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★☆★ Xforum | Ultimate Story Contest 2025 ~ Reviews Thread ★☆★

Lucifer

ReFiCuL
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Unfortunately We are facing a server issue which limits most users from posting long posts which is very necessary for USC entries as all of them are above 5-7K words ,we are fixing this issue as I post this but it'll take few days so keeping this in mind the last date of entry thread is increased once again,Entry thread will be closed on 7th May 11:59 PM. And you can still post reviews for best reader's award till 13th May 11:59 PM. Sorry for the inconvenience caused.

You can PM your story to any mod and they'll post it for you.

Note to writers :- Don't try to post long updates instead post it in 2 Or more posts. Thanks. Regards :- Luci
 
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Aakash.

ɪ'ᴍ ᴜꜱᴇᴅ ᴛᴏ ʙᴇ ꜱᴡᴇᴇᴛ ᴀꜱ ꜰᴜᴄᴋ, ɴᴏᴡ ɪᴛ'ꜱ ꜰᴜᴄᴋ & ꜰᴜᴄᴋ
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Innocent Wife Reena by lustyreenaroy

Positive Points:

Yeh kahani ek bold aur dramatic twist ke saath shuru hoti hai jo suspense banaye rakhti hai. Reena ka character ek masoom biwi se ek khule aur sexy roop mein badalta hai jo kahani ko tezi se aage badhata hai. Jallad Singh ka entry aur uska Reena ke saath rishta ek unexpected turn deta hai jo reader ka dhyan pakadta hai. Conversation ka style real aur raw lagta hai jo is tarah ki kahani ke mood ko suit karta hai. Climax mein Reena ka poora khul jana aur pati ka shocked hona ek strong emotional punch deta hai. Rhythm tezi se chalta hai jo is tarah ki short intense kahani ke liye perfect hai.

Negative Points:

Kahani mein depth ki kami hai, Reena ka itna bada badlav bina kisi wajah ke jaldi ho jata hai jo unnatural lagta hai. Patni aur pati ke rishte ka background ya emotion kam dikhaya gaya jisse sympathy ya connection nahi banta. Jallad ka character flat hai sirf ek lustful aadmi ke roop mein dikhta hai uska aur development ho sakta tha. Bhasha kabhi-kabhi zyada vulgar ho jati hai jo shayad sab readers ko pasand na aaye. Ant thoda jaldi khatam ho jata hai thodi aur buildup ya conclusion accha hota to accha hota.

Ek Acchi Kahani ke Liye Kya Accha Hai:

▪︎ Tez pace aur suspense jo reader ko bandhe rakhe.

▪︎ Bold twists jaise Reena ka khulna jo shock value dete hain.

▪︎ Real dialogue jo characters ke mood ko dikhaye.

▪︎ Emotional impact jaise pati ka reaction jo kahani ko yaadgaar banaye.

Kya Bura Hai:

▪︎ Characters ka background ya motive clear na hona.

▪︎ Zyada vulgarity bina context ke kahani ko cheap bana deta hain.

▪︎ Jaldi khatam hona bina proper ending ke.

Wartani aur Rhythm:

Wartani (spelling) mein kuch chhoti galtiyan hain lekin badi dikkat nahi hai. Rhythm accha hai kahani ekdum tezi se chalti hai aur rukti nahi jo iske plus point hai. Bas thodi si polishing se dialogues aur scenes aur smooth ho sakte the.

Overall:

Ek fast-paced spicy kahani hai jo apne bold style se dhyan khinchti hai agar characters aur story mein thodi gehraayi hoti to yeh aur mazedaar ho sakti thi. Phir bhi jo hai woh apne tareeke se entertaining hai.
 

vakharia

Supreme
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Story: ghor paap ek varjit prem katha by
Vakhariya

Waah bhai kya story likhi hai

Rajao ke time wali story and ekdum open aisa laga jaise story nahi koi Granth likh rahe ho

Aur story me kavita (shlok)ne to chaar Chand laga diye

Aur shakini ka apne bete ke liye bhi pyar bhi kafi tha as usual

Jaise jaise aage padhta gaya romanch aur badhne laga

Bus 2 baat ankohi lagi ki ek Raja ka beta rajpurohit aur ke raja tantrik kaise ho skta hai pahli baar hi suna

Par Shakini ne pisachini ke concept ko raja ke tantrik kirya se joda woh kuch acha

Rating. 8.4/10
प्रिय RED Ashoka जी,

आपकी उत्साही प्रतिक्रिया पढ़कर मन अत्यंत आनंदित हुआ। आपने मेरी रचना को ‘ग्रंथ जैसा अनुभव’ बताया — इससे बड़ा प्रशंसा-पुष्प किसी लेखक के लिए और क्या हो सकता है? विशेषकर यह जानकर प्रसन्नता हुई कि शाकिनी की ममत्वपूर्ण भावनाओं, काव्य-संयुक्त श्लोकों और कथा की गहराइयों ने आपको प्रभावित किया।

अब आइये, आपके मन में जागी जिज्ञासाओं पर बात करें – और इस संवाद को सार्थक बनाएँ।

1. राजकुमार का राजपुरोहित होना — क्या यह संभव है?
साहित्य में कल्पना का अधिकार होता है, परन्तु वह कल्पना यदि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सूत्रों से जुड़ी हो, तो उसमें प्रामाणिकता भी जुड़ जाती है।

भारत के प्राचीन राजवंशों में कई उदाहरण मिलते हैं जहाँ राजकुमारों को आध्यात्मिक और दार्शनिक शिक्षा दी जाती थी – केवल युद्ध-कला तक सीमित नहीं रखा जाता था। राजपुरोहित का पद सामान्य ब्राह्मणों द्वारा ही ग्रहण किया जाता था, यह सामान्य परंपरा थी – पर अपवाद भी होते रहे हैं।

यदि कोई राजकुमार आत्मिक साधना, यज्ञ-विधि, वेद-अध्ययन और शास्त्रों में विशेष निपुणता प्राप्त कर ले, और यदि राज्य हित में उसे यह भूमिका निभानी पड़े – तो वह एक विशेष दायित्व भी बन जाता है, केवल पद नहीं।

अब हमारा राजा भी थोड़ा experimental निकला — democracy तो थी नहीं, passion follow करने दिया बेटे को! :smile:


2. राजा का तांत्रिक होना — क्या यह असंगत है?
भारतीय परंपरा में राजा को केवल शासनकर्ता नहीं, धर्म-रक्षक भी माना गया है। अनेक शास्त्रों में वर्णित है कि राजा को वेद, आयुर्वेद, ज्योतिष और यहाँ तक कि तंत्र विद्या में भी ज्ञान होना चाहिए। विशेषकर तंत्र विद्या का प्रयोग तब होता था जब राज्य संकट में हो, और सामान्य उपाय निष्फल हो जाएँ।

कई ग्रंथों में यह भी उल्लेखित है कि कुछ विशिष्ट राजाओं ने तांत्रिकों से दीक्षा प्राप्त कर सीधे साधनाएँ की हैं — उनके उद्देश्य आत्मरक्षा, शत्रु पर नियंत्रण, अथवा अलौकिक शक्तियों का सामना करना था।

मेरी कथा में यह रेखांकित करने का प्रयास किया गया है कि राजा केवल बाह्य शक्ति से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विवेक और तांत्रिक चेतना से भी समृद्ध था –और कौन कहता है कि राजा सिर्फ तलवार से लड़ता है? कभी-कभी चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए चक्र और मंत्र भी ज़रूरी होते हैं..!!

आपकी रेटिंग (8.4/10) मेरे लिए बहुत मूल्यवान है।

यह न केवल उत्साहवर्धक है, बल्कि इस बात का संकेत भी है कि एक सजग पाठक ने कथानक को गंभीरता से पढ़ा और आत्मसात किया।

आप जैसे पाठकों से संवाद बना रहे — यही मेरे लेखन की सबसे बड़ी सफलता होगी।

आपके समय, समीक्षात्मक दृष्टिकोण और भावनात्मक जुड़ाव के लिए हार्दिक धन्यवाद।

सादर

वखारिया
 

vakharia

Supreme
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कहानी समीक्षा: तेरहवीं मंज़िल का रहस्य
लेखक महोदय: JOKER.

तेरहवीं मंज़िल – एक दफ़्तर, एक लिफ्ट और एक खोती हुई पहचान की रोमांचकारी यात्रा


कभी सोचा है कि अगर आप जिस कुर्सी पर रोज़ बैठते हैं, वह एक दिन किसी और की हो जाए और कोई यह मानने को ही तैयार न हो कि आप कभी वहां थे भी — तो क्या होगा? "तेरहवीं मंज़िल" इसी डर को कल्पना की गहराइयों से उठाकर, दफ़्तर के गलियारों में फैला देती है।

कहानी की शुरुआत अजय नामक एक आदर्श कॉरपोरेट कर्मी से होती है — जो समय का गुलाम है, एक्सेल का पुजारी है और मीटिंग रूम का संत। उसकी ज़िंदगी इतनी नियमित है कि अगर घड़ी में गड़बड़ हो जाए तो शायद उसका सिस्टम ही रीसेट हो जाए।

लेकिन लेखक ने इस एकरसता में जिस तरह रहस्य का रंग मिलाया है, वह प्रशंसनीय है। लिफ्ट की एक "गलत बटन" से शुरू हुई यात्रा धीरे-धीरे मानसिक अस्तित्व और पहचान के विमर्श तक पहुँच जाती है — और पाठक को सोचने पर मजबूर कर देती है कि हम जो हैं, वो वास्तव में हैं भी या बस किसी सिस्टम की फाइल में मौजूद डेटा?

कहानी का मध्य भाग तकनीकी रहस्यों और थ्रिलर का सुंदर समन्वय है — जहाँ पुराने कंप्यूटर, धूल से भरी फाइलें, और एक बुझता लैंप, भय के वातावरण को धीरे-धीरे गाढ़ा करते हैं। यह सब किसी हॉलीवुड साइबर-थ्रिलर की याद दिलाता है — लेकिन अपनी मिट्टी की सोंधी खुशबू के साथ।

कहानी में जो परोक्ष व्यंग्य है, वह गहरा है — जैसे ऑफिस का आईडी स्कैनर ही व्यक्ति के अस्तित्व का प्रमाण बन जाए। “अमान्य आईडी” — दो शब्दों में पूरी ज़िंदगी का खात्मा..!!

श्रीकांत का रहस्यमय आगमन और “मेंटल री-प्रोग्रामिंग” का विचार कहानी को वैज्ञानिक कल्पना की सीमा पर खड़ा कर देता है। यह अंश थोड़ा अधिक विस्तृत हो सकता था, परंतु लेखक ने सस्पेंस बनाए रखने के लिए कुछ सूत्र जानबूझकर अस्पष्ट छोड़े हैं — जो एक लेखकीय युक्ति का भाग भी हो सकता है।

अंत में जब अजय की पहचान लौटती है, तब भी संदेह की हल्की परछाई बनी रहती है — क्या वह सच में लौट आया या यह भी ‘13वीं मंज़िल’ का ही कोई नया प्रोटोकॉल है? और शायद यही कहानी की सबसे बड़ी सफलता है — कि यह खत्म होकर भी पूरी तरह समाप्त नहीं होती।

निष्कर्ष:
"तेरहवीं मंज़िल" एक मनोरंजक, कल्पनाशील और चौंकाने वाली कहानी है, जो आधुनिक कॉरपोरेट जीवन की खोखली नियमितता को एक असाधारण मोड़ के साथ प्रस्तुत करती है। यह कहानी हमें न केवल डराती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा अस्तित्व, क्या केवल रूटीन का हिस्सा ही हैं या हमारी खुद की भी कोई स्वतंत्र पहचान है?

रेटिंग: 9/10
(अब मैं भी अपनी लिफ्ट के हर बटन को दो बार सोचकर दबा रहा हूँ! 😄)

सादर


वखारिया
 

vakharia

Supreme
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कहानी समीक्षा: चंदगी राम पहलवान
लेखिका महोदया: Shetan

एक अद्भुत प्रेरणास्पद जीवन-कथा जो हरियाणवी ठाठ के साथ दिल में उतर जाती है

कभी आपने सुना है कि किसी पहलवान के पीछे उसकी भाभी हो?

ना ना, शीला भाभी जैसी काम-कथा वाली भाभी नहीं...!!

यहाँ बात है "बीना" नाम की उस भारतीय नारी की, जो घड़े के साथ संस्कार भी ढोती है, और ज़रूरत पड़ने पर दूध की कटोरी से पहलवान गढ़ देती है।

यह कहानी किसी आम ग्रामीण जीवन की कथा नहीं — यह है चरित्र निर्माण की कहानी, वो भी उस दौर में जहाँ औरतें दंगल नहीं देखती थी पर बीना ने पूरा का पूरा दंगल ही रच दिया।

साधारण से घर में पली बढ़ी, घरेलू कामकाज में दक्ष, बीना को देखकर शायद कोई नहीं कहेगा कि वह एक स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और फिटनेस कोच है — लेकिन उसने वह सब कर दिखाया, वो भी बिना किसी किताब, कोर्स या मोबाइल ऐप के।

जब समाज ने चंदगी राम को “पहलवान” शब्द से ही अपमानित किया, बीना ने उसे अपना मिशन बना लिया। उस मिशन में दूध, घी, पोछे की बाल्टियाँ, सूती बोरियाँ, और चुपचाप फटी बलियाँ तक शामिल थीं — ये सब एक पूरी देसी ट्रेनिंग किट बन गए।

लेखक ने जिस सहजता से ग्रामीण हरियाणा के हास्य, तंज और भावनाओं को प्रस्तुत किया है, वो काबिले तारीफ़ है। कहीं भी नाटकीयता जबरन नहीं लगती — वो वही देसी ड्रामा है जो हर गाँव के नुक्कड़ पर होता है, और हर घर की रसोई में गूंजता है।

सेवा राम और बग्गा राम जैसे पात्र सिर्फ़ कहानी को गति नहीं देते, वे उस समाज की मानसिकता का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बाहरी शरीर देखकर व्यक्ति को आँकते है — और फिर उसी मानसिकता को जब चंदगी की "गिरफ़्त" बेजान कर देती है, तब पाठक, ताली बजाने से, खुद को रोक नहीं पाता।

बीना सिर्फ एक भाभी नहीं, वो माँ है, कोच है, आलोचक है, सहायक है और सबसे बढ़कर प्रेरणा है। उसकी घूँघट वाली हँसी और अश्रु भरी मुस्कान में ऐसा तेज़ है, जो बड़े-बड़े ओलंपिक मंचों को भी प्रेरणा दे सकता है।

यह एक लघुकथा नहीं, एक जीवन-गाथा है। लेखक ने पूरे ग्रामीण परिवेश, पारिवारिक संबंधों और खेल की दुनिया को इतनी स्वाभाविकता से बुना है कि यह कहीं भी बनावटी नहीं लगती।

और सबसे मज़ेदार बात — हर भाव, हर मोड़, हर संवाद में कोई न कोई चुटीली सचाई छिपी है, जो पढ़ने वाले को हँसाती भी है और सोचने पर मजबूर भी करती है।

बीना और चंदगी की यह कहानी उस हर “माँ-भाभी” के नाम है, जिनका सपना कभी स्कूल की फीस भरने तक सीमित नहीं रहा.. उन्हों ने अपने बच्चों को आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।

यह भी प्रतीत होता है कि असली ‘हिंद केसरी’ सिर्फ अखाड़े में नहीं, घर की रसोई और खेत की पगडंडी पर ही तैयार होता है — और उसके पीछे होती है एक ऐसी बीना, जो बिना थके, बिना हारे, बस करती जाती है।

रेटिंग: 9.5/10
(0.5 की कटौती केवल इसलिए, क्योंकि कहानी खत्म होते ही मन करता है — इसे दोबारा शुरू किया जाए! 😄)

सादर


वखारिया
 
Last edited:

RED Ashoka

Writer
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124
प्रिय RED Ashoka जी,

आपकी उत्साही प्रतिक्रिया पढ़कर मन अत्यंत आनंदित हुआ। आपने मेरी रचना को ‘ग्रंथ जैसा अनुभव’ बताया — इससे बड़ा प्रशंसा-पुष्प किसी लेखक के लिए और क्या हो सकता है? विशेषकर यह जानकर प्रसन्नता हुई कि शाकिनी की ममत्वपूर्ण भावनाओं, काव्य-संयुक्त श्लोकों और कथा की गहराइयों ने आपको प्रभावित किया।
Bhai aap to hakdar ho tarif ke ekdum royal,and excited story likhi


अब आइये, आपके मन में जागी जिज्ञासाओं पर बात करें – और इस संवाद को सार्थक बनाएँ।

1. राजकुमार का राजपुरोहित होना — क्या यह संभव है?
साहित्य में कल्पना का अधिकार होता है, परन्तु वह कल्पना यदि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सूत्रों से जुड़ी हो, तो उसमें प्रामाणिकता भी जुड़ जाती है।

भारत के प्राचीन राजवंशों में कई उदाहरण मिलते हैं जहाँ राजकुमारों को आध्यात्मिक और दार्शनिक शिक्षा दी जाती थी – केवल युद्ध-कला तक सीमित नहीं रखा जाता था। राजपुरोहित का पद सामान्य ब्राह्मणों द्वारा ही ग्रहण किया जाता था, यह सामान्य परंपरा थी – पर अपवाद भी होते रहे हैं।

यदि कोई राजकुमार आत्मिक साधना, यज्ञ-विधि, वेद-अध्ययन और शास्त्रों में विशेष निपुणता प्राप्त कर ले, और यदि राज्य हित में उसे यह भूमिका निभानी पड़े – तो वह एक विशेष दायित्व भी बन जाता है, केवल पद नहीं।

अब हमारा राजा भी थोड़ा experimental निकला — democracy तो थी नहीं, passion follow करने दिया बेटे को! :smile:

Haa ye bhi sahi baat hai , Rajkumar hai to rajpurohit ho sakta par aamtaur pe aisa dekha nahi gaya isliye kaha


2. राजा का तांत्रिक होना — क्या यह असंगत है?
भारतीय परंपरा में राजा को केवल शासनकर्ता नहीं, धर्म-रक्षक भी माना गया है। अनेक शास्त्रों में वर्णित है कि राजा को वेद, आयुर्वेद, ज्योतिष और यहाँ तक कि तंत्र विद्या में भी ज्ञान होना चाहिए। विशेषकर तंत्र विद्या का प्रयोग तब होता था जब राज्य संकट में हो, और सामान्य उपाय निष्फल हो जाएँ।

कई ग्रंथों में यह भी उल्लेखित है कि कुछ विशिष्ट राजाओं ने तांत्रिकों से दीक्षा प्राप्त कर सीधे साधनाएँ की हैं — उनके उद्देश्य आत्मरक्षा, शत्रु पर नियंत्रण, अथवा अलौकिक शक्तियों का सामना करना था।

मेरी कथा में यह रेखांकित करने का प्रयास किया गया है कि राजा केवल बाह्य शक्ति से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विवेक और तांत्रिक चेतना से भी समृद्ध था –और कौन कहता है कि राजा सिर्फ तलवार से लड़ता है? कभी-कभी चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए चक्र और मंत्र भी ज़रूरी होते हैं..!!

Bhai aapki baat sahi hai , tantra vidhya ka gyan hona raja ke liye aavashyak hai par jaha tak dekha gaya hai ki jyadatar raja ki karibi yani rajpurohit, Mahamatya,aadi vagera iska prayog krtee hue Nazar aate hai ,
And Kai jagah to khud maharani bhi tantrika rah chuki hai,


आपकी रेटिंग (8.4/10) मेरे लिए बहुत मूल्यवान है।

यह न केवल उत्साहवर्धक है, बल्कि इस बात का संकेत भी है कि एक सजग पाठक ने कथानक को गंभीरता से पढ़ा और आत्मसात किया।

आप जैसे पाठकों से संवाद बना रहे — यही मेरे लेखन की सबसे बड़ी सफलता होगी।

आपके समय, समीक्षात्मक दृष्टिकोण और भावनात्मक जुड़ाव के लिए हार्दिक धन्यवाद।


सादर
वखारिया
Thanks you too
 

Shetan

Well-Known Member
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259
कहानी समीक्षा: चंदगी राम पहलवान
लेखिका महोदया: Shetan

एक अद्भुत प्रेरणास्पद जीवन-कथा जो हरियाणवी ठाठ के साथ दिल में उतर जाती है

कभी आपने सुना है कि किसी पहलवान के पीछे उसकी भाभी हो?

ना ना, शीला भाभी जैसी काम-कथा वाली भाभी नहीं...!!

यहाँ बात है "बीना" नाम की उस भारतीय नारी की, जो घड़े के साथ संस्कार भी ढोती है, और ज़रूरत पड़ने पर दूध की कटोरी से पहलवान गढ़ देती है।

यह कहानी किसी आम ग्रामीण जीवन की कथा नहीं — यह है चरित्र निर्माण की कहानी, वो भी उस दौर में जहाँ औरतें दंगल नहीं देखती थी पर बीना ने पूरा का पूरा दंगल ही रच दिया।

साधारण से घर में पली बढ़ी, घरेलू कामकाज में दक्ष, बीना को देखकर शायद कोई नहीं कहेगा कि वह एक स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और फिटनेस कोच है — लेकिन उसने वह सब कर दिखाया, वो भी बिना किसी किताब, कोर्स या मोबाइल ऐप के।

जब समाज ने चंदगी राम को “पहलवान” शब्द से ही अपमानित किया, बीना ने उसे अपना मिशन बना लिया। उस मिशन में दूध, घी, पोछे की बाल्टियाँ, सूती बोरियाँ, और चुपचाप फटी बलियाँ तक शामिल थीं — ये सब एक पूरी देसी ट्रेनिंग किट बन गए।

लेखक ने जिस सहजता से ग्रामीण हरियाणा के हास्य, तंज और भावनाओं को प्रस्तुत किया है, वो काबिले तारीफ़ है। कहीं भी नाटकीयता जबरन नहीं लगती — वो वही देसी ड्रामा है जो हर गाँव के नुक्कड़ पर होता है, और हर घर की रसोई में गूंजता है।

सेवा राम और बग्गा राम जैसे पात्र सिर्फ़ कहानी को गति नहीं देते, वे उस समाज की मानसिकता का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बाहरी शरीर देखकर व्यक्ति को आँकते है — और फिर उसी मानसिकता को जब चंदगी की "गिरफ़्त" बेजान कर देती है, तब पाठक, ताली बजाने से, खुद को रोक नहीं पाता।

बीना सिर्फ एक भाभी नहीं, वो माँ है, कोच है, आलोचक है, सहायक है और सबसे बढ़कर प्रेरणा है। उसकी घूँघट वाली हँसी और अश्रु भरी मुस्कान में ऐसा तेज़ है, जो बड़े-बड़े ओलंपिक मंचों को भी प्रेरणा दे सकता है।

यह एक लघुकथा नहीं, एक जीवन-गाथा है। लेखक ने पूरे ग्रामीण परिवेश, पारिवारिक संबंधों और खेल की दुनिया को इतनी स्वाभाविकता से बुना है कि यह कहीं भी बनावटी नहीं लगती।

और सबसे मज़ेदार बात — हर भाव, हर मोड़, हर संवाद में कोई न कोई चुटीली सचाई छिपी है, जो पढ़ने वाले को हँसाती भी है और सोचने पर मजबूर भी करती है।

बीना और चंदगी की यह कहानी उस हर “माँ-भाभी” के नाम है, जिनका सपना कभी स्कूल की फीस भरने तक सीमित नहीं रहा.. उन्हों ने अपने बच्चों को आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।

यह भी प्रतीत होता है कि असली ‘हिंद केसरी’ सिर्फ अखाड़े में नहीं, घर की रसोई और खेत की पगडंडी पर ही तैयार होता है — और उसके पीछे होती है एक ऐसी बीना, जो बिना थके, बिना हारे, बस करती जाती है।

रेटिंग: 9.5/10
(0.5 की कटौती केवल इसलिए, क्योंकि कहानी खत्म होते ही मन करता है — इसे दोबारा शुरू किया जाए! 😄)
Thankyou very very much. Muje bahot Khushi hui ki aap ko ye story pasand aai. Ha me kahani ki truti janti hu. Kosis rahegi ki aage ye galtiyan na ho.
 

Mrxr

𝓢𝓴𝔂...𝓽𝓱𝓮 𝓱𝓮𝓪𝓻𝓽 𝓸𝓯 𝓮𝓵𝓮𝓶𝓮𝓷𝓽𝓼 ✨
Banned
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Story ; चंदगी राम पहलवान​
Written by ; Shetan
Story line ; A biography


Is story me ek India ke mahan wrestler the chandgi raam ki life batai gai hai, ki kaise wo ek sadharan we ladke se ek mahan pahalwaan bane.

Positive points


  • Chandgi raam ki bhabhi beena ka chandgi raam ko apne bete jisa pyaar dena, ek maa ki mamta aur pyaar darsata hai.
  • Chandgi raam ki mehnat, lagan aur vishwas ye darsata hai ki aapko khud pe bharosa ho toh aap safalta hansil kar sakte hai.

Negative points

  • Characters ki depth ka kam hona,jaise ketraam, sevaraam, beena ke bacche, bagga.
  • Chandgi raam ki pahli fight ki detail ka saaf warnan nahi ho paya jisse samajhne me dikkat hui ki dono ki position kaysi thi.
  • Start me beena ka itni jaldi gussa hona aur gusse me itna bada kadam uthana thoda ajeeb laga.
  • Chandgi raam ko kuch din bhi nahi hue the sayad mehnat karte aur beena ka mele ke dangal me chandgi ki fight ka sochna thoda ajeeb laga.
  • Beena ka apni kaan ki baali ka bechna sahi nahi tha.Ye agle point me clear karta hun.
  • Haryana me ek killaa 4 beeghe ke karib hota hai aur ketraam ke pass 20 killaa jameen thi, sun ke ajeeb lagta hai,
  • Chandgi raam ki training me aur bhi pahlu jode ja sakte the, gaon ke desi tarike, jisse story aur acchi lagti.
  • Story me chandgi raam ka struggle nahi dikha jo title ke according dikhna chahiye tha.

Mistakes


Sabhi storys me mistakes hoti hain isme bhi hai, ye koi badi baat nahi hai lekin,
1-2 mistakes aisi hai story me jo read karte samay story ke flow ko tod deti hai, jisko sudharne ki jarurat hai, mod se baat kar unko sahi kar dijiye toh story aur behtar ho jaygi.
  1. बिना ki jagah बीना hona chahiye.​
  2. Rajesh au birju ki mistake,story me birju ko 3 baar ka champion bataya hai, aur ek jagah birju ki jagah apne rajesh kar diya hai aur 2 saal ka champion bhi likha hai.​

Story ki pace kanhi kanhi kam kanhi jyada hai. Story me thode emotions aur dal sakte the. End jaldi lagta hai story ka, story me haryanvi aur hindi mix ki gai hai jisse story ek alag feel deti hai. Mujhe haryanvi toh nahi aati hai lekin songs sunta hun jisse mujhe Kuch jagah pe haryavi language me mistakes lagi kanhi knhai pe, ye koi badi baat nahi hai so leave it, story acchi thi.


Rating ; 7.1/10.
 

vakharia

Supreme
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कहानी समीक्षा: अनदेखा,अनसुना एक किस्सा
लेखक महोदय: DEVIL MAXIMUM


कभी-कभी सबसे बड़ा रहस्य वहीं छिपा होता है जहाँ हम सबसे कम खोजते हैं – बच्चों की मासूम आँखों में..!!

यह कहानी एक क्लासिक सस्पेंस थ्रिलर है, जो पारिवारिक रिश्तों की ऊपरी परत से शुरू होकर, मानव स्वभाव, शक, स्वाभिमान और मनोवैज्ञानिक उथल-पुथल की गहराइयों तक जाती है।


साहिल, एक जिम्मेदार पति और पिता; सीमा, एक संवेदनशील मगर आत्मसम्मानी स्त्री; विवेक, आधुनिक समय का शिकार करने वाला भेड़िया और बिट्टू, एक मासूम और आश्चर्यजनक रूप से बुद्धिमान बच्चा — इन सभी पात्रों को लेखक ने जीवंत बना दिया है।

संवादों में सहजता है, जो कहानी को वास्तविकता के करीब लाते हैं।

कहानी एक घरेलू ड्रामा की तरह शुरू होती है, लेकिन जैसे-जैसे विवेक का किरदार परत-दर-परत खुलता है, वैसे-वैसे सस्पेंस गहराता जाता है। कबीर का प्रवेश कहानी में नयापन और तेज़ी लाता है, जो कि क्लासिक क्राइम इन्वेस्टिगेशन के लहजे में रचा गया है।

बिट्टू की मासूम सी मुस्कान के पीछे छिपा बुद्धिमान और ‘जान-बूझकर किया गया मर्डर’ — एक झकझोर देने वाला टर्न है। लेखक ने यह मोड़ इतने सहज और निर्दोष-बुद्धिमत्ता के साथ रचा है कि पाठक ठगा-सा रह जाता है।


कहानी में कुछ दृश्य ऐसे हैं, जो दोहराए गए लगते हैं.. जैसे विवेक की गंदी नीयत पर चर्चा, या सीमा और साहिल के झगड़े। संपादन करके इसे और धारदार बनाया जा सकता था।

कभी-कभी संवाद इतने लंबे और जानकारीपूर्ण हो जाते हैं कि वे पात्रों की बजाय वक्ता लगने लगते हैं.. पर शायद यही लेखक का अंदाज़ है, जो बात को सीधे दिल से कहते है, और वही उनके लेखन की खासियत भी है।

कबीर भले ही तेज़तर्रार हो, लेकिन पूरी कहानी में वो बिट्टू को आइसक्रीम खिलाकर फुसलाने वाले मामा से ज्यादा नहीं लगता।

बिट्टू को देखकर लगता है कि अगली जासूसी वेब सीरीज़ में शेरलॉक होम्स की जगह कोई 7वीं कक्षा का बच्चा ही लेना चाहिए! उसकी चालाकियाँ और स्टोरी-टेलिंग के प्रति जागरूकता का तत्व, इतना परिपक्व महसूस होता है कि अंत में वह खुद ही कहानी का लेखक-दिग्दर्शक बन जाता है।




यह कहानी सिर्फ एक मर्डर मिस्ट्री नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है, जहाँ अपराध की जड़, न वासना है, न लालच – बल्कि अपमान और आत्मरक्षा की भावना से जन्मी बुद्धिमत्ता है। लेखक ने यह दिखाया है कि दुनिया में सबसे ख़तरनाक चीज़ है — एक मासूम बच्चे की नज़र से देखी गई नाइंसाफी।

रेटिंग: 8.5/10

सादर


वखारिया
 

vakharia

Supreme
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कहानी समीक्षा: वो खिड़की जो....
लेखक महोदय: Riky007

"वो खिड़की जो..." सिर्फ एक खिड़की नहीं, एक दरवाज़ा है — आपके दिल और दिमाग दोनों को खोलने वाला।


कल्पना की उड़ान और भावना की ज़मीन पर टिकी यह कहानी, आपको सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए लिखी गई है।

एक सामान्य-सा दिखता कॉलेज स्टूडेंट मानव, एक प्यारा-सा दादाजी रमेश शर्मा, एक रहस्यमयी गायिका सुचिता, और एक "वॉर्महोल" जो काल और यथार्थ की सीमाओं को तोड़ता है—ये सभी मिलकर एक ऐसी कहानी रचते हैं, जो विज्ञान और दिल के बीच झूलती है।

दादाजी और पोते के बीच का रिश्ता कहानी का हार्द है — हल्के-फुल्के हास्य, गहराई और सच्चाई से भरपूर। वॉर्महोल, आइंस्टीन-रोसेन ब्रिज, समय यात्रा—सभी बातें दिलचस्प अंदाज़ में बुनी गई हैं। ऐसा लगता है जैसे क्रिस्टोफर नोलन और गुलजार के विचारों को एक साथ जोड़ दिया गया हो! सुचितावो लड़की जो 30 साल पहले गायब हो गई थी… या शायद, अभी भी वहीं है…? उसकी दो चोटियों और लता मंगेशकर के गानों में लिपटी उपस्थिति, मानो कहानी को कविता बना देती है। जब आप सोचते हैं कि अब सब सामान्य है, तभी कहानी एक नया मोड़ लेती है.. कभी चिठ्ठी, कभी बंद खिड़की, कभी माचिस की तीली..!!

यह कहानी साबित करती है कि विज्ञान भी रोमांटिक हो सकता है, और अतीत भी वर्तमान से बात कर सकता है — बस अगर खिड़की सही हो, और दिल खुला हो। यह कहानी एक पूर्ण उपन्यास की पात्रता भी रखती है, और यदि इसका रूपांतरण वेब सीरीज़ में हो, तो यह 'Dark' और 'Stranger Things' जैसी कहानियों को टक्कर दे सकती है — 'दिल से देसी' स्पर्श के साथ।

रेटिंग: 8.5/10

सादर

वखारिया
 

vakharia

Supreme
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Story review: Who Tricked Whom?
Author: kinkystuff

A story where heartbreak turns into a power play, and the man you thought was broken… is quietly plotting his return...


This story hits hard from the beginning, literally. Aarav, the protagonist, gets into a life-changing car crash, and just like that, everything falls apart: he loses his ability to walk, his vision becomes blurry, and to top it all off, he’s told he might never be a man in the bedroom sense again. Tough start, right?

But this isn’t just a sob story — it’s a slow-cooked psychological thriller wrapped in betrayal, layered with tension, and sprinkled with dark irony.

Aarav isn’t your typical broken hero. Yes, he’s physically wrecked, but mentally? He’s sharper than ever. Instead of giving in to self-pity, he does something wild — he pretends to be completely blind so that his wife can leave him guilt-free. Noble, right?

But that lie? Oh, it backfires... and how..!!

The story beautifully captures his emotional journey — from heartbreak to suspicion to full-blown, cold, calculated revenge. It’s twisted, it’s painful, but it’s so well done.

The pacing here is chef’s kiss. It doesn’t rush into drama. The betrayal unravels slowly, and that makes it all the more gut-wrenching. First, it's small things — odd routines, whispers, missing hours. Then one day, boom — Aarav sees what’s been going on behind his back (literally). And it gets worse... and worse... until you're screaming in your head: “DUDE, DO SOMETHING!”

But he doesn’t. Not yet.

And that restraint? Makes the final act all the more powerful.

This isn’t just a cheating story. It’s about control. Aarav starts off powerless — physically, emotionally, and sexually. But as Naina gets more bold, more careless, he begins regaining power in the most ironic way: by watching her betray him. The more she cheats, the more he heals.

Like, seriously, it’s poetic (and a bit wicked): she gave him pain, and that pain brought him back to life.

The irony is top-tier..

Let’s talk symbolism for a sec.. The blind man sees everything... The helpless husband regains power by being passive... The wife thinks she’s fooling him, but she's digging her own grave...!!

It’s dark, it’s juicy, and honestly, kinda genius...

However, some scenes feel repetitive — especially the cheating bits. We get it: she’s horrible. Multiple versions of the same betrayal in slightly different positions, could have been avoided.

Naina's motivation remained a mystery..We get what she does, but not why. Is she a gold digger? Just bored? Mad? There’s room to flesh out her backstory a little, even just a hint.

Some dialogues tend to get a tad dramatic. Especially when Naina is doing her “I knew you could see!” speech. Feels like she’s auditioning for a soap opera. A little over the top, but that’s also part of the fun.

Just on a lighter note..

This story is basically what happens when Rear Window meets Gone Girl and they both get adopted by an Indian soap opera.
Drama? ✔️ Cheating? ✔️ Disability faking? ✔️ Emotional revenge? ✔️
All that’s missing is a secret twin brother from Canada.

Conclusion


"Who Tricked Whom?" is wild, dark, and super addictive. It’s not just about betrayal, it’s about slowly taking your power back from the person who thought you had none left. Aarav’s transformation is the kind of slow-burn revenge arc that makes you want to clap at the end.

With a few trimmed scenes and by adding a bit more to Naina’s character, this could totally be the next viral web series.

Rating: 8.5/10

Honestly kinkystuff, I need to know, what inspired this twisted gem? Because damn, it’s addictive.

Regards,

Vakharia
 
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