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अपडेट नंबर 259 पोस्ट कर दी है पढ़ कर रिव्यू ज़रूर करें, लाइक और रिव्यू कम नहीं होने चाहिए। और जब तक 30 लाइक्स नहीं होते अपडेट लिखना शुरू नहीं होगा।
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Tharkipo bhai aap ki tarif mai kya likhu kuch samaj hi nhi ata h aap ese hi nhi is forum ke sabse behatreen write ho jitni bhi tarif ki jaye hamesa kam hi rehti mere hisab seकाम भवन में भी यही हुआ हर तरह से चुदाई करने के बाद सब थक कर सो गए थे महिपाल के परिवार को सुबह घर जल्दी पहुंचना था क्योंकि अंजली आने वाली थी, एक अनोखे दिन का अंत करके महिपाल और उसका परिवार भी नींद के साए में चला गया।
एक और दिन का अंत हो चुका था और कल फिर से नया दिन आने वाला था जो और नए किस्से लाने वाला था
अपडेट 255
गेंदापुर की एक सुहानी सुबह थी, अभी बाहर अंधेरा ही था तभी सविता की आंख खुली उसने धीरे धीरे से आंखें खोल बगल में देखा तो बेटे का सोता हुआ चेहरा दिखा, उसने पीयूष का हल्का सा हिलाया और धीमी आवाज़ में बोली: उठ बेटा सुबह होने वाली है जा अपने कमरे में जा कर सो जा,
पीयूष आंखें मलते हुए उठा और फिर बिस्तर से उठ कर खड़ा हो गया,
सविता: अरे कपड़े तो पहन ले,
ये सुन पीयूष हल्का सा मुस्कुराया, और बोला: अरे मैं तो भूल ही गया था, तुम भी पहन लो।
सविता: अभी उठने से पहले पहन लूंगी, तू जा अभी।
पीयूष ने जल्दी से कपड़े पहने और जाने लगा तो पीछे से सविता बोली: अपने पापा को भेज देना जल्दी से।
पीयूष: हां भेजता हूं अभी,
ये कह कर पीयूष कमरे से निकल जाता है और चुपके से बिना आवाज़ किए अपने कमरे के बाहर जा कर दरवाज़ा खोलता है और अंदर का नज़ारा देखता है तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है,
उसके पापा उसकी पत्नी को पीछे से पकड़ कर सो रहे थे, वहीं उसकी पत्नी भी लगभग पूरी नंगी थी उसके चूतड़ों पर एक पतली चादर थी जिसने उसके चूतड़ों और जांघों को छुपा रखा था, उसकी भरी हुई चूची उसके पापा के हाथ में थी जो उसे थामे सो रहे थे, पीयूष ने अपने पापा को पुकारा: पापा पापा उठो,
आवाज़ से महिपाल थोड़ा सा हिले पर जागे नहीं तो फिर पीयूष ने आगे जाकर उनको हिलाया तब जाकर महिपाल की नींद टूटी, उठने के बाद महिपाल ने भी जल्दी से कपड़े पहने और कमरे से बाहर निकल गए, वहीं पीयूष उनकी जगह अपनी पत्नी के पीछे उससे चिपक कर लेट गया, उसे अब नींद नहीं आ रही थी, वो सोचने लगा पिछले दिनों के बारे में, शहर में बिताई हुई उस रात को अब एक हफ्ता हो चुका था उस रात जिसने उसके परिवार का जीवन बदल दिया था, ऐसा नहीं था कि किसी के मन में उसे लेकर या इस नए बदलाव को लेकर दुख था, बल्कि इसका उल्टा ही था, अब जब भी मौका मिलता था वो अपनी मां को चोदता था और उसके पापा उसकी पत्नी को, बहुत सी नई नई चीज़ें आजमा रहे थे वो लोग, बस अंजली घर में हो तो सावधान रहना पड़ता था। ये सब सोचते सोचते उसकी आंख फिर से लग गई।
सूरज निकल चुका था और चोदम पुर में में भी सब उठ चुके थे और सुबह के काम निपटा रहे थे, कर्मा के घर में सुबह की चहल पहल थी कोई रसोई में था तो कोई अभी सो ही रहा था तो कोई सुबह के काम निपटा रहा था सभ्या सब को आवाज़ लगाते हुए हाथों में चाय की ट्रे लेकर रसोई से आ रही थी और आंगन में टेबल पर चाय लाकर रख दी,
उसने बदन पर अभी सिर्फ एक सादा धोती लपेट रखी थी जिसमें उसका पेट और बड़ी बड़ी चूचियां नंगी दिख रही थीं उसने फिर से सबको आवाज लगाई,
सभ्या: अरे कहां हो सब, आ जाओ चाय ठंडी हो जाएगी, सुबह हो गई, पर किसी को कुछ पड़ी ही नहीं है, शालू, गुंजन, ममता, बच्चों को और सबको उठा कर लाओ तो।
सभ्या आवाज लगा रही थी कि इतने में उसके पिता यानी कर्मा के नाना आंगन में आए,
नाना: अरे बिटिया क्या हुआ क्यों सुबह सुबह घर को सिर पर उठा रही है,
सभ्या: देखो न बाबा, चाय बना दी है और सब गायब हैं अभी तक, चलो तुम तो पी लो कम से कम,
नाना: अरे बिटिया तू इस हालत में सामने है तो चाय कौन पियेगा इधर आ अह बाबा के पास।
नाना सभ्या को खींच कर खुद से चिपका लेते हैं और पीछे से उसे बाहों में भर लेते हैं,
सभ्या: अरे बाबा ये सब बाद में आह कर लेना पहले चाय तो पी लो।
नाना: आह बिटिया पी लूंगा चाय भी ओह तेरा ये बदन कितना मखमली है, आह मन करता है इससे खेलता ही रहूं।
नाना ने सभ्या के पेट पर हाथ चलाते हुए कहा,
सभ्या: ओह बाबा मैं कौन सा भागी जा रही हूं जितना मन करे खेल लेना पर अभी चाय पियो,
सभ्या ने अपने पिता की बाहों से निकलते हुए कहा,
नाना: ठीक है भाई तू जैसा कहे, तेरा कहा न माने इतनी किसी में हिम्मत नहीं है।
नाना आगे जाकर एक कुर्सी पर बैठ गए और सभ्या ने उन्हें चाय दी।
सभ्या: बाबा तुम भी न बहुत बातें बनाने लगे हो।
नाना: वो सब छोड़ तू भी चाय ले और पी बैठ कर आराम से।
सभ्या: हां बाबा पी रही हूं पता नहीं ये शालू कहां रह गई, कर्मा को उठाने गई थी।
सभ्या ने चाय का घूंट भरते हुए कहा,
वहीं शालू ने कर्मा को उठा तो दिया था पर कर्मा बिस्तर से नहीं उठा था और अभी अपनी मौसी के बगल में बैठ कर उसके मखमली पेट को सहलाते हुए उसके रसीले होंठों को चूस रहा था
कुछ देर बाद शालू ने उसे धकेला और बोली: चल अब बहुत हो गया, जीजी बुला रही हैं चाय पीले नहीं तो तेरे साथ साथ मुझे भी सुनाएंगी।
कर्मा: अरे मौसी तुम्हारे होंठो के बाद चाय तो बेस्वाद लगेगी, अच्छा थोड़ी देर दूदू पुलादो।
शालू: धत्त मैं नहा चुकी हूं अब कपड़े खराब नहीं होने दूंगी, तू चल अभी।
कर्मा: थोड़ी सी देर बस,
शालू: अभी नहीं कर्मा बाहर चल, पहले चाय पी ले फिर दूदू पी लिओ।
कर्मा: पक्का न?
शालू: हां बाबा पक्का तू भी न बिल्कुल बच्चा बन जाता है कभी कभी।
ये कहते हुए शालू बिस्तर से उठी और कर्मा को भी खींच कर बाहर ले गई।
बाहर निकले तो बगल वाले कमरे से कुछ आवाज़ आ रही थी दोनों ने अंदर झांक कर देखा तो पाया अनुज ने गुंजन को बिस्तर पर लिटा रखा था और खुद उसके ऊपर चढ़ कर उसके पेट और कमर को सहलाते हुए उसके होंठों को चूम रहा था,
शालू: ओह महाशय अपनी मामी को छोड़ो और जल्दी दोनों बाहर आओ नहीं तो जीजी की डांट पड़ेगी।
अनुज ने ये सुनकर गुंजन के होंठों को छोड़ा और दरवाज़े की ओर देख कर बोला: मौसी बस थोड़ी देर में आया,
शालू: नहीं अभी चल,
इतने में ही गुंजन ने धक्का देकर अनुज को अपने ऊपर से हटा दिया और बिस्तर से उठ खड़ी हुई और अपनी साड़ी सही करने लगी।
गुंजन: अब और नहीं बाबू पहले ही बहुत देर हो चुकी, चलो चाय पियो पहले नाश्ता वगैरा करो।
अनुज: अरे मामी,
कर्मा: अरे मरे छोड़ और बाहर आ जल्दी, तुम चलो मामी।
गुंजन, शालू और कर्मा के साथ निकल गई तो अनुज भी अंगड़ाई लेता हुआ उनके पीछे पीछे निकल गया,
ये लोग आंगन में पहुंचे और सब अपनी अपनी चाय लेकर पीने लगे. तब तक बाकी लोग भी आंगन में आ चुके थे।
नीलेश: अरे ये जमुना और ममता कहां है ?
किरन: पापा और ममता बुआ तो नहाने गए हैं।
शालू: लो हो गया काम दोनों साथ गए हैं तो नहा तो नहीं रहे होंगे।
सभ्या: किरन आवाज लगा दोनों को जल्दी आने के लिए बोल।
किरन बाथरूम के बाहर से आवाज़ लगाती है
किरन: पापा, बुआ जल्दी आओ बड़ी बुआ बुला रही हैं।
जमुना: आ रहे हैं अभी,
जमुना ने ममता की पीठ की चूमते हुए कहा,
ममता के बदन पर बस ब्रा थी, उसका पेटीकोट तो आगे की ओर लटक रहा था वहीं जमुना के बदन पर उसका कच्छा था जिसमें उसका लंड तंबू बना रहा था।
ममता: आह जमुना जल्दी कर जीजी बुला रही हैं।
जमुना: ओह जीजी बुलाने दो अब बिना काम निपटाए नहीं जायेंगे,
वो ममता के चूतड़ों को मसलते हुए बोला,
ममता: तो देर क्यों कर रहा है घुसा दे न पीछे से।
जमुना: ये भी ठीक है,
ये कहते हुए जमुना ने पीछे जगह ली ममता के और अपना लंड उसकी गांड में फंसा दिया।
ममता: ओह आह आह भाई कितना मोटा है तेरा ओह।
जमुना: तुम्हारी गांड जादुई है जीजी इतना मरवाती हो फिर भी कसी हुई रहती है।
जमुना ने दो तीन धक्के लगा कर पूरा लंड ममता की गांड में घुसा दिया और उसकी कमर थाम कर कमर हिलाने लगा, ममता के मुंह से सिसकियां निकलने लगी।
सब ने चाय पी ली थी अब नाश्ते और बाकी कामों की बारी थी मर्द सब बाहर निकल गए काफी काम थे जानवरों के चारा पानी से लेकर खेत के काम साथ ही नया मकान जो बन रहा था उसके लिए सभी चीजें जुटा के रखना, इसीलिए नीलेश ने साफ कर दिया था कि अब से राजन का परिवार भी अब से वहीं उनके साथ रहेगा, सोने के लिए उनके घर का इस्तेमाल कर सकते हैं पर रसोई एक ही होगी, इसलिए सब अपने अपने काम को संभालने के लिए निकल चुके थे वहीं औरतें भी नाश्ते और घर की साफ सफाई में लग गईं। चुदाई तो इन परिवारों के जीवन का हिस्सा बन चुकी थी पर उसके साथ साथ बाकी काम के महत्व को भी सब लोग अच्छे से समझते थे, वैसे भी सारे काम निपटा कर आराम के साथ साथ चुदाई का मज़ा ही अलग होता है।
उसी काम का हिस्सा था गांव में स्कूल बनाना, और उसके लिए महिपाल, नीलेश, शैलेश अपनी हर संभव कोशिश कर रहे थे, क्योंकि ज़मीन महिपाल के पास पहले से ही थी इसलिए उनका आधा काम तो हो चुका था अब बाकी कागज़ वगैरा बनवा कर प्रशासन से परमिशन मिलते ही स्कूल बनने का काम शुरू होना था, उसी के चलते आज नीलेश, शैलेश और महिपाल साथ में शहर के लिए निकल चुके थे,
कर्मा बाकी सब के साथ बाग में होता है कि तभी उसका फोन बजता है
कर्मा: और मेरी जान तुम्हारा ही इंतज़ार था
अंजली: धत्त तुम भी न पूरे फिल्मी हो, और बताओ क्या कर रहे हो?
कर्मा: कुछ नहीं यार बस बाग में था, यहां का काम दिखवा रहा था, पापा और मौसा तो तुम्हारे पापा के साथ गए हैं।
अंजली: हां, मैं भी बोर हो रही हूं, तुमसे मिले भी कई दिन हो गए,
कर्मा: अरे अभी आ जाता हूं, तुम्हे बोर नहीं होने दूंगा।
अंजली: आ जाओ, अच्छा सुनो मुझे तुम्हारे घर आना है तुम्हारी मम्मी से मिलना है,
कर्मा: मम्मी से अचानक क्यों?
अंजली: ऐसे ही मेरा मन है।
कर्मा: ठीक है आ जाओ इसमें क्या है।
अंजली: आ क्या जाओ, लेने आओ अभी 20 मिनट में।
कर्मा: ठीक है आता हूं तुम तैयार हो जाओ तो फोन कर देना।
अंजली: ओके।
आधे घंटे बाद अंजली कर्मा के साथ उसके दरवाज़े पर खड़ी होती है किरन दरवाज़ा खोलती है।
कर्मा: अंजली ये किरन है तुम्हारी ननद और किरन ये तुम्हारी भाभी।
कर्मा की इस बात पर अंजली उसे आंखें फाड़ कर देखती है, और वहीं किरन भी,
अंजली: ये क्या बोल रहे हो,
अंजली झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहती है,
किरन: अरे दीदी अंदर आओ तुम भैया तो कुछ भी बोलते रहते हैं।
अंजली फिर अंदर जाती है, सबसे मिलती है, सभ्या भी उस पर बहुत प्यार लुटाती है, कर्मा को कुछ काम आ जाता है तो उसे वो घर पर छोड़कर चला जाता है, घर पर अंजली सबका व्यवहार और आपस का प्यार देख मन ही मन सोचती है कि जो कुछ कर्मा ने उसके परिवार के बारे में बताया देख कर लगता ही नहीं कि ये सब वैसे होंगे, पर आपस में कितना प्यार है सब में, क्या ये सब उसके कारण ही इतना करीब हैं।
अंजली के अंदर जिज्ञासा और उत्तेजना भी हो रही थी कि कैसा लगता होगा जब कर्मा अपनी मां या मौसी या मामी के साथ करता होगा, क्योंकि सब एक से बढ़कर एक हैं।
ये सब सोचते हुए अंजली कर्मा के परिवार के साथ व्यस्त थी, किरन और पल्लवी ने उसे घेर रखा था और खूब सारी बातें कर रहे थे,
सभ्या: बेटा चल खाना खा ले।
अंजली: नहीं चाची मैं खा कर आई थी,
सभ्या: ये सब नहीं चलता खाना तो पड़ेगा ही, किरन और पल्ली तुम लोग बाग में बुला कर लाओ सबको।
किरन: अभी जाते हैं बुआ।
किरन और पल्ली बाग के लिए निकल जाते हैं वहीं अंजली सभ्या के साथ उसकी मदद करने लग जाती है, पर अंजली के दिमाग़ में बार बार वही सब घूम रहा था, उसे सोच में देख सभ्या पूछती है: क्या हुआ बेटा क्या सोच रही है?
अंजली: कुछ नहीं चाची बस ऐसे ही।
सभ्या: अच्छा ठीक है।
अंजली कुछ देर चुप रहती है और फिर बोलती है: वो चाची कर्मा ने मुझे कुछ बताया है, आपके बारे में।
सभ्या: क्या बताया है?
अंजली: वो की आप, मेरा मतलब आपका परिवार, सब लोग वैसे मतलब आपस में आप लोग सब....
सभ्या मुस्कुराती है और कहती है: अब कर्मा ने जो बताया है सच हो होगा वो तुझसे झूठ थोड़े ही बोलेगा।
अंजली ये सुन हां में सिर हिलाती है तब तक कर्मा भी बापिस आ जाता है और फिर सब खाने में लग जाते हैं, अंजली भी उनके साथ खाती है,
खाने के बाद अंजली और कर्मा उसके कमरे में एक साथ बैठे होते हैं,
अंजली: सुनो।
कर्मा: हां।
अंजली: वो मैने न अभी तुम्हारी मम्मी से पूछा।
कर्मा: क्या पूछा?
अंजली: मतलब उसी सब के बारे में जो तुमने मुझे बताया था,
कर्मा: अच्छा तो क्या बोला मां ने?
अंजली: यही की तुमने बताया होगा तो सच ही बताया होगा।
कर्मा: तो फिर तुम क्यों परेशान हो?
अंजली: पता नहीं यार एक तरफ तुम्हारा वो सच और दूसरी तरफ़ देखती हूं तो तुम्हारा परिवार कितना प्यारा है, सबका आपस में कितना प्यार है।
कर्मा: हां है तो अच्छा तुमने नीतू के साथ भी किया तो ये सब सोचने में क्या दिक्कत हो रही है।
अंजली: नीतू के साथ बात अलग थी पर पता नहीं क्यों परिवार के बारे में सोच कर अजीब लगता है यकीन नहीं होता।
कर्मा कुछ कहने ही वाला होता कि तभी कमरे में सभ्या आती है,
सभ्या: पेट भर के खा लिया ना अंजली बेटा? कुछ और ला दूं?
अंजली: नहीं नहीं चाची।
कर्मा: अरे मां इधर आओ ना, इधर बैठो।
सभ्या: हां बता न क्या हुआ?
सभ्या ने उनके पास बिस्तर पर बैठते हुए कहा। इधर कर्मा ने उठ कर दरवाज़ा बंद कर दिया।
कर्मा: वो अंजली के मन में कुछ सवाल हैं हमें लेकर।
कर्मा बापिस बिस्तर पर आते हुए कहता है
अंजली ये सुनकर चौंक जाती है और उसे ना में सिर हिलाकर कहती है।
सभ्या: अंजली बेटा खुल कर बोल ना क्या बात है,
कर्मा: मां बात कुछ नहीं है तुम इधर आओ, इसके मन का संशय मिटाना है,
ये कहते हुए कर्मा सभ्या को हाथ पकड़ कर उठाता है और अपने होंठ उसके होंठों पर रख देता है और चूसने लगता है, अगले ही पल सभ्या भी बेटे का साथ देने लगती है कर्मा के हाथ सभ्या की कमर पर चलने लगते हैं, अंजली पीछे बैठे हुए मुंह फाड़े ये सब देखती है अचानक कर्मा की इस हरकत से वो हैरान रह जाती है,
कर्मा और सभ्या बिना किस हिचक के उसके सामने एक दूसरे के होंठों को चूसने में लगे थे, वहीं अंजली मां बेटे का ऐसा प्यार देख हैरान थी, उसके प्रेमी और उसकी मां के बीच ये सब देखना बहुत अलग थी, पता होना अलग बात थी पर अभी वो सामने से देख रही थी एक मां और बेटे को प्रेमियों की तरह एक दूसरे को चूमते हुए।
कुछ देर बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो कर्मा ने और सभ्या ने उसकी ओर देखा अंजली के चेहरे पर हैरानी के भाव साफ दिख रहे थे,
कर्मा: कैसा लगा?
अंजली: वो मैं क्या, क्या कहूं समझ नहीं आ रहा,
कर्मा: समझने की ज़रूरत नहीं है, बस महसूस करो इधर आओ।
कर्मा ने उसे अपने पास बुलाया और अंजली भी हिचकिचाते हुए उठके उन दोनों के पास गई, कर्मा ने हाथ आगे कर उसे भी खुद से चिपका लिया और उसके होंठों को चूसने लगा, अंजली भी कुछ पल हिचकिचाई फिर साथ देने लगी जब दोनों के होंठ अलग हुए तो अंजली ने सभ्या की ओर देखा जो उसे मुस्कुराते हुए देख रही थी, अंजली सभ्या की आंखों में देख शर्मा गई,
सभ्या: अरे शर्मा क्यों रही है बेटा, यहां सब अपने ही हैं, खुल कर जी,
ये कहते हुए सभ्या ने अपना चेहरा आगे बढ़ाया और अंजली के होंठों को चूम लिया बस पल भर के लिए ही। पर उस पल भर के स्पर्श ने ही अंजली के बदन में सिहरन मचा दी उसे लगने लगा उसके बदन में बिजली दौड़ रही है,
इधर कर्मा ने उसके सूट और सलवार को खोलना शुरू कर दिया, अंजली ने भी अब उसे नहीं रोका और कुछ पल बाद ही अंजली मां बेटे के बीच ब्रा और पैंटी में थी और सबसे हैरानी वाली बात थी कि अंजली को अजीब नहीं लग रहा था उसे लग रहा था जैसे बिल्कुल अपने घर पर वो नंगी हो रही है,
सभ्या ने ब्रा और पैंटी में अंजली को देखा और बोली: बहुत सुंदर है तू बेटा, नज़र न लग जाए मेरी।
अंजली: तुमसे ज़्यादा नहीं हूं।
सभ्या: हट मुझ बुढ़िया से अपनी बराबरी कहां करती है,
इधर कर्मा ने तब तक अपनी शर्ट और पजामा उतार दिया था और वो भी बस एक कच्छे में था,
अंजली: अरे तुम और बुढ़िया ये किसने कहा मां?
अंजली ने अचानक कहा फिर झिझकी और बोली मैं भी तुम्हें मां बुलाऊं?
सभ्या: हां क्यों नहीं मेरी बच्ची जो तुझे अच्छा लगे वो बुला।
अंजली सभ्या के गले से लग गई और उसकी कमर और पीठ को सहलाने लगी,
इधर कर्मा ने अपनी मां के पल्लू को हटाया और नीचे बैठ कर उसके मखमली पेट को चूमने चाटने लगा,
अंजली ने ये देखा और बोली: कैसा लग रहा है मां बेटे का ऐसा प्यार?
सभ्या: बहुत अच्छा मेरी बच्ची, तू भी करेगी मुझे ऐसा प्यार।
ये सुन अंजली मुस्कुराई और फिर उसका चेहरा अपनी ओर कर उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिए और दोनों एक दूसरे के होंठों को चूमने लगे।
कर्मा नीचे बैठ कर अपनी मां के पेट और नाभि को चूम रहा था उसने हाथ कभी अपनी मां की कमर को सहलाते तो कभी उसके चूतड़ों को तो कभी चूचियों को, अंजली के हाथ भी लगातार सभ्या के बदन पर चलने लगे, वहीं सभ्या भी अंजली के बदन को छू रही थी,
कर्मा अपनी मां और अपनी प्रेमिका को इस तरह प्यार जताते देख खुश भी हो रहा था उसकी उत्तेजना हर बढ़ते पल के साथ बढ़ती जा रही थी, अंजली को भी सभ्या के रसीले होंठों को चूसने में अदभुत आनंद मिल रहा था। कुछ पल बाद दोनों के होंठ अलग हुए तो सभ्या हांफते हुए बोली: बड़ा मीठा स्वाद है तेरा अंजली।
अंजली: और तुम्हारा सबसे मीठा बिल्कुल रबड़ी हो मां।
अंजली ने पीछे से सभ्या से चिपकते हुए कहा,
सभ्या: अब अच्छी लग रही है खुश खुश।
अंजली: अभी तो और भी खुश होना है मुझे।
सभ्या: अच्छा वो कैसे होगी?
अंजली ने हाथ आगे बढ़ाया और सभ्या के ब्लाउज़ के बटन खोलने लगी और बोली: अपनी मां का दूध पीकर।
इस पर तीनों हंसने लगे, और सभ्या बोली: बस इतनी सी बात ये ले, अंजली ने एक ही बटन खोला था तब तक सभ्या ने तुरंत बाकी के बटन खोल दिए और फिर अपना ब्लाउज़ पकड़ कर आगे से खोल दिया और अपनी बाजुओं पर लटका लिया,
अंजली ने सभ्या की सुंदर, मोटी और बड़ी बड़ी चूचियों को देखा तो उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, कर्मा भी नीचे बैठे बैठे अपनी मां की चूचियों को नंगा होते देख रहा था, हालांकि वो रोज ही ये नजारा देखता था पर हर बार उसे उतनी ही उत्तेजना होती थी,
अंजली: हाय मां कितनी सुंदर दूदू हैं तुम्हारे और कितने बड़े बड़े भी।
सभ्या: तुझे पसंद आए?
अंजली: पसंद नहीं बहुत पसंद।
अंजली ने पीछे से ही उसके पेट को सहलाते हुए कहा,
कर्मा: अरे पागल दुदू नहीं, चूचियां बोलते हैं,
अंजली: धत्त गंदी बात ही बोलो तुम।
कर्मा: असली मज़ा ही गंदी बात में हैं
कर्मा ने अपनी मां के पेट को चूमते हुए कहा, तो अंजली ने उसके सिर को पीछे धकेल दिया, और बोली: धत्त दूर रहो मेरी मां हैं।
कर्मा: अरे?
सभ्या: और क्या दूर रह तू मैं अंजली की मां हूं।
कर्मा: मां तुम भी इसके साथ मिल गई,
अंजली: मेरी मां है मेरे साथ मिलेंगी ही,
अंजली सभ्या के पेट और उसकी चूचियों को मसलने लगी साथ ही उसके नंगे कंधे को भी चूम रही थी,
वहीं सभ्या भी उसकी हरकतों से गरम हो रही थी, कर्मा भी नीचे बैठ कर अपनी मां के पेट को सहला रहा था,
अंजली: ओह कितनी मुलायम और बड़ी बड़ी हैं मां तुम्हारी।
कर्मा: तुम्हारी क्या?
अंजली: चूचियां, अब खुश।
कर्मा: खुश तो तुम हो मां की चूचियों को मसल कर।
सभ्या: खुश तो मैं हूं बहुत मेरे दोनों बच्चे इतने प्यार से खेल रहे हैं मेरे साथ,
अंजली: ओह मां मुझे भी बहुत खुशी हो रही है तुम्हारी चूचियों से खेलने में।
इधर नीचे कर्मा ने सभ्या की साड़ी को पकड़ कर खोलना शुरू कर दिया और कुछ पल बाद ही साड़ी नीचे थी फिर कर्मा ने अपनी मां के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया और फिर पेटीकोट को नीचे सरका दिया सभ्य अब दोनों के सामने सिर्फ एक काली कच्छी में खड़ी थी कर्मा अपनी मां की जांघों को सहलाते हुए ऊपर बढ़ने लगा
अंजली भी पीछे से सभ्या की पीठ और कंधे को चूम रही थी और उसकी कमर और चूतड़ों और चूचियां को सहला रही थी,
कर्मा: कब तक खड़ा रखोगी मां को चलो बिस्तर पर।
अंजली मुस्कुराई और सभ्या की ओर देखा और बोली चलो मां,
सभ्या दोनों के साथ बिस्तर पर गई तो दोनों ने उसे बीच में लिटा दिया और खुद उसके दोनों तरफ आ गए, और फिर कर्मा ने सभ्या की एक चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगा, अंजली ने जब ये देखा तो उसकी देखा देखी अंजली ने भी सभ्या की एक चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगी। सभ्या दोनों के सिर पर हाथ फिराते हुए आहें भरने लगी, वहीं अंजली और कर्मा पूरे लगन से उसकी चूचियों को चूस रहे थे,
सभ्या के मुंह से लगातार आहें और सिसकियां निकल रही थी,
सभ्या: ओह आह बच्चों ऐसे ही आह चूसो अपनी मां की चूचियों को ओह आह खा जाओ निचोड़ लो।
अंजली ने कुछ पल बाद मुंह हटाया और फिर बोली: अब मुझे वो वाली दो,
कर्मा और अंजली ने जगह बदली और अगले ही पल दोनों फिर से बदल कर चूचियों को चूस रहे थे, और तब तक चूसते रहे जब तक मन नहीं भर गया, कर्मा ऊपर की ओर सरका और अपनी मां के होंठों को चूसने लगा वहीं अंजली भी सभ्या की गर्दन और गाल को चूमने लगी, दोनों के हाथ सभ्या के पेट और छाती पर चल रहे थे
सभ्या अपने बेटे से अपने होंठों को चुसवा रही थी वहीं अंजली थोड़ी नीचे सरकी और फिर से सभ्या की चूची को मुंह में भर लिया और चूसने लगी, सभ्या के होंठ कर्मा के होंठों पर कस गए,
चूचियों को बारी बारी चूसने के बाद अंजली नीचे सरकी और सभ्या के पेट को चूमने लगी चाटने लगी, पूरे पेट पर अपनी जीभ और होंठ फिराने लगी, पेट के बाद उसने अपना अगला निशाना सभ्या की नाभी को बनाया, जिसमें जीभ घुसा कर वो चूसने लगी तो सभ्या की कमर अकड़ गई और उसका पेट ऊपर उठ गया, अंजली भी सभ्या को ऐसे प्रतिक्रिया करते देख और जोश में आ गई और अच्छे से उसकी नाभि को चूसने चाटने लगी,
कर्मा का भी अब उत्तेजना से बुरा हाल हो रहा था उसका लंड बिलकुल कड़क हो कर कच्छे में तम्बू बना रहा था जिसे उसने बाहर निकाल लिया और अपनी मां के होंठों को चूसते हुए उसके हाथ में रख दिया जिसे सभ्या सहलाने लगी। अंजली ने अपनी जीभ सभ्या की नाभी से निकाली तो थोड़ा आगे कर्मा का नंगा लंड देखा जिस पर सभ्या का हाथ चल रहा था, अंजली आगे बढ़ी और उसने कर्मा के लंड को मुंह में भर लिया और चूसने लगी,
अपने लंड पर अंजली का मुंह महसूस कर कर्मा ने अपनी मां के होंठों को छोड़ा और आहें भरने लगा, वहीं सभ्या भी उठ कर बैठी और अंजली की ब्रा उसने खोल दी, साथ ही पैंटी को भी नीचे सरका दिया, अंजली ने अगले पल ही पल भर को कर्मा का लंड मुंह से निकाला और ब्रा पैंटी को अपने बदन से अलग कर फैंक दिया, अब वो बिल्कुल नंगी थी, और हाथ आगे बढ़ा कर उसने कर्मा के कच्छे को भी उसकी टांगों से नीचे सरका दिया बिना उसका लंड मुंह से निकाले।
कर्मा: ओह आह अंजली ऐसे ही मेरी जान।
कर्मा अंजली के सिर पर हाथ फिराते हुए बोला,
अब सिर्फ सभ्या के बदन पर ही पैंटी थी और ये बात शायद अंजली को भी न गंवार गुजरी, उसने कर्मा के लंड को मुंह से निकाला और सभ्या को धकेल कर फिर से पीछे उसकी पीठ पर लिटा दिया,
सभ्या: अरे जोश में है मेरी बच्ची।
अंजली: मां तुम्हे ऐसे देख जोश तो आएगा ही,
ये कहते हुए अंजली ने सभ्या की पेंटी में उंगलियों को फंसाया और फिर उसे नीचे खींच दिया और फिर उसे सभ्या की टांगों से निकालकर अलग फेंक दिया अब तीनों ही बिल्कुल नंगे थे।
अंजली ने सभ्या की नंगी गीली चूत को सामने से देखा तो नजरें गड़ाए देखती ही रह गई,
कर्मा ने भी जब अंजली को अपनी मां की चूत को ऐसे घूरते देखा तो उसे कुछ सुझा और उसने अपना हाथ अंजली के सिर पर रखा और उसके सिर को अपनी मां की चूत पर दबा दिया जिससे अंजली का मुंह सीधा सभ्या की चूत से टकराया,
अब अंजली के लिए चूत चाटना नया तो नहीं था नीतू के साथ वो ये सब कर चुकी थी, इसलिए चूत पर मुंह पड़ते ही उसने मुंह खोल दिया और अपनी जीभ सभ्या की चूत पर चलानी शुरू कर दी, और सभ्या का मुंह अचानक से खुल गया।
सभ्या: ओह आह अंजली बेटा अहम्म।
सभ्या का खुला मुंह देख कर्मा उसकी ओर सरक गया और अपना लंड उसके मुंह में घुसा दिया, जिसे सभ्या तुरंत चूसने लगी,
अब सभ्या कर्मा का लंड चूस रही थी और सभ्या की चूत अंजली चाट रही थी,
कर्मा: ओह मां ऐसे ही चूसो ओह अंजली खा जाओ मां की चूत सारा रस चाट जाओ,
अंजली भी पूरे जोश के साथ सभ्या की चूत चाट रही थी।
सभ्या के लिए भी अंजली के द्वारा चूत चाटे जाना एक अलग ही अनुभव था, और उसे उत्तेजित कर रहा था, अंजली ने मन भर के चूत चाटी फिर अपना मुंह हटाया जो कि चूत रस से सना हुआ था,
अंजली आगे बढ़ी और कर्मा का लंड पकड़ कर सभ्या के मुंह से निकाल दिया और खुद सभ्या के होंठों को चूमने लगी, वहीं कर्मा को इशारा किया मां की टांगों के बीच आने का, कर्मा के लिए क्या परेशानी थी वो तुरंत सभ्या के पैरों के बीच था और अपना लंड सभ्या की चूत पर थपथपा रहा था, अंजली ने सभ्या के होंठों को छोड़ा और उसकी आँखों में देखते हुए बोली: मां मुझे तुम्हे चुदते हुए देखना है, चुदोगी अपने बेटे से?
सभ्या समझ रही थी अंजली के लिए मां बेटे की चुदाई देखना एक बहुत ही उत्तेजित करने वाला और गरम करने वाला विचार था जिसे होते देखने के लिए वो इतनी जोश में थी,
सभ्या ने उसकी आंखों में देखते हुए सिर हिलाया और बोली: पर तुझे भी चुदना पड़ेगा मेरे साथ,
इस पर अंजली मुस्कुराई और ऊपर उठ गई और घूम कर अपने हाथों और पैरों पर आ गई उसका मुंह सभ्या की चूत के ठीक ऊपर था जिस पर कर्मा अपना लंड घिस रहा था, इधर अंजली के मुड़ने से उसकी चूत सभ्या के सिर के पास थी जिसे हाथ बढ़ा कर वो घिसने लगी।
अंजली: रुको एक मिनट,
अंजली ने कर्मा से कहा, कर्मा रुक गया तो अंजली ने सभ्या की चूत पर थूका और फिर कर्मा से बोली: अब घुसाओ
अंजली की सहमति मिलते ही कर्मा ने अपना लंड अपनी मां की चूत में घुसा दिया, वैसे तो कुछ नया नहीं था कर्मा और सभ्या के लिए वो लगभग रोज ही चुदाई करते थे, पर हर बार कर्मा को अपनी मां की चूत कुछ अलग ही सुख देती थी और पर आज अंजली के साथ होने से दोनों के लिए ही ये एक खास एहसास था, कर्मा ने धीरे धीरे से धक्के लगाना शुरू कर दिया।
सभ्या: ओह बेटा ओह घुसा दिया आह अपना मोटा लंड अपनी मां की चूत में, आह अंजली देख कैसे कर्मा का मोटा लंड मेरी चूत को चीर रहा है आह।
अंजली: हां मां आह देख रही हूं तुम्हारी चूत भी कितनी गीली और गरम है आह पूरा लंड ले रही है बेटे का ओह मां तुम कमाल हो।
अंजली गर्म होते हुए अपनी चूत को सहलाते हुए बोली, उसके सामने एक बेटा अपनी मां को चोद रहा था और ये उसके लिए एक नया और अनकहा अहसास था, जिसे देख वो गरम हो रही थी
सभ्या: ओह आह आह आह कर्मा, ऐसे ही आह अंजली देख मेरी चूत ओह।
अंजली: ऐसे ही कर्मा चोदो मां को अच्छे से तेज तेज धक्के लगाओ।
अंजली अपनी चूत सहलाते हुए कर्मा का जोश बढ़ाते हुए बोल रही थी कर्मा भी अपनी मां की चूत में तेजी से जोश में आते हुए धक्के लगा रहा था,
सभ्या: आह आह आह बेटा कर्मा आह ऐसे ही चोद अपनी मां को, अंजली आह तू भी देख अपनी मां की चुदाई आह ओह ।
अंजली: ओह मां हां देख रही हूं आह ऐसा आज तक कुछ नहीं देखा आह आह आह मां,
कर्मा: ओह मां ओह अंजली अब तो आह तुम्हारे मन के सारे संशय आह मिट गए न।
अंजली: आह सब मिट गए ओह तुम बस ऐसे ही चोदते रहो मां को।
सभ्या: ओह अंजली मेरे ऊपर आ बेटा आह आह तेरी चूत का स्वाद चखा आह अपनी मां को।
अंजली: अभी आई मां,
अंजली तुरंत सभ्या के ऊपर सरक आई। उसने अपने घुटनों के बल पर थोड़ा ऊपर उठकर अपनी चूत को सभ्या के मुंह के ठीक सामने ला दिया। सभ्या की साँसें गरम-गरम अंजली की भीगी हुई चूत पर पड़ रही थीं। अंजली ने धीरे से कमर नीचे की, अपनी चूत सभ्या के होंठों से छुआ दी।
सभ्या ने बिना एक पल गँवाए अपनी जीभ बाहर निकाली और अंजली की चूत की ऊपरी सिलाई पर हल्के से फेरा। अंजली का बदन एक झटके से काँप गया।
अंजली: आह्ह्ह… माँ… ओह्ह… कितनी नरम जीभ है तुम्हारी…
सभ्या ने अब दोनों हाथों से अंजली के चूतड़ थाम लिए, उन्हें थोड़ा फैलाया और जीभ को पूरी तरह अंदर डाल दिया। अंजली की चूत से रस टपक रहा था, जो सभ्या की जीभ पर, होंठों पर फैल रहा था। सभ्या उसे चाट रही थी जैसे कोई प्यासी औरत सालों बाद पानी पी रही हो।
नीचे कर्मा अभी भी अपनी माँ की चूत में धीरे-धीरे लेकिन गहरे धक्के मार रहा था। हर धक्के के साथ सभ्या की चूत से चपचप की आवाज़ निकल रही थी। कर्मा का लंड पूरी तरह रस से लथपथ था।
कर्मा: माँ… आह… तुम्हारी चूत आज और भी कसी हुई लग रही है… ओह… अंजली के सामने चुदवाने से इतना मज़ा आ रहा है…
सभ्या (अंजली की चूत चाटते हुए बीच-बीच में बोलती हुई): हाँ बेटा… आह… तेरी माँ को आज बहुत जोश आ रहा है… अंजली तेरी चूत का स्वाद… ओह्ह… कितना मीठा है… आह्ह…
अंजली अब खुद कमर हिलाने लगी थी। वो सभ्या के मुँह पर अपनी चूत रगड़ रही थी। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं। दोनों हाथों से वो सभ्या की बड़ी-बड़ी चूचियों को मसल रही थी, निप्पल्स को उँगलियों से दबा रही थी।
अंजली: माँ… आह… और ज़ोर से चाटो… ओह्ह… जीभ अंदर डालो… हाय… ऐसे ही… मैं… मैं झड़ जाऊँगी…
कर्मा ने अब धक्कों की रफ्तार बढ़ा दी। उसका पेट सभ्या की जाँघों से टकरा रहा था। हर धक्के पर सभ्या की चूत और गीली हो रही थी। कर्मा का लंड अब पूरी तरह चिकना और चमकदार हो चुका था।
कर्मा: माँ… अब तेज़… तेज़ चोदूँगा… तैयार हो जाओ… आह्ह…
सभ्या: हाँ बेटा… जोर से… अपनी माँ की चूत फाड़ दो… आह्ह… अंजली… मेरी बच्ची… तू भी झड़ जा… मेरे मुँह में… ओह्ह…
अंजली अब पूरी तरह झुक गई थी। उसकी चूत सभ्या के मुँह में दबी हुई थी। सभ्या जीभ को तेज़-तेज़ अंदर-बाहर कर रही थी। अंजली की कमर काँप रही थी। उसकी आँखें बंद हो गई थीं।
अंजली: माँ… आह्ह… बस… अब… ओह्ह्ह… आ रहा है… आह्ह्ह्ह!!!
अंजली का पहला झटका आया। उसकी चूत से गरम रस की धार निकली और सीधे सभ्या के मुँह में जा गिरी। सभ्या ने उसे पूरा पी लिया, जीभ से चाटते हुए। अंजली का बदन कई बार झटके खा रहा था। वो सिसक रही थी, लेकिन रुक नहीं रही थी।
इसी बीच कर्मा भी अपनी माँ की चूत में जोर-जोर से धक्के मार रहा था। उसका लंड अब फुल स्पीड पर था। इसका असर सभ्या की चूत पर ये हुआ कि वो भी झड़ने लगी, कर्मा ने मां को झड़ते देखा तो अपने आप को संभाला और धक्कों की गति धीमी कर दी वो इतनी जल्दी नहीं झड़ना चाह रहा था, इसलिए सभ्या के झड़ते ही उसने अपने झटके रोक दिए और कर्मा कुछ पल ऐसे ही रहा, फिर धीरे-धीरे बाहर लंड बाहर निकाला। उसके लंड से सभ्या की चूत का रस टपक रहा था। अंजली ने तुरंत आगे बढ़कर कर्मा के लंड को मुँह में ले लिया और साफ करने लगी।
अंजली: माँ… तुम्हारा और कर्मा का रस… कितना स्वादिष्ट है…
फिर वो नीचे झुकी और सभ्या की चूत से टपकते रस को जीभ से चाटने लगी। सभ्या फिर से सिहर उठी।
सभ्या: अंजली… मेरी बच्ची… ओह… कितनी प्यारी है तू…
तीनों कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे। साँसें धीमी होने लगीं। कमरे में सिर्फ़ हल्की-हल्की सिसकियाँ और प्यार भरी आहें गूँज रही थीं।
कर्मा ने दोनों को अपनी बाहों में भर लिया।
कर्मा: अब संशय बाकी है?
अंजली (मुस्कुराते हुए, सभ्या की चूची पर सिर रखकर): अब एक भी नहीं… माँ… तुम सचमुच कमाल हो… और कर्मा तुम तुम मादरचोद हो ।
इस पर तीनों हंसने लगे,
कर्मा: अब आराम बहुत हो गया मुझे मत भूलो मेरा लंड अभी भी खड़ा है,
अंजली: अभी तो बस शुरुआत है क्यों मां,?
सभ्या: बिल्कुल अब तो जब तक तू चाहेगी तब तक चुदाई करेंगे।
कुछ देर बाद अंजली बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी और कर्मा उसकी चूत में दनादन लंड पेल रहा था सभ्या अंजली के सिर की ओर लेट कर उसका जोश बढ़ा रही थी
कर्मा अपना लंड जड़ तक अंजली की चूत में धक्के लगा कर भरने लगा।
अंजली: ओह्ह्ह… हाय… पूरा… आह… और अंदर…
कर्मा अब रुक-रुक कर धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ उसका लंड और गहराई तक जाता, और अंजली की चूत से चपचप-चपचप की आवाज़ निकलने लगी। सभ्या अंजली के सिर के पास लेटी हुई थी, एक हाथ से अंजली के बाल सहला रही थी, दूसरा हाथ अंजली की चूचियों पर था – निप्पल को उँगलियों से दबाती, मसलती, खींचती।
सभ्या: देख मेरी बच्ची… कितना जोश से चोद रहा है तुझे कर्मा… आह… तेरी चूत कितनी कसी हुई लग रही है… ले… ले उसका पूरा लंड…
अंजली ने सभ्या की ओर देखा, आँखों में शरारत और उत्तेजना थी। उसने सभ्या का हाथ पकड़ा और अपनी चूची पर और जोर से दबवाया।
अंजली: माँ… आह… तुम भी मेरे साथ खेलो ना… अपनी चूत मेरे मुँह पर दे दो… मैं चाटूँगी तुम्हें…
सभ्या मुस्कुराई। वो उठी, घुटनों के बल अंजली के चेहरे के ऊपर आ गई। अपनी चूत – जो अभी भी गीली थी – अंजली के होंठों के ठीक ऊपर ले आई। अंजली ने तुरंत जीभ निकाली और सभ्या की चूत को चाटना शुरू कर दिया। सभ्या की कमर सिहर गई।
सभ्या: ओह्ह… अंजली… मेरी बच्ची… आह… ऐसे ही… जीभ अंदर डाल… ओह्ह… कितनी अच्छी चाटती है तू…
नीचे कर्मा अब फुल स्पीड पर था। उसके धक्के तेज़ और गहरे हो गए थे। हर धक्के पर अंजली का पूरा बदन हिल रहा था। सभ्या की चूत उसके मुँह पर रगड़ रही थी, जिससे अंजली की सिसकियाँ और तेज़ हो गईं।
कर्मा: अंजली… तेरी चूत… आह… कितनी गरम है… ओह… मां ओह ओह ओह
अंजली (सभ्या की चूत चाटते हुए बीच-बीच में बोलती): हाँ… कर्मा… जोर से… आह… फाड़ दो मेरी चूत… माँ… तुम्हारी चूत… ओह… कितना रस है… पी जाऊँगी सारा…
सभ्या अब खुद कमर हिला रही थी, अंजली के मुँह पर अपनी चूत रगड़ रही थी। उसकी चूचियाँ उछल रही थीं। उसने अपने हाथों से अपनी चूचियाँ मसलनी शुरू कर दीं, निप्पल्स को खींचते हुए।
सभ्या: आह्ह… दोनों बच्चे… मेरी जान… ओह… ऐसे ही… चोदो… चुसो… मैं… मैं फिर झड़ने वाली हूँ…
वहीं कर्मा ने अब अंजली की टांगों को कंधों पर उठा लिया। इस आशन में उसका लंड और गहराई तक जा रहा था। हर धक्के पर अंजली की चूत की दीवारें सिकुड़ रही थीं, लंड को जकड़ रही थीं।
कर्मा: अंजली… मैं… आह… अब झड़ने वाला हूँ… अंदर… अंदर डालूँ?
अंजली (सभ्या की चूत से मुँह हटाकर हाँफते हुए): नहीं नहीं नहीं आह मां के मुंह में, मुझे मां के मुंह में रस देखना है तुम्हारा,
ये सुनकर सभ्या और गरम होने लगी और उस ने जोर से कमर घुमाई, अपनी चूत अंजली के जीभ पर दबा दी।
सभ्या: ले… ले मेरी बच्ची… आह्ह… झड़ रही हूँ… ओह्ह्ह!!!
सभ्या का रस अंजली के मुँह में बहने लगा। अंजली ने उसे पूरा पी लिया, जीभ से चाटते हुए। सभ्या अंजली के मुंह से सरक गई और और अपनी सांसे संभालने लगी उसी पल कर्मा ने भी आखिरी तेज़ धक्के मारे।
कर्मा: आह्ह… अंजली… ओह मां मैं… आह्ह्ह्ह!!!
ये सुनकर सभ्या तुरंत आगे आई और कर्मा ने भी अपना लंड अंजली की चूत से निकाला और अपनी मां के खुले मुंह में घुसा कर झड़ने लगा
कर्मा का लंड सभ्या के मुंह में फड़क रहा था। एक के बाद एक गरम-गरम पिचकारियाँ सभ्या के गले में जा रही थीं। सभ्या ने आँखें बंद कर लीं, दोनों गाल फुलाकर चूस रही थी, जैसे एक भी बूँद बर्बाद न होने देना चाहती हो। कुछ रस उसके होंठों के किनारों से छलककर नीचे गिर रहा था – अंजली के पेट पर, उसकी नाभि में, चूचियों के बीच में फैल रहा था।
अंजली नीचे लेटी हुई ये सब देख रही थी – कर्मा का लंड सभ्या के मुँह में अंदर-बाहर हो रहा था, सभ्या के गाल फूल-फूलकर सिकुड़ रहे थे, और उसके मुंह से निकलती चूसने की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। अंजली का बदन अभी भी झटकों से काँप रहा था, उसकी चूत से कर्मा का लंड निकलने के बाद भी रस टपक रहा था।
अंजली (हाँफते हुए, उँगली से अपने पेट पर फैला रस उठाकर चाटते हुए): ओह्ह… माँ… कितना गरम है कर्मा का रस… देखो… मेरे बदन पर भी गिर रहा है… आह… कितना स्वादिष्ट…
सभ्या ने कर्मा का लंड मुँह से निकाला, अभी भी फड़क रहा था, आखिरी बूँदें टपक रही थीं। उसने जीभ से लंड का सुपारा चाटा, साफ किया, फिर अंजली की ओर मुड़ी। उसके होंठ चमक रहे थे, ठोड़ी पर रस की लकीर थी। वो अंजली के पास आई, उसके ऊपर झुककर उसके पेट पर टपके रस को जीभ से चाटने लगी – धीरे-धीरे, जैसे कोई कीमती चीज़ हो।
सभ्या: मेरी बच्ची… तेरा बदन भी अब मेरे बेटे के रस से सना हुआ है… आह… कितना अच्छा लग रहा है…
अंजली ने सभ्या के बाल पकड़े, उसे ऊपर खींचा और उसके होंठ चूम लिए। दोनों के होंठ मिले तो रस का स्वाद दोनों के मुँह में फैल गया – कर्मा का रस, सभ्या का लार, अंजली की चूत का रस – सब मिलकर एक मीठा-नमकीन स्वाद। दोनों ने एक-दूसरे के होंठ चूसे, जीभें आपस में लिपटीं, रस को एक-दूसरे के मुँह में डालते हुए।
कर्मा बिस्तर पर घुटनों के बल बैठा ये सब देख रहा था। उसका लंड अभी भी आधा खड़ा था, धीरे-धीरे फिर से सख्त हो रहा था। वो मुस्कुराया।
कर्मा: माँ… अंजली… तुम दोनों कितनी गरम हो…।
सभ्या: क्यों अंजली अब तो खुश है तू, और कुछ तो नहीं है मन में?
अंजली: अभी भी कुछ बचा हुआ है
अंजली ने मुस्कुराते हुए कहा,
कुछ देर बाद सभ्या बिस्तर के किनारे लेट गई थी। उसने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठाईं, घुटनों को छाती की ओर मोड़ा और पीछे की ओर फैला दिया। इस मुद्रा में उसकी गांड पूरी तरह खुल गई थी – गोल, मखमली चूतड़ अलग-अलग होकर बीच में गहरा, गुलाबी छेद साफ दिख रहा था। सभ्या ने दोनों हाथों से अपने चूतड़ और फैलाए हुए थे।
अंजली तुरंत बिस्तर के नीचे फर्श पर घुटनों के बल बैठ गई। उसका चेहरा सभ्या की गांड के ठीक सामने था। उसने पहले दोनों हाथों से सभ्या के चूतड़ों को सहलाया, मसला, फिर धीरे से जीभ बाहर निकाली।
अंजली की गरम साँसें पहले सभ्या के छेद पर पड़ीं, जिससे सभ्या की कमर हल्के से सिहर गई। फिर अंजली ने जीभ का नोक सभ्या के गांड के छेद पर रखा और हल्के-हल्के गोल-गोल घुमाने लगी। धीरे-धीरे जीभ को अंदर धकेलने की कोशिश की – पहले सिर्फ सतह पर चाटा, फिर थोड़ा अंदर घुसाया।
सभ्या: आह्ह्ह… अंजली… मेरी बच्ची… ओह्ह… वहाँ… जीभ डाल… और अंदर… कितना अच्छा लग रहा है…
अंजली ने अब जीभ को और गहराई तक धकेला। वो चाट रही थी, चूस रही थी, जीभ को अंदर-बाहर कर रही थी। सभ्या की गांड की मांसपेशियाँ सिकुड़-फैल रही थीं, अंजली की जीभ को जकड़ रही थीं। अंजली का मुँह सभ्या के चूतड़ों से सटा हुआ था, दोनों गाल सभ्या की नरम त्वचा से दब रहे थे।
इधर कर्मा सभ्या के बगल में बैठ गया था। उसने सभ्या की एक बड़ी-बड़ी चूची मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा। निप्पल को दाँतों से हल्के से काटा, जीभ से घुमाया। दूसरी चूची हाथ से मसल रहा था, निप्पल को उँगलियों से दबा रहा था
कर्मा (चूसते हुए): माँ… तुम्हारी चूचियाँ… कितनी रसीली हैं… आह… अंजली तुम्हारी गांड चाट रही है… देखो कितने जोश से,
सभ्या की सिसकियाँ तेज़ हो गईं। उसने एक हाथ से अपनी चूत को सहलाना शुरू कर दिया, उँगलियाँ चूत की लबों पर फेर रही थीं।
सभ्या: ओह्ह… अंजली… ऐसे ही… मेरी गांड चाट… जीभ पूरी अंदर डाल… आह्ह… कितनी नरम जीभ है तेरी… हाय…आह क्या लड़की है ये ओह।
अंजली ने अब और जोश में आकर सभ्या के छेद को चाटना तेज़ कर दिया। जीभ को तेज़-तेज़ अंदर-बाहर कर रही थी, कभी गोल घुमा रही, कभी चूस रही। सभ्या का पूरा बदन काँप रहा था, उसकी साँसें रुक-रुक कर आ रही थीं।
सभ्या: हाँ बेटा… ओह्ह… दोनों बच्चे… मेरी जान… आह… अंजली… और ज़ोर से… जीभ अंदर… कर्मा… चूस… मेरी चूचियाँ चूस…
अंजली अब पूरी तरह डूबी हुई थी। उसकी जीभ सभ्या की गांड में गहरे तक जा रही थी, चाट रही थी, गीला कर रही थी। सभ्या की गांड अब पूरी तरह रिलैक्स हो गई थी, अंजली की जीभ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी। कमरे में सिर्फ़ चाटने की चटचट आवाज़ें, सभ्या की आहें और कर्मा की चूसने की आवाज़ें गूँज रही थीं।
सभ्या की कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी, जैसे और ज्यादा चाह रही हो। अंजली ने एक हाथ बढ़ाकर सभ्या की चूत पर रख दिया, उँगलियाँ अंदर डालकर सहलाने लगी – जबकि जीभ अभी भी गांड में काम कर रही थी।
सभ्या: आह्ह्ह… दोनों आह अंजली दोनों छेदों को छेड़ मेरे आह ओह बेटा… ओह्ह… मैं… पागल हो जाऊँगी… अंजली… मेरी गांड… चाट… और चाट…
कर्मा ने सभ्या की चूची से मुंह हटाया और खड़ा हो गया कर्मा अब पूरी तरह तैयार था। उसका लंड फिर से पूरी तरह खड़ा और चिकना हो चुका था – सभ्या की चूत और अंजली की जीभ के रस से चमक रहा था। सभ्या अभी भी वही मुद्रा में थी – टांगें ऊपर, घुटने छाती से लगे, चूतड़ पूरी तरह फैले हुए, गांड का छेद अंजली की जीभ से गीला और थोड़ा खुला हुआ।
अंजली ने जीभ निकाली, सभ्या के छेद को आखिरी बार चाटा और पीछे हटी। उसने कर्मा की ओर देखा, मुस्कुराई और धीरे से बोली:
अंजली: अब जाओ कर्मा… अपनी माँ की गांड में घुसा दो… मैं सामने से देखूँगी… कैसे तुम्हारा मोटा लंड माँ की गांड को चीरता है…
कर्मा ने सभ्या के चूतड़ थाम लिए, अंगूठों से छेद को थोड़ा और फैलाया। उसने अपना लंड पकड़ा, सुपारे को सभ्या के गांड के छेद पर रखा और हल्का सा दबाव डाला। सभ्या की साँस रुक गई।
सभ्या: आह्ह… बेटा… धीरे… पहले थोड़ा अंदर… ओह्ह… मोटा है तेरा…
कर्मा ने धीरे-धीरे कमर आगे की। सुपारा पहले अंदर घुसा, फिर थोड़ा और। सभ्या की गांड की मांसपेशियाँ सिकुड़ रही थीं, लेकिन अंजली की जीभ ने पहले से ही उसे ढीला कर दिया था। कर्मा ने एक गहरा, धीमा धक्का मारा – आधा लंड अंदर चला गया।
सभ्या: आह्ह्ह्ह… ओह्ह्ह… पूरा… बेटा… आह… गांड में… तेरी माँ की गांड में… घुसा दिया…
अंजली नीचे फर्श पर बैठ गई, चेहरा ठीक सभ्या की गांड और कर्मा के लंड के मिलन के सामने। उसने दोनों हाथों से सभ्या के चूतड़ और थोड़ा फैलाए और करीब से देखने लगी। कर्मा का मोटा लंड सभ्या की गांड में धीरे-धीरे अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर सभ्या का छेद लंड के साथ फैलता, सिकुड़ता। अंजली की आँखें चमक रही थीं।
अंजली: ओह्ह… माँ… देखो… कर्मा का लंड कितना गहरा जा रहा है… तुम्हारी गांड कितनी अच्छे से ले रही है… आह… कितना सेक्सी लग रहा है…
कर्मा अब रफ्तार बढ़ाने लगा। धक्के गहरे और तेज़ हो गए। हर धक्के पर उसकी जांघें सभ्या के चूतड़ों से थप्पड़ मार रहा था – थप-थप-थप की आवाज़ कमरे में गूँज रही थी। सभ्या की चूत से रस बह रहा था, अंजली ने जीभ निकाली और टपकते रस को चाट लिया, फिर आगे बढ़कर कर्मा के अंडकोष को सहलाने लगी – हल्के से मसलते हुए, चूमते हुए।
कर्मा: माँ… तुम्हारी गांड… कितनी टाइट है… आह… अंदर तक… ओह्ह… अंजली… देख… कैसे पेल रहा हूँ माँ को…
सभ्या की आहें अब चीखों में बदल रही थीं। उसने दोनों हाथों से अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिया, उँगलियाँ अंदर डालकर खुद को चोद रही थी।
सभ्या: आह्ह… बेटा… जोर से… अपनी माँ की गांड फाड़ दो… ओह्ह… अंजली… मेरी बच्ची… देख… कितना मज़ा आ रहा है… आह्ह… मैं… झड़ने वाली हूँ…
अंजली ने कर्मा की गोलियों को चूमते हुए कहा:
अंजली: माँ… झड़ जाओ… कर्मा… और तेज़… माँ की गांड फाड़ दो आज मार मार कर, दिखाओ कितने बड़े मादरचोद हो तुम ओह।
कर्मा ने अब फुल स्पीड पकड़ ली। उसके धक्के इतने तेज़ थे कि सभ्या का पूरा बदन हिल रहा था। उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, चूत से रस बह रहा था। अंजली ने एक हाथ बढ़ाकर सभ्या की चूत में उँगलियाँ डाल दीं – कर्मा के धक्कों के साथ-साथ अंदर-बाहर कर रही थी।
सभ्या: आह्ह्ह्ह… दोनों… ओह्ह… मैं… आ रही हूँ… गांड में… चूत में… आह्ह्ह!!! बच्चों क्या कर रहे हो तुम मेरे साथ आह आह आह।
सभ्या का बदन अकड़ गया। उसकी गांड कर्मा के लंड को जकड़ ली, चूत से रस की धार निकली। वो जोर से झडने लगी – पूरा बदन काँप रहा था। कर्मा ने आखिरी कुछ जोरदार धक्के मारे। और फिर अपना लंड बाहर खींच लिया, सभ्या बुरी तरह हांफ़ रही थी कर्मा के लंड निकालते ही वो बिस्तर पर पलट के अपने पेट के बल लेट गई और तेजी से सांसें भरने लगी,
कर्मा ने बिना समय गंवाए ही अंजली को पकड़ा और अपनी मां के ऊपर ही पेट के बल लिटा दिया और फिर उसके ऊपर आकर जगह ली अपने लंड को अंजली की गांड के छेद पर टिकाया, कर्मा ने एक हाथ से अंजली की कमर थामी, दूसरे हाथ से लंड को पकड़ा और धीरे-धीरे दबाव डाला। सुपारा अंदर घुसा – अंजली की गांड की मांसपेशियाँ सिकुड़ गईं, लेकिन वो खुद को रिलैक्स करने की कोशिश कर रही थी।
अंजली: आह्ह्ह… हाय… धीरे… ओह्ह… जल रहा है… लेकिन… मत रुकना…
कर्मा ने धीमा धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। अंजली का मुंह खुल गया, आँखें बंद हो गईं, दाँत भींच लिए। सभ्या ने नीचे से हाथ पीछे लेजाकर अंजली के पैर को सहलाया और बोली,
सभ्या: मेरी बच्ची… सह ले… बेटा धीरे कर रहा है… देख… तेरी गांड कितनी अच्छे से ले रही है… आह… कितना अच्छा लग रहा होगा…
अंजली: आह्ह… माँ… हाँ… अब बहुत अच्छा लग रहा है मैं तैयार हूं… पूरा घुसा दो कर्मा… ओह्ह… मैं… तैयार हूँ…
कर्मा ने एक और गहरा धक्का मारा – पूरा लंड अंदर चला गया। अंजली की कमर ऊपर उठ गई, एक लंबी आह निकली।
अंजली: ओह्ह्ह्ह… पूरा… अंदर… हाय… कितना भरा हुआ लग रहा है… आह… अब… मारो… बिना रहम के आह,
कर्मा अब धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। हर धक्के पर अंजली का पूरा बदन हिल रहा था, उसकी चूचियाँ सभ्या की पीठ पर रगड़ रही थीं। सभ्या ने नीचे से हाथ बढ़ाकर अंजली की चूचियों को सहलाना शुरू कर दिया –
हर धक्के पर नीचे लेटी सभ्या के चूतड़ भी लहर रहे थे कर्मा लगातार तेजी से धक्के लगा रहा था
सभ्या: ले मेरी बच्ची… आह गांड मरवाने का भी मजा ले आह कर्मा आराम से मार।
अंजली की सिसकियाँ तेज़ हो गईं। वो अब खुद कमर हिला रही थी, पीछे धक्के मार रही थी। कर्मा की रफ्तार बढ़ गई – थप-थप-थप की आवाज़ फिर से कमरे में गूँजने लगी। अंजली की गांड अब लंड को अच्छे से ले रही थी, छेद फैलकर चिकना हो गया था।
अंजली: आह्ह… कर्मा… जोर से… फाड़ दो मेरी गांड… ओह्ह… माँ… ऐसे ही मसल डालो मेरी चूचियों को ओह मां।
कुछ देर तक कर्मा ने अंजली की गांड को इसी तरह पीछे से पेला – तेज़, गहरे धक्के, थप-थप की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं। अंजली की सिसकियाँ अब चीखों में बदल चुकी थीं, वो खुद पीछे कमर हिलाकर लंड को और गहराई तक ले रही थी। सभ्या नीचे से अंजली की चूचियाँ मसल रही थी, कभी निप्पल को खींचती, कभी चूमती।
अचानक कर्मा ने धक्के रोक दिए। उसने अंजली की कमर से हाथ हटाया, लंड धीरे से बाहर निकाला। अंजली की गांड का छेद अभी भी खुला हुआ था, रस से चमक रहा था। वो हाँफ रही थी, बदन काँप रहा था।
कर्मा ने बिस्तर पर पीठ के बल लेटते हुए कहा अंजली को इशारा किया तो वो समझ गई वो उठी, कर्मा के ऊपर आ गई। उसने पीठ कर्मा की तरफ करके घुटनों के बल बैठी, फिर धीरे से कमर नीचे की। कर्मा ने अपना लंड पकड़ा, सीधा अंजली के गांड के छेद पर टिकाया।
अंजली ने खुद कमर नीचे की – लंड फिर से अंदर सरकने लगा। इस बार वो खुद कंट्रोल कर रही थी। पूरा लंड अंदर जाने पर वो एक लंबी आह भरकर रुक गई।
अंजली: ओह्ह्ह… पूरा… फिर से अंदर… कितना गहरा जा रहा है… आह… अब… मारो मेरी गांड अब नीचे से… आह कर्मा मेरी गांड,
कर्मा ने नीचे से कमर उठानी शुरू की। धक्के ऊपर की तरफ – हर धक्के पर अंजली का पूरा बदन उछल रहा था। उसकी गांड कर्मा के लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी, चूतड़ फैलकर लंड को निगल रहे थे। थप-थप की आवाज़ अब अलग थी – गीली, गहरी।
सभ्या थोड़ी देर लेट कर दोनों का खेल देखती रही फिर उठी और तुरंत आगे आई। वो अंजली के सामने घुटनों के बल बैठ गई, अंजली की टांगों को थोड़ा फैलाया और अपना मुँह अंजली की चूत पर लगा दिया। जीभ बाहर निकालकर चूत की लबों पर फेरा, फिर क्लिट को चूसने लगी।
सभ्या: मेरी बच्ची… ले… तेरी चूत का रस…आह मेरा तो मन ही नहीं भर रहा आह आज मैं जी भर के चाटूँगी… आह बेटी मज़ा ले… तेरी गांड में कर्मा अपना मोटा लंड पेल रहा है… और चूत मेरे मुँह में…
अंजली का बदन अब दोहरे हमले में था। नीचे से कर्मा की गांड में धक्के, सामने से सभ्या की जीभ चूत पर। अंजली की दोनों हाथ सभ्या के सिर पर थे, बाल पकड़कर उसे और करीब दबा रही थी।
अंजली: आह्ह… माँ… जीभ अंदर… ओह्ह… कर्मा… नीचे से जोर से… हाय… दोनों जगह… मैं… पागल हो रही हूँ… आह्ह… ऐसा मज़ा… पहली बार…
कर्मा नीचे से तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। उसका लंड अंजली की गांड में जड़ तक जा रहा था, बाहर आते ही फिर अंदर। अंजली की गांड अब पूरी तरह खुल चुकी थी, रस से चिकनी। सभ्या जीभ को अंजली की चूत में गहराई तक डाल रही थी, कभी चूस रही, कभी क्लिट को दाँतों से हल्का काट रही।
अंजली की सिसकियाँ अब लगातार हो गईं। उसका बदन काँपने लगा, कमर खुद-ब-खुद ऊपर-नीचे हो रही थी।
अंजली: आह्ह… बस… अब… आ रहा है… ओह्ह… गांड में… चूत में… माँ… कर्मा… आह्ह्ह!!! मैं झड़ रही हूँ… ओह्ह्ह्ह!!!
अंजली का पूरा बदन अकड़ गया। चूत से रस की तेज़ धार निकली – सीधा सभ्या के मुँह में। सभ्या ने उसे पूरा पी लिया, जीभ से चाटते हुए। उसी पल अंजली की गांड की मांसपेशियाँ सिकुड़ गईं, कर्मा के लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि कर्मा भी रुक नहीं पाया।
कर्मा: अंजली… ओह्ह… तेरी गांड… जकड़ रही है… आह… मैं भी… आ रहा हूँ… ले… गांड में मेरा रस… आह्ह्ह!!!
कर्मा ने नीचे से आखिरी जोरदार धक्का मारा। उसका लंड फड़का और गरम-गरम रस की पिचकारियाँ अंजली की गांड के सबसे अंदर जा गिरीं। एक के बाद एक धार – अंजली की गांड भर गई। वो फिर से सिहर उठी, दूसरी बार झड़ते हुए। रस चूत से बहकर सभ्या के चेहरे पर गिर रहा था, गांड से टपककर कर्मा के पेट पर।
तीनों कुछ पल ऐसे ही रहे – अंजली कर्मा के लंड पर बैठी, सभ्या उसके सामने। फिर धीरे-धीरे अंजली उठी, लंड बाहर निकला। उसकी गांड से रस की सफेद धार बहने लगी – बिस्तर पर टपक रही थी।
सभ्या ने अंजली को खींचकर सीने से लगाया, उसके होंठ चूमे। कर्मा भी उठकर दोनों को बाहों में भर लिया।
अंजली (हाँफते हुए, मुस्कुराते हुए): माँ… कर्मा… ये… ये तो जिंदगी भर याद रहेगा… दोनों जगह से… इतना मज़ा… ओह…
सभ्या: अभी कुछ मत बोल बेटा, आराम से लेट जा थोड़ी देर बहुत मेहनत की है।
तीनों एक दूसरे की बाहों में लेट गए, एक नए रिश्ते की शुरुआत हो चुकी थी तीनों के बीच।
जहां अंजली कर्मा के साथ उसके घर पर नए रिश्ते बना रही थी वहीं गैंदापुर में उसकी मां और भाभी भी कुछ नया कर रही थी,
कहां और क्या करने वाली हैं दोनों सास बहू इस हालत में जानने के लिए जुड़े रहिए।
जारी रहेगी।
You are the sweetest soul.Sabhya: Meri bacchi… le... teri chut ka ras…aah mera to mann hi nahi bhar raha, aah aaj main jee bhar ke chaatungi…aah beti maza le… teri gaand mein karma apna mota lund pel raha hai… aur choot mere muh mein…
Anjali ka badan ab dohre hamle mein tha. Neeche se karma ki gaand mein dhakke, samne se sabhya ki jeebh chut par. Anjali ki dono haath sabhya ke sir par the, baal pakadkar use aur kareeb daba rahi thi.
Anjali: Aahh… maa… jeebh andar… ohh… karma… neeche se jor se… hay… dono jagah… main… paagal ho rahi hun… aahh…aisa maza… pahli baar…
Karma neeche se tez-tez dhakke maar raha tha. Uska lund anjali ki gaand mein jad tak ja raha tha, bahar aate hi phir andar. Anjali ki gaand ab puri tarah khul chuki thi, ras se chikni. Sabhya jeebh ko anjali ki chut mein gehrayi tak daal rahi thi, kabhi choos rahi, kabhi clit ko daanton se halka kaat rahi.
Anjali ki siskiyan ab lagatar ho gayin. Uska badan kaampne laga, kamar khud-b-khud upar-neech ho rahi thi.
Anjali: Aahh… bas… ab… aa raha hai… ohh… gaand mein… chut mein… maa… karma… aahhh!!! Main jhad rahi hun… ohhhhh!!!
Anjali ka pura badan akad gaya. Choot se ras ki tez dhaar nikli - seedha.Sabhiya ke munh mein. Sabhiya ne use poora pee liya, jeebh se chatate huye. Usi pal Anjali ki gaand ki maaspeeshiyan sikud gayi, Karma ke land ko itni jor se jakda ki Karma bhi ruk nahi paya.
Karma: Anjali... ohh... teri gaand... jakad rahi hai... aah... main bhi... aa raha hoon... le... gaand mein mera ras... aahhhh!!! Karma ne neeche se Akhiri jordar dhakka maara. Uska land fadka aur garam-garam ras ki pichkariyan Anjali ki gaand ke sabse andar ja giri. Ek ke baad ek dhaar - Anjali ki gaand bhar gayi. Wo fir se sihar uthi, dusri baar jhadte huye. Ras chut se bahkar Sabhiya ke chehre par gir raha tha, gaand se tapakkar Karma ke pet par.
Teeno kuch pal aise hi rahe - Anjali Karma ke land par baithi, Sabhiya uske saamne. Phir dheere-dheere Anjali uthi, land bahar nikala. Uski gaand se ras ki safed dhaar bahne lagi - bistar par tapak rahi thi.
Sabhiya ne Anjali ko khinchkar seene se lagaya, uske honth choome. Karma bhi uthkar dono ko baahein mein bhar liya.
Anjali (haafte huye, muskurate huye): Maa... Karma... ye... ye toh zindagi bhar yaad rahega... dono jagah se... itna maza... oh...
Sabhiya: Abhi kuch mat bol beta, aaram se let ja thodi der bahut mehnat ki.Teenon ek dusre ki baahon mein let gaye, ek naye rishte ki shuruat ho chuki thi teenon ke beech. Jahan Anjali Karma ke sath uske ghar par naye rishte bana rahi thi wahi Gendapur mein uski maa aur bhabhi bhi kuch naya kar rahi thi.
Kahan aur kya karne wali hain dono saas bahu is haalat mein jaanne ke liye jude rahiye.
Jaari rahegi.
Bhat shukriya app nay meri request maan li. Love from romaSabhya: Aahhh... Ohhh... Pura... Beta... Aah... Gaand mein... Teri Maa ki gaand mein... Ghusa diya...
Anjali niche farsh par baith gayi, chehra theek sabhya ki gaand aur Karma ke lund ke milan ke samne. Usne dono haathon se sabhya ke chutar aur thoda failaye aur karib se dekhne lagi. Karma ka mota lund sabhya ki gaand mein dheere-dheere andar-bahar ho raha tha. Har dhakke par sabhya ka chhed lund ke sath failta, sikudta. Anjali ki aankhein chamag rahi thi.
Anjali: Ohhh... Maa... Dekho... Karma ka lund kitna gahra ja raha hai... tumhari gaand kitni acche se le rahi hai... Aah... kitna sexy lag raha hai...
Karma ab raftaar badhane laga. Dhakke gehre aur tez ho gaye. Har dhakke par uski janghein sabhya ke chutado se thappad mar raha tha – Thap-thap-thap ki aawaaz kamre mein goonj rahi thi. Sabhya ki choot se ras beh raha tha, Anjali ne jeebh nikali aur tapakte ras ko chat liya, phir aage badhkar Karma ke andkosh ko sahlaane lagi – Halka se masalte huye, chumte huye.
Karma: Maan... Tumhari gaand... Kitni tight hai... Aah... Andar tak... Ohh... Anjali... Dekh... Kaise pel raha hoon maan ko...
Sabhya ki aahen ab chikhon mein badal rahi thi. Usne dono haathon se apni choot ko ragadna shuru kiya.na shuru kar diya, ungaliyan andar daalkar khud ko chod rahi thi.
Sabhya: Aahh… beta… jor se… apni maa ki gaand faad do… ohh… Anjali… meri bacchi… dekh… kitna maza aa raha hai… aahh… main… jhadne wali hoon…
Anjali ne Karma ki goliyon ko chumte huye kaha:
Anjali: Maa… jhad jao… Karma… aur tez… maa ki gaand faad do aaj maar maar kar, dikhao kitne bade madarchod ho tum oh.
Karma ne ab full speed pakad li. Uske dhakke itne tez the ki Sabhya ka pura badan hil raha tha. Uski choochiyan uchal rahi thi, choot se ras bah raha tha. Anjali ne ek haath badhakar Sabhya ki choot mein ungaliyan daal di - Karma ke dhakko ke saath-saath andar-bahar kar rahi thi.
Sabhya: Aahh… dono… ohh… main… aa rahi hoon… gaand mein… choot mein… aahh!!! Baccho kya kar rahe ho tum mere saath aah aah aah.
Sabhya ka badan akad gaya. Uski gaand Karma ke land ko jakad li, choot se ras ki dhaar nikli. Vo jor se jhadne lagi – pura badan kaanp raha tha. Karma ne aakhiri kuch jordaar dhakke maare. Aur fir apna land bahar kheench liya, Sabhya buri tarah haanf rahi thi Karma ke land nikaalte hi vo bistar par palat ke apne pet ke bal let gayi aur tezise saanse bharni lagi,
Karma ne bina samay gawaye hi Anjali ko pakada aur apni maa ke upar hi pet ke bal leta diya aur fir uske upar aakar jagah li apne land ko Anjali ki gaand ke chhed par tikaya, Karma ne ek haath se Anjali ki kamar thami, dusre haath se land ko pakada aur dheere-dheere dabav daala. Supara andar ghusa - Anjali ki gaand ki maanspeshiya sikud gayi, lekin vo khud ko relax karne ki koshish kar rahi thi.
Anjali: Aahhh... hay... dheere... ohh... jal raha hai... lekin... mat rukna...
Karma ne dheema dhakka maara. Aadha land andar chala gaya. Anjali ka muh khul gaya, aankhein band ho gayi, daant bheench liye. Sabya ne neeche se haath peechhe lejaakar Anjali ke pair ko sahlaya aur boli,
Sabhya: Meri bacchi... sah le... beta dheere kar raha hai... dekh... teri gaand kitni acche se le rahi hai... ah... kitna accha lag raha hoga...