कहानी समीक्षा: अधूरी शिद्दत
लेखक महोदय: Mahakal
एक सच्ची, संवेदनशील और भावनात्मक कथा की बेमिसाल बुनावट.. एक ऐसी कहानी जो दिल तोड़ती है… लेकिन बड़ी खूबसूरती से..!!
यह एक ऐसी कहानी है जो मोहब्बत, पीड़ा, और इंसानी रिश्तों की नर्म लेकिन गहरी तहों में उतरती है। लेखक ने इसे बेहद सच्चे और आत्मीय अंदाज़ में बुना है.. दिल्ली की बारिश से शुरू होकर मौत की ख़ामोशी तक, यह कथा पाठक के भीतर धीरे-धीरे उतरती है, और वहाँ कुछ अधूरा छोड़ जाती है।
हर दृश्य, हर जगह, चाहे वह बरसाती बस स्टॉप हो या सरकारी हॉस्पिटल की छत, इतनी बारीकी से उकेरी गई है कि पाठक वहां खुद को मौजूद पाता है।
संवादों में भावनात्मक गहराई: बातचीत बिल्कुल वास्तविक, सहज और दिल को छूने वाली है। पात्रों की नज़ाकत और मासूमियत, खासकर सोनिया की, पाठक को मोह लेती है।
भावनाओं का बहाव: कहानी का सबसे बड़ा गुण है इसकी संवेदनशीलता। प्यार, असहायता, उम्मीद और फिर टूटन—हर भाव अपनी पूरी ईमानदारी और गरिमा के साथ सामने आता है।
जौन एलिया की शायरी को कथानक में जिस तरह पिरोया गया है, वह न केवल कथा को सौंदर्य देता है, बल्कि उसकी भावनात्मक गूंज को भी कई गुना बढ़ा देता है।
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कुछ जगहों पर विवरण अत्यधिक विस्तार पा जाते हैं, जिससे गति थोड़ी धीमी हो जाती है। यदि संपादन थोड़ा कसाव लाता, तो प्रभाव और तीव्र होता।
पूरी कथा मुख्य रूप से दो पात्रों पर केंद्रित है। कभी-कभी एक हल्की बाहरी दृष्टि या एक और संवाद पात्र कहानी की भावनात्मक परिपक्वता को और समृद्ध कर सकती थी।
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"अधूरी शिद्दत", एक इमोशनल डायरी है जिसे शायद हर इंसान अपने जीवन में कभी न कभी लिखता है.. चाहे अधूरी ही क्यों न रह जाए। यह कहानी पढ़ने के बाद कुछ देर मौन रहना और आँखों में हल्की सी नमी महसूस होना स्वाभाविक है।
रेटिंग: 8.5/10