे कर लिया करेंगे।
शैलेश: चलो ठीक है महिपाल भाई तुम्हारा घर हो या हमारा बात तो एक ही है।
महिपाल: वैसे शबाब का क्या करना है? तुम लोगों को शराब के बाद शबाब जरूरी लगता है।
नीलेश: हां भाई साहब नशे के बाद बिना चुदाई के नहीं रहा जाता।
शैलेश: नशे का असली मज़ा तो तभी आता है।
महिपाल: तो पिछली बार की तरह ही करते हैं न आप लोग भाभियों को लेकर आ जाना।
नीलेश: वो सब तो ठीक है पर फिर बच्चे? उनके सामने ये सब करना अच्छा नहीं लगता ना।
महिपाल: अरे कुछ नहीं होगा बच्चे नीचे सो जाएंगे हम लोग ऊपर छत पर अपना प्रोग्राम करेंगे। फिर आगे के प्रोग्राम के लिए कमरों में चले जाएंगे।
नीलेश: चलो ठीक है ऐसा ही करते हैं पहले अपनी अपनी पत्नियों को भी तो मनाना पड़ेगा।
तीनों बातें करते हुए गाड़ी में आगे बढ़ जाते हैं, आगे क्या क्या करना ह उस बारे में सोचते हुए।


इधर चोदम पुर में शाम की चाय चल रही थी, कर्मा, सभ्या और अंजली कमरे से बाहर निकल चुके थे और सबके साथ बैठ कर चाय पी रहे थे, अंजली को थोड़ी शर्म और झिझक हो रही थी क्योंकि अभी वो अंदर चुदाई कर रही थी और ऐसे अब सब के सामने बैठी थी, हालांकि सब कुछ बिल्कुल साधारण लग रहा था आपस में बातें, नौकझोंक ये सब देख उसे बहुत अच्छा लग रहा था,
किरन: भाभी बोर तो नहीं हो रही ना?
किरन ने अंजली से पूछा, तो अंजली थोड़ी शर्मा गई और बोली: अभी से भाभी?
पल्ली: अरे भाभी हो तो भाभी ही बोलेंगे न भाभी।
शालू: अरे बच्चों क्यों परेशान कर रहे हो उसे? इतनी प्यारी बच्ची है।
किरन: बुआ बड़ा प्यार आ रहा अपनी बहू पर।
शालू: तुम लोग पिटोगे अभी।
अंजली: अरे कोई बात नहीं मौसी बुलाने दो, अच्छा लगता है।
ये कह कर वो शर्मा गई तो सब हंसने लगे।
पल्ली: चलो न भाभी हमारे साथ थोड़ा घूम कर आते हैं गांव में।
किरन: हां और बहुत सी बातें भी करनी हैं तुमसे।
सागर: अरे हम लोगों को भी बातें करनी थी भाभी से।
अनुज: और क्या तुम लोग ही क्यों करेंगे।
पल्ली: ननद पहले देवर बाद में।
दोनों अंजली को लेकर चली गईं। बाकी घर में सब अपने काम में लग गए।


जारी रहेगी
Good 🔥❤️💯
 
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DREAMBOY40

सपनों का सौदागर 😎
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जहां अंजली कर्मा के साथ उसके घर पर नए रिश्ते बना रही थी वहीं गैंदापुर में उसकी मां और भाभी भी कुछ नया कर रही थी,

अपडेट 256

दोनों सास बहू अभी आंगन में थी और दोनों के बदन पर अभी बस एक एक। बैंगनी रंग की पेंटी थी और चेहरे पर कामुक मुस्कान और शर्म का मिश्रण था

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रानी: कितना अजीब लग रहा है न मम्मी जी हम लोग ऐसे हम लोग आंगन में घूम रहे हैं।
सविता: अजीब तो है पर मज़ेदार भी, गर्मी में ऐसे ही रहना चाहिए,
सविता ने हंसते हुए कहा, और फिर दोनों हंसने लगी,
रानी: अब चलते हैं ये इंतजार कर रहे होंगे आखिर उन्हें ही हमें घर में ऐसे देखना था,
सविता: हां चल बेटा।
दोनों फिर आगे बढ़ कर पीयूष और रानी के कमरे की ओर चल दी, जहां पीयूष पहले से ही उनका इंतजार कर रहा था उसके बदन पर भी बस एक कच्छा था, दोनों ने देखा कि पीयूष बिस्तर पर लेटा हुआ था तीनों की नज़रें मिली और पीयूष के चेहरे पर मुस्कान आ गई अपनी मां और अपनी पत्नी को इस रूप में देख कर।
रानी: ऐसे क्या देख कर मुस्कुरा रहे हो तुमने ही कहा था न ऐसे ही घूमने को।
पीयूष: हां कहा था और बिल्कुल सही कहा था बहुत सुन्दर लग रही हो दोनों लोग।
रानी: हां तुम्हे तो सुंदर लगेंगे ही नंगे जो घूम रहे हैं।
रानी ने उसे छेड़ते हुए कहा और बिस्तर पर चढ़ गई,
पीयूष: अरे कपड़े तुम्हारी सुंदरता को छिपाते हैं अब असली सुंदरता तो ऐसे ही नज़र आती है, मम्मी आओ न तुम भी बैठो।
सविता: हां आई,
सविता भी आगे बढ़ कर बिस्तर पर चढ़ जाती है और बैठ जाती है।

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पीयूष भी आगे होकर अपनी मां के होंठों को चूमने लगता है वहीं रानी पीछे से अपनी सास के बदन को सहलाती है फिरउसने सास की कमर पकड़ी, पीठ पर होंठ रख दिए। धीरे-धीरे जीभ से पीठ चाटने लगी – कंधे से लेकर कमर तक। सविता की साँसें तेज़ हो गईं।
रानी (सविता के कान में, जीभ फेरते हुए): सासू माँ... आपकी पीठ... कितनी नरम... कितनी गरम... मन करता है पूरा बदन चाट जाऊँ...
सविता (आह भरते हुए): बहू... तेरी जीभ... ओह... माँ की पीठ पर... कितना अच्छा लग रहा है... पीयूश... बेटा... देख... तेरी पत्नी तेरी माँ को कैसे चाट रही है... आ... तू भी आ... अपनी माँ की चूचियाँ... चूस...
पीयूश ने आगे बढ़कर सविता की एक चूची मुंह में ले ली। जोर से चूसा। निप्पल को जीभ से घुमाया, दांतों से हल्का कसा। सविता की कमर अकड़ गई। रानी ने पीछे से सविता की दूसरी चूची हाथ में ली, और उसे मसलने लगी।
रानी (चूची मसलते हुए): मम्मी जी... आपकी चूचियाँ... कितनी भरी हुई... ओह... कितनी नरम? ओह... देखो... तुम्हारी माँ का निप्पल... कितना सख्त... चूसो... पूरा निचोड़ लो...
थोड़ी देर बाद पीयूष अपनी मां की चूची को छोड़ता है और रानी के होंठों को चूसने लगता है इतने में सविता पीयूष के कच्छे की लास्टिक में उंगलियां फांसती है और उसे नीचे खिसकती है और पूरी तरह से पैरों से निकाल देती है तो पियूष का लंड उछल कर बाहर आ जाता है, जिसे सविता हाथ में लेकर प्यार से सहलाने लगती है, अपनी मां के हाथों में लंड का स्पर्श पाकर आह निकलती है और वो रानी के होंठों से अपने होंठ अलग करता है, रानी अलग होती है और उठ कर झट से अपनी पैंटी उतार कर पूरी नंगी हो जाती है उसकी देखा देखी सविता भी अपनी कच्छी उतार देती है और नंगी हो जाती है, पीयूष बिस्तर के बीच में लेट जाता है वहीं सविता और रानी उसके एक एक ओर बिस्तर पर चढ़ जाती हैं
रानी आगे झुक कर अपनी सास की चूची को मुंह में भर लेती है वहीं पीयूष रानी के बदन को सहलाने लगता है
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सविता: ओह बहू आह ऐसे ही आह मज़ा आ रहा है खा जा मेरी चूचियों को।
पीयूष: आह क्या पत्नी और मां पाई है मैने आह रानी ओह।
पीयूष रानी के चूतड़ों को सहलाते हुए बोला।
रानी अपनी सास की चूचियों को बदल बदल कर चूस रही थी वहीं सविता उसके सिर को अपनी चूचियों पर दबा रही थी, वहीं पीयूष उसकी कमर और चूचियों को चूम रहा था, वहीं रानी का एक हाथ उसके पति के लंड को पकड़ कर सहला रहा था,
सविता: आह बच्चों ओह ऐसे ही आह ओह मेरे बच्चों ओह ओह।
रानी ने जी भर के अपनी सास की चूचियों को चूसा फिर जा कर छोड़ा और फिर बिना समय गंवाए, अपने पति के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी,
पीयूष के मुंह से सिसकियां निकलने लगी।
पीयूष: आह रानी अह कितना गरम मुंह है तेरा ओह मज़ा आ रहा है ऐसे ही चूसती रह।
पीयूष ने कहा और फिर हाथ बढ़ा कर अपनी मां के चूतड़ों को पकड़ लिया और उन्हें अपनी ओर खींचने लगा, सविता भी उसका इशारा समझ गई और तुरंत आगे बढ़ कर अपने बेटे के चेहरे पर बैठ गई, उसके बैठते ही पीयूष ने अपनी मां की चूत में जीभ चलाना शुरू कर दिया, और सविता अपने बेटे की जीभ के इशारों पर मचलने लगी,


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सविता: ओह आह बेटा आह चाट अपनी मां की चूत को ओह आह इसी चूत से निकला था तू ओह आह आज बापिस घुसा अपनी जीभ ओह।
सविता ने गरम होते हुए बोला
पीयूष के हाथ अपनी मां की गरम बातों को सुन कर उसके चूतड़ों पर कस गए वहीं रानी तो बिना विराम लिए अपने पति के लंड को चूस रही थी,
वहीं सविता अपने बेटे से अपनी चूत चटवा रही थी उसकी चूत लगातार गीली होकर बह रही थी,
कुछ देर बाद सविता ने अपने बेटे के मुँह से धीरे से अपनी कमर ऊपर उठाई। पीयूष की जीभ अभी भी उसकी चूत से चिपकी हुई थी, जैसे छोड़ना न चाहती हो। सविता की चूत गीली, रस से चमक रही थी – बेटे की लार और अपना रस मिलकर। वो हाँफते हुए मुस्कुराई, रानी की ओर देखा जो अभी भी पीयूष के लंड को सहलाते हुए चूस रही थी।
सविता (हाँफते हुए): बहू... अब तू अकेली क्यों खेल रही है? आ... माँ-बहू मिलकर बेटे की सेवा करें... देख... कितना कड़क है... हम दोनों का इंतजार कर रहा है...
रानी ने लंड से हाथ नहीं हटाया, बल्कि सविता को अपनी ओर खींचा। सविता घुटनों के बल बिस्तर पर झुकीं, पीयूष के लंड के ठीक सामने। सविता ने पहले जीभ फेरी – लंड के सुपारे पर, धीरे-धीरे गोल-गोल। पीयूष की आह निकली। रानी ने सामने से सविता की चूची पकड़ी, मसली, और फिर अपना मुँह लंड पर रख दिया – सविता के साथ मिलकर चूसने लगी। दोनों की जीभें लंड पर टकरा रही थीं, रस चाट रही थीं, होंठ मिलाकर लंड को बीच में दबा रही थीं। तो कभी एक दूसरे को होंठों को चूस रही थी

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रानी (लंड चूसते हुए, सविता से): ओह मम्मी... आपका बेटा... कितना मोटा लंड रखता है... आह... चूसने में मजा आ रहा है ना।
सविता (रानी की जीभ से टकराते हुए, आह भरकर): आह... बहू... तू भी चाट... सास बहु की जीभ एक साथ आह... बेटे के लंड पर... ओह... कितना गंदा लग रहा है... लेकिन... मजा दोगुना... पीयूष... बेटा... देख... तेरी माँ और बहू... तेरा लंड... मिलकर... चूस रही हैं... जैसे रंडियाँ... आह... तेरा लंड... कितना गरम है।

पीयूष ने दोनों के सिर पकड़े, धक्के लगाने लगा – लंड दोनों के मुँह में बारी-बारी घुसा रहा था। कमरा आहों और चूसने की चपचप आवाजों से भर गया। सविता और रानी की चूचियाँ आपस में टकरा रही थीं, निप्पल्स सख्त होकर रगड़ खा रही थीं।
पीयूष (सिसकते हुए): आह... माँ... रानी... दोनों... मेरी रंडियाँ... चूसो... पूरा गले में उतार लो... ओह... माँ... तेरी जीभ... आह मक्खन की तरह... लंड पर... कितनी गरम... मजा आ रहा है...

कुछ देर दोनों सास-बहू ने पीयूष का लंड चूसा, फिर सविता ने रानी को बगल में धकेला। वो खुद बिस्तर पर लेट गई, टांगें थोड़ी फैलाईं। पीयूष ऊपर आया, और अपना लंड सविता की चूचियों के बीच फँसा दिया। सविता ने दोनों चूचियाँ दबाकर लंड को बीच में जकड़ लिया – मोटी, नरम चूचियाँ लंड को दबा रही थीं। पीयूष ने कमर हिलानी शुरू की – लंड चूचियों के बीच अंदर-बाहर होने लगा। रानी अपनी सास की चूचियों को थाम कर उन्हें दबा रही थी और जिससे पीयूष को और गहराई मिले चूचियां चोदने में, साथ ही वो झुक कर अपनी सास के होंठों को चूस रही थी,

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रानी (सविता के होंठ चूसते, चूचियाँ दबाते): सासू माँ... देखो... आपकी चूचियाँ... कितनी मोटी... लंड को अपने में समा रही हैं... आह... कितना गरम लंड है... आपकी चूचियों के बीच... ओह... मैं दबाती हूँ...
सविता (आह भरते, रानी के होंठ चूसते): आह... बहू... तेरे हाथ... माँ की चूचियों पर... ओह... कितने गरम... पीयूष... बेटा... चोद... माँ की चूचियाँ... लंड से जैसे चूत चोदता है ... आह... रानी... तेरी जीभ घुसा... माँ के मुँह में... चूस... और चूस...

पीयूष (धक्के लगाते, लंड चूचियों में घिसते): आह... माँ... तेरी चूचियाँ... कितनी नरम... लंड को दबा रही हैं... ओह... रानी... दबाओ... माँ की चूचियाँ... और जोर से... देखो... लंड बाहर आ रहा है... चाट लो... माँ की चूचियों से निकलकर...
रानी ने वैसा ही किया और झुककर लंड का सुपारा चाटा – चूचियों के बीच से। सविता की चूचियाँ लार से चमक रही थीं, रस से लथपथ। रानी की जीभ कभी लंड तो कभी चूचियों के बीच से चाट रही थीं। पीयूष की सिसकियाँ तेज़ हो गईं।

कुछ देर बाद पीयूष ने सविता की चूचियों से लंड निकाला। रानी बिस्तर पर लेट गई, टांगें फैलाईं।
रानी: आह मम्मी आओ न मेरी चूत चाटो आह बहुत देर से तड़प रही है। आओ मेरी रंडी मम्मी चाटो अपनी बहू की चूत।
सविता: आह बहू तूने मेरे मन की बात कह दी आज तेरी चूत को खा जाऊंगी।
सविता उसके ऊपर झुकी, चूत पर जीभ फेरी – धीरे-धीरे, होंठ चूसते हुए। रानी की आह निकली। पीयूष सविता के पीछे आया, अपना लंड सविता की चूत पर रगड़ने लगा,
सविता रानी की चूत में ही सिसकने लगी,
रानी: ओह जी क्यों तड़पा रहे हो मम्मी को घुसा दो न।
पीयूष ने ये सुनकर वैसा ही किया और लंड अपनी मां की चूत में घुसा दिया। सविता की कमर अकड़ गई, लेकिन वो रानी की चूत चाटती रही।
सविता (रानी की चूत चाटते, पीयूष से): आह... बेटा... तेरी माँ की चूत... भर दी... ओह... रानी... बहू... तेरी चूत... कितनी गीली कितनी स्वाद है आराम से लेट ... माँ चाट रही है... रस पी रही है... आह... पीयूष... जोर से... माँ को चोद... बहू की चूत चाटते हुए...
पीयूष सविता की कमर थाम कर धक्के लगाने लगा,

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रानी अपनी सास के सिर को सहलाते हुए उसकी जीभ की हरकतों से मचल रही थी,
रानी (सिसकते हुए , सविता के बाल पकड़कर): मम्मी जी ... जीभ... अंदर... ओह... कितनी गरम... ओह जी ओह... देखो... सासू माँ मेरी चूत चाट रही हैं... आप... माँ को चोदो... जोर से... आह... मम्मी... चाटो... बहू की चूत... जैसे रंडी की चाटते हैं आह मम्मी जी।
पीयूष (धक्के लगाते): आह... माँ... तेरी चूत... कितनी कसी... ओह... रानी... देख... माँ तेरी चूत चाट रही है... जैसे प्यासी कुतिया दूध चाटती है... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ... चोदूँगा... चटवाऊँगा... रोज...
सविता की जीभ रानी की चूत में घूम रही थी, क्लिट को चूस रही थी । पीयूष के धक्कों से सविता का बदन हिल रहा था, जिससे उसकी जीभ और तेज़ चल रही थी।रानी का पूरा बदन उसकी सास की हरकतों से मचल रही थी, उसकी कमर बार बार घूम रही थी वो अपने चरम सुख की ओर बढ़ रही थी और क्यों न बढ़े उसकी सास उसकी चूत चाट रही थी, उसकी पति अपनी मां को चोद रहा था ये सब सोचते हुए रानी झड़ी – और रस सविता के मुँह में बहा दिया। सविता ने भी चटकारे लेते हुए सब चाटा, इधर पीयूष ने अपनी मां की चूत से लंड निकाल लिया तो सविता भी उसके सामने से हट गई
सविता के हटते ही पीयूष बिस्तर पर चढ़ कर आगे आया अपनी पत्नी की टांगों के बीच, रानी लेटे हुए हाफ रही थी, पीयूष ने उसकी दोनों टांगों को फैलाया और अपना कड़क लंड रानी की चूत पर घिसने लगा रानी एक बार फिर से मचलने लगी।
रानी: ओह आह हां जी घुसा दो न अपना मोटा लंड मेरी चूत में मत तड़पाओ,
पियूष ने अपने पत्नी की बात मानी और रानी की चूत में लंड घुसाया। जिससे रानी के मुंह से आह निकल गई, वहीं सविता भी रानी के बदन के ऊपर चढ़ कर रानी के मुँह पर बैठ गई – चूत रानी के होंठों पर टिका दी। रानी ने जीभ निकाली, और तुरंत सविता की चूत चाटने लगी। नीचे से पीयूष धक्के लगाने लगा।
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सविता (रानी के मुँह पर रगड़ते): आह... बहू... तेरी जीभ... मम्मी की चूत में... ओह... चाट... पूरा रस पी... पीयूष... बेटा... चोद अपनी पत्नी को... माँ की चूत चटवाते हुए... चोद अपनी पत्नी को आह और तेज धक्के लगा।
पीयूष: आह... रानी... तेरी चूत... कितनी कसी हुई... ओह... मम्मी... देखो... कैसे तुम्हारी बहू तुम्हारी चूत चाट रही है... आह रानी चूस लो मम्मी की चूत का सारा रस... आह... दोनों... मेरी रंडियाँ...हो तुम दोनों आह आह आह।
पीयूष रानी की चूत में धक्के लगाते हुए बोला, सविता हाथ आगे कर रानी की चूचियों को मसल रही थी और पीयूष ने एक हाथ से अपनी मां के चेहरे को पकड़ लिया और अपनी ओर खींच कर उसके होंठों को चूसने लगा, तीनों आपस में जुड़े हुए थे, पीयूष का लंड रानी की चूत में अंदर बाहर हो रहा था, रानी की जीभ सविता की चूत में चल रही थी वहीं सविता और पियूष एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे,
कुछ देर बाद ही सविता रानी के मुंह पर कांप रही थी और अपने चरमसुख को महसूस कर रही थी उसकी चूत रानी के मुंह में अपना रस छोड़ रही थी जिसे रानी शरबत की तरह गटक रही थी, सविता झड़ने लगी और झड़ने के बाद रानी के मुंह से हटकर एक ओर गिर गई, पीयूष ने रानी को चोदना जारी रखा, रानी लगातार आहें भर रही थी,
सविता अपनी सांसों को संभालते हुए उठी और अपने बेटे और बहू के बगल में बैठ गई, उसे कुछ सुझा तो उसने अपनी दो उंगलियों को अपने मुंह में घुसा कर गीला किया और फिर रानी के चूत के नीचे की ओर ले गई जहां पीयूष का लंड अंदर बाहर हो रहा था और फिर थोड़ा नीचे लेजाकर वो रानी के गांड के छेद को अपनी उंगली से छेड़ने लगी,रानी मचलने लगी।
कुछ पल अपनी उंगली को रानी के गांड के छेद पर घुमाने के बाद उसने एक उंगली रानी की गांड में घुसा दी और रानी के मुंह से एक आह निकल गई, चूत में पति का लंड और गांड में सास की उंगली पाकर वो गन गना उठी, एक उंगली के अच्छे से घुसते ही सविता ने दूसरी उंगली भी उसकी गांड में सरका दी और अंदर बाहर करने लगी, रानी भी मजे से पागल होने लगी उसे दोहरी चुदाई का मज़ा जो मिल रहा था,
रानी: ओह मम्मी जी ओह आह आह आह आह मज़ा आ रहा है ओह जी चोदो और तेज,
इसी बीच सविता ने दूसरे हाथ की उंगलियों को भी मुंह में घुसा कर अच्छे से गीला किया और फिर कुछ पल बाद ही पीयूष की भी एक तेज सिसकी निकली, क्योंकि उसकी मां ने अचानक से एक उंगली पीछे से उसकी गांड में घुसा दी,
पीयूष: ओह आह आह आह मां ओह ये क्या आह,
पहली बार पीयूष अपनी मां की उंगली को अपनी गांड में महसूस कर उत्तेजना से भर गया, सविता ने रानी की तरह ही पीयूष की गांड में भी दो उंगलियों को घुसा दिया और अपना हाथ आगे पीछे करने लगी,
सविता अब एक साथ अपनी बहू और बेटे की गांड से खेल रही थी और दोनों पर ही इसका बहुत असर हो रहा था, पीयूष तो और तेजी से आहें भरते हुए रानी को चोदने लगा वहीं रानी का भी पूरा बदन अकड़ रहा था, दोनों के मुंह से ही अभी बस सिर्फ आहें और सिसकियां निकल रही थी,
सविता: आह आह आह मेरे बच्चों ओह ऐसे ही करते रहो एक दूसरे के साथ तुम्हारी मम्मी तुम्हारी गांड से खेल रही है,मज़ा आ रहा है न दोनों को,
सविता को इसका जवाब जल्दी ही मिला जब रानी और पीयूष एक साथ झड़ने लगे, रानी की कमर ऊपर उठ गई तो पीयूष ने गुर्राते हुए कुछ धक्के लगाए और अपना रस रानी की चूत में भरने लगा और एक के बाद एक धक्के लगा कर पूरा रस उसकी चूत में उड़ेल दिया। दोनों के झड़ते ही सविता ने अपनी उंगलियां दोनों की गांड से निकाल ली और फिर जैसे ही पीयूष ने अपना लंड रानी की चूत से निकाला सविता उसे अपने मुंह में भर कर चाट कर साफ करने लगी।


दूसरी ओर शहर के एक छोटे लेकिन भीड़भाड़ वाले रेस्टोरेंट में महिपाल, नीलेश और शैलेश एक कोने की टेबल पर बैठे थे। सामने प्लेट में गरमागरम परांठे, दाल, सब्जी और दही। लेकिन तीनों का ध्यान खाने से ज्यादा बातों पर था। बाहर धूप तेज थी, लेकिन अंदर एसी की ठंडक और बातों का जोश दोनों थे।
शैलेश ने परांठा तोड़ा, मुंह में डाला, फिर महिपाल की ओर देखा।
शैलेश (मुँह में परांठा रखते हुए): महिपाल भाई साहब... आज का काम तो हो गया। हस्ताक्षर, फाइल जमा... अब बस इंतजार। क्या लगता है... कितने दिन में परमिशन मिल जाएगी?
महिपाल ने चम्मच से दाल उठाई, मुंह में डाली। वो थोड़ा सोच में पड़ गया।
महिपाल (धीरे से, लेकिन मुस्कुराते): शैलेश... सच कहूँ तो... अफसरों का मूड है। लेकिन हमने जो कागजात तैयार किए... सब सही हैं। जमीन हमारी है, प्रोजेक्ट अच्छा है। लगता है... दो-तीन हफ्ते में क्लियर हो जाएगा। बस... थोड़ा इन लोगों के पीछे पड़ना पड़ेगा।
नीलेश ने दही का कटोरा अपनी तरफ खींचा, चम्मच से खाया।
नीलेश (हँसते हुए): वो तो हम करेंगे भाई साहब। जबतक काम नहीं हो जाता सालों की गांड के पीछे पड़े रहेंगे।
शैलेश: वैसे सालों की गांड है तो नहीं पीछे पड़ने लायक पर कोई नहीं काम है अपना।
इस पर तीनों हंसने लगे,
महिपाल: अरे शैलेश भाई तुम भी न अलग ही बात करते हो।
शैलेश: अरे सही तो कह रहा हूं गांड के पीछे पड़ना ही है तो गांड भी वैसी होनी चाहिए कि देखने और पीछे लगने में मज़ा आए।
इसी बीच महिपाल के फोन पर व्हाट्स ऐप मैसेज आता है तो महिपाल फोन उठा कर देखने वाला ही होता है कि शैलेश उसे कहता है: अरे भाई साहब तुम्हारे पास जमीन के और सारे कागजों के फोटो तो हैं न?
महिपाल: हां सब के हैं। अभी जमा करने से पहले ही खींचे थे।
शैलेश: मुझे भेज दो कोई जान पहचान निकालता हूं अगर निकल गई तो अपना काम यूं हो जाएगा।
महिपाल: अभी भेजता हूं,
महिपाल तुरंत शैलेश को सारे फोटो भेज देता है। उसके बाद जो मैसेज आया था उसे देखता है वो पीयूष का था पहले लिखा था पापा इसे अकेले में खोलना और उसके साथ एक वीडियो था। महिपाल तुरंत सतर्क हो जाता है और दोनों से कहता है: मैं हाथ धो कर आता हूं, और फिर अकेले में आकर वो वीडियो खोल कर देखता है तो उसकी आँखें चौड़ी हो जाती हैं

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वो देखता है वीडियो में उसकी बहू और पत्नी एक दूसरे के बगल में बिल्कुल नंगी होकर लेटी हैं दोनों ने अपनी टांगों को पीछे की ओर मोड़ रखा है जिससे उनकी गांड और चूतड़ पूरी तरह खुले हुए दिखाई दे रहे हैं उसकी बहू की गांड में बेटे का लंड है जिसे वो एक हाथ से पकड़ कर निकालता है क्योंकि दूसरे हाथ से उसने फोन पकड़ रखा था और वीडियो बना रहा था, वो रानी की गांड से लंड निकालता है और फिर सविता की गांड के सामने आता है और अपना लंड सविता की गांड के छेद पर रखता है और फिर अंदर घुसा देता है, महिपाल को अपनी पत्नी की गांड में अपने बेटे का लंड घुसता हुआ साफ दिखता है ये देख तो उसके बदन में भी सिहरन होने लगती है और उसका लंड कड़क होने लगता है, इतने में पीछे से उसे नीलेश बुलाते हैं तो वो फोन को बंद करके तुरंत जेब में रख लेता है और उनके पास चला जाता है।

खाने के बाद तीनों बापिस दफ्तर में जाकर फाइल जमा कराते हैं वहीं महिपाल के मन में तो वही घूम रहा था वो सोचता है कि उसका परिवार कितना अलग हो गया है इन लोगों से, बताओ ये लोग सोच भी नहीं सकते कि घर पर मेरा बेटा अपनी पत्नी और मां की गांड मार रहा होगा, उसका मन अब काम से हटकर कामसुख पर लग रहा था,
फाइल जमा करा के वो लोग बाहर निकल ही रहे थे कि एक औरत ने उन्हें रोका,
औरत: भाई साहब आपके पास पेन होगा मुझे फॉर्म पर साइन करने हैं
नीलेश: हां हां लीजिए ना।
औरत: धन्यवाद बस 5 मिनिट रुकिए अभी देती हूं।
औरत पेन लेकर थोड़ा आगे जाकर खड़ी हो कर फार्म भरने लगती है और वो लोग वहीं खड़े होकर बातें करने लगते हैं, इसी बीच उस औरत का पल्लू उसके कंधे से सरक जाता है और तीनों की नज़रें उसके ब्लाउज़ में बंद बड़ी बड़ी चूचियों और उसकी गोरी कमर पर ठहर जाती है
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औरत जल्दी से ही अपने पल्लू को ठीक करती है और तीनों बापिस अपनी नज़र हटाते हैं और एक दूसरे को देखते हैं और मुस्कुराते हैं
शैलेश: हाय क्या नजारा है इसने तो मेरा पेन खड़ा कर दिया।
नीलेश: सही में यार।
महिपाल भी औरत के बदन को देख कर थोड़ा गरम हुआ था पर वो थोड़ा झिझकते हुए बोला: अरे यार आप लोग भी न क्या बोल रहे हो।
शैलेश: अरे महिपाल भाई साहब काहे इतना झिझक रहे हो अच्छा खुद ही बताओ तुम्हें नज़ारा पसंद नहीं आया?
महिपाल: अरे ऐसी बात नहीं है
शैलेश: अरे महिपाल भाई अब हम लोग दोस्त भी हैं और पार्टनर भी तो अब सब झिझक भूल जाओ, अब आपस में ही एक दूसरे के सामने खुल कर नहीं बोलेंगे तो कब बोलेंगे।
नीलेश: और क्या बिल्कुल सही कहा,
महिपाल को खुलने की बात सुनकर एक झटका सा लगा वो सोचने लगा ये लोग सही बोल रहे हैं ये ही मौका खुलने का, अब मेरा जीवन जितना खुल चुका है उतना ये लोग न खुल सकें तो न सही पर इन लोगों के साथ भी ऐसी मस्त तो कर ही सकता हूं। इतने में ही वो औरत आई और नीलेश को पेन देकर चली गई।
महिपाल: वैसे इसकी गांड के पीछे लगना पड़ता तो मज़ा आता,
महिपाल ने धीरे से बोला तो वो दोनों भी हंसने लगे,
शैलेश: ये हुई न बात महिपाल भाई साहब, अब खुल कर मन की बात कही है तुमने।
शैलेश ने आगे चलते हुए दफ्तर से बाहर आते हुए कहा, बाकी दोनों भी उसके बगल में चल रहे थे।
महिपाल: अब तुमने दोस्त मान लिया है तो दोस्तों के साथ तो खुलना ही पड़ेगा ना।
नीलेश: बिल्कुल, दोस्ती का पहला नियम तो यही कहता है।
महिपाल: अच्छा भाई साहब तो दोस्ती के और कौन से नियम हैं?
नीलेश: दोस्त हर मजा साथ में लेते हैं चाहे वो शराब का हो या शबाब का।
शैलेश: तो फिर आज करें फिर प्रोग्राम नई दोस्ती के नाम?
महिपाल: कैसा प्रोग्राम?
शैलेश: अरे समझ जाओ भाई साहब, शराब का।
नीलेश: कर सकते हैं क्यों महिपाल भाई क्या कहते हो ?
महिपाल: हां बिल्कुल पर शबाब का क्या?
शैलेश: अरे महिपाल भाई तो पूरे जोश में हैं, वैसे शराब का पहले बनाते हैं शबाब का भी मौका मिला तो जल्दी ही करेंगे।
महिपाल: ये भी ठीक है
नीलेश: शैलेश घुमाओ गाड़ी फिर ठेके की तरफ।
शैलेश: नेकी और पूछ पूछ। वैसे बैठेंगे कहां?
नीलेश: कहीं भी बैठ जाएंगे जगह की कमी थोड़ी ही है।
महिपाल: पिछली बार की तरह करते हैं आप लोग आ जाओ हमारे घर।
नीलेश: अरे पिछली बार भी तुम्हारे यहां ही बैठे थे इस बार सेवा का मौका हमें दो।
महिपाल: नहीं भाई साहब दोस्ती की शुरुआत तो मेरे यहां से ही होगी, आगे से तुम जैसा चाहो वैसे कर लिया करेंगे।
शैलेश: चलो ठीक है महिपाल भाई तुम्हारा घर हो या हमारा बात तो एक ही है।
महिपाल: वैसे शबाब का क्या करना है? तुम लोगों को शराब के बाद शबाब जरूरी लगता है।
नीलेश: हां भाई साहब नशे के बाद बिना चुदाई के नहीं रहा जाता।
शैलेश: नशे का असली मज़ा तो तभी आता है।
महिपाल: तो पिछली बार की तरह ही करते हैं न आप लोग भाभियों को लेकर आ जाना।
नीलेश: वो सब तो ठीक है पर फिर बच्चे? उनके सामने ये सब करना अच्छा नहीं लगता ना।
महिपाल: अरे कुछ नहीं होगा बच्चे नीचे सो जाएंगे हम लोग ऊपर छत पर अपना प्रोग्राम करेंगे। फिर आगे के प्रोग्राम के लिए कमरों में चले जाएंगे।
नीलेश: चलो ठीक है ऐसा ही करते हैं पहले अपनी अपनी पत्नियों को भी तो मनाना पड़ेगा।
तीनों बातें करते हुए गाड़ी में आगे बढ़ जाते हैं, आगे क्या क्या करना ह उस बारे में सोचते हुए।


इधर चोदम पुर में शाम की चाय चल रही थी, कर्मा, सभ्या और अंजली कमरे से बाहर निकल चुके थे और सबके साथ बैठ कर चाय पी रहे थे, अंजली को थोड़ी शर्म और झिझक हो रही थी क्योंकि अभी वो अंदर चुदाई कर रही थी और ऐसे अब सब के सामने बैठी थी, हालांकि सब कुछ बिल्कुल साधारण लग रहा था आपस में बातें, नौकझोंक ये सब देख उसे बहुत अच्छा लग रहा था,
किरन: भाभी बोर तो नहीं हो रही ना?
किरन ने अंजली से पूछा, तो अंजली थोड़ी शर्मा गई और बोली: अभी से भाभी?
पल्ली: अरे भाभी हो तो भाभी ही बोलेंगे न भाभी।
शालू: अरे बच्चों क्यों परेशान कर रहे हो उसे? इतनी प्यारी बच्ची है।
किरन: बुआ बड़ा प्यार आ रहा अपनी बहू पर।
शालू: तुम लोग पिटोगे अभी।
अंजली: अरे कोई बात नहीं मौसी बुलाने दो, अच्छा लगता है।
ये कह कर वो शर्मा गई तो सब हंसने लगे।
पल्ली: चलो न भाभी हमारे साथ थोड़ा घूम कर आते हैं गांव में।
किरन: हां और बहुत सी बातें भी करनी हैं तुमसे।
सागर: अरे हम लोगों को भी बातें करनी थी भाभी से।
अनुज: और क्या तुम लोग ही क्यों करेंगे।
पल्ली: ननद पहले देवर बाद में।
दोनों अंजली को लेकर चली गईं। बाकी घर में सब अपने काम में लग गए।


जारी रहेगी
संबंधी समधन का होगा संगम
इंतजार रहेगा उस पल का

जोरदार जबरजस्त प्लाट तैयार हो रहा है
मजा आएगा
 
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