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Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

Ben Tennyson

Its Hero Time !!
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जबरदस्त तूफानी संभोग का सुंदर चित्रण कर डाला भाई गज़ब लिख रहे हो...अच्छे अच्छों का पानी निकालने में माहिर है शीला भाभी
 

vakharia

Supreme
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बहुत ही सुंदर लाजवाब और हसी ठिठोली भरा शानदार अपडेट है भाई मजा आ गया
घर पर रुकी शीला की जवानी का रस शायद उसका दामाद संजय चुसने की संभावना लगती हैं
वही सफर में क्या क्या धूम मचती हैं देखते हैं आगे
Thanks Napster bhai ♥️
 

vakharia

Supreme
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भाई वखारिया जी आपकी लिखनी ग़ज़ब है. हमे तो अपनी प्रतिक्रिया लिखने में भी सोच के लिखना पड़ता है और दो चार शब्दों में ही हमारा ज्ञान समाप्त हो जाता है। पर आप मानव मन की दुविधा परेशानियाँ मज़बूती आदि बड़े ही विस्तार से लिखते हैं. हाँ कुछ अतिशयोक्ति होती है जिसकी स्वतंत्रता लेखक लेता है। पर आप अद्भुत लिखते हैं। लगे राहिया । फोरम के बहुत अच्छे लेखकों में आपका नाम है।
साथ ही आप नियमित रूप से कहानी बढ़ाते रहते हैं। कुछ लेखकों की तरह नाराज़ नहीं होते कि प्रतिक्रिया नहीं है तो नहीं लिखूँगा।
👌👌
Bittoo जी.. इस सराहना के लिये आप का बहोत बहोत शुक्रिया..

भाई.. आप सब पाठक और वाचक मेरे लिए मित्र समान है.. ये सच है की अच्छा विवेचन और प्रतिक्रिया ही लेखक का प्रेरणा बल होता है.. पर फिर भी.. गिने चुने लोगों की प्रतिक्रिया के बीच भी, मैं लिखता रहा हूँ.. और आगे भी ऐसे ही लिखते रहने की इच्छा है..

हालांकि पाठकों की टिप्पणियाँ कम आ रही हैं, फिर भी मैं लिखना जारी रखूंगा और इसे बेहतर बनाने का प्रयास करूंगा। इस कमेंट्स की कमी को मैं एक प्रेरणा के रूप में लूंगा और कहानी को और भी उत्कृष्ट बनाने के लिए खुद को प्रेरित करूंगा। वाचकों की मौन प्रतिक्रिया भी मेरे लिए महत्वपूर्ण है, और मैं इसे सकारात्मक रूप से लेकर अपनी लेखनी में सुधार लाने का प्रयास करूंगा।

आप यूं ही हमारा होसला बढ़ाते रहना..

कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा ♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️
 
Last edited:

Amitjadhav12

New Member
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Bittoo जी.. इस सराहना के लिये आप का बहोत बहोत शुक्रिया..

भाई.. आप सब पाठक और वाचक मेरे लिए मित्र समान है.. ये सच है की अच्छा विवेचन और प्रतिक्रिया ही लेखक का प्रेरणा बल होता है.. पर फिर भी.. गिने चुने लोगों की प्रतिक्रिया के बीच भी, मैं लिखता रहा हूँ.. और आगे भी ऐसे ही लिखते रहने की इच्छा है..

हालांकि पाठकों की टिप्पणियाँ कम आ रही हैं, फिर भी मैं लिखना जारी रखूंगा और इसे बेहतर बनाने का प्रयास करूंगा। इस कमेंट्स की कमी को मैं एक प्रेरणा के रूप में लूंगा और कहानी को और भी उत्कृष्ट बनाने के लिए खुद को प्रेरित करूंगा। वाचकों की मौन प्रतिक्रिया भी मेरे लिए महत्वपूर्ण है, और मैं इसे सकारात्मक रूप से लेकर अपनी लेखनी में सुधार लाने का प्रयास करूंगा।

आप यूं ही हमारा होसला बढ़ाते रहना..

कमेंट्स का इंतज़ार रहेगा ♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️
Bhai badhiya likh rahe , comment kam aaye iska matlab ye nahi ki accha nahi lag raha sabko
 

Ajju Landwalia

Well-Known Member
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आखिर थककर जॉन ने "प्रोजेक्ट चूत सकिंग" अधूरा छोड़ दिया और खड़ा हो गया..

चार्ली को एक प्यारी किस देते हुए वह बोला "Honey, she is a real bitch..very hot lady..Let's go to room..I can't bear anymore..Sanjay, do you want to join us? Let's enjoy four-some! Charlie, I am damn sure you will have a great time with Shila too..just try her once baby.. she is amazing!!"

चार्ली जबरदस्त उत्तेजित हो गई "Ohh really..!! Hey Sanjay, lets go and join them.."

कार्यक्रम में मध्यांतर की घोषणा होते ही शीला ने अपनी चड्डी ऊपर की उसकी क्लिप बंद कर दी.. फिर वह जॉन का हाथ पकड़कर चलने लगी.. शीला इतनी उतावली होकर चल रही थी जैसे जॉन के लंड को जल्दी से जल्दी अपनी चूत में गटक लेना चाहती हो.. उसका दामाद संजय और चार्ली पीछे पीछे आ रहे थे..

संजय: "Charlie..just look at her huge hips..It is my wish to bang her with John"

"Ohhh...you mean in both the holes? चार्ली ने हँसते हुए कहा

"Yesss...!!" संजय ने जवाब दिया

"I will fuck her ass the whole night, Charlie!!" शीला के कूल्हों पर थप्पड़ लगाते हुए जॉन ने संजय से कहा

शीला को उनकी बातें ज्यादा समझ नही आ रही थी.. और उससे समझने में दिलचस्पी भी नही थी.. बातें करते हुए.. सिगार फूंकते हुए.. चारों लोग, जॉन और चार्ली की होटल पर पहुंचे.. संजय और शीला की होटल से थोड़ी दूरी पर थी इनकी होटल.. चारों कमरे में गए और दरवाजा अंदर से लोक कर लिया.. दरवाजा बंद होते ही सब की वासना के दरवाजे खुल गए.. चार्ली संजय से लिपट गई और संजय ने बिना वक्त गँवाए उसे तुरंत ही नंगा कर दिया.. शीला चार्ली के स्लिम और दाग रहित गोरे जिस्म को देखती ही रही.. बी.पी. में गोरी लड़कियों की जिस तरह की हरकतें उसने देखी थी वह सब उसकी आँखों के आगे तैरने लगी.. ब्लू फिल्मों में लेस्बियन सीन में चूत चटाई के द्रश्य देखकर अक्सर शीला का मन करता था की वह भी किसी गोरी रांड की चूत को चटकारे लेकर चाटे और अपनी भी उससे चटवाएं.. आज आखिर उस सपने को साकार करने का मौका मिलने वाला था.. शीला ने संजय के कान में कुछ कहा..

"अभी नही मम्मी जी, पहले मुझे ईसे मन भर कर चोद लेने दीजिए.. निवाला मुंह तक आ चुका है अब मैं और इंतज़ार करना नही चाहता.. एक बार तसल्ली से चोद लूँ फिर आप जो चाहो कर लेना इसके साथ" संजय ने कहा

हिन्दी में हो रही बातचीत में जॉन और चार्ली को क्या पता चलता ??? लेकिन तब तक चार्ली ने जॉन की चड्डी उतार दी थी.. जॉन की दोनों जांघों के बीच लटक रहे खूबसूरत फिरंगी गोरे लंड को देखकर शीला जैसे होश ही खो बैठी.. उसके लंड को पहली नजर में देखते ही उसे प्यार हो गया.. !! संजय को छोड़कर वह जॉन की तरफ मुड़ी.. वो जॉन के अर्ध-जागृत लंड को पकड़े इससे पहले चार्ली ने उसे पकड़ लिया.. और मुठ्ठी में पकड़कर हिलाने लगी..

जॉन: "Suck it baby...suck it hard like its your dad's cock.." यह सुनते ही चार्ली नीचे झुक गई और जॉन की आँखों में देखते हुए उसका लंड चूसने लगी.. शीला और संजय आश्चर्यचकित होकर इन दोनों को देखते रहे.. चार्ली ने जॉन के हाथ से सिगार लेकर एक लंबा कश लिया.. फिर बिना धुआँ बाहर निकाले वह लंड चूसने लगी.. थोड़ी ही देर में चार्ली के मुंह से अंदर बाहर निकल रहे लंड के साथ साथ धुआँ भी निकलने लगा.. बड़ा ही अनोखा द्रश्य था.. !!

sd

चार्ली और जॉन की इन कामुक हरकतों को देखकर शीला अपने आपे से बाहर हो रही थी.. वह चार्ली की बगल में बैठ गई और जॉन के अंडकोशों को सहलाने लगी.. गोरे गोरे सुंदर अंडों से खेलते हुए शीला ने चार्ली की ओर देखा.. दोनों की नजरें एक हुई.. चार्ली को शीला की आँखों में एक अजीब सा आमंत्रण नजर आया.. और चुपचाप उस आमंत्रण का स्वीकार करे हुए वह शीला के सुंदर गालों को सहलाने लगी.. उसके बालों में उँगलियाँ फेरते हुए वह जॉन के लंड को चूसती रही.. चार्ली के एक हाथ में सिगार थी और दूसरे हाथ से वह शीला के अंगों को सहला रही थी.. शीला का बहोत मन कर रहा था जॉन का लंड चूसने को.. पर ये चार्ली छोड़े तब न!!

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शीला की इस तकलीफ को संजय समझ गया.. वह धीरे से चलकर चार्ली के पास आया और अपने लंड से चार्ली का गाल सहलाने लगा.. वैसे संजय का लंड काला तो बिल्कुल नही था.. पर जॉन के लंड के गोरेपन के आगे गेहुआँ नजर आ रहा था.. चार्ली ने तुरंत जॉन का गीला लंड छोड़ दिया और संजय का लंड चूसने लगी.. जॉन के तंदूरस्त गोरे लंड को शीला ने हाथ में लेकर बड़े ध्यान से देखा.. उसके सख्ती की जांच की और फिर उस लोड़े को मुंह में लेकर चूसने लगी.. जब चार्ली चूस रही थी तब जॉन चुपचाप खड़ा था पर शीला ने जैसे ही मुंह में लिया उसकी सिसकारी निकल गई..

"Ohhhh yess..Ahhh..nice..Suck it baby.." जॉन सिसकने लगा.. शीला ने पहले तो आधा ही लंड चूसकर उसे थोड़ा तड़पाया.. फिर धीरे से उसने बाकी आधा लंड मुंह में लेते हुए उसके आँड दबा दिए.. शीला ने अभी अपने कपड़े उतारे नही थे.. लेकिन टाइट कपड़ों से उसके जिस्म का शानदार भूगोल आसानी से नजर आ रहा था.. टॉप से आधे बाहर लटक रहे उसके अद्भुत स्तन.. जॉन और चार्ली को पागल कर रहे थे.. चार्ली संजय के लंड को मस्ती से चूस रही थी..

शीला ने जॉन के लंड को पूरा चूसकर लाल कर दिया था.. आखिर उसने अपने मुंह की कैद से उस लंड को मुक्त किया.. नोक से लेकर मूल तक पूरा लंड शीला की लार से भीग चुका था.. शीला अब खड़ी होकर खुद ही अपने कपड़े उतारने लगी.. और मादरजात नंगी होकर फर्श पर लेट गई अपनी जांघों को चौड़ी करते हुए.. कमर को उठाकर वह अपने भोसड़े को जॉन के सामने प्रस्तुत कर रही थी..

शीला: "संजय बेटा.. मम्मी जी की चूत कौन पहले चाटेगा? मेरा दामाद या जॉन?" अपनी चिपचिपी चूत के दोनों होंठों को उंगलियों से अलग करते हुए अंदर के गुलाबी हिस्से को दिखाते हुए वह दोनों मर्दों को ललचाने लगी.. अपनी जिस्म की नुमाइश कैसे करनी वह शीला से बेहतर कोई नही जानता था.. जॉन यह देखते ही चीते की तरह शीला के भोसड़े पर झपट पड़ा.. बरसों से किसी अंग्रेज से अपनी चूत चटवाने की ख्वाहिश आज पूरी हो रही थी.. जॉन को कानों से पकड़कर शीला ने खींचा और उसके मुंह को अपनी चुत के एकदम करीब ले आई..


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जॉन भी कारीगर था.. शीला को खुश करने में उसने कोई कसर नही छोड़ी.. जितनी अंदर घुस सकती थी उतनी अंदर जीभ डालकर उसने शीला की चूत को कुरेद दिया.. कभी वह अपनी हथेली में शीला के सम्पूर्ण भोसड़े को पकड़कर दबाता तो कभी वह उसकी क्लिटोरिस को जीभ और होंठों के बीच दबाकर चूसता.. तरह तरह की आवाज़ें निकालते हुए वह शीला की चिकनी चूत के मजे ले रहा था.. शीला अपनी कमर उठा उठा कर जॉन के मुंह से अपनी चूत रगड़ते जा रही थी.. इतने भारी शरीर वाली शीला की चपलता देखने लायक थी.. बेहद उत्तेजित होकर शीला ने जॉन का हाथ खींचकर उसे अपनी ओर ले लिया.. असंतुलित होकर जॉन शीला के नरम तकिये जैसे स्तनों के ऊपर गिर पड़ा.. शीला ने जॉन को अपनी बाहों में भरकर चूम लिया.. जॉन भी भूखे भेड़िये की तरह शीला पर टूट पड़ा..

शीला ने अपना हाथ नीचे डाला और जॉन का लंड पकड़कर अपनी फड़क रही चुत के सेंटर पर लगा दिया.. जॉन धक्का दे उससे पहले शीला ने ही नीचे से कमर उचक कर जॉन के लंड को अपनी चुत की गहरी गुफा में लापता कर दिया.. और फिर जॉन को अपनी बाहों में भरते हुए उसने पलटी मारी.. अब जॉन नीचे फर्श पर लेट गया और शीला उसपर सवार हो गई.. जॉन पर सवार होकर शीला ऐसे चोदने लगी.. जैसे अंग्रेजों की गुलामी का बदला ले रही हो..

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"Ohh..ohhh..stop it you bitch!!" जॉन चिल्लाने लगा.. पर शीला ने शताब्दी एक्स्प्रेस जैसी स्पीड पकड़ ली थी.. चोदते वक्त शीला खूंखार शेरनी का रूप धारण कर लेती थी.. अपना ऑर्गजम पाने के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती थी.. जॉन के चिल्लाने पर ध्यान न देते हुए.. शीला लगातार २० से २५ मिनट तक फूल स्पीड में कूदती ही गई.. जॉन के लंड ने तो कब से इस्तीफा दे दिया था.. क्योंकि जब शीला ठंडी होकर जॉन पर से उतरी तब उसकी गहरी गुफा से जॉन का लंड मरी हुई छिपकली की तरह बाहर निकला.. नीचे उतरते ही शीला जॉन के बगल में लेटकर गहरी सांसें भरते हुए अपनी थकान उतार रही थी.. उसके हांफने से ऊपर नीचे होती हुई उसकी छातियों को देखकर स्तब्ध रह गया जॉन.. उसका दिल तो कर रहा था की वह उसकी चूचियों को मसलें.. पर थोड़ी देर पहले ही शीला ने उसे जिस तरह रीमाँड़ पर लिया था वह देखकर उसे फिर से उत्तेजित करने की हिम्मत नही हो रही थी उसकी..

यह द्रश्य देखकर मन ही मन मुस्कुरा रहा था संजय.. उसे अपनी सेक्सी सास पर गर्व महसूस हो रहा था.. चार्ली को काँखों के नीचे से उठाते हुए संजय ने उसे उठा लिया.. और पूरे कमरे में घूमते हुए उसे किस करने लगा.. जॉन के शॉर्ट्स की जेब से शीला ने किंग एडवर्ड सिगार निकाली और उसे जलाकर एक के ऊपर एक दम लगाने लगी.. नशा सा होने लगा उसे.. अलग ही दुनिया में खो गई वो.. उसकी आँखें बंद हो गई.. उसके हाथ से जब जॉन ने सिगार खींच ली तब उसकी आँखें खुली.. संजय की कमर के इर्दगिर्द अपने पैरों की कुंडली लगाए हुए चार्ली छोटे बच्चे की तरह लटकी हुई थी.. उसकी जांघों के ठीक नीचे.. संजय का आठ इंच लंबा विकराल लंड.. चूत की गंध सूंघते हुए छेद ढूंढ रहा था.. चार्ली के स्तन, संजय की मर्दाना छाती से दबकर समोसे से कचौड़ी बन गए थे..

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संजय के गले में बाहें डालकर चार्ली ऐसे झूल रही थी जैसे डाली पर आम लटक रहा हो.. एक दुसरें को कामुक चुम्बन करते हुए वह अलग अलग अंगों को मसल रहे थे.. चार्ली के सुन्दर गोरे कूल्हें संजय के लंड पर ठोकर मार मारकर यह कह रहे थे की जल्दी करो.. अब और सहा नही जाता!!

संजय ने चार्ली को बिस्तर पर पटक दिया.. डनलॉप के नरम गद्दे पर पटकते ही चार्ली एक फिट जितना ऊपर उछली और साथ में उसके स्तन भी!! नजदीक से देख रही शीला ने जॉन को इशारा किया "Let us join them"

"Not now Shila..I will have to take some rest!!"
जॉन ने अपनी असमर्थता जाहीर की

शीला अंगड़ाई लेते हुए खड़ी हुई.. फर्श पर लेते हुए जॉन ने शीला के भरे भरे कटहल जैसे स्तनों को देखा और देखता ही रह गया.. शीला के अद्भुत संगेमरमरी कूल्हें.. स्तम्भ जैसी जांघें.. चरबीदार लचकती कमर और चिड़िया घोंसला बना सके वैसी गहरी नाभि.. शीला खतरनाक मूड में लग रही थी.. दोनों जंघाए चौड़ी कर वो जॉन की चेहरे पर बैठ गई..अपनी चूत के होंठों को अलग करते हुए उसने जॉन के होंठों पर उसे लगा दिया.. चाटने के अलावा जॉन के पास कोई चारा नही था.. दो तीन मिनट तक चूत चटवाने के बाद शीला ने एक नजर जॉन के लंड पर डाली.. पोस्टमॉर्टम रूम में पड़ी लावारिस लाश की तरह जॉन का लंड पड़ा हुआ था..

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शीला का मुंह बिगड़ गया.. वह उठकर बेड पर चली गई.. जहां चार्ली और संजय दोनों एक दूसरे के संग खेल रहे थे.. चार्ली संजय के लंड को हिला रही थी और संजय चार्ली की संकरी चूत में उंगली डालते हुए उसके मम्मे चूस रहा था.. चूत में उंगली डालकर उसे चौड़ी कर रहा था संजय.. ताकि उसके तगड़े लंड को वो झेल सके.. संकरी चुत में दो उंगली जाते ही चार्ली दर्द से सिसक उठी..

शीला ने पहले दोनों का दूर से ही निरीक्षण किया.. वह जॉइन होना चाहती थी पर मौका देखकर.. धीरे से वह चार्ली की बगल में लेट गई.. और चार्ली के मुंह को अपनी ओर खींचकर और गोरे फिरंगी होंठों पर अपने देसी होंठ लगा दिए.. कामुक चुंबन करते हुए शीला चार्ली के जीभ से अपनी जीभ लड़ा रही थी.. कभी चार्ली की जीभ को लंड की तरह चूस लेती.. तो कभी उसके मुंह के भीतर तक अपनी जीभ घुसा देती.. दोनों अब बेहद गरम हो गई थी.. चार्ली ने अपनी हथेली में शीला के एक स्तन को पकड़ने की नाकाम कोशिश करके देखा.. पर पहाड़ जैसी चुची, हथेली में भला कैसे समाती.. !!! शीला के नरम गुदगुदे मांस के गोलों चार्ली बड़ी ही मस्ती से दबाते हुए दूसरे हाथ से संजय के लंड के साथ खेल रही थी..

"Ohh Shila...suck my cunt, please!!" चार्ली ने शीला से कहा

शीला ने संजय का हाथ चार्ली की चिकनी बालरहित बुर से हटा दिया.. और संजय की उंगली पर लगे चार्ली के चुत के गाढ़े अमृतरस को चाटकर अपने दामाद की उंगलियों को संपूर्णतः सेनीटाइज़ कर दिया.. थोड़ा सा ऊपर उठकर उसने अपने दामाद को होंठों को चूम लिया.. एक गजब की कशिश थी शीला के अंदाज में.. शीला के चुंबन से संजय जबरदस्त गरम हो गया.. और आक्रामकता से चार्ली के स्तनों को आटे की तरह गूँदने लगा..

शीला ने चार्ली की दोनों जांघों को जरूरत के हिसाब से चौड़ा किया.. और इसकी गोरी जांघों को चाटने लगी.. संजय का सख्त लंड देखकर उस खूँटे को अपनी चुत में महसूस करने की अदम्य इच्छा हो रही थी शीला के मन में.. पर संजय के लंड के मजे तो वो जब चाहे ले सकती थी.. उसने चार्ली की चुत का अब करीब से निरीक्षण किया.. उसकी गुलाबी क्लिटोरिस को अपनी उंगली से कुरेदा.. होंठों को अलग किया.. और फिर चार्ली की गांड के नीचे तकिया सटा दिया.. चार्ली की चूत वडापाँव की तरह उभर कर बाहर आ गई..

शीला ने पहले तो चार्ली की पूरी चूत को अपने मुंह में भरकर देखा.. चार्ली की आँखें बंद हो गई और उसकी कमर ऊपर उठ गई..

"Ohhh my...you are sucking so good..suck my cunt very hard, Shila..Ohh yes..ohh no..yeah..right there..yes yess..aaahhh!!" चार्ली की इन आवाजों से पूरा कमरा गूंज उठा.. कमर को उठाकर शीला डोगी स्टाइल में सेट होकर चार्ली की चूत चाटने लगी..

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जब वह चाटने में व्यस्त थी तब संजय उठकर शीला के पीछे से आया और उसके गोलमटोल चूतड़ों को चौड़ा कर शीला की गांड और चूत के छेद का निरीक्षण करने लगा.. अपने चूतड़ों पर मर्दाना हाथ का स्पर्श पाते ही शीला की गांड थिरकने लगी.. गोल गोल क्लॉकवाइज़ घुमाने लगी.. अपनी सास के बादामी रंग के गांड के छेद को देखकर संजय को वैशाली के छेद की याद आ गई.. माँ बेटी दोनों के गांड के छेद बिल्कुल एक जैसे ही थे..

वैशाली के विचारों को अपने दिमाग से निकालकर संजय ने शीला की गांड के उस टाइट छेद में.. अपनी गीली उंगली डालने का प्रयास किया.. बेहद टाइट था वो होल.. !! और क्यों न हो!! मदन के जाने के बाद किसी ने शीला के इस छेद को छेड़ा नही था.. !! अपनी गांड में घुसी दामदजी की उंगली आनंद दे रही थी शीला को.. चार्ली से किस कर रही शीला ने उसे मुक्त किया और बोली

"संजय बेटा.. उंगली छोड़.. अंगूठा डाल.. बड़ी तेज खुजली हो रही है अंदर" शीला की इस बात से उत्साहित होकर संजय ने अंगूठा अंदर डाल दिया.. अंगूठा अंदर घुसते ही शीला बेकाबू हो गई और उसने चार्ली की चूत में एक साथ तीन उँगलियाँ डाल दी..

"Ohh my god...it is paining..please remove the fingers, Shila!!" चार्ली की फट गई.. शीला ने उसकी चूत से एक उंगली निकाली और उसकी गांड में डाल दी.. चार्ली की चुत चाटते हुए शीला उसकी नाभि तक पहुँच गई.. और उसके सपाट पेट के गोरे हिस्सों को चाटने लगी.. वह और ऊपर की तरफ आई.. अब दोनों के स्तन एक के ऊपर एक हो गए थे.. निप्पलों के बीच छेड़खानियाँ हो रही थी.. शीला की वासना ज्वार की लहरों की तरह उछलने लगी.. शीला की भरावदार छाती के तले चार्ली के छोटे स्तन दबकर रह गए.. इतना अद्भुत सीन था की देखते ही किसी का भी पानी छूट जाए..

शीला के तंदूरस्त स्तनों का सौन्दर्य.. और चार्ली के जवान सख्त उरोज जब एक हो जाएँ.. तो कितना अनोखा द्रश्य होगा!! संजय ने अब दूसरे हाथ का अंगूठा भी शीला की गांड में डाल दिया था.. दर्द और आनंद के मिश्रण से शीला की गांड गोल गोल घूम रही थी.. शीला फिर से नीचे की ओर आई और अपनी जीभ से चार्ली की नाजुक चुत को टटोलने लगी.. चार्ली की चुत काफी तंग थी.. ज्यादा इस्तेमाल नही हुई थी शायद.. हाथ ऊपर ले जाकर शीला उसके सख्त उरोजों को मसल रही थी.. चार्ली ने भी उत्तेजना से शीला के हाथों को पकड़कर अपने स्तनों आर दबाए रखा था.. संजय अपनी सासुमा के पीछे के छेद को कुरेदने में व्यस्त था.. अपनी सास के इस खास अंग को बड़ी उत्सुकता और उत्तेजना से देखते हुए संजय का लंड झटके कहा रहा था.. इतना सख्त हो चुका था की संजय से रहा नही जा रहा था..

दोनों अंगूठे बाहर निकालकर संजय ने अपने सुपाड़े पर थोड़ा सा थूक लगाया और टोपे को शीला की गांड के छेद पर टीका दिया.. थोड़ी देर तक सुपाड़े से छेद को रगड़ने के बाद उसने बिल्कुल मध्य में रखकर दबाया..

शीला: "आह्ह बेटा.. नही जाएगा अंदर.. !!" संजय ने फिर से थोड़ा सा दबाव दिया.. बड़ी मुसीबत से केवल उसका आधा सुपाड़ा छेद के अंदर जा पाया.. शीला का पूरा बदन कांपने लगा "ओह बेटा.. निकाल दे बाहर.. और आगे डाल दे.. ज्यादा मज़ा आएगा" शीला कराहने लगी

संजय ने एक न सुनी और थोड़ा सा और दबाया.. इस बार उसका टमाटर जैसा सुपाड़ा टाइट छेद के अंदर चला गया

3s
शीला: "संजु.. आह्ह.. मर गई बेटा.. बहोत दर्द हो रहा है मुझे.. प्लीज बाहर निकाल ले"

संजय: "ओहह मम्मी जी.. कितनी टाइट और मस्त है आपकी गांड.. मेरे लंड पर जबरदस्त दबाव बना रहा है आपका छेद.. बहोत मज़ा आ रहा है.. प्लीज एक बार मुझे आपकी गांड मार लेने दीजिए.. जब जब आपके गदराए जिस्म की याद आती थी तब तब मैं वैशाली की गांड मारकर अपनी इच्छा को शांत कर लेता था.. प्लीज आज मना मत करना.. आपकी चूत से ज्यादा तो गांड में गर्मी है मम्मी जी.. ओहहह आह्ह.. " काफी दबाने के बाद मुश्किल से आधा ही लंड घुसा पाया अंदर

शीला को अब जबरदस्त दर्द हो रहा था.. ए.सी. कमरे में भी उसके पसीने छूट रहे थे..उसके दोनों लटकते हुए स्तन चार्ली के घुटनों से टकरा रहे थे.. शीला ने चार्ली की चुत चाटना छोड़कर अपनी गांद के दर्द पर ही ध्यान केंद्रित किया.. चार्ली शीला के नीचे से निकल कर बाहर आई और सीधे जॉन के पास पहुँच गई.. जॉन तो केवल दर्शक बनकर यह सारा खेल देख रहा था.. संजय और शीला की इस असाधारण मुहिम को बड़ी ही दिलचस्पी से देख रहा था.. धीरे धीरे उसका लंड हरकत करने लगा.. आधे-सख्त हुए उस लंड को चार्ली ने पकड़कर कहा "John, fuck me now.. Shila sucked my cunt really good..I enjoyed like never before..Now I need a cock deep in my pussy..please fuck me hard" कहते हुए वह जॉन के लंड को चूसकर पूरा सख्त करने में जुट गई.. दो ही मिनट में जॉन का लंड कडा हो गया..

चार्ली अब नीचे लेट गई और बोली "Don't waste time..now climb on me..and fuck the shit out of my pussy"

जॉन ने चार्ली के पास से हटकर खड़ा हो गया और बिस्तर पर आ गया.. संजय अपना आधा लंड शीला की गांड में डालकर दर्द कम होने का इंतज़ार कर रहा था.. घोड़ी बनी शीला के नीचे जॉन संभलकर घुस गया और शीला के नीचे अपने आपको सेट कर लिया.. धीरे से उसने अपने लंड को नीचे से ही शीला की चूत के छेद पर सेट किया.. और अपनी कमर उठाकर एक धक्का लगाया.. शीला की चूत तो कब से बेकरार थी.. लंड को एक पल में ही निगल गई.. !!!

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दो दो लंडों के एक साथ हुए हमले से शीला उत्तेजित हो गई.. सिर्फ ब्लू-फिल्मों में ही देखे इस द्रश्य को आज वह वाकई अनुभावित कर रही थी.. संजय अभी भी स्थिर था.. लेकिन जॉन ने नीचे से हुचक हुचक कर शॉट लगाने शुरू कर दिए थे.. चिपचिपे भोसड़े में लंड का स्पर्श इतना सुहाना लग रहा था की शीला सिहरने लगी.. चार्ली भी अब बेड पर आ गई.. और शीला की पीठ पर सवारी करते हुए वह संजय के बिलकूल सामने आ गई.. और संजय को चूमने लगी.. लिप किस करते हुए संजय चार्ली के स्तनों को भी दबाने लगा था.. दबाते हुए वह इतना गरम हो गया की उसने एक जोरदार धक्का लगाते हुए अपना पूरा लंड शीला की गांड में घुसेड़ दिया !!!

शीला: "ओहह माँ.. मर गई.. फट गई मेरी तो.. बाहर निकाल संजय.. ऊईई माँ.. !!" शीला को एक पल के लिए ऐसा लगा की उसकी जान ही निकल गई थी.. इतना दर्द हो रहा था.. लेकिन संजय और जॉन.. शीला की चीखो को नजर अंदाज करते हुए ऐसे शॉट लगा रहे थे जैसे शीला की इस ट्रिप को यादगार बना देना चाहते हो.. एक साथ दो दो जानदार लंडों से युद्ध खेल रही शीला को शुरुआत में भयंकर दर्द हुआ.. पर धीरे धीरे गांड की मांसपेशियाँ ढीली पड़ने लगी और दर्द काम होते ही उसे मज़ा आने लगा.. नीचे चूत में हो रही अंधाधुन चुदाई से मिल रहे आनंद के कारण भी उसका दर्द कम हो रहा था

दोनों लंड एक साथ अंदर डालना कठिन था.. जब संजय गांड में डालता तब जॉन चूत से बाहर निकालता और जब उसके अंदर डालते ही संजय खींच लेता.. एक अनोखी लय बना ली थी दोनों ने शीला को चोदते हुए.. एक उस्ताद तबलची जैसे दोनों तबलों को लय और सुर में एक साथ बजाता है वैसे ही अनुभवी शीला इन दोनों मर्दों के दमदार हथियारों को अपने दोनों छेदों में लेते हुए मस्त होकर चुद रही थी..

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शीला की गांड मारते हुए संजय.. शीला पर घोड़ी बनकर बैठी हुई चार्ली की निप्पलों को चूस रहा था.. चूसचूसकर उन गुलाबी निप्पलों का रंग लाल हो गया था.. चार्ली के स्तनों पर कई जगह संजय के काटने से निशान भी पड़ गए थे.. शीला के नीचे लेटा हुआ जॉन.. आगे पीछे हो रही शीला के हिल रहे मदमस्त चूचों को बस देखता ही जा रहा था.. दोनों हाथों से उन स्तनों को पकड़ना मुमकिन नही था.. इतने गदराए मांसल बड़े बड़े स्तनों को अपने ऊपर झूलता हुआ देख वह वासना की आग में अपने आप को समर्पित कर रहा था

सासुमाँ की चूत चोदने का ख्वाब देख रहे संजय को चुत से पहले उनकी गांड मिल गई.. अपने आप को खुशकिस्मत समझ रहा था वोह.. वैशाली की जब गांड मारने की वह कोशिश करता तब उसे मनाने में ही एक घंटा निकल जाता.. तकिये पर उसका मुंह दबाकर फिर गांड में डालना पड़ता वरना उसकी चीखें सुनकर पूरा मोहल्ला इकठ्ठा हो जाने का डर रहता.. अंदर डालने के बाद एक मिनट से ज्यादा मारने नही देती थी वैशाली.. और एक बार गांड मारने के बाद तीन से चार दिन तक अपने नजदीक भी नही आने देती थी.. और उसकी माँ को देखो.. खुशी खुशी एक साथ गांड और चूत मरवा रही है.. !!

शीला: "अब दर्द एकदम कम हो गया.. जरा जोर से धक्के मार.. आज तो फाड़ ही दे मेरी.. बहोत मज़ा आ रहा है मुझे.. छील रही है मेरी गांड फिर भी मज़ा आ रहा है.. आह्ह ओहह देख क्या रहा है भड़वे.. चोद मेरी गांड.. लगा ताकत!! इतना जल्दी थक गया क्या साले!!" ऑर्गजम करीब आते ही शीला हिंसक होने लगी.. वह ढीले धक्कों को बर्दाश्त नही कर पा रही थी.. नाव को किनारे पर पहुंचना हो तो पतवार तेज लगानी पड़ती है.. थका हुआ माँजी की नाव को किनारे नही लगा सकता..

"ओहह मम्मी जी.. मेरा निकलने को है.. " संजय ने अपना इस्तीफा तैयार कर लिया.. शीला के कूल्हों से संजय की जांघें टकराकर पक्क पक्क की मस्त आवाज़े आ रही थी.. इतना ही नही.. नीचे से धक्के लगा रहे जॉन और संजय के गीले आँड टकराने से भी आवाज आ रही थी.. शीला की गांड में अचानक गरम गरम लावारस छूटा.. संजय ने धक्के लगाना बंद कर दिया.. और एक आखिरी बार जोर लगाते हुए अपने लंड को शीला की गांड की खाई में गाड़ दिया.. संजय ठंडा हो गया.. लेकिन शीला अभी भी पाँवभाजी के तवे की तरह गरम थी..

एक साथ दो तंदूरस्त जानदार लंड के धक्के खाते हुए शीला की हवस उफान पर चढ़ी हुई थी.. उसने कभी नही सोचा था की बी.पी. में देखी हुई हरकतें उसे वाकई अपने जिस्म के साथ करने का मौका मिलेगा.. शीला के भोसड़े की गर्मी से जॉन का लंड ढीला पड़ने लगा था.. उसके धक्कों में अब जान नही बची थी.. गांड में वीर्यस्त्राव हो जाने के बाद वह छेद एकदम लसलसित हो गया था.. संजय अपने आधे मुरझाए लंड से भी आसानी से धक्के लगाए जा रहा था.. शीला भी अपने दामाद के संग गोवा की इस ट्रिप का पूरा लाभ उठा रही थी..

dca
एक घंटे के भीषण एनकाउंटर के बाद.. कमरे में सन्नाटा छा गया था.. जॉन और संजय लाश की तरह बिस्तर की एक तरफ पड़े हुए थे.. चार्ली नाम की चिड़िया.. शीला की पुख्त भुजाओं में सिमटकर छोटे बच्चे की तरह आराम से सो रही थी.. शीला की गांड में जलन हो रही थी.. नजदीक पड़े सिगार का पैकेट खोला तो वह खाली था.. शीला ने.. अकेले ही.. अपने बलबूते पर.. जॉन, संजय, चार्ली और सिगार.. सब को खाली कर दिया था.. आराम करते हुए एकाध घंटा और बीत गया..


Wah vakharia Bhai,

Aag hi laga di aapne..................

Sheela ke to kya hi kehne........do do lund aur ek chut sigar ka packet sab nipta deiye sheela ne.......

Gazab Bhai............. Simply outstanding

Keep rocking Bro
 

vakharia

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Bhai badhiya likh rahe , comment kam aaye iska matlab ye nahi ki accha nahi lag raha sabko
भाई.. इसीलिए तो मैंने कहा की वाचकों की मौन प्रतिक्रिया भी मेरे लिए महत्वपूर्ण है

आते रहिएगा और कमेंट्स भी करते रहिएगा.. अच्छा लगता है
♥️
 

vakharia

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