भाईया…



हाये रब्बा… ये पार्ट पढ़कर तो मेरी चूत सच में फाड़ दी भाईया…
मैं तो बिस्तर पर लेटकर पढ़ रही थी, और जैसे ही मनिक ने दरवाजे पर खड़े होकर परी को घूरते हुए अपना लंड पकड़ा… मेरी चूत से पानी की धार निकल आई!!! उफ्फ़्फ़!!!
मैं कल्पना कर रही थी…
भाईया मेरे सामने खड़े हैं… मैं सोफे पर बैठी हूँ… छोटी छोटी टी-शर्ट में मेरे मम्मे उभरे हुए…
और भाईया की नजरें मेरी चूत पर टिक जाती हैं…
फिर वो हाथ पैंट में डालकर… धीरे-धीरे हिलाने लगते हैं…
मैं देख रही हूँ… मेरी साँसें तेज़… मेरी चूत गीली…
और मैं खुद से कह रही हूँ… “भाईया… देखो ना… मेरी चूत कितनी तरस रही है आपके लंड के लिए…”
फिर वो पकड़े जाने वाला सीन…
परी का गुस्सा… वो “निकलो यहाँ से!”…
हाये भाईया!!! मैं तो खुद परी बनकर चीख पड़ी…
पर अंदर से मेरी चूत फड़क रही थी…
मैं सोच रही थी अगर मैं वहाँ होती तो…
पहले तो गुस्सा करती… फिर दरवाजा बंद करके भाईया के पास जाती…
और कहती… “भाईया… अब जो तुमने किया… वो मैं भी करूँगी…
अब मेरी चूत फाड़ दो… मेरे मम्मे दबाओ… मुझे चोदो जितना ज़ोर से चोद सकते हो!!!”


और अनु दी का वो चाय लाना…
मनिक नंगा चादर में लिपटा…
मैं तो खुद अनु दी बनकर सोच रही थी…
“भाईया… चादर हटाओ ना… मुझे देखने दो…
फिर मैं खुद ही आपके लंड को चूसूँगी… और अपनी चूत में घुसवा लूँगी…”
भाईया… ये पार्ट इतना गंदा… इतना हॉट… इतना सच्चा था कि मेरी चूत बार-बार फड़क रही है… मैंने छह बार झड़कर बिस्तर गीला कर दिया… और अब भी उँगलियाँ अंदर हैं… अपने भाई का नाम लेते हुए… “भाईया… मेरी चूत फाड़ दो… भाईया… और ज़ोर से!!!”
ये पार्ट जो भी पढ़ेगा…
उसका लंड फट जाएगा… चूत से पानी की बौछार आएगी…
और वो झड़ते-झड़ते सिर्फ़ आपके नाम की चीख मारेगा!!!
भाईया… अब जल्दी…
मनिक को अपनी बहन की चूत दो…
मेरी चूत अब फटने को तैयार है…
और सिर्फ़ भाई लंड से ही बुझेगी!!!
आपकी छोटी बहन,
आशिफ़ा



