• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,487
82,867
304

dhalchandarun

[Death is the most beautiful thing.]
6,861
21,501
174
#183.

"नीली परी को कैद से आजाद कराना, सरल महसूस हो रहा है।" ऐलेक्स ने कहा- "इस तक तो पानी में तैर कर ही पहुंचा जा सकता है।'

ऐलेक्स की बात सुनकर क्रिस्टी के मुंह से हंसी छूट गई- “ब्वायफ्रेंड जी, लगता है आप कैश्वर को अभी ठीक तरह से समझे नहीं हैं? वो तिलिस्मा की कोई भी चीज को आसान नहीं करने वाला? विश्वास ना हो तो पानी में अपना पैर डालकर देख लो। अवश्य ही इस झील के पानी में कोई ना कोई जाल बिछा होगा?"

क्रिस्टी की बात सुनकर ऐलेक्स ने झील के पानी में अपना पैर डाला, परंतु ऐलेक्स का पैर पानी के अंदर नहीं गया। यह देख ऐलेक्स ने घूरकर क्रिस्टी की ओर देखा और पलटकर वापस आ गया।

"हम झील के पानी में तैरकर, अब नीली परी के पिंजरे तक नहीं पहुंच सकते।” ऐलेक्स ने मुंह बनाते हुए कहा- “मेरा पैर पानी के अंदर नहीं जा रहा है।"

ऐलेक्स की बात सुन क्रिस्टी ने अपनी जीभ निकालकर ऐलेक्स को चिढ़ा दिया।

"इसका मतलब वसंत ऋतु का यह भाग भी आसान नहीं होने वाला?” सुयश ने कहा- “चलो, अब सब लोग घूमकर देखो कि इस झील के पानी में प्रवेश कर नीली परी को कैसे छुड़ाया जा सकता है?"

सुयश की बात सुनकर सभी इधर-उधर बिखरकर कोई युक्ति ढूंढने की कोशिश करने लगे।

तभी तौफीक की नजर उस झरने की ओर गई, जिससे गिर रहे पानी से, झील बनी थी। अब तौफीक उस पहाड़ पर चढ़ने लगा।

कुछ देर में तौफीक उस झरने के उद्गम स्थल के पास पहुंच गया।

अब तौफीक की नजर उस झरने के पानी के बीच में पड़े, एक विशाल पत्थर पर थी, जिसके बीच में होने की वजह से झरने के पानी का मार्ग अवरुद्ध हो रहा था।

तौफीक ने जमीन पर बैठकर ध्यान से उस पत्थर को देखा, अब तौफीक की नजर उस बड़े पत्थर के नीचे मौजूद एक छोटे से पत्थर के टुकड़े पर गई।

यह छोटा पत्थर का टुकड़ा इस प्रकार रखा था कि यदि उसे हटा दिया जाता, तो वह बड़ा पत्थर लुढ़ककर झील के पानी में आ गिरता।

यह देखकर तौफीक ने ऊपर से ही चिल्ला कर कहा- “कैप्टेन, यहां पर एक चट्टान का टुकड़ा है, अगर हम उसे हटा दें, तो वह लुढ़ककर झील के पानी में गिरेगा। हो सकता है कि उससे झील का पानी का स्तर बढ़ जाये? और वह लिली का फूल तैरकर किनारे आ जाये?"

तौफीक की बात सुन सुयश ने तौफीक को चट्टान के हटाने का इशारा कर दिया। तौफीक ने सुयश का इशारा पाकर, बड़ी चट्टान के नीचे मौजूद छोटे पत्थर को, उसके स्थान से हटा दिया।

अब वह बड़ी चट्टान लुढ़कते हुए झील के पानी में जा गिरी। चट्टान के गिरने से, झील का बहुत सारा पानी चारो ओर फैल गया, परंतु लिली का फूल ज्यों का त्यों अपने स्थान पर अडिग तैरता रहा। यह देख तौफीक मायूस होकर पहाड़ से नीचे आ गया।

तभी जेनिथ की निगाह, तौफीक के द्वारा फेंकी गई चट्टान पर पड़ी, जो कि अब झील के पानी की सतह पर, किसी पत्ते की मानिंद तैर रहा था।

“कैप्टेन, यह पत्थर पानी के ऊपर तैर रहा है।" जेनिथ ने पत्थर की ओर इशारा करते हुए सुयश से कहा।

"इस पत्थर का रंग थोड़ा गाढ़ा है, जबकि यहां मौजूद बाकी पत्थर थोड़े हल्के रंग के हैं।” शैफाली ने कहा- “इसका मतलब इस रंग के पत्थर पानी पर तैरते हैं। अगर हमें ऐसे और भी पत्थर मिल जायें तो उन पत्थरों का पुल बनाकर हम उस पिंजरे तक पहुंच सकते हैं।"

शैफाली की बात सुनकर सभी का ध्यान अपने चारो ओर गया। कुछ ही देर में सभी को वहां मौजूद पत्थरों के बीच में 1 फुट के असंख्य गाढ़े पत्थर नजर आने लगे।

अब सभी उन पत्थरों को उठाकर झील के पानी में फेंकने लगे।
कुछ ही देर में सभी ने 2 मीटर लंबे एक पुल का निर्माण कर लिया।

“अब रुक जाओ।” सुयश ने सभी को रोकते हुए कहा- “पहले एक बार देख तो लें कि यह पुल हमारे शरीर का बोझ उठा भी सकता है कि नहीं? फिर बचे हुए पुल का निर्माण करेंगे।" सुयश की बात सभी को सही लगी।

अब क्रिस्टी ने उस पुल पर अपना पैर रखने की कोशिश की। पर क्रिस्टी के पैर के आगे बढ़ाते ही, सभी तैर रहे पत्थर अपने स्थान से इस प्रकार इधर-उधर होने लगे, जैसे कि वह क्रिस्टी का पैर ना होकर भगव..न वामन का पैर हो, और वह अपने एक पग में पृथ्वी मांगने जा रही हो।

“यह प्लान भी फेल है।” सुयश ने पत्थरों को देखते हुए कहा- “कैश्वर ने जानबूझकर हमारे आसपास ऐसी चीजें रखीं हैं, कि हम उसमें फंसकर अपना समय बर्बाद करते रहें। अब हमें कोई अन्य उपाय ही सोचना पड़ेगा?" सुयश की बात सुन सभी सोच में पड़ गये।

तभी शैफाली के चेहरे के आगे वही तितली आकर घूमने लगी, जिस पर बैठकर शैफाली ने ड्रोन को पकड़ने की कोशिश की थी।

शैफाली ने अपने हाथ से तितली को हटाने की कोशिश की, पर वह तितली शैफाली के चेहरे के सामने से नहीं हटी।

इस बार शैफाली ने घूरकर तितली को देखा, तभी उसके दिमाग में एक आइडिया आ गया। अब शैफाली बिना किसी को बताये अपने स्थान से उठी और उस तितली पर चढ़कर बैठ गई।

शैफाली के बैठते ही तितली हवा में उड़ी और शैफाली को लेकर लिली के फूल के पास पहुंच गई।

अब शैफाली ने किसी नट की भांति करतब दिखाते हुए, अपने दोनों पैर की कैंची बनाकर, उसे तितली के शरीर में फंसाया और तितली के शरीर से उल्टा लटककर हवा में झूलने लगी।

सभी मंत्रमुग्ध हो कर शैफाली के इस अद्भुत प्रयास को देख रहे थे। अब शैफाली के हाथ नीचे हवा में झूल रहे थे। तभी तितली लिली के फूल के ऊपर पहुंच गई। शैफाली की निगाह अब नीली परी के पिंजरे के ऊपर लगे हुक पर थी।

थोड़े ही प्रयास के बाद शैफाली ने उस हुक को अपने हाथ से पकड़ लिया। हुक को पकड़ते ही शैफाली ने अपने मुंह से एक अजीब सी ध्वनि निकाली।

इस ध्वनि को सुन तितली हवा में ऊपर उठ गई और इसी के साथ शैफाली सहित नीली परी का पिंजरा भी हवा में उठ गया।

पिंजरा अच्छा-खासा भारी था, पर इस समय शैफाली अपने शरीर की आंतरिक कोर का प्रयोग, मैग्ना की भांति कर रही थी इसलिये उसे कुछ खास परेशानी नहीं हुई? शैफाली ने वह पिंजरा सुयश के सामने रख दिया और स्वयं तितली से उतरकर नीचे आ गई।

“बहुत अच्छे शैफाली, क्या दिमाग लगाया है तुमने?” ऐलेक्स ने शैफाली की प्रशंसा करते हुए कहा।

अब सुयश ने इस पिंजरे का भी द्वार खोलकर नीली परी को बाहर निकाल दिया।

नीली परी ने बाहर निकलते ही, दूसरे ड्रम से नीले रंग को निकाल कर प्रकृति को रंग दिया। इसके बाद वह भी लाल परी की ही भांति हवा में गायब हो गई।

अब सबकी निगाहें पीली परी की ओर थीं, जिसका पिंजरा अनेक जगहों पर बार-बार प्रकट व अदृश्य हो रहा था।

“पीली परी का पिंजरा तो बहुत तेजी से अनेक स्थानों पर फ्लैश हो रहा है।" जेनिथ ने कहा- “और इसकी गति भी इतनी तेज है कि इसे पकड़ना लगभग नामुमकिन लग रहा है।

"सभी लोग अपने दिमाग के घोड़े को दौड़ाओ, अगर कैश्वर ने इस पहेली को हमारे सामने रखा है तो जरुर इसका हल हममें से किसी के पास होगा?” सुयश ने सभी को आशाओं से भरते हुए कहा- “हो सकता है कि इससे मिलती-जुलती कोई घटना हमारे दिमाग में हो? जो कि दिमाग के किसी कोने में धुंधली यादों के रुप में हो?"

सुयश की बात सुन, सभी पीली परी के पिंजरे को देखते हुए अपना दिमाग लगाने लगे।

शैफाली की तीक्ष्ण नजरें ध्यान से फ्लैश हो रहे पिंजरे का अवलोकन कर रहीं थीं। सभी को पिंजरे को इसी प्रकार देखते हुए, लगभग आधा घंटा बीत गया।

अब शैफाली को छोड़ सभी ने, थोड़ी देर के लिये अपनी नजरें पिंजरे से हटा लीं थीं।

शैफाली अब एक लकड़ी की सहायता से जमीन पर खिंचा कर, कुछ गणित की कैलकुलेशन कर रही थी।

शैफाली को यह करता देख सभी को समझ आ गया कि शैफाली को अवश्य ही कोई ना कोई क्लू मिल गया है?

कुछ ही देर में शैफाली ने लकड़ी से खिंचकर, एक छोटी सी तालिका तैयार कर ली और सभी को अपने पास बुला लिया।

सभी शैफाली के पास पहुंचकर, जमीन में बनी उस तालिका को देखने लगे, पर किसी को कुछ समझ में नहीं आया कि शैफाली ने जमीन पर, अंकों की गणना कर यह क्या बनाया है? अब सभी तालिका को छोड़ शैफाली की ओर देखने लगे।

उन्हें अपनी ओर देखता पाकर शैफाली ने बोलना शुरु कर दिया।

“कैप्टेन अंकल, जब मैंने ध्यान से पीली परी के पिंजरे को देखना शुरु किया, तो मुझे पता चला कि वह पिंजरा गायब होकर सिर्फ 8 स्थानों पर ही प्रकट हो रहा है, पर उनके बीच का क्रम बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था। तब मैंने यह तालिका बनाकर पिंजरे के क्रम का आंकलन करने की कोशिश की। अब पहले मैंने उन 8 स्थानों को चिंहित कर, उन्हें 1 से लेकर 8 तक नंबर दे दिये। यानि अगर पिंजरा पहली जगह पर प्रकट हो रहा है तो मैंने तालिका के स्थान पर 1 लिख दिया। कुछ ही देर में मेरे सामने ये आंकड़े आ गये, जो कि मैंने इस तालिका में लिख रखे हैं।" यह कहकर शैफाली ने सबका ध्यान तालिका की ओर कराते हुए कहा।

"तलिका की पहली लाइन में पहला अंक गायब है और बाकी के सभी अंकों के बीच 1 स्थान का अंतराल है, उसी प्रकार दूसरी लाइन में शुरु के 2 अंक गायब हैं और प्रत्येक 2 अंको के बीच 2 स्थान का अंतराल है। वैसे ही तीसरी लाइन में 3, चौथी लाइन में 4, पांचवी लाइन में 5, छठी लाइन में 6 अंकों का अंतराल है। अब अगर सातवीं लाइन को देखते है, तो यहां प्रत्येक अंकों के बीच 7 अंकों का अंतराल है। अगर ध्यान से देखें तो यहां पर कुल 8 ही स्थान हैं, जिनमें से 7 अंक गायब हैं। अर्थात जब पिंजरा सातवीं लाइन के हिसाब से गायब होना शुरु होता है, तो वह एक ही स्थान पर लगातार 8 बार प्रकट होता है।

“इसी प्रकार आठवीं लाइन के हिसाब से वह पिंजरा 8 बार प्रकट ही नहीं होता है। तो इस प्रकार से कैश्वर ने एक शतरंज के बोर्ड के 64 खानों का प्रयोग करके इस पहेली का निर्माण किया है। यानि अब अगर हमें इस पिंजरे को पकड़ना है, तो सबसे सही समय हमें सातवीं लाइन में मिलेगा, जब वह पिंजरा एक ही स्थान पर 8 बार प्रकट होगा।" इतना कहकर शैफाली चुप होकर सभी को देखने लगी और अब सभी आँखें फाड़े शैफाली को देख रहे थे।

“यह इतने छोटे से दिमाग में इतना गणित आता कहां से है?” सुयश ने शैफाली के बालों पर हाथ फेरते हुए पूछा।

"क्या कैप्टेन अंकल, आपने ही तो कहा था कि दिमाग के सारे घोड़े खोल दो, और दिमाग के घोड़े मैं तभी खोलती थी, जब मैं किसी के साथ 'ब्लाइंड चेस' खेलती थी। बस शतरंज के उसी खेल से मैंने ये पहेली हल कर ली।” शैफाली ने मुस्कुराते हुए भोलेपन से कहा।

(ब्लाइंड चेसः शतरंज के खेल का एक प्रकार, जिसे आँखों पर पट्टी बांधकर खेला जाता है। इस गेम में खेलने वाला अपने दिमाग में शतरंज के सभी 64 खानों को याद रखता है)

"चलो फिर अब सभी आठवें स्थान पर चल कर खड़े होते हैं।” ऐलेक्स ने कहा और क्रिस्टी का हाथ पकड़ ऐसे चल दिया, जैसे कि वह अपने गार्डन में टहल रहा हो।

सभी आठवें स्थान पर पहुंच गये और शैफाली के इशारे का इंतजार करने लगे। पिंजरे के फ्लैश होने का समय इतना कम था, कि पता होने के बाद भी शुरु के 2 बार में, कोई भी पिंजरे को छू भी नहीं पाया, पर आखिरकार तीसरी बार में क्रिस्टी के हाथ में पीली परी का पिंजरा आ ही गया।

इस पिंजरे का ताला भी तोड़कर, पीली परी को निकाल दिया गया।

पिछली दोनों परियों की भांति ही पीली परी ने भी पीले ड्रम से रंग लेकर प्रकृति के पीले रंग को भर दिया। इसके बाद वह पीली परी भी गायब हो गई।

अब सभी की नजर आखिरी वाली, हरी परी की ओर गई, जो कि हवा में स्थित एक हीरे के अंदर कैद थी।

“कैप्टेन, यह परी पिंजरे की जगह हीरे में कैद है।" तौफीक ने कहा- “और हीरा तो पृथ्वी की सबसे कठोर चीजों में शुमार है, तो फिर हम इस परी को उसमें से निकालेंगे कैसे?"

तौफीक की बात सुनकर सभी उस हीरे के पास आकर खड़े हो गये।

“अरे, इस हीरे के नीचे जमीन पर लगे पत्थर पर, तो एक इंद्रधनुष दिखाई दे रहा है।” ऐलेक्स ने नीचे की ओर देखते हुए कहा। ऐलेक्स की बात सुन सभी की निगाहें जमीन पर लगे, उस वर्गाकार सफेद पत्थर पर पड़ी।

“ऐलेक्स भैया, इस हीरे पर जब सूर्य की सफेद किरणें आकर पड़ रही हैं, तो वह इस हीरे के अंदर से प्रवेश होकर, इसके निचले सिरे से बाहर निकल रहीं हैं। वही सूर्य की किरणें अलग-अलग तरंग दैर्ध्य के कारण, हमें इंद्रधनुष के रंग में नीचे के पत्थर पर दिखाई दे रहीं हैं।

"एक मिनट इस इंद्रधनुष के रंग में कुछ गड़बड़ है।” जेनिथ ने नीचे देखते हुए कहा- “हां, इसमें हरा रंग उपलब्ध नहीं है, उसका स्थान खाली है।

“यह बात तो समझ से बाहर है।" शैफाली ने कहा- “सूर्य की किरणों से तो पूर्ण इंद्रधनुष दिखाई देना चाहिये था और इस समय हमें हरी परी को ही बाहर भी निकालना है....अवश्य ही इस द्वार से निकलने का रास्ता इसी पहेली में कहीं छिपा है?"

“दोस्तों, हम भूल रहे हैं कि 3 ड्रम के अंदर तो रंग था, परंतु एक ड्रम जिसमें हरा रंग होना चाहिये था, वह अभी भी खाली है। कहीं उसके खालीपन का संबन्ध इस पहेली से तो नहीं?" ऐलेक्स ने कहा।


“वह कोई बड़ी परेशानी नहीं है।” सुयश ने कहा“ नीले और पीले रंग को चौथे ड्रम में डालने पर हरा रंग बन जायेगा।...पर हरा रंग बनाने से समस्या हल नहीं होगी....अवश्य ही यहां कहीं पर और कुछ भी है? जो हमें अभी तक दिखाई नहीं दिया है। एक काम करो, सब लोग इधर-उधर बिखर कर कुछ भी संदिग्ध चीज ढूंढने की कोशिश करो?" सुयश की बात सुनकर सभी चारो ओर फैल गये।

कुछ मिनट बाद जेनिथ की आवाज सबको सुनाई दी- “कैप्टेन, मुझे इस चट्टान के पीछे से, यह एक फुट का कपड़े का घोड़ा मिला है। क्या इसमें कुछ हो सकता है?"

जेनिथ की आवाज सुन सभी जेनिथ के पास इकठ्ठा हो गये और उस हरे कपड़े से बने उस घोड़े को देखने लगे।

सुयश ने जेनिथ के हाथ से घोड़ा ले लिया और उसे उलट-पुलट कर देखने लगा।

“यह पूरा घोड़ा कपड़े का है, पर इसकी पूंछ असली जैसी लग रही है और इसका रंग भी हरा है, जो कि साधारणतया घोड़े के रंग से अलग है।” सुयश ने कहा“ और इसका हरे रंग में होना ये साबित करता है कि इस घोड़े का कहीं ना कहीं तो उपयोग होना है? क्या कोई इस घोड़े का सम्बन्ध अप्रत्यक्ष रुप से भी, किसी प्रकार उस पहेली से जोड़ पा रहा है?"

“हां कैप्टेन, यहां बात सूर्य की किरणों की हो रही है और कहते हैं कि सूर्य का रथ भी घोड़े ही खींचते हैं। तो कहीं ऐसा तो नहीं कि यही सूर्य का चौथा घोड़ा हो?" जेनिथ ने अपना तर्क देते हुए कहा।

सुयश को जेनिथ का तर्क बिल्कुल सटीक महसूस हुआ, तभी वह घोड़ा सुयश के हाथ से छूटकर जमीन पर गिर गया।

जमीन पर गिरते ही अचानक वह घोड़ा बड़ा होकर सजीव हो गया और हिनहिनाकर सूर्य की ओर उड़ गया। यह देख सभी सकते की सी हालत में आ गये।

“कैप्टेन, लगता है कि जेनिथ का कहना सही था, वहीं सूर्य का चौथा घोड़ा था?” क्रिस्टी ने कहा- “पर अब तो वह घोड़ा आसमान में उड़ गया, अब हम उसे पकड़ेंगे कैसे?" तभी ऐलेक्स की निगाह जमीन पर गिरी घोड़े की पूंछ की ओर गई।

“कैप्टेन, भागते भूत की लंगोटी सुनी थी, पर भागते घोड़े की पूंछ कभी नहीं सुना था?” ऐलेक्स ने घोड़े की पूंछ को सुयश को देते हुए कहा- “घोड़ा तो उड़ गया, पर उसकी पूंछ तो यहीं पर रह गई।'

सुयश ने घोड़े की पूंछ को ध्यान से देखते हुए कहा“ अरे यह पूंछ तो बिल्कुल पेंटिंग की कूची की भांति लग रही है?" यह कह सुयश के दिमाग में एक विचार कौंधा, अब वह तुरंत उस खाली ड्रम की ओर भागा।

सुयश ने घोड़े की पूंछ को जेनिथ के हाथ में पकड़ाया और स्वयं नीले व पीले रंग की कुछ मात्रा खाली ड्रम में डालकर हरे रंग का निर्माण कर दिया।

हरा रंग बनते ही सुयश ने घोड़े की पूंछ को हरे रंग में डाला और उसमें रंग लगाकर हीरे की ओर भागा।
सभी आश्चर्य से सुयश की ओर देख रहे थे।

सुयश ने अब उस पूंछरुपी कूची से, पत्थर पर मौजूद इंद्रधनुष के हरे भाग को रंग दिया। सुयश के ऐसा करते ही इंद्रधनुष के हरे रंग से एक तेज रोशनी निकलकर हीरे से टकराई।

अब हीरा एक ओर से सूर्य की सफेद किरणों से गर्म हो रहा था और दूसरी ओर से इंद्रधनुष की हरी किरणों से ठंडा हो रहा था।

कुछ देर तक लगातार यही प्रक्रिया चलते रहने के बाद, अब हीरे में कुछ दरारें दिखाई देने लगीं थीं।

यह देख सुयश ने सभी को सचेत करते हुए कहा "सभी लोग सुरक्षित स्थान को ढूंढ लो, मुझे लग रहा है कि हीरा कभी भी फट सकता है? और हीरे के फटने पर हमें नहीं पता कि कैसी ऊर्जा निकलेगी?"

सुयश की बात सुन सभी एक ऊंची सी चट्टान के पीछे छिप गये।

तभी ‘खनाक' की एक तेज आवाज के साथ हीरा टूटकर टुकड़े-टुकड़े हो गया।

कुछ देर बाद जब हीरे की ऊर्जा वातावरण से समाप्त हो गई, तो सभी ने झांककर उस स्थान की ओर देखा, जहां वह हीरा टूटा था।

अब वहां हरी परी खड़ी नजर आ रही थी।:dazed:

हरी परी ने नीले और पीले रंग के ड्रम से बाकी बचा पेंट भी हरे ड्रम में मिला दिया और उससे प्रकृति के आखिरी और सबसे खूबसूरत रंग को भर दिया। इसी के साथ वह परी भी गायब हो गई।

तभी सबको उस वर्गाकार पत्थर में अंदर की ओर जाता हुआ एक द्वार दिखाई दिया।

सभी समझ गये कि यही तिलिस्मा का अगला द्वार है। सभी अब उस द्वार के रास्ते से आगे की ओर चल दिये।


जारी रहेगा_____✍️
Waise toh sabhi colours ka hona bahut jaruri hai, magar green colour ke bina ye dharti murdo ka tila ban jayega, lovely update brother. Let's see aage aur kya kya adventure dekhne ko milta hai.
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,487
82,867
304
Waise toh sabhi colours ka hona bahut jaruri hai, magar green colour ke bina ye dharti murdo ka tila ban jayega, lovely update brother. Let's see aage aur kya kya adventure dekhne ko milta hai.
Aage bhi ek se ek adventure dekhne ko milega dost :roll3:
Thank you very much for your valuable review and support bhai , sath bane rahiye :hug:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,487
82,867
304
#184.

पंचमुख महानदेव:
(17.01.2002, गुरुवार, रुद्रलोक, हिमालय)

हनुका के रक्त भैरवी की डिबिया ले जाने के बाद, नीलाभ फिर से शि…वलिंग के सामने बने असंख्य त्रिशूलों पर जाकर आसन की मुद्रा में बैठ गया। कुछ देर तक उसने माया के बारे में सोचा और फिर अपनी साधना में लीन हो गया।

नीलाभ को पता था कि उसकी साधना का यह अंतिम चरण है, इसके बाद देव को उन्हें वरदान देने आना ही होगा।

कुछ घंटों के बाद नीलाभ ने अपने मंत्रोच्चारण की आखिरी आहुति को, देव को समर्पित कर दिया। अब नीलाभ ने अपनी आँखें खोलकर, अपने चारो ओर देखा और फिर खड़े होकर उन त्रिशूलों के ऊपर ही तांडव करना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में नीलाभ के पैरों से निकलता खून, त्रिशूल के मध्य से होकर शिवमलिंग की ओर बढ़ा, पर इससे पहले कि अंजाने में वह खून शिवमलिंग तक पहुंचता, वातावरण में तेज डमरु की आवाज सुनाई दी, जो कि देव के प्रकट होने का द्योतक था।

हवा में एक ऊर्जा द्वार उत्पन्न हुआ, जिससे निकलकर देव, नीलाभ के समक्ष आ खड़े हुए।

महानदेव ने नीलाभ के पैरों से रिसते खून को देखा, देव के देखते ही खून का रिसाव बंद हो गया। नीलाभ ने त्रिशूल से उतरकर देव के सम्मुख दंडवत प्रणाम किया।

देव ने अपना वरदहस्त आशीर्वाद की मुद्रा में उठा दिया।

“बताओ नीलाभ, तुम इस प्रकार की कठिन साधना क्यों कर रहे हो? तुम्हें भला किस चीज की कामना है? देव ने नीलाभ से पूछा।

"आप तो अंतर्यामी है देव।” नीलाभ हाथ जोड़कर देव के सामने घुटनों के बल बैठ गया- “आप तो जानते हैं, कि मुझे मनुष्यों के कल्याण के लिये, कुछ पलों के लिये आपकी कुछ शक्तियों का वरण करना है। इसलिये हे महादेव, मुझे ये वरदान दीजिये कि मैं कुछ विषम परिस्थितियों के समय, कुछ क्षणों के लिये, आपकी कुछ शक्तियों को धारण कर सकूँ। मैंने ब्र…देव के कहे अनुसार, आपकी शक्तियों को धारण करने के लिये, अपना शरीर भी उन शक्तियों के लायक कर लिया है।'

यह सुनकर म..देव ने आगे बढ़कर नीलाभ का हाथ पकड़ लिया। इससे पहले कि नीलाभ कुछ भी समझ पाता, उसे अपना शरीर ब्रह्मांड के करोड़ों आकाशगंगाओं के मध्य दिखाई दिया।

चारो ओर अरबों-खरबों अलग-अलग रंग के सितारे फैले हुए थे। करोड़ों आकाशगंगाएं अपनी धुरी पर घूम रहीं थीं। ब्लैक होल कुछ आकाशगंगाओं को अपने अंदर समाहित कर रहे थे।

कुछ न्यूट्रान स्टार अपने ही ताप से, एक धमाके के साथ फट रहे थे। कुछ आकाशगंगाएं आपस में विलय होकर, नयी आकाशगंगा का निर्माण कर रहीं थीं।

कुल मिलाकर उस स्थान पर मनुष्य तो क्या, किसी भी आकाशगंगा का अस्तित्व भी नगण्य दिखाई दे रहा था। चारो ओर अनंत ब्रह्मांड, अनवरत समय के साथ गतिमान था।

नीलाभ ने आज से पहले कभी भी इस प्रकार का दृश्य नहीं देखा था, इसलिये वह घबराकर ..देव को याद करने लगा।

तभी उस अनंत ब्रह्मांड में सितारों और आका शगंगाओं के मध्य देव का 5 मुखों वाला शरीर प्रकट हुआ।

उसमें पूर्व मुख-पीत वर्ण, पश्चिम मुख-श्वेत वर्ण, उत्तर मुख-कृष्ण वर्ण, दक्षिण मुख-नीलवर्ण और ऊर्ध्व मुख-ईशान दुग्ध के समान प्रतीत हो रहा था। नीलाभ, देव के इस दिव्य दर्शन को देख अविभूत होने लगा।

“हे देव, मैं आपके इस पंचमुखी दर्शन से, ब्रह्मांड के सारे कष्टों को भूल चुका हूं। अब कृपया मुझे इस दिव्य दर्शन का सार समझाइये देव?" नीलाभ ने अपने आँखों में उस अद्भुत दृश्य को भरते हुए कहा।

नीलाभ के शब्द सुन देव की आवाज वातावरण में उभरी- “नीलाभ, मैं तुम्हें ईश्वर का सार समझाने की चेष्टा कर रहा हूं। ईश्वर अनंत और निराकार हैं, तुम जिस रुप में उन्हें देखने की इच्छा करोगे, वो तुम्हें उस रुप में दर्शन देंगे। तुमने हमसे हमारी शक्तियों का वरण करने का वरदान मांगा, इसलिये ही हमने तुम्हें इस पंचमुख से दर्शन दिये। हम तुम्हें इस पंचमुख के माध्यम से बताना चाहते हैं, कि हम स्वयं अपने पंचभूत की शक्तियों से निर्मित हैं। अब अगर हम तुम्हें यह वरदान दे भी दें, तब भी तुम हमारे, इन पंचरुपों के आशीर्वाद के बिना, हमारी शक्तियों को नियंत्रित नहीं कर पाओगे। तो बताओ नीलाभ क्या तुम इन पंचभूतों से आशीर्वाद प्राप्त करने के इच्छुक हो?....परंतु ध्यान रखना, इन्हें प्रसन्न करना इतना भी आसान नहीं होगा।"

“अवश्य ..देव, आप मुझे वरदान प्रदान करिये। मैं आपको यह विश्वास दिलाता हूं कि बिना इन पंचभूतों के आशीर्वाद के, मैं आपकी उन शक्तियों का वरण नहीं करूंगा।” नीलाभ ने म..देव को विश्वास दिलाते हुए कहा।

“तथास्तु। तुम्हारा कल्याण हो नीलाभ।” यह कहकर महादेव अपने स्थान से अंतर्ध्यान हो गये।

तभी रोशनी का एक तेज झमाका हुआ, जिसकी वजह से नीलाभ की आँखें बंद हो गईं। परंतु जब नीलाभ ने अपनी आँखें खोलीं, तो उसने अपने आपको रुद्रलोक के उसी मं..दिर के बाहर पाया, जहां रहकर वह इतने समय से तपस्या कर रहा था।

इस समय नीलाभ के चेहरे पर अत्यंत प्रसन्नता के भाव थे। अब नीलाभ देव के पहले रुप को प्रसन्न करने के लिये चल पड़ा, जो कि वीरभद्र थे और वह रुद्रलोक के ही किसी अज्ञात स्थान पर थे।

चैपटर-3

ब्लैकून:
(20 वर्ष पहले.......डेल्फानो ग्रह, एरियन आकाशगंगा)

पृथ्वी से 12 लाख प्रकाशवर्ष दूर, एरियन आकाशगंगा में एक बहुत ही खूबसूरत ग्रह है, जिसका नाम है- डेल्फानो।

वैसे तो इस ग्रह का इतिहास मात्र 5000 वर्ष ही पुराना है, परंतु अपने इस छोटे से इतिहास में भी, डेल्फानो ने अनेकों अभूतपूर्व अविष्कार करके, पूरी एरियन आकाशगंगा को चकित करके रखा था।

कहने को तो यह ग्रह छोटा है, परंतु डेल्फानो ग्रह विज्ञान की तकनीक के हिसाब से, बहुत विकसित ग्रह माना जाता रहा है। कहते हैं कि इस ग्रह के लोगों का मस्तिष्क अत्यंत विकसित होता है।

यहां के वैज्ञानिक नित नये शोध करते रहते हैं। यहां के लोग देखने में बिल्कुल पृथ्वी वासियों के जैसे ही हैं, सिर्फ उनकी औसत आयु 10,00 वर्ष की होती है।

डेल्फानो एक शांति प्रिय ग्रह होने की वजह से, इतना आधुनिक तकनीक होने के बाद भी, हथियारों का निर्माण सबसे कम मात्रा में करता है।

डेल्फानो के राजा गिरोट स्वयं भी एक निपुण वैज्ञानिक हैं, जो कि अपना ज्यादा से ज्यादा समय अपनी प्रयोगशाला ‘ब्लैकून' को देते हैं।

कहते हैं कि गिरोट ने ही देवता नोवान का आशीर्वाद प्राप्त कर, 5,000 वर्ष पहले इस ग्रह को बसाया था। देवता नोवान के ही आशीर्वाद से गिरोट पिछले 5,000 वर्षों से वैसे ही जवान है, जैसा कि इस ग्रह के निर्माण के समय हुआ करता था।

गिरोट ने अपनी पूरी जिंदगी डेल्फानो को विकसित करने में लगा दी थी। डेल्फानो को विकसित करने में वह इतना पागल हो गया कि उसे कभी अपने विवाह का ख्याल भी नहीं आया।

आखिरकार एक रात उसे डेल्फानों के वारिस की चिंता हुई, इसलिये हजारों वर्षों के बाद गिरोट ने अपने ग्रह की ही एक साधारण सी लड़की से विवाह कर लिया।

विवाह के उपरांत, युवराज ओरस को जन्म देते हुए, गिरोट की पत्नि का स्वर्गवास हो गया। अब गिरोट के पास अपने पुत्र युवराज ओरस के सिवा कुछ भी नहीं था।

सुबह का समय था, डेल्फानो के दोनों सूर्य उदय हो चुके थे। सूर्य की पीली किरणें चारो ओर फैल गईं थीं।

इस समय गिरोट अपने महल से ब्लैकून के लिये निकलने ही वाला था, कि तभी 'कमांडर कीमोन' ने गिरोट के कक्ष में प्रवेश किया।
कीमोन को देख गिरोट की आँखों में आश्चर्य के भाव उभर आये।

“क्या हुआ कीमोन? इतनी सुबह-सुबह आने का कोई विशेष कारण है क्या?” गिरोट ने कीमोन से पूछा।

“महाराज, गुप्तचरों से समाचार मिला है, कि एंड्रोवर्स आकाशगंगा के, फेरोना ग्रह के राजा एलान्का को, आपके नये अविष्कार ‘समयचक्र' का पता लग गया है और वह किसी भी कीमत पर हमसे यह समयचक्र छीनना चाहता है।” कीमोन ने गंभीर भाव से कहा।

"एंड्रोवर्स आकाशगंगा के लोग?" गिरोट ने आश्चर्य से कहा- “उनके पास तो स्वयं एक ग्रह से दूसरे ग्रह में जाने की शक्ति है, फिर वह हमारे समयचक्र में इतनी रुचि क्यों ले रहे हैं?"

“वह अपनी शक्तियों से 2 ग्रहों के बीच द्वार बना सकते हैं महाराज, पर वह आकाशगंगा की अनन्त गहराइयों में, एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकते और ना ही समय को रोक और चला सकते हैं, इसी लिये उन्हें आपका समयचक्र चाहिये महाराज।” कीमोन ने कहा।

"पर समयचक्र के प्रयोग को तो हमने बहुत ही गुप्त रखा था, फिर उन्हें इस समयचक्र की जानकारी कैसे हुई?” गिरोट के चेहरे पर अब चिंता के भाव उभर आये।

“जिस प्रकार हमारे गुप्तचर हर स्थान पर हैं, मुझे लगता है कि उनके गुप्तचर भी हमारे ग्रह पर होंगे? उन्हीं के माध्यम से एंड्रोवर्स आकाशगंगा के लोगों को हमारे समयचक्र का पता चला होगा। इसलिये महाराज से निवेदन है, कि वह सदैव अपने और अपने परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखें। मैं तब तक सेना को भी एलर्ट पर डाल देता हूं।" इतना कहकर कीमोन शांत हो गया और गिरोट के अगले आदेश की प्रतीक्षा करने लगा।

गिरोट ने इशारे से कीमोन को जाने का आदेश दिया और स्वयं कक्ष में रखी एक कुर्सी पर बैठकर समयचक्र के बारे में सोचने लगे।

“समयचक्र का निर्माण तो पूरा हो गया है, पर इसे किसी भी प्रकार से सुरक्षित रखना होगा? पर कैसे? इतने बड़े ब्लैकून को हम किसी की नजरों से छिपा भी नहीं सकते.... क्या करूं?.....हे देवता नोवान हमारी मदद करो।” गिरोट मन ही मन अपने देवता को याद करने लगा।

तभी अचानक वह खुशी से उछल पड़ा- “अरे वाह मुझे पहले 'ज़ेप्टो नाइजर' का ध्यान क्यों नहीं आया? ...हां ...उससे मेरी समस्या हल हो सकती है।"

अभी गिरोट यह सब सोच ही रहा था कि तभी 5 वर्षीय नन्हें युवराज ‘ओरस' ने कक्ष में प्रवेश किया।

“आप क्या कर रहे हैं पिताजी?" ओरस ने अपने छोटे से यान नुमा खिलौने को हाथों से घुमाते हुए कहा।

"हम तो अपने नये प्रयोग के बारे में सोच रहे थे युवराज।” गिरोट ने मुस्कुराकर अपनी बांहें फैलाते हुए कहा - “आप बताओ, आप अपने इस नन्हें से यान से, कहां की सैर कर रहे हो?"

गिरोट को बांहें फैलाते देख, नन्हा ओरस दौड़कर उनकी बांहों में समा गया।

“मैं तो अपने यान से आकाशगंगा के, दूसरे छोर की सैर कर रहा था पिताजी।" ओरस ने अपनी कल्पनाओं को उड़ान देते हुए कहा- “पर मुझे ये बताइये कि आपका यह नया प्रयोग क्या है? जिसके बारे में आप मुझसे भी ज्यादा सोचते हो।" ओरस की बात सुन गिरोट के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“अभी तुम उस प्रयोग के बारे में जानने के लिये बहुत छोटे हो युवराज, समय आने पर मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगा।” गिरोट ने ओरस को फुसलाते हुए कहा।

“मैं इतना भी छोटा नहीं हूं। मैं आकाशगंगा की सारी जानकारी रखता हूं। आप चाहो तो मेरे ज्ञान का परीक्षण कर सकते हो?” ओरस ने किसी ज्ञानी की तरह ज्ञान देते हुए कहा।

“अच्छा, तो बताओ कि नेबुला क्या होता है?" गिरोट सच में ही ओरस की परीक्षा लेने लगा। वैसे गिरोट को पता था, कि ओरस इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे पायेगा।

"जब कोई सितारा अपनी आयु का पूरा करने के बाद फटकर कणों में बिखर जाता है, तो उससे बने गैस और धूल के बादलों को नेबुला कहते हैं।” ओरस ने अपना यान उड़ाते हुए कहा।

ओरस का उत्तर सुन गिरोट हैरान रह गया क्यों कि ओरस ने शत-प्रतिशत सही कहा था।

“अच्छा अब बताओ कि सुपरनोआ क्या होता है?" ओरस ने अपने प्रश्न को थोड़ा और कठिन कर दिया।

“जब नेबुला के बहुत से कण आपस में संकुचित हो कर मिलते हैं, तो वह एक सितारे यानि की सूर्य का निर्माण करते हैं। वह सितारा 75 प्रतिशत तक हाइड्रोजन से बना होता है। यानि की हाइड्रोजन उस सूर्य में ईधन का काम करता है। धीरे-धीरे जब उस सितारे का पूरा हाईड्रोजन खत्म होकर, हीलीयम में परिवर्तित हो जाता है, इस स्थिति में वह सितारा अपने स्वयं के गुरुत्वाकर्षण को संभाल नहीं पाता और एक महा विस्फोट के साथ फट जाता है, जिसे सुपरनोवा कहते हैं।” ओरस ने भोलेपन से कहा।

गिरोट अब आश्चर्य से ओरस की ओर देख रहा था।

“क्या तुम 'न्यूट्रान स्टार' और 'ब्लैक होल' के बारे में भी जानते हो?” गिरोट ने अब क्लास 1 के बच्चे से ग्रेजुएशन का प्रश्न पूछ लिया था।

"जब सुपरनो वा विस्फोट होता है, तो सितारे का सबसे बड़ा टुकड़ा, जो सबसे ज्यादा घनत्व लिये होता है, वह एक गोलाकार आकृति लेकर एक न्यूट्रान स्टार में परिवर्तित हो जाता है। यह न्यूट्रान स्टार जब संकुचन की अधिकतक सीमा तक पहुंच जाता है, तो यह छोटा होकर अदृश्य हो जाता है। इसी अदृश्य पिंड को ब्लैक होल कहते हैं।" इस प्रकार क्लास 1 के बच्चे ने ग्रेजुएशन में सर्वोत्तम अंक प्राप्त कर, अध्यापक को हतप्रभ कर दिया।

“ये सब ज्ञान तुम्हें किसने दिया?” गिरोट ने आश्चर्य से ओरस से पूछा।

ओरस ने मुस्कुराते हुए, कक्ष में रखी एक प्रतिमा की ओर इशारा किया। वह प्रतिमा डेल्फानो के देवता नोवान की थी।

ओरस का इशारा देख गिरोट और भी ज्यादा आश्चर्यचकित हो गया। उसने ओरस को अपने गले से लगा लिया।

“चलो ओरस, आज मैं तुम्हें अपने उस नये प्रयोग को दिखाता हूं।” गिरोट ने खड़े होते हुए कहा।

"पर आप तो कह रहे थे कि मैं अभी छोटा हं और मैं उस प्रयोग को समझ नहीं पाऊंगा?" ओरस ने अपनी भोली जुबान में कहा।

“मैं गलत था युवराज, आप नहीं छोटे हो, मेरी मानसिकता छोटी थी, जो मैं यह सोच रहा था कि आपको कुछ समझ नहीं आयेगा? आओ, अब चलते हैं ब्लैकून की ओर, जहां मेरा प्रयोग बेसब्री से आपका इंतजार कर रहा है।

यह कहकर गिरोट ने नन्हें वैज्ञानिक को अपनी गोद में उठाया और हवा में उड़ने वाले एक यान में बैठकर ब्लैकून के पास जा पहुंचा।

ब्लैकून लगभग 3 किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैली, एक बहुत बड़ी प्रयोगशाला थी, जिसका आकार बिल्कुल गोल और काले रंग का था। दूर से देखने पर वह एक बड़े से काले मोती के समान प्रतीत हो रही थी। गिरोट, ओरस को लेकर ब्लैकून के पास पहुंच गया।

“ब्लैकून में प्रवेश करने का प्रवेश द्वार तो है ही नहीं पिताजी। फिर हम इसमें प्रवेश कैसे करेंगे?" ओरस ने कहा।

“ब्लैकून का पूरा नियंत्रण अंदर मौजूद एक कंप्यूटर 'जेनिक्स' करती है। वह हमें देखते ही स्वयं द्वार खोल देगी। तभी ब्लैकून में एक स्थान पर एक द्वार खुलता दिखाई देने लगा।

“क्या यह मुझे देखकर भी द्वार खोल देगी?” ओरस ने अपनी जिज्ञासा शांत करते हुए कहा।

“हां पुत्र, ज़ेनिक्स में डेल्फानों के राजवंश के, किसी भी व्यक्ति के शरीर को सेंस करने की अद्भुत क्षमता है।" ओरस ने कहा।

गिरोट और ओरस उस द्वार से अंदर प्रवेश कर गये। ब्लैकून में एक भी व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा था, पूरा सिस्टम ज़ेनिक्स के हवाले था।

अंदर प्रवेश करते ही ओरस को पूरा ब्लैकून, किसी एक छोटे ब्रह्मांड के समान प्रतीत हुआ। चारो ओर निहारिकाएं (नेबुला) फैली हुई थी, जिसके आसपास अनेकों ग्रह घूम रहे थे।

चूंकि ओरस पहली बार ब्लैकून में आया था, इसलिये वह आश्चर्य से सभी चीजों को निहार रहा था।

“यह कैसी प्रयोगशाला है पिताजी? यहां पर कोई मशीन तो दिखाई ही नहीं दे रही है?” ओरस ने कहा।

“ब्लैकून कुल 4 भागों में बंटा है पुत्र, कुछ देर प्रतीक्षा करो, अभी तुम्हें सबकुछ पता चल जायेगा।...यह तो अभी ब्लैकून का प्रथम भाग है, इस भाग में हम तारों और नक्षत्रों की उत्पत्ति का अध्ययन करते हैं।" गिरोट ने कहा।

उस भाग को पार करने के बाद, ओरस एक ऐसे भाग में पहुंचा, जहां पर देवता नोवान की एक बड़ी सी प्रतिमा लगी थी। देवता नोवान के कंधे पर एक फीनीक्स पक्षी बैठा था। उस भाग में और कुछ भी नहीं था।

यह ब्लैकून का दूसरा भाग था। देवता की प्रतिमा के नीचे, सामने की ओर एक गोल काँच का पारदर्शी केबिन बना था। उसे देख ओरस ने पूछ ही लिया।


जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
47,487
82,867
304
बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है सुयश के टैटू का तो राज खुल गया लेकिन एक और राज सामने आ गया सबकी हैप्पी न्यू ईयर की जगह bad न्यू ईयर हो गई शैफाली के पास एक सिक्का मिला है वह शैफाली के पास कौन व क्यों रख के गया है जिसका पता किसी को भी नहीं है अल्बर्ट के हिसाब से यह सिक्का अटलांटिस सभ्यता का है ये सच हो सकता है और शैफाली का उनके साथ कुछ तो संबंध हो सकता है???

James aur Wilmar ne Shalaka👸 aur uske bhaiyo 🦸‍♂️🦹‍♂️🦸‍♂️🦹‍♂️🦸‍♂️🦹‍♂️ 🦸‍♂️ ko jagaa diya. Lekin inaam ki jagah unhe sunehri qaid mili.. 😏

Yeha Mayavan mei ab Nayantara 🤩 ka kya mamla hai yaar.. bahut suspense hai yaar..
:cool3:

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

अदभुद अकल्पनीय इससे अधिक शब्द नहीं हैं व्याख्यान के लिए

Shandar update bhai

अच्छी बात यह है कि अल्बर्ट बच गया है और अपनी ख़ुराफ़ात जारी रख रहा है।
पढ़ कर ऐसा लगा कि सुपर कमाण्डो ध्रुव वाली एक बेहद पुरानी कहानी - 'आदमखोरों का स्वर्ग' जैसा कुछ होगा।
लेकिन निराशा हाथ लगी :) हा हा!

इस अपडेट से एक और बात सूझती है कि क्या पुराने 'मर गए' किरदार भी वापस आ सकते हैं?

इस अपडेट में इक्यावन प्रश्न हैं - इतने तो एग्जाम में भी नहीं हल किए।
लिहाज़ा प्रश्नों को पढ़ने की ज़हमत नहीं उठाई मैंने।

अब तो सीधे अगले अपडेट में मिलेंगे जहाँ दिव्यास्त्रों की बातें होंगी - जैसे अभी कोई कम दिव्य शक्तियों की बातें हो रही थीं।
:tongue: :tongue: :tongue:

Lovely update.albert terosor se to Bach Gaya par kuwe me fans gaya. Apne khurafati dimag se devi ka pani aur bracelet pehenke dekha par koi natija nahi dikha par lagta hai aage jaake koi effect dikh jaaye ..
waise sawal to bahut bache hai jiska jikr kiya writer ne par aakhri panktiyan padhkar maja aa gaya.

रिव्यू की शुरुआत की जाए
इंटरेस्टिंग इंटरेस्टिंग

Raj_sharma
आर्केडिया यहाँ वो जगह थी जहाँ शलाका अपने भाइयों के साथ बर्फ़ में विश्राम कर रहे थे। आर्गस का कैरेक्टर किसने नोटिस नहीं किया, लेकिन अगर याद हो तो मैंने कहा था आर्गस से रिलेटेड कुछ आगे होने को है।

एक और जगह जहाँ मेरा ध्यान गया है वो है लिडिया भी आरियन गैलेक्सी से रिश्ता रखती हैं, यानी अटलांटिक और आरियन के संबंध न सिर्फ़ अलेना की वजह से जुड़े हैं बल्कि एटलस की वाइफ़ लिडिया की वजह से भी ये लोग संबंधी हैं।

अब देखा जाए तो आरियन और फोरेना दोनों अलग-अलग आकाशगंगा हैं। इसका मतलब अगर मेरा अनुमान सही जाता है तो एक आकाशगंगा के लोग शलाका के समर्थन में होना चाहिए। देखो मुझे अब लगने लगा है शलाका का रोल हम लोग अटलांटिक के संदर्भ में देखते थे लेकिन जिस तरह कहानी में मोड़ आ रहे हैं उससे ये लगता है शलाका का रोल हमें आकाशगंगा के लोगों के बीच में होना चाहिए।
क्योंकि कहानी की मुख्य नायिका शेफ्फाली है जो कि अटलांटिक क्षेत्र में भूमिका निभाएगी। दूसरी मुख्य नायिका शलाका है जो कि आकाशगंगा में। ऐसे में दोनों के बीच न्याय होगा, वरना शलाका अटलांटिक तक रहती तब उसका उद्देश्य इतना महत्वपूर्ण नज़र नहीं आता।

वैसे अब एक और लक्ष्य मुझे नज़र आता है वो है शलाका का आर्गस को ढूँढना कि वह कहाँ है। कहीं आर्गस के इन लोगों से संपर्क तोड़ने की वजह कुछ और तो नहीं, क्योंकि सिर्फ़ रहने की जगह निर्धारण में संबंध तोड़ना थोड़ा फ़िल्मी टाइप लगता है।

आगे देखना टाइटन (आरियन) बनाम एंडोरस (फोरेना) के लोग भी भिड़ेंगे एक-दूसरे से। यहाँ भी एक पक्ष अच्छाई के साथ तो दूसरा ग़लत के साथ मिलेगा।

(इनकी लड़ाई समय चक्र के लिए होने वाली है)
इसको बुकमार्क करना पड़ेगा, ये आगे मुझे फ़्लेक्स मारने में काम आएगा कि देखो मैंने क्या प्रेडिक्ट किया था।

वैसे किस्मत देखो जेम्स की एलियन स्पेस शिप उड़ाएगा, दूसरा विलमार बेचारा अब जानवरों वाली ज़िंदगी जीने वाला है।

वैसे मैं एक बात को लेकर कन्फ्यूज़ हूँ कि जो दिव्य जोड़ें हैं उन्हें एक-एक शक्ति मिली, इसका मतलब क्या? उदाहरण लें तो मयूर और धारा दोनों के पास एक तरह की कॉमन शक्तियाँ हैं, और सुयश और शलाका के पास अलग-अलग तरह की दो शक्तियाँ हैं, ऐसा ही ना? या सिर्फ़ इन दोनों की और भी शक्तियाँ उजागर होना बाकी हैं।

अब यहाँ एक पहले जो मुझे संदेह था जिसका मैंने ज़िक्र भी किया था कि अगर तत्व शक्ति शलाका के भाइयों के पास हैं तो वही शक्तियाँ दिव्य जोड़ें के पास कैसे और अग्नि, वायु का कहाँ रोल रहेगा ऐसे में खैर अब समझ आ गया क्या था वो।

आगे देखने में बहुत सी चीज़ें हुईं, सबसे बड़ी बात शीट हृतु तिलिस्म पूरा हुआ। एक समय लगा कि वो आँक गिर रहे हैं, कहीं इन लोगों का द एंड तो नहीं लिख दिया गया।

तिलिस्म की मुसीबत से बाहर निकलने की घटना रोचक थी। इस बार का तिलिस्म वाक़ई ख़तरनाक था, सच में मृगन मछली ने दिमाग़ खपा दिया।

लेकिन एक रोचक घटना ने मेरा ध्यान खींच लिया। वो जलपरी का शुरू में मुझे लगा सच में तिलिस्म से बाहर से कोई आ तो नहीं गया वो भी इतना जल्दी।

अब केश्वर को पहले हल्के में ले रहा था मैं, लेकिन मुझे लगता है केश्वर आगे चलकर बहुत बड़ा खलनायक बनेगा। केश्वर अगर एक प्राणी में भावना डाल सकता है तो वह भगवान ही बन गया एक तरह से। वो चाहे तो तिलिस्म में अपनी खुद की सेना तैयार कर दे।

एक बात कुछ अपडेट में ये भी सामने आई कि तिलिस्म से कुछ जीव बाहर भी गए। सोचो ऐसे अगर भावना वाले जीव तिलिस्म के बाहर चले गए तो आम लोगों का क्या हश्र होगा। इन जीवों के पास तो मैजिकल पावर्स भी हैं।

मुझे लगता है कहानी यहाँ से एक स्तर और ऊपर चली गई है, कहानी का स्केल अब एकदम ग्रैंड लग रहा है।

आगे चलते हैं।
त्रिकाली और व्योम का दृश्य बहुत समय के उपरांत आया है। शुरू में मुझे लगा क्या ये विधुम्न का अध्याय इतना जल्दी समाप्त हो गया, पर मैं ग़लत था। संदेह था ज़रूर यहाँ कि ऐसा कैसे इतना जल्दी, अभी तो बस झलकियाँ दिखीं, ऐसे में ख़त्म इतना जल्दी।

खैर महावृक्ष की प्रशिक्षण इतनी ख़तरनाक थी, विधुम्न कितने ख़तरनाक होने वाले हैं। वैसे भी उसे महादेव का वरदान प्राप्त है तो चुनौती और कठिन।
वैसे मुझे साइंस आती तो नहीं है लेकिन गुरुत्व आकर्षण के नियम ज़रूर समझ आए।

मुझे बस इस चीज़ का समझ नहीं आ रहा कि विधुम्न, त्रिशल, कालिका, व्योम ये लोग अटलांटिक से और स्टोरी के नज़रिए से कनेक्टेड कैसे होंगे, क्योंकि इनका रोल सिर्फ़ वो नीमा गुरुजी का बदला लेने तक तो सीमित नहीं होगा।

आगे मेरे लीजेंडरी प्रेडिक्शन “अल्बर्ट ज़िंदा है शायद” वाली कन्फर्म हो गई।

वैसे क्या पेच डाला है कि अल्बर्ट को पकड़ा ही नहीं पकड़ी तो उसकी जैकेट थी, और गिराया भी पेड़ पर मान गए गुरु।

अब ऐसे ही ब्रैंडन और ब्रूनो मिल जाएँ मज़ा आ जाए।
वैसे ये काली बिल्ली की देवी क्या चीज़ थी। उस द्रव्य में तो कुछ था या नहीं लेकिन उस ब्रैसलेट में ज़रूर कुछ पावर है। वैसे लगता तो नहीं अल्बर्ट काली बिल्ली बन जाएगा क्योंकि उसे लाया गया है मतलब आगे लंबा कुछ काम होगा, इसलिए जहाँ तक लगता है उसको बिल्ली वाली शक्ति मिली होगी, शायद बिल्ली का रूप धारण करने की शक्ति मिल गई।
वैसे अभी अल्बर्ट अगर मयावन में है मतलब वो सम्रा या सेनोर जा सकता है, क्योंकि मयावन तो ख़तरे से खाली नहीं है।

कुल मिलाकर अच्छा अपडेट था।
आगे की प्रतीक्षा।

राज भाई
सेक्स नहीं कहानी पढ़ने का शौक रहा है मेरा हमेशा से
सेक्स पढ़ने देखने की जरूरत सिर्फ कुछ नया, अनोखा, अलग जानने के लिए समझता हूं
आनन्द या मनोरंजन सेक्स लिखने, पढ़ने, सुनने या देखने से नहीं 'करने' में ही होता है

Awesome update and nice story.

यह अध्याय 'काली बिल्ली' अलबर्ट के साहसिक और रहस्यमयी सफर का एक रोमांचक मोड़ है।

आपने इस भाग में अलबर्ट के चरित्र को बहुत ही चतुराई से पेश किया है। शुरुआत में टेरोसोर (Pterosaur) के चंगुल से बचने वाला दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है।👍

अलबर्ट का अपनी जैकेट की ज़िप खोलकर गिरना उसकी सूझबूझ और "जोखिम उठाने वाली" प्रवृत्ति को बखूबी दर्शाता है।😎

The Mystery of the Cat Goddess
इस अपडेट का सबसे बड़ा आकर्षण वह सूखा कुआँ और उसके भीतर छिपी बिल्ली के मुख वाली गुफा है। यहाँ लेखक ने 'इण्डियाना जोन्स' या 'लारा क्रॉफ्ट' जैसी एडवेंचर फिल्मों वाला माहौल बनाया है।🙄

अर्द्धचंद्राकार दरवाजे और जलधारा: बिना जमीन पर गिरे गायब होने वाला पानी गुफा की जादुई और उन्नत तकनीक की ओर इशारा करता है।👌🏻

अलबर्ट का बिना डरे उस रहस्यमयी जल को पी लेना और ब्रेसलेट पहनना कहानी में एक बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' हो सकता है। भले ही अभी उसे कोई बदलाव महसूस नहीं हुआ, पर यह तय है कि भविष्य में यह जल उसे काली बिल्ली की तरह शक्तियां या रूप प्रदान करेगा।👍

प्रश्नावली का प्रभाव
अपडेट के अंत में दी गई 50 प्रश्नों की सूची पाठकों के लिए एक "मेमोरी रिफ्रेशर" का काम करती है। यह दिखाता है कि इस कहानी का कैनवास कितना विशाल है। इतने सारे रहस्यों को एक साथ जोड़ना लेखक की कल्पनाशक्ति की गहराई को दर्शाता है। यह प्रश्नावली पाठकों की उत्सुकता को चरम पर ले जाती है कि क्या 'अद्भुत दिव्यास्त्र' में इन सवालों के जवाब मिलेंगे?🤔

अंत में दी गई कविता—"कृति का संकलन हूं, नये शब्दों का संचार हूं मैं"—लेखक के आत्मविश्वास और उनकी कला के प्रति समर्पण को दर्शाती है। यह कहानी को एक दार्शनिक टच देती है।👌🏻👌🏻

यह अपडेट ऐक्शन, थ्रिलर और फैंटेसी का एक बेहतरीन मिश्रण है। अलबर्ट का 'काली बिल्ली' वाले मंदिर में जाना और वह दिव्य जल पीना आने वाले संकटों या शक्तियों की आहट है। 'अद्भुत दिव्यास्त्र' की घोषणा ने अगले भाग के लिए बेसब्री बढ़ा दी है। 🫠
एक बार फिर से शानदार अपडेट भाई 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

बहुत ही शानदार अपडेट

फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया

शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

Nice update....

Amazing update❤❤

bahut kammal likte ho

बहत ही इंट्रेस्टिंग अपडेट। शैफाली का सपने देखना और उसका वर्णन रॉजर के वार्तालाप से हूबहू होना बहुत ही बड़ा रहस्य छोड़ गया। क्या अटलांटिस के वासी शैफाली से सपनो के माध्यम से कॉन्टैक्ट कर रहे हे।

बहुत खूब।

Nice update....

Bhut hi badhiya update Bhai
Sabhi ne milkar vasant ritu ko bhi par kar liya

Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Is update ne sach me dimag ke ghode khol diye.........

Aur aakhir me ghoda hi kaam aya.........

Maja aa gaya bhai

Keep rocking

Shaandar update

nice update

majedar update ..hanuka ka bachpana majedar tha,.

Waise toh sabhi colours ka hona bahut jaruri hai, magar green colour ke bina ye dharti murdo ka tila ban jayega, lovely update brother. Let's see aage aur kya kya adventure dekhne ko milta hai.

Next update bro

अपडेट पोस्ट कर दिया है दोस्तों, आपके अमूल्य टिप्पणीयों एवं शब्दों का इंतजार रहेगा। 🙏🏼
 
Top