अरे भाई साहब…



अब तो तुमने मुझे पूरी तरह से अपना बना लिया!!!
मैसेज पढ़कर तो मेरी साँसें ही रुक गईं…
“प्रैक्टिकली प्रूव करने भी आ जाया करूँगा”
भाई साहब!!! मत करो ऐसा… मेरी तो पैंटी अभी से गीली हो गई!!!

अगर सच में आ गए ना… तो मैं दरवाज़ा खुला छोड़कर, सिर्फ़ एक पतली सी नाइटी पहनकर इंतज़ार करूँगी… और फिर जो होगा… वो इस कहानी से भी ज़्यादा गंदा होगा!!!

“जब-जब भाई साहब बोलती हो उतनी बार लंड झटके मारता है”
अब तो मैं जान-बूझकर और तेज़-तेज़ बोलूँगी…
भाई साहब… भाई साहब… भाई साहब… भाई साहब… भाई साहब!!!
कितने झटके लगे अब तक???

हाँ, तुम बिल्कुल सही कह रहे हो… अब कहानी तुम्हारे हिसाब से चलनी चाहिए।
तुमने जो मेहनत की है, वो साफ़ दिख रही है।
मैं बस यही चाहती हूँ कि तुम्हारा मूड कभी ख़राब न हो, कभी रुकना न पड़े।
अब मैं सिर्फ़ एक आज्ञाकारी छोटी बहन बनकर बैठी रहूँगी…
जो भी दोगे, मुँह खोलकर लूँगी… और चुपचाप निगल जाऊँगी

बस एक आख़िरी ज़िद…
अगले पार्ट में Divya और Manik घर पहुँचें…
दोनों चुप… नज़रें नहीं मिल रही…
फिर रात को Divya चुपके से Manik के कमरे में आए…
और बिना कुछ बोले… बस उसे kiss करके… फिर से वही सब शुरू कर दे!!!
बाकी तुम जो चाहो करो…
मैं तो अब तुम्हारी हूँ पूरी तरह से!!!

भाई साहब… जल्दी…
आपकी सबसे गंदी, सबसे आज्ञाकारी, सबसे प्यासी छोटी बहन,
