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Sci-FI A Forty Light Years Away

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

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Mene jo likha tha, wo mene read kiya to pasnd nahi aaya to post nahi kiya kal
Aisa mat karo yaar, itna lamba gap rakhogi to reader bhaag jayenge :D
Waise tum chaho to apni prem kahani likh sakti ho :shhhh:
 
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DesiPriyaRai

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मशीनी हाथ ने पाउच मेरी तरफ बढ़ा दिया। मैंने कांपते हाथों से उसे लिया और सील तोड़ दी। पानी ठंडा और थोड़ा खारा था, जैसे उसमें दवाइयां घुली हों। मैंने धीरे-धीरे उसे पिया। गला थोड़ा गीला हुआ, आधे रास्ते में पेट सिकुड़ा, एक सुस्त लहर उठी, जो धीरे-धीरे शांत हो गई।

“और,” मैंने धीमे से कहा। गला जकड़ गया जब दोबारा कोशिश की।
“पानी।”

कोई जवाब नहीं आया।

वह मशीनी हाथ वापस दीवार में समा चुका था, जैसे वहां कुछ था ही नहीं।

मेरे पीछे वे पॉड्स अपना काम कर रहे थे। पंपों की गूँज, चमकती लाइटें, वे उन ज़िन्दगियों को सहेज रहे थे जिन्हें अपनी मौजूदगी का होश तक नहीं था।

मशीनों की धीमी, नियमित गूंज चलती रही जैसे हमेशा चलती आई हो।


मानो कुछ भी न बदला हो। मानो मेरा वहां होना कोई मायने ही न रखता हो।


दीवार से वही मशीनी बाँह फिर बाहर निकली। उसकी पकड़ में एक छोटा सा पैकेट था।


ऊपर कहीं से एक आवाज़ आई: “मेटाबॉलिक स्टेबिलाइज़ेशन। सेवन करें।”

पैकेट आसानी से फट गया। अंदर एक सघन पोषक ब्लॉक था—हल्का फीका रंग, थोड़ा गर्म, और इतना सख़्त कि उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में ही निगला जा सकता था।

उसका कोई खास स्वाद नहीं था।

न बुरा। न अच्छा।

बस… फीका।

मैंने खुद को मजबूर किया कि उसे धीरे-धीरे खत्म करूँ। हर टुकड़े के बाद रुकता, इंतज़ार करता कि पेट उसे स्वीकार करे।

कुछ मिनट बाद छाती में हल्की गर्माहट फैलने लगी।

ताकत नहीं आई।

बस शरीर थोड़ा संभलने लगा।

मेरे हाथों का कांपना भी कम हो गया।

मशीनी बाँह वापस दीवार के अंदर चली गई।

कोई संकेत नहीं।

मैं पॉड बे से बाहर आ गया।

इसलिए नहीं कि मैं तैयार था।

बल्कि इसलिए कि वहाँ और रुकना ऐसा लग रहा था, जैसे किसी ऐसी चीज़ का इंतज़ार कर रहा हूँ जो पहले ही हो चुकी है।

बे के दूसरे सिरे पर लगा हैच मेरी हथेली के एक्टिवेशन पैनल को छूते ही धीरे से खुल गया। एक हल्की मशीनी आवाज़ हुई।

आगे का गलियारा पॉड बे से ज़्यादा अँधेरा था। फर्श की लाइटें फीकी हरी रेखा की तरह दूर तक फैली हुई थीं।

यहाँ की हवा थोड़ी ठंडी थी। संरचना वही थी बस क्रायो चैंबर की नमी यहाँ तक नहीं पहुँची थी।

मैं आगे बढ़ गया।

हैच मेरे पीछे बंद हो गया।

शिप ने मेरी हरकत का जवाब हल्की गूँज से दिया।

हर कदम डेक प्लेट्स पर उम्मीद से थोड़ा ज़्यादा भारी लगा।

आवाज़ दूर तक नहीं गई।

लेकिन उसने याद दिला दिया कि जहाज़ अब कितना खाली हो चुका है।

गलियारों में कोई नहीं। इंटरकॉम पर कोई आवाज़ नहीं।

दूर के कम्पार्टमेंट्स से कोई गतिविधि नहीं। सिर्फ सिस्टम।

अगर ध्यान से देखा जाए तो गलियारा अपनी उम्र दिखा रहा था।

छत के एक पैनल पर एक पतली दरार चली गई थी।

एक मेंटेनेंस हैच अपने फ्रेम से थोड़ा तिरछा बैठा था।

दीवार के दो हिस्सों के बीच की जोड़ पर हल्का रंग बदल गया था—दशकों के तापमान बदलाव ने सामग्री पर असर डाला था।

कुछ भी गंभीर नहीं।

बस समय अपना काम कर रहा था।

पहले जंक्शन पर दिशा संकेत अब भी साफ चमक रहे थे—

BRIDGE – ENGINEERING – HABITATION – STORAGE

मैं ब्रिज की ओर मुड़ गया।

ब्रिज के दरवाज़े के पास लगा एक्सेस पैनल मेरे पास आते ही ग्लो करने लगा।

मैंने हथेली उस पर रखी।

“एक्सेस।”

Authorization recognized. Limited command tier.

दरवाज़े खुल गए।

ब्रिज मेरी याद से ज़्यादा अँधेरा था।

सिर्फ ज़रूरी सिस्टम सक्रिय थे।

सामने की मुख्य डिस्प्ले ने व्यूपोर्ट पर आसपास के तारों का फ़िल्टर किया हुआ दृश्य दिखाया।

छिटपुट।

दूर। अनजान।

मैं कुछ समय वहीं खड़ा रहा।

फिर मैन कंसोल के पास चला गया।

“System logs.”

डिस्प्ले चमक उठा।

दशकों का डेटा स्क्रीन पर स्क्रॉल होने लगा।

हुल स्ट्रेस रिपोर्ट।

रेडिएशन एक्सपोज़र मेट्रिक्स।

बाहरी प्लेटिंग के थर्मल साइकल लॉग।

टाइमस्टैम्प लगातार नीचे बढ़ते जा रहे थे।

Year 36

Year 44
Year 57
Year 71

Year 79

जब तक हम क्रायो-नींद में थे, शिप सब कुछ रिकॉर्ड करता रहा।

एक एंट्री ने मेरा ध्यान खींचा—

Outer hull microfracture detected – Sector C-14

Auto-seal deployed – structural integrity stable

कुछ साल बाद एक और—

Communication antenna alignment drift – corrected

फिर—

Radiation shielding efficiency reduced by 3.2 percent – recalibration successful

हर समस्या दर्ज हुई।

सुधारी गई।

फिर लॉग में दर्ज कर दी गई।

दशकों तक जहाज़ खुद ही अपना रखरखाव करता रहा बिना किसी इंसान के।

मैंने कम्युनिकेशन लॉग खोला।

नियमित अंतराल पर भेजे गए संदेश दिखाई दिए।

ऑटोमेटिक रिपोर्ट्स।

हर टाइमस्टैम्प के साथ एक ही नोट लिखा था

Return signal pending

मैं और नीचे स्क्रॉल करता गया।

दर्जनों रिपोर्ट्स।

सब एक जैसे।

Return signal pending

मैंने दूरी का हिसाब अपने आप लगा लिया।

इस दूरी से पृथ्वी का कोई सिग्नल हम तक पहुँचने में दशकों लेगा।

हमारे शुरुआती संदेशों का कोई जवाब अभी भी खाली अंतरिक्ष में ट्रावेल कर रहा होगा।

कभी फैसले मिनटों या घंटों में लिए जाते थे।

अब दूरी ने सब कुछ बदल दिया था।

यहाँ बाहर…

फैसले अकेले लेने पड़ते हैं।

तभी एक हल्की आवाज हुई।

अलार्म नहीं।

एक ट्रांज़िशन टोन।

निचले कंसोल पर जहाज़ के आंतरिक नक्शे का एक हिस्सा चमक उठा।

Cryogenic Bay — Unit 3

STATUS UPDATE: STASIS REVERSAL INITIATED

मैं उस पंक्ति को देखता रह गया।

“मैंने यह रेक़ुएस्ट नहीं किया।”

कोई जवाब नहीं।

“Stasis reversal delay.”

Authorization insufficient.

स्क्रीन फिर अपडेट हुई।

Cryo-fluid warming.


Drain sequence active.

Internal harness release pending.

सिस्टम किसी आदेश का जवाब नहीं दे रहा था।

वह बस अपनी प्रक्रिया चला रहा था।

मैं ब्रिज से बाहर आ गया।

जब तक मैं पॉड बे वापस पहुँचा…

क्लेयर का चैंबर पहले ही खाली होना शुरू हो चुका था। क्रायो-फ्लूड नीचे के वाल्वों से घूमता हुआ बाहर जा रहा था। पॉड के आधार पर हरी लाइटें पहले से तेज़ चलने लगी थीं।

धीरे-धीरे उसका शरीर तरल से बाहर आने लगा।

पहले कंधे।

फिर हार्नेस के नीचे कॉलरबोन की रेखा।

तरल उसकी छाती से नीचे गिर गया।

चैंबर की दीवारों से जुड़ी ट्यूबें एक-एक कर पीछे हटने लगीं।

हर कनेक्शन के साथ हल्की यांत्रिक क्लिक सुनाई दी।

उसका सिर थोड़ा हिला। बस इतना कि शरीर फिर से गुरुत्व को पहचान रहा था।

पॉड का दबाव संतुलित हुआ।

एक धीमी सी फुसफुसाहट जैसी आवाज़ आई। कंटेनमेंट मेष हट गई।

चैंबर का दरवाज़ा खुल गया। वह आगे की ओर झुक कर गिरने लगी। पर मैंने उसे डेक से टकराने से पहले ही थाम लिया।

उसका वजन लगभग हम दोनों को गिरा देता।

मेरे पैर एक पल के लिए डगमगाए। लेकिन फिर संभल गए।

उसकी त्वचा ठंडी थी। कमरे की ठंड से भी गहरी। दशकों तक जमा रही ठंड।

वह खाँसी।

आवाज़ उसकी छाती से फट कर निकली।

तेज़। भीगी।

साफ तरल डेक प्लेट्स पर गिर पड़ा।

उसकी उँगलियाँ मेरी बाँह पकड़ चुकी थीं, बिना जाने।

मैंने उसे संभाले रखा।

कुछ देर बाद खाँसी कम हुई।

फिर साँसें आने लगीं

उथली।

अनियमित।

जैसे फेफड़े खुद को साफ कर रहे हों।

मैंने उसे सावधानी से उसके पॉड के नीचे बैठा दिया। उसकी आँखें आधी खुली थीं। अभी किसी चीज़ पर टिक नहीं रही थीं।

उसकी बाँहों में कंपन जारी था।

महीन।

लगातार।

उसके नियंत्रण से बाहर।

समय धीरे बीता।

साँसों के बीच गुजरते पलों में।

और उस कंपन के धीरे-धीरे कम होने में।

कुछ देर बाद उसकी आँखों ने फोकस पकड़ा।

सबसे पहले उसने अपने हाथ देखे। धीरे-धीरे पलटकर।

जैसे पुष्टि कर रही हो कि वे अभी भी उसके ही हैं।

फिर उसने पूरे बे को देखा, छत की लाइटें। चैंबरों का घेरा।

वह खुला पॉड जिससे वह अभी निकली थी।

तभी उसकी नज़र मुझ पर आई।

वह घुटनों के बल उठी।

पहली बार खड़े होने की कोशिश असफल रही।

दूसरी बार मैं उसके कोहनी थामे हुए था।

खड़ी होने के बाद वह कुछ सेकंड स्थिर रही।

धीरे-धीरे साँस लेती हुई।

फिर वह लॉकरों की तरफ मुड़ी। मैं उसके साथ चला।

जहाँ उसका संतुलन डगमगाया, मैंने उसे संभाला।

पास आते ही इंडिकेटर लाइट बदल गई।

दरवाज़ा खुला। अंदर से पहले की तरह बासी ओज़ोन की गंध बाहर आई।

उसने धीरे-धीरे सूट पहना।

हर हरकत में कमजोरी साफ थी।

आस्तीन पहनते-पहनते बाजू थक जाती। सील बंद करने में ज़्यादा ताकत लगती।

जब सूट पूरी तरह बंद हो गया… वह कुछ पल चुप खड़ी रही।

तभी दीवार से वही मशीनी बाँह फिर निकली।

एक हाइड्रेशन पाउच उसकी तरफ बढ़ाया गया।

उसने कुछ पल उसे देखा।

फिर ले लिया।

वह धीरे-धीरे पीती रही।

हर घूँट के बीच रुककर।

पाउच खाली हुआ।

मशीनी बाँह बिना कुछ कहे वापस दीवार में चली गई।

वह मेरी तरफ मुड़ी। उसकी आँखें मेरे चेहरे पर घूमीं।

जैसे पहचान ढूँढ रही हों।

“हम कहाँ हैं?” उसने पूछा।

उसकी आवाज़ खुरदरी थी।

दशकों बाद बोले गए पहले शब्दों की तरह।

मैंने गलियारे की ओर देखा—जो ब्रिज तक जाता था। वही तारे याद आए जो मैंने अभी देखे थे।

“अब भी रास्ते में,” मैंने कहा।

उसने मेरी नज़र का पीछा किया।

हमारे पीछे सिस्टम अपडेट हुआ:

UNIT 3

STATUS: AWAKE.......
 

DesiPriyaRai

Royal
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Badiya update

जबरदस्त डिस्क्रिप्शन है पोस्ट हाइबरनेशन का। :applause:

लेकिन अपडेट बहुत ही छोटा है, कुछ बड़ा लिखने से लोगों का इंटरेस्ट ज्यादा बढ़ेगा पढ़ने का।

प्लॉट बहुत हद तक समझ रहा हूं। लेकिन जितना लिखा है वो बहुत ही कम है।

Bahot accha tha update thoda chhota laga mujhe shuru hote hi khatam ho gaya khair dekhte hai humara hero suit pahankar kaha jaane ki taiyaari me hai :yay:

Congrats nayi story k liye ye lo badka dil♥️

Ye signature ka link ko exforum se xforum wala link lagao

Ee sala itna samajhdaar kabse hua be Evaran Eternity ? :hmm:

Fir qpun ki story se kya dusmqni hai priye? Wo bhi to devanagari me hi hain? :bat:

Agar hinglish me aaya to apun gayab samjho, fir bhi tumhare liye ek aadh review to chemp hi dunga :love: Dil ke hatho majboor jo hu

Wo kya jaane ishq mohabbat,
Pyar wafa sabke baska nahi,
Hum pyar me jeene walo se,
Uska koi vaasta nahi, ye pyar nahi aasaan sahib, hum pyar me jeete marte, ye pyar aise shay hai pyare,
Ke pal pal aahe bharte hain.:dazed:

Katil raat ka dekho, last review ab diya hai, us se pahle 6th update pe diya tha :bat:

Update kab de rahi???:?:

Mu chupane se sach nahi chhiptq babe :D

Sab nazaron ka fer hai pyare, ham to kal bhi vese the aur aaj bhi vese hi hai...

Aankho se hawas ka chasma utaro lekhak mahoday

यह अपडेट अत्यंत प्रभावशाली और वायुमंडलीय है। आपने 'क्रायो-स्लीप' से जागने के बाद की शारीरिक और मानसिक वेदना को बहुत ही बारीकी से चित्रित किया है।:claps:

आपने जिस तरह से परफ़्लुओरोकार्बन की चिपचिपाहट, ठंडे फर्श का अहसास और त्वचा के खिंचाव का वर्णन किया है, वह पाठक को सीधे उस ठंडे, बेजान हॉल में खड़ा कर देता है। "जोड़ जैसे चीख उठे" और "दिमाग से अंगों तक संदेश पहुँचने में वक्त लगना"—यह विवरण विधा (Sci-Fi) को वास्तविकता के करीब लाता है।:approve:
पहचान का संकट: कहानी का सबसे गहरा हिस्सा वह है जहाँ नेथन अपना ही नाम एक 'जानकारी' की तरह देखता है, 'पहचान' की तरह नहीं। लॉकर के दरवाजे में खुद की परछाई न पहचान पाना उसके अस्तित्व के खालीपन को बखूबी दर्शाता है। यह एक मनोवैज्ञानिक गहराई जोड़ता है कि लंबी नींद ने उसे सिर्फ शरीर से ही नहीं, बल्कि उसकी आत्मा से भी दूर कर दिया।:declare:

मशीनी हाथ का आना, पानी देना और बिना किसी संवाद के वापस चले जाना यह स्थापित करता है कि यह जहाज भावनाओं से नहीं, बल्कि प्रोटोकॉल से चलता है। "मानो मेरा वहां होना कोई मायने ही न रखता हो"—यह पंक्ति नेथन के अकेलेपन और उस विशाल मशीनरी के बीच उसकी तुच्छता को बहुत अच्छे से उभारती है।:dazed:

कहानी की गति धीमी और बोझिल रखी गई है, जो एक ऐसे व्यक्ति के लिए बिल्कुल सटीक है जो अभी-अभी लंबी बेहोशी से जागा है। भाषा सरल है लेकिन दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं।:claps:

यह एक बेहतरीन 'Hard Sci-Fi' शुरुआत है। क्लायर मॉर्गन और लियाम कार्टर के नाम भविष्य के संघर्ष या संबंधों की नींव रखते हैं। पाठक के मन में यह उत्सुकता बनी रहती है कि वह अकेला क्यों जागा और बाकी सब अभी भी 'Stasis' में क्यों हैं?

कुल मिलाकर ये कहूंगा कि शुरुआत के हिसाब से काफी बढिया लिख रहे हो। और शब्द चुनाव भी अच्छा है। बनाए रखिए। :claps::claps:


‎Ye update padhte hue mujhe lagta hai jaise main us scene ko dekh raha hoon, shuru se hi jo physical discomfort dikhaya gaya hai — saanse, skin ka tight feel hona, movement ka slow aur painful hona — woh bahut real sa lagta hai. Ye sirf “uth gaya character” wala moment nahi hai, balki ek poora struggle hai, jo hame charector se turant connect kara deta hai.

‎Pods aur hall ka description kaafi strong hai. Cold, lifeless, same-to-same pods… ye repetition ek creepy feel create karti hai. Me to ye soch raha hu ke ye sab kab se chal raha hai? Aur sabse zyada impact tab aata hai jab naam screen par aata hai — NATHAN HALE. Character ka apne hi naam se disconnect hona bahut subtly likha gaya hai. Ye identity crisis hai.

‎Claire aur Liam ke pods ka scene honestly thode disturbing to lagte hai, par bina overdrama ke hai. Zindagi yahan ek maintained object banke rah gayi hai.

‎Locker aur suit ka part slow hai, par boring nahi. Kapdon ka chipakna, body ka kaanpna — ye sab recovery ka pain dikhaata hai. Reflection wala moment especially hit karta hai. Jab character khud ko pehchaan nahi paata, toh hame bhi ajib sa feel hota hai. Ye sirf physical change nahi, balki time ke chheen jaane ka ehsaas hai.

‎Machine arm aur hydration scene bahut achha hai. Voice ka emotionless hona aur phir bina response ke arm ka wapas chala jaana — yeh clear signal deta hai ki yahan insaan important nahi hai, sab protocol se chalta hai. “Aur… paani” wali line ka silence mein doob jana kaafi heavy lagta hai.

‎Ending kaafi strong hai. Machines ka chalna, pods ka kaam karna, aur ye realization ki protagonist ki presence ka koi matlab nahi — yahin se story ka real loneliness shuru hoti hai. Hmare mann mein ek cold sa sawaal reh jata hai—agar main na hota, tab bhi sab same hi hota na?

‎ye update atmosphere pe jyada focus karta hai, aur woh bilkul kaam karta hai. Slow hai, par impactful. Is update me jawab to nahi hai but ye update hamari curiosity badha deta ke aage kya hoga, ye sab hua kese ? Wo yaha aaya kese ? Kya hua hai uske sath ?

‎Sawal bahut hai par jawab koi nhi, maybe aage ke updates me in sawalon ke jawab mil jaaye...
‎Bhut acha likh rahi ho.. agle update ka intezar rahega...

‎Good luck 🤞

Matlab dheere-2 kholne me jo maja hai, wo jaldi jaldi me nahi?:blush1:


Intzaar rahega


Mods too do chit chat in story threds??

Raj_sharma and others...

Story threads are strictly for story-related discussion.

Brief clarification, confusion or questions about the story are allowed.. General chit-chat is not permitted in story threads. For extended discussion, writers may open a separate thread in the OD section.
This rule applies equally to everyone... members, writers, mods and senior mods.

Please story ki baare mein hi baat karein :p:
Story ki garima ko naa todein
Waiting for the next update DesiPriyaRai

Landed here for new sci fi adventure.
Plot looking promising for a space journey ,
can u increase update size if possible.

It's been a long time,
Waiting for new update,

Take your time, we will wait. You can understand it is habit of readers to ask for next update just after reading the current. No one is different

Update kaha hai dear

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Priya baby waiting :waiting:

New update posted. Read it, feel it and review it🫣😃🫣😃🫣😃
 

Raj_sharma

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