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Adultery सपना या हकीकत [ INCEST + ADULT ]

DREAMBOY40

सपनो का सौदागर
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174
HAPPY 3RD ANNIVERSARY
🎉🎊:celebconf:🎊🎉

सभी पाठकों को बहुत बहुत आभार एवं धन्यवाद
आपके प्यार और स्नेह की बदौलत
आज इस कहानी को ना सिर्फ
3 साल पूरे हुए
बल्कि 60 लाख व्यूज भी हो रहे है ।
कहानी पहले ही हजार पेज की रेस मे दौड़ रही है

आप सभी का आभार एक ऐसी कहानी को प्रेम देने के लिए जहा मेरे जैसे अड़ियल मिजाज वाले लेखक की मनमानी ही आपको पढने और सुनने को मिलती है ।
बिना किसी पोल और ओपेनियन लिये आप पाठक फिर भी कहानी से जुड़े है उसके लिए मै ऋणी रहूंगा


एक बार फिर से धन्यवाद 🙏
 
Last edited:

ashik awara

Member
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मेरा भी इस कहानी का रिवीजन चल रहा है दोस्तो
अपडेट लेट करने से आपका ही नही मेरा भी नुक्सान ही होता है कि मुझे भी सब पढना पड़ता है ।

लेकिन क्या करे देश , काल , परिस्थिति औ र सबसे बढकर मनोस्थीति के अनुसार ही इन्सान चलने को बाध्य होता है । तो चिंता ना करे जल्द ही आपको रसभरे अपडेट मिलेन्गे जैसे ही मेरा रिवीजन खतम हो जायेगा
दोस्त आपकी कहानी को हम यदि शुरू से पढ़ें तो एक दिलचस्प नोवल की तरह उत्सुकता रहती हे आगे क्या होगा यही कहानी की सफलता होती हे पाठक बंध कर रह जाता हे जेसा आपने कहा खुद की कहानी को एक पाठक की तरह खुद पड़ें आपको पता लग जाएगा क्या क्या और सुधार की जरूरत हे , सबसे बड़ी बात अपनी भाषा में कहानी पढना इससे बढकर कुछ नही
 

DREAMBOY40

सपनो का सौदागर
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दोस्त आपकी कहानी को हम यदि शुरू से पढ़ें तो एक दिलचस्प नोवल की तरह उत्सुकता रहती हे आगे क्या होगा यही कहानी की सफलता होती हे पाठक बंध कर रह जाता हे जेसा आपने कहा खुद की कहानी को एक पाठक की तरह खुद पड़ें आपको पता लग जाएगा क्या क्या और सुधार की जरूरत हे , सबसे बड़ी बात अपनी भाषा में कहानी पढना इससे बढकर कुछ नही
बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई
साथ ब्नाये रखे ।
 

DREAMBOY40

सपनो का सौदागर
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UPDATE 174 (A)

लेखक की जुबानी

दोपहर के डेढ़ बजने को थे , चुकि राज चंदू के साथ उसके घर की साफ सफाई मे लगा हुआ था तो अनुज और उसके पापा के लिए खाना लेके राज की मा निकलने को हुई ।


अब ऐसे मे रज्जो अकेले क्या करती तो वो भी रागिनी के साथ निकल गयी मार्केट वाले घर के लिए ।

इधर अनुज दुकान में बैठा था , दोपहर के समय ग्राहकी कम थी और उसके बेचैनी भूख ने बढा दी थी ।

कुछ ही देर मे दुकान पर उसके मा के साथ उसकी मौसी ने दस्तक दी ।

खाने के टिफ़िन के साथ अपनी मौसी को देख अनुज का चेहरा चमक उठा ।

अनुज - क्या मा कित्ने देर से आ रहे हो , कबसे भूख लगी

रागिनी - अरे बेटा वो तेरा भैया समान लाया था वही देख रही थी उसी मे देर हो गई, ले तु खा ले । मै तेरे पापा को खाना देके आती हू


अनुज - अरे आप दुकान पर बैठोगे तब न खाऊंगा

रज्जो मुस्कुरा कर - अरे लल्ला तु खा मै हू ना , जा छोटी तु खाना देके आ ।


अनुज अपनी मौसी की बात सुनकर बहुत खुश हुआ और सोचा क्यू ना जल्दी जल्दी खा कर मौसी के साथ कुछ टाईम बिताया जाये ।

इधर अनुज अन्दर के कमरे मे खाने चला गया और रज्जो दुकान मे बैठ कर ऐसे ही समान देखने लगी ।

अनुज फटाफट 10 मिंट मे खा कर बाहर आ गया ।

उसने देखा कि उसकी मौसी लिपस्टिक वाला बॉक्स खोल कर देख रही थी ।

अनुज हौले से अपनी मौसी के पास गया , उसने अपने मौसी के जिस्म से आती भीनी भीनी परफ्युम की खुस्बु ली और एक गहरी सास लेते हुए बोला - क्या देख रहे हो मौसी ?

अनुज के अचानक से बोलने से रज्जो चौकी फिर हस्ते हुए - अरे तु खा चुका

अनुज - हा वो भूख ज्यादा लगी थी ना , आप क्या खोज रहे हो

रज्जो लिपस्टिक का बॉक्स बन्द करके उसको उसकी जगह पर रखते हुए - वो मै बस ऐसे ही देख रही थी कि तेरी दुकान मे मेरे मतलब का कुछ है भी या नही ।


अनुज चहक कर - आप बोलो तो आपको क्या चाहिये , मेरे यहा तो सारे लेडिज समान मिलते है ।

रज्जो मुस्कुरा कर - सारे सामान मिलते है ।

अनुज - हा !

रज्जो कुछ सोच के - अच्छा तो जरा मुझे *** कम्पनी का लिपस्टिक दिखा

अनुज चहक कर दुकान मे एक ओर गया और वही अपनी मौसी को देख कर - कैसा चाहिये मौसी , डार्क सेट या लाईट


अनुज के सवाल से रज्जो मुस्कुराई और उसे सुबह का समय याद आया जब अनुज उसके चुचे टटोल रहा था, उसने बस परखने के लिए अनुज से मजाक शुरु किया ।

रज्जो - तु बता मेरे उपर कैसे अच्छा लगेगा

अपनी मौसी के सवाल से अनुज चौक गया और वो हिचकते हुए अपनी मौसी को एक नजर उपर से निचे देख कर जायजा लिया ।

हल्की गाजरी रंग साड़ी मे उसकी मौसी का अंग अंग खिल रहा था । अनुज थुक गटक कर अपने मौसी के होठो को देखा जिस्पे ब्राइट मरून मे शेड वाली लिपस्टिक लगी थी जो उन्के सावले स्किन टोन पर बहुत ही फ़ब रही थी ।

अनुज थोडा मुस्कुराया और शर्मा कर अपनी मौसी को दो तिन मैट शेड वाले ब्राउन और सेमी डार्क लिपस्टिक सजेस्ट किये


रज्जो ने सेमी डार्क पिन्क मैट वाली लिपस्टिक ट्राई की और सच मे उसके चेहरे पे बहुत ही खिल रहा था ।


रज्जो - अरे वाह तुने तो गजब के कलर बताये

अनुज हस कर - आपको पसंद आया ना
रज्जो खुश होकर अनुज के गाल चूमती हुई - बहुत ज्यादा

अनुज - आप चाहो तो और भी लेलो पप्पी इसका color नही छपता

रज्जो हसी - अच्छा सच मे ,, तुझे बहुत चाहिये चुम्मी तेरी भी शादी करवा दू उम्म्ं

अनुज शर्मा गया और रज्जो ने उसे अपने सीने से लगा लिया - मेरा प्यारा बच्चा

अनुज को उम्मीद ही नही थी कि ऐसे अनुभव भी उसको मिल सकते थे और वो अपने चेहरे को अपनी मौसी के सीने पर घिसने लगा ।


रज्जो हस्ती हुई - अब बस कर हम दुकान मे है कोई देख लेगा

अनुज चहका कर सीधा होकर - तो अन्दर चले मौसी

अनुज की बात सुन्कर रज्जो ने मुस्कुराहत भरी भौहे चढाई और अनुज को भी अह्सास हुआ कि वो क्या बोल गया ।


रज्जो उससे अलग होकर हस्ती हुई - तू बहुत शैतान हो गया आजकल हम्म्म

अनुज हड़बड़ाया - म म मै ? क्या मतलब !

रज्जो तुनक कर - खुब समझती हू मै , लग रहा है राज से पहले तेरी ही शादी करनी पड़ेगी


अनुज की सासे तेज हो गई उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे , थोडी सी मस्ती अब उसको भारी लगने लगी थी । उस्के हाथ पाव फूलने शुरु हो गये थे ।


अनुज डरा हुआ लेकिन हसने का दिखावा करता हुआ - क्या मौसी हिहिही भैया से पहले मै कैसे और अभी तो मै बहुत छोटा हू हिहिहिही


रज्जो उसके कान पकड कर - शैतान कही का , मुझे नही पता कितना बड़ा हो गया है तू


अनुज हसता हुआ - आह्ह मौसी छोडो ना , मैने क्या किया है अब आप ही तो मुझे हग की है ना

रज्जो कान छोडते हुए - और वो जो तु सुबह सब्के सामने मेरे दूध छू रहा था वो


अब अनुज की सिट्टीपिट्टी गुम हो गयी , उसके गले से थुक गटकना भी दुभर हो चुका था । शर्म और भय से उसका चेहरा लाल हो गया था ।


मगर कब तक रज्जो अपने लाड़ले को ऐसे देख पाती इससे पहले अनुज रोना शुरु कर देता वो खिलखिला कर हस दी ।


अनुज अपनी डबड्बाइ आंखो से अपनी मौसी को हस्ता देख रहा था

रज्जो - देखा पकड लिया ना मैने तुझे , उम्म्ं अब बोल क्यू छू रहा था सुबह मे

अनुज अपने आसू पोछ कर - वो मै आपका हाथ पकडे हुए था तो मुझे नरम नरम सा कुछ लगा । मुझे लगा आपका पेट है ।


इतना बोल कर अनुज सुबकने लगा , खुद को बचाने का उसको यही रास्ता सूझ रहा था ।

रज्जो ने अपने लाड़ले को रोता देख पिघल गयी और हसते हुए अपने आंचल से उसका चेहरा साफ करते हुए बोली - क्या तु भी बच्चो के जैसे रो रहा है , मै तो बस पुछ रही हू ना ।

अनुज शान्त होकर अपनी मौसी को देखा ।

रज्जो - अगर तुझे अच्छा लग रहा था तो बता देना चाहिए साफ साफ ,


अनुज - नही वो मुझे ...

रज्जो उसी बात को काटकर मुस्कुराती हुई - तो क्या तुझे अच्छा नही लग रहा था ।

अनुज अपनी मौसी की शरारती मुस्कान देख कर शर्माहत भरी हसी के साथ - हा वो वो हिहुहिही


रज्जो हस कर - मै जान रही थी तु एक नम्बर का शैतान है , बदमाश कही का ।
इधर इनकी बाते और बढती इससे पहले रागिनी खाना देकर वापस आ चुकी थी ।
रागिनी अनुज को देख कर - अरे अनुज क्या हुआ ? तेरी आंखे लाल क्यू है


अब तो अनुज की फिर फट गयी कि कही उसकी मौसी उसकी मा को सब बोल ना दे । वो जानता था कि उसकी मौसी का स्वभाव बहुत चंच्ल है और उन्हे ऐसी बाते कहने मे कोई भी हिचक नही होती है ।

लेकिन अचरज तो तब हुआ जब रज्जो ने मुस्कुराते हुए रागिनी को जवाब दिया - अह कुछ नही छोटी वो खाना खा रहा था सब्जी वाले हाथ से ही उनसे आंख मल ली थी तो जलन के मारे लाल हो गयी है ।

रागिनी अनुज के पास आकर अपनी साडी की पल्लू को मुह की भाप देते हुए बहुत फ़िकर मे अनुज की आंखो की सेकाई करते हुए - क्या तु भी ऐसे छू दिया , देख कितनी लाल हो गयी है ।


अनुज अपनी मा को परेशान देख कर खुद को बहुत कोष रहा था और वही जब उसने मौसी को मुस्कुराता देखा तो अचानक से उसके दिल की तरंगे हिल्कोरे मारने लगी और वो शर्मा कर मुस्कुरा दिया ।


रागिनी अनुज से अलग होती हुई - अरे जीजी अब आप आई हो तो चलो थोडा शालिनी से मिल लेते है और कल पूजन शुरु हो रहा है उसका न्योता भी दे आते है ।


रज्जो - हा चलो ,

फिर रागिनी और रज्जो दोनो बहने अपने भारी भारी कुल्हे हिलाती हुई जंगीलाल के घर की ओर चल दी ।

वही अनुज एक अलग ही उलझन मे अटक गया कि मौसी की मुस्कान का क्या हिसाब लगाये वो ?

धीरे धीरे सोशल मीडिया पर ऐक्टिव होने से अनुज का ज्ञान बढा तो था लेकिन उसके जहन मे कुछ भ्रम ने भी जगह बना ली ।
अब वो जितना कुछ अपने जीवन मे सिख समझ पाया तो वो उसी के हिसाब से अपनी मौसी को परखने मे खोया हुआ था ।



जम्गिलाल के घर के किचन मे ताबड़तोड़ धक्को की बरसात जारी थी , किचन की सिंक के पास बरतन खंगाल रही शालिनी अपनी गाड़ फैलाये हुए खडी थी और पीछे से राहुल उसकी झिनी सी नाइटी उठाये सटासट अपनी मा की बुर मे लण्ड पेले जा रहा था ।



वही दुकान मे ग्राहको से डील कर रहे जंगीलाल की निगाहे दो भारी भरकम कूल्हो पर गयी जो उसकी दुकान पर चढ़े आ रहे थे ।

दोनो औरतो को देखते ही जन्गीलाल का चेहरा खिल गया

जन्गीलाल - अरे भाभी आप ,
फिर जंगीलाल ने रज्जो को उपर से निचे देखते हुए अपनी थुक गटकते हुए हाथ जोड़ कर उसका स्वागत करते हुए उठ खड़ा हुआ - अरे भाभी जी नमस्ते आईये बैठीये

ये बोलकर जंगीलाल ने रागिनी और रज्जो को कुर्सियाँ दे दी बैठने के लिए

रागिनी - अरे देवर जी , परेशान क्यू है , हम अन्दर चले जाते है ना , आप ग्राहको को देखीये


अन्दर जाने की बात सुनते ही जन्गीलाल के कान खड़े हो गये और उसे ध्यान आया कि शालिनी अन्दर किन कपड़ो मे है , और अन्दर राहुल भी है ।

अगर इन्होने उसे ऐसे कपड़ो मे देख लिया तो ना जाने क्या क्या सोच लेंगी ।

जन्गीलाल ग्राहको को उनका समान थैली भरकर देता हुआ - अरे भाभी हो गया , आप तो मुझसे जरा भी बाते करना ही नही चाहती , सीधा निशा की मा के पास चली जाती है


रागिनी झेप कर हसती हुई - अच्छा बाबा यही हू कहिये

जंगीलाल - आप बस बैठीए मै राहुल को भेज कर ठंड़ा मगाता हू


रागिनी - अरे उसकी जरुरत नही है , हम लोग खाना खा के आये है

जन्गीलाल - अरे कैसे जरुरत नही है

" भाभी जी कितने दिनो बाद ह्मारे यहा आई है , खातिरदारि तो बनती है ना " , जन्गीलाल ने रज्जो की ओर इशारा करके कहा ।


फिर वो गैलरी मे मुह देके जोर से राहुल को आवाज दिया ।

वही राहुल ने जैसे ही अपने बाप की आवाज सुनी , मा बेटे ठिठक गये और दोनो झट से अलग हो गये ।

शालिनी हड़बड़ा कर - अह बेटा जा जल्दी से देख क्या बुला रहे है तेरे पापा

राहुल ने अपना लण्ड पैन्त मे भरा और उसको सेट करते हुए अपने शर्ट के बाजुओ से अपने चेहरे का पसिना पोछते हुए तेज कदमो से दुकान मे आ गया ।


जंगीलाल - बेटा जरा कल्लु के यहा दो थमसअप लेके आ तो


राहुल ने फिर अपनी बड़ी मा और उनकी दीदी को देखा तो झट से उन्के पैर छू कर नमस्ते किया और निकल गया


इधर जन्गीलाल जब तक दोनो के हाल चाल और तैयारियो के बारे मे बाते कर रहा था कि तभी राहुल ठंडा लेके आ भी गया ।

इधर राहुल ने दोनो को ठन्डा दिया और भितर जाने को हुआ कि जन्गीलाल ने राहुल को टोका

जन्गीलाल अपनी आंखे नचा कर हसने का दिखावा करता हुआ - अह बेटा वो तेरी मा को बता दे कि बड़ी मा और उनकी दिदी आई है


राहुल समझ गया और फटाक से किचन मे भागा और हाफते हुए - मम्मी मम्मी , वो बड़ी मम्मी और उनकी दीदी आई है , आप ये कपडा बदल लो जल्दी से ।


घर पर मेहमान आने का सुनते ही शालिनी की भी हालत खराब हुई वो तेजी से भागती हुई कमरे मे गयी और जल्दी से फुल नाइटी डाल कर वापस किचन मे आ गयी ।


इधर जब राहुल वापस कर गैलरी के पास से ही अपने पापा को इशारा किया कि काम हो गया तो जन्गीलाल ने चैन की सास ली और हस कर - अरे राहुल बेटा, अपनी बड़ी मम्मी को घर मे लेके जाओ , जाईये भाभी जी


फिर दोनो बहने बारी बारी से उठी और भितर जाने लगी ,

16-16-35-859-1000


उसी समय जन्गीलाल की निगाहे रज्जो के मादक भारी भरकम कूल्हो पर गयी और अनायास उसके मुह से ये शब्द फुट पड़े - उफ्फ़ क्या गाड़ है यार ।



flirting-staring

जिसे रज्जो की तेज कानो से सुन ही लिया और फौरन गरदन घुमा के जन्गीलाल की ओर मुह करके देखा तो जंगीलाल की फट गयी और अगले ही पल रज्जो मुस्कुराते हुए भितर चली गयी और जंगीलाल ने चैन की सास ली ।
इधर महिलाए भीतर गयी और राहुल चुपचाप बाहर आ गया । दुकान मे आते ही उसका सामना अपने पापा से हुआ , वो अभी भी थोडा शर्मा रहा था ।
वही जन्गीलाल ने अपने भोले बेटे से कन्फ़र्म करने के लिए पुछा- बेटा वो तेरी मा ने कपडे बदल लिए ना

राहुल नजरे नीची करके हल्का मुस्कुरा कर - जी पापा !

जन्गीलाल अपने बेटे की ऐसी प्रतिक्रिया से थोडा असहज हुआ और उसे लगा कि शायद उसका बेटा इतना भी नादान नही है । सब समझता है ।


जन्गीलाल - अच्छा सुन , ये बात किसी से कहना मत कि तेरी मा मे ऐसे कपडे पहने थे

राहुल हस कर - नही पापा क्या आप भी ,

फिर थोडी देर की चुप्पी रही और राहुल को पता नही क्या सुझा उसने पापा ऐसा सवाल किया कि जन्गीलाल की घिग्गी बध गयी ।

राहुल - पापा आपने इतना छोटा क्यू लिया मम्मी के लिए , ऐसा तो वो फिल्मो मे हीरोइन लोग पहनती है ना


जन्गीलाल ने कुछ देर चुप रहा और फिर हस कर - तेरी मा कौन सी हीरोइन से कम है हाअहहहा

राहुल भी शर्माकर मुस्कुरादिया और पुछ पड़ा - तो क्या आप मम्मी के और भी ऐसे ड्रेस लाते हो

जन्गीलाल - अह नही बेटा ये बस पहली बार था

राहुल - तो और अच्छे अच्छे कपडे लाओ ना मम्मी के लिए, देखो ना मम्मी घर मे कितना काम करती है ना कही घुमने जाती है बस ऐसे ही घर मे पड़ी रहती है ।


जन्गीलाल - हमम बेटा बात तो तेरी सही है लेकिन बेटा हमेशा तो तेरी मा को ऐसे कपडे नही ना पहना सकता ।

राहुल - क्यू ?
जन्गीलाल - अरे बेटा देखा ना आज कैसे मेहमान आ गये थे और फिर निशा भी तो रहती है ना ।

राहुल - तो क्यू ना रात मे मम्मी को पहनाया जाये , तब कोई नही होगा ना

जंगीलाल के जहन मे राहुल की बाते सुनकर एक अलग ही फैंटसी ने जनम ले लिया था , वो एक गहरी सोच मे घूम सा गया कि

क्या होगा जब उसकी बीवी अपने ही बेटे के सामने ब्रा पैंटी मे घुमेगी ?
और कितना मजा आयेगा जब मै मेरे बेटे के सामने ही उसकी मा को छेड़ने मे ?
और कही उसके सामने खड़ा करके चोद दू तो ?

आह्ह , ये सब सोच कर ही जन्गीलाल का लण्ड फौलादी हो गया था ।
इधर राहुल भी अपने बाप से ऐसे बाते करके मन ही मन कोरी कलपनाये बुन चुका था और उसका लण्ड सर उठाने लगा था ।


इधर थोडी देर बाद ही रागिनी और रज्जो दुकान मे वापस आ गयी ।

राहुल को अपने लण्ड का तनाव बर्दाश्त ना हुआ और वो उसको सेट करने अंदर चला गया ।

रागिनी - अच्छा देवर जी हम चलते नमस्कार ।

जंगीलाल को मजबुरन अपने जगह से उठना पड़ गया और हाथ जोड़ उन्हे विदा किया ।

पहले रागिनी जो दुकान से उतर चुकी थी और फिर रज्जो को नमस्ते करते हुए चोर नजरो से अपने चढ़ढे मे तने हुए लण्ड को निहारा कि अभी भी उभरा हुआ तो नही ना दिख रहा था ।

वही रज्जो ने जंगीलाल की हरकतो को देखा तो वो मुस्कुरा दी और विदा लेके निकल गयी ये सोचते हुए कि जन्गीलाल भी उसकी चुतडो का दीवाना हो गया और अगर किस्मत साथ दे गयी तो उसको अपनी बुर मे लेके मौका वो नही चूकेगी ।
वही जन्गीलाल थोडा शर्मीन्दा होकर अपना लण्ड सेट करके बैठ गया ।


********______***********______**********


चौराहा वाले घर पर किचन का सारा काम निपटा कर सोनल और निशा घर के बाकी कमरो को सेट करने मे लगी थी


निशा गेस्ट रूम के बेड पर बिस्तर लगाने के बाद तकिया रखते हुए सोनल से बोली - दीदी क्यू ना कल जीजू को भी बुला ले ।


सोनल जो आलमारी के ड्रा साफ कर रही थी वो अचरज भरी नजरो से निशा को देखकर - तु पागल है क्या निशा , वो कैसे आयेगा ।


निशा - अरे दीदी कल पूजा होनी है तो जैसे बाकी मेहमान आयेंगे वो भी आ जायेंगे ।


सोनल निशा की बातो को सोचने लगती है और उसकी भी बेचैनी बढने लगती है क्योकि उसे अमन से मिले कितना समय हो गया था और फिर शादी से पहले मिलने का मौका कहा मिलता ।


सोनल बेचैन होकर निशा - लेकिन ये होगा कैसे , मतलब कौन बुलायेगा ।

निशा हस के - अरे राज है ना , वो बड़े पापा से बात कर लेगा

सोनल कुछ सोच कर - वो कुछ गलत ना सोचे

निशा सोनल की खिचाई करते हुए - ओहो देखो तो नवाबजादी के नखरे , सुबह शाम जिसका लण्ड लिये बिना चैन नही होता उससे कहने मे शर्म आ रही है


सोनल हस कर - अरे वो बात नही है , तु समझती नही है राज बहुत दुष्ट है मुझे बहुत तंग करता है अमन के नाम पर

निशा - ठिक है तो मै बोल दूँगी बस तुम जीजू को फोन करो ना
सोनल - अभी तो वो नहाने गया है ना , बोला है उसने

निशा भौहे चढा कर - आप कर रही हो या मै करु


इधर सोनल फोन लगाने को हो रही थी उधर अमन के कमरे मे उसकी मा उसके लिए कपडे निकाल रही थी

इसि दौरान अमन के मोबाइल की रिंग तेजी से बजनी शुरु हो गयी ,

अमन बाथरूम से फोन की रिंग सुन कर अपनी मा को आवाज देता है - मम्मी देखना जरा किसका फोन है

ममता बेड पर रखे हुए फोन पर की स्क्रिन को देखते हुए फोन हाथ मे ले लेती है और मोबाइल स्क्रीन पर my jaan नाम से काल आता देख मुस्कुरा देती है ।


इतने मे अमन की आवाज फिर से आती है - किसका है मा

ममता हस कर - ये कोई MY JAAN करके है , कौन है ये

अपनी मा के शब्द सुनते ही अमन हड़बड़ा कर - उठाना मत मम्मी मै आ रहा हू

और फिर अमन तेजी से अपने शरिर पर पानी डालते हुए फटाफट तौलिया लपेट कर भिगे जिस्म के साथ ही कमरे के बाहर आता है

लेकिन तबतक ममता फोन उठा चुकी थी और वही सोनल बिना कोई हैलो हाय किये सिधा फोन पर चुम्मीया देना शुरु कर देती और धीरे से बोलती है , आई मिस यू जान


अपनी बहु का रोमांटिक मूड समझ कर ममता की हसी छुट जाती है और वो अपने हसी को होठो से दबाते हुए फोन को अमन के हाथ थमाती है

अमन इशारे से अपनी मा को देख कर पुछता है कि क्या बोली वो ?
तो ममता मुस्कुरा कर अमन के गाल अपने पास करते हुए 7 8 चुम्मीये देते हुए धीरे से उसके कान मे बोली - आई मिस यू जान


फिर खिलखिलाहत भरी मुस्कान के साथ कमरे के बाहर चली गयी और अमन शर्म से भी भीग गया ।

फिर वो सोनल से बात करता है तो पता चलता है कि कल उसे आना है तो वो भी एक्साईटेड हो जाता है ।


फिर वो फोन काट कर वापस बाथरूम मे नहाने पहुच जाता है

नहाने के बाद अमन को बार बार अपनी मा की हरकते याद आने लगती है कि उसकी मा भी अब उसके मजे लेने लगी ।

इधर कुछ समय बाद राज जब चंदू के घर मे सारे बन्दोबसत कर लेता है तो अपने घर आ जाता है , उसे सोनल इंसिस्ट करती है वो पापा से बात करके कल के पूजा के लिए अमन और उसके परिवार वालो को बुलाये ।

राज इसके लिए मना नही करता है और वो अपने पापा से फोन पर बात करता है । तो रंगीलाल की बाहे भी खिल जाती है और उसे ममता से मिलने का एक बहाना भी मिल जाता है ।


जारी रहेगी ।
 

DREAMBOY40

सपनो का सौदागर
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Romanchak. Pratiksha agle rasprad update ki

Shandar lajawab बरखुरदार..... update bahut hi jabardast tha.... waiting more regular update Bhai...

Super super super super super super Super update Bhai ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️💯💯💯💯💯💯⏳⏳❤️❤️❤️❤️❤️🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🥵🥵🥵🥵🥵🙏🙏🙏🙏🙏🙏👏👏👏👏👏👏👏😘😘😘😘👌👌👌👌👌👌👍👍👍 Waiting for next update ⏳⏳⏳⏳⏳⏳⏳⏳⏳⏳

Bahut mast hai bhai...Lekin raj ne mauka chod diya yeh kuch alag hua

💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤❤😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘😘

Nice update

Fabolous update Bhai

बहुत ही बढ़िया और शानदार अपडेट दिया है भाई

दोस्त आपकी कहानी को हम यदि शुरू से पढ़ें तो एक दिलचस्प नोवल की तरह उत्सुकता रहती हे आगे क्या होगा यही कहानी की सफलता होती हे पाठक बंध कर रह जाता हे जेसा आपने कहा खुद की कहानी को एक पाठक की तरह खुद पड़ें आपको पता लग जाएगा क्या क्या और सुधार की जरूरत हे , सबसे बड़ी बात अपनी भाषा में कहानी पढना इससे बढकर कुछ नही
NEW UPDATE IS POSTED
 

Raj Kumar Kannada

ಸಂದರ್ಭದ ಕಾಮ
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1,037
124
UPDATE 174 (A)

लेखक की जुबानी

दोपहर के डेढ़ बजने को थे , चुकि राज चंदू के साथ उसके घर की साफ सफाई मे लगा हुआ था तो अनुज और उसके पापा के लिए खाना लेके राज की मा निकलने को हुई ।


अब ऐसे मे रज्जो अकेले क्या करती तो वो भी रागिनी के साथ निकल गयी मार्केट वाले घर के लिए ।

इधर अनुज दुकान में बैठा था , दोपहर के समय ग्राहकी कम थी और उसके बेचैनी भूख ने बढा दी थी ।

कुछ ही देर मे दुकान पर उसके मा के साथ उसकी मौसी ने दस्तक दी ।

खाने के टिफ़िन के साथ अपनी मौसी को देख अनुज का चेहरा चमक उठा ।

अनुज - क्या मा कित्ने देर से आ रहे हो , कबसे भूख लगी

रागिनी - अरे बेटा वो तेरा भैया समान लाया था वही देख रही थी उसी मे देर हो गई, ले तु खा ले । मै तेरे पापा को खाना देके आती हू


अनुज - अरे आप दुकान पर बैठोगे तब न खाऊंगा

रज्जो मुस्कुरा कर - अरे लल्ला तु खा मै हू ना , जा छोटी तु खाना देके आ ।


अनुज अपनी मौसी की बात सुनकर बहुत खुश हुआ और सोचा क्यू ना जल्दी जल्दी खा कर मौसी के साथ कुछ टाईम बिताया जाये ।

इधर अनुज अन्दर के कमरे मे खाने चला गया और रज्जो दुकान मे बैठ कर ऐसे ही समान देखने लगी ।

अनुज फटाफट 10 मिंट मे खा कर बाहर आ गया ।

उसने देखा कि उसकी मौसी लिपस्टिक वाला बॉक्स खोल कर देख रही थी ।

अनुज हौले से अपनी मौसी के पास गया , उसने अपने मौसी के जिस्म से आती भीनी भीनी परफ्युम की खुस्बु ली और एक गहरी सास लेते हुए बोला - क्या देख रहे हो मौसी ?

अनुज के अचानक से बोलने से रज्जो चौकी फिर हस्ते हुए - अरे तु खा चुका

अनुज - हा वो भूख ज्यादा लगी थी ना , आप क्या खोज रहे हो

रज्जो लिपस्टिक का बॉक्स बन्द करके उसको उसकी जगह पर रखते हुए - वो मै बस ऐसे ही देख रही थी कि तेरी दुकान मे मेरे मतलब का कुछ है भी या नही ।


अनुज चहक कर - आप बोलो तो आपको क्या चाहिये , मेरे यहा तो सारे लेडिज समान मिलते है ।

रज्जो मुस्कुरा कर - सारे सामान मिलते है ।

अनुज - हा !

रज्जो कुछ सोच के - अच्छा तो जरा मुझे *** कम्पनी का लिपस्टिक दिखा

अनुज चहक कर दुकान मे एक ओर गया और वही अपनी मौसी को देख कर - कैसा चाहिये मौसी , डार्क सेट या लाईट


अनुज के सवाल से रज्जो मुस्कुराई और उसे सुबह का समय याद आया जब अनुज उसके चुचे टटोल रहा था, उसने बस परखने के लिए अनुज से मजाक शुरु किया ।

रज्जो - तु बता मेरे उपर कैसे अच्छा लगेगा

अपनी मौसी के सवाल से अनुज चौक गया और वो हिचकते हुए अपनी मौसी को एक नजर उपर से निचे देख कर जायजा लिया ।

हल्की गाजरी रंग साड़ी मे उसकी मौसी का अंग अंग खिल रहा था । अनुज थुक गटक कर अपने मौसी के होठो को देखा जिस्पे ब्राइट मरून मे शेड वाली लिपस्टिक लगी थी जो उन्के सावले स्किन टोन पर बहुत ही फ़ब रही थी ।

अनुज थोडा मुस्कुराया और शर्मा कर अपनी मौसी को दो तिन मैट शेड वाले ब्राउन और सेमी डार्क लिपस्टिक सजेस्ट किये


रज्जो ने सेमी डार्क पिन्क मैट वाली लिपस्टिक ट्राई की और सच मे उसके चेहरे पे बहुत ही खिल रहा था ।


रज्जो - अरे वाह तुने तो गजब के कलर बताये

अनुज हस कर - आपको पसंद आया ना
रज्जो खुश होकर अनुज के गाल चूमती हुई - बहुत ज्यादा

अनुज - आप चाहो तो और भी लेलो पप्पी इसका color नही छपता

रज्जो हसी - अच्छा सच मे ,, तुझे बहुत चाहिये चुम्मी तेरी भी शादी करवा दू उम्म्ं

अनुज शर्मा गया और रज्जो ने उसे अपने सीने से लगा लिया - मेरा प्यारा बच्चा

अनुज को उम्मीद ही नही थी कि ऐसे अनुभव भी उसको मिल सकते थे और वो अपने चेहरे को अपनी मौसी के सीने पर घिसने लगा ।


रज्जो हस्ती हुई - अब बस कर हम दुकान मे है कोई देख लेगा

अनुज चहका कर सीधा होकर - तो अन्दर चले मौसी

अनुज की बात सुन्कर रज्जो ने मुस्कुराहत भरी भौहे चढाई और अनुज को भी अह्सास हुआ कि वो क्या बोल गया ।


रज्जो उससे अलग होकर हस्ती हुई - तू बहुत शैतान हो गया आजकल हम्म्म

अनुज हड़बड़ाया - म म मै ? क्या मतलब !

रज्जो तुनक कर - खुब समझती हू मै , लग रहा है राज से पहले तेरी ही शादी करनी पड़ेगी


अनुज की सासे तेज हो गई उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे , थोडी सी मस्ती अब उसको भारी लगने लगी थी । उस्के हाथ पाव फूलने शुरु हो गये थे ।


अनुज डरा हुआ लेकिन हसने का दिखावा करता हुआ - क्या मौसी हिहिही भैया से पहले मै कैसे और अभी तो मै बहुत छोटा हू हिहिहिही


रज्जो उसके कान पकड कर - शैतान कही का , मुझे नही पता कितना बड़ा हो गया है तू


अनुज हसता हुआ - आह्ह मौसी छोडो ना , मैने क्या किया है अब आप ही तो मुझे हग की है ना

रज्जो कान छोडते हुए - और वो जो तु सुबह सब्के सामने मेरे दूध छू रहा था वो


अब अनुज की सिट्टीपिट्टी गुम हो गयी , उसके गले से थुक गटकना भी दुभर हो चुका था । शर्म और भय से उसका चेहरा लाल हो गया था ।


मगर कब तक रज्जो अपने लाड़ले को ऐसे देख पाती इससे पहले अनुज रोना शुरु कर देता वो खिलखिला कर हस दी ।


अनुज अपनी डबड्बाइ आंखो से अपनी मौसी को हस्ता देख रहा था

रज्जो - देखा पकड लिया ना मैने तुझे , उम्म्ं अब बोल क्यू छू रहा था सुबह मे

अनुज अपने आसू पोछ कर - वो मै आपका हाथ पकडे हुए था तो मुझे नरम नरम सा कुछ लगा । मुझे लगा आपका पेट है ।


इतना बोल कर अनुज सुबकने लगा , खुद को बचाने का उसको यही रास्ता सूझ रहा था ।

रज्जो ने अपने लाड़ले को रोता देख पिघल गयी और हसते हुए अपने आंचल से उसका चेहरा साफ करते हुए बोली - क्या तु भी बच्चो के जैसे रो रहा है , मै तो बस पुछ रही हू ना ।

अनुज शान्त होकर अपनी मौसी को देखा ।

रज्जो - अगर तुझे अच्छा लग रहा था तो बता देना चाहिए साफ साफ ,


अनुज - नही वो मुझे ...

रज्जो उसी बात को काटकर मुस्कुराती हुई - तो क्या तुझे अच्छा नही लग रहा था ।

अनुज अपनी मौसी की शरारती मुस्कान देख कर शर्माहत भरी हसी के साथ - हा वो वो हिहुहिही


रज्जो हस कर - मै जान रही थी तु एक नम्बर का शैतान है , बदमाश कही का ।
इधर इनकी बाते और बढती इससे पहले रागिनी खाना देकर वापस आ चुकी थी ।
रागिनी अनुज को देख कर - अरे अनुज क्या हुआ ? तेरी आंखे लाल क्यू है


अब तो अनुज की फिर फट गयी कि कही उसकी मौसी उसकी मा को सब बोल ना दे । वो जानता था कि उसकी मौसी का स्वभाव बहुत चंच्ल है और उन्हे ऐसी बाते कहने मे कोई भी हिचक नही होती है ।

लेकिन अचरज तो तब हुआ जब रज्जो ने मुस्कुराते हुए रागिनी को जवाब दिया - अह कुछ नही छोटी वो खाना खा रहा था सब्जी वाले हाथ से ही उनसे आंख मल ली थी तो जलन के मारे लाल हो गयी है ।

रागिनी अनुज के पास आकर अपनी साडी की पल्लू को मुह की भाप देते हुए बहुत फ़िकर मे अनुज की आंखो की सेकाई करते हुए - क्या तु भी ऐसे छू दिया , देख कितनी लाल हो गयी है ।


अनुज अपनी मा को परेशान देख कर खुद को बहुत कोष रहा था और वही जब उसने मौसी को मुस्कुराता देखा तो अचानक से उसके दिल की तरंगे हिल्कोरे मारने लगी और वो शर्मा कर मुस्कुरा दिया ।


रागिनी अनुज से अलग होती हुई - अरे जीजी अब आप आई हो तो चलो थोडा शालिनी से मिल लेते है और कल पूजन शुरु हो रहा है उसका न्योता भी दे आते है ।


रज्जो - हा चलो ,

फिर रागिनी और रज्जो दोनो बहने अपने भारी भारी कुल्हे हिलाती हुई जंगीलाल के घर की ओर चल दी ।

वही अनुज एक अलग ही उलझन मे अटक गया कि मौसी की मुस्कान का क्या हिसाब लगाये वो ?


धीरे धीरे सोशल मीडिया पर ऐक्टिव होने से अनुज का ज्ञान बढा तो था लेकिन उसके जहन मे कुछ भ्रम ने भी जगह बना ली ।
अब वो जितना कुछ अपने जीवन मे सिख समझ पाया तो वो उसी के हिसाब से अपनी मौसी को परखने मे खोया हुआ था ।



जम्गिलाल के घर के किचन मे ताबड़तोड़ धक्को की बरसात जारी थी , किचन की सिंक के पास बरतन खंगाल रही शालिनी अपनी गाड़ फैलाये हुए खडी थी और पीछे से राहुल उसकी झिनी सी नाइटी उठाये सटासट अपनी मा की बुर मे लण्ड पेले जा रहा था ।



वही दुकान मे ग्राहको से डील कर रहे जंगीलाल की निगाहे दो भारी भरकम कूल्हो पर गयी जो उसकी दुकान पर चढ़े आ रहे थे ।

दोनो औरतो को देखते ही जन्गीलाल का चेहरा खिल गया

जन्गीलाल - अरे भाभी आप ,
फिर जंगीलाल ने रज्जो को उपर से निचे देखते हुए अपनी थुक गटकते हुए हाथ जोड़ कर उसका स्वागत करते हुए उठ खड़ा हुआ - अरे भाभी जी नमस्ते आईये बैठीये

ये बोलकर जंगीलाल ने रागिनी और रज्जो को कुर्सियाँ दे दी बैठने के लिए

रागिनी - अरे देवर जी , परेशान क्यू है , हम अन्दर चले जाते है ना , आप ग्राहको को देखीये


अन्दर जाने की बात सुनते ही जन्गीलाल के कान खड़े हो गये और उसे ध्यान आया कि शालिनी अन्दर किन कपड़ो मे है , और अन्दर राहुल भी है ।

अगर इन्होने उसे ऐसे कपड़ो मे देख लिया तो ना जाने क्या क्या सोच लेंगी ।

जन्गीलाल ग्राहको को उनका समान थैली भरकर देता हुआ - अरे भाभी हो गया , आप तो मुझसे जरा भी बाते करना ही नही चाहती , सीधा निशा की मा के पास चली जाती है


रागिनी झेप कर हसती हुई - अच्छा बाबा यही हू कहिये

जंगीलाल - आप बस बैठीए मै राहुल को भेज कर ठंड़ा मगाता हू


रागिनी - अरे उसकी जरुरत नही है , हम लोग खाना खा के आये है

जन्गीलाल - अरे कैसे जरुरत नही है

" भाभी जी कितने दिनो बाद ह्मारे यहा आई है , खातिरदारि तो बनती है ना " , जन्गीलाल ने रज्जो की ओर इशारा करके कहा ।


फिर वो गैलरी मे मुह देके जोर से राहुल को आवाज दिया ।

वही राहुल ने जैसे ही अपने बाप की आवाज सुनी , मा बेटे ठिठक गये और दोनो झट से अलग हो गये ।

शालिनी हड़बड़ा कर - अह बेटा जा जल्दी से देख क्या बुला रहे है तेरे पापा

राहुल ने अपना लण्ड पैन्त मे भरा और उसको सेट करते हुए अपने शर्ट के बाजुओ से अपने चेहरे का पसिना पोछते हुए तेज कदमो से दुकान मे आ गया ।


जंगीलाल - बेटा जरा कल्लु के यहा दो थमसअप लेके आ तो


राहुल ने फिर अपनी बड़ी मा और उनकी दीदी को देखा तो झट से उन्के पैर छू कर नमस्ते किया और निकल गया


इधर जन्गीलाल जब तक दोनो के हाल चाल और तैयारियो के बारे मे बाते कर रहा था कि तभी राहुल ठंडा लेके आ भी गया ।

इधर राहुल ने दोनो को ठन्डा दिया और भितर जाने को हुआ कि जन्गीलाल ने राहुल को टोका

जन्गीलाल अपनी आंखे नचा कर हसने का दिखावा करता हुआ - अह बेटा वो तेरी मा को बता दे कि बड़ी मा और उनकी दिदी आई है


राहुल समझ गया और फटाक से किचन मे भागा और हाफते हुए - मम्मी मम्मी , वो बड़ी मम्मी और उनकी दीदी आई है , आप ये कपडा बदल लो जल्दी से ।


घर पर मेहमान आने का सुनते ही शालिनी की भी हालत खराब हुई वो तेजी से भागती हुई कमरे मे गयी और जल्दी से फुल नाइटी डाल कर वापस किचन मे आ गयी ।


इधर जब राहुल वापस कर गैलरी के पास से ही अपने पापा को इशारा किया कि काम हो गया तो जन्गीलाल ने चैन की सास ली और हस कर - अरे राहुल बेटा, अपनी बड़ी मम्मी को घर मे लेके जाओ , जाईये भाभी जी


फिर दोनो बहने बारी बारी से उठी और भितर जाने लगी ,

16-16-35-859-1000


उसी समय जन्गीलाल की निगाहे रज्जो के मादक भारी भरकम कूल्हो पर गयी और अनायास उसके मुह से ये शब्द फुट पड़े - उफ्फ़ क्या गाड़ है यार ।
flirting-staring
जिसे रज्जो की तेज कानो से सुन ही लिया और फौरन गरदन घुमा के जन्गीलाल की ओर मुह करके देखा तो जंगीलाल की फट गयी और अगले ही पल रज्जो मुस्कुराते हुए भितर चली गयी और जंगीलाल ने चैन की सास ली ।
इधर महिलाए भीतर गयी और राहुल चुपचाप बाहर आ गया । दुकान मे आते ही उसका सामना अपने पापा से हुआ , वो अभी भी थोडा शर्मा रहा था ।
वही जन्गीलाल ने अपने भोले बेटे से कन्फ़र्म करने के लिए पुछा- बेटा वो तेरी मा ने कपडे बदल लिए ना

राहुल नजरे नीची करके हल्का मुस्कुरा कर - जी पापा !

जन्गीलाल अपने बेटे की ऐसी प्रतिक्रिया से थोडा असहज हुआ और उसे लगा कि शायद उसका बेटा इतना भी नादान नही है । सब समझता है ।


जन्गीलाल - अच्छा सुन , ये बात किसी से कहना मत कि तेरी मा मे ऐसे कपडे पहने थे

राहुल हस कर - नही पापा क्या आप भी ,

फिर थोडी देर की चुप्पी रही और राहुल को पता नही क्या सुझा उसने पापा ऐसा सवाल किया कि जन्गीलाल की घिग्गी बध गयी ।

राहुल - पापा आपने इतना छोटा क्यू लिया मम्मी के लिए , ऐसा तो वो फिल्मो मे हीरोइन लोग पहनती है ना


जन्गीलाल ने कुछ देर चुप रहा और फिर हस कर - तेरी मा कौन सी हीरोइन से कम है हाअहहहा

राहुल भी शर्माकर मुस्कुरादिया और पुछ पड़ा - तो क्या आप मम्मी के और भी ऐसे ड्रेस लाते हो

जन्गीलाल - अह नही बेटा ये बस पहली बार था

राहुल - तो और अच्छे अच्छे कपडे लाओ ना मम्मी के लिए, देखो ना मम्मी घर मे कितना काम करती है ना कही घुमने जाती है बस ऐसे ही घर मे पड़ी रहती है ।


जन्गीलाल - हमम बेटा बात तो तेरी सही है लेकिन बेटा हमेशा तो तेरी मा को ऐसे कपडे नही ना पहना सकता ।

राहुल - क्यू ?
जन्गीलाल - अरे बेटा देखा ना आज कैसे मेहमान आ गये थे और फिर निशा भी तो रहती है ना ।

राहुल - तो क्यू ना रात मे मम्मी को पहनाया जाये , तब कोई नही होगा ना

जंगीलाल के जहन मे राहुल की बाते सुनकर एक अलग ही फैंटसी ने जनम ले लिया था , वो एक गहरी सोच मे घूम सा गया कि

क्या होगा जब उसकी बीवी अपने ही बेटे के सामने ब्रा पैंटी मे घुमेगी ?
और कितना मजा आयेगा जब मै मेरे बेटे के सामने ही उसकी मा को छेड़ने मे ?
और कही उसके सामने खड़ा करके चोद दू तो ?

आह्ह , ये सब सोच कर ही जन्गीलाल का लण्ड फौलादी हो गया था ।
इधर राहुल भी अपने बाप से ऐसे बाते करके मन ही मन कोरी कलपनाये बुन चुका था और उसका लण्ड सर उठाने लगा था ।


इधर थोडी देर बाद ही रागिनी और रज्जो दुकान मे वापस आ गयी ।

राहुल को अपने लण्ड का तनाव बर्दाश्त ना हुआ और वो उसको सेट करने अंदर चला गया ।

रागिनी - अच्छा देवर जी हम चलते नमस्कार ।

जंगीलाल को मजबुरन अपने जगह से उठना पड़ गया और हाथ जोड़ उन्हे विदा किया ।

पहले रागिनी जो दुकान से उतर चुकी थी और फिर रज्जो को नमस्ते करते हुए चोर नजरो से अपने चढ़ढे मे तने हुए लण्ड को निहारा कि अभी भी उभरा हुआ तो नही ना दिख रहा था ।

वही रज्जो ने जंगीलाल की हरकतो को देखा तो वो मुस्कुरा दी और विदा लेके निकल गयी ये सोचते हुए कि जन्गीलाल भी उसकी चुतडो का दीवाना हो गया और अगर किस्मत साथ दे गयी तो उसको अपनी बुर मे लेके मौका वो नही चूकेगी ।
वही जन्गीलाल थोडा शर्मीन्दा होकर अपना लण्ड सेट करके बैठ गया ।


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चौराहा वाले घर पर किचन का सारा काम निपटा कर सोनल और निशा घर के बाकी कमरो को सेट करने मे लगी थी


निशा गेस्ट रूम के बेड पर बिस्तर लगाने के बाद तकिया रखते हुए सोनल से बोली - दीदी क्यू ना कल जीजू को भी बुला ले ।


सोनल जो आलमारी के ड्रा साफ कर रही थी वो अचरज भरी नजरो से निशा को देखकर - तु पागल है क्या निशा , वो कैसे आयेगा ।


निशा - अरे दीदी कल पूजा होनी है तो जैसे बाकी मेहमान आयेंगे वो भी आ जायेंगे ।


सोनल निशा की बातो को सोचने लगती है और उसकी भी बेचैनी बढने लगती है क्योकि उसे अमन से मिले कितना समय हो गया था और फिर शादी से पहले मिलने का मौका कहा मिलता ।


सोनल बेचैन होकर निशा - लेकिन ये होगा कैसे , मतलब कौन बुलायेगा ।

निशा हस के - अरे राज है ना , वो बड़े पापा से बात कर लेगा

सोनल कुछ सोच कर - वो कुछ गलत ना सोचे

निशा सोनल की खिचाई करते हुए - ओहो देखो तो नवाबजादी के नखरे , सुबह शाम जिसका लण्ड लिये बिना चैन नही होता उससे कहने मे शर्म आ रही है


सोनल हस कर - अरे वो बात नही है , तु समझती नही है राज बहुत दुष्ट है मुझे बहुत तंग करता है अमन के नाम पर

निशा - ठिक है तो मै बोल दूँगी बस तुम जीजू को फोन करो ना
सोनल - अभी तो वो नहाने गया है ना , बोला है उसने

निशा भौहे चढा कर - आप कर रही हो या मै करु


इधर सोनल फोन लगाने को हो रही थी उधर अमन के कमरे मे उसकी मा उसके लिए कपडे निकाल रही थी

इसि दौरान अमन के मोबाइल की रिंग तेजी से बजनी शुरु हो गयी ,

अमन बाथरूम से फोन की रिंग सुन कर अपनी मा को आवाज देता है - मम्मी देखना जरा किसका फोन है

ममता बेड पर रखे हुए फोन पर की स्क्रिन को देखते हुए फोन हाथ मे ले लेती है और मोबाइल स्क्रीन पर my jaan नाम से काल आता देख मुस्कुरा देती है ।


इतने मे अमन की आवाज फिर से आती है - किसका है मा

ममता हस कर - ये कोई MY JAAN करके है , कौन है ये

अपनी मा के शब्द सुनते ही अमन हड़बड़ा कर - उठाना मत मम्मी मै आ रहा हू

और फिर अमन तेजी से अपने शरिर पर पानी डालते हुए फटाफट तौलिया लपेट कर भिगे जिस्म के साथ ही कमरे के बाहर आता है

लेकिन तबतक ममता फोन उठा चुकी थी और वही सोनल बिना कोई हैलो हाय किये सिधा फोन पर चुम्मीया देना शुरु कर देती और धीरे से बोलती है , आई मिस यू जान


अपनी बहु का रोमांटिक मूड समझ कर ममता की हसी छुट जाती है और वो अपने हसी को होठो से दबाते हुए फोन को अमन के हाथ थमाती है

अमन इशारे से अपनी मा को देख कर पुछता है कि क्या बोली वो ?
तो ममता मुस्कुरा कर अमन के गाल अपने पास करते हुए 7 8 चुम्मीये देते हुए धीरे से उसके कान मे बोली - आई मिस यू जान


फिर खिलखिलाहत भरी मुस्कान के साथ कमरे के बाहर चली गयी और अमन शर्म से भी भीग गया ।

फिर वो सोनल से बात करता है तो पता चलता है कि कल उसे आना है तो वो भी एक्साईटेड हो जाता है ।


फिर वो फोन काट कर वापस बाथरूम मे नहाने पहुच जाता है

नहाने के बाद अमन को बार बार अपनी मा की हरकते याद आने लगती है कि उसकी मा भी अब उसके मजे लेने लगी ।

इधर कुछ समय बाद राज जब चंदू के घर मे सारे बन्दोबसत कर लेता है तो अपने घर आ जाता है , उसे सोनल इंसिस्ट करती है वो पापा से बात करके कल के पूजा के लिए अमन और उसके परिवार वालो को बुलाये ।

राज इसके लिए मना नही करता है और वो अपने पापा से फोन पर बात करता है । तो रंगीलाल की बाहे भी खिल जाती है और उसे ममता से मिलने का एक बहाना भी मिल जाता है ।


जारी रहेगी ।
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